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Thursday, 20 August 2015

बिहार चुनाव आम चुनाव पार्ट-2

नरेन्द्र मोदी और भाजपा गठबंधन को बिहार में हराने के लिए नीतीश का महागठबंधन बन गया है। बिहार में आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस महागठबन्धन ने सीटों का तालमेल कर चुनावी बिसात बिछा दी है। बिहार पर पूरे देश की नजर लगी हुई है और बिहार चुनाव परिणाम देश के सियासी भविष्य की दशा-दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। महागठबंधन में इन पार्टियों के साथ-साथ चुनाव लड़ने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो चुका है। जद(यू) और राजद के नेताओं ने यह फार्मूला तय करते वक्त इस बात का ख्याल रखा है कि आपसी विवादों के लिए यथासंभव कम से कम जगह छोड़ी जाए। इस फार्मूले के तहत जद(यू) और राजद 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और कांग्रेस को 40 सीटें मिलेंगी। इस फार्मूले की खास बात यह है कि दोनों बड़ी पार्टियों को बराबर-बराबर सीटें मिलेंगी और किसी को यह डर नहीं होगा कि दूसरी पार्टी उस पर हावी होगी। सिर्प 100 सीटों पर लड़ने से यह भी सुनिश्चित हो गया है कि अगर महागठबंधन को बहुमत मिलता है तो कोई पार्टी इतनी ताकतवर नहीं हो सकती कि दूसरी पार्टी को धत्ता दिखा सके। बिहार में महागठबंधन की बुनियाद रखे जाने के दिन से ही सहयोगी जद(यू) और इसके नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तमाम तरह का दबाव बनाने के खेल रच रहे राजद सुपीमो लालू पसाद यादव की एक न चली और सीट बंटवारे में उन्हें नीतीश के समक्ष पूर्ण समर्पण की मुद्रा में देखा गया। हां, इन दोनों की शह-मात के खेल में कांग्रेस की जरूर लाटरी लग गई है जिससे उसकी मौजूदा हैसियत से ज्यादा सीटें लड़ने के लिए मिल रही हैं। दूसरी ओर भाजपा को लगता है कि मोदी लहर के सहारे वह बिहार में भी बाजी मार लेगी। विपक्ष का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में शुरू हुई उसकी भाजपा विरोधी मुहिम अब कुछ-कुछ जड़ पकड़ने लगी है और बिहार में यह अपना चमत्कार जरूर दिखाएगी। बहरहाल भाजपा के खिलाफ बने सेक्यूलर गठबंधन की एक छोटी चूक भी सीट बंटवारे की घोषणा के साथ ही सामने आ गई है। शरद पवार की एनसीपी का बिहार में कोई खास वजूद तो नहीं है पर फिर भी उसे गठबंधन वार्ता में इज्जत से बिठाए जाने की उम्मीद थी। उसके लिए बिना बातचीत के ही तीन सीटें छोड़ी गईं लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं है और गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ने के लिए ताल ठेंक रही है। ंइस बार जीतन राम माझी और पप्पू यादव जैसे नेता भी मैदान में हैं जो किसी भी खेमे का खेल बिगाड़ सकते हैं। एनडीए की सबसे बड़ी चुनौती अपने सहयोगी दलों की महत्वाकांक्षा पर नियंत्रण लगाना है। उपेंद्र कुशवाहा और राम विलास पासवान से सीटों की डील करना आसान नहीं होगा कयोंकि इनकी नजर भी सीएम पद पर है और तो और खुद भाजपा में कम से कम पांच लीडर इस कुसी की फिराक में हैं। यह चुनाव सभी पार्टियों के लिए बड़ा महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा ने हालांकि दांव नरेंद्र मोदी की लाकपियता व लहर पर लगाया है पर इससे इंकार वह भी नहीं कर सकती कि पिछले कुछ महीनों में मोदी का ग्राफ गिरा है और शत्रुघ्न सिन्हा सरीखे के नेताओं का भी असर तो होगा ही। नीतीश कुमार की भविष्य की राजनीति उनके तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने पर निर्भर है। लालू पसाद यादव और राजद को दस साल बिहार की सत्ता से बाहर रहते हो गए हैं। उनका सत्ता में आना इसलिए भी जरूरी है कि अगर वह नहीं जीतते तो उनकी और उनकी पाटी का बिहार में राजनीतिक भविष्य चौपट होने का खतरा हो जाएगा। दोनों ही गठबंधनों को अपनी-अपनी पाटी के कार्यकर्ताओं में समन्वय बैठाना भी कम चुनौती नहीं है। ऐसे में इस चुनाव को आम चुनाव पार्ट-2 कहना गलत नहीं होगा।

-अनिल नरेंद्र

मरहबा (स्वागत) नमो, यूएई की सफल यात्रा

मरहबा नमो। ऐसे हुआ स्वागत हमारे पधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जब वह अबूधाबी के मसदर शहर में गए। पधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय अमीरात की यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक रही। एक बहुत लंबे अरसे के बाद भारत का पधानमंत्री यूएई गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिवसीय यूएई यात्रा के दौरान इस देश के साथ बिजनेस और आतंकवाद जैसे जरूरी मुद्दों पर सहयोग के अलावा भारत को एक शानदार इन्वेस्टमेंट स्पॉट के तौर पर निवेशकों में पेश किया। नरेंद्र मोदी से पहले इंदिरा गांधी यूएई गई थीं। लेकिन मोदी ने चौकाया अबूधाबी की शेख जायद मस्जिद पहुंच कर। पीएम बनने के बाद वह पहली बार किसी मस्जिद में गए। यहां हजारों लोग मोदी-मोदी के नारे लगा रहे थे। मोदी ने मस्जिद के साथ सेल्फी भी ली। सोमवार को मोदी सबसे उंढची इमारत बुर्ज खलीफा गए। मक्का और मदीना के बाद शेख जायद मस्जिद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मस्जिद है। 30 एकड़ जमीन पर 960 गुणा 1380 फीट के क्षेत्र में बनी है। इसका निर्माण 1996 से 2007 के बीच 13 देशों के तीन हजार कारीगरों ने पूरा किया। मोदी ने मस्जिद में 40 मिनट बिताए। उन्होंने लगभग 54 करोड़ डॉलर की लागत से बनी इस मस्जिद की गेस्ट बुक में लिखा कि मैं शानदार, विशाल, खूबसूरत इबादतगाह में आकर पसन्न हूं। पधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा इस मायने में ज्यादा अहम है कि भारत के साथ व्यापार और सुरक्षा के मोर्चों पर घनिष्ठ संबंधों के बावजूद विदेश नीति और कूटनीति के स्तर पर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से खामोशी छाई हुई थी। करीब साढ़े तीन दशक पहले तत्कालीन पधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब यूएई की यात्रा की थी तब से वैश्विक परिदृश्य और राजनीति दोनों में काफी बदलाव आ चुका है। आज भारत यूएई के साथ तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और राजनीतिक लिहाज से भी दोनों पुराने मित्र हैं। आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए यूएई भारत में अपने निवेश को समर्पित आधारभूत संरचना के जरिए बढ़ाकर 75 अरब डॉलर यानी 5 लाख करोड़ रुपए तक करने को सहमत हो गया है। दोनों देशों का अगले पांच वर्षें में द्विपक्षीय व्यापार को 60 पतिशत बढ़ाने पर राजी होना भारत की बड़ी जीत है। पधानमंत्री मोदी इस यात्रा में भी पूर्व सरकारों पर निशाना साधने से नहीं चूके। सोमवार को मसदर शहर में उन्हेंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए शहर के कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार को कुछ कठिनाइयां विरासत में मिली हैं और उसकी तत्काल पाथमिकता पूर्व की सरकारों के अनिर्णय और सुस्ती की वजह से स्थगित हुईं चीजों को शुरू करने की है। पधानमंत्री ने कहा कि मुझे कुछ समस्याएं विरासत में मिली हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि मैं केवल अच्छी चीजों को ले लूं और समस्याओं को छोड़ दूं... कुछ चीजें (पिछली) सरकारों के अनिर्णय और सुस्ती की वजह से रुक गई थीं। उन चीजों को शुरू करना मेरी पाथमिकता है। हमारी राय में बेहतर होता कि विदेशी जमीन पर मोदी जी पूर्व सरकारों की आलोचना से बचते। पधानमंत्री की इस यात्रा की एक हाई लाइट थी दुबई से पाकिस्तान को कड़ा संदेश देना। दुबई के स्टेडियम में नमो-नमो के नारों के बीच 50 हजार अपवासी भारतीयों को संबोधित करते पीएम मोदी ने इशारों में पाकिस्तान को बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों के खिलाफ मानवतावाद में विश्वास करने वाले देशों को एक होकर लड़ने का वक्त आ गया है। अच्छा आतंकवाद, बुरा आतंकवाद, अच्छा तालिबान और बुरा तालिबान अब नहीं चलेगा। हर किसी को तय करना होगा कि वह मानवता के साथ है या आतंकवाद के। यूएई में 26 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं जो हर साल देश को 12 अरब डॉलर की बड़ी रकम भेजते हैं। जहां यूएई की अर्थव्यवस्था में भारतीयों की इतनी बड़ी भागेदारी है वहीं उन्हें काम और रोजमर्रा के कठिन हालात से जूझना पड़ता है। दलालों की धोखेबाजी के शिकार पवासी मजदूरों की समस्या गहरी है और उसे दूर करना एक बड़ी समस्या है। कुल मिलाकर पधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा सफल ही रही।

Wednesday, 19 August 2015

मामला आप विधायक अलका लांबा को पत्थर मारने का

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की विधायक और तेज-तर्रार नेता-प्रवक्ता अलका लांबा एक नए विवाद में उलझती दिख रही हैं। चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा गत रविवार सुबह कश्मीरी गेट स्थित हनुमान मंदिर के पास नशे के खिलाफ अभियान में शामिल हुईं। अभियान के दौरान कुछ लोगों द्वारा पत्थरबाजी में वह घायल हो गईं। अलका ने बताया कि रविवार सुबह वो अपने कुछ कार्यकर्ताओं के साथ भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर आईएसबीटी (कश्मीरी गेट) हनुमान मंदिर के पास यमुना बाजार में नशे के खिलाफ अभियान में शामिल हुई थीं ताकि लोगों को नशे की लत से छुटकारा मिल सके। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन पर पत्थर फेंके जिससे उनके सिर पर चोट आ गई। आप नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक ओम प्रकाश शर्मा की दुकान के स्टाफ ने यह पत्थर फेंका था।  उन्होंने कहा कि यह हमला एक साजिश के तहत किया गया। अलका लांबा के इस बयान पर बवाल खड़ा हो गया। भाजपा विधायक ओम प्रकाश शर्मा ने अलका लांबा पर ड्रग्स लेने और ड्रग एडिक्ट होने का ही आरोप लगा दिया। शर्मा ने चेतावनी दी कि अगर अलका और उनके समर्थकों ने दुकानदारों को फिर से परेशान किया तो वह बचकर नहीं जा सकेंगी बल्कि उन्हें स्ट्रेचर पर जाना पड़ेगा। डीसीपी (नॉर्थ) के मुताबिक अलका लांबा ने सुबह आईएसबीटी के नजदीक हनुमान मंदिर के बाहर बनी कुछ दुकानों को बंद कराने की कोशिश की। वो अपने साथ एमसीडी कर्मियों को लेकर नहीं गई थीं जबकि यह काम एमसीडी का है। दुकान बंद करवाने के दौरान छत पर खड़े एक लड़के ने उन्हें पत्थर मार दिया, जैसा कि अलका लांबा कह रही हैं। पत्थर मारने वाले लड़के को हमने हिरासत में लिया है। अलका लांबा की शिकायत पर हम उसे गिरफ्तार कर लेंगे। क्षेत्र के व्यापारियों ने पुलिस से विधायक की शिकायत कर मुकदमा दर्ज करवाया है और परिणामस्वरूप सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया है जिसमें विधायक को दुकान में तोड़फोड़ करते देखा जा सकता है। विधायक का कहना है कि यह फुटेज हमले के बाद का है। क्षेत्र के 200 से अधिक व्यापारी अलका की छापेमारी कार्रवाई के विरोध में उपराज्यपाल नजीब जंग से मिले और मांग रखी कि मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल फोटो छपवाने के लिए सुबह छह बजे छापेमारी की। इस दौरान उन्होंने झूठ बोला कि वहां नशे का व्यापार चल रहा है जबकि सीसीटीवी फुटेज में वह खुद ही दोषी दिख रही हैं। इस मौके पर व्यापारियों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। यमुना बाजार में प्राचीन हनुमान मंदिर के पास रविवार सुबह कुछ दुकानों में घुसकर तोड़फोड़ करने के मामले में कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने अलका लांबा समेत अज्ञात आप कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। एफआईआर में केवल अलका लांबा को नामजद किया गया है। वारदात के आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरे में घटना की तस्वीरें कैद की गई थीं इसी की बिना पर केस दर्ज हुआ है। एक मिनट के लिए मान भी लिया जाए कि हमले के बाद की स्थिति का फुटेज है तब भी अलका लांबा ने कानून हाथ में लेने और तोड़फोड़, अराजकता की है और इसकी इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। जवाब में भाजपा विधायक लांबा को नशे की लत और देर रात की अराजक गतिविधियों में लिप्त होने का जो आरोप लगा रहे हैं वह भी सही नहीं है। इतना ही नहीं, दोबारा क्षेत्र में दिखने पर स्ट्रेचर से वापस जाने की भी धमकी दे रहे हैं। ऐसा लगता है कि अलका लांबा भी गलतबयानी कर रही हैं। वह नशा मुक्ति अभियान में नहीं, उनकी नजरों में अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान में गई थीं। अहम की इस लड़ाई में भले दो विधायकों में से कोई जीते-हारे किन्तु बेचारी दिल्ली की जनता को तो हारना ही है जिसने बड़ी हसरतों से इन्हें चुना है।

-अनिल नरेन्द्र

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया

मध्यप्रदेश में व्यापमं घोटाले और उससे जुड़ी करीब 49 मौतों के चलते सियासी मुश्किलों का सामना कर रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने थोड़ी ताकत दे दी है। रविवार को आए नतीजों में भाजपा ने 10 में से आठ निकायों में कामयाबी हासिल की है। भाजपा ने कांग्रेस से आठ सीटें छीन लीं जबकि कांग्रेस एक ही सीट बचा पाई। अब राज्य के 16 नगर निगमों पर भाजपा का ही कब्जा है। कहने को तो यह 10 निकायों का चुनाव था, लेकिन भाजपा इसे शुरू से ही प्रतिष्ठा का सवाल मानकर लड़ रही थी। खासकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव की तारीखें आते ही जी-तोड़ मेहनत की। वह सभी जगह ऐसे घूमे, प्रचार किया मानो स्वयं मैदान में हों। मंत्रियों की भी ड्यूटियां लगाईं। घोटाले पर सियासी बढ़त लेने के प्रयास में जुटी कांग्रेस के हिस्से में सिर्प एक ही निकाय आया। एक निर्दलीय के कब्जे में चला गया। ये चुनाव बृहस्पतिवार को हुए थे। उज्जैन व मुरैना नगर निगम में फिर भाजपा का डंका बजा। इससे पहले 14 निगमों में हुए चुनावों में भाजपा पहले ही जीत चुकी है। इस तरह मध्यप्रदेश के सभी 16 निगमों पर भगवा झंडा फहरा गया। यदि कांग्रेस बेहतर नतीजे ले आती तो वह इसे व्यापमं घोटाले से जोड़ कर मुख्यमंत्री की दिक्कतें और बढ़ाने का काम करती या उनके इस्तीफे की मांग को तेज कर देती। बिहार चुनाव से ठीक पहले आए इन नतीजों से भाजपा के हौंसले बुलंद हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश भाजपा को जीत की मुबारकबाद देकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। वहीं बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आए इन परिणामों से कांग्रेस कमजोर हुई है। यूएई के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिवराज सिंह चौहान को बधाई देना नहीं भूले और कहा कि राज्य के निकाय चुनाव के नतीजे खुश कर देने वाले हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और भाजपा का खुश होना स्वाभाविक भी है। आखिर इसी व्यापमं घोटाले को लेकर कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र में कोई कामकाज नहीं होने दिया। हालांकि घोटाला सामने आने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने ही उसकी एसआईटी के जांच के आदेश दिए थे। हाई कोर्ट ने भी माना था कि एसआईटी जांच ठीक दिशा में हो रही है और उसने सीबीआई जांच का आदेश देने से भी इंकार कर दिया था। लेकिन कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक ऐसा शोर मचाया मानो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भ्रष्टाचारी और अपराधी हैं, बिना न-नुक्कर किए शिवराज ने भी उसकी सीबीआई जांच के आदेश दे दिए ताकि दूध का दूध-पानी का पानी हो सके। व्यापमं और कांग्रेस और उसके नेताओं का जिक्र किए बिना शिवराज ने ट्विट कियाöयह नकारात्मक राजनीति करने वालों को जनता का संदेश है।

Tuesday, 18 August 2015

Pakistan: Out of Control

Internal situation in Pakistan is getting out of control. This can be gauged by the fact that it couldn't even save its own state home minister. It's shocking news that provincial Home Minister of Pakistani Punjab Shuja Khanzada was killed in a bomb blast in his very home. Two suicide bombers exploded themselves at the patriarchal residence of Pakistani Provincial Home Minister Shuja Khanzada in Attock district on Sunday in which 15 people including Khanzada were killed. Khanzada was known as a strong opponent of Taliban. Pak officials said that 15 people including Khanzada (71) and a DSP were assassinated in a suicide bomb attack at his political office in his patriarchal village Shadi Khan. The explosion was so powerful that 15 people were killed and many more were injured. Khanzada was a retired colonel and was holding a Jirga (meeting) at his farmhouse at Shadi Khan, almost hundred kilometers away from Islamabad, attackers succeeded in entering his house and exploded the bomb. Deputy Commissioner of Police Shaukat Shah was also among the deceased. It can easily be made out that how unmanageable the internal situation of Pakistan is?  Nobody cares for civil administration. In Pakistan, army and ISI are on one side and these Jehadi organization on the other, that really matters.  Presently these are the real powers in Pakistan. Pakistan is incessantly firing on LoC in J&K. Pakistan has crossed the J&K LoC 35 times in the month of August alone.  Defence spokesperson Colonel Manish Mehta told that Pak army is attacking with mortars at advance Indian posts and nearby villages in sector 5 of Punch district since Monday morning. Indian Army is also responding.  Even the funeral of the deceased couldn't take place due to this incessant firing from across the border. Many a people have started migrating from the border villages due to incessant firing. Indian Army has taken strict attitude over Pak firing. India and Pakistan NSA propose having peace talks. In such a situation where neither the internal situation of Pakistan nor the Pakistan Army is under control, what is the use of having dialogues with Pakistani civil and political group?  These talks should be cancelled and no dialogues with Pakistan be held until it stops its nefarious adventure. What can Pakistan ultimately give to India? Whenever there is dialogue with Pakistani Government and Army, it is known that these non-state actors spoil the broth. Are these non-state actors ultimately your kids? Don't they attack from your territory?  Whenever India extends the friendship hand towards Pakistan, it only get 26/11 or Gurdaspur in return. At present, we should avoid dialogue with Pakistan. Let the situation be normalise, before we think of a dialogue. At present Pakistan is out of control.

-        Anil Narendra

वन रैंक-वन पेंशन पर सरकार जल्द फैसला करे

जिस तरह से वन रैंक-वन पेंशन की मांग को लेकर पूर्व सैनिकों को दिल्ली पुलिस ने जबरन जंतर-मंतर से हटाने की कार्रवाई की वह निंदनीय है। 61 दिनों से धरना दे रहे पूर्व सैनिकों को शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने हटाना चाहा। पुलिस ने 15 अगस्त के सुरक्षा प्रबंधों के चलते यह कदम उठाया। लेकिन जिस तरह जबरन हटाना चाहा उससे हंगामा खड़ा होना स्वाभाविक ही था। आप पूर्व सैनिकों से इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकते। शुक्रवार सुबह एनडीएमसी और दिल्ली पुलिस द्वारा चलाए गए इस साझा अभियान का पूर्व सैनिकों ने जमकर विरोध किया। इस दौरान कई सैनिकों को गंभीर चोटें भी आईं। पूर्व सैनिकों के विरोध के बाद दिल्ली पुलिस ने बाद में सैनिकों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी। इस घटना का सियासी लाभ उठाने जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जंतर-मंतर पहुंचे तो उन्हें `गो बैक' का नारा सुनना पड़ा। राहुल वापस जाओ के नारे लगे। कुछ सैनिकों ने राहुल पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को कभी भी संसद में क्यों नहीं उठाया? राहुल का जब विरोध होने लगा तो वह कुछ समय के लिए असहज हो गए और बमुश्किल 15 मिनट ही रुके। हालांकि मंच के नीचे बैठे कुछ पूर्व सैनिकों ने राहुल का स्वागत भी किया। बाद में पत्रकारों से बातचीत में राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने वन रैंक-वन पेंशन लागू करने को लेकर पीएम से स्पष्ट तारीख बताने की मांग की। उधर रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर ने कहा कि सरकार वन रैंक-वन पेंशन लागू करने के लिए वचनबद्ध है, लेकिन कुछ तकनीकी बाधाएं हैं। सरकार अपने कार्यकाल में और जल्दी लागू करने का प्रयास करेगी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवसीय भाषण में कहा कि सरकार समान रैंक पर एक जैसी पेंशन को बहुत जल्द पूरा करेगी। दशकों पुरानी मांग पर सरकार सिद्धांत रूप से सहमत है। बस इसे लागू करने के ब्यौरे तय किए जा रहे हैं। पूर्व फौजियों की इस मांग पर शनिवार को पीएम ने कहाöमेरे सेना के जवानों, सिद्धांतत वन रैंक-वन पेंशन हमने स्वीकार कर लिया है। लेकिन संगठनों से बातचीत का दौर चल रहा है, यह अंतिम दौर में है। जिस विश्वास के साथ वार्ता चल रही है मैं सुखद परिणाम की आशा करता हूं। वन रैंक-वन पेंशन के मुद्दे पर पूर्व सैनिकों ने प्रधानमंत्री के मौखिक आश्वासन से एक कदम आगे बढ़कर अब लिखित आश्वासन पर जोर दिया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों ने कहा कि मोदी ने 16 माह पहले भी वन रैंक-वन पेंशन लागू करने का भरोसा दिया था। इस बार लिखित आश्वासन के साथ वह अभी तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी चाहते हैं। पूर्व सैनिक सतवीर सिंह ने कहा कि 15 अगस्त पर प्रधानमंत्री के आश्वासन से उम्मीद तो जगी है। लेकिन इसके लागू करने के समय पर संदेह है। हम वन रैंक-वन पेंशन का पूर्ण समर्थन करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए।
-अनिल नरेन्द्र


पाकिस्तान की स्थिति बेकाबू और नियंत्रण से बाहर है

पाकिस्तान की अंदरूनी स्थिति बेकाबू होती जा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने गृहमंत्री को भी सुरक्षित नहीं रख सकती। चौंकाने वाली खबर आई है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गृहमंत्री शुजा खानजादा को उनके घर में ही बम से उड़ा दिया गया है। पाक के पंजाब प्रांत के अटक जिले में रविवार को राज्य के गृहमंत्री शुजा खानजादा के पैतृक आवास पर दो आत्मघाती बम हमलावरों ने खुद को उड़ा लिया जिसमें खानजादा सहित 15 लोगों की मौत हो गई। खानजादा तालिबान के कड़े विरोध के लिए जाने जाते थे। पाक अधिकारियों ने बताया कि खानजादा के पैतृक गांव शादी खान में उनके राजनीतिक कार्यालय पर आत्मघाती हमलावरों के हमले में खानजादा (71) और एक डीएसपी सहित 15 लोगों की मौत हो गई। विस्फोट इतना प्रभावशाली था कि 15 लोग तो मारे गए और इससे ज्यादा लोग घायल हो गए। खानजादा एक सेवानिवृत्त कर्नल थे और इस्लामाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर शादी खान में अपने घर पर जिरगा (बैठक) कर रहे थे, हमलावर वहां घुसने में कामयाब रहे और खुद को बम से उड़ा दिया। मरने वालों में पुलिस उपायुक्त शौकत शाह भी शामिल हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के अंदरुनी हालात कितने बेकाबू हैं। पाकिस्तान में सिविल एडमिनिस्ट्रेशन को तो कोई पूछता ही नहीं। एक तरफ पाक सेना व आईएसआई और दूसरी तरफ यह जेहादी संगठन। असल शक्तियां यह हैं मौजूदा पाकिस्तान में। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाक कई दिनों से लगातार गोलाबारी कर रहा है। अगस्त के ही महीने में 35 बार जम्मू-कश्मीर नियंत्रण रेखा पर पाक उल्लंघन कर चुका है। रक्षा प्रवक्ता कर्नल मनीष मेहता ने बताया कि पाक सेना रविवार सुबह से ही पुंछ के पांच सैक्टर में अग्रिम चौकियों व आसपास के गांवों पर गोलियों और मोर्टारों से हमला कर रही है। भारतीय सेना भी इसका करारा जवाब दे रही है। सीमा पर लगातार हो रही गोलीबारी के कारण मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार भी नहीं हो सका। सीमा के पास स्थित गांवों से कई लोगों ने गोलीबारी से त्रस्त होकर पलायन शुरू कर दिया है। भारतीय सेना ने भी पाक गोलीबारी पर सख्त रुख अपनाया है। रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। इन परिस्थितियों के चलते जहां पाकिस्तान के अंदरूनी हालात भी काबू में नहीं हैं और न ही पाक सेना नियंत्रण में है पाकिस्तान की सिविल व सियासी जमात से बातचीत का औचित्य क्या है? 23-24 अगस्त को एनएसए स्तर की वार्ता रद्द होनी चाहिए और पाकिस्तान से तब तक बातचीत नहीं होनी चाहिए जब तक वह अपनी हरकतें बंद नहीं करता। आखिर पाकिस्तान हिन्दुस्तान को दे क्या सकता है? पाक सरकार और सेना से जब भी बात होती है वह हमेशा यह बहाना बना देता है कि यह नॉन स्टेट एक्टर माहौल बिगाड़ रहे हैं। यह नॉन स्टेट एक्टर आखिर हैं तो आपकी पैदायश? आपकी सर-जमीन से ही तो हमला करते हैं? जब-जब भारत ने पाक की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है जवाब में कारगिल, 26/11 व गुरदासपुर ही मिला है। हमें पाकिस्तान से फिलहाल कोई बातचीत नहीं करनी चाहिए। पहले स्थिति सामान्य हो फिर बातचीत का सोचा जाए। अभी तो पाकिस्तान की स्थिति बेकाबू है, नियंत्रण से बाहर।