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Saturday, 23 May 2026

इमरान का तख्ता पलट अमेरिका की साजिश थी

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार गिराने को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। लीक दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि इमरान की कुसी सिर्फ अविश्वास के प्रस्ताव से नहीं गिरी थी। इसके पीछे अमेरिकी साजिश और पाक सेना की भूमिका थी। दरअसल, इमरान ने 24 फरवरी 2022 को रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से मॉस्को में मुलाकात की थी। ठीक उसी दिन रूस ने यूव्रेन पर हमले शुरू किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इमरान की इस यात्रा से नाराज था। वह चाहता था कि पाकिस्तान यूक्रेन युद्ध पर रूस की खुलकर आलोचना करे, लेकिन इमरान सरकार ने तटस्थ रुख अपनाया। 7 मार्च 2022 को वाशिंगटन में पाक के तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी सहायक विदेशी मंत्री डोनाल्ड लू के बीच बातचीत हुई। लू ने मजीद से कहा, यदि इमरान अविश्वास प्रस्ताव में टूट जाते हैं तो अमेरिका ‘सब माफ' कर देगा। इसके 33 दिन बाद, 9 अप्रैल 2022 को इमरान सरकार गिर गई। वाशिंगटन के एक होटल में लू ने मजीद को लंच पर इमरान को हटाने का दबाव दिया था। इमरान के हटने के अगले दिन ही शाहबाज ने सत्ता संभाल ली। नवम्बर 2022 में जनरल बाजवा पद से सेवानिवृत हुए और आमी चीफ आसिम मुनीर का उदय हुआ। इमरान ने आरोप लगाया था कि मुनीर की नियुक्ति पूर्व पीएम नवाज शरीफ से परामर्श के बाद हुई थी। बाकी तो इतिहास है। अमेरिका किसी भी ऐसी सरकार को बर्दाश्त नहीं करता जो उसका विरोध करे और जिसकी रूस से नजदीकी हो।

-अनिल नरेन्द्र

ट्रंप ने कैसे ईरान जंग में कमाए पैसे?

डोनाल्ड ट्रंप पर पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति पर जंग से कमाई करने पर सवाल उठने लगे हैं। अब ट्रंप ट्रेडिंग वॉर में घिर गए हैं। नए वित्तीय खुलासों के अनुसार 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के बीच ट्रंप या उनके सलाहकारों की मंडली ने 3700 से ज्यादा शेयर सौदे किए। रोज लगभग 40 शेयर सौदे हुए। इनमें ट्रंप को लगभग 800 करोड़ रुपए यानी लगभग 83 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई हुई। ये शेयर एनवीडिया, बोइंग, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेजन, ओरेकल और कॉस्टको जैसी कंपनियों के थे। ट्रंप विवादों में इसलिए हैं क्योंकि ये कंपनियां रक्षा सौदों, एआई नियमों और चिप और सेमीकंडक्टर आयात या फिर निर्यात से जुड़ी हुई हैं। वॉल स्ट्रीट की कंपनी एरिक प्रिंस के मुताबिक अमेरिका के इतिहास में ये पहली बार है जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति वित्तीय लेन-देन और हितों के टकराव के मुद्दे पर सवालों के घेरे में है। उधर व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर शेयर ट्रेडिंग को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर लगे आरोपों से इंकार किया है। ट्रंप आर्गेनाइजेशन पूरे कारोबार को संभालता है। बेटे जूनियर ट्रंप के पास अमेरिका और यूरोप से निवेश लाने की जिम्मेदारी है। जबकि दामाद जेरेड कुशनर की कंपनी एफिनिटी पार्टनर्स सउदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के सरकारी वेल्थ फंड से मिले अरबों डालर के निवेश को संभालती है। इस रकम को शेयरों में डायवर्ड करते हैं। ट्रंप के पोर्टफोलियो में पिछले साल के अंतिम तीन महीनों में कई सौ शेयर ट्रेडिंग के रिकार्ड हैं। जबकि इस साल 10 फरवरी को ही ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन में अपने शेयरों की हिस्सेदारी को बेचकर लगभग 350 करोड़ रुपए की कमाई की। इससे कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने एंटी ट्रस्ट और एआई रेगुलेशन और डाटा नीतियों से संबंधित बड़े फैसले किए। ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप के कभी युद्ध तो कभी वार्ता के बयानों से तेल और स्टॉक वायदा बाजारों में तेज उथल-पुथल रही। जब भी ट्रंप युद्ध का बयान देते तो तेल के दाम उछल जाते, जबकि वार्ता वाले बयान से शेयर बाजारों में तेजी आ जाती।

-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 21 May 2026

यूएई के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर हमला

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अल दफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के परिसर में रविवार को एक ड्रोन हमला हुआ और उसके बाद आग लग गई। हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। ईरान और यूएई अब जानी दुश्मन बन चुके हैं। ड्रोन से बराकाह न्यूक्लियर प्लांट को निशाना बनाया गया। इस अटैक को यूएई ने बिना किसी कारण के आतंकी हमला बताया। बहरहाल इस हमले की जिम्मेदारी  फिलहाल किसी भी समूह ने नहीं ली है। मगर यूएई का आरोप ईरान की तरफ ही है। यूएई का मानना है कि यह हमला ईरान ने ही ड्रोन के जरिए किया है। पिछले कई दिनों से ईरान-यूएई में तनातनी चल रही है। ईरान का मानना है कि यूएई खुलकर अमेरिका और इजरायल की मदद कर रहा है और उसकी भूमि से ही अमेरिकी हमले हो रहे हैं। खबर तो यहां तक है कि वर्तमान जंग के दौरान ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके मोसाद  प्रमुख ने यूएई का गुप्त दौरा किया था। ड्रोन हमले से बराकाह संयंत्र के बाहरी क्षेत्र में स्थित एक इलैक्ट्रिक जेनेरेटर में आग लग गई। यह आग संयंत्र की भीतरी परिधि के बाहर लगी थी। संघीय परमाणु नियामक प्राधिकरण (एफएएनआर) ने भी इस हमले की पुष्टि की कि आगे से संयंत्र की सुरक्षा या उसके जरूरी सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा है और सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रही है। सभी जरूरी एहतियाती कदम उठा लिए गए हैं और लोगों से अपील की गई है कि वे सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें और अफवाहों से बचें। बयान में ड्रोन हमले के स्त्राs के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी गई। ईरानी सूत्रों का कहना है कि हमने कोई हमला नहीं किया है तो फिर हमला किसने किया? क्या कोई तीसरी शक्ति अपना खेल तो नहीं खेल रही जो दोनों मुल्कों को लड़वा कर अपना उल्लू सीधा करना चाहती है। इससे पहले भी 5 मई को यूएई ने कहा था कि उसके कुछ क्षेत्रों पर ईरान से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया, लेकिन ईरान की सैन्य कमान ने इस आरोप से इंकार किया था। ईरानी अधिकारियों ने यूएई के उन आरोपों को भी खारिज किया था जिसमें ईरान पर हमला करने का दावा किया गया था। दरअसल यूएई को ईरान इसलिए अपना दुश्मन मान रहा है, क्योंकि उसे लगता है कि यूएई की धरती का इस्तेमाल करके ही अमेरिका ने उस पर अटैक किए हैं। बहरहाल इस हमले ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे नाजुक संघर्ष विराम को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ऐसा लग रहा है कि कूटनीतिक प्रयास भी अब काफी तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने इस हमले के पीछे के लोगों पर बिना किसी उकसावे के आतंकवादी हमला करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि वह अपनी देश की संप्रभुता पर किसी भी तरह के खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। दक्षिण कोरिया की मदद से बने और 2020 से चालू बराकाह  परमाणु संयंत्र अरब दुनिया का एक मात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। 20 अरब डालर की लागत से बना यह संयंत्र यूएई की लगभग एक चौथाई ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है।

-अनिल नरेन्द्र