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Wednesday, 6 June 2012

सचिन तेंदुलकर ने आरम्भ की अपनी राजनीतिक पारी


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 6 June 2012
अनिल नरेन्द्र
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने अपनी राजनीति की पारी आरम्भ कर दी है। सोमवार को सचिन माननीय संसद सदस्य बन गए। काफी लम्बे समय से सचिन का इंतजार हो रहा था कि वे आकर संसद की सदस्यता की शपथ लें। लेकिन आईपीएल क्रिकेट में व्यस्त होने की वजह से सचिन दिल्ली नहीं आ पा रहे थे। अंतत उन्होंने शपथ लेने का समय निकाल ही लिया। सोमवार को सचिन ने राज्यसभा चेयरमैन हामिद अंसारी के कैबिन में शपथ लेते वक्त सचिन के साथ पत्नी अंजलि भी मौजूद थीं। शपथ लेने के बाद सचिन ने कहा कि फिलहाल मैं क्रिकेट पर पूरा ध्यान दूंगा। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह संसद के लिए समय निकाल पाएंगे तो उनका कहना था कि मैंने किसी से नहीं कहा था कि मुझे राज्यसभा का सदस्य बना दीजिए। मैं मनोनीत सदस्य हूं, यह सम्मान है। लेकिन हकीकत है कि मैं आज क्रिकेट के कारण ही यहां हूं। सचिन ने यह भी कहा कि मुझे खुशी होगी अगर मैं एक ऐसे शख्स के तौर पर जाना जाऊं जिसने सिर्प क्रिकेट की जगह बाकी सभी खेलों के लिए भी योगदान दिया। उधर अन्ना हजारे ने उम्मीद जताई कि सचिन लोकपाल बिल पर समर्थन देने के अलावा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएंगे। सचिन को राज्यसभा में लाने के पीछे कांग्रेस की रणनीति शायद यही रही होगी कि इससे युवाओं के बीच यह राजनीतिक संदेश जाए कि कांग्रेस तेंदुलकर जैसे खिलाड़ियों को सम्मान देकर पूरी युवा पीढ़ी से कहना चाहती है कि वे आगे बढ़े, तो कांग्रेस इसके लिए हर पहल करने को तैयार है।
इधर तमाम क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक और खुश खबरी है। आईसीसी क्रिकेट कमेटी ने सिफारिश की है कि वन-डे और ट्वंटी-ट्वंटी के समान टेस्ट मैच भी रात को आयोजित हों। सिफारिश के अनुसार नाइट टेस्ट मैच दो देशों की आपसी सहमति पर निर्भर होगा। समिति ने डकवर्थ लुइस नियम को सर्वश्रेष्ठ विकल्प मानते हुए इसे बरकरार रखने का फैसला किया है। साथ ही खेल के अन्य क्षेत्रों में मामूली बदलाव किए हैं। वन-डे मैच में एक ओवर में शार्ट पिच गेंद यानि बाउंसर की संख्या एक से बढ़ाकर दो की जा रही है। अम्पायर फैसला समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) यथावत रहेगी। एक ऐसा सेंसर तैयार किया गया है जो मैचों के दौरान पहना जा सकता है और वह बताएगा कि गेंद फेंकने के दौरान गेंदबाजों की कोहनी सीधी होती है या नहीं? पॉवर प्ले पहले 10 ओवर तक सीमित रहेगा और पांच ओवर का बल्लेबाजी पॉवर प्ले 40वें ओवर तक पूरा कर लेना होगा। गैर-पॉवर प्ले वाले ओवरों में केवल चार खिलाड़ियों को 30 गज के घेरे के बाहर रहने की अनुमति होगी। टेस्ट में आधिकारिक ड्रिंक्स ब्रेक के अलावा ड्रिंक्स को मैदान में लाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही टीमें रेफरल में भी समय बर्बाद नहीं कर सकेंगी। 2014 से प्रत्येक दो साल बाद 16 टीमों का ट्वंटी-ट्वंटी वर्ल्ड कप आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी आईसीसी के महाप्रबंधक (क्रिकेट) डेव रिचर्ड्सन ने दी। आईसीसी ने वर्षा प्रभावित वन-डे मैचों में विजेता का निर्धारण करने के लिए लागू होने वाला डकवर्थ लुइस नियम के स्थान पर एक भारतीय इंजीनियर द्वारा तैयार वीजेडी नियम पर विचार किया तो लेकिन उसने डकवर्थ लुइस नियम को जारी रखने का फैसला किया। आईआईटी चेन्नई के छात्र रहे बी. जयदेवन ने पिछले 12 सालों से चल रहे डकवर्थ लुइस नियम में कई खामियां उजागर करते हुए एक वैकल्पिक नियम बनाया है पर आईसीसी ने उसे फिलहाल स्वीकार नहीं किया। सचिन को अपनी नई पारी शुरू करने पर ढेर सारी बधाई।

Sunday, 29 April 2012

सचिन और रेखा के तीर से कांग्रेस ने साधे कई निशाने

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29 April 2012
अनिल नरेन्द्र
गुरुवार को राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने मनोनीत राज्यसभा सदस्यों की सूची पर हस्ताक्षर कर सचिन तेंदुलकर, फिल्म अभिनेत्री रेखा और कारोबारी अनु आगा को राज्यसभा सदस्य बना दिया। क्रिकेट के मैदान से शुरू हुई सचिन तेंदुलकर की पारी अब संसद तक पहुंच गई। किसी खेलते हुए खिलाड़ी को राज्यसभा के लिए मनोनीत करने का यह पहला मौका है। शतकों पर शतक लगाने के बाद सचिन को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठती रही थी। गुरुवार को सचिन ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके निवास 10 जनपथ पर मुलाकात की और तब से इस बात की अटकलें तेज हो गई थीं कि वह राज्यसभा में मनोनीत सदस्य के तौर पर आ सकते हैं। सोनिया ने गुरुवार को औपचारिक रूप से सचिन को इस बात का प्रस्ताव दिया जिसे वह मान गए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सचिन ने जब अपना सौवां अंतर्राष्ट्रीय शतक बनाया था तभी से कांग्रेस अध्यक्ष इन्हें बधाई देना चाहती थीं और गुरुवार को बधाई देने के बहाने उन्होंने सचिन के सामने राज्यसभा में आने का प्रस्ताव औपचारिक तौर पर रख दिया। सोनिया के साथ सचिन ने आधा घंटा बिताया। सचिन को राज्यसभा में मनोनीत कर कांग्रेस ने एक तीर से कई शिकार करने का प्रयास किया है। अब कांग्रेस ने उस विवाद को भी खत्म कर दिया कि ध्यान चन्द और सचिन को भारत रत्न दिया जाए। शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कांग्रेस की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस बिना स्वार्थ के किसी को कोई पद नहीं देती। ऐसे में सचिन को कांग्रेसी झांसे से सावधान रहना चाहिए। उनका मानना है कि कांग्रेस नेता महाराष्ट्र में अपनी राजनीति के लिए सचिन की लोकप्रियता को भुनाना चाहते हैं। टीम अन्ना की सिपहसालार किरण बेदी ने भी कहा कि सचिन को कांग्रेस के राजनीतिक जाल से बचकर रहना चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि केंद्र सरकार और कांग्रेस तमाम संकटों से घिरी है, ऐसे में वह सचिन का इस्तेमाल करना चाहती है जबकि सचिन तो पूरे देश के हीरो हैं। कांग्रेस की राजनीति की बात का `रेखा को मनोनीत करने पर' हमें आश्चर्य कम नहीं हुआ। मेरे पास तरह-तरह के एसएमएस आ रहे हैं। एक आया कि जो काम अमिताभ तमाम जिन्दगी नहीं कर सके वह कांग्रेस ने कर दिखाया। जया और रेखा को एक हाउस में लाकर बिठा दिया। एक अन्य आया हेमा, रेखा, जया और सुषमा सब की पसंद (निरमा) राज्यसभा। अब निरमा का अगला विज्ञापन राज्यसभा में बनेगा। समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन को अपनी संख्या के बल पर यूपी के कोटे से राज्यसभा पहुंचाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कभी कांग्रेस से जुड़े रहे और फिर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के हम सफर अमिताभ बच्चन को काउंटर करने के लिए कांग्रेस ने जो दांव चला है उसे रेखा के माध्यम से एक तीर से कई शिकार किए गए हैं। फिल्मी दुनिया से राज्यसभा सदस्यों को लाने की भले ही परम्परा और संवैधानिक व्यवस्था रही हो लेकिन इस कड़ी में सुनील दत्त एक ऐसी शख्सियत थे कि उनकी राजनीतिक सूझ-बूझ और कार्यकुशलता की आज भी मिसाल दी जाती है। तुलनात्मक दृष्टिकोण से रेखा अब 57 वर्ष की उम्र में राजनीतिक जमीन पर क्या देश के लिए एक मिसाल स्थापित कर पाएंगी? बहरहाल सचिन तेंदुलकर और रेखा को बधाई।
Anil Narendra, Congress, Daily Pratap, Rekha, Sachin, Samajwadi Party, Vir Arjun

Tuesday, 20 March 2012

सचिन का कभी न टूटने वाला सैकड़ों का रिकॉर्ड

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 20 March 2012
अनिल नरेन्द्र
शुक्रवार का दिन इसलिए एक ऐतिहासिक दिन बन गया इसलिए नहीं कि उस दिन प्रणब मुखर्जी ने बजट पेश किया था बल्कि इसलिए कि उस दिन सचिन तेंदुलकर ने अपना महान शतक पूरा किया। पता नहीं इन बजटों के सचिन के शतकों से क्या संबंध है, क्योंकि उन्होंने पहले भी रेल बजट के दिन दोहरा शतक पूरा किया था। दिन की शुरुआत संसद में प्रणब मुखर्जी ने जनता को कठोर बजट का दर्द देने के साथ की। लेकिन शाम ढलते-ढलते सचिन के शतक ने इस दर्द को दूर कर दिया। बजट भाषण खत्म होने के बाद सभी अपने टीवी क्रीनों पर चिपक गए। सचिन के बल्ले से निकलने वाले एक-एक रन पर उनके फैंस की दिल की धड़कन तेज होती गई। मीरपुर के शेर-ए-बंगला स्टेडियम में जैसे ही सचिन का सौवां शतक पूरा हुआ देश झूम उठा। इस मैच में भले ही भारत हार गया हो लेकिन यह दिन दोनों देशों के लिए अपने-अपने कारणों से ऐतिहासिक बन गया। खेल में हार-जीत तो चलती रहती है। बेशक उस दिन बंगलादेश ने कमाल का खेल दिखाते हुए टीम इंडिया को हरा दिया पर शायद ही कोई क्रिकेट प्रेमी ऐसा हो जो यह चाहता हो कि सचिन 95-96 रन बनाकर आउट हो जाते और भारत मैच जीत जाता? इस मैच को अंतत सचिन के सौवें सैकड़ों के लिए याद किया जाएगा न कि बंगलादेश की जीत के लिए। राजनेता, राजनेता ही होते हैं। उस दिन भी वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी पीछे नहीं रहे। कहे कि पिछले साल जब भारतीय टीम ने 28 साल बाद क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीता था तब भी मैं ही वित्त मंत्री था और आज जब सचिन ने सौवां शतक पूरा किया तब भी मैं ही वित्त मंत्री हूं। मतलब वित्त मंत्री होना टीम इंडिया के लिए लक्की साबित हुआ। अब देखना यह है कि वही लक फैक्टर मनमोहन सिंह को कितना नसीब होता है जिन्हें फिलहाल इसकी सख्त जरूरत है। कहा जाता है कि रिकॉर्ड बनते हैं टूटते हैं लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं, जहां तक पहुंचना खासा मुश्किल होता है। सचिन के महाशतक का रिकॉर्ड भी कुछ ऐसा ही है। असल में इस तक पहुंचने के लिए किसी भी खिलाड़ी को लगातार दो दशक तक (कम से कम) अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होगी और मौजूदा समय में ऐसा कोई खिलाड़ी नजर नहीं आ रहा है। सचिन के बाद रिकी पोंटिंग हैं जिन्होंने शयाद 71 सैकड़े बनाए हैं और अब वह रिटायरमेंट के करीब हैं। सचिन पर इस सौवें शतक का कितना बोझ रहा होगा, उनकी इस टिप्पणी से ही अन्दाजा लगाया जा सकता है जब यह शतक लगाने के बाद सचिन ने कहाöमुझे अब तक सौवें शतक का विश्वास नहीं हो रहा, लेकिन निश्चित तौर पर मेरे सिर पर से 50 किलो का बोझ हट गया है। सचिन को नया हेयर स्टाइल शूट किया है। सचिन ने अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर के दौरान कई बार हेयर स्टाइल और अपने लुक को बदला है लेकिन उनका नया हेयर स्टाइल शायद उनके सौवें अंतर्राष्ट्रीय महाशतक के लिए लक्की साबित हुआ। अब जब सचिन ने यह ऐतिहासिक कीर्तिमान पार कर लिया है मुझे लगता है कि वह खुलकर खेलेंगे, बिना किसी दबाव के और टैंशन के। वैसे उनके शुभचिन्तक भी उन्हें टैंशन फ्री नहीं रखना चाहते। एक साल चार दिन के इंतजार के बाद सौ सेंचुरी पूरी करते ही सचिन पर नया प्रेशर बनने लगा है। अब उन पर इंटरनेशनल वनडे मैचों में सेंचुरी की हाफ सेंचुरी लगाने का प्रेशर आएगा। बंगलादेश के खिलाफ बनाई गई सेंचुरी वनडे मैचों में उनकी 49वीं सेंचुरी है। इससे उनके फैंस की यह इच्छा स्वाभाविक ही है कि वह उनसे वनडे की 50वीं सेंचुरी भी पूरा करें और इस तरह टेस्ट के साथ-साथ वनडे में भी 50-50 सेंचुरी का रिकॉर्ड पूरा करें। सचिन को हम तहे दिल से बधाई देते हैं। अभी लम्बा सफर तय करना है सचिन को।
Anil Narendra, Cricket Match, Daily Pratap, Sachin, Vir Arjun

Sunday, 17 April 2011

इंडिया को हरगिज पाकिस्तान में नहीं खेलना चाहिए

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 17 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने पर विपक्ष की तमाम आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए मनमोहन सरकार ने अपने संबंधों को सुधारने की न केवल अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान में मैच खेलने पर लगी पाबंदी हटा ली है। यह समझा जा रहा है कि पाकिस्तान में सुरक्षा हाल ठीक रहे तो इस वर्ष के अन्त में भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में एक दिवसीय मैच खेलने जा सकती है। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पड़ोसी देश में सुरक्षा माहौल का जायजा लेने के बाद सरकार ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को अपनी सुविधा के अनुसार पाकिस्तान में मैच की सिद्धांतत अनुमति दे दी है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल के कैलेंडर के मुताबिक अगले वर्ष फरवरी तक भारतीय टीम का दौरा कार्यक्रम पहले से ही तय है। इसमें फिलहाल पाकिस्तान शामिल नहीं है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गिलानी के बीच बनी सहमति के हिसाब से पहले भारतीय टीम पाकिस्तान का दौरा करेगी और उसके बाद पाकिस्तानी टीम भारत का। बाद में दोनों टीमों के बीच एक फाइनल मैच शारजाह में भी आयोजित किया जा सकता है। सरकार ने इस मामले में विपक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया है।
हम भारत सरकार के फैसले से सहमत नहीं हैं और इसका विरोध करते हैं। जो देश अपने पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सांसद, खुफिया मुख्यालय को नहीं बचा सकता वह भला भारतीय टीम की सुरक्षा क्या करेगा? शायद भारत सरकार लाहौर का वह आतंकी हमला भूल गई जब श्रीलंकाई क्रिकेट खिलाड़ियों पर लश्कर के सूरमाओं ने गोलियां चलाई थीं? हमारा अनुभव तो यह है कि जब-जब भारत ने अपनी तरफ से शांति की पहल की है भारत को पाक प्रायोजित आतंकी हमले का जवाब मिला है। ऐसे में जब आतंकी राणा के कबूलनामे के बाद भारत को पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए था तब भारत क्रिकेट की सीरीज शुरू करने की कवायद में जुटा है। विदेश मंत्री कहते हैं कि शांतिवार्ता, खेल और आतंकवादियों को सजा दिलाने के काम साथ-साथ जारी रहेंगे। सरकार को चाहिए था कि वह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की करतूतों की कलई खोलती और उस पर आतंकी शिविरों को बन्द करने का दबाव बनाती, लेकिन इसकी बजाय वह उससे क्रिकेट के रिश्ते बहाल करने में लगी हुई है। टीम इंडिया पाकिस्तान की टीम के साथ खेले किन्तु पाकिस्तान की जमीन पर नहीं बल्कि किसी दूसरे देश के स्टेडियम में। पाकिस्तान की टीम के साथ खेलने में कोई एतराज नहीं है, एतराज सिर्प पाकिस्तान के तालिबानी आतंकियों से टीम इंडिया की सुरक्षा को मिल रही चुनौतियों से है।
भारत सरकार के पाकिस्तान की भूमि पर मैच खेलने के फैसले से टीम इंडिया के खिलाड़ी भी सहमत नहीं हैं। एक खिलाड़ी ने कहा कि पाकिस्तान के हालात बेकाबू हैं, वहां जितनी भी सिक्योरिटी क्यों न हो, कोई सुरक्षित नहीं। जब वह बेनजीर भुट्टो व श्रीलंका टीम को नहीं बचा सके तो इस बात की क्या गारंटी है कि हम नहीं मारे जाएं? एक अन्य का कहना था कि अगर क्रिकेट में इतनी राजनीति होगी  तो वह क्रिकेट कहां रहेगा? फिर टीम इंडिया ने खुलकर भी पाकिस्तान को क्या कुछ नहीं कहा? सचिन ने कहा था कि मुंबई में जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। क्रिकेट ने इससे कुछ नहीं सीखा। मुझे आशा है कि मेरा यह शतक लोगों में खुशी बढ़ाएगा। मैं एनएसजी कमांडो, ताज होटल के कर्मियों, पुलिस, जनता को प्रणाम करता हूं। सचिन ने यह बात दिसम्बर 2008 में कही थी। विश्व कप के फाइनल के पहले पाकिस्तान को हराने के बाद गौतम गम्भीर ने कहा : हम जागरूक हैं और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। अगर हम फाइनल जीत जाते हैं तो मैं इस जीत को मुंबई हमले में मारे गए लोगों को समर्पित करूंगा। मेरे विचार में पाक से जीत और फाइनल में जीत भी उन्हें समर्पित की जानी चाहिए।