Anil Narendra Blog
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Saturday, 4 July 2026
कहां है ईरान की 100 अरब डॉलर जब्त संपत्तियां?
ईरान को जल्द मिलेंगे 6 अरब डॉलर
Thursday, 2 July 2026
ट्रंप और मेलोनी के बीच बिगड़ते रिश्ते
Tuesday, 30 June 2026
अलविदा अयातुल्ला अली खामेनेई
Saturday, 27 June 2026
आसिम मुनीर की हत्या की साजिश?
जो लोग भी इजरायल और उसकी कुख्यात खुफिया एजेंसी मोसाद से वाकिफ हैं वह जानते हैं कि मोसाद राजनीतिक हत्याएं करवाने में माहिर है। इजरायल के इतिहास में ऐसे दर्जनों केस हैं जहां उसने अपने दुश्मनों के लीडरों को मौत के घाट उतारा है। ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है, 28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया था तो सबसे पहला काम मोसाद ने यह किया था कि उसने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई व ईरान टॉप मिलिट्री कमांडरों की हत्या कर दी थी। यह भी किसी से छिपा नहीं कि इजरायल अमेरिका-ईरान के युद्ध विराम से बहुत निराश है और इन एमओयू को तुड़वाने की पूरी कोशिश कर रहा है। मध्य पूर्व में कई देशों में रहस्यमय हमले हो रहे हैं, यह कौन कर रहा है पता नहीं चल रहा है। मुझे हैरानी नहीं हुई जब एक ताजा खबर आई कि मोसाद आसिम मुनीर और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की जेनेवा में हत्या का प्लान बना रहा था। मैंने अपने 18 जून के सम्पादकीय में जिसका शीर्षक था ः कागजों पर दस्तखत ः जमीन पर धुआं की अंतिम लाइन में लिखा था ः अंत में इजरायल-मोसाद कुछ भी कर सकता है। समझौता तुड़वाने के लिए ईरानी लीडरशिप की हत्या भी करवा सकता है ताकि यह युद्ध विराम टूट जाए। मेरी भविष्यवाणी इस मायने में सफल हुई, हालांकि थोड़ा फर्क यह रहा कि मोसाद ईरानी लीडरों को तो निशाने पर नहीं ले पाया पर उसने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल पर निशाना साधने की कोशिश जरूर की। बता दें कि ब्राजील के एक वरिष्ठ और जाने-माने पत्रकार पेपे एस्कोबार के इस सनसनीखेज दावे ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। एस्कोबार ने दावा किया कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और स्विट्जरलैंड दौरे पर गए पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की हत्या की साजिश रची थी। एस्कोबार ने दावा किया कि यह प्लान तब फेल हो गया जब पाकिस्तान की सेना को बेहद विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी कि इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निर्देश पर मोसाद जनरल आसिम मुनीर और पूरे पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को निशाना बनाने की तैयारी कर दी थी। एस्कोबार ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने ओमान के माध्यम से इजराइल को कड़ा संदेश भेजा था कि यदि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल या जनरल आसिम मुनीर को नुकसान पहुंचाया गया तो उसका गंभीर जवाब दिया जाएगा। यह भी याद दिलाया गया कि पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है। इसका मतलब साफ था। इन दावों के सामने आते ही पाकिस्तान ने यह सिरे से खारिज कर दिया। एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कामरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह बकवास और निराधार है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री शाहवाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर का स्विट्जरलैंड दौरा पूरी तरह सुरक्षित और बिना किसी सुरक्षा खतरे के पूरा हुआ। हत्या की साजिश का दावा वास्तविकता से कोई संबंध नहीं रखता और पूरी तरह काल्पनिक है। कटु सत्य तो यह है कि कोई भी एजेंसी ऐसी खबरों की कभी पुष्टि नहीं करता और उन्हें काल्पनिक ही बताता है।
-अनिल नरेन्द्र
Thursday, 25 June 2026
वार्ता को दिया मीनाब 168 नाम
Tuesday, 23 June 2026
शांति व अमन का दुश्मन नेतन्याहू
जब भी पिछले 80 वर्षें का दुनिया का इतिहास लिखा जाएगा उसमें दो नामों का विशेष उल्लेख होगा। जब भी मानवता के नरसंहार का वर्णन आएगा उसमें पहला नाम जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर का होगा और दूसरा नाम इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का होगा। नेतन्याहू इस सदी के नंबर वन विलेन बन कर उभरे हैं। जब भी मध्य-पूर्व में शांति की बात होती है तो उसमें नेतन्याहू कोई न कोई अड़ंगा लगा देते हैं। आप ताजा उदाहरण ही देख लें। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है, एमओयू भी साइन हो गया है पर नेतन्याहू अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे और अब तो वह अपने इकलौते मित्र देश अमेरिका को भी खुलकर गाली दे रहे हैं। यही वजह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कहना पड़ा कि तुम पागल हो चुके हो और मैं अगर तुम्हें न बचाता तो आज तुम जेल में होते। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायली कैबिनेट मंत्रियों को लताड़ते हुए कहा कि उन्हें उस ताकतवर सहयोगी पर हमला नहीं करना चाहिए क्योंकि अमेरिका के अलावा उसके साथ आज कोई नहीं है। वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तिगत हमलों से परेशान हैं। उन्होंने ट्रंप को पूरी दुनिया में इजरायल के प्रति सहानुभूति रखने वाला एक मात्र राष्ट्राध्यक्ष कहा है, उन्हें यह भूलना नहीं चाहिए। आखिर नेतन्याहू क्यों किसी भी शांति समझौते का विरोध करते हैं? इसके पीछे नेतन्याहू का राजनीतिक अस्तित्व, सरवाइवल प्रमुख कारण है। नेतन्याहू अपनी गद्दी सुरक्षित रखने के लिए कभी गाजा पर हमले कर रहे हैं, कभी लेबनान पर तो कभी ईरान पर। उनके इस आचरण पर ट्रंप सख्ती से बोलते भी नहीं। इसके पीछे एक कारण हो सकता है एपस्टीन फाइल्स! दुनिया जानती है कि इजरायल के पास वह बदनाम, ब्लैकमेल करने वाली एपस्टीन फाइल्स है जिनमें ट्रंप समेत दर्जनों राष्ट्राध्यक्ष फंसे हुए हैं। यह बात ट्रंप समझते हैं तभी तो इजरायल को रोक नहीं पा रहे हैं। नेतन्याहू की एक मजबूरी है वह है उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के केस। नेतन्याहू के खिलाफ आपराधिक और दीवानी मामलों के साथ नियमित अदालती कार्यवाही चल रही है। नेतन्याहू ने इसे आगे बढ़ने से यह कहकर रोक रखा है कि इजरायल इस समय युद्ध लड़ रहा है और यह पहली प्राथमिकता है, इसलिए इसे फिलहाल टाला जाए। नेतन्याहू इससे इतने परेशान हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से बाकायदा इजरायल के राष्ट्रपति से गुजरिश की थी कि नेतन्याहू के खिलाफ केसों को खत्म कर दें, वह माफी दे दें पर इजरायली राष्ट्रपति नहीं माने। इन केसों से बचने के लिए और संभावित जेल की सजा से बचने के लिए नेतन्याहू कहीं न कहीं लड़ाई जारी रखते हैं। अब जब अमेरिका-ईरान में शांति वार्ता जेनेवा में चल रही है और एमओयू पर आगे बातचीत चल रही है। नेतन्याहू ने इसमें भाजी मारने के लिए लेबनान पर युद्ध छेड़ रखा है। नेतन्याहू का तो अब इजरायल के अंदर भी विरोध होना शुरू हो गया है। इसी साल के अंत में इजरायल में आम चुनाव होने हैं जिसमें नेतन्याहू की सरकार जा सकती है। बेंजामिन नेतन्याहू पर पिछले कई वर्षें से रिश्वत खोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगे हैं। इजरायल के इतिहास में नेतन्याहू पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए अदालती कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। फरवरी के अंत में ईरान के साथ संघर्ष चरम पर था और इजरायल-अमेरिका एयर स्ट्राइक के बाद नेतन्याहू ने देश में इमरजेंसी लगा दी थी। इस दौरान सुरक्षा कारणों से अदालती कार्यवाही को भी टाल दिया गया था और यह अब भी टाली जा रही है। जब तक इजरायल किसी से लड़ाई बंद नहीं करता। नेतन्याहू इसी बहाने अदालती कार्यवाही टालते रहेंगे। जैसे मैंने कहा कि दिलचस्प बात यह भी है कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इजरायली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से नेतन्याहू को माफी देने की वकालत की थी। हर्जोग ने स्पष्ट किया कि इजरायल एक कानून से चलने वाला संप्रभु राष्ट्र है और वह बिना किसी बाहरी दबाव के अपने न्यायिक फैसले खुद लेगा।
-अनिल नरेन्द्र