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Friday, 8 May 2020

पाक में तबलीगी जमात के 72 सदस्य भागे

पाकिस्तान में रविवार को कोरोना मरीजों की संख्या 20 हजार से ऊपर हो गई। अब तक 450 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा 180 मौतें खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में हुई हैं। कोरोना से मुकाबले में सरकार कई मोर्चों पर नाकाम रही है। पंजाब प्रांत के हाफिजाबाद स्थित प्रमुख मरकज के क्वारंटाइन किए गए तबलीगी जमात के अब तक 72 सदस्य भाग चुके हैं। इन्हें पकड़ने के लिए पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई को अब लगाया गया है। दूसरी ओर पाक सेना ने भी कोरोना से मुकाबले के लिए खुद को आगे कर दिया है। उसने पूरे देश में छावनियों, हथियार फैक्ट्रियों, बॉर्डर इलाकों जैसे तिब्बत बेल्ट, कश्मीर, गिलगित बालटिस्तान में सख्त लॉकडाउन किया है। इन सभी जगहों पर जवान तैनात किए गए हैं। सेना के मेडिकल कोर की मदद के लिए चीनी सेना से मेडिकल एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। इन चीनी डॉक्टरों को पाकिस्तान के अस्पतालों में देखा जा सकता है। चीनी मेडिकल टीम का नेतृत्व मेजर जनरल हुआंग किन जेन कर रहे हैं। वह 9 दिन पहले पाकिस्तान आए थे। टीम अगले दो महीने तक पाकिस्तान में रहेगी। टीम में रोग नियंत्रण, आईसीयू एक्सपर्ट और सांस रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। इधर विपक्ष प्रधानमंत्री इमरान खान पर लगातार दबाव बना रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो का कहना है कि सरकार कोरोना संकट का मुकाबला करने में कमजोर साबित हुई है। पीएम इमरान को इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि सरकार का कहना है कि उसने अब तक 2,03,025 लोगों के टेस्ट करवाए हैं। पाकिस्तान के डॉक्टर शुरू से ही सुरक्षा उपकरण की कमी से जूझ रहे हैं। चार दिन पहले रावलपिंडी शहर में 26 साल की डॉक्टर की कोरोना से मौत हो गई थी। एक युवा डॉक्टर की मौत ने अन्य हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को झकझोर कर रख दिया। यह स्वास्थ्य कर्मी शुरू से ही आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। सरकार उनकी मांगें पूरी करने में नाकाम रही है। युवा डॉक्टर की मौत के करीब हफ्तेभर पहले पेशावर में भी एक सीनियर डॉक्टर की मौत कोरोना से हो चुकी है। नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के मुताबिक देश में 444 हैल्थ वर्पर कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 216 डॉक्टर, 67 नर्सें और 161 अन्य स्वास्थ्य कर्मी हैं। पहले से मुसीबत में पाक सरकार व प्रशासन की मुसीबत इन तबलीगी जमात वालों ने और बढ़ा दी है। 72 सदस्य भाग गए हैं और देश के अन्य भागों में फैल चुके होंगे। अगर इनमें से कुछ संक्रमित हुए तो यह जिस-जिससे मिलेंगे उसे भी संक्रमित करेंगे। तबलीगी जमात भारत के लिए तो समस्या बनी ही थी, पाकिस्तान के लिए भी सिरदर्द बन गई है।

-अनिल नरेन्द्र

इजरायल और इटली का दावा ः कोरोना वैक्सीन टेस्ट सफल

कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए इजरायल और इटली से खुशखबरी आई है। इजरायल के रक्षामंत्री नफ्ताली बेनेट ने दावा किया है कि देश के मुख्य जैविक अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के लिए एंटीबॉडी विकसित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि हमारी टीम ने कोरोना वायरस को खत्म करने के टीके के विकास का चरण पूरा कर लिया है और अब इसके पेटेंट और बड़े पैमाने पर संभावित उत्पादन के बारे में काम चल रहा है। बेनेट ने सोमवार को नेज जियोना में इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर बॉयोलाजिकल रिसर्च (आईआईबीआर) की लैब्स का दौरा किया और कोरोना के लिए एक वैक्सीन विकसित करने का निर्देश दिया। मंत्री के अनुसार यह एंटीडॉट वैक्सीन मोनोकलोनल तरीके से कोरोना वायरस पर हमला कर वायरस को शरीर के अंदर ही खत्म कर देती है। बयान में कहा गया है कि यह हमारे रचनात्मकता व यहूदी दिमाग की अद्भुत उपलब्धि है। उधर इटली के वैज्ञानिकों ने भी दावा किया है कि उन्होंने कोरोना वायरस की वैक्सीन बना ली है। साइंस टाइम्स में मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि रोग की संक्रामक बीमारी से जुड़े स्पालनलनागी हॉस्पिटल में टेस्ट किया गया है और चूहे में एंटीबॉडीज तैयार किया गया। इसका प्रयोग फिर इससे पर किया गया और इसने अपना असर दिखाया। संस्था टाकीस के सीईओ लूगी ऑरेसिशियो ने कहा कि हमने एंटीबॉडीज विकसित किए हैं, जिसने पहली बार मानव कोशिका में मौजूद कोरोना वायरस को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि आगे कुछ और ह्यूमन ट्रायल किए जाने हैं। उम्मीद तो यही की जाती है कि इन दोनों देशों के दावों में दम हो और इस मनहूस महामारी से जल्द दुनिया को छुटकारा मिले।

मजदूरों से ट्रेन किराया वसूलने पर सियासी घमासान

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार सुबह प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के रेल किराये का भुगतान कांग्रेस की तरफ से किए जाने का ऐलान करके एक बड़ा सियासी दांव खेला है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सोनिया के इस मास्टर स्ट्रोक की भूमिका रविवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से हुई लंबी बातचीत के बाद बनी। राहुल ने इस पर कोरोना को लेकर गठित कांग्रेस की कोर कमेटी के कुछ विश्वस्त सदस्यों से चर्चा करने के बाद रणनीति तय की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम का नाम लिए बगैर सोनिया ने कहाöजब हम गुजरात के एक कार्यक्रम में सरकारी खजाने से सौ करोड़ रुपए खर्च कर सकते हैं, रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री केयर्स फंड में 151 करोड़ रुपए दे सकता है, विदेश में फंसे भारतीयों को निशुल्क वापस ला सकते हैं, तो फिर प्रवासी मजदूरों को निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती है? कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मीडिया से बातचीत में रेलवे का एक परिपत्र जारी किया, जिसमें श्रमिकों से किराया वसूलने का जिक्र है। वेणुगोपाल ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस ईकाइयां संबंधित राज्य सरकारों और मुख्य सचिवों के साथ चर्चा कर श्रमिकों के रेल किराये का जो भी खर्च होगा उसका भुगतान करेगी। राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखाöएक तरफ रेलवे दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों से टिकट का भाड़ा वसूल कर रही है वहीं दूसरी ओर रेल मंत्रालय पीएम केयर्स फंड में 151 करोड़ रुपए का चन्दा दे रहा है। जरा यह गुत्थी सुलझाएं। उन्होंने रेलवे के 151 करोड़ देने की खबर भी ट्वीट की। वहीं प्रियंका गांधी ने ट्वीट कियाöहम विदेशों में फंसे भारतीयों को निशुल्क ला सकते हैं। नमस्ते ट्रंप पर सरकारी खजाने से सौ करोड़ खर्च कर सकते हैं तो इस संकट में मजदूरों को निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दे सकते? भाजपा ने पलटवार करते हुए प्रवासी मजदूरों से रेल यात्रा का खर्च वसूलने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि रेलवे श्रमिक स्पेशल ट्रेन के किराये पर 85 फीसदी सब्सिडी दे रहा है। शेष 15 फीसदी राशि का भुगतान राज्यों को करना है। जीवन अर्थ चक्र से चलता है। आर्थिक प्रक्रिया चक्रीय होती है, यानि श्रम से उत्पादन, उत्पादन से उपयोग, उपयोग के लिए श्रम। उद्यमी कह रहे हैं कि उत्पादन नहीं हो सकता क्योंकि श्रमिक अपने गांव चले गए हैं, बेरोजगार हुए श्रमिक के पास खाने को नहीं है और क्वारंटाइन का भूत उसे फिर रोजी के लिए बाहर निकलने से डराता है, सरकार के पास इतना अनाज है कि अगर जल्द ही खपत नहीं की गई तो भंडारण, रखरखाव और वितरण का खर्च अनाज की कीमत से दोगुना हो जाएगा। देखा जाए तो राज्य सरकारों की विफलता है कि वह दूसरे राज्यों में रह रहे लोगों को विश्वास दिलाने में सफल नहीं रहे कि हर स्थिति में उनका साथ दिया जाएगा, उनको कोई कठिनाई नहीं आने दी जाएगी। वैसे इन प्रवासी मजदूरों का वापस जाना भी कोरोना संक्रमण की पुष्टि से कम जोखिम भरा नहीं है। हम राजनीतिक पार्टियों से अपील करेंगे कि इस मामले में राजनीति बंद कर देश के भविष्य की दृष्टि से अपनी भूमिका निभाएं।

Thursday, 7 May 2020

कई देश अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ढील देंगे

दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन खत्म करने के साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी, जापान जैसे देशों में ढील के साथ चीन और पहले से छूट पा रहे यूरोपीय देशों को शामिल कर लें तो 4 मई से करीब आधी दुनिया दौड़ने लगेगी। चीन के ज्यादातर क्षेत्रों में पहले ही आर्थिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग, फेस मास्क जैसी पाबंदियां हर देश में लागू रहेंगी। हालांकि कुछ देशों ने अभी प्रतिबंध बरकरार रखने का फैसला किया है। अमेरिकी राज्यों में लॉकडाउन 17 से 24 मार्च के बीच लागू हुआ था। अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहाöमुझे बताया गया कि 35 राज्यों ने दोबारा कामकाज शुरू करने के लिए औपचारिक योजनाएं जारी कर दी हैं। टेक्सास, टेनेसी जैसे राज्यों में लॉकडाउन शुक्रवार को खत्म हो गया। फ्लोरिडा, अरांकसास के साथ कैलिफोर्निया के कुछ क्षेत्रों ने 4 मई के बाद खुलने के संकेत दिए हैं। जॉर्जिया, ओक्लहोमा ने ढील दी है। हालांकि एरिजोना, कनेकटिकर, डेलावेयर, इलिनॉयस, मैसाच्यूसेट्स जैसे प्रांत 15 मई के पहले खुलने के आसार नहीं हैं। जर्मनी में भारत की तरह 24 मार्च से लॉकडाउन लागू हुआ था। 4 मई से चर्च, लाइब्रेरी, जू, खेल के मैदान जैसे सार्वजनिक संस्थान खुल गए हैं। 6 मई से बार, पब और होटल भी खुल सकते हैं। आर्थिक गतिविधियां पिछले हफ्ते ही शुरू हो चुकी हैं। स्पेन में चरणबद्ध तरीके से ढील शुरू होगी। पहले हफ्ते के पहले चरण में सैलून, मरम्मत की सेवाएं, भोजन की होम डिलीवरी आदि शुरू होंगी। छोटे कारोबार और होटल 11 मई से खुलेंगे। मलेशिया के प्रधानमंत्री मुहिद्दीन यासिन ने शुक्रवार को ऐलान किया कि 4 मई से आर्थिक क्षेत्र खोला जाएगा। 18 मार्च से लागू छह हफ्तों का लॉकडाउन भी उसी दिन से हटेगा। मलेशिया दक्षिण पूर्व एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है। अधिकतम 10 सदस्यों से जुड़े हर तरह के आयोजन भी हो सकेंगे। जापान और ब्रिटेन में लॉकडाउन फिलहाल बढ़ाया गया है, फ्रांस के प्रधानमंत्री एडवर्डो फिलिप ने कहा है कि आर्थिक पाबंदियां 11 मई से खत्म होंगी। देश में हर हफ्ते 7 लाख टेस्ट करने की क्षमता होगी। समुद्र तट, रेस्तरां-कैफे एक जून तक नहीं खुलेंगे। देश में 17 मार्च से लॉकडाउन शुरू हुआ था और 15 दिन का तीसरा लॉकडाउन पूरा होने वाला है।

-अनिल नरेन्द्र

एक बार फिर ममता और केंद्र आमने-सामने

एक तरफ पूरा देश कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है वहीं दूसरी तरफ आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी है। पश्चिम बंगाल के प्रिंसिपल हैल्थ सैकेटरी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा है कि बंगाल में 10 नहीं सिर्प चार ही रेड जोन हैं। आपको बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो दिन पहले देश के जिलों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बांटा है, जिसमें बंगाल के कुछ 10 जिलों को रेड जोन में रखा गया है। पश्चिम बंगाल के प्रिंसिपल हैल्थ सैकेटरी ने कहा है कि 30 अप्रैल को कैबिनेट सैकेटरी के वीडियो कांफ्रेंसिंग में पश्चिम बंगाल के 10 जिलों को रेड जोन में दिखाया गया है, लेकिन बंगाल में सिर्प चार जिले इसमें शामिल हैं। बंगाल के जिन 10 जिलों को रेड जोन में रखा गया है वह हैं कोलकाता, हावड़ा, चौबीस परगना उत्तरी, चौबीस परगना दक्षिण, मिदनापुर पूर्वी, मिदनापुर पश्चिमी, दार्जिलिंग, जलपाईगुडी, कलिम्पोंग और मालदा शामिल है। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से 3 मई के बाद यानि अगले हफ्ते के लिए जिलों को अलग-अलग हिसाब से बांटने का काम किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के सभी जिलों को तीन कैटेगरी में बांट दिया हैöरेड जोन, ऑरेंज जोन और ग्रीन जोन। स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा केस की संख्या डबलिंग रेट और टेस्टिंग के हिसाब से जिलों की नई सूची तैयार की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक जिन जिलों में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैला है और नए मरीज सामने आ रहे हैं उस जिले को रेड जोन में रखा गया है वहीं जिन जिलों में बीते 21 दिन में एक भी नया मामला सामने नहीं आया है, उसे ग्रीन जोन में रखा गया है। केंद्र सरकार ने रेड जोन से ग्रीन जोन में जिलों को रखने के मानक बदले हैं। अब 28 दिन की बजाय 21 दिन तक कोरोना का नया केस नहीं आने पर किसी जिले को रेड जोन से ग्रीन जोन में रखा जा सकेगा। मौजूदा नियमों के तहत 14 दिनों तक नया केस नहीं आने पर जिले को रेड से ऑरेंज और फिर अगले 14 दिनों तक केस नहीं आने पर ग्रीन जोन जिलों में रखा जाता है। पश्चिम बंगाल व केंद्र की लड़ाई पुरानी चली आ रही है। इससे पहले केंद्रीय टीम भेजने पर भी विवाद हुआ है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और सबको मिलकर कोरोना से लड़ना चाहिए न कि आपस में।

रियायत मिली तो शराब की दुकानों पर लंबी लाइनें

दिल्ली सहित देशभर में 25 मार्च को शुरू हुए लॉकडाउन के 41वें दिन और लॉकडाउन 3.0 का सोमवार के पहले दिन का रेड जोन वाली दिल्ली में भी छूट मिली तो सुबह से ही सड़क पर वाहन बढ़ने लगे। गाजियाबाद और नोएडा बॉर्डर पर लंबी कतार में वाहन खड़े दिखे तो गुड़गांव व फरीदाबाद बॉर्डर पर भी सख्ती कायम रही। पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू नहीं होने की वजह से सरकारी व प्राइवेट दफ्तर खुलने के बावजूद उसमें उपस्थिति कम रही। इन सबके बीच सबसे ज्यादा भीड़ और लंबी कतारें सुबह से ही शराब की दुकानों पर देखने को मिली। दुकानें 9 बजे से 930 बजे के बीच खुलनी थी लेकिन कहीं 6 बजे से तो कहीं 7 बजे से लाइनें लग गई थीं। दुकान खुली तो पहले पूरी पेटी मिली, थोड़ी देर बाद 4 बोतल हुईं और फिर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती देख और बेकाबू भीड़ की वजह से 11-1130 बजे सभी दुकानें बंद करनी पड़ीं। जगतपुरी थाना क्षेत्र के चंद्र नगर की दुकान पर एक किलोमीटर से लंबी कतार थी तो लक्ष्मी नगर में एक-डेढ़ किलोमीटर की लाइन थी। कश्मीरी गेट, लक्ष्मी नगर, चंद्र नगर में पुलिस को हटाने के लिए लाठीचार्ज भी करना पड़ा। दिल्ली सरकार ने शराब की दुकान खोलने की जिम्मेदारी अपने चार कार्पोरेशन को सौंपी। 150 दुकान की सूची भी बनाई गई लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और दुकान पर 5 खरीददार से ज्यादा एक साथ एकत्रित नहीं होने की शर्त की वजह से दिल्ली स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन ने दुकान खोलने से हाथ खड़े कर दिए। शराब के ठेकों के पास मौजूद पुलिस कर्मी लगातार उन्हें शारीरिक दूरी बने नियमों का भी पालन करने के लिए कहते रहे। दिल्ली में ठेके खुलने पर कई जगहों पर सरकार का विरोध हुआ तो कई जगहों पर महिलाओं ने शराब की दुकानों को बंद कराने के लिए मोर्चा खोला। यह बिल्कुल अच्छा नहीं हुआ कि शराब की दुकानें खुलते ही उनके आगे जमा हुई भारी भीड़ ने शारीरिक दूरी बनाए रखने की ऐसी अपेक्षा की कि लॉकडाउन की तपस्या ही भंग हो गई। राज्य सरकारों और उनके स्थानीय प्रशासन को इसका आभास होना चाहिए था कि शराब बिक्री की अनुमति मिलने पर उनकी दुकानों पर अफरातफरी मच सकती है। ज्यादातर स्थानों पर ऐसा ही हुआ और इसकी एक बड़ी वजह यही रही कि लोगों ने जल्द शराब खरीदने की ललक में संयम और अनुशासन को ठेंगा दिखा दिया। मंत्रालय का कहना है कि राजस्व की वजह से शराब की दुकानें खोलने के लिए राज्य सरकारों का भारी दबाव था। 2021-21 में देश के 16 बड़े राज्यों का शराब से आने वाला कुल आबकारी राजस्व करीब दो लाख करोड़ रुपए रखा गया है। कई राज्यों में कुछ राजस्व का 15-20 प्रतिशत इसी मद से आता है। लिहाजा कहा जा रहा है कि अगर शासन का पहिया चलाना है तो यह राजस्व जरूरी है। हालांकि देश में दो राज्य ऐसे भी हैं बिहार और गुजरात, जहां शराब पाबंद है और उन्हें इस मद से एक भी पैसा नहीं आता। फिर भी वह काम चला रहे हैं। अगर शराब खरीदने वाले संयम से काम लें, ढंग से सोशल डिस्टेंसिंग बरकरार रखें तो शराब की दुकान खोलने में कोई हानि भी नहीं है। जहां एक ओर आम लोगों के चलने-फिरने व अन्य शराब की दुकानों पर एक किलोमीटर लंबी लाइनें देखकर कई राज्यों के मुख्यमंत्री खुश नजर आ रहे हैं।

Wednesday, 6 May 2020

कोरोना वायरस पीड़ितों के लिए इरडा का महत्वपूर्ण फैसला

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) ने सभी हैल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को निर्देश दिया है कि कोरोना वायरस महामारी में कैशलेस उपचार और अस्पताल से फाइनल डिस्चार्ज की रिक्वेस्ट पर दो घंटे के अंदर निर्णय लेना होगा। इरडा ने जनरल और हैल्थ इंश्योरेंस के तत्काल सैटलमेंट के लिए नए मानदंड जारी किए हैं। ताकि बीमाधारी कोरोना वायरस पीड़ित मरीजों को कोई परेशानी न हो। इंश्योरेंस रेगुलेटर ने कहा कि हॉस्पिटल से फाइनल बिल या डिस्चार्ज की सूचना मिलने पर बीमाकर्ताओं को दो घंटे के अंदर अपने फैसले की सूचना मरीज और हॉस्पिटल को देनी होगी। साथ ही बीमाकर्ताओं को यह भी कहा कि अपने थर्ड पार्टी एडमिन स्टेटस के लिए जरूरी दिशानिर्देश जारी करें। मार्च में ही इरडा ने बीमाकर्ताओं को कोरोना मरीजों के दावे तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए थे। रेगुलेटर ने कहा कि बीमाकर्ता क्लेम को सैटल करने के लिए सिस्टम और प्रक्रिया स्थापित करें, जो 24 घंटे एक्टिव रहे। वित्त मंत्रालय ने देशभर में लागू लॉकडाउन को देखते हुए हाल में हैल्थ और मोटर इंश्योरेंस की रिन्यूअल की तारीख को बढ़ाकर 15 मई कर दिया था ताकि बीमा पॉलिसी लेने वालों को असुविधा न हो। इसका मतलब है कि अगर आपके मोटर या हैल्थ इंश्योरेंस की रिन्यूअल की तारीख 25 मार्च से तीन मई के बीच थी तो वह पॉलिसी अब 15 मई तक वैध रहेगी। अवधि और  बढ़ेगी या नहीं यह लॉकडाउन की मियाद पर निर्भर होगा। इरडा ने 4 मार्च 2020 को जारी अपने सर्कुलर में कहा है, हॉस्पिटलाइजेशन कवर देने वाली सभी मौजूद क्षतिपूर्ति आधारित हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों को कोरोना मामलों के लिए भी हॉस्पिटलाइजेशन कवर देना चाहिए। कोरोना वायरस संबंधी बीमारी के इलाज के लिए स्वीकार्य मेडिकल खर्च का निपटान, मौजूदा पॉलिसी समझौते के नियमों और शर्तों के अनुसार किया जाना चाहिए जिसमें क्वारंटाइन पीरियड भी शामिल है। क्लेम्स कमेटी द्वारा एक कॉप्रहेंसिव रिव्यू किए बिना दावे को रिजेक्ट नहीं किया जा सकता है। इरडा के फैसले का हम स्वागत करते हैं पर देखना यह है कि यह इंश्योरेंस कंपनियां इन निर्देशों का कितना पालन करती है? क्योंकि इंश्योरेंस कंपनियों की आदत-सी बन गई है कि किसी न किसी तरीके से क्लेम सैटल करने से बचा जा सके।

-अनिल नरेन्द्र