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Tuesday, 21 July 2026

होर्मुज ईरान का ट्रंप कार्ड

ईरान ने होर्मुज स्टेट बंद कर अमेरिका के सभी रणनीतिक गणित और वैश्विक बाजार को हिला दिया है। यह ईरान का ऐसा तुरुप का पत्ता है जिसने ट्रंप को चारों खाने चित्त कर दिया है। ईरान ने बिना कोई बड़ा परमाणु कदम उठाए सिर्फ एक समुद्री रास्ते की चाबी अपने हाथ में लेकर अमेरिका के पूरे जंग की रणनीति को बदल दिया है। अब अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध का सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज को खोलने, खुलवाने का बन गया है। याद रहे कि 28 फरवरी से पहले यह होर्मुज कभी भी बंद नहीं हुआ था। यह विचार तो ईरान को तब आया जब अमेरिका ने 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमले किए। ईरान ने होर्मुज का ताला लगाकर अमेरिका के सामने यह साफ कर दिया है कि अगर बातचीत करनी है तो शर्तें ईरान की होगी। होर्मुज का बंद होना न सिर्फ मध्य-पूर्व में ही असर डाल रहा है पर इसका प्रभाव अमेरिका में भी सीधा पड़ रहा है। मैं बात कर रहा हूं अमेरिका में होने वाले मिड टर्म चुनाव की जिनमें ट्रंप का राजनीतिक भविष्य कुछ हद तक टिका हुआ है। ईरान ने ठीक उसी समय होर्मुज पर दबाव बनाया है, जब अमेरिकी कूटनीति सबसे कमजोर मोड़ पर है। ईरान से तंग अमेरिकी कूटनीति के लिए एक बड़ा मिस कैलकुलेशन साबित हुआ है। सीजफायर खत्म होने के बाद से ही अमेरिका ईरान पर मिसाइलें बरसा रहा है और ईरान जवाबी हमले कर रहा है। लेकिन ईरान ने फिर अमेरिका को झुकाने के लिए अपने ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया और बारूदी धमाकों के बीच ईरान ने एक बार फिर होर्मुज को बंद कर दिया। ये ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव सिर पर हैं और अमेरिकी जनता से पेट्रोल के दाम गिरने का दावा कर रहे थे। ईरान ने ठीक उसी वक्त अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सबसे कमजोर नस यानी कच्चे तेल की सप्लाई पर पैर रख दिया है। अमेरिका-ईरान के बीच हमलों के बाद तेल की कीमतों में 3ज्ञ् से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। होर्मुज स्टेट ने तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होने की वजह से नवम्बर में होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है। वॉलिट और वोट समीकरण अमेरिकी राजनीति का कड़वा सच है क्योंकि अमेरिकी राजनीति में एक पुरानी कहावत है कि राष्ट्रपति चाहे कोई भी वादा करे, लेकिन वोटर अपना फैसला पेट्रोल पंप पर तेल की कीमतों को देखकर ही तय करता है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उसकी विरोधी पाटी रिपब्लिकन पाटी पर भारी राजनीतिक दबाव बढ़ेगा? राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में आने के बाद पेट्रोल के दाम 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाने का वादा किया था, लेकिन होर्मुज संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे पेट्रोल के दाम घटने के बजाय बढ़ रहे हैं। पेट्रोल महंगा होने का मतलब है आज अमेरिकी परिवार के बजट पर सीधा दबाव पड़ेगा, अमेरिकी जनता की जेब पर सीधी मार होगी। इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी, ट्रांसपोर्टेशन बढ़ने से सुपर मार्केट के सामान से लेकर हवाई टिकट तक सब महंगा होगा। इतिहास गवाह है कि जब भी चुनाव से ठीक पहले अमेरिका में ईंधन के दाम बढ़े हैं। सत्ताधारी दल को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जैसे 1979 में जिमी कार्टर के साथ हुआ था। होर्मुज बंद होते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ने लगे हैं। इंटरनेश्नल बेच मार्क ब्रेट क्रूड 3.92ज्ञ् से बढ़कर 78.99 डॉलर प्रति बैरल हो गया और अमेरिकी क्रूड 3.44ज्ञ् से बढ़कर 73.87 डालर प्रति बैरल हो गया है। अगर होर्मुज लंबे समय तक यूं ही बंद रहता है तो इसका असर अमेरिका पर ही नहीं पूरे विश्व पर पड़ेगा और ऐसा होने से रोकने की चाबी सिर्फ ईरान के हाथ में है। 

-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 18 July 2026

ट्रंप: मोजतबा खामेनेई 90 फीसदी खत्म?

ईरान के नए सर्वेच्च नेता मोजतबा अली खामेनेई अपने पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी नहीं दिखे थे और तब से ही उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा कि आयतुल्लाह अली खामनेई मारे जा चुके हैं और उनके बेटे मोजतबा खामेनेई भी 90 फीसदी खत्म हो चुके हैं। ट्रंप ने आगे कहा कि उनके पास अब कोई नौसेना नहीं बची है, उनकी वायु सेना भी नहीं बची है, सब कुछ खत्म हो चुका है। उनका एयर डिफेंस सिस्टम भी खत्म हो चुका है। उनके सभी नेता मारे जा चुके हैं। उनके सबसे बेहतरीन नेता मारे जा चुके हैं। इससे पहले मोजतबा खामेनेई के नाम से शनिवार को जारी एक लिखित बयान में पूर्व सर्वेच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई। बयान में कहा गया था कि हम अपने पवित्र खून और इन दोनों युद्धों में शहीद हुए सभी लोगों के खून का बदला लेने की कसम खाते हैं। दुनिया भर में ऐसे लोग मौजूद हैं जो बदला लेने को तैयार हैं। इसी साल 23 अप्रैल को अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें बताया गया था कि ईरान के नए सर्वेच्च नेता मोजतबा खामेनेई अमेरिका-इजरायल के उस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसमें उनके पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। हालांकि वह मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय हैं। अखबार ने अधिकारियों के हवाले से कहा था, उनके एक पैर का तीन बार ऑपरेशन किया गया है और अब उन्हें कृत्रिम संक्रमित पैर (प्रोस्येटिक) लगाए जाने का इंतजार है। उनके एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे वापस आ रही है। उनके चेहरे और होंठ पूरी तरह झुलस गए हैं, जिससे उन्हें बोलने में कठिनाई होती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आखिरकार उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की भी जरूरत होगी। बता दें कि इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हवाई हमलों में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई को सर्वेच्च नेता नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के बाद से ही वह सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। उन्होंने कोई वीडियो संदेश भी जारी नहीं किया है। इससे इस बात को लेकर सवाल उठे हैं कि उसी हमले में वह कितने गंभीर रूप से घायल हुए थे? आयतुल्लाह अली खामेनेई के अन्य तीन बेटे मसूद, मुस्तफा और मेमसाम रविवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए थे। उनके साथ राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और रिव्यूल्शनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वहीदी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। जून में जारी एक बयान में मोजतबा खामेनेई ने कहा था कि सिद्धांत रूप से वह अमेरिका के साथ डील के पक्ष में नहीं थे। लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के आश्वासनों के बाद ही उन्होंने इसकी अनुमति देने का फैसला किया। कुवैती अखबार अल जरीदा ने मार्च 2026 में एक रिपोर्ट की थी। इसके मुताबिक मोजतबा खामेनेई को शुरुआत में इलाज के लिए मास्को ले जाया गया था। उसके बाद मोजतबा के स्वास्थ्य को लेकर कोई खबर नहीं आई। इस वक्त मॉस्को खुद असुरक्षित है, वहां लगातार यूव्रेन का हमला हो रहा है, इसलिए इस वक्त चीन को मोजतबा के लिए सुरक्षित माना जाता है। ईरानी जनता चाहती है कि जल्द आयतुल्लाह मोजतबा आवाम के सामने आएं ताकि दुनिया देख सके कि वह ठीक हैं, सुरक्षित हैं। 

-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 16 July 2026

आंख के बदले आंख

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया कि उसने आंख के बदले आंख नाम से सैन्य अभियान शुरू करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल के अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई है। इस दावे के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध तेज हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक बार फिर खुली जंग का रूप ले चुका है। यह संघर्ष अब सिर्फ सीमित क्षेत्रों तक ही नहीं रहा बल्कि पूरे मिडल ईस्ट, वैश्विक तेल बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तक फैल चुका है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अब यह युद्ध बढ़ता जा रहा है और भयानक रूप अख्तियार कर सकता है। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक इस अभियान के तहत खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान का दावा है कि उसका उद्देश्य उन ठिकानों को जवाब देना था, जहां से उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गई थी। ईरान ने इस सैन्य कार्रवाई को आंख के बदले आंख (आई फॉर एन आई) नाम दिया है। इस नाम का सीधा संदेश है कि वह अपने खिलाफ हुई हर सैन्य कार्रवाई का जवाब देगा। ईरान लंबे समय से कहता आ रहा है कि अगर उसकी देश की सुरक्षा या उसके सैन्य ठिकानों पर हमला होगा तो वह जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इसी नीति के तहत उसने पहले भी कई बार जवाबी कार्रवाई की घोषणा की है। ईरान की आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने आई फॉर एन आई अभियान के तहत जार्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। पहले चरण में जार्डन के प्र्रिंस हसन एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। दूसरे चरण में बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर हमला कर हेलीकॉप्टर और ड्रोन सुविधाओं को निशाना बनाया गया। तीसरे चरण में कुवैत के अली अल-अलेम एयरबेस और अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर हमले का दावा किया गया। ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम केन्द्र माना जाता है। यहीं से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। अगर अमेरिका ईरान के बीच यह युद्ध और तेजी पकड़ता है तो इसका सीधा असर होर्मुज स्टेट पर पड़ेगा, बल्कि पड़ना शुरू हो गया है। अमेरिका के लगातार ईरान पर हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मूज बंद करने का एलान भी कर दिया है। इसका सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा। भारत जैसे देश जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी से पूरा करते हैं, वे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यह पहली बार नहीं जब ईरान ने बदले के लिए सैन्य कार्रवाई का वादा पूरा करने का प्रयास किया है। जनवरी 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान ने इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं। अप्रैल 2024 में दमिश्क स्थित ईरानी दूतावास पर हमले के बाद भी ईरान ने पहली बार सीधा अपनी जमीन से इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इससे साफ है कि ईरान अपनी सुरक्षा नीति में जवाबी कार्रवाई को महत्वपूर्ण रणनीति मानता है। 

 -अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 14 July 2026

ट्रंप की हत्या की साजिश


इजरायल ने अमेरिका के साथ ऐसी नई जानकारी देने का दावा किया है, जिसमें ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। अमेरिकी मीडिया में यह दावा किया गया है। ट्रंप इस पर भड़क गए और अपना आपा खो बैठे हैं। अमेरिका का प्रतिष्ठित समाचार पत्र द वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक रिपोर्ट छपी है, जिसके मुताबिक इजरायल ने अमेरिका को बताया है कि उसके पास खुफिया रिपोर्ट है। खुफिया जानकारी है जिसके अनुसार तेहरान ट्रंप की हत्या की नई योजना बना रहा है। मोसाद ने ये इंटेल शेयर की है और ट्रंप से कहा है कि वे ईरान के टारगेट नंबर वन पर है। इसका नतीजा यह हुआ कि नाटो के समिट के बाद ट्रंप ने डर कर अपना नया एयर फोर्स वन बदल डाला और अमेरिका से पूरा एयर फोर्स वन मंगवाया और उसमें वापस अमेरिका पहुंचे। उधर ट्रंप ने दावा किया कि अगर ईरान उनकी हत्या करने में सफल होता है तो उन्होंने पहले ही एक आदेश दे रखा है कि अगर ईरान अमेरिका पर हमला करता है, जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा ऐसा जवाब दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा है कि 1000 मिसाइलें ईरान को अपने निशाने पर लिए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान उनकी हत्या करने में सफल होता है तो उन्होंने पहले से ही एक आदेश दे रखा है। न्यूयार्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि इस आदेश के मुताबिक ईरान पर इतना बड़ा जवाबी हमला करे जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा। सवाल उठता है कि क्या ट्रंप ऐसा कोई आदेश दे भी सकते हैं या फिर इतिहास में किसी नेता ने ऐसा आदेश दिया था। अमेरिकी संविधान के तहत कोई भी राष्ट्रपति ऐसा आदेश नहीं छोड़ सकता कि उसकी मौत के बाद अपने आप किसी देश पर हमला कर दिया जाए। किसी भी बड़े सैन्य अभियान का फैसला उस समय जो राष्ट्रपति होगा वही तय करेगा। क्योंकि कमांडर इन चीफ के आदेश पर ही अमेरिकी सेना ऐसा कुछ कर सकती है। ट्रंप का यह बयान सिर्फ ईरान के लिए नहीं बल्कि अमेरिकी जनता के लिए भी एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। एक तरफ वह अपने समर्थकों के सामने यह छवि बनाना चाहते हैं कि वह निडर हैं और सख्त नेता हैं जो किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे, दूसरी तरफ ईरान को यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो जवाब पूरे देश को मिलेगा। सभी जानते हैं कि इजरायल अमेरिका-ईरान के शांति-वार्ता से परेशान है और इसे हर हालत में तोड़ना चाहता है। वह ट्रंप कितने बहादुर हैं यह भी जानती है। इससे बेहतर क्या हो सकता है कि यह खबर चला दो कि आप ईरान के टारगेट नंबर वन हैं। इससे ट्रंप मजबूरन ईरान पर हमला कर देंगे और एक बार फिर युद्ध शुरू हो जाएगा। हुआ भी यही। अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए और ईरान ने भी जबर्दस्त जवाबी कार्रवाई कर दी। एक बार फिर मध्य-पूर्व जंग की आग में धकेल दिया गया। वैसे हम ट्रंप और नेतन्याहू से पूछना चाहते हैं कि जब आपने 28 फरवरी को अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके लगभग पूरे परिवार को निशाना बनाया था, जिसमें उनकी 14 महीने की पोती भी शामिल थी, 40 से अधिक टॉप के मिलिट्री कमांडरों को निशाना बनाया था तब आपको यह ख्याल नहीं आया था कि ईरान भी ऐसा कर सकता है और अपने सुप्रीम लीडर की हत्या का बदला ले सकता है? अब जब अपने पर पड़ी तो आप को नानी याद आ गई। वैसे भी इजरायल के मंत्री ने खुलेआम ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की हत्या करने की खुली धमकी दी थी। शहीद अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में आपने देखा होगा कि किस तरह करोड़ों लोगों ने अपने रहबर की हत्या का बदला लेने की कसम खाई थी। ईरान आपसे बदला ले सकता है और ले भी रहा है पर इस तरह नहीं जैसे नेतन्याहू और मोसाद आपको बेवकूफ बनाकर अपने हित साध रहा है।
- अनिल नरेन्द्र

Saturday, 11 July 2026

20 दिन भी नहीं टिक पाया युद्ध-विराम

 
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम पर बनी सहमति कायम हुए 20 दिन भी नहीं हुए कि दोनों देश न केवल फिर से आमने-सामने आ गए, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कह दिया कि मेरे हिसाब से अब युद्ध विराम खत्म हो चुका है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। यह तो होना ही था। यह युद्ध विराम ही अविश्वास के साथ शुरू हुआ था। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते थे। अमेरिका यह युद्ध विराम इसलिए चाहता था कि ट्रंप अमेरिकी जनता के दबाव को झेलने में मुश्किल का सामना कर रहे थे और वह किसी भी हालत में इस युद्ध को रोकना चाहते थे। चाहते तो वो ये भी थे कि किसी सम्मानजनक तरीके से वह इससे बाहर निकलें। दूसरी ओर ईरान इसलिए तैयार हुआ था कि उसने सोचा कि 20 दिन की जंग में जो उसे नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कर सके और इतना दबाव अमेरिका पर बना सके कि वो उसकी शर्तें पर समझौता कर ले। हालांकि वह जानता था कि ट्रंप युद्ध-विराम की शर्तों का आदर नहीं करेंगे पर फिर भी उन्होंने जुआ खेला। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग छिड़ गई है। ट्रंप शायद अब इस निष्कर्ष पर पहुंच गए हैं कि यह संघर्ष अब एक निर्णायक मोड पर पहुंच सकता है। अब वह आशावादी काफी कम हो गए हैं और ट्रंप ने लंबे समय तक फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए हैं। सेना ने खुद बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। ईरान के अलग-अलग इलाकों में हमले किए जा रहे हैं। अबू मूसाआइलैंड, बंदर अब्बास जैसे ईरानी महत्वपूर्ण ठिकानों पर अमेरिका धमाके कर रहा है। चाबहार में भी हमले हुए हैं जिससे एवं यहां बिजली सप्लाई कट गई है। अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए जहाजों पर अटैक का यह बदला है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज स्टेट में आवाजाही को खतरे में डालने को ईरान की क्षमता को और कमजोर करने के लिए उसके खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू कर दिए हैं। अब अमेरिका, महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग पर स्वतंत्र रूप से आवागमन कर रहे जहाजों और नागरिक दल के खिलाफ हाल ही में किए गए हमलों के लिए ईरान को जवाबदेह ठहरा रहा है। जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में 85 जगह मिसाइलें और ड्रोन दागे। ज्यादातर हमले बहरीन-कुवैत में अमेरिकी बेस पर हुए। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान ने कहा कि धोखा देना अमेरिका की फितरत में है, लेकिन ईरान अपना हक लेकर रहेगा। अमेरिका के हमलों के बाद पजेश्कियान अफरा-तफरी में इराक के कर्बला से तेहरान लौट गए। इस बीच देर रात ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका यदि हमला करता है तो होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इस बीच अमेरिका ने डील के तहत ईरान को तेल बेचने की छूट की फूट दी थी। 2019 के बाद पहली बार ईरान को डॉलर के बदले तेल बेचने की मंजूरी मिली थी। तुर्किये में नाटो समिट में ट्रंप ने कहा ईरानी लोग बीमार मानसिकता के लोग हैं। उनके साथ आगे बातचीत करते वक्त की बर्बादी है। मैंने शांति लाने की कोशिश की लेकिन अब जल्द ही कहर फैलेगा। ट्रंप के बयान के तुरन्त बाद बुधवार तड़के ईरान के अहम पोर्ट बंदर अब्बास समेत 80 ठिकानों पर ताबड़तोड़ एयर स्ट्राइक की। ईरान के 8 फौजी मारे गए जबकि 60 पावर प्लांट्स तबाह हो गई। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बेगर गालिबाफ ने इन हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, अमेरिका ने अब तक यह नहीं सीखा है कि धमकाने और खुद वादे तोड़ने की कीमत अब चुकानी पड़ेगी। मैं साफ शब्दों में कहता हूं अगर आप हमले करेंगे तो जवाबी हमले भी झेलेंगे। यह मानने के अपने-अपने कारण हैं कि जैसे ईरान होर्मुज पर आधिपत्य जमाने की कोशिश कर रहा है। वैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति भी दुनिया और अपने देशवासियों को यह दिखाने को आतुर हैं कि वे ईरान को अपनी शर्तें पर झुकने के लिए बाध्य कर सकते हैं। अब यह युद्ध लम्बा खिंचने की पूरी संभावना है। शायद इजरायल भी यही चाहता है कि युद्ध-विराम टूटे और एक बार फिर ईरान पर मुकम्मिल हमला हो। 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 9 July 2026

ट्रंप का तंज:आंसू नकली हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि ईरान में इतनी बड़ी संख्या में लोग अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में रो रहे थे। एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगा था कि ईरान की जनता खामेनेई से नफरत करती है। इस पर उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि शायद यह आंसू नकली हों। जनाजे में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के मौजूद होने के सवाल पर ट्रंप ने दावा किया है कि यदि अमेरिका चाहे तो एक ही हमले में ईरान के मौजूदा नेतृत्व को खत्म कर सकता है। उन्होंने कहा कि वे सभी वहां मौजूद हैं। एक ही हमले में हम सभी खत्म कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर हमारे पास बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा। ईरान ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका खामेनेई की मौत के बाद छाए गहरे शोक को समझ नहीं पाएगा, क्योंकि न तो उसकी कोई सभ्यता है, न ही इतिहास और न ही सम्मान। उधर, ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर कहा, लोगों को मारा जा सकता है पर आदर्शों को नहीं। आपने अयातुल्ला अली खामेनेई को मार डाला पर असल में आपने इत्र की एक ऐसी शीशी तोड़ दी जिसकी खुशबू हर जगह फैल गई। बता दें कि ईरान में 36 साल तक सत्ता में रहे खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिकी इजराइली हमले मौत हो गई थी। 97 वर्ष के शिया धर्मगुरु अयातुल्ला जाफर सोमानी ने तेहरान की ग्रैंड मोसाला में अयातुल्ला अली खामेनेई, व उनके परिवार के दिवंगत सदस्यों के लिए प्रार्थना कराई। यहां अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मसूद, मेयसाम व मुस्तफा भी मौजूद थे। इन्हें युद्ध शुरू होने के बाद से नहीं देखा गया था। मौजूदा सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई नहीं देखे गए। रिव्यूशनरी गार्ड के प्रमुख जनरल अहमद वाहिदी भी युद्ध के बाद पहली बार दिखे। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, संसद के स्पीकर मो. बाघेर गालिबाफ व कुदस बलों का नेतृत्व करने वाले इस्माइल थानी भी मौजूद थे। ग्रैंड मोसाला में लगे पोस्टरों व दीवारों पर लिखे संदेशों में ट्रंप व इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को मारने की मांग की गई। कवि रासोली ने प्रार्थना से पूर्व कार्यक्रम का संचालन किया और अमेरिका-इजरायली मुर्दाबाद के नारे लगवाए। उधर, ईरान के सीनियर सैन्य अधिकारी अली शादमानी ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई का उसकी सशस्त्र सेनाएं कड़ा जवाब देंगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची ने भी दोहराया कि देश की जनता या नेतृत्व किसी भी खतरे का तत्काल और मजबूत जवाब दिया जाएगा। यह बयान इजरायल के रक्षामंत्री की ईरानी सुप्रीम लीडर को मारने की धमकी से जुड़ी टिप्पणी के बाद आया। बता दें कि शहीद अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में उनके अंतिम दीदार करने करोडों लोग सडकों पर उतरे। ऐसी अंतिम यात्रा दुनिया में पहले कही भी नहीं देखी गई। अंतिम संस्कार में भारत समेत 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। विदेश मंत्री अब्बास आराघची ने कहा कि 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधि सर्वोच्च नेता ग्रैट अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इनमें हमारे वफादार अरब भाई भी शामिल हैं।

- अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 7 July 2026

खामेनेई के अंतिम विदाई की रस्में शुरू

बीते 28 फरवरी को अमेरिकी इजरायली हमले में शहीद हुए ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चार महीने बाद चार जुलाई से तेहरान में शुरू हो गया है। ईरानी अधिकारी इसे सदी का अंतिम संस्कार बता रहे है। उनके अनुसार 1.2 करोड़ से दो करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इन तैयारियों की अगुवाई तेहरान स्थित मोहम्मद रसूल्लाह कोर कर रहा है। यह इस्मामिक रिवाल्यूशनरी गार्ड कोर की प्रमुख इकाई है। करीब 800 विदेशी पत्रकार इस कार्यक्रम की कवरेज के लिए तेहरान में मौजूद हैं। अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार कई दिनों तक चलने वाली अंतिम विदाई की रस्में शुक्रवार को शुरू हो गई। तेहरान में जगह-जगह बैनर लगाए गए हैं, जिसमें लोगों से अपील की गई है कि वे इस विनाशकारी युद्ध के बाद इस्लामिक रिपब्लिक के समर्थन में एकजुट हों। उनके जनाजे को ईरानी शहरों और पड़ोसी देश इराक में ले जाया जाएगा। खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के ताबूत ईरानी झंडे में लपेटकर तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में रखे गए है। मृतकों में उनके दामाद, उनकी सबसे बड़ी बेटी और एक छोटा ताबूत उनकी 14 महीने की पोती का है जिसे देकर सभी का दिल दहल गया। ताबूतों में अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की पत्नी भी शामिल है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लगभग 50 देशों के प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचे हैं। भारत और सउदी अरब का प्रतिनिधिमंडल भी इनमें शामिल है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है। उन्होंने ईरान पर तीखा तंज कसा है तो वहीं दूसरी तरफ ईरानी लोगों ने अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए और खामेनेई के कातिलों से बदला लेने की कस्में खाई। ट्रंप ने तेहरान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान को अंतिम सरकार के लिए एक हफ्ते का समय इसलिए दिया क्योंकि वाशिंगटन अच्छा देश है। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि युद्ध में ईरान की बुरी तरह हार हुई है। ईरानी अधिकारियों ने अंतिम संस्कार का नारा वी मस्ट राइज रखा है जिसके साथ मुट्ठी भींचे हुए हाथ का प्रतीक जोड़ा गया है। खामेनेई का ताबूत एक ऊंचे मंच पर रखा गया है। भीड़ प्रबंधन इस तरह से किया गया है कि लोग 15-20 मिनट के भीतर अंदर जाकर बाहर निकल सकें। बुधवार को खामेनेई का पार्थिव शरीर नजफ से लाया जाएगा। वहां शिया इस्लाम के पहले इमाम अली की दरगाह पर जुलूस निकाला जाएगा इसके बाद श्रद्धांजलि समारोह कर्बला में जारी रहेगा, फिर पार्थिव शरीर वापस, ईरान लाया जाएगा। एक बड़ा सवाल यह कि जनाजे की नमाज कौन पढ़ाएगा। शिया परंपरा में यह भूमिका धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। ईरान के सर्वोच्च नेता बनने के बाद से मोजतबा खामेनेई जो कि अब ईरान के सुप्रीम लीडर है को अभी तक सार्वजनिक रूप से देखा नहीं गया है। अभी तक यह भी नहीं कहा जा सकता कि वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं? अमेरिका- इजरायल युद्ध के बीच यह एक अपने प्रकार का अनूठा अंतिम संस्कार है। ईरानी खुफिया एजेंसियों ने मोजतबा से अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना किया है। क्योंकि इजरायल के एक मंत्री ने खुलेआम धमकी दी है कि मोजतबा को हम मार कर रहेंगे। हालांकि मोजतबा खामेनेई डरने वालों में से नहीं है। यह भी सम्भव है कि इतने दिन चलने वाली इस अंतिम विदाई में कहीं न कहीं बगैर शोर मचाए मोजतबा अपने पिता को श्रद्धांजली देने पहुंच जाएं। हालांकि भारत में ईरान के अधिकारिक प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने खुलासा किया है कि मोजतबा खुद समर्थकों और देशवासियों के बीच जाने के लिए बेहद उत्सुक है, पर ईरान की टॉप खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने इस पर वीटो लगा दिया है। मौजूदा हालातों में मोजतबा का सार्वजनिक रूप से समाने आना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं माना जा सकता है। दरअसल, इस वक्त ईरान और इजरायल के बीच दुश्मनी अपने चरम पर है और खुफिया इनपुट्स है कि इस बड़े जमावड़े का फायदा उठाकर दुश्मन देश ईरान के बीच नए शीर्ष नेतृत्व को निशाना बना सकता है। इसी खतरे के माहौल की वजह से मोजतबा को नजरों से दूर रखने की रणनीति अपनाई जा रही है।
- अनिल नरेन्द्र