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Saturday, 26 November 2011

2जी घोटाले में कारपोरेटों को मिली जमानत


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26th November 2011
अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में पहली बार किसी को जमानत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पांच कारपोरेट आरोपियों को जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाने वाले हैं ः संजय चन्द्रा, विनोद गोयनका, हरि नायर, गौतम दोषी और सुरेन्द्र पिपारा। आरोपियों ने निचली अदालत और हाई कोर्ट में जमानत अर्जी खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आर्थिक अपराध का आरोप है और अगर यह साबित होता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को खतरा हो सकता है। लेकिन सीबीआई ने यह नहीं कहा कि जमानत पर छूटने के बाद आरोपी सुबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। हम ऐसा कोई कारण नहीं देखते जिससे कि आरोपी को कस्टडी में रखा जाए और वह भी तब जब इस मामले में छानबीन पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। आरोपी छह महीने से ज्यादा जेल में हैं और इस मामले में इन्हें कस्टडी में रखने का कोई मकसद पूरा नहीं होता। ऐसे में आरोपियों को 5-5 लाख रुपये की जमानत राशि पर जमानत देने का आदेश दिया जाता है। कोर्ट ने जमानत देने के साथ-साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं। इन्हें जमानत दिए जाने के बाद कनिमोझी समेत 6 आरोपियों को जमानत मिलने की उम्मीद हो गई है। 2जी घोटाले में अभी भी 2 फरवरी से ए. राजा बन्द हैं। कनिमोझी 20 मई से तिहाड़ में हैं। शरद कुमार (एमडी कलैंग्नार टीवी) भी 20 मई से बन्द हैं। आरके चंदोलिया (ए. राजा के प्राइवेट सचिव) 2 फरवरी को जेल गए थे। सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व टेलीकॉम सैकेटरी भी 2 फरवरी से ही बन्द हैं। शाहिद उस्मान बलवा, स्वान के प्रोमोटर 2 फरवरी से तिहाड़ में है। आसिफ बलवा (शाहिद के भाई) 29 मार्च से जेल में हैं। राजीव अग्रवाल डायरेक्टर कुसेगांव फूड्स एण्ड वेजिटेबल्स प्राइवेट लिमिटेड 29 मार्च को जेल गए थे। करीम मोरानी जो एक फिल्म निर्माता हैं और शाहरुख खान के दोस्त भी हैं 30 मार्च से तिहाड़ में हैं।
किसी आपराधिक मामले में आरोपी को कितनी अवधि तक न्यायिक हिरासत यानि जेल में रखा जाए और कब उसे जमानत मिलनी चाहिए, यह सवाल अक्सर उठता है। इन दिनों भी इस सवाल पर बहस जारी है। कुछ दिन पहले दिग्विजय सिंह ने भी यह सवाल उठाते हुए कहा था कि किसी आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के बाद उसे जेल में करने का कोई औचित्य नहीं है, इसलिए उसे जमानत मिलनी ही चाहिए। हालांकि उनके इस बयान की काफी आलोचना भी हुई थी। कहा गया कि वे अदालतों को निर्देशित करने की कोशिश कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह चूंकि एक विवादित राजनेता हैं इसलिए उनके बयान पर टीका टिप्पणी स्वाभाविक ही है पर कुछ समय पहले खुद सुप्रीम कोर्ट की एक तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि वह बहुचर्चित मामलों में आरोपियों को जमानत न देने की अदालतों की कथित नई प्रवृत्ति की पड़ताल करेंगे, क्योंकि यह प्रवृत्ति उस स्थापित न्यायिक सिद्धांत के खिलाफ है, जो कहता है कि `जमानत नियम है और जेल उपवाद है।' सुप्रीम कोर्ट की यह पहल निश्चित ही सराहनीय है लेकिन सवाल उठता है कि सिर्प हाई प्रोफाइल केसों पर ही क्यों। छोटे-मोटे मामलों में भी आरोपियों को अदालतों का वर्षों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब इन्हें जमानत मिलती है या केस का फैसला आता है उस वक्त तक वह सजा से ज्यादा समय तो जेल में बिता देते हैं। तिहाड़ जेल में अंडर ट्राइलों की संख्या देखें तो पाएंगे कि निचली अदालतों की बेल न देने की वजह से यह जेल में बन्द हैं। जहां तक 2जी स्पेक्ट्रम केस का संबंध है जेल भेजना तो ठीक है पर इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है पैसों की रिकवरी और इस दिशा में न तो सरकार और न ही सीबीआई कोई ठोस कदम उठा रही है। एक लाख 60-70 हजार करोड़ के इस घोटाले में आपने दर्जनों लोगों को अन्दर तो कर दिया पर जो पैसा इन्हेंने लूटा, जो देश की सम्पत्ति है उसका क्या हुआ? कनिमोझी और अन्य की अब जमानत हो जाएगी। केस वर्षों तक चलता रहेगा। अन्त में कुछ को सजा भी हो सकती है पर मूल प्रश्न वही आता है कि लूटी धनराशि की रिकवरी कैसे होगी?
2G, A Raja, Anil Narendra, Daily Pratap, Karim Morani, Reliance Telecom, Shahid Balwa, Supreme Court, Swan Telecom, Unitech Wireless, Vir Arjun

Tuesday, 4 October 2011

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अनिल अम्बानी की भूमिका?


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th October 2011
अनिल नरेन्द्र
सीबीआई ने दावा किया है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में रिलायंस धीरुभाई अम्बानी ग्रुप के मुखिया अनिल अम्बानी की भूमिका की आगे जांच करने की जरूरत है और उन्हें क्लीन चिट नहीं दी गई। आरएडीएजी अध्यक्ष अनिल अम्बानी को क्लीन चिट दिए जाने से संबंधित खबरें आने के बाद सीबीआई ने रविवार को अपने प्रवक्ता के माध्यम से इस बारे में स्थिति स्पष्ट की है। सीबीआई ने कहा कि अनिल अम्बानी की भूमिका की जांच इसलिए भी करनी जरूरी है क्योंकि तिहाड़ जेल में बन्द उनके तीन शीर्ष अधिकारियों ने किसी भी तरह के गलत काम में शामिल होने से इंकार किया है। सीबीआई ने कहा कि रिलायंस अनिल धीरुभाई अम्बानी ग्रुप के तीन गिरफ्तार वरिष्ठ अधिकारी जांच के दौरान दिए गए अपने बयानों से मुकर गए हैं इसलिए वास्तविक लाभान्वितों का पता लगाने के लिए आगे जांच की जा रही है। सीबीआई ने कहा है कि आरएडीएजी के तीन अधिकारियों गौतम दोषी, सुरेन्द्र पीपारा और हरि नायर ने आपराधिक संहिता प्रक्रिया की 161 धारा के तहत दिए गए अपने वक्तव्य में फैसले के लिए पूरी जिम्मेदारी ली थी लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय में वे इससे मुकर गए। सीबीआई की ओर से पेश वकील केके वेणुगोपाल ने न्यायाधीश जीएस सिंघवी तथा एके गांगुली की खंडपीठ के समक्ष कहा कि उन्होंने फैसले की सारी जिम्मेदारी ली थी लेकिन उच्च न्यायालय में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान वह बोले कि हम तो केवल कर्मचारी थे और हमें कोई लाभ नहीं मिला। सीबीआई ने अदालत को इस घोटाले में अम्बानी, टाटा ग्रुप, वीडियोकॉन के स्वामित्व वाली डेटम तथा अटार्नी जनरल जीई वाहनवती के खिलाफ विभिन्न आरोपों में अपनी जांच की विस्तृत जानकारी दी और कहा कि अनिल अम्बानी के खिलाफ जांच जारी है लेकिन उसे इस घोटाले में अन्य के खिलाफ अभियोजयता संबंधी कोई साक्ष्य नहीं है। जांच एजेंसी द्वारा दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि स्वान टेलीकॉम में 9.9 फीसदी शेयर के मामले को लेकर अनिल अम्बानी और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। ये शेयर मारीशस की कम्पनी डेल्फी को बेचे गए थे। सीबीआई ने जांच की प्रगति के बारे में 29 सितम्बर को उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत `स्थिति पत्र' में कहा है कि जांच में ऐसा कोई मौखिक या लिखित सबूत नहीं मिला है जिससे लगता है कि विभिन्न कम्पनियों के पुनर्गठन और धन के हस्तांतरण में अनिल अम्बानी संलिप्त हैं। सीबीआई ने यह जवाब इस मामले में याचिका दायर करने वाले वकील प्रशांत भूषण की ओर से अदालत को दिए गए एक पत्र के जवाब में दिया। अदालत में सीबीआई ने कहा कि याचिकाकर्ता ने इस पत्र के उसकी जांच की निष्पक्षता और ईमानदारी के बारे में गलत राय पैदा करने की कोशिश की है। जनता जानना चाहती है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में श्री अनिल अम्बानी की सही भूमिका क्या थी? अगर सीबीआई की जांच पर शक किया जा रहा है तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार है जो बार-बार विरोधाभास बयान दे रही है। कभी क्लीन चिट देती है तो कभी कहती है कि आगे जांच करना जरूरी है और हमने अनिल अम्बानी को कोई क्लीन चिट नहीं दी?

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Tuesday, 2 August 2011

चंदोलिया ने घसीटा नीरा राडिया और रतन टाटा को

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2nd August 2011
अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा के निजी सचिव रहे आरके चंदोलिया ने विशेष अदालत में सीबीआई पर आरोप लगाया है कि जांच एजेंसी उनके विरुद्ध गवाही देने के लिए गवाहों पर नाजायज दबाव बना रही है। सीबीआई उन्हें झूठे मामले में फंसाने की भी कोशिश कर रही है। शनिवार को पटियाला हाउस में सीबीआई ओपी सैनी की विशेष अदालत में चंदोलिया की ओर से जिरह पूरी कर ली गई। अब सोमवार को स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा अपने बचाव में दलीलें देंगे। चंदोलिया के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि चंदोलिया की गिरफ्तारी के वक्त सीबीआई के पास उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं था, न ही जांच एजेंसी ने किसी भी गवाह को पेश किया। इस तरह इस साल 2 फरवरी को हुई उनकी गिरफ्तारी पूर्णत गैर-कानूनी थी। अग्रवाल ने कहा कि जिन लोगों को छोड़ दिया गया या जिन्हें गवाह बनाया जा रहा है, उन्हें विशेष अदालत में आरोपी के तौर पर होना चाहिए था। शुक्रवार को स्पेक्ट्रम मामले में चंदोलिया ने अपनी दलील में खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उन्होंने तो सिर्प अपने बॉस के निर्देशों का पालन किया था। साथ ही नीरा राडिया और रतन टाटा को भी लपेटा। चंदोलिया के वकील ने सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी से कहा कि राजा के कथित सहयोगी असीरवदम आचारी ने कथित तौर पर कलेंग्नर टीवी को टाटा स्काई डीटीएच में लाने की साजिश रची और इसके लिए राजा और नीरा राडिया के बीच सम्पर्प का काम किया। इसमें नीरा राडिया को आरोपी बनाया जाना चाहिए। दलील के दौरान चंदोलिया के वकील ने कहा कि बातचीत के दौरान नीरा ने जब समझौते के सन्दर्भ में बात की, आचारी ने उनसे कहीं भी नहीं पूछा कि वह किस बारे में बात कर रही हैं। इससे पता चलता है कि आचारी को राजा की ओर से किए जा रहे कलेंग्नर टीवी और टाटा के बीच समझौते के बारे में जानकारी थी। इसे देखते हुए टाटा, नीरा और आचारी सहित कलेंग्नर टीवी को इस मामले में आरोपी बनाया जाना चाहिए। टाटा और नीरा राडिया बड़े लोग हैं और सीबीआई उन्हें छू तक नहीं पा रही लेकिन आचारी को क्यों नहीं? चंदोलिया ने कहा कि वे तो रोजमर्रा के कामकाज में ए. राजा की सहायता करने वाले अधिकारी मात्र थे। उनके वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल के बॉस ए. राजा थे। चंदोलिया ने तो सिर्प उनके निर्देशों का पालन किया। बॉस के निर्देशों का पालन करने के लिए एक सहायक मात्र थे। क्या वे (चंदोलिया) अपने बॉस से सवाल कर सकते थे? चंदोलिया ने कहा कि वह द्रमुक, कलेंग्नर टीवी या किसी दूरसंचार कम्पनी से जुड़े व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने सीबीआई को चुनौती दी भी कि वह सबूत के रूप में कोई भी एक दस्तावेज पेश करे जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर किए हों।
अब तक विभिन्न गवाहों पर नजर डालें तो एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। पहले बात करते हैं खुद ए. राजा की। राजा ने 25/7/2011 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी. चिदम्बरम का नाम घसीटा। आरोप ः स्वान, यूनिटेक की हिस्सेदारी कम किए जाने के बारे में जानते थे। 26/7/2011 को अटार्नी जनरल जीई वाहनवती (तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल) पर राजा ने आरोप लगाया कि पहले आओ, पहले पाओ की नीति में राजा के बदलावों को मंजूरी दी। नीरा राडिया के टेप सार्वजनिक होने से 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में नेताओं, उद्योगपतियों, पत्रकारों के खेल की डरावनी तस्वीर सामने आई। इन टेपों से पता चला कि वह टाटा और अम्बानी जैसी कम्पनियों के लिए लॉबिंग का काम करती थी। टाटा समूह की सभी 90 कम्पनियों का विज्ञापन और जनसम्पर्प काम नीरा राडिया की कम्पनी वैष्णवी कम्युनिकेशन के पास था। 27/7/2011 को सिद्धार्थ बेहुरा ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्पेक्ट्रम लाइसेंस शुल्क की समीक्षा नहीं की। मामला पेचीदा होता जा रहा है। सीबीआई विशेष अदालत के जज ओपी सैनी इस केस को कैसे निपटाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
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Thursday, 2 June 2011

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के 14वें आरोपी करीम मोरानी भी पहुंचे तिहाड़


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2nd June 2011
अनिल नरेन्द्र
बॉलीवुड फिल्मों के निर्माता और किंग खान उर्प शाहरुख खान के मित्र करीम मोरानी आखिर धरे ही गए। सीबीआई विशेष अदालत के जज ओपी सैनी ने मोरानी की जमानत याचिका रद्द कर दी और जेल भेजने का आदेश सुना दिया। जमानत की सुनवाई के दौरान आरोपी द्वारा एक महीने से भी कम समय में सात अर्जी लगाए जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जज ने कहा ऐसा लगता है कि जानबूझकर कानूनी टाल-मटोल का रास्ता अपनाया गया। उन्होंने कहा कि मोरानी 6 मई से लेकर 23 मई तक चिकित्सा के नाम पर हाजिर नहीं हुए जबकि 11 मई को सौंपे गए रिपार्ट में उनकी स्थित स्थिर और सामान्य बताई गई थी। आरोपी को जेल भेजने के साथ ही आरोप पत्र में शामिल सभी 14 आरोपी तिहाड़ जेल पहुंच गए। ये हैं 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के 14 आरोपी ः ए. राजा सांसद-डीएमके, पूर्व केन्द्राrय संचार मंत्री सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व दूरसंचार सचिव आरके भदोलिया, निजी सचिव ए. राजा, विनोद गोयनका-स्वान टेलीकॉम पमोटर एवं निदेशक डीबी ग्रुप पा. लि., हरि नायर सीनियर वाइस पेसिडेंट, रिलायंस, आसिफ बलवा निदेशक, पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि., राजीव अग्रवाल निदेशक पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि., संजय चंद्रा निदेशक यूनिटेक वायरलेस (तमिलनाडु) पा.लि., कनिमोझी सांसद डीएमके, स्टाक होल्डर (20 पतिशत, कलेंगनार टीवी पा. लि.), शरद कुमार निदेशक एवं स्टाक होल्डर (20 पतिशत कलेंगनार टीवी पा. लि.) और करीम मोरानी निदेशक सिनेयुग मीडिया पा. लि.।
आरोप के अनुसार डीबी रियलिटी से 200 करोड़ पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि. और वहां से सिनेयुग मीडिया पा. लि. के जरिए कलेंगनार टीवी पा. लि. को मिले। पैसा स्वान टेलीकॉम को स्पेक्ट्रम आवंटन के बदले में दिया गया था। सीबीआई के मुताबिक सौदेबाजी में सबसे बड़ी भूमिका करीम मोरानी की रही है जिन्होंने छह करोड़ का फायदा उठाया। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि मोरानी को जानकारी थी कि यह दूषित पैसा है। उन्होंने लोन लेकर कलेंगनार को लोन दिया जबकि सिनेयुग गैर वित्तीय कंपनी भी नहीं है। डीबी रियलिटी के एकाउंटेंट सतीश अग्रवाल ने बताया कि पुंसेगांव को दो सौ करोड़ 23 दिसम्बर 2008 से लेकर 11 अगस्त 2009 के बीच बिना कोई समझौते के ही दे दिया गया। उसके बाद यही पैसा वहां से सिनेयुग में चला गया।
सीबीआई अदालत में एक तरफ मोरानी की जमानत पर बहस हो रही थी तो दूसरी तरफ फिल्मी हिरोइनों की मौजूदगी से अदालत में हलचल मच गई। आने वाली फिल्म `आलवेज कभी-कभी' की नायिका जोया मोरानी उस समय भावुक हो गई जब उसके पिता को जेल भेज देने का आदेश सुनाया गया। कोर्ट रूम में वह कभी अपनी मां का मुंह ताकती रही, कभी अपनी बहन का तो कभी पिता को निहार रही थी। जब पुलिस मोरानी को लॉक-अप में ले जाने लगे तो जोया जमीन पर बैठकर बुहत देर तक रोती रही। आखिरकार एक महिला ने आकर जब ढांढस बंधाया तब जाकर संभली। कोर्ट में एक और नायिका भी आई हुई थीं, अभिनेत्री खुशबू। खुशबू कनिमोझी और ए. राजा से मिलने आई थी। अब सब आरोपियों की तिहाड़ में महफिल लगेगी।
Tags: 2G, A Raja, Anil Narendra, CBI, Daily Pratap, DB Reality, Karim Morani, Reliance Telecom, Shah Rukh Khan, Swan Telecom, Vir Arjun

Monday, 30 May 2011

Jail is alright, but recovery of the money, too is very important

Anil Narendra
A few days ago, I met a leader. During our talks, various scams being in the limelight these days, also came up. His views made me to think. He said that scam of any magnitude can be carried out these days. But, if you are ready to go to jail for a few days, you have nothing to fear of. According to him, the moment the leader is put behind the bars, half of public ire gets pacified and half of the case is also won. When he comes out of jail after a few months, he is accorded a hero’s welcome. Then, comes the elections and the leader wins and now he can claim that the public has condoned the corruption or he might say that he has been forgiven by the supreme court of the democracy i.e. the janata durbar. There may be one or two cases, but ultimately disputes are settled in his favour. But, the most important question remains, where is the money, which this man has amassed from the scam?
Let us take the example of 2-G spectrum scam, which amounts to almost staggering 1,76,000 crores rupees. It may be true that more than half a dozen leaders and others including A Raja and Kanimozhi are behind the bars in connection with this scam, but the question remains that how much money has so far been recovered by the CBI? It is not clear from the statements of the CBI as to any amount relating to this scam has so far been recovered or not? According to the charges by the investigation agency in this scam of  1,76,000 crore rupees, Raja had made the company of Shahid Balwa to pay a sum of Rs 200 crores to Kalaignar TV and this amount had reached Kalaignar TV through Cineyug. Kanimozhi and Sharad owned 20% shares each in Kalaignar TV, whereas Dayalu Ammal had a whooping holding of 60%. It is being talked about that if the CBI has not made it public that it has recovered any amount from someone or not, then the money has came back to Shahid Balwa through the same channel through which it had reached Kalaignar TV? In case, the amount of theft is not recovered, there can not be an air-tight case. This amount must be recovered and deposited in the Court, which then becomes the case property. If your mobile phone is stolen in a bus, then the case can not be considered air tight till the police apprehend the culprit and recover and table the stolen mobile in the Court. Of course, the CBI arrested Gautam Doshi, Managing Director, Reliance, Senior Vice Presidents, Hari Nayar and Surendra Papara, Director, Swan Telecom, Vinod Goenka and Director of Unitech Wireless Sanjay Chandra, but there is no indication as to the recovery of any money from these persons. What steps the CBI or the government is contemplating to recover the money involved in the scam? Will the government confiscate the properties of these accused and their companies to recover the scam money? This action is necessary for two reasons. Firstly, it is the property of the country, and secondly this amount has been amassed by looting the country and as such it is the case property. 2-G Spectrum is just one scam, God knows how many more scams are lying undetected. If money involved in these scam is recovered, the people of the country can be relieved of the burden of the poverty.

Sunday, 29 May 2011

जेल तो ठीक है पर पैसे की रिकवरी बहुत जरूरी है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29th May 2011
अनिल नरेन्द्र
दो-तीन दिन पहले मुझे एक नेता मिला था। बातों बातों में आजकल सुर्खियों में चल रहे विभिन्न घोटालों का जिक हुआ। उस नेता की बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। उसने कहा कि आजकल जितना बड़ा घोटाला करना चाहो कर लो। हां, अगर आप कुछ दिन जेल जाने को तैयार हों तो फिर आपको कोई और डर नहीं। उसके अनुसार जिस दिन नेता जेल गया उसी दिन जनता का आधा गुस्सा तो ठंडा हो जाता है, आधा केस भी हो जाता है। वह कुछ महीने अंदर रहने के बाद जब बाहर आता है तो उसका अच्छा स्वागत किया जाता है। फिर चुनाव आ जाते हैं और वह नेता चुनाव जीत जाता है और यह कहने की स्थिति में हो जाता है कि जनता ने उसके भ्रष्टाचार पर उसे माफ कर दिया या फिर यह कहता है कि लोकतंत्र की सुपीम अदालत यानी जनता के दरबार में उसे माफी मिल गई है। एक-आध केस चलता रहता है और मामला रफा-दफा हो जाता है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वह पैसा कहां गया जिसका इसने घोटाला किया था?
आप 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले को ही ले लीजिए। यह घोटाला लगभग 1,76,000 करोड़ रुपए का है। यह ठीक है कि इस घोटाले में ए. राजा, कानीमोझी सहित आधा दर्जन से ज्यादा नेता व अन्य जेलों में हैं पर सवाल यह है कि सीबीआई ने कितने पैसों की अब तक रिकवरी की है? सीबीआई के बयान से अभी तक यह साफ नहीं है कि उसने इस केस में अब तक कोई राशि जब्त की है या नहीं? 1,76,000 करोड़ रुपए के इस घोटाले में अभी तक जो आरोप सीबीआई की ओर से लगाया गया है वह है कि राजा ने 200 करोड़ रुपए कलेंगनार टीवी को शाहिद बलवा की कम्पनी से दिलाए थे जो सिने युग द्वारा कलेंगनार टीवी तक पहुंचे थे। इस टीवी में कानीमोझी और शरद की बीस पतिशत की हिस्सेदारी थी जबकि दयाल अम्मल की भागीदारी साठ पतिशत है। कहा यह जा रहा है कि जिस रास्ते से पैसा कलेंगनार टीवी में आया था उसी रास्ते से वापस शाहिद बलवा के पास पहुंच गया अगर सीबीआई ने अभी तक यह बात सार्वजनिक नहीं की है कि उसने किसी से कोई रकम भी बरामद की है या नहीं? जब तक चोरी की रकम बरामद नहीं हो जाती तब तक कोई भी एयर राइट केस नहीं बनता। उन्हें यह राशि बरामद करके अदालत में जमा करानी आवश्यक होती है जो केस पापर्टी बनती है। अगर आप का मोबाइल बस में चारी हो जाता है तो पुलिस मुजरिम को पकड़ कर जब तक अदालत में चोरी गया मोबाइल पेश नहीं करती तब तक केस एयर राइट नहीं माना जाता। सीबीआई ने रिलायंस के मैनेजिंग निदेशक गौतम दोषी, सीनियर वाइस पेसीडेंट हरी नायर, सुरेन्द्र पपारा, स्वॉन टेलीकॉम के निदेशक विनोद गोयनका और यूनिटेक वायरलैस के निदेशक संजय चंद्रा को गिरफ्तार तो किया है मगर उनसे कोई राशि बरामद हुई है या नहीं, इसका कोई ब्यौरा नहीं दिखा गया। सीबीआई या सरकार घोटाले की रकम को रिकवर करने के लिए क्या कदम उठा रही है? क्या सरकार इन आरोपियों की सम्पत्ति जब्त करके पैसे की रिकवरी करेगी? यह करना इसलिए जरूरी है कि पहली बात तो यह देश की सम्पत्ति है और दूसरी बात यह रकम देश को लूट कर बनाई गई है और केस पापर्टी है। 2-जी स्पेक्ट्रम का तो एक घोटाला है, ऐसे न जाने कितने और घोटाले हैं। अगर इनकी रिकवरी हो जाए तो देश की जनता गरीबी की मार से बच जाए।
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Sunday, 1 May 2011

बड़ी मछलियों को सीबीआई क्यों बचा रही है?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 01 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र

भारत में अकसर यह कहा जाता है कि बड़ी मछलियां तो फंसती नहीं और छोटी मछलियों से सरकारी एजेंसियां खानापूर्ति कर लेती हैं। बात 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की कर रहा हूं। हालांकि ईडी अपना काम तेजी और पारदर्शिता से कह रहा है और कई दिग्गजों को तिहाड़ पहुंचा चुका है पर सवाल यह भी उठ रहा है कि सीबीआई ने जो चार्जशीट दाखिल की है उसमें रिलायंस टेलीकॉम के अध्यक्ष अनिल अम्बानी, एस्सार के सीईओ प्रशांत रुइया और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी बड़ी मछलियों के नाम गायब हैं? सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में एक एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने आरोप लगाया है कि यह कम्पनियां ही 2जी मामले में वास्तविक लाभार्थी हैं। संगठन की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि शाहिद उस्मान बलवा की स्वान टेलीकॉम रिलायंस कम्युनिकेशन की फ्रंट कम्पनी थी जबकि लूप टेलीकॉम एस्सार ग्रुप की फ्रंट कम्पनी थी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु स्थित एनजीओ को धन देने पर टाटा टेलीसर्विसेज को फायदा पहुंचाया गया। द्रमुक सांसद कनीमोझी इस एनजीओ की निदेशक थीं। उन्होंने कहा कि चार्जशीट में अनिल अम्बानी का नाम नहीं है। सीबीआई ने उन्हें बचाने की कोशिश की है और चार्जशीट में केवल अफसरों को आरोपी बनाया गया है। कोर्ट ने कहा कि उनकी इस दलील पर 3 मई को होने वाली सुनवाई में इस पर विचार किया जाएगा।
उधर उद्योगपति रतन टाटा तथा कारपोरेट जगत के लिए लॉबिंग करने वाली नीरा राडिया की भी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में भूमिका की जांच करने के लिए पटियाला हाउस में विशेष रूप से बनी विशेष अदालत में भी यह अर्जी दाखिल की गई है। अदालत ने इस पर विस्तृत रूप से सुनवाई के लिए 2 मई की तारीख तय की है। उत्तर प्रदेश के रहने वाले धर्मेन्द्र पांडे के वकील एसके सिंह द्वारा दायर अर्जी में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने इस घोटाले में टाटा और राडिया की भूमिका की जांच नहीं की और उनकी अनदेखी की गई है। अर्जी में कहा गया है कि सीबीआई ने टाटा टेलीसर्विसेज को नीतियों और प्रतिक्रियाओं का उल्लंघन कर लाइसेंस दिया गया लेकिन इस तथ्य की पूरी तरह अनदेखी की। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि टाटा टेलीसर्विसेज को लाइसेंस दिलाने में नीरा राडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कहा गया है कि सीबीआई को आरोप पत्र दाखिल करने से पहले जांच के दौरान टाटा टेलीसर्विसेज को लाइसेंस दिए जाने में नीतियों, प्रक्रियाओं के उल्लंघन की जानकारी थी पर जानबूझकर इसमें चूक की वजह पर ध्यान नहीं दिया। अर्जी में न्यायमूर्ति शिवराज पाटिल समिति की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया है कि टाटा ने आखिरी तारीख यानि एक अक्तूबर 2007 तक यूएएस लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया था। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि उसके बाद ही नीरा राडिया ने अपने प्रयास से लाइसेंस दिलवाया।
सबकी नजरें अब 2 और 3 मई को पटियाला हाउस और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। देश देखना यह चाहता है कि क्या बड़ी मछलियों पर हाथ डालने का साहस इस सरकार और उनकी एजेंसियों में है या नहीं?

Tuesday, 26 April 2011

कारपोरेट कैदियों को तिहाड़ का लंगर पसंद नहीं आया

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 26 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

लाखों रुपये की सालाना सेलरी लेने वाले कारपोरेट जाइंट्स की आजकल तिहाड़ में जिंदगी कैसी गुजर रही होगी? प्राप्त समाचारों के अनुसार तिहाड़ में उनका हाल खस्ता है। 26 अप्रैल तक ये बड़े लोग जेल नंबर तीन के वार्ड नंबर चार में बारह फीट लम्बी और दस फीट चौड़ी कोठरी में ही दिन और रात बिताएंगे। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट उनकी जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला देगी। जेल के पहले दिन बुधवार रात को इन लोगों को चार कंबल मिले। एक दरी, कुछ चादरें भी दी गईं। लेकिन जेल में कोई बन्द नहीं था लिहाजा उन्हें जमीन पर ही सोना पड़ रहा है। खाना भी उन्हें जेल में बना खाना पड़ रहा है। हां जेल में उनके लिए राहत की बात है कि कोठरी से लगा शौचालय में एक पंखा लगा हुआ है। लेकिन वार्ड में एक ही खिड़की है जहां से थोड़ी रोशनी उनके हिस्से  में आ सकती है। इनको अपना वार्ड छोड़ने की इजाजत नहीं है। दरअसल यूनिटेक के प्रबंधक निदेशक संजय चंद्रा, स्वान  टेलीकॉम के निदेशक विनोद गोयनका और धीरु भाई अंबानी समूह के तीन आला अधिकारी गौतम दोशी, हरि नायर और सुरेन्द्र पीपारा जेल में इससे ज्यादा जगह की उम्मीद भी नहीं कर सकते। तिहाड़ पहले से ही जरूरत से ज्यादा भरी है। गुरुवार को तिहाड़ परिसर की नौ जेलों में 11,696 कैदी बन्द थे।
तिहाड़ जेल में बन्द इन कारपोरेट हस्तियों को जेल के लंगर का खाना पसंद नहीं आया। अब वे कैंटीन से खाना खरीद कर खाते हैं। इनमें से कोई भी जेल में सुबह-सुबह होने वाली प्रार्थना में भी शरीक नहीं हुआ। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अब तक किसी ने भी उन पांच-पांच लोगों के नाम भी जेल प्रशासन को नहीं दिए हैं जिनसे इन्हें मुलाकात करनी है जबकि तिहाड़ जेल प्रशासन ने कुछ समय पहले यह नियम बनाया था कि जेल में जो भी विचाराधीन कैदी आएगा उसी वक्त उससे उन पांच लोगों के नाम, पता और टेलीफोन नंबर ले लिए जाएंगे जिनसे कैदियों को मुलाकात और बाद में जेल में ही उपलब्ध सुविधा के तहत फोन पर बात करनी होगी। सुबह 5.30 बजे जेल खुल जाती है और 6 बजे सभी जेलों में प्रार्थना होती है। इसमें सभी विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों को शरीक होना पड़ता है। लेकिन शुक्रवार को इनमें से कोई भी प्रार्थना में नहीं गया। सभी ने दोपहर में वार्ड में ही चहलकदमी की पर किसी से बात नहीं की। शुक्रवार को उन्होंने अखबारों की मांग की। अपने-अपने सेल में अधिकतर वक्त वे टीवी पर न्यूज देखते रहे। जेल आने के वक्त ही ये अपने साथ दो-दो जोड़ी कपड़े लाए थे। इनमें से एक भी तनाव में नहीं दिख रहा है।
कड़ी सुरक्षा वाले कैदियों के लिए विशेष यही है कि दुर्दांत अपराधियों से उन्हें बचाने के बंदोबस्त किए गए हैं। तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने बताया कि वसूली के लिए इन बड़े लोगों पर हमला हो सकता है। बहरहाल में पांच बड़े लोग भले ही जेल में एक साथ न रह पाएं, राजा की तरह कुछ नियमों से वे प्रोत्साहित हो सकते हैं। फरवरी में जब ए. राजा तिहाड़ पहुंचे थे तो उन्हें भी खाली संकरे स्थान में रखा गया जहां छत पर लोहे की एक झिरी से रोशनी आती थी। जाली वाले दरवाजे के कारण उनके लिए कोई एकांत नहीं था। लेकिन एक हफ्ते बाद ही राजा ने इस बन्द जगह को अपना घर बनाना शुरू कर दिया। जेल कैंटीन में डोसा, इडली, सांभर स्वादिष्ट मिलती है और यह उसी को खा रहे हैं।

Saturday, 23 April 2011

वीआईपी जेल बनती जा रही है तिहाड़

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 23 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

एशिया की सबसे बड़ी जेल का दर्जा प्राप्त तिहाड़ में वीआईपी कैदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अभियुक्त पांच और कारपोरेट दिग्गज बुधवार को तिहाड़ पहुंच गए। वहीं जिस तरह से वीआईपी कैदी तिहाड़ पहुंच रहे हैं उससे जेल प्रशासन की मुसीबत लगातार बढ़ रही है। इनके नाज-नखरे उठाने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से जुड़े कई वीआईपी पहले से ही तिहाड़ में बन्द हैं, बुधवार को इसी मामले से जुड़े विनोद गोयनका, संजय चन्द्रा, गौतम दोसी, सुरेन्द्र पिपारा और हरि नायर को तिहाड़ के सुरक्षित घेरे में रखा गया। जेल सूत्रों के मुताबिक इन कैदियों को तिहाड़ जेल संख्या तीन में रखा गया है। इससे पहले दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरिया, ए. राजा के निजी सचिव आरके चांदोलिया, स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर उस्मान बलवा पहले से ही जेल नम्बर तीन में बन्द हैं। पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के अलावा सुशील शर्मा और मनु शर्मा भी यहां बन्द हैं। तिहाड़ जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने बताया कि केवल पूर्व संचार मंत्री ए. राजा जेल नम्बर वन में बन्द हैं।
स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है कि उद्योग जगत से जुड़े इतने बड़े, प्रभावशाली व्यक्तियों को जेल की हवा खानी पड़ी हो। यह उद्योगपति जो सरकार उनकी जेब में होने का दावा करते हैं, ने शायद यह कभी कल्पना भी नहीं की हो कि एक दिन ऐसा भी आ सकता है कि जब इनको अपनी जवाबदेही देनी पड़ी और परिणामस्वरूप जेल की हवा खानी पड़े। बुधवार को पटियाला हाउस की विशेष अदालत के न्यायाधीश ओपी सैनी ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपियों व दूरसंचार कम्पनियों के पांच अति वरिष्ठ अफसरों की जमानत याचिका खारिज कर दी। यूनिटेक वायरलेस के एमडी संजय चन्द्रा, स्वान टेलीकॉम के निदेशक विनोद गोयनका, रिलायंस टेलीकॉम के एमडी गौतम दोसी  और दो  उपाध्यक्ष हरि नायर एवं सुरेन्द्र पिपारा को कोर्ट ने 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। न्यायाधीश सैनी ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन जैसे बड़े मामले में फंसे आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और यहां तक कि अभियोग से बचने के लिए वे फरार भी हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। वहीं पांचों कारपोरेट अधिकारियों ने जमानत याचिका खारिज करने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। जब मामले की सुनवाई हो रही थी तो ए. राजा, सिद्धार्थ बेहुरिया, आरके चांदोलिया व शाहिद बलवा भी सुनवाई के दौरान मौजूद थे। इन चारों को भी अभी तक जमानत नहीं मिली है।
उद्योग जगत में हड़कम्प मचा हुआ है। वह सवाल कर रहे हैं कि अगले दौर की गिरफ्तारी में किस कम्पनी पर गाज गिरेगी? पहले दौर में दूरसंचार मंत्री ए. राजा, उनके निजी सचिव रहे आरके चांदोलिया और पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरिया  गिरफ्तार हुए। दूसरे दौर में सरकारी अधिकारियों के इधर निजी कम्पनियों पर गाज गिरी है। लेकिन गड़बड़ी सिर्फ रिलायंस, स्वान टेलीकॉम, एतीसलात और यूनिटेक ने ही नहीं की है, ऐसा नहीं है। कई अन्य कम्पनियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। टाटा-बीएसएनएल डील को लेकर भी नकारात्मक चर्चा है। ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि अगले दौर में किस-किस पर शिकंजा कसा जाता है और कौन-कौन तिहाड़ की शोभा बढ़ाते हैं।