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Thursday, 21 May 2026

यूएई के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर हमला

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अल दफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के परिसर में रविवार को एक ड्रोन हमला हुआ और उसके बाद आग लग गई। हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। ईरान और यूएई अब जानी दुश्मन बन चुके हैं। ड्रोन से बराकाह न्यूक्लियर प्लांट को निशाना बनाया गया। इस अटैक को यूएई ने बिना किसी कारण के आतंकी हमला बताया। बहरहाल इस हमले की जिम्मेदारी  फिलहाल किसी भी समूह ने नहीं ली है। मगर यूएई का आरोप ईरान की तरफ ही है। यूएई का मानना है कि यह हमला ईरान ने ही ड्रोन के जरिए किया है। पिछले कई दिनों से ईरान-यूएई में तनातनी चल रही है। ईरान का मानना है कि यूएई खुलकर अमेरिका और इजरायल की मदद कर रहा है और उसकी भूमि से ही अमेरिकी हमले हो रहे हैं। खबर तो यहां तक है कि वर्तमान जंग के दौरान ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके मोसाद  प्रमुख ने यूएई का गुप्त दौरा किया था। ड्रोन हमले से बराकाह संयंत्र के बाहरी क्षेत्र में स्थित एक इलैक्ट्रिक जेनेरेटर में आग लग गई। यह आग संयंत्र की भीतरी परिधि के बाहर लगी थी। संघीय परमाणु नियामक प्राधिकरण (एफएएनआर) ने भी इस हमले की पुष्टि की कि आगे से संयंत्र की सुरक्षा या उसके जरूरी सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा है और सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रही है। सभी जरूरी एहतियाती कदम उठा लिए गए हैं और लोगों से अपील की गई है कि वे सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें और अफवाहों से बचें। बयान में ड्रोन हमले के स्त्राsत के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी गई। ईरानी सूत्रों का कहना है कि हमने कोई हमला नहीं किया है तो फिर हमला किसने किया? क्या कोई तीसरी शक्ति अपना खेल तो नहीं खेल रही जो दोनों मुल्कों को लड़वा कर अपना उल्लू सीधा करना चाहती है। इससे पहले भी 5 मई को यूएई ने कहा था कि उसके कुछ क्षेत्रों पर ईरान से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया, लेकिन ईरान की सैन्य कमान ने इस आरोप से इंकार किया था। ईरानी अधिकारियों ने यूएई के उन आरोपों को भी खारिज किया था जिसमें ईरान पर हमला करने का दावा किया गया था। दरअसल यूएई को ईरान इसलिए अपना दुश्मन मान रहा है, क्योंकि उसे लगता है कि यूएई की धरती का इस्तेमाल करके ही अमेरिका ने उस पर अटैक किए हैं। बहरहाल इस हमले ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे नाजुक संघर्ष विराम को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ऐसा लग रहा है कि कूटनीतिक प्रयास भी अब काफी तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने इस हमले के पीछे के लोगों पर बिना किसी उकसावे के आतंकवादी हमला करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि वह अपनी देश की संप्रभुता पर किसी भी तरह के खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। दक्षिण कोरिया की मदद से बने और 2020 से चालू बराकाह  परमाणु संयंत्र अरब दुनिया का एक मात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। 20 अरब डालर की लागत से बना यह संयंत्र यूएई की लगभग एक चौथाई ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है।

-अनिल नरेन्द्र


Tuesday, 19 May 2026

चीन से क्या लेकर लौटे ट्रंप

 
2025 में अमेरिका की सत्ता में वापस लौटे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूरी दुनिया के साथ रंगबाज की तरह पेश आ रहे थे। एक साल में कई देशों को दादागिरी के तेवर दिखाने वाले ट्रंप बीजिंग भी उन्हीं तेवरों के साथ पहुंचे थे लेकिन जब लौटे तो ये तेवर खाली थे खाली रह गए। उनका कॉन्फिडेंस कुछ यूं गायब हुआ जैसे फ्री के वाई-फाई का नेटवर्क। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि चीन गए ट्रंप क्या देकर आए हैं और क्या लेकर लौटे हैं? बाहर से चेहरे पर मुस्कान के पीछे नुकसान है या फायदा है? जितनी बड़ी बातें उतनी बड़ी डील हमें तो नजर नहीं आई। बीजिंग छोड़ने से पहले ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुए समझौतें को शानदार व्यापारिक सौदा बताया। उन्होंने कहा कि इन डील्स से दोनों देशों को बड़ा फायदा होगा। साथ ही ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को दोबारा खोलने के लिए चीन की मदद स्वीकार करने की बात कही। ट्रंप ने कहाः हमने कुछ शानदार टेड डील की है जो दोनों देशों के लिए बहुत अच्छी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बातचीत के दौरान कई समस्याएं सुलझाई गई हैं। ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने 200 बोइंग विमानों की डील पर सहमति जताई है। ये एक मात्र ठोस डील कही जा सकती है जो इस दौरे पर हुई लेकिन इस पर भी चीन ने कोई जवाब नहीं दिया है। इस यात्रा में ट्रंप का व्यवहार पूरी तरह बदला हुआ था। आमतौर पर आक्रामक और टकराव वाली राजनीति के लिए जाने जाते ट्रंप इस दौरे में काफी शांत और संयमित नजर आए। उन्होंने शी जिनपिंग की तारीफ में इतने कसीदे पढ़े जितने शायद और किसी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के लिए पढ़े हों। जिनपिंग की तारीफ में पढ़े कसीदे जेलेंस्की हों या पूर्व राष्ट्रपति बिडेन एक साल में ट्रंप ने कई देशी-विदेशी नेताओं की बेइज्जती करने और मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ट्रंप ने कहाö अगर आप हॉलीवुड जाएं और चीन के नेता की भूमिका निभाने के लिए किसी अभिनेता को ढूंढें तो शी जिनपिंग बिल्कुल उसी तरह फिट बैठेंगे। ट्रंप की चीन यात्रा में एक महत्वपूर्ण मुद्दा था ताइवान का। बीजिंग इसे अपना हिस्सा मानता है। जबकि अमेरिका लंबे समय से ताइवान का समर्थन करता रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पूरी यात्रा में ट्रंप ने ताइवान का नाम तक नहीं लिया। उल्टा शी जिनपिंग ने ट्रंप के मुंह पर सुना दिया कि आप ताइवान की मदद करना बंद करें अगर आपने ऐसा नहीं किया तो हम आपसे युद्ध तक करने पर मजबूर होंगे। इस पर भी ट्रंप ने कोई रिएक्शन नहीं दिया है। शी ने चेतावनी दी कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे संवेदनशील महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि अगर इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों के बीच टकराव और यहां तक कि युद्ध भी हो सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रूथ सोशल पर भी ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को चौंका दिया। उन्होंने अमेरिका को गिरता हुआ राष्ट्र कहने वाली शी जिनपिंग की बात से सहमति जताई। हालांकि ट्रंप ने कहा कि शी का इरादा बिडेन प्रशासन के चार सालों की भारी क्षति की तरफ था। एक ब्रिटिश विश्लेषक ने अपने कॉलम में ट्रंप के रवैये पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, सौदे की कला अब इस समय चापलूसी की कला जैसे लगती है, जब दूसरे आदमी के पास सारे पत्ते हों। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग यह बात जानते थे, दुनिया का सबसे महान व्यवसायी भी जानता था, लेकिन शायद कमरे में मौजूद एक मात्र व्यक्ति जिसे इसका एहसास नहीं हुआ, वह खुद ट्रंप थे। 
-अनिल नरेन्द्र