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Friday, 18 May 2012

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अंतिम अभियुक्त ए. राजा की जमानत

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 18 May 2012
अनिल नरेन्द्र
हाल के वर्षों में देश की राजनीति में भूचाल लाने वाले एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी और जेल में बन्द आखिरी अभियुक्त पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा को अंतत अदालत से जमानत मिल गई। दिल्ली की तिहाड़ जेल में सवा साल बिताने के बाद ए. राजा बाहर आकर अगले दिन ही संसद में भी पहुंच गए। 49 वर्षीय राजा काफी खुश दिख रहे थे लेकिन उन्होंने संसद भवन में खड़े पत्रकारों से कोई बातचीत नहीं की। ए. राजा को 2 फरवरी 2011 को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने ए. राजा को 20 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो बांड पर जमानत देने का आदेश दिया। जमानत मिलने के बाद राजा ने कहा कि उनके खिलाफ मामला झूठा और मनगढ़ंत है और कानून के आधार पर टिकने वाला नहीं है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में गिरफ्तारी के बाद जमानत के लिए आवेदन न करना ए. राजा की एक सोची-समझी चाल थी। उन्होंने इस मामले में अभियुक्त कम बल्कि एक पेशेवर वकील की तरह ज्यादा काम किया। मामले की नजाकत व मीडिया को अटैंशन न देखते हुए उन्होंने जमानत की अर्जी नहीं दी और पूरे 15 महीने जेल में रहे। राजा को मालूम था कि सीबीआई ने उन्हें पूरे केस का सूक्षधार बना रखा है और जब भी जमानत के लिए वह आवेदन करेंगे सीबीआई यही दलील पेश करेगी। इसलिए उन्होंने सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने दी। इतना ही नहीं, उन्होंने चार्जशीट पर संज्ञान लेने तथा ट्रायल शुरू होने के बाद भी जमानत की अर्जी नहीं दी। यहां तक कि डीएमके सांसद तथा पार्टी प्रमुख की बेटी कनिमोझी की जमानत के बाद भी उन्होंने आवेदन नहीं किया जबकि सांसद को मिली जमानत उनके आवेदन का ठोस आधार बन सकता था। उन्होंने आवेदन तब किया जब गत सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने मामले के अंतिम अभियुक्त पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और निजी सचिव आरके चंदोलिया को जमानत दे दी। इस रणनीति का फायदा यह है कि राजा के खिलाफ अदालतों की टिप्पणियां नहीं हैं। यहां तक कि जमानत देते हुए सीबीआई कोर्ट ने कहा कि राजा सुबूतों से छेड़छाड़ नहीं कर सकते क्योंकि सभी सुबूत दस्तावेजों की शक्ल में हैं। राजा के लिए कोर्ट का यह सकारात्मक रुख है जो ट्रायल के दौरान उनके पक्ष में जाएगा। वैसे ए. राजा जमानत पर ऐसे वक्त बाहर आए हैं जब स्पेक्ट्रम घोटाले से उठती आंच ने उनके पूर्व टेलीकॉम मंत्री दयानिधि मारन और तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम तक को अपनी चपेट में ले लिया है। मारन पर आरोप हैं कि टेलीकॉम मंत्री रहते उन्होंने एक देशी टेलीकॉम कम्पनी एयरसेल की बाहें उमेढकर उसे मलेशिया की एक कम्पनी के हाथों बिकने पर मजबूर किया और एवज में इस विदेशी कम्पनी से करीब छह सौ करोड़ रुपये रिश्वत के रूप में बटोरे। लेकिन हाल के खुलासे तो और गम्भीर है, जिनमें चिदम्बरम के साथ उनके बेटे कार्ती चिदम्बरम का नाम भी उछला है और पता चला है कि इस विदेशी कम्पनी को लाभ पहुंचाने के लिए देश के सख्त कानूनों को कैसे ताक पर रख दिया गया। संसद में चिदम्बरम जब अपनी सफाई में भावुक होकर कहते हैं कि चाहे मेरी छाती में खंजर भोंक दो लेकिन मेरी ईमानदारी पर शक मत करो तब उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उनके वित्त मंत्री रहते एक विदेशी कम्पनी देश के कानून से कैसे खेल गई? भारत के कानून से खिलवाड़ करने और सरकार से धोखाधड़ी करने के स्पष्ट सुबूतों के बावजूद क्यों नहीं `मैक्सिस' का लाइसेंस कैंसिल कर उसके खिलाफ मुकदमा चलाया गया? चिदम्बरम ने संसद में साफ इंकार कर दिया कि उनके या परिवार के किसी सदस्य के पास किसी भी टेलीकॉम कम्पनी के शेयर रहे हैं। तब उन्हें यह भी बताना चाहिए कि एयरसेलöमैक्सिस सौदे में उनके बेटे कार्ती चिदम्बरम का नाम किन हालात में उछला है? ए. राजा की जमानत पर प्रतिक्रिया देते हुए अभियुक्तों के वकील माजिद मेमन का कहना है कि सीबीआई के केस में दम नहीं है और वह अदालत की सख्त जांच झेल नहीं पाएगी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी कह रही है कि 2जी स्पेक्ट्रम को बेचने में 1.75 लाख करोड़ का घोटाला हुआ लेकिन क्या उसके पास इसका कोई दस्तावेजी सुबूत है? अभी तक की कार्रवाई में सीबीआई ने इस तरह का साक्ष्य पेश नहीं किया है। इससे मुझे कुछ समय पहले एक राजनेता से हुई बात याद आ गई। नेता ने कहा कि अगर कोई पालिटीशियन किसी भी आरोप में जेल जाने को तैयार है तो वह साफ बच सकता है। कहीं ए. राजा का यही किस्सा न हो? जेल तो वह हो आए पर देश को 1.75 लाख करोड़ की रिकवरी में भी उतनी दिलचस्पी है जितनी सजा काटने में। क्या सीबीआई इस रकम को कभी रिकवर कर सकेगी?
2G, A Raja, Anil Narendra, Daily Pratap, P. Chidambaram, Vir Arjun

Sunday, 5 February 2012

झटकों पर झटके झेलने के आदी मनमोहन सिंह और उनकी सरकार

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 5th February  2012
अनिल नरेन्द्र
मनमोहन सिंह सरकार को सुप्रीम कोर्ट से लगातार झटके लगते ही जा रहे हैं। शीर्ष अदालत द्वारा यूपीए-2 को इस तीसरे झटके को मिलाकर पांचवां झटका है। बृहस्पतिवार का झटका इसलिए ज्यादा उद्वेलित करने वाला है, क्योंकि सीएजी ने 1.67 लाख करोड़ रुपये के 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले को उजागर कर सनसनी फैलाई थी कि प्रधानमंत्री स्वयं ए. राजा के बचाव में आए थे और पूरी सरकार पहले सीएजी फिर पीएसी के पीछे पड़ गई थी। कटु सत्य तो यह है कि यूपीए सरकार ने बेशकीमती स्पैक्ट्रम को रेवड़ी की तरह बांट दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूपीए-घ्घ् को बृहस्पतिवार को यह तीसरा झटका था। इससे पहले मुख्य सतर्पता आयुक्त पर पीजे थॉमस की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। तब भी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की आलोचना हुई थी क्योंकि सीवीसी की चयन समिति में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज की आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया गया था यह सीधे तौर पर पीएम के लिए झटका था। सुप्रीम कोर्ट ने 2जी मामले में ही दोषियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने में देर लगाने को गलत करार दिया और इस सीमा को अधिकतम चार महीने की सीमा तय कर दी। इस मुद्दे में भी पीएमओ की किरकिरी हुई थी। इस बार भी पीएमओ कठघरे में है। तीसरा और ऐतिहासिक फैसला बृहस्पतिवार को आया जो सबसे बड़ा झटका है। इस बार भी प्रधानमंत्री और तत्कालीन वित्तमंत्री कठघरे में हैं क्योंकि जब सीएजी ने यह मामला उठाया था और मीडिया ने इसे उछाला तो प्रधानमंत्री ने राजा को निर्दोष बताया था और बार-बार उन्हें बचाने की कोशिश की थी। जब बात ज्यादा बढ़ी तो वह जेल भेज दिए गए। तब मनमोहन सिंह ने बचाव में यह दलील दी कि गठबंधन सरकार के सामने ऐसी मजबूरियां होती हैं। ताजा फैसले ने 2जी स्पैक्ट्रम की प्रक्रिया को ही गलत करार दिया है यानि कि वह गलत और पक्षपाती था। सवाल यह उठता है कि प्रधानमंत्री ने इस गैर कानूनी-गलत प्रक्रिया को डिफैंड किन बेसिस पर किया? क्या उन्हें नैतिक आधार पर अब अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देना चाहिए? और कितनी विपरीत टिप्पणियों का इंतजार करेंगे मनमोहन सिंह? इससे पहले भी जब यूपीए-घ् का शासन था तब भी सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन सरकार को दो बार तगड़े झटके दिए थे। एक बार जब बिहार में एनडीए को सरकार बनाने का मौका न देकर राष्ट्रपति शासन लगाया था तब कोर्ट ने राज्यपाल के व्यवहार को असंवैधानिक करार दिया था। दूसरी बार झारखंड में भी यही स्थिति रही। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शिबू सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा था और एनडीए की सरकार बन गई थी। कांग्रेस पार्टी और संप्रग सरकार के लिए एक साथ एक नहीं बल्कि तीन मोर्चे खुल गए हैं। सबसे पहले उत्तर प्रदेश चनाव, दूसरे पी. चिदम्बरम का भविष्य और तीसरे दोनों को बचाने में संप्रग गठबंधन की चिन्ता। उत्तर प्रदेश चुनाव से ठीक पहले 122 टेलीकॉम लाइसेंस रद्द होने के बाद कांग्रेस पूरी ताकत से अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी. चिदम्बरम का बचाव तो कर रही है लेकिन इसके सियासी असर को लेकर उसकी जान हलक में जरूर अटकी होगी। कांग्रेस और सरकार दोनों ने मान लिया है कि अब उसके पास इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अख्तियार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। इन्हीं सब पहलुओं पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस के सर्वोच्च नेताओं की कोर कमेटी की बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व मान रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विपक्ष को चुनाव से पहले भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक हथियार तो मिल ही गया है। जिस तरह से कपिल सिब्बल ने अपनी प्रेस वार्ता के दौरान द्रमुक कोटे के दूरसंचार मंत्री रहे ए. राजा पर ठीकरा फोड़ा है उससे कहीं एक और नया मोर्चा न खुल जाए। ममता और शरद पवार ने पहले ही नाक में दम कर रखा है। अब पूरे घोटाले के लिए राजा को अकेले जिम्मेदार ठहराना पहले से नाराज द्रमुक को और उकसाना है। कहीं पहले से लगी आग और न भड़क जाए?
2G, A Raja, Anil Narendra, Congress, Daily Pratap, Manmohan Singh, Supreme Court, UPA, Vir Arjun

Saturday, 4 February 2012

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सुनाए दूरगामी महत्वपूर्ण फैसले

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th February  2012
अनिल नरेन्द्र
यकीनन बृहस्पतिवार का दिन सुप्रीम कोर्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन था। अदालत को तीन अहम मुद्दों पर अपना फैसला देना था। तीनों ही बहुत महत्वपूर्ण थे जिनके दूरगामी असर होने हैं। बृहस्पतिवार को सबसे महत्व फैसला 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले का था। इस पर देश और दुनिया की निगाहें टिकी थीं। इस घोटाले में गृहमंत्री पी. चिदम्बरम की कथित भूमिका की सीबीआई जांच, दूरसंचार कम्पनियों के लाइसेंस निरस्त करने और 2जी मामले की निगरानी के लिए एसआईटी गठित करने की मांग पर फैसला आना था। इन सबको छोड़कर एक और महत्वपूर्ण घटना थी उस जज के रिटायर होने का आखिरी दिन जिन्होंने 15 महीनों में सुप्रीम कोर्ट की उस बैंच की शोभा बढ़ाई जिसने हर उस रसूखदार को जेल की हवा खिलाई जिसके बारे में आम आदमी सोच भी नहीं सकता था। मैं बात कर रहा हूं जस्टिस एके गांगुली की जिनका अपने कार्यकाल का अंतिम दिन था बृहस्पतिवार। जस्टिस गांगुली की बेबाक टिप्पणियां इतिहास में दर्ज हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों मुद्दों पर अपना फैसला सुना दिया। पहला, कम्पनियों के 122 लाइसेंस रद्द करना और सात कम्पनियों पर भारी जुर्माना। दूसरा, चिदम्बरम के मामले में फैसला निचली अदालत पर छोड़ना और तीसरा सीबीआई जांच की निगरानी का काम सीवीसी की देखरेख में करना। तीनों फैसलों के दूरगामी असर होना लाजिमी है। शीर्ष अदालत ने तीन कम्पनियों पर पांच-पांच करोड़ रुपये का जुर्माना ठोंका है और चार कम्पनियों पर 50-50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने यह भी कहा है कि यदि सरकार की नीति जनहित के खिलाफ है तो अदालत कर सकती है अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग। कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि तत्कालीन संचार मंत्री ए. राजा के समय में लाइसेंस हासिल करने वाली कम्पनियां प्रभावित होंगी। कोर्ट ने कहा कि 10 जनवरी 2008 को लाइसेंस मनमाने और असंवैधानिक तरीके से जारी किए गए थे जिन्हें जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं शीर्ष अदालत ने पी. चिदम्बरम की कथित भूमिका की जांच की मांग पर निर्णय निचली अदालत पर छोड़ दिया। पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत को दो हफ्ते में फैसला सुनाने को कहा गया है। सम्भव है कि विशेष अदालत अपना फैसला शनिवार, चार फरवरी को ही सुना दे। शीर्ष अदालत ने टेलीकॉम नियामक `ट्राई' को निर्देश दिया है कि वह दो माह में 2जी लाइसेंस आवंटन के लिए नई सिफारिशें दे। जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस एके गांगुली की पीठ ने सरकार से ट्राई की सिफारिशों पर एक माह के अन्दर अमल करने को कहा है। फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए याचिकाकर्ता जनता पार्टी के अध्यक्ष डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि यह सरकार की सामूहिक विफलता है। उसने चेतावनियों की अनदेखी की। भाजपा नेता अरुण जेटली का कहना है कि यह एक व्यक्ति का नहीं बल्कि यूपीए सरकार का निर्णय था। ट्राई के अध्यक्ष जेएस शर्मा ने कहा कि इस फैसले से पांच फीसदी उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा यानि मोबाइल कॉलें अब महंगी हो जाएंगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। निश्चित रूप से विपक्ष इसे भुनाने का प्रयास करेगा और उसे एक ऐसा नया मुद्दा मिल गया है जिससे यूपीए सरकार की फजीहत बढ़ जाएगी। चूंकि यह दूरगामी फैसले हैं, इनके प्रभाव को समझने में भी टाइम लगेगा पर इस फैसले से उद्योग जगत में भूचाल आ गया है। उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि इतनी प्रभावशाली औद्योगिक कम्पनियों को यह दिन भी देखना पड़ेगा। इस बीच एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में डॉ. स्वामी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर गम्भीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 2जी मामले में 60 फीसदी रकम सोनिया गांधी ने ली है और इसका सुबूत उनके पास है। अब सबकी नजरें चार फरवरी को पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत पर टिकी हुई हैं जिसने पी. चिदम्बरम के भाग्य का निर्णय सुनाना है। चिदम्बरम की निजी सियासत इस फैसले पर टिकी है। कुछ हद तक यूपीए सरकार का भी भविष्य इस पर टिका है। अगर चिदम्बरम पर केस चलता है तो निश्चित रूप से इसका प्रभाव मनमोहन सरकार पर जरूर पड़ेगा। देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों से सरकार कैसे लड़ती है?
2G, A Raja, Anil Narendra, Daily Pratap, P. Chidambaram, Sonia Gandhi, Subramaniam Swamy, Supreme Court, Vir Arjun

Saturday, 10 December 2011

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फंसते पी. चिदम्बरम

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 10th December 2011
अनिल नरेन्द्र
केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदम्बरम के सितारे आजकल गर्दिश में चल रहे हैं। उनकी वजह से संप्रग सरकार और कांग्रेस पार्टी की फजीहत बढ़ती ही जा रही है। बृहस्पतिवार को सीबीआई की अदालत ने डॉ.सुब्रह्मण्यम स्वामी की उस याचिका को मंजूर कर लिया जिसमें चिदम्बरम के खिलाफ 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में दो गवाहों से पूछताछ की मांग की गई थी। अदालत ने दोनों गवाहों को पेश करने की इजाजत दे दी, लेकिन यह भी कहा कि पहले डॉ. स्वामी खुद गवाही देंगे और अगर उनकी गवाही में दम हुआ तो आगे की कार्रवाई होगी। स्वामी की संतोषजनक गवाही के बाद ही दोनों गवाहों की पेशी होगी। एक गवाह श्री खुल्लर वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं और दूसरे गवाह एससी अवस्थी सीबीआई में संयुक्त निदेशक हैं। गौरतलब है कि पी. चिदम्बरम 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के वक्त वित्तमंत्री थे। स्वामी के मुताबिक 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ियों की पूरी जानकारी चिदम्बरम को थी। वे चाहते तो घोटाला रुक सकता था। दरअसल तत्कालीन वित्त सचिव डी. सुब्बाराव द्वारा 6जुलाई 2008को लिखे एक पत्र के लीक होने के बाद से ही चिदम्बरम पर राजनीतिक हमले तेज हो गए। सुब्बाराव के पत्र से चिदम्बरम और पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा की स्पेक्ट्रम आवंटन, स्पेक्ट्रम उपयोग चार्ज, मूल्य निधारण समेत तमाम पहलुओं पर चर्चा की पुष्टि होती है। पत्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्तमंत्री के बीच मुद्दे पर विस्तार से चर्चा का भी जिक्र है। डॉ.स्वामी का दावा है कि चिदम्बरम पर लगाए आरोपों का उनके पास पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं और वह अदालत में इसे साबित कर सकते हैं। तत्कालीन वित्तमंत्री चाहते तो 2जी लाइसेंस पाने वाली कम्पनियों के इक्विटी बेचे जाने को रोक सकते थे पर उन्होंने इसकी सहमति दी। यह बात 5 नवम्बर 2008 को ए. राजा द्वारा लिखे गए नोट से पता चलता है। राजा का यह नोट स्वामी को सौंपे गए 400 दस्तावेजों का हिस्सा है। जाहिर है कि इस नोट के सामने आने से चिदम्बरम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में चिदम्बरम की भूमिका को लेकर यह दूसरा बड़ा रहस्योद्घाटन है। इससे पहले कैबिनेट सचिवालय को वित्त मंत्रालय की ओर से भेजे गए उस नोट से बवाल मच चुका है, जिसमें कहा गया था कि चिदम्बरम चाहते तो वित्तमंत्री रहते हुए घोटाले को रोक सकते थे। अदालत के आदेश के बाद चिदम्बरम एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। चिदम्बरम के इस्तीफे की मांग पर भारी हंगामे के चलते बृहस्पतिवार को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही। विपक्ष का कहना है कि उनके पद पर रहते 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच प्रभावित होगी। विपक्ष की मांग को दरकिनार करते हुए कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों में चिदम्बरम या सरकार के खिलाफ कोई बात नहीं है। संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए खुर्शीद ने कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि सरकार महंगाई के मोर्चे पर सरकार अपनी उपलब्धियों को बताए। खुद पी.चिदम्बरम ने बृहस्पतिवार को किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया और पत्रकारों द्वारा बार-बार पूछने पर कोई रिएक्शन नहीं दिया। जहां तक कांग्रेस पार्टी का सवाल है बेशक पब्लिक में तो पार्टी चिदम्बरम का साथ दे रही है पर अन्दरखाते वह समझ रही है कि चिदम्बरम फंसते जा रहे हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फंसे होने के अलावा उनके चुनाव को भी चुनौती का मुद्दा अदालत में है। उसका फैसला भी जल्द आ सकता है। अगर 17दिसम्बर को सीबीआई अदालत में जज ओपी सैनी स्वामी की दलीलों से सहमत हो गए तो दोनों गवाहों को पेश होने का आदेश दिया जाएगा। डॉ.स्वामी के पास चिदम्बरम को फंसाने के दस्तावेजों के होने का दावा भी पुख्ता हो सकता है। अगर चिदम्बरम के खिलाफ कोई भी कार्रवाई हुई तो सरकार और पार्टी को उन्हें बचाना मुश्किल हो सकता है। अगले कुछ दिन न केवल पी. चिदम्बरम के लिए ही मुश्किल भरे हैं बल्कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस पार्टी के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।
2G, A Raja, Anil Narendra, Daily Pratap, Manmohan Singh, P. Chidambaram, Subramaniam Swamy, Vir Arjun

Saturday, 26 November 2011

2जी घोटाले में कारपोरेटों को मिली जमानत


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26th November 2011
अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में पहली बार किसी को जमानत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पांच कारपोरेट आरोपियों को जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाने वाले हैं ः संजय चन्द्रा, विनोद गोयनका, हरि नायर, गौतम दोषी और सुरेन्द्र पिपारा। आरोपियों ने निचली अदालत और हाई कोर्ट में जमानत अर्जी खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आर्थिक अपराध का आरोप है और अगर यह साबित होता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को खतरा हो सकता है। लेकिन सीबीआई ने यह नहीं कहा कि जमानत पर छूटने के बाद आरोपी सुबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। हम ऐसा कोई कारण नहीं देखते जिससे कि आरोपी को कस्टडी में रखा जाए और वह भी तब जब इस मामले में छानबीन पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। आरोपी छह महीने से ज्यादा जेल में हैं और इस मामले में इन्हें कस्टडी में रखने का कोई मकसद पूरा नहीं होता। ऐसे में आरोपियों को 5-5 लाख रुपये की जमानत राशि पर जमानत देने का आदेश दिया जाता है। कोर्ट ने जमानत देने के साथ-साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं। इन्हें जमानत दिए जाने के बाद कनिमोझी समेत 6 आरोपियों को जमानत मिलने की उम्मीद हो गई है। 2जी घोटाले में अभी भी 2 फरवरी से ए. राजा बन्द हैं। कनिमोझी 20 मई से तिहाड़ में हैं। शरद कुमार (एमडी कलैंग्नार टीवी) भी 20 मई से बन्द हैं। आरके चंदोलिया (ए. राजा के प्राइवेट सचिव) 2 फरवरी को जेल गए थे। सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व टेलीकॉम सैकेटरी भी 2 फरवरी से ही बन्द हैं। शाहिद उस्मान बलवा, स्वान के प्रोमोटर 2 फरवरी से तिहाड़ में है। आसिफ बलवा (शाहिद के भाई) 29 मार्च से जेल में हैं। राजीव अग्रवाल डायरेक्टर कुसेगांव फूड्स एण्ड वेजिटेबल्स प्राइवेट लिमिटेड 29 मार्च को जेल गए थे। करीम मोरानी जो एक फिल्म निर्माता हैं और शाहरुख खान के दोस्त भी हैं 30 मार्च से तिहाड़ में हैं।
किसी आपराधिक मामले में आरोपी को कितनी अवधि तक न्यायिक हिरासत यानि जेल में रखा जाए और कब उसे जमानत मिलनी चाहिए, यह सवाल अक्सर उठता है। इन दिनों भी इस सवाल पर बहस जारी है। कुछ दिन पहले दिग्विजय सिंह ने भी यह सवाल उठाते हुए कहा था कि किसी आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के बाद उसे जेल में करने का कोई औचित्य नहीं है, इसलिए उसे जमानत मिलनी ही चाहिए। हालांकि उनके इस बयान की काफी आलोचना भी हुई थी। कहा गया कि वे अदालतों को निर्देशित करने की कोशिश कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह चूंकि एक विवादित राजनेता हैं इसलिए उनके बयान पर टीका टिप्पणी स्वाभाविक ही है पर कुछ समय पहले खुद सुप्रीम कोर्ट की एक तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि वह बहुचर्चित मामलों में आरोपियों को जमानत न देने की अदालतों की कथित नई प्रवृत्ति की पड़ताल करेंगे, क्योंकि यह प्रवृत्ति उस स्थापित न्यायिक सिद्धांत के खिलाफ है, जो कहता है कि `जमानत नियम है और जेल उपवाद है।' सुप्रीम कोर्ट की यह पहल निश्चित ही सराहनीय है लेकिन सवाल उठता है कि सिर्प हाई प्रोफाइल केसों पर ही क्यों। छोटे-मोटे मामलों में भी आरोपियों को अदालतों का वर्षों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब इन्हें जमानत मिलती है या केस का फैसला आता है उस वक्त तक वह सजा से ज्यादा समय तो जेल में बिता देते हैं। तिहाड़ जेल में अंडर ट्राइलों की संख्या देखें तो पाएंगे कि निचली अदालतों की बेल न देने की वजह से यह जेल में बन्द हैं। जहां तक 2जी स्पेक्ट्रम केस का संबंध है जेल भेजना तो ठीक है पर इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है पैसों की रिकवरी और इस दिशा में न तो सरकार और न ही सीबीआई कोई ठोस कदम उठा रही है। एक लाख 60-70 हजार करोड़ के इस घोटाले में आपने दर्जनों लोगों को अन्दर तो कर दिया पर जो पैसा इन्हेंने लूटा, जो देश की सम्पत्ति है उसका क्या हुआ? कनिमोझी और अन्य की अब जमानत हो जाएगी। केस वर्षों तक चलता रहेगा। अन्त में कुछ को सजा भी हो सकती है पर मूल प्रश्न वही आता है कि लूटी धनराशि की रिकवरी कैसे होगी?
2G, A Raja, Anil Narendra, Daily Pratap, Karim Morani, Reliance Telecom, Shahid Balwa, Supreme Court, Swan Telecom, Unitech Wireless, Vir Arjun

Friday, 25 November 2011

चिदम्बरम का बहिष्कार सोची-समझी रणनीति के तहत है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 25th November 2011
अनिल नरेन्द्र
संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही पहले दिन से सियासी गर्मी की आंच गरमाने लगी है। सत्र की शुरुआत महंगाई और गृहमंत्री पी. चिदम्बरम के बहिष्कार से हुई। बुधवार को लोकसभा में वामदलों के नोटिस पर महंगाई पर होने वाली बहस में भी सदन का पारा गरम रहेगा। बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर विपक्षी दलों के स्थगन प्रस्ताव की चर्चाओं के बीच वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने स्वीकार किया कि उम्मीद के मुताबिक परिणाम हासिल नहीं हो सके। उन्होंने जैसी उनकी अब आदत-सी बन गई महंगाई का ठीकरा मांग एवं आपूर्ति में असंतुलन, डालर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट व अन्य अंतर्राष्ट्रीय कारणों को छोड़ दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुद्रास्फीति की दर मार्च 2012 के अन्त तक 6-7 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। प्रणब दा के बयान से विपक्ष भड़क उठा। पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने मुखर्जी के बयान को आंकड़ों का जाल और जनता को दिग्भ्रमित करने वाला बताते हुए चेतावनी दे डाली कि अगर महंगाई का यही हाल रहा तो लोग जल्द हिंसा पर उतर आएंगे। एनडीए ने सदन के पहले दिन ही यह संकेत भी दे दिया कि वह गृहमंत्री पी. चिदम्बरम का बहिष्कार के अपने फैसले पर पूरी तरह अमल करेंगे। हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने गृहमंत्री को बचाने का पूरा प्रयास किया। मनमोहन सिंह ने कहा, जहां तक गृहमंत्री के बहिष्कार की बात है मुझे उम्मीद है कि राजनीतिक दल इस तरह के किसी कदम से बचेंगे, क्योंकि गृहमंत्री के बहिष्कार की कोई वजह नजर नहीं आती। दूसरी ओर राजग द्वारा चिदम्बरम के बहिष्कार को पूरी तरह से जायज बताते हुए भाजपा ने कहा कि यह विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। 2जी स्पेक्ट्रम मामले में प्रधानमंत्री के नाम लिखे वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी के नोट के सार्वजनिक होने के मद्देनजर ऐसा किया जाना स्वाभाविक कदम है। भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस पूर्व में जॉर्ज फर्नांडीस के साथ ऐसा कर चुकी है जब निर्दोष जॉर्ज को उन्होंने छह महीने तक बोलने नहीं दिया था। अब यह विदित है कि अगर चिदम्बरम ने पहल की होती तो यह घोटाला रोका जा सकता था। चिदम्बरम को भाजपा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में उतना ही जिम्मेदार मानती है, जितना ए. राजा को। भाजपा का कहना है कि जब चिदम्बरम वित्तमंत्री थे उस वक्त राजा जो भी कर रहे थे उन सभी के बारे में न सिर्प चिदम्बरम को जानकारी थी बल्कि उन्होंने राजा का समर्थन भी किया। उन्होंने राजा के उठाए कदमों को अपनी सहमति दी। अगर वह चाहते तो उसी वक्त ही इस घोटाले को होने से रोक सकते थे। भाजपा ने अपने आरोपों का आधार वित्त मंत्रालय के इस साल प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे उस नोट को भी बनाया है जो इस साल 25 मार्च को भेजा गया था। इस नोट से साफ हो जाता है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन नीलामी की बजाय `पहले आओ पहले पाओ' की नीति पर बनाने के लिए भी वित्तमंत्री के रूप में चिदम्बरम ने ही अपनी मंजूरी दी थी। यही नहीं, राजा ने बाकायदा चिदम्बरम को इस बारे में पत्र भी लिखा और बैठक भी की थी। ऐसे में चिदम्बरम इस घोटाले के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं, जितने कि राजा। दरअसल चिदम्बरम का बहिष्कार करके राजग ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। सरकार और चिदम्बरम के लिए एक एम्बैरिसिंग स्थिति हो गई है। वहीं चिदम्बरम को पसंद न करने वाली टीम अन्ना के लोग, बाबा रामदेव और तमिलनाडु की सीएम जयललिता तक भी एक मैसेज गया है। बहिष्कार का टाइमिंग मानना पड़ेगा कि अच्छा है। जनता पार्टी के अध्यक्ष
डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी की अपील पर यह मामला कोर्ट में है। चिदम्बरम की लोकसभा सीट भी खतरे में है। क्योंकि उनके चुनाव के खिलाफ एक याचिका का फैसला कभी भी आ सकता है। डॉ. स्वामी की डिमांड पर सीबीआई को 2जी से जुड़े कागजात भी देने पड़े हैं। स्वामी दावा कर रहे हैं कि चिदम्बरम को पूरी जानकारी थी और वह इसे दस्तावेजों के साथ साबित भी कर सकते हैं। एनडीए ने सिर्प दबाव ही नहीं बनाया बल्कि एक सियासी मैसेज भी दिया है। बाबा रामदेव और उनके साथ रामलीला मैदान में बैठे लोगों पर पुलिस कार्रवाई के पीछे गृहमंत्री के आदेश माने जा रहे थे। रामदेव समर्थकों की तरह टीम अन्ना के भी काफी लोग मानते हैं कि अन्ना और साथियों की गिरफ्तारी और उसके बाद मामले को उलझाने में गृहमंत्री और मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल का मेन रोल था। उधर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता तो अपने ही राज्य में चिदम्बरम को एक आंख नहीं भातीं। यह भी गौरतलब है कि गत रविवार को जयललिता की पहल पर अन्नाद्रमुक के थंबुदुरई रामलीला मैदान में लाल कृष्ण आडवाणी की रैली में आए थे। इसके एक दिन बाद चिदम्बरम के बहिष्कार का फैसला हो गया। जयललिता सम्भव है कि भविष्य में एनडीए के साथ जुड़ जाएं। कुल मिलाकर भाजपा को लगता है कि उनकी बहिष्कार की नीति सही दिशा में सही कदम है।
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Wednesday, 28 September 2011

अब क्या होगा आगे ः नजरें सुप्रीम कोर्ट पर



Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 28th September 2011
अनिल नरेन्द्र
देश के लिए कितने दुःख की बात है कि अमेरिका में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से 2जी घोटाले पर प्रश्न पूछे जा रहे हैं। सारी दुनिया में घोटालों की इस सरकार ने पूरे देश की इज्जत मिट्टी में मिला दी है। पता नहीं दुनिया भारत के बारे में क्या सोचती होगी? इधर देश में इस सरकार की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। 2जी घोटाले में रोज नई परतें खुलती जा रही हैं और जैसे-जैसे नए रहस्योद्घाटन हो रहे हैं, पता चल रहा है कि इस घोटाले की ऊपर से नीचे तक सबको खबर थी पर किसी ने भी इसे रोकने की कोशिश नहीं की। बेशक प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री वर्तमान और भूतपूर्व खुद घोटाले में शामिल न भी रहे हों पर इससे तो अब वह भी इंकार नहीं कर सकते कि सब कुछ उनकी जानकारी और कुछ हद तक स्वीकृति से हुआ। प्रधानमंत्री बेशक तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम को क्लीन चिट दे रहे हों और कह रहे हों कि उन्हें गृहमंत्री पर पूरा भरोसा है पर इससे अब बात बनने वाली नहीं। 2जी घोटाले पर पूरी तरह घिर चुकी सरकार के संकटमोचकों के उपाय अब खत्म होने लग हैं। सरकार के शीर्ष नेतृत्व को अब इस घोटाले के जाल से बचाने के लिए यह सिद्ध करना जरूरी है कि पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के फैसले से देश के खजाने को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। बीते सप्ताह अदालत के सामने पेश टीआरएआई की रिपोर्ट इसी कोशिश का हिस्सा थी जो औंधे मुंह गिर पड़ी। घोटाले की जांच कर रही संयुक्त समिति भी इसी निष्कर्ष की दिशा में कोशिश कर रही है। राजा के फैसलों में सरकार के शीर्ष नेतृत्व की सहमति को साबित करने वाले तमाम दस्तावेजी सुबूत देश व अदालत के सामने हैं। ए. राजा के निर्णयों से राजस्व के नुकसान का पहलू यदि कानूनी तौर पर साबित हो जाता है तो फिर प्रधानमंत्री व तत्कालीन वित्त मंत्री इस हानि की परोक्ष जिम्मेदारी से शायद ही बच सकें। लाइसेंस लेने वाली एक कम्पनी एस टेल की एक चिट्ठी सरकार के लिए मुसीबत बनेगी। प्रधानमंत्री को मालूम था कि कम्पनियां 2जी स्पेक्ट्रम की ऊंची कीमत देने को तैयार हैं। नवम्बर 2007 में सीधी मनमोहन सिंह को लिखी चिट्ठी में एस टेल ने स्पेक्ट्रम के लिए 6000 करोड़ रुपये का राजस्व देने की पेशकश की थी। कम्पनी ने बाद में इसे बढ़ाकर 13752 करोड़ रुपये तक कर दिया। बाजार से इन संकेतों के बावजूद राजा ने स्पेक्ट्रम को कम कीमत पर बेचा और पीएमओ इस फैसले में राजा के साथ खड़ा रहा। स्पेक्ट्रम में कुल कितना घाटा हुआ या घपला हुआ इस नुकसान की गणना में कैग ने एस टेल की चिट्ठी में प्रस्तावित कीमत को ही प्रमुख मुद्दा बनाया है। राजा के फैसले से प्रधानमंत्री और तब के वित्त मंत्री की अनभिज्ञता का तर्प बिखर गया है। राजा के फैसलों से भ्रष्टाचार तो स्पष्ट है अलबत्ता इस फैसले से राजस्व के नुकसान का तर्प अभी विवादों में है। कैग 1,76,000 करोड़ रुपये का नुकसान का निष्कर्ष दे चुकी है जिसे सरकार ने नकार दिया है। सूत्र बताते हैं कि ताजा जानकारी के बाद यह साबित करने की अंतिम कोशिश होगी कि 2001 की कीमतों पर 2008 में स्पेक्ट्रम बेचने से खजाने को कोई नुकसान नहीं हुआ था। यही अंतिम रास्ता है जिससे भ्रष्टाचार का ठीकरा ए. राजा के सिर फूटेगा और सरकार के शीर्ष नेतृत्व देश का नुकसान कराने की तोहमत से बच सकेगा। वैसे सीबीआई ने राजा पर भ्रष्टाचार का जो मामला बनाया है उसमें यह दर्ज है कि संचार मंत्री के फैसलों से देश को करीब 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई को पूर्व संचार मंत्री व अन्याय पर अभियोग के लिए यह साबित करना होगा कि राजा के फैसलों से खजाने को भारी चपत लगी है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर लगी हैं। देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट गृहमंत्री पी. चिदम्बरम की स्पेक्ट्रम में भूमिका की जांच को लेकर क्या निर्णय लेती है। यूपीए और कांग्रेस एक अभूतपूर्व संकट में फंसी हुई है जिसका फिलहाल तो कोई तोड़ नहीं निकल पा रहा है। कांग्रेस केवल इस बात से चिंतित नहीं है कि चिदम्बरम पर हमला किया जा रहा है बल्कि उसकी असली चिंता भाजपा की प्रधानमंत्री को लपेटने की योजना से है। यदि भाजपा एक बार चिदम्बरम के खिलाफ जांच शुरू करवाने में सफल हो गई तो इस जांच की आंच अपने आप प्रधानमंत्री तक पहुंच जाएगी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई है। देखें अदालत में क्या होता है?2G, A Raja, Anil Narendra, CAG, Corruption, Daily Pratap, Manmohan Singh, P. Chidambaram, Pranab Mukherjee, Prime Minister, Scams, Supreme Court, Vir Arjun

Saturday, 24 September 2011

चिदम्बरम सरकार और पार्टी दोनों के लिए लाइबिलिटी बन गए हैं


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 24th September 2011
अनिल नरेन्द्र
पौने दो लाख करोड़ रुपये के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में एक अहम मोड़ आ गया है। अब इस घोटाले के घेरे में तत्कालीन वित्त मंत्री और वर्तमान गृहमंत्री पी. चिदम्बरम भी आ गए हैं। उन पर आरोप विपक्ष या जांच एजेंसी सीबीआई ने नहीं बल्कि वर्तमान वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की ओर से लगाए गए हैं। मुखर्जी की ओर से 25 मार्च 2011 को प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखी चिट्ठी में कहा गया है कि अगर चिदम्बरम चाहते तो 2जी घोटाला रोक सकते थे। लेकिन उन्होंने 30 जनवरी 2008 को ए. राजा से मीटिंग में उन्हें पुरानी दरों पर स्पेक्ट्रम बेचने की इजाजत दी। उन्होंने कहा, `मैं अब एंट्री फीस या रेवेन्यू रोटिंग की वर्तमान दरों को रीविजिट (समीक्षा) नहीं करना चाहता।' चिट्ठी में कहा गया है कि अगर चिदम्बरम चाहते तो स्पेक्ट्रम की पहले आओ, पहले पाओ की जगह उचित कीमत पर नीलामी की जा सकती थी। 11 पन्नों की यह चिट्ठी आने वाले वक्त में चिदम्बरम के लिए आफत का सबब बन सकती है। यह चिट्ठी आरटीआई के तहत विवेक गर्ग ने हासिल की है। जनता पार्टी के अध्यक्ष डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बुधवार को यह पत्र सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस एके गांगुली की बैंच के समक्ष दस्तावेज के तौर पर पेश किया। वित्त मंत्रालय में उपनिदेशक पद पर तैनात डॉ. पीजीएस राव ने प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव विनी महाजन को 25 मार्च 2011 को भेजी इस चिट्ठी से साफ है कि प्रणब मुखर्जी ये संकेत देना चाह रहे हैं कि अगर पी. चिदम्बरम अड़ जात तो शायद टेलीकॉम घोटाले के चलते देश को लाखों करोड़ों रुपये का नुकसान न होता। मंत्रालय पीएमओ को भेजी अपनी चिट्ठी में कहता है कि वित्त मंत्रालय 31 दिसम्बर 2008 तक के लाइसेंस 2001 के भाव पर बेचने के लिए तैयार हो गया।
चिदम्बरम पर सीधा आरोप लगता है कि ए. राजा जो कुछ कर रहे थे उसकी सहमति गृहमंत्री को थी। यही नहीं, 30 जनवरी 2008 को उन्होंने ए. राजा से मीटिंग में उन्हें पुरानी दरों पर स्पेक्ट्रम बेचने की इजाजत दी। ए. राजा भी शुरू से ही कह रहा है कि मैंने जो कुछ भी किया वह पीएमओ और गृह मंत्रालय की स्वीकृति और जानकारी में किया है। अब यह आरोप तो खुद सरकारी दस्तावेज से साबित होता है। पहले आओ, पहले पाओ की जगह ज्यादा कीमत पर स्पेक्ट्रम की नीलामी की जा सकती थी पर चिदम्बरम ने ऐसा कुछ नहीं किया। कम्पनियों को दिए यूएएस लाइसेंस का प्रावधान 5.1 सरकार को लाइसेंस की शर्तों को किसी भी समय बदलने की इजाजत देता है बशर्ते यह जनहित में हो या सुरक्षा के लिए जरूरी हो पर चिदम्बरम ने ऐसा कुछ नहीं किया। वित्त मंत्रालय ने टेलीकॉम सेक्टर में ग्रोथ के अनुपात फीस तय करने की बात की। राजा इससे सहमत नहीं थे। चिदम्बरम ने इसका भी विरोध नहीं किया। वित्त मंत्रालय 4.4 मेगा हर्ट्स से ऊपर के स्पेक्ट्रम को बाजार भाव में बेचना चाहता था। राजा ने यह सीमा 6.2 मेगा हार्ट्स कर दी। चिदम्बरम इसी पर मान गए। लेकिन किसी भी कम्पनी को 6.2 मेगा हर्ट्स से ऊपर स्पेक्ट्रम दिया ही नहीं गया। होना यह चाहिए था कि सरकार 4.4 मेगा हर्ट्स से ऊपर की नीलामी वाले रुख पर कायम रहती और कम्पनियों से नई दरों पर पैसा वसूलती पर यह भी नहीं हुआ।
यूपीए के अन्दर एक तरह से छिड़े गृह युद्ध से प्रधानमंत्री का परेशान होना स्वभाविक ही है। पीएम आजकल अमेरिका में हैं। मनमोहन सिंह ने प्रणब मुखर्जी और चिदम्बरम दोनों से फोन पर बात की है। गुरुवार शाम चिदम्बरम ने एक बयान जारी कर दोनों नेताओं से बातचीत की जानकारी दी। चिदम्बरम ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया है कि जब तक वह स्वदेश वापस नहीं लौटते हैं मैं इस विषय पर कोई बयान नहीं दूंगा। मनमोहन सिंह 27 सितम्बर को न्यूयार्प से भारत लौटेंगे। उधर वित्त मंत्री ने भी न्यूयार्प में मीडिया से कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए मैं कुछ नहीं कहूंगा। वहीं केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि चिदम्बरम पर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते हैं। वह सरकार के समर्थन के हकदार हैं। केंद्रीय मंत्री अम्बिका सोनी ने भी सरकार में दरार के दावों को खारिज रकते हुए कहा कि जो भी रिपोर्टें आ रही हैं उनमें सच्चाई कम ही है। Šजी स्पेक्ट्रम केस की जांच करने वाली लोक लेखा समिति के अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि चिदम्बरम तुरन्त इस्तीफा दें या उन्हें बर्खास्त किया जाए। सीपीएम ने चिदम्बरम की भूमिका की सीबीआई जांच की मांग की है। उधर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा है कि चिदम्बरम 2जी केस में शामिल हैं। यह साफ हो गया है। न्यूयार्प से प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें चिदम्बरम पर पूरा भरोसा है। चौतरफा समस्याओं से घिरी यह यूपीए सरकार के लिए समय दिन प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। चूंकि इस बार सारे आरोप एक सरकारी दस्तावेज के आधार पर लग रहे हैं इसलिए इससे निकलना आसान नहीं होगा इस सरकार के लिए। रहा सवाल पी. चिदम्बरम का तो अब वह सरकार और कांग्रेस पार्टी के लिए एक लाइबिलिटी बनते जा रहे हैं।
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Friday, 16 September 2011

तिहाड़ जेल में कैसे गुजार रहे अपना समय ये वीआईपी कैदी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 16th September 2011
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली की तिहाड़ जेल का नाम वीआईपी जेल कर देना चाहिए। पिछले कुछ महीनों से यहां एक से एक बड़ा नेता मेहमान बन रहा है। सलाखों के पीछे अमर सिंह, ए. राजा, कलमाड़ी, कनिमोझी जैसे नेता अपने दिन कैसे गुजारते हैं, सुनिए।
पहले बात करते हैं अमर सिंह की। अमर सिंह के लि जेल के नियम-कानून और परम्परा ताक पर रख दी गई। स्वास्थ्य का हवाला देकर अमर सिंह को सोमवार देर शाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भेज दिया गया, लेकिन नियमानुसार अमर सिंह को पहले दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल भेजा जाना चाहिए था। सम्भवत यह पहला मौका है जब किसी कैदी को इलाज के लिए सीधे एम्स भेजा गया हो। बताया जा रहा है कि अमर सिंह को जेल में सुविधाएं देने को लेकर हो रहे लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव से आजिज आकर जेल महानिदेशक छुट्टी पर चले गए हैं। जेल कर्मी भी अमर सिंह के नखरों से परेशान हो गए हैं। डीआईजी (जेल) आरएन शर्मा ने बताया कि तिहाड़ में कोई वीआईपी नहीं है। सभी कैदियों को बराबर अधिकार और सुविधाएं हैं। दरअसल कलमाड़ी को साथ अपने दफ्तर में चाय-पिलाने के चलते जेल सुपरिंटेंडेंट भारद्वाज को कालापानी (पोर्ट ब्लेयर) भेज दिया गया था। यह सख्ती उसी का असर है। एक वार्डन मुस्कुरा कर कहता है कि ये वही अमर सिंह हैं जिन्हें कुछ दिन पहले तक अमिताभ बच्चन खुद ड्राइव कर एयरपोर्ट से अपने घर ले जाते थे, जिन्होंने अपने घर में करोड़ों की फर्निशिंग करवाई थी वही अमर सिंह आज 10 बाय 15 के एक सेल में जमीन पर सो रहे हैं जिसमें एक छोटा टीवी सेट और पंखा है।
उन्हें जेल के चार कम्बल, दो बैड शीट, एक थाली, कटोरी, चम्मच, गिलास और एक मटका मिला है। बड़ी पार्टियों के बीच अरबों-खरबों की डील कराने वाले अमर सिंह की जेब में 1500 रुपए, वह भी जेल कूपन के रूप में।
सुबह 6 बजे रोल कॉल का समय। एक के बाद एक नाम पुकारे जाते हैं। अमर सिंह का नाम आता है, संतरी पुकारता है अमर सिंह....जी। सुरेश कलमाड़ी, ए. राजा, कनिमोझी इत्यादि-इत्यादि। कई बार खुद बिना नाम पुकारे रजिस्टर पर सही का निशान लगा देते हैं। फिर प्रार्थना ः ऐ मालिक तेरे बन्दे हम। पिछले 20 साल से तिहाड़ में रोज सुबह लता मंगेशकर की आवाज में यही प्रार्थना बजती है और सभी कैदी उसे दोहराते हैं। फिर चाय। अखबार। कुछ देर टीवी। कुछ का टहलना। कुछ का काम सांप-सीढ़ी, लूडो, कैरम और बैडमिंटन खेलना। फिर खाना-पीना और सोना। राजा की पत्नी परमेश्वरी गुरुवार को उनसे मिलने पहुंचीं। लेकिन कनिमोझी इतनी खुशकिस्मत नहीं थीं। उनसे मिलने के लिए एक तमिल कवि ने एक सांसद के मार्पत अर्जी दी थी जिसे जेल अधिकारियों ने खारिज कर दिया। इसी तरह जेल नम्बर 3 के गेट पर सफेद कुर्ता-पायजामा पहने दर्जनभर से ज्यादा लोग जमा थे। सुबह 11 से देर शाम तक। कुछ विधायक अन्य खुद को बड़ा नेता बता रहे थे। सांसद कुलस्ते और भगोरा से मिलने मध्य प्रदेश और राजस्थान से आए थे। जेल प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी। जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता बताते हैं कि 12ः30 बजे कैदियों में केवल दो के लिए घर से खाना आता है। राजा और कनिमोझी। कोर्ट ने इसकी खास अनुमति दी है। महिला जेल में कनिमोझी घुलमिल गई हैं और महिला संतरी उन्हें दीदी कहकर बुलाती हैं। नियमानुसार हफ्ते में दो मुलाकात हो सकती हैं वह भी परिवार वालों से, वही कपड़े लेकर आते हैं। हफ्तेभर के लिए 1500 रुपये दे जाते हैं। इनमें कैंटीन से कुछ पकवान-मिठाई खरीदी जा सकती है। राजा तमिल चैनल और फिल्में देखकर समय काट रहे हैं। शाहिद बलवा ने आई पैड, कूलर, नरम तकिया और गद्दे की मांग की है। वे हिन्दी फिल्म देकर समय काट रहे हैं।
हां जेल में सैलून, कपड़ों पर प्रेस और ड्राई व वैट कैंटीन की सुविधा है। कूपन के जरिये जो चाहे खरीद लो। कलमाड़ी ने झांसी की रानी सीरियल देखने के लिए टीवी मांगा था। संतरी कहता है कि कलमाड़ी घंटों रजिस्टर में कुछ लिखते रहते हैं, क्या लिखते हैं, कोई नहीं जानता। क्या वह किस-किसको क्या दिया गया इसका हिसाब-किताब लिख रहे हैं, क्योंकि उनकी याददाश्त तो आती-जाती रहती है? अधिकतर वीआईपी-दो पूर्व केंद्रीय मंत्री, एक पूर्व मुख्यमंत्री, छह पूर्व सांसद, दो पूर्व नौकरशाह, 15 उद्योगपति-विचाराधीन कैदी हैं। इनसे जेल का काम नहीं करवाया जाता जिस जेल में रहते हैं? उसकी सफाई कर्मचारी करते हैं। अमर सिंह के साथ तीन कैदी इसलिए रखे गए हैं ताकि वह पूरा दिन फिनायल से फर्श साफ करते रहें ताकि अमर सिंह को कोई इंफैक्शन न हो। जेल कर्मचारी भी मानते हैं कि एमपी तो आखिर एमपी है। बाहर चाहे जितनी बातें बनाई जाएं, लेकिन एमपी का लिहाज करना ही पड़ता है। सो इस तरह गुजर रही है इन वीआईपी की तिहाड़ जेल में जिन्दगी।

Wednesday, 3 August 2011

धमकियों पर उतरे मनमोहन सिंह पहले ही दिन चित्त

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd August 2011
अनिल नरेन्द्र
संसद का मानसून सत्र आरम्भ हो गया है। इस सत्र में आरोपों-प्रतिआरोपों की जबरदस्त बारिश होगी यह तय है। पहले ही दिन से यह शुरू हो गया। आमतौर पर शालीनता और कूल स्वभाव के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बौखलाहट में विपक्ष पर सीधा हमला बोल दिया। सोमवार से मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही मनमोहन सिंह ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि हमें किसी मुद्दे पर चर्चा कराने का खौफ नहीं है। हम हर विषय पर बहस कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यहां तक तो बात समझ में आती है पर इससे आगे प्रधानमंत्री ने जो कहा वह जरूर समझ से बाहर है। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि हमारे पास विपक्षी खेमे को शर्मिंदा करने वाले बहुत सारे राज हैं। प्रधानमंत्री के इस हमले से विपक्ष बिफर गया। भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि एक तरफ तो प्रणब मुखर्जी, पवन बंसल और राजीव शुक्ला जैसे सरकार के प्रतिनिधि संसद को सुचारू रूप से चलाने का अनुरोध कर रहे हैं वहीं उनके नेता धमकियों पर उतर आए हैं। जब भाजपा नेता से इस बारे में पूछा गया तो नकवी ने कहा कि संसद चले और सभी कामकाज सुचारू रूप से चले ऐसी हमारी इच्छा है लेकिन सरकार टकराव और अहंकारी मुद्रा में है। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें (प्रधानमंत्री) को मुर्दे उखाड़ने तो दीजिए फिर देखेंगे। पहले ही दिन सरकार एक ऐसी ओट से चारों खाने चित्त हुई जहां से शायद उसे उम्मीद नहीं रही होगी।
टीम अन्ना ने सरकार पर हल्ला बोल दिया। डॉ. मनमोहन सिंह की दूसरी पारी का दूसरा दिन ही मानसून सत्र ऐसा होगा किसी ने सपनों में भी नहीं सोचा होगा। गांधीवादी अन्ना हजारे पक्ष ने सोमवार को दावा किया कि केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र चांदनी चौक सहित नागपुर, वर्धा और अमरावती के मतदाताओं ने लोकपाल विधेयक के सरकार के मसौदे को नामंजूर कर सामाजिक कार्यकर्ताओं के जन लोकपाल विधेयक का समर्थन किया है। अन्ना ने दावा किया कि सिब्बल के निर्वाचन क्षेत्र के 85 फीसदी मतदाता हजारे पक्ष के जन लोकपाल विधेयक के पक्ष में हैं और 82 फीसदी मतदाता चाहते हैं कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाया जाए। अन्ना ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो देशवासियों को सही लोकशाही का रास्ता दिखाता है। यह जनमत संग्रह बताता है कि `सोशल ऑडिट' बहुत जरूरी है। हम चाहते हैं कि पूरे देश में इस तरह का जनमत संग्रह हो। नतीजे बताते हैं कि सिब्बल के निर्वाचन क्षेत्र में 88 फीसदी लोग संसद के भीतर सांसदों के आचरण और 86 फीसदी लोग उच्च न्यायपालिका को प्रस्तावित लोकपाल के दायरे में रखने के पक्षधर हैं। प्रश्नावली के जरिये 83 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि संसद में लोकपाल विधेयक पर सांसदों को अपनी पार्टी के रुख के बजाय जनाकांक्षाओं के अनुरूप मतदान चाहिए।
टेलीकॉम घोटाला में एक बार फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम सामने आया है। सोमवार को ही आरोपी शाहिद बलवा की ओर से दी गई दलील में उसके वकीलों ने कहा कि पीएम को 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी। बलवा ने तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और सालिसिटर जनरल जी. वाहनवती का भी नाम लिया कि उन्हें भी आवंटन प्रक्रिया के संवाद की पूरी जानकारी थी। बलवा ने अपनी दलील को पुख्ता करने के लिए ए. राजा की उस चिट्ठी का भी जिक्र किया जो उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखी थी। बलवा ने सीबीआई पर पक्षपात का भी आरोप लगाया और कहा कि वह टाटा को बचाने की कोशिश में अन्य लोगों पर हाथ डाल रही है। बलवा के वकीलों ने यहां तक कहा कि ये स्पैक्ट्रम आवंटन पॉलिसी सरकार की थी और यही वजह है कि कहीं भी उसका विरोध नहीं किया गया। हर कदम पर उसे अनुमति मिलती गई। न तो प्रधानमंत्री और न ही अभी के संचार मंत्री ने किसी स्टेज पर ये कहा है कि इस पॉलिसी से सरकार को नुकसान हुआ है, फिर वे कटघरे में क्यों हैं?
इस मानसून सत्र की शुरुआत हंगामी हुई है। इस समय तो समूचा विपक्ष अपने-अपने कारणों से कांग्रेस पार्टी और सरकार से नाराज है। यह सत्र ठीकठाक से निकल जाए, यह प्रधानमंत्री और उनके सिपहसालारों के लिए चुनौती है। संसद के अन्दर और संसद के बाहर दोनों ही जगहों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा गरम है। देखें सरकार कैसे निपटती है।

Tuesday, 2 August 2011

चंदोलिया ने घसीटा नीरा राडिया और रतन टाटा को

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2nd August 2011
अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा के निजी सचिव रहे आरके चंदोलिया ने विशेष अदालत में सीबीआई पर आरोप लगाया है कि जांच एजेंसी उनके विरुद्ध गवाही देने के लिए गवाहों पर नाजायज दबाव बना रही है। सीबीआई उन्हें झूठे मामले में फंसाने की भी कोशिश कर रही है। शनिवार को पटियाला हाउस में सीबीआई ओपी सैनी की विशेष अदालत में चंदोलिया की ओर से जिरह पूरी कर ली गई। अब सोमवार को स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा अपने बचाव में दलीलें देंगे। चंदोलिया के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि चंदोलिया की गिरफ्तारी के वक्त सीबीआई के पास उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं था, न ही जांच एजेंसी ने किसी भी गवाह को पेश किया। इस तरह इस साल 2 फरवरी को हुई उनकी गिरफ्तारी पूर्णत गैर-कानूनी थी। अग्रवाल ने कहा कि जिन लोगों को छोड़ दिया गया या जिन्हें गवाह बनाया जा रहा है, उन्हें विशेष अदालत में आरोपी के तौर पर होना चाहिए था। शुक्रवार को स्पेक्ट्रम मामले में चंदोलिया ने अपनी दलील में खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उन्होंने तो सिर्प अपने बॉस के निर्देशों का पालन किया था। साथ ही नीरा राडिया और रतन टाटा को भी लपेटा। चंदोलिया के वकील ने सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी से कहा कि राजा के कथित सहयोगी असीरवदम आचारी ने कथित तौर पर कलेंग्नर टीवी को टाटा स्काई डीटीएच में लाने की साजिश रची और इसके लिए राजा और नीरा राडिया के बीच सम्पर्प का काम किया। इसमें नीरा राडिया को आरोपी बनाया जाना चाहिए। दलील के दौरान चंदोलिया के वकील ने कहा कि बातचीत के दौरान नीरा ने जब समझौते के सन्दर्भ में बात की, आचारी ने उनसे कहीं भी नहीं पूछा कि वह किस बारे में बात कर रही हैं। इससे पता चलता है कि आचारी को राजा की ओर से किए जा रहे कलेंग्नर टीवी और टाटा के बीच समझौते के बारे में जानकारी थी। इसे देखते हुए टाटा, नीरा और आचारी सहित कलेंग्नर टीवी को इस मामले में आरोपी बनाया जाना चाहिए। टाटा और नीरा राडिया बड़े लोग हैं और सीबीआई उन्हें छू तक नहीं पा रही लेकिन आचारी को क्यों नहीं? चंदोलिया ने कहा कि वे तो रोजमर्रा के कामकाज में ए. राजा की सहायता करने वाले अधिकारी मात्र थे। उनके वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल के बॉस ए. राजा थे। चंदोलिया ने तो सिर्प उनके निर्देशों का पालन किया। बॉस के निर्देशों का पालन करने के लिए एक सहायक मात्र थे। क्या वे (चंदोलिया) अपने बॉस से सवाल कर सकते थे? चंदोलिया ने कहा कि वह द्रमुक, कलेंग्नर टीवी या किसी दूरसंचार कम्पनी से जुड़े व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने सीबीआई को चुनौती दी भी कि वह सबूत के रूप में कोई भी एक दस्तावेज पेश करे जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर किए हों।
अब तक विभिन्न गवाहों पर नजर डालें तो एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। पहले बात करते हैं खुद ए. राजा की। राजा ने 25/7/2011 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी. चिदम्बरम का नाम घसीटा। आरोप ः स्वान, यूनिटेक की हिस्सेदारी कम किए जाने के बारे में जानते थे। 26/7/2011 को अटार्नी जनरल जीई वाहनवती (तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल) पर राजा ने आरोप लगाया कि पहले आओ, पहले पाओ की नीति में राजा के बदलावों को मंजूरी दी। नीरा राडिया के टेप सार्वजनिक होने से 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में नेताओं, उद्योगपतियों, पत्रकारों के खेल की डरावनी तस्वीर सामने आई। इन टेपों से पता चला कि वह टाटा और अम्बानी जैसी कम्पनियों के लिए लॉबिंग का काम करती थी। टाटा समूह की सभी 90 कम्पनियों का विज्ञापन और जनसम्पर्प काम नीरा राडिया की कम्पनी वैष्णवी कम्युनिकेशन के पास था। 27/7/2011 को सिद्धार्थ बेहुरा ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्पेक्ट्रम लाइसेंस शुल्क की समीक्षा नहीं की। मामला पेचीदा होता जा रहा है। सीबीआई विशेष अदालत के जज ओपी सैनी इस केस को कैसे निपटाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
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Thursday, 28 July 2011

बकौल ए. राजा, प्रधानमंत्री-चिदम्बरम को सब पता था


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 28th July 2011
अनिल नरेन्द्र
लगभग एक सप्ताह बाद संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। पहले से ही कई तरफ से घिरी कांग्रेस पार्टी और उसके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और घिरने वाले हैं। विपक्ष ने पहले से ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ लामबंदी तेज कर दी है। ऐसे में ए. राजा का सीबीआई की विशेष अदालत में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर सीधे आरोप लगाने से पार्टी और सरकार दोनों की खासी फजीहत होने की सम्भावना है। Šजी स्पेक्ट्रम घोटाले मामले के मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर कार्रवाई में देर को लेकर पहले ही सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी झेल चुके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम अब इस विवाद में घसीटे जाने से संप्रग सरकार में हड़कम्प मचना स्वाभाविक ही है। अदालत में अपने बचाव में दलील देते हुए राजा ने कह दिया कि 2जी स्पेक्ट्रम के तमाम महत्वपूर्ण फैसले उन्होंने अकेले नहीं किए। इनमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम की सहमति भी रही थी। उल्लेखनीय है कि अदालत में 2जी स्पेक्ट्रम मामले में अभियोग पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलों का दौर चल रहा है। अभियोजन पक्ष की दलीलें सुन ली गई हैं। अब बचाव पक्ष को अपनी दलीलें रखने का मौका मिला है। ए. राजा की तरफ से उसके वकील ने एक लिखित बयान पढ़ा था। इसमें कहा गया कि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों के वितरण में कोई मनमानी नहीं की। भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौर से मंत्रालय में जो नीति चली आ रही थी, उन्होंने भी अपने कार्यकाल में इसका ही अनुसरण-भर किया। राजा का कहना था कि यदि मंत्रालय में चली आ रही इस नीति का पालन करके उन्होंने कोई गुनाह किया है तो इससे पहले के दूरसंचार मंत्री भी उतने ही दोषी हैं और उन्हें भी उनके साथ तिहाड़ में होना चाहिए। राजा ने यह कह दिया है कि यह बात प्रधानमंत्री की जानकारी में थी कि स्वान और यूनिटेक कम्पनियों की काफी हिस्सेदारी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के पास चली गई थी। इन कम्पनियों को 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस जारी किए गए थे। इस मुद्दे पर तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की थी। ऐसे में उन पर यह आरोप सही नहीं हैं कि उन्होंने विदेशी कम्पनियों के मामले की जानकारी सरकार से छिपाई थी।
राजा के अदालती बयान से चिंतित सरकार ने अपने रणनीतिकार मंत्रियों की फौज `डैमेज कंट्रोल' के लिए लगा दी है। कपिल सिब्बल से लेकर पी. चिदम्बरम, पवन बंसल और नारायणस्वामी तक, सभी राजा के बयानों को एक आरोपी का बयान साबित कर विपक्ष के हमलों का जवाब देने में जुट गए हैं। यूपी, बिहार और कर्नाटक में उजागर हुए ताजा घोटालों के मद्देनजर भाजपा समेत सभी विपक्षी दलों को आईना दिखाने की रणनीति पर अमल शुरू हो चुका है। यह अपनी जगह ठीक हो सकता है पर इससे राजा के आरोप धुल नहीं जाते। इसलिए एक ओर कपिल सिब्बल ने राजा के बयानों को एक आरोपी का बयान साबित करने की कोशिश की तो चिदम्बरम ने भाजपा पर यह आरोप मढ़ दिया कि विस्फोट की घटनाओं में शामिल दक्षिणपंथी कट्टरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई की वजह से भाजपा बौखलाई हुई है और इसी बौखलाहट में वह प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इस्तीफों की मांग कर रही है। मगर ए. राजा के बयान के बाद सरकार के सबसे ईमानदार कहे जाने वाले दोनों शीर्ष मंत्री की साख पर आंच आ गई है और वह कैसे साबित करें कि वाकई मनमोहन सिंह और चिदम्बरम को 2जी घोटाले की जानकारी नहीं थी? प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके सिपहसालारों को यह भूलना नहीं चाहिए कि उन्होंने पहले इसी ए. राजा को डिफैंड किया था और यह भी कहा था कि राजा ने कोई गलत काम नहीं किया। अब उस स्टैंड से कैसे पलटेंगे? किसी भी घोटाले का अभियुक्त अपने बचाव में जो कुछ कहता है उस पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल होता है, लेकिन यह भी मानकर नहीं चला जा सकता कि हर मामले में उसकी दलील खारिज ही कर देनी चाहिए। Šजी स्पेक्ट्रम घोटाले के अभियुक्त यह जो आरोप लगा रहे हैं कि स्पेक्ट्रम पाने वाली कम्पनियों द्वारा शेयर बेचे जाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्तमंत्री चिदम्बरम के साथ चर्चा की गई थी एक गम्भीर आरोप है। राजा की मानें तो स्पेक्ट्रम पाने वाली कम्पनियों द्वारा अपनी हिस्सेदारी विदेशी कम्पनियों को बेचने के फैसले को केंद्रीय वित्तमंत्री ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में मंजूरी दी थी। सत्तापक्ष राजा के इस आरोप को एक अभियुक्त का बयान बताकर पल्ला झाड़ सकता है, लेकिन इतने मात्र से सन्देह के बादल छंटने वाले नहीं हैं। इसलिए और भी नहीं, क्योंकि यह बात पहले भी सामने आ चुकी है कि राजा के फैसलों पर प्रधानमंत्री के साथ-साथ चिदम्बरम ने भी एतराज जताया था। सच तो यह है कि इस सन्दर्भ में इन दोनों ने पत्र भी लिखे थे और उसके प्रमाण मौजूद हैं। आम जनता तो यह जानना चाहेगी कि आखिर राजा पर इस एतराज का कोई असर क्यों नहीं हुआ और उन्हें मनमानी करने से क्यों नहीं रोका जा सका? ए. राजा की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के कई आधार हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण तो यह है कि राजा की गिरफ्तारी में इतनी देर क्यों लगी? गिरफ्तारी से पहले तक यही प्रधानमंत्री और तत्कालीन गृहमंत्री उनका हर तरह से बचाव करने में लगे हुए थे। खुद प्रधानमंत्री ने स्पेक्ट्रम आवंटन में किसी तरह की गड़बड़ी से इंकार किया था। इतना ही नहीं, दोषपूर्ण और मनमाने तरीके से किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन के चलते हुई राजस्व हानि को शून्य बताया गया था। इसके अतिरिक्त यह भी किसी से छिपा नहीं कि स्पेक्ट्रम हासिल करने वाली कम्पनियों ने किस तरह अपनी हिस्सेदारी बेचकर अरबों रुपये अर्जित किए और यह तो जगजाहिर है कि स्पेक्ट्रम आवंटन के समय सारे कायदे-कानूनों को ताक पर रख दिया गया था। क्या सरकार के मुखिया हमें यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके मना करने पर भी उनके एक मंत्री ने मनमानी की और उनके आदेशों का खुला उल्लंघन किया? हम गठबंधन मजबूरियां तो एक हद तक समझ सकते हैं पर इस मजबूरी की आड़ में एक मंत्री को खुलेआम लूट मचाने की छुट्टी हो, यह बात अपनी समझ से बाहर है। अब सवाल यह है कि राजा अपने आरोपों को साबित करने के लिए अदालत में कैसे सबूत देते हैं और अदालत उस पर क्या रुख करती है? अभी तो ए. राजा ने यह आरोप लगाए हैं, आगे देखते जाइए कौन-कौन क्या आरोप लगाता है।
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Wednesday, 20 July 2011

इस देश में असल राज है नौकरशाहों, पत्रकारों और दलालों का

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 20th July 2011
अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले ने एक बात तो साबित कर ही दी है कि इस देश को जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि उर्प सांसद, मंत्री इत्यादि नहीं चला रहे बल्कि उद्योगपति, नौकरशाह और दलाल चला रहे हैं। अगर ऐसा न होता तो नीरा राडिया सरीखे के लोग इतने शक्तिशाली न होते जो अपनी पसंद का मंत्री भी चुनवा लेते हैं और उसे चुनिंदा मंत्रालय भी दिलवा देते हैं। नीरा राडिया आज मशहूर हस्ती हैं, कौन हैं यह नीरा राडिया? 1995 में पहली बार नीरा राडिया भारत में आई और उसने पहली नौकरी सहारा समूह में बतौर लियाजन अफसर की थी। 2001 में नीरा ने वेशन्वी कम्युनिकेशन नामक कंपनी आरंभ की थी और देखते ही देखते टाटा और अंबानी समूह का सारा लियाजन का काम संभालने लगी। अचानक अपनी संदिग्ध गतिविधियों के कारण नीरा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नजरों में आ गई। ईडी इस बात की जांच कर रहा था कि अचानक 10 सालों में नौकरी करने वाली नीरा राडिया 300 करोड़ रुपये की सम्पत्ति की मालिक कैसे बन गई? इसी जांच में ईडी ने नीरा राडिया के फोन को टेप करना आरंभ किया। आयकर विभाग ने लगभग 104 टेप अपनी वेबसाइट पर लगाए हैं। इनसे पता चलता है कि कैसे राजनेताओं, उद्योगपतियों, नौकरशाह और पत्रकारों की सांठगांठ से यह सरकार चल रही है। अकेले टाटा समूह और मुकेश अंबानी नीरा राडिया को साल का 30,30 करोड़ रुपये बतौर फीस देती है। आखिर इतने पैसे उद्योगपति (वह भी टाटा और अंबानी जैसे) देते हैं तो कुछ तो नीरा राडिया उन्हें एवज में देती ही होगी। ऐसा नहीं उद्योगपति एक भी पैसा खर्च करते? राडिया की गतिविधियों की सूची लंबी है। 2009 में यूपीए सरकार की सत्ता में वापसी के बाद ए. राजा को फिर से दूरसंचार मंत्री बनवाने के लिए नीरा राडिया ने कनिमोझी सहित कई प्रभावशाली लोगों के साथ लाबिंग की थी। राडिया ने सीबीआई को दिए बयान में स्वीकार किया कि राजा को मंत्री बनवाने के लिए सभी संभावित संगत पर विचार किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि राजा को अनिल अंबानी से दूरी बनाकर रहने की सलाह दी गई थी। नीरा ने इस विषय पर भारती एयरटेल के प्रमुख सुनील मित्तल से भी चर्चा की थी। राडिया ने हाल ही में सीबीआई को दिए बयान में यह बातें कबूल की हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच में हस्तक्षेप करने को लेकर सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय और दो पत्रकारों के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के सिलसिले में सीबीआई ने कारपोरेट लाबिस्ट नीरा राडिया और टेलीविजन चैनलों के कुछ शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ की है। हालांकि सीबीआई ने कहा कि अभी उन टेलीविजन पत्रकारों और प्रवर्तन निदेशालय के जांच अधिकारियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत की जांच किया जाना बाकी है जिनसे 2जी मामले की जांच के सिलसिले में कथित तौर पर संपर्प किया गया था। यह बयान वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने दिया। उन्होंने सीबीआई द्वारा की गई जांच के निष्कर्षों को पढ़ा। सीबीआई ने बंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट दी है। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ को यह भी सूचित किया गया कि सीबीआई सभी पहलुओं से आरोपों की जांच कर रही है और स्वतंत्र गवाहों तथा दस्तावेजों की तलाश कर रही है। वेणुगोपाल ने कहा नीरा राडिया से पूछताछ की गई है। इन लोगों से एक से अधिक बार पूछताछ की गई है क्योंकि उनके बयान में कुछ विरोधाभास था। शीर्ष अदालत ने गत छह मई को कहा था कि प्रथम दृष्टया सुब्रत राय और सहारा न्यूज नेटवर्प के दो पत्रकारों उपेंद्र राय और सुबोध जैन के खिलाफ 2जी मामले की जांच में हस्तक्षेप करने का मामला बनता है और अदालत ने अवमानना के लिए नोटिस जारी किया था।
उधर सीबीआई ने पटियाला हाउस की एक अदालत को जानकारी दी कि बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की अहम कड़ी माने जाने वाली कारपोरेट लाबिस्ट नीरा राडिया की बातचीत वाले टेप मामले से जुड़े सभी आरोपियों को दिए जाएंगे। बता दें कि इन टेपों में कारपोरेट जगत के अलावा मीडिया सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों से बातचीत है, जिसके कुछ ही अंश बाहर आ पाए हैं। सीबीआई द्वारा सभी आरोपियों को ये टेप उपलब्ध कराने से कई अन्य लोगों की बातचीत से पर्दा उठ सकता है। देश उम्मीद करता है कि नीरा राडिया के सारे टेपों को सार्वजनिक किया जाए ताकि जनता को यह पता चल सके कि असल में इस देश पर राज कौन करता है? जनता या दलाल?
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Thursday, 23 June 2011

अभी कुछ महीने और तिहाड़ में ही रहेंगी कनिमोझी


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 23nd June 2011
अनिल नरेन्द्र
`सॉरी मैडम वी हैव ट्राइड ऑवर बैस्ट।' सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कनिमोझी के वकीलों ने जब ये शब्द कहे तो दो माह पूर्व तक तमिलनाडु के वीवीआईपी का दर्जा रखने वाली कनि की मां रजती अम्मल फूट-फूट कर रोने लगी। उन्हें बहुत उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट से कनिमोझी को जमानत मिल जाएगी। रुआंसी और आंसू पोंछती रजती ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। बस हाथ जोड़कर सिर हिलाया और आगे बढ़ गई। थके मुकदमे में बालू भी उनके पीछे चल दिए। बालू ने ढाई घंटे चली पूरी कार्रवाई खड़े होकर ही सुनी थी। रजती पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की तीसरी पत्नी हैं, कनिमोझी (43) उनकी इकलौती संतान है। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद करुणानिधि ने दयालु अम्मा से विवाह किया। दयालु कलैग्नार टीवी में 60 फीसदी शेयर की मालिक है। रजती काफी दिनों तक करुणानिधि के साथ ऐसे ही रहती रही। करुणानिधि ने उनके साथ कभी विधिवत विवाह नहीं किया। उन्हें पत्नी भी 10-12 साल पहले तब माना था जब चुनाव में उन्होंने अपनी आय का शपथ पत्र दायर किया और उसमें अम्मा के नाम कुछ सम्पत्ति दिखाई। लोगों ने जब पूछा कि रजती कौन है तब उन्होंने कहा कि वह उनकी पत्नी है।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अभियुक्त द्रमुक सांसद कनिमोझी को सुप्रीम कोर्ट आना महंगा पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका ही खारिज नहीं की बल्कि भविष्य में जमानत देने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। कनिमोझी अब जमानत के लिए तब ही आवेदन कर पाएगी जब उनके खिलाफ निचली अदालत में आरोप तय हो जाएंगे। आरोप तय होने में तीन माह का समय लग सकता है, लेकिन सुनवाई अदालत सिर्प इस केस के लिए बनी है इसलिए हो सकता है कि यह अवधि कुछ दिन कम हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कनि की यह दलील अस्वीकार कर दी कि उन्हें धारा 437 के तहत जमानत दी जाए। कोर्ट ने कहा कि आपमें क्या खास बात है, आपकी तरह सैकड़ों विचाराधीन महिला कैदी जेल में हैं और बच्चों से दूर हैं। कनिमोझी 20 मई से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बन्द है। जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस बीएस चौहान की खंडपीठ ने यह फैसला जमानत का विरोध कर रही सीबीआई और कनिमोझी के वकीलों की डेढ़ घंटा बहस सुनने के बाद दिया। जमानत खारिज करने का दो लाइन का फैसला सुनकर कनि के वकीलों का चेहरा फक रह गया। कनिमोझी के वकीलों ने बहुत कोशिश की कि जमानत किसी भी हालत में हो जाए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह कोर्ट की कठोर से कठोर शर्तें मानने को तैयार हैं। यदि सीबीआई को डर है कि अपने राजनैतिक रसूख से गवाहों और जांच को प्रभावित कर सकती है तो उन्हें उनके घर में नजरबन्द भी रखा जा सकता है। कनिमोझी के वकीलों का तो यहां तक कहना था कि अमेरिका की तरह यहां पैरों में रेडियो एंकलेट तो नहीं लगाए जाते, लेकिन उनके घर में 24 घंटे पहरेदारी तथा इलैक्ट्रॉनिक निगरानी (कैमरे तथा वायरलेस) रखी जा सकती है पर कोर्ट ने उनकी कोई दलील नहीं मानी। बस इतनी छूट जरूर दी कि अदालत ने कहा कनिमोझी आरोप तय होने के बाद मामले की सुनवाई कर रही कोर्ट से नियमित जमानत मांग सकती हैं। वहां मामले को नए सिरे से सुना जाएगा।
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Friday, 10 June 2011

प्रधानमंत्री का मंत्रियों पर नकेल कसने की कसरत का स्वागत है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 10th June 2011
अनिल नरेन्द्र
काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ते चौतरफा दबावों से घिरी मनमोहन सिंह सरकार चिंतित लग रही है। खासकर पीएम डॉ. मनमोहन सिंह। वह अपनी सरकार की गिरती छवि को थामने के लिए अब कदम उठाने की बात कर रहे हैं। इनमें से एक है एक बार फिर अपने मंत्रियों को अपनी सम्पत्ति का खुलासा करने का निर्देश देना। प्रधानमंत्री का यह कदम उच्च स्तर पर शासन में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रियों के लिए आचार संहिता जारी की है। इसके तहत हर मंत्री को अपनी और अपने परिजनों की सम्पत्ति के ब्यौरे की घोषणा करनी होगी। इतना ही नहीं, मंत्रियों को अपने हितों की भी जानकारी देनी होगी। मसलन, यदि किसी मंत्री का परिजन विदेशी कम्पनी में कार्यरत है तो इसका पूरा ब्यौरा उन्हें देना होगा तथा सरकार से इसकी पूर्व अनुमति लेनी होगी। राज्यों को भी आचार संहिता लागू करनी होगी। उन्हें 31 अगस्त तक मंत्रियों को अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा देने को कहा गया है।
प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को चिट्ठी लिखकर अपनी सम्पत्ति और सालाना कमाई ही नहीं बल्कि अपने पति या पत्नी के साथ उन पर आश्रित परिजनों के नाम की सम्पत्ति को भी सार्वजनिक करने के लिए कहा गया है। इतना ही नहीं, मंत्रियों को इस बार विशेष रूप से कारपोरेट जगत से अपने कारोबारी रिश्तों और संबंधों का भी खुलासा करने के निर्देश दिए गए है। प्रधानमंत्री की इस चिट्ठी में मंत्रियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि यदि उनके परिवार का कोई सदस्य अपनी कोई फर्म शुरू करता है या फिर किसी कारोबारी फर्म के बोर्ड का सदस्य बनता है तो इस जानकारी का भी उन्हें खुलासा करना होगा। आचार संहिता के तहत सभी मंत्रियों को सम्पत्ति, देनदारियों, व्यापारिक हितों और अन्य किसी आश्रितों के किसी विदेशी सरकार या संगठन के तहत रोजगार संबंधी जानकारी भी देनी होगी। विवरण में समस्त अचल सम्पत्ति, नकदी, आभूषण, शेयर और डिबेंचर का ब्यौरा शामिल है।
कारण कुछ भी रहा हो, चाहे वह बाबा रामदेव के आंदोलन का दबाव रहा हो या फिर अन्ना हजारे का प्रेशर्स, प्रधानमंत्री के इस कदम का हम स्वागत करते हैं। मनमोहन सरकार में कई करोड़पति मंत्री पहले से ही मौजूद हैं। नेशनल इलेक्शन वॉच की एक रिपोर्ट जो मंत्रियों द्वारा 2009 में दाखिल चुनाव हलफनामे पर आधारित है, का कहना है कि श्री प्रफुल्ल पटेल पहले से ही 89.9 करोड़ सम्पत्ति के मालिक हैं। कपिल सिब्बल 31.97 करोड़, विसेंट पाला 25.16 करोड़, वीरभद्र सिंह 22.52 करोड़। यूपीए सरकार में कुल 47 मंत्री करोड़पति हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के खलनायक पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के मामले में पर्दे के पीछे कुछ औद्योगिक घरानों से उनकी साठगांठ, इंडियन प्रीमियर लीग की टीमें खरीदने के लिए शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले और पूर्व विदेश मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनन्दा पुष्कर की वजह से सरकार की हुई फजीहत शायद प्रधानमंत्री के नए निर्देश का कारण हो सकती है। जहां हम पीएम के इस कदम का स्वागत करते हैं वहीं यह भी कहना चाहते हैं कि नौकरशाहों पर भी नकेल कसनी चाहिए। मंत्रियों से कहीं ज्यादा इन नौकरशाहों ने लूट-खसोट मचा रखी है।
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Thursday, 9 June 2011

दयानिधि मारन से कन्नी काटी प्रधानमंत्री व कांग्रेस ने

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 9th June 2011
अनिल नरेन्द्र
दयानिधि मारन बुरी तरह से फंसते जा रहे हैं। जैसे डीएमके के अन्य मंत्रियों व नेताओं ने यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा करवाया ठीक उसी तरह मारन ने अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए एक नया सिरदर्द खड़ा कर दिया है। मनमोहन सिंह पहले से ही ए. राजा, कनिमोझी विवाद को लेकर कटघरे में खड़े हैं अब दयानिधि ने उनकी फजीहत बढ़ा दी है। 2004 से 2007 तक हुए स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर यूपीए पहले ही अंगुलियां जला बैठी है, क्योंकि ए. राजा और सुरेश कलमाड़ी को बचाने का अंजाम वह देख चुकी है। अब शायद ही प्रधानमंत्री दयानिधि मारन को बचाने की कोशिश करें। दयानिधि के खिलाफ गम्भीर आरोप हैं। अनिवासी भारतीय एस. शिवशंकरन को उनकी कम्पनी एयरसेल को बेचने के लिए मजबूर करने के आरोपी केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का जाना अब लगभग तय-सा लगता है। मारन के खिलाफ आरोपों और संबंधित सुबूतों के बारे में सीबीआई ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को विस्तृत रिपोर्ट दे दी है। शिवशंकरन ने सोमवार को सीबीआई को बताया था कि किस तरह दूरसंचार मंत्री रहते हुए उन्हें एयरसेल बेचने के लिए दयानिधि मारन ने मजबूर किया था। एयरसेल मामले में दयानिधि मारन की भूमिका पर प्रधानमंत्री को विस्तृत रिपोर्ट देने की पुष्टि करते हुए सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कपड़ा मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप काफी गम्भीर हैं और उनकी पूरी जांच की जरूरत है। शिवशंकरन ने जांच एजेंसी को उन लोगों के नाम-पते दिए हैं, जो मारन की ज्यादतियों के चश्मदीद गवाह हैं। मारन इन्हीं लोगों के माध्यम से शिवशंकरन पर एयरसेल को बेचने के लिए दबाव बना रहे थे। इनमें एयरसेल से जुड़े वकील और चार्टर्ड एकाउंटेंट शामिल हैं। शिवशंकरन का कहना था कि दूरसंचार मंत्री रहते हुए मारन ने उनके वाणिज्यिक साम्राज्य को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और उन्हें देश से भागने पर मजबूर कर दिया।

आज की तारीख में भ्रष्टाचार का मुद्दा घर-घर तक चर्चा का विषय बना हुआ है। तभी तो भ्रष्टाचार और काले धन को लेकर आज के सूरत-ए-हाल में लोकायुक्त गठन की जरूरत महसूस की जा रही है। यही कारण है कि कांग्रेस नेतृत्व आज दयानिधि मारन से फासले बढ़ा रहा है और सरकार या कांग्रेस शायद ही उन्हें अब बचा पाए। दयानिधि मारन को संकेत दे भी दिए गए हैं। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी से उनकी मुलाकात के दौरान उन्हें संकेत दे दिए गए हैं। प्रधानमंत्री पहले ही सीबीआई से कह चुके हैं कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले मामले में सभी आरोपों की जांच की जाए जिनमें मारन के विरुद्ध आरोप भी शामिल हैं। इन आरोपों पर सीबीआई जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंच चुकी है। देखना अब यह है कि द्रमुक प्रमुख करुणानिधि का अब क्या रुख होता है। दो दिन पहले करुणानिधि ने प्रधानमंत्री को कनिमोझी की गिरफ्तारी के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया था। अब अगर दयानिधि मारन हिरासत में लिए जाते हैं तो करुणानिधि क्या करेंगे? क्या वह यूपीए सरकार से अपने मंत्रियों को हटाने का आदेश देते हैं? समर्थन वापसी की तो वह पहले ही घोषणा कर चुके हैं।
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Saturday, 4 June 2011

कनिमोझी, ए. राजा के बाद अब दयानिधि मारन का नंबर आ रहा है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th June 2011
अनिल नरेन्द्र
वर्षों तक श्रीराम को गाली देने वाले एम. करुणानिधि और उनके परिवार ने तमिलनाडु और केन्द्र में मुगलों की तरह सत्ता सुख भोगा है और इतना पैसा बनाया है कि जिसका हिसाब ही कोई नहीं। पर जब श्रीराम की मार पड़ती है तो अच्छे-अच्छे धुरंधर धाराशाह हो जाते हैं। करुणानिधि के परिवार का भी दुर्दिन आरम्भ हो गया है। पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के बाद सांसद बेटी कनिमोझी के भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने के बाद उनके परिवार का एक और सदस्य तथा केन्द्राrय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का अब नम्बर आ रहा है। दयानिधि मारन के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर पब्लिक लिटिगेशन ने सुपीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि मारन द्वारा मलेशिया के मैक्सिस समूह का पक्ष लिए जाने से संबंधित दस्तावेज उसे कोर्ट में पेश करने की अनुमति दी जाए। इस समूह ने मई 2004 से मई 2007 के बीच मारन के दूरसंचार मंत्री रहने के दौरान चेन्नई की टेलीकॉम कंपनी एयरसेल को खरीद लिया था। आरोप है कि दूरसंचार मंत्री रहते शिवा गुप की कंपनी एयरसेल को यूएएस लाइसेंस देने का मामला अटका दिया था। दूरसंचार मंत्रालय के रवैए से क्षुब्ध होकर इस कंपनी के मालिक सी. शिवाशंकर एयरसेल को मैक्सिस समूह को बेचने के लिए बाध्य हो गए थे। मैक्सिस समूह के मालिक मलेशिया के बिजनेस टाइकून टी. आनंद कृष्णन हैं। आरोप है कि मैक्सिस समूह के एयरसेल के बाद मारन परिवार नियंत्रित सन टीवी में भारी निवेश करते हुए उसकी 20 पतिशत हिस्सेदारी खरीद ली। मारन के कार्यकाल में एयरसेल को 14 लाइसेंस दिए गए।
उधर, 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने राष्ट्रीय दूरसंचार नीति में 2001 से हुई अनियमितताओं की पड़ताल के लिए पारंभिक जांच दर्ज की है। इससे ए. राजा के पहले रहे दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन भी जांच के घेरे में आ गए हैं। गौरतलब है कि तहलका पत्रिका ने इस मामले का खुलासा किया था। हालांकि मारन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए पत्रिका को कानूनी नोटिस भी भेजा है। सीबीआई के पवक्ता धारिणी मिश्रा ने कहा `सीबीआई ने 2001 से 2007 के बीच दूरसंचार नीति में हुई आपराधिक गड़बड़ियों के निर्धारण के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ यह जांच दर्ज की है। इसका लक्ष्य तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा पारित पहले आओ-पहले पाओ के पावधान का दूरसंचार नीति में पालन हुआ है या नहीं यह मालूम करना है।'
2006 में जब दयानिधि मारन दूरसंचार मंत्री थे, तब उन्होंने अपने परिवार के सन टीवी नेटवर्प को फायदा पहुंचाने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन में पद का दुरुपयोग किया था। दयानिधि मारन के कार्यकाल में दूरसंचार क्षेत्र में पत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी की गई थी। एयरसेल में 74 फीसदी शेयर धारक मैक्सिस ने अपनी कंपनी एस्ट्रो के जरिए मारन बंधुओं के सन टीवी नेटवर्प में 600 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया था। मारन ने दूरसंचार मंत्री रहते एयरसेल के लाइसेंस और स्पेक्ट्रम संबंधी आवेदनों को मंजूरी नहीं दी थी। इसके चलते एयरसेल के मालिक शिवाशंकर ने मारन परिवार के करीबी मैक्सिस को अपने 74 फीसदी शेयर बेच दिए थे। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि शिवाशंकर पर इस सौदे को लेकर भारी दबाव था।
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Thursday, 2 June 2011

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के 14वें आरोपी करीम मोरानी भी पहुंचे तिहाड़


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2nd June 2011
अनिल नरेन्द्र
बॉलीवुड फिल्मों के निर्माता और किंग खान उर्प शाहरुख खान के मित्र करीम मोरानी आखिर धरे ही गए। सीबीआई विशेष अदालत के जज ओपी सैनी ने मोरानी की जमानत याचिका रद्द कर दी और जेल भेजने का आदेश सुना दिया। जमानत की सुनवाई के दौरान आरोपी द्वारा एक महीने से भी कम समय में सात अर्जी लगाए जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जज ने कहा ऐसा लगता है कि जानबूझकर कानूनी टाल-मटोल का रास्ता अपनाया गया। उन्होंने कहा कि मोरानी 6 मई से लेकर 23 मई तक चिकित्सा के नाम पर हाजिर नहीं हुए जबकि 11 मई को सौंपे गए रिपार्ट में उनकी स्थित स्थिर और सामान्य बताई गई थी। आरोपी को जेल भेजने के साथ ही आरोप पत्र में शामिल सभी 14 आरोपी तिहाड़ जेल पहुंच गए। ये हैं 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के 14 आरोपी ः ए. राजा सांसद-डीएमके, पूर्व केन्द्राrय संचार मंत्री सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व दूरसंचार सचिव आरके भदोलिया, निजी सचिव ए. राजा, विनोद गोयनका-स्वान टेलीकॉम पमोटर एवं निदेशक डीबी ग्रुप पा. लि., हरि नायर सीनियर वाइस पेसिडेंट, रिलायंस, आसिफ बलवा निदेशक, पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि., राजीव अग्रवाल निदेशक पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि., संजय चंद्रा निदेशक यूनिटेक वायरलेस (तमिलनाडु) पा.लि., कनिमोझी सांसद डीएमके, स्टाक होल्डर (20 पतिशत, कलेंगनार टीवी पा. लि.), शरद कुमार निदेशक एवं स्टाक होल्डर (20 पतिशत कलेंगनार टीवी पा. लि.) और करीम मोरानी निदेशक सिनेयुग मीडिया पा. लि.।
आरोप के अनुसार डीबी रियलिटी से 200 करोड़ पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि. और वहां से सिनेयुग मीडिया पा. लि. के जरिए कलेंगनार टीवी पा. लि. को मिले। पैसा स्वान टेलीकॉम को स्पेक्ट्रम आवंटन के बदले में दिया गया था। सीबीआई के मुताबिक सौदेबाजी में सबसे बड़ी भूमिका करीम मोरानी की रही है जिन्होंने छह करोड़ का फायदा उठाया। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि मोरानी को जानकारी थी कि यह दूषित पैसा है। उन्होंने लोन लेकर कलेंगनार को लोन दिया जबकि सिनेयुग गैर वित्तीय कंपनी भी नहीं है। डीबी रियलिटी के एकाउंटेंट सतीश अग्रवाल ने बताया कि पुंसेगांव को दो सौ करोड़ 23 दिसम्बर 2008 से लेकर 11 अगस्त 2009 के बीच बिना कोई समझौते के ही दे दिया गया। उसके बाद यही पैसा वहां से सिनेयुग में चला गया।
सीबीआई अदालत में एक तरफ मोरानी की जमानत पर बहस हो रही थी तो दूसरी तरफ फिल्मी हिरोइनों की मौजूदगी से अदालत में हलचल मच गई। आने वाली फिल्म `आलवेज कभी-कभी' की नायिका जोया मोरानी उस समय भावुक हो गई जब उसके पिता को जेल भेज देने का आदेश सुनाया गया। कोर्ट रूम में वह कभी अपनी मां का मुंह ताकती रही, कभी अपनी बहन का तो कभी पिता को निहार रही थी। जब पुलिस मोरानी को लॉक-अप में ले जाने लगे तो जोया जमीन पर बैठकर बुहत देर तक रोती रही। आखिरकार एक महिला ने आकर जब ढांढस बंधाया तब जाकर संभली। कोर्ट में एक और नायिका भी आई हुई थीं, अभिनेत्री खुशबू। खुशबू कनिमोझी और ए. राजा से मिलने आई थी। अब सब आरोपियों की तिहाड़ में महफिल लगेगी।
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Sunday, 22 May 2011

कनिमोझी भी पहुंच गईं तिहाड़

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
 Published on 22nd May 2011
अनिल नरेन्द्र
विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने शुक्रवार को द्रमुक सांसद और करुणानिधि की बेटी कनिमोझी और कलेंगनार टीवी के प्रबंधक निदेशक शरद कुमार को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें फौरन गिरफ्तार करने का आदेश दिया। कनिमोझी तिहाड़ जेल में बैरक नम्बर 6 में पाक जासूसी कांड में गिरफ्तार माधुरी गुप्ता के साथ रहेंगी। उल्लेखनीय है कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा, शाहिद बलवा, सिद्धार्थ बेहरुया, संजय चन्द्रा, एडी, एजी के दो अधिकारी पहले से ही तिहाड़ में बन्द हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि 43 वर्षीय कनिमोझी और कुमार को शनिवार को पूर्वाह्न 10 बजे उनके समक्ष पेश किया जाए। कनिमोझी अदालत का आदेश सुनकर एकदम सदमे में आ गईं और रोने लगीं। उनके परिवार के सदस्यों एवं पति अरविन्दन ने उन्हें ढाढ्स बंधाया। अदालत के आदेश सुनाए जाने पर द्रमुक के कुछ समर्थक रोने लगे, कुछ चिल्लाने लगे। अदालत ने अपने 144 पृष्ठों के आदेश में कहा कि गवाही देने वाले अधिकतर लोग कलेंगनार टीवी के कर्मचारी हैं जिन्हें प्रभावित किया जा सकता है।
इससे पहले सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कनिमोझी पर आरोप लगाया कि उन्हें गैर कानूनी तरीके से कलेंगनार टीवी को करीब 200 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता था। एक निजी कम्पनी के जरिये इस चैनल को 200 करोड़ रुपये दिए गए, जिसकी जानकारी कनिमोझी को थी। उल्लेखनीय है कि इस घोटाले में पूर्व संचार मंत्री ए. राजा न्यायिक हिरासत में हैं। यह घपला छोटा-मोटा नहीं, यह घपला एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये का है। उधर ए. राजा अब दुनियाभर में मशहूर हो गए हैं। कहते हैं न, कि नाम कमाने का एक तरीका बदनाम होना भी है। तभी तो तिहाड़ जेल में बन्द पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा की सुध आजकल सियासी गलियारों में भले ही कोई न ले रहा हो, लेकिन प्रतिष्ठित पत्रिका `टाइम' ने उन्हें याद किया है। पत्रिका ने उन्हें `दुनिया के सबसे बदनाम नेताओं' की सूची में प्रमुखता से जगह दी है। टाइम ने सत्ता के दुरुपयोग के दुनिया के 10 बड़े मामलों में शामिल लोगों की एक सूची बनाई है। इसमें भारत का नाम रोशन करने के लिए 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला दूसरे पायदान पर है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के कार्यकाल के दौरान बहुचर्चित वॉटर गेट से जुड़े मामले को शीर्ष स्थान दिया गया है। `बदनाम नेताओं' के क्लब में मनमोहन सरकार से इस्तीफा दे चुके द्रमुक नेता ए. राजा ने लीबियाई राष्ट्रपति मुअम्मर गद्दाफी, उत्तर कोरियाई नेता किग जोंग इल और बिन्दास शैली के लिए बदनाम इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी को भी पीछे छोड़ दिया है। टाइम ने स्पेक्ट्रम घोटाले पर टिप्पणी में कहा है, `हाल के कुछ महीनों में भारत की यूपीए गठबंधन सरकार इस बड़े घोटाले से हिल गई है। इस मामले ने सत्ता पर अटूट पकड़ रखने वाली सरकार को चुनौती पेश कर दी है।' आरोपों की वजह से पिछले साल राजा को इस्तीफा देना पड़ा।
करुणानिधि का साम्राज्य बिखर रहा है। उनको विधानसभा चुनाव में भारी शिकस्त मिली है। बेटी और विश्वासपात्र दोनों जेल में हैं। परिवार टूटने की कगार पर खड़ा है। देखते रहो आगे-आगे होता है क्या?
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Tuesday, 17 May 2011

Those who abuse the Lord will always suffer.

Anil Narendra
Karunanidhi’s Dravida Munnetra Kazhgam suffered a total washout in the recent elections to the Tamil Nadu Assembly. Of the 234 seats in the Assembly, his party could get just 31 seats while Jayalalitha’s AIADMK got huge 200 seats. With his defeat, I am particularly happy because this is the fate that should befall those abusing Lord Rama. He is the same person who had said at a Press Conference that Lord Rama was an imaginary figure and also that the Ramayana had no basis. And from which engineering college did Lord Rama get his degree? These very remarks the Ravana of this era were made on the Setu controversy. Some of the stanzas of the Ramayana come to my mind on this issue.
`राम विमुख अस हाल तुम्हारा। रहा कोई न कुल रोबन हारा'
Meaning that “Not giving due respect to Lord Rama has brought you to this pass. And due to this you have reached a stage where even in your family there is no one left even to cry for you.”
The people have done what is written in one part of the Ramayana.
“जाको प्रिय न राम वैदेही। तजिये ताहि कोटि काति वैरी सम।। यद्यपि परम स्नेही”
Meaning that“Anyone who does not respect Rama Sita, he should be totally ignored, however dear he might be to you.”
When Karunanidhi and his stooge T R Baalu suggested that Ram Setu should be destroyed, their downfall started that very moment.
“जो अपराध भगत कर करहीं, राम रोष पावक सो जरहीं”
Meaning that, “Anyone who demeans devotees, he gets burnt in the fire of anger of Lord Rama, that he invited because of his utterances. Lord Rama does not spare anyone who insults his devotees.”
Ram Setu was built not by Rama, but by his ardent devotee Lord Hanuman and his army of followers. And the idea of destroying the Setu given by Karunanidhi was an insult to the devotees of Lord Rama. Devotee of Lord Rama, Lord Ram the Protector of Devotees could never tolerate all this. That is why in Ramcharitramanas, Saint Tulsidas said:
“जाको प्रभु दारुण दुख दीन्हा, ताकि मति पहिले हर लीन्हा”
Meaning that “anyone who troubles the Almighty will have to pay for it by inviting misery upon himself. And whomsoever the Lord wishes to punish, he takes control of his mind first.”
And that is what has happened to Karunanidhi who is so unwell that one cannot say how he will be affected by the defeat at the hustings. His daughter Kanimozhi might go to jail any time. A Raja is already in jail. One of his wives, Dayalu Ammal might also get into trouble. T R Baalu is out and it is difficult to say whether he will get power again. In all, the whole family is scattered.
After the humiliating defeat of Karunanidhi, what his attitude will be towards the Manmohan Singh government could cause concern for the Central Government, because he can withdraw his ministers from the government, but the Congress Party should not be too worried by this. The shortfall in case of DMK MPs pulling out of the government can be met and the Congress Party should not be bothered by this.
In the 2G spectrum scam, the government should be open about investigating Karunanidhi and company without any fear or pressure.The supporter of Rajiv Gandhi’s assassin, the LTTE, Karunanidhi, deserved this fate.
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