Translater

Thursday, 2 July 2026

ट्रंप और मेलोनी के बीच बिगड़ते रिश्ते

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से जुड़े कई पोस्ट सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। इनमें से कुछ में तो ऐसा दिखाया गया है जैसे वो किसी ब्रेक-अप के बाद अपनी जिंदगी बदलने की कोशिश कर रही हों। एक एआई फोटो में उन्हें नए हेयरकट के साथ दिखाया गया है। एक अन्य तस्वीर में उन्हें सिंगल हॉलिडे बुक करते हुए दिखाया गया है। ये सारी तस्वीरें असली नहीं हैं, लेकिन उनका मजाक इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि मेलोनी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच खुले तौर पर विवाद अब सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ट्रंप और मेलोनी का रिश्ता कभी खुले हमलों तक गया, कभी भी निजी तानों तक और फिर थोड़ा ठीक भी हुआ लेकिन इन उठापटक से यूरोप की सबसे चर्चित राजनीतिक दोस्ती ठंडी पड़ गई। कुछ समय पहले तक लोग मेलोनी को ट्रंप की सहयोगी कहते थे। इसकी बानगी जनवरी 2025 में देखने को मिली जब ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें सबसे आगे बैठने की जगह मिली। समारोह में यह अहम जगह पाने वाली वह अकेली यूरोपीय नेता थीं। पिछले अप्रैल में मेलोनी व्हाइट हाउस गई थीं। वहां वह उस उद्देश्य से गई थीं ताकि यूरोपीय सामान पर लगे अमेरिकी ट्रेड टैरिफ को लेकर तनाव कम हो। लेकिन ट्रंप की जैसी आदत है, उनकी अनिश्चितता मेलोनी के लिए मुश्किल भरी साबित हुईं और उनकी साख को देश-विदेश दोनों जगह चोट पहुंची। ट्रंप और मेलोनी में पहली बड़ी दरार मार्च के आखिर में आई। इटली के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी सैन्य जहाजों को सिसिली के सिगोनेला नाटो एयरबेस इस्तेमाल करने की इजाजत देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी है। इटली ने ये कदम इसलिए उठाया क्योंकि उनका कानून और जनता दोनों ही ईरान युद्ध के खिलाफ थे। यह विवाद और बढ़ गया। अप्रैल में ट्रंप ने टूथ सोशल पर पोप लियो (14वें) पर हमला करते लिखा, क्योंकि उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध की चेतावनी व आलोचना की थी। ट्रंप ने उन्हें कमजोर बताया। कैथोलिक देश की नेता मेलोनी ने ट्रंप के बयान को अस्वीकार्य बताया। मेलोनी की सख्त प्रतिक्रिया ट्रंप को पसंद नहीं आई और उन्होंने इटली के अखबार कोरिएरे डेला सेरा से कहा: मैं हैरान हूं, मुझे लगा था कि उनमें हिम्मत है, लेकिन मैं गलत था। वह अब पहले जैसी नहीं रही और इटली भी पहले जैसा देश नहीं रहा। फ्रांस ने जी-7 सम्मेलन में ट्रंप और मेलोनी को बातचीत करते हुए देखा गया था। दोनों देशों के अधिकारियों ने इस बातचीत को सकारात्मक और सामान्य बताया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद ट्रंप ने इतालवी चैनल को कहा मेलोनी ने समिट में उनसे फोटो खिंचवाने के लिए मिन्नत की थी। ट्रंप ने कहा कि वह मेरे साथ तस्वीर चाहती थीं, मैं नहीं लेता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया। मेलोनी ने तुरंत जबाव दिया, उन्होंने वीडियो जारी कर ट्रंप की बात को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगियों के साथ ऐसा क्यों करते हैं। मैं बस इतना कह सकती हूं कि अफसोस है कि वह पश्चिम के दुश्मनों के खिलाफ ऐसी मजबूती नहीं दिखाते। लेकिन एक बात याद रखनी चाहिए, न मैं और न ही इटली किसी की मिन्नत करता है। इसके तुरंत बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिकी यात्रा रद्द कर दी। इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला ने मेलोनी को फोन कर उनका समर्थन किया। सरकार के सहयोगियों और सांसदों ने भी ट्रंप की टिप्पणियों को अपमानजनक बताया और माफी की मांग की। विपक्ष ने इसे पूरे देश का अपमान कहा। दूसरी तरफ ट्रंप ने फिर दोहराया कि मेलोनी ने बार-बार तस्वीर खिंचवाने की मांग की थी। मेलोनी पर यह भी आरोप लगाया कि वह अब दोबारा दोस्त बनने की कोशिश कर रही हैं। क्योंकि अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है। जैसे ही यह विवाद ठंडा पड़ता दिखा तो सैन्य ठिकानों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद ईरान युद्ध में आपरेशन फ्यूरी के दौरान इटली के अमेरिकी एयरबेस को लेकर उठा। नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने बताया कि लगभग 500 विमान इटली में अमेरिकन ठिकानों से ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में उड़ान भरी। लेकिन इटली को यह बात अच्छी नहीं लगी और उसके रक्षा मंत्रालय ने इसे गलत और भ्रामक बताया। मजेदार बात यह है कि दोनों ट्रंप और मेलोनी को जल्द ही अपने देश में चुनाव का सामना करना पड़ सकता है। इटली में आम चुनाव होने हैं तो अमेरिका में मिड टर्म चुनाव हैं। देखते हैं कि अमेरिका और इटली के रिश्ते सुधरते हैं या और बिगड़ते हैं।
- अनिल नरेन्द्र