Thursday, 12 February 2026

ट्रंप झुकेगा बस झुकाने वाला चाहिए


अमेरिका के सर्वशक्तिमान, रेम्बो डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सामने झुक गए हैं। पिछले एक पखवाड़े से ज्यादा ट्रंप की फौजों, समुद्री जहाजों, फाइटर जैट्स ने ईरान को चारो तरफों से घेरा हुआ है पर ट्रंप ने हमला अभी तक नहीं किया। अरबों डॉलर खर्च करके भी उसकी हिम्मत नहीं पड़ रही कि ईरान पर हमला करे। दरअसल ईरान ने दिखा दिया है कि सैनिक तैयारी कैसी है। ईरान के पास ऐसी-ऐसी मिसाइलें हैं जो इजरायल तो छोड़िए अमेरिका तक मार कर सकती है। मध्य पूर्व में जहां-जहां भी अमेरिकी सैनिक अड्डे हैं वह सब ईरान की मिसाइलों की रेंज में हैं और यही तथ्य सउदी अरब, कतर, मिस्र, कुवैत आदि अरब देशों को सता रहा है। इजरायल ने तो 12 दिन की जंग में देख ही लिया था कि ईरान कितना विनाश कर सकता है। उसे डर है कि अब अगर लड़ाई छिड़ी तो वह तो नक्शे से ही मिट सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समझ नहीं आ रहा था कि वह आगे कैसे बढ़े? वह इतने आगे आ चुका है, अब पीछे हटना भी नाक कटाने जैसा होगा। इसलिए कुछ समय के लिए ट्रंप ने वार्ता का रास्ता चुना है। ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का पहला दौर पूरा हो चुका है। दोनों पक्ष आगे वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। लेकिन तनाव बरकार है और जंग की तैयारी पूरी चल रही है। खाड़ी देश ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई। दोनों देश आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी संदेशवाहक की भूमिका में रहे। ईरान की ओर से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची शामिल हुए जबकि अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विरकॉम और ट्रंप के दामाद जेरेड कोरी कुशनर मौजूद रहे। बातचीत से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप खुली चुनौती दे चुके थे कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए या अपनी मिसाइलों की दूरी कम नहीं की तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बावजूद ईरान ने दो टूक कहा कि न तो उसका यूरेनियम संवर्धन बंद होगा न ही वह अपनी मिसाइल प्रोडक्शन को सीमित या कम करेगा और न ही अपने प्रवासियों, हिजबुल्ला, हूती, हमास, इत्यादी को अपना समर्थन बंद करेगा। हां वह अमेरिका के साथ अपने न्यूक्लियर प्रोडक्शन पर बात कर सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने काहिरा में कहा कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ हुई वार्ताओं के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए रविवार को कहा कि ताकतवर देशों के आगे नहीं झुकने से ईरान को ताकत मिलती है। अरागची ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के साथ बातचीत का नया दौर जल्द शुरू होगा। उन्हेंने एक दिन पहले हुई वार्ता को एक अच्छी शुरुआत बताया, साथ ही चेताया कि भरोसा फिर से बनाने में समय लगेगा। अल जजीरा के साथ एक इंटरव्यू में अरागची ने यह भी साफ किया कि तेहरान अपने यूरेनियम एग्रीमेंट प्रोग्राम को नहीं छोड़ेगा जिसे उन्होंने एक ऐसा अधिकार कहा जिसे अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि उनका देश एक ऐसे एग्रीमेंट के लिए तैयार है जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भरोसा दिलाए और साथ ही उसकी संवर्धन गतिविधियों को भी बचाए। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अमेरिका की इस मांग को भी खारिज कर दिया कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी ओर वार्ता विफल होने पर ईरान को घातक अंजाम भुगतने की धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौता करने में विफल रहता है तो उसे वेनेजुएला से भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। अब देखना है कि मध्य पूर्व में शांति होती है या जंग। ईरान अपने स्टैंड पर अड़ा हुआ है और कहीं भी झुकने को तैयार नहीं है। पहला राउंड तो ईरान ने जीत लिया है। अब गेंद ट्रंप के पाले में है देखते हैं कि मध्य पूर्व में शांति होती हैं या जंग?
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 10 February 2026

यह जानलेवा कोरियन लव गेम


गाजियाबाद में तीन सगी बहनों का 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने की घटना ने एक बार फिर इन जानलेवा गेम्स की भारी कीमत चुकाने की याद दिला दी है। इस घटना को महज आत्महत्या कहना सच्चाई से आंखें मूंदना जैसा होगा। इन तीन नाबिलग बच्चियों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गाजियाबाद के शालीमार गार्डन की यह घटना कई दिनों सुर्खियों में है और कई तरह की बातें कही जा रही हैं। शालीमार गार्डन के एसीपी अतुल कुमार सिंह ने पत्रकारों को बताया चार फरवरी की रात लगभग सवा दो बजे सूचना मिली कि टीला मोड़ पुलिस स्टेशन क्षेत्र के तहत भारत सिटी में एक घटना हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची वहां तीन बच्चियों की ऊंची इमारत से गिरने के कारण मौत हो गुई थी। उन्हें एम्बुलेंस के जरिए लोनी के एक अस्पताल लाया गया, जहां डाक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। तीनों बहनों के नाम है 16 वर्षीय विशिका, 14 वषीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी। बारह, चौदह और सोलह वर्ष की उम्र तो सपनों को पंख लगाकर उड़ने की होती है। उस उम्र में मौत को गले लगाना भला किसके गले उतर सकता है? दरअसल हालात, स्थितियां और आभासी भावनाओं के झूठे संसार ने इन मासूमों को मौत की दर तक पहुंचाया। यह एक डिजिटल मर्डर है। यह दुखद हादसा खूनी डिजिटल एल्गोरिदम का परिणाम है। जो मोबाइल के जरिए हम सबके घरों में घुस आया है। यह घटना कोरियन लव गेम और उसके पीछे एल्गोरिदम की कारगुजारी है। शुरुआती जांच में मोबाइल फोन और कोरियाई संस्कृति के प्रति जुनून इस घटना का मुख्य कारण हो सकते हैं। लड़कियां कोरियाई संगीत, ड्रामा, हस्तियां, जापानी फिल्में और डोरेमान के अलावा हिट मैन जैसे कार्टूनों के साथ-साथ ऑनलाइन गेम्स की शौकीन थीं। साथ ही वे कोरियाई कल्चर से इस हद तक प्रभावित थीं कि उन्होंने अपने नाम भी बदल लिए थे। लेकिन ब्लूव्हेल जैसे टास्क आधारित गेम को इस घटना का एक मात्र या मुख्य कारण नहीं माना जा सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि तीनों बच्चियों की मौत शरीर से ज्यादा खून निकलने और चोट से हुई है। ऊंचाई से गिरने के कारण कई हड्डियां टूटी थीं। परिवार आर्थिक तंगी की मार झेल रहा था और घर में कलह ने भी चीजें सुरक्षित बना दी थीं। कमरे में एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें सॉरी पापा लिखा हुआ था। इस घटना के बाद बच्चों के बीच फोन एडिक्शन को लेकर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई मां-बाप का कहना है कि हमारे बच्चे रात को सो नहीं पा रहे हैं। वे इतने डरे हुए हैं। बाल मनोचिकित्सक नीलेश देसाई कहते हैं कि फोन एडिक्शन रसायनिक पदार्थों की लत जैसा ही है। किशोरावस्था एक नाजुक अवस्था है। जहां बदलते समाज के साथ टेक्नोलॉजी का आक्रमण बढ़ रहा है। इस स्थिति में जब कोई किशोर या किशोरी से परिवार एकदम से फोन छीन लेता है तो एक आपदा सी खड़ी हो जाती है। एक बच्चे के लिए ये एक रसायनिक पदार्थ के एडिक्शन से कम नहीं है। डाक्टर भावना वर्मा बताती हैं, लंबे समय से स्कूल न जाने का मतलब पढ़ाई छूटने से नहीं है। यह मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का एक सिलसिला खड़ा कर देता है। स्कूल किशोरों के स्वस्थ विकास के लिए केवल तथ्य सीखने की जगह से कहीं अधिक एक अहम स्ट्रक्चर के तौर पर काम करता है। मैंने कई किशोरों और परिवारों को परामर्श दिया है। जहां के पॉप, के-ड्रामा, कोरियाई सौंदर्य रुझान और आइडल्स के प्रति तीव्र आकर्षण एक सामान्य रूचि से कहीं अधिक गहरा हो गया है जोकि बच्चों के लिए बहुत हानिकारक हो चुका है। गाजियाबाद की घटना हर उस माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जो यह सोच कर निश्चिंत बैठे हैं कि उनका बच्चा कमरे में सुरक्षित मोबाइल चला रहा है। कोरियन लव गेम जैसे डिजिटल खेल बच्चों की भावनाओं, असुरक्षा बोध का फायदा उठाकर उन्हें टाक्स पूरा करने के लिए मजबूर करते हैं। इसी का एक नतीजा गाजियाबाद की। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के रूप में सामने आया है। ऐसी खतरनाक, जानलेवा गेम्स पर तुरन्त बैन लगाना चाहिए।
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 7 February 2026

ट्रेड डील में कृषि सेक्टर पर विवाद


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बनने और साथ ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ को कम करते हुए 18 प्रतिशत करने की जानकारी दी। हालांकि इस ट्रेड डील की विस्तृत जानकारी आना अभी बाकी है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत भारत सरकार के कई मंत्रियों ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। लेकिन विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि इस ट्रेड डील में किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों को नजरअन्दाज किया गया है। इसका जवाब देते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में कहा कि भारत ने अपने एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टरों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया है। गोयल ने कहा कि ट्रेड डील पर अंतिम दौर की बातीत में ब्यौरे तय किए जा रहे हैं और बहुत जल्द भारत और अमेरिका की ओर से इस पर एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। ट्रंप ने दूसरी ओर ट्रूथ सोशल पर को जानकारी दी उसमें कहा गया है कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ और नॉन टैरिफ बैरियर्स को जीरा करेगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका से अधिक खरीद पर सहमति जताई है जिसमें 500 अरब डॉलर से अधिक की अमेरिकी ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि, कोयला और अन्य कई उत्पादों की खरीद शामिल है। इसके बाद अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस ने भी इस डील को अमेरिकी किसानों के लिए लाभदायक बताते हुए कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार तक पहुंच बढ़ने और इसमें 1.3 अरब डॉलर के भारत के साथ अमेरिकी कृषि व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। भारत की चिंताओं पर अगर हम नजर डालें तो एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में खेती से क्षेत्र की आधी आबादी यानि करीब 70 करोड़ लोगों का भरण-पोषण हो रहा है और यह सेक्टर भारत की रीढ़ बना हुआ है। खेती भारत के करीब आधे कामगारों को रोजगार देती है। अमेरिका कई सालों से भारत पर कृषि क्षेत्र को व्यापार के लिए खोलने के लिए दबाव बना रहा है। भारत खाद्य सुरक्षा, आजीविका और लाखों किसानों के हित का हवाला देकर इससे बचता रहा है। भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार 8 अरब डालर का है, जिसमें भारत चावल, झींगा और मसाले निर्यात करता है और अमेरिका मेवे, सेब और दालें भेजता है। अमेरिका अब अपने 45 अरब डालर के व्यापार घाटे को कम करने के लिए मक्का, सोयाबीन और कपास के बड़े कृषि निर्यात के लिए दरवाजे खोले जाने की मांग करता रहा है। विशेषज्ञों को डर है कि टैरिफ रियायतों को लेकर भारत को अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी और सार्वजनिक खरीद को कम करने के लिए दबाव डाल सकती है। ये दोनों भारतीय किसानों के प्रमुख कवच हैं, जो उन्हें अपनी फसलों को उचित दाम की गारंटी देकर उन्हें कीमतों में अचानक कमी से बचाती है और अनाज खरीद को सुनिश्चित करती है। दिलचस्प बात है कि भारत के नीति आयोग के एक ताजा दस्तावेज में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत चावल, डेयरी, पोल्ट्री, मक्का, सेब, बादाम और जीएम सोया सहित अमेरिकी कृषि आयात पर टैरिफ कटौती की सिफारिश की गई है। इस ट्रेड डील में क्या-क्या शर्तें है या क्या कुछ अमेरिका ने मांगा है या हमने स्वीकार किया है उसे स्पष्ट करना चाहिए। क्या भारत सरकार ने कृषि, डेयरी सेक्टर भी खोल दिए हैं?
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 5 February 2026

मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई की मूर्ति पर विवाद


उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर पिछले कई दिनों से सुर्खियों में बना हुआ है। हिन्दुओं की धार्मिक नगरी के रूप में चर्चित वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है। वह 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां से तीसरी बार निर्वाचित हुए हैं। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने की वजह से वाराणसी में विकास की कई परियोजनाएं चल रही हैं। इसी कड़ी में ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट का भी पुनर्विकास किया जा रहा है। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके लिए पहले पुराने ढांचों को तोड़ा गया है। इस तोड़फोड़ को लेकर स्थानीय लोग नाराज भी हैं। काशी के पाल समाज के अध्यक्ष महेंद्र पाल कहते हैं कि जब मूर्ति खंडित की गई तो उन्होंने विरोध किया था। कई लोगों का आरोप है कि वहां मौजूद इंदौर के पूर्व राजघराने की अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति भी टूट गई है। लेकिन वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी इससे साफ इंकार करते हैं। उनका कहना है कि मूर्ति सुरक्षित रखी गई है, जिसे बाद में स्थापित कर दिया जाएगा। अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति टूटने के दावों के बाद वहां विरोध प्रदर्शन भी हुए। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को हिरासत में भी लिया। विरोध प्रदर्शन में शामिल काशी के पाल समाज के अध्यक्ष महेंद्र पाल कहते हैं, अहिल्याबाई होल्कर हम लोगों की पूर्वज रही हैं और वो पाल समाज की महिला थीं। उन्होंने दावा किया हम लोग मौके पर पहुंचे थे और तोड़-फोड़ देखी थी। जेसीबी लगाकर मूर्ति को तोड़ा जा रहा था। इसलिए जब उनकी मूर्ति खंडित की गई तो हमने विरोध किया। लेकिन पुलिस ने हमें वहां जाने नहीं दिया। वैसे तो वाराणसी में 80 से अधिक घाट हैं लेकिन मणिकर्णिका घाट को धार्मिक रूप से अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी घाट के पुनर्विकास के लिए काम शुरू हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुनर्विकास के नाम पर प्राचीन परंपराओं और स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। अजय शर्मा काशी में मूर्तियों की स्थापना का काम करते हैं। उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा यहां जो टूटी है वह मणि टूटी है। मेरा विरोध हमारे पौराणिक विग्रहों के संरक्षण के लिए है। विकास का कोई विरोध नहीं है। नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण का भी यहां कोई व्यक्ति विरोध नहीं करता। अजय शर्मा कहते हैं कि अहिल्याबाई की जो मूर्ति थी या गणेश जी की मूर्ति थी या गंगा स्वरूप की जो मूर्ति थी, वे नष्ट नहीं हुई। लेकिन वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी ने सभी आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि सभी मूर्तियां संरक्षित की गई हैं और घाट के विकास के बाद उन्हें दोबारा स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा, मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास की योजना पर काम किया जा रहा है ताकि इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सके। इसके अंतर्गत शव जलाने के लिए चिमनीयुक्त 38 प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं, जिससे खासकर बरसात के मौसम में शवदाह में आसानी होगी। अशोक तिवारी ने बताया अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले लोगों के लिए अप्रोच रैम्प, प्रतीक्षालय और व्यूइंग गैलरी बनाई जाएगी। लकड़ी ढुलाई के लिए अलग रैम्प, पंजीकरण कार्यालय और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी। अशोक तिवारी का दावा है कि ये काम डोमराजा के कहने पर ही प्रधानमंत्री ने शुरू कराया है। हालांकि इस सब विवाद के बीच पुनर्विकास का काम जारी है। इस जगह पर शवदाह का काम चलता रहता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने से मोक्ष प्राप्त होता है।
-अनिल नरेन्द्र

Sunday, 1 February 2026

अजित पवार प्लेन क्रैश से जुड़े सवाल


आखिर हम इन हवाई दुर्घटनाओं में कितनी कीमती जानें गंवाएंगे? अगर हाल ही के प्लेन क्रेशों पर नजर डाले तो 2021 में सीडीएस जनरल विपिन रावत, भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का दिसम्बर 2021 तमिलनाडु के कुनूर के पास एयर क्रेश में मृत्य हो गई। दो सितम्बर 2009 को आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) का हेलीकाप्टर नालामाला जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 30 अप्रैल 2011 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दोइली खांदू को तवांडा से ईटानगर ही रहे हैं हेलीकाप्टर क्रेश हो गया और उनकी मृत्यु हो गई। हाल ही में 2025 (12 जून) को अहमदाबाद में भयंकर एयर क्रेश में पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी सहित 292 यात्रियों की मौत हो गई। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी का निधन भी एक हेलीकाप्टर क्रेश में हुआ। और अब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित दादा पवार की प्लेन क्रेश में मृत्यु हो गई। पूर्वी जिले के बारामती में हुए इस हादसे की अब कई कोणों से जांच की जा रही है। क्या यह महज दुर्घटना थी, पायलट एटर था या फिर कोई साजिश थी? इसका झराब तो गहन जांत से मिल सकता है। अगर कभी मिला भी? क्योंकि आज तक जितने भी क्रेश हुए हैं आज तक उनमें से किसी का भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला, यह नहीं पता चल सका कि दुर्घटना का असल कारण क्या था? अजित दादा पवार के प्लेन क्रेश पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक विजिवलिटी कम होने की वजह से बारामती में रनवे नहीं दिखा और लैडिंग की कोशिश नाकाम हो गई। अगर पं. बंगाल की मुख्यमंत्री सहित कई नेताओं ने हादसे पर सवाल उठाए हैं और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। हालांकि, अजित पवार के चाचा शरद पवार ने हादसे के पीछे किसी भी तरह की राजनीति होने की बात से इंकार करते हुए कहा कि यह महज एक दुर्घटना थी। हादसे के बाद शुरुआती जानकारियां भी सामने आ चुकी हैं लेकिन अब भी कई ऐसे अहम सवाल हैं जिनके जवाब देश चाहता है। आखिरी पलों में क्या हुआ? लैडिंग के दौरान किन हालात ने खतरा बढ़ाया और क्या सुरक्षा प्रोटोकाल का पूरी तरह पालन हुआ ये वो सवाल है जो इस पूरे मामले को और गंभीर बना रहे हैं। हमें इन सवालों का जवाब चाहिए उनमें प्रमुख हैं ः खराब विजिविलिटी में लैडिंग की कोशिश क्यों की गई? क्या यह संभव था कि विमान वापस चला जाता (अगर उसमें ईंधन काफी था)? लैडिंग व्लीटेंस के बाद अचानक क्या हुआ? कितना सुरक्षित है लियर जेट-45 विमान? नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार वीटी-एसएस थे - एलजे 45 चार्टर विमान माध्यम आकार का बिजनेस जेट है। जिन्हें कनाडा की कंपनी बम्बारडियर एटोस्योन ने बनाया है इसमें 8 यात्रियों के बैठने की जगह है। ये विमान छोटे रनवे वाले हवाई अड्डे पर भी आसानी से उतर सकता है। यह भी पता चला है कि इससे पहले 14 सितम्बर 2023 को, ऐसा ही विमान मुंबई में लैडिंग के बाद रनवे से फिसल गया था और दो हिस्सों में टूट गया था। बुधवार के हादसे के बाद एक बार फिर से सवाल खड़ा हो गया है कि ये विमान कितना सुरक्षित है? क्या लैडिंग एप्रोच सुरक्षित थी? हादसे के चश्मदीदों ने बताया कि विमान को हवा में देखकर ही लग रहा था कि वे लैंड नहीं कर पाएगा। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जब विमान नीचे आ रहा था, ऐसा लग रहा था कि वह क्रेश हो जाएगा। तभी तो क्रेश हो गया। डीजीसीए के बयान में ये बताया गया है कि विमान के पायलट ने पहले रनवे न दिखाई की सूचना दी और बाद में ये सूचना दी गई कि रनवे दिख रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आया है कि जिसमें विमान हवा में ही पलटते हुए दिख रहा है। किसी भी विमान हादसे के बाद मे ये शब्द का इस्तेमाल कई बार होता है। ये शब्द एबिएशन और मैरिटरपून इमरजेंसी के लिहाज से बहुत अहम है। एक अन्य पायलट ने कहा कि मेडे कॉल न किया जाना इस ओर इशारा करता है कि आखिरी वक्त तक पायलट का विमान नियंत्रण में था। उन्होंने कहा कि अगर विमान के इंजन फलियर हुआ होता या कोई और समस्या होती तो पायलटों ने मेडे वाल दी होती। इन सवालों का जवाब देश चाहता है। पर पता नहीं कभी मिले या यह भी इतिहास का एक पन्ना बनकर रह जाएगा?
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 31 January 2026

ईरान की ट्रंप को धमकी

 
जिस तरह से अमेरिका ने ईरान को चारो तरफ से जंगी उपकरणों व अत्याधुनिक हथियारों से इस समय घेर रखा है ऐसा जमावड़ा हमने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कभी नहीं देखा। एयराफ्ट कैरियरों, 500 लड़ाकू विमानों, हजारों सैनिकों से इस टाइम ट्रंप ने आयतुल्ला खामनेई को घेर रखा है। ट्रंप ने ईरान पर परमाणु समझौता वार्ता के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से यह जंगी बेड़ा भेजा है। ट्रंप ने ईरान को सीधी धमकी दी है कि वह परमाणु समझौता कर ले वरना उस पर अगला हमला और भीषण होगा। उधर ईरान ने चेतावनी दी कि उसकी सेना किसी भी अमेरिकी भी सैन्य ऑपरेशन का जोरदार जवाब देगी। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि उनकी सेना तैयार है और देश पर किसी भी हमले का जोरदार जवाब देने के लिए ट्रिगर पर उंगली रखे हुए हैं। अरागची की टिप्पणी ट्रंप के धमकी के बाद आई है। जिसमें ट्रंप ने कहा था कि इस विवादित परमाणु कार्पाम पर अमेरिका के साथ डील करे वरना उसे बड़े पैमाने पर अमेरिकी हमले का सामना करना पड़ेगा। उधर ट्रंप ने अपनी बात रखते हुए कहा, ईरान के पास हमारा बड़ा जंगी बेड़ा है, वेनेजुएला से भी बड़ा तेहरान में मौजूद अधिकारी लगातार संकेत दे रहे हैं कि ईरान वार्ता के लिए तैयार है। ट्रंप ने कहा वे समझौता करना चाहते हैं मुझे पता है। उन्होंने कई बार कॉल भी किया है। ट्रंप ने आगे कहा उम्मीद है कि ईरान जल्द ही बातचीत के लिए तैयार होगा और एक निष्पक्ष और बराबरी का समझौता करेगा। कोई परमाणु हथियार नहीं... जो सभी पक्षों के लिए अच्छा हो। समय कम है और यह सच में बहुत जरूरी है। अगला हमला और भीषण होगा। इसे मत होने दो। ट्रंप की धमकियों के बीच मध्य-पूर्व के अरब देशों में भी हलचल बहुत तेज हो गई है। सऊदी अरब, तुर्किए, कतर इत्यादि देशों के अध्यक्ष व राजा अपनी पूरी ताकत लगा रखे हैं कि जंग टल जाए। सऊदी बादशाह सलमान ने तो पूरी ताकत झोंक दी है। यह इसलिए भी है कि ईरान ने खुली धमकी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल की तरफ से कोई हमला होता है तो ईरान, अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल मार देगा और उन्हें तबाह कर देगा। बता दें कि सऊदी अरब सहित तमाम अरब देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं। जहां हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और सैकड़ों लड़ाकू विमान इत्यादि रखे हुए हैं। अगर लड़ाई छिड़ती है तो एक तरफ ईरान इजरायल को तबाह कर देगा और दूसरी तरफ मध्य-पूर्व में तमाम अमेरिकी सैन्य अड्डों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। ईरान खुद जंग के लिए पूरी तरह तैयार है। वह पिछले 20 साल से इस दिन का इंतजार कर रहा है। इस दौरान उसने दुनिया की सबसे प्रभावी मिसाइलों का निर्माण कर लिया है। उसने ऐसी-ऐसी मिसाइलें तैयार कर ली हैं जो 10 हजार प्रति घंटा की स्पीड से बहुत दूरी तक मार कर सकती है। दुनिया ने पिछले साल बारह दिन की जंग में ईरान ने इजरायल का क्या हाल किया था, सभी ने देखा था। इस बीच खबर ये भी आई है कि सऊदी अरब ने स्पष्ट कहा है कि अगर ईरान पर अमेरिका हमला करता है तो सऊदी हमले के लिए अपनी जमीन नहीं देगा। सऊदी अरब के युवराज व प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सउद ने कहा है कि उनका देश ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देगा। मध्य-पूर्व एशिया में इस समय जंगी बादल मंडरा रहे हैं और किसी भी छोटी चिंगारी से अचानक युद्ध छिड़ सकता है। हम ऊपर वाले से प्रार्थना करते हैं कि यह जंग टल जाए और बातचीत से मसला हल हो जाए और पूरी दुनिया जंग की तबाही से बच जाए। 
-अनिल नरेन्द्र

Friday, 30 January 2026

महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा


महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की बुधवार को विमान दुर्घटना में मौत से जहां पूरा देश स्तब्ध है, शोक में डूबा हुआ है वहीं यह भी प्रश्न उठ रहा है कि उनकी अकस्मात मृत्यु से महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? 66 साल के अजीत पवार का निजी विमान महाराष्ट्र के बारामती में लैंड करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बता दें कि अजीत पवार ने जुलाई 2023 में अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से बगावत कर दी थी। 2023 में 2 जुलाई को वे अपनी पार्टी के 8 सदस्यों के साथ महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए थे और सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। शरद पवार से बगावत कर एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने के अपने फैसले पर अजीत पवार ने कहा था, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रगति कर रहा है, इसलिए भाजपा के साथ कुछ मतभेद होने के बावजूद एनसीपी ने महाराष्ट्र की प्रगति के लिए सरकार के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया है। नवम्बर 2024 में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हुए और अजीत पवार अपने चाचा पर भारी पड़े। हालांकि छह महीने पहले ही लोकसभा चुनाव में अजीत पवार की पार्टी को केवल एक सीट पर ही जीत मिली थी। तब अजीत पवार को महाराष्ट्र की सत्तारुढ़ भाजपा नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी कहा जा रहा था। लेकिन विधानसभा चुनाव में अजीत पवार सबसे मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरे। उन्होंने 41 विधानसभा सीटें हासिल की और लगभग अपने चाचा के विद्रोही गुट एनसीपी (एसपी) को खत्म कर दिया। जो केवल 10 सीटें ही जीत सकी। अजीत पवार ने 5 दिसम्बर 2024 को रिकार्ड छठी बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। विश्लेषक कहते हैं कि शरद पवार की छाया में 20 साल बिताने के बाद अजीत पवार को लगा कि चाचा उनके रास्ते में बाधा बन रहे हैं इसलिए उन्होंने अपना रास्ता ढूंढ़ लिया। 5 फरवरी से महाराष्ट्र जिला परिषद पंचायत समिति के चुनाव होने जा रहे हैं। इसी के प्रचार के लिए अजीत दादा पवार बारामती जा रहे थे। एनसीपी का पूरा दायित्व अजीत पवार के ऊपर ही था। अजीत पवार का निधन तब हुआ है, जब शरद पवार राजनीतिक रूप से बहुत कमजोर हो गए हैं। जिला परिषद के चुनाव में अजीत अपने चाचा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले थे। अब मुझे लग रहा है कि पूरी सहानुभूति शरद पवार के साथ जाएगी। भाजपा के उभार के बाद से महाराष्ट्र में मराठा नेताओं की हैसियत कमजोर हुई है और इसका अहसास प्रदेश में सबको है। मराठा जाति का वर्चस्व खेती, शिक्षा और बैंकिंग पर खत्म हो चुका है। शरद पवार के साथ अब मराठा जाति की सहानुभूति आएगी। ग्रामीण महाराष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था पर अब भी मराठा जाति की पकड़ है और इन्हें अब लग रहा है कि भाजपा के आने से उनकी पकड़ कमजोर पड़ रही है। देवेन्द्र फडणवीस की सरकार में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और अजीत पवार की अगुवाई वाली एनसीपी है। अजीत पवार के निधन के बाद एनसीपी अगर इस सरकार से हट जाती है तब भी सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भले सरकार सत्ता में बनी रहेगी लेकिन फर्क दूसरी तरह से पड़ेगा। मराठा जाति अजीत पवार के निधन के बाद सोचेगी कि अब उनके पास कौन है? शरद पवार खुद ही जीवन के सांध्य काल में हैं। पूरा मराठा तबका अब सोचेगा कि उन्हें किस तरफ रुख करना है? एक विश्लेषक का कहना है कि अजीत पवार महाराष्ट्र की राजनीति में हिन्दुत्व के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी ताकत बनाए हुए थे और यह बड़ी बात थी। भाजपा और शिवसेना दोनों हिन्दुत्व की राजनीति करते हैं। भाजपा की अगुवाई वाली सरकार स्थिर रहेगी लेकिन मराठा राजनीतिक का उभार हो सकता है। एनसीपी फिर से शरद पवार के नेतृत्व में एकजुट हो सकती है और यह भाजपा की मजबूती के हक में नहीं होगी। अजीत पवार को देवेन्द्र फडणवीस सरकार में एकनाथ शिंदे की शक्ति संतुलन करने के रूप में भी देखा जाता था। कहा जाता है कि अगर अजीत दादा पवार का साथ नहीं होता तो नवम्बर 2024 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बनने के लिए अड़ सकते थे। ऐसे में भाजपा के पास विकल्प था वह अजीत पवार के साथ सरकार बना ले। हम अजीत पवार को अपनी श्रद्धांजलि देते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके परिवार को इस भारी क्षति से उभरने का साहस दें। 
-अनिल नरेन्द्र