Friday, 31 March 2017

लश्कर, हिजबुल की घाटी में तनाव पैदा करने की योजना

सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक लश्कर--तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन ने कश्मीर घाटी को फिर दहलाने की साजिश रची है। दोनों ही आतंकी तंजीमों ने हाथ मिलाते हुए घाटी में उपचुनावों और पर्यटन सीजन के दौरान बड़ी वारदातों की व्यूहरचना की है। शोपियां, पुलवामा, कुलगांव, हंदवाड़ा, कुपवाड़ा और अनंतनाग में दोनों संगठनों के पोस्टर मिलने से सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना हो गई हैं। दक्षिणी कश्मीर सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। इसका इलाका नेशनल हाइवे से बिल्कुल सटा हुआ है जिससे सुरक्षा बलों के काफिले को निशाना बनाना आतंकियों के लिए आसान हो सकता है। बुरहान वानी के मारे जाने के बाद सबसे ज्यादा 80 युवाओं ने इसी इलाके में आतंकी संगठनों का दामन थामा है। बढ़ी हिंसा के कई सबूत सामने आने लगे हैं। मध्य कश्मीर के बड़गांव जिले में सुरक्षा बलों ने 10 घंटे से अधिक चली मुठभेड़ में हिजबुल के एक आतंकी को ढेर कर दिया। इस दौरान आतंकियों को भगाने के उद्देश्य से स्थानीय नागरिकों ने प्रदर्शन किया और सुरक्षा बलों पर जबरदस्त पथराव भी किया। स्थिति पर काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों को आंसूगैस के गोले दागने पड़े और जब उससे भी पथराव नहीं रुका तो फायEिरग करनी पड़ी। इसमें तीन पत्थरबाजों की मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हो गए। मारे गए युवकों की पहचान जाहिद रशीद गनई, आमिर वाजा और अशफाक अहमद के तौर पर हुई। कश्मीर घाटी में अचानक तेज हुई पत्थरबाजी, आगजनी उसे देखते हुए वहां से अच्छी खबर नहीं बल्कि सिर्फ खूनखराबे और निराशाजनक खबरें ही आ सकती हैं। बड़गांव के फसाद से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पिछले साल की तरह ही हिंसक घटनाओं की शुरुआत हो चुकी है। पिछले दिनों सेनाध्यक्ष जनरल रावत ने चेतावनी दी थी कि सेना के सर्च ऑपरेशन अभियान में बाधा डालने वालों और आतंकवादियों का सुरक्षा कवच बनने वालों से सेना कड़ाई से पेश आएगी। अलगाववादी उनके इस बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर स्थानीय लोगों को भड़का रहे हैं। सरकार को सख्ती के साथ ही संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया भी तत्काल शुरू करनी चाहिए। युवकों में बढ़ती बेरोजगारी एक बड़ी वजह है कि 500 रुपए प्रतिदिन लेकर गुमराह युवक पत्थरबाजी पर उतरते हैं। इन्हें रोजगार देने की गंभीरता से योजना बननी चाहिए। घाटी में मनोरंजन का भी अब कोई जरिया नहीं बचा। तमाम सिनेमा हॉल बंद हैं। युवा शाम को क्या करें? उनका ध्यान बंटाने के लिए सिनेमा हॉल इत्यादि खुलने चाहिए। कश्मीर में पिछले ढाई दशक से भी ज्यादा समय से जारी भीषण रक्तपात कब और कहां रुकेगा यह सभी के लिए चिन्ता का विषय है।
-अनिल नरेन्द्र


किसानों की आत्महत्याएं ः आपराधिक लापरवाही

किसानों की आत्महत्या को बेहद गंभीर मामला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इसे रोकने के लिए तुरन्त कार्ययोजना बनाने को कहा है। शीर्ष अदालत ने इसके लिए चार हफ्ते का वक्त दिया है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा से कहा कि सरकार को ऐसी नीति लेकर आना चाहिए जिसमें किसानों की आत्महत्या के मूल कारण को दुरुस्त किया जा सके। पीठ ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। केंद्र सरकार को रोड मैप तैयार करना होगा। केंद्र यह भी बताए कि किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए राज्यों को क्या कदम उठाने चाहिए। सोमवार को सुनवाई के दौरान पीएस नरसिम्हा ने कहा कि सरकार इसके लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वे सीधे किसानों से फसल लेना, बीमा राशि बढ़ाने, ऋण देने और फसल की क्षति होने पर मुआवजे की रकम बढ़ाने सहित कई सकारात्मक कदम उठा रही है। बता दें कि यह समस्या कितनी गंभीर है कि 2015 में 8007 किसानों ने आत्महत्या की। जान देने वाले किसानों में से 73 फीसदी दो एकड़ या इससे कम जमीन के मालिक थे। आत्महत्याओं के पीछे कर्ज और दिवालियापन को मुख्य वजह बताया गया है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार किसानों द्वारा आत्महत्या करने की सबसे ज्यादा घटनाएं महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में हुई। वर्ष 2014 में 5650 किसानों ने आत्महत्या की थी। एक साल में यह आत्महत्या का सिलसिला 5650 से बढ़कर 8007 तक पहुंच गया यानि यह लगातार बढ़ रहा है। वैसे तो किसानों द्वारा आत्महत्या करने के लिए कारण हैं पर भारतीय किसान बहुत हद तक मानसून पर निर्भर हैं। इसकी असफलता के कारण नकदी फसलें नष्ट होना आत्महत्याओं का मुख्य कारण माना जाता रहा है। मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, कर्ज का बोझ आदि समस्याओं की शुरुआत करती है। बैंकों, महाजनों, बिचौलियों आदि के चक्र में फंसकर भारत के विभिन्न हिस्सों के किसानों ने आत्महत्याएं की हैं। एक अत्यंत दुखद पहलू यह भी है कि ओलावृष्टि और बारिश से फसल को हुए नुकसान की भरपायी के लिए केंद्र और राज्य सरकारें दोनों ने ही शुरुआती तकरार के बाद किसानों को मुआवजे की घोषणा की थी। मगर उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष दिए गए 1790 करोड़ रुपए में से सिर्फ 480 करोड़ रुपए ही जरूरतमंद किसानों तक पहुंच सके हैं और अब विभिन्न जिलों के अधिकारी बाकी के 1200 करोड़ रुपए सरकारी खजाने में लौटाने की जुगत कर रहे हैं। यदि सरकारें और विभिन्न संस्थाएं अपनी जवाबदेही ठीक से समझतीं तो किसानों की इतनी दुर्दशा न होती जो आज हो गई है।

Thursday, 30 March 2017

Hindus own Big Slaughterhouses

Gauhatya (cow slaughter) is not just an issue, it is a question of our faith and belief. The cow has the status of Goddess in Hindu religion. Within the cow, the abode of Gods has been considered in our religious texts. Cows are specially worshiped on the occasion of Govardhan Puja, on the second day of Deepawali and they are adorned from peacock feathers etc. According to the Puranas, it is  believed that all the deities inhabit in the cow. Tormenting cow in any form is considered a grave sin. To kill her is like opening the door to the hell, where many lives have to suffer. According to Atharva Veda, 'Dhenu Sadanam Rainnam' i.e. cow is the main source of prosperity. Cow is a sign of prosperity and profusion. It is the source of the nurturing of creation. She is mother. Many types of products are made from cow's milk. Fuels and composts are obtained from dungs. Medicines and fertilizers are made from urine.

The cow is not so worshipful that it gives milk and its  existence meets our social fulfillment. Actually, according to the fact, the soul finally becomes a cow after taking birth in 84 lakhs Yoni (types of bodies). The scientists say that the cow is the only creature that inhales oxygen and releases oxygen only. While all creatures including humans inhale oxygen and release carbon dioxide.Trees and plants carry out reverse process of it. The cow's meat, which is called beef, everyone who sells or eat beef should abstain from it. What to do when the beef sellers themselves are related to Hindu religion?

A sensational report of Mr. Pramod Malik (BBC dot work) has been published in BBC (Hindi). This report is available in this regard. In the last few days, some slaughterhouses have been closed in Uttar Pradesh.
The government says it was being run illegally. When issue of slaughterhouses surfaces, common people make a perception that persons of a particular religion and class are involved in this profession without knowing the reality. You would be surprised to know that 10 big beef exports of India belong to the Hindu community. According to the Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA), a body of  Ministry of Commerce, GOI, owners of 10 slaughter houses out of 74 in the country, belong to the Hindu community.

The country's largest abattoir is situated in  Rudram village in Medak district of Telangana. Spread over 400 acres, Satish Sabharwal is the owner of this slaughterhouse. This abattoir runs Al Kabir Exports Pvt. Ltd. This abattoir is run by Al Kabir Exports Pvt. Ltd. From the headquarters located at Nariman Point, Mumbai, it exports beef to many Middle East countries.

It is also India's largest beef exporter and has offices in several Middle East cities. Suresh Sabharwal, Chairman Al Kabir Middle East told the BBC in the conversation on the phone from Dubai office- Religion and business are two different things and both should not be seen together. If any Hindu remains in beef business or any Muslim lends money on interest, what is the problem? Al Kabir had a business of about Rs 650 crore last year.

Sunil Kapoor is the owner of Arabian Exports Pvt. Ltd. It has its headquarters in Mumbai's Ashir Mansions. The Company exports the meat of the sheep also besides beef. Its board of directors includes Viratan Nagnath Woodchule, Vikas Maruti Shinde and Ashok Narang.

Madan Abbott is the owner of MKR Frozen Food Exports Pvt. Company's headquarters is in Delhi. The abattoir of Abbott Cold Storage Pvt. Ltd is situated in Samgauli village in Mohali district of Punjab. Its director is Sunny Abbott.
Anil Sood, owner of Alnnur Exports. This Company's office is in Delhi. But its abattoir and meat processing plant is in Shernagar village of Muzaffarnagar in Uttar Pradesh. Apart from this, they have plants in Meerut and Mumbai also. Its second partner is Ajay Sood. This company was established in 1992 and it exports beef to 35 countries.

Abattoir of AOV Exports Pvt. Ltd. is in Unnao, Uttar Pradesh. Its director is O. P. Arora. This Company has been working since 2001. Company's headquarter is in Noida and Abhishek Arora is director of AOV Agro Foods. Plant of this company is in Mewat's Nooh.

Kamal Verma is director of Standard Foods Exports Private Limited. S Kumar is director of PN Products Exports. Slaughterhouse of Ashwini Agro Exports is in the Gandhi Nagar of Tamil Nadu. Company's Director K. Rajendran  departs religion  from business. He says that religion is a private thing and it should not be associated with his business at all. Sunny Khattar, partner of Maharashtra Foods Processing and Cold Storage, also believes that religion and business are different things, it is wrong to combine both. He says - I am a Hindu and I am in Beef business, so what has happened? There is no evil in it if any Hindu is in this business. I did not become a bad Hindu by doing this business.

Apart from this, there are many such companies of Hindus which are working only in the field of beef export. They do not have abattoir but they process, pack and export meat. Kanak Traders is such a company. Its proprietor Rajesh Swamy said that there is no discrimination between Hindus and Muslims in this business. People of both religions work together. There is no excuse for anyone being a Hindu. They also say that if slaughterhouses are closed then both Hindus and Muslims will meet loss. We believe that whether it be beef or pork (pig meat) neither should it be consumed nor its business. Most Indians refrain from these two.

The beef should be banned. Cow slaughter should be stopped, no matter whoever is involved.

-Anil Narendra

दिल्ली नगर निगम चुनाव ः दम दिखाने में कोई नहीं कम

आगामी दिल्ली नगर निगम चुनाव में दिल्ली की जनता क्या गुल खिलाएगी, इसका तो 25 अप्रैल को ही पता चलेगा, पर चुनाव जीतने के लिए सभी संबंधित दल युद्ध स्तर पर तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यालय और पंडित गोबिन्दवल्लभ पंत मार्ग पर भाजपा कार्यालय पर लगने वाली उम्मीदवारों की भीड़ अब नेताओं के घरों तक पहुंचने लगी है। आप ने निगम चुनाव के लिए अपने सभी 272 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। लेकिन जिस तरह से उम्मीदवार बदले गए हैं, उससे अन्य उम्मीदवारों को टिकट पाने की उम्मीद बढ़ी है। वहीं भाजपा और कांग्रेस भी एक-आध दिन में अपने उम्मीदवार घोषित कर देगी। पहली बार निगम चुनाव लड़ने जा रही स्वराज इंडिया पार्टी ने भी अपने ज्यादातर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। वाम दलों के अलावा बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (एका) ने भी इस बार जोर-शोर से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। कांग्रेस ने सबसे पहले 5 मार्च को रामलीला मैदान में अपने उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सभा के माध्यम से चुनाव प्रचार का श्रीगणेश किया था। अब वह पंजाब के चुनाव अभियान काफी विद कैप्टन की तर्ज पर चाट पर चर्चा से चुनाव प्रचार शुरू करने की तैयारी कर रही है। वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को रामलीला मैदान में सभा करके भाजपा के चुनाव प्रचार का आगाज किया। आप के सर्वेसर्वा और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 31 मार्च से चुनाव प्रचार शुरू करने वाले हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे ने फिलहाल आप के आत्मविश्वास को धक्का पहुंचाया है। वहीं इन परिणामों ने कांग्रेस के हौसले बुलंद किए हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी जीत दर्ज करने के बाद भाजपा हर हालत में दिल्ली जीतना चाहेगी। वर्तमान में भाजपा के 153 निगम पार्षद सत्ता पर काबिज हैं और यह संभव नहीं कि सभी के सभी को टिकट मिलेगा। भाजपा को भीतरघात पहुंचने का बड़ा खतरा है। जिस तरह दिल्ली की सत्ता में आप 67 विधायकों के जीतने के साथ रिकार्ड बनाकर एकतरफा सत्ता पर काबिज हुई थी, उसे देखकर क्या यह समझा जाए कि जनता में आपका भाव बरकरार है? इस दृष्टिकोण से भाजपा के समक्ष आप या कांग्रेस को कम नहीं आंका जा सकता है। आप विधायक जरनैल सिंह के इस्तीफे के बाद राजौरी गार्डन विधानसभा सीट पर नगर निगम चुनाव से पहले 9 अप्रैल को चुनाव होना है। इस सीट पर कांग्रेस ने गैर-पंजाबी मीनाक्षी चंदेला को अपना उम्मीदवार बनाया है। भाजपा और आप ने इस सीट के लिए सिख उम्मीदवार उतारे हैं। नगर निगम चुनाव से ठीक पहले इस चुनाव से दिल्ली की जनता के मूड का पता चलेगा।
-अनिल नरेन्द्र


राजधानी, शताब्दी में फ्लेक्सी योजना समाप्त होगी

लगता है कि रेल मंत्रालय का वीआईपी ट्रेनों, राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस में फ्लेक्सी किराया योजना कामयाब नहीं हो पाई। सामान्य से डेढ़ गुना अधिक किराया होने से रेल  यात्री अब हवाई सफर करना बेहतर विकल्प मान रहे हैं। ट्रेनों में बर्थ खाली जा रही है और ज्यादा कमाई की जगह रेलवे को नुकसान उठाना पड़ रहा है। खबर है कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड को फ्लेक्सी किराया स्कीम हटाने का निर्देश दिया है। हालांकि रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी कहा कि अधिकारियों का एक वर्ग अभी भी फ्लेक्सी फेयर के फैसले पर अड़ा है। राजधानी और शताब्दी में खाली बर्थ भरने की योजना को अगर सब ठीक रहा तो 1 अप्रैल से हटाया जा सकता है। इसमें मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में प्रतीक्षा वाले यात्रियों को बगैर अतिरिक्त किराया दिए राजधानी और शताब्दी में सफर करने का मौका दिया जाएगा। हालांकि आरक्षण फार्म भरते समय यात्री को विकल्प के तौर पर संबंधित राजधानी-शताब्दी अथवा दुरंतो ट्रेन का उल्लेख करना होगा। यात्री का टिकट कंफर्म नहीं हुआ तो विकल्प वाली ट्रेन में बर्थ खाली होने पर सफर करने का मौका मिलेगा। एक मई अथवा जून महीने में राजधानी-शताब्दी और दुंरतो से फ्लेक्सी फेयर का हटाना लगभग तय  है। बता दें कि फ्लेक्सी फेयर योजना 9 सितंबर 2015 से लागू है। 22 दुरंतो, 25 राजधानी व 38 जुड़ी शताब्दी ट्रेनें चल रही हैं। टिकट बुकिंग की शुरुआत के 10 बर्थ पर सामान्य किराया लेते हैं। हर 10 प्रतिशत बर्थ की बुकिंग के साथ 10 प्रतिशत किराया बढ़ता है। उदाहरण के लिए किसी ट्रेन में कुल 100 बर्थ हैं, तो पहली 10 बर्थ का किराया 100 रुपए (सामान्य) रहेगा। फिर 11 से 20 बर्थ का किराया 110 रुपए, 21 से 30 बर्थ का किराया 120, 31 से 40 बर्थ का किराया 130 रुपए, 41 से 50 बर्थ का किराया 140 रुपए  होगा। इसके पश्चात 51 वीं बर्थ के आगे सभी बर्थ के लिए मूल किराये से 50 फीसदी अधिक कीमत देनी होगी। रेलवे को फ्लेक्सी फेयर से सालाना एक हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त कमाई होने का अनुमान था। लेकिन रेल यात्रियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। इसलिए पिछले छह माह में महज 300 करोड़ रुपए की आय हो सकी है। वहीं डेढ़ गुना किराया होने से रेल यात्रियों की संख्या में दिनोंदिन कमी आ रही है। यह रेलवे के लिए चिंता का विषय है। यात्री सुविधा  के लिए रेलवे एक अप्रैल से कई नए बदलाव भी करेगा। रेलवे बोर्ड से सभी जोन में यह आदेश भेजा गया है। अगर यह फ्लेक्सी फेयर योजना समाप्त होती है तो सभी को फायदा है, यात्रियों को भी और रेलवे को भी।

Wednesday, 29 March 2017

बीफ के बड़े कत्लखाने चलाने वाले ये हिन्दू मालिक

गौहत्या केवल एक मुद्दा ही नहीं यह हमारी आस्था व मान्यता का सवाल है। गाय को हिन्दू धर्म में देवी का दर्जा प्राप्त है। गाय के भीतर देवताओं का वास हमारे धार्मिक ग्रंथों में माना गया है। दीपावली के दूसरे दिन गोवर्द्धन पूजा के अवसर पर गायों की विशेष रूप से पूजा की जाती है और उनका मोर पंखों आदि से श्रृंगार किया जाता है। पुराणों के अनुसार गाय में सभी देवताओं का वास माना गया है। गाय को किसी भी रूप में सताना घोर पाप माना गया है। उसकी हत्या करना तो नर्क के द्वार को खोलने के समान है, जहां कई जन्मों तक दुख भोगना पड़ता है। अथर्ववेद के अनुसार `धेनु सदानाम रईनाम' अर्थात गाय समृद्धि का मूल स्रोत है। गाय समृद्धि व प्रचुरता की द्योतक है। वह सृष्टि के पोषण का स्रोत है। वह जननी है। गाय के दूध से कई तरह के उत्पाद बनते हैं। गोबर से ईंधन व खाद मिलती है। इसके मूत्र से दवाएं व उर्वरक बनते हैं। गाय इसलिए पूजनीय नहीं है कि वह दूध देती है और इसके होने से हमारी सामाजिक पूर्ति होती है। दरअसल मान्यता के अनुसार 84 लाख योनियों का सफर करके आत्मा अंतिम योनी के रूप में गाय बनती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है। जबकि मनुष्य सहित सभी प्राणी ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइ-ऑक्साइड छोड़ते हैं, पेड़-पौधे इसका ठीक उल्टा करते हैं। गाय का मीट जिसे बीफ कहते हैं खाने वाले, बीफ को बेचने वाले सभी को इससे बचना चाहिए। जब बीफ बेचने वाले खुद हिन्दू धर्म से संबंधित हों तो क्या करें? बीबीसी (हिन्दी) में श्री प्रमोद मलिक (बीबीसी डॉट काम) की एक सनसनीखेज रिपोर्ट छपी है इसी संबंध में प्रस्तुत है यह रिपोर्टöउत्तर प्रदेश में पिछले दिनों कुछ बूचड़खाने बंद कराए गए। सरकार का कहना है कि वह अवैध रूप से चलाए जा रहे थे। बूचड़खानों का जिक्र आने पर आम लोगों की जहां मान्यता है कि इस पेशे में एक खास मजहब और वर्ग के लोग ही काम करते हैं वहीं हकीकत क्या है? आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत के 10 बड़े बीफ एक्सपोर्ट का संबंध हिन्दू समुदाय से है। केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की संस्था कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (अपेडा) के अनुसार मौजूद देश के 74 बूचड़खानों में 10 के मालिक हिन्दू हैं। देश का सबसे बड़ा बूचड़खाना तेलंगाना के मेडक जिले में रुद्रम गांव में है। तकरीबन 400 एकड़ में फैले इस बूचड़खाने के मालिक सतीश सब्बरवाल हैं। यह बूचड़खाना अल कबीर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड चलाता है। मुंबई के नरीमन प्वाइंट स्थित मुख्यालय से यह मध्य-पूर्व के कई देशों को बीफ निर्यात करता है। यह भारत का सबसे बड़ा बीफ निर्यातक भी है और मध्य-पूर्व के कई शहरों में इसके दफ्तर हैं। दुबई दफ्तर से फोन पर बातचीत में अल कबीर मध्य-पूर्व के चेयरमैन सुरेश सब्बरवाल ने बीबीसी से कहाöधर्म और व्यवसाय दो बिल्कुल अलग चीजें हैं और दोनों को एक-दूसरे से मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए। कोई हिन्दू बीफ व्यवसाय में रहे या मुसलमान ब्याज पर पैसे देने के व्यवसाय में रहे तो क्या हर्ज है? अल कबीर ने बीते साल लगभग 650 करोड़ रुपए का कुल व्यवसाय किया था। अरेबियन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक सुनील कपूर हैं। इसका मुख्यालय मुंबई के एशियर मैनशंस में है। कंपनी बीफ के अलावा भेड़ का मांस भी निर्यात करती है। इसके निदेशक मंडल में विरतन नागनाथ कुडचुले, विकास मारुति शिंदे और अशोक नारंग हैं। एमकेआर फ्रोजन फूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक मदन एबट हैं। कंपनी का मुख्यालय दिल्ली में है। एबट कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना पंजाब के मोहाली जिले के समगौली गांव में है। इसके निदेशक सनी एबट हैं। अलन्नूर एक्सपोर्ट्स के मालिक अनिल सूद हैं। इस कंपनी का दफ्तर दिल्ली में है। लेकिन इसका बूचड़खाना और मांस प्रसंस्करण संयंत्र उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के शेरनगर गांव में है। इसके अलावा मेरठ और मुंबई में भी इसके संयंत्र हैं। इसके दूसरे पार्टनर अजय सूद हैं। इस कंपनी की स्थापना 1992 में हुई और यह 35 देशों को बीफ निर्यात करती है। एओवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना उत्तर प्रदेश के उन्नाव में है। इसके निदेशक ओपी अरोड़ा हैं। यह कंपनी साल 2001 से काम कर रही है। कंपनी का मुख्यालय नोएडा में है और अभिषेक अरोड़ा एओवी एग्रो फूड्स के निदेशक हैं। इस कंपनी का संयंत्र मेवात के नूह में है। स्टैंडर्ड फ्रोजन फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कमल वर्मा हैं। पान्ने प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट्स के निदेशक साहिब कुमार हैं। अश्विनी एग्रो एक्सपोर्ट्स का बूचड़खाना तमिलनाडु के गांधी नगर में है। कंपनी के निदेशक के. राजेंद्रन धर्म को व्यवसाय से बिल्कुल अलग रखते हैं। वे कहते हैंöधर्म निहायत ही निजी चीज है और इसका व्यवसाय से कोई ताल्लुक नहीं होना चाहिए। महाराष्ट्र फूड्स प्रोसेसिंग एंड कोल्ड स्टोरेज के पार्टनर सन्नी खट्टर का भी मानना है कि धर्म और धंधा अलग-अलग चीजें हैं, दोनों को मिलाना गलत है। वे कहते हैंöमैं हिन्दू हूं और बीफ व्यवसाय में हूं तो क्या हो गया? किसी हिन्दू के इस व्यवसाय में होने में कोई बुराई नहीं है। मैं यह व्यवसाय कर कोई बुरा हिन्दू नहीं बन गया। इसके अलावा हिन्दुओं की कई ऐसी कंपनियां हैं जो सिर्फ बीफ निर्यात के क्षेत्र में हैं। उनका बूचड़खाना नहीं है पर वे मांस प्रसंस्करण, पैकेजिंग कर निर्यात करते हैं। कनक टेडर्स ऐसी ही कंपनी है। इसके प्रोप्राइटर राजेश स्वामी ने कहाöइस व्यवसाय में हिन्दू-मुसलमान का भेदभाव नहीं है। दोनों धर्मों के लोग मिलजुल कर काम करते हैं। किसी के हिन्दू होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। वे यह भी कहते हैं कि बूचड़खाने बंद हुए तो हिन्दू-मुसलमान दोनों को नुकसान होगा। हमारा मानना है कि चाहे वह बीफ हो या पोर्क हो (सूअर का मीट) न तो उसका सेवन होना चाहिए और न ही उसका धंधा। अधिकतर भारतीय इन दोनों से परहेज करते हैं। बीफ पर बैन लगना चाहिए। गौहत्या बंद होनी चाहिए, चाहे इसमें कोई भी शामिल हो।

-अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 28 March 2017

अब भाजपा की नजरें हिमाचल, गुजरात और कर्नाटक चुनाव पर

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से निपटने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने अपना अगला मिशन शुरू कर दिया है। अटकलें तो यह भी लगाई जा रही हैं कि गुजरात में समय से पहले विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। पार्टी के अंदर की चर्चाओं के संकेत हैं कि गुजरात के विधानसभा चुनाव भाजपा सरकार मई या जून में करा सकती है। यह संकेत कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने दिए हैं। सोलंकी ने कहा कि भाजपा 31 मार्च को विधानसभा भंग कर सकती है और मई-जून में राज्य में चुनाव हो सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब हिमाचल, गुजरात और कर्नाटक के बारे में कई चीजें नजर आएंगी। उनमें दूसरे दलों के नेताओं का भाजपा में स्वागत करने का सिलसिला भी शामिल है। कर्नाटक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एसएम कृष्णा के आगमन से यह सिलसिला शुरू हो चुका है। हिमाचल और गुजरात में इसी साल के अंत में चुनाव हैं। कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। लगता है कि भाजपा की सेंट्रल लीडरशिप तीनों राज्यों में यूपी और उत्तराखंड को दोहराने के इरादे से काम कर रही है। इन दोनों राज्यों में भी चुनाव से पहले दूसरे दलों के कई नेता भाजपा में आए थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की नीति अपने पार्टी संगठन को मजबूत करने और दूसरे दलों को कमजोर करने की लगती है। यानि दो समानांतर प्रयास। संगठन को मजबूत करने हेतु देशभर में 10 करोड़ से ज्यादा सदस्य बनाए गए हैं। कमजोरी को दूर करने के लिए कई तरह के प्रयास हो रहे हैं। जहां अपने यहां मजबूती नहीं है, वहां दूसरे दल के नेताओं को लाकर कमी दूर करने की कोशिश है। यूपी और उत्तराखंड में भी यही किया गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत की पृष्ठभूमि में एक बात जो साफ उभरकर आई है वह यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए हिन्दुस्तान में भाजपा मुसलमानों के लिए अछूती नहीं रही। देवबंद, बरेली और कई मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा की जीत इसका प्रमाण है। तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां अब तक मुसलमानों की ठेकेदार बनकर वोटों का सौदा करती थीं। मोदी जी ने इन ठेकेदारों का कारोबार बंद कर दिया। अब तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल शायद ही मुसलमानों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल कर सकें। तीन तलाक का मुद्दा मुस्लिम महिलाओं को भा गया और गुजरात और कर्नाटक में भी इसका असर दिखेगा। अंत में बता दें कि भाजपा के तीन सांसद योगी आदित्यनाथ, मनोहर पर्रिकर और केशव प्रसाद मौर्य जुलाई के अंत तक अपना इस्तीफा लोकसभा से नहीं देंगे क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी उनका वोट खोना नहीं चाहती।

-अनिल नरेन्द्र