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Thursday, 13 October 2011

मारन का नंबर आ गया है पर रतन टाटा अभी भी बचे हुए हैं

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 13th October 2011
अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में करुणानिधि एंड कंपनी का एक विकेट डाउन होने वाला है। ए. राजा, कनिमोझी के बाद पूर्व मंत्री दयानिधि मारन का नंबर है। दयानिधि मारन पर सीबीआई का फंदा कसा जा चुका है। इस मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करा दी है। सीबीआई की एफआईआर में दयानिधि मारन के साथ उनके भाई कलानिधि मारन, मलेशिया के मैक्सिस ग्रुप के चेयरमैन टी आनंद कृष्णन व निदेशक रॉल्फ मार्शल समेत तीन कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। रविवार को एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी ने सोमवार को मारन के दिल्ली और चेन्नई स्थित आवास व दफ्तरों पर छापा मारा। एफआईआर के अनुसार संचार मंत्री रहते हुए दयानिधि मारन ने अनिवासी भारतीय उद्योगपति एस शिवशंकरन पर एयरसेल को बेचने के लिए दबाव डाला। एयरसेल स्पेक्ट्रम आवंटन को मारन ने लगभग दो साल तक लटकाए रखा और स्पेक्ट्रम तभी दिया गया जब शिवशंकरन ने एयरसेल को मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ग्रुप को बेच दिया। यही नहीं 14 सर्पिल में एक साथ स्पेक्ट्रम मामले के बाद मैक्सिस ग्रुप की सहयोगी कंपनी एस्ट्रो ने मारन परिवार की कंपनी सन डायरेक्ट में लगभग 600 करोड़ रुपए का निवेश किया। आरोप है कि एस्ट्रो ने सन डायरेक्ट के शेयर को बाजार भाव से अधिक कीमत पर खरीद कर परोक्ष रूप से मारन को रिश्वत दी।
2जी स्पेक्ट्रम में घोटाले की जांच अभी चल ही रही है। जनसंपर्प एजेंसी चलाने वाली नीरा राडिया और उनके कानटेक्ट्स की जांच अभी भी अधूरी चल रही है। नीरा राडिया के टेप जब जनता के सामने उजागर हुए तब पूरे देश को यह जानकर गहरा धक्का लगा कि जो मंत्री सरकार चलाते हैं और जनता जिन्हें समझती है कि इन्हें देश के पधानमंत्री चुनते हैं वह मंत्री पधानमंत्री द्वारा न चुने जाकर देश के पमुख औद्योगिक घराने द्वारा बनाए जाते हैं और यह घराने अपने पसंदीदा नेताओं को मंत्री बनवाने के लिए किस तरह से और किस स्तर तक जाकर लाबिंग करते हैं, यह नीरा राडिया मामले के बाद सामने आया। नीरा पकरण में देश के पमुख औद्योगिक घराने टाटा का नाम सामने आया कि राडिया टाटा घराने के लिए काम करती है और उनके राजनैतिक तथा व्यापारिक हितों का कितना ध्यान रखती है। लेकिन यह खुलासा सिर्प एक सिरा था। राडिया टेप मामले का दूसरा सिरा 2जी स्पेक्ट्रम महाघोटाले से जाकर जुड़ गया। इस महाघोटाले में टाटा की भूमिका पर कैग ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है। राडिया पकरण में होना तो यह चाहिए था कि सरकार यह सुनिश्चित करती कि भविष्य में अब ऐसा संदर्भ न जाए कि सरकार किसी भी औद्योगिक घराने से पभावित है। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ है। 2जी घोटाले की जांच से जिस पकार से रतन टाटा को बाहर किया जा रहा है वह निश्चित ही देश की जनता के सामने सरकार और औद्योगिक घराने की दुरभिसंधि का दूसरा झटका है। यूपीए सरकार के लिए 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला किसी दलदल से कम साबित नहीं हो रहा है। सरकार इससे निकालने के लिए भले ही जितने पयास करती है उतना ही इसमें धंसती चली जा रही है। इस घोटाले में रोज ही नए-नए नाम सामने आ रहे हैं। मारन बंधुओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इसी पकार एस्सार ग्रुप के रुइया बंधुओं को भी सीबीआई जल्द लपेटने वाली है। एस्सार से पूर्व रिलायंस, यूनीटेक, स्वान और वीडियोकॉन जैसी कंपनियों के बड़े अधिकारी तिहाड़ में पहुंच चुके हैं। हाल ही में वित्त मंत्रालय द्वारा पधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई चिट्ठी से गृहमंत्री पी. चिदंबरम का नाम भी सामने आया है। हालांकि इस घोटाले के सूत्रधार ए राजा पहले भी इस तरफ कई बार इशारा कर चुके थे लेकिन राजा के आरोप की बदले की भावना के तहत लगाया गया आरोप माना गया। लेकिन इस महाघोटाले के पकरण में सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि टाटा की भूमिका उन सभी औद्योगिक घराने से ज्यादा व्यापक और स्पष्ट है पर अभी तक कोई जांच या आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया? टाटा पर इस घोटाले में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का न सिर्प आरोप है बल्कि काफी पुख्ता सबूत भी है। लेकिन रतन टाटा का सरकार से विपक्ष तक में कितना पभाव है यह इसी से साफ है कि टाटा घराना इस महाघोटाले की जांच के दायरे से लगभग बाहर है। इस महाघोटाले में टाटा की भूमिका पर सबसे पहले उंगली कैग ने उठाई। कैग ने अपनी रिपोर्ट में टाटा टेलीसर्विसिज की वजह से सरकारी राजस्व को 19.074 करोड़ रुपए का नुकमसान होने का दावा किया है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में टाटा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की है। टाटा की इस महाघोटाले में भूमिका जगजाहिर है कि ए राजा को दूरसंचार मंत्री बनवाने के लिए टाटा ने नीरा राडिया के माध्यम से किस पकार लाबिंग की। पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन ने रतन टाटा से संबंध मधुर नहीं थे और यूपीए के पथम कार्यकाल में टाटा को मारन का सहयोग नहीं मिला था। अत रतन टाटा नहीं चाहते थे कि दयानिधि मारन फिर से दूरसंचार मंत्री बनें। लेकिन सच तो यह है कि टाटा ने सिर्प लाबिंग ही नहीं की बल्कि एक तरीके से घूस के तौर पर डीएमके पमुख करुणानिधि को चेन्नई में करोड़ों की जमीन उपहार में दी और बाद में उस जमीन पर भवन का निर्माण भी करवाया। इसी सब का पभाव था कि ए राजा के मंत्री रहते रतन टाटा को 2जी लाइसेंस देने के लिए मंत्रालय ने किसी भी नियम की परवाह नहीं की। हमारा मानना है कि रतन टाटा की विस्तार से जांच होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो यह जांच और घोटाले का पूरा पर्दाफाश नहीं होगा। नीरा राडिया के टेपों की पता नहीं क्यों जांच और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही?
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Saturday, 9 July 2011

द्रमुक की तीसरी भ्रष्ट विकेट डाउन, मारन का इस्तीफा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 9th July 2011
अनिल नरेन्द्र
कुछ यूपीए घटक दलों ने मनमोहन सिंह सरकार का साथ-समर्थन इसलिए किया था कि वह देश को लूट सकें। उनका एकमात्र मकसद पैसा कमाना था और है। इनमें प्रमुख है द्रमुक। हालांकि एनसीपी भी इसी श्रेणी में आती है पर फिलहाल द्रमुक का नम्बर लगा है। 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन घोटाले में डीएमके को अंतत तीसरा विकेट गंवाना पड़ा। केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का मामला जेल में बन्द चल रहे ए. राजा और डीएमके सांसद व करुणानिधि की सुपुत्री कनिमोझी से भी एक कदम आगे हैं। दयानिधि मारन ने यूपीए में केंद्रीय संचार मंत्री रहते कमाल ही कर दिया। सीबीआई ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए बयान दिया कि मारन ने एयरसेल कम्पनी की हिस्सेदारी मलेशियाई कम्पनी मैक्सिस को बिकवाई। फिर उसे लाइसेंस देकर बदले में 675 करोड़ रुपये का निवेश अपने सन टीवी में करवाया। सीबीआई के वकील केके वेणुगोपाल ने जस्टिस जीएस सिंघवी और एके गांगुली की बैंच को बताया कि 2006 में टेलीकॉम मंत्री रहते मारन ने चेन्नई की कम्पनी एयरसेल का लाइसेंस आवेदन जानबूझ कर लम्बित रखा। उसे अपनी हिस्सेदारी मलेशियाई कम्पनी मैक्सिस को बेचने के लिए मजबूर किया। मैक्सिस-एयरसेल को लाइसेंस देते हुए बदले में अपनी डीटीएम कम्पनी सन टीवी के लिए बड़ा निवेश हासिल किया। मारन का फॉर्मूला सिम्पल था, इस हाथ लो, उस हाथ दो। मैक्सिस केटी आनन्द कृष्णन मारन के रिश्तेदार हैं। इसीलिए मारन ने उनके जरिये यह फायदा का सौदा किया। देखिए यह खेल मारन ने कैसे खेला ः दबाव बनाने के लिए पहले तो मारन ने एयरसेल के 2जी स्पैक्ट्रम लाइसेंस आवेदन को दो साल तक रोके रखा। फिर 2006 में एयरसेल को अपनी हिस्सेदारी मैक्सिस को बेचने के लिए मजबूर किया। बदले में मैक्सिस ने अपनी एक सहयोगी कम्पनी के जरिये मारन की सन टीवी में 675 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके एवज में एयरसेल की 74 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर मैक्सिस को 23 सर्पिल के लाइसेंस दे दिए। कनिमोझी तो कुल 200 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल थी, दयानिधि मारन ने तो 675 करोड़ रुपये का सीधा घपला किया है।
यह दूसरा मौका है जब मारन को मंत्री पद छोड़ना पड़ा है। इससे पहले उन्हें 2007 में पद तब छोड़ना पड़ा था जब करुणानिधि परिवार में आंतरिक मतभेद का वह शिकार हुए थे। चेन्नई मध्य से लोकसभा के सदस्य मारन आम चुनावों के बाद मई 2009 में फिर से कैबिनेट में शामिल हुए। लेकिन इस बार उन्हें दूरसंचार मंत्रालय नहीं मिला जैसा वह चाहते थे बल्कि उन्हें कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। कांग्रेस ने गुरुवार को जहां दयानिधि मारन के इस्तीफे पर टिप्पणी करने से मना कर दिया वहीं यह भी कहा कि द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) पार्टी के साथ उसका गठबंधन जारी रहेगा। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि जमीनी हकीकत की तरजीह पर राजनीतिक गठबंधन आधारित होता है। हमारा गठबंधन डीएमके के साथ वर्ष 2004 से है और इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं है।
क्या इसे महज इत्तिफाक माना जाए कि मनमोहन सरकार से उन तमाम भ्रष्ट मंत्रियों का सफाया सुप्रीम कोर्ट के कहने पर हो रहा है या यह सब किसी तयशुदा रणनीति के तहत हो रहा है? द्रमुक के बाद अब अगला नम्बर एनसीपी के भ्रष्ट मंत्रियों का होना चाहिए।
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Thursday, 9 June 2011

दयानिधि मारन से कन्नी काटी प्रधानमंत्री व कांग्रेस ने

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 9th June 2011
अनिल नरेन्द्र
दयानिधि मारन बुरी तरह से फंसते जा रहे हैं। जैसे डीएमके के अन्य मंत्रियों व नेताओं ने यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा करवाया ठीक उसी तरह मारन ने अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए एक नया सिरदर्द खड़ा कर दिया है। मनमोहन सिंह पहले से ही ए. राजा, कनिमोझी विवाद को लेकर कटघरे में खड़े हैं अब दयानिधि ने उनकी फजीहत बढ़ा दी है। 2004 से 2007 तक हुए स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर यूपीए पहले ही अंगुलियां जला बैठी है, क्योंकि ए. राजा और सुरेश कलमाड़ी को बचाने का अंजाम वह देख चुकी है। अब शायद ही प्रधानमंत्री दयानिधि मारन को बचाने की कोशिश करें। दयानिधि के खिलाफ गम्भीर आरोप हैं। अनिवासी भारतीय एस. शिवशंकरन को उनकी कम्पनी एयरसेल को बेचने के लिए मजबूर करने के आरोपी केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का जाना अब लगभग तय-सा लगता है। मारन के खिलाफ आरोपों और संबंधित सुबूतों के बारे में सीबीआई ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को विस्तृत रिपोर्ट दे दी है। शिवशंकरन ने सोमवार को सीबीआई को बताया था कि किस तरह दूरसंचार मंत्री रहते हुए उन्हें एयरसेल बेचने के लिए दयानिधि मारन ने मजबूर किया था। एयरसेल मामले में दयानिधि मारन की भूमिका पर प्रधानमंत्री को विस्तृत रिपोर्ट देने की पुष्टि करते हुए सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कपड़ा मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप काफी गम्भीर हैं और उनकी पूरी जांच की जरूरत है। शिवशंकरन ने जांच एजेंसी को उन लोगों के नाम-पते दिए हैं, जो मारन की ज्यादतियों के चश्मदीद गवाह हैं। मारन इन्हीं लोगों के माध्यम से शिवशंकरन पर एयरसेल को बेचने के लिए दबाव बना रहे थे। इनमें एयरसेल से जुड़े वकील और चार्टर्ड एकाउंटेंट शामिल हैं। शिवशंकरन का कहना था कि दूरसंचार मंत्री रहते हुए मारन ने उनके वाणिज्यिक साम्राज्य को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और उन्हें देश से भागने पर मजबूर कर दिया।

आज की तारीख में भ्रष्टाचार का मुद्दा घर-घर तक चर्चा का विषय बना हुआ है। तभी तो भ्रष्टाचार और काले धन को लेकर आज के सूरत-ए-हाल में लोकायुक्त गठन की जरूरत महसूस की जा रही है। यही कारण है कि कांग्रेस नेतृत्व आज दयानिधि मारन से फासले बढ़ा रहा है और सरकार या कांग्रेस शायद ही उन्हें अब बचा पाए। दयानिधि मारन को संकेत दे भी दिए गए हैं। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी से उनकी मुलाकात के दौरान उन्हें संकेत दे दिए गए हैं। प्रधानमंत्री पहले ही सीबीआई से कह चुके हैं कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले मामले में सभी आरोपों की जांच की जाए जिनमें मारन के विरुद्ध आरोप भी शामिल हैं। इन आरोपों पर सीबीआई जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंच चुकी है। देखना अब यह है कि द्रमुक प्रमुख करुणानिधि का अब क्या रुख होता है। दो दिन पहले करुणानिधि ने प्रधानमंत्री को कनिमोझी की गिरफ्तारी के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया था। अब अगर दयानिधि मारन हिरासत में लिए जाते हैं तो करुणानिधि क्या करेंगे? क्या वह यूपीए सरकार से अपने मंत्रियों को हटाने का आदेश देते हैं? समर्थन वापसी की तो वह पहले ही घोषणा कर चुके हैं।
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Tuesday, 7 June 2011

जयललिता का मारन बंधुओं व करुणानिधि को पहला तोहफा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 7th June 2011
अनिल नरेन्द्र

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने सत्ता संभालते ही एम. करुणानिधि और उनके कुनबे को तोहफा दे दिया है। जया सरकार ने शुकवार को अपने पतिद्वंद्वी करुणानिधि के जन्मदिन पर उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को बंद कर दिया। ये परियोजनाएं आवास एवं बीमा क्षेत्रों से जुड़ी थी। इसके साथ ही सरकार ने यहां बन रहे विधानसभा और मंत्रालय काम्पलैक्स के निर्माण के घोटालों के आरोप लगाते हुए उसकी जांच कराने की घोषणा की है। बात यहीं खत्म नहीं हुई। द्रमुक से जुड़े मारन बंधुओं पर निशाना साधते हुए जया सरकार ने राज्य के करोड़ों रुपए के केबल व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण करने की घोषणा कर दी है। विधानसभा के नए सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला ने ये घोषणाएं शुकवार को की।
मारन साम्राज्य का सूरज कभी डूब नहीं सकता' कुछ इस पकार की बातें कारोबारी जगत के आला अधिकारी, कलानिधि मारन और उनके छोटे भाई मौजूदा कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन के स्वामित्व वाले सन ग्रुप के बारे में कहते रहे हैं। लेकिन बीते तीन दिनों के घटनाकम इस बात के संकेत कर रहे हैं कि मारन बंधुओं के लिए संध्याकाल का समय करीब-करीब आ चुका है। अमेरिकी बिजनेस मैगजीन ने हाल ही में मारन बंधुओं की सम्पत्ति 4 अरब डॉलर करीब 179 अरब रुपए आंकी थी। जिन लोगों ने `सन ग्रुप' का विस्तार देखा है वे इसके विकास को आश्चर्यजनक मानते हैं। लेखक व राजनीतिक विश्लेषक जो रामास्वामी कहते हैं कि मारन बंधुओं की यह तरक्की उनके राजनीतिक संरक्षण और पभाव के कारण ही रही है। उनके लिए राजनीति ने कारोबारी दुनिया में पवेश के लिए लांच पैड का काम किया। दरअसल करुणानिधि एंड परिवार ने जितना आर्थिक लाभ राजनीति से उठाया है उतने परिवार कम ही देखने को मिलेंगे।
तमिलनाडु में केबल टीवी नेटवर्प का बाजार 1400 से 1500 करोड़ रुपए का है। इसमें मारन बंधुओं के स्वामित्व वाले `सुमंगली केबल विजन' की 65 फीसदी हिस्सेदारी 950 से 1000 करोड़ रुपए के बीच है। दयानिधि ने संचार मंत्री रहते अपने पभाव का इस्तेमाल दक्षिण भारतीय भाषा वाले केबल टीवी चैनल ऑपरेटरों को लाइसेंस देने में देरी की। वे नहीं चाहते थे कि `सन टीवी' का कोई पतिस्पर्धा खड़ा हो, इसलिए तमिलनाडु के कई टीवी चैनलों के लाइसेंस कई सालों तक लटकाए रखे। दयानिधि और कलानिधि मारन, पूर्व केन्द्राrय मंत्री व डीएमके के कद्दावर नेता रहे दिवंगत मुरासोली मारन के बेटे हैं और करुणानिधि के भांजे थे मुरासोली मारन। उनके छोटे भाई सेवलम का विवाह सेल्वी से हुआ है जो करुणानिधि-दयालु अम्माल की पुत्री हैं। 1990 में कलानिधि ने वीडियो मैगजीन `पुललाई' शुरू की थी। 1993 में दक्षिण भारत का पहला सैटलाइट चैनल सन टीवी शुरू किया। 1995 में उनकी कुल सम्पत्ति बढ़कर 45 करोड़ रुपए हो गई। सन गुप देश का सबसे बड़ा सैटलाइट टीवी नेटवर्प है। इसके तमिल, मलयालम, कनड़ और तेलगु भाषाओं में 20 चैनल हैं। वे तमिलनाडु के दूसरे बड़े अखबार `दिनाकरण' के अलावा एक दर्जन मैगजीन भी निकालते हैं।
उनके पास 45 रेडियो चैनल भी हैं। सन पिक्चर्स दक्षिण भारत का सबसे बड़ा मूवी पोडक्शन हाउस है। अब आप बताएं कि 1990 से लेकर 2011 तक यह 180 अरब रुपए के मालिक कैसे बन गए?
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Saturday, 4 June 2011

कनिमोझी, ए. राजा के बाद अब दयानिधि मारन का नंबर आ रहा है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th June 2011
अनिल नरेन्द्र
वर्षों तक श्रीराम को गाली देने वाले एम. करुणानिधि और उनके परिवार ने तमिलनाडु और केन्द्र में मुगलों की तरह सत्ता सुख भोगा है और इतना पैसा बनाया है कि जिसका हिसाब ही कोई नहीं। पर जब श्रीराम की मार पड़ती है तो अच्छे-अच्छे धुरंधर धाराशाह हो जाते हैं। करुणानिधि के परिवार का भी दुर्दिन आरम्भ हो गया है। पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के बाद सांसद बेटी कनिमोझी के भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने के बाद उनके परिवार का एक और सदस्य तथा केन्द्राrय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का अब नम्बर आ रहा है। दयानिधि मारन के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर पब्लिक लिटिगेशन ने सुपीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि मारन द्वारा मलेशिया के मैक्सिस समूह का पक्ष लिए जाने से संबंधित दस्तावेज उसे कोर्ट में पेश करने की अनुमति दी जाए। इस समूह ने मई 2004 से मई 2007 के बीच मारन के दूरसंचार मंत्री रहने के दौरान चेन्नई की टेलीकॉम कंपनी एयरसेल को खरीद लिया था। आरोप है कि दूरसंचार मंत्री रहते शिवा गुप की कंपनी एयरसेल को यूएएस लाइसेंस देने का मामला अटका दिया था। दूरसंचार मंत्रालय के रवैए से क्षुब्ध होकर इस कंपनी के मालिक सी. शिवाशंकर एयरसेल को मैक्सिस समूह को बेचने के लिए बाध्य हो गए थे। मैक्सिस समूह के मालिक मलेशिया के बिजनेस टाइकून टी. आनंद कृष्णन हैं। आरोप है कि मैक्सिस समूह के एयरसेल के बाद मारन परिवार नियंत्रित सन टीवी में भारी निवेश करते हुए उसकी 20 पतिशत हिस्सेदारी खरीद ली। मारन के कार्यकाल में एयरसेल को 14 लाइसेंस दिए गए।
उधर, 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने राष्ट्रीय दूरसंचार नीति में 2001 से हुई अनियमितताओं की पड़ताल के लिए पारंभिक जांच दर्ज की है। इससे ए. राजा के पहले रहे दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन भी जांच के घेरे में आ गए हैं। गौरतलब है कि तहलका पत्रिका ने इस मामले का खुलासा किया था। हालांकि मारन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए पत्रिका को कानूनी नोटिस भी भेजा है। सीबीआई के पवक्ता धारिणी मिश्रा ने कहा `सीबीआई ने 2001 से 2007 के बीच दूरसंचार नीति में हुई आपराधिक गड़बड़ियों के निर्धारण के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ यह जांच दर्ज की है। इसका लक्ष्य तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा पारित पहले आओ-पहले पाओ के पावधान का दूरसंचार नीति में पालन हुआ है या नहीं यह मालूम करना है।'
2006 में जब दयानिधि मारन दूरसंचार मंत्री थे, तब उन्होंने अपने परिवार के सन टीवी नेटवर्प को फायदा पहुंचाने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन में पद का दुरुपयोग किया था। दयानिधि मारन के कार्यकाल में दूरसंचार क्षेत्र में पत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी की गई थी। एयरसेल में 74 फीसदी शेयर धारक मैक्सिस ने अपनी कंपनी एस्ट्रो के जरिए मारन बंधुओं के सन टीवी नेटवर्प में 600 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया था। मारन ने दूरसंचार मंत्री रहते एयरसेल के लाइसेंस और स्पेक्ट्रम संबंधी आवेदनों को मंजूरी नहीं दी थी। इसके चलते एयरसेल के मालिक शिवाशंकर ने मारन परिवार के करीबी मैक्सिस को अपने 74 फीसदी शेयर बेच दिए थे। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि शिवाशंकर पर इस सौदे को लेकर भारी दबाव था।
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