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Thursday, 2 June 2011

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के 14वें आरोपी करीम मोरानी भी पहुंचे तिहाड़


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2nd June 2011
अनिल नरेन्द्र
बॉलीवुड फिल्मों के निर्माता और किंग खान उर्प शाहरुख खान के मित्र करीम मोरानी आखिर धरे ही गए। सीबीआई विशेष अदालत के जज ओपी सैनी ने मोरानी की जमानत याचिका रद्द कर दी और जेल भेजने का आदेश सुना दिया। जमानत की सुनवाई के दौरान आरोपी द्वारा एक महीने से भी कम समय में सात अर्जी लगाए जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जज ने कहा ऐसा लगता है कि जानबूझकर कानूनी टाल-मटोल का रास्ता अपनाया गया। उन्होंने कहा कि मोरानी 6 मई से लेकर 23 मई तक चिकित्सा के नाम पर हाजिर नहीं हुए जबकि 11 मई को सौंपे गए रिपार्ट में उनकी स्थित स्थिर और सामान्य बताई गई थी। आरोपी को जेल भेजने के साथ ही आरोप पत्र में शामिल सभी 14 आरोपी तिहाड़ जेल पहुंच गए। ये हैं 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के 14 आरोपी ः ए. राजा सांसद-डीएमके, पूर्व केन्द्राrय संचार मंत्री सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व दूरसंचार सचिव आरके भदोलिया, निजी सचिव ए. राजा, विनोद गोयनका-स्वान टेलीकॉम पमोटर एवं निदेशक डीबी ग्रुप पा. लि., हरि नायर सीनियर वाइस पेसिडेंट, रिलायंस, आसिफ बलवा निदेशक, पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि., राजीव अग्रवाल निदेशक पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि., संजय चंद्रा निदेशक यूनिटेक वायरलेस (तमिलनाडु) पा.लि., कनिमोझी सांसद डीएमके, स्टाक होल्डर (20 पतिशत, कलेंगनार टीवी पा. लि.), शरद कुमार निदेशक एवं स्टाक होल्डर (20 पतिशत कलेंगनार टीवी पा. लि.) और करीम मोरानी निदेशक सिनेयुग मीडिया पा. लि.।
आरोप के अनुसार डीबी रियलिटी से 200 करोड़ पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि. और वहां से सिनेयुग मीडिया पा. लि. के जरिए कलेंगनार टीवी पा. लि. को मिले। पैसा स्वान टेलीकॉम को स्पेक्ट्रम आवंटन के बदले में दिया गया था। सीबीआई के मुताबिक सौदेबाजी में सबसे बड़ी भूमिका करीम मोरानी की रही है जिन्होंने छह करोड़ का फायदा उठाया। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि मोरानी को जानकारी थी कि यह दूषित पैसा है। उन्होंने लोन लेकर कलेंगनार को लोन दिया जबकि सिनेयुग गैर वित्तीय कंपनी भी नहीं है। डीबी रियलिटी के एकाउंटेंट सतीश अग्रवाल ने बताया कि पुंसेगांव को दो सौ करोड़ 23 दिसम्बर 2008 से लेकर 11 अगस्त 2009 के बीच बिना कोई समझौते के ही दे दिया गया। उसके बाद यही पैसा वहां से सिनेयुग में चला गया।
सीबीआई अदालत में एक तरफ मोरानी की जमानत पर बहस हो रही थी तो दूसरी तरफ फिल्मी हिरोइनों की मौजूदगी से अदालत में हलचल मच गई। आने वाली फिल्म `आलवेज कभी-कभी' की नायिका जोया मोरानी उस समय भावुक हो गई जब उसके पिता को जेल भेज देने का आदेश सुनाया गया। कोर्ट रूम में वह कभी अपनी मां का मुंह ताकती रही, कभी अपनी बहन का तो कभी पिता को निहार रही थी। जब पुलिस मोरानी को लॉक-अप में ले जाने लगे तो जोया जमीन पर बैठकर बुहत देर तक रोती रही। आखिरकार एक महिला ने आकर जब ढांढस बंधाया तब जाकर संभली। कोर्ट में एक और नायिका भी आई हुई थीं, अभिनेत्री खुशबू। खुशबू कनिमोझी और ए. राजा से मिलने आई थी। अब सब आरोपियों की तिहाड़ में महफिल लगेगी।
Tags: 2G, A Raja, Anil Narendra, CBI, Daily Pratap, DB Reality, Karim Morani, Reliance Telecom, Shah Rukh Khan, Swan Telecom, Vir Arjun

Sunday, 1 May 2011

बड़ी मछलियों को सीबीआई क्यों बचा रही है?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 01 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र

भारत में अकसर यह कहा जाता है कि बड़ी मछलियां तो फंसती नहीं और छोटी मछलियों से सरकारी एजेंसियां खानापूर्ति कर लेती हैं। बात 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की कर रहा हूं। हालांकि ईडी अपना काम तेजी और पारदर्शिता से कह रहा है और कई दिग्गजों को तिहाड़ पहुंचा चुका है पर सवाल यह भी उठ रहा है कि सीबीआई ने जो चार्जशीट दाखिल की है उसमें रिलायंस टेलीकॉम के अध्यक्ष अनिल अम्बानी, एस्सार के सीईओ प्रशांत रुइया और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी बड़ी मछलियों के नाम गायब हैं? सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में एक एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने आरोप लगाया है कि यह कम्पनियां ही 2जी मामले में वास्तविक लाभार्थी हैं। संगठन की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि शाहिद उस्मान बलवा की स्वान टेलीकॉम रिलायंस कम्युनिकेशन की फ्रंट कम्पनी थी जबकि लूप टेलीकॉम एस्सार ग्रुप की फ्रंट कम्पनी थी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु स्थित एनजीओ को धन देने पर टाटा टेलीसर्विसेज को फायदा पहुंचाया गया। द्रमुक सांसद कनीमोझी इस एनजीओ की निदेशक थीं। उन्होंने कहा कि चार्जशीट में अनिल अम्बानी का नाम नहीं है। सीबीआई ने उन्हें बचाने की कोशिश की है और चार्जशीट में केवल अफसरों को आरोपी बनाया गया है। कोर्ट ने कहा कि उनकी इस दलील पर 3 मई को होने वाली सुनवाई में इस पर विचार किया जाएगा।
उधर उद्योगपति रतन टाटा तथा कारपोरेट जगत के लिए लॉबिंग करने वाली नीरा राडिया की भी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में भूमिका की जांच करने के लिए पटियाला हाउस में विशेष रूप से बनी विशेष अदालत में भी यह अर्जी दाखिल की गई है। अदालत ने इस पर विस्तृत रूप से सुनवाई के लिए 2 मई की तारीख तय की है। उत्तर प्रदेश के रहने वाले धर्मेन्द्र पांडे के वकील एसके सिंह द्वारा दायर अर्जी में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने इस घोटाले में टाटा और राडिया की भूमिका की जांच नहीं की और उनकी अनदेखी की गई है। अर्जी में कहा गया है कि सीबीआई ने टाटा टेलीसर्विसेज को नीतियों और प्रतिक्रियाओं का उल्लंघन कर लाइसेंस दिया गया लेकिन इस तथ्य की पूरी तरह अनदेखी की। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि टाटा टेलीसर्विसेज को लाइसेंस दिलाने में नीरा राडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कहा गया है कि सीबीआई को आरोप पत्र दाखिल करने से पहले जांच के दौरान टाटा टेलीसर्विसेज को लाइसेंस दिए जाने में नीतियों, प्रक्रियाओं के उल्लंघन की जानकारी थी पर जानबूझकर इसमें चूक की वजह पर ध्यान नहीं दिया। अर्जी में न्यायमूर्ति शिवराज पाटिल समिति की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया है कि टाटा ने आखिरी तारीख यानि एक अक्तूबर 2007 तक यूएएस लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया था। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि उसके बाद ही नीरा राडिया ने अपने प्रयास से लाइसेंस दिलवाया।
सबकी नजरें अब 2 और 3 मई को पटियाला हाउस और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। देश देखना यह चाहता है कि क्या बड़ी मछलियों पर हाथ डालने का साहस इस सरकार और उनकी एजेंसियों में है या नहीं?

Friday, 29 April 2011

पूरी तरह लपेटे में आ चुके हैं करुणानिधि और उनका परिवार

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 29 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

यह कलयुग है और कलयुग में भगवान राम को गाली देने वाले भी मौजूद हैं पर भगवान राम को गाली देने वाला अंतत धरा जाता है और जब उपर वाले के प्रकोप का डंडा चलता है तो बन्दे के होश ठिकाने हो जाते हैं। यही कुछ हाल द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि का भी हो रहा है। यह वही करुणानिधि हैं जिसने रामसेतु समुद्र परियोजना में सवाल पूछा था कि राम ने कौन-सी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। भगवान राम को खुली गाली देने की कीमत करुणानिधि को चुकानी पड़ेगी। करुणानिधि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले प्रकरण में बुरी तरह से उलझते जा रहे हैं। इनके तमाम तेवरों के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व इनकी ब्लैकमेलिंग में नहीं आ रहा है। यही नहीं कांग्रेस ने तो एक तरह से करुणानिधि को सीधी चुनौती दे दी है कि वे सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला करते हैं तो कर लें। लेकिन नई स्थितियों में उनका बचाव करना अब सम्भव नहीं है। करुणानिधि की तमाम कोशिशों के बावजूद उनके चहेते ए. राजा तिहाड़ में पहुंच चुके हैं। अब सांसद बेटी कनिमोझी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की आरोपी बन गई है। सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी है। बेटी के कटघरे में आने से करुणानिधि का पूरा परिवार फंसता नजर आ रहा है। सीबीआई ने जो ताजा चार्जशीट दाखिल की है उसमें दावा किया गया है कि बहुचर्चित फर्म डीबी रियलिटी के जरिये कलैगनर टीवी के खाते में 214 करोड़ रुपये की रकम दी गई है। कलैगनर टीवी के प्रबंधन ने कागजों में हेराफेरी की और इस रकम को कर्ज के रूप में दिखा दिया। अपनी भूमिका पाक-साफ दिखाने के लिए टीवी संस्थान ने यह रकम भी लौटा दी। सीबीआई ने दावा किया है कि यह रकम उन कम्पनियों को मिली थी जिन्हें स्पेक्ट्रम आवंटन में फायदा पहुंचाया गया था। चूंकि ए. राजा, कनिमोझी के खास प्रभाव में थे, इसलिए उन्होंने कलैगनर टीवी को एक जरिया बना लिया। उल्लेखनीय है कि कलैगनर टीवी डीएमके के प्रचार मुखौटे की भूमिका में रहता है। आरोपी तो करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्माल को भी बनना था पर यह इसलिए फिलहाल नहीं हुआ क्योंकि वे टीवी संस्थान में महज एक साइलेंट पार्टनर थीं। कनिमोझी के साथ कलैगनर टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। इस संस्थान में उनकी भी 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी पाई गई। डीएमके के करीबियों का कहना है कि दयालु अम्माल भले सीबीआई के शिकंजे से बच गई हों, लेकिन वे अदालती जंजाल में फंस सकती हैं। क्योंकि जिस संस्थान में उनका मालिकाना हक 60 प्रतिशत का हो, उसके कार्यकलापों की जिम्मेदारी से वे कैसे मुक्त मानी जा सकती हैं? इसके साथ ही इस मामले से करुणानिधि के परिवार में आपसी द्वंद्व बढ़ सकती है क्योंकि करुणानिधि की एक पत्नी दयालु अम्माल फिलहाल बच गई हैं जबकि उनकी दूसरी पत्नी राजथी अम्माल की बेटी कनिमोझी घोटाले के लपेटे में आ गई है। करुणानिधि के परिवार में कई वजहों से पहले से ही घमासान चल रहा है। सीबीआई की चार्जशीट परिवार के द्वंद्व को और बढ़ा सकती है, रही-सही कसर तमिलनाडु विधानसभा परिणाम आने पर शायद पूरी हो जाए। अगर डीएमके हार जाती है तो दोनों तमिलनाडु और केंद्र से सत्ता से हाथ धोना पड़ सकता है। भगवान के घर देर है अन्धेर नहीं।

Sunday, 17 April 2011

...और अब शरद पवार 2जी स्पेक्ट्रम में भी शामिल

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 17 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र
केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का नाम बस अब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से जुड़ना बाकी रह गया था। कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया ने सीबीआई को दिए बयान में यह काम भी पूरा कर दिया है। कभी आईपीएल गेट तो कभी लवासा तो कभी हसन अली मामले के चलते विवादों में रहे पवार का नाम 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फायदा उठाने वाली डीबी रियल्टी की स्वान टेलीकॉम से भी जुड़ गया है। कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया ने सीबीआई के सामने दिए बयान में स्वान टेलीकॉम में पवार का नियंत्रण होने की सम्भावना जताई है। डीबी रियल्टी की कम्पनी स्वान टेलीकॉम 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले  में अनुचित तरीके से फायदा उठाने की आरोपी है। राडिया ने सीबीआई पूछताछ में कबूला है कि स्वान टेलीकॉम को लाइसेंस दिलाने के लिए पवार ने तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा से सिफारिश की थी। इसी कड़ी में राडिया ने दागी स्वान टेलीकॉम में पवार की हिस्सेदारी होने की सम्भावना भी जताई है। राडिया का यह बयान सीबीआई के आरोप पत्र का हिस्सा है। इसमें राडिया ने कहा है कि मुंबई में लोगों की ऐसी धारणा है, लेकिन दस्तावेजी सबूत नहीं हैं। यह पहली बार नहीं है कि शरद पवार का नाम किसी विवाद से जुड़ा है। चाहे वह आईपीएल, लवासा, आदर्श सोसायटी घोटाला हो या फिर चीनी घोटाले से लेकर वायदा बाजार को फायदा पहुंचाने जैसे विवाद, सबमें उनका नाम जरूर आया। वहीं पवार ने डीबी रियल्टी पर स्वान टेलीकॉम में किसी भी तरह की भागीदारी से इंकार किया है। डीबी रियल्टी के मालिक विनोद गोयनका से 35 साल पुराने रिश्तों की बात तो उन्होंने स्वीकारी है और कहा कि उन्होंने 20 साल पहले बारामती (पवार के गृह क्षेत्र) में दुग्ध प्रसंस्करण इकाई स्थापित की थी। बकौल पवार `हम सभी किसान उन्हें अच्छी गुणवत्ता का दूध निकालने में मदद करते हैं। हमारे रिश्ते हैं और इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन टेलीकॉम कम्पनी में मेरी भागीदारी या जुड़ाव कतई नहीं है।'
बेशक पवार यह कहें कि उनका 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन यह पूरा सच नहीं है। पवार की बेटी सुप्रिया सुले और उनके पति सदानन्द की पुणे के पंचशील रियल्टी के पंचशील टेक पार्प वन प्रोजैक्ट में चार प्रतिशत की हिस्सेदारी है जिसके सीधे-सीधे संबंध डीबी रियल्टी से हैं। शाहिद बलवा की डीबी रियल्टी और पंचशील रियल्टी में सीधा संबंध पुणे के यरवदा की 15 हजार करोड़ रुपये की करीब 19 एकड़ जमीन के विकास से जुड़ी है। पुणे म्युनिसिपल कारपोरेशन (पीएमसी) और जिला कलेक्टर कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों के अनुसार पंचशील टेक पार्प वन आईटी प्रोजैक्ट और डीबी रियल्टी (हिसलाइड कंस्ट्रक्शन प्रा. लि.) के द ग्रांड हमार फाइव स्टार होटल प्रोजैक्ट की जमीन के सर्वे क्रमांक 191(ए) के दो हिस्सा नम्बरों में नहीं बांटा गया है। जमीन के बंटवारे के साथ ही मुख्य सर्वे नम्बर में जमीन के टुकड़ों को अलग-अलग हिस्सा नम्बर अवंटित किए जाते हैं। अलग-अलग हिस्सा नम्बर लिए बिना यदि दो कम्पनियां काम कर रही हैं तो टाउन प्लानर्स के मुताबिक उनमें आपसी सहमति या भागीदारी निश्चित है।
शरद पवार इतने बदनाम हो चुके हैं कि वह किस-किस मामले में सफाई देंगे? पर सवाल यह उठता है कि इस सबके बावजूद उन पर कोई हाथ डालने का साहस क्यों नहीं करता? कांग्रेस तो गठबंधन धर्म निभाने का बहाना लेकर साइड कर लेती है और सरकार के वह खुद हिस्सा हैं। अन्ना हजारे ने यूं ही शरद पवार को नहीं चुना।