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Thursday, 28 May 2026

ईरान की फ्रीज पड़ी संपत्ति


पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में तेहरान का फ्रीज छह अरब डॉलर की संपत्ति को जारी करना एक अहम मुद्दा है। यह संपत्ति अभी कतर में जमा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक ईरानी सूत्र ने बताया कि कतर समेत विदेश में फ्रीज संपत्तियों को जारी करना, हार्मूज से सुरक्षित आवाजाही तय करने से सीधे तौर पर जुड़ा है। छह अरब डालर की यह राशि सबसे पहले 2018 में रोकी गई थी। वाशिंगटन तथा तेहरान के बीच कैदियों की अदला-बदली के समझौते के तहत इसे 2023 में जारी किया जाना था, पर 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के बाद बिडेन प्रशासन ने संपत्तियों को फिर से फ्रीज कर दिया। उधर, अमेरिका ने ईरान की इस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि इस्लामाबाद वार्ता में जब्त संपत्तियों को छोड़ेगा। अमेरिका ने स्पष्ट कहा कि वह ईरानी संपत्तियों को वापस नहीं करेगा। इससे पहले ईरान ने दावा किया था कि अमेरिका इस बात पर सहमत हो गया है कि जब्त संपत्तियों को छोड़ेगा। पिछले कुछ दिनों में एक बार फिर युद्ध विराम और शांति वार्ता की बात हो रही है। देखें, अमेरिका और ईरान में किन-किन मुद्दों पर समझौता होता है, अगर होता भी है? 
-अनिल नरेन्द्र

ट्रंप के पास तीसरी बार फायरिंग

 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस की सुरक्षा जांच चौकी के पास एक व्यक्ति ने गोली बारी कर दी। सुरक्षा कर्मियों ने जवाबी कार्रवाई में संदिग्ध हमलावर को ढेर कर दिया। पिछले एक महीने में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आसपास गोलीबारी की यह तीसरी घटना थी। इससे पहले अप्रैल में व्हाइट हाउस संवाददाता संघ रात्रि भोज और मई की शुरुआत में वाशिंगटन मॉन्यूमेंट के पास घटनाएं हुईं। कानून प्रर्वतन एजेंसी ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में बताया कि 17वीं स्ट्रीट और पेंसिल्वेनिया एवेन्यू में मौजूद हमलावर ने शनिवार शाम छह बजे अपने बैग से हथियार निकाला और गोलीबारी शुरू कर दी। सीक्रेट सर्विस जवानों की जवाबी कार्रवाई में यह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। बताया जाता है कि हमलावर ने 30 राउंड गोलियां चलाईं। शनिवार को हुई घटना के दौरान एक राहगीर को भी गोली लगी है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह संदिग्ध द्वारा शुरू में चलाई गोलियों से घायल हुआ या अधिकारियों द्वारा जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी? ट्रंप घटना के समय व्हाइट हाउस में मौजूद थे। एक कानून प्रवर्तन अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि संदिग्ध की पहचान 21 वर्षीय नासिरे बेस्ट के रूप में हुई है। बेस्ट को पहले भी गिरफ्तार किया गया था। वह जब उसने बिना अनुमति के व्हाइट हाउस की एक अन्य जांच चौकी में प्रवेश करने की कोशिश की थी। बेस्ट को जुलाई 2025 में इस सिलसिले में गिरफ्तार भी किया गया था। बेस्ट खुद को भगवान यीशु मसीह का मॉर्डन अवतार मानता था। डोनाल्ड ट्रंप पर तीन बार गोली बारी हो चुकी है। एक बार तो बाल-बाल बचे जब गोली उनके कान के पास से निकली। कुछ आलोचकों का मानना है कि इन हमलों के पीछे सहानुभूति लेने की और अमेरिकी जनता का ज्वलंत मुद्दों से ध्यान हटाने का नाटक शामिल है। खैर, जो भी हो एक बात तो साफ लगती है कि ट्रंप की जान को खतरा है और उन्हें अपनी सुरक्षा में किसी प्रकार की ढील नहीं देनी चाहिए। 
अनिल नरेंद्र 

Tuesday, 26 May 2026

ट्रंप पर आगबबूला हुए नेतन्याहू

अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ जंग शुरू की थी, लेकिन अब इस जंग को रोकने के लिए दोनों देश आपस में सहमत नहीं हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू में भारी मतभेद सामने आ रहे हैं। नेतन्याहू एक बार फिर से ईरान पर हवाई हमले शुरू करना चाहते हैं, वहीं ट्रंप हथियार से पहले कूटनीति के जरिए मामले को शांत करना चाह रहे हैं और अमेरिका को इस युद्ध से बाहर निकालने के लिए ईरान से कोई डील करने के चक्कर में हैं। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच लगभग एक घंटे तक बातचीत हुई। लेकिन दोनों एक मत नहीं हो पाए। नेतन्याहू का कहना था कि ईरान की सैन्य क्षमता जब तक पूरी तरह बर्बाद न हो जाए, उनके यूरेनियम पर कब्जा न हो जाए हमले जारी रहने चाहिए। राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि मध्यस्थ कतर और पाकिस्तान एक लेटर ऑफ इंटेंट पर काम कर रहे हैं ताकि युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म किया जा सके। इस पर दस्तख्त होने के बाद 30 दिनों की बातचीत का दौर शुरू होगा। नेतन्याहू ट्रंप की नीति से सहमत नहीं थे। अब देखना यह होगा कि क्या ईरान युद्ध रुकेगा और क्या नेतन्याहू अकेले ही ईरान युद्ध को आगे बढ़ाएंगे या फिर ट्रंप की चलेगी। 

-अनिल नरेन्द्र 


संसद में ही अपनों ने घेरा ट्रंप को

अमेरिका की कांग्रेस (संसद) ने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना व देश को हुए भारी नुकसान पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि लड़ाई के दौरान 42 अमेरिकी विमान नष्ट हुए हैं या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसी खबरें पहले भी मीडिया में आईं थी पर ट्रंप प्रशासन ने कभी इसकी पुष्टि नहीं की थी। यह रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) ने संकलित की है और यह अमेरिकी कांग्रेस की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। सीआरएस किसी भी राजनीतिक दल से संबंध की परवाह किए बिना अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों को नीतिगत मुद्दों पर विश्लेषण मुहैया करता है। रिपोर्ट में अमेरिकी रक्षा विभाग, पेंटागन, सेंट्रल कमांड (सेटकॉम) और समाचार लेखों का हवाला दिया गया है। जिनके अनुसार क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए विमानों में मानवरहित हवाई वाहन, लड़ाकू जेट और ड्रोन शामिल थे। ईरान से युद्ध अमेरिका के लिए काफी भारी पड़ रहा है। विश्लेषकों का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका ने एक लाख करोड़ (एक ट्रिलियन) डॉलर के करीब पूंक चुका है। हालांकि सरकार ने इसे काफी कम करके दिखाया है। पेंटागन के एक वरिष्ठ बजट अधिकारी ने संसद को बताया कि युद्ध में  अमेरिका को अब तक 29 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है जबकि बजट 25 अरब डॉलर का था। ईरान युद्ध के कारण भारी खर्च और हथियार भंडार में आई कमी के मुद्दे पर ट्रंप के विपक्ष के साथ-साथ अपनी पार्टी के सांसदों के भी भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर ईरान ने अभी तक युद्ध में हुए नुकसान का विवरण जारी नहीं किया है और अब भी दावा करता है कि वह अमेरिका के खिलाफ युद्ध जारी रखने में सक्षम है। राष्ट्रपति ट्रंप अब ईरान युद्ध को लेकर घर के अंदर ही बुरी तरह घिरते जा रहे हैं। जहां एक तरफ अमेरिकी जनता सड़कों पर उतर रही है वहीं अमेरिकी सेना और संसद सभी जगह ट्रंप को अपने ही उन्हें घेर रहे हैं। 

-अनिल नरेन्द्र 


Saturday, 23 May 2026

इमरान का तख्ता पलट अमेरिका की साजिश थी

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार गिराने को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। लीक दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि इमरान की कुसी सिर्फ अविश्वास के प्रस्ताव से नहीं गिरी थी। इसके पीछे अमेरिकी साजिश और पाक सेना की भूमिका थी। दरअसल, इमरान ने 24 फरवरी 2022 को रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से मॉस्को में मुलाकात की थी। ठीक उसी दिन रूस ने यूव्रेन पर हमले शुरू किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इमरान की इस यात्रा से नाराज था। वह चाहता था कि पाकिस्तान यूक्रेन युद्ध पर रूस की खुलकर आलोचना करे, लेकिन इमरान सरकार ने तटस्थ रुख अपनाया। 7 मार्च 2022 को वाशिंगटन में पाक के तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी सहायक विदेशी मंत्री डोनाल्ड लू के बीच बातचीत हुई। लू ने मजीद से कहा, यदि इमरान अविश्वास प्रस्ताव में टूट जाते हैं तो अमेरिका ‘सब माफ' कर देगा। इसके 33 दिन बाद, 9 अप्रैल 2022 को इमरान सरकार गिर गई। वाशिंगटन के एक होटल में लू ने मजीद को लंच पर इमरान को हटाने का दबाव दिया था। इमरान के हटने के अगले दिन ही शाहबाज ने सत्ता संभाल ली। नवम्बर 2022 में जनरल बाजवा पद से सेवानिवृत हुए और आमी चीफ आसिम मुनीर का उदय हुआ। इमरान ने आरोप लगाया था कि मुनीर की नियुक्ति पूर्व पीएम नवाज शरीफ से परामर्श के बाद हुई थी। बाकी तो इतिहास है। अमेरिका किसी भी ऐसी सरकार को बर्दाश्त नहीं करता जो उसका विरोध करे और जिसकी रूस से नजदीकी हो।

-अनिल नरेन्द्र

ट्रंप ने कैसे ईरान जंग में कमाए पैसे?

डोनाल्ड ट्रंप पर पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति पर जंग से कमाई करने पर सवाल उठने लगे हैं। अब ट्रंप ट्रेडिंग वॉर में घिर गए हैं। नए वित्तीय खुलासों के अनुसार 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के बीच ट्रंप या उनके सलाहकारों की मंडली ने 3700 से ज्यादा शेयर सौदे किए। रोज लगभग 40 शेयर सौदे हुए। इनमें ट्रंप को लगभग 800 करोड़ रुपए यानी लगभग 83 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई हुई। ये शेयर एनवीडिया, बोइंग, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेजन, ओरेकल और कॉस्टको जैसी कंपनियों के थे। ट्रंप विवादों में इसलिए हैं क्योंकि ये कंपनियां रक्षा सौदों, एआई नियमों और चिप और सेमीकंडक्टर आयात या फिर निर्यात से जुड़ी हुई हैं। वॉल स्ट्रीट की कंपनी एरिक प्रिंस के मुताबिक अमेरिका के इतिहास में ये पहली बार है जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति वित्तीय लेन-देन और हितों के टकराव के मुद्दे पर सवालों के घेरे में है। उधर व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर शेयर ट्रेडिंग को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर लगे आरोपों से इंकार किया है। ट्रंप आर्गेनाइजेशन पूरे कारोबार को संभालता है। बेटे जूनियर ट्रंप के पास अमेरिका और यूरोप से निवेश लाने की जिम्मेदारी है। जबकि दामाद जेरेड कुशनर की कंपनी एफिनिटी पार्टनर्स सउदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के सरकारी वेल्थ फंड से मिले अरबों डालर के निवेश को संभालती है। इस रकम को शेयरों में डायवर्ड करते हैं। ट्रंप के पोर्टफोलियो में पिछले साल के अंतिम तीन महीनों में कई सौ शेयर ट्रेडिंग के रिकार्ड हैं। जबकि इस साल 10 फरवरी को ही ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन में अपने शेयरों की हिस्सेदारी को बेचकर लगभग 350 करोड़ रुपए की कमाई की। इससे कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने एंटी ट्रस्ट और एआई रेगुलेशन और डाटा नीतियों से संबंधित बड़े फैसले किए। ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप के कभी युद्ध तो कभी वार्ता के बयानों से तेल और स्टॉक वायदा बाजारों में तेज उथल-पुथल रही। जब भी ट्रंप युद्ध का बयान देते तो तेल के दाम उछल जाते, जबकि वार्ता वाले बयान से शेयर बाजारों में तेजी आ जाती।

-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 21 May 2026

यूएई के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर हमला

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अल दफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के परिसर में रविवार को एक ड्रोन हमला हुआ और उसके बाद आग लग गई। हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। ईरान और यूएई अब जानी दुश्मन बन चुके हैं। ड्रोन से बराकाह न्यूक्लियर प्लांट को निशाना बनाया गया। इस अटैक को यूएई ने बिना किसी कारण के आतंकी हमला बताया। बहरहाल इस हमले की जिम्मेदारी  फिलहाल किसी भी समूह ने नहीं ली है। मगर यूएई का आरोप ईरान की तरफ ही है। यूएई का मानना है कि यह हमला ईरान ने ही ड्रोन के जरिए किया है। पिछले कई दिनों से ईरान-यूएई में तनातनी चल रही है। ईरान का मानना है कि यूएई खुलकर अमेरिका और इजरायल की मदद कर रहा है और उसकी भूमि से ही अमेरिकी हमले हो रहे हैं। खबर तो यहां तक है कि वर्तमान जंग के दौरान ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके मोसाद  प्रमुख ने यूएई का गुप्त दौरा किया था। ड्रोन हमले से बराकाह संयंत्र के बाहरी क्षेत्र में स्थित एक इलैक्ट्रिक जेनेरेटर में आग लग गई। यह आग संयंत्र की भीतरी परिधि के बाहर लगी थी। संघीय परमाणु नियामक प्राधिकरण (एफएएनआर) ने भी इस हमले की पुष्टि की कि आगे से संयंत्र की सुरक्षा या उसके जरूरी सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा है और सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रही है। सभी जरूरी एहतियाती कदम उठा लिए गए हैं और लोगों से अपील की गई है कि वे सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें और अफवाहों से बचें। बयान में ड्रोन हमले के स्त्राs के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी गई। ईरानी सूत्रों का कहना है कि हमने कोई हमला नहीं किया है तो फिर हमला किसने किया? क्या कोई तीसरी शक्ति अपना खेल तो नहीं खेल रही जो दोनों मुल्कों को लड़वा कर अपना उल्लू सीधा करना चाहती है। इससे पहले भी 5 मई को यूएई ने कहा था कि उसके कुछ क्षेत्रों पर ईरान से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया, लेकिन ईरान की सैन्य कमान ने इस आरोप से इंकार किया था। ईरानी अधिकारियों ने यूएई के उन आरोपों को भी खारिज किया था जिसमें ईरान पर हमला करने का दावा किया गया था। दरअसल यूएई को ईरान इसलिए अपना दुश्मन मान रहा है, क्योंकि उसे लगता है कि यूएई की धरती का इस्तेमाल करके ही अमेरिका ने उस पर अटैक किए हैं। बहरहाल इस हमले ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे नाजुक संघर्ष विराम को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ऐसा लग रहा है कि कूटनीतिक प्रयास भी अब काफी तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने इस हमले के पीछे के लोगों पर बिना किसी उकसावे के आतंकवादी हमला करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि वह अपनी देश की संप्रभुता पर किसी भी तरह के खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। दक्षिण कोरिया की मदद से बने और 2020 से चालू बराकाह  परमाणु संयंत्र अरब दुनिया का एक मात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। 20 अरब डालर की लागत से बना यह संयंत्र यूएई की लगभग एक चौथाई ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है।

-अनिल नरेन्द्र