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Sunday, 20 November 2011

नेताओं के दबाव के कारण जांच एजेंसियों की साख पर बट्टा


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 20th November 2011
अनिल नरेन्द्र
हमारी जांच एजेंसियों द्वारा विभिन्न केसों में की गई जांच अदालतों में ठहर नहीं पा रही है। इससे प्रश्न उठता है कि क्या राजनीतिज्ञ जांच एजेंसियों की केसों की जांच को प्रभावित करते हैं? राजनीतिक दबाव के चलते चाहे वह दिल्ली पुलिस हो, एनआईए हो या फिर सीबीआई ही क्यों न हो पिछले एक पखवाड़े में कम से कम चार ऐसे केस सामने आए हैं जिनमें अदालतों ने इन एजेंसियों को फटकार लगाई है और इनके जांच करने के तरीके और निष्कर्ष दोनों पर सवाल उठाए हैं। पहला केस मालेगांव बम विस्फोट का है। एक अदालत ने वर्ष 2006 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में नौ आरोपियों में से सात को रिहा कर दिया। एनआईए ने कहा कि सलमान फारसी, शब्बीर मोहम्मद जाहिद और फारुगुई अंसारी को मुंबई के आर्थर रोड जेल से रिहा कर दिया गया। औपचारिकता पूरी होने के बाद एक अन्य आरोपी अबरार अहमद को भी वामदुला जेल से रिहा कर दिया। मामले के दो अन्य आरोपियों आसिफ खान और मोहम्मद अली को भी जमानत तो मिल गई पर इन्हें रिहा नहीं किया गया क्योंकि वे 2006 के मुंबई ट्रेन सिलसिलेवार विस्फोटों में भी आरोपी हैं। मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने रिहाई का विरोध नहीं किया। एनआईए ने तर्प दिया कि मक्का मस्जिद बम विस्फोट मामले में गिरफ्तार स्वामी असीमानन्द के खुलासे के बाद उसने ताजा साक्ष्यों के अलावा पूर्व की जांच एजेंसी एटीएस और सीबीआई द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों की समीक्षा की थी। एनआईए ने कहा, `तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर काफी सोच विचार के बाद सभी नौ आरोपियों के जमानत, आवेदनों का विरोध नहीं करने का फैसला किया गया जिन्हें पूर्व में गिरफ्तार किया गया था और आरोपी बनाया गया था।'
दूसरा केस सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में गुजरात के पूर्व गृह राज्यमंत्री अमित शाह की कथित भूमिका पर सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है। सीबीआई ने कई अनाम पत्रों को शाह की फिरौती रैकेट में कथित भूमिका से जुड़ी शिकायतों के तौर पर पेश किया। एजेंसी के इस कदम को न्यायालय ने किसी को खुश करने का कदम बताया। न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने कहा, `यह स्पष्टतया किसी को खुश करने के लिए उठाया गया कदम है, जो बिल्कुल गलत है।' सीबीआई ने अमित शाह के खिलाफ ऐसी लगभग 200 शिकायतें पेश की थीं, जिन्हें देखने के बाद पीठे ने कहा, `आपने (सीबीआई) ने हमसे कहा है कि प्रदेश सरकार ने इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। इन पत्रों पर कोई कार्रवाई की ही नहीं जा सकती। ये शिकायतें पूरी तरह बकवास लग रही हैं।' सीबीआई ने गुजरात उच्च न्यायालय की ओर से शाह को जमानत दिए जाने की चुनौती दी है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, `आपको हमारा सबसे अच्छा जांचकर्ता माना जाता है। अब आपको इन कमियों का जवाब देना होगा।' सुनवाई के दौरान शाह ने आरोप लगाया कि वह राजनीतिक साजिश का शिकार हुए हैं और सीबीआई ने उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया है। शाह के वकील राम जेठमलानी ने कहा कि शाह राजनीतिक साजिश का शिकार हुए हैं और सीबीआई भी उसका एक भाग है।
तीसरा केस भी सीबीआई से संबंधित है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की सुनवाई कर रही विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी की अदालत में माननीय जज महोदय ने सीबीआई से साक्ष्यों को नष्ट करने में लग रहे आरोपों पर जानकारी मांगी है। सीबीआई को 23 नवम्बर तक जवाब देना है। सीबीआई पर आरोपियों ने कहा कि आरोप तय करने के आदेश में गलतियां और विरोधाभास हैं। निष्पक्ष सुनवाई के लिए उनमें सुधार की जरूरत है। आरोपी विनोद गोयनका ने सीबीआई पर आरोप लगाया है कि गवाह को अनाधिकृत तौर पर बुलाकर साक्ष्य प्रभावित किए जा रहे हैं। बुधवार को गवाही दे रहे रिलायंस अधिकारी एएन सेथुरमन ने बताया था कि उसके बयान के साथ छेड़छाड़ की गई है। गवाह ने दावा किया कि उसने हरी नायर के हस्ताक्षर की कभी भी पहचान नहीं की। इसके बावजूद सीबीआई ने इसे पेश कर दिया है। गोयनका के वकील माजिद मेनन ने कहा कि गवाह की याददाश्त ताजा करने के नाम पर सीबीआई द्वारा अपनाई गई कार्रवाई मामले को प्रभावित करने की तरह है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को आदेश दिया जाए कि याददाश्त ताजा करने के नाम पर गवाह या साक्ष्यों को प्रभावित न करें।
चौथा केस हमारी दिल्ली पुलिस से संबंधित है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को साफ कर दिया कि कैश फॉर वोट मामला भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि महज एक स्टिंग ऑपरेशन था। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि मामले के अभियुक्त तीन सांसदों ने रिश्वत मांगी या ली। इतना ही नहीं, अगर वे रिश्वत लेते तो चुपचाप लेते न कि टीवी चैनल के समक्ष लेकर उसे इस प्रकार संसद में पेश करते। वही हमारी संसद सर्वोच्च है और संसद द्वारा गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने भी साक्ष्य न होने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत ने यह टिप्पणी भाजपा के मौजूदा सांसद अशोक अर्गल तथा दो पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगोरा सहित सभी छह अभियुक्तों की जमानत स्वीकार करते हुए की। जस्टिस एमएल मेहता ने अपने फैसले में कहा कि दर्ज प्राथमिकी और आरोप पत्र का अध्ययन करने से वह महसूस करते हैं कि सांसदों व अन्य के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। इसके अलावा सीएफएसएल की रिपोर्ट से भी साफ है कि टीवी चैनल की ओर से स्टिंग ऑपरेशन की सीडी व ऑडियो में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई। किसी भी सांसद और अन्य ने कथित रिश्वत की राशि से फायदा नहीं उठाया। अदालत ने यह भी कहा कि वही दूसरी ओर अभियोजन पक्ष का केस भी यही है कि उक्त सांसद व अन्य अभियुक्तों का उद्देश्य मात्र कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की मिलीभगत का पर्दाफाश करना था।
उक्त केसों से साफ है कि राजनीतिज्ञों के दबाव के कारण हमारी जांच एजेंसियों की साख पर बट्टा लग रहा है। राजनेता जबरन अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए जांच एजेंसियों पर नाजायज दबाव डलवाकर झूठे केस बनवाते हैं जो अदालतों में जाकर उड़ जाते हैं। दुःखद पहलू यह है कि यह सिलसिला चलता रहेगा और जल्द एक भी एजेंसी ऐसी नहीं रहेगी जिसकी जांच पर जनता विश्वास कर सके।
2G, Amar Singh, Anil Narendra, Cash for Vote Scam, CBI, Daily Pratap, delhi Police, NIA, Vir Arjun

Thursday, 29 September 2011

सुधींद्र कुलकर्णी भी पहुंचे तिहाड़


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29th September 2011
अनिल नरेन्द्र
नोट के बदले वोट कांड में खुद को व्हिसिल ब्लोअर बताने वाले भाजपा नेता सुधींद्र कुलकर्णी मंगलवार को खुद ही तिहाड़ जेल पहुंच गए। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के आरोप पत्र में इस कांड के मास्टर माइंड बताए गए कुलकर्णी को अदालत ने एक अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब उसी दिन उनकी जमानत पर भी फैसला होगा। इस मामले में कोर्ट में पहले दो बार हुई सुनवाई में गैर हाजिर रहे कुलकर्णी मंगलवार को न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल की अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लेकर पेश हुए। कुलकर्णी ने दलील दी कि अपनी बेटी के दाखिले के लिए वह अमेरिका गए थे। लिहाजा वह पहले की सुनवाई में नहीं आ सके। उन्होंने कहा कि देशहित में उन्होंने सांसदों को रिश्वत देने के मामले का स्टिंग करवाया था ताकि लोगों को पता चल सके कि सरकार बचाने के लिए सांसदों की खरीद-फरोख्त होती है। लेकिन सरकार और पुलिस ने अपराधी को जेल भेजने के बजाय सच्चाई उजागर करने वालों को ही जेल में डाल रही है। उन्होंने कहा कि नोट के बदले वोट कांड मामले में कांग्रेस नेताओं की भूमिका की जांच होनी चाहिए, तभी पता चलेगा कि दोषी कौन है। कुलकर्णी ने इस बाबत अदालत के समक्ष अपने वकील महिपाल सिंह के जरिये एक अर्जी भी लगाई। दायर किए गए आवेदन में उन्होंने कहा कि मेरी भूमिका सिर्प पोल खोलने वाली की थी और मेरा मकसद तेजी से फैल रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने का था। उन्होंने तर्प दिया कि किसी ऐसे व्यक्ति को अंतरिम जमानत दिए जाने से इंकार का कोई कारण नहीं है, जिसकी नियमित जमानत याचिका (अदालत में) लम्बित हो और जिसे जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया गया हो। उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने हमेशा जांच एजेंसी का सहयोग किया है। जब-जब भी जांच एजेंसी ने बुलाया, मैं हाजिर रहा। अब मुझे हिरासत में भेजने की क्या जरूरत है? उधर उनकी अंतरिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील राजीव मोहन ने कहा कि इसका फैसला सिर्प गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए। मोहन ने कहा कि उन्होंने (बचाव पक्ष के वकील ने) अंतरिम जमानत देने के लिए कोई प्रयोजन नहीं बताया है। उधर वोट के बदले नोट कांड के आरोपी समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह की जमानत पर फैसला बुधवार को होगा। हालांकि फैसला मंगलवार को ही आना था लेकिन तीस हजारी की विशेष अदालत ने नियमित अर्जी पर फैसला एक दिन टाल दिया। अमर सिंह फिलहाल एम्स में भर्ती हैं जहां उनका इलाज चल रहा है। नोट के बदले वोट कांड मामले में कुलकर्णी जेल जाने वाले छठे आरोपी हैं। इससे पहले अमर सिंह, भाजपा के दो पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते एवं महावीर भगोरा समेत अमर सिंह के पूर्व निजी सहायक संजीव सक्सेना और भाजपा के कथित कार्यकर्ता सुहैल हिन्दुस्तानी को पहले ही तिहाड़ भेजा जा चुका है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के सहयोगी रहे सुधींद्र कुलकर्णी को जेल भेजे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि कोर्ट के इस आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नोट के बदले वोट का पूरा षड्यंत्र भाजपा का ही था। दूसरी ओर भाजपा ने दिल्ली पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच पर सवाल खड़े कर दिए। भाजपा के लीगल सेल के सदस्य सत्यपाल जैन के अनुसार यह पहली बार देखने को मिल रहा है जब पुलिस द्वारा किसी मामले में शिकायतकर्ता को ही गिरफ्तार किया जा रहा है जबकि जिनके विरुद्ध शिकायत की गई है उसके किसी भी सदस्य की गिरफ्तारी तो दूर की बात है उनको बुलाकर पुलिस ने पूछताछ करना भी उचित नहीं समझा। यही नहीं, दिल्ली पुलिस ने उल्टे ही जांच के प्रारम्भिक चरण में ही इस रिश्वत कांड में फायदा लेने वाले लोगों को क्लीन चिट दे दी। मेरा छोटा-सा प्रश्न है कि आखिर इस मामले में जिन लोगों की गिरफ्तारी की गई है वह सभी चाहते तो रिश्वत लेकर सरकार को बचा सकते थे और किसी को कानोंकान खबर तक नहीं लगती। लेकिन उन्होंने सच कहने का साहस दिखाया और रिश्वत दिए जाने की बात सार्वजनिक की तो सरकार और पुलिस ने उन्हें ही जेल पहुंचा दिया।
Amar Singh, Anil Narendra, Cash for Vote Scam, Daily Pratap, Sudhendra Kulkarni, Vir Arjun

Thursday, 22 September 2011

राम जेठमलानी की कैश फॉर वोट केस में पलटी


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 22nd September 2011
अनिल नरेन्द्र
नोट के बदले वोट कांड में अभियुक्त अमर सिंह की पैरवी करते हुए पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी ने कांग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम घसीट कर सनसनी फैला दी है। इससे पहले 12 सितम्बर को अमर सिंह की अंतरिम जमानत पर बहस करते हुए जेठमलानी ने पैसे के स्रोत का ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ने का प्रयास किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने संसद में स्वीकार किया है कि स्टिंग ऑपरेशन उनकी इजाजत से किया गया, इसका मतलब यही निकलता है कि पैसे उसी पार्टी ने दिए होंगे। कोर्ट में जेठमलानी का कहना था कि नोट के बदले वोट का उद्देश्य तत्कालीन मनमोहन सरकार को बचाना था, ऐसी स्थिति में संकेत मिलते हैं कि सरकार के पक्ष में मत देने के लिए अहमद पटेल ने विपक्षी दलों के सांसदों को कथित रूप से प्रलोभन दिया। जेठमलानी ने कहा कि वह यह नहीं कर रहे हैं कि इस साक्ष्य के आधार पर पटेल को दोषी ठहराया जाए लेकिन जब आप अपनी पार्टी के हित के लिए सांसदों को प्रभावित कर रहे हैं तब घूसप्रदाता ही कहलाएंगे। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान से पहले राम जेठमलानी ने कांग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम लिया, तो दोपहर बाद दूसरे अधिवक्ता एन. हरिहरन ने समाजवादी पार्टी सांसद रेवती रमन सिंह का नाम ले लिया। उन्होंने कहा कि कैश फॉर वोट कांड में अमर सिंह से ज्यादा सबूत रेवती रमन सिंह के खिलाफ मौजूद हैं। बावजूद जांच एजेंसी ने उन्हें न तो आरोपी बनाया है और न ही मामले में गवाहों की सूची में उनके नाम का जिक्र है। आरोप पत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 22 जुलाई 2008 को रेवती रमन सिंह ने सुहैल को बताया कि अमर सिंह अपने घर पर भाजपा सांसदों की प्रतीक्षा कर हे हैं। इसके बाद सुहैल भाजपा सांसदों अशोक अर्गल और फग्गन सिंह कुलस्ते को लेकर अमर सिंह के घर गया था। जब आरोप पत्र में इन बातों का जिक्र होने के बाद उन्हें न तो आरोपी बनाया गया और न ही गवाह। जिस पर सरकारी अधिवक्ता राजीव मोहन ने अदालत को बताया कि रेवती रमन सिंह को सिर्प अशोक अर्गल के घर जाते देखा गया था। कोई बातचीत की रिकार्डिंग नहीं है। लिहाजा महज उन्हें इस आधार पर आरोपी नहीं बनाया जा सकता। राम जेठमलानी ने विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल के समक्ष यह भी कहा कि रिश्वत लेन-देन का स्थान अमर सिंह का आवास नहीं था बल्कि ली मैरीडियन होटल था।
श्री अहमद पटेल का नाम आने पर कांग्रेस में हलचल मचना स्वभाविक ही था पर अहमद पटेल ने जहां जेठमलानी की दलीलों पर इसे बेबुनियाद और धोखा बताया और कहा कि मैंने इस बारे में पहले ही स्पष्टीकरण दे दिया है वहीं कांग्रेस पार्टी की टिप्पणी चौंकाने वाली जरूर थी। कांग्रेस पार्टी ने सारे विवाद को प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की ओर धकेलने का प्रयास करते हुए कहा कि बोफोर्स तोप सौदे में स्वर्गीय राजीव गांधी की लुटिया डुबाने में अहम भूमिका निभाने वाले फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन एक बार फिर वही कहानी दोहरा रहे हैं और निशाने पर स्वर्गीय राजीव गांधी की पत्नी व कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी हैं। उन्हीं को बदनाम करने का एक बार फिर षड्यंत्र रचा जा रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने इशारों में कहा कि अमिताभ बच्चन अमर सिंह से मिलकर लौटे हैं तभी से उनका (राम जेठमलानी और अमर सिंह) का स्टैंड बदला है। उन्होंने इस संबंध में पूछे गए सवाल का यह कहकर कूटनीतिक जवाब दिया कि प्राण जाए और वचन न जाए। गौरतलब है कि इस समय अमिताभ बच्चन गुजरात के ब्रांड एमबेस्डर हैं और मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीबी हैं। दो दिन पहले ही अमिताभ एम्स जाकर अमर सिंह से मिले थे। करीब दो घंटे की बातचीत का कांग्रेस रणनीतिकार यही अर्थ निकाल रहे हैं कि भाजपा के दूत के रूप में उन्होंने काम किया है और उसी मुलाकात के तत्काल बाद अमर सिंह के वकील ने पलटी मारते हुए अहमद पटेल का नाम ले डाला। हालांकि सीधे तौर पर रेणुका ने यही कहा कि अभी इस प्रकरण के और भी पन्ने खुलने बाकी हैं। यह तो सिर्प एक एपीसोड है। आगे देखते जाइए कि क्या होगा। बेचारे अमिताभ बच्चन न तीन में न तेरह में। अगर वह अमर सिंह से मिलने नहीं जाते तो जयाप्रदा खुलेआम ललकारती है और देखने जाते हैं तो कांग्रेस उन्हें सारे षड्यंत्र के पीछे शातिर दिमाग बता देती है जबकि अमर सिंह और अमिताभ की बातचीत में कहीं कैश फॉर वोट केस का जिक्र तक नहीं हुआ होगा।

Sunday, 18 September 2011

Will Advani’s yatra prove to be a master stroke?

- Anil Narendra
Senior BJP leader, LK Advani will set on another Rath Yatra. Claiming UPA government loosing its legitimacy and its mandate, Mr Advani has announced that he will be undertaking this Rath Yatra before November in protest against this corrupt government. He says that he will expose the way, the cash for vote issue has been treated by the government before the masses through his yatra. The proposed yatra was discussed by the BJP Core Group. The yatra is likely to cover a distance of about 6,000 kms. Mr Advani wants to highlight clean politics and good governance, whereas some of the BJP leaders think that the thrust of this yatra should be on anti-corruption, as the corruption is the main issue in the country currently. Leaders of states like Punjab, Uttarakhand, Goa and UP want this yatra to pass through their states, as these states would be going for Assembly elections very soon, But other leaders do not agree with this line of thinking.
This yatra of Mr Advani is being both supported as well as criticized. Let us take criticism first. Anna Hazare and his team think that this yatra is being undertaken to undermine the importance of their movement. Calling this yatra as an effort to show off, Anna himself has said that he would not support BJP, till it does not support Jan Lokpal Bill in the Parliament and its State governments do not enact laws for appointment of Lokayuktas. Anna told TV Channels, if Mr Advani is serious on the issue of corruption, then instead of undertaking the rath yatra, he must persuade BJP-led States to enact laws for appointment of Lokayuktas. Recently, the Anna team held an important meeting at Ralegan. Social Activiist, Medha Patkar had expressed her serious reservations over the proposed rath yatra at the meeting. She clearly stated that the rath yatra of Advaniji must not get Anna Hazare's support at any cost. Medha Patkar warned that this was a political march that has nothing to do with the issue of corruption. As far as the Congress reaction is concerned, it is not happy with this rath yatra. One of the leaders went to the extent of calling it a master stroke of Advaniji. The proposed rath yatra of top BJP leader, known as the Iron Man of the Party, immediately after Anna's movement, relief to Narendra Modi by Supreme Court and rumours of mid-term elections have added to the concerns of the Party. The Party is already under pressure on corruption issue. First, it was Anna Hazare and now BJP leader LK Advani's announcement of undertaking rath yatra on the issue of corruption that have created more problems for the government and the party. The Congress is really worried over the ensuing Assembly elections in five States in coming months. The most important of these is UP election. The Party is also hoping to form government in Punjab and Uttarkhand this time. The problem is that the Anna movement has sent a message to the masses that the government and the Party are not serious over the issue of corruption and this has proved a great irritant to the Party. The Party is also apprehensive of Advani's master stroke, which he has played to grab benefit of the atmosphere created by Anna's movement. The problem for the government and the party is not Advani alone. Anna, too is mulling the idea of touring villages. Yog Guru Baba Ramdev has also been keeping bitterness towards the government and he is also planning yatras afresh. All these three yatras coincide on the issue of corruption. Under these circumstances, the corruption issue will not only continue to dominate, but in case the Congress is defeated in these Assembly elections, even then the issue may impact the outcome of the 2014 General Elections. Advaniji also wants that the government as well as the party, remain under pressure.
Some BJP leaders of second line are also not happy over this rath yatra in the heart of their heart. They fear that even if NDA under the leadership of BJP is able to come to power in 2014 general elections, their dream of becoming Prime Minister will not be fulfilled as Mr Advani will be left as number one leader of the BJP. On the other hand, BJP workers are happy with this yatra and they would welcome this move whole-heartedly. The party workers will be active during this yatra and in fact this is one of the objectives of Mr Advani, but there are leaders like Ram Jethmalani in the Party, who are bent upon puncturing his rath, before it embarks on its journey. Putting up arguments on behalf of jailed leader Amar Singh, Ram Jethmalani said in the Tees Hazari Court on Monday that since this sting operation was carried out at the instance of the BJP, the arrangement to disburse money to MPs must have been done by them. Earlier also, Jethmalani has been creating such difficult situations for BJP.  While the BJP had opened a front against UPA government in 2-G Spectrum scam, Jethmalani has appeared as a defence lawyer for Kanimojhi, a Rajya Sabha MP, who is in Tihar Jail these days over the 2-G scam. It is interesting to note that on one hand, Advani announces to come to streets on this matter, and on the other, a member of his party alleges that money in the cash for vote incident, the cash must have come from the BJP coffers. These allegations of Ram Jethmalani could belittle the impact of proposed rath yatra of Shri Advani, as from the very beginning the BJP has been putting UPA government to the dock in the cash for vote matter. It has been calling two of its members, who are behind bars in Tihar Jail as the whistle blowers and it has been in this reference that Shri Advani has also stated about his willingness to go to jail.
It may, however, be noted that neither Ram Mandir nor the Hindutva is at the centre of this proposed rath yatra, but it is about the two issues namely good governance and clean politics and it appeals to all religious communities. But, why, in the first place, the need for such a rath yatra was felt? There are two reasons for this. Scams after scam have put the UPA government on the offensive. Then, it was the Anna movement which made this a household issue. Being the largest opposition party, BJP feels that it is likely to be benefited the most out of the present atmosphere. Secondly, the Delhi Police has added to its uneasiness. Two of its former MPs have been sent to Tihar by the Court. Then, the Court has also issued notice to the one-time close associate of Shri Advani, Sudheendra Kulkarni and the Delhi Police has sought permission from the Lok Sabha Speaker to initiate action against a present BJP MP. The BJP has, however claimed that the persons who have been made accused, are the persons, who were, in fact, trying to expose the Congress conspiracy to secure majority through the trading of MPs. The BJP leadership might have felt that it would have to bear a huge loss, if the Party kept quite over the issue. It cannot be denied that in the twilight of his political career, Shri Advani is looking at it as an only opportunity to reach to the highest post in the country. But to achieve this objective, he will have to try to re-clean and re-organize his party. Perhaps, the biggest challenge for Advaniji would be to rekindle faith among the masses that he is really against the corruption and he is honestly in favour of elimination of corruption. No doubt, some tainted leaders have been removed from the Party, but still there are a number of leaders who would not hesitate in accepting money, if offered. It is a sad commentary on BJP that it has leaders in its fold with clean image like Advaniji along with tainted ones. Threat to Advaniji is not from without, but from within.
Amar Singh, Anil Narendra, Cash for Vote Scam, Corruption, Daily Pratap, L K Advani, Rath Yatra, Vir Arjun

Friday, 16 September 2011

तिहाड़ जेल में कैसे गुजार रहे अपना समय ये वीआईपी कैदी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 16th September 2011
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली की तिहाड़ जेल का नाम वीआईपी जेल कर देना चाहिए। पिछले कुछ महीनों से यहां एक से एक बड़ा नेता मेहमान बन रहा है। सलाखों के पीछे अमर सिंह, ए. राजा, कलमाड़ी, कनिमोझी जैसे नेता अपने दिन कैसे गुजारते हैं, सुनिए।
पहले बात करते हैं अमर सिंह की। अमर सिंह के लि जेल के नियम-कानून और परम्परा ताक पर रख दी गई। स्वास्थ्य का हवाला देकर अमर सिंह को सोमवार देर शाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भेज दिया गया, लेकिन नियमानुसार अमर सिंह को पहले दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल भेजा जाना चाहिए था। सम्भवत यह पहला मौका है जब किसी कैदी को इलाज के लिए सीधे एम्स भेजा गया हो। बताया जा रहा है कि अमर सिंह को जेल में सुविधाएं देने को लेकर हो रहे लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव से आजिज आकर जेल महानिदेशक छुट्टी पर चले गए हैं। जेल कर्मी भी अमर सिंह के नखरों से परेशान हो गए हैं। डीआईजी (जेल) आरएन शर्मा ने बताया कि तिहाड़ में कोई वीआईपी नहीं है। सभी कैदियों को बराबर अधिकार और सुविधाएं हैं। दरअसल कलमाड़ी को साथ अपने दफ्तर में चाय-पिलाने के चलते जेल सुपरिंटेंडेंट भारद्वाज को कालापानी (पोर्ट ब्लेयर) भेज दिया गया था। यह सख्ती उसी का असर है। एक वार्डन मुस्कुरा कर कहता है कि ये वही अमर सिंह हैं जिन्हें कुछ दिन पहले तक अमिताभ बच्चन खुद ड्राइव कर एयरपोर्ट से अपने घर ले जाते थे, जिन्होंने अपने घर में करोड़ों की फर्निशिंग करवाई थी वही अमर सिंह आज 10 बाय 15 के एक सेल में जमीन पर सो रहे हैं जिसमें एक छोटा टीवी सेट और पंखा है।
उन्हें जेल के चार कम्बल, दो बैड शीट, एक थाली, कटोरी, चम्मच, गिलास और एक मटका मिला है। बड़ी पार्टियों के बीच अरबों-खरबों की डील कराने वाले अमर सिंह की जेब में 1500 रुपए, वह भी जेल कूपन के रूप में।
सुबह 6 बजे रोल कॉल का समय। एक के बाद एक नाम पुकारे जाते हैं। अमर सिंह का नाम आता है, संतरी पुकारता है अमर सिंह....जी। सुरेश कलमाड़ी, ए. राजा, कनिमोझी इत्यादि-इत्यादि। कई बार खुद बिना नाम पुकारे रजिस्टर पर सही का निशान लगा देते हैं। फिर प्रार्थना ः ऐ मालिक तेरे बन्दे हम। पिछले 20 साल से तिहाड़ में रोज सुबह लता मंगेशकर की आवाज में यही प्रार्थना बजती है और सभी कैदी उसे दोहराते हैं। फिर चाय। अखबार। कुछ देर टीवी। कुछ का टहलना। कुछ का काम सांप-सीढ़ी, लूडो, कैरम और बैडमिंटन खेलना। फिर खाना-पीना और सोना। राजा की पत्नी परमेश्वरी गुरुवार को उनसे मिलने पहुंचीं। लेकिन कनिमोझी इतनी खुशकिस्मत नहीं थीं। उनसे मिलने के लिए एक तमिल कवि ने एक सांसद के मार्पत अर्जी दी थी जिसे जेल अधिकारियों ने खारिज कर दिया। इसी तरह जेल नम्बर 3 के गेट पर सफेद कुर्ता-पायजामा पहने दर्जनभर से ज्यादा लोग जमा थे। सुबह 11 से देर शाम तक। कुछ विधायक अन्य खुद को बड़ा नेता बता रहे थे। सांसद कुलस्ते और भगोरा से मिलने मध्य प्रदेश और राजस्थान से आए थे। जेल प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी। जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता बताते हैं कि 12ः30 बजे कैदियों में केवल दो के लिए घर से खाना आता है। राजा और कनिमोझी। कोर्ट ने इसकी खास अनुमति दी है। महिला जेल में कनिमोझी घुलमिल गई हैं और महिला संतरी उन्हें दीदी कहकर बुलाती हैं। नियमानुसार हफ्ते में दो मुलाकात हो सकती हैं वह भी परिवार वालों से, वही कपड़े लेकर आते हैं। हफ्तेभर के लिए 1500 रुपये दे जाते हैं। इनमें कैंटीन से कुछ पकवान-मिठाई खरीदी जा सकती है। राजा तमिल चैनल और फिल्में देखकर समय काट रहे हैं। शाहिद बलवा ने आई पैड, कूलर, नरम तकिया और गद्दे की मांग की है। वे हिन्दी फिल्म देकर समय काट रहे हैं।
हां जेल में सैलून, कपड़ों पर प्रेस और ड्राई व वैट कैंटीन की सुविधा है। कूपन के जरिये जो चाहे खरीद लो। कलमाड़ी ने झांसी की रानी सीरियल देखने के लिए टीवी मांगा था। संतरी कहता है कि कलमाड़ी घंटों रजिस्टर में कुछ लिखते रहते हैं, क्या लिखते हैं, कोई नहीं जानता। क्या वह किस-किसको क्या दिया गया इसका हिसाब-किताब लिख रहे हैं, क्योंकि उनकी याददाश्त तो आती-जाती रहती है? अधिकतर वीआईपी-दो पूर्व केंद्रीय मंत्री, एक पूर्व मुख्यमंत्री, छह पूर्व सांसद, दो पूर्व नौकरशाह, 15 उद्योगपति-विचाराधीन कैदी हैं। इनसे जेल का काम नहीं करवाया जाता जिस जेल में रहते हैं? उसकी सफाई कर्मचारी करते हैं। अमर सिंह के साथ तीन कैदी इसलिए रखे गए हैं ताकि वह पूरा दिन फिनायल से फर्श साफ करते रहें ताकि अमर सिंह को कोई इंफैक्शन न हो। जेल कर्मचारी भी मानते हैं कि एमपी तो आखिर एमपी है। बाहर चाहे जितनी बातें बनाई जाएं, लेकिन एमपी का लिहाज करना ही पड़ता है। सो इस तरह गुजर रही है इन वीआईपी की तिहाड़ जेल में जिन्दगी।

Thursday, 15 September 2011

क्या आडवाणी की पस्तावित यात्रा एक मास्टर स्ट्रोक होगी


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 15th September 2011
अनिल नरेन्द्र
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता 83 वर्षीय श्री लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर रथ यात्रा पर निकलेंगे। श्री आडवाणी ने संपग सरकार के वैधता खो देने और उसका जनादेश समाप्त हो जाने का दावा करते हुए ऐलान किया कि वह इस भ्रष्ट सरकार के खिलाफ नवम्बर से पहले देश भर में रथ यात्रा करेंगे। वोट के बदले नोट जिस पकार से इस सरकार ने बर्ताव किया है उसका भी जनता में वह इस यात्रा में पर्दाफाश करेंगे। भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक में पस्तावित यात्रा पर चर्चा हुई। यात्रा के दौरान करीब 6000 किलोमीटर का सफर तय किया जा सकता है। आडवाणी जी का विचार है कि यात्रा का जोर स्वच्छ राजनीति,बेहतर पशासन पर होना चाहिए, जबकि कुछ भाजपा नेताओं का विचार है कि इसे भ्रष्टाचार विरोधी यात्रा होना चाहिए क्योंकि पूरे देश में भ्रष्टाचार का मुद्दा केन्द्र में है। पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और उत्तर पदेश जैसे राज्यों के कुछ नेता चाहते हैं कि यात्रा इन राज्यों से होकर गुजरे क्योंकि इन राज्यों में चुनाव होने हैं। वहीं कुछ नेता इस विचार से सहमतनहीं हैं।
आडवाणी जी की इस पस्तावित यात्रा का समर्थन और आलोचना दोनों ही हो रहे हैं। पहले आलोचना की बात करते हैं। अन्ना हजारे और उनकी टीम महसूस करती है कि यह यात्रा उनके आंदोलन का महत्व कम करने के लिए की जा रही है।
अन्ना ने खुद यात्रा को दिखावा करार देते हुए कहा कि वह तब तक भाजपा का समर्थन नहीं करेंगे जब तक कि वह संसद में जन लोकपाल विधेयक का समर्थन नहीं करती और उसको राज्य सरकारें लोक आयुक्त की नियुक्ति का कानून नहीं बनाती। अन्ना ने टीवी चैनलों से कहा कि अगर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आडवाणी गम्भीर हैं तो यात्रा करने की बजाए उन्हें भाजपा शासित सभी राज्यों से लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए कानून बनाने को कहना चाहिए। गत दिनों रालेगण में अन्ना की टीम की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में मेधा पाटकर ने जमकर आडवाणी यात्रा का विरोध किया था। पाटकर ने साफ कहा कि आडवाणी की यात्रा को किसी भी हालत में अन्ना हजारे का समर्थन नहीं मिलना चाहिए। मेधा पाटकर ने चेताया कि यह एक राजनीतिक यात्रा है जिसका उद्देश्य राजनीतिक है, सामाजिक उत्थान या भ्रष्टाचार दूर करना नहीं है।
जहां तक कांग्रेस पार्टी के रिएक्शन का सवाल है वह इससे नाखुश है। एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि यह आडवाणी का मास्टर स्ट्रोक है। अन्ना हजारे के आंदोलन के ठीक बाद लौह पुरुष कहे जाने वाले भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा, सर्वोच्च अदालत द्वारा नरेन्द्र मोदी को दी गई राहत और मध्यावधि चुनावों की अफवाहों ने कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार दबाव में है। पहले गांधीवादी
अन्ना हजारे और उसके बाद भाजपा नेता एलके आडवाणी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर रथ यात्रा की बात कहकर सरकार और कांग्रेस संगठन दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस को असली चिंता आने वाले महीनों में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण उत्तर पदेश है।
पंजाब और उत्तराखंड में भी कांग्रेस इस बार सरकार बनाने की उम्मीद पाले हुए है। कांग्रेस को बड़ी परेशानी यह है कि अन्ना के आंदोलन से जनता में यह संदेश गया है कि सरकार और संगठन इसको लेकर गम्भीर नहीं है और यह पार्टी के माथे पर बल डालने के लिए काफी है। पार्टी को यह चिंता भी सता रही है कि कहीं अन्ना की बोई फसल को काटने के लिए आडवाणी ने जो मास्टर स्ट्रोक खेला है वह कामयाब न हो जाए? सरकार के लिए और कांग्रेस पार्टी के लिए परेशानी अकेले आडवाणी ही नहीं हैं। उधर अन्ना भी गांव-गांव घूमने की योजना पर विचार कर रहे हैं। योगगुरू बाबा रामदेव भी सरकार से खार खाए बैठे हैं और नए सिरे से यात्रा करने जा रहे हैं। तीनों ही यात्राएं भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार का मुद्दा न केवल विधानसभा चुनावों तक जीवित रहेगा बल्कि अगर इन चुनावों में कांग्रेस हार जाती है तो 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी इसका असर पड़ सकता है।
आडवाणी भी यही चाहते हैं कि सरकार और पार्टी दोनों पर दबाव बना रहे। आडवाणी जी की इस यात्रा से भाजपा के कुछ दूसरी पंक्ति के नेता अंदरखाते खुश नहीं हैं। उन्हें लगता है कि अगर 2014 में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को सत्ता मिल जाती है तो उनका पधानमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं होगा और आडवाणी भाजपा के नंबर वन व्यक्ति होंगे। जबकि भाजपा कार्यकर्ता इस यात्रा से खुश है और गर्मजोशी से इसका स्वागत करेगा। इस यात्रा के दौरान कार्यकर्ता सकिय हो जाएगा जो आडवाणी का एक उद्देश्य भी है पर पार्टी के अंदर राम जेठमलानी सरीखे के नेता भी मौजूद हैं जो यात्रा शुरू होने से पहले ही उसकी हवा निकालने में तुले हैं। तिहाड़ जेल में बंद अमर सिंह की पैरवी कर रहे राम जेठमलानी ने सोमवार को तीस हजारी अदालत में कहा कि चूंकि यह स्टिंग ऑपरेशन भाजपा ने कराया था, इसलिए सांसदों को दिए पैसे की व्यवस्था भी उसी ने की होगी। जेठमलानी पहले भी भाजपा के लिए इस तरह की विकट परिस्थितियां पैदा करते रहे हैं। टू-जी स्पेक्ट्रम मामले में एक ओर भाजपा यूपीए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे तो जेठमलानी तिहाड़ में बंद डीएमके की राज्यसभा सांसद कनिमोझी की पैरवी कर रहे थे। एक तरफ तो आडवाणी इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरने का ऐलान करते हैं दूसरी तरफ उन्ही की पार्टी का सदस्य यह आरोप लगाता है कि कैश फॉर वोट मामले में पैसा भाजपा ने ही दिया होगा। जेठमलानी की ये दलीलें आडवाणी की यात्रा की धार को पुंद कर सकती है क्योंकि कैश फॉर वोट मामले में भाजपा शुरू से ही कांग्रेस नीति यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा करती रही है। तिहाड़ जेल में बंद अपने दो पूर्व सांसदों को भाजपा व्हिसल ब्लोअर बताती रही है और आडवाणी इसी पकरण में कह चुके हैं कि वे जेल जाने को तैयार हैं।
अलबत्ता पस्तावित रथ यात्रा का केन्द्र बिंदु न तो राम मंदिर है और न ही हिंदुत्व बल्कि सुशासन और साफ सुथरी राजनीति के मुद्दों को लेकर है और यह मुद्दे सभी वर्गों, धर्मों,समुदायों को अपील करता है। आखिर इस यात्रा की जरूरत महसूस क्यों हुई? इसके दो कारण नजर आते हैं। एक के बाद एक घोटालों ने यूपीए सरकार को बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया है। फिर अन्ना के आंदोलन ने इसे घर-घर का विषय बना दिया है। सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते भाजपा को लगता है कि इस माहौल का सबसे ज्यादा लाभ उसी को मिल सकता है। दूसरे नोट के बदले वोट कांड में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। उसके दो पूर्व सांसदों को अदालत ने तिहाड़ भेज दिया है। फिर अदालत ने इस मामले में आडवाणी के निकट सहयोगी रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी को नोटिस दिया गया है और दिल्ली पुलिस ने भाजपा के एक मौजूदा सांसद के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष से इजाजत मांगी है। जबकि भाजपा का दावा है कि उनके जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है वे तो असल में खरीद-फरोख्त के जरिए बहुमत जुटाने के कांग्रेस के षड़यंत्र को बेनकाब करने में जुटे थे। भाजपा नेतृत्व को यह महसूस हुआ होगा कि अगर पार्टी इस मामले में चुप बैठ गई तो उसे काफी नुकमसान उठाना पड़ सकता है।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अब अपने राजनीतिक जीवन की सूर्यास्त की बेला पर उन्हें शीर्ष पद पर पहुंचने के लिए एक अवसर दिख रहा है। इसके लिए उन्हें अपनी पार्टी को पुनर्संशोधित और पुनर्सुनियोजित करने का पयास करना होगा। आडवाणी जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती शायद यह रहेगी कि
वह भारत की जनता में यह विश्वास पैदा करें कि वाकई ही भ्रष्टाचार के खिलाफ है और वह पूरी ईमानदारी से भ्रष्टाचार को दूर करने के पक्षधर हैं।
बेशक कुछ दागी नेताओं को हाल में हटाया गया है पर अभी भी `थैली' लेने वाले नेता पार्टी में मौजूद हैं। दुख से कहना पड़ता है कि आडवाणी जैसी स्वच्छ छवि वाले नेता भाजपा में जरूर हैं पर दागी भी मौजूद हैं। आडवाणी जी को सबसे ज्यादा खतरा अंदर से है, बाहर से नहीं।
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Saturday, 27 August 2011

बुरे फंसे अमर सिंह और सुधीन्द्र कुलकर्णी



Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 27th August 2011
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली की एक अदालत में वोट के बदले नोट मामले में राज्यसभा सदस्य अमर सिंह और भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी के करीबी सुधीन्द्र कुलकर्णी समेत छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इन पर 2008 में लोकसभा में विश्वासमत से पहले सांसदों को घूस देने का आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप है। हैरानगी की बात यह है कि इस चार्जशीट में कांग्रेस के किसी भी नेता का नाम नहीं है। अमर सिंह के साथ सुधीन्द्र कुलकर्णी का नाम बतौर मास्टर माइंड शामिल है। आरोप पत्र के अनुसार कुलकर्णी को इस घोटाले का सरगना इसलिए करार दिया गया है क्योंकि वह सभी साजिशकर्ताओं के सम्पर्प में था। वह उस समय भी मौजूद था जब सांसदों को रिश्वत दी जा रही थी। आरोप पत्र में जिन दो सांसदों (भाजपा) का उल्लेख किया गया है, वे हैं फग्गन सिंह कुलस्ते और महाबीर सिंह भगोड़ा। अमर सिंह के पूर्व सहयोगी संजीव सक्सेना और भाजपा के कथित कार्यकर्ता सुहैल हिन्दुस्तानी के खिलाफ भी इस मामले में आरोप पत्र पेश किया गया है। दोनों अभी जेल में हैं। भाजपा सांसद अशोक अर्गल का नाम आरोप पत्र में नहीं है। लेकिन दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह उन्हें अभियोगी बनाने के लिए जरूरी मंजूरी मिलने के बाद इस संबंध में पूरक आरोप पत्र पेश करेगी। माना जाता है कि पार्टी लाइन का उल्लंघन करने के लिए उन्हें रिश्वत दी गई थी। 80 पेज के आरोप पत्र को विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल की अदालत में पेश किया गया। इसे अदालत के समक्ष संज्ञान में गुरुवार को लाया जाएगा। आरोप पत्र में कहा गया है कि राज्यसभा के सांसद अमर सिंह ने सक्सेना और अन्य के साथ मिलकर साजिश रची और तत्कालीन सांसदों को रिश्वत दी। कुलकर्णी ने विश्वास मत के दौरान सक्रिय भूमिका अदा की। इसमें आरोप लगाया गया है कि जांच के दौरान इस बात के पर्याप्त सबूत मिले हैं कि 22 जुलाई 2008 की सुबह सांसद अमर सिंह ने अपने सचिव संजीव सक्सेना के साथ एक करोड़ रुपये की रिश्वत पहुंचाने के लिए एक आपराधिक साजिश रची। आरोप पत्र में दावा किया गया है कि इस आपराधिक साजिश के तहत सक्सेना ने पीली कमीज वाले एक अन्य व्यक्ति के साथ सुबह के लगभग 11 बजे, चार फिरोजशाह मार्ग पर एक करोड़ नकद राशि भाजपा के तीन सांसदों अर्गल, कुलस्ते और भगोड़ा को सौंपी। चार्जशीट में दावा किया गया है कि इन सांसदों को नौ करोड़ का भुगतान होना था और अग्रिम राशि के रूप में उन्हें यह रकम दी गई थी। पुलिस ने अमर सिंह को भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 11 और आईपीसी की धारा 120 के तहत आरोपित किया है। चार्जशीट में कहा गया है कि कुलकर्णी ने जांच एजेंसी को अंधेरे में रखा जबकि उन्हें इस षड्यंत्र की पूरी जानकारी थी।

दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच के दौरान 53 गवाहों से बातचीत की। इनमें सीएनएन-आईबीएन के पत्रकार भी शामिल हैं जिन्होंने इस मामले में वीडियो रिकार्डिंग की थी। हैरानगी की बात तो यह है कि दिल्ली पुलिस ने इस चार्जशीट में न तो किसी कांग्रेसी का नाम लिया और न ही समाजवादी पार्टी के किसी व्यक्ति का। अमर सिंह, कुलस्ते और भगोड़ा को सम्मन जारी करते हुए न्यायाधीश ने पुलिस से पूछा कि इन लोगों को दो अन्य लोगों के साथ पहले गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की ओर से लोक अभियोजक ने अदालत से कहा कि चारों को गिरफ्तार नहीं किया गया, क्योंकि हिरासत में उनसे पूछताछ की जरूरत नहीं पड़ी। अमर सिंह, कुलकर्णी और भाजपा के दो पूर्व सांसदों को छह सितम्बर को अदालत में पेश होने का सम्मन जारी हो गया है। अगर अमर सिंह इस केस में गिरफ्तार हुए तो काफी लोगों का भांडा फूट सकता है। आखिर अमर सिंह ने अपनी मर्जी से तो यह कांड नहीं किया होगा। इसमें कांग्रेस के दिग्गज भी फंस सकते हैं। अमर सिंह ने अगर अपनी जुबान खोल दी तो कइयों की पोल खुल जाएगी। मनमोहन सिंह सरकार जो पहले से ही चारों तरफ से समस्याओं से घिरी है, के लिए सिरदर्दी बढ़ाने के लिए एक नई समस्या यह आ गई है। इस केस का कुछ रेलवेंस तो अन्ना की मांगों को लेकर भी है। संसद के बाहर के आचरण पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की है। इसका मतलब यह है कि यह सब सरकार की नीयत पर निर्भर करता है। कानून तो मौजूद है पर कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। इसमें अमर सिंह और सुधीन्द्र कुलकर्णी को तो फंसा दिया है अब देखना है कि क्या कांग्रेसी खुद साफ बच निकलेंगे?


Tuesday, 26 July 2011

नोट के बदले वोट पर अमर सिंह से लम्बी पूछताछ


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26th July 2011
अनिल नरेन्द्र
`नोट के बदले वोट' मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने शुक्रवार को राज्यसभा सांसद अमर सिंह से लगभग साढ़े तीन घंटे पूछताछ की। इस मामले में पहले से ही गिरफ्तार दो आरोपियों संजीव सक्सेना और सुहेल हिन्दुस्तानी से भी आमना-सामना कराया गया। इस तीन घंटे की पूछताछ पर औपचारिक रूप से दिल्ली पुलिस द्वारा कोई ब्रीफिंग अभी तक नहीं हुई है, इसलिए इस दौरान क्या सवाल-जवाब हुए उनके बारे में दावे से कुछ नहीं कहा जा सकता। हां, समाचार पत्रों में जो रिपोर्ट छपी है उससे थोड़ा अंदाजा हो सकता है कि सवालों की लाइन क्या रही होगी। अमर सिंह शुक्रवार सुबह ही 10ः45 बजे अपनी मर्सीडीज कार में चाणक्यपुरी स्थित अपराध शाखा के इंटर स्टेट सेल पहुंच गए। दोपहर लगभग 12ः50 बजे तक अपराध शाखा के पुलिस अधिकारी अमर सिंह से पूछताछ करते रहे। फिर स्पेशल सेल के अतिरिक्त उपायुक्त एलएन राव भी पहुंच गए। राव पूर्व में भी टेपिंग मामले में अमर सिंह से पूछताछ कर चुके हैं। दोपहर 2ः00 बजे पूछताछ समाप्त होने के बाद वे मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब दिए बिना निकल गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान अमर सिंह का व्यवहार सामान्य रहा और वे आत्मविश्वास से भरे थे। अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान लगभग 1ः30 बजे सुहेल हिन्दुस्तानी और अमर सिंह का आमना-सामना भी कराया। अमर सिंह ने सुहेल के एक करोड़ रुपये देने के आरोपों समेत सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संजीव सक्सेना मेरा निजी सचिव रह चुका है। लेकिन जब यह कांड हुआ तब वह एक बसपा नेता का निजी सचिव था। एक छपी रिपोर्ट के अनुसार अमर सिंह ने सभी सवालों का गोलमोल अंदाज में जवाब दिया। दिल्ली पुलिस अपराध शाखा ने अमर सिंह के लिए 15 सवालों की फेहरिस्त तैयार कर रखी थी। पहला सवाल था कि 22 जुलाई, 2008 को संसद में लाए गए एक करोड़ रुपये के सिलसिले में एक खास टेलीफोन पर बातचीत हुई। उस नम्बर वाले शख्स के बारे में वह कितना जानते हैं। दूसरा सवाल कुछ खातों के बारे में पूछा जिनसे कैश फॉर वोट के लिए एक करोड़ रुपये निकाले गए थे। तीसरा सवाल था, 22 जुलाई को सांसद अशोक अर्गल, महावीर सिंह भगोरा, फग्गन सिंह कुलस्ते उनके निवास पर आए थे या नहीं? चौथा सवाल कि सिंह ने अपने पीए संजीव सक्सेना की मुलाकात इन तीनों से करवाई थी या नहीं। सूत्रों के मुताबिक अमर सिंह का फरार ड्राइवर संजय इन मामलों की अहम कड़ी है। घटना के बाद से ही संजय गायब है। छठा सवाल कि क्या अमर सिंह ने 22 जुलाई की सुबह संजय को संजीव के साथ फिरोजशाह रोड भेजा था? अगला सवाल कि रिश्वत के एक करोड़ रुपये बैग में उनके घर पर भरे गए थे? सूत्रों ने बताया कि सवाल नम्बर आठ था, वह एक करोड़ रुपये किसके थे? अमर सिंह ने इसकी जानकारी से इंकार कर दिया तो अगला सवाल संजीव की पूछताछ में आए तथ्य पर दागा गया। पुलिस ने पूछा कि संजीव ने कहा है कि अमर सिंह का ड्राइवर संजय उसे लेकर गया था तो आपको (अमर सिंह) इसकी जानकारी कैसे नहीं है? यह कैसे हो सकता है? अभी तक पूरी तरह लड़खड़ा चुके अमर सिंह से हल्का सवाल करते हुए पुलिस ने पूछा कि वह संजीव सक्सेना को कब से जानते हैं और उसे घटना से संबंधित क्या काम सौंप रखा था। 13वां सवाल फिर सख्त था। पहले सवाल में पूछे गए फोन नम्बर पर वापस लौटते हुए पुलिस ने सवाल दागा कि 19 और 21 जुलाई, 2008 के बीच उस नम्बर पर उनकी कितनी बातचीत हुई, किससे हुई, क्यों और क्या हुई? कॉल डिटेल के मुताबिक अमर सिंह ने उस नम्बर पर उस बीच कई दफा बातचीत की। 15वां और आखिरी सवाल था कि कुलस्ते ने पुलिस को बयान दिया है कि अमर सिंह ने संजीव को सांसदों से मिलवाया। इसमें कितना सच्चाई है?
उधर श्री अमर सिंह से चाणक्यपुरी थाने में पूछताछ हो रही थी इधर बहुत से नेताओं की सांसें अटकी हुई थीं। उन्हें यह डर सता रहा था कि पता नहीं अमर सिंह क्या कह दें। अमर सिंह उस्तादों के उस्ताद हैं, वे अपने को बचाने के लिए अंगुली किसी तरफ भी कर सकते हैं। खासकर कांग्रेसी नेताओं में काफी हलचल रही। पूछताछ के बाद कांग्रेसी नेता गम्भीर दिखे। कल तक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कह रहे थे कि सुहेल हिन्दुस्तानी के बयान पर कांग्रेस और अमर सिंह जैसी शख्सियत से पूछताछ ठीक नहीं है। सुहेल भाजपा का पिट्ठू और दलाल है। पुलिस दरियाफ्त के बाद ही पार्टी के नेता अहमद पटेल को क्लीन चिट दे दी है। सवाल किया जा रहा है कि पूछताछ से पहले ही पुलिस ने किसी को भी क्लीन चिट किस बिना पर दे दी? कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में कानून अपना काम कर रहा है। चूंकि मामला कोर्ट के विचाराधीन है इसलिए पार्टी की तरफ से प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है। एक अन्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज दिल्ली के एक कोर्ट ने नोट के बदले वोट में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की भूमिका को नकार दिया है। इसलिए पुलिस बहुत जल्द सच्चाई तक पहुंच जाएगी। यह पूरा खेल भाजपा की तरफ से प्रायोजित था जिससे कांग्रेस और सरकार बदनाम हो।
दूसरी तरफ भाजपा ने दिल्ली पुलिस द्वारा न्यायालय को यह बताए जाने पर कि मामले में कांग्रेस या सपा के किसी नेता के शामिल होने की बात जांच में सामने नहीं आई है पर कहा कि पुलिस का बयान पूरी बेइमानी को छिपाने वाला और जांच के नाम पर धब्बा है। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने पुलिस जांच पर प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि जब पूरी जांच नहीं हुई, मामले से संबंधित लोगों के बयान ही नहीं हुए तो फिर पुलिस इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंच सकती है कि पूरे मामले में लाभान्वित होने वाली कांग्रेस या इस पूरे कांड को अंजाम देने वाली सपा का इसमें कोई हाथ नहीं है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अगर जांच इसी तरह होनी है तो जांच एक छलावा है और पुलिस अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर पूरे मामले में लीपापोती करने की कोशिश कर रही है। जावडेकर ने कहा कि पुलिस की जांच में तेजी वैसे ही उच्चतम न्यायालय के दबाव के बाद आई है लेकिन लगता है कि पुलिस पूरी तरह से राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस मामले में ईमानदारी और कायदे से जांच करे तो 15 दिन के अन्दर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। वैसे भी मामला अदालत में है और अदालत को दिल्ली पुलिस को कनविंस करना होगा कि वह अगर इस निष्कर्ष पर पहुंची है तो किस बिना पर पहुंची है? फिर अदालत के रुख पर निर्भर करेगा कि केस किस दिशा में चलना है। अभी से कुछ भी दावे से कहना शायद गलत होगा।
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Friday, 22 July 2011

कैश फॉर वोट प्रकरण में सुहेल हिन्दुस्तानी की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण है


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 23rd July 2011
अनिल नरेन्द्र
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नोट के बदले वोट मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बुधवार को इस केस की अहम कड़ी की भूमिका निभाने वाले सुहेल हिन्दुस्तानी को गिरफ्तार कर लिया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता रह चुके सुहेल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने संजीव सक्सेना के साथ मिलकर तीन भाजपा सांसदों को रिश्वत देने में अहम भूमिका निभाई थी। क्राइम ब्रांच ने सुहेल को बुधवार सुबह पूछताछ के लिए बुलाया था। लगभग सात घंटे तक चली पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सुहेल के रवैये से पुलिस अधिकारी भी हैरान हो गए। दरअसल उसने पुलिस के हर सवाल का हाजिर जवाबी अन्दाज में जवाब दिया। इस दौरान उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि एक गुलदस्ता लेकर अपराध शाखा के दफ्तर में पहुंचे सुहेल ने अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए बताया कि वह राजस्थान के टोंक जिले से 15 वर्ष पहले जनपथ होटल आकर रुका था। इसके बाद उसने राशि रत्नों का व्यवसाय शुरू किया। इस दौरान उसका सम्पर्प कई बड़े लोगों व नेताओं से हुआ। इसी के चलते वह कुछ वर्ष पहले भाजपा के युवा मोर्चा में शामिल हो गए। उसके बाद उसने पार्टी में काफी अच्छी पकड़ बना ली। पूछताछ के लिए जाने से पहले सुहेल ने कैश फॉर वोट मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी का नाम लेकर उन्हें भी इस मामले में घसीटने की कोशिश की। सुहेल ने संवाददाताओं से कहा, `मुझे अमर सिंह और अहमद पटेल (सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव) के फोन आए थे। प्रधानमंत्री के करीबी लोगों से और 10 जनपथ से भी मुझे फोन आए।' लेकिन सुहेल ने फोन करने वालों के नाम नहीं बताए। पूछताछ में उसने दावा किया कि उसका रोल विश्वास मत के दौरान बीजेपी सांसदों की खरीद-फरोख्त की कोशिश का पर्दाफाश करने तक सीमित था। सुहेल हिन्दुस्तानी का असल नाम सुहेल अहमद है। उसके बारे में कहा जाता है कि वह राजनीति के गलियारों में लोगों से सम्पर्प बनाने के लिए जाना जाता है। पूर्ववर्ती राजस्थान सरकार के कुछ राजनेताओं से भी उसके अच्छे सम्पर्प बताए जाते हैं। इतना ही नहीं, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में सुहेल की निर्बाध पैठ भी बताई जाती है। सुहेल की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह पर गाज गिर सकती है। गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस को अमर सिंह समेत दो वर्तमान और दो पूर्व सांसदों की जांच की इजाजत दे दी है। मंत्रालय ने यह निर्णय बुधवार की देर शाम गृहमंत्री पी. चिदम्बरम से पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता की मुलाकात के बाद किया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अमर सिंह के अलावा समाजवादी पार्टी के सांसद रेवती रमण सिंह और भाजपा के पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा से भी इस मामले की पूछताछ की जाएगी। सुहेल ने बताया कि अमर सिंह और अहमद पटेल ने सरकार बचाने के लिए उससे सम्पर्प किया था। उन लोगों ने उन भाजपा सांसदों की खरीद-फरोख्त करने में मदद करने को कहा था जो कमजोर या मजबूरी में फंसे हों और जिनके खिलाफ कोई केस चल रहा हो। इसके एवज में उन सांसदों को पांच करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सरकार बचाने की प्रक्रिया में उससे किन लोगों ने सम्पर्प किया था, इसका पूरा ब्यौरा मिल जाएगा। इसके लिए उसके फोन कॉल रिकार्ड की जांच की जा सकती है। पुलिस को इस मामले में अमर सिंह के ड्राइवर संजय की भी तलाश है जो अब तक काबू नहीं आ सका।
राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने दिल्ली पुलिस को `कैश फॉर वोट' के मामले में जांच आगे बढ़ाने में संसद सदस्यों में सम्भावित पूछताछ की इजाजत दे दी है। राजनेताओं, सत्ता के गलियारों तथा नामचीन हस्तियों के इर्द-गिर्द घूमकर सेवाएं देने में माहिर सुहेल हिन्दुस्तानी की गिरफ्तारी के बाद अब कई नेताओं की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। राजग सरकार के समय प्रधानमंत्री कार्यालय में सेवाएं देने तथा बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के करीबी माने जाने वाले सुधीन्द्र कुलकर्णी तक इसकी आंच पहुंच सकती है। हालांकि भाजपा प्रवक्ताओं ने अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी पर अगर यह मामला आगे बढ़ता है तो संसद के मानसून सत्र में इसका मुद्दा बनना लग रहा है। फिलहाल भाजपा इस मामले की जांच और दोषी को सजा देने के बयान तक ही सीमित है। सुहेल हिन्दुस्तानी द्वारा 12 अगस्त 2008 को तत्कालीन लोकसभाध्यक्ष को लिखे पत्र के मुताबिक उसने सुधीन्द्र कुलकर्णी द्वारा रखे गए प्रस्ताव को मानकर सांसदों की कथित खरीद-फरोख्त उजागर करने में सहयोग दिया था। उसके मुताबिक कांग्रेस के बड़े नेताओं के इशारे पर सरकार बचाने का प्रयास किया जा रहा था। पत्र में बताया गया है कि इसके लिए इंडिया इस्लामिक सेंटर में सुहेल हिन्दुस्तानी ने पहले सपा के तत्कालीन सांसद उदय प्रताप सिंह से सम्पर्प किया। उन्हें अपने पास विपक्ष के बिकाऊ सांसदों की सूची होने की जानकारी दी और उदय ने इसके लिए सपा सांसद पुंवर रेवती रमण सिंह और राज्यसभा में पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह से सम्पर्प करने की सलाह दी। जाते-जाते उदय सुहेल का नम्बर भी लेते गए। इससे पहले सुहेल हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी और मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के करीबी एसपी गुप्ता से मिले थे। पत्र के अनुसार गुप्ता को भी सुहेल हिन्दुस्तानी ने विपक्ष के बिकाऊ सांसदों की सूची होने के बारे में बताया। गुप्ता ने भी इसके बाबत उन्हें मुख्यमंत्री हुड्डा तथा कांग्रेसी नेताओं से मिलाने का आश्वासन दिया। समझा जा रहा है कि इस घटनाक्रम को दिल्ली पुलिस और अदालत के सामने रखकर सुहेल हिन्दुस्तानी बड़ा राजनीतिक भूचाल खड़ा कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा के सभापति और लोकसभाध्यक्ष दोनों ने दिल्ली पुलिस को `कैश फॉर वोट' मामले की जांच आगे बढ़ाने की हरी झंडी दिखा दी है। इससे साफ है कि आने वाले समय में सपा के सांसद रेवती रमण सिंह और पूर्व महासचिव अमर सिंह की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। इस प्रकरण में अभी भाजपा, वामदल, जद(यू) समेत अन्य दल पुलिस की जांच पर पूरी नजर रखे हुए हैं। संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर `कैश फॉर वोट' मामले की गूंज सुनाई देने के आसार हैं। इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहले से गिरती छवि और गिरने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता पर सारा दारोमदार दिल्ली पुलिस की जांच और अदालतों के एटीट्यूट पर निर्भर करता है।

Thursday, 21 July 2011

कैश फॉर वोट केस ः अमर सिंह पर कसता शिकंजा


Published on 21th July 2011
अनिल नरेन्द्र
यूपीए-एक सरकार को बचाने के लिए कथित रूप से सांसदों के वोट खरीदने के आरोप की जांच के सिलसिले में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए संजीव सक्सेना को गिरफ्तार कर लिया था और सोमवार को उसे विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने पुलिस को पुख्ता जानकारी प्राप्त करने के लिए सक्सेना का तीन दिन का पुलिस रिमांड दे दिया है। गौरतलब है कि यूपीए-एक सरकार के कार्यकाल में जब वामदलों के समर्थन वापस लेने के बाद मनमोहन सिंह ने लोकसभा में अपना बहुमत साबित किया था तभी सांसदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगा था। इसी कड़ी में 22 जुलाई, 2008 को विश्वास मत से एक दिन पहले तीन भाजपा सांसदों को कथित तौर पर एक करोड़ रुपये दिए गए थे। पुलिस ने आरोप लगाया है कि 22 जुलाई को समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह ने भाजपा सांसद फगन सिंह कुलस्ते और अशोक अर्गल का संजीव से परिचय करवाया था। दावा किया गया है कि संजीव सक्सेना ने संसदीय समिति को भी गलत जानकारी देकर तथ्यों से भटकाने की कोशिश की। आरोप है कि संजीव ने ही भाजपा सांसद को एक करोड़ रुपये दिए थे। इस मामले में भाजपा के पूर्व सांसद महावीर सिंह भगोरा और फगन सिंह के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अशोक अरगल का बयान लिया जाना है। सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद शुरुआती पूछताछ में संजीव सक्सेना ने बिना झिझक के अमर सिंह के साथ अपने करीबी रिश्तों की बात कही है। उसने पुलिस को बताया कि वह सिंह के सचिव के रूप में काम करता था। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अमर सिंह के ड्राइवर संजय की तलाश जारी है। संजय का बयान इस केस में महत्वपूर्ण बन जाता है, क्योंकि वही इस बात की पुष्टि कर सकता है कि वह और संजीव सक्सेना भाजपा सांसद के आवास पर एक करोड़ रुपये लेकर देने गए थे। अमर सिंह ने दो 20 जुलाई 2008 को संजीव सक्सेना को अपना सचिव बताते हुए भाजपा सांसद अशोक अरगल से मिलाया। सक्सेना ने लोधी एस्टेट स्थित आवास पर अर्गल को एक करोड़ रुपये दिए। फगन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा ने भी सक्सेना की पहचान कर ली है। दिल्ली पुलिस ने छानबीन करके यह पता लगा लिया है कि यह पैसा किसके यूपी के बैंक से निकाला गया था। दरअसल नोटों की गड्डी पर बैंक का लेवल चिपका रह गया था। अब किस खाते से यह पैसा निकाला गया, यह पता लगाने की कोशिश हो रही है। पैसा (3 करोड़) एकमुश्त नहीं निकाला गया, यह थोड़ा-थोड़ा करके निकाला गया।
श्री अमर सिंह पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। संजीव सक्सेना ने तो सीधा आरोप लगा ही दिया है कि यह पैसा अमर सिंह ने उन्हें दिया था। अगर ड्राइवर संजय भी मिल जाता है और वह भी यह कह देता है कि संजीव सक्सेना ठीक कह रहे हैं और वह संजीव के साथ मौजूद था जब भाजपा के सांसद के पास एक करोड़ लेकर गए थे तो मामला ज्यादा संगीन हो जाएगा। सरकार और प्रशासन ने तो मामले को लटकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी पर गत शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कुछ न करने पर कड़ी फटकार लगाई थी। तब जाकर दिल्ली पुलिस हरकत में आई और संजीव सक्सेना की गिरफ्तारी हुई। यह मामला बहुत संगीन बन सकता है। इसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल हो सकती हैं। अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में लड़खड़ाने वाली यूपीए सरकार के लिए एक नया सिरदर्द पैदा हो सकता है। अपने सहयोगी रहे संजीव सक्सेना की गिरफ्तारी से बौखलाए अमर सिंह ने कांग्रेस रणनीतिकारों को चेतावनी दी है कि यदि कानून के हाथ उन तक पहुंचे तो वे सबका भंडाफोड़ कर देंगे। आरोप यह है कि कांग्रेस के कुछ रणनीतिकारों के कहने पर अमर सिंह ने भाजपा सांसदों को रिश्वत दी थी जिन्होंने अपनी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए यूपीए के पक्ष में वोटिंग की थी। तब जाकर मनमोहन सिंह सरकार बच गई थी। लेकिन उस जांच में 3 साल ढिलाई बरतने के बाद सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस हरकत में आई है। सूत्रों के अनुसार अमर सिंह कांग्रेस के रवैये से इन दिनों खासे नाराज चल रहे हैं और उन्हें इस बात का दर्द है कि आड़े वक्त में कांग्रेस जन उनसे काम निकलवा लेते हैं और बाद में भूल जाते हैं। हाल ही में अमर सिंह ने कांग्रेस के ही रणनीतिकारों के कहने पर टीम अन्ना हजारे के सबसे योग्य वकील शांति भूषण और प्रशांत भूषण के कच्चे चिट्ठे खोलने में भी मदद की थी परन्तु इसके बाद भी कानूनी शिकंजा उनकी ओर बढ़ता जा रहा है। अब उन्होंने कांग्रेस नेताओं को स्पष्ट चेतावनी दे दी है कि यदि दिल्ली पुलिस उनके द्वार पर चढ़ी तो फिर वो किसी को भी नहीं छोड़ने वाले हैं। उनके पास जो भी खुफिया जानकारी और सूचनाएं हैं, वे उन्हें सार्वजनिक कर देंगे।
Amar Singh, Anil Narendra, Cash for Vote Scam, Congress, Daily Pratap, Samajwadi Party, UPA, Vir Arjun

Friday, 22 April 2011

क्या शांति भूषण अन्ना हजारे के लिए बोझ बनते जा रहे हैं?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 22 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने वाले अन्ना हजारे के सिपहसालार प्रशांत भूषण व उनके पिता शांति भूषण एक के बाद एक नए विवाद में फंसते जा रहे हैं। जन लोकपाल विधेयक बनाने के लिए गठित संयुक्त समिति में पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण और उनके पुत्र प्रशांत भूषण को शामिल करना अन्ना को बहुत भारी पड़ रहा है। अभी सीडी विवाद चल ही रहा है कि शांति भूषण और उनके वकील पुत्र प्रशांत भूषण के खिलाफ एक याचिका अदालत में दर्ज की गई है। याचिका इलाहाबाद में कम कीमत पर आवासीय परिसर की रजिस्ट्री के बारे में है। याचिका में दावा किया गया है कि शांति भूषण और इलाहाबाद के परिसर के मालिक ने कम कीमत पर सम्पत्ति की रजिस्ट्री कराकर शासन को डेढ़ करोड़ रुपये का चूना लगाया है। याचिका में विवादास्पद सीडी के सभी तथ्यों की जांच की भी मांग की गई है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील मनोहर लाल शर्मा ने सोमवार को दायर की है। इससे पहले शर्मा ने देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में शांति भूषण और प्रशांत भूषण पर न्यायपालिका पर ओछे आरोप लगाकर उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और अपने हितों की खातिर अदालत का इस्तेमाल करने के आरोपों में दोनों के खिलाफ जांच की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि ये पिता-पुत्र न्यायपालिका के प्रति जनता की आस्था को ठेस पहुंचाने के इरादे से सुनियोजित तरीके से समय-समय पर बयानबाजी करते आ रहे हैं। यही नहीं, पिता-पुत्र ने समूची न्याय व्यवस्था और पूर्व न्यायाधीशों पर भी भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगाए। याचिका में अन्ना को आमरण अनशन करने की गलत सलाह देने का भी आरोप लगाया गया है।
अंग्रेजी के एक दैनिक में एक खबर छपी है जिसके अनुसार शांति भूषण और उनके बेटे प्रशांत भूषण को उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2009 में 10 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र वाले भूखंड आवंटित किए थे। प्रत्येक भूखंड का मूल्य साढ़े तीन करोड़ रुपये है। अखबार के अनुसार शांति भूषण और उनके बेटे ने स्वयं माना है कि योजना में पारदर्शिता नहीं थी और बिना किसी स्पष्ट मानदंड के यह आवंटन हुआ है। इन प्लाटों की कीमत सात करोड़ रुपये बताई जा रही है। ये प्लाट ग्रेटर नोएडा में दिए गए हैं। इस आवंटन को सुप्रीम कोर्ट के एक वकील विकास सिंह सेकानूनी चुनौती भी दे दी है। विकास सिंह का कहना है कि इसी स्कीम में उन्हें भी फार्म हाउस का प्लाट दिया गया है। लेकिन इस योजना में कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने आरोप लगाया है कि आवंटन के लिए बड़ी रकम का लेन-देन भी हुआ है। हालांकि उन्होंने माना कि रिश्वत के पैसे उन्होंने नहीं दिए, फिर भी प्लाट मिल गया।
शांति भूषण के कारनामों की खबरें छपने से टीम हजारे में फिर बेचैनी फैलना स्वाभाविक ही है। अभी तक बहुचर्चित सीडी प्रकरण सुलटा नहीं कि एक नया विवाद आ खड़ा हो गया है। जयंत भूषण, शांति भूषण के दूसरे पुत्र हैं। ये भी सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। उन्होंने ही मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजैक्ट नोएडा पार्प के मामले में याचिका दायर की थी। इस याचिका के चलते नोएडा पार्प का काम रुक गया था। क्या यह प्लाट जयंत को खुश करने के लिए मायावती सरकार की मेहरबानी तो नहीं थी?

Wednesday, 20 April 2011

अन्ना की मूवमेंट पर सीडी विवाद का साया

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 20 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

पिछले दो-तीन दिनों से उस सीडी को लेकर घमासान मचा हुआ जो आजकल चर्चा में है। उल्लेखनीय है कि इस चर्चित सीडी में अमर सिंह, शांति भूषण का हवाला देकर मुलायम सिंह से कह रहे हैं कि चार करोड़ रुपये में प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट के फ्लां जज को मैनेज करा देंगे। यह सीडी ऐसे समय जारी हुई है जबकि टीम अन्ना ने लोकपाल कानून के मुद्दे पर सरकार पर भारी दबाव बना लिया है। शांति भूषण और उनके बेटे प्रशांत भूषण ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य हैं। लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर जो देशव्यापी बहस शुरू हुई उसे सीडी प्रकरण ने नया मोड़ दे दिया है। अब इस घमासान में कई बड़े नेता व सिपहसालार कूद गए हैं। शांति भूषण के वकील पुन प्रशांत भूषण जहां सीडी को फर्जी, छेड़छाड़ युक्त और विभिन्न सन्दर्भों की बातचीत को तैयार किया गया प्रपंच बता रहे हैं, वहीं लोकपाल विधेयक लाने के लिए आंदोलन की अगुवाई करने वाले अन्ना हजारे ने कहा कि यदि सीडी प्रकरण में शांति भूषण दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें संयुक्त समिति से इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि हजारे ने शांति भूषण पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि ये आरोप सही नहीं हैं। अन्ना के मुताबिक प्रयोगशाला में सीडी की जांच कराई गई और पता चला कि यह फर्जी है। इस मामले में एक नया मोड़ और आ गया है। स्वामी अग्निवेश भी इसमें कूद पड़े हैं। एक निजी चैनल में स्वामी ने अमर सिंह पर संदेह जताया। अग्निवेश ने अपने सहयोगियों से अनौपचारिक बात में यह आशंका जताई कि अमर सिंह अपनी खाल बचाने के लिए इस सीडी का इस्तेमाल कर सकते हैं। शांति भूषण के बेटे प्रशांत भूषण ने सीडी में अपने पिता की आवाज होने की बात मानी है लेकिन इसे छेड़छाड़ युक्त और फर्जी सीडी बताया है। इस बारे में एक बड़े अंग्रेजी अखबार ने फोरेंसिक विशेषज्ञों के हवाले से बताया है कि सीडी से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। इस सीडी में हुई बातचीत निरन्तर और लगातार एक क्रम में हैं। हालांकि अखबार के मुताबिक फोरेंसिक विशेषज्ञों ने आवाज की सत्यता के संबंध में कुछ नहीं कहा जबकि वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण समेत एक बड़ा वर्ग सीडी में हुई बातचीत को आधार बनाकर संयुक्त समिति से शांति भूषण के इस्तीफे की मांग पर उतर आए हैं।
शांति भूषण ने इस मामले में सोमवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की वहीं अमर सिंह ने भी मानहानि व अवमानना का मामला दर्ज करने की चेतावनी दी। अमर सिंह ने शांति भूषण और प्रशांत भूषण के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा है कि सरकार विवादित सीडी से जुड़े शांति भूषण के खिलाफ आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पूरी जांच कराएगी। इस मामले में एक नया आयाम इन्कम टैक्स के पूर्व कमिशनर विश्व बंधु गुप्ता ने यह कहकर जोड़ दिया कि शांति भूषण वाली सीडी सही है। इसलिए शांति भूषण के बारे में सिविल सोसाइटी को नए सिरे से फैसला करना चाहिए। उन्होंने ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य अरविन्द केजरीवाल की छवि को लेकर भी कुछ तीखी टिप्पणियां की हैं। कुल मिलाकर अन्ना हजारे की ओर से उनकी टीम पर चौतरफा कीचड़ उछलना आरम्भ हो गया है। इन सब आरोपों में सच्चाई कितनी है, झूठ कितना यह तो समय ही बताएगा।