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Sunday, 3 July 2011

Reasons for BJP’s success in Assembly bye elections

- Anil Narendra
Bhartiya Janata Party (BJP) has won both the seats in the recent Assembly bye-elections. Dashrath Lodhi of BJP defeated Dr Tanya of Congress by a margin of 11,738 votes on Jabera seat in Madhya Pradesh, while in Bihar, the Purnia seat was won by BJP’s Kiran Kesari, defeating Ram Charitra Yadav of Congress by a margin of 23,665 votes. BJP has retained this seat. These impressive victories, once again confirm the deteriorating image and position of the Congress. The strong leadership in these States is another important factor in BJP’s impressive performance in these elections. The most important reason for sound image in BJP-ruled States is the party leader in those States. It is important that the party leader has a clean and sincere image and is sensitive towards the public, has control over bureaucracy and has right priorities. It is also important for a leader to keep his flock together and make them partners in power sharing. A committed hardcore BJP worker once told me a secret. He explained the important basic difference between BJP and the Congress. When Congress comes to power, it shares the comforts, benefits and awards of power with its workers, in other words, the worker, too is benefited, whereas, for BJP leaders, the worker is the saviour, but once the elections are over and it is time to share benefits of the power with him, the leaders become inaccessible, they shut themselves away from workers in their air-conditioned drawing rooms. Workers are not allowed even entry to their houses or offices. They want to enjoy fruits of power and privileges by themselves, they are averse to sharing the benefits of power with their workers. That is why the worker doesn’t come out in their support of his leader in the next elections and says that he is least bothered if netaji wins or looses. On the other hand, the Congress worker puts his best efforts in the next elections, as his interests are also involved in getting his leader elected. The BJP leadership in Madhya Pradesh must understand this simple equation, only then it may come to power there. If BJP has been able to achieve such an impressive success, it is due to the fact that Chief Minister of the State was from the party. Congress worker identifies himself with his leader and realizes that in case of any problem or seeking any favour, he can depend on his leader. The Congress leaders are able to win elections even in adverse conditions, as their workers labour relentlessly for the victory of their leaders.
Today, the central leadership of BJP is fraught with factionalism. Leaders are vying with each other with an eye on the primeministership and they are too busy in their own manipulations to have time for other things. They are engaged only in pulling each others’ legs. I am not the only one, who is saying such things, the senior party leader, Shri Lal Krishna Advani has himself accepted it. The former Deputy Prime Minister and leader of the BJP Parliamentary Party, LK Advani has said that Party’s credibility as regard to the sincerity has suffered a dent. He said that factionalism is fast taking roots within the party and BJP might have to pay a heavy price for it. According to inner party sources, speaking at the inaugural session of a training camp for BJP councilors at Chhatarpur Mandir, Shri Advani said that party’s performance in Corporation has been far from satisfactory and party’s image of integrity has deteriorated. Praising Ahmedabad Municipal Corporation in this regard, he said that the party is working there sincerely. He said that Delhi Pradesh BJP was, earlier plagued with factionalism, but now the factionalism is increasing day by day. He blamed some leaders of the party for this deteriorating image of the party. Probably, Shri Advani’s targets were the leaders of Delhi Pradesh BJP, but he succeeded in aiming a number of other persons also. The need of the hour is that the second level central BJP leadership should give up dreaming for the primeministership, instead BJP should project such a person as the future Prime Minister, who is capable of carrying whole party with him. I find three alternatives in the present leadership, who are experienced, whose image is clean, who can carry party workers with them and who are not too egotists to forget their roots. They are: Shri Lal Krishna Advani, Shri Murli Manohar Joshi and Shri Narendra Modi.

शव के 300 टुकड़े और इसे गैर-इरादतन हत्या बता रहे हैं


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd July 2011
अनिल रेन्द्र
कभी-कभी केसों के ऐसे फैसले सुनने को मिलते हैं कि आदमी चौंक जाता है। ऐसा ही एक फैसला बहुचर्चित नीरज ग्रोवर हत्याकांड में मुंबई की एक अदालत से आया है। गुरुवार को फैसला सुनाते हुए मुंबई के सत्र न्यायालय ने कन्नड़ अभिनेत्री मारिया सुसई राज को हत्या के आरोप से बरी कर दिया है। मालूम हो कि `क्या आप पांचवीं पास से तेज हैं' क्विज शो को नीरज ग्रोवर ने ही बनाया था जिसका संचालन शाहरुख खान ने किया था। बाला जी फिल्म्स के क्रिएटिव हेड और सिनर्जी एडलैब के एग्जीक्यूटिव पद पर काम करने वाले नीरज की हत्या का मामला तीन साल पुराना है। मलाड उपनगर में 7 मई 2008 को मारिया के नए फ्लैट में नीरज की हत्या हुई थी। इस हत्या में मारिया और जेरोम को आरोपी बनाया गया था। मारिया बॉलीवुड में अपना कैरियर बनाने के लिए नीरज के करीब आई थी। मारिया और जेरोम ने नीरज की बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी थी। उसके शव के लगभग 300 टुकड़े किए गए थे। फिर टुकड़ों को दो बैगों में भरकर ढाणे स्थित मनोट के जंगल में उसे पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश की गई थी।
अदालत ने जेरोम को गैर-इरादतन हत्या और मारिया को सिर्प सबूत मिटाने का दोषी पाया है। सेशन जज एनडब्ल्यू चांदवानी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों के खिलाफ हत्या की वजह साबित करने में विफल रहा है। अदालत में पेश किए गए सबूतों के लिहाज से उन्होंने मारिया को सिर्प सबूत मिटाने का दोषी पाया। भारतीय दंड संहिता के मुताबिक इस अपराध की सजा महज तीन साल है और मारिया इतना वक्त जेल में पहले से ही गुजार चुकी है। लिहाजा मारिया जल्द ही जेल से बाहर आ सकती है और आजादी से घूम सकती है। वहीं एमिली जेरोम को भी अदालत के फैसले से राहत मिली होगी, क्योंकि अदालत ने उसे इरादतन हत्या का दोषी नहीं पाया है। जेरोम को सजा सुनाई जा चुकी है। उसे 10 साल की जेल की सजा हुई है। अब उसे सिर्प सात वर्ष कारावास की सजा काटनी होगी। क्योंकि सुनवाई के दौरान वह पहले से ही तीन वर्ष से जेल में है। उसे केवल साक्ष्य नष्ट करने के लिए सजा सुनाई गई है जबकि जेरोम को गैर-इरादतन हत्या का दोषी पाया गया है।
इस फैसले से पीड़ित के परिजन और कानून बिरादरी का एक धड़ा क्षुब्ध है। मेरे बेटे के जितने टुकड़े मारिया और जेरोम ने किए, उन्हें उतने माह की सजा तो कम से कम मिलती। यह कहना है नीरज के माता-पिता का। जहां नीरज के पिता अमरनाथ ग्रोवर सबूत मिटाने व गैर-इरादतन हत्या में हत्यारों को सजा होने से आहत हैं, वहीं नीलम का कहना है कि मेरे जिगर के टुकड़े-टुकड़े करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए थी। मेरे जिगर के टुकड़े-टुकड़े करने वालों को कम से कम उतनी सजा तो होनी ही चाहिए थी जितने टुकड़े इन्होंने मेरे नीरज के किए।
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बाबा रामदेव का आत्मविश्वास, मनोबल तोड़ने में केंद्र असफल


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd July 2011
अनिल रेन्द्र
ऐसा नहीं लगता कि केंद्र सरकार बाबा रामदेव का आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प तोड़ पाई है। मनमोहन सरकार ने इस प्रकार के हथकंडे इस्तेमाल कर लिए और कर भी रही है पर बाबा न केवल अपने इरादों पर कायम हैं बल्कि वह इसमें नए मुद्दे भी जोड़ते जा रहे हैं। बाबा मेरठ यात्रा के दौरान गत मंगलवार को केंद्र सरकार से दो सवाल पूछे। पहला-चार जून की शाम तक जो बाबा देवता था, वह अचानक ठग कैसे बन गया? दूसरा-यह कि दिल्ली में उनके अनशन के बाद स्विस बैंक से पांच लाख करोड़ रुपये क्यों निकाले गए? इससे साबित होता है कि निकाली गई धनराशि कांग्रेस, उसके मंत्री और उसके पोषित लोगों की है। बाबा पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज में तो पूरी दाल ही काली है। सरकार ने अत्याचार की हदें लांघ दीं। रामलीला मैदान में बहू-बेटियों से बलात्कार तक की कोशिश की गई। आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। नैतिकता के धरातल पर परिवर्तन की लड़ाई लड़ी जाएगी। अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर बाबा रामदेव बोले, जो भी केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएगा, उस पर लांछन लगेंगे और उसका चरित्र हनन होगा। पतंजलि योग पीठ में सब कुछ वैधानिक है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार बाबा ने अब अपने अभियान में एक और मुद्दा जोड़ दिया है। हरिद्वार में बाबा ने काले धन और भ्रष्टाचार के साथ ही अवैध खनन को भी अपने एजेंडे में शुमार कर लिया है। उनकी योजना योग साधकों के माध्यम से इसके लिए देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाने की है। काले धन के पांच मुख्य स्रोत और उनका समाधान बताना इसका मुख्य उद्देश्य रखा गया है। शुक्रवार से पतंजलि योग पीठ में शुरू हुए योग शिविर में इसका खाका तैयार किया जा रहा है। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की तरफ से बाकायदा पत्र बांटकर योग साधकों को मुहिम से जोड़ने का प्रयास हो रहा है। बाबा ने अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए बाकायदा जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। योग साधकों और समर्थकों को बताया जा रहा है कि देश में 89 प्रकार के खनिज के रूप में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की भू-सम्पदा है, जिसका बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। इस काम में एक लाख से अधिक लोग सक्रिय हैं जबकि देशभर के मात्र 200 लोगों को ही खनन करने की इजाजत मिली हुई है। यह काले धन का सबसे बड़ा स्रोत हैं। बाबा ने काले धन के पांच स्रोत बताए हैं। ये हैं-अवैध खनन, टैक्स की चोरी, रिश्वतखोरी, विकास योजनाओं में हेराफेरी और बड़े और अधिक नोट।
उधर सीबीआई ने कथित गलत सूचना देकर पासपोर्ट बनवाने के सिलसिले में पतंजलि योग पीठ के महामंत्री और बाबा के सहयोगी वैद्य बालकृष्ण से हरिद्वार जाकर पूछताछ की। सीबीआई दल ने हरिद्वार नगर पालिका के दफ्तर जाकर जीवन-मृत्यु रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड भी खंगाले। बाबा रामदेव अपने एजेंडे पर चल रहे हैं और मनमोहन सिंह की केंद्र सरकार अपने पर।
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Saturday, 2 July 2011

धमकी की जुबान बोलने वाले पाकिस्तान का कबूलनामा


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2st July 2011
अनिल रेन्द्र
पाकिस्तान अपने बड़बोलेपन के लिए मशहूर है, खासकर जब भारत के बारे में कोई बात होती है। आए दिन उसके जनरल धमकियां देते रहते हैं कि अगर हमारे ऊपर हमला किया गया तो हम भारत के दांत तोड़ने की क्षमता रखते हैं। यहां तक कि परमाणु हमले की भी धमकी परवेज मुशर्रफ से लेकर कयानी तक दे चुके हैं। जब पाकिस्तान के रक्षामंत्री चौधरी अहमद मुख्तार का यह बयान आया या स्वीकृति आई कि जंगी मुकाबले में उनके देश की हैसियत भारत से कम है तो ताज्जुब जरूर हुआ। एबटाबाद हमले जैसी कोशिश करने पर भारत को सबक सिखाने की धमकी देने वाले पाकिस्तान की जुबान पर आखिरकार सच्चाई आ ही गई। पाकिस्तान ने मान लिया है कि सैन्य ताकत में वह भारत की बराबरी नहीं कर सकता है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने बीबीसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि सैन्यशक्ति में अगर हम भारत की बराबरी करना चाहें या उसके पास उपलब्ध सैन्य हथियार उपकरणों को हम भी खरीदना चाहें तो हम ऐसा नहीं कर सकते हैं। सरकार ने दोनों देशों के सामरिक सामर्थ्य की तुलना करते हुए कहा कि पहले तो भारत और पाक 20 से 22 दिनों तक जंग लड़ सकते थे लेकिन अब भारत ने 45 दिन तक जंग करने लायक क्षमता विकसित कर ली है। हम ऐसा नहीं कर सकते। मुख्तार ने माना कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से तकरीबन छह से सात गुणा ज्यादा बड़ी है। उनकी इस टिप्पणी को भारत के सामरिक और रणनीति विशेषज्ञ सच्चाई मान रहे हैं जिससे पाकिस्तान आंखें नहीं मूंद सकता है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका द्वारा पाकिस्तान में घुसकर की गई कार्रवाई में दुनिया के सबसे दुर्दांत आतंकी ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के कोई दो माह बाद उस देश की सप्रभुत्ता के अमेरिकी हनन का शेर शांत हो चुका है। लिहाजा मुख्तार के बयान को जुमलेबाजी नहीं मानना चाहिए। अगर पाकिस्तान आत्मघाती दुस्साहस, कोरी धमकियों का सिलसिला छोड़ दे तो हकीकत तो यह है कि पाकिस्तान की हैसियत किसी भी क्षेत्र में भारत के सामने ठहरती नहीं। अभावों के बीच व भूखे पेट लड़ाई नहीं हो सकती। सारी दुनिया जानती है कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की आज वास्तविक स्थिति क्या है। अगर अमेरिका आर्थिक मदद आज देना बन्द कर दे तो पाकिस्तान का बैंड बज जाए। भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल मजबूत ही है बल्कि दिन प्रतिदिन और मजबूत होती जा रही है। पिछले साल भारत का जीडीपी जहां 1430 बिलियन डालर अनुमानित था, वहीं पाकिस्तान का जीडीपी स्तर मात्र 175 बिलियन डालर था। वह पाकिस्तान अपने जीडीपी का बड़ा भाग फौज और सुरक्षा पर खर्च करता है जो इस आधार पर भारत के खर्च के मुकाबले 11 फीसदी से ज्यादा है। लेकिन उसकी झूठी शान तो है ही, गृह युद्ध जैसे हालात व अपने द्वारा पैदा तथा पोषित किए गए आतंकवाद से निपटने की मजबूरी भी है। सैन्य क्षेत्र में भी भारत की दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी सेना है जिसमें कुल 27 लाख, छह हजार से ज्यादा सैनिक हैं। पाकिस्तानी फौज इसके आधे से भी कम (12 लाख, 50 हजार सैन्य बल की) है। भारत के पास हथियारों का जो जखीरा है उसमें 5000 मुख्य लड़ाकू टैंक, 13000 तोपें, 1322 लड़ाकू विमान, 25 नौसैनिक विमान, 18 पनडुब्बी, 13 फ्रीगेट, 1200 बैलेस्टिक मिसाइलें और पृथ्वी, अग्नि, आकाश तथा त्रिशूल जैसी अन्य मिसाइलें हैं। इसकी तुलना में पाकिस्तान के पास 3950 तोपें, 710 लड़ाकू विमान व 21 फ्रीगेट हैं। उसके पास हत्फ, गौरी व शाहीन जैसी मिसाइलें हैं जिन पर कुछ क्षेत्रों में संदेह किया जाता है। कुल मिलाकर पाकिस्तान सैन्य दृष्टि से भारत के सामने ज्यादा दिन की लड़ाई लड़ने की क्षमता नहीं रखता। उसे अब भी अमेरिकी आर्थिक व सैन्य मदद का सिलसिला जारी है। भारत को चौधरी मुख्तार की स्वीकृति से खुश नहीं होना चाहिए और अपनी सैन्य क्षमता पर से ध्यान नहीं हटाना चाहिए क्योंकि हमें यह याद रखना होगा कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान अकेला नहीं, उसको चीन का पूरा समर्थन है। दोनों, चीन और पाकिस्तान भारत पर भारी पड़ सकते हैं। बार-बार सबूत मिलने के बाद भी अमेरिका पाकिस्तान के मामले में सुधरा नहीं और आज भी उसे मदद देने से बाज नहीं आ रहा। एक दृष्टि से देखा जाए तो पाकिस्तान की विदेश नीति भारत से ज्यादा सफल है। उसे दोनों, अमेरिका और चीन का समर्थन मिल रहा है
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अब तो गरीब की थाली से सब्जी भी गायब हो रही है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2st July 2011
अनिल रेन्द्र
सरकार ने पेट्रोल पम्प डीलरों के कमीशन की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है जिससे पेट्रोल 27 पैसे और डीजल 15 पैसे प्रति लीटर और महंगा हो गया है। इससे महंगाई और बढ़ जाएगी। पहले से ही महंगाई की मार से दबी जनता पर अब और भार पड़ जाएगा पर यूपीए सरकार को इससे कोई चिन्ता नहीं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि आम जनता को यह मार अभी कुछ और समय तक झेलनी पड़ेगी। मनमोहन सिंह ने कहा कि अगले साल मार्च तक 6 फीसदी हो सकती है मुद्रास्फीति की दर। उनके वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी कहते हैं कि डीजल, रसोई गैस और केरोसिन के दामों में हाल में की गई बढ़ोतरी को वापस नहीं लिया जाएगा। अमेरिका की यात्रा पर पहुंचे प्रणब ने बुधवार को कहा कि दामों में बढ़ोतरी का फैसला वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता। बढ़ती महंगाई के कारण गरीब आदमी की थाली से सब्जियां भी अब गायब होने लग गई हैं। अर्थशास्त्राr योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने बढ़ती कीमतों को यूं तर्पसंगत बताया। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र का प्रमुख सिद्धांत है, खपत कम करो तो महंगाई कम होगी। वस्तुओं की कीमतें कम होंगी तो वित्तीय घाटा कम होगा। इसलिए महंगाई घटाने के लिए ही कीमतें बढ़ाई गई हैं।
डीजल की बढ़ी कीमत का असर आम आदमी की थाली पर दिखना शुरू हो गया है। बाजार में सब्जियों के दाम उंचाई छूने लगे हैं। थोक की तुलना में फुटकर बाजार में यह तेजी ज्यादा दिख रही है। हालत यह है कि डीजल की बढ़ती कीमत का हवाला देकर फुटकर कारोबारी सब्जियों की मनमानी कीमतें वसूल रहे हैं। एक माह के भीतर थोक बाजार में टमाटर के भाव 10 गुणा बढ़े हैं, वहीं खुदरा कारोबारियों ने इसकी कीमत 20 गुणा तक बढ़ा दी है। महंगाई के चलते अब सलाद से टमाटर भी गायब हो गया है। थाली से हरी सब्जियां भी धीरे-धीरे नदारद हो रही हैं। डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि की वजह से सब्जियों की कीमतों में जो उछाल आया है वह थमने का नाम ही नहीं ले रहा। खुदरा कारोबारी इसका मनमाना फायदा उठा रहे हैं। दिल्ली की आजादपुर की थोक मण्डी में जो टमाटर 30 मई को 1.60 रुपये किलो था वही 28 जून तक 15 रुपये किलो बिका। खुदरा बाजार में इसकी कीमत 45 रुपये तक पहुंच गई है। जो आलू 30 मई को 800 था वह 22 जून को 1250 और 28 जून को 1125 तक पहुंच गया। यह है थोक दाम और फुटकर का तो हाल ही न पूछें। 29 जून को टमाटर फुटकर में 30 से 45 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। आलू का दाम 15 से 20 रुपये। प्याज जैसी चीज 20 से 30 रुपये प्रति किलो, फूल गोभी 30 से 40 रुपये, शिमला मिर्च 35 से 50 रुपये प्रति किलो बिकी। मानसून की वजह से भी हरी सब्जी और टमाटर की आवक प्रभावित हुई है, जिसका असर उनके दामों पर देखने को मिल रहा है। भिण्डी जो पहले 7 रुपये में बिकती थी अब 30 रुपये में बिक रही है। घीया 5 से 15, तोरई 20 से 60, करेला 10 से 35, आलू 7 से 15 तक पहुंच गया। महंगाई इस देश की सबसे बड़ी समस्या है। इससे भारत की 95 प्रतिशत जनता सीधा प्रभावित होती है और मनमोहन सरकार के पास इसको घटाने का न तो कोई फॉर्मूला है और न ही इच्छाशक्ति। प्रधानमंत्री और उनके वित्तमंत्री, उनके सिपहसालारों को ज्यादा चिन्ता ग्रोथ रेट की है। अंतर्राष्ट्रीय छवि की है। अमेरिका हमारी आर्थिक नीतियों पर क्या सोचता है यह प्रधानमंत्री के लिए ज्यादा जरूरी है बनिस्पत भारत की जनता।
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Friday, 1 July 2011

इन रेव पार्टियों ने तो तबाही मचा रखी है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 1st July 2011
अनिल रेन्द्र
पिछले दिनों रायगढ़ जिले में एक होटल में हो रही रेव पाटा पर छापा मारते हुए वहां से मुंबईं मादक पदार्थ निरोधख शाखा के एक इंस्पैक्टर समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। रायगढ़ पुलिस अधीक्षक आरडी शिंदे ने बताया कि रेव पाटा के संबंध में मुंबईं की मादक पदार्थ निरोधक शाखा के इंस्पैक्टर अनिल जाधव समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पाटा में युवाओं को मादक पदार्थ दिए जा रहे थे। जिले के खालापुर में रविवार रात हुईं इस पाटा में जाने-माने परिवारों की 59 लड़कियों समेत लगभग 290 युवा शामिल हुए। सभी को चिकित्सकीय जांच के बाद जाने दिया गया। रिपोर्ट आने के बाद पुलिस उन लोगों पर कार्रवाईं शुरू करेगी जिन्होंने मादक पदार्थ लिए थे। पुलिस ने रविवार देर रात खालापुर के होटल माऊंट व्यू में हो रही इस पाटा में छापा मारकर यहां से गांजा, चरस और कोकीन के अलावा 3.08 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। पिछले दिनों गुजरात में भी एक ऐसी रेव पाटा को पुलिस ने पकड़ा था। दोनों जगह एक बात मुख्य है। शराब, कॉल गल्र्स और बेसुध होकर नाचते, शराब और ड्रग्स लेते हुए युवाओं को पकड़ा गया। और यही आलम होता है लगभग हर रेव पाटा में। इन दोनों पाटा में अन्तर था तो बस यही कि एक गुजरात की पाटा में गिरफ्तार अभियुक्तों का संबंध राज्य के प्रातिष्ठित लोगों से है इसलिए उनके नाम उजागर नहीं हुए जबकि मुंबईं की पाटा में पकड़े गए अधिकतर लोग युवा हैं और उम्र की ऐसी दहलीज पर हैं जहां पैर फिसलने की पूरी सम्भावनाएं होती हैं। वुल मिलाकर, हर उम्र, हर दज्रे, हर तबके के लोग इसके शिकार हो रहे हैं। मुझे कोईं आार्यं नहीं होगा अगर जल्दी ही यह सुनने को मिले कि पिता एक रेव पाटा में पकड़ा गया, बीवी दूसरी में और बेटा-बेटी तीसरी रेव पाटा में पकड़े गए। हम बेवजह ही कहते हैं कि देश में नौकरियों की कमी है। देखिए कितनी नौकरियां बिखरी पड़ी हैं। एक तरफ तो गरीबी के कारण लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हैं, दूसरी ओर यह लोग लाखों रुपये इन रेव पार्टियों में शराब, ड्रग्स में उड़ा रहे हैं। देश में बेशक भुखमरी हो पर ऐसी पार्टियों को देखकर लगता है कि युवा पीढ़ी को तो खाने की कमी नहीं, वे तो पीकर ही, नशा करके ही काम चला रहे हैं। रेव पाटा ऐसे अय्याश लोगों का जमावड़ा जो शराब पीने, खुले बदन नाचने और ड्रग्स को ही जिन्दगी मानने लगे हैं उनसे तो बात करना भी बेकार है। क्योंकि वह छूटते ही कह देंगे कि आप पुराने दकियानूसी बातें क्यों कर रहे हैं। वैसे भी पािमी संस्वृति का इतना प्राभाव आज के युवाओं पर आ गया है कि वह माता-पिता की हर बात का विरोध करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं। वैसे ऐसे माता-पिता की भी कमी नहीं जिन्हें खुद सोशलाइजिंग से पुर्सत नहीं, उन्हें इसकी परवाह नहीं कि उनके बच्चे कर क्या रहे हैं, कहां जा रहे हैं, कब आ रहे हैं। सभी खुद की जिन्दगी अपने अंदाज में जीना चाहते हैं। बड़े-बूढ़ों की इज्जत करने के दिन लद गए।
सोशलाइजिंग की खातिर आज मध्यवगाय लड़कियों को जिनके लिए अपना स्टेटस मेनटेन करना अपनी इज्जत मेनटेन करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि ऐसी पार्टियों में अपनी हदें तोड़ना उतना ही आसान है जितनी आसानी से वो अपने मांबाप का विश्वास तोड़ देते हैं। इन्हें न तो अपने पापा का जन्मदिन याद रहेगा, न मांबाप की शादी की सालगिरह। इन्हें कहां, कब रेव पाटा हो रही है, यह जरूर याद रहेगा। आजकल पेसबुक आ गया है। उसमें बन्दे-बन्दी की सब डिटेल्स मिल जाती है और एक दूसरे से फोन पर सम्पर्व करने में कोईं दिक्कत नहीं होती। इन्हीं कम्युनिटी साइटों से फोन नम्बर एक्सचेंज होते हैं। वैन्यू डिसाइड होते हैं और लोग आपस में मिलने के लिए युवा बरकरार होते हैं। हम बेकार ही कहते हैं कि लोगों के पास समय नहीं, एक दूसरे के लिए या लोग अब सोशल नहीं रहे पर इन रेव पार्टियों को देखकर लगता है कि युवा तो पहले से कहीं ज्यादा सोशल हो गए हैं।
अब वह समाज के पुराने उसूलों को तोड़कर अपना नया रास्ता ढूंढने में लगे हुए हैं। देह व्यापार के बढ़ने का एक कारण यह भी है कि इन रेव पार्टियों में इतना प्री सेक्स मिलता है कि उसके बाद सेक्स का चस्का लग जाता है।
ज्वाइंट पैमिली सिस्टम का टूटना कईं मामलों में घातक साबित हो रहा है।
पहले घर के बड़े-बूढ़े जो कहते थे बच्चों को मानना पड़ता था और अनुशासन के दायरे में रहना पड़ता था। बच्चों को बड़े-बूढ़े अच्छे संस्कार देते थे, उन पर कड़ी नजर रखते थे पर अब यह सब समाप्त होता जा रहा है। पैसों की लालच ने, यह पािमी संस्वृति ने यह सब तोड़ दिया है और मुझे तो डर यह लगता है कि ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब समाज का विघटन चरम पर होगा। शादी, रिश्ते, सामाजिकता जैसी बातें सिर्प किस्से-कहानियां बनकर रह जाएंगी। वेश्यावृत्ति, नशाखोरी और बढ़ता अपराध आम बात हो जाएगी।
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भाजपा के विधानसभा उपचुनाव में सफलता के कारण

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 1st July 2011
अनिल रेन्द्र
दो राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पाटा ने दोनों सीटों पर सफलता अर्जित की है। मध्य प्रादेश की जबेरा सीट पर भाजपा के दशरथ लोधी ने कांग्रोस की डॉ. तान्या सालोमन को 11,738 वोटों के अन्तर से हराया।
भाजपा ने यह सीट कांग्रोस से छीनी है। उधर बिहार में पूर्णिया सदर सीट पर भाजपा की किरण केसरी ने कांग्रोस के रामचरित्र यादव को 23,665 वोटों से पराजित किया। इस सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार है। इन शानदार सफलताओं से एक बार फिर साबित होता है कि कांग्रोस की छवि और स्थिति कितनी खराब हो गईं है। इसका एक और महत्वपूर्ण कारण है इन राज्यों में सशक्त नेतृत्व। भाजपा शासित राज्यों में अच्छी छवि का सबसे बड़ा कारण है वहां पाटा का नेता। पाटा के नेता की छवि स्वच्छ, ईंमानदार, जनता के प्राति संवेदनशील, नौकरशाह पर वंट्रोल और सही प्राथमिकताओं को रखना अति आवश्यक है। नेता कार्यंकर्ता को अपने पास रखे और सत्ता में उनसे भागीदारी करे। मुझे बीजेपी के कर्मठ और हार्ड कोर कायकर्ता ने एक पते की बात बताईं। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रोस में एक बड़ा बुनियादी फर्व क्या है? कांग्रोस जब सत्ता में आती है, तो सत्ता का सुख, लाभ, पुरस्कार अपने कार्यंकर्ताओं से बांटते हैं यानि कार्यंकर्ता को सत्ता का लाभ मिलता है। दूसरी ओर भाजपा नेता चुनाव से पहले तो कार्यंकर्ता को माईं-बाप बना लेते हैं और चुनाव जीतने के बाद जब सत्ता सुख बांटने की बारी आती है तो वह अपने एयरवंडीशन ड्राइंग रूम में बन्द होकर रह जाते हैं, कार्यंकर्ता उनके घर, कार्यांलय में घुस भी नहीं सकता। वह सत्ता सुख, सत्ता के लाभ, प्रासाद खुद ही भोगना चाहते हैं, कार्यंकर्ताओं से बांटने को तैयार नहीं होते। यही वजह है कि अगले चुनाव में वह कार्यंकर्ता घर बैठ जाता है और कहता है कि हमारी बला से यह जीते या हारे, हमें क्या लेना-देना है? दूसरी ओर कांग्रोस का कार्यंकर्ता अगले चुनाव में पूरा दमखम लगा देता है। इसलिए क्योंकि अपने नेता को जिताने में उसका भी स्वार्थ जुड़ा होता है। जब तक भाजपा वेंद्रीय नेतृत्व को यह साधारणसी बात समझ नहीं आती वह शायद ही सत्ता में आ सवें। अगर मध्य प्रादेश, बिहार या गुजरात में भाजपा को इतनी सफलता मिल रही है तो उसका एक बड़ा कारण है वहां पाटा का मुख्यमंत्री। आम कार्यंकर्ता अपने आपको अपने नेता से आइडेंटीफाईं करता है और उसे मालूम है कि उसे कोईं भी समस्या होगी या उसका कोईं काम होगा तो वह अपने नेता पर भरोसा कर सकता है।
कांग्रोस में वुछ नेता चाहे जितनी भी विपरीत हवा हो, चुनाव जीत जाते हैं क्योंकि उनके कार्यंकर्ता उन्हें जिताने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं।
आज भारतीय जनता पाटा के वेंद्रीय नेतृत्व में इतनी गुटबाजी है, प्राधानमंत्री बनने की होड़ लगी हुईं कि उन्हें सिवाय अपना जोड़तोड़ करने की किसी को पुर्सत नहीं है। एक-दूसरे की टांग खींचना, नम्बर घटाने के खेल में यह दिन-रात जुटे हुए हैं। यह बात मैं अकेला नहीं कह रहा, खुद पाटा के दिग्गज नेता श्री लाल वृष्ण आडवाणी ने हाल ही में कही है। पूर्व उपप्राधानमंत्री और भारतीय जनता पाटा संसदीय दल के अध्यक्ष लाल वृष्ण आडवाणी ने कहा है कि ईंमानदारी के मामले में पाटा की साख गिरी है। उन्होंने कहा कि पाटा में गुटबाजी अब तेजी से बढ़ रही है। इससे भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। भाजपा के अंदरुनी सूत्रों के अनुसार आडवाणी ने दिल्ली नगर निगम के भाजपा पार्षदों के लिए दिल्ली के छतरपुर मंदिर में आयोजित प्राशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र में कहा कि पाटा का निगम के कामों में तो प्रादर्शन अच्छा नहीं रहा है, ईंमानदारी के मामले में पाटा की साख गिरी है। इस मामले में उन्होंने अहमदाबाद नगर निगम की तारीफ करते हुए कहा कि वहां ईंमानदारी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रादेश भाजपा में पहले भी गुटबाजी थी, अब यह गुटबाजी और बढ़ रही है। उन्होंने साफ कहा कि पाटा की साख गिराने के लिए खुद पाटा के वुछ नेता जिम्मेदार हैं। आडवाणी जी ने बेशक यह बातें दिल्ली प्रादेश भाजपा नेताओं के लिए कही हों पर इशारे- इशारे में वे एक तीर से कईं शिकार कर गए हैं। आज की आवश्यकता यह है कि भाजपा के वेंद्रीय नेतृत्व के दूसरी पंक्ति के नेता प्राधानमंत्री बनने का सपना छोड़े और भाजपा ऐसे व्यक्ति को पीएम के तौर पर प्राोजेक्ट करे जो पूरी पाटा को साथ लेकर चल सके। वर्तमान नेतृत्व में मुझे तो ऐसे तीन ही विकल्प नजर आते हैं जिन्हें अनुभव है, जो ईंमानदार छवि के हैं, जो पाटा कार्यंकर्ताओं को साथ लेकर चला सकते हैं, जिनमें अहंकार इतना नहीं आया कि वह अपनी जमीन ही भूल जाएं—ये हैं श्री लाल वृष्ण आडवाणी, श्री मुरली मनोहर जोशी और श्री नरेन्द्र मोदी।
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