अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए महज चुनावी झटका नहीं, बल्कि उनकी सत्ता, नीतियों और राजनीतिक दबदबे पर जनता के बदलते मिजाज का संकेत हैं। जिस जनसमर्थन के भरोसे ट्रंप अमेरिका की राजनीति को अपनी शर्तें पर चलाने का दावा कर रहे थे, चुनावी नतीजे उसी भरोसे में दरार का इशारा करते हैं। यह नतीजे उनके लिए चेतावनी है कि सत्ता की ताकत और आक्रामक राजनीतिक बयानबाजी के दम पर जनमत को हमेशा अपने पक्ष में नहीं रखा जा सकता। ईरान पर हुए हमलों के बाद अमेरिका में जिस तरह पेट्रोल-डीजल, खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़े थे उससे जनता में काफी नाराजगी थी। पिछले कई महीनों से आ रहे पोल, सर्वे भी इसी तरह के नतीजे के संकेत दे रहे थे। सर्वे के मुताबिक, अमेरिकी संसद के निचले सदन या प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिवस) पर नियंत्रण हासिल करने के लिए जरूरी 218 सीटों से कहीं ज्यादा सीटों पर डेमोक्रेट्स उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। हाल ही में आए न्यूयार्क टाइम्स के एक सर्वेक्षण में साउथ कैरोलाइना की सीनेट सीट पर मुकाबला बराबर का दिखाया गया था और नतीजे भी अनुमान के मुताबिक ही आए। यह वही राज्य है जहां डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में 18 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीत दर्ज की थी। वैसे हाल के वर्षें में कई ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जब जनमत सर्वेक्षण (पोल सर्वे) चुनाव नतीजों का सटीक अनुमान नहीं लगा सके। ये मध्यावधि चुनाव डोनाल्ड ट्रंप के लिए अग्नि परीक्षा है। इनका नतीजा तय करेगा कि ट्रंप को अपने कार्यकाल के अगले दो वर्षें में संसद (कांग्रेस) का कितना समर्थन मिलेगा। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों की तरह मध्यावधि चुनाव भी हर चार साल में होते हैं। यह चुनाव राष्ट्रपति के ठीक आधे कार्यकाल के दौरान होते हैं। चुनाव वैलेट पेपर के जरिए कराए जाते हैं। इस वजह से अमेरिका में मध्यावधि चुनाव का बहुत ही महत्व होता है। अमेरिका के निचले सदन को प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिवस) में दो साल के कार्यकाल वाले इन प्रतिनिधियों की सभी 435 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। जनसंख्या के आधार पर सीटें तय की जाती है। ऊपरी सदन के सांसदों का कार्यकाल छह साल का होता है। सीनेट में 100 सीटें होती हैं। हर प्रांत के लिए दो सीटें हैं। 50 प्रांतों की कुल 100 सीटें हुईं। इस चुनाव में सीनेट की 35 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इस बार चुनाव में ट्रंप को कई मुद्दों पर चुनौतियां मिल रही हैं। इसमें महंगाई, बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के अलावा ईरान से जारी जंग बड़ा मुद्दा है। वहीं व्यापार, स्वास्थ्य, इमिग्रेशन सेवाएं, शिक्षा और लोकतंत्र का भविष्य प्रमुख मुद्दे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर हुए कई जनमत सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट की बढ़त हासिल हुई थी। संभावित वोटरों के बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को 52 से 53 प्रतिशत तक समर्थन है। जबकि ट्रंप की पाटी रिपब्लिकन उम्मीदवार 44 प्रतिशत के आसपास माने जा रहे हैं। डीसीजन डेस्क एमक्यू के सर्वेक्षण में डेमोक्रेट्स की जीत की 79 प्रतिशत की संभावना है। 16-18 करोड़ (लगभग) पंजीकृत मतदाता वोट डालने के लिए पात्र हैं। अमेरिका में 4 नवम्बर की सुबह लगभग 6 बजे से रुझान और शुरुआती नतीजे आने शुरू हो गए थे (भारतीय समयानुसार)। यह चुनाव भारत के लिए इसलिए मायने रखता है, क्योंकि अमेरिकी संसद के फैसले भारतीय निर्यात, अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को सीधा प्रभावित कर सकते हैं। इन चुनावों के परिणाम न केवल अमेरिकी नीतियों को प्रभावित कर सकता है बल्कि पूरी दुनिया पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
-अनिल नरेन्द्र