Saturday, 21 March 2026

नेतन्याहू की साजिशों का नतीजा

 
अगर ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध फैलता जा रहा है तो इसकी सबसे बड़ी वजह नेतन्याहू की साजिशें हैं। यह सारी करी कराई नेतन्याहू की है। 28 फरवरी को सबसे पहला काम नेतन्याहू ने यह किया कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और सर्वोच्च सैन्य कमांडरों, गुप्तचर प्रमुख इत्यादि को शहीद कर दिया। नेतन्याहू यही नहीं रूके। उन्होंने अगला निशाना बनाया ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी को मार डाला। यह इसलिए भी किया गया ताकि उस नेता को रास्ते से हटा दिया जाए जो एक उदारवादी, लायक और बीच-बचाव करके इस युद्ध को किसी तरह से रोकने में मदद कर सकता था और यही नेतन्याहू नहीं चाहते थे। लारिजानी ईरान के नंबर 2 नेता थे। यह ट्रांजिशनल काउंसिल के जरिए देश चला रहे थे। ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार सर्वोच्च नेता की मृत्यु या अक्षमता की स्थिति में एक परिषद देश चलाती है। लेकिन लारिजानी इन सबसे ऊपर थे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानि सेना भी उनके आदेश मानती थी। संसद के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नीति सलाहकार के तौर पर अली लारिजानी को ट्रंप प्रशासन के साथ परमाणु वार्ता की रणनीति पर दिवंगत अयातुल्लाह खामेनेई को सलाह देने के लिए नियुक्त किया गया था। अली लारिजानी की हत्या के साथ-साथ नेतन्याहू ने जनरल गुलाम रजा सुलेमानी को भी मार डाला। रिवोल्यूशनरी गार्ड की वसीज सेना के वे प्रमुख थे। दरअसल नेतन्याहू ने सोचा था कि अगर वह ईरान की टॉप लीडरशिप को खत्म कर देंगे तो युद्ध जीतने में आसानी हो जाएगी, ईरान बिखर जाएगा। पर हुआ इसका उलटा। ईरानी आवाम हमदर्दी में सड़कों पर उतर आई। जो अयातुल्लाह निजाम से नाराज भी था वह भी निजाम के समर्थन में उतर गया। नेतन्याहू को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि ईरान का टॉप नेतृत्व अगर खत्म हो जाएगा तो इतनी जल्दी उसका विकल्प सामने आकर मोर्चा संभाल लेगा। जब इजरायल ने देखा कि यह तो मामला उलटा हो गया तो उसने नई साजिश रची। इस बीच यह संकेत भी आने लगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति घरेलू दबाव के कारण इस युद्ध से हटने की तैयारी कर रहा है तो नेतन्याहू परेशान हो गए। याद रहे कि पिछले साल जब 12 दिनों तक युद्ध हुआ था तो सबसे पहले इजरायल ने ही हमला किया था। बाद में उसने अमेरिका को जबरदस्ती इस युद्ध में शामिल होने पर मजबूर किया था। जब बाजी हाथ से निकलते देख नेतन्याहू ने एक नई और निहायत खतरनाक चाल चली। उसने बिना अमेरिका से पूछे ईरान के सबसे बड़े ऊर्जा प्रतिष्ठानों में से एक बुराहट स्थित असलुयेह गैस प्लांट (साउथ पार्स) पर हमला कर दिया। इस कार्रवाई से ईरान का भड़कना स्वाभाविक ही था। उसने खाड़ी में मौजूद तेल और गैस ठिकानों की सैटेलाइट इमेज जारी कर चेतावनी दी कि इन इलाकों को तत्काल खाली करें। इजरायली हमले के जवाब में कतर के रास लफान की एलएनजी गैस फील्ड पर हमला कर दिया। यह कतर की मुख्य एलएनजी प्रोसेसिंग साइट है और देश के ऊर्जा नेटवर्क का अहम केंद्र है। सऊदी अरब ने कहा कि हालांकि उन्होंने कई ईरानी मिसाइलों को नष्ट कर दिया पर उसकी तेल भंडार के स्टारेज पर भी कुछ नुकसान हुआ है। रही सही कसर ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके पूरी कर दी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी माना है कि उन्हें इस हमले (साउथ पार्स गैस फील्ड) के बारे में कुछ पता नहीं था। उन्होंने लिखा इजरायल इस बहुत जरूरी और कीमती साउथ पार्स फील्ड पर कोई और हमला नहीं करेगा। क्या यह बयान ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू को सुनाने के लिए दिया था? इससे साबित होता है कि जंग को आगे बढ़ाने के लिए नेतन्याहू अपनी साजिशों से बाज नहीं आ रहे हैं। 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 19 March 2026

नेतन्याहू अगर जिंदा है तो ढूंढ़कर मारेंगे


ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने कहा है कि अगर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जिंदा है तो वो उनका पीछा करके उन्हें मार डालेंगे। आईआरजीसी ने नेतन्याहू को बच्चों का हत्यारा बताया है। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी इरना ने एक स्पेशल पोस्ट में इसकी जानकारी दी है। वहीं दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा हैö इससे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता कि नेतन्याहू जिंदा है या मर चुके हैं। एक मिनाबी लड़की का बाल का एक भी रेशा, उनके पूरे वजूद से कहीं ज्यादा कीमती है। इस मामले में सवाल यह भी उठता है कि अगर नेतन्याहू जिंदा है तो ऐसा आईआरजीसी ने क्यों कहा है और यह दावा या अफवाह कहां से शुरू हुई है कि बेंजामिन नेतन्याहू जिंदा है या नहीं। हालांकि कई खबरों के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने नेतन्याहू की बात को फेक न्यूज बताया है। वहीं रविवार शाम को नेतन्याहू ने एक्स पर अपना एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें वो कॉफी पीते हुए कैफे के बाहर कुछ महिलाओं से बात करते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान वो एक-एक कर दोनों हाथों को कैमरे के सामने ला रहे हैं और अपनी पांचों उंगलियां गिना रहे हैं। इजरायल और ईरान के बीच जंग की शुरुआत में ही ईरानी अधिकारियों ने बताया था कि दक्षिण ईरान के शहर मिनाब में लड़कियों के एक स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 180 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इनमें 160 के लगभग छोटी-छोटी बच्चियां और उनके टीचर भी मारे गए थे। बता दें कि ईरान के मिनाब में प्राथमिक स्कूल पर भीषण एयरस्ट्राइक को लेकर अमेरिका के भीतर भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। अमेरिका के 40 से अधिक सीनेटरों ने पेंटागन को पत्र लिखकर इस हमले का कड़ा विरोध जताया है। सांसदों ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस सैन्य कार्रवाई की जांच, जवाबदेही और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर स्पष्टीकरण मांगा है। सीनेटरों ने अपने पत्र में विशेष रूप से चिंता जताई है कि मरने वालों में ज्यादातर 7 से 13 साल की मासूम बच्चियां थीं। घटना 28 फरवरी की है, जब अमेरिका ने बहरीन सैन्य बेस से एक टोमाहॉक मिसाइल से मिनाब स्थित लड़कियों के एक स्कूल को निशाना बनाया। ईरान में इस हमले से लोगों में काफी ज्यादा आाढाsश देखा गया और इन लड़कियों के जनाजे में लाखों ईरानी जनता शामिल हुई। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा जियोनिस्ट अपराधी प्रधानमंत्री का अज्ञात और उनकी मौत या कब्जे वाले इलाकों से अपने परिवार के साथ उनके भाग निकलने की पूरी संभावना है। यह एक संकट और जियोनिस्ट की डगमगाती स्थिति को उजागर करती है। आईआरजीसी ने आगे कहा, अगर बच्चों की हत्या करने वाला अपराधी जीवित है तो हम पूरी ताकत से पीछा करके उन्हें मार डालेंगे। यह धमकी इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के उस खंडन के बाद आई है जिसमें नेतन्याहू के मारे जाने की खबरों को गलत बताया गया है। साथ ही उसने यह दावा किया था कि इजरायल ने उनके तथ्यों और क्षेत्र में तीन अमेरिकी बेस को 52वीं बार किए गए हमले में नष्ट कर दिया गया है। 13 मार्च को नेतन्याहू के एक्स अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया गया था जिसमें वो ईरान के हमलों के बारे में जानकारी दे रहे थे। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे एआई जेनरटिड बताया था और दावा किया था कि नेतन्याहू की मौत हो चुकी है। अब देखना यह है कि क्या नेतन्याहू जिंदा है और अगर वह जिंदा है तो क्या ईरानी आईआरजीसी उनकी हत्या करने में कामयाब होती है या नहीं? 
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 17 March 2026

युद्ध के लंबे खिंचने की संभावना

 
ईरान-अमेरिका व इजरायल का युद्ध 28 फरवरी को ईरान पर हमले से शुरू हुआ था। अमेरिका-इजरायल को उम्मीद थी कि यह युद्ध चंद दिन चलेगा और ईरान अपने घुटनों पर आ जाएगा। उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि ईरान इतना जवाबी हमला करेगा और यह युद्ध इतना लम्बा खिंचेगा। ईरान अमेरिका-इजरायल को मुंह तोड़ जवाब दे रहा है। ईरान के नए सुप्रीम अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले संदेश में ही स्पष्ट कर दिया कि ईरान झुकने वाला नहीं है। खामेनेई का पहला संदेश ईरानी टीवी पर प्रसारित करते हुए एंकर ने पढ़कर सुनाया। खामेनेई ने संदेश में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी जारी रखने और मिनाब स्कूल के बच्चों सहित शहीद हुए लोगों के खून का बदला लेने पर जोर दिया। अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ चल रहे युद्ध का पा करते हुए खामेनेई ने लगातार हमले जारी रखने का आ"ान करते हुए आगे कहा कि अन्य मोर्चों को खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने यमन में ईरान के सहयोगियों, लेबनान में हिजबुल्लाह और इराक में रेजिस्टेंस की तारीफ की है। खामेनेई का यह संदेश उनके स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति को लेकर चल रही अटकलों के बीच आया है। उधर अमेरिका ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और उनसे जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में जानकारी देने पर बड़ा इनाम घोषित किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के रिकार्ड्स फॉर जस्टिस के तहत इन लोगों के बारे में ठोस जानकारी देने वालों को अधिकतम एक करोड़ डॉलर तक का ईनाम दिया जा सकता है। यह कदम ईरान की सैन्य और सुरक्षा संरचना से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेताओं को मारना सम्मान की बात है। उन्होंने पावार को कहा, हम ईरान के आतंकवादी शासन को सैन्य, आर्थिक और अन्य रूप से पूरी तरह नष्ट कर रहे हैं। वे 47 वर्षों से निर्दोषों को मार रहे हैं और अब मैं उन्हें मार रहा हूं। ऐसा करना सम्मान की बात है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने उधर दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग आइलैंड पर बड़े हमले किए और सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि यह अमेरिका-इजरायल का ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के इस रणनीतिक द्वीप पर बड़े हवाई हमले में सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब बुरी तरह कमजोर हो चुका है और समझौता चाहता है, लेकिन ऐसा समझौता नहीं होगा जिसे वह स्वीकार करे। साथ ही ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश हुई तो अमेरिका तेल ढांचे पर हमला करने का फैसला भी बदल सकता है। अफवाहें तो यह भी है कि ट्रंप अब अमेरिकी थल सेना को भी ईरान में उतारने का प्रयास कर रहे हैं। बता दें कि खार्ग आइलैंड से ईंधन का बहुत बड़ा हिस्सा दूसरे देशों पर थोपा जाता है। अमेरिका अपनी मरीन कार्प के जरिए खार्ग आइलैंड पर जबरन कब्जा करने की योजना बना रहा है। खबर तो यह भी है कि इसकी पूर्ति के लिए अमेरिका ने 2500 मरीन ईरान की तरफ रवाना भी कर दिए हैं। उधर ईरान ने भी अपने हमले तेज कर दिए हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं और इजरायल ने भी जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की है। इजरायली विमानों ने लेबनान में भारी तबाही मचाई है। इस बढ़ती जंग से वैश्विक तेल बाजार को भी लेकर चिंता बढ़ गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भले तेल सुविधाओं को सीधा निशाना नहीं बनाया गया हो, लेकिन सैन्य हमलों का असर निर्यात व्यवस्था पर पड़ सकता है। युद्ध लंबा खिंचने की आशंका ने खाड़ी क्षेत्रों में तो बेचैनी बढ़ाई ही है साथ ही पूरे विश्व में इसको लेकर टेशनें बढ़ा दी हैं। 
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 14 March 2026

नेतन्याहू ने बुरा फंसाया ट्रंप को


ईरान युद्ध के बाद दुनियाभर में एक्सपर्ट अब ये बात कहने लगे हैं कि असल में इजरायल ने अपने हितों के लिए अमेरिका को बुरी तरह फंसा दिया है यानि कि नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप को ऐसा फंसाया है कि अब उन्हें पीछे हटने का बहाना नहीं मिल रहा है। न केवल अमेरिका को ही फंसाया है बल्कि गल्फ के अन्य अरब देशों को भी फंसा दिया है। इससे धीरे-धीरे खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देश भी उससे नाराज हो रहे हैं। अमेरिका में हुए हालिया पोल्स कह रहे हैं कि अमेरिकी जनता इस ईरान युद्ध को अनावश्यक मान रही है, जो अमेरिका पर बुरी तरह आर्थिक बोझ को बढ़ाएगी। अमेरिका और इजरायल द्वारा मिलकर ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को लेकर कई विश्लेषक सामने आ रहे हैं। युद्ध अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इजरायल ने अमेरिका को ऐसा फंसाया है कि ट्रंप को समझ नहीं आ रहा है कि आगे क्या करें? विश्लेषक कह रहे हैं कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी हितों की बजाए इजरायल के विशेष उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अमेरिका को युद्ध में खींच लिया। कई विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्पाम को खतरे के रूप में पेश कर ट्रंप को युद्ध में उलझा दिया है। वास्तव में इजरायल के हित कहीं और हैं वे इस युद्ध के जरिए सबको भटकाना चाहता है। वास्तव में इजरायल का इस हमले के जरिए मुख्य उद्देश्य ईरान के साथ अमेरिकी कूटनीति को बाधित करना और गाजा में इजरायली कार्रवाइयों से वैश्विक ध्यान भटकाना था। नेतन्याहू का एक मकसद यह भी है कि उन पर चल रहे भ्रष्टाचार के केसों से इजरायली जनता का ध्यान भटकाना। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप डोनाल्ड को इजारयल की कार्रवाई में ाsढडिट लेने की चाहत ने फंसाया है। शुरू में तटस्थ रहने वाले ट्रंप ईरान पर हमले से बचते रहे पर नेतन्याहू के पास पता नहीं ट्रंप की कौन सी गुप्त कुंजी है कि न चाहते हुए भी ट्रंप ने ईरान युद्ध छेड़ दिया। मजबूरी में ट्रंप अब दावे कर रहे हैं कि हम ईरान के आकाश पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं। ऐसे दावे कर रहे हैं, जो इजरायल की आाढामकता को बढ़ावा दे रहा है। वह जबरदस्ती अमेरिका को एक लंबे अभियान में धकेल रहा है। जो अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाएगा। दरअसल अमेरिका ईरान का सही आकलन नहीं कर पाया। इजरायल और अमेरिका ने सोचा था कि ईरान जल्दी टूट जाएगा, लेकिन ईरानी मिसाइलों के हमलों और प्राक्सी समूहों की सािढयता ने संघर्ष को क्षेत्रीय बना दिया। सुप्रीम लीडर और ईरान के रहबर अयातुल्लाह खामेनेई की हत्या जैसे कदमों न सिर्फ दुनिया के शिया मुसलमानों को एक किया बल्कि तमाम सुन्नी भी अमेरिका-इजरायल के खिलाफ हो गए। अमेरिकी ठिकानों पर पूरे मध्य एशिया अरब मुल्को पर ईरान ताबड़तोड़ हमले कर रहा है। अमेरिका के 17 सैनिक अड्डों को तबाह कर दिया है और इजरायल का तो यह हाल है कि वहां के अखबार जेरुस्लम पोस्ट ने स्वीकार किया है कि 11 दिन की लड़ाई में इजरायल पर 9,115 मिसाइल, राकेट हमले हुए हैं और वहां की इंशोरेंस कंपनियों पर जो मुआवजे के दावे हुए हैं उनमें बताया गया है कि ईरानी-हिजबुल्लाह हमलों में 6,586 इमारतें तबाह हुई हैं। अब आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि एक इमारत में कितने लोग रहते होंगे जो या तो मारे गए या फिर घायल हुए। इजरायल में 1485 कारों को नष्ट कर दिया गया है, 1044 इक्विपमेंट तबाह हो चुके हैं। बता दें कि इजरायल में नुकसान की खबरों पर सेंसर लगा हुआ है। इसलिए सही से पता नहीं चल रहा है कि असल में कितना नुकसान हुआ है। यह तो जेरुस्लम पोस्ट के बीमा दावों का हवाला है। ट्रंप अब बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे हैं। 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 12 March 2026

खामेनेई कभी मरते नहीं हैं


ईरान ने अपना सुप्रीम लीडर चुन लिया है। अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर चुने गए हैं। दुनिया के स्वयंभू बादशाह सलामत डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अयातुल्लाह अली खामेनेई की शहादत के बाद ईरान का अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा यह मैं चुनूंगा। ईरान ने ट्रंप को मुंहतोड़ जवाब दिया है और साफ बता दिया है कि ईरान ट्रंप-नेतन्याहू के सामने झुकने वाला नहीं है। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स 88 सदस्यीय धार्मिक संस्था है जिसकी जिम्मेदारी सुप्रीम लीडर को चुनने की है। संस्था द्वारा जारी एक बयान को ईरानी टीवी पर एंकर ने पढ़कर सुनाया। बयान में कहा गया कि युद्ध में बेहद गंभीर हालात और हमारी संस्था के खिलाफ दुश्मनों की सीधी धमकियों के बावजूद और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सचिवालय के दफ्तरों पर बमबारी से उसके कई कर्मचारियों और सुरक्षा टीम के सदस्यों के शहीद हो जाने के बावजूद ईरानी व्यवस्था के नेतृत्व के चयन और उसकी घोषणा की प्रािढया एक पल के लिए भी नहीं रूकी। इसके बाद एंकर ने नारा लगाया-अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर खामेनेई ही रहबर। अमेरिकी-इजरायल के हवाई हमलों में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद कई लोगों को आशंका थी कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई भी मारे गए हैं। कई दिनों तक मोजतबा के बारे में कोई खबर नहीं आई। लेकिन तीन मार्च को ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि मोजतबा जिंदा हैं और उन्हें ईरान का सर्वोच्च नेता चुन लिया गया है। बता दें कि मोजतबा खामेनेई ने तो कभी कोई सार्वजनिक भाषण दिया ही नहीं, न कोई सरकारी पद संभाला, न कोई साक्षात्कार दिया और उनकी बहुत कम तस्वीरें और वीडियो प्रकाशित हुए हैं। अमेरिकी राजनयिक दस्तावेजों में उन्हें पर्दे के पीछे असली ताकत बताया गया था। उनको शासन के भीतर एक सक्षम और दृढ़ नेता माना जाता है। 8 सितम्बर 1969 को ईरान के उत्तर पूर्वी शहर माशहद में जन्मे मोजतबा इमाम अली खामेनेई के 6 बच्चों में दूसरे स्थान पर हैं। मीडिया के मुताबिक 17 साल की उम्र में मोजतबा ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान सेना में सेवा दी थी। मदरसों की व्यवस्था में अयातुल्लाह के पदवी का होना और धार्मिक कक्षाओं को पढ़ाना किसी व्यक्ति की विद्वत क्षमता और ज्ञान का प्रमाण माना जाता है। ये भविष्य में नेता चुने जाने की आवश्यक शर्तों में से एक है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक जैसे ही नाम की घोषणा हुई, ईरान की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और राजनीतिक नेताओं ने तुरन्त मोजतबा खामेनेई के प्रति निष्ठा की शपथ ली। आईआरजीसी ने बयान जारी करते हुए कहा हम नए नेता आयतुल्लाह सैय्यद मोजतबा खामेनेई के हुक्म का पालन करने और खुद को कुर्बान करने के लिए तैयार हैं। सेना के शीर्ष नेतृत्व ने भी अपनी पूरी वफादारी का वादा किया है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई के सबसे शक्तिशाली पद संभालते ही ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों से हमला किया। मानों यह संकेत था कि अयातुल्लाह अली खामेनेई की शहादत से भी उसकी रणनीति में कोई बदलाव नहीं आया बल्कि यूं कहें कि ईरान अब और शक्ति से हमला करेगा। यह इससे साबित होता है कि अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में इस युद्ध में जबरदस्त नई मिसाइलों से हमला किया। देखना यह है कि क्या अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई अपने पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई के उस फतवे को बदलेंगे जिसमें कहा गया था कि ईरान कोई परमाणु हथियार नहीं बनाएगा? 
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 10 March 2026

ईरान पर हमले की कीमत?

 
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ तो नेतन्याहू के उकसावे पर युद्ध तो शुरू कर दिया पर उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह लड़ाई लम्बी और महंगी पड़ सकती है। जो संघर्ष चार दिन में खत्म होने की भविष्यवाणी की जा रही थी वह आज दसवें दिन भी खत्म होना तो दूर की बात वह बढ़ती जा रही है। अमेरिका को सैनिकों की मौत और आर्थिक मार मार झेलनी पड़ रही है जिसका उसने कभी अनुमान भी नहीं लगाया होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने अब संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की यह लड़ाई 4-5 हफ्ते तक चल सकती है। वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक सीएसआईएस और ािढस पार्क द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत जंग के पहले 100 घंटों में अमेरिका को लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 31,000 करोड़ रुपए) खर्च उठाना प़ड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के शुरूआती 100 घंटों में अमेरिका का औसत खर्च लगभग 891 मिलियन डॉलर प्रतिदिन यानि करीब 90 करोड़ डॉलर रोज रहा है। शुरुआती चरण में सबसे अधिक खर्च महंगी मिसाइलों, हथियारों और बमों के इस्तेमाल पर हुआ है, इसलिए शुरुआती दिनों में लागत सबसे अधिक है। थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.7 अरब डॉलर पैट्रियट जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर सिस्टम पर खर्च किए गए हैं जबकि 1.5 अरब डॉलर मिसाइलों और अन्य आाढामक हथियारों पर किए गए हैं। इसके अलावा 125 मिलियन डॉलर लड़ाकू विमानों और हवाई अभियानों के परिचालन पर खर्च किए गए हैं। सीएसआईएस के मुताबिक खर्च में से केवल लगभग 200 बिलियन डॉलर ही पहले से अमेरिकी रक्षा बजट में शामिल था जबकि करीब 3.5 अरब डालर का खर्च अतिरिक्त है, जिसके लिए अलग से फंड की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को जल्द ही युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त बजट की मांग करनी पड़ सकती है। इसके अलावा कतर, जार्डन, यूएई में जो एयर डिफेंस के रडार व अन्य यंत्र जो तबाह हुए हैं जिनकी कीमत अरबों डॉलर रही है का तो हिसाब ही नहीं है। रिपोर्ट का अनुमान है कि युद्ध के पहले 100 घंटों में अमेरिका के 2000 से अधिक प्रकार के हथियार और मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। इन हथियारों के स्टाक को दो बार भरने में लगभग 3.1 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं। थिंक टैंक ने अपने आंकलन में कहा है कि युद्ध का मानवीय नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में ही लगभग 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 180 छोटी बच्चियां भी शामिल हैं जिनके स्कूल पर अमेरिका ने बहरीन से बम मारा। अमेरिका के कितने सैनिक मरे हैं यह संख्या भी बहुत हो सकती है। अमेरिका ने फिलहाल 6-7 सैनिकों के मरने की पुष्टि की है। पर ईरानी दावा कर रहे हैं कि यह संख्या सैंकड़ों में है। खर्च के अलावा, कुवैत में फ्रेंडली फायर की घटना में तीन अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान गिर गए। बता दें कि एक एफ-15 अत्याधुनिक फाइटर जेट की कीमत लगभग 800 करोड़ रुपए है। ईरान पर हमला करते वक्त अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप ने शायद यह सोचा भी नहीं होगा कि यह जंग उसे कितनी महंगी पड़ेगी। लड़ाई लंबी खिंचने और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने ट्रंप की नींद उड़ा रखी है। आए दिन वह धमकियों पर उतर आए हैं। ट्रंप फंस तो गए हैं पर बाहर कैसे निकलें ये उन्हें समझ नहीं आ रहा है। खर्च के अलावा अंदरूनी राजनीतिक दबाव, एपस्टीन फाइल, सहयोगी अरब मुल्कों का दबाव यह सब अमेरिका और ट्रंप पर भारी पड़ रहा है। हताश होकर ट्रंप कोई ऐसा कदम न उठा लें जिससे पूरी दुनिया सकते में आ जाए? 
-अनिल नरेन्द्र

Friday, 6 March 2026

जंग तुम शुरू करोगे खत्म हम करेंगे


यह चेतावनी दी थी अयातुल्लाह अली खामेनेई ने शहीद होने से पहले। उन्होंने एक बार नहीं बार-बार यह चेतावनी दी और साथ ही कहा था कि अगर अमेरिका-इसरायल ईरान पर हमला करते हैं तो हम मुंह तोड़ जवाब देंगे। ऐसा जवाब देंगे जिसकी अमेरिका ने कभी कल्पना भी नहीं की हो। इतना ही नहीं अयातुल्लाह खामेनेई ने भी चेताया था कि अगर ईरान पर हमला होगा तो जवाबी कार्रवाई पूरे मध्य एशिया के देशों पर अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी होगी और यह क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि हम 4 दिन में ईरान को घुटनों पर ला देंगे और नई सत्ता स्थापित कर देंगे। अब जंग के 7-8 दिन बाद वहीं ट्रंप अब यह कह रहे हैं कि यह जंग चार-पांच सप्ताह खिच सकती है। दरअसल अमेरिका फंस गया है। तालिबान अगर 20 साल बाद भी लड़ाई के बाद जिंदा रहा तो उसके पीछे उसकी रणनीति और अफगानिस्तान के भौगोलिक हालात थे। ईरान भी अमेरिका के लिए ऐसी ही चुनौती पेश करने वाला है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में अपनी सेना भेजने से इंकार नहीं किया है। लेकिन यकीन मानिए अगर अमेरिकी सैनिक ईरान पहुंचते हैं तो वियतनाम और अफगानिस्तान की तरह उसे जलील होकर भागना पड़ सकता है। दशकों से खाड़ी देशों को अमेरिकी सुरक्षा को लेकर भ्रम बना हुआ था। लेकिन आसमान से बरसती ईरानी मिसाइलों ने उस भरोसे को तोड़ दिया है। ईरान ने खाड़ी के देशों यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन में जमकर मिसाइले मारी हैं और अमेरिकी टारगेट्स को नष्ट किया है। ईरानी हमलों का मकसद और संदेश साफ था कि जो देश अमेरिकी सेना को हमले के लिए अपनी जमीन दे रहे हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराधची ने कहा है कि तेहरान ने इस इलाके में दुश्मनों के मिलिट्री बेस पर हमला करके शुरुआत की है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध अगले 4-5 हफ्तों तक और चल सकता है। जिससे मध्य-पूर्व में और तबाही फैलने की आशंका बढ़ गई है। अयातुल्लाह खामेनेई की हत्या के बाद मध्य-पूर्व के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकाने पर ताबड़तोड़ ईरानी हमले हो रहे हैं। इनमें सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास, कतर के अल उदीद एयरबेस, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और दुबई के कई होटलों और महत्वपूर्ण सैन्य इमारतों पर हमले यह दर्शाते हैं कि अब जंग पूरे मध्य-पूर्व में फैल चुकी है। अमेरिकी-सऊदी के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए ईरान ने वहां की सबसे बड़ी अरामको रिफाइनरी पर बम बरसाए। ये हमले इतने खतरनाक है कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने दूतावासों को बंद कर दिया है। इसके अलावा अमेरिका ने इजरायल से अपने नागरिकों को निकालने को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। अमेरिका और इजरायल ने पहले ही हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई को मार दिया था और ट्रंप को उम्मीद थी कि सिर काटने से सिस्टम गिर जाएगा लेकिन हुआ उल्टा। सड़कों पर बगावत नहीं, खामेनेई के लिए लाखों मातम करते दिखे। सड़कों पर बगावत नहीं, उल्टा सरकार का बढ़ता समर्थन दिखा और इंतकाम लेने के इरादे दिखे। सत्ता ढही नहीं, बल्कि ईरान ने पूरे मध्य-पूर्व को हिला दिया। अब ट्रंप भी समझ गए हैं कि जंग लम्बी चलेगी। कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि इस जंग की तैयारी ईरान पिछले 40 सालों से कर रहा था और वह लम्बी लड़ाई लड़ने की क्षमता रखता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सैनिकों के बॉडी बैग अमेरिका पहुंचने शुरू हो चुके हैं। देखना यह होगा कि अब यह जंग क्या रूप अख्तियार करती है? संकेत साफ हैं कि यह आग और फैलने वाली है और विनाशकारी होगी। 
-अनिल नरेन्द्र