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Thursday, 22 March 2012

क्या सैयद मोहम्मद काजमी पर दिल्ली पुलिस झूठा केस बना रही है?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 22 March 2012
अनिल नरेन्द्र
इजरायली दूतावास की कार में विस्फोट के मामले में गिरफ्तार पत्रकार सैयद मोहम्मद काजमी क्या निर्दोष हैं जिन्हें जबरन दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है या यह हमले में शामिल एक महत्वपूर्ण कड़ी है? यह प्रश्न काजमी की गिरफ्तारी के बाद से ही अखबारों में बना हुआ है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने इजरायल और अमेरिका के कहने पर काजमी को गिरफ्तार किया और उसकी गिरफ्तारी की असल वजह थी कि वह अपनी टीवी रिपोर्टों में मध्य-पूर्व की सही स्थिति पेश करता था जिससे दोनों इजरायल और अमेरिका नाराज थे और उसे रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने यह ड्रॉमा रचा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य प्रमुख शिया धर्मगुरु मौलाना कल्वे जव्वाद ने लखनऊ में कहा कि दिल्ली के पुलिस आयुक्त इजरायली एजेंट हैं और उनकी सम्पत्ति की जांच होनी चाहिए। मौलना जव्वाद ने मीडिया से कहा कि देश में पिछले करीब 20 वर्षों से बेकसूर मुसलमानों को आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार करने का सिलसिला जारी है। गत 13 फरवरी को दिल्ली में हुए विस्फोट में वरिष्ठ पत्रकार सैयद मोहम्मद काजमी की गिरफ्तारी इसकी नई कड़ी है। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस नए-नए सुबूत पेश कर रही है। मामले की जांच में जुटे सूत्रों ने बताया कि काजमी के ईरान से गहरे रिश्ते होने के पक्के सुबूत मिले हैं। काजमी कई बार ईरान गया था। इस दौरान उसने ब्लास्ट से जुड़े दूसरे ईरानियों से मुलाकात की थी। काजमी ने पुलिस को बताया कि वह 7 जनवरी 2011 को ईरान गया था। इस बार उसकी मुलाकात सैयद अली और अली रजा से हुई थी। सैयद अली ने उसे ईरानी साइंटिस्ट की मौत का बदला लेने की बात कही थी। सैयद ने उसे तेहरान में 3000 डालर और एक मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराया। वापस दिल्ली लौटने पर उसकी कई बार सैयद से फोन पर बात हुई। मई 2011 में ईरान से उसे सैयद ने फोन कर इजरायली डिप्लोमेट को निशाना बनाने की बात कही थी। उसे इस हमले के लिए ईरान से आने वाले लोगों के लिए दिल्ली में मदद करने के निर्देश मिले थे। पुलिस का दावा है कि योजना के मुताबिक ईरानी हमलावरों के दिल्ली आने पर काजमी ने उन्हें न सिर्प करोल बाग में फैज रोड स्थित होटल में ठहराया बल्कि इजरायली डिप्लोमेट के आने-जाने का रूट पता करने में भी उनकी मदद की। इसके लिए किराये पर ली गई मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल किया गया। ज्ञात रहे कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जोरबाग के कर्बला इलाके में रहने वाले फ्रीलांस पत्रकार मोहम्मद काजमी को 6 मार्च को गिरफ्तार किया था। पुलिस आयुक्त ने बताया कि सन् 2011 में जब काजमी ईरान गया था तो इसकी मुलाकात सैयद अली, मोहम्मद रजा और ईरानी अफसर से हुई। मलेशिया में बैठे गैंग के मास्टर माइंड मोहम्मद मसूद के दिशानिर्देश पर सैयद अली और मोहम्मद रजा ने दिल्ली में इजरायली डिप्लोमेट पर हमला करवाने में काजमी को पैसों का लालच दिया। इसके लिए 5500 डालर देने की बात कही गई। काजमी तैयार हो गया और फिर ईरानी अफसर के साथ दिल्ली चला गया। 10 फरवरी को सैयद अहमद, मोहम्मद रजा खान और अब्दुल फजी मेंहदियान भी दिल्ली आ गए। तीनों काजमी के यहां रुके हुए थे। अगले दिन काजमी की आल्टो में बैठकर तीनों ने इजरायल दूतावास के साथ-साथ नई दिल्ली रेंज इलाके का भ्रमण कर हमले की रूपरेखा तैयार की। उधर अफसर ईरानी ने करोल बाग के रहने वाले एक युवक के सहयोग से एक स्कूटी खरीदी। इसी स्कूटी का इस्तेमाल कार में स्टिकी बम लगाने के लिए प्रयोग में लाया गया था। अफसर से मलेशिया में बैठा उसका आका मसूद सम्पर्प में था। उधर मसूद की हां पर 14 फरवरी को बैंकाक और जॉर्जिया में हमला किया गया। इस हमले को मोरादी सईद और मोहम्मद काजी ने अंजाम दिया था। मोहम्मद काजी को बैंकाक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं मलेशिया पुलिस के हत्थे सभी धमाकों का मास्टर माइंड मसूद भी चढ़ गया। दिल्ली में हुए ब्लास्ट के 24 घंटे में इजरायल की जांच एजेंसी मोसाद की एक टीम दिल्ली पहुंच गई थी और लगातार जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मोसाद के एजेंट जल्द ही रिमांड पर चल रहे काजमी से पूछताछ कर सकते हैं। वहीं दिल्ली पुलिस पूरे मामले से परदा उठाने के लिए मलेशिया में गिरफ्तार मसूद से भी पूछताछ करने के लिए मलेशिया सरकार से सम्पर्प कर रही है। अब दिल्ली पुलिस सही कह रही है या यह सारी कहानी जबरन बनाई गई है, इसका फैसला तो अदालत में हो ही जाएगा। उम्मीद है कि सच्चाई की जीत होगी। वैसे दिल्ली पुलिस को यह केस अदालत में साबित करना होगा। इससे दिल्ली पुलिस की प्रतिष्ठा जुड़ चुकी है। यह मामला अब पूरी तरह इंटरनेशनल हो चुका है।
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Tuesday, 13 March 2012

इजरायली राजनयिक पर हमले में ईरानी पत्रकार की गिरफ्तारी?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 13 March 2012
अनिल नरेन्द्र
13 फरवरी को नई दिल्ली के अति सुरक्षित क्षेत्रों में से एक औरंगजेब रोड पर इजरायली महिला राजनयिक टाल योहाशुआ की इनोवा कार के पिछले हिस्से में एक मोटर साइकिल सवार ने मैग्नेटिक डिवाइस (स्टिकी बम) लगा दिया था। इसके तत्काल बाद हुए विस्फोट से कार में आग लग गई थी। महिला राजनयिक व कार चालक मनोज घायल हो गए थे। तीन अन्य गाड़ियां भी इसकी चपेट में आई थी, दिल्ली पुलिस ने इस धमाके के सिलसिले में एक ईरानी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। ईरानी व्यक्ति ने स्वयं को एक न्यूज एजेंसी का पत्रकार बताया है। गिरफ्तार व्यक्ति का नाम सैयद मोहम्मद काजमी (50 वर्ष) है और वह ईरानी न्यूज एजेंसी के लिए काम करता था। पुलिस का कहना है कि सैयद मोहम्मद काजमी की गिरफ्तारी के सुराग बैंकाक से मिले थे। याद रहे कि जिस दिन दिल्ली में कार बम लगाया गया था ठीक उसी दिन बैंकाक में भी एक धमाका करने का असफल प्रयास किया गया था। दिल्ली में हुए धमाके के तार न केवल बैंकाक से ही जुड़े हैं बल्कि जार्जिया से भी जुड़े हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दूतावास की कार पर हुए बम धमाके की पहली कामयाबी भी इसी का नतीजा है। फिलहाल पुलिस इस हमले के पीछे शामिल संगठन के नाम का खुलासा नहीं कर रही है लेकिन कहीं न कहीं इस हमले के पीछे ईरानी संगठन पूंड्स (क्यूयूडीएस) के हाथ होने की आशंका जरूर जताई जा रही है। दरअसल बैंकाक में हुए विस्फोट के बाद वहां से कुछ संदिग्ध ईरानी फरार हो गए थे, जिनमें एक महिला भी शामिल थी। बैंकाक पुलिस को उस महिला के घर की तलाशी में एक टेलीफोन डायरी मिली थी जिसमें काजमी का मोबाइल नम्बर था। काजमी के खिलाफ कई महत्वपूर्ण सुबूत मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि हमलों के पीछे ईरानी सेना की स्पेशल फोर्स है, जिसे खासतौर से ईरान-इराक युद्ध के समय गठित किया गया था। मोहम्मद अहमद काजमी को सूचनाएं जुटाने के लिए डालर में भुगतान किया गया था। ब्लास्ट में जिस मोटर साइकिल का इस्तेमाल किया गया वह करोल बाग इलाके से किराये पर ली गई थी। हमलावर विदेश से आकर पहाड़गंज के एक होटल में ठहरे थे। बताया जा रहा है कि स्टिकी बम इसी होटल में तैयार किया गया। पूरे मामले का दुःखद पहलू यह है कि विदेशी बाम्बर जिसने औरंगजेब रोड में कार पर बम लगाया था वह गृह मंत्रालय की सुस्ती के कारण उसी दिन इन्दिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दक्षिण-एशिया के किसी देश की फ्लाइट से भाग गया। 3 बजे के लगभग दोपहर को बम लगाने के 8 घंटे बाद वह निकल गया। गृह मंत्रालय या किसी और सरकारी एजेंसी ने हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन को सूचित नहीं किया कि अमूक व्यक्तियों को रोका जाए, पूछताछ की जाए। गृह मंत्रालय की यह चूक इसलिए भी चिन्ता का विषय है कि बम धमाका होने के तुरन्त बाद इजरायल ने कह दिया था कि हमले के पीछे ईरान का हाथ है। इमिग्रेशन में हर ईरानी को रोक कर तसल्ली करनी चाहिए थी जो नहीं की गई और हमलावर भागने में सफल रहा। इस मामले में गिरफ्तार मोहम्मद अहमद काजमी के परिजनों ने दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि पुलिस द्वारा बरामद स्कूटी उनके एक रिश्तेदार की है। करीब दो साल से वह स्कूटी उनके घर पर खड़ी थी। परिवार का कोई सदस्य उस स्कूटी का उपयोग नहीं करता है। मोहम्मद काजमी के दूसरे बेटे शौजब काजमी ने गिरफ्तारी के अरेस्ट मेमो पर हस्ताक्षर के लिए पुलिस का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है। अपने घर पर किसी ईरानी के आकर ठहरने से इंकार किया। परिजनों का यह भी कहना था कि कर्बला मामले में उनके पिता ने सक्रिय भूमिका निभाई है। बीके दत्त कॉलोनी में उनका अकेला मुस्लिम परिवार है। पेशे से पत्रकार मोहम्मद अहमद काजमी मूल रूप से मेरठ निवासी है। वरिष्ठ पत्रकार सैयद नकवी ने मोहम्मद काजमी की गिरफ्तारी को लेकर कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल के इशारे पर पत्रकार को इजरायली दूतावास कार ब्लास्ट में जबरन गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने इसका मुख्य कारण भी दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के इशारे पर अरब मुल्कों में विद्रोह हो रहा है। उसकी सच्चाई को सैयद मोहम्मद अहमद काजमी ने दुनिया के सामने रखा और इसी के कारण अमेरिका और इजरायल के दबाव में दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस को अपना केस मजबूत कर लेना चाहिए क्योंकि इस केस पर न केवल देश के अन्दर ही बल्कि दुनिया भी देख रही है। इस केस में दिल्ली पुलिस की प्रतिष्ठा एक बार फिर दांव पर है।
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Wednesday, 22 February 2012

ज्वालामुखी के ढेर पर बैठा मध्य-पूर्व

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 22th February  2012
अनिल नरेन्द्र
पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध की ज्वालामुखी के ढेर पर खड़ा होता जा रहा है। परमाणु आयुध बनाने में जुटे ईरान ने जहां अपने युद्धपोत जैद्दाह बन्दरगाह से सीरिया के तट के पास तैनात कर दिए हैं वहीं ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दो दिवसीय जमीनी सैन्य युद्धाभ्यास शुरू कर अमेरिका और पड़ोसी इजरायल जैसे कट्टर विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। उधर ब्रिटेन ने इजरायल को चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो भारी नुकसान की कीमत चुकानी होगी। ये युद्धपोत ईरान ने स्वेज नहर के रास्ते भू-मध्य सागर के किनारे बसे सीरिया भेजे हैं ताकि उसके परमाणु ठिकानों पर किसी भी तरह के हमलों का जवाब दे सकें। इधर उत्तर कोरिया ने भी सैन्य अभ्यास की सूरत में हमले की चेतावनी दे डाली है। ईरान की संवाद समिति इरना ने देश के नौसेना प्रमुख एडमिरल हबीबुल्ला सचारी के हवाले से कहा कि ईरान ने भू-मध्य सागर में अपने युद्धपोत तैनात करके विरोधियों को क्षेत्र में अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। उन्होंने बताया कि ईरानी नौसेना इस्लामी क्रांति के बाद दूसरी बार स्वेज नहर के रास्ते भू-मध्य सागर तक पहुंची है। ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि उसने सम्भावित बाहरी खतरों से देश की रक्षा के मद्देनजर अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए दो दिवसीय एक जमीनी अभ्यास शुरू किया है। यह रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई है। गौरतलब है कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल की चेतावनियों को नजरंदाज करते हुए उठाया है। अमेरिका के रक्षामंत्री लियोन पैनेटा ने कल ही ईरान को सख्त चेतावनी दी थी कि यदि उसने हरभुज जल संधि बन्द की या परमाणु हथियार बनाए तो उसके खिलाफ कार्रवाई के हर विकल्प खुले हैं। पैनेटा ने कहाöहम स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता। हम इसे हरगिज बर्दाश्त नहीं करेंगे कि वह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख जलमार्ग हरभुज जल संधि को बन्द करे। इस क्षेत्र से दुनिया के पांचवें हिस्से का तेल व्यापार होता है। यह अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र है। हम ईरान को इसे बन्द करने की इजाजत नहीं देंगे। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने इराकी तेल भंडार को हड़पने के लिए कुवैत के जरिये इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन को घातक रासायनिक हथियार नष्ट करने के बहाने नेस्तनाबूद कर दिया था जबकि जानमाल और तेल कुओं की भीषण तबाही के बावजूद इराक में ऐसा कोई हथियार नहीं मिला। ईरान को डर सता रहा है कि अमेरिका उसके परमाणु संयंत्रों में घातक हथियार बनाने के बहाने इजरायल के सहयोग से उस पर कभी भी चढ़ाई कर सकता है। ईरान ने भी ऐसे किसी तरह के हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। उधर फारस की खाड़ी में तनाव के बीच ब्रिटेन ने इजरायल से कहा है कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को तबाह करने के लिए पहले कोई हमला करने के भारी नकारात्मक पहलू है और ऐसा करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार द वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि दरअसल लियोन पैनेटा से बातचीत के बाद हमारे एक पत्रकार ने लिखा है कि पेंटागन प्रमुख का यह मानना है, `इस बात की ठोस आशंका है कि अप्रैल, मई या जून के महीने में इजरायल सरकार ईरान पर हमला करेगी।' मध्य-पूर्व ज्वालामुखी के ढेर पर बैठा है जो किसी भी समय फट सकता है।
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Thursday, 16 February 2012

दिल्ली, तिबलिस और बैंकाक धमाकों का कोई आपसी रिश्ता है?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 17th February  2012
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली के अति सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में इजराइली दूतावास की कार को निशाना बनाने और जार्जिया की राजधानी में असफल बम विस्फोट के प्रयास के 24 घंटे बाद थाइलैंड की राजधानी बैंकाक में लगातर तीन धमाके साबित करते हैं कि यह दहशतगर्द जब चाहे, जहां चाहे हमले कर सकते हैं। यह भी एक बार फिर साबित होता है कि पूरी दुनिया आज आतंकवाद की जकड़ में फंस चुकी है। मंगलवार को बैंकाक में महज 100 मीटर के दायरे में तीन धमाके हुए। घटना में हमलावर समेत पांच लोग घायल हुए हैं। मौके से मिले पहचान पत्र से हमलावर के ईरानी होने की आशंका है। हमलावर की शिनाख्त मोरादी के रूप में हुई है। उसने राजधानी बैंकाक के भीड़भाड़ वाले इलाके में बम फेंके। तीसरा बम पेड़ से टकराने के कारण मोरादी के ही पैर के पास फटा, जिससे वह खुद भी घायल हो गया। उसके एक और ईरानी मददगार मोहम्मद इजाई को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों ने हमले की दिल्ली और जार्जिया की घटना से तार जुड़ने की आशंका जताई है। इस घटना में हमलावर सहित तीन थाई पुरुष और एक महिला भी घायल हुईं। थाई प्रधानमंत्री चिंगलक शिनवात्रा ने पुलिस और देश के राष्ट्रीय गुप्तचर एजेंसी को तिहरे विस्फोट के जांच के आदेश दिए हैं। थाई विदेश मंत्री को ईरान से बात करने को कहा है। थाई प्रधानमंत्री शिनवात्रा गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली विशेष अतिथि के रूप में आई थीं। क्या उनकी यात्रा का, दिल्ली में पहले धमाके फिर बैंकाक में धमाके, इनमें कोई आपसी कनैक्शन है? थाई पुलिस के जनरल पांसिटी प्रापावात ने बताया कि सुरक्षा बलों ने राजधानी स्थित हमलावर के किराये के मकान से भी विस्फोटक बरामद किए। स्थानीय मीडिया के मुताबिक ईरानी मूल के नागरिक ने टैक्सी रोककर चालक से कहीं चलने को कहा लेकिन चालक के मना करने से वह नाराज हो गया और उसने टैक्सी पर बम से हमला कर दिया। वहां खड़े पुलिसकर्मियों ने जब वह वाकया देखा तो वे टैक्सी के पास पहुंचे। हमलावर ने पुलिसकर्मियों पर भी बमों से दूसरा हमला कर दिया लेकिन सुरक्षाकर्मियों की किस्मत अच्छी थी और यह बम एक पेड़ से टकरा गया और खुद हमलावर पर आ गिरा। विस्फोट से हमलावर का पैर उड़ गया तथा हमलावर को पकड़ लिया गया। घटनास्थल से एक पासपोर्ट बरामद हुआ जिससे पता चला कि हमलावर का नाम सामरेब मोरादी है और वह ईरान का रहने वाला है। इससे पहले मध्य बैंकाक के इकामाई क्षेत्र में एक घर में विस्फोट हुआ। हमलावर सहित दो और ईरानी इसी घर में किरायेदार के रूप में रहते थे। सरकारी प्रवक्ता थीतिया चासेंग ने कहा कि पुलिस ने रिपोर्ट दी है कि मकान का प्रयोग बम बनाने के लिए किया जाता था। यहां से विस्फोटक पदार्थ और रिमोट कंट्रोल डिटोनेशन डिवाइसिस मिले हैं। फिलहाल बैंकाक की घटना और नई दिल्ली एवं जार्जिया की घटना का कोई संबंध नहीं स्थापित हो सका लेकिन इजराइल के विदेश विभाग के प्रवक्ता चिगाल पालमोर ने यरुशलम में कहा कि हम किसी भी सम्भावना से इंकार नहीं कर रहे हैं। इन हमलों से ईरान सारी दुनिया की नजरों में आ गया है। पहले से ही अपने विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम की वजह से पश्चिमी देशों की आंखों की किरकिरी बने ईरान के लिए अब यह नई समस्या खड़ी हो गई है। निश्चित रूप से अमेरिका अब ईरान पर और दबाव डालेगा।
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अधिकतर आतंकी हमले 13 तारीख को क्यों?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 16th February  2012
अनिल नरेन्द्र
क्या यह महज एक संयोग है कि भारत में अधिकतर आतंकी बम धमाकों की घटना 13 तारीख को ही होती है या फिर इस 13 का कुछ खास महत्व है? ताजा बम कांड 13 फरवरी को हुआ है। तकरीबन हर धमाका 13 तारीख को ही हुआ है। सितम्बर 2008 को भी राजधानी में 13 तारीख को ही बम ब्लास्ट हुआ था। मुंबई में पिछले साल जुलाई की 13 तारीख को ही सीरियल ब्लास्ट हुए थे। पुणे में जर्मन बेकरी धमाका भी 13 को ही हुआ था। 2001 में संसद भवन परिसर में भी 13 तारीख (दिसम्बर) को ही आतंकी हमला हुआ था। हमारे विशेषज्ञ अब इस बात की जांच में लगे हुए हैं कि 13 तारीख का इन आतंकियों के लिए क्या विशेष महत्व है। पधानमंत्री निवास में जो हमला हुआ वह ठीक उसी पकार का था, जो इसी साल 11 जनवरी को ईरान की राजधानी तेहरान में हुआ था जिसमें ईरान के एक परमाणु वैज्ञानिक मुस्तफा अहमदी रोशन की हत्या की गई थी। उस हमले में भी दो मोटर साइकिल पर सवार दो हत्यारों ने रोशन की पीजो कार पर इसी तरह का स्टिकी बम लगा दिया था। धमाका इतना तेज था कि वैज्ञानिक की मौके पर ही मौत हो गई। नई दिल्ली की घटना में इनोवा सवार सभी यात्री खुशकिस्मत थे कि जल्दी में युवक सही स्थान पर बम नहीं लगा सका। जांच करने वाले अधिकारियों की माने तो अगर यही बम कार के पीछे की बजाए किसी दरवाजे पर लगाया गया होता तो इसमें कहीं अधिक नुकसान होता। बताया जा रहा है कि हमलावर बम को दरवाजे पर लगाने में सफल नहीं होने के कारण पीछे लगा गए। विस्फोट का सारा असर इनोवा कार की पिछली सीट पर पड़ा। हमला इतना जोरदार था कि कार के टुकड़े और बम के स्पिंटर इस्राइली राजनयिक ताल येहोशुवा की पीठ में लगे। अगर यही बम कार के दरवाजे या फ्यूल टैंक के करीब लगाया गया होता तो उनका बचना नामुमकिन था। दाद देनी होगी इनोवा ड्राइवर मनोज शर्मा की। खुद घायल होने के बावजूद मनोज शर्मा ने हौंसला नहीं छोड़ा और गाड़ी से महिला राजनयिक को उतारा, एक ऑटो को रोककर सबसे पहले वह उसे सुरक्षित ठिकाने पर ले गया। इस्राइली दूतावास में पहुंचाने के बाद ताल येहोशुवा को पास के एक पाइवेट अस्पताल में एडमिट कराया गया जहां डाक्टरों ने उसकी पीठ में घुसे लोहे के टुकड़ों को ऑपरेशन से निकाला। राजधानी में औरंगजेब रोड पर इनोवा गाड़ी में स्टिकी बम से धमाके का मामला भले ही देश में पहला मामला हो, हॉलीवुड की फिल्मों में यह आम है। एक निश्चित टारगेट को उड़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया दिखाया जाता है। हॉलीवुड से पभावित होकर बॉलीवुड में भी अब यह पयोग में आने लगा है। स्टिकी बम का इस्तेमाल जेम्स बांड सीरिज फिल्मों के अलावा जासूसी फिल्मों में दिखाया जाता है। सिल्विसटर स्टैलोन की फिल्म स्पेशलिस्ट में स्टिकी बम का इस्तेमाल दिखाया गया है। इस बम की खासियत है लक्ष्य ही को नुकसान पहुंचाना, आसपास इसका कम असर होता है। साइज में यह छोटा होता है और इसे छिपाने व लक्ष्य पर लगाना आसान रहता है। बॉलीवुड में इस बम का इस्तेमाल सन्नी देओल की फिल्म जो बोले सो निहाल में, हाल ही में शाहरुख खान की फिल्म डॉन-2 में किया गया। पुलिस के आला अफसर भी मान रहे हैं कि विदेशी राजनयिकों की गाड़ी को उड़ाने का फॉर्मूला फिल्मों से लिया गया हो सकता है। हालांकि नक्सली इस पकार का बम इस्तेमाल करते हैं पर आतंकवादी जंग में यह भारत में पहली बार इस्तेमाल किया गया है।
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Wednesday, 15 February 2012

बेशक धमाका दिल्ली में हुआ पर निशाने पर था इजराइल

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 15th February  2012
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली में पिछले कई महीनों से कोई आतंकी घटना नहीं घटी थी और हमें लगने लगा था कि अंतत हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद पर कुछ हद तक काबू पा लिया है। सात सितम्बर 2011 को दिल्ली हाई कोर्ट में बम धमाका हुआ था जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। बेशक सोमवार को जो धमाका हुआ वह अत्यन्त गम्भीर है। बेशक इसमें किसी की मौत तो नहीं हुई पर कई और दृष्टियों से यह हाई कोर्ट परिसर में हुए धमाके से ज्यादा चिन्तापूर्ण है। सबसे पहली बात तो यह है कि धमाका ऐसी जगह हुआ जो देश की सर्वाधिक सुरक्षित जगह मानी जाती है। प्रधानमंत्री निवास से महज 400 मीटर की दूरी पर सोमवार दोपहर इजराइली दूतावास की कार में जोरदार विस्फोट हो गया। धमाके के बाद कार में आग लग गई जिससे उसमें सवार एक इजराइली महिला अधिकारी सहित चार लोग घायल हो गए। मोटरसाइकिल सवार आतंकी ने मैग्नेटिक डिवाइस (स्टिकी बम) से चलती इनोवा गाड़ी में धमाका किया। इस कार के बगल में चल रही दो अन्य कारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। इस घटना में इजराइली राजनयिक, उसका चालक व इंडिका कार में सवार दो अन्य लोग जख्मी हो गए। गम्भीर रूप से घायल राजनयिक को चन्द्रगुप्त मार्ग स्थित प्राइमस अस्पताल में आईसीयू में रखा गया है। शेष तीनों घायलों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिस जगह पर धमाका हुआ वह वीवीआईपी इलाका है जहां दोनों तरफ बड़े-बड़े नेता व मंत्रियों के बंगले हैं। पुलिस आयुक्त बीके गुप्ता के मुताबिक दूतावास में एडमिनिस्ट्रेटिव अटैची के पद पर तैनात महिला टाल येहोशुवा 3, औरंगजेब रोड स्थित अमेरिकन स्कूल में पढ़ रहे अपने बच्चों को लेने जा रही थी तभी दोपहर बाद करीब 3.16 बजे औरंगजेब रोड स्थित केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक की कोठी के सामने उनकी चलती इनोवा कार (109 सीडी 35) में धमाका हो गया। पुलिस को मिले एक चश्मदीद ने बताया कि लाल रंग की मोटरसाइकिल पर सवार हैल्मेट लगाए युवक ने चलती कार में पीछे से मैग्नेटिक डिवाइस चिपकाई और तेजी से फरार हो गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जिस तरह के बम का इस्तेमाल इस हमले में हुआ वह पहली बार देखा गया है। इसे स्टिकी बम कहा जाता है। आमतौर पर सेना ही इसका इस्तेमाल करती है। स्टिकी बम ऐसा बम होता है जिसे चलते-चलते किसी वाहन पर चिपका दिया जाता है। इसमें चिपकन का काम बम के साथ लगी मैग्नेट यानि चुम्बक करती है जो कार की लोहे की बॉडी पर हल्के से छूते ही सख्ती से चिपक जाती है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इसमें प्लास्टिक विस्फोटक का इस्तेमाल हल्केपन के लिए किया गया है। साथ ही बम फटने की टाइम सेटिंग मैकेनिज्म भी अपने में नया है। इस प्रकार के बम का इस्तेमाल होना हमारी सुरक्षा के लिए एक गम्भीर चुनौती है। जाहिर है कि यह बम या तो विदेश से लाया गया है या फिर सेना के किसी डिपो से चुराया गया है। मैंने फिल्मों में देखा है कि इस प्रकार के बम को चलते टैंक पर चिपका दिया जाता है जिससे टैंक उड़ जाता है। यह विस्फोट महज एक इत्तेफाक नहीं था। सोमवार को ही जार्जिया की राजधानी तिब्लिसी स्थित इजराइली दूतावास पर ऐसा ही हमले की कोशिश हुई। इजराइली रेडियो ने कहा है कि एक कर्मचारी ने विस्फोटों से लैस एक कार दूतावास के पास देखी थी और इसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने वहां पहुंचकर बम को निक्रिय कर दिया। बाद में इस घटना की जानकारी दूतावास को दी गई। इसके बाद दुनियाभर के इजराइली दूतावासों को अलर्ट जारी किया है। उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में अजरबैजान, थाइलैंड और अन्य स्थानों पर भी इजराइली ठिकानों पर हमले की साजिश नाकाम की गई है। थाइलैंड में तो पिछले माह एक हिजबुल्ला से जुड़े लेबनान के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। उसके पास से विस्फोटक बरामद भी हुए थे। चूंकि निशाने पर इजराइली थे इसलिए यह भी कहा जा सकता है कि इसके पीछे इस्लामिक कट्टरपंथियों का हाथ हो सकता है। इजराइली प्रधानमंत्री ने घटना की जानकारी देते हुए कहा कि इसके पीछे आतंकी संगठन हिजबुल्ला और ईरान का हाथ है। इसके पहले 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में खबद हाउस को निशाना बनाया गया था जहां सात इजराइली मारे गए थे। हिजबुल्ला लेबनान का मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन और राजनीतिक दल है। रविवार को उसके एक टॉप नेता इमाद मुग्निया की चौथी बरसी थी। मुग्निया एक मिसाइल अटैक में मारा गया था। हिजबुल्ला ने मुग्निया की मौत के लिए इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद को जिम्मेदार ठहराकर बदला लेने की कसम खाई है। ईरान में भी एक उच्च कोटि के वैज्ञानिक को पिछले दिनों मिसाइल हमले में मार दिया गया था। ईरान ने भी इजराइल का हाथ होने का आरोप लगाया था। इस हमले में एक ईरानी आतंकी संगठन अमाद मधुनियाह का नाम भी आ रहा है। अब तक देश में जितनी भी आतंकी वारदातें हुई हैं, उसमें कभी इस संगठन का नाम नहीं आया। हालांकि पुलिस का मानना है कि संगठन का मुख्य उद्देश्य इजराइली नागरिकों को नुकसान पहुंचाना था। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि ईरान ने पाकिस्तानी आतंकियों के जरिये वारदात को अंजाम दिया होगा। इस सिलसिले में ज्यादा शक हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तोयबा पर जाता है। हमें याद रखना चाहिए कि 26/11 मुंबई हमलों में भी इजराइली नागरिकों को निशाना बनाया गया था। वारदात के पीछे कोई भी हो पर यह भी तय है कि उन्हें स्थानीय मदद जरूर मिली है। क्योंकि मोटरसाइकिल सवार एक हिन्दुस्तानी ही होगा। मैग्नेट बम का उपयोग न केवल दिल्ली पुलिस बल्कि तमाम सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिन्ता का कारण होना चाहिए। अब तक इस तरह के बमों का उपयोग ईरान और कुछ अरब देशों में होता पाया गया है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में हुए इस हमले में नाइट्रोग्लिसरीन, सल्फर व पोटाशियम क्लोरेट का इस्तेमाल किया गया है। नाइट्रोग्लिसरीन का उपयोग इसी तरह के विस्फोट कराने में किया जाता है। अरब देशों और इजराइल के बीच की लड़ाई में अब भारत भी आ गया है। सोमवार को यह घटना हमारे अंदरूनी कारणों से नहीं हुई है, यही चिन्ता की बात है। इजराइल इस हमले का बदला जरूर लेगा। ईसाई बनाम इस्लाम लड़ाई आज की नहीं हजारों वर्षों पुरानी है। ईरान पर किसी भी समय अब इजराइल-अमेरिका हमला कर सकते हैं। कहीं दिल्ली के इस विस्फोट से मामला और ज्यादा न बढ़ जाए?
Anil Narendra, Daily Pratap, Delhi Bomb Case, Delhi High Court, Israil, Terrorist, Vir Arjun

Wednesday, 1 February 2012

Can US ask Israel to attack Iran?

- Anil Narendra
The confrontation between Iran and Western countries is entering a dangerous phase. In Brussels, the European Union, under the leadership of the US has opened a new front against the Iranian leaders. US have been asking the Asian countries to stop importing crude oil from Iran. Iran is being pressurized from all sides and its currency is weakening. In response to the American campaign, Iran has threatened closure of the Strait of Hormuz, situated at the mouth of Persian Gulf. The Iranian threat has created concern in the world oil markets. Military experts are, however, questioning the ability of Iran to close the Strait. But, US and its allies have already warned Iran of stern action, in case he closes the Strait. The UAAS Abraham Lincoln along with British and French warships has entered the Persian Gulf without any resistance from Iran. Almost half of oil produced in the world is transported by tankers through identified sea lines. Though this oil blockade in the Strait of Hormouz in the Persian Gulf is temporary, yet it can escalate the energy cost world over to new heights. Terming the decision regarding restriction on purchase of the Iranian oil as unfair, Iran has said that this decision will have to be reversed very soon. Iran has clarified that its nuclear programme is for fulfilling its energy needs and it would continue with it in the face of all restrictions. Meanwhile, announcing the EU decision, Nicolas Sarkozi, the French President, Angela Merkel and the British Prime Minister, David Cameroon said in a joint statement that our message was clear. We have no enmity towards the Iranian people. But the Iranian leadership has failed to restore the trust of the international community regarding the peaceful nature of their nuclear programme. The European leaders have made it clear that they would not agree to Iran procuring nuclear weapons. The three leaders asked Iran to stop its sensitive nuclear activities immediately and called upon it to fully fulfill its international obligations.
The US is also afraid that Israel may take advantage of the situation and attack Iran. Quoting Pentagon sources, the Wall Street Journal has said that US President Barak Obama, Secretary of Defence, Leon Panetta and other senior officials have sent messages to Israel, warning it of grave consequences of attack on Iran. Obama also talked to Israeli President, Benjamin Netanyahu on phone. A few days earlier, an Iranian nuclear scientist was killed in a car bomb blast in Tehran. Iran had called Israel responsible for this attack. Immediately after the attack, an Iranian official said that the way, two motorcycle-borne assailants targeted the vehicle with magnetic bomb, was similar to the modus operendi adopted in killing of three other scientists during last two years. There were even anti-US slogans in the Iranian Parliament. The tension prevailing between Iran and these Western countries does not augur well for the rest of the world. If oil supply is obstructed, it would have its effect on India also. If it comes to war with Israel, then Iran would try to take Israel head on. On the other hand, America may use Israel in attacking Iran. The greatest threat from the Iranian nuclear programme is for Israel and it would never like Iran to become a nuclear country. In case, Israel takes military action against Iran, other Arab countries in the Middle East might be compelled to join hands with Iran against Israel. If it happens, already disturbed Middle East might become more disturbed. In fact, it has been the American policy to take control of the oil reserves of Arabian countries on one pretext or the other. Let us hope this confrontation is avoided.

Tuesday, 31 January 2012

ईरान पर क्या अमेरिका इजराइल से हमला करवा सकता है?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 30th January  2012
अनिल नरेन्द्र
ईरान बनाम पश्चिम देश लड़ाई खतरनाक दौर में आती जा रही है। यूरोपीय संघ ने अमेरिका के नेतृत्व में ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के लिए ब्रुसेल्स में ईरानी नेतृत्व के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया है। अमेरिका एशियाई देशों से भी ईरान से कच्चे तेल का आयात रोकने का आग्रह कर रहा है। इससे ईरान पर चौतरफा दबाव बन रहा है और उसकी मुद्रा कमजोर हो रही है। अमेरिकी मुहिम के जवाब में ईरान के अधिकारियों ने फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित होर्मुज जलडमरू बन्द करने की धमकी दी है। ईरान की इस धमकी की वजह से विश्वभर के तेल बाजारों में चिन्ता है। हालांकि सैन्य विशेषज्ञ ईरान की जलडमरू बन्द करने की क्षमता पर साल उठा रहे हैं। लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगी पहले ही जलडमरू मध्य बन्द करने पर तीव्र कार्रवाई करने की चेतावनी दे चुके हैं। ब्रिटेन और फ्रांस के जंगी जहाजों के साथ अमेरिका का विमानवाहक पोत यूएएएस अब्राहम लिंकन बिना किसी प्रतिरोध के फारस की खाड़ी में प्रवेश कर गया। दुनिया के कुल तेल उत्पादन का आधा हिस्सा तय समुद्री मार्गों से टैंकरों द्वारा ले जाया जाता है। हालांकि फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरू मध्य पर यह प्रतिबंध अस्थायी है फिर भी इस प्रतिबंध की वजह से दुनिया में ऊर्जा की लागत में काफी वृद्धि हो सकती है। ईरान ने उससे कच्चा तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा है कि इसे जल्द ही वापस लेना पड़ेगा। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए है और वह तमाम प्रतिबंधों के बावजूद जारी रहेगा। दूसरी ओर यूरोपीय संघ की घोषणा करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सर्कोजी, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने एक संयुक्त बयान में कहा कि हमारा संदेश साफ है। हमारी ईरानी जनता के साथ कोई लड़ाई नहीं है। लेकिन ईरानी नेतृत्व अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण प्रवृत्ति के बारे में अंतर्राष्ट्रीय विश्वास बहाल करने में नाकाम रहा है। यूरोपीय नेताओं ने कहा कि हम ईरान का परमाणु हथियार हासिल करना स्वीकार नहीं करेंगे। तीनों नेताओं ने ईरान के नेतृत्व से उसकी संवेदनशील परमाणु गतिविधियां तत्काल बन्द करने और अपनी अंतर्राष्ट्रीय बाध्यताओं को पूरी तरह पालन करने का आह्वान किया।
अमेरिका को इस बात की आशंका भी है कि कहीं इस विवाद का फायदा उठाते हुए इजराइल ईरान पर हमला न कर दे। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पेंटागन सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, रक्षामंत्री लियोन पेनेटा और अन्य शीर्ष अधिकारियों ने इजराइली नेताओं को कई निजी संदेश भेजे हैं जिसमें हमले के गम्भीर नतीजों की चेतावनी दी गई है। ओबामा ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतात्याहू से फोन पर बात भी की है। कुछ दिन पहले तेहरान में एक कार बम विस्फोट में ईरान के एक परमाणु वैज्ञानिक की मौत हो गई थी। ईरान ने इस हमले के लिए इजराइल को जिम्मेदार ठहराया था। ईरान के एक अधिकारी ने इस हमले के फौरन बाद कहा कि दो लोगों ने एक मोटरसाइकिल पर आकर जिस तरह वाहन को मैग्नेटिक बम से अपना निशाना बनाया, वह तरीका वैसा ही है जैसा पिछले दो साल में तीन और वैज्ञानिकों को निशाना बनाने के लिए अपनाया था। ईरान की संसद में अमेरिकी मुर्दाबाद, इजराइल मुर्दाबाद के नारे तक लगे। ईरान और इन पश्चिमी देशों के बीच चल रहा तनाव सारी दुनिया के लिए खतरे का संकेत है। अगर तेल सप्लाई प्रभावित होती है तो भारत भी प्रभावित हो सकता है। ईरान का प्रयास होगा कि अगर लड़ाई की नौबत आती है तो वह इजराइल से पंगा लेना चाहेगा। दूसरी ओर अमेरिका भी इजराइल के माध्यम से ईरान पर हमला करवा सकता है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम से सबसे ज्यादा खतरा इजराइल को ही है और वह किसी भी कीमत पर ईरान को एक परमाणु सम्पन्न देश बनने से रोक सकता है। अगर इजराइल ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैनिक कार्रवाई करता है तो सम्भव है कि मध्य पूर्व के अन्य अरब देश ईरान का साथ देने पर मजबूर हो जाएं। अगर ऐसा होता है तो पहले से ही डिस्टर्वड मध्य पूर्वी और डिस्टर्व हो जाएगा। अमेरिका की तो खैर यह नीति पुरानी है कि अरब देशों के तेल भंडारों पर उल्टे-सीधे बहाने बनाकर कब्जा करे। उम्मीद करते हैं कि टकराव टल जाए।
America, Anil Narendra, Daily Pratap, Iran, Israil, Vir Arjun