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Wednesday, 30 May 2012

आईपीएल-5 रोमांचक रहा पर शक के दायरे में ही आया

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 30 May 2012
अनिल नरेन्द्र
आईपीएल-5 शानदार तरीके से समाप्त हुआ। रविवार को खेला गया फाइनल मैच बहुत ही रोमांचक था। अगर यह कहें कि आईपीएल-5 का समापन मैच इससे अच्छा नहीं हो सकता था तो शायद गलत न होगा। शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स आखिरकार पांचवीं कोशिश में पास हो गई। रविवार को खेले गए फाइनल में केकेआर ने पिछले दो बार के चैंपियन चेन्नई सुपरकिंग्स को पांच विकेट से हरा दिया। मैच का फैसला आखिरी ओवर की चौथी गेंद पर हुआ। विजेता टीम को 10 करोड़ और उपविजेता को 7.50 करोड़ रुपये की इनामी राशि मिली। किस्मत ने केकेआर का निश्चित रूप से साथ दिया। कम से कम दो किस्से ऐसे हुए जिससे केकेआर की जीत सम्भव हो सकी। पहला तब हुआ जब कैलिस ने एक शाट मारा। बाउंड्री पर खड़े माइक हसी ने कैच लपक तो लिया पर वह बाउंड्री लाइन क्रॉस कर गए। जिस बॉल पर कैलिस को आउट होना था वह छक्के में बदल गई। दूसरा किस्सा तब हुआ जब हिलफेन हास ने शाकीब अल हसन को गेंद फेंकी। शाकीब ने शाट मारा और और कैच हो गए पर कैच होने से पहले वह दो रन भाग चुके थे। एम्पायर ने इस बॉल को कमर से ऊपर होने के कारण वाइट करार दिया। वाइट होने के कारण हिलफेन हास को दोबारा बॉल करनी पड़ी और इस बार शाकीब ने चौका मार दिया। इस तरह एक ही बॉल से केकेआर को 7 रन मिल गए और उस समय केकेआर को 7 बॉलों में 16 रनों की दरकार थी। इन 7 रनों ने आखिरी ओवर का लक्ष्य आसान कर दिया। मनोज तिवारी ने दो चौके लगा दिए और केकेआर चैंपियन बन गया। केकेआर की यह पहली जीत थी। मालिक शाहरुख खान की खुशी का ठिकाना देखने लायक थी। शानदार टूर्नामेंट का शानदार क्लाइमैक्स रहा पर आईपीएल-5 विवादों से नहीं बच सका। सबसे बड़ा विवाद तो दिल्ली डेयर डेविल्स की परफार्मेंस को लेकर था। विवादित क्रिकेट लीग बनकर उभरी आईपीएल में गड़बड़ी का शक भी होने लगा है। क्या आईपीएल के रिजल्ट पहले से ही तय थे? शक करने के कई कारण दिखाई देते हैं। क्वालीफायर-1 और क्वालीफायर-2 में दिल्ली डेयर डेविल्स के अजीबो-गरीब फैसलों और आईपीएल की वेबसाइट में क्वालीफायर-2 के रिजल्ट के पहले ही दोनों फाइनलिस्टों के नाम आने के बाद शक होना लाजिमी है। 22 मई को केकेआर के खिलाफ पहले क्वालीफायर में भी सहवाग की कप्तानी में ऐसे फैसले देखने को मिले जिससे लगा कि दिल्ली हारने के लिए ही उतरी है। स्पिन ट्रैक होने के बावजूद सहवाग ने उस मैच में सिर्प एक स्पिनर को खिलाया जबकि केकेआर की ओर से तीन स्पिनर उतरे। यही नहीं लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली ने टेलर और इरफान पठान से पहले अपेक्षाकृत धीमी बल्लेबाजी करने वाले वेणुगोपाल राव और पवन नेगी को बल्लेबाजी के लिए उतारा। इन दोनों की धीमी बल्लेबाजी की वजह से बाद में टेलर और इरफान के लिए लक्ष्य पाना बहुत मुश्किल हो गया। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। क्वालीफायर-2 में तो सहवाग ने बीसीसीआई अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन की टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के फाइनल में जाने के सारे रास्ते खोल दिए। शुक्रवार को हुए इस मैच में सहवाग ने चेन्नई की पिच पर टास जीतने के बावजूद पहले गेंदबाजी की। यही नहीं पूरे टूर्नामेंट में टाप फार्म में रहे दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज मोर्नी मोर्केल को इस मैच में नहीं खिलाया गया और इनकी जगह कैरेबियाई आलराउंडर आद्रेरसल को शामिल कर लिया। सहवाग के इस निर्णय पर धोनी ने भी आश्चर्य जाहिर किया। यही नहीं पूरे टूर्नामेंट में बढ़िया प्रदर्शन करने वाले स्पिनर शाहबाज नदीम की जगह इस मैच में सन्नी गुप्ता को शामिल किया और उनसे पहला ही ओवर करवा डाला। गुप्ता ने तीन ओवर में 47 रन दिए और एक भी सफलता उनके हाथों में नहीं लगी। यही नहीं सहवाग ने इस टूर्नामेंट में पहली बार गेंदबाजी में हाथ आजमाए और एक ही ओवर में 21 रन दिए। सबसे आश्चर्य की बात यह रही कि 223 रन की विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली के ओपनिंग बल्लेबाजों में वीरेन्द्र सहवाग नदारद थे। उन्होंने वार्नर के साथ ओपनिंग में माहेला जयवर्द्धने को उतारा। उनमें न तो कांफिडेंस नजर आई और उनकी बाडी लैंग्वेज ने सारी कहानी कह डाली। वह सिर्प एक रन बनाकर चलते बने। माहेला जयवर्द्धने अच्छा खेल रहे थे पर एक बॉल पर जब वह बीट हुए तो वह खड़े तमाशा देखते रहे। उन्होंने वापस बैट रखने की कोई कोशिश नहीं की जबकि वह सम्भव है कि स्टम्प होने से बच सकते थे। दिल्ली डेयर डेविल्स ने अपने दिल्ली के फैंस को न केवल नाराज किया बल्कि सहवाग के आचरण से शक भी पैदा किया पर कुल मिलाकर आईपीएल-5 सफल रहा और सब ने इसका खूब मजा लिया। ऐसा नहीं कि टूर्नामेंट से कुछ अच्छा नहीं उभरा। कई युवा खिलाड़ी उभरे। बोर्ड ने यह भी फैसला किया कि आईपीएल नियमों की समीक्षा होगी और अगले सत्र में सभी घरेलू खिलाड़ियों की भी नीलामी होगी।
Anil Narendra, Cricket Match, Daily Pratap, IPL, Kolkata, Shah Rukh Khan, Vir Arjun

Wednesday, 23 May 2012

क्लाइमैक्स पर पहुंचता आईपीएल

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 23 May 2012
अनिल नरेन्द्र
आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) अपने क्लाइमैक्स में पहुंच गया है। मंगलवार से नाकआउट स्टेज आरम्भ हो गई है। अपने-अपने विचार हो सकते हैं। मुझे तो यह कहने में कोई संकोच नहीं कि मैंने आईपीएल मैचों का पूरा मजा लिया है। पिछले लगभग डेढ़ महीने से जब से आईपीएल शुरू हुआ है मैंने तकरीबन सारे मैच देखने का प्रयास किया है। मजबूरी की वजह से इक्का-दुक्का रह गए हों तो और बात है पर हर शाम मैंने मैचों का रोमांच लिया है। मेरी राय में यह एंटरटेनमेंट का बहुत अच्छा साधन रहा। औरतों को भी मजबूरी में सीरियल छोड़कर मैच देखने पड़े। हमने इन मैचों में देखा कि किसी सपाट पिच पर 180 के लक्ष्य का बचाव किया जा सकता है। 160 के स्कोर पर भी चुनौती पेश की जा सकती है और 140 के लक्ष्य को आसानी से पाया जा सकता है। कुछ टीमें लक्ष्य का पीछा करते हुए मैच को आखिरी बॉल तक ले गए और कई मैचों में आखिरी बॉल पर हार-जीत का फैसला हुआ। इससे ज्यादा किसी भी मैच में और क्या रोमांच हो सकता है? हमने टूर्नामेंट में देखा कि यदि आखिरी दो ओवर में जीत के लिए 25 रन की भी जरूरत रही तो बल्लेबाजों ने उसे हासिल कर लिया। टी-20 में गेंदबाजों की भूमिका भी साफ हुई। क्रिस गेल जिस टीम (रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु) में हों और वह नाकआउट से बाहर हो जाए तो दर्शाता है कि डेल स्टेन जैसा बॉलर कितना कहर ढा सकता है। वैसे फाइनल स्टेज पर पहुंचने वाली चार टीमों ने डेक्कन चार्जर्स का दिल से शुक्रिया अदा किया होगा कि उन्होंने क्रिस गेल को फाइनल स्टेज से बाहर कर दिया। क्योंकि क्रिस गेल रहते तो वह किसी भी टीम के अकेले अपने दमखम पर नाक में दम कर देते। इससे यह भी साबित हुआ कि अकेले बल्लेबाजों से टीम नहीं जीतती, उसकी बॉलिंग और फील्डिंग भी उतनी ही जरूरी है। बैलेंस्ड टीम होनी चाहिए। दिल्ली डेयर डेविल्स मुझे सबसे ज्यादा बैलेंस्ड टीम लगती है। जिगरी दोस्त वीरेन्द्र सहवाग और गौतम गम्भीर आमने-सामने होंगे। दिल्ली को सुनील नारायण की काट निकालनी होगी। एक तरफ वीरू और मोर्पल होंगे तो दूसरी तरफ गौतम और सुनील नारायण। अगर किस्मत की बात करें तो मेरी राय में सबसे धनी किस्मत के हैं महेन्द्र सिंह धोनी। डेक्कन की बेंगलुरु पर जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महेन्द्र सिंह धोनी और चेन्नई सुपरकिंग्स सचमुच भाग्य के धनी हैं। पिछली दो बार की चैंपियन चेन्नई को 2010 की तरह इस बार भी आईपीएल से लगभग बाहर माना जा रहा था। पूरी तरह से वह दूसरी टीमों के परिणाम पर निर्भर थे और तीनों परिणाम उनके अनुकूल रहे। चेन्नई ने 17 अंक के साथ लीग चरण का समापन किया था और किंग्स इलेवन पंजाब, राजस्थान रॉयल्स और बेंगलुरु उससे आगे निकलने की स्थिति में थे। चेन्नई तभी प्ले ऑफ में पहुंच पाता जबकि पंजाब और राजस्थान दोनों अपना एक-एक मैच हार जाते। दोनों के तब 14-14 अंक थे और उन्हें दो मैच खेलने थे। पंजाब और राजस्थान दोनों हार गए। अब सबकी निगाहें चार्जर्स और बेंगलुरु मैच पर टिकी थी। बेंगलुरु मैच जीतने पर प्ले ऑफ में पहुंच जाता और चेन्नई बाहर हो जाता पर क्रिस गेल और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की टीम बेंगलुरु मैच हार गई और धोनी पहुंच गए प्ले ऑफ स्टेज पर। है न किस्मत के धनी? आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में थोड़े विवाद तो जरूर होंगे। कहा जा रहा है कि इसमें ब्लैक मनी का खुला इस्तेमाल हुआ है। हुआ होगा, उसे रोकने की कोशिश भी होनी चाहिए पर इसकी वजह से आईपीएल बन्द कर दिया जाए, हम सहमत नहीं हैं। रेव पार्टियों में इक्का-दुक्का क्रिकेटर का शामिल होना, स्पॉट फिक्सिंग के आरोप, महिला पर लड़ाई यह सब चलता है। हमें इस टूर्नामेंट के पाजिटिव बातों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। दो महीने बाद वर्ल्ड टी-20 टूर्नामेंट हेने जा रहा है। कितने भारतीय युवा खिलाड़ी आईपीएल में उभरकर आए हैं। इनमें अजिक्म रहाणे जैसे भारतीय टीम-20 में शामिल किए जा सकते हैं और भी कुछ युवा खिलाड़ी हैं जिन्हें मौका दिया जा सकता है। यह तभी सम्भव हुआ जब यह आईपीएल में अपनी फार्म और हुनर दिखा सके। फिर दर्जनों उन खिलाड़ियों, कोचों, फिजियों व अन्य लोगों को मौका मिल रहा है जो वैसे तो खेलने के लिए फिट हैं पर उम्र की वजह से नेशनल टीमों से बाहर हैं। होटलों, एयरलाइनों, ट्रांसपोर्ट उद्योग को भी कितना लाभ हुआ है। बेहतर चीजों का तजुर्बा करने का मौका मिला है। भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने, सीखने का मौका मिलता है। कुल मिलाकर यह एक अच्छा फार्मेट है जो जारी रहना चाहिए। देखें कौन-सी टीम खिताब जीतती है? वही जीतेगी जो मैच के दिन बेहतरीन खेल खेलेगी।
Anil Narendra, Cricket Match, Daily Pratap, IPL, T20, Vir Arjun

Thursday, 17 May 2012

आईपीएल-5 में स्पॉट फिक्सिंग स्टिंग ऑपरेशन

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 17 May 2012
अनिल नरेन्द्र
क्रिकेट में फिक्सिंग का भूत फिर बाहर निकल आया है। इंडिया टीवी ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर आईपीएल के कुछ खिलाड़ियों द्वारा गलत तरीके से पैसे के लिए स्पॉट फिक्सिंग का खुलासा किया। चैनल ने दावा किया कि उसने यह स्टिंग ऑपरेशन एक साल तक किया है। इस स्टिंग ऑपरेशन में चैनल के रिपोर्टरों ने और आईपीएल टीमों के एजेंट बनकर खिलाड़ियों से मुलाकात की थी। जिसमें कई काम शामिल थे, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड के नियमों का उल्लंघन है। आइए देखें, इस टेप में एक खिलाड़ी से बातचीत क्या है। जैसा कि टीवी चैनल ने दावा किया है। रिपोर्टर ः मैच फिक्सिंग के लिए किस तरह के उदाहरण दिए गए हैं? खिलाड़ी ः यह कहा जाता है कि एक आध मैच फिक्स करके काफी कमाई कर सकते हो। रिपोर्टर ः एक नो बॉल या बाउंसर से काम चल जाता है? खिलाड़ी ः ओके। रिपोर्टर ः आपके लिए यह कोई समस्या नहीं है? खिलाड़ी ः नहीं कोई समस्या नहीं। रिपोर्टर ः 10, 15, 20 मैच या पांच मैच, आदि जितने मैच चाहो? खिलाड़ी ः ठीक है कोई समस्या नहीं है। रिपोर्टर ः टेस्ट, लीग या रणजी? खिलाड़ी ः हम...। रिपोर्टर ः क्या आप इससे सहमत हैं? खिलाड़ी ः हां ठीक है। रिपोर्टर ः यह आसान भी है। हम आपको पूरा मैच फिक्स करने को नहीं कह रहे? खिलाड़ी ः हूं...। रिपोर्टर ः हम सिर्प स्पॉट फिक्सिंग के लिए कह रहे हैं? खिलाड़ी ः हूं। रिपोर्टर ः मैं इसके लिए आपको 5000 दे रहा हूं, आप कितना चाहते हैं? खिलाड़ी ः उस टूर्नामेंट के लिए 40,000। इसके अलावा चैनल ने यह भी दावा किया कि मनीष पांडे, मोहनीश मिश्रा, मनविन्दर बिसला ने तय स्लैब से अधिक पैसे लिए। ऐसा करना बीसीसीआई के नियमों का उल्लंघन है। टीपी सुधींद्र ने नो बॉल फेंकने के लिए पैसे लिए। कुछ खिलाड़ी टूर्नामेंट के दौरान भी टीम बदलने को राजी मिले। बीसीसीआई ने अनकैंड (नीलामी में शामिल नहीं) खिलाड़ियों के लिए स्लैब निर्धारित किया हुआ है। वे इससे अधिक पैसे नहीं ले सकते। फ्रेंचाइजी भी उन्हें ऐसी पेशकश नहीं कर सकते, ऐसा करना नियम का उल्लंघन है। मध्य प्रदेश के गेंदबाज सुधींद्र ने जानबूझ कर नो बॉल फेंकने के लिए राजी हो गए। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपये मांगे. सुधींद्र आईपीएल-5 में डेक्कन चार्जर्स के लिए खेलते हैं। चैनल के मुताबिक इवेंट में खेले गए एक घरेलू मैच में जानबूझ कर नो बॉल फेंकने के लिए 40 हजार रुपये लिए थे। शलभ श्रीवास्तव टीम बदलने और स्पॉट फिक्सिंग के लिए राजी दिखे। उन्होंने नो बॉल फेंकने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की। शलभ ने बताया कि मनीष पांडे को सहारा पुणे वारियर्स में बनाए रखने के लिए 50 लाख की कार दी है। शलभ के मुताबिक कोलकाता से खेलने के लिए मनविन्दर बिसला ने 75 लाख रुपये ब्लैक में लिए हैं। बीसीसीआई ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच पूरी होने तक कथित पांच आरोपी क्रिकेटरों को तुरन्त प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मोहनीश मिश्रा, शलभ श्रीवास्तव, टीपी सुधीन्द्र, अमित यादव और अभिनव बाली हैं जिन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया गया है। हमारा मानना है कि यह स्टिंग ऑपरेशन अगर कुछ साबित करता है तो बस इतना कि कुछ छुटभैया खिलाड़ी केवल स्पॉट फिक्सिंग कर रहे थे। इससे पूरे मैच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रही बात एक टीम से दूसरी टीम में बदलने के लिए अतिरिक्त पैसों की मांग करना बेशक नियमों का उल्लंघन हो पर गम्भीर अपराध नहीं। ब्लैक में पैसा लेना भी इतना बड़ा अपराध नहीं। आईपीएल क्रिकेट से ज्यादा पैसों का खेल है। खिलाड़ी भी चाहते हैं कि वह ज्यादा से ज्यादा कमा सकें। फ्रेंचाइजी भी कुछ चुनिन्दा खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं। अगर पुणे वारियर्स ने ब्लैक में पैसे दिए हैं तो उसका कोई खास फायदा हुआ हो ऐसा नहीं दिखता। वह डेक्कन चार्जर्स के साथ प्वाइंट टेबल में सबसे नीचे है। टीवी चैनल सनसनी फैलाने के लिए मशहूर है। यह स्टिंग ऑपरेशन भी उसी सनसनी अभियान का एक हिस्सा है जिसमें ज्यादा गम्भीरता नजर नहीं आती। आईपीएल-5 को बिना वजह बदनाम करने का प्रयास है और दर्शकों में ख्वामख्वाह शक पैदा करने का एक प्रयास।
क्रिकेट में फिक्सिंग का भूत फिर बाहर निकल आया है। इंडिया टीवी ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर आईपीएल के कुछ खिलाड़ियों द्वारा गलत तरीके से पैसे के लिए स्पॉट फिक्सिंग का खुलासा किया। चैनल ने दावा किया कि उसने यह स्टिंग ऑपरेशन एक साल तक किया है। इस स्टिंग ऑपरेशन में चैनल के रिपोर्टरों ने और आईपीएल टीमों के एजेंट बनकर खिलाड़ियों से मुलाकात की थी। जिसमें कई काम शामिल थे, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड के नियमों का उल्लंघन है। आइए देखें, इस टेप में एक खिलाड़ी से बातचीत क्या है। जैसा कि टीवी चैनल ने दावा किया है। रिपोर्टर ः मैच फिक्सिंग के लिए किस तरह के उदाहरण दिए गए हैं? खिलाड़ी ः यह कहा जाता है कि एक आध मैच फिक्स करके काफी कमाई कर सकते हो। रिपोर्टर ः एक नो बॉल या बाउंसर से काम चल जाता है? खिलाड़ी ः ओके। रिपोर्टर ः आपके लिए यह कोई समस्या नहीं है? खिलाड़ी ः नहीं कोई समस्या नहीं। रिपोर्टर ः 10, 15, 20 मैच या पांच मैच, आदि जितने मैच चाहो? खिलाड़ी ः ठीक है कोई समस्या नहीं है। रिपोर्टर ः टेस्ट, लीग या रणजी? खिलाड़ी ः हम...। रिपोर्टर ः क्या आप इससे सहमत हैं? खिलाड़ी ः हां ठीक है। रिपोर्टर ः यह आसान भी है। हम आपको पूरा मैच फिक्स करने को नहीं कह रहे? खिलाड़ी ः हूं...। रिपोर्टर ः हम सिर्प स्पॉट फिक्सिंग के लिए कह रहे हैं? खिलाड़ी ः हूं। रिपोर्टर ः मैं इसके लिए आपको 5000 दे रहा हूं, आप कितना चाहते हैं? खिलाड़ी ः उस टूर्नामेंट के लिए 40,000। इसके अलावा चैनल ने यह भी दावा किया कि मनीष पांडे, मोहनीश मिश्रा, मनविन्दर बिसला ने तय स्लैब से अधिक पैसे लिए। ऐसा करना बीसीसीआई के नियमों का उल्लंघन है। टीपी सुधींद्र ने नो बॉल फेंकने के लिए पैसे लिए। कुछ खिलाड़ी टूर्नामेंट के दौरान भी टीम बदलने को राजी मिले। बीसीसीआई ने अनकैंड (नीलामी में शामिल नहीं) खिलाड़ियों के लिए स्लैब निर्धारित किया हुआ है। वे इससे अधिक पैसे नहीं ले सकते। फ्रेंचाइजी भी उन्हें ऐसी पेशकश नहीं कर सकते, ऐसा करना नियम का उल्लंघन है। मध्य प्रदेश के गेंदबाज सुधींद्र ने जानबूझ कर नो बॉल फेंकने के लिए राजी हो गए। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपये मांगे. सुधींद्र आईपीएल-5 में डेक्कन चार्जर्स के लिए खेलते हैं। चैनल के मुताबिक इवेंट में खेले गए एक घरेलू मैच में जानबूझ कर नो बॉल फेंकने के लिए 40 हजार रुपये लिए थे। शलभ श्रीवास्तव टीम बदलने और स्पॉट फिक्सिंग के लिए राजी दिखे। उन्होंने नो बॉल फेंकने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की। शलभ ने बताया कि मनीष पांडे को सहारा पुणे वारियर्स में बनाए रखने के लिए 50 लाख की कार दी है। शलभ के मुताबिक कोलकाता से खेलने के लिए मनविन्दर बिसला ने 75 लाख रुपये ब्लैक में लिए हैं। बीसीसीआई ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच पूरी होने तक कथित पांच आरोपी क्रिकेटरों को तुरन्त प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मोहनीश मिश्रा, शलभ श्रीवास्तव, टीपी सुधीन्द्र, अमित यादव और अभिनव बाली हैं जिन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया गया है। हमारा मानना है कि यह स्टिंग ऑपरेशन अगर कुछ साबित करता है तो बस इतना कि कुछ छुटभैया खिलाड़ी केवल स्पॉट फिक्सिंग कर रहे थे। इससे पूरे मैच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रही बात एक टीम से दूसरी टीम में बदलने के लिए अतिरिक्त पैसों की मांग करना बेशक नियमों का उल्लंघन हो पर गम्भीर अपराध नहीं। ब्लैक में पैसा लेना भी इतना बड़ा अपराध नहीं। आईपीएल क्रिकेट से ज्यादा पैसों का खेल है। खिलाड़ी भी चाहते हैं कि वह ज्यादा से ज्यादा कमा सकें। फ्रेंचाइजी भी कुछ चुनिन्दा खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं। अगर पुणे वारियर्स ने ब्लैक में पैसे दिए हैं तो उसका कोई खास फायदा हुआ हो ऐसा नहीं दिखता। वह डेक्कन चार्जर्स के साथ प्वाइंट टेबल में सबसे नीचे है। टीवी चैनल सनसनी फैलाने के लिए मशहूर है। यह स्टिंग ऑपरेशन भी उसी सनसनी अभियान का एक हिस्सा है जिसमें ज्यादा गम्भीरता नजर नहीं आती। आईपीएल-5 को बिना वजह बदनाम करने का प्रयास है और दर्शकों में ख्वामख्वाह शक पैदा करने का एक प्रयास।
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Wednesday, 16 May 2012

आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर से प्रतिबंध हटाओ

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 16 May 2012
अनिल नरेन्द्र
26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद से बिगड़े भारत-पाक क्रिकेट संबंध बहाल होने की पहली उम्मीद शनिवार को नजर आई। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने चैंपियंस लीग ट्वंटी-ट्वंटी में पाकिस्तान की टीम के प्रतिनिधित्व का रास्ता साफ कर दिया। बीसीसीआई के इस फैसले का भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध दोबारा शुरू होने पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। बीसीसीआई के प्रेजीडेंट एन. श्रीनिवासन ने बताया कि चैंपियंस लीग ट्वंटी-ट्वंटी वर्किंग कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया कि चैंपियंस लीग टूर्नामेंट में पाकिस्तानी टीम को इनवाइट किया जाएगा। बीसीसीआई ने गवर्निंग काउंसिल को सिफारिश भेज दी है, जो अंतिम फैसला लेगी। क्या यह पाक से क्रिकेट संबंध बहाल करने की दिशा में पहला कदम है? इस पर श्रीनिवासन ने कहा कि हमारा फैसला सिर्प चैंपियंस लीग तक सीमित है। मैं इसके आगे कुछ नहीं कहूंगा। बीसीसीआई की सिफारिश पर अब चैंपियंस लीग गवर्निंग काउंसिल फाइनल फैसला करेगा। अगर उसने हरी झंडी दे दी तो पाकिस्तान की ट्वंटी-ट्वंटी चैंपियंस सियालकोट स्टेलियंस भारत में खेलेंगे। मंजूरी मिली तो अक्तूबर से भारत में होने वाली चैंपियंस लीग ट्वंटी-ट्वंटी टूर्नामेंट में पाक चैंपियन टीम खेल सकेगी। इससे 2008 के बाद से आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर लगे प्रतिबंध के हटने का रास्ता साफ हो सकेगा। 26/11 के बाद से ही पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर आईपीएल में खेलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि हमें समझ नहीं आया कि यह प्रतिबंध क्यों लगाया गया? आईपीएल में जब आप पाकिस्तानी अम्पायर बुला सकते हैं, पाकिस्तानी कमंटेटर बुला सकते हैं तो खिलाड़ी क्यों नहीं? अजहर महमूद खेल रहे हैं। उन्होंने एक दूसरा रास्ता अख्तियार किया है। वह ब्रिटिश सिटीजन की हैसियत से आईपीएल में भाग ले रहे हैं। आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज व श्रीलंका, बंगलादेश के खिलाड़ी जब आईपीएल में भाग ले रहे हैं तो पाकिस्तानियों से परहेज क्यों? हम पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को तो नहीं बुला रहे और न ही भारतीय क्रिकेट टीम वहां दौरे पर जा रही है। चन्द चुनिंदा खिलाड़ियों के आईपीएल में खेलने से आईपीएल और दिलचस्प बनेगा। मुझे याद है कि एक साल तो सुहेल तनवीर पूरे टूर्नामेंट में छाये रहे। शाहिद अफरीदी, शोएब मलिक, रावलपिंडी एक्सप्रेस शोएब अख्तर सभी ने आईपीएल की पहले शोभा बढ़ाई है। चैंपियंस लीग ट्वंटी-ट्वंटी पर बीसीसीआई, क्रिकेट आस्ट्रेलिया और क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका का मालिकाना हक है। श्रीनिवासन ने कहा कि हम संचालन परिषद को सिफारिश करेंगे कि बीसीसीआई को कोई आपत्ति नहीं है और वह चैंपियन लीग में पाकिस्तान से टीम आमंत्रित करने को तैयार है। अब संचालन समिति फैसला करेगी और अगर वह राजी हुई तो वही पाकिस्तानी टीम को इनवाइट करेगी। हम बीसीसीआई के इस फैसले का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही हम चैंपियंस लीग के साथ-साथ अगले आईपीएल में पाक क्रिकेट सितारों को भाग लेते देखेंगे।
Anil Narendra, BCCI, Daily Pratap, IPL, Pakistan, Vir Arjun

Sunday, 6 May 2012

आईपीएल-5 के जलवे

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 6 May 2012
अनिल नरेन्द्र
कुछ खेल पेमियों को संदेह था कि आईपीएल-5 क्या वैसा ही होगा जैसा आईपीएल-4 था? क्योंकि इस बार आईपीएल को रूप देने वाले ललित मोदी नहीं होंगे पर मानना पड़ेगा कि ललित मोदी की कमी नहीं खली और आईपीएल-5 हर दृष्टि से हिट हो रहा है। सूत्रों के अनुसार पहले 16 दिनों में दिल्ली और मुंबई दोनों ही की सिर्प गेट कलैक्शन से ही 40-40 करोड़ से अधिक की कमाई हुई है। दिल्ली में 7, 15 और 17 मई को तीन और मैच होने हैं। इसमें भी 40 हजार से अधिक दर्शक पहुंचने की पेंचाइजी उम्मीद कर रहे हैं। अब आखिरी चार लाइन अप में पहुंचने के लिए हर मैच अधिक कांटेदार हो रहा है इसलिए भी अधिक रोमांच दर्शकों में बना हुआ है। दिल्ली ने जिस तरह राजस्थान रॉयल्स से आखिरी बाल पर जीत दर्ज की वह तो कमाल की ही थी। इस बार दिल्ली डेयर डेविल्स की टीम संतुलित लग रही है। चाहे वह बैटिंग हो, बालिंग हो या फील्डिंग सभी क्षेत्रों में वह बैलेंसड लग रही है। एक बात जो सामने आ रही है वह यह है कि अकेले बड़ा स्कोर खड़ा करने से काम नहीं चलता। आपकी बालिंग भी अच्छी होनी चाहिए और फील्डिंग भी। 200 से अधिक स्कोर भी चेस हो रहे हैं। दूसरी ओर बृहस्पतिवार को मुंबई और पुणे में बहुत कम स्कोर के बावजूद मुंबई आखिरी बाल पर जीत गई, तो यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि इस बार आईपीएल में बैटिंग से ज्यादा बालिंग और फील्डिंग भारी पड़ रही है। सचिन तेंदुलकर के राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने पर कुछ क्षेत्रों में आलोचना का जवाब देते हुए सचिन ने कहा कि वे खिलाड़ी हैं और हमेशा खिलाड़ी ही रहेंगे। सचिन ने कहा कि राज्यसभा में मनोनीत होना एक बड़ा सम्मान है और इससे उनकी जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। लेकिन यदि कोई कहता है कि यह मेरे किकेट कैरियर को खत्म कर देगा तो गलत है। मेरा सांसद के रूप में चयन इसलिए हुआ क्योंकि मैं 22 साल से किकेट खेल रह हूं। किकेट मेरी जिंदगी है और मैं इससे जी रहा हूं। अभी संयास का इरादा नहीं है। अपनी सबसे यादगार पारी वह विश्वकप 2003 में पाकिस्तान के खिलाफ 98 रन की बताते हैं। सचिन ने यह भी बताया कि वह हर महत्वपूर्ण मैच के लिए बहुत पहले से ही तैयारी करते हैं। 2003 में जॉन राइट ने कहा था कि मैं किकेट में महाशतक लगा सकता हूं। मैं सामाजिक क्षेत्र में भी अपना योगदान देता हूं। मैं 400 गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाता हूं। हर व्यक्ति अपनी हैसियत के अनुसार समाजसेवा करना चाहता है। दूसरे की सहायता करने का सुख असीम होता है। इस धर्म को सभी लोगों को निभाना चाहिए। विश्वकप 2011 की जीत पर सचिन ने कहा कि वानखेड़ा स्टेडियम के बाहर खड़ी मेरी गाड़ी पर चढ़कर पशंसक जश्न मना रहे थे। ड्राइवर ने मुझे बताया, तो मैंने उससे कहा कि कार में खरोंच लगने की परवाह मत करो। वर्ल्डकप की जीत ने पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया है। यह मेरे जीवन का महानतम दिन है। ईश्वर से पार्थना करता हूं कि वे सही निर्णय लेने के लिए हमेशा मेरा मार्ग दर्शन करते रहें। आईपीएल-5 में इस बार सभी स्टेडियमों में टिकट अधिक रखी गई है और परसों की संख्या पिछले साल की तुलना में कम है। तभी तो विभिन्न स्टेडियमों के अंदर इस बार एक मिलियन यानी 10 लाख दर्शक मौजूद हैं।
Anil Narendra, Daily Pratap, IPL, Vir Arjun

Friday, 23 September 2011

टी-20 की घटती लोकप्रियता को रोकने के लिए सचिन के सुझाव


Published on 23rd September 2011
अनिल नरेन्द्र
मेरा क्रिकेट से थोड़ा मन खट्टा हो गया है। टीम इंडिया के इंग्लैंड दौरे ने कम से कम मेरा तो क्रिकेट के प्रति थोड़ा मोहभंग जरूर किया है। हार-जीत तो खेल का हिस्सा होता है पर जिस तरीके से टीम इंडिया ने इंग्लैंड दौरे में प्रदर्शन किया वह निराशाजनक और शर्मनाक था। एक भी मैच में वह टक्कर देते नजर नहीं आए। यह खिलाड़ी केवल पैसों के लिए खेलते हैं, देश के झंडे या सम्मान के लिए नहीं और पैसा इनको इतना मिल गया है कि इनके पांव जमीन पर ही नहीं टिक रहे। सच बताऊं तो मैं अब हॉकी या फुटबाल का मैच देखना ज्यादा पसंद कर रहा हूं। आजकल चैंपियन लीग 20-20 मुकाबला चल रहा है पर मेरा उसे देखने को भी दिल नहीं करता। विश्व चैंपियन बनने के मात्र पांच महीने बाद टीम इंडिया का ऐसा हश्र होगा, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। इंग्लैंड दौरे में महेन्द्र सिंह धोनी और उनके धुरंधरों का गर्व चकनाचूर हो गया। पहुंची तो इंग्लैंड विश्व की नम्बर वन टेस्ट टीम और विश्व चैंपियन का रुतबा लेकर थी जब दौरा समाप्त हुआ तो भारत टेस्ट रैंकिंग में तीसरे और वन डे रैंकिंग में पांचवें स्थान पर गिर चुकी थी। यह एक ऐसा शर्मनाक प्रदर्शन था जो पिछले एक दशक से अधिक समय में किसी विदेशी दौरे में सुनने में नहीं आया हो। 
बहरहाल भारत के महान क्रिकेट सपूत सचिन तेंदुलकर ने वन डे क्रिकेट की घटती लोकप्रियता को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को एक पत्र लिखकर क्रिकेट के इस फार्मेट की लोकप्रियता वापस हासिल करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। वन डे क्रिकेट के बादशाह सचिन ने इस क्रम में आईसीसी के मुख्य अधिकारी हारुन लोगार्ट को सुझाव दिया है कि 50-50 ओवरों के मैच को 25-25 ओवरों की चार पारियों वाले मैच में परिवर्तित कर दिया जाए। वन डे और टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकार्ड अपने नाम रखने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर पहले भी वन डे में बदलाव की बात उठाते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने हर पारी में ओरों की संख्या घटाने के अलावा कई और परिवर्तन सुझाए हैं। सचिन ने कहा है कि 25 ओवर की चार पारियों से मैच में संतुलन आएगा और पहले टास जीतने वाली टीम का एडवांटेज खत्म हो जाएगा। मैच में पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम की ओर से ही दो पॉवर प्ले होने चाहिए, लेकिन इसके साथ चार गेंदबाजों को 12-12 ओवर फेंकने की अनुमति होनी चाहिए। मौजूदा नियमों में एक गेंदबाज 10 ओवर फेंक सकता है। सचिन का मानना है कि पिच और मौसम की परिस्थितियों में टास की भूमिका मायने रखती है और सिक्के की उछाल से ही मैच का कुछ हद तक फैसला हो जाता है। गौरतलब है कि ब्रिटेन में जिलेट कप में दो बंटी हुई पार्टियों का प्रस्ताव दिया गया था जबकि आस्ट्रेलिया में इंटरस्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में 45 ओवरों के मैचों को 20-20 ओवर और 25-25 ओवरों में बांटा गया था। क्रिकेट आस्ट्रेलिया के अनुसार यह फार्मेट काफी सफल रहा था। भारत में सभी क्रिकेट कामेंटेटर हैं। आप सब का सचिन के सुझावों पर क्या राय है? मेरे ख्याल में सुझावों पर गौर करना चाहिए। हर सुझाव में दो पहलु होते हैं। ऐसे भी क्रिकेट प्रेमी होंगे जो सचिन के सुझाव से सहमत न हों।
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Wednesday, 1 June 2011

आईपीएल की वजह से छिड़ी क्लब बनाम देश बहस


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 1st June 2011
अनिल नरेन्द्र
आईपीएल ने किकेट का रूप ही बदल दिया है। इसका इतना मनोरंजन फारमेट बना दिया है कि सारी दुनिया में यह जितना, लोकपिय हुआ है शायद ही कोई और खेल इतनी रफ्तार से फैला हो। इस फारमेट में सभी कुछ है, खेल, मनोरंजन, ग्लैमर और पैसा। इसने तो खिलाड़ियों की मानसिकता तक बदल दी है। एक नया विवाद शुरू हो गया है, क्लब बनाम देश। अब कई खिलाड़ी आईपीएल खेलना ज्यादा पसंद करते हैं बनिस्पत अपने देश के लिए। यह एक कटु सत्य है। पिछले दिनों हमने देखा कि किस तरह 27 साल की उम्र में श्रीलंकाई तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा ने घोषणा कर दी कि वह अब टेस्ट मैचों से संन्यास ले रहे हैं। वे केवल वनडे और टी-20 में खेलेंगे। टेस्ट से हटने का कारण उन्होंने दाएं घुटने की चोट को बताया, लेकिन यह समझा जा रहा है कि आईपीएल को महत्व देते हुए उन्होंने अपने देश के लिए खेलने से मनाकर दिया। इससे पहले वेस्टइंडीज के किस गेल ने भी इंडीज बोर्ड को पाकिस्तान के खिलाफ जारी वन डे सीरीज खेलने से मना कर दिया और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का रुख किया तथा अपने दमदार पदर्शन करके आईपीएल के गोल्डन प्लेयर का खिताब जीता। गेल ने कहा कि उन्हें मलाल है कि उन्हें अपने देश से पर्याप्त प्यार और सम्मान नहीं मिला। गेल ने कहा कि उन्हें टी-20 पतियोगिता में जो प्यार व सम्मान मिला, वह स्वदेश में उनसे दूर रहा। असल कारण है पैसा, आईपीएल में इतना पैसा आ गया है कि खिलाड़ी अब अपने देश की बजाय आईपीएल में खेलना पसंद करने लगे हैं।
आईपीएल के दौरान `क्लब बनाम देश पर शुरू हुई बहस में पूर्व कप्तान कपिल देव और सुनील गावस्कर आमने-सामने आ गए हैं। पूर्व आल राउंडर कपिल का मानना है कि इस संबंध में अंतिम फैसला करने का हक खिलाड़ी को होना चाहिए, क्योंकि वह अपने बारे में निर्णय करने के लिए स्वतंत्र है। वहीं सुनील गावस्कर कहते हैं कि भले ही खिलाड़ियों का हक हो, लेकिन यदि कोई खिलाड़ी देश पर क्लब को तरजीह देता है, तो उसे भविष्य में भी राष्ट्रीय टीम में नहीं चुनना चाहिए। अगर खिलाड़ी को चुनाव करने का हक है तो हमें भी यह अधिकार है कि टीम चयन में उसके नाम पर विचार न करें। दूसरी ओर 1983 विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव का कहना है कि कोई व्यक्ति देश के लिए खेलना चाहता है तो यह तय करने का उसे अधिकार होना चाहिए। मुझे अपने देश के लिए खेलना पसंद था और मैं खेला भी। लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। आप इन दिनों किसी के जीवन को नियमित नहीं कर सकते। कोई भी व्यक्ति जो करना चाहता है, उसे वह करने की आजादी होनी चाहिए।
क्लब बनाम देश की बहस लसिथ मलिंगा के टेस्ट से संन्यास लेने के साथ शुरू हुई लेकिन इसने जोर पकड़ा गौतम गंभीर की चोट के बाद। दरअसल गंभीर, सहवाग, सचिन, धोनी और जहीर ने आईपीएल में लगभग सभी मैच खेले। लेकिन अगले महीने जब राष्ट्रीय टीम वेस्टइंडीज दौरे पर जाएगी, तब ये आराम करेंगे। धोनी, जहीर टेस्ट खेलने जाएंगे। पूर्व किकेटरों से लेकर किकेट पमियों में तब से यह बहस जारी है कि आराम का सही समय क्या है?
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Sunday, 24 April 2011

श्रीलंकाई खिलाड़ियों को वापस बुलाना हर लिहाज से गलत फैसला है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 24 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

आईपीएल-4 में हिस्सा ले रहे श्रीलंकाई खिलाड़ियों की वतन वापसी को लेकर बीसीसीआई और श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड (एसएलसी) के बीच चल रही खींचतान कुछ हद तक बृहस्पतिवार को खत्म हो गई। विश्व क्रिकेट के पॉवर हाउस बीसीसीआई के आगे झुकते हुए एसएलसी ने अपने स्टार खिलाड़ियों की वापसी की समय  सीमा 5 मई से बढ़ाकर 18 मई कर दी। इससे पहले एसएलसी ने अपने खिलाड़ियों को आगामी इंग्लैंड दौरे के तहत पांच मई तक स्वदेश लौटने के निर्देश दिए थे। श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड के इस फैसले का बीसीसीआई ने कई स्तरों पर विरोध किया था। नैतिकता के तकाजे पर भी यह गलत था और कानूनी दृष्टि से भी। फिर जो करार आईपीएल फ्रेंचाइजियों ने खिलाड़ियों से किया था उसका भी यह उल्लंघन था। जब आईपीएल-4 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी हुई थी तो कोच्चि टस्कर्स केरल ने महेला जयवर्द्धने के लिए 1.5 मिलियन डालर फीस दी थी। एंजेला मैथ्यूस के लिए पुणे वारियर्स ने 9,50,000 डालर दिए। कुमार संगकारा की 7,00,000 डालर की बोली डेक्कन चार्जर्स ने लगाई। तिलकरत्ने दिलशान के लिए रॉयल चैलेंजर्स ने 6,50,000 डालर दिए। मुंबई इंडियंस ने लसिथ मलिंगा के लिए 5 लाख डालर दिए। कुलशेखरा  को चेन्नई सुपर किंग्ज ने एक लाख डालर में खरीदा। सूरज रणदीव-चेन्नई सुपर किंग्स ने 80,000 डालर में, परेरा को कोच्चि टस्कर्स ने 80,000 डालर और नुवान पारादीप को रॉयल चैलेंजर्स ने 20,000 डालर में खरीदा। बीसीसीआई और एसएलसी में यह फैसला हुआ था कि श्रीलंकाई खिलाड़ी 22 मई तक आईपीएल खेलेंगे। नीलामी की शर्तों में यह तय है कि खिलाड़ियों को फीस तभी दी जाएगी जब वह पूरा सीजन फिट रहेंगे और मैच खेलेंगे। बीसीसीआई ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को यहां तक धमकी दे दी थी कि उसे जो खिलाड़ियों की नीलामी की पूरी कीमत में 10 प्रतिशत मिलना चाहिए वह रोक लिया जाएगा। खबर यह भी है कि बीसीसीआई ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को आईपीएल में खेल रहे श्रीलंकाई खिलाड़ियों की मैच फीस का 10 प्रतिशत हिस्सा (दो करोड़ रुपये) न देने की धमकी भी दी थी।
विश्व कप से ठीक पहले तक भारत-श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के रिश्ते ठीक थे, फिर अचानक सब कुछ बदल गया। आखिर ऐसा क्यों हुआ? विश्व कप फाइनल में श्रीलंका टीम इंडिया से हार के कारण बौखला गई। फिर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि बीसीसीआई ने फाइनल मैच के लिए आए कुछ श्रीलंकाई मंत्रियों से अच्छा व्यवहार नहीं किया और उन्हें टिकटें ब्लैक में खरीदनी पड़ीं। यह भी कहा जा रहा है कि पर्दे के पीछे का खेल पाकिस्तान खेल रहा था। पाक बोर्ड कई कारणों से बीसीसीआई से चोट खाए बैठा है। पहले तो उसे वर्ल्ड कप के आयोजन से किनारे किया। फिर आईपीएल से उसके क्रिकेटरों को हटा दिया। वह लम्बे समय से यूएई में बड़े कारपोरेट्स से आईपीएल के समानांतर लीग कराने की बात कर रहा था, उसे एक या दो देशों का साथ चाहिए था। उसे यह भी शिकायत है कि दुनिया में सबसे अमीर बीसीसीआई खुद तो बहुत कमाता है यह दूसरे बोर्डों को कुछ नहीं देता। इसलिए वह अपनी खुंदक श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को भारत के खिलाफ खड़ा करके निकाल रहा है। हालांकि मलिंगा चोटिल है और इंग्लैंड के दौरे के लिए नहीं चुने गए पर फिर भी उन्हें वापस बुला लिया गया है। आईपीएल-4 में कुल 11 श्रीलंकाई खिलाड़ी हैं।

Sunday, 17 April 2011

...और अब शरद पवार 2जी स्पेक्ट्रम में भी शामिल

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 17 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र
केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का नाम बस अब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से जुड़ना बाकी रह गया था। कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया ने सीबीआई को दिए बयान में यह काम भी पूरा कर दिया है। कभी आईपीएल गेट तो कभी लवासा तो कभी हसन अली मामले के चलते विवादों में रहे पवार का नाम 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फायदा उठाने वाली डीबी रियल्टी की स्वान टेलीकॉम से भी जुड़ गया है। कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया ने सीबीआई के सामने दिए बयान में स्वान टेलीकॉम में पवार का नियंत्रण होने की सम्भावना जताई है। डीबी रियल्टी की कम्पनी स्वान टेलीकॉम 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले  में अनुचित तरीके से फायदा उठाने की आरोपी है। राडिया ने सीबीआई पूछताछ में कबूला है कि स्वान टेलीकॉम को लाइसेंस दिलाने के लिए पवार ने तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा से सिफारिश की थी। इसी कड़ी में राडिया ने दागी स्वान टेलीकॉम में पवार की हिस्सेदारी होने की सम्भावना भी जताई है। राडिया का यह बयान सीबीआई के आरोप पत्र का हिस्सा है। इसमें राडिया ने कहा है कि मुंबई में लोगों की ऐसी धारणा है, लेकिन दस्तावेजी सबूत नहीं हैं। यह पहली बार नहीं है कि शरद पवार का नाम किसी विवाद से जुड़ा है। चाहे वह आईपीएल, लवासा, आदर्श सोसायटी घोटाला हो या फिर चीनी घोटाले से लेकर वायदा बाजार को फायदा पहुंचाने जैसे विवाद, सबमें उनका नाम जरूर आया। वहीं पवार ने डीबी रियल्टी पर स्वान टेलीकॉम में किसी भी तरह की भागीदारी से इंकार किया है। डीबी रियल्टी के मालिक विनोद गोयनका से 35 साल पुराने रिश्तों की बात तो उन्होंने स्वीकारी है और कहा कि उन्होंने 20 साल पहले बारामती (पवार के गृह क्षेत्र) में दुग्ध प्रसंस्करण इकाई स्थापित की थी। बकौल पवार `हम सभी किसान उन्हें अच्छी गुणवत्ता का दूध निकालने में मदद करते हैं। हमारे रिश्ते हैं और इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन टेलीकॉम कम्पनी में मेरी भागीदारी या जुड़ाव कतई नहीं है।'
बेशक पवार यह कहें कि उनका 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन यह पूरा सच नहीं है। पवार की बेटी सुप्रिया सुले और उनके पति सदानन्द की पुणे के पंचशील रियल्टी के पंचशील टेक पार्प वन प्रोजैक्ट में चार प्रतिशत की हिस्सेदारी है जिसके सीधे-सीधे संबंध डीबी रियल्टी से हैं। शाहिद बलवा की डीबी रियल्टी और पंचशील रियल्टी में सीधा संबंध पुणे के यरवदा की 15 हजार करोड़ रुपये की करीब 19 एकड़ जमीन के विकास से जुड़ी है। पुणे म्युनिसिपल कारपोरेशन (पीएमसी) और जिला कलेक्टर कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों के अनुसार पंचशील टेक पार्प वन आईटी प्रोजैक्ट और डीबी रियल्टी (हिसलाइड कंस्ट्रक्शन प्रा. लि.) के द ग्रांड हमार फाइव स्टार होटल प्रोजैक्ट की जमीन के सर्वे क्रमांक 191(ए) के दो हिस्सा नम्बरों में नहीं बांटा गया है। जमीन के बंटवारे के साथ ही मुख्य सर्वे नम्बर में जमीन के टुकड़ों को अलग-अलग हिस्सा नम्बर अवंटित किए जाते हैं। अलग-अलग हिस्सा नम्बर लिए बिना यदि दो कम्पनियां काम कर रही हैं तो टाउन प्लानर्स के मुताबिक उनमें आपसी सहमति या भागीदारी निश्चित है।
शरद पवार इतने बदनाम हो चुके हैं कि वह किस-किस मामले में सफाई देंगे? पर सवाल यह उठता है कि इस सबके बावजूद उन पर कोई हाथ डालने का साहस क्यों नहीं करता? कांग्रेस तो गठबंधन धर्म निभाने का बहाना लेकर साइड कर लेती है और सरकार के वह खुद हिस्सा हैं। अन्ना हजारे ने यूं ही शरद पवार को नहीं चुना।