Sunday, 4 January 2026

कुरान पर हाथ रखकर ली शपथ ममदानी ने


जोहरान ममदानी ने एक जनवरी 2026 को न्यूयार्क के मेयर पद की शपथ ले ली है। वह शहर के 111वें मेयर और बीते 100 साल में सबसे कम उम्र के मेयर बनकर इतिहास रच चुके हैं। शहर के 111वें मेयर के तौर पर जोहरान ममदानी ने एक पुराने सबवे में आयोजित निजी समारोह में कुरान को हाथ में ले शपथ ली। क्वीन्स प्रांत के प्रतिनिधि रह चुके 34 वर्षीय ममदानी अब अमेरिका के सबसे बड़े शहर के मेयर बनने वाले दक्षिण एशियाई मूल के और मुस्लिम समुदाय के पहले व्यक्ति हो गए हैं। जोहरान ममदानी ने कभी अपने मुस्लिम होने को छिपाया नहीं बल्कि खुलकर कहा मैं एक मुसलमान हूं। 34 साल के ममदानी 100 साल से भी अधिक समय में न्यूयार्क के सबसे युवा, पहले मुसलमान और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बने हैं। मेयर पद के लिए मुख्य मुकाबला जोहरान ममदानी और एंड्रयू कुओमो के बीच था। उनके चुनाव ने प्रोग्रेसिव लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव लाया जो शहर के राजनीतिक केंद्र में बदलाव का संकेत था। चुनाव जीतने के बाद ममदानी ने आधे घंटे लंबे भाषण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले ममदानी को वोट न देने की अपील की थी। उन्होंने फ्री बस सेवा, यूनिवर्सल चाइल्डकेयर और बढ़ती महंगाई काबू करने समेत अपने सभी चुनावी वादों को पूरा करने की बात कही। जोहरान ममदानी का जन्म 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। उनके पिता ने उन्हें एक क्रांतिकारी और घाना के पहले प्रधानमंत्री क्वामे एनक्रूमा के नाम पर मिडिल नेम क्वामे दिया था। ममदानी बता दें कि मशहूर भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जाने-माने प्रोफेसर महमूद ममदानी के बेटे हैं। ममदानी ने कहा था कि उनका शपथ ग्रहण न्यूयार्क के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक होगा। इससे न्यूयार्क के कामकाजी कर्मचारियों को आवश्यक रूप से केंद्र में रखा जाएगा। जोहरान ममदानी ने दिल्ली के जेएनयू छात्र नेता और 2020 से जेल में बंद उमर खालिद को एक पत्र लिखकर कहा कि मैं आपको याद कर रहा हूं और आपके बारे में सोच रहा हूं। ममदानी के इस पत्र की भारत सरकार ने आलोचना की है और कहा है कि वे हमारी न्याय व्यवस्था पर प्रश्न उठा रहे हैं जोकि उन्हें कोई अधिकार नहीं है। ममदानी की जीत साधारण जीत नहीं मानी जा सकती। न्यूयार्क खरबपतियों का शहर है जहां पर यहूदी लॉबी बहुत शक्तिशाली है। तमाम उद्योगपतियों के विरोध और यहूदी लॉबी के विरोध के बावजूद ममदानी की जीत ऐतिहासिक मानी जाएगी। एक समय तो खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ममदानी के खिलाफ प्रचार में उतर गए थे और यहां तक कहा था कि देखता हूं यह कैसे जीतता है? ट्रंप उन्हें कम्युनिस्ट तक कह चुके हैं। ममदानी को दाद देनी होगी कि उन्होंने न तो अपने मूल को छुपाया और न ही अपने धर्म को। उनकी जीत से अमेरिका के अंदर सियासी समीकरण बदलने की आशंका जताई जा रही है। उनके क्रांतिकारी वादे जो कुछ-कुछ आम आदमी पार्टी के नारों से मिलते हैं, क्या रंग लाते हैं देखना होगा। यह भी देखने लायक होगा कि अब जब ममदानी न्यूयार्क जैसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली शहर के मेयर बन चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप इनके साथ कौन सा रवैया अपनाते हैं? हम जोहरान ममदानी को उनकी अप्रत्याशित जीत पर हार्दिक बधाई देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो अपने वादों पर खरे उतरेंगे और अपने समर्थकों को निराश नहीं करेंगे। पर रास्ता आसान नहीं होगा। उन्होंने कांटे भरा रास्ता चुना है।
-अनिल नरेन्द्र

Friday, 2 January 2026

2025 की वो घटनाएं जो हमेशा याद रहेंगी


2026 आ गया है। हम ऊपर वाले से प्रार्थना करते हैं कि यह वर्ष पिछले वर्ष से हर लिहाज से बेहतर साबित हो। 2025 दुर्भाग्य से अगर उसे हादसों का वर्ष कहें तो शायद गलत नहीं होगा। 2025 का साल भारत के लिए त्रासदियों भरा रहा। 2025 में भारत में वो 5 घटनाएं हुई हैं जो देशवासियों के जहन में हमेशा के लिए दर्ज हो गई हैं। जिसमें पहलगाम आतंकी घटना, प्रयागराज महाकुंभ भगदड़, अहमदाबाद विमान हादसा, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ और दिल्ली आतंकी हमला शामिल है। 22 अप्रैल 2025 भारत के लिए कभी भी न भूलने वाली तारीख है। इस दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकियों ने हमला किया था। इसमें 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तौयबा के एक संगठन ने ली थी। मंगलवार के दिन बसैरन घाटी में आतंकियों ने इस कायरनामा हरकत से मिनी स्विटजरलैंड कहा जाने वाला यह स्थान कुख्यात हो गया। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला प्रयागराज महाकुंभ वैसे तो सफल रहा। लेकिन 29 जनवरी 2025 को जो वहां भगदड़ मची उसने एक बदनुमा दाग लगा दिया। जिसमें करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। यह हादसा मौनी अमावस्या के दिन अमृत स्नान के दौरान हुआ। 11 फरवरी 2025 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी। यहां लोग प्रयागराज महाकुंभ जाने के लिए स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। लेकिन ट्रेन का प्लेटफार्म बदलने के चलते ये भगदड़ मच गई थी। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 13 और 14 पर शनिवार को उस समय भगदड़ मच गई जब यात्रियों के बीच प्रयागराज जा रही दोनों ट्रेने के रद्द होने की अफवाह फैल गई। 12 जून 2025 की यह तारीख भारत को कभी नहीं भूलने वाली डेट है। इस दिन अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट अपनी उड़ान भरने के महज 30 सैकेंड बाद ही क्रैश हो गई थी। इस बोइंग विमान 783 ड्रीमलाइनर विमान में पायलट समेत 242  लोग सवार थे। जिसमें 241 मारे गए थे, सिर्फ एक बचा था। इस विमान दुर्घटना में भाजपा के वरिष्ठ नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का भी निधन हो गया था। भारतीय इतिहास के सबसे बड़े विमानन दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही इस दुर्घटना ने हर किसी को गमगीन कर दिया था। अंत में इस सूची में दिल्ली लालकिला आतंकी हमला आता है। वैसे तो पूरे देश में और कई हादसे हुए। मैंने सिर्फ कुछ प्रमुख हादसों का जिक्र किया है। लालकिला ब्लास्ट 10 नवम्बर 2025 को लाल किला मैट्रो स्टेशन के पास हुआ था। रेड लाइट पर एक सफेद रंग की हुंडई आई-20 कार में ब्लास्ट होने से 12 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे। छानबीन के कुछ समय बाद सामने आया कि हुंडई आई-20 कार चलाने वाला उमर मोहम्मद उर्फ उमर-उन- नबी था। इसके बाद इसके तार अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े। डाक्टरों के एक निहायत खतरनाक आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। अभी भी इसकी जांच चल रही है। फरीदाबाद में गिरफ्तार मुस्लिम के घर से 2910 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था। कुल मिलाकर 2025 न केवल भारत के लिए ही एक हादसों का साल रहा बल्कि पूरे विश्व की अशांति और हिंसा का साल रहा। 2026 बेस्ट साबित हो हम इसकी उम्मीद और प्रार्थना करते हैं।
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 30 December 2025

रेप पीड़िता को मिला न्याय

 
उन्नाव दुष्कर्म मामले में आरोपी कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली राहत को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर रेप पीड़िता को न्याय दिया है। यह अत्यन्त दुख और चिंता का विषय है कि कानूनी नुक्तो का फायदा उठाकर बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के दोषी को भी कई बार रियायत दे दी जाती है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक नाबलिक लड़की से बलात्कार के मामले में वर्ष 2019 में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्र कैद की सजा हुई थी। अदालत ने भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार के मामले और बच्चे-बच्चियों के यौन शोषण से सुरक्षा के कानून पॉस्को में गंभीर हिंसा के प्रावधानों के मुताबिक सजा दी थी। तब यह घटना देश भर में व्यापक चिंता और आाढाsश का कारण बनी थी। मगर दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की सजा निलंबित करने का आदेश दे दिया। इस संदर्भ में एक अहम तथ्य यह है कि दोषी सिद्ध होने के बाद निचली अदालत ने साफ कहा था कि सेंगर को जीवन भर जेल में रहना होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2017 के इस उन्नाव दुष्कर्म मामले में निष्कासित भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर की जेल की सजा निलंबित करके उन्हें जमानत दे दी। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर गई और न्याय की दुहाई मांगने पर मजबूर हो गई। पीड़िता के परिवार और अन्य महिला कार्यकर्ताओं ने पावार को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर सेंगर की जमानत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और अपनी नाराजगी जाहिर की। जनता के विरोध को देखते हुए सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पावार को ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के वकील ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी से संबंधित एक मामले में यह अभिनिर्धारण किए जाने का हवाला दिया कि एमपी और एमएलए लोक सेवक होते हैं। मात्र इसी दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर को मिले दिल्ली हाईकोर्ट से राहत को निरस्त कर दिया और यह निश्चित हो गया कि अब सेंगर को आजीवन जेल में ही रहना होगा। अधिवक्ता अंजले पटेल और पूजा शिल्पकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई। उन्होंने तर्क दिया है कि हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर विचार किए बिना आदेश पारित किया कि ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि सेंगर को अपनी शेष प्राकृतिक जीवन अवधि तक जेल में रहना चाहिए। हाईकोर्ट ने सेंगर को जमानत सजा निलंबन देने में कानून और तथ्यों में गंभीर त्रुटि की है, जबकि इसे गंभीर आपराधिक अतीत और दुष्कर्मों के घृणित अपराधों में उसकी स्थापित संलिप्तता को ध्यान में नहीं रखा गया। दरअसल इस घटना के बाद पीड़िता को जिन हालात का सामना करना पड़ा और उसको जीवन तक पर जिस तरह के जोखिम खड़े हुए थे, वे बेहद अप्रत्याशित हो मगर उससे साफ था कि जघन्य अपराधों के बाद एक ऊंचे राजनीतिक रसूख वाला आरोपी पीड़िता को खामोश करने के लिए किस हद तक जा सकता है। इस दौरान पीड़िता के पिता की जान चली गई। एक ट्रक ने उस कार को टक्कर मार दी, जिसमें वह परिवार के अन्य लोगों के साथ जा रही थी। उस घटना में पीड़िता और उसका वकील बुरी तरह घायल हो गए, जबकि उसकी दो मौसियों की मौत हो गई। समझा जा सकता है कि इस पूरे मामले में पीड़िता को किस तरह के हालात का सामना करना पड़ा। जब किसी रसूख वाले अपराधी की सजा को लेकर रियायत बरतने की खबर आती है, तब यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर कानून के काम करने के पैमाने क्या हैं? कहा जाता है कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िता को न्याय देने के उद्देश्य से आरोपी की सजा को बहाल कर दिया जो स्वागत योग्य है। 
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 25 December 2025

एपस्टीन फाइलों में दबे हैं कई राज


अमेरिकी न्याय विभाग ने कुख्यात फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े मामलों की जांच से संबंधित 13 हजार से ज्यादा फाइल सार्वजनिक कर दिए हैं। वे दस्तावेज उस कानून के तहत जारी किए गए हैं। जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि लंबे इंतजार के बावजूद इन फाइलों से अभी तक कोई चौंकाने वाले खुलासे नहीं हुए हैं। ज्यादातर दस्तावेजों को भारी रूप से ब्लैक किए गए हैं। जेफरी एपस्टीन की मौत हो चुकी है। अमेरिकी संसद ने एक कानून पास किया था, जिसके तहत शुक्रवार तक सभी फाइलों को पूरी तरह सार्वजनिक करना जरूरी था। लेकिन अब तक कुछ ही दस्तावेज जारी किए गए हैं, वो भी कई जगह भारी काट-छांट के साथ। इन दस्तावेजों को सार्वजनिक कराने के लिए दबाव बनाने वाले सांसदों ने विभाग की कोशिश को गैर-गंभीर बताया है। वहीं कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी ज्यादा काट-छांट से साजिश से जुड़ी धाराएं और मजबूत हो सकती हैं। जारी सामग्री में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोटो भी जारी किया गया है, हालांकि उन्हें बचाने की भी पूरी कोशिश की गई है। फाइलों में एक फोटो शामिल है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जेफरी एपस्टीन, मेलानिया ट्रंप और गिलेन मैक्सवैल (एपस्टीन की गर्लफ्रेंड) साथ नजर आ रहे हैं। जस्टिस डिपार्टमेंट ने इन फाइलों के हटने को लेकर अब तक कोई सफाई नहीं दी है। जो फाइले सार्वजनिक की गई हैं उनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, ब्रिटेन के शाही परिवार से जुड़े एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर, मशहूर गायक मिक जैगर और माइकल जैक्सन के नाम शामिल हैं। हालांकि इन फाइलों में किसी का नाम होना या उनकी तस्वीर होना यह साबित नहीं करता कि उन्होंने कोई गलत काम किया है। जिन लोगों के नाम इन दस्तावेजों में आए हैं या पहले भी एपस्टीन से जुड़े मामलों में सामने आए थे, उनमें से कई ने किसी भी तरह की गलत गतिविधि से इंकार किया है। जारी की गई कई तस्वीरों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन स्विमिंग पूल में दो महिलाओं के साथ तैरते दिखते हैं। यह तस्वीर हॉट टब की लगती है। 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में बिल क्लिंटन की जेफरी एपस्टीन के साथ कई बार तस्वीरें ली गई थीं। क्लिंटन हालांकि यह कहते हैं कि उन्हें एपस्टीन के यौन अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी। दस्तावेजों के मुताबिक जेफरी एपस्टीन ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात एक 14 साल की लड़की से कराई गई थी। अमेरिकी न्याय विभाग ने जो फाइलें जारी की हैं उनमें राष्ट्रपति ट्रंप का भी जिक्र है। अदालत के कागजों के मुताबिक यह मुलाकात फ्लोरिडा के मार-ए-लागो रिसॉर्ट में 1990 के दशक की बताई जाती है। दस्तावेज में कहा गया है कि एपस्टीन ने ट्रंप को कोहनी मारकर लड़की की ओर इशारा किया और मजाकिया अंदाज में पूछा कि यह अच्छी है ना...? ट्रंप मुस्कराए और सहमति से सिर हिलाया। दस्तावेज के मुताबिक इसे लेकर दोनों हंसे थे और लड़की को असहज महसूस हुआ। लेकिन उस समय वह इतनी छोटी थी कि उस हंसी की वजह वे समझ नहीं पाई। सर्वाइवर का आरोप है कि एपस्टीन ने कई सालों तक उसे बहकाया और उसका शोषण किया। हालांकि अदालत में दायर कागजों में लड़की ने ट्रंप पर कोई आरोप नहीं लगाया है। इन दस्तावेजों पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने बयान दिया कि ट्रंप प्रशासन इतिहास का सबसे पारदर्शी प्रशासन है। उन्होंने कहा कि हजारों पन्नों के दस्तावेज जारी किए गए हैं और हाउस ओवरसाइट कमेटी की जांच में सहयोग किया गया है। उधर डिप्टी अटार्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा है कि कई लाख पन्नों की अभी भी जांच चल रही है। ये दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेटिक सदस्यों ने इससे जुड़ी तस्वीर के गायब होने पर सवाल उठाए हैं और पूछा कि और क्या छिपाया जा रहा है? अभी तो खेला शुरू हुआ है, आगे-आगे देखें होता है क्या?
-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 23 December 2025

फिर उठी बांग्लादेश में अशांति की लहर


बांग्लादेश में युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद एक बार फिर अशांति और हिंसा की लहर आ गई है। 15 महीने बाद फिर हिंसा भड़क गई। भारत विरोधी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद कट्टरपंथियों ने गुरुवार देर रात चट्टोग्राम में भारतीय उच्चायोग पर हमला कर दिया। यहां पर उच्चायुक्त का निवास स्थान भी है। दंगाइयों ने जमकर पथराव किया और मयमनसिंह के भालुका में दंगाइयों ने ईशनिंदा का आरोप लगा हिन्दू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीट कर हत्या कर दी और पेड़ पर लटकाकर शव को जला दिया। बता दें कि कट्टरपंथी हादी ने पिछले साल अगस्त में छात्र आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। हादी हाल ही में जमात-ए-इस्लामी से जुड़े इंकबाल मंच में शामिल हो गया था। वह 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में ढाका-8 सीट से इंकलाब मंच का प्रत्याशी था। ढाका में 12 दिसम्बर को हादी को दो युवकों ने गोली मार दी थी। उसकी सिंगापुर में इलाज के दौरान गुरुवार को मौत हो गई थी। भारत संग रिश्ते लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। पाकिस्तान के बढ़ते कदम और बांग्लादेश से बिगड़ते रिश्तों पर संसदीय रिपोर्ट में इन चुनौतियों का जिक्र किया है। साल 1971 की जंग के बाद भारत को बांग्लादेश में सबसे बड़े रणनीतिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, यह कहना गलत नहीं होगा। राष्ट्रवाद के उभार, इस्लामी संगठनों की दोबारा सक्रियता और चीन-पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव ने बांग्लादेश में भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी है। अगर समय रहते भारत ने अपनी नीति में बदलाव नहीं किया तो वह बांग्लादेश में अप्रासंगिक हो जाएगा। यह बातें भारत में विदेशी मामलों की एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में रेखांकित की गई है। 99 पन्नों की इस रिपोर्ट में समिति ने भारत-बांग्लादेश के रिश्तों से जुड़ी उन चुनौतियों का जिक्र किया है, जो अगस्त 2024 के बाद खड़ी हुई है। अगस्त 2024 यह वह महीना था जब बांग्लादेश में व्यापक जनप्रचार के बाद देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। तब से वह यहां रह रही हैं और देश में मोहम्मद युनूस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार काम कर रही है। संसदीय समिति की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कांग्रेस सांसद शशि थरूर को नेतृत्व करने के लिए चुना गया। समिति ने विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों से बातचीत की और बीते जून को 4 विशेषज्ञों की राय भी सुनी है। इन विशेषज्ञों में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन, सेवानिवृत्त ले. जनरल सैयद अता हसनैन, विदेश मंत्रालय की पूर्व सचिव रीवा गांगुली व अन्य शामिल थे। विश्लेषक के हवाले से बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते में मौजूदा चुनौतियों के पीछे प्रमुख वजहें भी गिनाई गई हैं। अल्पसंख्यकों पर हमले के पीछे आईएसआई के हाथ से इंकार नहीं किया जा सकता। बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी भी एक चुनौती है। लालमोनिरहाट एयरबेस का चीनी मदद से विकसित किया जाना भारत की सुरक्षा के लिए एक खतरा है। जमात-ए-इस्लामी पार्टी के नेताओं के हालिया चीन दौरे का भी रिपोर्ट में जिक्र किया गया और कहा कि इससे बांग्लादेश के अलग-अलग राजनीतिक गुटों के साथ चीन की गहराती बातचीत का संकेत मिलता है, जिहादी वहां उसकी मौजूदगी और मजबूत हो रही है। समिति ने सिफारिश की है कि सरकार बांग्लादेश में विदेशी शक्तियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे क्योंकि किसी भी वैसे देश, जिनके साथ भारत के रिश्ते अच्छे नहीं हैं (पाक-चीन) उनका वहां सैन्य ठिकाना बनाने की कोशिश भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकती है। मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश में ताजा हिंसा पर सिर्फ औपचारिक बयान देते दिख रहे हैं। अगर यूनुस वाकई असहाय हो गए हैं और कट्टरपंथी तंत्र अराजकता फैलाने के लिए स्वतंत्र है तो यह न तो बांग्लादेश के लिए अच्छी है और भारत के लिए तो बहुत चिंताजनक है ही। फिलहाल बांग्लादेश में जिस तरह की अराजकता फैली हुई है और उनकी आंच में बहुत कुछ झुलसने की आशंका है। उसे देखते हुए भारत सरकार को चाहिए कि वह कूटनीतिक स्तर पर इन मामलों को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के समक्ष प्रभावी तरीके से उठाए।
-अनिल नरेन्द्र

Saturday, 20 December 2025

राष्ट्रीय अध्यक्ष की जगह कार्यकारी अध्यक्ष


भारतीय जनता पार्टी ने पटना की बांकीपुर सीट से विधायक और बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन सिन्हा को पार्टी का नया कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर सबको चौंका दिया है। शायद ही किसी ने उम्मीद की हो कि नबीन बाबू को इतना महत्वपूर्ण पद दिया जाएगा। पिछले कई महीनों से यह चर्चा चल रही थी कि भाजपा अपना नया अध्यक्ष चुनने वाली है क्योंकि श्री नड्डा का कार्यकाल बहुत पहले समाप्त हो चुका था और वह एक्सटेंशन पर चल रहे थे। नितिन नबीन भाजपा के इतिहास में जेपी नड्डा के बाद दूसरे कार्यकारी अध्यक्ष होंगे। पार्टी के संविधान में कार्यकारी अध्यक्ष का कोई औपचारिक पद नहीं है। लेकिन साल 2019 के बाद से भाजपा में पूर्णकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने से पहले कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने की एक परंपरा शुरू हुई है। भाजपा में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कब होगा अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में पार्टी के शीर्ष नेताओं के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अगले साल जनवरी में ये प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल भी जनवरी तक ही है। ऐसे में से सवाल उठ रहा है कि जब कुछ दिनों बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है तो पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष क्यों नियुक्त किया है? इसका कोई स्पष्ट जवाब तो नहीं है लेकिन ये माना जा रहा है कि पार्टी अपने संविधान के हिसाब से होने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को आम सहमति और निर्विरोध रूप से करना चाहती है। वरिष्ठ पत्रकार ने बीबीसी को बताया कि भाजपा जनवरी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी। पार्टी में इसकी एक औपचारिक प्रक्रिया है। ऐसे तो कोई चुनाव नहीं हो रहा है लेकिन नामांकन तिथि, चुनाव तिथि में औपचारिक प्रक्रियाएं हैं, पार्टी को इन्हें करना है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं, कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर भाजपा ने ये साफ कर दिया है कि नितिन नबीन ही अगले अध्यक्ष होंगे। भाजपा में अध्यक्ष को चुनने की एक लंबी प्रक्रिया है। भाजपा के संसदीय बोर्ड ने नितिन नबीन सिन्हा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया है। 26 साल की उम्र में पहली बार विधायक चुने जाने वाले नितिन नबीन 5 बार से लगातार विधायक हैं और भाजपा के पहले कार्यकारी अध्यक्ष हैं। 45 साल के नितिन नबीन का कार्यकारी अध्यक्ष बन जाना जरूर कई लोगों को हैरान कर रहा है लेकिन विश्लेषक इससे हैरान नहीं हैं। बिहार चुनावों के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने नितिन नबीन से दो घंटे मुलाकात की थी। नितिन नबीन पार्टी के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के प्रभारी थे और भाजपा ने यह चुनाव भारी बहुमत से जीता था। यानी नितिन नबीन अपनी संगठनात्मक क्षमता पहले ही साबित कर चुके हैं। सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या नितिन नबीन की नियुक्ति के पीछे कोई खास वजह या पार्टी की कोई खास रणनीति है? विश्लेषक मानते हैं कि पार्टी में ये बदलाव का दौर है और ये समय की जरूरत के हिसाब से उठाया गया कदम है। विजय त्रिवेदी और विनोद शर्मा दोनों ही मानते हैं कि पार्टी जेनरेट्स चेंज यानि पीढ़ीगत बदलाव से गुजर रही है। पार्टी में पुरानी पीढ़ी के नेताओं की जगह नए नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के रूप में पुराने नेताओं को हटाना और नए चेहरों को लाना पार्टी की इसी रणनीति का हिस्सा है और नितिन नबीन का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाना इस कड़ी में अगला कदम है। पार्टी नए नेतृत्व को आगे लाना चाहती है और ये नियुक्ति भी उसी दिशा में है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भाजपा में ऐसे नेताओं को आगे लाया जा रहा है जो किसी भी तरह से नरेन्द्र मोदी या अमित शाह के लिए चुनौती पेश न करें। विनोद शर्मा कहते हैं, नितिन नबीन की नियुक्ति हैरान इसलिए नहीं कर रही है क्योंकि उन्हें अमित शाह की सहूलियत के हिसाब से बनाया गया है। किसी भी ऐसे नेता को मजबूत पद पर नहीं लाया जा रहा है जो आगे चलकर किसी भी तरह की शीर्ष नेतृत्व को चुनौती पेश कर सके। व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जो भाजपा और संघ को भी मंजूर हो। विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि नितिन नबीन का नाम उन चुनिन्दा लोगों में रहा होगा जिन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी अनुमोदन प्राप्त हुआ है।
-अनिल नरेन्द्र

Thursday, 18 December 2025

नरसंहार करने वाले पिता-पुत्र


ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रविवार को जश्न मना रहे बान्डी बीच पर लोगों पर दो आतंकियों ने हमला कर दिया। इस दौरान 44 साल के अहमद अल अहमद ने अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकियों से भिड़ गया और कई जानें बचाई। हुआ यूं कि रविवार को सिडनी के बान्डी बीच पर यहूदियों के हनुक्का पर्व पर लोग पर्व का मजा उठा रहे थे। हनुक्का यहूदियों का सालाना त्यौहार है। इस दौरान दो बंदूकधारियों ने अंधाधुंध गोलीबारी करनी शुरू कर दी। गोलियों की आवाजें सुनकर बीच पर अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। इस अंधाधुंध फायरिंग में अब तक 16 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। आतंकियों की निशानदेही हो चुकी है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार इस आतंकी घटना को अंजाम देने वाले बाप और बेटे हैं, जिनमें से एक की तो मौके पर ही मौत हो गई। आस्ट्रेलिया जांच एजेंसियों ने आरोपी के बैकग्राउंड की जांच शुरू कर दी है। शूटिंग में शामिल पिता (50 वषीय) की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका 25 वषीय बेटा गंभीर हालत में अस्पताल में भती है, सिडनी अटैक में पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया है। आस्ट्रेलिया की जांच एजेंसियां इस घटना को लेकर बहुत गंभीर है। अहम बात यह भी है कि हमले में शामिल पिता-पुत्र की पहचान पाकिस्तानी मूल के रूप में हुई है। वहीं अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने भी दोनों आतंकियों को पाकिस्तानी नागरिक बताया है। हमलावर पाकिस्तानी नागरिक थे और सिडनी में रह रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि गोलीबारी के बाद पास ही एक सड़क पर एक कार से कई इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लेसिव डिवाइस यानी विस्फोटक बरामद किए गए, जिससे आशंका है कि हमले की साजिश इससे काफी ज्यादा तबाही फैलाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारने की थी। ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसी एसियो ने पुष्टि की है कि हमलावरों में से एक पहले से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में संदिग्ध था, लेकिन उसे तत्काल खतरे के रूप में लिस्ट नहीं किया गया था। इधर दोनों आतंकी गोलियां बरसा रहे थे उधर 44 साल के अहमद अल अहमद ने अपनी जान की परवाह किए बिना हिम्मत दिखाते हुए पीछे से आतंकी पर झपट्टा मारा और उससे बंदूक छीन ली, जिससे कई लोगों को सुरक्षित निकालने का मौका मिल गया। लोग अहमद अल अहमद को ऑस्ट्रेलिया का नया हीरो कह रहे हैं। अहमद जब आतंकी साजिद से मुठभेड़ करने जा रहा था, तब उनके भाई ने उन्हें रोका था। तब उन्होंने कहा था कि अगर मुझे कुछ हुआ तो परिवार को बताना कि मैं लोगों की जान बचाते हुए मारा गया। अहमद फल-सब्जी की दुकान चलाता है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की निंदा हुई है और ऑस्ट्रेलिया की सरकार से लेकर मुस्लिम-अरब देशों की ओर से भी आतंकवाद और हिंसा के सभी रूपों को खारिज किया है। मगर यह भी सच है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना और विरोध के बावजूद किसी समुदाय से नफरत की भावना में डूबे को रोक पाना एक मुश्किल चुनौती है। यह स्वाभाविक है कि इस आतंकी हमले की वैश्विक स्तर पर निंदा होगी और शोक-संवेदनाएं व्यक्त की जाएंगी, लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है। दुनिया भर में जिहादी आतंक का खतरा जिस तरह उभर रहा है उसका मुकाबला तभी किया जा सकता है जब पूरा विश्व समुदाय मिलकर इस उठते खतरे का ईमानदारी से सामना करे और मिलकर मुकाबला करने के लिए कदम उठाएं। बान्डी बीच के हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है। दोनों ही आतंकी पाकिस्तानी मूल के निकले। यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान विश्व की सबसे बड़ी आतंकी फैक्ट्री है जहां साल दर साल हजारों आतंकी तैयार किए जाते हैं। भारत तो बार-बार इस बात को कहता रहता है पर दुनिया मानने को तैयार नहीं, पहलगाम हमला भी इसी तरह के आतंकियों ने किया था पर दुनिया मानने को तैयार नहीं थी। अब तो ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में यह हमला हुआ है, अब विश्व को इस पर क्या कहना है?
-अनिल नरेन्द्र