Thursday, 3 April 2025

दूर होंगी दिल्ली के मरीजों की तकलीफ



लगभग पौने दो करोड़ की सघन आबादी वाले दिल्लीवासियों की सेहत को बूस्टर डोज देने के लिए दिल्ली सरकार प्लान तैयार कर रही है। प्लान के तहत सरकार 10 बिंदुओं पर फोकस कर विभिन्न अस्पतालों, पॉलीक्लीनिक्स, अरोग्य मंदिरों सहित दूसरी स्तरीय अस्पतालों का ऑडिट कर रही है। एक अधिकारी के अनुसार इसका लक्ष्य जून 2025 रखा गया है। इसमें 10 बिंदुओं को फोकस किया गया है, जिसके तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंडर आने वाले 28 अस्पतालों मैडिकल कालेजों में तीन पॉवर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के आधार पर सुनिश्चित करने की पहल होगी। सेहत सुधारने की पहल में मोशन और क्लीचर में आगे बढ़ने के अवसरों में वृ]िद्ध करना, सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करना, जनकपुरी सुपर स्पेशल और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी में विशेषज्ञ स्तरीय सर्जन्स कम्युनिटी मेडिसन व अन्य विभागों से जुड़े विशेषज्ञों की कमी को दूर करना रखा गया है। लोकनायक व जीटीबी अस्पताल के आईसीयू में बिस्तरों की संख्या में इजाफा करने का भी लक्ष्य रखा गया है। जरूरी दवाओं और उपकरणों को अपग्रेड करने के साथ ही किसी प्रकार की किल्लत को दूर करने के लिए क्रीनिंग कमेटी के गठन की भी योजना है। मरीजों की वेटिंग कम करने के लिए पेशेंट डॉक्टर्स डैशबोर्ड की स्थापना होगी। नए अस्पतालों के उनके अधूरे पड़े निर्माण कार्य कम से कम समय में पूरा करने उसकी लागत नियंत्रण करने के लिए लोक निर्माण विभाग और केन्द्राrय लोक निर्माण के एक्सपर्ट्स की मदद ली जाएगी। सर्जरी विभाग इमरजेंसी में औसत टाइम को कम करने का लक्ष्य भी रखा जाएगा। दिल्लीवासी उम्मीद करते हैं कि दिल्ली सरकार अपनी इन योजनाओं में सफल हो और इन्हें जमीन पर उतारे ताकि दिल्लीवासियों को इलाज में सहूलियतें मिलें जिनकी बहुत आवश्यकता है। दिल्ली सरकार की योजना तो सही है, उम्मीद रखें कि वह इन्हें पूरा करेंगी।

-अनिल नरेन्द्र

सवाल रॉ पर प्रतिबंध लगाने का



अमेरिका में भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) पर प्रतिबंध लगाने की मांग हुई है। पता नहीं अमेरिका भारत के साथ कौन सी दुश्मनी का बदला निकाल रहा है। एक के बाद एक झटका हमें देने पर तुला हुआ है। ताजा उदाहरण अमेरिका के यूएस कमीशन ऑन रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने साल 2025 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। रॉ पर प्रतिबंध लगाने की मांग इस रिपोर्ट का हिस्सा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हो रही हैं क्योंकि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले और भेदभाव के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसे पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बताया है। पिछले कुछ सालों से यह संस्था लगातार भारत कि धार्मिक स्वतत्रता और अल्पसंख्यक उत्पीड़न पर चिंता जताता रही है और भारत हर बार इसे खारिज करता आया है। 96 पन्ने की इस रिपोर्ट में भारत को उन 16 देशों के साथ रखने का सुझाव दिया है। जहां कुछ खास चिंताएं हैं। रिपोर्ट में लिखा गया है कि भारत सरकार ने विदेशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेष रूप से सिख समुदाय के सदस्यों और उनकी आवाज उठाने वालों को टारगेट करने के लिए अपनी दमनकारी रणनीति का विस्तार करना जारी रखा। भारत के धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघनों का डॉक्यूमेंटेशन करने वाले पत्रकारों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज संगठनों ने कांसुलर सेवाएं न मिलने, ओवर सीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड को निरस्त करने के साथ-साथ हिंसा और निगरानी की धमकियों की सूचना दी है। रॉ के बारे में कहा गया, अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग और कनाडा सरकार की खुफिया जानकारी ने भारत के रॉ के एक अधिकारी और छह राजनयिकों के न्यूयार्क में 2023 में एक अमेरिकी सिख कार्यकर्ता की हत्या के प्रयास से जुड़े आरोपों की पुष्टि की है। संस्था ने अमेरिकी सरकार से रॉ पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की है। रिपोर्ट में लिखा ः धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन में दोषी पाए गए व्यक्तियों और संस्थाओं जैसे विकास यादव और रॉ पर टारगेटेड प्रतिबंध लगाएं। उनकी संपत्तियों को जब्त करें और/या संयुक्त राज्य अमेरिका में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाएं। अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने 17 अक्टूबर को भारतीय नागरिक विकास यादव के खिलाफ भाड़े पर हत्या और मनीलांड्रिंग का मामला दर्ज करने की घोषणा की थी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि साल 2023 में अमेरिकी धरती पर गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश में विकास यादव की अहम भूमिका थी। जहां अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने यादव को भारत सरकार का कर्मचारी बताया था। वहीं भारत ने कहा था कि विकास यादव अब भारत सरकार का कर्मचारी नहीं है। टारेगेटेड प्रतिबंध एक प्रकार का आर्थिक या व्यापारिक प्रतिबंध है जो एक या एक से अधिक देश या अंतर्राष्ट्रीय संगठन किसी देश के अंदर व्यक्ति विशेष संस्थाओं या सेक्टर के खिलाफ लगाया जा सकता है न कि पूरे देश पर। धार्मिक स्वतंत्रता की 2025 की इस रिपोर्ट पर भारत के विदेश मंत्रालय ने जवाब देते हुए कहा ः हमने अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की हाल ही में जारी भारत की वार्षिक रिपोर्ट देखी है जो एक बार फिर पूर्वाग्रह से भरी हुई और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना है कि रिपोर्ट में बार-बार कुछ घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है और भारत के बहुसांस्कृतिक समाज को गलत तरीके से दर्शाने की कोशिश करता है।

Tuesday, 1 April 2025

अंतत कांग्रेस कोयह समझ आई



सत्ता के बिना संगठन की विचारधारा लागू नहीं कर सकते यह बात लगातार चुनाव दर चुनाव हारने के बाद अंतत कांग्रेsस को अब समझ आई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यों में चुनाव जीतने के लिए दीर्घकालिक रणनीति के साथ एकजुट होकर काम करने के वास्ते पार्टी की जिला इकाई प्रमुखों को आह्वान किया और कहा कि संगठन की विचारधारा मजबूत है। लेकिन इसे सत्ता के बिना देश में लागू नहीं किया जा सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने एक होकर लड़ाई लड़ी, जिससे भाजपा 240 पर अटक गई। कांग्रेस पार्टी ने 2024 लोकसभा चुनाव में लगभग 100 सीट हासिल की। अगर हमने अधिक मेहनत की होती, हमारा संगठन और मजबूत होता तो हम 20-30 सीटें और हासिल कर सकते थे। खरगे ने कहा कि इतनी सीट हासिल करने से देश में वैकल्पिक सरकार भी बना सकते थे। कांग्रेस फसल को तैयार कर लेती है पर उसे काटने वाला संगठन निहायत कमजोर है या यूं कहें है ही नहीं। राहुल गांधी जितना मर्जी देश में घूम लें, हर वर्ग से मिल लें, जब तक संगठन उनके सपने को साकार नहीं करेगा वह सपने ही रह जाएंगे। देखें खरगे जी जो कह रहे हैं उसे क्रियान्वयन करने की क्षमता भी रखते हैं या नहीं?

-अनिल नरेन्द्र


अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है


सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि असुरक्षित लोगों के आधार पर अभिव्यक्ति की आजादी को नहीं आंका जा सकता। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है क्योंकि इसके बिना सम्मानजनक जीवन जीना असंभव है। सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी को लोकतंत्र का अहम अंग बताते हुए कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात में दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा, भले बड़ी संख्या में लोग किसी के विचार को नापसंद करते हों, पर उसके विचार व्यक्त करने के अधिकार का सम्मान व संरक्षण होना चाहिए। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने कहा, 75 वर्ष पुराना लोकतंत्र इतना कमजोर नहीं कि किसी कविता या कॉमेडी से समाज में शत्रुता या घृणा फैले। यह कहना कि किसी कला या स्टैण्डअप कॉमेडी से नफरत फेल सकती है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल देगा। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ कांग्रेस से सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ सोशल मीडिया पर भड़काऊ गीत का संपादित वीडियो पोस्ट करने के मामले में गुजरात पुलिस की एफआईआर को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने जोर देकर कहा, भाषण व अभिव्यक्ति की आजादी प्रतिबंधों से ऊपर है। भारतीय न्याय संहिता की धारा-196 के तहत धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए अपराध के किसी व्यक्ति के बोल या लिखे गए शब्दों के प्रभाव को मजबूत दिमाग वाले दृढ़ व साहसी व्यक्ति के मानकों के आधार पर विचार करना होगा। इसे उन लोगों के समर्थन के आधार पर नहीं आंका जा सकता, जो कमजोर व अस्थिर दिमाग वाले हैं, जिनमें सदैव असुरक्षा की भावना होती है या जो हमेशा आलोचना को यानि ताकत व पद के लिए खतरा मानते हैं। पीठ ने कहा, लोगों या उनके समूहों के विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति स्वस्थ व सभ्य समाज का अभिन्न अंग है। विचारों व दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति की आजादी के बिना, संविधान के अनुच्छेद-21 में दी गई गारंटी वाला सम्मानजनक जीवन असंभव है। पीठ ने कहा, यह सुनिश्चित करना कोर्ट का परम कर्तव्य है कि संविधान व इसके आदर्शों का उल्लंघन न हो। गुजरात हाईकोर्ट के 17 जनवरी के आदेश को इमरान ने चुनौती दी थी। जिसमें उन पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जांच शुरुआती चरण में है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने अभिव्यक्ति की आजादी के संरक्षण को सर्वोपरि बताया और साफ किया कि किसी भी बयान या लेख की व्याख्या तार्किक और दृढ़ व्यक्ति की दृष्टि से होनी चाहिए न कि उन लोगों के अनुसार जो असुरक्षा के चलते आलोचना को खतरा मानते हैं। साथ ही धारा-196 के तहत जांच प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया ताकि अनावश्यक मुकदमों से नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन न हो। हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में सभी संबंधित पक्ष इसको ध्यान में रखेंगे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नाजायज तरीके से दबाने का प्रयास नहीं करेंगे।

Saturday, 29 March 2025

क्या स्टालिन विपक्ष का चेहरा बनना चाहते हैं?

लोकसभा सीटों के परिसीमन के संबंध में चेन्नई में आयोजित बैठक में सात राज्यों- तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और ओडिशा के नेताओं ने भाग लिया। चेन्नई में हुई बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अन्य लोग शामिल हुए। स्टालिन ने कहा, केवल तभी सच्चा संघीय ढांचा बन सकता है जब राज्य स्वायत्तता से काम करेंगे और हम तभी विकास की ओर बढ़ सकते हैं। एक प्रस्ताव पारित किया गया कि लोकसभा सीटों का परिसीमन अगले 25 साल के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए। स्टालिन ने यह भी कहा कि यदि पुनर्गठन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो इसका दक्षिणी राज्यों पर बहुत ज़्यादा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, हम पुनर्गठन का विरोध करते हैं, क्योंकि जिन राज्यों ने सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी जनसंख्या को नियंत्रित किया है, उन्हें लोकसभा में प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऩुकसान होगा। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि केंद्र सरकार से मांग की जाए कि 25 साल तक परिसीमन को रोका जाए और इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संसद में की जानी चाहिए। निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्गठन को पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए और साल 1971 की जनगणना के आधार पर संसदीय सीटों की संख्या बरकरार रखी जानी चाहिए। स्टालिन खुद को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के ख़िल़ाफ एक राजनीतिक नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका अहसास होने से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक में भाग नहीं लिया। स्टालिन पूरे देश को अपनी अहमियत दिखाने के लिए इस तरह का काम कर रहे हैं। वो इंडिया अलायंस की तरह अपनी बैठक में सबको आमंत्रित कर ख़ुद की छवि को ऊपर उठाना चाहते हैं। हाल ही में ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन के नेता के रूप में आगे बढ़ाने की मांग उठ रही है। फिलहाल स्टालिन भी खुद को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। -अनिल नरेन्द्र

मामला कुणाल कामरा का

स्टैंडअप कमेडियन कुणाल कामरा की कॉमेडी के दौरान गाए गए एक गाने पर भारी विवाद हो गया है। कामरा के इस गीत से महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे पर तंज कसा और कथित तौर पर उन्हें गद्दार बताया। इससे खफा शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के उस होटल में बने स्टूडियो में तोड़फोड़ की जहां यह कॉमेडी शूट की गई। महाराष्ट्र की सत्ता में शामिल शिवसेना, भाजपा और एनसीपी ने कुणाल कामरा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि कामरा को माफी मांगनी चाहिए। वहीं विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी बता रहा है। बताते हैं, कामरा का यह वीडियो 2 फरवरी को शूट किया गया था। इसमें दिल तो पागल है की धुन पर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर कथित तौर पर तंज कसा गया है जो रविवार को सामने आया। इसके बाद शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने कामरा ने जहां यह शूट किया था उसमें जमकर तोड़फोड़ की। पुलिस ने सोमवार सुबह दो एफआईआर दर्ज की। पहली कुणाल कामरा पर शिंदे के अपमान की, दूसरी स्टूडियो में तोड़फोड़ में 40 शिवसेना कार्यकर्ताओं पर। कुणाल कामरा मंगलवार को पूछताछ के लिए मुंबई पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। यही नहीं कुणाल कामरा ने साथ कहा है कि वह माफी नहीं मागेंगे। हां अगर अदालत चाहेगी तो माफी मांग सकते हैं। वहीं एकनाथ शिंदे ने कहा किसी पर हास्य व्यंग्य करना, कटाक्ष करना गलत नहीं है, लेकिन इसकी भी एक मर्यादा होती है। कुणाल कामरा ने जो किया ऐसा लगता है कि उन्हेंने सुपारी लेकर ऐसा किया है। कटाक्ष करते समय एक शिष्टाचार बनाए रखा जाना चाहिए, नहीं तो एक्शन का रिएक्शन भी होता है। विवाद के बीच कामरा ने दूसरा पैरोडी गीत भी सोशल मीडिया पर जारी कर दिया। पैरोडी के बोल हम होंगे कामयाब एक दिन...। कामरा ने नई पैरोडी में नाथुराम और आसाराम को जोड़कर अंधविश्वास, बेरोजगारी और गरीबी के साथ संघ के शिष्टाचार पर भी कटाक्ष किया है। उधर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, कुणाल कामरा जो सच है, उस जनमानस के सामने लाए है, इसलिए मैं उनके समर्थन में खड़ा हूं। कामरा के स्टूडियो में तोड़फोड़ शिव सैनिकों ने नहीं की। शिवसेना का तोड़फोड़ से कोई संबंध नहीं है। संभवत गद्दारों के गुट के कार्यकर्ताओं ने किया है। यू-ट्यूब पर पोस्ट की गई 36 वर्षीय कामरा की टिप्पणी 36 लाख बार से ज्यादा देखी जा चुकी है और सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रही है। बयान में कामरा ने इस टिप्पणी के लिए कहा है कि यह पहले अजित पवार कह चुके हैं। मैं भीड़ से नहीं डरता और पलंग के नीचे छिपकर मामला शांत होने का इंतजार नहीं करूंगा। कामरा ने मीडिया को भी निशाना बनाते हुए टिप्पणी की है कि ईमानदारी से इस तमाशे की रिपोर्टिंग करें, याद रखें, प्रेस की आजादी के मामले में भारत 159वें स्थान पर है। शिंदे ने व्यंग्य की सीमा तक करने की बात कहते हुए इसे किसी के खिलाफ बोलने की सुपारी लेने जैसा कहा। पैरोडी में किसी विशेष को संबोधित नहीं किया गया है। इसलिए इस कदर त्योरियां चढ़ाना सही नहीं होता। सत्ता और राजनीतिज्ञों की हालिया पौध में बर्दाश्त इस कदर खत्म हो चुकी है कि कोई भी आलोचना, व्यंग्य या मसखरी बर्दाश्त करने को राजी नहीं हैं। प्रेस या अभिव्यक्ति की आजादी पर बखान करना आसान है, मगर यह रचनात्मक आपातकाल सरीखा माहौल रचा जा रहा है। जो बोलने, लिखने, गाने, अभिनय पर कड़ी नजर रखी जा रही है। विरोधस्वरूप उपद्रव कानून को हाथ में लेना भी सरकार विरोधी काम ठहराया जा सकता है।

Thursday, 27 March 2025

धर्म आधारित आरक्षण असंवैधानिक: संघ

कर्नाटक के ठेके में मुस्लिम आरक्षण और औरगंजेब की क्रब को लेकर छिड़े विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने दो टूक कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है। डा. बीआर आंबेडकर द्वारा लिखित संविधान में भी इसे स्वीकार नहीं किया गया था। साथ ही बाहरी आक्रमणकारियों का महिमामंडन करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि आक्रांता जैसी मानसिकता रखने वाले लोग देश के लिए खतरा हैं। देश की संस्कृति के खिलाफ चलने वाला औरंगजेब आदर्श नहीं हो सकता। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा-स्वतंत्र भारत के लोगों को सोचना होगा कि देश के इतिहास, मिट्टी, संस्कृति और परंपरा के खिलाफ चलने वाले विदेशी आक्रांताओं को अपना आदर्श बनाना हो या नायकों को सम्मान देना है। देश का आदर्श वही हो सकता है, जो भारत के इतिहास, संस्कृति व परंपरा के साथ चले। औरंगजेब इस खांचे में फिट नहीं बैठता। इसमें उसके भाई दाराशिकोह फिट बैठते हैं, जिन्हें गंगा-जमुनी तहजीब की बात करने वालों ने कभी आगे नहीं किया। इन लोगों ने सामाजिक सदभाव में विश्वास करने वाले दाराशिकोह की जगह और औरंगजेब का महिमामंडन किया। सरकारी ठेकों में मुसलमानों को 4 प्रतिशत आरक्षण देने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर संघ ने कहा कि संविधान धर्म आधारित कोटे की इजाजत नहीं देता। होसबोले ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों ने भी ऐसे आरक्षण के प्रावधानों को खारिज किया है। -अनिल नरेन्द्र