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Thursday, 18 June 2026

कागजों पर दस्तखत: जमीन पर धुआं

दुनिया ने राहत की सांस ली जब यह घोषणा हुई कि अमेरिका-ईरान युद्ध में युद्ध बंदी हो गई है। पर मैं इसे सिर्फ युद्ध विराम ही कहता हूं, यह जंग की समाप्ति नहीं मानी जा सकती क्योंकि अभी सही मायनों में तो दोनों तरफों की शर्तें माननी बची हैं। फिलहाल तो इससे सिर्फ  अमेरिका और ईरान के बीच बमबारी रुकी है। जंग रोकने के लिए अभी बहुत से पेंच फंसे हैं। मैं सबसे पहले अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और स्पीकर बागेर गालिबफ को बधाई देना चाहता हूं कि युद्ध में भारी पड़ने के बावजूद उन्होंने इस युद्ध विराम (सीजफायर) को रोकने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। मैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इसके लिए बधाई नहीं देना चाहता क्योंकि उन्होंने ही यह जंग शुरू की थी। जिसे बिना वजह जंग को शुरू किया था उसमें युद्ध विराम करके उन्होंने अपनी जान ही छुड़ाई है, किसी पर एहसान नहीं किया। उनके समर्थक उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स कह रहे हैं कि ट्रंप अब नोबल पुरस्कार के हकदार हैं? क्यों भाई ! कैसे हुए हकदार? पहले शुरू करो, फिर पिटो और अब बिना शर्तों के बमबारी रोकने की घोषणा करो? यह जो एमओयू पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं वह कितने कारगर सिद्ध होते हैं यह देखना बाकी है क्योंकि सबसे बड़ा पेंच तो नेतन्याहू बने हुए हैं। इजरायल ने साफ घोषणा कर दी है कि वह इस समझौते को नहीं मानता और न ही वह लेबनान पर लड़ाई बंद करेगा। जबकि ईरान की शर्तों पर यह शामिल है। ट्रंप की धमकियों के बावजूद, गाली-गलौच की परवाह न करते हुए इजरायल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और इस पूरी कोशिश में लगा हुआ है कि यह समझौता न हों। ईरान ने 14 बिंदुओं की मांग रखी है। ट्रंप ने भी दो बड़ी शर्तें रखी हैं। ईरान ने मांग की है कि शांति समझौते से पहले 24 अरब डालर की जब्त संपत्ति अमेरिका ईरान को दे। इस राशि का आधा हिस्सा यानी 12 अरब डालर बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को दी जाए। वहीं अमेरिका ने इस दावे पर अलग रुख अपनाया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान को किसी प्रकार की वित्तीय राहत तभी मिलेगी जब वह समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी विवाद है। बेशक ईरान ने होर्मुज को खोल दिया है पर अभी सिर्फ तय रास्तों से ही समुद्री जहाजों का आना शुरू हुआ है। होर्मुज को पूरी तरह से खोलने में समय लगेगा क्योंकि ईरान ने होर्मुज में बारुदी सुरंगें बिछा रखी हैं। जिन्हें हटाने में समय लग सकता है। ईरान हर जहाज से टोल भी वसूल कर रहा है। जिसे कर सर्विस चार्ज कह रहा है। अमेरिका ऐसा करने पर ऐतराज कर रहा है। खैर, होर्मुज के खुलने से पूरी दुनिया ने राहत की सांस जरूर ली है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और एनज्डि यूरोनियम के मुद्दे पर भी अभी सहमति बननी बाकी है। ईरान द्वारा उसके मिसाइल कार्यक्रम पर भी अमेरिका और इजरायल को आपत्ति है। इस मुद्दे पर दोनों पक्ष 60 दिनों की बातचीत में कोई निर्णय करेंगे। ईरान के उपविदेश मंत्री काजेम धरीबाबादी ने तस्लीन न्यूज एजेंसी से कहा कि अंतिम समझौते को लेकर अगले 6ˆ दिनों के भीतर बातचीत जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका अपने वादों पर किस हद तक टिका रहता है और पूरा करता है? ई&रान की प्रमुख मार्गों में सैन्य गतिविधियों को रोकना यानी की हर जंग को पूरी तरह रोकना, आर्थिक नाकाबंदी समाप्त करना और विदेशों में जमे हुए ईरानी फंडस को जारी करना शामिल है। समझौते में लेबनान में युद्ध विराम का भी प्रावधान शामिल है। वित्तीय मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद व्यापक समझौते को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली हैं। ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, फ्रांस और भारत ने इसका स्वागत किया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य मध्य-पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करना है। ऐसे में अगर समझौता सफल रहता है तो वैश्विक बाजारों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। बस यह टिका रहे? अंत में इजरायल-मोसाद कुछ भी कर सकता है। ईरानी लीडरशिप की हत्या भी करवा सकता है ताकि यह युद्ध विराम टूट जाए। 

-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 16 June 2026

अब फुटबाल का जादू

ऐसे वक्त पर जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान में भंयकर युद्ध छिड़ा हुआ है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। जब सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल हो रही है उसी समय खेल प्रेमियों के लिए जबरदस्त राहत का आयोजन हो रहा है। मैं विश्व कप फुटबाल 2026 की बात कर रहा हूं। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा फुटबाल विश्व कप चल रहा है। फीफा विश्व कप 2026 के पहले उद्घाटन समारोह ने बृहस्पतिवार को एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम में 85000 दर्शकों के सामने अनूठा रंग बरपा दिया। इस बार तीन उद्घाटन समारोह हुए हैं जिनमें दो समारोह शुक्रवार को कनाडा के टोरंटो और अमेरिका के लॉस एंजिल्स में आयोजित हुए। 39 दिन तक चलने वाले इस सबसे लंबे प्रख्यात महाकुंभ में रिकार्ड मैचों के साथ रिकार्ड दर्शकों के आने से फुटबाल की शीर्ष संस्था को वित्तीय रूप से भारी मुनाफा होने वाला है। फीफा की कमाई कई तरीकों से होगी जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा प्रसारण अधिकारों का होगा। इसके अलावा प्रायोजन, टिकटों की बिक्री, आतिथ्य सत्कार, पर्यटन आदि से भारी कमाई होगी। इस बार 48 टीमों के टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से भी कमाई उम्मीद से ज्यादा हो सकती है और यह आंकड़ा 76 हजार करोड़ रुपए (8.9 अरब डॉलर) से भी ज्यादा पहुंच सकता है। असल में 104 मुकाबले तीन देशों के 16 शहरों में होने से कमाई में कई तरह की बढ़ोतरी होगी। बता दें कि तीन बार विश्व कप की मेजबानी करने वाला मैक्सिको दुनिया का पहला देश है। मैक्सिको ने अपने यहां हुए उद्घाटन में अपनी देसी संस्कृति की झलक दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। फीफा ने इस समारोह के लिए दुनिया भर से कलाकार बुलाए थे, लेकिन असली समां शकीरा के दाई-दाई गाने से बांधा, जिस पर दर्शक झूम उठे। सवाल यह भी है कि क्या यह खेल की उस शक्ति को साबित कर पाएगा, जो मतभेदों के बीच संवाद व तनावों के बीच उम्मीद की गुजांइश पेश करती है? फुटबाल विश्व कप का इतिहास देखें तो उम्मीद की जा सकती है। बता दें कि इटली के डिक्टेटर मुसोलिनी के शासन के दौरान 1934 में इटली में हुआ विश्वकप हो या फिर 1938 की प्रतिस्पर्धा, जब  जर्मनी, आस्ट्रिया पर कब्जा कर चुका था, इस खेल ने दर्द से कराहते देशों को जरूर कुछ राहत तो दी थी। हिटलर ने भी विश्वकप हाकी का आयोजन किया था जिसमें भारत के मेजर ध्यानचंद सबसे बड़े सितारे के रूप में उभरे थे। दिलचस्प यह है कि ईरान की टीम को भी मेजबान अमेरिका में खेलने का मौका मिलेगा। हालांकि ईरान को वीजा देने में भी विवाद हुआ। उल्लेखनीय है कि ईरानी खिलाड़ी जब मैक्सिको पहुंचे तो उन्होंने वह प्रतीक चिह्न पहना था जो मिनाब के बच्चियों के स्कूल पर अमेरिका ने मिसाइल मारा था और 138 छोटी बच्चियां शहीद हो गई थीं। अपेक्षा की जाती है कि इस आयोजन से देशों में प्रेम व एक-दूसरे का सम्मान बढ़ेगा, भाई चारा बढ़ेगा और दुनिया में अशांति के माहौल में कमी आएगी। 

-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 13 June 2026

क्यूबा है ट्रंप का अगला टारगेट?

भारत में एक कहावत है विनाश काले विपरीत बुद्धि यानी जब आप पर विपत्ति आती है तो आपकी सबसे पहले बुद्धि भ्रष्ट होती है। यही हाल है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उसके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का। पीट हेगसेथ ने ताजा बयान दिया है जिससे लगता है कि ट्रंप का अगला निशाना क्यूबा है। पीट हेगसेथ ने हाल ही में गुआंतानामो बे का दौरा किया और क्यूबा को कई शब्दों में चेतावनी दी। हेगसेथ ने क्यूबा को स्पष्ट किया कि अमेरिका के खिलाफ किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि ईरान के बाद या साथ-साथ क्यूबा भी ट्रंप के निशाने पर है। लगता है कि ट्रंप अपने पड़ोसी देश क्यूबा के खिलाफ जंग छेड़ने के मूड में है। जबकि ईरान युद्ध में बुरी तरह फंसे हुए हैं और बाहर निकलने के लिए बेताब हैं और अब क्यूबा को कब्जाने की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने क्यूबा की एनजी सप्लाई काटने के बाद अब एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस निमित्ज को पूरे कैरियर ग्रुप के साथ तैनात कर दिया है। यह तैनाती ठीक उसी तरह की है जिस तरह उन्होंने वेनेजुअला पर हमला करने से पहले वहां के राष्ट्रपति निकोलास मादुरो को हटाने के लिए चारों और तैनात किया था। क्यूबा पर हमले की तैनाती में अमेरिका ने क्यूबा के 94 वषीय पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्राs पर हत्या का आरोप भी लगाया है। इसके बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका की तख्ता पलट सूची में अगला नाम क्यूबा का हो सकता है। अमेरिका की मैक्सिमम प्रैशर की वजह से क्यूबा में दशकों का सबसे बड़ा ईंधन और बिजली संकट पैदा हो गया है। इसी बीच ट्रंप और उनके अधिकारी लगातार यह कह रहे हैं कि 66 साल से सत्ता में मौजूद कम्युनिस्ट सरकार का अंत होना चाहिए। व्हाइट हाउस ने यह भी चेतावनी दी है कि वह अमेरिका के तट से सिर्फ 144 किलोमीटर किसी दागी राष्ट्र को बर्दाश्त नहीं करेगा। अब ये चर्चा है कि राउल कास्त्राs को कोई सैन्य अभियान चलाकर मादुरो की तरह गिरफ्तार करके अमेरिका लाया जा सकता है। उन्हें अमेरिका लाकर उन पर मुकदमा चला सकता है। इस साल की शुरुआत में एक कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने दावा किया था कि क्यूबा में रूस का सबसे बड़ा विदेशी जासूसी केंद्र मौजूद है। बिडेन प्रशासन ने चीन पर भी आरोप लगाया था कि उसने अमेरिका के तटों से सिर्फ 90 मील दूर स्थित इन कम्युनिस्ट द्वीप पर जासूसी केंद्र खोल रखा है। यही नहीं ट्रंप प्रशासन ने करीब 30 साल पुराने एक मामले को अचानक जिंदा करके क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्राs पर गंभीर आरोप लगा दिया। असल में 1996 में समुद्र में फंसे लोगों और क्यूबा से भागकर अमेरिका आने वाले शरणार्थियों की मदद करने वाला एक संगठन छोटे नागरिक विमानों के जरिए रेस्क्यू मिशन चला रहा था। उसके दो नागरिक विमानों को क्यूबा के सैन्य विमानों ने मार गिरया। इसमें चार अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में और ज्यादा तनाव बढ़ गया था। अब तीन दशक बाद अमेरिकी अधिकारियों ने पूर्व क्यूबाई राष्ट्रपति राउल कास्त्राs पर हत्या, साजिश रचने और विमान गिराने से जुड़े आरोप लगाए हैं। राउल कास्त्राs क्यूबा की राजनीति के सबसे ताकतवर चेहरों में से एक हैं। उन्होंने अपने भाई फिदल कास्त्राs के बाद देश की राजनीति संभाली थी। अब सवाल है कि आखिर 30 साल बाद अमेरिका इस मामले को क्यों उठाना चाहता है? 

-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 11 June 2026

क्या इजरायल अमेरिका की जासूसी कर रहा है?

ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन  नेतन्याहू के बीच टकराव व बढ़ती रणनीतिक दूरियों ने पेंटागन की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय को इजरायली जासूसी का भय लगने लगा है। उसने चेतावनी दी है कि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी कड़ी इजरायली निगरानी का निशाना बन सकते हैं? एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के दो मौजूदा व एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि पेंटागन की डिफैंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआईए) ने हाल ही में इजरायल के लिए काउंटर इंटेलिजेंस खतरे के स्तर को क्रिटिकल यानी गंभीर कर दिया है। यह उनका सबसे ऊंचा आंतरिक मूल्यवान स्तर है। एक मौजूदा अधिकारी ने अमेरिकी पत्रकार को बताया कि अमेरिका पहले से ही इजरायल की आधिकारिक यात्राओं के दौरान सुरक्षा उपाय बरतता है क्योंकि इजरायली जासूसी एजेंसियों को जानकारी जुटाने के मामले में बहुत आक्रामक माना जाता रहा है। पेंटागन की नई चिंताओं से पता चलता है कि इजरायल पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के संबंध में अमेरिकी रणनीतिक चर्चाओं व फैसलों की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इजरायली जासूसी नेटवर्क खासकर उनकी खुफिया एजेंसी ऐसे कामों के लिए दुनिया में बदनाम है। चौंकाने वाली बात यह है कि मोसाद ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी अमेरिका को भी नहीं बक्शा है? 

-अनिल नरेन्द्र

पत्रकार को कहा: बेईमान और बेवकूफ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्राध्यक्षों से तो बदतमीजी से पेश आते ही हैं पर अपने देश के पत्रकारों खासकर महिला पत्रकारों से कैसे पेश आते हैं ताजा घटना से पता चलता है। ट्रंप ने एनबीसी जैसी बड़ी टीवी नेटवर्क से एक इंटरव्यू के दौरान अचानक बातचीत बीच में ही खत्म कर दी। कार्यक्रम की होस्ट क्रिस्टन वेल्कर बार-बार उनके (ट्रंप के) कई दावों पर सवाल उठा रही थीं। रविवार को प्रसारित हुए कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस' में ट्रंप ने दावा किया कि कैलिफोर्निया में चल रहे प्राइमरी चुनाव और साल 2020 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव दोनों ही धांधली पूर्ण थे। जब वेल्कर ने चुनावों में धांधली के दावे के समर्थन में सुबूत मांगे तो ट्रंप ने कहा, ‘मुझे बस देखना और सुनना भर है।' इस पर वेल्कर ने कहा यह सुबूत नहीं है। इसके बाद ट्रंप ने मीडिया पर बेईमान होने का आरोप लगाया और इंटरव्यू समाप्त करते हुए कहा, माफ कीजिए, अब इसे यहीं खत्म करते हैं। मेरे लिए बहुत हो गया यह इंटरव्यू अब खत्म है। इंटरव्यू शुरू होने के लगभग 50 मिनट बाद इसे छोड़ दिया। वेल्कर के सवालों के जवाब में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए कार्रवाई करनी जरूरी थी और यह अंतहीन युद्ध नहीं होगा। हम वहां कुछ महीनों के लिए रहेंगे और उसके बाद खतरा काफी हद तक समाप्त हो जाएगा। इसके बाद बातचीत उस दंगे पर पहुंची और जब ट्रंप ने साल 2020 के चुनाव में धांधली का अपना पुराना, बिना सुबूत वाला दावा दोहराया तो क्रिस्टन वेल्कर ने उन्हें  चुनौती दी। ट्रंप ने फिर कैलिफोर्निया  के प्राथमिक चुनावों का जिक्र किया, जहां गवर्नर सहित कई पदों के लिए नवम्बर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में कौन से दो उम्मीदवार होंगे। यह तय करने के लिए वोटों की गिनती जारी थी। उन्होंने फिर आरोप लगाया, वे चुनाव में धांधली कर रहे हैं, पलटकर वेल्कर ने पूछा: क्या आपके पास इसके समर्थन में कोई सुबूत है? ट्रंप ः मुझे सिर्फ देखना और सुनना है। वेल्कर ने बीच में टोका, लेकिन यह कोई सुबूत नहीं हैं। ट्रंप ने आगे कहा वे बेईमान हैं बिल्कुल आपकी तरह। इस पर वेल्कर ने जवाब दिया निष्पक्षता की बात करें तो मैं बेईमान नहीं हूं। लेकिन बातचीत जारी रखें, इस पर ट्रंप ने उनसे कहा या तो आप बेईमान हैं या फिर बेवकूफ और यह कहते हुए ट्रंप उठ गए  और कहा इसे यहीं खत्म करते हैं। मेरे लिए बहुत हो गया। शुक्रिया डार्लिंग, आपको अपने प्रेस को सुधारना चाहिए क्योंकि एक देश कभी महान नहीं बन सकता अगर उसकी प्रेस बेईमान है। हम इस महान पत्रकार को सलाम करते हैं जिन्होंने अपनी बेइज्जती सही पर डटी रहीं। 

-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 9 June 2026

युद्ध विराम के नाम पर धोखा?

क्या अमेरिका ईरान पर जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है और सीजफायर के नाम पर ईरान को बेवकूफ बना रहा है? अमेरिकी वारशिप यूएसएस त्रिपोली की तैनाती के बाद  सवाल फिर यह उठ गया है कि अमेरिका की असल नीयत क्या है? त्रिपोली की तैनाती के बाद यह सवाल उठाना लाजमी है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को ईरान की ओर से लांच किए गए ड्रोन को तबाह कर देने का दावा किया। वहीं अब होर्मूज में यूएसएस त्रिपोली की तैनाती की ताजा खबर आई है। सवाल उठता है कि क्या ईरान पर अब जमीनी हमला होने जा रहा है? अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कहने को तो अभी जारी है। लेकिन जमीन और समुद्र पर जो स्थिति दिख रही है वे कुछ और ही कहानी की ओर इशारा कर रही है। पिछले 72 घंटों में हुई कई सैन्य कार्रवाईयों ने पश्चिम एशिया में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका सिर्फ  ईरान पर दबाव बना रहा है या फिर होर्मूज जलडमरूमध्य पर निर्णायक बढ़त हासिल करने की तैयारी कर रहा है?  क्योंकि जो तैनाती अमेरिका कर रहा है, उसे देखकर तो ऐसा लगता है कि ट्रंप अब ईरान के आइलैंड पर कब्जा करने जा रहा है?  घटनाओं की शुरुआत उस खबर से हुई जिसमें बताया गया कि ईरानी झंडे वाले चार तेल टैंकर होर्मूज पार करने में सफल रहे। ये जहाज कथित तौर पर करीब 70 लाख बैरल तेल लेकर निकले थे और प्रतिबंधों के बावजूद आगे बढ़ गए। लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी इंडो-पैसेफिक कमांड ने घोषणा की कि उसने हिंद महासागर में प्रतिबंधित तेल टैंकर एमटी डेविना को रोककर इस पर कब्जा कर लिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कब्जे में लिया गया जहाज उन्हीं चार टैंकरों में से एक था या नहीं। लेकिन टाइमिंग ने कई अटकलों को जन्म दिया है। इसे मसले पर संभल ही रहा था कि उस पर अमेरिका ने हमला कर दिया। शनिवार को ही अमेरिकी सैंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने होर्मूज की ओर बढ़ रहे चार ईरानी हमलावर ड्रोन मार गिराए। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के गोसक और केशम द्वीप पर मौजूद तटीय रडार ठिकानों पर हमले किए। पहली बार नहीं है जब केशम को निशाना बनाया गया है। लेकिन मौजूदा हालात में इस द्वीप का नाम बार-बार सामने आना सैन्य विश्लेषकों का ध्यान खींच रहा है। जवाब में ईरान ने भी कुवैत और बहरीन की ओर सात मिसाइलें दागी। इनमें से 6 को अमेरिका ने रोकने का दावा किया। इस बीच अमेरिका ने यूएसएस त्रिपोली की अरब सागर और होर्मूज क्षेत्र में तैनाती की है। यूएसएस त्रिपोली कोई साधारण युद्ध पोत नहीं है। यह एक उभयचर हमलावर जहाज है, जिसका मतलब है कि ये जहाज पानी से तो हमला कर ही सकता है, जरूरत पड़ने पर जमीन के बेहद करीब जाकर सैनिकों को उतार भी सकता है। ऐसे जहाज समुद्र से सीधे सैन्य अभियान चलाए जाने के लिए बनाए जाते हैं। उधर केशम ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और होर्मूज के मुहाने पर मौजूद है। इसे न डूबने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर भी कहा जाता है। ईरान ने यहां वर्षों से रडार सिस्टम, ड्रोन बेस, एंटी शिप मिसाइलें, अंडरग्राउंड सुरंगे और नौ सैनिक अड्डे बनाए हुए हैं। अगर अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा कर लेता है तो उसे  कई बड़े स्ट्रेटिजिक फायदे मिल सकते हैं। वैसे अमेरिका के लिए केशम पर कब्जा बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला है। इसका मतलब होगा सीधे अंगारों को हाथ में लेना। केशम ईरानी जमीन से बेहद करीब है। अगर अमेरिका अपने सैनिकों को यहां उतारता है तो उसे ईरान की मिसाइलों, ड्रोन, नौ सैनिक हमलों और संभावित गुरिल्ला प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यूएसएस त्रिपोली की मौजूदगी, केशम पर लगातार हमले और टैंकरों को रोकने जैसी कार्रवाईयों ने यह बहस तेज कर दी है कि अमेरिका होर्मूज पर रणनीतिक बढ़त लेने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि शांति वार्ता चलने के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की बजाए और बढ़ता दिखाई दे रहा है। 

-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 6 June 2026

अयातुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के लिए तीन दिन के राजकीय अंतिम संस्कार का ऐलान किया गया है। तीन महीने बाद अयातुल्लाह अली खामेनेई को दी जाएगी अंतिम विदाई, मशहद में होंगे सुपुर्द-ए-खाक। ईरान सरकार ने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के लिए तीन दिन के राजकीय अंतिम संस्कार का ऐलान किया है। फिलहाल तारीख घोषित नहीं हुई है। अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम इस्लामिक कैलेंडर के अखिरी महीने जिलहिज्जा के अंत में हो सकता है। यानी 15 जून के आसपास। अधिकारियों ने बताया कि खामेनेई की इच्छा के अनुसार उन्हें मशहद के इमाम रजा दरगाह में दफनाया जाएगा। तेहरान, कोम और मशहद में अंतिम कार्यक्रम होंगे। इन शहरों में बड़े पैमाने पर शोभा यात्राएं और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी। ईरान के सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी से बातचीत में तवाकोली-जादेह ने कहा कि तीनों शहरों में करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। तेहरान के डिप्टी मेयर मोहम्मद अमीन तवाकोली-जादेह ने कहा कि ईरान के कई अन्य प्रांत भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि तेहरान में होने वाला मुख्य कार्यक्रम कम से कम 24 घंटे चलेगा। सिर्फ तेहरान में ही 1.5 करोड़ से दो करोड़ लोग अपने शहीद सुप्रीम लीडर को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंच सकते हैं। इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन सुरक्षा, यातायात और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की तैयारी कर रहा है। यह फैसला अयातुल्लाह अली खामेनेई की शहादत के 3 महीने बाद लिया गया है। आमतौर पर इस्लामी परम्परा के अनुसार किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार मौत के कुछ दिनों के भीतर कर दिया जाता है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने पहले इस कार्यक्रम को टाल दिया था। पहले क्यों नहीं हुआ अंतिम संस्कार? अयातुल्लाह अली खामेनेई 23 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए थे। उनकी शहादत के बाद मार्च में ईरान के अधिकारियों ने बयान दिया था कि भारी भीड़ और व्यवस्थाओं को लेकर आ रही चुनौतियों की वजह से अंतिम संस्कार तुरंत करना संभव नहीं है। ईरान की सरकारी एजेंसी ईरना के मुताबिक राजकीय अंतिम संस्कार जून के मध्य में आयोजित किया जाएगा। हालांकि इसकी सटीक तारीख और समय की अभी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम संस्कार बहुत बड़े स्तर पर होगा और इसमें ईरान के साथ-साथ कई मुस्लिम देशों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भारत, बांग्लादेश से भी बड़ी संख्या में लोगों के मशहद पहुंचने की उम्मीद है। अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में करोड़ों लोग एक साथ इकट्ठे होंगे। यह भी खतरा है कि मौके का फायदा उठाकर कहीं इजरायल कोई उल्टी-सीधी हरकत न कर दे। अमेरिका भी इस मौके का फायदा उठा सकता है। ऊपर वाला ऐसा होने से बचाए। उम्मीद करते हैं कि इस पवित्र मौके का इजरायल-अमेरिका कोई नाजायज फायदा नहीं उठाएगा और अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई में कोई बाधा नहीं डालेगा। खामेनेई 86 साल के थे। वह तीन दशक से ज्यादा समय तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे। आज जो ईरान है उसके पीछे अयातुल्लाह अली खामेनेई की दूरदृष्टि और प्लानिंग ही थी। हम अयातुल्लाह अली खामेनेई को अपनी श्रद्धांजलि देते हैं। 

-अनिल नरेन्द्र