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Tuesday, 24 July 2012

आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी के पीछे असल उद्देश्य क्या है?

योग बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ आगामी साझा अभियान के ठीक पहले शुक्रवार को रामदेव के खास सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को सीबीआई ने पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया। बालकृष्ण के खिलाफ फर्जी पासपोर्ट मामले में कोर्ट में हाजिर होने का सम्मन जारी किया गया था। सूत्रों ने कहा कि बालकृष्ण को शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में हाजिर होना था लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। इसके बाद उन्हें हरिद्वार में बाबा रामदेव के पतंजलि योग पीठ आश्रम से वहां मौजूद लोगों के विरोध के बीच गिरफ्तार कर लिया गया। फर्जी पासपोर्ट, दोहरी नागरिकता और फर्जी डिग्री मामले में सीबीआई ने पिछले साल 23 जुलाई को एफआईआर दर्ज की थी। इसी महीने 10 जुलाई को बालकृष्ण के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। अदालत ने उन्हें पेश होने के लिए 20 जुलाई तक का समय दिया था। सीबीआई ने जांच में पाया कि बालकृष्ण ने उत्तर प्रदेश के खुर्जी के संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य से मिलकर फर्जी सर्टिफिकेट लिया जिससे पासपोर्ट बनवाया। दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित दूसरी धाराओं में मामले दर्ज किए गए। बालकृष्ण के खिलाफ पासपोर्ट कानून के तहत भी प्रकरण दर्ज किया गया। सम्पूर्णानन्द संस्कृत यूनिवर्सिटी से पूछताछ में पता चला कि बालकृष्ण का नाम उनके रिकार्ड में नहीं है। सीबीआई ने बालकृष्ण के सर्टिफिकेट में दिए गए नामांकन क्रमांक को संस्थान के रिकार्ड से मिलाया जिसमें यह नम्बर किसी अन्य विद्यार्थी का पाया गया। इसी यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री बालकृष्ण ने बनवाई थी। बालकृष्ण की नागरिकता के बारे में भी नेपाल से जानकारी मांगी गई लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया है। आचार्य के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी का देहरादून और हरिद्वार में जबरदस्त विरोध किया, नारेबाजी की और उनकी कार के आगे लेट गए और पतंजलि योग पीठ के सामने हाइवे जाम कर दिया। पुलिस को स्थिति सम्भालने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी की निन्दा करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि सरकार ने नौ अगस्त के आंदोलन को कुचलने के लिए साजिश के तहत आचार्य को सीबीआई के माध्यम से गिरफ्तार करवाया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से घबराई केंद्र सरकार ने आतंकवादियों की तर्ज पर आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी की है लेकिन इससे आंदोलन कमजोर नहीं होगा। शुक्रवार की रात सहारा ग्रेस में पत्रकारों से मुखातिब बाबा ने कहा कि पहले सीबीआई के जरिये सरकार ने नेपाल सरकार पर दबाव बनाया कि वह बालकृष्ण को नेपाली नागरिकता संबंधी प्रमाण पत्र दें। लेकिन जब नेपाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि आचार्य बालकृष्ण भारत के नागरिक हैं तो फिर फर्जी उपाधि का षड्यंत्र रच कर बालकृष्ण को गिरफ्तार कर लिया। रामदेव का कहना है कि संविधान में अनपढ़ों को भी पासपोर्ट हासिल करने का अधिकार है तो आचार्य को पासपोर्ट हासिल करने के लिए फर्जी उपाधि की क्या आवश्यकता है? बालकृष्ण की गिरफ्तारी का लाभ उठाते हुए पूछताछ में रामदेव की आर्थिक व व्यापारी गतिविधियों के बारे में सीबीआई को मदद मिलेगी। इसमें जहां बदले की कार्रवाई की बू आती है वहीं असल टारगेट बाबा लगते हैं। बालकृष्ण तो महज दबाव बनाने वाले एक मोहरा हैं। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव में बहुत फर्प है। अन्ना हजारे एक फकीर हैं जो बहुत साधारण जीवन व्यतीत करते हैं जबकि बाबा हाई प्रोफाइल उद्योगपति बन गए हैं जिनका करोड़ों का कारोबार है और अरबों का साम्राज्य। असल निशाना तो बाबा रामदेव ही हैं।

Tuesday, 13 September 2011

बाबा रामदेव के ट्रस्टों की हो रही है छानबीन


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 13th September 2011
अनिल नरेन्द्र
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई के बाद अब डायरेक्टर जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) ने भी बाबा रामदेव की घेराबंदी करनी शुरू कर दी है। बाबा के ट्रस्टों द्वारा दी जा रही योग शिक्षा को हेल्थ एंड फिटनेस सर्विसेज के दायरे में रखते हुए डीजीसीईआई ने बाबा के दोनों ट्रस्टों पर तीन करोड़ रुपये सेवा कर देनदारी निकाल दी है। इस बाबत ट्रस्ट के सैकेटरी जनरल आचार्य बालकृष्ण को समन जारी किया गया है। महीने भर पहले एक नोटिस भेज कर आचार्य से उनके ट्रस्ट की कमाई व डोनेशन के बारे में जानकारी मांगी गई थी। हरिद्वार स्थित पतंजलि ट्रस्ट द्वारा दिव्य फार्मेसी, पतंजलि आयुर्वेद, पतंजलि फूड एण्ड हर्बल पार्प लि., वैदिक ब्रॉडकास्टिंग, आदि कम्पनियों का संचालन किया जाता है। डीजीसीईआई सूत्रों के मुताबिक फर्में उत्पाद कर एवं आयकर से मुक्त हैं मगर सेवा कर के दायरे में आती हैं। योग की शिक्षा हेल्थ एण्ड फिटनेस सर्विसेज के दायरे में है, जिस पर 10 प्रतिशत की दर से सेवा कर देय है। इस संबंध में सन् 2007 से पांच वर्षों तक ट्रस्टों द्वारा की गई कमाई का ब्यौरा आचार्य को नोटिस देकर मांगा गया है। खबर है कि आचार्य बालकृष्ण ने इस नोटिस के जवाब में दोनों ट्रस्टों की बैलेंसशीट, डोनेशन और सदस्यों के बारे में जानकारी अधिकारियों को दे दी है। इन जानकारियों के आधार पर योग शिक्षा के जरिये हुई कमाई का आकलन किया गया तो उस पर करीब तीन करोड़ की सेवा कर देयता निकली। इस पर कानपुर स्थित कार्यालय के डिप्टी डायरेक्टर संजय लवानिया ने
सर्विस टैक्स एवं सेंट्रल एक्साइज एक्ट 1944 के सैक्शन-14 के तहत आचार्य बालकृष्ण को समन भेजा है। इसमें 16 सितम्बर को सुबह 10 बजे कार्यालय में उपस्थित होकर इस बारे में जवाब देने के लिए कहा गया है।
योग गुरु बाबा रामदेव के निकट सहयोगी आचार्य बालकृष्ण 265 करोड़ रुपये के कारोबार के सर्वेसर्वा हैं। वह 34 कम्पनियों के निदेशक हैं। यह जानकारी गत गुरुवार को सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई। कारपोरेट मामलों के राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि योग गुरु रामदेव खुद किसी भी कम्पनी के बोर्ड में शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ताजा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश में ऐसी कई कम्पनियां पंजीकृत नहीं हैं जिनमें बाबा रामदेव निदेशक हों। मंत्री ने कहा कि बालकृष्ण उत्तराखंड में पंजीकृत 23 कम्पनियों के निदेशक हैं जिनका कारोबार 94.84 करोड़ है।
इसके अलावा पांच कम्पनियां उत्तर प्रदेश में (व्यापार पांच लाख), चार दिल्ली में (व्यापार 163.06 करोड़) और एक पश्चिम बंगाल में (व्यापार आठ करोड़) पंजीकृत हैं। वह महाराष्ट्र की एक कम्पनी में निदेशक भी हैं, जिसका कोई व्यापार नहीं बताया गया है। मंत्री ने कहा कि इतने कम समय में कम्पनियों का व्यापार बढ़ने के कारणों की अभी व्याख्या नहीं की जा सकती।
बाबा रामदेव पर हर ओर से सरकारी शिकंजा कसता जा रहा है। उधर बाबा ने फिर से आंदोलन की घोषणा कर दी है। यानि वह फिर से आंदोलन छेड़ेंगे। आगे वाले दिन उनके लिए विशेष चुनौती भरे होंगे।
Anil Narendra, Baba Ram Dev, Bal Krishan, CBDT, CBI, Daily Pratap, ED, Vir Arjun

Friday, 29 July 2011

सरकार मुझे और मेरे सहयोगियों को मिटाने पर तुली है ः बाबा रामदेव


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29th July 2011
अनिल नरेन्द्र
केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय व दिल्ली पुलिस की तमाम दलीलों को नकारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामलीला मैदान में चार जून को बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर हुई कार्रवाई पर साफ आदेश दिया कि उस रात की सीडी सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाए, कोर्ट खुद सीडी को देखेगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों यह सुनिश्चित करेगा। न्यायमूर्ति बीएस चौहान व न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कहा कि वे पांच अगस्त को शाम सवा चार बजे सभी पक्षों के वकीलों की उपस्थिति में घटना की सीडी देखेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार व अन्य सरकारी एजेंसियों से कहा है कि उन्हें जो भी हलफनामे दाखिल करने हैं वे तीन दिन के भीतर दाखिल कर दें। आठ अगस्त और 16 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि आधी रात में निर्दोष लोगों की पिटाई नहीं की जा सकती है, चाहे वे जो भी लोग हों। अदालत सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में ऐसा दोबारा न हो। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि पहले ये साबित हो कि ऐसा हुआ भी था। इस पर न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने टिप्पणी की, `कुछ तो हुआ है।' साथ ही अदालत ने चिदम्बरम को नोटिस किए जाने संबंधित दलील पर कहा कि यह मामला अभी ओपन है और पहले हलफनामा दायर करने दिया जाए उसके बाद इस मुद्दे को देखा जाएगा। उधर बाबा रामदेव ने सोमवार को नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित कांस्टीट्यूशनल क्लब में क्रोध से कहा कि केंद्र सरकार को न तो आतंकवाद से मतलब है और न ही भ्रष्टाचार से। उसके केंद्रबिन्दु सिर्प मैं हूं। सरकार मुझे और मेरे सहयोगियों को मिटाने पर तुली है। तरह-तरह से हम लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। सीबीआई सहित तमाम एजेंसियों को हमारे पीछे लगाया गया है ताकि कोई षड्यंत्र और कुचक्र कर हमारी प्रतिष्ठा को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमारे या योगाचार्य बालकृष्ण के खिलाफ सरकार क्या कार्रवाई करवाएगी। कार्रवाई करनी है तो पहले प्रधानमंत्री और तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम के खिलाफ करे, जिनके नाम भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा ने लिए हैं। स्वामी रामदेव ने कहा कि बालकृष्ण ने कुछ भी गलत नहीं किया और न ही उनकी डिग्री फर्जी है। उन्होंने कहा कि यह कैसा मजाक है, हम विदेश से काला धन लाने की बात करते हैं, हम भ्रष्टाचार की बात करते हैं तो हमारे खिलाफ देशद्रोहियों जैसा सलूक किया जा रहा है। चार जून से पहले जो सरकार हमें राष्ट्रभक्त कह रही थी वह मुझे मिटाने पर आज तुली है।
फर्जी डिग्री और पासपोर्ट के आरोपों को लेकर सीबीआई बालकृष्ण पर शिकंजा कसती जा रही है। पासपोर्ट मामले में सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है और बालकृष्ण को पकड़ने के लिए जगह-जगह छापे मार रही है। बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण के खिलाफ सख्त रवैया अपनाकर सीबीआई ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि वह एक स्वतंत्र जांच एजेंसी न होकर बल्कि केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने वाला एक हथियार है। हालत यह है कि बालकृष्ण का पासपोर्ट रद्द कराने पर आमादा सीबीआई ने कांग्रेस के पूर्व सांसद सुब्बा का पासपोर्ट रद्द कराने की जरा भी कोशिश नहीं की जबकि इस मामले में वह सुब्बा के खिलाफ चार्जशीट तक दाखिल कर चुकी है। सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी स्वीकार करते हैं कि एमके सुब्बा के खिलाफ आरोप बालकृष्ण से कहीं ज्यादा गम्भीर हैं। सीबीआई ने अभी तक बालकृष्ण की भारतीय नागरिकता पर अंगुली नहीं उठाई है। उसके पास केवल पासपोर्ट कार्यालय में जमा किए बालकृष्ण की शैक्षिक डिग्रियों के फर्जी होने के प्रमाण हैं जबकि सुब्बा के मामले में सीबीआई ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर उसके भारतीय नागरिक नहीं होने का प्रमाण पेश किया है। इसके बावजूद आज तक जांच एजेंसी ने सुब्बा का पासपोर्ट रद्द करने के लिए विदेश मंत्रालय से अनुरोध करने की जरूरत नहीं समझी। यही नहीं, सीबीआई की चार्जशीट के बावजूद सुब्बा न सिर्प व्यावसायिक गतिविधियों को बदस्तूर जारी रखे हुए है बल्कि एक पूर्व सांसद को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ भी ले रहा है। मजेदार बात यह है कि बालकृष्ण के फर्जी पासपोर्ट में तत्काल कार्रवाई शुरू करने वाली सीबीआई को सुब्बा के खिलाफ कार्रवाई करने में एक दशक से ज्यादा समय लग गया है। सरकार की नीयत साफ है, बाबा रामदेव ठीक ही कहते हैं कि सरकार उन्हें और उनके सहयोगियों को अब मिटाने पर तुली है।
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Sunday, 3 July 2011

बाबा रामदेव का आत्मविश्वास, मनोबल तोड़ने में केंद्र असफल


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd July 2011
अनिल रेन्द्र
ऐसा नहीं लगता कि केंद्र सरकार बाबा रामदेव का आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प तोड़ पाई है। मनमोहन सरकार ने इस प्रकार के हथकंडे इस्तेमाल कर लिए और कर भी रही है पर बाबा न केवल अपने इरादों पर कायम हैं बल्कि वह इसमें नए मुद्दे भी जोड़ते जा रहे हैं। बाबा मेरठ यात्रा के दौरान गत मंगलवार को केंद्र सरकार से दो सवाल पूछे। पहला-चार जून की शाम तक जो बाबा देवता था, वह अचानक ठग कैसे बन गया? दूसरा-यह कि दिल्ली में उनके अनशन के बाद स्विस बैंक से पांच लाख करोड़ रुपये क्यों निकाले गए? इससे साबित होता है कि निकाली गई धनराशि कांग्रेस, उसके मंत्री और उसके पोषित लोगों की है। बाबा पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज में तो पूरी दाल ही काली है। सरकार ने अत्याचार की हदें लांघ दीं। रामलीला मैदान में बहू-बेटियों से बलात्कार तक की कोशिश की गई। आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। नैतिकता के धरातल पर परिवर्तन की लड़ाई लड़ी जाएगी। अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर बाबा रामदेव बोले, जो भी केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएगा, उस पर लांछन लगेंगे और उसका चरित्र हनन होगा। पतंजलि योग पीठ में सब कुछ वैधानिक है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार बाबा ने अब अपने अभियान में एक और मुद्दा जोड़ दिया है। हरिद्वार में बाबा ने काले धन और भ्रष्टाचार के साथ ही अवैध खनन को भी अपने एजेंडे में शुमार कर लिया है। उनकी योजना योग साधकों के माध्यम से इसके लिए देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाने की है। काले धन के पांच मुख्य स्रोत और उनका समाधान बताना इसका मुख्य उद्देश्य रखा गया है। शुक्रवार से पतंजलि योग पीठ में शुरू हुए योग शिविर में इसका खाका तैयार किया जा रहा है। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की तरफ से बाकायदा पत्र बांटकर योग साधकों को मुहिम से जोड़ने का प्रयास हो रहा है। बाबा ने अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए बाकायदा जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। योग साधकों और समर्थकों को बताया जा रहा है कि देश में 89 प्रकार के खनिज के रूप में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की भू-सम्पदा है, जिसका बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। इस काम में एक लाख से अधिक लोग सक्रिय हैं जबकि देशभर के मात्र 200 लोगों को ही खनन करने की इजाजत मिली हुई है। यह काले धन का सबसे बड़ा स्रोत हैं। बाबा ने काले धन के पांच स्रोत बताए हैं। ये हैं-अवैध खनन, टैक्स की चोरी, रिश्वतखोरी, विकास योजनाओं में हेराफेरी और बड़े और अधिक नोट।
उधर सीबीआई ने कथित गलत सूचना देकर पासपोर्ट बनवाने के सिलसिले में पतंजलि योग पीठ के महामंत्री और बाबा के सहयोगी वैद्य बालकृष्ण से हरिद्वार जाकर पूछताछ की। सीबीआई दल ने हरिद्वार नगर पालिका के दफ्तर जाकर जीवन-मृत्यु रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड भी खंगाले। बाबा रामदेव अपने एजेंडे पर चल रहे हैं और मनमोहन सिंह की केंद्र सरकार अपने पर।
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Thursday, 30 June 2011

बाबा रामदेव पर चौतरफा दबाव बनाने का प्रयास

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 30th June 2011
अनिल रेन्द्र
मनमोहन सरकार ने बाबा रामदेव को सबक सिखाने के लिए सभी हथकंडों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। साम, दाम, दण्ड, भेद सभी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जैसा कि सरकार ने कहा था वैसा ही करना आरम्भ कर दिया है। इधर बाबा की सम्पत्तियों की जांच शुरू कर दी है उधर बालकृष्ण के खिलाफ पासपोर्ट मामले में छानबीन आरम्भ हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने स्काटलैंड में बाबा रामदेव और उनके संस्थानों की सम्पत्ति या निवेश की जांच शुरू कर दी है। निदेशालय सूत्रों ने बताया कि इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं उनके निवेश और धन के लेनदेन से विदेशी धन विनियमन कानूनों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। ईडी की नजर में स्काटलैंड के उस द्वीप पर भी है जो योग गुरु के एक प्रबल समर्थक दम्पत्ति ने उन्हें उपहार में दी थी। `द लिटिल कुबेर आइलैंड' नामक इस द्वीप को बाबा रामदेव के विदेश में स्थित ठिकाने और कल्याण केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक पूरी जांच बाबा रामदेव की ओर से बनाए गए ट्रस्टों में धन की आमद और लेनदेन पर टिकी है। इनमें पतंजलि योग पीठ ट्रस्ट, दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान अगर ईडी को किसी तरह की गड़बड़ी मिली तो वह फेमा या प्रीवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर सकता है। बताया जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से यह जांच अलग-अलग आधिकारिक सूत्रों से मिले दस्तावेजों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर की जा रही है।
इधर बाबा के ट्रस्टों व सम्पत्तियों की जांच हो रही है तो उधर उनके सहयोगी स्वामी बालकृष्ण के पासपोर्ट की जांच कर रही सीबीआई बरेली पासपोर्ट कार्यालय से जुड़े और लोकल इंटेलीजेंस यूनिट (एलआईयू) के अफसरों से पूछताछ कर रही है। बालकृष्ण का पासपोर्ट बरेली पासपोर्ट कार्यालय से बना हुआ है। इसलिए सीबीआई ने जिस अवधि में पासपोर्ट जारी किया गया, उस समय पासपोर्ट कार्यालय में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। सीबीआई ने इसी तरह बरेली एलआईयू कार्यालय में तैनात अफसरों व कर्मचारियों की जानकारी तलब की है। चूंकि पासपोर्ट के आवेदन फार्म की जांच एलआईयू शाखा द्वारा की जाती है। एलयूआई यह जांच करती है कि आवेदक द्वारा दी गई सूचनाएं सही हैं अथवा नहीं। वह भारतीय नागरिक है या नहीं, उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला तो नहीं, उसका सामान्य आचरण और साख, आदि कैसी है। एलआईयू ने बालकृष्ण के आवेदन फार्म पर कैसे संस्तुति की। सीबीआई इसके लिए जिम्मेदार एलआईयू कर्मियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करेगी। इसी तरह पासपोर्ट कर्मियों से यह पूछा जाना है कि उन्होंने किस आधार पर बालकृष्ण के पक्ष में पासपोर्ट जारी किया। इसके लिए सीबीआई दोनों ही विभागों के लोगों को नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है। सरकार हर तरह का दबाव बनाने पर जुट गई है ताकि बाबा रामदेव लाइन पर आ जाएं पर जो तेवर बाबा ने दो दिन पहले दिल्ली यात्रा में दिखाए उससे तो नहीं लगता कि बाबा किसी भी दबाव में आने वाले हैं।
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