Tuesday, 24 February 2026

पैसला ट्रंप के टैरिफ रद्द करने का

मानना पड़ेगा कि अमेरिका में आज भी लोकतंत्र जिंदा है। संविधान सवरेपरि है। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने दिखा दिया कि वह संविधान की रक्षा करने में किसी के सामने न तो झुकने को तैयार है और न ही किसी दबाव में आएगी। चाहे वह अमेरिका के राष्ट्रपति ही क्यों न हों। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुव्रवार को पैसला सुनाया कि राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप का वैश्विक टैरिफ अवैध है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस जॉन रॉबट्र्स ने पैसला 6-3 के बहुमत से दिया। यानि छह जजों ने टैरिफ को अवैध बताया और तीन इससे असहमत थे। ट्रंप अमेरिकी व्यापार समझौतों को नए सिरे से करने के लिए दुनियाभर में टैरिफ को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। यह पहली बार है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के दूसरे कार्यंकाल की किसी नीति को निर्णायक रूप से रद्द किया है। अन्य क्षेत्रों में अदालत के वंजर्वेटिव बहुमत ने अब तक ट्रंप को कार्यंकारी शक्तियों के व्यापाक उपयोग की छूट दी थी। इस बार सुप्रीम कोर्ट में छह जजों के बहुमत, तीन वंजर्वेटिव और तीन लिबरल ने कहा कि बिना कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की स्पष्ट अनुमति के इतने व्यापक टैरिफ लागू कर ट्रंप ने सीमा लांघी हैं। अदालत ने ट्रंप के इस तर्व को खारिज कर दिया कि 1977 का कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, अप्रत्यक्ष रूप से टैरिफ की अनुमति देता है। जस्टिस रॉबट्र्स ने कहा कि राष्ट्रपति जिस अधिकार का दावा कर रहे हैं, वह किसी भी पैमाने पर सीमा से बाहर का था। चीफ जस्टिस ने पैसले में लिखा है, अगर कांग्रेस टैरिफ लगाने जैसी असाधारण शक्ति देना चाहती कि वह इसे स्पष्ट रूप से कर सकती है। उन्होंने यह भी लिखा कि ट्रंप प्रशासन के कानूनी तर्को को स्वीकार करना व्यापार नीति पर कार्यंपालिका और विधायिका के लम्बे सहयोग को समाप्त कर राष्ट्रपति को अनियंत्रित ताकत देना होगा। ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताने के पैसले से तीन वंजर्वेटिव जजों क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल एलिटो और ब्रेट वैवनॉ ने असहमति जताईं। ट्रंप ने तीन जजों की तारीफ भी की है। वैदनो ने कहा कि कईं कानून राष्ट्रपतियों को टैरिफ और आयात प्रतिबंध लगाने की अनुमति देते हैं। उनके अनुसार 1977 का कानून राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान विदेशी खतरों से निपटने के लिए राष्ट्रपति को अनुमति देते हैं। उधर, ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्प्रेंस में पैसले को भयानक और हास्यास्पद बताया और कहा कि वह अदालत के वुछ सदस्यों से शर्मिदा हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय गलत है। लेकिन इससे कोईं फर्व नहीं पड़ता क्योंकि हमारे पास बहुत शक्तिशाली विकल्प है। ट्रंप के पास दो बड़े विकल्प हैं। पहला: ट्रंप अमेरिकी कांग्रेस यानि प्रतिनिधि सभा और सीनेट में टैरिफ के प्रस्ताव को पास कराने के लिए रख सकते हैं। 435 की प्रतिनिधि सभा में ट्रंप के रिपब्लिकन 218 जबकि विपक्षी डेमोव्रेट 213 है जबकि 100 सीनेट में रिपब्लिकन 53 और डेमोव्रेट 47 हैं। टैरिफ के खिलाफ सेंटीमेंट को देख ट्रंप संसद में टैरिफ को रखने से शायद परहेज करें। अन्य प्रावधान लागू कर सकते हैं, पर लम्बी प्रव्रिया होगी। ट्रंप अमेरिकी संविधान की धारा 301 के तहत टैरिफ के प्रावधान लागू कर सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत टैरिफ को जायज ठहराया जाता है। ट्रंप ने चीन, कनाडा और मैक्सिको पर इन्हीं प्रावधानों के तहत टैरिफ लगाया था। हालांकि इन्हीं प्रावधानों को भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ट्रंप ने भी ऐलान कर दिया है कि वह पीछे नहीं हटेंगे। शुव्रवार रात उन्होंने कहा कि अन्य कानूनी अधिकारों के आधार पर नया 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रंप ने कहा कि हम पीछे नहीं हटेंगे, हम और ज्यादा पूंजी जुटाएंगे। देखें, आगे क्या होता है। सारी दुनिया में अब रिपंड की मांग भी उठनी शुरू हो गईं है। आगे-आगे देखते हैं होता है क्या? ——अनिल नरेन्द्र

Saturday, 21 February 2026

अजित पवार विमान हादसा

 
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित दादा पवार के विमान हादसे के करीब 20 दिन बाद उनके बेटे ने चुप्पी तोड़ी। अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार ने एक बेहद भावुक पोस्ट के जरिए जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जय पवार ने सीधे तौर पर कहा है कि विमान का ब्लैक बाक्स इतनी आसानी से नष्ट होने वाली चीज नहीं है। बता दें कि किसी भी विमान हादसे में जब सब कुछ नष्ट हो जाता है तो उसके अंदर ब्लैक बॉक्स न तो आग से, पानी से, जमीन पर गिरने से, विस्फोट से नष्ट नहीं होता। 20 वर्षों तक वह सुरक्षित रहता है। जय पवार ने साफ तौर पर कहा है कि ब्लैक बॉक्स  इतनी आसानी से नष्ट होने वाली चीज नहीं है, जैसा कि दावा किया जा रहा है। जनता को सब जानने का हक है। जय पवार ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने लिखा विमान दुर्घटना में ब्लैक बॉक्स आसानी से  नष्ट नहीं हो सकते। महाराष्ट्र की जनता को इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना का पूरा, पारदर्शक और निर्विवाद सत्य जानने का अधिकार है। जय पवार ने विमान कंपनी वीएसआर के खिलाफ तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस कंपनी के उड़ान व संचालन पर तुरन्त प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और विमानों के रखरखाव में हुई संभावित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पोस्ट के अंत में उन्होंने बेहद भावुक होकर लिखा ः मिस यू डैड। उधर अजित पवार के भतीजे और विधायक रोहित पवार ने कहा कि अजित दादा पवार की आकस्मिक मृत्यु में साजिश की आशंका है। रोहित पवार ने मुंबई में दावा किया कि कई सूत्रों से विस्तृत जानकारी जुटाने के बाद ही वह प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं। प्रेस कांफ्रेंस में रोहित पवार ने कहा कि उन्हें एयरलाइंस कंपनी वीएसआर, बुकिंग संभालने वाली कंपनी एरो और पायलट सुमित कपूर पर संदेह हैं। उन्हेंने कहा कि उन्हें इस मामले में जानकारी इसलिए जुटानी पड़ी क्योंकि जांच एजेसियां बहुत धीमी गति से काम कर रही है। अजित दादा पवार परिवार और एनसीपी ने अब इस मामले की सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से मुलाकात कर इस मामले में उच्चस्तरीय जांच का निवेदन सौंपा है। प्रफुल्ल पटेल, हसन मुश्रीफ, सुनील तटकरे और पार्थ पवार जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में सरकार से मांग की गई है कि इस हादसे के पीछे की हर साजिश या लापरवाही का पर्दाफाश होना चाहिए। इनका सीधा निशाना उस एविएशन कंपनी पर है जिसका विमान इस हादसे का शिकार हुआ। आरोप लग रहे हैं कि क्या विमान की सर्विसिंग और सुरक्षा मानकों में कोई कोताही बरती गई थी? 28 जनवरी को हुए इस हादसे में अजित दादा पवार सहित कुल 5 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इस घटना के बाद से ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह मात्र एक दुर्घटना थी या कोई गहरी साजिश? आदरणीय अजित दादा पवार के आकस्मिक निधन से पूरे महाराष्ट्र को गहरा धक्का लगा है, यह कहना है सांसद सुप्रिया सुले का। एनसीपी (शरद गुट) ने मांग की है कि इस दुर्घटना की जांच पूरी होने तक नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू को उनके पद से हटा दिया जाए। हमारा भी मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि दुर्घटना के कारणों का साफ पता चले पर ऐसा होगा क्या? 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 19 February 2026

निखिल गुप्ता को हो सकती है 40 साल जेल


एक भारतीय व्यक्ति ने पावार को न्यूयार्क में सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की 2023 में हत्या की नाकाम साजिश रचने के आरोप में दोष स्वीकार किया है। पता नहीं पिछले कुछ दिनों से भारत और अमेरिका के ग्रह टकरा रहे हैं। एक के बाद एक नई समस्या खड़ी होती जा रही है। पहले गौतम अडानी का मामला फंसा, फिर भारत-अमेरिका ट्रंप डील पर विवाद खड़ा हो गया और अब पन्नू की हत्या की साजिश में मामला फंस गया है। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा है कि यह उस मामले में पहली बार अपराध स्वीकार किया गया है जिसे कनाडा और अमेरिका के अधिकारियों ने भारत सरकार की ओर से असंतुष्टों की हत्या के अभियान से जुड़ा बताया था। अमेरिका में भारतीय मूल के निखिल गुप्ता ने अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश रचने के मामले में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। इस मामले की सुनवाई न्यूयार्क की एक अदालत में हो रही है। अटार्नी के दफ्तर से जारी हुए बयान के मुताबिक गुप्ता ने हत्या के लिए सुपारी देने, हत्या की साजिश रचने के साथ ही मनी लांड्रिंग की साजिश से जुड़े तीनों आरोपों को स्वीकार कर लिया है। गुप्ता को 27 मई को सजा सुनाई जाएगी। अमेरिका में इन तीनों आरोपों में सम्मिलित तौर पर 40 साल की सजा हो सकती है। गुप्ता के 30 जून 2023 को चेक रिपब्लिक से गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसका प्रत्यर्पण किया गया। आरोप है कि निखिल गुप्ता ने ये साजिश भारतीय सरकारी कर्मचारी रहे विकास यादव के कहने पर रची, इस संबंध में विकास यादव को सीसी-1 कहकर संबोधित किया गया है। इस संबंध में मार्च 2025 में ही विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वो (विकास यादव) अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं है। आरोप पत्र के मुताबिक 2023 में यादव ने गुप्ता को हत्या का काम सौंपा था। यादव के कहने पर गुप्ता ने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया जो असलियत में अमेरिका की जांच एजेंसी डीईए का ही अंडरकवर एजेंट था विकास यादव ने एक सहयोगी के जरिए इस हिटमैन को अग्रिम भुगतान के तौर पर 15 हजार डालर दिए। 2023 में ही विदेश मंत्रालय ने कहा था कि निखिल गुप्ता को तीन बार चेक गणराज्य में काउंसलर मदद दी गई। यूं तो मामला अमेरिका में 2023 से चर्चा में है, लेकिन इस मामले में इस हालिया घटपाम की टाइमिंग को भी अहम माना जा रहा है। जब भारत और अमेरिका के संबंध बहुत सहज नहीं हैं और दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर एक व्यापार के अंतरिम समझौते के अगले महीने तक आखिरी रूप लेने की उम्मीद है। ऐसे में भारत के लिए आगे की राह आसान नहीं दिखती। न्याय विभाग ने पन्नू की हत्या को साजिश और 18 जुलाई को कनाडा में खालिस्तानी निज्जर की हत्या के बीच कई लिंक जोड़े हैं। एफबीआई के सहायक निदेशक रोमन रोज से जावस्की ने कहा अमेरिकी नागरिक सिर्फ बोलने की आजादी का इस्तेमाल करने के लिए ट्रांसनेशनल रिप्रेशन का निशाना बना। यानी दमन के लिए किसी दूसरे देश की धरती का इस्तेमाल की साजिश है। इन शब्द का इस्तेमाल कनाडाई अधिकारियों ने कनाडा में निज्जर की हत्या पर किया था। भारत सरकार के इशारे पर की गई बताई गई है जिसे भारत सिरे से खारिज कर चुका है। भारत ने पिछले साल नवम्बर में अमेरिका की ओर से उठाई गई सुरक्षा चिंताओं पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच एजेंसी गठित की थी। अक्टूबर 2024 में भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की थी कि पन्नू के खिलाफ नाकाम हत्या की साजिश से जुड़े अमेरिकी न्याय विभाग के अभियोग में जिस व्यक्ति (विकास यादव) का नाम सामने आया था, वह अब भारत सरकार की सेवा में नहीं है। मूल अभियोग में सरकारी अधिकारी को सीसी-1 कहा गया था। अक्टूबर 2024 में ही अमेरिकी अधिकारियों ने दूसरा संशोधित अभियोग सार्वजनिक किया, जिसमें सीसी-1 की पहचान विकास यादव के रूप में की गई। बाद में विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश विभाग ने हमें सूचित किया कि अभियोग में उल्लेखित व्यक्ति अब भारत में कार्यरत नहीं है। हम पुष्टि करते हैं कि वह अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। अब देखना यह है कि निखिल गुप्ता के खिलाफ अमेरिकी अदालत में केस आगे कैसे बढ़ता है। यह भी देखना होगा कि विकास यादव को लेकर अमेरिका भारत पर कितना दबाव बनाता है और भारत सरकार आगे क्यों करेगी? 
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 17 February 2026

जैफ्री एपस्टीन फाइल्स


आपने ताशकंद फाइल्स, केरला फाइल्स, कश्मीर फाइल्स और बंगाल फाइल्स का तो नाम सुना होगा और आप में से कईयों ने इन्हें देखा भी होगा पर आज मैं आपको विश्व चर्चित एपस्टीन फाइल्स के बारे में बताता हूं। जैफ्री एपस्टीन कौन था? एपस्टीन फाइल्स जी हां, यही वो दो शब्द हैं जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन को महीनों से परेशान कर रहे हैं। जैफ्री एपस्टीन अमेरिका का एक अमीर फाइनेंसर था। उस पर महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और तस्करी के गंभीर आरोप लगे थे। समय के साथ उसने काफी दौलत बनाई और उसके बाद उसके संबंध बड़े कारोबारियों, राजनेताओं और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों से जुड़ते चले गए। साल 2019 में उसे अमेरिका के फ्लोरिडा और न्यूयार्क में नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इससे पहले वह 2008 में भी ऐसे ही मामलों में जेल जा चुके थे। लेकिन तब उसे बहुत कम सजा मिली थी। अगस्त 2019 में जेल में उसकी रहस्यमय ढंग से मौत हो गई। जिसे अमेरिकी सरकार ने आत्महत्या बताया। एपस्टीन फाइलें उन सरकारी डाक्यूमेंट का संग्रह है जो उनके खिलाफ जांच से जुड़े हैं। इनमें पूछताछ के रिकार्ड, अदालत से जुड़े कागजात और अन्य सुबूत शामिल हैं। एपस्टीन की रहस्यमय मौत के बाद से ही लोग ये जानना चाहते थे कि उसके मामलों में किन-किन लोगों का हाथ रहा है। जब ये फाइलें सामने आई तो वहीं बड़े नामों का पा होने के कारण बहस और तेज हो गई। बाल यौन शोषण के दोषी जैफ्री एपस्टीन के यौन अपराधों को लेकर ट्रंप प्रशासन लगातार संकट से जूझ रहा है। अमेरिका की हाउस ओवर साइट कमेटी ने एपस्टीन से जुड़े लाखों दस्तावेज जारी किए हैं। इनमें ई-मेल, वीडियो, चैट इत्यादि शामिल हैं। मामला एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ के बाद सामने आया। तब एक लड़की (14 वर्ष) के माता-पिता ने फ्लोरिडा में पुलिस को बताया कि जैफ्री एपस्टीन ने अपने पाम बीच स्थित घर में उनकी बेटी से छेड़छाड़ की थी। पूरे घर में लड़कियों की तस्वीरें मिलीं और उसे एक नाबालिग से वेश्यावृत्ति कराने का दोषी ठहराया गया। एपस्टीन को यौन अपराधी के रूप में पंजीकृत किया गया। 11 साल बाद 2019 में उस पर फिर आरोप लगा कि वह नाबालिग लड़कियों का सैक्स रैकेट व नेटवर्क चला रहा है। जेल में ट्रायल का इंतजार करते हुए उसकी मौत हो गई। जिसे आत्महत्या बताया गया। इन दिनों चर्चा में बहुत सारे दस्तावेज जमा हुए हैं। जैसे पीड़ितों और गवाहों के बयान उनके घरों में छापे में मिली चीजें। 2025 में अमेरिका के न्याय विभाग के एक मंत्री के मुताबिक इस मामले में एफबीआई के पास 300 गीगाबाइट (जीबी) से ज्यादा डेटा और सबूत हैं। न्याय विभाग कहता है कि इनमें पीड़ितों की बहुत सारी तस्वीरें और वीडियो हैं। जो बच्चों के शोषण से जुड़ी हुई है। इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाएगा क्योंकि नया कानून सर्वाइवर की पहचान छिपाने की इजाजत देता हैं। यही जानकारी एपस्टीन फाइल्स हैं, जो समय-समय पर जारी हो रही है। एपस्टीन फाइल्स से जुड़े 30 लाख नए दस्तावेज जारी किए गए हैं। कुछ सामग्री पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है। जैफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों में एक अत्यन्त गंभीर और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है। अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा हाल ही में जारी कई फाइलों में नाबालिग लड़कियों और महिलाओं से दरिंदगी का खुलासा हुआ है। एक फाइल के अनुसार दो विदेशी महिलाओं की मौत यौन संबंधों के दौरान गला घोंटने के कारण हुई थी। बाद में एपस्टीन के एक कर्मचारी ने उन्हें न्यू मैक्सिको स्थित फार्म हाउस जोरो रैंच में दफना दिया। इसमें एपस्टीन की करीबी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल भी शामिल थीं। यह गिस्लेन मैक्सवैल कौन थीं, इसके बारे में फिर बताऊंगा। एक अन्य फाइल के अनुसार एक नाबालिग लड़की ने खुद को ह्यूमन इंक्यूवेटर की तरह इस्तेमाल किए जाने का दावा किया है। ई-मेल के अनुसार जोरो रैंच में लड़कियों को लंबे समय तक बंद रखा गया और उनसे जबरन गर्भधारण कराया गया। बच्चे पैदा कराए गए और जन्म के बाद ये बच्चे गायब हो गए। मैंने जैफ्री एपस्टीन जो कि एक मनुष्य नहीं था जानवर से भी बदतर था उसके बारे में कुछ जानकारी दी है। चूंकि यह मामला अभी चल रहा है इसलिए जो भी अपडेट होगी आप तक लाने की कोशिश करूंगा। इस नरभक्षी की परतें खुलती जा रही हैं। 
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 14 February 2026

एपस्टीन से मेरी मुलाकात हुई थी


सारी दुनिया में इस समय इस एपस्टीन फाइल्स की चर्चा हो रही है। अमेरिका में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी के आरोपी अरबपति जेफ्री एपस्टीन से जुड़े गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक होते ही दुनिया की सत्ता और रसूख के गलियारों में हलचल मच गई है। जैफ्री एपस्टीन की पूरी कहानी किसी और दिन बताऊंगा, आज तो एपस्टीन फाइल्स और भारत के एक मंत्री का नाम सामने आने के बारे में बताऊंगा। एक लंबे गतिरोध के बाद बुधवार को लोकसभा में बजट पर बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका और भारत की ट्रेड डील पर मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कई आर्थिक मुद्दों पर सवाल उठाएं। अपने भाषण में नेता प्रतिपक्ष ने जेफ्री एपस्टीन फाइल्स, अनिल अंबानी और अडानी से जुड़े मामलों पर भी बोले। उन्होंने अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर भी आरोप लगाए। राहुल गांधी की ओर से इन मुद्दों को उठाने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ गया। चूंकि लोकसभा की चर्चा में हरदीप पुरी का नाम आ गया था। इसलिए मंत्री हरदीप पुरी ने बाद में बाकायदा एक प्रेस कांफ्रेंस की और अपना पक्ष रखा। हरदीप पुरी ने कहा कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल तीन-चार मौकों पर वह भी एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर हुई थी और उनके साथ सिर्फ एक ई-मेल का आदान-प्रदान हुआ था। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताया और स्पीकर से अनुरोध किया कि राहुल गांधी के भाषण की गलत बातों को कार्रवाई से हटा दिया जाए। उधर राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स का पा करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कि अनिल अंबानी का परिचय अमेरिकी निवेशक और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से कराया था। उन्होंने कहा एक बिजनेसमैन है अनिल अंबानी, मैं पूछना चाहता हूं कि वो जेल में क्यों नहीं है? मैं हरदीप पुरी से भी पूछना चाहता हूं, जिन्होंने उन्हें एपस्टीन से परिचय करवाया था। हरदीप पुरी ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कई बातें कहीं। उन्होंने कहा एपस्टीन से जुड़ी 30 लाख फाइलें रिलीज हुई है और मैं न्यूयार्क में आठ साल रहा। मैं संयुक्त राष्ट्र में भारत का राजदूत बनकर 2009 में पहुंचा था और 2017 में मैं मंत्री बना और आठ सालों में संभवत तीन या चार मीटिंग का संदर्भ है। अमेरिका में भारतीय राजदूत के पद से रिटायर होने के कुछ महीने बाद मुझे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) में आयोजित किया गया था। मैं आईसीएम के अध्यक्ष जो आस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री थे के साथ एक डेलीगेशन में एपस्टीन से मिला था। हरदीप पुरी का कहना था कि एपस्टीन से जुड़े अन्य मामलों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हरदीप पुरी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट डालते हुए पुरी से कुछ 6 सवाल पूछे। पवन खेड़ा ने लिखा ः हरदीप पुरी ने कहा कि उनके सदस्यों ने उन्हें रीड हाफमैन से मिलवाया था। लेकिन जो उन्होंने नहीं कहा, वह ज्यादा मायने रखता है। 4 अक्टूबर 2014 को एपस्टीन ने हरदीप पुरी को ई-मेल किया गया रीड से मुलाकात हुई? पुरी ने जवाब दियाः क्या मैं आज दोपहर एक मीटिंग के लिए सैन फ्रांसिस्को में हूं। मेरे दोस्त, तुम तो चीजें करवा देते हो। कोई सलाह? इसके बाद खेड़ा ने एक्स पर की गई पोस्ट में 6 सवाल पूछे, ये सवाल थे - पहला ः एपस्टीन की रीड के साथ उनकी मुलाकात के बारे में पहले ही कैसे पता चल गया? दूसरा ः क्या एपस्टीन ही वह कंटैक्ट था जिसने रीड हॉफमैन के साथ मुलाकात करवाई थी? तीसरा ः हरदीप उनसे मुलाकात की जानकारी क्यों डिस्कस कर रहे थे? चौथा ः एपस्टीन को दोस्त कह के क्यों संबोधित किया था? पांचवां ः एपस्टीन हरदीप के लिए क्या करवा रहा था? छठा ः अगर उनका संबंध महज एक संयोगवश या सतही था तो हरदीप पुरी एपस्टीन से सलाह क्यों मांग रहे थे? एपस्टीन फाइल्स में लाखों दस्तावेज, वीडियो, ईमेल हैं। अभी बहुत से खुलासे बाकी हैं। इन फाइल्स के खुलासों के कारण अब तक 10 देशों में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे राजनेता, उद्योगपति, नौकरशाह, राजघराने से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों के इस्तीफे हो चुके हैं और 80 की जांच जारी है। अभी तो मामला शुरू हुआ है, आगे-आगे देखिए होता है क्या? 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 12 February 2026

ट्रंप झुकेगा बस झुकाने वाला चाहिए


अमेरिका के सर्वशक्तिमान, रेम्बो डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सामने झुक गए हैं। पिछले एक पखवाड़े से ज्यादा ट्रंप की फौजों, समुद्री जहाजों, फाइटर जैट्स ने ईरान को चारो तरफों से घेरा हुआ है पर ट्रंप ने हमला अभी तक नहीं किया। अरबों डॉलर खर्च करके भी उसकी हिम्मत नहीं पड़ रही कि ईरान पर हमला करे। दरअसल ईरान ने दिखा दिया है कि सैनिक तैयारी कैसी है। ईरान के पास ऐसी-ऐसी मिसाइलें हैं जो इजरायल तो छोड़िए अमेरिका तक मार कर सकती है। मध्य पूर्व में जहां-जहां भी अमेरिकी सैनिक अड्डे हैं वह सब ईरान की मिसाइलों की रेंज में हैं और यही तथ्य सउदी अरब, कतर, मिस्र, कुवैत आदि अरब देशों को सता रहा है। इजरायल ने तो 12 दिन की जंग में देख ही लिया था कि ईरान कितना विनाश कर सकता है। उसे डर है कि अब अगर लड़ाई छिड़ी तो वह तो नक्शे से ही मिट सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समझ नहीं आ रहा था कि वह आगे कैसे बढ़े? वह इतने आगे आ चुका है, अब पीछे हटना भी नाक कटाने जैसा होगा। इसलिए कुछ समय के लिए ट्रंप ने वार्ता का रास्ता चुना है। ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का पहला दौर पूरा हो चुका है। दोनों पक्ष आगे वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। लेकिन तनाव बरकार है और जंग की तैयारी पूरी चल रही है। खाड़ी देश ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई। दोनों देश आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी संदेशवाहक की भूमिका में रहे। ईरान की ओर से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची शामिल हुए जबकि अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विरकॉम और ट्रंप के दामाद जेरेड कोरी कुशनर मौजूद रहे। बातचीत से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप खुली चुनौती दे चुके थे कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए या अपनी मिसाइलों की दूरी कम नहीं की तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बावजूद ईरान ने दो टूक कहा कि न तो उसका यूरेनियम संवर्धन बंद होगा न ही वह अपनी मिसाइल प्रोडक्शन को सीमित या कम करेगा और न ही अपने प्रवासियों, हिजबुल्ला, हूती, हमास, इत्यादी को अपना समर्थन बंद करेगा। हां वह अमेरिका के साथ अपने न्यूक्लियर प्रोडक्शन पर बात कर सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने काहिरा में कहा कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ हुई वार्ताओं के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए रविवार को कहा कि ताकतवर देशों के आगे नहीं झुकने से ईरान को ताकत मिलती है। अरागची ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के साथ बातचीत का नया दौर जल्द शुरू होगा। उन्हेंने एक दिन पहले हुई वार्ता को एक अच्छी शुरुआत बताया, साथ ही चेताया कि भरोसा फिर से बनाने में समय लगेगा। अल जजीरा के साथ एक इंटरव्यू में अरागची ने यह भी साफ किया कि तेहरान अपने यूरेनियम एग्रीमेंट प्रोग्राम को नहीं छोड़ेगा जिसे उन्होंने एक ऐसा अधिकार कहा जिसे अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि उनका देश एक ऐसे एग्रीमेंट के लिए तैयार है जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भरोसा दिलाए और साथ ही उसकी संवर्धन गतिविधियों को भी बचाए। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अमेरिका की इस मांग को भी खारिज कर दिया कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी ओर वार्ता विफल होने पर ईरान को घातक अंजाम भुगतने की धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौता करने में विफल रहता है तो उसे वेनेजुएला से भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। अब देखना है कि मध्य पूर्व में शांति होती है या जंग। ईरान अपने स्टैंड पर अड़ा हुआ है और कहीं भी झुकने को तैयार नहीं है। पहला राउंड तो ईरान ने जीत लिया है। अब गेंद ट्रंप के पाले में है देखते हैं कि मध्य पूर्व में शांति होती हैं या जंग?
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 10 February 2026

यह जानलेवा कोरियन लव गेम


गाजियाबाद में तीन सगी बहनों का 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने की घटना ने एक बार फिर इन जानलेवा गेम्स की भारी कीमत चुकाने की याद दिला दी है। इस घटना को महज आत्महत्या कहना सच्चाई से आंखें मूंदना जैसा होगा। इन तीन नाबिलग बच्चियों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गाजियाबाद के शालीमार गार्डन की यह घटना कई दिनों सुर्खियों में है और कई तरह की बातें कही जा रही हैं। शालीमार गार्डन के एसीपी अतुल कुमार सिंह ने पत्रकारों को बताया चार फरवरी की रात लगभग सवा दो बजे सूचना मिली कि टीला मोड़ पुलिस स्टेशन क्षेत्र के तहत भारत सिटी में एक घटना हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची वहां तीन बच्चियों की ऊंची इमारत से गिरने के कारण मौत हो गुई थी। उन्हें एम्बुलेंस के जरिए लोनी के एक अस्पताल लाया गया, जहां डाक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। तीनों बहनों के नाम है 16 वर्षीय विशिका, 14 वषीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी। बारह, चौदह और सोलह वर्ष की उम्र तो सपनों को पंख लगाकर उड़ने की होती है। उस उम्र में मौत को गले लगाना भला किसके गले उतर सकता है? दरअसल हालात, स्थितियां और आभासी भावनाओं के झूठे संसार ने इन मासूमों को मौत की दर तक पहुंचाया। यह एक डिजिटल मर्डर है। यह दुखद हादसा खूनी डिजिटल एल्गोरिदम का परिणाम है। जो मोबाइल के जरिए हम सबके घरों में घुस आया है। यह घटना कोरियन लव गेम और उसके पीछे एल्गोरिदम की कारगुजारी है। शुरुआती जांच में मोबाइल फोन और कोरियाई संस्कृति के प्रति जुनून इस घटना का मुख्य कारण हो सकते हैं। लड़कियां कोरियाई संगीत, ड्रामा, हस्तियां, जापानी फिल्में और डोरेमान के अलावा हिट मैन जैसे कार्टूनों के साथ-साथ ऑनलाइन गेम्स की शौकीन थीं। साथ ही वे कोरियाई कल्चर से इस हद तक प्रभावित थीं कि उन्होंने अपने नाम भी बदल लिए थे। लेकिन ब्लूव्हेल जैसे टास्क आधारित गेम को इस घटना का एक मात्र या मुख्य कारण नहीं माना जा सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि तीनों बच्चियों की मौत शरीर से ज्यादा खून निकलने और चोट से हुई है। ऊंचाई से गिरने के कारण कई हड्डियां टूटी थीं। परिवार आर्थिक तंगी की मार झेल रहा था और घर में कलह ने भी चीजें सुरक्षित बना दी थीं। कमरे में एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें सॉरी पापा लिखा हुआ था। इस घटना के बाद बच्चों के बीच फोन एडिक्शन को लेकर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई मां-बाप का कहना है कि हमारे बच्चे रात को सो नहीं पा रहे हैं। वे इतने डरे हुए हैं। बाल मनोचिकित्सक नीलेश देसाई कहते हैं कि फोन एडिक्शन रसायनिक पदार्थों की लत जैसा ही है। किशोरावस्था एक नाजुक अवस्था है। जहां बदलते समाज के साथ टेक्नोलॉजी का आक्रमण बढ़ रहा है। इस स्थिति में जब कोई किशोर या किशोरी से परिवार एकदम से फोन छीन लेता है तो एक आपदा सी खड़ी हो जाती है। एक बच्चे के लिए ये एक रसायनिक पदार्थ के एडिक्शन से कम नहीं है। डाक्टर भावना वर्मा बताती हैं, लंबे समय से स्कूल न जाने का मतलब पढ़ाई छूटने से नहीं है। यह मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का एक सिलसिला खड़ा कर देता है। स्कूल किशोरों के स्वस्थ विकास के लिए केवल तथ्य सीखने की जगह से कहीं अधिक एक अहम स्ट्रक्चर के तौर पर काम करता है। मैंने कई किशोरों और परिवारों को परामर्श दिया है। जहां के पॉप, के-ड्रामा, कोरियाई सौंदर्य रुझान और आइडल्स के प्रति तीव्र आकर्षण एक सामान्य रूचि से कहीं अधिक गहरा हो गया है जोकि बच्चों के लिए बहुत हानिकारक हो चुका है। गाजियाबाद की घटना हर उस माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जो यह सोच कर निश्चिंत बैठे हैं कि उनका बच्चा कमरे में सुरक्षित मोबाइल चला रहा है। कोरियन लव गेम जैसे डिजिटल खेल बच्चों की भावनाओं, असुरक्षा बोध का फायदा उठाकर उन्हें टाक्स पूरा करने के लिए मजबूर करते हैं। इसी का एक नतीजा गाजियाबाद की। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के रूप में सामने आया है। ऐसी खतरनाक, जानलेवा गेम्स पर तुरन्त बैन लगाना चाहिए।
-अनिल नरेन्द्र