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Thursday, 30 July 2026

क्या ईरान के आगे झुका है ट्रंप ?


अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सीजफायर हो गया है और जंग फिर थम गई है। 13 दिनों में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ है क्योंकि ईरान जार्डन और इराक में भी हमले कर रहा है। ईरान ने इस बार सिर्फ अमेरिकी बेस पर मौजूद हथियारों को टारगेट किया बल्कि अगर खबर सही है तो इन हमलों में अमेरिकी सैनिकों के मरने व घायल होने की बात ईरान कर रहा है। ट्रंप की सेना ने फिलहाल हमले रोक दिए हैं, नहीं तो वो लगातार 12-13 दिनों से हर रोज ईरान पर बमबारी कर रहा था। अमेरिका ने तो एक बार फिर भारी बी-1 बाम्बरों का भी इस्तेमाल किया। ईरान ने तो ताबड़तोड़ कई जवाबी हमले किए। जब अमेरिका ने हमले रोके तो ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई रोक दी। कहा जा रहा है कि अमेरिका के एयर डिफेंस मिसाइलों का स्टॉक कम हो चुका है, जिससे अरब क्षेत्र में अमेरिका ठिकानों की सुरक्षा करना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से ट्रंप को पीछे हटना पड़ा है। दरअसल ईरान ने युद्ध की शुरुआत से ही सस्ते ड्रोन से लगातार हमले करने की रणनीति बनाई थी जिसका परिणाम ये हुआ कि अमेरिका को पैट्रियट मिसाइलों का इस्तेमाल बहुत अधिक करना पड़ा और चंद दिनों में ही मिसाइलों का स्टॉक कम हो गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका पिछले 13 दिनों से अपने तमाम बेसों की सुरक्षा के लिए पैट्रियट मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा था। 13 दिनों की जंग के बाद अब कहा जा रहा है कि अमेरिकी सेना के पास सिर्फ 900 से 1000 पैट्रियट मिसाइलें ही बची हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी कंपनियां हर महीने सिर्फ 20 मिसाइलों का प्रोडक्शन कर रहा है। दूसरी तरफ ईरान ने अपनी मिसाइलें और ड्रोनों का स्टॉक लगातार बढ़ा लिया है और वह नई मिसाइलों और ड्रोनों का भी बहुत तेजी से निर्माण कर रहा है। अब अगर ईरान की तरफ से और हमले होते हैं तो अमेरिका की बची-खुची मिसाइलें भी खत्म हो जाएंगी। यह चेतावनी अमेरिका की सेटकॉम ने भी ट्रंप को दी है। ऐसे में अमेरिका को अपने बेस की सुरक्षा की फिक्र है। ईरान के हमलों से भी अमेरिकी डिफेंस को भारी नुकसान हुआ है। हमलों के दौरान अमेरिकी बेस पर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर नष्ट हो चुके हैं। इसके अलावा 6 पैट्रियट एयर डिफेंस रडार नष्ट हो चुके हैं। अमेरिका हमलों की वजह से 3 ईपीएस रडार सिस्टम गंवा चुका है। हमलों में 5 लांग रेंज रडार भी नष्ट हो गए हैं। एक तरफ हथियारों की कमी है तो दूसरी तरफ नुकसान की वजह से युद्ध का बढ़ता खर्च भी ट्रंप पर दबाव बना रहा है। हमलों के दौरान अमेरिका का एक एफ-15 विमान नष्ट हो गया। एफपी-8 विमान भी नष्ट हो चुका है। ईरानी हमलों की वजह से सी-17 कार्गो विमान जल गया, 8 हवा में तेल भरने वाले रिफ्यूलिंग विमान भी नष्ट हो गए हैं। हमलों के दौरान 4 हेलिकॉप्टर नष्ट हो गए। 13 दिनों में अमेरिका को इसलिए भी भारी नुकसान हुआ है क्योंकि ईरान जार्डन और ईराक में भी हमले करता रहा। ईरान ने इस बार सिर्फ अमेरिकी बेस पर मौजूद हथियारों, विमानों को टारगेट किया बल्कि दावा किया जा रहा है कि चीन की सेटेलाइट्स की मदद से ईरान ने सटीक निशाने से हमला किया। कहा तो यह भी जा रहा है कि केवल एयर डिफेंस सिस्टम पर ही हमले नहीं हुए पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के कई ठिकानों पर भी सीधे हमले किए ताकि जो इंटेलिजेंस कह रहे थे उनको रोका जा सके। ईरान के हमलों में अमेरिका के नुकसान का ग्राफ बढ़ता गया। ईरान ने अमेरिका एयर डिफेंस को खाली करने की राणनीति को आगे बढ़ाया। ईरान ने विमानों के रैंप और हैंगर्स को निशाना बनाया है। बहरीन ने हेलीकॉप्टर चेनटेनस सेंटर को नष्ट किया। ईरान ने अमेरिकी बेस पर 12 तेल डिपो को तहस-नहस कर दिया। सबसे बड़ा दावा तो इराक के इटबिल बेस को लेकर है। ईरानी सेना का दावा है कि लगातार हमलों की वजह से इराक के इटबिल में अमेरिका का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो चुका है और ईरान के ठिकानों की ऑपरेशनल क्षमता काफी हद तक खत्म हो चुकी है। यूं ही नहीं अमेरिका के राष्ट्रपति ने युद्ध बंद करने की घोषणा की। पर डोनाल्ड ट्रंप की बातों पर अब शायद ही कोई यकीन करे? इस युद्ध को रोकने की पीछे भी कोई नया खेल हो सकता है। पर ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है।
- अनिल नरेन्द्र

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