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Saturday, 4 January 2014

मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव में नोंकझोक

जब से लालू प्रसाद यादव जेल से रिहा हुए हैं तरह-तरह के अजीबोगरीब बयान दे रहे हैं। आजकल वह कांग्रेस पार्टी और उसके उपाध्यक्ष से इतना प्रभावित हैं, कहते हैं कि राहुल गांधी भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और आप पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल से लाख गुना बेहतर हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी सेक्यूलर पार्टियां सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ एकजुट होंगी। कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है। हम सभी एकजुट होकर इस लड़ाई को लड़ेंगे। राजद सुप्रीमो ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता तक पहुंचने नहीं देंगे। लालू जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी भेंट की और पिछले चुनाव में गठबंधन न करने पर खेद जताया। सोनिया से मिलने के बाद लालू ने कहा कि वह 2009 की गलती नहीं दोहराएंगे। आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, लोजपा के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरेंगे। उल्लेखनीय है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में राजद और लोजपा ने गठबंधन कर कांग्रेस को सिर्प तीन सीट देने का प्रस्ताव किया था। इसके चलते दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन टूट गया। लालू जी की बात समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को नहीं भाई। वह लालू से खासे नाराज दिखते हैं। पिछले दिनों लालू ने मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ित शिविरों का दौरा कर लिया था। इस दौरान अखिलेश सरकार के कामकाज पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की थीं। इस पर मुलायम ने उन्हें जमकर फटकार लगाई है। दरअसल मुलायम ने लखनऊ में कार्यकर्ताओं के बीच कह दिया था कि कांग्रेस के इशारे पर ही लालू यादव ने मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों के शिविरों का दौरा किया है। वह जेल से छूट कर उत्तर प्रदेश में सपा के खिलाफ राजनीति करने की कोशिश में हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि वह यह सब कांग्रेस की चापलूसी के लिए कर रहे हैं। नाराजगी में उन्होंने यहां तक कह डाला कि लालू तो अब कांग्रेस के तलबे चाटने पर उतारू हो गए हैं। ऐसे में  लालू जैसों की राजनीति से सपा कार्यकर्ताओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बिहार में फ्लॉप होने के बाद वह यूपी में राजनीतिक जोकर की तरह हरकतें कर रहे हैं। मुलायम सिंह यादव के तीखे कटाक्षों से आहत लालू यादव ने भी नाराजगी के तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मीडिया से उन्होंने कहा है कि मुलायम उनके बड़े भाई जैसे हैं। ऐसे में वह उनका कुछ लिहाज कर रहे हैं, इसलिए वो ठेठ जवाब नहीं देना चाहते। लालू ने अपने खास अंदाज में कह दिया कि मीडिया ने यह दिखाया है कि मुलायम सिंह दो-तीन रातों से सो नहीं पाए हैं, क्योंकि वे अपने गांव सैफई में बॉलीवुड की नंग-धड़ंग लड़कियों का नाच देखने में लगे रहे हैं तो हो सकता है कि वह नींद की गफलत में इस तरह की बातें कर रहे हों। लालू ने मुलायम को चेतावनी के अंदाज में कहा कि वे तलबे चाटने जैसी बातें न करें वरना उनकी जुबान भी खुल जाएगी तो उन्हें जवाब नहीं देते बनेगा। दोनों यादवों के दिग्गजों की यह जुबानी लड़ाई दिलचस्प बन गई है। लालू आजकल पूरी तरह कांग्रेसमय हो गए हैं। कांग्रेस के गुणगान गाते थम नहीं रहे। इस नए कांग्रेस प्रेम का क्या कारण है हमारी समझ में तो नहीं आया। जेल जाने के  बाद लालू की बिहार में सियासी स्थिति पहले से बेहतर हुई है जबकि कांग्रेस वहीं की वहीं है। आज बिहार में कांग्रेस को लालू की ज्यादा जरूरत है न कि लालू को कांग्रेस की। फिर भी पता नहीं लालू जैसे दिग्गज यूं चमचों की तरह कांग्रेस का गुणगान कर रहे हैं?

-अनिल नरेन्द्र

बिजली कम्पनियों का सीएजी ऑडिट कराने का सराहनीय फैसला

यह खुशी की बात है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने चुनाव के दौरान किया गया एक और वादा पूरा कर दिया है। दिल्ली की निजी बिजली वितरण कम्पनियों के खातों की जांच कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) से कराई जाएगी। राज्य सरकार की सिफारिश पर उपराज्यपाल नजीब जंग ने बुधवार शाम बिजली कम्पनियों को आदेश जारी कर दिए हैं। जिन कम्पनियों की जांच कैग करेगा वह हैंöबीएसईएस यमुना पॉवर लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पॉवर लिमिटेड और टाटा पॉवर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड। इसमें से बीएसईएस यमुना पॉवर लिमिटेड पूर्वी दिल्ली में बिजली वितरण का काम देखती है। इसी तरह बीएसईएस राजधानी पॉवर लिमिटेड दक्षिण दिल्ली तथा टाटा पॉवर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड उत्तरी दिल्ली क्षेत्र में बिजली वितरण करती है। बीएसईएस की दोनों कम्पनियां रिलायंस ग्रुप की हैं। यह सच है कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान यह वादा किया था कि वह बिजली बिलों को आधा कर देगी। वह वादा इस धारणा पर आधारित था कि बिजली कम्पनियां गड़बड़ी करती हैं, बिजली के मीटर काफी तेज चलते हैं और बिलों में हेराफेरी होती है। मुमकिन है कि इसमें सच्चाई भी हो। इसकी जांच का जो फैसला अरविंद केजरीवाल ने किया है वह स्वागत योग्य है। इसी तरह बिजली के मीटरों की जांच भी जरूरी है और ट्रांसमिशन में होने वाले नुकसान की भी। यह ऐसा काम है जो पिछली सरकार को भी करना चाहिए था। लेकिन ऐसी किसी जांच के नतीजे आने से पहले सिर्प चुनावी वादा निभाने के नाम पर बिजली की दरों को आधा करने का फैसला किसी भी तरह से तार्पिक नहीं कहा जा सकता। खासकर इसलिए भी कि अभी हमें यह नहीं मालूम कि यह सब्सिडी दी जा रही है, उसका पैसा आएगा कहां से? विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने बिजली दरों के आधे करने की बजाय सब्सिडी 50 फीसद तक बढ़ाकर 400 यूनिट के नीचे की खपत वालों को 31 मार्च तक फौरी राहत दी है। दिल्ली से संबंधित समस्याएं दूर करने का वादा पूरा करना अभी जैसे का तैसा है। बिजली दरें आधी करने से सरकार पर  सब्सिडी का 200 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। वितरण कम्पनियों पर पड़ने वाले बोझ को पूरा करने के लिए टाटा पॉवर को 61 करोड़ रुपए और ट्रांसको जैन को जैसी सरकारी कम्पनियों को 139 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना पॉवर को कुछ नहीं मिलेगा। क्योंकि उन पर सरकारी कम्पनियों के 4500 करोड़ रुपए पहले से ही बकाया हैं। बिजली कम्पनियों को सब्सिडी देना एक हाथ से लो दूसरे से देने जैसा है। इनसे रेट घटवाने की बजाय उन्हें ही सब्सिडी दी जा रही है। सब्सिडी का यह बोझ करों के रूप में दिल्ली वालों की जेब से ही निकला पैसा होगा। दिल्ली वालों का असली गुस्सा तेज भागते मीटरों और अनाप-शनाप चार्जेस को लेकर था। किसी एक माह में घरेलू समारोह के कारण बढ़ी खपत के आधार पर बढ़ाया गया लोड हमेशा के लिए बरकरार रखना सबसे बड़ी समस्या है। यह समस्याएं कब दूर होंगी यह कोई नहीं जानता। बहरहाल बिजली कम्पनियों के खातों की जांच सीएजी से करवाने के लिए आरडब्ल्यूए बेहद खुश है। राजीव काकरिया आरडब्ल्यूए ग्रेटर कैलाश का कहना है कि सीएजी ऑडिट का स्वागत है, लेकिन इस बात की सीएजी को जांच करनी चाहिए कि टैक्स अथारिटी में डिस्कॉम्स ने क्या लेखाजोखा दिया है। क्योंकि अथारिटी में डिस्कॉम्स की ओर से लाभ दिखाया गया है और डीईआरसी में घाटा बताया है। सौरभ गांधी जो यूनाइटेड रेजिडेंट ऑफ दिल्ली के महासचिव हैं ने कहा कि सीएजी ऑडिट का स्वागत है। यह लड़ाई शुरू से आरडब्ल्यूए की थी जिसे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूरा किया है। सीएजी सूत्रों के मुताबिक जैसे ही ऑडिट के लिए औपचारिक पत्र मिलेगा, इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया जाएगा। तीनों बिजली कम्पनियों से जुलाई 2002 से लेकर अब तक के खातों से संबंधित दस्तावेज और आय-व्यय से जुड़े कागजात मांगे जाएंगे। दस्तावेजों के मिलने के बाद उनके खातों की जांच शुरू होगी। अभी तक इन बिजली कम्पनियों को लग रहा था कि निजी कम्पनी होने के नाते उनका सीएजी ऑडिट नहीं हो सकता है। लेकिन सरकार के सख्ती के सामने डिस्कॉम्स के दावे धरे रह गए। कई वर्षों से दिल्ली के आम बिजली उपभोक्ताओं के साथ-साथ डीईआरसी भी परोक्ष या अपरोक्ष रूप से डिस्कॉम्स के खातों की जांच की मांग सीएजी से कराने पर सहमत थी। लेकिन पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति या अन्य कारण इसके आड़े आते रहे। मसला केवल बिजली कम्पनियों के ऑडिट का नहीं बेशक जांच के सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद है पर असल जरूरत विद्युत क्षेत्र में बड़े सुधार की है, बिजली उत्पादन कैसे बढ़े, ट्रांसमिशन लॉस कैसे कम हो, चोरी को कैसे रोका जाए इत्यादि-इत्यादि हैं जिन पर गौर करना अत्यंत आवश्यक है।

Friday, 3 January 2014

आतंकवाद की चपेट में रूस ः 24 घंटे में दो धमाके

रूस में लगातार दो बम धमाकों ने चौंका दिया है। दक्षिण रूस के वोल्गोग्राद शहर में लगातार दूसरे दिन हुए आत्मघाती बम हमले में कम से कम 15 लोग मारे गए, 23 अन्य घायल हो गए। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि शहर के जेरिंस्की जिले में व्यस्त बाजार के पास एक ट्रॉली बस में विस्फोट हुआ। मारे गए 15 लोगों में एक साल का एक बच्चा भी है। विस्फोट जिस समय हुआ उस समय बाजार में बहुत भीड़ थी जिस कारण ज्यादा संख्या में  लोग हताहत हुए। इससे एक दिन पहले वोल्गोग्राद में एक रेलवे स्टेशन पर हुए आत्मघाती बम हमले में 18 लोग मारे गए थे और बीसियों घायल हो गए थे जबकि 21 अक्तूबर को हुए विस्फोट में सात लोग मारे गए थे। वोल्गोग्राद शहर सोची के 690 किलोमीटर उत्तर दक्षिण में स्थित है जहां आगामी फरवरी 2004 से शीतकालीन ओलम्पिक खेल होने वाले हैं। यह खेल रूस की सरकार के लिए नाक का सवाल बन गए हैं। वहीं दक्षिण रूस के कुछ हिस्सों को एक स्वतंत्र इस्लामिक देश के रूप में अलग करने की वकालत करने वाले आतंकवादी इन खेलों को न होने देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। गत जुलाई में उन्होंने एक वेबसाइट पर खेलों को रोकने के लिए पूरी ताकत लगाने की धमकी भी दी थी। अभी तक किसी संगठन ने इन विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं ली है। रेलवे स्टेशन पर हुए हमले के पीछे `ब्लैक विंडो' के नाम से कुख्यात साइबेरिया की मुस्लिम महिला ओक्साना अस्लानोवा का हाथ होने का संदेह जताया जा रहा है। द साइबेरियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस अधिकारियों को हमले की प्रारम्भिक जांच में 26 साल की ओक्साना पर ही संदेह है। अभी डीएनए जांच से इसका पता लगाया जा रहा है। वोल्वोग्राद का इतिहास भी दिलचस्प है। जब सोवियत संघ होता था तो इसे स्टालिनग्राद कहा जाता था। द्वितीय विश्व युद्ध की एक प्रमुख लड़ाई यहां लड़ी गई थी। हिटलर ने ढाई वर्ष तक स्टालिनग्राद को घेरे रखा था और स्टालिन ने यहां हिटलर की फौजों को हराया। द्वितीय महायुद्ध में यह स्टालिनग्राद की लड़ाई एक निर्णायक मोड़ साबित हुई और फिर हिटलर हारता ही चला गया। देश के दक्षिणी हिस्से को एक स्वतंत्र इस्लामिक देश के रूप में अलग करने की वकालत करने वाले आतंकी ओलम्पिक खेल नहीं होने देना चाहते। यह रूस के राष्ट्रपति  ब्लादिमीर पुतिन के लिए अब प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। सुरक्षा चाक-चौबंद करने के आदेश देकर उन्होंने वैश्विक जगत को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि रूस हजारों आगंतुकों की सुरक्षा करने में हर तरह से सक्षम है। ताजा समाचार के अनुसार वोल्गोग्राद में हुए इन दो आत्मघाती हमलों में घायल हुए दो लोगों के दम तोड़ने के बाद इन हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। मंत्रालय ने आपात स्थिति की घोषणा की है। इन दो आत्मघाती हमलों ने पूरे देश में भय का माहौल बना दिया है। इसी के साथ फरवरी में सोची में होने वाले शीतकालीन ओलम्पिक्स की सुरक्षा को लेकर भी आशंकाएं जताई जा रही हैं। वोल्गोग्राद  शहर सोची से 690 किलोमीटर दूर है। राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की पूरी कोशिश सोची खेलों को सफल बनाने के साथ-साथ पूरी दुनिया को यह दिखाना  है कि रूस एक आधुनिक और सफल राष्ट्र भी है। लेकिन इन विस्फोटों ने दुनिया के साथ-साथ रूसियों के मन में भी सुरक्षा को लेकर आशंका पैदा कर दी है। हम उम्मीद करते हैं कि आतंकवादियों का राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन समय रहते सफाया कर देंगे। वोल्गोग्राद का चयन हमले के लिए इस कारण किया गया क्योंकि यह महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र और द्वितीय विश्व युद्ध में रूस की विजय का प्रतीक है।

-अनिल नरेन्द्र

वीरभद्र मुद्दे पर बुरी फंसी कांग्रेस ः हटाती है तो मरती है, नहीं हटाती तो मरती है

भाजपा नेता प्रतिपक्ष राज्यसभा अरुण जेटली ने न केवल हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री की फजीहत ही बढ़ा दी है बल्कि कांग्रेस आला कमान के लिए एक नई सिरदर्दी पैदा कर दी है। श्री जेटली ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था जिसकी एक प्रति सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा को भी भेजी गई। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग को अपनी सम्पत्ति की गलत जानकारी देने, साई कोठी पन बिजली परियोजना में धांधली कर करोड़ों रुपए बतौर कमीशन खाने तथा मुंबई की एक इस्पात कम्पनी को पैसों के बदले रियायत देने संबंधी कई घोटालों के खुलासे के बाद वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा बुरी तरह घिर गए हैं। वीरभद्र पर कार्रवाई की मांग को लेकर भाजयुमो ने मंगलवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के घर के सामने प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन को उग्र होता देख दिल्ली पुलिस ने पानी की बौछार कर भीड़ को तितर-बितर किया। भाजयुमो अध्यक्ष अनुराग ठाकुर व प्रदेश भाजयुमो अध्यक्ष गौरव खारी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी और वीरभद्र सिंह का प्रदर्शन स्थल पर पुतला भी पूंका। इस मौके पर अनुराग ठाकुर ने कहा कि भ्रष्टाचार मुद्दे पर कांग्रेस दोहरी बात करती है। एक तरफ राहुल गांधी लोकपाल विधेयक को पारित कराने का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ हिमाचल के मुख्यमंत्री को बचाने में जुटे हैं। मामले की गम्भीरता को देखते हुए कांग्रेस आला कमान ने वीरभद्र से जब इस मामले में सफाई मांगी तो उनकी सांसद पत्नी ने उनकी तरफ से सात पन्नों का एक सफाई पत्र पार्टी मुख्यालय से जारी कर दिया। इस सफाई पत्र से भी शीर्ष नेतृत्व संतुष्ट नहीं है, लिहाजा उन्होंने वीरभद्र सिंह को दिल्ली तलब किया। राहुल गांधी के घर पर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस हाई कमान काफी दबाव में दिखा, क्योंकि इससे पहले आदर्श घोटाले की जांच रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंकने वाले मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को राहुल कड़ी फटकार लगा चुके हैं। ऐसे में वीरभद्र सिंह का बचाव इतने बड़े घोटाले पर राहुल की नई इमेज को खराब कर सकता है। वीरभद्र सिंह दिल्ली आए पर बुधवार को न तो सोनिया गांधी उनसे मिलीं और न ही राहुल गांधी। उन्हें अम्बिका सोनी से मिलकर अपनी सफाई पेश करनी पड़ी। उन्होंने सभी आरोपों को बकवास बताया और मामले से संबंधित कुछ दस्तावेज दिखाए। उन्होंने विपक्षी  दल को आड़े हाथों  लेते हुए उनके एवं उनके परिवार के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण दुप्रचार का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि वे राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। कांग्रेस आला कमान की अब मुश्किल यह है कि वह एक सीमा तक वीरभद्र सिंह का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। क्योंकि हिमाचल में कांग्रेस का अर्थ है वीरभद्र सिंह, इसलिए उन्हें पद से हटाने का मतलब पार्टी में विभाजन तथा एक पहाड़ी राज्य में अपनी सरकार खो देना है। लिहाजा पार्टी के सामने एक नया सिरदर्द वीरभद्र सिंह के कारण पैदा हो गया है। सवाल यहां यह भी उठता है कि जो आरोप भाजपा ने वीरभद्र पर लगाए हैं वे सभी तब के हैं जब वह केंद्र सरकार में इस्पात मंत्री थे। इन्हीं आरोपों के चलते कांग्रेस आला कमान ने उन्हें हटा दिया। फिर वीरभद्र को हिमाचल की कमान थमा दी। वीरभद्र ने पार्टी को चुनाव जिता दिया और कांग्रेस की झोली में एक और राज्य आ गया। अगर वीरभद्र कसूरवार थे तो उन्हें हिमाचल की कमान दोषी होते हुए क्यों थमाई गई? आज दरअसल अरविन्द केजरीवाल के डर और अभियान से कांग्रेस आला कमान घबरा गया है। अगर हटाती है तो मरती है और नहीं हटाती तो मरती है। इधर पुंआ  है तो उधर खाई।


Thursday, 2 January 2014

धारा-377 पर सुपीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका का रास्ता आसान नहीं

केन्द्र सरकार ने समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाले फैसले के खिलाफ सुपीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। सरकार ने फैसले से समलैंगिकों और किन्नरों को हो रही परेशानियों की दुहाई देते हुए सुपीम कोर्ट से अपने निर्णय पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। सुपीम कोर्ट पहुंची सरकार का कहना है कि धारा-377 समानता और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। सुपीम कोर्ट ने 11 दिसंबर को समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाला दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया था और आईपीसी की धारा-377 को संवैधानिक ठहराया था। शीर्ष अदालत के फैसले से समलैंगिक संबंध एक बार फिर अपराध की श्रेणी में आ गए। इस मामले में न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय ने यह फैसला सुनाया था। न्यायमूर्ति सिंघवी रिटायर हो चुके हैं। ऐसे में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के लिए जस्टिस मुखोपाध्याय के साथ एक नए न्यायाधीश सुनवाई करेंगे। सरकार ने अपनी पुनर्विचार याचिका में शीर्ष अदालत के फैसले को सही नहीं बताते हुए इससे समलैंगिक और किन्नर (एलजीटीबी) पभावित होते हैं। उनके साथ अन्याय रोकने के लिए ही सरकार ने यह कदम उठाया है। केन्द्र सरकार को जब इस पुनर्विचार याचिका की सुनवाई होगी तब कुछ असहज सवालों के जवाब देने पड़ सकते हैं। हिंदू-मुस्लिम, ईसाई और सिखों के धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध किया है। सरकार ने हाई कोर्ट में कहा था कि धारा-377 के दुरुपयोग होने के पमाण नहीं हैं। जब से यह अस्तित्व में आया है तब से (15 वर्ष में) सिर्फ 200 मामलों में लोगों को सजाएं दी गई हैं। इसके अलावा समलैंगिकी सेक्स करने वाले लोगों की संख्या पूरे देश में महज 25 लाख है। इन लोगों में एड्स का फैलाव भी ज्यादा नहीं है। सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने हाई कोर्ट में दिए गए अपने शपथ पत्र में कहा था कि विधि आयोग ने अपनी 42वीं रिपोर्ट में धारा-377 को बरकरार रखने की सिफारिश की थी क्योंकि समाज में इसके खिलाफ रोष है। सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा था कि धारा-377 किसी भी असंवैधानिकता से ग्रस्थ नहीं है। एक गैर कानूनी कार्य सिर्फ इस वजह से कानूनी नहीं हो जाता कि उसे करने वाले उसे आपसी सहमति से कर रहे हैं। धारा-377 पीड़ित की शिकायत पर लागू होती है। इसलिए उसके  मनमाने ढंग से इस्तेमाल होने का कोई उदाहरण नहीं है। धारा संविधान के अनुच्छेद 14,21(बराबरी और जीवन के अधिकार) के विपरीत नहीं है। जनता का सम्मान करते हुए विधायिका ने इस धारा को बरकरार रखने का फैसला किया है। यह कोर्ट का काम नहीं है कि वह समाज पर असाधारण नैतिक मूल्य लादे। पाकृतिक व्यवस्था के खिलाफ सहवास को अपराध बनाने वाली धारा ब्रिटिश काल के पुराने कानून के अनुरूप है जिसे भारत में 1860 में लाया गया था। अब आगे क्या होगा? जस्टिस मुखोपाध्याय के साथ अब दूसरे जज इस याचिका पर जनवरी में सुनवाई करेंगे। पुनर्विचार याचिकाओं की सफलता का रिकार्ड मुश्किल से एक फीसदी है। क्योंकि जिन बिंदुओं पर बहस पहले हो चुकी होती है उन पर बहस के बाद फैसला पलटना कठिन होता है। नेता पतिपक्ष राज्यसभा अरुण जेटली का कहना है कि मामले पर बहस खत्म नहीं हुई है। अदालत ने धारा-377 की वैधता को सही ठहराया है। इस धारा के तहत क्या आता है और क्या नहीं, इसे लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है अंतत सरकार आगे बढ़े और रास्ता निकाले।

öअनिल नरेन्द्र

आम आदमी पार्टी सरकार ने पूरा किया अपना एक चुनावी वादाः मुफ्त पानी

मानना पड़ेगा कि आम आदमी पाटी की सरकार ने नए साल की धमाकेदार शुरुआत की है। साल शुरू होने से दो दिन पहले यूं तो दिल्ली के नए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तेज बुखार के कारण घर में थे पर इस बीमारी ने भी उनके राजनीतिक जज्बे को जरा भी कमजोर नहीं किया। बीमारी की हालत में ही उन्होंने अपने घर पर जल बोर्ड के अधिकारियों की बैठक बुलाकर मुफ्त पेय जल देने का एक बड़ा तोहफा दिल्लीवासियों को दिया। याद रहे कि यह मुद्दा केजरीवाल के एजेंडे में सबसे ऊपर था। मुख्यमंत्री बनने के तीन दिन बाद ही अरविंद केजरीवाल ने 1 जनवरी 2014 से राजधानी में चालू पानी मीटर वाले हर कनेक्शन पर हर महीने बीस हजार लीटर पानी फी देने की घोषणा की है यानी हर परिवार को रोजाना 667 लीटर पानी मुफ्त मिलेगा। इस पर सीवर चार्ज, सर्विस टैक्स और सेस भी देना नहीं पड़ेगा लेकिन कुछ शर्तें भी हैं। अगर महीने में बीस हजार लीटर से ज्यादा पानी खर्च हुआ तो उपभोक्ता को पूरा पानी का बिल चुकाना होगा। वह भी मौजूदा दस फीसदी इजाफे के साथ। क्योंकि 1 जनवरी से पानी के रेट 10 पर्सेंट बढ़ गए हैं। नए फैसले का फायदा सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं को ही मिलेगा। जल बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि तीन महीने तक फी पानी देने का खर्च जल बोर्ड उठाएगा जो करीब 41 करोड़ रुपए का होगा। तीन महीने के बाद यह खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। इस स्कीम पर सालाना कुल खर्च 165 करोड़ होगा। इस सुविधा से दिल्ली के चार लाख परिवारों को मुफ्त पानी मिलेगा। अभी 218.20 रुपए का बिल बीस हजार लीटर पानी का आता था। जहां मीटर नहीं है वहां 310 रुपए औसतन बिल आता है। 1 जनवरी से रेट में दस फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। इन परिवारों को वाटर चार्ज 66.50, सीवर चार्ज 39.50, सर्विस चार्ज 133.10 और सेस 1.33 को मिलाकर 240.43 रुपए पति माह की बचत होगी। सिटीजन पंट वाटर डेमोकेसी के संयोजक एसए नकवी का दावा है कि 667 लीटर रोजाना पानी देने वाला दिल्ली दुनिया का पहला शहर होगा। अभी दक्षिण अफीका के सोवोतो शहर में कोर्ट के आदेश पर गरीबों को 40 लीटर पानी रोजाना मुफ्त दिया जाता है। दिल्ली सरकार ने हर परिवार को 667 लीटर फी पानी देने का ऐलान तो कर दिया है पर ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के बारे में कोई जिक नहीं किया है। आरडब्ल्यूए इस पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस ऐलान से कितने उपभोक्ताओं को हकीकत में फायदा होगा? सोसायटी में पानी का मीटर कामन होता है। हर सोसायटी में 100 से लेकर 700 फ्लैट्स तक हैं। ज्वाइंट मीटर होने की वजह से हर सोसायटी का महीने का पानी का खर्च 20 हजार लीटर से ऊपर ही होगा। ऐसे में क्या ग्रुप हाउसिंग मैनेजमेंट को पूरे बिल का भुगतान करना प़ड़ेगा? यह दोहरा रवैया है और बराबरी के अधिकार का उल्लंघन है। दिल्ली में 2000 से अधिक गुप हाउसिंग सोसायटी हैं। दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ें पर गौर फरमाएं तो केवल 9 लाख पानी के कनेक्शन पर ही मीटर लगे हुए हैं। जानकारों के मुताबिक महीने में 20 हजार लीटर पानी का इस्तेमाल करने वाले केवल 3-4 लाख कनेक्शन ही हेंगे। अवैध कालोनियों में जहां पाइप लाइन के जरिए पानी की सप्लाई नहीं होती उनका क्या होगा? सिर्फ उन ही लोगों को फायदा मिलता दिख रहा है जहां पहले से पानी के कनेक्शन लगे हुए हैं। पानी के कनेक्शन जल बोर्ड रेगुलर कालोनियों को ही देता है। ऐसे में इसमें संदेह है कि गरीब लोगों को मुफ्त पानी मिल  पाएगा। फिर सबसे अहम बात यह है कि पानी भी तो रेगुलर आए। पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी तो फिर भी दिल्ली जल बोर्ड की है और यह व्यवस्था कैसी है किसी से छिपी नहीं है। विरोधी दल भाजपा और कांग्रेस सरकार के इस फैसले को जनता के साथ छलावा बता रहे हैं। जहां कांग्रेस पवक्ता संदीप दीक्षित ने इसे आंकड़ों की बाजीगरी बताते हुए कहा कि 20 किलोलीटर की मात्रा पर पहले से ही सब्सिडी दी जा रही है वहीं भाजपा के पदेश पवक्ता हरीश खुराना ने कहा कि दिल्ली में अभी भी लगभग 40 पतिशत उपभोक्ता बिना मीटर वाले हैं। साथ ही 40 पतिशत लीकेज को देखते हुए इसका लाभ सीमित वर्ग तक ही रहेगा। वहीं गैर सियासी जमात इस फैसले का स्वागत कर रही है। कई सामाजिक संगठनों ने कहा कि इससे लोगों को फायदा होगा। हमारा मानना है कि अरविंद केजरीवाल बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने अपना वादा पूरा किया। यह गवर्नेंस की सही दिशा में एक सही कदम है। कमियां तो हर स्कीम में रहती हैं पर उससे उसके उद्देश्यों को दबाया नहीं जा सकता। जनता को राहत मिलनी ही चाहिए।

Wednesday, 1 January 2014

खट्टी-मीठी यादों से अलविदा 2013

अलविदा 2013 2013 का साल कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। कुछ खट्टी-मीठी यादों के साथ साल खत्म हुआ। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली व उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड ने जनता को परेशान कर रखा है। राजधानी में ठंड का प्रकोप दिखने लगा है। पारा चार डिग्री से भी कम हो रहा है। यही हाल उत्तर भारत का भी है। हालत यह है कि पहाड़ों से ज्यादा ठंड मैदानों में दर्ज की जा रही है। रविवार को शिमला से ज्यादा ठंड हरियाणा के हिसार और नारनौल में थी जहां न्यूनतम तापमान 2.1 डिग्री रहा। नारनौल में तो 0.1 डिग्री तक खिसक गया। 2013 में इतनी घटनाएं घटी हैं कि सबका वर्णन करना मुश्किल है पर कुछ प्रमुख घटनाएं ऐसी हैं जिन्होंने देश को हिलाकर रख दिया और जिसका प्रभाव काफी दिन तक देखने को मिलेगा। उत्तराखंड की  प्राकृतिक आपदा इस साल की सबसे बड़ी त्रासदी रही। 16 और 17 जून को आए इस जल प्रलय ने उत्तराखंड में दर्द और आंसुओं के ऐसे निशान छोड़े हैं जिन्हें भुलाना आसाना नहीं होगा। इस घटना में कितने मरे यह शायद कभी नहीं पता चलेगा। इस साल कई महत्वपूर्ण हस्तियों ने हमारा साथ छोड़ दिया। नेल्सन मंडेला, प्राण साहब, वेनेजुएला के 14 साल तक देश का नेतृत्व करने वाले तेज-तर्रार नेता ऊगो चावेज का इस साल पांच मार्च को देहांत हो गया। मशहूर  ध्रुपद गायक उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डागर हमें नौ मई को छोड़कर चले गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल का नक्सली हमले के उपरांत दिल्ली में देहांत हो गया। वयोवृद्ध अभिनेता प्राण का लम्बी बीमारी के बाद 12 जुलाई को मुंबई में देहांत हो गया। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी और रिश्तेदार अरुण नेहरू चले गए। प्रख्यात पार्श्व गायक मन्ना डे 24 अक्तूबर को इस दुनिया को छोड़ गए। दुनिया की आधुनिक राइफलों में शामिल एके-47 के डिजाइनर मिखाइल क्लाशनिकोव का 23 दिसम्बर को मास्को में निधन हो गया। गरम हवा, शतरंज इत्यादि कई यादगार फिल्मों में प्रभावशाली अभिनय करने वाले फारुख शेख का 28 दिसम्बर साल के जाते-जाते निधन हो गया। अगर यह कहा जाए कि 2013 का साल स्कैंडलों के नाम रहा तो गलत नहीं होगा। 16 दिसम्बर 2012 को निर्भया का दर्दनाक कांड पूरे वर्ष छाया रहा। 2013 में स्वयंभू धर्मगुरु, पत्रकार व राजनेता सभी शामिल रहे। इसकी आंच न्यायपालिका तक भी पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एके गांगुली पर कानून की एक इंटर्न ने यौन उत्पीड़न का आरोप  लगाया तो उधर राजनीति के गलियारों में अप्राकृतिक यौन शोषण के आरोप में कई मंत्री धरे गए। एक दशक तक देश-विदेश के लाखों भक्तों के बीच स्वयंभू संत आसाराम बापू बलात्कार के आरोप में बुरी तरह फंस गए तो उनके बेटे नारायण साईं भी बलात्कार के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंच गए। गोवा के एक पांच सितारा होटल में चल रहे एक कार्यक्रम के दौरान तहलका में ही काम करने वाली एक महिला पत्रकार ने प्रख्यात पत्रकार तरुण तेजपाल पर यौन शोषण के आरोप लगाए, जिससे उनको साल का अंत और नए साल की शुरुआत जेल की सलाखों के पीछे से करनी पड़ी। अगर हम कुछ अन्य घोटालों की बात करें तो 10 मई को रेलवे रिश्वत कांड में रेलमंत्री पवन कुमार बंसल को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। पोंजी स्कीम के जरिये पश्चिम बंगाल में निवेशकों की गाढ़ी कमाई की लूट का कांड सामने आने पर चिट फंड शारदा समूह के चेयरमैन धरे गए। मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री रहे राघव जी पर उनके ही एक नौकर के साथ लम्बे समय तक लगातार दुराचार के आरोप लगने के बाद उनके खिलाफ अप्राकृतिक सेक्स करने का मुकदमा दर्ज हुआ और उन्हें भाजपा ने पार्टी से बाहर निकाल दिया। उच्चतम न्यायालय और अधीनस्थ अदालतों ने इस साल कई महत्वपूर्ण फैसले दिए और सार्थक टिप्पणियां कीं जो वैसे तो व्यवस्था को दुरुस्त करने की जद्दोजहद का हिस्सा थीं लेकिन उनसे कहीं न कहीं आम आदमी की पीड़ा भी जुड़ती नजर आई। 27 सितम्बर को व्यवस्था दी कि किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में नकारात्मक मतदान ः इनमें से कोई नहीं (नोटा) का बटन दबाकर सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने का मतदाताओं को ऐतिहासिक अधिकार दिया गया। कोयला खदान आवंटन घोटाला कांड की जांच रिपोर्ट का मूल तत्व बदलने के लिए आठ मई को सीबीआई, प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय को कड़ी फटकार सुप्रीम कोर्ट ने लगाई और सीबीआई को बाहरी दबाव तथा दखल से मुक्त करने के निर्देश दिए। समलैंगिक संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया। अब बात सियासत की। यूपीए द्वारा हरी झंडी के बाद तेलंगाना को भारत का 29वां राज्य बनाने की प्रक्रिया आरम्भ हो गई। 13 सितम्बर को लाल कृष्ण आडवाणी की आपत्तियों के बावजूद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को पार्टी ने अपना पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। संसद में हमले के दोषी अफजल गुरु को 19 फरवरी को तिहाड़ जेल में फांसी देकर दफनाया गया। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा हुई। बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को 1993 के मुंबई धमाकों से जुड़े मामले में शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी करार दिए जाने पर पांच साल की सजा मिली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में एक में छोड़कर चार में कांग्रेस पार्टी को करारी हार का मुंह देखना पड़ा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह पुन मुख्यमंत्री बने। दिल्ली में त्रिशंकु विधानसभा के चलते कई दिनों की कशमकश के बाद अरविन्द केजरीवाल की आप पार्टी ने सत्ता सम्भाली और अरविन्द केजरीवाल 46 साल की उम्र में दिल्ली के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने से राजनीति में स्वच्छता का एक महत्वपूर्ण कदम उठा। क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। वाम मोर्चे ने चुनावों में त्रिपुरा में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की और माणिक सरकार ने लगातार चौथे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में तीन क्रिकेटर श्री संत, अजीत चन्देला, अंकित चव्हाण सहित कई अन्य की गिरफ्तारी से आईपीएल विवादों के केंद्र में बना रहा। संसद के अन्दर अंतत लम्बे इंतजार के बाद लोकपाल विधेयक पारित हुआ। मई में कांग्रेस सात साल बाद कर्नाटक में सत्ता में लौटी और विधानसभा चुनावों में भाजपा दो अंकों पर सिमट गई। बहुप्रतिष्ठित और महत्वाकांक्षी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य को पांच साल के विलम्ब के बाद भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया जिससे भारत की समुद्री क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ। इस साल 14 जुलाई को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भेजे गए आखिरी टेलीग्राम के साथ ही 163 साल पुरानी टेलीग्राम सेवा भारतीय इतिहास के पन्नों में समा गई। कुल मिलाकर खट्टी-मीठी यादों से 2013 अलविदा। हम उम्मीद करते हैं कि वर्ष 2014 सभी पाठकों और देश के लिए मंगलमय होगा। मैं अपनी ओर से और दैनिक वीर अर्जुन, दैनिक प्रताप और सांध्य वीर अर्जुन की ओर से शुभकामनाएं देता हूं और उम्मीद करता हूं कि नव वर्ष मंगलमय हो। नए साल की बधाई।

-अनिल नरेन्द्र