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Tuesday, 1 May 2012

India’s missile lady alias Agniputri Tessy

--Anil Narendra
Tessy Thomas is known as the Missile Lady of India. Super power missile Agni-V has been successfully test-fired on 19th April. India not only created a history by developing an inter-continental missile with a range of 5,000 kms, but has provided the world a new insight into India's achievements. Credit for this achievement goes to Tessy Thomas, the Agni Project Director of The Defence Research & Development Organisation (DRDO). 48-year old Tessy wants to develop a missile an incomparable missile in the world. After successful development of Agni-V missile, Tessy's team is now embarking upon developing a missile that could provide success report of the war-head launched through it, whose success could be tracked at the Base Lab. Tessy was born at Allapuzha district of Kerala in 1964. His father was an accountant in a firm. Tessy had visualized developing a rocket in the childhood itself. A Rocket Centre of the DRDO close to Allapuzha was her inspiration and her fascination with rockets and missile began there. Test launches of rockets were carried out from this Centre. She joined the Agni team in 1968. After completing her engineering education from the Thrissur College of Engineering, Tessy came to DRDO. Later, she did her MTech in 'Guided Missile Technology' from the Deence Institute of Advanced Technology, Pune. Tessy remembers the first test flight of Agni-3, which ended in failure. Dr APJ Abdul Kalam was the Chief of Missile Project then. Tessy says that Dr Kalam was a role model for all in the field of missiles. She considers Dr Kalam as her Guru. She says that today, people may call her missile lady or missile woman, but the real hero of Missile Technology is Dr Kalam. Tessy considers her 75 year old mother as her biggest inspirational source. Her mother had named her after the nobel laureate Mother Teresa. Tessy says that she has been working for the welfare of the country like Mother Teresa, who had dedicated her life for the betterment of the humanity. When asked as to how she can relate her work to peace for humanity, when the missiles, she is developing are to be used for destruction, she replied that when a country becomes strong and powerful, then none can dare threaten it.
In such circumstances, deterrent missiles like Agni-V act as 'ambassador of peace'. It may be mentioned that the range of Agni-V covers whole of China. With this achievement in the strategic field, India has gained new power. Now it stands equal to USA, France, Russia and China. After this successful test-launch, China's tone has also undergone a change and now, it has started referring to India as a friendly neighbour.

Saturday, 28 April 2012

भारत की मिसाइल लेडी उर्प अग्नि पुत्री टेसी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 28 April 2012
अनिल नरेन्द्र
टेसी थामस अब भारत की मिसाइल लेडी के नाम से जानी जाएगी। अग्नि-5 सुपर पॉवर मिसाइल का सफल परीक्षण
19 अप्रैल को हो चुका है। 5000 किलोमीटर तक मार करने वाली अंतर्महाद्वीपीय मिसाइल तैयार करके भारत ने एक नया इतिहास तो रचा ही साथ-साथ दुनिया को भारत को एक नए चश्मे से देखने का काम भी किया है। इस कामयाबी का बड़ा श्रेय डिफेंस रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) की अग्नि परियोजना की निदेशक टेसी थामस को जाता है। 48 वर्षीय टेसी का सपना है कि एक ऐसी अग्नि मिसाइल तैयार की जाए जो अब तक दुनिया में न बनी हो। टेसी की टीम अग्नि-5 की सफलता के बाद एक ऐसी मिसाइल बनाने के काम में जुटने वाली है, जिससे निकला वार हैड निशाने पर पहुंचकर कामयाबी की रिपोर्ट भी बेस लैब में देखी जा सके। टेसी का जन्म 1964 में केरल के अलपुझा जिले में हुआ था। उनके पिता एक फर्म में एकाउंटेंट थे। बचपन से ही टेसी ने रॉकेट बनाने का सपना देखना शुरू कर दिया था। इसकी वजह थी कि अलपुझा के पास ही डीआरडीओ का एक रॉकेट सेंटर है। जहां से प्रयोग के तौर पर रॉकेट लांच होते रहते हैं। वे 1988 में अग्नि टीम में शामिल हुईं। त्रिशूर इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद 1985 में टेसी डीआरडीओ से जुड़ गई थीं। बाद में उन्होंने पुणे के डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस टेक्नोलॉजी से `गाइडिड मिसाइल' तकनीक में एम.टेक की डिग्री ली। टेसी याद करती हैं कि अग्नि-3 का पहला प्रयोग असफल रहा था। इस दौर में मिसाइल परियोजना के प्रमुख डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम थे। टेसी कहती हैं कि मिसाइल क्षेत्र में डॉ. कलाम ही सबके रोल मॉडल होते थे। वे तो डॉ. कलाम को अपना गुरु मानती हैं। कहती हैं कि आज भले लोग उन्हें अग्नि पुत्री या मिसाइल वूमैन कहें लेकिन मिसाइल तकनीक के वास्तव हीरो तो डॉ. कलाम ही हैं। टेसी अपनी 75 वर्षीया मां को अपना सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत मानती हैं। उनका नाम उनकी मां ने नोबल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा के नाम से प्रेरित होकर रखा था। टेसी कहती भी हैं कि जिस तरह से मदर टेरेसा ने पूरी मानवता के लिए काम किया था, ठीक उसी तरह से वे भी देश की भलाई के काम के लिए जुटी हुई हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि मिसाइलों का प्रयोग तो विध्वंस और विनाश के लिए ही होगा, तो ऐसे में आप अपने काम को मानवता की शांति से कैसे जोड़ पाती हैं? इस पर उनका जवाब था कि जब कोई देश ताकतवर बन जाता है तो दूसरा देश उसके खिलाफ युद्ध करना तो दूर, उसे आंख तक दिखाने की हिम्मत नहीं करता। ऐसे में परोक्ष रूप से अग्नि-5 जैसी मिसाइलें `शांतिदूत' की भूमिका निभाती हैं। उल्लेखनीय है कि अग्नि-5 की रेंज में पूरा चीन आ जाता है। इस तरह से सामरिक क्षेत्र में इस सफलता के बाद से भारत को एक नई ताकत मिल गई है। अब वह मिसाइल क्षेत्र में अमेरिका, फ्रांस, रूस और चीन की बराबरी पर खड़ा हो गया है। इस सफल प्रयोग के बाद चीन की भाषा भी बदल गई है और अब वह भारत को अपना पड़ोसी मित्र देश कहने लगा है।

Saturday, 21 April 2012

अग्नि-5 का सफल परीक्षण ः जय हिंद, जय भारत

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 21 April 2012
अनिल नरेन्द्र
सैन्य शक्ति के विकास की दिशा में भारत ने एक और गौरवशाली इतिहास रच डाला। भारत ने बृहस्पतिवार को परमाणु क्षमता से लैस पांच हजार किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को भेदने में सक्षम इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) अग्नि-5 के कामयाब परीक्षण के साथ ही जहां मिसाइल के क्षेत्र में बादशाहत हासिल करके पूरी दुनिया में भारत का डंका पीट दिया वहीं इतिहास भी रच दिया। ओडिशा से तट के समीप स्थित इनरव्हील द्वीप से सुबह आठ बजकर सात मिनट पर प्रक्षेपित की गई इस मिसाइल ने निर्धारित प्रक्षेपण मार्ग (ट्रेजैक्ट्री पाथ) का शत-प्रतिशत अनुसरण करते हुए जब 20 मिनट बाद सुदूर लक्ष्य को भेदा, तो रक्षा वैज्ञानिक खुशी से उछल पड़े। इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के साथ उन चुनिन्दा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास आईसीबीएम की क्षमता है। इस मिसाइल के सफल प्रक्षेपण से भारत ने पेइचिंग सहित चीन, पूर्वी यूरोप, पूर्वी अफ्रीका और आस्ट्रेलियाई तट के लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता हासिल कर ली है। अग्नि-5 का सफल परीक्षण एकीकृत मिसाइल विकास कार्यक्रम में भारत की लम्बी छलांग को प्रदर्शित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल विशेषताओं वाली है। फिलहाल केवल अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के पास आईसीबीएम को प्रक्षेपित करने की क्षमता है। भारत ने अपनी सबसे ताकतवर और पहली आईसीबीएम का कामयाब टेस्ट क्या किया, पड़ोसी चीन का मीडिया बौखला गया। एक चीनी अखबार ने अग्नि-5 के टेस्ट के बाद पहली प्रतिक्रिया में लिखा है कि भारत को इससे कुछ भी हासिल नहीं होगा और न्यूक्लियर हथियारों के मामले में भारत चीन के आगे कहीं नहीं ठहरता है। चीन की बौखलाहट हमें समझ आती है। अग्नि-5 मिसाइल की कई खूबियां बेमिसाल हैं। एटमी वारहैड से लैस यह मिसाइल किसी भी युद्ध की बाजी पलटने की ताकत रखती है। दो और परीक्षणों के बाद इसे 2014-15 तक सेना के हवाले कर दिया जाएगा। इस मिसाइल की रेंज को जरूरत के अनुसार बढ़ाया जा सकता है। भारतीय मिसाइल बेड़े में यह पहला प्रक्षेपास्त्र है जो भारत को जरूरत पड़ने पर चीन के सभी हिस्सों तक मार करने की क्षमता रखता है। हालांकि अग्नि-5 अभी चीन की डोंगफेंग-31 का छोटा जवाब ही है क्योंकि यह चीनी मिसाइल दुनिया के किसी भी हिस्से में प्रहार कर सकती है पर इससे भारत कम से कम जवाबी कार्रवाई तो कर सकता है। अग्नि-5 भारत की सबसे तेजी से विकसित मिसाइल है। इसे महज तीन साल में तैयार किया गया है। इसे अचूक बनाने के लिए भारत ने माइक्रो नेविगेशन सिस्टम, कार्बन कम्पोजिट मैटेरियल से लेकर मिशन कम्प्यूटर व सॉफ्टवेयर तक ज्यादातर चीजें स्वदेशी तकनीक से विकसित की हैं। संयोग से 1975 में 19 अप्रैल को ही भारत ने आर्यभट्ट उपग्रह को लांच किया था और अंतरिक्ष में अपनी सफलता का सितारा रखा था। इस मिसाइल के सफल परीक्षण ने भारत के दुश्मनों पर बल डाल दिए हैं। अब हम पर कोई पड़ोसी हमला करने से पहले दस बार सोचेगा। तमाम वैज्ञानिकों को इस शानदार सफलता पर बधाई।
Agni Missile, Anil Narendra, Daily Pratap, Vir Arjun