मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया कि उसने आंख के बदले आंख नाम से सैन्य अभियान शुरू करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल के अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई है। इस दावे के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध तेज हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक बार फिर खुली जंग का रूप ले चुका है। यह संघर्ष अब सिर्फ सीमित क्षेत्रों तक ही नहीं रहा बल्कि पूरे मिडल ईस्ट, वैश्विक तेल बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तक फैल चुका है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अब यह युद्ध बढ़ता जा रहा है और भयानक रूप अख्तियार कर सकता है। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक इस अभियान के तहत खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान का दावा है कि उसका उद्देश्य उन ठिकानों को जवाब देना था, जहां से उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गई थी। ईरान ने इस सैन्य कार्रवाई को आंख के बदले आंख (आई फॉर एन आई) नाम दिया है। इस नाम का सीधा संदेश है कि वह अपने खिलाफ हुई हर सैन्य कार्रवाई का जवाब देगा। ईरान लंबे समय से कहता आ रहा है कि अगर उसकी देश की सुरक्षा या उसके सैन्य ठिकानों पर हमला होगा तो वह जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इसी नीति के तहत उसने पहले भी कई बार जवाबी कार्रवाई की घोषणा की है। ईरान की आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने आई फॉर एन आई अभियान के तहत जार्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। पहले चरण में जार्डन के प्र्रिंस हसन एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। दूसरे चरण में बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर हमला कर हेलीकॉप्टर और ड्रोन सुविधाओं को निशाना बनाया गया। तीसरे चरण में कुवैत के अली अल-अलेम एयरबेस और अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर हमले का दावा किया गया। ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम केन्द्र माना जाता है। यहीं से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। अगर अमेरिका ईरान के बीच यह युद्ध और तेजी पकड़ता है तो इसका सीधा असर होर्मुज स्टेट पर पड़ेगा, बल्कि पड़ना शुरू हो गया है। अमेरिका के लगातार ईरान पर हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मूज बंद करने का एलान भी कर दिया है। इसका सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा। भारत जैसे देश जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी से पूरा करते हैं, वे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यह पहली बार नहीं जब ईरान ने बदले के लिए सैन्य कार्रवाई का वादा पूरा करने का प्रयास किया है। जनवरी 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान ने इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं। अप्रैल 2024 में दमिश्क स्थित ईरानी दूतावास पर हमले के बाद भी ईरान ने पहली बार सीधा अपनी जमीन से इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इससे साफ है कि ईरान अपनी सुरक्षा नीति में जवाबी कार्रवाई को महत्वपूर्ण रणनीति मानता है।
-अनिल नरेन्द्र