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Tuesday, 19 June 2012

उपचुनाव के स्पष्ट संकेत ः हवा कांग्रेस के खिलाफ चल रही है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 19 June 2012
अनिल नरेन्द्र
आमतौर पर उपचुनावों का दूरगामी असर नहीं होता पर ताजा उपचुनावों के नतीजे कांग्रेस पार्टी के लिए गहरी चिन्ता का विषय होना चाहिए। यूं तो उपचुनाव कई राज्यों में कई जगह हुए हैं पर आंध्र प्रदेश के उपचुनाव का सबसे ज्यादा महत्व है। आंध्र प्रदेश की 18 विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर हुए चुनाव इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि इस कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले राज्य में कांग्रेस की हवा खराब हो चुकी है। इस तरह के नतीजों की शायद ही कांग्रेस ने कल्पना की हो। विद्रोह कर वाईएसआर कांग्रेस का गठन करने वाले वाईएस जगनमोहन रेड्डी को धूल चटाने की मंशा से कांग्रेस ने सत्ता का पूरा फायदा लेते हुए जेल की सींखचों में बन्द कर दिया। व्यापार में अनैतिक साधनों के इस्तेमाल के आरोप में सीबीआई ने उन्हें 27 मई को ही गिरफ्तार कर लिया था। यकीनन 12 जून के चुनाव को ध्यान में रखकर ही ऐसा किया गया था। जगन को गिरफ्तार करने का उलटा असर हुआ, उनसे जनता की सहानुभूति हो गई और उसने 18 में से 15 विधानसभा सीटें जगन की झोली में डाल दीं। इसके अलावा एक लोकसभा सीट पर भी जगन की पार्टी को भारी सफलता मिली। एक तरह से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। लोकसभा की सीट तो जगन के उम्मीदवार ने दो लाख वीटों के अन्तर से जीती। कांग्रेस को एक करारा झटका मध्य प्रदेश में भी लगा है। आरक्षित महेश्वर सीट सत्तारूढ़ भाजपा ने उससे छीन ली। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के 2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद जितनी भी सीटों पर उपचुनाव हुआ, सभी जगह कांग्रेस बुरी तरह हारी। कांग्रेस अपना गढ़ भी बचा नहीं सकी। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी है। यहां बांकुरा और जसपुर की दो सीटों के लिए उपचुनाव हुए थे। दोनों में पिछले विधायकों की मृत्य के कारण उपचुनाव हुए थे। तृणमूल कांग्रेस ने दोनों सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस के लिए बुरी खबर झारखंड से भी आई है। वहां ऑल झारखंड छात्र संघ के नवीन जायसवाल के मुकाबले हटिया से कांग्रेस के केंद्रीय मंत्री सुबोध कान्त सहाय के भाई और कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील सहाय की तो जमानत जब्त हो गई। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की मांट सीट के उपचुनाव ने भी सीधे न सही परोक्ष रूप से कांग्रेस को झटका जरूर दिया है। यहां कांग्रेस समर्थित रालोद उम्मीदवार को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार श्याम सुन्दर शर्मा ने करीब पांच हजार वोट से हरा दिया। इस सीट पर उपचुनाव केंद्रीय मंत्री और रालोद के मुखिया अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी के इस्तीफे के कारण हुआ था। मार्च में हुए चुनाव में इन्हीं जयंत चौधरी ने श्याम सुन्दर शर्मा को हराया था पर बाद में उन्होंने लोकसभा के सदस्य बने रहने के फेर में इस सीट से इस्तीफा दे दिया था। कन्नौज लोकसभा सीट से तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव के सामने किसी भी दल ने अपना उम्मीदवार ही नहीं उतारा और वह 22 साल बाद निर्विरोध लोकसभा पहुंच गईं। महाराष्ट्र की इकलौती केन सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बचाने में सफल रही। यहां उसके उम्मीदवार पृथ्वीराज साठे ने भाजपा की संगीता को हराया। त्रिपुरा में नल्चर सीट पर माकपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा। तमिलनाडु में भी पुडुकोहई सीट सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक ने जीत ली जबकि केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस गठबंधन को नेयातिकार सीट पर जीत जरूर मिली और कांग्रेस गठबंधन ने वाम मोर्चे को झटका दिया। इस सीट पर पिछली बार माकपा उम्मीदवार जीता था। कुल मिलाकर बेशक उपचुनावों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर न पड़ता हो पर फिर भी देशभर में कांग्रेस के खिलाफ चल रही हवा का पता चलता है।
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Saturday, 26 May 2012

सभी दलों ने मध्यावधि चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26 May 2012
अनिल नरेन्द्र
भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि इस सरकार से न तो विपक्ष खुश है और न ही सरकार के घटक दल। भाजपा ने दावा किया है कि यह सरकार कभी भी गिर सकती है। कभी ममता बनर्जी नाराज हो जाती हैं तो कभी शरद पवार। कांग्रेस सरकार अपनी सारी विफलताओं को अपने गठबंधन साथियों पर थोपने का प्रयास शायद ही जनता में उनकी छवि को सुधारे। अगर कुछ रिपोर्टों पर यकीन किया जाए तो कांग्रेस के रणनीतिकारों ने चुनावों की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। कहने को तो यह कसरत 2014 लोकसभा चुनाव के लिए की जा रही है पर वक्त का कुछ पता नहीं। अगर भाजपा की भविष्यवाणी सत्य हुई तो देश में किसी भी समय मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार समय पूर्व चुनाव की गोपनीय महायोजना को रूपाकार देने में जुट गए हैं। पार्टी का सर्वोच्च सघन समूह कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की आसमान से जमीन चूमती लोकप्रियता ग्रॉफ से भायभीत होकर लोकसभा चुनाव को अंतिम विकल्प मानता है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने रहस्योद्घाटन किया कि सन् 2012 के अन्त में अथवा सन् 2013 के बजट से पहले फरवरी-मार्च में लोकसभा चुनाव में पार्टी न्यूनतम 125-130 सीटें जीत सकती है जबकि 22 से 24 माह बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 100 सीट भी नहीं जीत पाएगी। संप्रग सरकार की गठबंधन साथी तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव, बसपा की मायावती सभी ने अपने काडरों को कह दिया है कि वह कमर कस लें और चुनाव के लिए हर समय तैयार रहें। दरअसल मुलायम सिंह और ममता, दोनों की रणनीति यह है कि वह किसी भी तरह 50-50 सांसद अगले चुनाव में ले आएं और अगर वह ऐसा कर सकते हैं तो वह देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। आंध्र प्रदेश में तेलुगूदेशम पार्टी अध्यक्ष चन्द्रबाबू नायडू, असम में गण परिषद प्रमुख प्रफुल्ल महंत, बिहार में जनता दल (यू) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सभी लोकसभा चुनाव की अचानक घोषणा को ध्यान में रखकर चतुरंगिनी सेना को सुज्जित करने में लगे हैं। पंजाब में अकाली दल, हरियाणा में चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने भी लोकसभा चुनाव के लिए खम्भ ठोकी है। वैसे अन्ना द्रमुक, बीजद, तृणमूल कांग्रेस, अकाली दल, सपा, बसपा, अगप, तेदेपा, इनेलो एवं भाजपा सभी लोकसभा चुनाव को फायदे का सौदा मानती हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, फारवर्ड ब्लॉक, रिव्योव्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी का वाम मोर्चा भी आम चुनाव के लिए ताल ठोक रहा है। शिवसेना सुप्रीमो बाला साहब ठाकरे मुंबई महानगर निगम के चुनाव में विजय के बाद लोकसभा महाकुम्भ के चाणक्य बने हुए हैं। कांग्रेस ने प्रस्तावित लोकसभा उम्मीदवारों की सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह सूची सोनिया गांधी को भी दिखाई जा चुकी है। इस कांग्रेसी नेता की अगर मानें तो कांग्रेस पार्टी मात्र 30 दिन की सूचना पर लोकसभा चुनाव महाकुम्भ में कूद सकती है। मध्यावधि चुनाव की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता।