यह कहना है भारतीय मूल के पायलट स्मित मच्छार का जब वह अपनी और 170 विमान यात्रियों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पीएम मोदी ने शुक्रवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार से 9 मिनट वीडियो कॉल की। पीएम ने कहा, आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिन्दुस्तानी दूसरों की जान बचाने के लिए खुद को भी जोखिम में डालने वाले लोग हैं। स्मित ने उस पल का अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैं अपनी लाइफ के लिए लड़ रहा था, मैं नीचे गिर गया था, घाव हो चुके थे और मैं फंस गया था। उन्होंने कहा कि जब भी दर्द होता है तो मैं हनुमान चालीसा ही बोलता हूं और उस वक्त भी मैं हनुमान चालीसा ही बोल रहा था और मुझे पता है कि भगवान हनुमान ने ही मुझे बचाया। दुबई से तेल अवीव (इजरायल) जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में कैप्टन स्मित मच्छार ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, वह वाकई ही बेमिसाल है। स्मित ने बताया कि मैं 17 साल से जहाज उड़ा रहा हूं। पिछले 11 साल से कैप्टन हूं और मुझे पता चलता है, आंख बंद करके भी जहाज में क्या हो रहा है। जब मैं नीचे गिरा हुआ था, तब मुझे एहसास हो रहा था कि एयरक्राप्ट नीचे जा रहा है। मैंने अपने आप से कहा कि स्मित बस एक लास्ट पुश और दरवाजा खोल दे। तब मैंने किसी तरह दरवाजा खोला और बाकी सब आ गए और सबने अपना रोल निभाया। मुझे बस ये पता था कि मैं उन सबको मरने नहीं दे सकता। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात के प्रॉस्टिक्यूटर जनरल ने शनिवार को कहा कि फ्लाईदुबई की उड़ान एफ जेड 1073 के को-पालयट ने उड़ान के दौरान आतंकवादी हमला किया और विमान को क्रैश कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पायलट ने कॉकपिट के अंदर व्रैश एक्स से पायलट पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। व्रैश एक्स आमतौर पर कॉकपिट में रखा जाता है और दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि घटना की परिस्थितियों, हमले के मकसद और इससे जुड़े किसी भी संबंध का पता लगाने के लिए जांच जारी है। उधर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि को-पायलट ओमानी नागरिक है। हालांकि फ्लाईदुबई ने किसी आधिकारिक रूप से को-पायलट की राष्ट्रीयता के बारे में कुछ भी नहीं कहा है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी को-पायलट ओमान का नागरिक है। अधिकारियों ने बताया कि 2024 में ओमान एयर में को-पायलट ट्रेनी पर काम करने के दौरान को-पायलट हमाम अल हमामी के पास चरमपंथ से जुड़ी सामग्री पाई गई थी। इसके बावजूद उसे एयरलाइन में प्रशासनिक भूमिका में काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। इस घटना ने एक बार फिर विमानन क्षेत्र की अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीरता से पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। विमानन सुरक्षा के सामने एक नया सवाल पैदा होता है। अब तक सुरक्षा का बड़ा हिस्सा बाहरी खतरे को लेकर व रोकने पर केंद्रित रहा है। 9/11 के बाद कॉकपिट के दरवाजे मजबूत किए गए, यात्रियों की स्क्रीनिंग कड़ी हुई, सामान की जांच के तरीके बेहतर हुए और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ी है। लेकिन फ्लाईदुबई की घटना बताती है कि सुरक्षा की अगली चुनौती विमान के भीतर मौजूद ऐसे संभावित खतरों की पहचान के रूप में हो सकती है। पायलटों की मानसिक सेहत की लगातार जांच करने के लिए बेहतर सिस्टम की जरूरत है। लेकिन ये हो कैसे ये चुनौती है। भारत में आए दिन पायलटों के नशे में होने की शिकायत आती रही है। सीएनएन ने लिखा कि फ्लाईदुबई की उड़ान में कैप्टन पर हमला करने वाले संदिग्ध पायलट को ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन की नौकरी से हटा दिया गया था, ऐसा उसके चरमपंथी विचारों को लेकर किया गया था। फिर इसको फ्लाईदुबई ने विमान उड़ाने की अनुमति क्यों दी? मामले की जांच हो रही है। यूएई में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। सोशल मीडिया में एक अलग कहानी चल रही है। ईरान और ही कुछ बता रहा है। क्या हुआ, कैसे हुआ, किसने करवाया यह तो वास्तविक जांच से ही पता चलेगा? पता चले भी या नहीं वैसे किसी ने ठीक ही कहा हैः सॉरी ब्रोः फ्लाप शो, बैड स्क्रिप्ट।
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