Anil Narendra Blog
AAJ KI AWAZ आज की आवाज़
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Tuesday, 19 May 2026
चीन से क्या लेकर लौटे ट्रंप
Saturday, 16 May 2026
ईरान की न्यूक्लियर धमकी
अमेरिका की तरफ से शांति प्रस्ताव पर ईरान के जवाब को खारिज किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में फिर से युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। अमेरिका के प्रस्तावों का ईरान की ओर से दिए जवाब से राष्ट्रपति ट्रंप बौखला गए हैं। उन्हें ईरान का जवाब बिल्कुल पसंद नहीं आया। उधर ईरान ने अमेरिका को ऐसी धमकी दे दी है जो ट्रंप के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। पहले से ही जो शांति वार्ता वेंटिलेटर पर थी, वो अब और नाजुक हालत में पहुंच सकती है। इस बार ईरान ने साफ कर दिया है कि वो वेपन्स ग्रेड परमाणु बम बनाने से सिर्फ एक कदम दूर है और इसे हासिल करने का आदेश कभी भी दे सकता है। परमाणु हमले को लेकर ईरान ने सख्त चेतावनी देते हुए लहजे में 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम को शुद्ध करने की बात कही है। ईरान के संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने मंगलवार को कहा है कि अगर ईरान पर फिर हमला हुआ तो वह यूरेनियम को 90 प्रतिशत शुद्ध कर सकता है। ऐसे में यह यूरेनियम परमाणु हथियार के लिए कारगर होगा। यह चेतावनी उन्होंने एक्स के माध्यम से दी है। पिछले जून 2025 में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से कहा गया था कि इजरायल और यूएस के हमले की वजह से ईरान के यूरेनियम संदर्भ की क्षमता को नुकसान पहुंचा था। फिलहाल, जो संवर्धित यूरेनियम 60 प्रतिशत ईरान के पास है। जिसकी मात्रा लगभग 400 किलो है, फिलहाल इसके बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं है। अमेरिका लगातार ईरान से परमाणु कार्यक्रम छोड़ने की मांग कर रहा है। उधर अमेरिकी सीक्रेट एजेंसियों की तरफ से कहा गया है कि जब तक ईरान के इस यूरेनियम संवर्धन को हटाया नहीं जाता तब तक किसी तरह का असर ईरान परमाणु कार्यक्रम पर नहीं पड़ेगा। 28 फरवरी से जारी जंग में फिलहाल सीजफायर लागू है। लेकिन यह बेहद ही संवेदनशील सीजफायर माना जा रहा है। ऐसे में दोनों पक्ष किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। अमेरिका लगातार मांग कर रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ दे। लेकिन ईरान भी अपनी शर्तें पर अड़ा हुआ है। ईरान बोला-अमेरिका के पास प्रस्ताव स्वीकार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं, वहीं अमेरिका के पास ईरान की तरफ से बताए गए 14 सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। ऐसा ईरान के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है। जितना अमेरिका देर करेगा, वहां के टैक्सपेयर्स को उतनी ही बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने साफ कहा है कि ईरान हर विकल्प पर राजी है। पलटवार को तैयार है। ऐसा हमला करेगा कि अमेरिका भी चौंक जाएगा। ईरान अब झुकने के मूड़ में नहीं दिख रहा है। पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो हम 90 प्रतिशत तक जाएंगे। अब जब ट्रंप दोबारा सत्ता में हैं और तेहरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहे हैं तो ये न्यूक्लिर कांड पूरी दुनिया को एक ऐसी जंग में झोंक सकता है जिसे रोकना शायद किसी के बस में नहीं होगा।
-अनिल नरेन्द्र
Thursday, 14 May 2026
नेतन्याहू की खुली चेतावनी, अभी जंग हो सकती है
ईरान और अमेरिका के बीच हालिया युद्ध विराम के बावजूद मध्य-पूर्व में तनाव की लपटें एक बार फिर तेज हो गई हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक अमेरिकी टीवी चैनल में एक विस्फोटक इंटरव्यू देते हुए साफ कर दिया है कि ईरान का परमाणु खतरा टला नहीं है। नेतन्याहू का यह संदेश न केवल ईरान बल्कि ट्रंप प्रशासन और पूरी अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सीबीएस के पत्रकार स्कॉट पेली को दिए 18 मिनट के साक्षात्कार में पहली बार ईरान के परमाणु भंडार की डिटेल दीं। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अभी भी 440 किलोग्राम से अधिक 60 प्रतिशत तक संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम का भंडार है। नेतन्याहू ने सख्त लहजे में कहा: युद्ध विराम अपनी जगह है, लेकिन परमाणु खतरा खत्म नहीं हुआ है। आप वहां जाएंगे और उसे हटा देते है... अभी काम पूरा होना बाकी है। नेतन्याहू ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि इजरायल को अब अमेरिका की सैन्य सहायता (3.8 बिलियन डालर सालाना) पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होने की योजना बना रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर बिना किसी बाहरी दबाव के कार्रवाई कर सके। इस इंटरव्यू के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रुथ सोशल पर लिखा ः हम इजरायल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। बेंजामिन एक महान नेता हैं और हम दोनों एक ही पेज पर हैं। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और इजरायल की ईरानी नीति और भी आक्रामक हो सकती है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए जो शांति प्रस्ताव भेजा था, उसे इजरायल ने भी अस्वीकार्य करार दिया है। इजरायल का एक ही स्टैंड है जब तक सारा एनरिच्ड यूरेनियम देश से बाहर नहीं जाता कोई समझौता नहीं होगा। नेतन्याहू के इस स्टैंड ने साफ कर दिया है कि इजरायल एक तरफा कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। जहां एक तरफ दुनिया शांति की उम्मीद लगाई बैठी है, वहीं नेतन्याहू का यह बयान यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा के लिए निर्णायक होने वाला हो सकता है। क्या यह केवल एक कूटनीतिक दबाव है या इजरायल सच में किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में है? अमेरिका जहां ईरान के साथ शांति चाहता है, वहीं इजरायल इस दिशा में बड़ा रोड़ा दिख रहा है। अमेरिका बेशक ईरान से युद्ध खत्म करना चाहता हो लेकिन इजरायल है कि उसे यह करने नहीं दे रहा है। अमेरिका एक तरफ चाहता है कि ईरान के साथ उसकी सुलह हो जाए, वहीं इजरायल ऐसा होने नहीं देगा। लड़ाई जारी रखने में बेंजामिन नेतन्याहू का निजी स्वार्थ भी है। उस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं और इजरायली अदालतों में उनके खिलाफ यह केस चल रहे हैं। उनसे बचने के लिए नेतन्याहू कहीं न कहीं युद्ध को बढ़ावा देता है और इसकी आड़ में अदालतों से बचता रहता है। इसीलिए अगर ईरान से युद्ध विराम हो तो वह लेबनान में युद्ध शुरू कर देता है। जब ईरान और अमेरिका की सीजफायर की बात हुई तब भी नेतन्याहू ने साफ कहा कि इसमें इजरायल-लेबनान युद्ध शामिल नहीं है। वह मध्य-पूर्व में किसी भी डील को तोड़ने में लगा रहता है। असल युद्ध का कसूरवार नेतन्याहू है।
-अनिल नरेन्द्र
Tuesday, 12 May 2026
सीजफायर और जंग
Saturday, 9 May 2026
ईरान ने खाड़ी देशों पर हमला क्यों किया?
Thursday, 7 May 2026
मिनाब स्कूल पर हमले पर पेंटागन की चुप्पी
पूर्व शीर्ष सैन्य वकील समेत अमेरिका के पांच पूर्व अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में ईरान के एक स्कूल पर हुए घातक हमले में संभावित अमेरिकी भूमिका को स्वीकार न रकने पर पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) की आलोचना की है। इनमें से कुछ ने कहा कि इतने लंबे समय बाद भी हमले की बुनियादी जानकारी तक जारी न करना बेहद असामान्य है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआती कार्रवाई के दौरान मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल गिरी। जिसमें करीब 110 बच्चे समेत 168 लोगों की मौत हुई। इसके बाद बीते दो महीनों में पेंटागन ने सिर्फ इतना कहा है कि इस घटना की जांच जारी है। मार्च की शुरुआत में अमेरिकी मीडिया ने खबर दी थी कि अमेरिकी सैन्य जांचकर्ताओं का मानना है कि शायद अमेरिकी बल अनजाने में स्कूल पर हमले के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन वे अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचे थे। बीबीसी ने इस हमले की पारदर्शिता की कमी के आरोपों पर कई सवाल पूछे, जिस पर पेंटागन के एक अधिकारी ने कहा, इस घटना की जांच जारी है। लेफ्टिनेंट कर्नल रेचल ई वेनलैंडिंगम कहती हैं कि अमेरिका की मौजूदा स्थिति सामान्य प्रतिक्रिया से साफ तौर पर अलग है। वैनलैंडिंगम अमेरिकी वायुसेना में जज एडवोकेट जनरल रह चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों ने कम से कम युद्ध कानून के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता दिखाई थी। मौजूदा प्रशासन के बयानों में जबावदेही की प्रतिबद्धता गायब है। सबसे अहम यह सुनिश्चित करना भी कि ऐसा दोबारा न हो। राष्ट्रपति ट्रंप ने 7 मार्च को कहा था कि उनके विचार में मिनाब हमले के लिए ईरान जिम्मेदार है, लेकिन उन्होंने कोई सुबूत नहीं दिया। कुछ दिन बाद जब उनसे मिनाब स्कूल के पास सैन्य अड्डे पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल गिरने का वीडियो दिखाए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहाः मैंने यह नहीं देखा। साथ ही ट्रंप ने बिना किसी सुबूत दावा किया कि ईरान के पास भी टॉमहॉक मिसाइलें थीं। 11 मार्च को जब उनसे उन खबरों के बारे में पूछा गया जिसमें कहा गया था कि शुरुआती सैन्य जांच में पाया गया कि अमेरिका ने स्कूल पर हमला किया था तो ट्रंप ने कहा मुझे इसके बारे में नहीं पता। अमेरिका के रक्षामंत्री पीटहेगसेथ से 4 मार्च को बीबीसी ने इस हमले पर सवाल किया था तो उन्होंने कहा, मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि हम इसकी जांच कर रहे हैं। यही नहीं अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस हमले पर कई सवालों के जवाब देने से इंकार कर दिया। पिछले महीने बीबीसी ने स्वतंत्र रूप से हमले की वीडियो की पुष्टि की थी जिसमें स्कूल के पास ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के अड्डे पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल गिरती दिख रही थी। पेंटागन के एक वरिष्ठ पूर्व सलाहकार वेस ब्रायंट ने बीबीसी से कहा कि शुरुआती सैन्य जांच आमतौर पर दो बातें तय करने के लिए होती है। पहली, क्या नागरिक क्षति वास्तव में हुई? दूसरी क्या उस समय अमेरिका उस इलाके में सक्रिय था या नहीं? जब दोनों शर्तें पूरी हो जाती हैं, तभी औपचारिक जांच शुरू की जाती है। प्रक्रिया के लिहाज से यह और भी साफ संकेत देता है कि वे पहले से जानते हैं कि वह अमेरिका की वजह से हुआ नहीं तो वे जांच नहीं कर रहे होते। वे बस इसे स्वीकार नहीं करना चाहते या इस पर बोलना नहीं चाहते। पिछले साल अमेरिका के रक्षा विभाग ने नौकरियों की कटौती की थी, उसमें ब्रायंट भी शामिल थे। अमेरिका स्वीकार करे या न करे उसने मानवता का कत्ल किया है जिसे कभी माफ नहीं किया जा सकता।
-अनिल नरेन्द्र