एक भारतीय व्यक्ति ने पावार को न्यूयार्क में सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की 2023 में हत्या की नाकाम साजिश रचने के आरोप में दोष स्वीकार किया है। पता नहीं पिछले कुछ दिनों से भारत और अमेरिका के ग्रह टकरा रहे हैं। एक के बाद एक नई समस्या खड़ी होती जा रही है। पहले गौतम अडानी का मामला फंसा, फिर भारत-अमेरिका ट्रंप डील पर विवाद खड़ा हो गया और अब पन्नू की हत्या की साजिश में मामला फंस गया है। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा है कि यह उस मामले में पहली बार अपराध स्वीकार किया गया है जिसे कनाडा और अमेरिका के अधिकारियों ने भारत सरकार की ओर से असंतुष्टों की हत्या के अभियान से जुड़ा बताया था। अमेरिका में भारतीय मूल के निखिल गुप्ता ने अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश रचने के मामले में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। इस मामले की सुनवाई न्यूयार्क की एक अदालत में हो रही है। अटार्नी के दफ्तर से जारी हुए बयान के मुताबिक गुप्ता ने हत्या के लिए सुपारी देने, हत्या की साजिश रचने के साथ ही मनी लांड्रिंग की साजिश से जुड़े तीनों आरोपों को स्वीकार कर लिया है। गुप्ता को 27 मई को सजा सुनाई जाएगी। अमेरिका में इन तीनों आरोपों में सम्मिलित तौर पर 40 साल की सजा हो सकती है। गुप्ता के 30 जून 2023 को चेक रिपब्लिक से गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसका प्रत्यर्पण किया गया। आरोप है कि निखिल गुप्ता ने ये साजिश भारतीय सरकारी कर्मचारी रहे विकास यादव के कहने पर रची, इस संबंध में विकास यादव को सीसी-1 कहकर संबोधित किया गया है। इस संबंध में मार्च 2025 में ही विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वो (विकास यादव) अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं है। आरोप पत्र के मुताबिक 2023 में यादव ने गुप्ता को हत्या का काम सौंपा था। यादव के कहने पर गुप्ता ने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया जो असलियत में अमेरिका की जांच एजेंसी डीईए का ही अंडरकवर एजेंट था विकास यादव ने एक सहयोगी के जरिए इस हिटमैन को अग्रिम भुगतान के तौर पर 15 हजार डालर दिए। 2023 में ही विदेश मंत्रालय ने कहा था कि निखिल गुप्ता को तीन बार चेक गणराज्य में काउंसलर मदद दी गई। यूं तो मामला अमेरिका में 2023 से चर्चा में है, लेकिन इस मामले में इस हालिया घटपाम की टाइमिंग को भी अहम माना जा रहा है। जब भारत और अमेरिका के संबंध बहुत सहज नहीं हैं और दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर एक व्यापार के अंतरिम समझौते के अगले महीने तक आखिरी रूप लेने की उम्मीद है। ऐसे में भारत के लिए आगे की राह आसान नहीं दिखती। न्याय विभाग ने पन्नू की हत्या को साजिश और 18 जुलाई को कनाडा में खालिस्तानी निज्जर की हत्या के बीच कई लिंक जोड़े हैं। एफबीआई के सहायक निदेशक रोमन रोज से जावस्की ने कहा अमेरिकी नागरिक सिर्फ बोलने की आजादी का इस्तेमाल करने के लिए ट्रांसनेशनल रिप्रेशन का निशाना बना। यानी दमन के लिए किसी दूसरे देश की धरती का इस्तेमाल की साजिश है। इन शब्द का इस्तेमाल कनाडाई अधिकारियों ने कनाडा में निज्जर की हत्या पर किया था। भारत सरकार के इशारे पर की गई बताई गई है जिसे भारत सिरे से खारिज कर चुका है। भारत ने पिछले साल नवम्बर में अमेरिका की ओर से उठाई गई सुरक्षा चिंताओं पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच एजेंसी गठित की थी। अक्टूबर 2024 में भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की थी कि पन्नू के खिलाफ नाकाम हत्या की साजिश से जुड़े अमेरिकी न्याय विभाग के अभियोग में जिस व्यक्ति (विकास यादव) का नाम सामने आया था, वह अब भारत सरकार की सेवा में नहीं है। मूल अभियोग में सरकारी अधिकारी को सीसी-1 कहा गया था। अक्टूबर 2024 में ही अमेरिकी अधिकारियों ने दूसरा संशोधित अभियोग सार्वजनिक किया, जिसमें सीसी-1 की पहचान विकास यादव के रूप में की गई। बाद में विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश विभाग ने हमें सूचित किया कि अभियोग में उल्लेखित व्यक्ति अब भारत में कार्यरत नहीं है। हम पुष्टि करते हैं कि वह अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। अब देखना यह है कि निखिल गुप्ता के खिलाफ अमेरिकी अदालत में केस आगे कैसे बढ़ता है। यह भी देखना होगा कि विकास यादव को लेकर अमेरिका भारत पर कितना दबाव बनाता है और भारत सरकार आगे क्यों करेगी?
-अनिल नरेन्द्र