लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलने का समय मांगा था। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इंकार कर दिया। विपक्षी नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा कि वे उनसे मिलकर चुनाव आयोग और कथित वोट चोरी समेत कई मुद्दों पर अपनी चिंताएं उनके सामने रखना चाहते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने इस मुलाकात को ठुकराते हुए कहा कि जिन मुद्दों को लेकर मुलाकात का अनुरोध किया गया है, उनसे जुड़े मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे मामलों पर अलग बैठक करना न्यायिक मर्यादाओं के अनुकूल नहीं होगा। मुख्य न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं को सुझाव दिया कि वह एक याचिका दायर कर दें। उस पर वह सुनवाई करेंगे। मुख्य न्यायाधीश के सुझाव पर अमल करते हुए तमाम विपक्षी नेता सोमवार को एक मार्च करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 12 अक्टूबर को यह मार्च निकाला गया। इत्तेफाक से मुझे इन जुलूस को देखने का अवसर मिला। हुआ यूं कि मैं लगभग 3 बजे अपने कार्यालय प्रताप भवन बहादुर शाह जफर मार्ग जा रहा था। जब हम इंडिया गेट पहुंचे तो तिलक मार्ग का रास्ता बंद था। मजबूरन हमें कॉपरनिक्स मार्ग से मंडी हाउस के रास्ते से जाना पड़ा। मंडी हाउस पहुंचने पर मैंने देखा कि वह पूरी तरह भरा हुआ है। वहां सैकड़ों प्रदर्शनकारी पहुंचे हुए थे। वहां से लेडी इरविन कॉलेज वाला रोड तिलक ब्रिज तक का ब्लाक था। मजबूरन हम बाराखंभा रोड से जाने लगे। बाराखंभा रोड पर सैकड़ों लोग सड़क पर थे। इनमें ज्यादातर वकील थे। वह शांतिपर्वूक खड़े थे या सड़क पर बैठे थे। उन्होंने मेरी गाड़ी को रास्ता दिया और भीड़ में मैं ललित होटल होते हुए कार्यालय पहुंचा। मैंने अपने जीवन में इतनी भीड़ सिर्फ एक बार पहले देखी थी जब रामलीला ग्राउंड में अन्ना आंदोलन हुआ था। पर बाद में मैंने टीवी पर भीड़ देखी तो मैं हैरान हो गया। दिल्ली में वर्षें बाद ऐसी भीड़ देखी। यह भीड़ कोई किराए पर लाए लोग नहीं थे, जो बसों में दबाव के चलते आने पर मजबूर हुए। भीड़ में बुजुर्ग, अन्य उम्र के लोग, लड़के, लड़कियां सभी तरह के लोग थे जो अपने पैसों से अपनी मजी से इस मार्च में शामिल हुए। पुलिस ने भी इस बात पर बहुत नियंत्रण, समझदारी से काम किया। उन्होंने कहीं भी किसी प्रकार की जोर-जबर्दस्ती नहीं की। भीड़ इतनी थी कि राहुल गांधी, प्रियंका की जान को खतरा हो सकता था। हालांकि उनको जेड प्लस की सुरक्षा मिली हुई है जिसमें 45-50 सुरक्षा गार्ड होते हैं, उस दिन मुश्किल से चार-पांच ही नजर आए। राहुल, प्रियंका को थोड़ा अपनी सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसी अनियंत्रित भीड़ में कुछ भी हो सकता है। खैर 11 विपक्षी नेताओं ने एसआईआर में बड़े स्तर पर नाम काटने और गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए संयुक्त याचिका दायर की। इसमें निर्वाचन आयोग, सीईसी ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधु व विवेक जोशी पक्षकार बनाए गए हैं। वोट चोरी को लेकर दिल्ली की सड़कों पर 7 दिन से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे पहले बाराखंभा रोड से विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च शुरू हुआ तो राहुल गांधी ने अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले समेत कई दूसरे नेताओं को भी बुलाया। एआईएसए (आईसा) की नेहा वोरा भी गाड़ी में मौजूद थीं। मार्च के दौरान जब राहुल गांधी पहले आगे बढ़ने के लिए निकले तो उनके आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इससे कुछ देर तक धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। भीड़ को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया। इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी कि दोनों में एक अहम मुद्दे पर लोगों को सड़कों पर आने के लिए मजबूर होना पड़े। और जब कोई जवाबदेही को तैयार न रहे तो एक ही रास्ता न्याय के लिए बचता है वह है सुप्रीम कोर्ट का द्वार और यही विपक्ष ने किया। न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
-अनिल नरेन्द्र
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