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Tuesday, 19 May 2026

चीन से क्या लेकर लौटे ट्रंप

 
2025 में अमेरिका की सत्ता में वापस लौटे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूरी दुनिया के साथ रंगबाज की तरह पेश आ रहे थे। एक साल में कई देशों को दादागिरी के तेवर दिखाने वाले ट्रंप बीजिंग भी उन्हीं तेवरों के साथ पहुंचे थे लेकिन जब लौटे तो ये तेवर खाली थे खाली रह गए। उनका कॉन्फिडेंस कुछ यूं गायब हुआ जैसे फ्री के वाई-फाई का नेटवर्क। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि चीन गए ट्रंप क्या देकर आए हैं और क्या लेकर लौटे हैं? बाहर से चेहरे पर मुस्कान के पीछे नुकसान है या फायदा है? जितनी बड़ी बातें उतनी बड़ी डील हमें तो नजर नहीं आई। बीजिंग छोड़ने से पहले ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुए समझौतें को शानदार व्यापारिक सौदा बताया। उन्होंने कहा कि इन डील्स से दोनों देशों को बड़ा फायदा होगा। साथ ही ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को दोबारा खोलने के लिए चीन की मदद स्वीकार करने की बात कही। ट्रंप ने कहाः हमने कुछ शानदार टेड डील की है जो दोनों देशों के लिए बहुत अच्छी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बातचीत के दौरान कई समस्याएं सुलझाई गई हैं। ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने 200 बोइंग विमानों की डील पर सहमति जताई है। ये एक मात्र ठोस डील कही जा सकती है जो इस दौरे पर हुई लेकिन इस पर भी चीन ने कोई जवाब नहीं दिया है। इस यात्रा में ट्रंप का व्यवहार पूरी तरह बदला हुआ था। आमतौर पर आक्रामक और टकराव वाली राजनीति के लिए जाने जाते ट्रंप इस दौरे में काफी शांत और संयमित नजर आए। उन्होंने शी जिनपिंग की तारीफ में इतने कसीदे पढ़े जितने शायद और किसी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के लिए पढ़े हों। जिनपिंग की तारीफ में पढ़े कसीदे जेलेंस्की हों या पूर्व राष्ट्रपति बिडेन एक साल में ट्रंप ने कई देशी-विदेशी नेताओं की बेइज्जती करने और मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ट्रंप ने कहाö अगर आप हॉलीवुड जाएं और चीन के नेता की भूमिका निभाने के लिए किसी अभिनेता को ढूंढें तो शी जिनपिंग बिल्कुल उसी तरह फिट बैठेंगे। ट्रंप की चीन यात्रा में एक महत्वपूर्ण मुद्दा था ताइवान का। बीजिंग इसे अपना हिस्सा मानता है। जबकि अमेरिका लंबे समय से ताइवान का समर्थन करता रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पूरी यात्रा में ट्रंप ने ताइवान का नाम तक नहीं लिया। उल्टा शी जिनपिंग ने ट्रंप के मुंह पर सुना दिया कि आप ताइवान की मदद करना बंद करें अगर आपने ऐसा नहीं किया तो हम आपसे युद्ध तक करने पर मजबूर होंगे। इस पर भी ट्रंप ने कोई रिएक्शन नहीं दिया है। शी ने चेतावनी दी कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे संवेदनशील महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि अगर इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों के बीच टकराव और यहां तक कि युद्ध भी हो सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रूथ सोशल पर भी ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को चौंका दिया। उन्होंने अमेरिका को गिरता हुआ राष्ट्र कहने वाली शी जिनपिंग की बात से सहमति जताई। हालांकि ट्रंप ने कहा कि शी का इरादा बिडेन प्रशासन के चार सालों की भारी क्षति की तरफ था। एक ब्रिटिश विश्लेषक ने अपने कॉलम में ट्रंप के रवैये पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, सौदे की कला अब इस समय चापलूसी की कला जैसे लगती है, जब दूसरे आदमी के पास सारे पत्ते हों। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग यह बात जानते थे, दुनिया का सबसे महान व्यवसायी भी जानता था, लेकिन शायद कमरे में मौजूद एक मात्र व्यक्ति जिसे इसका एहसास नहीं हुआ, वह खुद ट्रंप थे। 
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 16 May 2026

ईरान की न्यूक्लियर धमकी

अमेरिका की तरफ से शांति प्रस्ताव पर ईरान के जवाब को खारिज किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में फिर से युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। अमेरिका के प्रस्तावों का ईरान की ओर से दिए जवाब से राष्ट्रपति ट्रंप बौखला गए हैं। उन्हें ईरान का जवाब बिल्कुल पसंद नहीं आया। उधर ईरान ने अमेरिका को ऐसी धमकी दे दी है जो ट्रंप के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। पहले से ही जो शांति वार्ता वेंटिलेटर पर थी, वो अब और नाजुक हालत में पहुंच सकती है। इस बार ईरान ने साफ कर दिया है कि वो वेपन्स ग्रेड परमाणु बम बनाने से सिर्फ एक कदम दूर है और इसे हासिल करने का आदेश कभी भी दे सकता है। परमाणु हमले को लेकर ईरान ने सख्त चेतावनी देते हुए लहजे में 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम को शुद्ध करने की बात कही है। ईरान के संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने मंगलवार को कहा है कि अगर ईरान पर फिर हमला हुआ तो वह यूरेनियम को 90 प्रतिशत शुद्ध कर सकता है। ऐसे में यह यूरेनियम परमाणु हथियार के लिए कारगर होगा। यह चेतावनी उन्होंने एक्स के माध्यम से दी है। पिछले जून 2025  में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से कहा गया था कि इजरायल और यूएस के हमले की वजह से ईरान के यूरेनियम संदर्भ की क्षमता को नुकसान पहुंचा था। फिलहाल, जो संवर्धित यूरेनियम 60 प्रतिशत ईरान के पास है। जिसकी मात्रा लगभग 400 किलो है, फिलहाल इसके बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं है। अमेरिका लगातार ईरान से परमाणु कार्यक्रम छोड़ने की मांग कर रहा है। उधर अमेरिकी सीक्रेट एजेंसियों की तरफ से कहा गया है कि जब तक ईरान के इस यूरेनियम संवर्धन को हटाया नहीं जाता तब तक किसी तरह का असर ईरान परमाणु कार्यक्रम पर नहीं पड़ेगा। 28 फरवरी से जारी जंग में फिलहाल सीजफायर लागू है। लेकिन यह बेहद ही संवेदनशील सीजफायर माना जा रहा है। ऐसे में दोनों पक्ष किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। अमेरिका लगातार मांग कर रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ दे। लेकिन ईरान भी अपनी शर्तें पर अड़ा हुआ है। ईरान बोला-अमेरिका के पास प्रस्ताव स्वीकार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं, वहीं अमेरिका के पास ईरान की तरफ से बताए गए 14 सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। ऐसा ईरान के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है। जितना अमेरिका देर करेगा, वहां के टैक्सपेयर्स को उतनी ही बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने साफ कहा है कि ईरान हर विकल्प पर राजी है। पलटवार को तैयार है। ऐसा हमला करेगा कि अमेरिका भी चौंक जाएगा। ईरान अब झुकने के मूड़ में नहीं दिख रहा है। पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो हम 90 प्रतिशत तक जाएंगे। अब जब ट्रंप दोबारा सत्ता में हैं और तेहरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहे हैं तो ये न्यूक्लिर कांड पूरी दुनिया को एक ऐसी जंग में झोंक सकता है जिसे रोकना शायद किसी के बस में नहीं होगा। 

-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 14 May 2026

नेतन्याहू की खुली चेतावनी, अभी जंग हो सकती है

ईरान और अमेरिका के बीच हालिया युद्ध विराम के बावजूद मध्य-पूर्व में तनाव की लपटें एक बार फिर तेज हो गई हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक अमेरिकी टीवी चैनल में एक विस्फोटक इंटरव्यू देते हुए साफ कर दिया है कि ईरान का परमाणु खतरा टला नहीं है। नेतन्याहू का यह संदेश न केवल ईरान बल्कि ट्रंप प्रशासन और पूरी अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सीबीएस के पत्रकार स्कॉट पेली को दिए 18 मिनट के साक्षात्कार में पहली बार ईरान के परमाणु भंडार की डिटेल दीं। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अभी भी 440 किलोग्राम से अधिक 60 प्रतिशत तक संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम का भंडार है। नेतन्याहू ने सख्त लहजे में कहा: युद्ध विराम अपनी जगह है, लेकिन परमाणु खतरा खत्म नहीं हुआ है। आप वहां जाएंगे और उसे हटा देते है... अभी काम पूरा होना बाकी है। नेतन्याहू ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि इजरायल को अब अमेरिका की सैन्य सहायता (3.8 बिलियन डालर सालाना) पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होने की योजना बना रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर बिना किसी बाहरी दबाव के कार्रवाई कर सके। इस इंटरव्यू के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रुथ सोशल पर लिखा ः हम इजरायल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। बेंजामिन एक महान नेता हैं और हम दोनों एक ही पेज पर हैं। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और इजरायल की ईरानी नीति और भी आक्रामक हो सकती है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए जो शांति प्रस्ताव भेजा था, उसे इजरायल ने भी अस्वीकार्य करार दिया है। इजरायल का एक ही स्टैंड है जब तक सारा एनरिच्ड यूरेनियम देश से बाहर नहीं जाता कोई समझौता नहीं होगा। नेतन्याहू के इस स्टैंड ने साफ कर दिया है कि इजरायल एक तरफा कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। जहां एक तरफ दुनिया शांति की उम्मीद लगाई बैठी है, वहीं नेतन्याहू का यह बयान यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा के लिए निर्णायक होने वाला हो सकता है। क्या यह केवल एक कूटनीतिक दबाव है या इजरायल सच में किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में है? अमेरिका जहां ईरान के साथ शांति चाहता है, वहीं इजरायल इस दिशा में बड़ा रोड़ा दिख रहा है। अमेरिका बेशक ईरान से युद्ध खत्म करना चाहता हो लेकिन इजरायल है कि उसे यह करने नहीं दे रहा है। अमेरिका एक तरफ चाहता है कि ईरान के साथ उसकी सुलह हो जाए, वहीं इजरायल ऐसा होने नहीं देगा। लड़ाई जारी रखने में बेंजामिन नेतन्याहू का निजी स्वार्थ भी है। उस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं और इजरायली अदालतों में उनके खिलाफ यह केस चल रहे हैं। उनसे बचने के लिए नेतन्याहू कहीं न कहीं युद्ध को बढ़ावा देता है और इसकी आड़ में अदालतों से बचता रहता है। इसीलिए अगर ईरान से युद्ध विराम हो तो वह लेबनान में युद्ध शुरू कर देता है। जब ईरान और अमेरिका की सीजफायर की बात हुई तब भी नेतन्याहू ने साफ कहा कि इसमें इजरायल-लेबनान युद्ध शामिल नहीं है। वह मध्य-पूर्व में किसी भी डील को तोड़ने में लगा रहता है। असल युद्ध का कसूरवार नेतन्याहू है। 

-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 12 May 2026

सीजफायर और जंग

एक तरफ तो अमेरिका-ईरान के बीच कहने को तो सीजफायर यानी युद्ध बंदी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ जंग भी चल रही है। यह सीजफायर अपनी समझ से तो बाहर है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले हफ्ते इस्लामाबाद में बातचीत हो सकती है। दोनों देशों के बीच 14 प्वाइंट वाले समझौते पर काम चल रहा है। जिसमें परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज तनाव जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की भूमिका को लेकर भी नई जानकारी सामने आई है। अमेरिकी एजेंसियां उन्हें युद्ध और बातचीत में अहम मान रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अगले हफ्ते इस्लामाबाद में जो बातचीत होनी है उसमें एक प्रमुख मुद्दा एक महीने तक चलने वाली बातचीत की रूपरेखा तैयार करना है, ताकि दोनों देशों के बीच तनाव और युद्ध खत्म किया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान के पास मौजूद हाई एनीरिच्ड यूरेनियम को किसी दूसरे देश में भेजने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि कई अहम मामलों पर अभी भी सहमति नहीं बनी हैं। सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका की तरफ से ईरान पर लगे प्रतिबंधों से राहत को लेकर है। इस बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर नई जानकारी भी सामने आई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई युद्ध की रणनीति तय करने और अमेरिका से बातचीत को संभालने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ठीक हैं और अब उन्होंने कमान संभाल ली है। एक तरफ तो सीजफायर चल रहा है और डील की बात हो रही है। दूसरी तरफ होर्मुज को लेकर अचानक जंग छिड़ी हुई है। मिडल ईस्ट में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात को अमेरिका और ईरान के बीच हमले फिर शुरू हो गए हैं। इस हमले के बीच 8 अप्रैल 2026 से चला आ रहा नाजुक सीजफायर टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ये हमले होर्मूज, केशम और बंदर अब्बास इलाके में हुए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुई इस झड़प के बाद पूरे इलाके में तनाव फिर से चर्म पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बदतमीजी की है। हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि समझौता अब भी मुमकिन है। अमेरिका के सेंट्रल कमांड (सेटकॉम) के अनुसार ईरानी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तैनात तीन अमेरिकी विध्वंसक जहाजों पर मिसाइलों, ड्रोनों और छोटी नावों से हमला किया। हालांकि, अमेरिका का दावा है कि उनके जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और जवाबी कार्रवाई में ईरान के उन सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया गया है जहां से ये हमले शुरू हुए थे। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया तेहरान टाइम्स ने दावा किया है कि अमेरिकी हमले के कारण उनके जहाजों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने वाशिंगटन पर सीजफायर के उल्लघंन का सीधा आरोप लगाया है। सारी दुनिया की नजर प्रस्तावित इस्लामाबाद में शांति वार्ता पर टिकी हुई है। तमाम दुनिया चाह रही है कि यह जंग रुके और क्षेत्र में अमन-चैन फिर से स्थापित हो।
- अनिल नरेन्द्र

Saturday, 9 May 2026

ईरान ने खाड़ी देशों पर हमला क्यों किया?


अमेरिका और इजरायल के साथ जंग के दौरान ईरान की जवाबी कार्रवाई पारंपरिक लक्ष्यों से आगे बढ़ गई, उसने खाड़ी देशों में लगातार हमले किए और यह सिलसिला अभी भी जारी है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने दावा किया है कि ईरान ने उस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने रोका। फुजैटा में एक तेल फैसिलिटी पर बहरहाल एक ड्रोन गिरने से आग लग गई, जिसमें 3 भारतीय घायल हो गए। इससे पहले भी टैंकर पर ड्रोन हमले की घटना सामने आई थी। ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद यह इस तरह का पहला हमला है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार शाम बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बैलिस्टिक मिसाल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया जा रहा है। ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिका से जुड़े डिजिटल हब, क्लाउड, इन्फ्रास्ट्रकचर और डेटा केंद्रों को निशाना बनाकर जंग के दायरे को और फैला दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसने यूएई और बहरीन में डेटा हब्स पर ड्रोन हमले किए। यह आज के जंग में एक अभूतपूर्व कारण है, जिसमें सिर्फ साइबर घुसपैठ की बजाए आम लोगों से जुड़ें क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर सोची-समझी रणनीति के तहत हमले किए गए हैं? ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि इसका मकसद इन डेटा सेंटरों की दुश्मन की सैन्य और अन्य गतिविधियों में मदद करने वाली भूमिका को सामने लाना और उसे रोकना है। मौजूदा दौर में क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर अब दोहरे इस्तेमाल वाली रणनीतिक ढांचे के तौर पर उभरा है। यह बैंकिंग एविएशन, हेल्थ केयर, कार्पेरेट कामकाज और गवर्नमेंट जैसे क्षेत्रों में आम लोगों को सेवा देता है। इसके अलावा वह सेना और खुफिया एजेंसियों के कामों में भी मदद करता है। जिसमें एआई आधारित विश्लेषण, सैटलाइट तस्वीरों की प्रोसेसिंग लॉजिस्टिक्स की योजना बनाना और कमांड-एंड-कंट्रोल में मदद करना शामिल है। अमेरिका खासतौर पर बड़े पैमाने पर क्लाउड सेवाएं देने वाली कंपनियों पर निर्भर है। इनमें अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं। ईरान का मानना है कि इन केंद्रों को निशाना बनाने से जंग की रणनीतियां पूरी तरह बदल जाएंगी और इससे संघर्ष की दिशा पर गहरा असर पड़ सकता है। यूएई इसलिए भी ईरान के निशाने पर है क्योंकि उसका मानना है कि यह अमेरिका, इजरायल के इशारों पर काम करता है और अपनी जमीन का ईरान अमेरिकी हमलों के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत देता है। शोधकर्ता खालिद वलीद ने लंदन से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘अल-कुद्स-अल-अरबी' में एक लेख लिखा यह दिखाता है कि अब रणनीति में बड़ा बदलाव आया है। अब जगहों को नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को निशाना बनाया जा रहा है जो निगरानी का काम करती हैं। उन्होंने कहा, इस नजरिए से देखें तो ये कंपनियां अब स़िर्फ तकनीकी सेवाएं देने तक ही सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि वे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सेना के फ़ैसले लेने की प्रक्रिया की चेन का हिस्सा बन गई हैं।
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 7 May 2026

मिनाब स्कूल पर हमले पर पेंटागन की चुप्पी

पूर्व शीर्ष सैन्य वकील समेत अमेरिका के पांच पूर्व अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में ईरान के एक स्कूल पर हुए घातक हमले में संभावित अमेरिकी भूमिका को स्वीकार न रकने पर पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) की आलोचना की है। इनमें से कुछ ने कहा कि इतने लंबे समय बाद भी हमले की बुनियादी जानकारी तक जारी न करना बेहद असामान्य है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआती कार्रवाई के दौरान मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल गिरी। जिसमें करीब 110 बच्चे समेत 168 लोगों की मौत हुई। इसके बाद बीते दो महीनों में पेंटागन ने सिर्फ इतना कहा है कि इस घटना की जांच जारी है। मार्च की शुरुआत में अमेरिकी मीडिया ने खबर दी थी कि अमेरिकी सैन्य जांचकर्ताओं का मानना है कि शायद अमेरिकी बल अनजाने में स्कूल पर हमले के लिए जिम्मेदार  थे, लेकिन वे अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचे थे। बीबीसी ने इस हमले की पारदर्शिता की कमी के आरोपों पर कई सवाल पूछे, जिस पर पेंटागन के एक अधिकारी ने कहा, इस घटना की जांच जारी है। लेफ्टिनेंट कर्नल रेचल ई वेनलैंडिंगम कहती हैं कि अमेरिका की मौजूदा स्थिति सामान्य प्रतिक्रिया से साफ तौर पर अलग है। वैनलैंडिंगम अमेरिकी वायुसेना में जज एडवोकेट जनरल रह चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों ने कम से कम युद्ध कानून के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता दिखाई थी। मौजूदा प्रशासन के बयानों में जबावदेही की प्रतिबद्धता गायब है। सबसे अहम यह सुनिश्चित करना भी कि ऐसा दोबारा न हो। राष्ट्रपति ट्रंप ने 7 मार्च को कहा था कि उनके विचार में मिनाब हमले के लिए ईरान जिम्मेदार है, लेकिन उन्होंने कोई सुबूत नहीं दिया। कुछ दिन बाद जब उनसे मिनाब स्कूल के पास सैन्य अड्डे पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल गिरने का वीडियो दिखाए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहाः मैंने यह नहीं देखा। साथ ही ट्रंप ने बिना किसी सुबूत दावा किया कि ईरान के पास भी टॉमहॉक मिसाइलें थीं। 11 मार्च को जब उनसे उन खबरों के बारे में पूछा गया जिसमें कहा गया था कि शुरुआती सैन्य जांच में पाया गया कि अमेरिका ने स्कूल पर हमला किया था तो ट्रंप ने कहा मुझे इसके बारे में नहीं पता। अमेरिका के रक्षामंत्री पीटहेगसेथ से 4 मार्च को बीबीसी ने इस हमले पर सवाल किया था तो उन्होंने कहा, मैं सिर्फ  इतना कह सकता हूं कि हम इसकी जांच कर रहे हैं। यही नहीं अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस हमले पर कई सवालों के जवाब देने से इंकार कर दिया। पिछले महीने बीबीसी ने स्वतंत्र रूप से हमले की वीडियो की पुष्टि की थी जिसमें स्कूल के पास ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के अड्डे पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल गिरती दिख रही थी। पेंटागन के एक वरिष्ठ पूर्व सलाहकार वेस ब्रायंट ने बीबीसी से कहा कि शुरुआती सैन्य जांच आमतौर पर दो बातें तय करने के लिए होती है। पहली, क्या नागरिक क्षति वास्तव में हुई? दूसरी क्या उस समय अमेरिका उस इलाके में सक्रिय था या नहीं? जब दोनों शर्तें पूरी हो जाती हैं, तभी औपचारिक जांच शुरू की जाती है। प्रक्रिया के लिहाज से यह और भी साफ संकेत देता है कि वे पहले से जानते हैं कि वह अमेरिका की वजह से हुआ नहीं तो वे जांच नहीं कर रहे होते। वे बस इसे स्वीकार नहीं करना चाहते या इस पर बोलना नहीं चाहते। पिछले साल अमेरिका के रक्षा विभाग ने नौकरियों की कटौती की थी, उसमें ब्रायंट भी शामिल थे। अमेरिका स्वीकार करे या न करे उसने मानवता का कत्ल किया है जिसे कभी माफ नहीं किया जा सकता। 

-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 5 May 2026

आप और ट्रंप लगातार झूठ बोल रहे हैं

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ईरान युद्ध पर जनता को झूठ बोलने और गुमराह करने व वरिष्ठ सैन्य अफसरों को हटाने के आरोपों को लेकर प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति में सुनवाई हुई। पहली बार युद्ध शुरू होने के बाद रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को ईरान युद्ध पर डेमोक्रेटिक सांसदों का सामना करना पड़ा। गत बुधवार को वो हाउस आर्ड सर्विसिज कमेटी के सामने पेश हुए। उनके साथ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डेन केन और रक्षा मंत्रालय के मुख्य वित्त अधिकारी जूल्स हर्स्ट भी मौजूद थे। बहस की शुरुआत हेगसेथ ने डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकनों के बयान को निराशावादी करार देते हुए कहा कि इस तरह के कमेंट्स अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इस दौरान हेगसेथ और डेमोक्रेट्स सांसदों से तीखी बहस हो गई। छह घंटे की सुनवाई में माहौल गरमा गया। संसद के निचले सदन में ट्रंप प्रशासन के 1500 अरब डॉलर के रक्षा बजट पर चर्चा के दौरान यह नोकझोक हुई। पेंटागन द्वारा युद्ध की लागत 25 अरब डॉलर बताने पर डेमोक्रेट्स भड़क गए और उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक सेहत पर ही सवाल उठा दिए। इस पर हेगसेथ ने पलटवार किया कि ट्रंप सबसे तेज और सूझबूझ वाले कमांडर-इन-चीफ हैं। उन्होंने डेमोक्रेट सदस्यों से उल्टा सवाल किया कि क्या उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बिडेन की क्षमता पर कभी सवाल उठाए? डेमोक्रेटिक सांसदों ने अमेरिका द्वारा शुरू किए ईरान युद्ध को वॉर ऑफ चॉइस बताया, जिसे कांग्रेस की मंजूरी के बिना शुरू किया गया। कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सांसद जॉन गरामेंडी ने कहा, आप और राष्ट्रपति शुरू से ही इस युद्ध के बारे में अमेरिकी जनता से झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप मध्य-पूर्व के एक और युद्ध के दलदल में फंस गए हैं। हेगसेथ ने इस बयान को लापरवाह बताया और कहा कि ट्रंप किसी दलदल में नहीं हैं। आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति आपकी नफरत आपको अंधा कर रही है। हालांकि कमेटी के कई रिपब्लिकन सदस्यों ने पेंटागन का समर्थन किया। फ्लोरिडा के सांसद कार्लोस जिमेनेज ने कहा कि ईरान से अमेरिका के अस्तित्व को खतरा है। उन्होंने कहा-अगर कोई 47 साल से कह रहा है कि वह हमें मारना चाहता है तो मैं उसकी बात को गंभीरता से लूंगा। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और उसकी वजह से सामानों की कीमतों पर असर पर एक सांसद ने कहा आपको शर्म आनी चाहिए कि आपने मीनाब में हुए इस हमले में 168 लोग मारे गए, जिनमें करीब 110 बच्चे भी शामिल थे। आज हर अमेरिकन बढ़ती महंगाई से परेशान है। तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही हैं और इसके जिम्मेदार आप के राष्ट्रपति और आप जैसे सलाहाकार हैं। कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य एडम स्मिथ ने कहा- हमसे गलती हुई और युद्ध में ऐसा होता है, लेकिन दो महीने तक चुप रहकर हमने दुनिया को यह संदेश दिया कि हमें परवाह नहीं है। कैलिफोर्निया के भारत मूल के सांसद रो खन्ना ने इस हमले की लागत पर सवाल उठाया। इस पर हेगसेथ न कहा कि यह मामला अभी जांच के दायरे में है और वह इसकी लगात पर टिप्पणी नहीं करेंगे। इसके अलावा डेमोक्रेट सांसद सारा जैकब्स ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक सेहत पर सवाल किया। इस सवाल पर पीट हेगसेथ और सारा जैकब्स के बीच तीखी बहस हुई। खबर है कि विपक्षी डेमोक्रेट्स सदस्यों ने हेगसेथ के खिलाफ हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में महाभियोग प्रस्ताव भी लाने का फैसला किया है। इस प्रस्ताव के आने के बाद ईरान जंग में ट्रंप और हेगसेथ की मुसीबतें बढ़ सकती है। हाउस ऑफ डेमोक्रेट्स ने 5 गंभीर आरोप लगाते हुए हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग लाने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री को कैबिनेट से हटाने के लिए सीनेट और हाउस में 2 तिहाई सांसदों की जरूरत होगी।
- अनिल नरेन्द्र