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Saturday, 5 September 2026

पुतिन से युद्ध खत्म करने की अपील

युद्ध मानव सभ्यता की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है और आज एक नहीं कई युद्ध चल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि युद्ध से समस्याओं का हल तो दूर उल्टा युद्ध नई जटिलताओं को जन्म देता है। युद्ध के लक्षण जान-माल की भारी क्षति, आर्थिक बर्बादी, विस्थापन और सामाजिक अस्थिरता के रूप में सामने आते हैं। रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष इसके उदाहरण हैं। भारत हमेशा वैश्विक शांति का समर्थक रहा है और युद्ध के स्थान पर महात्मा बुद्ध, महात्मा गांधी के शांति मार्ग पर चलने का संदेश देता रहा है। इसी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के मौके पर रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतहीन युद्ध के बजाए इसके अंत की ओर बढ़ने की वकालत की। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को खत्म करने की अपील की। पीएम मोदी ने सोमवार को कहा, युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है और शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम मानवता को नई आशा और उत्साह से भर देता है। यूक्रेन में युद्ध खत्म करने पर पीएम मोदी की टिप्पणियां हैरान करने वाली नहीं है और ये भारत की विदेश नीति में किसी भी किस्म के सामरिक बदलाव का संकेत नहीं देती है। दरअसल, संघर्ष शुरू होने के बाद साल 2022 में एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान बोलते हुए, मोदी ने पुतिन से सार्वजनिक रूप से कहा था कि यह युद्ध का समय नहीं है। लेकिन यह कहना बहुत आसान होगा कि युद्ध पर मोदी के अभी या पहले के बयानों को पुतिन या रूस स्ट्रैटजी को जवाब देने के तौर पर देख जा सकता है। पश्चिमी देशों ने मोदी पर स्पष्ट रुख अपनाने के लिए काफी दबाव डाला है लेकिन भारत काफी हद तक तटस्थ रहा है। भारत ने इसके बजाए युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत का आग्रह किया है। बेशक इस रुख से कई पश्चिमी देश खुश नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भारत को लुभाना जारी रखा है क्योंकि भारत इतनी बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह पहली बार नहीं है जब किसी विदेशी नेता ने सार्वजनिक रूप से पुतिन से यूक्रेन से युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया हो। महज पांच हफ्ते पहले कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कसीम-जोमार्ट टोकायेव ने पुतिन को सुझाव दिया था कि वे संघर्ष को रोक दें और बातचीत की मेज पर लौट आएं। शांति के लिए इन सार्वजनिक अपीलों से पुतिन की रणनीति में कोई बदलाव आने के संकेत नजर नहीं आते। मोदी द्वारा युद्ध विराम के आ"ान पर क्रेमलिन नेता ने जवाब दिया बहुत-बहुत धन्यवाद प्रधानमंत्री जी। हम इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। विनम्र, लेकिन मान्यवर और कोई स्पष्ट जवाब नहीं। आखिरकार एक रास्ता छोटा भी हो सकता है, लेकिन यह लंबा भी हो सकता है। सारे सुबूत बताते हैं कि रूस की लीडरशिप को अब भी यकीन है कि वह युद्ध में यूक्रेन से मिलिट्री जीत की राह पर है। इसे शांति के मामले में कहें तो रूस की शर्तें पर मिलिट्री सफलता से तय शांति की ओर आगे बढ़ना। इसलिए, फिलहाल लड़ाई जारी है। इस तथ्य के बावजूद कि साढ़े चार साल से अधिक के युद्ध और भारी सैन्य नुकसान के बाद भी व्रेमलिन को अभी तक जीत हासिल नहीं हुई है और यूक्रेन ने युद्ध को रूसियों के घर तक वापस लाने में सफलता हासिल की है। 

-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 3 September 2026

त्रासदी के पीछे चीन जिम्मेदार

नेपाल में फ्लैश फ्लड में मरने वालों की संख्या 1000 से ज्यादा हो गई है, 4000 से ज्यादा लापता हैं, जिसमें 287 भारतीय भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक नेपाल की सेना ने अब तक 12000 लोगों को सुरक्षित बचाया है। लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल में चीन के रवैये को लेकर भारी असंतोष है और सवाल उठने लगे हैं। बुधवार को तिब्बत में बनी बैरियर लेक टूटने के बाद चीन ने नेपाल से सूचना साझा करने में लापरवाही बरती, जिससे नेपाली नागरिकों में आक्रोश फैल गया है। तिब्बत में 20 लाख घन पानी जमा हो गया था, लेकिन अलर्ट तब भेजा गया, जब झील टूट चुकी थी। रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेन्द्र परियार ने बताया कि उन्हें झील टूटने की जानकारी नेपाली सेना के माध्यम से मिली। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने कोई सूचना साझा नहीं की। झील भरने के बाद ओवर फ्लो शुरू हुआ और शाम को चीन ने तिब्बत में बचाव अभियान शुरू किया। बुधवार सुबह 8.40 बजे भोटेकोशी नदी में जल स्तर का आंकड़ा भेजा गया। इसी बीच तिब्बत से आया तेज बहाव नेपाल में प्रवेश कर गया। नेपाल को इसकी जानकारी 16 मिनट बाद जब मिली जब सैलाब तबाही मचाने लगा। आरोप लगाए जा रहे हैं कि चीन की ओर से नेपाल में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता था। हालांकि नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों का खंडन किया है। इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी चीन की भूमिका को लेकर चर्चा हो रही है। नेपाली न्यूज आउटलेट्स से लेकर चीनी मीडिया ने इस मुद्दे को रिपोर्ट किया है। नेपाली अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मई में ही चीन से ग्लेशियर, पानी के स्तर और अन्य संभावित खतरों की जानकारी समय रहते साझा करने का आग्रह किया था। उनका मानना है कि सीमा पार से मिलने वाली नियमित चेतावनी कई जानें बचाने में मदद कर सकती थी। इस साल 27 मई को काठमांडू में नेपाल और चीन के पर्यावरण विशेषज्ञों की बैठक हुई थी। बैठक में ग्लेशियर झीलों की सूची तैयार करने और पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। हालांकि, नेपाली अधिकारियों के मुताबिक बैठक के बाद उन्हें चीन से अपेक्षित स्तर पर ग्लेशियर और जल स्तर संबंधी जानकारी नहीं मिल सकी। चीनी विश्व मौसम विज्ञान केन्द्र ने आपदा से पहले नेपाली अधिकारियों को ई-मेल से 14 और 19 अगस्त के बीच भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका जताई थी। लेकिन नेपाली अधिकारियों का कहना है कि ऐसी चेतावनियां ग्लेशियर टूटने जैसी संकेत नहीं देती। नेपाल के लोगों का कहना है कि मौत का ये सैलाब चीन से आया। वहां ग्लेशियर फटा, वो हिस्सा नेपाल से 50 किलोमीटर दूर है। बाढ़ के पानी को नेपाल तक पहुंचने में 30 से 40 मिनट लगे। अगर चीन ने ये सूचना समय रहते नेपाल को दी होती तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी। लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जाने के लिए आधा घंटा काफी था, लेकिन चीन ने ये सूचना शेयर नहीं की। पानी के बहाव का परिणाम और पानी के साथ आया मलबा इतना भयानक था कि रास्ते में जो कुछ आया जैसे इमारतें, पुल, सड़कें सब कुछ बहाकर ले गया। लेकिन खतरा अभी भी टला नहीं। अगर चीन का डैम टूटा तो वहां से दूसरा फ्लैश फ्लड आ सकता है। चीन से भेजी गई इस तबाही को नेपाली कभी भूलेंगे नहीं। 

-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 1 September 2026

कॉकरोच पीछे नहीं हटेंगे

 
सरकार की ओर से 25 जुलाई को किए गए वादों पर कार्रवाई नहीं होने पर कॉकरोच जनता पाटी ने घोषणा की है कि वह अब पीछे नहीं हटंगे। नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब कॉकरोच जनता पाटी (सीजेपी) ने एक बार फिर सड़कों पर उतरने की घोषण की है। सीजेपी ने बताया कि वो 5 सितम्बर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस हैडक्वार्टर तक शांतिपूर्ण युवा मार्च करेगी। सीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बयान जारी कर केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने के अपने वादे को पूरा नहीं किया। 25 जुलाई को धर्मेन्द्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के साथ ही केंद्र सरकर ने सीजेपी को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने समेत कई मांगों पर सहमति दी थी। 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी जिसमें कई प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठियां बरसाई थीं और दावा तो यह भी किया जा रहा है कि पैलेट गन तक का इस्तेमाल हुआ था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है जहां पर केन्द्र ने माना है कि गैर आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लिया जा सकता है। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि सरकार 25 जुलाई को किए गए वादों पर काम करने में नाकाम रही है। 25 जुलाई को सरकार ने सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से जो वादे किए थे उनमें एक वादा यह भी था कि इस आंदोलन से जुड़े मृत लोगों के परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा भी दिया जाएगा। कोई मुआवजा नहीं दिया गया। वहीं सीजेपी ने एक्स पर लिखा कि कॉकरोच जनता पाटी केन्द्र सरकार को 25 जुलाई को भारत के युवाओं से किए गए वादों को पूरा न करने की कड़ी निंदा करती है, खासकर स्टूडेंट्स और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने से जुड़े वादों को 15 सितम्बर का प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होगा, नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इसमें नीट से जुड़े मृत छात्रों के परिवार, पुलिस कार्रवाई के पीड़ित, छात्र और युवा संगठन शामिल होंगे। संगठन ने कहा है कि प्रदर्शन का उद्देश्य किसी तरह का हिंसक टकराव नहीं, बल्कि सरकार से अपने वादे पूरे करने की मांग करना है। सीजेपी ने युवाओं और छात्र संगठनों से 5 सितम्बर को इंडिया गेट पहुंचने और शांतिपूर्ण तरीके से मार्च में शामिल होने की अपील की है। सीजेपी ने कहा कि युवाओंं के भरोसे को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। सीजेपी के मुताबिक एक पूरी पीढ़ी ने सरकार की बात पर भरोसा करके आंदोलन वापस लिया था और अब वह अपने वादों को पूरा करने की मांग कर रही है। संगठन का कहना है कि परिवारों और युवाओं की मौजूदगी इस आंदोलन को अपनी मांगों के प्रति गंभीर बनाएगी। सीजेपी ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, वे मार्च की अगली कतार में होंगे और पुलिस कार्रवाई के पीड़ित उनके साथ चलेंगे। संगठन ने युवाओं से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील करते हुए सरकार से 25 जुलाई के आश्वासनों को पूरी तरह लागू करने की मांग की है। उम्मीद की जाती है कि यह प्रदर्शन शांति से गुजर जाए और 20 जुलाई की पुनर्वृत्ति न हो। 
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 29 August 2026

मोहन भागवत का विरोध

 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका में दौरा कर रहे हैं। 29 अगस्त को श्री भागवत ने न्यूयार्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डन में एक विशाल जनसभा को संबोधित करना है। मोहन भागवत का जहां जमकर स्वागत हो रहा है वहीं कुछ विरोध के स्वर भी दिखाई दे रहे हैं। न्यूयार्क की सड़कों पर उनकी यात्रा के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं, लोग सड़कों पर पोस्टर, बैनर इत्यादि लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सबसे प्रमुख विरोध करने वालों में न्यूयार्क के मेयर जोहरान ममदानी हैं। उन्होंने कहा कि वह इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते, हालांकि ममदानी ने यह भी कहा कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार नगर प्रशासन के पास है या नहीं, यह उन्हें नहीं पता। भागवत आरएसएस के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत अमेरिका पहुंचे हैं। मेडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका एक बड़ा कार्यक्रम होना है। न्यूयार्क प्रवास के दौरान मोहन भागवत यूनिवर्सल वननेस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और शनिवार को प्रतिष्ठित मेडिसन स्क्वायर गार्डन में करीब 5000 लोगों की सभा को संबोधित करेंगे। जोहरान ममदानी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, मैं हमारे शहर के इतिहास में पहला भारतीय-अमेरिकी मेयर भी हूं और मेरी मां का पूरा परिवार अब भी भारत में रहता है। उन्होंने कहा कि भारत के बारे में जो सोच उन्हें अपने परिवार से मिली और जिसे संभालते हुए वह बड़े हुए, वह एक बहुलतावादी समाज और ऐसे धर्मनिरपेक्ष गणराज्य की है, जहां भारत के हर व्यक्ति को बराबरी से अपनाया जाता है। ममदानी ने कहा और किसी भी देश को लेकर ऐसी सोच वाले आंदोलन का उभार देखना बेहद परेशान करने वाला है, जो कुछ लोगों को अलग रखता है। मैं इसका पुरजोर विराध करता हूं, न केवल एक भारतीय-अमेरिकी के रूप में बल्कि ऐसे शहर के मेयर के तौर पर भी, जो हर व्यक्ति को अपनाने में गहरा विश्वास रखता है। फिर चाहे उसका रंग, नस्ल, धर्म, आस्था या मूल स्थान कुछ भी हो। अमेरिका में भागवत के कार्यक्रम यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन की मेजबानी कर रहा अहेड फोरम ने इंटरनेट मीडिया पोस्ट में कहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत की यात्रा एक कालातीत और सार्वभौमिक संदेश लेकर आती है। दुनिया एक परिवार है। संघ के संयुक्त महासचिव श्री मुकुंद जी ने कहा कि भागवत की विदेश यात्रा का उद्देश्य-भारत हिंदू समाज और संघ पर सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। वहीं भाजपा ने कहा कि ममदानी का रुख उनके बहुलवाद के विपरीत है। अमेरिकी गायिका मैरी मिलीबेन ने कहा, मेरी सलाह ममदानी व उनके समाजवाद के समूह को है, पूंजीवाद बन पैसे जुटाएं मेडिसन ग्राउंड किराए पर लें और अपनी एंटी-मोदी मूर्खता के लिए अपनी खुद की रैली आयोजित करें। मिलीबेन ने आगे कहा-ममदानी और ये समाजवादी पागल मोहन भागवत के मेडिसन स्क्वायर गार्डन कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं जो कि वे पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी का विरोध करते हैं। देखें सरसंघचालक की अमेरिकी यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती है उन्हें कैसा रिस्पांस मिलता है। 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 27 August 2026

नृपेंद्र मिश्र बनाम चंपत राय


श्री राम जन्म भूमि ट्रस्ट में चढ़ावा को लेकर की गई चोरी के विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफे के बाद चंपत राय का एक 9 पन्नों का दूसरा पत्र सामने आया है। इसमें उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की भूमिका को लेकर कई दावे किए हैं। चंपत राय ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े कई फैसले समिति की बैठक में लिए जाते थे लेकिन बाद में उनमें बदलाव कर नृपेंद्र मिश्र के फैसलों को प्राथमिकता दी जाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में समिति के दूसरे सदस्यों के सुझाव और फैसलों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। चंपत राय ने अपने पत्र में बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए गठित ट्रस्ट में कुल 15 ट्रस्टी थे और नृपेंद्र मिश्र को निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। उनके अनुसार नृपेंद्र मिश्र के ही सुझाव पर लार्सन एंड टूब्रो को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। मंदिर और अन्य भवनों के डिजाइन से जुड़े काम के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म का चयन किया गया। चंपत राय ने नृपेंद्र मिश्र पर सीधा आरोप लगाया कि निर्माण समिति में उन्होंने अपने लोगों को ही शामिल किया। उन्होंने दावा किया कि इनमें से कुछ लोग 6 वर्षों के दौरान सिर्फ एक या दो बार ही अयोध्या आए। चंपत राय के अनुसार एनबीसीसी के चेयरमैन अनूप मित्तल लगातार नृपेंद्र मिश्र के साथ निर्माण समिति की बैठकों में शामिल होते थे। बता दें कि चंपत राय ने मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा मंजूर हो गया था। इसी दिन चंपत राय ने एक पत्र जारी कर ट्रस्टी अनिल मिश्र की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए थे। चंपत राय ने अपने पत्र में आगे कहा कि मंदिर निर्माण के सभी निर्णयों में नृपेंद्र मिश्र ने सदैव अपने को प्रमुख रखा। उन्होंने यह भी बताने की कोशिश की कि मंदिर निर्माण की सबसे पावरफुल मंदिर ट्रस्ट से ऊपर चलकर मंदिर निर्माण समिति रही जिसके चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र हैं। चंपत राय जी ने सारा चढ़ावा चोरी प्रकरण में अपने आप को पाक साफ दर्शाने की कोशिश की है। सारा दोष अनिल और नृपेंद्र मिश्र पर मढ़ने की कोशिश की है। आप ट्रस्ट के महासचिव थे, आपकी क्या ड्यूटी थी? नृपेंद्र मिश्र के अनुसार श्री राम जन्म भूमि ट्रस्ट के चढ़ावे की डकैती हो रही थी और आपको पता नहीं चला। बेशक आप अपनी ऊंची पोजीशन और संपर्क से फिलहाल बच जाएं पर भगवान राम आपको कभी माफ नहीं करेंगे। आपने और आपके तमाम साथियों ने करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है, वैसे आपको कभी क्षमा नहीं किया जा सकता। रहा सवाल नृपेंद्र मिश्र का तो उन्होंने चंपत राय के आरोपों के जवाब में कहा कि मैंने चंपत राय का कोई भी पत्र नहीं देखा है। उन्होंने साथ ही कहा कि अगर ऐसा कोई पत्र है भी तो उसमें उनके खिलाफ इस तरह की बातें नहीं लिखी गई होंगी। साफ है कि अब चंपत राय बदला लेने के मूड में हैं और यह विवाद अभी और आगे बढ़ेगा। -
अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 25 August 2026

महंगी चीनी : क्या वजह इथेनॉल तो नहीं?



भारत में चीनी के दाम पिछले कुछ महीनों से तेजी से बढ़ रहे हैं। राइटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार केवल इसी महीने भारत में चीनी की कीमतों में 20 फीसदी इजाफा हुआ है। भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार 20 अगस्त को भारत की खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 55.7 रुपए प्रति किलोग्राम थी। इसी रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने पहले चीनी की कीमत 48.18 रुपए प्रति किलोग्राम थी। 20 अगस्त 2025 को इसकी कीमत 46.3 रुपए प्रति किलोग्राम थी। बाजार के जानकारों का कहना है कि चीनी के दाम इससे पहले कभी इतने ऊंचे नहीं गए। सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि क्या पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल से चीनी महंगी हुई है? कच्चे तेल की खपत के मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। लेकिन भारत में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है। इस आयात को कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के लिए केन्द्र सरकार ने 2018 में पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की मात्रा को 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी करने का फैसला किया था। यह लक्ष्य 2030 में हासिल किया जाना था लेकिन सरकार ने इसे जुलाई 2025 में ही हासिल कर लिया। भारत में चीनी उद्योग सरकारी नियंत्रण के तहत आता है। चीनी मिलों को किसानों से खरीदे गए गन्ने के लिए कितना एमआरपी देना होगा यह केन्द्र सरकार तय करती है। सरकार यह भी तय करती है कि कौन सी चीनी मिल हर महीने कितनी चीनी बेच सकती है और चीनी का निर्यात किया जा सकता है या नहीं। देश में बड़े पैमाने पर इथेनॉल खरीदने वाला ग्राहक भी सरकार ही है और इस तरह इथेनॉल की कीमत भी अप्रत्यक्ष रूप से सरकार ही तय करती है। राइटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 के चीनी वर्ष में 30 लाख टन चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह देश में चीनी के कुल उत्पादन का करीब 10 फीसदी है। गन्ने के रस के अलावा चीनी बनाने के दौरान तैयार होने वाले सिरप, ए-हेवी मोलासिस, बी-हेवी मोलासिस और सी-हेवी मोलासिस से भी इथेनॉल बनाया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में उत्पादित कुल इथेनॉल का करीब एक तिहाई हिस्सा गन्ने से तैयार किया गया था। दूसरी तरफ सरकार ने शुक्रवार को कहा कि चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के कार्यक्रम को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। सरकार ने कहा कि देश में उत्पादन अनुमान से कम रहने, त्यौहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने और इंडस्ट्री के एक हिस्से की ओर से जमाखोरी के चलते चीनी के दाम उछले हैं। हालांकि मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है। मंत्रालय ने इथेनॉल ब्लैडिंग प्रोग्राम के चलते दाम बढ़ने की बात खारिज की। कहा, इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के उपयोग को कीमतों में हालिया बढोत्तरी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उधर सरकार ने चीनी की कीमतों की वृद्धि को देखते हुए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन गैर-परिष्कृत चीनी के ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) आयात को मंजूरी दे दी है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि त्यौहारी सीजन में चीनी के बढ़ते दामों की कड़वाहट और न बढ़े। एक दिन पहले, सरकार ने 10 लाख टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए चीनी की स्टॉक सीमा 15 दिन तय कर दी थी।

- अनिल नरेन्द्र

Saturday, 22 August 2026

अमेरिका-ईरान जंग का न्यूक्लियर होने का खतरा


अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब परमाणु हमले की धमकियों तक पहुंच गया है। इससे सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों में हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल, अमेरिका की पूर्व कांग्रेस वुमन मार्जेरी टेलर ग्रीन ने दावा किया था कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर न्यूक्लियर अटैक की योजना बना रहे हैं। इसके बाद ईरानी सांसद फिदा हुसैन मलेकी ने सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने परमाणु हमला किया तो ईरान भी उसी हथियार और उसी भाषा में पलटवार करेगा। अमेरिका की पूर्व कांग्रेस सुमन मार्जेरी टेलर ग्रीन ने ट्रंप की न्यूक्लियर अटैक वाली प्लानिंग लीक कर दी थी। उनहोंने दावा किया था कि वो ईरान पर परमाणु बम फोड़ने के बारे में विचार कर रहे हैं। इस बीच ईरान ने भी ऐसा ही ऐलान कर दिया है। क्या हम यह मानें कि ईरान ने भी कोई परमाणु हथियार बना लिया है? जिस भाषा का ईरान इस्तेमाल कर रहा है उसका मतलब तो साफ है कि अगर तुमने हम पर परमाणु हमला किया तो हम भी परमाणु हमले से जवाब देंगे। एएनआई के अनुसार, ग्रीन ने भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के उन आकलनों को स्वीकार नहीं कर रहा, जिनके मुताबिक ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के मुहाने पर नहीं है। व्हाइट हाउस ने ग्रीन के दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अमेरिकी सरकार या रक्षा अधिकारियों ने भी सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी योजना की पुष्टि नहीं की। अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब उस डरावने मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां परमाणु हमले की धमकियां खुलेआम दी जाने लगी है। अगर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एटम बम फोड़ने की बेवकूफी की तो क्या होगा? इस एक सवाल ने न सिर्फ वाशिंगटन और तेहरान में बल्कि पूरे खाड़ी देशों में भी हड़कंप मचा दिया है। सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देश अब थर-थर कांप रहे हैं, क्योंकि ईरान ने साफ कह दिया है कि अगर किसी भी खाड़ी देश ने अमेरिका को मदद की तो उसे भी भस्म होने से कोई नहीं बचा पाएगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य फिदा हुसैन मलेकी से सीधा सवाल पूछा गया कि अगर ट्रंप ने सच में परमाणु बम फोड़ दिया तो ईरान क्या करेगा? इस पर मलेकी ने बिना झिझक कहा, अगर ऐसा कोई हमला होता है तो ईरान भी उसी भाषा और उसी हथियार से जवाब देगा। हालांकि मलेकी ने खुलकर ये नहीं माना है कि ईरान के पास इस समय परमाणु बम तैयार है या नहीं, लेकिन उनके इस बयान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास कई ऐसे हथियार हैं जो न केवल खतरनाक हैं, बल्कि आधुनिक हैं जो अभी दुनिया के सामने आए ही नहीं। अगर युद्ध भड़का तो वह सिर्फ मध्य पूर्व में ही नहीं रहेगा वह पूरी दुनिया का अपनी चपेट में ले लेगा। ईरान ने अब केवल अपना बचाव करने के बजाए आक्रामक रणनीति अपना ली है। अगर अमेरिका परमाणु बम जैसा आत्मघाती कदम उठाता है या खाड़ी देश अमेरिका की ऐसा करने में मदद करते हैं, तो यह जंग केवल दो देशों के बीच नहीं रहेगी। खाड़ी देशों के तबाह होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई ठप्प हो जाएगी। पेट्रोल, डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे और वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। यही वजह है कि ट्रंप के परमाणु बम और ईरान के जवाबी पलटवार की खबरों ने दुनिया भर के नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। 
-अनिल नरेन्द्र