दुनिया ने राहत की सांस ली जब यह घोषणा हुई कि अमेरिका-ईरान युद्ध में युद्ध बंदी हो गई है। पर मैं इसे सिर्फ युद्ध विराम ही कहता हूं, यह जंग की समाप्ति नहीं मानी जा सकती क्योंकि अभी सही मायनों में तो दोनों तरफों की शर्तें माननी बची हैं। फिलहाल तो इससे सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच बमबारी रुकी है। जंग रोकने के लिए अभी बहुत से पेंच फंसे हैं। मैं सबसे पहले अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और स्पीकर बागेर गालिबफ को बधाई देना चाहता हूं कि युद्ध में भारी पड़ने के बावजूद उन्होंने इस युद्ध विराम (सीजफायर) को रोकने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। मैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इसके लिए बधाई नहीं देना चाहता क्योंकि उन्होंने ही यह जंग शुरू की थी। जिसे बिना वजह जंग को शुरू किया था उसमें युद्ध विराम करके उन्होंने अपनी जान ही छुड़ाई है, किसी पर एहसान नहीं किया। उनके समर्थक उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स कह रहे हैं कि ट्रंप अब नोबल पुरस्कार के हकदार हैं? क्यों भाई ! कैसे हुए हकदार? पहले शुरू करो, फिर पिटो और अब बिना शर्तों के बमबारी रोकने की घोषणा करो? यह जो एमओयू पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं वह कितने कारगर सिद्ध होते हैं यह देखना बाकी है क्योंकि सबसे बड़ा पेंच तो नेतन्याहू बने हुए हैं। इजरायल ने साफ घोषणा कर दी है कि वह इस समझौते को नहीं मानता और न ही वह लेबनान पर लड़ाई बंद करेगा। जबकि ईरान की शर्तों पर यह शामिल है। ट्रंप की धमकियों के बावजूद, गाली-गलौच की परवाह न करते हुए इजरायल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और इस पूरी कोशिश में लगा हुआ है कि यह समझौता न हों। ईरान ने 14 बिंदुओं की मांग रखी है। ट्रंप ने भी दो बड़ी शर्तें रखी हैं। ईरान ने मांग की है कि शांति समझौते से पहले 24 अरब डालर की जब्त संपत्ति अमेरिका ईरान को दे। इस राशि का आधा हिस्सा यानी 12 अरब डालर बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को दी जाए। वहीं अमेरिका ने इस दावे पर अलग रुख अपनाया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान को किसी प्रकार की वित्तीय राहत तभी मिलेगी जब वह समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी विवाद है। बेशक ईरान ने होर्मुज को खोल दिया है पर अभी सिर्फ तय रास्तों से ही समुद्री जहाजों का आना शुरू हुआ है। होर्मुज को पूरी तरह से खोलने में समय लगेगा क्योंकि ईरान ने होर्मुज में बारुदी सुरंगें बिछा रखी हैं। जिन्हें हटाने में समय लग सकता है। ईरान हर जहाज से टोल भी वसूल कर रहा है। जिसे कर सर्विस चार्ज कह रहा है। अमेरिका ऐसा करने पर ऐतराज कर रहा है। खैर, होर्मुज के खुलने से पूरी दुनिया ने राहत की सांस जरूर ली है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और एनज्डि यूरोनियम के मुद्दे पर भी अभी सहमति बननी बाकी है। ईरान द्वारा उसके मिसाइल कार्यक्रम पर भी अमेरिका और इजरायल को आपत्ति है। इस मुद्दे पर दोनों पक्ष 60 दिनों की बातचीत में कोई निर्णय करेंगे। ईरान के उपविदेश मंत्री काजेम धरीबाबादी ने तस्लीन न्यूज एजेंसी से कहा कि अंतिम समझौते को लेकर अगले 6ˆ दिनों के भीतर बातचीत जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका अपने वादों पर किस हद तक टिका रहता है और पूरा करता है? ई&रान की प्रमुख मार्गों में सैन्य गतिविधियों को रोकना यानी की हर जंग को पूरी तरह रोकना, आर्थिक नाकाबंदी समाप्त करना और विदेशों में जमे हुए ईरानी फंडस को जारी करना शामिल है। समझौते में लेबनान में युद्ध विराम का भी प्रावधान शामिल है। वित्तीय मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद व्यापक समझौते को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली हैं। ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, फ्रांस और भारत ने इसका स्वागत किया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य मध्य-पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करना है। ऐसे में अगर समझौता सफल रहता है तो वैश्विक बाजारों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। बस यह टिका रहे? अंत में इजरायल-मोसाद कुछ भी कर सकता है। ईरानी लीडरशिप की हत्या भी करवा सकता है ताकि यह युद्ध विराम टूट जाए।
-अनिल नरेन्द्र