Saturday, 10 January 2026

मादुरो को अचानक सत्ता से हटाया तो क्या होगा?


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए सैन्य अभियान को अधिकृत करने से ठीक पहले अमेरिका की गुप्तचर सेवा सीआईए ने एक गोपनीय आंकलन पूरा किया जिसमें यह जांच की गई कि अगर मादुरो को अचानक सत्ता से हटा दिया जाता है तो वेनेजुएला की आंतरिक स्थिति कैसी होगी? न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप द्वारा प्रत्यक्ष कार्रवाई के जोखिमों और परिणामों का आकंलन करने के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने गुप्त विश्लेषण का अनुरोध किया था। रिपोर्ट में अमेरिका के नेतृत्व में तख्तापलट की संभावना पर कम और मादुरो के लिए व्यावहारिक निकास परिदृष्टियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया था, जिसमें बातचीत के माध्यम से समझौते, निरन्तर अमेरिकी दबाव और अंतिम उपाय के रूप में बल प्रयोग शामिल थे। खुफिया आंकलन से अवगत लोगों ने बताया कि सीआईए ने मादुरो के पद छोड़ने के लिए एक ही संभावित परिणाम की कल्पना करने के बजाए कई विकल्पों पर विचार किया। इनमें बातचीत के जरिए सत्ता हस्तांतरण शामिल था, जिसमें मादुरो स्वेच्छा से पद छोड़ देते, प्रतिबंधों और संपत्ति जब्ती के माध्यम से दबाव बढ़ाना और अन्य विकल्पों के विफल होने पर जबरन निष्कासन की संभावना शामिल थी। इस विश्लेषण का उद्देश्य ट्रंप द्वारा द्वारा वेनेजुएला के एक अत्याधिक सुरक्षित सैन्य ठिकाने के खिलाफ उच्च जोखिम वाले अभियान की मंजूरी देने पर विचार करते समय उच्चस्तरीय निर्णय लेने में मार्गदर्शन करना था। रिपोर्ट से परिचित अधिकारियों ने कहा कि इसमें राष्ट्रपति के अंतिम निर्णय को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीआईए की नजर में सबसे संभावित उत्तराधिकारी कौन था? इस आकलन के सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में से एक उत्तराधिकारी पर इनका दृष्टिकोण था, उप राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगज। रोड्रिगज को उस व्यक्ति के रूप में पहचाना जो मादुरो को हटाए जाने की स्थिति में तुरन्त सत्ता संभालने के लिए सबसे उपयुक्त थीं। हालांकि कुछ सांसदों और वेनेजुएला के नागरिकों ने विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को संभावित वैकल्पिक नेता के रूप में देखा है, लेकिन खुफिया समीक्षाओं ने इस बात पर संदेह जताया है कि क्या उनके पास मादुरो के बाद की स्थिति में जल्दी से सत्ता संभालने के लिए आवश्यक संगठनात्मक ढांचा या राजनीतिक प्रयास है? खुफिया जानकारी से परिचित अधिकारियों के अनुसार सीआईए को संदेह था कि क्या विपक्ष जनसमर्थन को राज्य संस्थाओं, सेना और सुरक्षा सेवाओं पर प्रभावी नियंत्रण में बदल पाएगा? चिंता वैचारिक नहीं बल्कि व्यावहारिक थी, स्पष्ट और व्यवहार्य उत्तराधिकारी के बिना मादुरो को हटाने से अस्थिरता कम होने के बजाए और बढ़ सकती थी। सीआईए का यह आंकलन सही साबित होता दिख रहा है। वेनेजुएला में न तो सत्ता परिवर्तन हुआ और न ही मौजूदा सरकार और देशवासियों में अमेरिका के प्रति समर्थन बढ़ता दिख रहा है। निकोलस मादुरो को तो हटा दिया पर फिलहाल उनके उत्तराधिकारी डेल्सी रोड्रिगज वैसी ही बातें कर रही हैं जैसे मादुरो करते थे। आगे चलकर बदल जाए तो और बात है। अभी तो वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति, डेल्सी रोड्रिगज ने कहा है कि देश पर वेनेजुएला की सरकार शासन कर रही है, न कि कोई विदेशी शक्ति। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उन दावों को खारिज कर दिया, जिन्होंने कहा था कि उन्हें वेनेजुएला तक पूरी पहुंच चाहिए। रोड्रिगज ने कहा यहां कोई युद्ध नहीं है क्योंकि हम युद्ध में नहीं हैं। हम एक शांतिप्रिय लोग हैं। एक शक्तिशाली देश हैं, जिस पर हमला किया गया और आाढमण किया गया। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि वेनेजुएला के अंतरिम अधिकारी 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित तेल अमेरिका को हस्तांतरित करेंगे। 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 8 January 2026

अंकिता भंडारी केस का सच सामने आना चाहिए


अंकिता भंडारी हत्याकांड केस में वीआईपी का नाम सामने आने के बाद न्याय की मांग ने नए सिरे से तूल पकड़ लिया है। सामाजिक संगठनो और कांग्रेस ने रविवार को कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने देहरादून में मुख्यमंत्री आवास तक जाने की कोशिश की। इधर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी मामले में न्याय की मांग पर प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। इस मुद्दे को लेकर 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया गया है। इसके अलावा आने वाले दिनों में मशाल जुलूस और प्रदर्शनों का सिलसिला भी जारी रहने की उम्मीद है। बता दें कि अंकिता भंडारी मर्डर केस क्या है? अंकिता भंडारी (19) वन्तारां रिजार्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। 18 सितम्बर 2022 को वह अचानक लापता हो गई। कुछ दिनों बाद उसका शव चीला कैनाल में बरामद हुआ। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई। उन्हें हत्या, सबूत मिटाने और अन्य गंभीर आरोपों के तहत सजा मिली। कोर्ट ने अंकिता के परिवार को मुआवजा भी देने का आदेश दिया। हाल में अंकिता केस ने सोशल मीडिया और कुछ वीडियो-ऑडियो क्लिप की वजह से वीआईपी का नाम चर्चा में आया। हालांकि पुलिस ने ऐसे किसी व्यक्ति की भूमिका से इंकार किया है। उर्मिला सनावर नाम की महिला ने ये क्लिप शेयर किए थे, जिसमें एक शख्स को गट्टू नाम का बताया गया। इसके बाद बड़े नेता यानि वीआईपी का नाम सामने आया। आरोप लगा कि वीआईपी भाजपा का एक सीनियर नेता है। उत्तराखंड महिला मंच के बुलाने पर 4 जनवरी को देहरादून में जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। प्रोटेस्ट को उत्तराखंड क्रांति दल, कांग्रेस और कई संगठन अपना समर्थन दे रहे हैं। किन्नर भी न्याय के लिए सामने आए हैं। इस पूरे मामले में सीबीआई जांच, वीआईपी का नाम और जितनी शंकाएं उठ रही हैं, उनकी जांच करवाने को लेकर उत्तराखंड महिला मंच द्वारा बुलाए गए प्रोटेस्ट में हजारों युवाओं ने भी भाग लिया। देहरादून में इस प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस व कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त नोंकझोंक भी हुई। वहीं भाजपा ने जिला मुख्यालय में अंकिता भंडारी मामले को लेकर कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया और कांग्रेस के पुतले भी फूंके। कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद), महिला मंच, वामपंथी दलों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करते हुए हत्याकांड में सफेदपोश के नाम का खुलासा किए जाने के लिए प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की अपनी मांग को दोहराया। इस विरोध मार्च में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश येचुरी ने कहा कि हत्याकांड की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी शेखर सुभात द्वारा मामले में किसी वीआईपी की संलिप्तता न होने संबंधी बयान से सहमत नहीं हुआ जा सकता। येचुरी ने कहा कि उनकी मांग है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई से कराई जाए ताकि वीआईपी का पता चल सके। हमारा भी मानना है कि अब यह मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि असलीयत का पता चलना ही चाहिए। अगर सरकार इतनी निष्पक्ष है तो क्यों नहीं सीबीआई जांच करा लेती। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और धामी सरकार पर यह आरोप भी नहीं लगेगा कि वह इस व्यक्ति वीआईपी को बचाने के लिए मामले की लीपापोती कर रही है।
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 6 January 2026

क्या शाहरुख खान गद्दार हैं?


ऐसा कहना कुछ भाजपा के नेताओं का है क्योंकि शाहरुख खान की आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) कें टीम ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को अपनी टीम के लिए खरीद लिया। मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल 2026 के लिए 9 करोड़ रुपए से अधिक में खरीदा था। बॉलीवुड सुपर स्टार शाहरुख खान टीम के मालिकों में से एक हैं। अब खबर आई है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कोलकाता नाइट राइडर्स को बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से रिलीज करने के लिए कहा है। बीसीसीआई के सेक्रेट्री देवजीत सैकिया ने एएनआई को बताया है कि ये फैसला हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए लिया गया है। बोर्ड ने केकेआर को रहमान के बदले किसी दूसरे खिलाड़ी को रखने की इजाजत दे दी। इससे पहले भारत के दक्षिण पंथी संगठन और कुछ भाजपा के नेताओं ने मुस्तफिजुर को केकेआर टीम में शामिल करने पर शाहरुख खान की जमकर आलोचना की थी। राम भद्राचार्य ने शाहरुख खान पर निशाना साधते हुए पीटीआई से कहा कि केकेआर में मुस्तफिजुर रहमान को शामिल करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पहले देवकी नंदन ठाकुर ने भी बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ कथित हिंसा का हवाला देते हुए केकेआर के फैसले पर सवाल उठाया था और कहा था, बांग्लादेश में हिन्दुओं की निर्ममता से हत्या की जा रही है, उनके घर जलाए जा रहे हैं, उनकी मांओं और बोटियों से बलात्कार हो रहा है। इस तरह की क्रूर हत्याओं को देखने के बाद कोई इतना बेरहम कैसे हो सकता है कि उस देश के किसी क्रिकेटर को अपनी टीम में शामिल करे? वहीं भाजपा नेता और यूपी में सरधना के पूर्व विधायक संगीत सिंह सोम ने मुस्तफिजुर को केकेआर में शामिल करने के लिए शाहरुख खान को गद्दार तक कह दिया। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान को भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है। संगीत सोम ने मेरठ में कहा था एक तरफ बांग्लादेश में हिन्दुओं का कत्लेआम हो रहा है, दूसरी तरफ आईपीएल नीलामी में क्रिकेटरों को खरीदा जा रहा है। आज बांग्लादेश में भारत विरोधी नारे लग रहे हैं, प्रधानमंत्री को गालियां दी जा रही हैं, लेकिन शाहरुख खान जैसे गद्दार 9 करोड़ रुपए खर्च करके उनकी मदद कर रहे हैं। इन टिप्पणियों की विपक्षी नेताओं और मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने बड़ी निंदा की है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहती हूं कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों को उस पूल में किसने डाला? यह सवाल बीसीसीआई और आईसीसी के लिए है। गृहमंत्री के बेटे जय शाह को जवाब देना चाहिए कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों को उस पूल में किसने डाला जहां आईपीएल खिलाड़ियों की खरीद-बिक्री होती है और नीलामी होती है। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने शाहरुख खान पर हुए हमलों को भारत की बहुलता पर हमला बताया। गुरुवार को उन्होंने एक्स पर लिखा, सुपरस्टार शाहरुख खान को गद्दार कहना भारत की बहुलता पर हमला है। नफरत राष्ट्रवाद की परिभाषा नहीं हो सकती। आरएसएस को समाज को जहर देना बंद करना चाहिए। इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा के विरोध प्रदर्शन अक्सर सिर्फ इसलिए होते हैं क्योंकि उनमें मुस्लिम नाम शामिल होते हैं। शाहरुख खान मुस्लिम हैं, मुस्तफिजुर भी मुस्लिम हैं इसलिए विरोध होना लाजमी है क्योंकि मुस्लिमों के प्रति नफरत सामने आती है।
-अनिल नरेन्द्र

Sunday, 4 January 2026

कुरान पर हाथ रखकर ली शपथ ममदानी ने


जोहरान ममदानी ने एक जनवरी 2026 को न्यूयार्क के मेयर पद की शपथ ले ली है। वह शहर के 111वें मेयर और बीते 100 साल में सबसे कम उम्र के मेयर बनकर इतिहास रच चुके हैं। शहर के 111वें मेयर के तौर पर जोहरान ममदानी ने एक पुराने सबवे में आयोजित निजी समारोह में कुरान को हाथ में ले शपथ ली। क्वीन्स प्रांत के प्रतिनिधि रह चुके 34 वर्षीय ममदानी अब अमेरिका के सबसे बड़े शहर के मेयर बनने वाले दक्षिण एशियाई मूल के और मुस्लिम समुदाय के पहले व्यक्ति हो गए हैं। जोहरान ममदानी ने कभी अपने मुस्लिम होने को छिपाया नहीं बल्कि खुलकर कहा मैं एक मुसलमान हूं। 34 साल के ममदानी 100 साल से भी अधिक समय में न्यूयार्क के सबसे युवा, पहले मुसलमान और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बने हैं। मेयर पद के लिए मुख्य मुकाबला जोहरान ममदानी और एंड्रयू कुओमो के बीच था। उनके चुनाव ने प्रोग्रेसिव लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव लाया जो शहर के राजनीतिक केंद्र में बदलाव का संकेत था। चुनाव जीतने के बाद ममदानी ने आधे घंटे लंबे भाषण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले ममदानी को वोट न देने की अपील की थी। उन्होंने फ्री बस सेवा, यूनिवर्सल चाइल्डकेयर और बढ़ती महंगाई काबू करने समेत अपने सभी चुनावी वादों को पूरा करने की बात कही। जोहरान ममदानी का जन्म 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। उनके पिता ने उन्हें एक क्रांतिकारी और घाना के पहले प्रधानमंत्री क्वामे एनक्रूमा के नाम पर मिडिल नेम क्वामे दिया था। ममदानी बता दें कि मशहूर भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जाने-माने प्रोफेसर महमूद ममदानी के बेटे हैं। ममदानी ने कहा था कि उनका शपथ ग्रहण न्यूयार्क के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक होगा। इससे न्यूयार्क के कामकाजी कर्मचारियों को आवश्यक रूप से केंद्र में रखा जाएगा। जोहरान ममदानी ने दिल्ली के जेएनयू छात्र नेता और 2020 से जेल में बंद उमर खालिद को एक पत्र लिखकर कहा कि मैं आपको याद कर रहा हूं और आपके बारे में सोच रहा हूं। ममदानी के इस पत्र की भारत सरकार ने आलोचना की है और कहा है कि वे हमारी न्याय व्यवस्था पर प्रश्न उठा रहे हैं जोकि उन्हें कोई अधिकार नहीं है। ममदानी की जीत साधारण जीत नहीं मानी जा सकती। न्यूयार्क खरबपतियों का शहर है जहां पर यहूदी लॉबी बहुत शक्तिशाली है। तमाम उद्योगपतियों के विरोध और यहूदी लॉबी के विरोध के बावजूद ममदानी की जीत ऐतिहासिक मानी जाएगी। एक समय तो खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ममदानी के खिलाफ प्रचार में उतर गए थे और यहां तक कहा था कि देखता हूं यह कैसे जीतता है? ट्रंप उन्हें कम्युनिस्ट तक कह चुके हैं। ममदानी को दाद देनी होगी कि उन्होंने न तो अपने मूल को छुपाया और न ही अपने धर्म को। उनकी जीत से अमेरिका के अंदर सियासी समीकरण बदलने की आशंका जताई जा रही है। उनके क्रांतिकारी वादे जो कुछ-कुछ आम आदमी पार्टी के नारों से मिलते हैं, क्या रंग लाते हैं देखना होगा। यह भी देखने लायक होगा कि अब जब ममदानी न्यूयार्क जैसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली शहर के मेयर बन चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप इनके साथ कौन सा रवैया अपनाते हैं? हम जोहरान ममदानी को उनकी अप्रत्याशित जीत पर हार्दिक बधाई देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो अपने वादों पर खरे उतरेंगे और अपने समर्थकों को निराश नहीं करेंगे। पर रास्ता आसान नहीं होगा। उन्होंने कांटे भरा रास्ता चुना है।
-अनिल नरेन्द्र

Friday, 2 January 2026

2025 की वो घटनाएं जो हमेशा याद रहेंगी


2026 आ गया है। हम ऊपर वाले से प्रार्थना करते हैं कि यह वर्ष पिछले वर्ष से हर लिहाज से बेहतर साबित हो। 2025 दुर्भाग्य से अगर उसे हादसों का वर्ष कहें तो शायद गलत नहीं होगा। 2025 का साल भारत के लिए त्रासदियों भरा रहा। 2025 में भारत में वो 5 घटनाएं हुई हैं जो देशवासियों के जहन में हमेशा के लिए दर्ज हो गई हैं। जिसमें पहलगाम आतंकी घटना, प्रयागराज महाकुंभ भगदड़, अहमदाबाद विमान हादसा, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ और दिल्ली आतंकी हमला शामिल है। 22 अप्रैल 2025 भारत के लिए कभी भी न भूलने वाली तारीख है। इस दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकियों ने हमला किया था। इसमें 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तौयबा के एक संगठन ने ली थी। मंगलवार के दिन बसैरन घाटी में आतंकियों ने इस कायरनामा हरकत से मिनी स्विटजरलैंड कहा जाने वाला यह स्थान कुख्यात हो गया। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला प्रयागराज महाकुंभ वैसे तो सफल रहा। लेकिन 29 जनवरी 2025 को जो वहां भगदड़ मची उसने एक बदनुमा दाग लगा दिया। जिसमें करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। यह हादसा मौनी अमावस्या के दिन अमृत स्नान के दौरान हुआ। 11 फरवरी 2025 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी। यहां लोग प्रयागराज महाकुंभ जाने के लिए स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। लेकिन ट्रेन का प्लेटफार्म बदलने के चलते ये भगदड़ मच गई थी। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 13 और 14 पर शनिवार को उस समय भगदड़ मच गई जब यात्रियों के बीच प्रयागराज जा रही दोनों ट्रेने के रद्द होने की अफवाह फैल गई। 12 जून 2025 की यह तारीख भारत को कभी नहीं भूलने वाली डेट है। इस दिन अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट अपनी उड़ान भरने के महज 30 सैकेंड बाद ही क्रैश हो गई थी। इस बोइंग विमान 783 ड्रीमलाइनर विमान में पायलट समेत 242  लोग सवार थे। जिसमें 241 मारे गए थे, सिर्फ एक बचा था। इस विमान दुर्घटना में भाजपा के वरिष्ठ नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का भी निधन हो गया था। भारतीय इतिहास के सबसे बड़े विमानन दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही इस दुर्घटना ने हर किसी को गमगीन कर दिया था। अंत में इस सूची में दिल्ली लालकिला आतंकी हमला आता है। वैसे तो पूरे देश में और कई हादसे हुए। मैंने सिर्फ कुछ प्रमुख हादसों का जिक्र किया है। लालकिला ब्लास्ट 10 नवम्बर 2025 को लाल किला मैट्रो स्टेशन के पास हुआ था। रेड लाइट पर एक सफेद रंग की हुंडई आई-20 कार में ब्लास्ट होने से 12 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे। छानबीन के कुछ समय बाद सामने आया कि हुंडई आई-20 कार चलाने वाला उमर मोहम्मद उर्फ उमर-उन- नबी था। इसके बाद इसके तार अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े। डाक्टरों के एक निहायत खतरनाक आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। अभी भी इसकी जांच चल रही है। फरीदाबाद में गिरफ्तार मुस्लिम के घर से 2910 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था। कुल मिलाकर 2025 न केवल भारत के लिए ही एक हादसों का साल रहा बल्कि पूरे विश्व की अशांति और हिंसा का साल रहा। 2026 बेस्ट साबित हो हम इसकी उम्मीद और प्रार्थना करते हैं।
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 30 December 2025

रेप पीड़िता को मिला न्याय

 
उन्नाव दुष्कर्म मामले में आरोपी कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली राहत को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर रेप पीड़िता को न्याय दिया है। यह अत्यन्त दुख और चिंता का विषय है कि कानूनी नुक्तो का फायदा उठाकर बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के दोषी को भी कई बार रियायत दे दी जाती है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक नाबलिक लड़की से बलात्कार के मामले में वर्ष 2019 में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्र कैद की सजा हुई थी। अदालत ने भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार के मामले और बच्चे-बच्चियों के यौन शोषण से सुरक्षा के कानून पॉस्को में गंभीर हिंसा के प्रावधानों के मुताबिक सजा दी थी। तब यह घटना देश भर में व्यापक चिंता और आाढाsश का कारण बनी थी। मगर दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की सजा निलंबित करने का आदेश दे दिया। इस संदर्भ में एक अहम तथ्य यह है कि दोषी सिद्ध होने के बाद निचली अदालत ने साफ कहा था कि सेंगर को जीवन भर जेल में रहना होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2017 के इस उन्नाव दुष्कर्म मामले में निष्कासित भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर की जेल की सजा निलंबित करके उन्हें जमानत दे दी। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर गई और न्याय की दुहाई मांगने पर मजबूर हो गई। पीड़िता के परिवार और अन्य महिला कार्यकर्ताओं ने पावार को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर सेंगर की जमानत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और अपनी नाराजगी जाहिर की। जनता के विरोध को देखते हुए सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पावार को ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के वकील ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी से संबंधित एक मामले में यह अभिनिर्धारण किए जाने का हवाला दिया कि एमपी और एमएलए लोक सेवक होते हैं। मात्र इसी दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर को मिले दिल्ली हाईकोर्ट से राहत को निरस्त कर दिया और यह निश्चित हो गया कि अब सेंगर को आजीवन जेल में ही रहना होगा। अधिवक्ता अंजले पटेल और पूजा शिल्पकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई। उन्होंने तर्क दिया है कि हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर विचार किए बिना आदेश पारित किया कि ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि सेंगर को अपनी शेष प्राकृतिक जीवन अवधि तक जेल में रहना चाहिए। हाईकोर्ट ने सेंगर को जमानत सजा निलंबन देने में कानून और तथ्यों में गंभीर त्रुटि की है, जबकि इसे गंभीर आपराधिक अतीत और दुष्कर्मों के घृणित अपराधों में उसकी स्थापित संलिप्तता को ध्यान में नहीं रखा गया। दरअसल इस घटना के बाद पीड़िता को जिन हालात का सामना करना पड़ा और उसको जीवन तक पर जिस तरह के जोखिम खड़े हुए थे, वे बेहद अप्रत्याशित हो मगर उससे साफ था कि जघन्य अपराधों के बाद एक ऊंचे राजनीतिक रसूख वाला आरोपी पीड़िता को खामोश करने के लिए किस हद तक जा सकता है। इस दौरान पीड़िता के पिता की जान चली गई। एक ट्रक ने उस कार को टक्कर मार दी, जिसमें वह परिवार के अन्य लोगों के साथ जा रही थी। उस घटना में पीड़िता और उसका वकील बुरी तरह घायल हो गए, जबकि उसकी दो मौसियों की मौत हो गई। समझा जा सकता है कि इस पूरे मामले में पीड़िता को किस तरह के हालात का सामना करना पड़ा। जब किसी रसूख वाले अपराधी की सजा को लेकर रियायत बरतने की खबर आती है, तब यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर कानून के काम करने के पैमाने क्या हैं? कहा जाता है कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िता को न्याय देने के उद्देश्य से आरोपी की सजा को बहाल कर दिया जो स्वागत योग्य है। 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 25 December 2025

एपस्टीन फाइलों में दबे हैं कई राज


अमेरिकी न्याय विभाग ने कुख्यात फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े मामलों की जांच से संबंधित 13 हजार से ज्यादा फाइल सार्वजनिक कर दिए हैं। वे दस्तावेज उस कानून के तहत जारी किए गए हैं। जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि लंबे इंतजार के बावजूद इन फाइलों से अभी तक कोई चौंकाने वाले खुलासे नहीं हुए हैं। ज्यादातर दस्तावेजों को भारी रूप से ब्लैक किए गए हैं। जेफरी एपस्टीन की मौत हो चुकी है। अमेरिकी संसद ने एक कानून पास किया था, जिसके तहत शुक्रवार तक सभी फाइलों को पूरी तरह सार्वजनिक करना जरूरी था। लेकिन अब तक कुछ ही दस्तावेज जारी किए गए हैं, वो भी कई जगह भारी काट-छांट के साथ। इन दस्तावेजों को सार्वजनिक कराने के लिए दबाव बनाने वाले सांसदों ने विभाग की कोशिश को गैर-गंभीर बताया है। वहीं कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी ज्यादा काट-छांट से साजिश से जुड़ी धाराएं और मजबूत हो सकती हैं। जारी सामग्री में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोटो भी जारी किया गया है, हालांकि उन्हें बचाने की भी पूरी कोशिश की गई है। फाइलों में एक फोटो शामिल है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जेफरी एपस्टीन, मेलानिया ट्रंप और गिलेन मैक्सवैल (एपस्टीन की गर्लफ्रेंड) साथ नजर आ रहे हैं। जस्टिस डिपार्टमेंट ने इन फाइलों के हटने को लेकर अब तक कोई सफाई नहीं दी है। जो फाइले सार्वजनिक की गई हैं उनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, ब्रिटेन के शाही परिवार से जुड़े एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर, मशहूर गायक मिक जैगर और माइकल जैक्सन के नाम शामिल हैं। हालांकि इन फाइलों में किसी का नाम होना या उनकी तस्वीर होना यह साबित नहीं करता कि उन्होंने कोई गलत काम किया है। जिन लोगों के नाम इन दस्तावेजों में आए हैं या पहले भी एपस्टीन से जुड़े मामलों में सामने आए थे, उनमें से कई ने किसी भी तरह की गलत गतिविधि से इंकार किया है। जारी की गई कई तस्वीरों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन स्विमिंग पूल में दो महिलाओं के साथ तैरते दिखते हैं। यह तस्वीर हॉट टब की लगती है। 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में बिल क्लिंटन की जेफरी एपस्टीन के साथ कई बार तस्वीरें ली गई थीं। क्लिंटन हालांकि यह कहते हैं कि उन्हें एपस्टीन के यौन अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी। दस्तावेजों के मुताबिक जेफरी एपस्टीन ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात एक 14 साल की लड़की से कराई गई थी। अमेरिकी न्याय विभाग ने जो फाइलें जारी की हैं उनमें राष्ट्रपति ट्रंप का भी जिक्र है। अदालत के कागजों के मुताबिक यह मुलाकात फ्लोरिडा के मार-ए-लागो रिसॉर्ट में 1990 के दशक की बताई जाती है। दस्तावेज में कहा गया है कि एपस्टीन ने ट्रंप को कोहनी मारकर लड़की की ओर इशारा किया और मजाकिया अंदाज में पूछा कि यह अच्छी है ना...? ट्रंप मुस्कराए और सहमति से सिर हिलाया। दस्तावेज के मुताबिक इसे लेकर दोनों हंसे थे और लड़की को असहज महसूस हुआ। लेकिन उस समय वह इतनी छोटी थी कि उस हंसी की वजह वे समझ नहीं पाई। सर्वाइवर का आरोप है कि एपस्टीन ने कई सालों तक उसे बहकाया और उसका शोषण किया। हालांकि अदालत में दायर कागजों में लड़की ने ट्रंप पर कोई आरोप नहीं लगाया है। इन दस्तावेजों पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने बयान दिया कि ट्रंप प्रशासन इतिहास का सबसे पारदर्शी प्रशासन है। उन्होंने कहा कि हजारों पन्नों के दस्तावेज जारी किए गए हैं और हाउस ओवरसाइट कमेटी की जांच में सहयोग किया गया है। उधर डिप्टी अटार्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा है कि कई लाख पन्नों की अभी भी जांच चल रही है। ये दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेटिक सदस्यों ने इससे जुड़ी तस्वीर के गायब होने पर सवाल उठाए हैं और पूछा कि और क्या छिपाया जा रहा है? अभी तो खेला शुरू हुआ है, आगे-आगे देखें होता है क्या?
-अनिल नरेन्द्र