युद्ध मानव सभ्यता की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है और आज एक नहीं कई युद्ध चल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि युद्ध से समस्याओं का हल तो दूर उल्टा युद्ध नई जटिलताओं को जन्म देता है। युद्ध के लक्षण जान-माल की भारी क्षति, आर्थिक बर्बादी, विस्थापन और सामाजिक अस्थिरता के रूप में सामने आते हैं। रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष इसके उदाहरण हैं। भारत हमेशा वैश्विक शांति का समर्थक रहा है और युद्ध के स्थान पर महात्मा बुद्ध, महात्मा गांधी के शांति मार्ग पर चलने का संदेश देता रहा है। इसी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के मौके पर रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतहीन युद्ध के बजाए इसके अंत की ओर बढ़ने की वकालत की। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को खत्म करने की अपील की। पीएम मोदी ने सोमवार को कहा, युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है और शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम मानवता को नई आशा और उत्साह से भर देता है। यूक्रेन में युद्ध खत्म करने पर पीएम मोदी की टिप्पणियां हैरान करने वाली नहीं है और ये भारत की विदेश नीति में किसी भी किस्म के सामरिक बदलाव का संकेत नहीं देती है। दरअसल, संघर्ष शुरू होने के बाद साल 2022 में एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान बोलते हुए, मोदी ने पुतिन से सार्वजनिक रूप से कहा था कि यह युद्ध का समय नहीं है। लेकिन यह कहना बहुत आसान होगा कि युद्ध पर मोदी के अभी या पहले के बयानों को पुतिन या रूस स्ट्रैटजी को जवाब देने के तौर पर देख जा सकता है। पश्चिमी देशों ने मोदी पर स्पष्ट रुख अपनाने के लिए काफी दबाव डाला है लेकिन भारत काफी हद तक तटस्थ रहा है। भारत ने इसके बजाए युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत का आग्रह किया है। बेशक इस रुख से कई पश्चिमी देश खुश नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भारत को लुभाना जारी रखा है क्योंकि भारत इतनी बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह पहली बार नहीं है जब किसी विदेशी नेता ने सार्वजनिक रूप से पुतिन से यूक्रेन से युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया हो। महज पांच हफ्ते पहले कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कसीम-जोमार्ट टोकायेव ने पुतिन को सुझाव दिया था कि वे संघर्ष को रोक दें और बातचीत की मेज पर लौट आएं। शांति के लिए इन सार्वजनिक अपीलों से पुतिन की रणनीति में कोई बदलाव आने के संकेत नजर नहीं आते। मोदी द्वारा युद्ध विराम के आ"ान पर क्रेमलिन नेता ने जवाब दिया बहुत-बहुत धन्यवाद प्रधानमंत्री जी। हम इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। विनम्र, लेकिन मान्यवर और कोई स्पष्ट जवाब नहीं। आखिरकार एक रास्ता छोटा भी हो सकता है, लेकिन यह लंबा भी हो सकता है। सारे सुबूत बताते हैं कि रूस की लीडरशिप को अब भी यकीन है कि वह युद्ध में यूक्रेन से मिलिट्री जीत की राह पर है। इसे शांति के मामले में कहें तो रूस की शर्तें पर मिलिट्री सफलता से तय शांति की ओर आगे बढ़ना। इसलिए, फिलहाल लड़ाई जारी है। इस तथ्य के बावजूद कि साढ़े चार साल से अधिक के युद्ध और भारी सैन्य नुकसान के बाद भी व्रेमलिन को अभी तक जीत हासिल नहीं हुई है और यूक्रेन ने युद्ध को रूसियों के घर तक वापस लाने में सफलता हासिल की है।
-अनिल नरेन्द्र