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Saturday, 17 October 2026

विपक्ष का सुप्रीम मार्च

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलने का समय मांगा था। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इंकार कर दिया। विपक्षी नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा कि वे उनसे मिलकर चुनाव आयोग और कथित वोट चोरी समेत कई मुद्दों पर अपनी चिंताएं उनके सामने रखना चाहते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने इस मुलाकात को ठुकराते हुए कहा कि जिन मुद्दों को लेकर मुलाकात का अनुरोध किया गया है, उनसे जुड़े मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे मामलों पर अलग बैठक करना न्यायिक मर्यादाओं के अनुकूल नहीं होगा। मुख्य न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं को सुझाव दिया कि वह एक याचिका दायर कर दें। उस पर वह सुनवाई करेंगे। मुख्य न्यायाधीश के सुझाव पर अमल करते हुए तमाम विपक्षी नेता सोमवार को एक मार्च करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 12 अक्टूबर को यह मार्च निकाला गया। इत्तेफाक से मुझे इन जुलूस को देखने का अवसर मिला। हुआ यूं कि मैं लगभग 3 बजे अपने कार्यालय प्रताप भवन बहादुर शाह जफर मार्ग जा रहा था। जब हम इंडिया गेट पहुंचे तो तिलक मार्ग का रास्ता बंद था। मजबूरन हमें कॉपरनिक्स मार्ग से मंडी हाउस के रास्ते से जाना पड़ा। मंडी हाउस पहुंचने पर मैंने देखा कि वह पूरी तरह भरा हुआ है। वहां सैकड़ों प्रदर्शनकारी पहुंचे हुए थे। वहां से लेडी इरविन कॉलेज वाला रोड तिलक ब्रिज तक का ब्लाक था। मजबूरन हम बाराखंभा रोड से जाने लगे। बाराखंभा रोड पर सैकड़ों लोग सड़क पर थे। इनमें ज्यादातर वकील थे। वह शांतिपर्वूक खड़े थे या सड़क पर बैठे थे। उन्होंने मेरी गाड़ी को रास्ता दिया और भीड़ में मैं ललित होटल होते हुए कार्यालय पहुंचा। मैंने अपने जीवन में इतनी भीड़ सिर्फ एक बार पहले देखी थी जब रामलीला ग्राउंड में अन्ना आंदोलन हुआ था। पर बाद में मैंने टीवी पर भीड़ देखी तो मैं हैरान हो गया। दिल्ली में वर्षें बाद ऐसी भीड़ देखी। यह भीड़ कोई किराए पर लाए लोग नहीं थे, जो बसों में दबाव के चलते आने पर मजबूर हुए। भीड़ में बुजुर्ग, अन्य उम्र के लोग, लड़के, लड़कियां सभी तरह के लोग थे जो अपने पैसों से अपनी मजी से इस मार्च में शामिल हुए। पुलिस ने भी इस बात पर बहुत नियंत्रण, समझदारी से काम किया। उन्होंने कहीं भी किसी प्रकार की जोर-जबर्दस्ती नहीं की। भीड़ इतनी थी कि राहुल गांधी, प्रियंका की जान को खतरा हो सकता था। हालांकि उनको जेड प्लस की सुरक्षा मिली हुई है जिसमें 45-50 सुरक्षा गार्ड होते हैं, उस दिन मुश्किल से चार-पांच ही नजर आए। राहुल, प्रियंका को थोड़ा अपनी सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसी अनियंत्रित भीड़ में कुछ भी हो सकता है। खैर 11 विपक्षी नेताओं ने एसआईआर में बड़े स्तर पर नाम काटने और गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए संयुक्त याचिका दायर की। इसमें निर्वाचन आयोग, सीईसी ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधु व विवेक जोशी पक्षकार बनाए गए हैं। वोट चोरी को लेकर दिल्ली की सड़कों पर 7 दिन से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे पहले बाराखंभा रोड से विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च शुरू हुआ तो राहुल गांधी ने अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले समेत कई दूसरे नेताओं को भी बुलाया। एआईएसए (आईसा) की नेहा वोरा भी गाड़ी में मौजूद थीं। मार्च के दौरान जब राहुल गांधी पहले आगे बढ़ने के लिए निकले तो उनके आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इससे कुछ देर तक धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। भीड़ को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया। इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी कि दोनों में एक अहम मुद्दे पर लोगों को सड़कों पर आने के लिए मजबूर होना पड़े। और जब कोई जवाबदेही को तैयार न रहे तो एक ही रास्ता न्याय के लिए बचता है वह है सुप्रीम कोर्ट का द्वार और यही विपक्ष ने किया। न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 15 October 2026

नाराजगी क्या सिर्फ चुनाव आयोग से है या?

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को जिस बर्बरता से रोकने की कोशिश हुई उस पर सवाल उठ रहे हैं। 2026 में युवाओं से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का दायरा अब सिर्फ रोजगार या परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है। परीक्षा और रोजगार के सवालों से शुरू हुआ जेन-जी आंदोलन के बाद अब मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर भी जेन-जी और विपक्षी दलों के प्रदर्शन हो रहे हैं। आज का सवाल यह है कि युवा किन मुद्दों पर सड़कों पर आ रहे हैं और क्यों? क्या रोजगार की चिंता धीरे-धीरे संस्थाओं पर भरोसे की चिंता में बदल रही है? क्या परीक्षा में निष्पक्षता का सवाल और चुनाव में निष्पक्षता का सवाल, दोनों के पीछे व्यवस्था से न्याय मिलने के भरोसे का सवाल है? यह कुछ प्रश्न थे जिसको लेकर 10 अक्टूबर को राजधानी में ऐसा प्रदर्शन हुआ जो पहले कभी नहीं देखा गया था। जिस तरीके से प्रशासन-सरकार ने इससे निपटने के लिए हथकंडे अपनाए उससे सारी दुनिया में भारत की छवि खराब हुई। विदेशी मीडिया ने इस घटना को बड़ी कवरेज दी। और तो और पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने अपनी रिपोर्ट में इस प्रदर्शन को भारत के पीएम मोदी के खिलाफ युवाओं का विद्रोह करार दिया। अखबार लिखता है कि यह पहली बार है जब कोई वायरल ऑनलाइन यूथ मूवमेंट सोशल मीडिया से निकलकर सीधे सड़कें पर आ गया है। द डॉन ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के 2.2 करोड़ इंस्टाग्राम फॉलोअर्स और युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता को भी हाइलाइट किया है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि एक तरफ दिल्ली की सड़कें  पर अफरा-तफरी का माहौल था, तो दूसरी तरफ संसद में मुस्कुराते हुए मिस्टर मोदी शांति की छवि पेश करने की कोशिश कर रहे थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों को संबोधित नहीं किया। अखबार ने लिखा है कि सत्ताधारी बीजेपी ने भारत के युवाओं के भारी गुस्से को कमतर आंकने की गलती की है। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी की एक स्ट्रांगमैन वाली छवि में भी अब दरारें दिख रही हैं। न्यूयार्क टाइम्स ने सरकार समर्थक टीवी चैनलों पर भी तंज कसा कि जिन्होंने पहले इस प्रदर्शन को नजरअंदाज किया, वे बाद में संसद के आसपास दहशत का माहौल दिखाते नजर आए। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में जंतर-मंतर पर तिरंगा और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों और संसद की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बलों की भारी घेराबंदी के बीच टकराव को दिखाया है। रिपोर्ट में जिक्र है कि पुलिस के पीछे धकेलने पर कई प्रदर्शनकारी सिर से खून बहते हुए या लंगड़ाते हुए जंतर-मंतर की तरफ लौटे। बीबीसी के मुताबिक यह आंदोलन पीएम मोदी के खिलाफ हाल के वर्षें में असंतोष का सबसे बड़ा चेहरा बन गया है। फाईनेंशल टाइम्स के मुताबिक पुलिस ने भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां बरसाईं। अखबार का मानना है कि यह प्रदर्शन मोदी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों के उस नारे का विशेष जिक्र है, जिसमें वे चिल्ला रहे थे ः जब भी मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है। बिजनेस न्यूज ब्लूमबर्ग के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से इंकार कर दिया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है। ब्लूमबर्ग ने चेताया है कि यह बढ़ता असंतोष अगले साल मई तक होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के लिए यह एक बड़ा टेस्ट साबित होगा। वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इसे पीएम मोदी के सामने सालों की सबसे बड़ी चुनौती करार दिया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने अपनी हैडलाइन में लिखा हजारों सीजेपी प्रदर्शनकारियें ने पुलिस को चुनौती देते हुए दिल्ली में मार्च किया। इस भीड़ में मुख्य रूप से छात्र और जेन-जी युवा शामिल थे, जो मोदी सरकार से इस बात को लेकर बेहद नाराज हैं कि सरकार ने युवाओं को निराश किया है। द गार्डियन ने नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में युवाओं द्वारा सरकारें गिराए जाने का हवाला देते हुए लिखा कि भारत में उस स्तर का विरोध प्रदर्शन हाल के वर्षें में एक असमान्य घटना है। सुरक्षा बलों की बर्बरता व सख्ती से विरोध के स्वर बेशक कुछ समय तक शांत किए जा सकते हैं, लेकिन अब यह आंदोलन रुकने वाला नहीं लगता। समस्या का हल तो संवाद से ही संभव है, जिसकी पहल की संभावना फिलहाल सरकार की ओर से नजर नहीं आ रही है। 

-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 13 October 2026

विपक्ष महामहिम की शरण में

विपक्षी इंडिया गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार रात महामहिम से मुलाकात की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने वालों में मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष, राहुल गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख, उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री जे एंड के, सुप्रिया सुले, एनसीपी (शरद पवार) सांसद, मनोज झा, आरजेडी सांसद व अन्य विपक्षी नेता शामिल थे। विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की ये मांगें प्रमुख थी जो उन्होंने महामहिम के समक्ष रखी। पहली-मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और सीईसी-ईसी को आजीवन कानूनी छूट देने वाले 2023 के कानून को रद्द किया जाए। दूसरा-एसआईआर पर तत्काल रोक लगे और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं। तीसरा-सभी चुनावों में बैलेट पेपर की व्यवस्था वापस लाई जाए। चौथा-पिछले दो वर्षें में हुए उन सभी चुनावों (विधानसभा) को रद्द किया जाए, जिनमें विपक्ष के मुताबिक वोट चोरी के निर्णायक सुबूत पेश किए गए हैं। विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति से मुलाकात को संतोषजनक बताया। इससे पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने मार्च निकालते हुए राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़े तो पुलिस ने 10 लोगों की अनुमति होने का हवाला देते हुए उन्हें विजय चौक पर रोक लिया। विपक्ष 150 सांसदों के साथ मिलना चाहता था। विपक्षी नेता मांगें मंगवाने के लिए धरने पर बैठ गए। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति के पास भेजने पर तैयार हो गए। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा-हमने राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को स्थगित करने और 13.3 करोड़ मतदाताओं के अवैध तरीके से काटे गए नाम को फिर से बहाल करने की मांग की। राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में साफ तौर पर आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने की साजिश रची है। राहुल ने बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए दावा किया कि राष्ट्रपति ने हमारी बात का बिलकुल भी खंडन नहीं किया। उन्होंने (राहुल के अनुसार) चुनाव में धांधली के सुबूत मांगे जो उन्हें सौंप दिए जाएंगे। चुनाव चोरी किए गए हैं राहुल ने कहा। हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में धांधली करके जीत हासिल की और अब तक 24 चुनाव चोरी हुए हैं। राहुल ने कहा मुझे उम्मीद थी कि राष्ट्रपति इस बात से इंकार करेंगी कि वोट चोरी हो रही है लेकिन मैं हैरान और स्तब्ध रह गया कि उन्होंने हमारी बात मान ली। बता दें कि यह नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का कहना है, राष्ट्रपति भवन से ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है। देखना अब यह होगा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की इस पर क्या प्रतिक्रिया होती है? बता दें कि संविधान के अनुसार चुनाव आयोग राष्ट्रपति को रिपोर्ट करता है। सम्भव है कि राष्ट्रपति यह ज्ञापन चुनाव आयोग को भेजे और उनसे जवाब तलब करे। 

-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 8 October 2026

वोट छीनना संविधान के खिलाफ

पिछले तीन-चार महीने से पूरे देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके द्वारा वोट चोरी को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने जून से इस आंदोलन को नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं के लीक होने से शुरू हुआ यह आंदोलन तब जोर पकड़ गया जब इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर चुनाव आयुक्तों में मतभेदों को लेकर छपी तब पूरे देश में आंदोलन छिड़ गया और यह दिन-प्रतिदिन बड़ा होता जा रहा है। इस बीच, पूरे देश की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई हैं जहां दर्जनों याचिकाएं, चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आचरण को लेकर टिकी हुई हैं। इस बीच माननीय सुप्रीम कोर्ट के एक सिटिंग जज के इस पूरे प्रकरण पर विचार आए तो पूरे देश में उम्मीद की नई किरण जगी है। मैं बात कर रहा हूं सुप्रीम कोर्ट के माननीय सिटिंग जज जस्टिस उज्जवल भुईयां की। हैदराबाद के नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा है कि भारतीय नागरिक को वोट डालने का अधिकार संविधान की मूल संरचना का अंतिम हिस्सा है। अगर किसी प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाता है तो ऐसी प्रकिया मनमानी होगी। जस्टिस भुईयां ने कहा कि कोई भी बहाना नागरिकों को वोट का अधिकार छीनने को उचित नहीं कहा जा सकता। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 326 का उल्लंघन होगा। जस्टिस भुईयां ने आगे कहा कि 18 साल की आयु पूरा करने वाले नागरिक संविधान में निर्धारित अयोग्यताओं को छोड़कर चुनाव में वोट देने का हकदार है। इन संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करने वाला कानून अमान्य होगा। जस्टिस ने कहा कि मताधिकार नागरिकता की आत्मा है। आम नागरिक के लिए देश के शासन में भागीदारी का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम मतदान ही है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव आयोग के वोटिंग लिस्ट में बदलाव की प्रक्रिया-स्पेशल इंटेंसिव रिविजन  (एसआईआर) का जिक्र नहीं किया। जस्टिस भुईयां मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले में प्रक्रियात्मक सुरक्षा का भी सवाल उठाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के लाल बाबू हुसैन बनाम इलेक्टोरल रजिस्टेशन ऑफिसर मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मृत मतदाता को छोड़कर किसी भी मतदाता का नाम नोटिस और सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में शामिल होने का अधिकार नागरिकता से अलग नहीं किया जा सकता। इसे नागरिक से अलग करना ऐसा होगा जैसे शरीर से आत्मा निकाल देना। आम नागरिक के लिए देश के शासन में भागीदारी का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम मतदान ही है। जस्टिस भुईयां ने नालसार के छात्रों से कहा, आपने देश-दुनिया को दिखाया है कि यूनिवर्सिटी और खासकर कानून के छात्र को कैसा होना चाहिए। आप प्रतिभाशाली, निर्भीक और बहादुर हैं। याद रहे कि यही वह यूनिवर्सिटी है जब कुछ छात्रों ने सीजीआई सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में प्रस्तावित मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया था। कांग्रेस ने जस्टिस भुईयां की राय पर कहा कि इससे साबित होता है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने संविधान का उल्लंघन किया है। उनके पास पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।  

-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 6 October 2026

उस वक्त भी मैं हनुमान चालीसा पढ़ रहा था

यह कहना है भारतीय मूल के पायलट स्मित मच्छार का जब वह अपनी और 170 विमान यात्रियों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पीएम मोदी ने शुक्रवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार से 9 मिनट वीडियो कॉल की। पीएम ने कहा, आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिन्दुस्तानी दूसरों की जान बचाने के लिए खुद को भी जोखिम में डालने वाले लोग हैं। स्मित ने उस पल का अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैं अपनी लाइफ के लिए लड़ रहा था, मैं नीचे गिर गया था, घाव हो चुके थे और मैं फंस गया था। उन्होंने कहा कि जब भी दर्द होता है तो मैं हनुमान चालीसा ही बोलता हूं और उस वक्त भी मैं हनुमान चालीसा ही बोल रहा था और मुझे पता है कि भगवान हनुमान ने ही मुझे बचाया। दुबई से तेल अवीव (इजरायल) जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में कैप्टन स्मित मच्छार ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, वह वाकई ही बेमिसाल है। स्मित ने बताया कि मैं 17 साल से जहाज उड़ा रहा हूं। पिछले 11 साल से कैप्टन हूं और मुझे पता चलता है, आंख बंद करके भी जहाज में क्या हो रहा है। जब मैं नीचे गिरा हुआ था, तब मुझे एहसास हो रहा था कि एयरक्राप्ट नीचे जा रहा है। मैंने अपने आप से कहा कि स्मित बस एक लास्ट पुश और दरवाजा खोल दे। तब मैंने किसी तरह  दरवाजा खोला और बाकी सब आ गए और सबने अपना रोल निभाया। मुझे बस ये पता था कि मैं उन सबको मरने नहीं दे सकता। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात के प्रॉस्टिक्यूटर जनरल ने शनिवार को कहा कि फ्लाईदुबई की उड़ान एफ जेड 1073 के को-पालयट ने उड़ान के दौरान आतंकवादी हमला किया और विमान को क्रैश कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पायलट ने कॉकपिट के अंदर व्रैश एक्स से पायलट पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। व्रैश एक्स आमतौर पर कॉकपिट में रखा जाता है और दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि घटना की परिस्थितियों, हमले के मकसद और इससे जुड़े किसी भी संबंध का पता लगाने के लिए जांच जारी है। उधर इजरायली  प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि को-पायलट ओमानी नागरिक है। हालांकि फ्लाईदुबई ने किसी आधिकारिक रूप से को-पायलट की राष्ट्रीयता के बारे में कुछ भी नहीं कहा है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी को-पायलट ओमान का नागरिक है। अधिकारियों ने बताया कि 2024 में ओमान एयर में को-पायलट ट्रेनी पर काम करने के दौरान को-पायलट हमाम अल हमामी के पास चरमपंथ से जुड़ी सामग्री पाई गई थी। इसके बावजूद उसे एयरलाइन में प्रशासनिक भूमिका में काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। इस घटना ने एक बार फिर विमानन क्षेत्र की अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीरता से पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। विमानन सुरक्षा के सामने एक नया सवाल पैदा होता है। अब तक सुरक्षा का बड़ा हिस्सा बाहरी खतरे को लेकर व रोकने पर केंद्रित रहा है। 9/11 के बाद कॉकपिट के दरवाजे मजबूत किए गए, यात्रियों की स्क्रीनिंग कड़ी हुई,  सामान की जांच के तरीके बेहतर हुए और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ी है। लेकिन फ्लाईदुबई की घटना बताती है कि सुरक्षा की अगली चुनौती विमान के भीतर मौजूद ऐसे संभावित खतरों की पहचान के रूप में हो सकती है। पायलटों की मानसिक सेहत की लगातार जांच करने के लिए  बेहतर सिस्टम की जरूरत है। लेकिन ये हो कैसे ये चुनौती है। भारत में आए दिन पायलटों के नशे में होने की शिकायत आती रही है। सीएनएन ने लिखा कि फ्लाईदुबई की उड़ान में कैप्टन पर हमला करने वाले संदिग्ध पायलट को ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन की नौकरी से हटा दिया गया था, ऐसा उसके चरमपंथी विचारों को लेकर किया गया था। फिर इसको फ्लाईदुबई ने विमान उड़ाने की अनुमति क्यों दी? मामले की जांच हो रही है। यूएई में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। सोशल मीडिया में एक अलग कहानी चल रही है। ईरान और ही कुछ बता रहा है। क्या हुआ, कैसे हुआ, किसने करवाया यह तो वास्तविक जांच से ही पता चलेगा? पता चले भी या नहीं वैसे किसी ने ठीक ही कहा हैः सॉरी ब्रोः फ्लाप शो, बैड स्क्रिप्ट। 

 अनिल नरेन्द्र