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Tuesday, 25 August 2026

महंगी चीनी : क्या वजह इथेनॉल तो नहीं?



भारत में चीनी के दाम पिछले कुछ महीनों से तेजी से बढ़ रहे हैं। राइटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार केवल इसी महीने भारत में चीनी की कीमतों में 20 फीसदी इजाफा हुआ है। भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार 20 अगस्त को भारत की खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 55.7 रुपए प्रति किलोग्राम थी। इसी रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने पहले चीनी की कीमत 48.18 रुपए प्रति किलोग्राम थी। 20 अगस्त 2025 को इसकी कीमत 46.3 रुपए प्रति किलोग्राम थी। बाजार के जानकारों का कहना है कि चीनी के दाम इससे पहले कभी इतने ऊंचे नहीं गए। सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि क्या पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल से चीनी महंगी हुई है? कच्चे तेल की खपत के मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। लेकिन भारत में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है। इस आयात को कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के लिए केन्द्र सरकार ने 2018 में पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की मात्रा को 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी करने का फैसला किया था। यह लक्ष्य 2030 में हासिल किया जाना था लेकिन सरकार ने इसे जुलाई 2025 में ही हासिल कर लिया। भारत में चीनी उद्योग सरकारी नियंत्रण के तहत आता है। चीनी मिलों को किसानों से खरीदे गए गन्ने के लिए कितना एमआरपी देना होगा यह केन्द्र सरकार तय करती है। सरकार यह भी तय करती है कि कौन सी चीनी मिल हर महीने कितनी चीनी बेच सकती है और चीनी का निर्यात किया जा सकता है या नहीं। देश में बड़े पैमाने पर इथेनॉल खरीदने वाला ग्राहक भी सरकार ही है और इस तरह इथेनॉल की कीमत भी अप्रत्यक्ष रूप से सरकार ही तय करती है। राइटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 के चीनी वर्ष में 30 लाख टन चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह देश में चीनी के कुल उत्पादन का करीब 10 फीसदी है। गन्ने के रस के अलावा चीनी बनाने के दौरान तैयार होने वाले सिरप, ए-हेवी मोलासिस, बी-हेवी मोलासिस और सी-हेवी मोलासिस से भी इथेनॉल बनाया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में उत्पादित कुल इथेनॉल का करीब एक तिहाई हिस्सा गन्ने से तैयार किया गया था। दूसरी तरफ सरकार ने शुक्रवार को कहा कि चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के कार्यक्रम को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। सरकार ने कहा कि देश में उत्पादन अनुमान से कम रहने, त्यौहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने और इंडस्ट्री के एक हिस्से की ओर से जमाखोरी के चलते चीनी के दाम उछले हैं। हालांकि मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है। मंत्रालय ने इथेनॉल ब्लैडिंग प्रोग्राम के चलते दाम बढ़ने की बात खारिज की। कहा, इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के उपयोग को कीमतों में हालिया बढोत्तरी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उधर सरकार ने चीनी की कीमतों की वृद्धि को देखते हुए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन गैर-परिष्कृत चीनी के ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) आयात को मंजूरी दे दी है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि त्यौहारी सीजन में चीनी के बढ़ते दामों की कड़वाहट और न बढ़े। एक दिन पहले, सरकार ने 10 लाख टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए चीनी की स्टॉक सीमा 15 दिन तय कर दी थी।

- अनिल नरेन्द्र

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