सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने गुरुवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित कॉकरोज जनता पाटी (सीजेपी) की प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वह अब रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। इसके बाद हंगामा हो गया। मुझे लगता है कि प्रशांत भूषण ने देवेन्द्र यादव के इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख में यह लिखा था कि हम रिजीम चेंज नहीं चाहते हम चुनाव प्रक्रिया में सुधार चाहते हैं। यादव के इस बयान पर आंदोलनकारियों को बहुत बुरा लगा और अपनी स्थिति साफ करने के उद्देश्य से प्रशांत भूषण ने रिजीम चेंज की बात कही। इसके पहले कि मैं बीजेपी का इस पर क्या जवाब आया मैं पहले बताना चाहता हूं कि रिजीम चेंज का मतलब क्या होता है और क्यों वह लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मैंने गूगल पर इनका मतलब सर्च किया और जवाब आया ः रिजीम चेंज का हिंदी में सामान्य अर्थ ः शासन परिवर्तन या सत्ता परिवर्तन होता है। इसका मतलब किसी देश की मौजूदा शासन व्यवस्था, सरकार या नेतृत्व को हटाकर उसकी जगह नया नेतृत्व लाना है। इसका मतलब कतई तख्ता पलटना नहीं होता। तख्ता पलटने का आमतौर पर मतलब होता है जब सेना चुनी हुई सरकार को जबरन हटाकर खुद शासन संभाल लेती है। यह हमने कई बार पाकिस्तान में देखा है, अफ्रीका के कई देशों में देख है। लोकतंत्र में सरकार या शासन परिवर्तन लोकतंत्र का मूल हिस्सा है। अन्ना आंदोलन के बाद जनता ने सत्ता परिवर्तन किया था और भाजपा को बाद में शासन मिला। जब रिजीम चेंज की बात करते हैं तो वर्तमान सरकार को चुनाव में हराकर सत्ता परिवर्तन होता है। अगर ऐसा न हो और एक ही सरकार बिना चुनाव जीते सत्ता में सालों-साल बनी रहती है तो वह तो तानाशाही हो जाएगी। इसलिए यह कहना कि रिजीम चेंज का मतलब तख्त पलटना है तो यह सही नहीं है। खैर, इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन चुनाव सुधारों के लिए नहीं है इनका मकसद अराजकता फैलाना है। वहीं भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि प्रेस कांफ्रेंस से साफ हो चुका है कि इन लोगों की मंशा है देश में तख्ता पलट करना ऐर बिना चुनाव लड़े अपनी सरकार बनाना है। विपक्ष का आंदोलन चुनाव सुधारों के लिए नहीं है, बल्कि सत्ता परिवर्तन के लिए बांग्लादेश की तर्ज पर देश में हिंसा और अराजकता फैलाना है। इस पर कांग्रेस ने राजनाथ सिंह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष का तथ्य साफ है और हम चुनाव के जरिए सरकार को हटाना चाहते हैं। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने अराजकता के सहारे सत्ता परिवर्तन के राजनाथ के आरोप को भाजपा का पाखंड बताया। प्रेस कांफ्रेंस में पवन खेड़ा ने रक्ष मंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि हमें इस सरकार को हटाना है और इस व्यवस्था को बदलना है। खेड़ा ने कहा चुनावों के माध्यम से सरकार बदलना लोकतंत्र की एक सामान्य प्रक्रिया है। खेड़ा ने 1977 का जिक्र करते हुए कहा-हम तो कह रहे हैं कि रिजीम चेंज करना है। 77 में क्या हुआ था? हर बार जब विपक्ष सड़क पर आता है, कोई भी आंदोलन होता है तो सत्ता परिवर्तन होता है। चुनाव के जरिए ही रिजीम चेंज होता है। खेड़ा ने कहा, भाजपा लोकतंत्र का पालन करने की आदत भूल चुकी है। प्रशांत भूषण ने कहा, अब सरकार कह रही है कि यह तो विपक्ष का रिजीम चेंज का ऑपरेशन है। हम तो अभी चुनावी लोकतंत्र ठीक करने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन सरकार की ऐसी बर्बरता चलेगी तो जरूर रिजीम चेंज होगा। रिजीम चेंज के आरोपों पर उन्होंने कहा ः हां हम रिजीम चेंज चाहते हैं, क्या इसमें गलती है? भाजपा रिजीम चेंज के लिए बार-बार आंदोलन करती है और कहती है कि ये लोग तो रिजीम चेंज की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा, रिजीम चेंज कराना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। हमारे संविधान में सरकार के खिलाफ विरोध करना कोई अपराध नहीं है।
-अनिल नरेन्द्र