Thursday, 15 January 2026

आर-पार की लड़ाई


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच अकसर टकराव देखने को मिलता है। पर इस बार पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव है और यह लड़ाई अब आर-पार की बनती दिख रही है। कुलपतियों की नियुक्ति से लेकर राज्यपाल की भूमिका और एसआईआर तक दोनों के भेद कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। लेकिन अब जो लड़ाई है वह आर-पार की लगती दिख रही है, इस बार फ्लैश पाइंट पर पहुंचती दिख रही है। ममता बनर्जी लंबे समय से केंद्रीय एजेंसियों- ईडी, सीबीआई और अन्य को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाती रही हैं। टीएमसी का दावा है कि ये एजेंसियां भाजपा सरकार के इशारों पर काम कर रही हैं। खासकर चुनावों से पहले। उदाहरण के लिए हाल ही में ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी की गतिविधि को लिया जा सकता है। लेकिन पॉलिटिक्ल कसंलिटिंग फर्म आई-पैक और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय के छापों की वजह से जो टकराव चल रहा है उसने केंद्र और राज्य की एजेंसियों को भी आमने-सामने ला दिया है। ईडी का आरोप है कि ममता ने उसकी कार्रवाई में बाधा डाली और बंगाल पुलिस उनकी सरकार के निर्देश पर मनी लांड्रिंग जांच को विफल करने का प्रयास कर रही है। वहीं ममता का आरोप है कि केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियां राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करने में लगी हुई हैं। ममता का दावा है कि ईडी ने छापा मारकर सबूत नहीं बल्कि उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति संबंध दस्तावेज उठाने की कोशिश की। ममता का छापे के दौरान पहुंच कर कुछ फाइलों को जबरदस्ती ईडी अफसरों के हाथ से छीनने का भी आरोप लगा है। ईडी ने इस मामले में मुख्यमंत्री, पुलिस प्रमुख व अन्य के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है जहां प्राथमिक सुनवाई भी हो गई है इससे पहले ईडी कोलकाता हाईकोर्ट भी गई। वहीं ममता का कहना है कि वह सीएम की हैसियत से नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख के तौर पर मौके पर पहुंची थीं। हालांकि यह भेद करना मुश्किल है कि वह कब पार्टी प्रमुख हैं और कब सरकार प्रमुख। ममता ने ईडी की छापेमारी को राजनीतिक रंजिश बताते हुए न सिर्फ सड़क पर उतर कर विरोध किया बल्कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाए। ममता के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी कहा कि एजेंसियां हथियारबंद हैं और इसके सहारे भाजपा चुनाव में हेरफेर का प्रयास कर रही है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का समय ज्यो-ज्यों करीब आ रहा है, राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति गंभीर होती जा रही है। अब तो यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या राज्य राष्ट्रपति शासन की दिशा में बढ़ रहा है? यह सवाल इसलिए भी प्रासंगिक है कि हाल के वर्षों में ममता और केंद्रीय एजेंसियां, राज्यपाल और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों पर बार-बार चुनौतियां खड़ी की हैं। केंद्र और विपक्षी दलों वाले राज्यों के बीच अनबन का पुराना इतिहास है लेकिन बंगाल में अगर यह ज्यादा उग्र दिखता है तो वजह दोनों तरफ से ताकत बढ़ाने और नियंत्रण की कोशिश है। यह किसी से छिपा नहीं कि भाजपा पश्चिम बंगाल में अपना शासन चाहती है और इसके लिए साम, दाम, दंड और भेद सभी हथकंडे अपना रही है। मुश्किल यह भी है कि पश्चिम बंगाल में डबल इंजन की सरकार नहीं है। वहां की नौकरशाही पर ममता का कंट्रोल है इसलिए केंद्र अपनी एजेसियों का इस्तेमाल कर रही है। संवैधानिक संस्थाओं के बीच इस तरह का संघर्ष किसी के हित में नहीं है। पर लगता यह है कि ममता आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 13 January 2026

हजारों ईरानियों के खून से सने हैं ट्रंप के हाथ


ईरान में महंगाई के खिलाफ 13 दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बीच गुरुवार रात को हालात और बेकाबू हो गए। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन फैल चुका है। प्रदर्शनकारियों ने सड़के ब्लाक की, आग लगाई। लोग खामेनेई की मौत और इस्लामिक रिपब्लिकन का अंत हुआ, जैसे नारे लगा रहे थे। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारी क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। वह नारा लगा रहे थे यह आखिरी लड़ाई है शाह पहलवी लौटेंगे। अमेरिकन ह्ममून राइट एजेंसी के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक 200 लोग मारे गए हैं। जिसमें 8 बच्चे शामिल हैं। एक पुलिस अधिकारी की भी चाकू मारकर हत्या कर दी गई। जबकि 2270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरान में महंगाई के खिलाफ आम लोगों का विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे तेहरान बनाम वाशिंगटन होता जा रहा है। ईरानी मीडिया खुलेआम कह रहा है कि प्रदर्शनकारियों को सीआईए और मोसाद हवा व मदद दे रहा है। प्रदर्शन की आड़ में वाशिंगटन और तेल अवीव सत्ता परिवर्तन करवाना चाहता है। वह खामेनेई को भगाना चाहता है और ईरान के मुल्ला सत्ता को उखाड़ फेंक शाह पहलवी को सत्ता पर बिठाना चाहता है। इसके पीछे ईरान का तेल और अन्य कीमती खनिज पदार्थ ट्रंप अपने हाथ में लेना चाहता है। इसमें कोई शक नहीं कि ईरानी जनता महंगाई, बेरोजगारी से परेशान है और इसलिए सड़कों पर उतरी है। पर इस असंतोष का फायदा ट्रंप उठाना चाहते हैं और इस बहाने वह सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं। पर यह काम इतना आसान नहीं होगा। ईरानी एक बहुत बहादुर और लड़ाकू कौम है। वह अपनी सरकार से नाराज तो हो सकते हैं। पर वह अपने देश की कमान ट्रंप के हाथ में नहीं देना चाहेंगे। प्रदर्शनों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने शुक्रवार को स्पष्ट और सख्त संदेश दिया कि इस्लामिक गणराज्य किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेगा। सरकारी टीवी पर प्रसारित भाषण में 86 वषीय खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को विदेश समर्पित तत्व करार दिया और कहा कि उनका उद्देश्य ईरान को अस्थिर करना है। खामेनेई ने विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति के हाथ हजारों ईरानियों के खून से सने हैं। दरअसल ईरान की समस्या बहुत हद तक अमेरिकी और पश्चिम देशों ने पैदा की हुई है। वर्षों से ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय भी परमाणु हथियारों के कार्यक्रम पर रोक नहीं लगाने के आरोप में अमेरिका और यूरोप ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लाद रखे हैं। इन पाबंदियों की वजह से ईरान की इकोनॉमी डूबने की कगार पर पहुंच चुकी है। दशकों का इन पाबंदियों की वजह से ईरान को कभी संभलने का मौका नहीं मिला। ताजा विरोध प्रदर्शन देश के अधिकतर हिस्सों में फैल चुका है। इंटरनेट बंद है और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में चिंता है। पर यह ईरान का अंदरूनी मामला है और एक संप्रभु देश के मामले में अमेरिका या और किसी देश को कूदने का भी अधिकार नहीं है। अमेरिका और इजरायल आए दिन ईरान पर सैनिक कार्रवाई करने की धमकी दे रहा है। ईरान की जनता को ही अंतिम फैसला करना होगा कि वह क्या चाहते हैं?
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 10 January 2026

मादुरो को अचानक सत्ता से हटाया तो क्या होगा?


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए सैन्य अभियान को अधिकृत करने से ठीक पहले अमेरिका की गुप्तचर सेवा सीआईए ने एक गोपनीय आंकलन पूरा किया जिसमें यह जांच की गई कि अगर मादुरो को अचानक सत्ता से हटा दिया जाता है तो वेनेजुएला की आंतरिक स्थिति कैसी होगी? न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप द्वारा प्रत्यक्ष कार्रवाई के जोखिमों और परिणामों का आकंलन करने के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने गुप्त विश्लेषण का अनुरोध किया था। रिपोर्ट में अमेरिका के नेतृत्व में तख्तापलट की संभावना पर कम और मादुरो के लिए व्यावहारिक निकास परिदृष्टियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया था, जिसमें बातचीत के माध्यम से समझौते, निरन्तर अमेरिकी दबाव और अंतिम उपाय के रूप में बल प्रयोग शामिल थे। खुफिया आंकलन से अवगत लोगों ने बताया कि सीआईए ने मादुरो के पद छोड़ने के लिए एक ही संभावित परिणाम की कल्पना करने के बजाए कई विकल्पों पर विचार किया। इनमें बातचीत के जरिए सत्ता हस्तांतरण शामिल था, जिसमें मादुरो स्वेच्छा से पद छोड़ देते, प्रतिबंधों और संपत्ति जब्ती के माध्यम से दबाव बढ़ाना और अन्य विकल्पों के विफल होने पर जबरन निष्कासन की संभावना शामिल थी। इस विश्लेषण का उद्देश्य ट्रंप द्वारा द्वारा वेनेजुएला के एक अत्याधिक सुरक्षित सैन्य ठिकाने के खिलाफ उच्च जोखिम वाले अभियान की मंजूरी देने पर विचार करते समय उच्चस्तरीय निर्णय लेने में मार्गदर्शन करना था। रिपोर्ट से परिचित अधिकारियों ने कहा कि इसमें राष्ट्रपति के अंतिम निर्णय को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीआईए की नजर में सबसे संभावित उत्तराधिकारी कौन था? इस आकलन के सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में से एक उत्तराधिकारी पर इनका दृष्टिकोण था, उप राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगज। रोड्रिगज को उस व्यक्ति के रूप में पहचाना जो मादुरो को हटाए जाने की स्थिति में तुरन्त सत्ता संभालने के लिए सबसे उपयुक्त थीं। हालांकि कुछ सांसदों और वेनेजुएला के नागरिकों ने विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को संभावित वैकल्पिक नेता के रूप में देखा है, लेकिन खुफिया समीक्षाओं ने इस बात पर संदेह जताया है कि क्या उनके पास मादुरो के बाद की स्थिति में जल्दी से सत्ता संभालने के लिए आवश्यक संगठनात्मक ढांचा या राजनीतिक प्रयास है? खुफिया जानकारी से परिचित अधिकारियों के अनुसार सीआईए को संदेह था कि क्या विपक्ष जनसमर्थन को राज्य संस्थाओं, सेना और सुरक्षा सेवाओं पर प्रभावी नियंत्रण में बदल पाएगा? चिंता वैचारिक नहीं बल्कि व्यावहारिक थी, स्पष्ट और व्यवहार्य उत्तराधिकारी के बिना मादुरो को हटाने से अस्थिरता कम होने के बजाए और बढ़ सकती थी। सीआईए का यह आंकलन सही साबित होता दिख रहा है। वेनेजुएला में न तो सत्ता परिवर्तन हुआ और न ही मौजूदा सरकार और देशवासियों में अमेरिका के प्रति समर्थन बढ़ता दिख रहा है। निकोलस मादुरो को तो हटा दिया पर फिलहाल उनके उत्तराधिकारी डेल्सी रोड्रिगज वैसी ही बातें कर रही हैं जैसे मादुरो करते थे। आगे चलकर बदल जाए तो और बात है। अभी तो वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति, डेल्सी रोड्रिगज ने कहा है कि देश पर वेनेजुएला की सरकार शासन कर रही है, न कि कोई विदेशी शक्ति। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उन दावों को खारिज कर दिया, जिन्होंने कहा था कि उन्हें वेनेजुएला तक पूरी पहुंच चाहिए। रोड्रिगज ने कहा यहां कोई युद्ध नहीं है क्योंकि हम युद्ध में नहीं हैं। हम एक शांतिप्रिय लोग हैं। एक शक्तिशाली देश हैं, जिस पर हमला किया गया और आाढमण किया गया। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि वेनेजुएला के अंतरिम अधिकारी 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित तेल अमेरिका को हस्तांतरित करेंगे। 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 8 January 2026

अंकिता भंडारी केस का सच सामने आना चाहिए


अंकिता भंडारी हत्याकांड केस में वीआईपी का नाम सामने आने के बाद न्याय की मांग ने नए सिरे से तूल पकड़ लिया है। सामाजिक संगठनो और कांग्रेस ने रविवार को कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने देहरादून में मुख्यमंत्री आवास तक जाने की कोशिश की। इधर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी मामले में न्याय की मांग पर प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। इस मुद्दे को लेकर 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया गया है। इसके अलावा आने वाले दिनों में मशाल जुलूस और प्रदर्शनों का सिलसिला भी जारी रहने की उम्मीद है। बता दें कि अंकिता भंडारी मर्डर केस क्या है? अंकिता भंडारी (19) वन्तारां रिजार्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। 18 सितम्बर 2022 को वह अचानक लापता हो गई। कुछ दिनों बाद उसका शव चीला कैनाल में बरामद हुआ। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई। उन्हें हत्या, सबूत मिटाने और अन्य गंभीर आरोपों के तहत सजा मिली। कोर्ट ने अंकिता के परिवार को मुआवजा भी देने का आदेश दिया। हाल में अंकिता केस ने सोशल मीडिया और कुछ वीडियो-ऑडियो क्लिप की वजह से वीआईपी का नाम चर्चा में आया। हालांकि पुलिस ने ऐसे किसी व्यक्ति की भूमिका से इंकार किया है। उर्मिला सनावर नाम की महिला ने ये क्लिप शेयर किए थे, जिसमें एक शख्स को गट्टू नाम का बताया गया। इसके बाद बड़े नेता यानि वीआईपी का नाम सामने आया। आरोप लगा कि वीआईपी भाजपा का एक सीनियर नेता है। उत्तराखंड महिला मंच के बुलाने पर 4 जनवरी को देहरादून में जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। प्रोटेस्ट को उत्तराखंड क्रांति दल, कांग्रेस और कई संगठन अपना समर्थन दे रहे हैं। किन्नर भी न्याय के लिए सामने आए हैं। इस पूरे मामले में सीबीआई जांच, वीआईपी का नाम और जितनी शंकाएं उठ रही हैं, उनकी जांच करवाने को लेकर उत्तराखंड महिला मंच द्वारा बुलाए गए प्रोटेस्ट में हजारों युवाओं ने भी भाग लिया। देहरादून में इस प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस व कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त नोंकझोंक भी हुई। वहीं भाजपा ने जिला मुख्यालय में अंकिता भंडारी मामले को लेकर कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया और कांग्रेस के पुतले भी फूंके। कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद), महिला मंच, वामपंथी दलों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करते हुए हत्याकांड में सफेदपोश के नाम का खुलासा किए जाने के लिए प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की अपनी मांग को दोहराया। इस विरोध मार्च में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश येचुरी ने कहा कि हत्याकांड की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी शेखर सुभात द्वारा मामले में किसी वीआईपी की संलिप्तता न होने संबंधी बयान से सहमत नहीं हुआ जा सकता। येचुरी ने कहा कि उनकी मांग है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई से कराई जाए ताकि वीआईपी का पता चल सके। हमारा भी मानना है कि अब यह मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि असलीयत का पता चलना ही चाहिए। अगर सरकार इतनी निष्पक्ष है तो क्यों नहीं सीबीआई जांच करा लेती। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और धामी सरकार पर यह आरोप भी नहीं लगेगा कि वह इस व्यक्ति वीआईपी को बचाने के लिए मामले की लीपापोती कर रही है।
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 6 January 2026

क्या शाहरुख खान गद्दार हैं?


ऐसा कहना कुछ भाजपा के नेताओं का है क्योंकि शाहरुख खान की आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) कें टीम ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को अपनी टीम के लिए खरीद लिया। मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल 2026 के लिए 9 करोड़ रुपए से अधिक में खरीदा था। बॉलीवुड सुपर स्टार शाहरुख खान टीम के मालिकों में से एक हैं। अब खबर आई है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कोलकाता नाइट राइडर्स को बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से रिलीज करने के लिए कहा है। बीसीसीआई के सेक्रेट्री देवजीत सैकिया ने एएनआई को बताया है कि ये फैसला हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए लिया गया है। बोर्ड ने केकेआर को रहमान के बदले किसी दूसरे खिलाड़ी को रखने की इजाजत दे दी। इससे पहले भारत के दक्षिण पंथी संगठन और कुछ भाजपा के नेताओं ने मुस्तफिजुर को केकेआर टीम में शामिल करने पर शाहरुख खान की जमकर आलोचना की थी। राम भद्राचार्य ने शाहरुख खान पर निशाना साधते हुए पीटीआई से कहा कि केकेआर में मुस्तफिजुर रहमान को शामिल करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पहले देवकी नंदन ठाकुर ने भी बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ कथित हिंसा का हवाला देते हुए केकेआर के फैसले पर सवाल उठाया था और कहा था, बांग्लादेश में हिन्दुओं की निर्ममता से हत्या की जा रही है, उनके घर जलाए जा रहे हैं, उनकी मांओं और बोटियों से बलात्कार हो रहा है। इस तरह की क्रूर हत्याओं को देखने के बाद कोई इतना बेरहम कैसे हो सकता है कि उस देश के किसी क्रिकेटर को अपनी टीम में शामिल करे? वहीं भाजपा नेता और यूपी में सरधना के पूर्व विधायक संगीत सिंह सोम ने मुस्तफिजुर को केकेआर में शामिल करने के लिए शाहरुख खान को गद्दार तक कह दिया। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान को भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है। संगीत सोम ने मेरठ में कहा था एक तरफ बांग्लादेश में हिन्दुओं का कत्लेआम हो रहा है, दूसरी तरफ आईपीएल नीलामी में क्रिकेटरों को खरीदा जा रहा है। आज बांग्लादेश में भारत विरोधी नारे लग रहे हैं, प्रधानमंत्री को गालियां दी जा रही हैं, लेकिन शाहरुख खान जैसे गद्दार 9 करोड़ रुपए खर्च करके उनकी मदद कर रहे हैं। इन टिप्पणियों की विपक्षी नेताओं और मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने बड़ी निंदा की है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहती हूं कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों को उस पूल में किसने डाला? यह सवाल बीसीसीआई और आईसीसी के लिए है। गृहमंत्री के बेटे जय शाह को जवाब देना चाहिए कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों को उस पूल में किसने डाला जहां आईपीएल खिलाड़ियों की खरीद-बिक्री होती है और नीलामी होती है। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने शाहरुख खान पर हुए हमलों को भारत की बहुलता पर हमला बताया। गुरुवार को उन्होंने एक्स पर लिखा, सुपरस्टार शाहरुख खान को गद्दार कहना भारत की बहुलता पर हमला है। नफरत राष्ट्रवाद की परिभाषा नहीं हो सकती। आरएसएस को समाज को जहर देना बंद करना चाहिए। इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा के विरोध प्रदर्शन अक्सर सिर्फ इसलिए होते हैं क्योंकि उनमें मुस्लिम नाम शामिल होते हैं। शाहरुख खान मुस्लिम हैं, मुस्तफिजुर भी मुस्लिम हैं इसलिए विरोध होना लाजमी है क्योंकि मुस्लिमों के प्रति नफरत सामने आती है।
-अनिल नरेन्द्र

Sunday, 4 January 2026

कुरान पर हाथ रखकर ली शपथ ममदानी ने


जोहरान ममदानी ने एक जनवरी 2026 को न्यूयार्क के मेयर पद की शपथ ले ली है। वह शहर के 111वें मेयर और बीते 100 साल में सबसे कम उम्र के मेयर बनकर इतिहास रच चुके हैं। शहर के 111वें मेयर के तौर पर जोहरान ममदानी ने एक पुराने सबवे में आयोजित निजी समारोह में कुरान को हाथ में ले शपथ ली। क्वीन्स प्रांत के प्रतिनिधि रह चुके 34 वर्षीय ममदानी अब अमेरिका के सबसे बड़े शहर के मेयर बनने वाले दक्षिण एशियाई मूल के और मुस्लिम समुदाय के पहले व्यक्ति हो गए हैं। जोहरान ममदानी ने कभी अपने मुस्लिम होने को छिपाया नहीं बल्कि खुलकर कहा मैं एक मुसलमान हूं। 34 साल के ममदानी 100 साल से भी अधिक समय में न्यूयार्क के सबसे युवा, पहले मुसलमान और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बने हैं। मेयर पद के लिए मुख्य मुकाबला जोहरान ममदानी और एंड्रयू कुओमो के बीच था। उनके चुनाव ने प्रोग्रेसिव लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव लाया जो शहर के राजनीतिक केंद्र में बदलाव का संकेत था। चुनाव जीतने के बाद ममदानी ने आधे घंटे लंबे भाषण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले ममदानी को वोट न देने की अपील की थी। उन्होंने फ्री बस सेवा, यूनिवर्सल चाइल्डकेयर और बढ़ती महंगाई काबू करने समेत अपने सभी चुनावी वादों को पूरा करने की बात कही। जोहरान ममदानी का जन्म 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। उनके पिता ने उन्हें एक क्रांतिकारी और घाना के पहले प्रधानमंत्री क्वामे एनक्रूमा के नाम पर मिडिल नेम क्वामे दिया था। ममदानी बता दें कि मशहूर भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जाने-माने प्रोफेसर महमूद ममदानी के बेटे हैं। ममदानी ने कहा था कि उनका शपथ ग्रहण न्यूयार्क के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक होगा। इससे न्यूयार्क के कामकाजी कर्मचारियों को आवश्यक रूप से केंद्र में रखा जाएगा। जोहरान ममदानी ने दिल्ली के जेएनयू छात्र नेता और 2020 से जेल में बंद उमर खालिद को एक पत्र लिखकर कहा कि मैं आपको याद कर रहा हूं और आपके बारे में सोच रहा हूं। ममदानी के इस पत्र की भारत सरकार ने आलोचना की है और कहा है कि वे हमारी न्याय व्यवस्था पर प्रश्न उठा रहे हैं जोकि उन्हें कोई अधिकार नहीं है। ममदानी की जीत साधारण जीत नहीं मानी जा सकती। न्यूयार्क खरबपतियों का शहर है जहां पर यहूदी लॉबी बहुत शक्तिशाली है। तमाम उद्योगपतियों के विरोध और यहूदी लॉबी के विरोध के बावजूद ममदानी की जीत ऐतिहासिक मानी जाएगी। एक समय तो खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ममदानी के खिलाफ प्रचार में उतर गए थे और यहां तक कहा था कि देखता हूं यह कैसे जीतता है? ट्रंप उन्हें कम्युनिस्ट तक कह चुके हैं। ममदानी को दाद देनी होगी कि उन्होंने न तो अपने मूल को छुपाया और न ही अपने धर्म को। उनकी जीत से अमेरिका के अंदर सियासी समीकरण बदलने की आशंका जताई जा रही है। उनके क्रांतिकारी वादे जो कुछ-कुछ आम आदमी पार्टी के नारों से मिलते हैं, क्या रंग लाते हैं देखना होगा। यह भी देखने लायक होगा कि अब जब ममदानी न्यूयार्क जैसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली शहर के मेयर बन चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप इनके साथ कौन सा रवैया अपनाते हैं? हम जोहरान ममदानी को उनकी अप्रत्याशित जीत पर हार्दिक बधाई देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो अपने वादों पर खरे उतरेंगे और अपने समर्थकों को निराश नहीं करेंगे। पर रास्ता आसान नहीं होगा। उन्होंने कांटे भरा रास्ता चुना है।
-अनिल नरेन्द्र

Friday, 2 January 2026

2025 की वो घटनाएं जो हमेशा याद रहेंगी


2026 आ गया है। हम ऊपर वाले से प्रार्थना करते हैं कि यह वर्ष पिछले वर्ष से हर लिहाज से बेहतर साबित हो। 2025 दुर्भाग्य से अगर उसे हादसों का वर्ष कहें तो शायद गलत नहीं होगा। 2025 का साल भारत के लिए त्रासदियों भरा रहा। 2025 में भारत में वो 5 घटनाएं हुई हैं जो देशवासियों के जहन में हमेशा के लिए दर्ज हो गई हैं। जिसमें पहलगाम आतंकी घटना, प्रयागराज महाकुंभ भगदड़, अहमदाबाद विमान हादसा, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ और दिल्ली आतंकी हमला शामिल है। 22 अप्रैल 2025 भारत के लिए कभी भी न भूलने वाली तारीख है। इस दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकियों ने हमला किया था। इसमें 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तौयबा के एक संगठन ने ली थी। मंगलवार के दिन बसैरन घाटी में आतंकियों ने इस कायरनामा हरकत से मिनी स्विटजरलैंड कहा जाने वाला यह स्थान कुख्यात हो गया। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला प्रयागराज महाकुंभ वैसे तो सफल रहा। लेकिन 29 जनवरी 2025 को जो वहां भगदड़ मची उसने एक बदनुमा दाग लगा दिया। जिसमें करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। यह हादसा मौनी अमावस्या के दिन अमृत स्नान के दौरान हुआ। 11 फरवरी 2025 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी। यहां लोग प्रयागराज महाकुंभ जाने के लिए स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। लेकिन ट्रेन का प्लेटफार्म बदलने के चलते ये भगदड़ मच गई थी। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 13 और 14 पर शनिवार को उस समय भगदड़ मच गई जब यात्रियों के बीच प्रयागराज जा रही दोनों ट्रेने के रद्द होने की अफवाह फैल गई। 12 जून 2025 की यह तारीख भारत को कभी नहीं भूलने वाली डेट है। इस दिन अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट अपनी उड़ान भरने के महज 30 सैकेंड बाद ही क्रैश हो गई थी। इस बोइंग विमान 783 ड्रीमलाइनर विमान में पायलट समेत 242  लोग सवार थे। जिसमें 241 मारे गए थे, सिर्फ एक बचा था। इस विमान दुर्घटना में भाजपा के वरिष्ठ नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का भी निधन हो गया था। भारतीय इतिहास के सबसे बड़े विमानन दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही इस दुर्घटना ने हर किसी को गमगीन कर दिया था। अंत में इस सूची में दिल्ली लालकिला आतंकी हमला आता है। वैसे तो पूरे देश में और कई हादसे हुए। मैंने सिर्फ कुछ प्रमुख हादसों का जिक्र किया है। लालकिला ब्लास्ट 10 नवम्बर 2025 को लाल किला मैट्रो स्टेशन के पास हुआ था। रेड लाइट पर एक सफेद रंग की हुंडई आई-20 कार में ब्लास्ट होने से 12 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे। छानबीन के कुछ समय बाद सामने आया कि हुंडई आई-20 कार चलाने वाला उमर मोहम्मद उर्फ उमर-उन- नबी था। इसके बाद इसके तार अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े। डाक्टरों के एक निहायत खतरनाक आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। अभी भी इसकी जांच चल रही है। फरीदाबाद में गिरफ्तार मुस्लिम के घर से 2910 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था। कुल मिलाकर 2025 न केवल भारत के लिए ही एक हादसों का साल रहा बल्कि पूरे विश्व की अशांति और हिंसा का साल रहा। 2026 बेस्ट साबित हो हम इसकी उम्मीद और प्रार्थना करते हैं।
-अनिल नरेन्द्र