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Saturday, 26 November 2011

2जी घोटाले में कारपोरेटों को मिली जमानत


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26th November 2011
अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में पहली बार किसी को जमानत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पांच कारपोरेट आरोपियों को जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाने वाले हैं ः संजय चन्द्रा, विनोद गोयनका, हरि नायर, गौतम दोषी और सुरेन्द्र पिपारा। आरोपियों ने निचली अदालत और हाई कोर्ट में जमानत अर्जी खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आर्थिक अपराध का आरोप है और अगर यह साबित होता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को खतरा हो सकता है। लेकिन सीबीआई ने यह नहीं कहा कि जमानत पर छूटने के बाद आरोपी सुबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। हम ऐसा कोई कारण नहीं देखते जिससे कि आरोपी को कस्टडी में रखा जाए और वह भी तब जब इस मामले में छानबीन पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। आरोपी छह महीने से ज्यादा जेल में हैं और इस मामले में इन्हें कस्टडी में रखने का कोई मकसद पूरा नहीं होता। ऐसे में आरोपियों को 5-5 लाख रुपये की जमानत राशि पर जमानत देने का आदेश दिया जाता है। कोर्ट ने जमानत देने के साथ-साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं। इन्हें जमानत दिए जाने के बाद कनिमोझी समेत 6 आरोपियों को जमानत मिलने की उम्मीद हो गई है। 2जी घोटाले में अभी भी 2 फरवरी से ए. राजा बन्द हैं। कनिमोझी 20 मई से तिहाड़ में हैं। शरद कुमार (एमडी कलैंग्नार टीवी) भी 20 मई से बन्द हैं। आरके चंदोलिया (ए. राजा के प्राइवेट सचिव) 2 फरवरी को जेल गए थे। सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व टेलीकॉम सैकेटरी भी 2 फरवरी से ही बन्द हैं। शाहिद उस्मान बलवा, स्वान के प्रोमोटर 2 फरवरी से तिहाड़ में है। आसिफ बलवा (शाहिद के भाई) 29 मार्च से जेल में हैं। राजीव अग्रवाल डायरेक्टर कुसेगांव फूड्स एण्ड वेजिटेबल्स प्राइवेट लिमिटेड 29 मार्च को जेल गए थे। करीम मोरानी जो एक फिल्म निर्माता हैं और शाहरुख खान के दोस्त भी हैं 30 मार्च से तिहाड़ में हैं।
किसी आपराधिक मामले में आरोपी को कितनी अवधि तक न्यायिक हिरासत यानि जेल में रखा जाए और कब उसे जमानत मिलनी चाहिए, यह सवाल अक्सर उठता है। इन दिनों भी इस सवाल पर बहस जारी है। कुछ दिन पहले दिग्विजय सिंह ने भी यह सवाल उठाते हुए कहा था कि किसी आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के बाद उसे जेल में करने का कोई औचित्य नहीं है, इसलिए उसे जमानत मिलनी ही चाहिए। हालांकि उनके इस बयान की काफी आलोचना भी हुई थी। कहा गया कि वे अदालतों को निर्देशित करने की कोशिश कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह चूंकि एक विवादित राजनेता हैं इसलिए उनके बयान पर टीका टिप्पणी स्वाभाविक ही है पर कुछ समय पहले खुद सुप्रीम कोर्ट की एक तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि वह बहुचर्चित मामलों में आरोपियों को जमानत न देने की अदालतों की कथित नई प्रवृत्ति की पड़ताल करेंगे, क्योंकि यह प्रवृत्ति उस स्थापित न्यायिक सिद्धांत के खिलाफ है, जो कहता है कि `जमानत नियम है और जेल उपवाद है।' सुप्रीम कोर्ट की यह पहल निश्चित ही सराहनीय है लेकिन सवाल उठता है कि सिर्प हाई प्रोफाइल केसों पर ही क्यों। छोटे-मोटे मामलों में भी आरोपियों को अदालतों का वर्षों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब इन्हें जमानत मिलती है या केस का फैसला आता है उस वक्त तक वह सजा से ज्यादा समय तो जेल में बिता देते हैं। तिहाड़ जेल में अंडर ट्राइलों की संख्या देखें तो पाएंगे कि निचली अदालतों की बेल न देने की वजह से यह जेल में बन्द हैं। जहां तक 2जी स्पेक्ट्रम केस का संबंध है जेल भेजना तो ठीक है पर इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है पैसों की रिकवरी और इस दिशा में न तो सरकार और न ही सीबीआई कोई ठोस कदम उठा रही है। एक लाख 60-70 हजार करोड़ के इस घोटाले में आपने दर्जनों लोगों को अन्दर तो कर दिया पर जो पैसा इन्हेंने लूटा, जो देश की सम्पत्ति है उसका क्या हुआ? कनिमोझी और अन्य की अब जमानत हो जाएगी। केस वर्षों तक चलता रहेगा। अन्त में कुछ को सजा भी हो सकती है पर मूल प्रश्न वही आता है कि लूटी धनराशि की रिकवरी कैसे होगी?
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Saturday, 5 November 2011

कनिमोझी की जमानत रद्द होना कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 5th November 2011
अनिल नरेन्द्र
द्रमुक प्रमुख करुणानिधि को बहुत उम्मीद थी कि इस बार उनकी बेटी कनिमोझी को अदालत जमानत दे देगी। उन्होंने इसकी भूमिका भी तैयार की। हाल ही में करुणानिधि इसी काम को लेकर दिल्ली आए थे। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की थी जिसके बाद ही केंद्र सरकार के नियंत्रण वाली सीबीआई ने कनिमोझी की जमानत याचिका का विरोध न करने की बात अदालत में की। इसके बावजूद अदालत ने बृहस्पतिवार को कनिमोझी सहित अन्य की जमानत याचिका रिजैक्ट कर दी। अदालत ने कनिमोझी, कलैगनार टीवी प्रबंधक निदेशक शरद कुमार, कुसेगांव फ्रूट्स एण्ड वेजीटेबल्स के निदेशक आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल एवं बॉलीवुड फिल्म निर्माता करीम मोरानी की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। आरोपी पिछले 9 से पांच महीने जेल में बिता चुके हैं। कनिमोझी 20 मई से जेल में बन्द हैं। पांच आरोपियों के अलावा अदालत ने पूर्व संचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के पूर्व निजी सचिव आरके चांदोलिया तथा स्वान टेलीकॉम के शाहिद उस्मान बलवा की जमानत अर्जियों को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहाöमामले से जुड़े तथ्य और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप बहुत गम्भीर प्रवृत्ति के हैं, जिनका देश की अर्थव्यवस्था पर गम्भीर प्रभाव पड़ा। न्यायाधीश ओपी सैनी ने महिला होने के नाते छूट देने की कनिमोझी के वकील की दलील पर कहा कि आमतौर पर माना जाता है कि महिलाएं सामाजिक व आर्थिक तौर पर कमजोर होती हैं, इसलिए सीआरपीसी की धारा 437 के तहत महिलाओं को कुछ बेनिफिट दिए जाते हैं लेकिन कनिमोझी सांसद हैं और समाज के ऊपरी तबके से हैं। ऐसे में उनके साथ भेदभाव जैसी बात नजर नहीं आती। ट्रायल 11 नवम्बर से शुरू होगा। कनिमोझी की जमानत न होने पर उनके वकील राम जेठमलानी ने इसे न्याय की विफलता करार दिया। जेठमलानी ने कहा कि न्यायाधीश ने जो किया है वह न्याय की गम्भीर विफलता है। मैं समझता हूं कि न्यायाधीश ने सम्भवत तय कर लिया कि कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए। सिर्प उच्चतम न्यायालय द्वारा ही राहत मिले तो मिले। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय जल्दी ही इसे सही कर देगी।
कनिमोझी की जमानत याचिका खारिज होने का कांग्रेस-द्रमुक संबंधों पर सीधा असर डाल सकती है। दोनों दलों की दोस्ती खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। मामले की गम्भीरता को भांपते हुए बृहस्पतिवार को ही तमिलनाडु के कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से पूरे प्रकरण पर बातचीत की। हालांकि कांग्रेस ने अनौपचारिक रूप में फिलहाल गठबंधन पर इसका कोई असर न पड़ने की उम्मीद जताई है पर सूत्रों का कहना है कि द्रमुक नेताओं को इस बात का मलाल है कि सरकार की ओर से कनिमोझी के बचाव में मजबूत कोशिश नहीं की गई। एक तरह से उनको उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया। इस बात को द्रमुक नेता वायदा खिलाफी की तरह मान रहे हैं। सम्भव है कि डीएमके जल्द कांग्रेस के साथ रहना है या नहीं फैसला कर सकती है। यहां यह भी गौरतलब है कि द्रमुक कोटे के दोनों मंत्रियों के स्थान पर अभी कोई मंत्री नियुक्त नहीं किया गया है। लाख कोशिशों के बाद भी डीएमके ने नए नाम नहीं भेजे हैं। लिहाजा कांग्रेस को अभी भी इस बात की आशंका है कि नए मंत्रिमंडल विस्तार में भी द्रमुक नेताओं से बात करने को कहा गया है। इस बात के लिए भी रणनीति बन रही है कि द्रमुक के समर्थन वापसी की स्थिति में नए राजनीतिक दलों से बात की जाए। छह सांसदों वाले राष्ट्रीय लोकदल से बात लगभग पक्की है। चौ. अजीत सिंह को नए विस्तार में जगह मिलनी लगभग पक्की है। इसके अलावा सपा और बसपा कांग्रेस के पास अतिरिक्त विकल्प हैं। अगर द्रमुक समर्थन वापस लेता है और उधर ममता बनर्जी भी पेट्रोल के दामों में वृद्धि को लेकर समर्थन वापस लेती हैं तो कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। मायावती भी आसानी से मानने वाली नहीं। उनका ऐसे समय समर्थन देना जब यूपी विधानसभा चुनाव सिर पर है, एक चुनौतीपूर्ण फैसला होगा। भगवान राम को गाली देना करुणानिधि पर भारी पड़ रहा है।
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Wednesday, 3 August 2011

धमकियों पर उतरे मनमोहन सिंह पहले ही दिन चित्त

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd August 2011
अनिल नरेन्द्र
संसद का मानसून सत्र आरम्भ हो गया है। इस सत्र में आरोपों-प्रतिआरोपों की जबरदस्त बारिश होगी यह तय है। पहले ही दिन से यह शुरू हो गया। आमतौर पर शालीनता और कूल स्वभाव के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बौखलाहट में विपक्ष पर सीधा हमला बोल दिया। सोमवार से मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही मनमोहन सिंह ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि हमें किसी मुद्दे पर चर्चा कराने का खौफ नहीं है। हम हर विषय पर बहस कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यहां तक तो बात समझ में आती है पर इससे आगे प्रधानमंत्री ने जो कहा वह जरूर समझ से बाहर है। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि हमारे पास विपक्षी खेमे को शर्मिंदा करने वाले बहुत सारे राज हैं। प्रधानमंत्री के इस हमले से विपक्ष बिफर गया। भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि एक तरफ तो प्रणब मुखर्जी, पवन बंसल और राजीव शुक्ला जैसे सरकार के प्रतिनिधि संसद को सुचारू रूप से चलाने का अनुरोध कर रहे हैं वहीं उनके नेता धमकियों पर उतर आए हैं। जब भाजपा नेता से इस बारे में पूछा गया तो नकवी ने कहा कि संसद चले और सभी कामकाज सुचारू रूप से चले ऐसी हमारी इच्छा है लेकिन सरकार टकराव और अहंकारी मुद्रा में है। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें (प्रधानमंत्री) को मुर्दे उखाड़ने तो दीजिए फिर देखेंगे। पहले ही दिन सरकार एक ऐसी ओट से चारों खाने चित्त हुई जहां से शायद उसे उम्मीद नहीं रही होगी।
टीम अन्ना ने सरकार पर हल्ला बोल दिया। डॉ. मनमोहन सिंह की दूसरी पारी का दूसरा दिन ही मानसून सत्र ऐसा होगा किसी ने सपनों में भी नहीं सोचा होगा। गांधीवादी अन्ना हजारे पक्ष ने सोमवार को दावा किया कि केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र चांदनी चौक सहित नागपुर, वर्धा और अमरावती के मतदाताओं ने लोकपाल विधेयक के सरकार के मसौदे को नामंजूर कर सामाजिक कार्यकर्ताओं के जन लोकपाल विधेयक का समर्थन किया है। अन्ना ने दावा किया कि सिब्बल के निर्वाचन क्षेत्र के 85 फीसदी मतदाता हजारे पक्ष के जन लोकपाल विधेयक के पक्ष में हैं और 82 फीसदी मतदाता चाहते हैं कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाया जाए। अन्ना ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो देशवासियों को सही लोकशाही का रास्ता दिखाता है। यह जनमत संग्रह बताता है कि `सोशल ऑडिट' बहुत जरूरी है। हम चाहते हैं कि पूरे देश में इस तरह का जनमत संग्रह हो। नतीजे बताते हैं कि सिब्बल के निर्वाचन क्षेत्र में 88 फीसदी लोग संसद के भीतर सांसदों के आचरण और 86 फीसदी लोग उच्च न्यायपालिका को प्रस्तावित लोकपाल के दायरे में रखने के पक्षधर हैं। प्रश्नावली के जरिये 83 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि संसद में लोकपाल विधेयक पर सांसदों को अपनी पार्टी के रुख के बजाय जनाकांक्षाओं के अनुरूप मतदान चाहिए।
टेलीकॉम घोटाला में एक बार फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम सामने आया है। सोमवार को ही आरोपी शाहिद बलवा की ओर से दी गई दलील में उसके वकीलों ने कहा कि पीएम को 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी। बलवा ने तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और सालिसिटर जनरल जी. वाहनवती का भी नाम लिया कि उन्हें भी आवंटन प्रक्रिया के संवाद की पूरी जानकारी थी। बलवा ने अपनी दलील को पुख्ता करने के लिए ए. राजा की उस चिट्ठी का भी जिक्र किया जो उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखी थी। बलवा ने सीबीआई पर पक्षपात का भी आरोप लगाया और कहा कि वह टाटा को बचाने की कोशिश में अन्य लोगों पर हाथ डाल रही है। बलवा के वकीलों ने यहां तक कहा कि ये स्पैक्ट्रम आवंटन पॉलिसी सरकार की थी और यही वजह है कि कहीं भी उसका विरोध नहीं किया गया। हर कदम पर उसे अनुमति मिलती गई। न तो प्रधानमंत्री और न ही अभी के संचार मंत्री ने किसी स्टेज पर ये कहा है कि इस पॉलिसी से सरकार को नुकसान हुआ है, फिर वे कटघरे में क्यों हैं?
इस मानसून सत्र की शुरुआत हंगामी हुई है। इस समय तो समूचा विपक्ष अपने-अपने कारणों से कांग्रेस पार्टी और सरकार से नाराज है। यह सत्र ठीकठाक से निकल जाए, यह प्रधानमंत्री और उनके सिपहसालारों के लिए चुनौती है। संसद के अन्दर और संसद के बाहर दोनों ही जगहों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा गरम है। देखें सरकार कैसे निपटती है।

Monday, 30 May 2011

Jail is alright, but recovery of the money, too is very important

Anil Narendra
A few days ago, I met a leader. During our talks, various scams being in the limelight these days, also came up. His views made me to think. He said that scam of any magnitude can be carried out these days. But, if you are ready to go to jail for a few days, you have nothing to fear of. According to him, the moment the leader is put behind the bars, half of public ire gets pacified and half of the case is also won. When he comes out of jail after a few months, he is accorded a hero’s welcome. Then, comes the elections and the leader wins and now he can claim that the public has condoned the corruption or he might say that he has been forgiven by the supreme court of the democracy i.e. the janata durbar. There may be one or two cases, but ultimately disputes are settled in his favour. But, the most important question remains, where is the money, which this man has amassed from the scam?
Let us take the example of 2-G spectrum scam, which amounts to almost staggering 1,76,000 crores rupees. It may be true that more than half a dozen leaders and others including A Raja and Kanimozhi are behind the bars in connection with this scam, but the question remains that how much money has so far been recovered by the CBI? It is not clear from the statements of the CBI as to any amount relating to this scam has so far been recovered or not? According to the charges by the investigation agency in this scam of  1,76,000 crore rupees, Raja had made the company of Shahid Balwa to pay a sum of Rs 200 crores to Kalaignar TV and this amount had reached Kalaignar TV through Cineyug. Kanimozhi and Sharad owned 20% shares each in Kalaignar TV, whereas Dayalu Ammal had a whooping holding of 60%. It is being talked about that if the CBI has not made it public that it has recovered any amount from someone or not, then the money has came back to Shahid Balwa through the same channel through which it had reached Kalaignar TV? In case, the amount of theft is not recovered, there can not be an air-tight case. This amount must be recovered and deposited in the Court, which then becomes the case property. If your mobile phone is stolen in a bus, then the case can not be considered air tight till the police apprehend the culprit and recover and table the stolen mobile in the Court. Of course, the CBI arrested Gautam Doshi, Managing Director, Reliance, Senior Vice Presidents, Hari Nayar and Surendra Papara, Director, Swan Telecom, Vinod Goenka and Director of Unitech Wireless Sanjay Chandra, but there is no indication as to the recovery of any money from these persons. What steps the CBI or the government is contemplating to recover the money involved in the scam? Will the government confiscate the properties of these accused and their companies to recover the scam money? This action is necessary for two reasons. Firstly, it is the property of the country, and secondly this amount has been amassed by looting the country and as such it is the case property. 2-G Spectrum is just one scam, God knows how many more scams are lying undetected. If money involved in these scam is recovered, the people of the country can be relieved of the burden of the poverty.

Sunday, 29 May 2011

जेल तो ठीक है पर पैसे की रिकवरी बहुत जरूरी है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29th May 2011
अनिल नरेन्द्र
दो-तीन दिन पहले मुझे एक नेता मिला था। बातों बातों में आजकल सुर्खियों में चल रहे विभिन्न घोटालों का जिक हुआ। उस नेता की बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। उसने कहा कि आजकल जितना बड़ा घोटाला करना चाहो कर लो। हां, अगर आप कुछ दिन जेल जाने को तैयार हों तो फिर आपको कोई और डर नहीं। उसके अनुसार जिस दिन नेता जेल गया उसी दिन जनता का आधा गुस्सा तो ठंडा हो जाता है, आधा केस भी हो जाता है। वह कुछ महीने अंदर रहने के बाद जब बाहर आता है तो उसका अच्छा स्वागत किया जाता है। फिर चुनाव आ जाते हैं और वह नेता चुनाव जीत जाता है और यह कहने की स्थिति में हो जाता है कि जनता ने उसके भ्रष्टाचार पर उसे माफ कर दिया या फिर यह कहता है कि लोकतंत्र की सुपीम अदालत यानी जनता के दरबार में उसे माफी मिल गई है। एक-आध केस चलता रहता है और मामला रफा-दफा हो जाता है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वह पैसा कहां गया जिसका इसने घोटाला किया था?
आप 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले को ही ले लीजिए। यह घोटाला लगभग 1,76,000 करोड़ रुपए का है। यह ठीक है कि इस घोटाले में ए. राजा, कानीमोझी सहित आधा दर्जन से ज्यादा नेता व अन्य जेलों में हैं पर सवाल यह है कि सीबीआई ने कितने पैसों की अब तक रिकवरी की है? सीबीआई के बयान से अभी तक यह साफ नहीं है कि उसने इस केस में अब तक कोई राशि जब्त की है या नहीं? 1,76,000 करोड़ रुपए के इस घोटाले में अभी तक जो आरोप सीबीआई की ओर से लगाया गया है वह है कि राजा ने 200 करोड़ रुपए कलेंगनार टीवी को शाहिद बलवा की कम्पनी से दिलाए थे जो सिने युग द्वारा कलेंगनार टीवी तक पहुंचे थे। इस टीवी में कानीमोझी और शरद की बीस पतिशत की हिस्सेदारी थी जबकि दयाल अम्मल की भागीदारी साठ पतिशत है। कहा यह जा रहा है कि जिस रास्ते से पैसा कलेंगनार टीवी में आया था उसी रास्ते से वापस शाहिद बलवा के पास पहुंच गया अगर सीबीआई ने अभी तक यह बात सार्वजनिक नहीं की है कि उसने किसी से कोई रकम भी बरामद की है या नहीं? जब तक चोरी की रकम बरामद नहीं हो जाती तब तक कोई भी एयर राइट केस नहीं बनता। उन्हें यह राशि बरामद करके अदालत में जमा करानी आवश्यक होती है जो केस पापर्टी बनती है। अगर आप का मोबाइल बस में चारी हो जाता है तो पुलिस मुजरिम को पकड़ कर जब तक अदालत में चोरी गया मोबाइल पेश नहीं करती तब तक केस एयर राइट नहीं माना जाता। सीबीआई ने रिलायंस के मैनेजिंग निदेशक गौतम दोषी, सीनियर वाइस पेसीडेंट हरी नायर, सुरेन्द्र पपारा, स्वॉन टेलीकॉम के निदेशक विनोद गोयनका और यूनिटेक वायरलैस के निदेशक संजय चंद्रा को गिरफ्तार तो किया है मगर उनसे कोई राशि बरामद हुई है या नहीं, इसका कोई ब्यौरा नहीं दिखा गया। सीबीआई या सरकार घोटाले की रकम को रिकवर करने के लिए क्या कदम उठा रही है? क्या सरकार इन आरोपियों की सम्पत्ति जब्त करके पैसे की रिकवरी करेगी? यह करना इसलिए जरूरी है कि पहली बात तो यह देश की सम्पत्ति है और दूसरी बात यह रकम देश को लूट कर बनाई गई है और केस पापर्टी है। 2-जी स्पेक्ट्रम का तो एक घोटाला है, ऐसे न जाने कितने और घोटाले हैं। अगर इनकी रिकवरी हो जाए तो देश की जनता गरीबी की मार से बच जाए।
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