Tuesday, 3 March 2026

अयातुल्लाह खामेनेई की शहादत


मैं सबसे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को अपनी श्रद्धांजलि पेश करना चाहता हूं। दुनिया अयातुल्लाह खामेनेई की शहादत को याद रखेगी। उनकी बहादुरी की मिसाल शहादत के हर पा में अव्वल रहेगी। वह यह जानते थे कि वह अमेरिका और इजरायल के निशाने पर हैं और उन पर किसी भी क्षण हमला हो सकता है। फिर भी वह तेहरान छोड़कर नहीं भागे। न तो किसी बने शैल्टर में गए और न ही किसी गुप्त स्थान पर। उन्होंने अपने दफ्तर में काम करते हुए शहादत को गले लगाना चुना। वह अपने देश के लिए कुर्बान हो गए पर दुश्मन के सामने पीठ नहीं दिखाई। बेशक आज डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू खामेनेई को मारकर विजेता होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने खामेनेई की हत्या करके बड़ा जोखिम मोल ले लिया है। खामेनेई की शहादत ने सारे ईरान व इस्लामी जगत को अमेरिका और इसरायल के खिलाफ खड़ा कर दिया है। उसके नतीजे सामने आने भी लगे हैं। कुवैत, यूएई, कतर, बहरीन पर ईरानी मिसाइलें गिर रही हैं। यूएई पर तो इस लेख लिखने तक 167 मिसाइलें गिर चुकी हैं। ईरानी पलटवार का कहर सबसे ज्यादा यूएई पर टूटा है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा, ईरान की तरफ से देश के कई हिस्सों में अब तक 165 बैलिस्टिक मिसाइल, 2 ाtढज मिसाइल और 541 ईरानी ड्रोन से हमला किया जा चुका है। इनमें से 506 को हवा में रोककर नष्ट कर दिया गया, जबकि 35 देश के अन्य इलाके में गिरी। दुबई विशेष टारगेट पर है क्योंकि यहां अमेरिकी कंपनियों के मुख्यालय हैं और ईरान अमेरिका की आर्थिक ताकत को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए वह ऐसे स्थानों पर हमले कर रहा है जहां अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनियां हैं। अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे कैसे गए? यह प्रश्न सब पूछ रहे हैं। क्या कोई मोसाद-सीआईए का स्लीपर एजेंट था जिसने सटीक जानकारी दी थी कि खामेनेई किस समय कहां होंगे और मीटिंग में कौन-कौन होगा? बिना इस सटीक जानकारी के यह हमला संभव ही नहीं था। फिर सवाल यह भी उठता है कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम क्या कर रहे थे? वह इस मिसाइल या बमों को इंटरसेप्ट क्यों नहीं कर सके? क्या अमेरिका ने ईरान के राडार हमले से पहले जाम कर दिए थे? इसरायल के एफ-35 फाइटर जेट्स ने ईरान एयर डिफेंस को भेदते हुए तेहरान में खामेनेई बेत-ए-रहबरी पैलेस पर दो हजार किलो के 40 बंकर बस्टर बम गिराए। ये लेजर गाइडेड पैनिट्रेटर है यानि पैलेस के अंडरग्राउंड में भी छिपे खामेनेई को मार गिराया जा सके। इजरायली सेना ने कई तरह की मिसाइलों से भी हमला किया। हमले में रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह, आर्मी चीफ आमिर हातामी और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के चीफ मोहम्मद पाकपुर समेत लगभग 40 आला अफसर और धार्मिक नेता मारे गए। सूत्रों के अनुसार इनमें से लगभग 15 खामेनेई के पैलेस में एक मीटिंग के लिए जमा हुए थे। अमेरिका और इजरायल चाहता है कि ईरान में निजाम यानि रजीम चेंज हो। देखना यह होगा कि वह अपने इस उद्देश्य में कितना कामयाब रहता है। फिलहाल तो ईरान की बदले की कार्रवाई से बचने का प्रयास हो रहा है। तेहरान ने बड़ी जवाबी कार्रवाई में कुवैत, कतर और बहरीन में अमेरिका के कई बड़े मिलिट्री बैस पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी हैं। इनमें नुकसान की खबर भी आई है। सऊदी अरब और जार्डन में भी हमले की खबर है। अयातुल्लाह खामेनेई मरने से पहले ही दूसरी पंक्ति खड़ी करके गए थे। ईरान ने हमले के तुरन्त बाद ही जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। देखें, यह जंग आगे कितनी बढ़ती है, कहीं यह तीसरे विश्व युद्ध की शक्ल तो नहीं लेता? 
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 28 February 2026

मोदी की इजरायल यात्रा और अरब मीडिया


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनके करीबी रिश्ते और इजरायली संसद में दिया गया उनका भाषण इन सबकी चर्चा अरब मीडिया में खूब हो रही है। अरब मीडिया इस यात्रा को सिर्फ भारत-इजरायल संबंधों के तौर पर नहीं बल्कि बड़े क्षेत्रीय समीकरणों के तौर पर पेश कर रहे हैं। कई अरब विश्लेषकों ने पा किया है कि जहां ऐतिहासिक रूप से भारत टू नेशन थ्योरी की बात कहता है और फिलस्तीनी क्षेत्र में शांति प्रयासों का समर्थन करता है, वहीं मोदी की लीडरशिप में वो इजरायल के बेहद नजदीक आ चुका है। अरब मीडिया इस बात पर भी फोकस कर रहा है कि भारत का मौजूदा स्टैंड इजरायल और फिलस्तिनियों के संबंध में उसके पारम्परिक स्टैंड से अलग दिशा में जा रहा है। जहां पहले भारत की विदेश नीति में इस बात पर जोर था कि इजरायल और फिलस्तीनी महत्वकांक्षा, दोनों से ही समान दूरी बनाए रखेगा, वहीं अब भारत की विदेश नीति के केंद्र में हित आधारित संबंध ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। अरब मीडिया के मुताबिक भारत अपने पड़ोसियों से तनावपूर्ण रिश्तों और अपनी सैन्य जरूरतों के मद्देनजर आज वो इजरायल के ज्यादा नजदीक जा रहा है। अरब मीडिया ने प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के पा के साथ-साथ गाजा में इजरायल पर लगे नरसंहार के आरोपों को भी हाइलाइट किया। साथ ही भारत के विपक्षी नेताओं की उन टिप्पणियों को भी अपनी कवरेज में शामिल किया है जिनमें वो इजरायल पर लगे इन आरोपों के मद्देनजर पीएम की यात्रा का विरोध कर रहे हैं। अल जजीरा के इजरायल-फिलस्तीन मामलों के जानकार अन्जाम अबु अल अदस कहते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री की ये यात्रा गहरे रणनीतिक बदलाव का प्रतीक है। भारत-इजरायल साझेदारी इस क्षेत्र में एक नए क्षेत्रीय ध्रुवीकरण को जन्म देगी। आने वाले समय में मध्य पूर्व और एशिया की राजनीति में भारत-इजरायल की अहम भूमिका होगी। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपने भाषण में भारत के साथ सैन्य साझेदारी का संकेत दिया। इससे साफ है कि इस क्षेत्र में पाकिस्तान, तुर्की व सउदी अरब के संभावित गठबंधन को चुनौती पेश करने के लिए भारत और इजरायल सहयोगी देशों के रूप में नजदीक आ रहे हैं। भारत इजरायल के साथ इस गठबंधन को पाकिस्तान के साथ अपने क्षेत्रीय संघर्ष और एशिया में अपनी सैन्य, कूटनीतिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। वहीं अल जजीरा ने मोदी के इजरायली संसद में दिए गए संबोधन पर लिखा ः गाजा में इजरायल पर नरसंहार के गंभीर आरोपों के बावजूद भारत ने इजरायल से एकजुटता दिखाई और प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा में इजरायल के विनाशकारी युद्ध का बचाव करते हुए कहा कि इजरायल के साथ खड़ा है। भारत में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए मोदी सरकार हिंदू राष्ट्रवाद का सहारा ले रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले का पा करते हुए कहा, हम आपका दर्द महसूस करते हैं, आपका दुख समझते हैं। कारण कोई भी हो नागरिकों की हत्या को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। गल्फ न्यूज ने भारत में नरेन्द्र मोदी की इस यात्रा की जिन विपक्षी नेताओं ने विरोध किया उसे भी कवर किया है और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के उस बयान को जगह दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी इजरायली संसद में इजरायल के गाजा में किए गए नरसंहार का भी पा करेंगे। लंदन बेस्ड द न्यू अरब लिखता है कि मोदी एक कट्टर हिंदू राष्ट्रवादी नेता है। जिन्होंने 7 अक्टूबर के हमले के बाद सबसे पहले इजरायल के साथ एकजुटता दिखाई थी। लेकिन भारत उन 100 से ज्यादा देशों में भी शामिल है जिन्होंने हाल ही में इजरायल के वेस्ट बैंक पर नियंत्रण के प्रयासों की और फिलस्तीनी प्राधिकरण के सीमित शक्तियों को कमजोर करने के इजरायल के इजरायल के प्रयासों की निंदा भी की है। इस समय यात्रा का क्या यह मतलब निकाला जाए कि भारत की विदेश नीति में भारी परिवर्तन आ रहा है। भारत को अब अरब देशों के रिएक्शन की कोई चिंता नहीं है? 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 26 February 2026

ट्रंप की धमकी, रमजान की रौनक


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हमले की लगातार धमकियों के बीच ईरान में रमजान को लेकर उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार ईरान के भीतर सार्वजनिक जीवन नियमित रूप से चल रहा है। उधर ईरान से सटे इलाके में अमेरिकी सेना की लगातार बढ़ती तैनाती अब सिर्फ संकेत देने तक सीमित नहीं लगती बल्कि ये वास्तविक जंग के स्पष्ट संकेत हैं। अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहिम लिंकन और यूएसएस फोर्ड के ईरानी जल क्षेत्र के पास पहुंचने से स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है। इसके अलावा सैकड़ों अमेरिकी फाइटर जेट व अन्य साजोसामान भी इस इलाके में पिछले कुछ दिनों में लाए गए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका-इजराइल यहां कई स्तरों पर सैन्य कार्रवाई के लिए विकल्प तैयार कर रहे हैं। ईरान में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि ट्रंप अपनी बात मनवाने के लिए सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। जंग की आहट के बावजूद ईरान में सब सामान्य दिख रहा है। मस्जिदों में विशेष नमाज, बड़े इफ्तार आयोजन और सदका-फितर प्रमुखता से हो रही है। इस्लामिक रिपब्लिकन न्यूज एजेंसी ने रमजान के अवसर पर राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का संदेश प्रकाशित किया है। इसमें उन्होंने इस महीनों को आत्मचिंतन और एकजुटता का समय बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया की शक्तियां हमें अपना सिर झुकाने के लिए साजिश कर रही है... लेकिन वे हमारे लिए जो भी समस्याएं पैदा करें, हम अपना सिर नहीं झुकाएंगे। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो इससे पश्चिम एशिया में एक क्षेत्रीय (रीजनल) युद्ध छिड़ सकता है, तनाव और अधिक बढ़ सकता है। खामनेई ने कहा कि ईरान उकसाने की नीति नहीं अपनाता लेकिन उन्होंने साफ किया कि ईरानी राष्ट्र पर अगर कोई हमला या उत्पीड़न किया गया तो ईरान ऐसा कडा जवाब देगा जिसका अमेरिका-इजराइल को अंदाजा नहीं। हम पर कोई भी स्ट्राइक हो चाहे वह लिमिटेड स्ट्राइक ही क्यों न हो पर उसका पूरी ताकत से जवाब देंगे। मध्यपूर्व के तमाम अमेरिकी सैन्य बेसों सहित उनके युद्धपोत भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार अपनी शर्तें बदल रहे हैं। पहले उन्होंने तीन शर्तें रखी थीं: ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करे, अपनी मिसाइलों की प्रोडक्शन और क्षमता कम करे। ईरान से अमेरिका की इस सिलसिले में दो बार जेनेवा में वार्ता विफल हो चुकी है। अब तीसरे और अंतिम राउंड की बात हो रही है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अब कहा है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता। अमेरिका इन तरीकों से ईरान को घेरने की युद्ध नीति पर काम कर रहा है। जंगी जहाजों की तैनाती, अरब सागर में तैनात अमेरिका के विशाल विमान वाहक पोतों को घेरने की है। पहले बड़ी संख्या में टैंक से जहाजों के सुरक्षा सिस्टम को उलझाएंगे, ताकि वे मिसाइल को रोकने में कामयाब रहें। दूसरीः खाड़ी देशों के मौजूद अमेरिका के 19 ठिकानों पर करीब 50,000 सैनिक किसी भी समय हमले में भाग ले सकते हैं। हालांकि यही सैनिक ईरान के निशाने पर होंगे। तीसरीः तेल सप्लाई रोकना। अमेरिका इस प्रयास में है कि ईरान किसी भी देश को अपने यहां से तेल सप्लाई न कर सके ताकि उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़े। उसने भारत पर भी दबाव डाला है कि भारत ईरान से तेल लेना बंद करे। इस बीच इजराइल से एक अपुष्ट खबर सोशल मीडिया पर चल रही है कि इजराइल ने अब चेतावनी दी है कि अगर उसके अस्तित्व पर खतरा हुआ तो वह ऐसे हथियार चलाएगा जो अभी तक इस्तेमाल नहीं हुए। इशारा साफ है कि परमाणु बम का इस्तेमाल भी कर सकता है। कुल मिलाकर बड़ी विस्फोटक स्थिति बनी हुई है। उम्मीद की जाती है कि जंग टले क्योंकि अगर यह होती है तो इसका असर पूरे विश्व पर पड़ सकता है।
- अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 24 February 2026

फैसला ट्रंप के टैरिफ रद्द करने का

मानना पड़ेगा कि अमेरिका में आज भी लोकतंत्र जिंदा है। संविधान सवरेपरि है। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने दिखा दिया कि वह संविधान की रक्षा करने में किसी के सामने न तो झुकने को तैयार है और न ही किसी दबाव में आएगी। चाहे वह अमेरिका के राष्ट्रपति ही क्यों न हों। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुव्रवार को फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप का वैश्विक टैरिफ अवैध है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस जॉन रॉबट्र्स ने पैसला 6-3 के बहुमत से दिया। यानि छह जजों ने टैरिफ को अवैध बताया और तीन इससे असहमत थे। ट्रंप अमेरिकी व्यापार समझौतों को नए सिरे से करने के लिए दुनियाभर में टैरिफ को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। यह पहली बार है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के दूसरे कार्यंकाल की किसी नीति को निर्णायक रूप से रद्द किया है। अन्य क्षेत्रों में अदालत के वंजर्वेटिव बहुमत ने अब तक ट्रंप को कार्यंकारी शक्तियों के व्यापाक उपयोग की छूट दी थी। इस बार सुप्रीम कोर्ट में छह जजों के बहुमत, तीन वंजर्वेटिव और तीन लिबरल ने कहा कि बिना कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की स्पष्ट अनुमति के इतने व्यापक टैरिफ लागू कर ट्रंप ने सीमा लांघी हैं। अदालत ने ट्रंप के इस तर्व को खारिज कर दिया कि 1977 का कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, अप्रत्यक्ष रूप से टैरिफ की अनुमति देता है। जस्टिस रॉबट्र्स ने कहा कि राष्ट्रपति जिस अधिकार का दावा कर रहे हैं, वह किसी भी पैमाने पर सीमा से बाहर का था। चीफ जस्टिस ने पैसले में लिखा है, अगर कांग्रेस टैरिफ लगाने जैसी असाधारण शक्ति देना चाहती कि वह इसे स्पष्ट रूप से कर सकती है। उन्होंने यह भी लिखा कि ट्रंप प्रशासन के कानूनी तर्को को स्वीकार करना व्यापार नीति पर कार्यंपालिका और विधायिका के लम्बे सहयोग को समाप्त कर राष्ट्रपति को अनियंत्रित ताकत देना होगा। ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताने के पैसले से तीन वंजर्वेटिव जजों क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल एलिटो और ब्रेट वैवनॉ ने असहमति जताईं। ट्रंप ने तीन जजों की तारीफ भी की है। वैदनो ने कहा कि कईं कानून राष्ट्रपतियों को टैरिफ और आयात प्रतिबंध लगाने की अनुमति देते हैं। उनके अनुसार 1977 का कानून राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान विदेशी खतरों से निपटने के लिए राष्ट्रपति को अनुमति देते हैं। उधर, ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्प्रेंस में पैसले को भयानक और हास्यास्पद बताया और कहा कि वह अदालत के वुछ सदस्यों से शर्मिदा हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय गलत है। लेकिन इससे कोईं फर्व नहीं पड़ता क्योंकि हमारे पास बहुत शक्तिशाली विकल्प है। ट्रंप के पास दो बड़े विकल्प हैं। पहला: ट्रंप अमेरिकी कांग्रेस यानि प्रतिनिधि सभा और सीनेट में टैरिफ के प्रस्ताव को पास कराने के लिए रख सकते हैं। 435 की प्रतिनिधि सभा में ट्रंप के रिपब्लिकन 218 जबकि विपक्षी डेमोव्रेट 213 है जबकि 100 सीनेट में रिपब्लिकन 53 और डेमोव्रेट 47 हैं। टैरिफ के खिलाफ सेंटीमेंट को देख ट्रंप संसद में टैरिफ को रखने से शायद परहेज करें। अन्य प्रावधान लागू कर सकते हैं, पर लम्बी प्रव्रिया होगी। ट्रंप अमेरिकी संविधान की धारा 301 के तहत टैरिफ के प्रावधान लागू कर सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत टैरिफ को जायज ठहराया जाता है। ट्रंप ने चीन, कनाडा और मैक्सिको पर इन्हीं प्रावधानों के तहत टैरिफ लगाया था। हालांकि इन्हीं प्रावधानों को भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ट्रंप ने भी ऐलान कर दिया है कि वह पीछे नहीं हटेंगे। शुव्रवार रात उन्होंने कहा कि अन्य कानूनी अधिकारों के आधार पर नया 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रंप ने कहा कि हम पीछे नहीं हटेंगे, हम और ज्यादा पूंजी जुटाएंगे। देखें, आगे क्या होता है। सारी दुनिया में अब रिपंड की मांग भी उठनी शुरू हो गईं है। आगे-आगे देखते हैं होता है क्या? ——अनिल नरेन्द्र

Saturday, 21 February 2026

अजित पवार विमान हादसा

 
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित दादा पवार के विमान हादसे के करीब 20 दिन बाद उनके बेटे ने चुप्पी तोड़ी। अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार ने एक बेहद भावुक पोस्ट के जरिए जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जय पवार ने सीधे तौर पर कहा है कि विमान का ब्लैक बाक्स इतनी आसानी से नष्ट होने वाली चीज नहीं है। बता दें कि किसी भी विमान हादसे में जब सब कुछ नष्ट हो जाता है तो उसके अंदर ब्लैक बॉक्स न तो आग से, पानी से, जमीन पर गिरने से, विस्फोट से नष्ट नहीं होता। 20 वर्षों तक वह सुरक्षित रहता है। जय पवार ने साफ तौर पर कहा है कि ब्लैक बॉक्स  इतनी आसानी से नष्ट होने वाली चीज नहीं है, जैसा कि दावा किया जा रहा है। जनता को सब जानने का हक है। जय पवार ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने लिखा विमान दुर्घटना में ब्लैक बॉक्स आसानी से  नष्ट नहीं हो सकते। महाराष्ट्र की जनता को इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना का पूरा, पारदर्शक और निर्विवाद सत्य जानने का अधिकार है। जय पवार ने विमान कंपनी वीएसआर के खिलाफ तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस कंपनी के उड़ान व संचालन पर तुरन्त प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और विमानों के रखरखाव में हुई संभावित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पोस्ट के अंत में उन्होंने बेहद भावुक होकर लिखा ः मिस यू डैड। उधर अजित पवार के भतीजे और विधायक रोहित पवार ने कहा कि अजित दादा पवार की आकस्मिक मृत्यु में साजिश की आशंका है। रोहित पवार ने मुंबई में दावा किया कि कई सूत्रों से विस्तृत जानकारी जुटाने के बाद ही वह प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं। प्रेस कांफ्रेंस में रोहित पवार ने कहा कि उन्हें एयरलाइंस कंपनी वीएसआर, बुकिंग संभालने वाली कंपनी एरो और पायलट सुमित कपूर पर संदेह हैं। उन्हेंने कहा कि उन्हें इस मामले में जानकारी इसलिए जुटानी पड़ी क्योंकि जांच एजेसियां बहुत धीमी गति से काम कर रही है। अजित दादा पवार परिवार और एनसीपी ने अब इस मामले की सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से मुलाकात कर इस मामले में उच्चस्तरीय जांच का निवेदन सौंपा है। प्रफुल्ल पटेल, हसन मुश्रीफ, सुनील तटकरे और पार्थ पवार जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में सरकार से मांग की गई है कि इस हादसे के पीछे की हर साजिश या लापरवाही का पर्दाफाश होना चाहिए। इनका सीधा निशाना उस एविएशन कंपनी पर है जिसका विमान इस हादसे का शिकार हुआ। आरोप लग रहे हैं कि क्या विमान की सर्विसिंग और सुरक्षा मानकों में कोई कोताही बरती गई थी? 28 जनवरी को हुए इस हादसे में अजित दादा पवार सहित कुल 5 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इस घटना के बाद से ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह मात्र एक दुर्घटना थी या कोई गहरी साजिश? आदरणीय अजित दादा पवार के आकस्मिक निधन से पूरे महाराष्ट्र को गहरा धक्का लगा है, यह कहना है सांसद सुप्रिया सुले का। एनसीपी (शरद गुट) ने मांग की है कि इस दुर्घटना की जांच पूरी होने तक नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू को उनके पद से हटा दिया जाए। हमारा भी मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि दुर्घटना के कारणों का साफ पता चले पर ऐसा होगा क्या? 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 19 February 2026

निखिल गुप्ता को हो सकती है 40 साल जेल


एक भारतीय व्यक्ति ने पावार को न्यूयार्क में सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की 2023 में हत्या की नाकाम साजिश रचने के आरोप में दोष स्वीकार किया है। पता नहीं पिछले कुछ दिनों से भारत और अमेरिका के ग्रह टकरा रहे हैं। एक के बाद एक नई समस्या खड़ी होती जा रही है। पहले गौतम अडानी का मामला फंसा, फिर भारत-अमेरिका ट्रंप डील पर विवाद खड़ा हो गया और अब पन्नू की हत्या की साजिश में मामला फंस गया है। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा है कि यह उस मामले में पहली बार अपराध स्वीकार किया गया है जिसे कनाडा और अमेरिका के अधिकारियों ने भारत सरकार की ओर से असंतुष्टों की हत्या के अभियान से जुड़ा बताया था। अमेरिका में भारतीय मूल के निखिल गुप्ता ने अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश रचने के मामले में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। इस मामले की सुनवाई न्यूयार्क की एक अदालत में हो रही है। अटार्नी के दफ्तर से जारी हुए बयान के मुताबिक गुप्ता ने हत्या के लिए सुपारी देने, हत्या की साजिश रचने के साथ ही मनी लांड्रिंग की साजिश से जुड़े तीनों आरोपों को स्वीकार कर लिया है। गुप्ता को 27 मई को सजा सुनाई जाएगी। अमेरिका में इन तीनों आरोपों में सम्मिलित तौर पर 40 साल की सजा हो सकती है। गुप्ता के 30 जून 2023 को चेक रिपब्लिक से गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसका प्रत्यर्पण किया गया। आरोप है कि निखिल गुप्ता ने ये साजिश भारतीय सरकारी कर्मचारी रहे विकास यादव के कहने पर रची, इस संबंध में विकास यादव को सीसी-1 कहकर संबोधित किया गया है। इस संबंध में मार्च 2025 में ही विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वो (विकास यादव) अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं है। आरोप पत्र के मुताबिक 2023 में यादव ने गुप्ता को हत्या का काम सौंपा था। यादव के कहने पर गुप्ता ने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया जो असलियत में अमेरिका की जांच एजेंसी डीईए का ही अंडरकवर एजेंट था विकास यादव ने एक सहयोगी के जरिए इस हिटमैन को अग्रिम भुगतान के तौर पर 15 हजार डालर दिए। 2023 में ही विदेश मंत्रालय ने कहा था कि निखिल गुप्ता को तीन बार चेक गणराज्य में काउंसलर मदद दी गई। यूं तो मामला अमेरिका में 2023 से चर्चा में है, लेकिन इस मामले में इस हालिया घटपाम की टाइमिंग को भी अहम माना जा रहा है। जब भारत और अमेरिका के संबंध बहुत सहज नहीं हैं और दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर एक व्यापार के अंतरिम समझौते के अगले महीने तक आखिरी रूप लेने की उम्मीद है। ऐसे में भारत के लिए आगे की राह आसान नहीं दिखती। न्याय विभाग ने पन्नू की हत्या को साजिश और 18 जुलाई को कनाडा में खालिस्तानी निज्जर की हत्या के बीच कई लिंक जोड़े हैं। एफबीआई के सहायक निदेशक रोमन रोज से जावस्की ने कहा अमेरिकी नागरिक सिर्फ बोलने की आजादी का इस्तेमाल करने के लिए ट्रांसनेशनल रिप्रेशन का निशाना बना। यानी दमन के लिए किसी दूसरे देश की धरती का इस्तेमाल की साजिश है। इन शब्द का इस्तेमाल कनाडाई अधिकारियों ने कनाडा में निज्जर की हत्या पर किया था। भारत सरकार के इशारे पर की गई बताई गई है जिसे भारत सिरे से खारिज कर चुका है। भारत ने पिछले साल नवम्बर में अमेरिका की ओर से उठाई गई सुरक्षा चिंताओं पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच एजेंसी गठित की थी। अक्टूबर 2024 में भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की थी कि पन्नू के खिलाफ नाकाम हत्या की साजिश से जुड़े अमेरिकी न्याय विभाग के अभियोग में जिस व्यक्ति (विकास यादव) का नाम सामने आया था, वह अब भारत सरकार की सेवा में नहीं है। मूल अभियोग में सरकारी अधिकारी को सीसी-1 कहा गया था। अक्टूबर 2024 में ही अमेरिकी अधिकारियों ने दूसरा संशोधित अभियोग सार्वजनिक किया, जिसमें सीसी-1 की पहचान विकास यादव के रूप में की गई। बाद में विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश विभाग ने हमें सूचित किया कि अभियोग में उल्लेखित व्यक्ति अब भारत में कार्यरत नहीं है। हम पुष्टि करते हैं कि वह अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। अब देखना यह है कि निखिल गुप्ता के खिलाफ अमेरिकी अदालत में केस आगे कैसे बढ़ता है। यह भी देखना होगा कि विकास यादव को लेकर अमेरिका भारत पर कितना दबाव बनाता है और भारत सरकार आगे क्यों करेगी? 
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 17 February 2026

जैफ्री एपस्टीन फाइल्स


आपने ताशकंद फाइल्स, केरला फाइल्स, कश्मीर फाइल्स और बंगाल फाइल्स का तो नाम सुना होगा और आप में से कईयों ने इन्हें देखा भी होगा पर आज मैं आपको विश्व चर्चित एपस्टीन फाइल्स के बारे में बताता हूं। जैफ्री एपस्टीन कौन था? एपस्टीन फाइल्स जी हां, यही वो दो शब्द हैं जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन को महीनों से परेशान कर रहे हैं। जैफ्री एपस्टीन अमेरिका का एक अमीर फाइनेंसर था। उस पर महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और तस्करी के गंभीर आरोप लगे थे। समय के साथ उसने काफी दौलत बनाई और उसके बाद उसके संबंध बड़े कारोबारियों, राजनेताओं और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों से जुड़ते चले गए। साल 2019 में उसे अमेरिका के फ्लोरिडा और न्यूयार्क में नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इससे पहले वह 2008 में भी ऐसे ही मामलों में जेल जा चुके थे। लेकिन तब उसे बहुत कम सजा मिली थी। अगस्त 2019 में जेल में उसकी रहस्यमय ढंग से मौत हो गई। जिसे अमेरिकी सरकार ने आत्महत्या बताया। एपस्टीन फाइलें उन सरकारी डाक्यूमेंट का संग्रह है जो उनके खिलाफ जांच से जुड़े हैं। इनमें पूछताछ के रिकार्ड, अदालत से जुड़े कागजात और अन्य सुबूत शामिल हैं। एपस्टीन की रहस्यमय मौत के बाद से ही लोग ये जानना चाहते थे कि उसके मामलों में किन-किन लोगों का हाथ रहा है। जब ये फाइलें सामने आई तो वहीं बड़े नामों का पा होने के कारण बहस और तेज हो गई। बाल यौन शोषण के दोषी जैफ्री एपस्टीन के यौन अपराधों को लेकर ट्रंप प्रशासन लगातार संकट से जूझ रहा है। अमेरिका की हाउस ओवर साइट कमेटी ने एपस्टीन से जुड़े लाखों दस्तावेज जारी किए हैं। इनमें ई-मेल, वीडियो, चैट इत्यादि शामिल हैं। मामला एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ के बाद सामने आया। तब एक लड़की (14 वर्ष) के माता-पिता ने फ्लोरिडा में पुलिस को बताया कि जैफ्री एपस्टीन ने अपने पाम बीच स्थित घर में उनकी बेटी से छेड़छाड़ की थी। पूरे घर में लड़कियों की तस्वीरें मिलीं और उसे एक नाबालिग से वेश्यावृत्ति कराने का दोषी ठहराया गया। एपस्टीन को यौन अपराधी के रूप में पंजीकृत किया गया। 11 साल बाद 2019 में उस पर फिर आरोप लगा कि वह नाबालिग लड़कियों का सैक्स रैकेट व नेटवर्क चला रहा है। जेल में ट्रायल का इंतजार करते हुए उसकी मौत हो गई। जिसे आत्महत्या बताया गया। इन दिनों चर्चा में बहुत सारे दस्तावेज जमा हुए हैं। जैसे पीड़ितों और गवाहों के बयान उनके घरों में छापे में मिली चीजें। 2025 में अमेरिका के न्याय विभाग के एक मंत्री के मुताबिक इस मामले में एफबीआई के पास 300 गीगाबाइट (जीबी) से ज्यादा डेटा और सबूत हैं। न्याय विभाग कहता है कि इनमें पीड़ितों की बहुत सारी तस्वीरें और वीडियो हैं। जो बच्चों के शोषण से जुड़ी हुई है। इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाएगा क्योंकि नया कानून सर्वाइवर की पहचान छिपाने की इजाजत देता हैं। यही जानकारी एपस्टीन फाइल्स हैं, जो समय-समय पर जारी हो रही है। एपस्टीन फाइल्स से जुड़े 30 लाख नए दस्तावेज जारी किए गए हैं। कुछ सामग्री पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है। जैफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों में एक अत्यन्त गंभीर और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है। अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा हाल ही में जारी कई फाइलों में नाबालिग लड़कियों और महिलाओं से दरिंदगी का खुलासा हुआ है। एक फाइल के अनुसार दो विदेशी महिलाओं की मौत यौन संबंधों के दौरान गला घोंटने के कारण हुई थी। बाद में एपस्टीन के एक कर्मचारी ने उन्हें न्यू मैक्सिको स्थित फार्म हाउस जोरो रैंच में दफना दिया। इसमें एपस्टीन की करीबी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल भी शामिल थीं। यह गिस्लेन मैक्सवैल कौन थीं, इसके बारे में फिर बताऊंगा। एक अन्य फाइल के अनुसार एक नाबालिग लड़की ने खुद को ह्यूमन इंक्यूवेटर की तरह इस्तेमाल किए जाने का दावा किया है। ई-मेल के अनुसार जोरो रैंच में लड़कियों को लंबे समय तक बंद रखा गया और उनसे जबरन गर्भधारण कराया गया। बच्चे पैदा कराए गए और जन्म के बाद ये बच्चे गायब हो गए। मैंने जैफ्री एपस्टीन जो कि एक मनुष्य नहीं था जानवर से भी बदतर था उसके बारे में कुछ जानकारी दी है। चूंकि यह मामला अभी चल रहा है इसलिए जो भी अपडेट होगी आप तक लाने की कोशिश करूंगा। इस नरभक्षी की परतें खुलती जा रही हैं। 
-अनिल नरेन्द्र