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Thursday, 16 April 2026

मेलानिया ने अमेरिका में नई जंग छेड़ दी


ईरान युद्ध में सीजफायर होते ही अमेरिका के अंदर एक और जंग शुरू हो गई है। आप हैरान होंगे कि यह कौन सी जंग है? बता दें कि एपस्टीन फाइल्स की यह जंग फिर शुरू हो गई है। एपस्टीन फाइल्स का जिन्न फिर बाहर आया है और उसे बाहर निकाला है (चौंकिए मत) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीवी मेलानिया ट्रंप ने। अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ने एपस्टीन फाइल्स पर धमाकेदार खुलासा किया है जिससे व्हाइट हाउस में खलबली मचनी स्वाभाविक ही है। जेफरी एपस्टीन से जुड़ी अफवाहों पर हमला बोलते हुए मेलानिया ने पीड़ितों की सुनवाई की मांग कर डाली है। मेलानिया ने 9 अप्रैल 2026 को व्हाइट हाउस से अचानक एक सनसनीखेज बयान जारी किया। उन्होंने जेफरी एपस्टीन से जुड़ी सभी झूठी खबरों, अफवाहों को साफ तौर पर खारिज कर दिया। एपस्टीन दोषी यौन अपराधी था। मेलानिया ने कहा कि ये अफवाहों को मैं साफतौर पर खारिज करती हूं। ये अफवाहें मुझे बदनाम करने की कोशिश हैं और इन्हें अब तुरन्त रोकना चाहिए। मेलानिया ने साफ शब्दों में कहा, जेफरी एपस्टीन से मेरे नाम को जोड़ने वाली झूठी बातें आज ही खत्म होनी चाहिए। मैं एपस्टीन की दोस्त कभी नहीं रही। डोनाल्ड और मैं कभी-कभी उसी पार्टी में जाते थे जहां एपस्टीन भी होता था। क्योंकि न्यूयार्क और पाम बीच के सोशल सर्कल में ऐसा आम है। लेकिन मैंने एपस्टीन या उसकी साथी घिस्लेन मैक्सवेल के साथ कभी कोई रिश्ता नहीं रखा। उन्होंने कहा- मैं कांग्रेस से कहती हूं कि इन पीड़ित महिलाओं को शपथ लेकर अपनी कहानी बताने का मौका दें। हर महिलाओं, अगर वह चाहे, अपनी बात सार्वजनिक रूप से कहने का अधिकार है। जेफरी एपस्टीन पर मेलानिया की प्रेस काफ्रेंस से बहस फिर तेज हो गई है। जुलियट ब्रायंट ने मेलानिया को सीधी चुनौती देते हुए कहाः मैं शपथ लेकर सच बोलने को तैयार हूं। जुलियट ब्रायंट के वीडियो मैसेज से अमेरिका में हड़कंप मच गया। कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ा मामला एक बार फिर वैश्विक राजनीति और न्याय व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। मेलानिया की टिप्पणी के बाद सर्वाइवर्स ने इसे पीड़ितों पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश बताते हुए अपना विरोध जताया। इस बीच एपस्टीन सवीवर जूलियट ब्रायंट का एक वीडियो मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने मेलानिया ट्रंप को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि अगर शपथ के तहत गवाही देने की बात है तो मैं खुद इसके लिए तैयार हूं और जो कुछ उन्होंने कहा है, वह सच है यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में इस मामले पर संभावित सुनवाई की चर्चा भी हो रही है। जूलियट ब्रायंट पहले भी गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। उनका दावा है कि उन्हें माडलिंग के झांसे में विदेश ले जाया गया, जहां उनका यौन शोषण किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें एपस्टीन के निजी द्वीप पर ले जाया गया और उनका पासपोर्ट छीन लिया गया। वीडियो में ब्रायंट ने यह भी दावा किया कि इस मामले में गवाही देने वाली कई लड़कियां अब जीवित नहीं हैं। वीडियो के अंत में ब्रायंट ने ट्रंप और मेलानिया से भी शपथ के तहत गवाही देने की मांग की। उनका कहना है कि देश के सामने प्रभावशाली लोगों के असली चेहरे सामने आएं।
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 14 April 2026

जिसका डर था वही हुआ

अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो गई है। वार्ता बेनतीजा ही खत्म हो गई है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच पहले दो राउंड में 21 घंटे से ज्यादा शांति को लेकर बातचीत चली, लेकिन यह बेनतीजा रही। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ अमेरिका के लिए रवाना भी हो गए। वेंस जाने से पहले बोले- समझौता न होने के लिए बुरी खबर ः वेंस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि समझौता न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका बिना किसी डील के ही लौट रहा है। किसी भी समझौते के लिए जरूरी है कि ईरान ये वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। सीजफायर डील में अमेरिका की ओर से जेडी वेंस (उपराष्ट्रपति), स्टीव विटकॉफ (विशेष दूत), जेरेड कुशकर (सीनियर एडवाइजर और ट्रंप के दामाद) और ब्रैड कूपर (सैन्य अधिकारी शामिल हुए। ईरान की तरफ से मोहम्मद बागेर गालिबाफ (संसद अध्यक्ष), अब्बास अराघची (विदेश मंत्री) और मजीद तख्त खांची (उप-विदेश मंत्री) शामिल हुए। वार्ता में पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आसिम मलिक शामिल हुए। ईरान से 71 सदस्यीय डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंचा। इस टीम में सिर्फ बातचीत करने वाले लोग ही नहीं थे बल्कि एक्सपर्ट सलाहकार, मीडिया प्रतिनिधि, डिप्लोमेट और सुरक्षा से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। ईरानी संसद के स्पीकर बागेर गलिबाफ जिस विमान से आए, वह बहुत खास था। वह पूरी दुनिया को अमेरिका का सितम दिखाने के लिए पाकिस्तान सुबूत लेकर आए थे। उनके साथ ऐसे यात्री भी आए जो इस दुनिया में अब नहीं हैं। दरअसल, इस विमान में बागेर गालिबाफ के साथ पाकिस्तान आने वाले दो बच्चे हैं। जो अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में अपनी जान गंवा चुके हैं। प्लेन की सीटों पर उन नन्हें बच्चों की तस्वीर रखी हुई थी। गालिबाफ ने वार्ता से पहले यह तस्वीर शेयर की जिसमें विमान की सीटों पर चार बच्चों की तस्वीरें रखी दिखाई देती थी, जिसके साथ एक-एक स्कूल बैग और फूल भी रखा गया था। ईरानी शहर मिनाब के स्कूल में 28 फरवरी को एक प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ था। इसमें 168 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें 160 स्कूली लड़कियां थीं। गालिबाफ ने वार्ता से पहले दिए बयान में कहा था कि उनका देश बातचीत और समझौते के लिए तैयार है। लेकिन इसके लिए अमेरिका को ईमानदारी से समझौते की पेशकश करनी होगी और ईरान के अधिकारों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के पास सद्भावना है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता शुरू होने से पहले ही कहा कि वाशिंगटन ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगाने की इजाजत नहीं देगा। ट्रंप ने आगे कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द ही फिर से खुल जाएगा, चाहे ईरान सहयोग करे या न करे। ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में उनका मुख्य ध्यान तेहरान की परमाणु क्षमताओं को सीमित करने पर होगा। उन्होंने कहा, कोई परमाणु हथियार नहीं। यही 99 प्रतिशत बात है। वार्ता तो फेल होनी ही थी। दोनों पक्षों की मांगों में बहुत बड़ा फासला था जिसे पाटना मुश्किल ही नहीं असंभव था।

-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 11 April 2026

मिट जाएंगे पर झुकेंगे नहीं


जंगे हथियारों से नहीं जीती जाती, यह जज्बातों से जीती जाती है। ईरानी आवाम ने यह साबित कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि आज रात हम ईरान की सभ्यता को ही मिटा देंगे। इसके जवाब में ईरानी आवाम सड़कों पर उतर आई। अपने देश के अस्तित्व और ट्रंप की धमकी के जवाब में ईरानी आवाम अपने देश के पुलों और पावर प्लांटों को बचाने के लिए अमेरिका के सामने सीना तानकर खड़ी हो गई। ईरान के अहवाज, तबरीज, ईलाम सहित कई शहरों में हजारों लोगों ने बिजली संयंत्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों के चारों ओर लंबी मानव श्रृंखला बना ली। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार पुरुषों, महिलाओं और यहां तक कि बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और ह्यूमन चेन बनाकर डट गए। प्रतिभागियों के हाथों में ईरानी झंडे और राष्ट्रीय नेताओं की तस्वीरों वाले पोस्टर थे और कई लोग मुख्य मार्ग पर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर लंबी कतार में खड़े थे। ईरान के अ"ाज में व्हाइट ब्रिज में पावर प्लांट सहित कई स्थानों पर मानव श्रृंखला बनाई गई। यह मानव श्रृंखला वाशिंगटन की ओर से बढ़ती आक्रामक बयानबाजी का सीधा जवाब था। ईलाम के लोगों ने देश को निशाना बनाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई का विरोध करने के लिए इस मानव श्रृंखला का सहारा लिया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय एकता दिखाने के लिए देश भक्ति का यह जबरदस्त प्रदर्शन किया। इसका सीधा असर वाशिंगटन पर पड़ा। शायद उसको सद्बुद्धि आई कि ईरानी जनता जो सड़कों पर मानव श्रृंखला बनाकर खड़ी है उस पर हम हमला करेंगे तो सारी दुनिया में हमारी थू-थू हो जाएगी। इसीलिए ईरान की सभ्यता को खत्म करने की धमकी देने वाले डोनाल्ड ट्रंप आखिरी क्षणों में पीछे हट गए। ईरान का मौजूदा सैन्य रुख स्पष्ट संकेत देता है कि उसकी प्राथमिकता अपने शासन और सेना ढांचे को बचाए रखना है। इस्लामिक रिपब्लिक के नेतृत्व और सैन्य कमांडरों ने पिछले 3-4 दशकों से ऐसे ही संभावित टकराव की तैयारी की है। शहीद अयातुल्लाह अली खामेनेई ने कई वर्षें पहले ही यह देख लिया था कि किसी न किसी दिन यह स्थिति आएगी और अमेरिका-इजरायल हम पर हमला करेगा। आज अगर ईरान की इस जंग में जीत हुई है तो इसका असल हकदार शहीद अयातुल्लाह खामेनेई ही है। दरअसल मोसाद और नेतन्याहू ने ट्रंप को यह आश्वासन दिया था कि अगर हम अयातुल्लाह खामेनेई और ईरान कि वरिष्ठतम सैन्य कमांडरों को मार देंगे तो ईरान में अंदरूनी विद्रोह हो जाएगा और हम अपने समर्थक को सत्ता में बिठा देंगे पर उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि अयातुल्लाह खामेनेई की शहादत का ईरान की आवाम पर क्या असर होगा। असर उल्टा हुआ जो ईरानी इस्लामी सत्ता के खिलाफ भी थे वे भी अयातुल्लाह खामेनेई की शहादत के बाद सरकार के समर्थन में आ गए और इस जंग में ईरान का पलड़ा भारी हो गया। जैसे मैंने कहा कि गैर परमाणु युद्ध में जीत हथियारों से नहीं होती, जीत जज्बे से होती है, जिसका प्रदर्शन ईरानी जनता ने बाखूबी किया। दरअसल ईरान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 9 April 2026

एटमी प्लांटों पर चौथा हमला कितना खतरनाक है


ईरान के बुशहर परमाणु केन्द्र के पास चौथी बार अमेरिकी-इजरायली हमला हुआ है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। शनिवार को ईरान के बेहद महत्वपूर्ण बुशहर परमाणु पर से जानलेवा विकिरण का सीधा खतरा तो नहीं है लेकिन हवाओं के जरिए रेडियोधर्मी धूल गल्फ राज्यों और यहां तक कि भारत के पश्चिमी राज्यों तक पहुंचने का खतरा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की चर्चा होने लगी है। अगर ईरान-इजरायल के बीच जंग खतरनाक स्तर पर पहुंचती है और ईरान की धरती पर परमाणु धमाका होता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है? क्या ईरान से उड़ने वाली रेडियोएक्टिव धूल हमारे शहरों तक पहुंचकर तबाही मचा सकती हैं? वैधानिक और रणनीतिक नजरिए से यह समझना जरूरी है कि हवा का रुख और दूरी इस खतरे को कैसे तय करती हैं? ईरान में अगर कोई परमाणु घटना होती है, तो सबसे ज्यादा तबाही उसके पड़ोसी देशों में देखने को मिलेगी। ईरान के 500 से 1000 किलोमीटर के दायरे में आने वाले इराक, तुर्किए, आर्मिनिया, अजरबैजान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों को बेहद घातक रेडिएशन का सामना करना पड़ेगा। इन देशों में रेडियोधर्मी धूल (फॉलआउट) सीधे तौर पर लोगों की सेहत और पर्यावरण को बर्बाद कर सकती है। हवा का बहाव के आधार पर इन देशों की सुरक्षा पूरी तरह दांव पर लगी होगी। ईरान के दक्षिण में स्थित खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर और यूएई भी इस खतरे की चपेट में हैं। अगर ईरान के बुशहर जैसे तटीय परमाणु बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया गया तो रेडियो एक्टिव रिसाव सीधे फारस की खाड़ी और अरब सागर के पानी को जहरीला बना सकता है। इससे समुद्री जीव-जंतुओं के साथ-साथ इन देशों की पेयजल व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा। समुद्री लहरें इस प्रदूषण को भारतीय तटों तक भी पहुंचा सकती हैं। विज्ञान के मुताबिक किसी भी परमाणु विस्फोट के बाद निकलने वाले सबसे खतरनाक और भारी रेडियोधर्मी कण धमाके वाले नगर से कुछ सौ किलोमीटर के दायरे में ही जमीन पर गिर जाते हैं। इतनी लंबी दूरी तय करते समय रेडिएशन का असर काफी हद तक कम हो जाता है। इसलिए तकनीकी रूप से भारत में तत्काल एक्यूट रेडिएशन सिकनेस यानि विकिरण से होने वाली गंभीर बीमारी का सीधा खतरा कम नजर आता है। भले ही भारत ईरान से काफी दूर है, लेकिन वायुमंडल में घुले रेडियोधर्मी कणों को हवाएं दूर तक ले जा सकती हैं। अगर हवा का रुख पश्चिम से पूर्व की ओर रहता है तो परमाणु बादल 48 से 72 घंटों के भीतर भारतीय आसमान तक पहुंच सकते हैं। ऐसी स्थिति में गुजरात, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों में रेडियो एक्टिव कणों की मौजूदगी दर्ज की जा सकती है। हालांकि भारत तक पहुंचते-पहुंचते ये कण इतने फैल और हल्के हो चुके होंगे कि इनसे जानलेवा खतरा होने की आशंका बहुत ही कम रहती है। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि खाड़ी देशों और ईरान के आसपास बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं। हम ऊपर वाले से प्रार्थना करते हैं कि ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध में परमाणु केंद्रों पर सीधे हमले से बचें। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर पूरी कायनात पर पड़ेगा।
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 7 April 2026

फाइटर जेट गिरने से तिलमिलाए ट्रंप


ईरान युद्ध में अपने फाइटर जेट गंवाने के बाद तिलमिलाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नया अल्टीमेटम दे दिया है। ट्रंप ने शनिवार को कहा, ईरान ने 48 घंटे में होर्मुज को नहीं खोला तो तबाही झेलने को तैयार रहे, अब आर-पार होगा। उन्होंने कहा- ईरान के लिए वक्त तेजी से निकल रहा है। उसे पीस डील पर साइन कर देना चाहिए। ईरान ने इस धमकी का जवाब अमेरिका के बहु-प्रतिष्ठित एफ-15ई लड़ाकू विमान को मार गिराकर दिया। ईरान ने शुक्रवार को अमेरिका के एक और विमान एफ-35 को मार गिराने का भी दावा किया। वहीं दो अमेरिकी अधिकारियों के सूत्रों ने दावा किया है कि उसका दो सीटर लड़ाकू विमान एफ-15ई ईरान में गिरा है। एक पायलट मिल गया है जबकि ईरान दावा कर रहा है कि दूसरा पायलट उसके कब्जे में है, हालांकि अमेरिका ने इसकी पुष्टि नहीं की है। पेंटागन और सैंट्रल कमांड ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव केरोलिन लेविट ने बयान जारी कर बताया कि लड़ाकू विमान गिरने की जानकारी राष्ट्रपति ट्रंप को दे दी गई है। ईरान की आईआरजीसी ने दावा किया कि एफ-35 विमान को दक्षिण पश्चिम ईरान में मार गिराया है। उधर अमेरिकी समाचार पोर्टल एक्सियोस का दावा है कि ईरान ने मार गिराए गए लड़ाकू विमान की जो तस्वीर साझा की है वो एफ-15ई विमान की है। एफ-15ई के स्ट्राइक ईगल एक उन्नत श्रेणी का अमेरिकी लड़ाकू विमान है, जिसे खासतौर पर लंबी दूरी तक गहराई में जाकर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए विकसित किया गया है। इस विमान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर मौसम में मिशन पूरा कर सकता है। अमेरिका के प्रमुख मीडिया आउटलेट्स में से एक सीएनएन ने इस घटना पर लिखा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जो पहले से ही अमेरिकी जनता के बीच काफी अलोकप्रिय साबित हो रहा था एक नए और अधिक जटिल चरण में पहुंच गया है। चैनल ने लिखा कि पहले खबर आई कि ईरान के ऊपर एक अमेरिकी लड़ाकू विमान को गिरा दिया गया है। इसके बाद शुक्रवार को खबर आई कि ईरान ने दूसरे अमेरिकी लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है। जबकि सीएनएन ने लिखा है, लेकिन एक ऐसे संघर्ष में जिसमें सैन्य वर्चस्व अमेरिका के पक्ष में हो, ये घटना एक विषम युद्ध के खतरों को दिखाती है। इसकी लागत को अमेरिकी जनता पहले से नामंजूर करती आ रही है। सीएनएन आगे लिखता हैः इन घटनाओं से ईरान के आसमान पर पूरे वर्चस्व के बारे में ट्रंप प्रशासन के दावों के साथ-साथ पिछले महीने से बनाए जा रहे अभेद्य होने के दिखावे की भी धज्जियां उड़ती है। एनबीसी न्यूज ने ईरान की ओर से विमान गिराने के दावे का जिक्र करते हुए लिखा हैö यह पहली बार है जब इस ताजा संघर्ष के तहत ईरान के अंदर अमेरिकी विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है जिससे यह धारणा गलत साबित होती है कि अमेरिका का ईरानी हवाई क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण है। एनबीसी लिखता है ः ट्रंप ने इस युद्ध में जीत की घोषणा करते हुए कहा है कि उन्होंने ईरान पर युद्ध समाप्त करने पर सहमत होने के लिए दबाव डाला है। वहीं अब ईरान की ओर से जो दावे किए जा रहे हैं उससे अमेरिका-इजरायल के ईरानी हवाई वर्चस्व के दावों पर संदेह पैदा होता है। इजरायल-अमेरिका के संयुक्त अभियान का प्रमुख मकसद ईरान की मिसाइल रक्षा प्रणाली को नष्ट करना और कमजोर करना रहा है, लेकिन ईरान ने पूरे क्षेत्र में जवाबी हमला करने की क्षमता को बरकरार रखा है। अमेरिका की ओर से छेड़े गए युद्ध के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेव ने बार-बार कहा है कि ईरान की क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के विमानरोधी सिस्टम को खत्म कर दिया है, लेकिन शुक्रवार को उस दावे पर सवाल उठने लगे जब ईरान ने अपने क्षेत्र में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान, एफ-15ई को मार गिराया। एक झटके में ईरान ने ट्रंप की सारी हेकड़ी निकाल दी।
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 4 April 2026

ट्रंप निकलने के प्रयास में फंस गए हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह साढ़े छह बजे व्हाइट हाउस में ईरान जंग पर भाषण दिया। ट्रंप ने फिर धमकी दी है कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर इतनी बमबारी करेगा कि उसे पाषण युग में पहुंचा देगा। 20 मिनट के इस प्राइम टाइम भाषण में ज्यादातर वही बातें दोहराईं जो वो कई बार पहले कह चुके थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हम अगले दो से तीन हफ्तों में उन (ईरान) पर बहुत बड़ा हमला करने जा रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकाöजरायल सैन्य अभियान मुख्य रणनीतिक मकसदों को लेकर लगभग पूरा करने के करीब है। उन्होंने अनुमान लगाया कि यह युद्ध अभी दो से तीन हफ्ते और चल सकता है। अगर आप पिछले एक हफ्ते में ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर किए गए पोस्ट पर कॉपी-पोस्ट करें तो वह इस राष्ट्र के नाम उनके संबोधन से काफी मिलता-जुलता पाएंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस युद्ध के फायदे अमेरिकी जनता को समझाने की भी कोशिश की। इसकी वजह भी है, क्योंकि अमेरिका के कई सर्वे बताते हैं कि 28 फरवरी को शुरू किए गए इस सैन्य अभियान को लेकर ज्यादातर मतदाता असहमति जता रहे हैं। ट्रंप ने अमेरिकी जनता से इस युद्ध को अपने भविष्य में एक निवेश के रूप में देखने की अपील की और कहा कि यह पिछले एक सदी या उससे भी अधिक समय से इस सैन्य संघर्ष की तुलना में कुछ भी नहीं है, जिनमें अमेरिका कहीं अधिक लंबे समय तक शामिल रहा है। लेकिन ट्रंप के भाषण से अमेरिकी जनता नाराज हुई। वह जानना चाहती थी कि यह युद्ध किस दिशा में जा रहा है या अमेरिका के लिए इससे बाहर निकलने के संभावित रास्ते क्या हो सकते हैं? इसमें कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए। पहला ः इजरायल अभी ईरान पर हमले कर रहा है? साथ ही इजरायल को ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना भी करना पड़ रहा है जिसमें बुधवार को तेल अवीव के पास कुछ हमले भी शामिल हैं। एक अहम सवाल यह है कि क्या इजरायली प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू की सरकार ट्रंप के बताए गए कुछ हमलों की समय-सीमा से सहमत हैं? फिलहाल इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। कम से कम मौजूदा हालात में तो इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। फिर इस 15 सूत्रीय शांति योजना का क्या हुआ, जिसे व्हाइट हाउस कुछ दिन पहले ईरान से स्वीकार करने के लिए कह रहा था? अपने संबोधन में ट्रंप ने इसका कोई जिक्र नहीं किया। क्या अब अमेरिका अपनी कई मांगों से पीछे हट रहा है, जिसमें समृद्ध यूरेनियम के भंडार को वापस लेने की मांग भी शामिल थी? इजरायल ने अभी ईरान पर हमले नहीं रोके हैं। अब दुनिया के सबसे तेल शिपिंग मार्गें में से एक होर्मुज स्ट्रेट इस संघर्ष का फोकस बन गया है। ईरान ने इस तेल मार्ग को बंद कर रखा है। हालांकि राष्ट्रपति का इस पर कोई ठोस और तय रुख नजर नहीं आता। अभी वो ईरान से टैंकरों को रास्ता देने की मांग करते हैं और अगले ही पल सहयोगी देशों से कहते हैं कि वह खुद जाकर इसे संभालें। बुधवार को उन्होंने कहा, होर्मुज पर जाओ और बस उसे अपने नियंत्रण में ले लो, उसकी सुरक्षा करो और अपने इस्तेमाल के लिए उसे खोलो। मुश्किल हिस्सा पूरा हो चुका है, इसलिए यह आसान होना चाहिए। उन्होंने ब्रिटेन और फ्रांस जैसे अपने सहयोगियों को होर्मुज खुद जाकर तेल हासिल करने की नसीहत दे डाली। इसके बाद उन्होंने बिना ज्यादा विस्तार से बताए सिर्फ इतना कहा कि युद्ध खत्म होने पर होर्मुज स्वाभाविक रूप से फिर से खुल जाएगा। तेल की कीमतों को लेकर चिंतित लोगों के लिए चार बात शायद ज्यादा भरोसा देने वाली नहीं होगी। व्हाइट हाउस में दिए गए ताजा भाषण में ट्रंप का वो तेवर पूरी तरह गायब था, जबकि ब्रीफिंग में संकेत दिए गए थे कि यह उनके संबोधन का एक अहम हिस्सा होगा। एक और बड़ा अनसुलझा सवाल मैदान में सैनिकों की मौजूदगी को लेकर है। क्षेत्र में लगातार पहुंच रहे हजारों मरीन और पैराट्रूपर्स आखिर वहां क्या कर रहे हैं या क्या करने वाले हैं? ट्रंप के बयान हर अगले दिन बदल रहे हैं या यूं कहें कि सुबह कुछ कहते हैं, शाम को कुछ कहते हैं। इस बीच अमेरिका से गैस की औसत कीमत लगभग चार साल में पहली बार 4 डालर प्रति गैलन से ऊपर चली गई है और ट्रंप की लोकप्रियता रेटिंग तेजी से गिर रही है। -अनिल नरेन्द्र

Thursday, 2 April 2026

दुबई को चुकानी पड़ी सबसे बड़ी कीमत

यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात को बनाने में 40 वर्ष लगे और तबाह होने में मुश्किल से 10 दिन ही लगे। दुबई जो दुनिया के सबसे आधुनिक शहरों में से एक माना जाता था, सुरक्षित माना जाता था जो दुनिया का नया हब बन गया था उसको ईरान ने ऐसा तबाह किया कि वह इतने पीछे चला गया कि अब उसे वर्षें लगेंगे उसी स्थिति में पहुंचने पर। अमेरिका-इजरायल के साथ जंग के बीच ईरान लगातार खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है। एक खास बात सामने आई है कि ईरान सबसे ज्यादा यूएई को निशाना बना रहा है। जिस दिन से (29 फरवरी) जंग शुरू हुई तब से ईरान ने 1714 ड्रोन, 334 बैलिस्टिक मिसाइल दागकर तबाही की इबारत लिख दी है। आखिर ईरान दुबई, आबू धाबी पर लगातार हमले क्यों कर रहा है? अमेरिका-इजरायल-ईरान की इस जंग में ईरान ने हमलों में दुबई के आलीशान होटल, रिफाइनरी, एयरपोर्ट और प्रमुख कॉमर्शियल जोन को काफी प्रभावित किया है। आखिर दुबई को तबाह करने के पीछे ईरान की रणनीति क्या है? क्या इसका कारण सिर्फ इतना है कि अमेरिका वहां से अपने सैन्य अ़ड्डे संचालित करता है? या इन हमलों के पीछे ईरान के कुछ और इरादे हैं? तो इसका जवाब हथियारों से ज्यादा इकोनॉमिक्स और इंवेस्टमेंट के आसपास घूमती है। दरअसल दुबई वाशिंगटन की वह कमजोर नस है, जिसे दबाते ही दर्द सीधे ट्रंप को व्हाइट हाउस में बैठे होने लगता है। मागा (मेक अमेरिका ग्रेट आगेन) के नाटो के साथ डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी सत्ता में दूसरी बार वापसी हुई। जबसे वे सत्ता में लौटे हैं, उनका पूरा फोकस अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने और बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश खींचने पर रहा है। व्हाइट हाउस के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में अमेरिका को अगले दस वर्षों में निवेश के लिए 5.2 ट्रिलियन डॉलर की विदेशी कमिटमेंट्स मिली है तो इस 5.2 ट्रिलियन डॉलर में से सबसे बड़ा हिस्सा यूएई इनवेस्ट कर रहा है। अकेले 1.4 ट्रिलियन डॉलर (यानी कुल निवेश का 27 प्रतिशत) सिर्फ यूएई ने वादा किया है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो यूएई अमेरिका के लिए कमजोर कड़ी बन गया है। ईरान अच्छी तरह जानता है कि अगर दुबई पर मिसाइलें गिरेंगी तो वहां की अर्थव्यवस्था डगमगाएगी और अगर दुबई की अर्थव्यवस्था हिली तो अमेरिका में आने वाले 1.4 ट्रिलियन डॉलर का वह निवेश सीधे तौर पर खतरे में पड़ जाएगा, जिस पर ट्रंप अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। ईरान का निशाना सिर्फ अमेरिका में जाने वाला दुबई का पैसा नहीं है, बल्कि ग्लोबल इंवेस्टमेंट हब के रूप में दुबई और यूएई की पहचान तबाह करना है। दुबई जो आर्थिक, डिजिटल और मीडिया हब रहा है, इस युद्ध में बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मुख्य शेयर सूचकांक एडीएक्स जनरल में पिछले महीने में 11.42 प्रतिशत की गिरावट आई है। हवाई क्षेत्र बंद हेने और उड़ानों के रद्द होने से पर्यटन और एविएशन सेक्टर में दुबई को करीब 9 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। यूएई सरकार और मीडिया ने देश को सुरक्षित जगह वाली छवि बनाएं रखने की कोशिश की। राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि सब कुछ नियंत्रण में है और देश हर खतरे से निपटने के लिए तैयार है। साथ ही अटानी जनरल हमाद सैफ अल शम्सी ने हमलों की तस्वीरें और वीडियो साझा करने की सख्त चेतावनी दी। इस आदेश के तहत कई विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया, जिस पर कम से कम एक साल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। ईरान दुनिया को यह कड़ा संदेश दे रहा है कि युद्ध के मैदान से हजारों किलोमीटर दूर बैठकर भी वह अमेरिका की दुखती आर्थिक नस को काट सकता है। हर ड्रोन हमला, मिसाइल स्ट्राइक दुबई और यूएई और खाड़ी देशों की उस सुरक्षित और स्थिर छवि पर एक करारा प्रहार है, जिसे उन्होंने सालों के रिफार्म और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर बनाया है। -अनिल नरेन्द्र