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Thursday, 3 September 2026

त्रासदी के पीछे चीन जिम्मेदार

नेपाल में फ्लैश फ्लड में मरने वालों की संख्या 1000 से ज्यादा हो गई है, 4000 से ज्यादा लापता हैं, जिसमें 287 भारतीय भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक नेपाल की सेना ने अब तक 12000 लोगों को सुरक्षित बचाया है। लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल में चीन के रवैये को लेकर भारी असंतोष है और सवाल उठने लगे हैं। बुधवार को तिब्बत में बनी बैरियर लेक टूटने के बाद चीन ने नेपाल से सूचना साझा करने में लापरवाही बरती, जिससे नेपाली नागरिकों में आक्रोश फैल गया है। तिब्बत में 20 लाख घन पानी जमा हो गया था, लेकिन अलर्ट तब भेजा गया, जब झील टूट चुकी थी। रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेन्द्र परियार ने बताया कि उन्हें झील टूटने की जानकारी नेपाली सेना के माध्यम से मिली। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने कोई सूचना साझा नहीं की। झील भरने के बाद ओवर फ्लो शुरू हुआ और शाम को चीन ने तिब्बत में बचाव अभियान शुरू किया। बुधवार सुबह 8.40 बजे भोटेकोशी नदी में जल स्तर का आंकड़ा भेजा गया। इसी बीच तिब्बत से आया तेज बहाव नेपाल में प्रवेश कर गया। नेपाल को इसकी जानकारी 16 मिनट बाद जब मिली जब सैलाब तबाही मचाने लगा। आरोप लगाए जा रहे हैं कि चीन की ओर से नेपाल में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता था। हालांकि नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों का खंडन किया है। इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी चीन की भूमिका को लेकर चर्चा हो रही है। नेपाली न्यूज आउटलेट्स से लेकर चीनी मीडिया ने इस मुद्दे को रिपोर्ट किया है। नेपाली अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मई में ही चीन से ग्लेशियर, पानी के स्तर और अन्य संभावित खतरों की जानकारी समय रहते साझा करने का आग्रह किया था। उनका मानना है कि सीमा पार से मिलने वाली नियमित चेतावनी कई जानें बचाने में मदद कर सकती थी। इस साल 27 मई को काठमांडू में नेपाल और चीन के पर्यावरण विशेषज्ञों की बैठक हुई थी। बैठक में ग्लेशियर झीलों की सूची तैयार करने और पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। हालांकि, नेपाली अधिकारियों के मुताबिक बैठक के बाद उन्हें चीन से अपेक्षित स्तर पर ग्लेशियर और जल स्तर संबंधी जानकारी नहीं मिल सकी। चीनी विश्व मौसम विज्ञान केन्द्र ने आपदा से पहले नेपाली अधिकारियों को ई-मेल से 14 और 19 अगस्त के बीच भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका जताई थी। लेकिन नेपाली अधिकारियों का कहना है कि ऐसी चेतावनियां ग्लेशियर टूटने जैसी संकेत नहीं देती। नेपाल के लोगों का कहना है कि मौत का ये सैलाब चीन से आया। वहां ग्लेशियर फटा, वो हिस्सा नेपाल से 50 किलोमीटर दूर है। बाढ़ के पानी को नेपाल तक पहुंचने में 30 से 40 मिनट लगे। अगर चीन ने ये सूचना समय रहते नेपाल को दी होती तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी। लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जाने के लिए आधा घंटा काफी था, लेकिन चीन ने ये सूचना शेयर नहीं की। पानी के बहाव का परिणाम और पानी के साथ आया मलबा इतना भयानक था कि रास्ते में जो कुछ आया जैसे इमारतें, पुल, सड़कें सब कुछ बहाकर ले गया। लेकिन खतरा अभी भी टला नहीं। अगर चीन का डैम टूटा तो वहां से दूसरा फ्लैश फ्लड आ सकता है। चीन से भेजी गई इस तबाही को नेपाली कभी भूलेंगे नहीं। 

-अनिल नरेन्द्र

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