Sunday, 25 August 2019

बिस्कुट कंपनी पारले पर जीएसटी की मार

भारतीय अर्थव्यवस्था की मंदी का असर देश की सबसे बड़ी बिस्कुट निर्माता कंपनी पारले पर देखने को मिल रहा है। इस वजह से आने वाले दिनों में पारले के 10 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पारले अपने प्रॉडक्ट्स के इस्तेमाल में सुस्ती की वजह से हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। बता दें कि पूरे देश में प्रसिद्ध पारले जी बिस्कुट का निर्माता है पारले। पारले जी आज घर-घर की पसंद बन चुका है और अगर इस पर प्रभाव पड़ा तो उसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। कंपनी के कैटेगरी हैड मयंक शाह के मुताबिक यह सुस्ती गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) की वजह से आई है। मयंक शाह ने कहा कि हम लगातार सरकार से बिस्कुट पर जीएसटी घटाने की मांग कर रहे हैं। मगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी या कोई विकल्प नहीं बताया तो हमें मजबूरन आठ से 10 हजार लोगों की छंटनी करनी पड़ सकती है। मयंक शाह ने बताया कि हमने सरकार से 100 रुपए प्रति किलो या उससे कम कीमत वाले बिस्कुट पर जीएसटी घटाने की मांग की है। दरअसल जीएसटी लागू होने से पहले 100 रुपए प्रति किलो से कम कीमत होने वाले बिस्कुट पर 12 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता था। लेकिन सरकार ने दो साल पहले जब जीएसटी लागू किया तो सभी बिस्कुटों को 18 प्रतिशत स्लैब में डाल दिया। इसका असर यह हुआ कि बिस्कुट कंपनियों को इनके दाम बढ़ाने पड़े और इस वजह से बिक्री में गिरावट आ गई है। मयंक शाह के मुताबिक पारले ने बिस्कुट पर पांच प्रतिशत दाम बढ़ाया है। इस वजह से बिक्री में बड़ी गिरावट आई है। शाह ने बिक्री में गिरावट की वजह बताते हुए कहा कि कीमतों को लेकर ग्राहक बहुत ज्यादा भावुक होते हैं। वे यह देखते हैं कि उन्हें कितने बिस्कुट मिल रहे हैं। इस अंतर को समझने के  बाद ग्राहक सतर्प हो जाते हैं। यहां बता दें कि 90 साल पुरानी बिस्कुट कंपनी पारले के 10 प्लांट अपने 125 कांट्रैक्ट वाले हैं। इनमें एक लाख कर्मचारी जुड़े हुए हैं। कंपनी का सालाना रवेन्यू करीब 9940 करोड़ रुपए का है। बीते दिनों पारले के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण बेरी ने भी बिक्री में गिरावट का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि ग्राहक पांच रुपए के बिस्कुट पैकेट भी खरीदने से कतरा रहे हैं। बेरी ने कहा कि हमारी ग्रोथ सिर्प छह प्रतिशत हुई है। मार्केट ग्रोथ हमसे भी सुस्त है। इससे पहले मार्केट रिसर्च फर्म नीलसन ने कहा था कि इकोनॉमिक स्लो डाउन की वजह से कंज्यूमर गुड्स इंडस्ट्री ठंडी पड़ी है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में खपत घट गई है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक नमकीन, बिस्कुट, मसाले, साबुन में अधिक सुस्ती दिख रही है।

-अनिल नरेन्द्र

जज कुहार की अदालत में चला कोर्ट रूम लाइव

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदम्बरम को सीबीआई ने गुरुवार को भोजनावकाश के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच 3.15 मिनट पर राऊज एवेन्यू स्थित न्यायाधीश अजय कुमार कुहार की अदालत में पेश किया। चिदम्बरम पर गंभीर आरोप लगाते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विशेष अदालत को बताया कि वे पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं। वे कुछ जानकारी नहीं दे रहे हैं। उनके पास आईएनएक्स मीडिया मामले से संबंधित कई दस्तावेज हैं, उन्होंने पहले हामी भरी और बाद में मुकर गए। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उनकी अग्रिम जमानत निरस्त करते हुए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच अभी चल रही है और उनसे और पूछताछ करनी है। उनके खिलाफ काफी आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं। कई दस्तावेज चिदम्बरम के नाम हैं। वे उसे दे नहीं रहे हैं। उनके विदेशी निवेश की अनुमति देने से पहले और बाद में भी षड्यंत्र करने की बात सामने आई है। अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है। इसलिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है। उन्हें पांच दिनों की सीबीआई हिरासत में सौंपा जाए क्योंकि सारे काम उनके कार्यकाल में हुए हैं। इस तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी हिरासत में लेकर पूछताछ करने की बात कही है। चिदम्बरम की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआई उनसे 22 बार पूछताछ कर चुकी है। हमेशा उन्होंने सहयोग किया है। इस मामले में उनके पुत्र कार्ति चिदम्बरम को नियमित जमानत व भास्कर को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। विदेशी निवेश की अनुमति देने वाले छह अधिकारियों में से अभी तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस मामले में इंद्राणी मुखर्जी भी जमानत पर हैं। इसलिए चिदम्बरम को हिरासत में सौंपने की जरूरत नहीं है। अगर सीबीआई को फिर से पूछताछ करनी है तो वह उन्हें बुला सकती है। सीबीआई सभी प्रश्नों की सूची दे दे और उसका जवाब दे दिया जाएगा। इस मामले में आरोप पत्र का मसौदा भी तैयार हो चुका है। वरीय अधिवक्ता ने कहा कि जमानत अधिकार है और हिरासत विशेष परिस्थितियों में ही दी जाती है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाए। केस डायरी को साक्ष्य नहीं माना जा सकता है। उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि केस डायरी भले ही साक्ष्य न हो, लेकिन अभी जांच का समय है और सीबीआई सभी बातों का खुलासा नहीं कर सकती है। वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। यह सीबीआई अधिकारी पर निर्भर करता है कि वह प्रश्न कैसे पूछे। इसके लिए उस पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। सीबीआई ने हाई कोर्ट में भी केस डायरी सौंपी है और वहां भी कहा है कि उसकी जांच जारी है। इसलिए जांच समाप्त होने की बात नहीं कही जा सकती और न ही आरोप पत्र तैयार होने की बात। अभिषेक मनु सिंघवी ने चिदम्बरम की ओर से पेश होते हुए कहा कि केस डायरी सबूत नहीं होती। इसमें सिर्प अधिकारी द्वारा लिखी बातें हैं। पूरा मामला इंद्राणी मुखर्जी के बयान पर आधारित है। उसके चार महीने बाद चिदम्बरम से पूछताछ हुई। सीबीआई इसलिए हिरासत मांग रही है क्योंकि उसके मन मुताबिक जवाब नहीं मिल रहे। सीबीआई चिदम्बरम से क्या पूछना चाहती है? सवाल कोर्ट में बताएं। मेहताöकोर्ट में कैसे बता दें? आप मेरा पूछताछ का हक नहीं छीन सकते। हम देशहित में काम कर रहे हैं। शातिर लोगों से निपट रहे हैं। सिंघवीöजून 2018 में इस मामले में सीबीआई ने एक नया शब्द गढ़ा हैöग्रेविटी। इसका कानून में कोई मतलब नहीं। जमानत खारिज करने के तीन आधार हो सकते हैं। जांच में असहयोग, कानून से भागने का जोखिम और सबूतों से छेड़छाड़। इनमें से कोई भी इस केस में चिदम्बरम पर लागू नहीं होता। विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहार ने सीबीआई से यह जानना चाहा कि उसने चिदम्बरम की अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय में क्या हलफनामा दिया है। इसका जवाब देते हुए मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालय में भी हलफनामा दाखिल कर चिदम्बरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की इजाजत मांगी थी। अदालत में इस मामले में करीब पौने दो घंटे जोरदार बहस हुई। इस दौरान चिदम्बरम कठघरे में खड़े रहे। मामले की सुनवाई के दौरान चिदम्बरम ने कहा कि वे कुछ कहना चाहते हैं। इस पर सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पहले से ही दो वरिष्ठ अधिवक्ता उनका पक्ष रख रहे हैं, इसलिए उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पर अदालत ने इजाजत दे दी। चिदम्बरम ने अदालत को बताया कि जब उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था तो इस मामले से जुड़ा कोई सवाल नहीं किया। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने सिर्प इतना पूछा था कि आपके विदेश में बैंक खाते हैं। करीब 4.55 बजे अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके बाद करीब छह बजकर 35 मिनट पर अदालत ने चिदम्बरम को पांच दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश  दे दिए। 26 अगस्त को उन्हें दोबारा पेश किया जाएगा। सीबीआई की हिरासत में रहने के दौरान वकील और परिवार के लोग रोज आधा-आधा घंटा चिदम्बरम से मिल सकेंगे। जज अजय कुमार ने कहा कि तथ्यों और हालात को देखते हुए सीबीआई की हिरासत न्यायोचित है। आरोप बेहद गंभीर हैं। इसलिए लेनदेन की तय सीमा तक पहुंचना जरूरी है। लेकिन आरोपी की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। कोर्ट में सारा समय चिदम्बरम की पत्नी और बेटे कार्ति मौजूद रहे।

Friday, 23 August 2019

30 साल में 490 अरब डॉलर का काला धन बाहर गया है

वित्त मंत्रालय की स्थायी समिति द्वारा काले धन को लेकर जो रिपोर्ट दी गई है, वह बेहद चिंतनीय है। यह और भी चौंकाने वाली बात है कि भाजपा जो दो बार काले धन के मुद्दे को लेकर देश की सत्ता में आई, आज वह कह रही है कि विदेशों में जो अनुमानित नौ लाख 41 हजार करोड़ रुपए गरीबों, किसानों और मजदूरों के हक का पैसा काले धन के रूप में चन्द नेताओं, उद्योगपतियों और अधिकारियों ने लूटकर रखा है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता, यह कहना था आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह का। सांसद संजय सिंह ने बयान जारी कर कहा कि मेरा मानना है कि अगर विदेशों में जमा काला धन वापस आ जाए तो देश में बेरोजगारी कम की जा सकती है, किसानों के कर्ज माफ किए जा सकते हैं, किसानों को उनकी फसल का डेढ़ गुना दाम दिया जा सकता है, नए स्कूलों, कॉलेजों व अस्पतालों का निर्माण किया जा सकता है। राष्ट्र निर्माण में यह पैसा अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी, विजय माल्या जैसे लोग जो देश का हजारों करोड़ रुपए लूटकर विदेशों मे बैठे हैं, सरकार को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और करनी पड़ेगी। वित्त पर स्थायी समिति ने तीन प्रतिष्ठित आर्थिक और वित्तीय शोध संस्थानों की रिपोर्ट के हवाले से जानकारी दी है कि भारतीयों द्वारा 1980 से लेकर 2010 तक की अवधि में 216.48 अरब डॉलर से 490 अरब डॉलर का काला धन देश के बाहर भेजा गया। काले धन पर राजनीतिक विवाद के बीच मार्च 2010 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तीन संस्थाओं को देश के बाहर भारतीयों के काले धन का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी थी। इन तीन संस्थानों में राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) राष्ट्रीय व्यवहारिक आर्थिक शोध परिषद (एनसीएईआर) और राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंध संस्थान (एनआईएफएम) शामिल हैं। कांग्रेस के वीरप्पा मोइली वाली इस स्थायी समिति ने 16वीं लोकसभा भंग होने से पहले गत 28 मार्च को ही लोकसभा अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। 7000 करोड़ रुपए जमा हैं स्विस बैंकों में भारतीयों के 2018 के मुताबिक। 100 लाख करोड़ रुपए जमा हैं सभी विदेशी ग्राहकों का पैसा स्विस बैंकों में। काला धन बाहर भेजने वाले शीर्ष पांच देशों में भारत चौथे नम्बर पर है। पहला चीन है, दूसरा रूस, तीसरा मैक्सिको, चौथा भारत और पांचवा मलेशिया। लगभग एक अरब डॉलर का काला धन विकासशील देशों से हर साल बाहर जाता है। खबर यह भी आई है कि स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों के जमा धन में कमी आई है। स्विस नेशनल बैंक की ओर से जारी डेटा के मुताबिक 2018 में छह प्रतिशत की गिरावट के साथ स्विस बैंकों में भारतीयों के 6,757 करोड़ रुपए थे। दो दशक में यह दूसरा सबसे निचला स्तर है। कुछ रिपोर्टों में यह गिरावट 11 प्रतिशत बताई गई है।

-अनिल नरेन्द्र

चिदम्बरम की गिरफ्तारी का हाईवोल्टेज ड्रामा

आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ्तारी से  बचने के लिए 27 घंटे तक लापता रहे पूर्व वित्तमंत्री, गृहमंत्री पी. चिदम्बरम को नाटकीय घटनाक्रम के बाद आखिरकार बुधवार रात को गिरफ्तार कर लिया गया। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के जोरबाग स्थित आवास पर लगभग एक घंटे चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद सीबीआई उन्हें एजेंसी मुख्यालय ले गई। सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि कोर्ट द्वारा वारंट के आधार पर चिदम्बरम को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले मंगलवार शाम से लापता रहे चिदम्बरम रात 8.15 बजे अचानक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ पार्टी मुख्यालय की प्रेस कांफ्रेंस में पहुंचे। उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया। कहा, वह कानून से भाग नहीं रहे  बल्कि कानून का सहारा ले रहे हैं। चिदम्बरम के पार्टी कार्यालय में होने की खबर मिलते ही सीबीआई की टीम वहां पहुंच गई। करीब सात मिनट का बयान देने के बाद चिदम्बरम पूर्व मंत्री व उनके वकील कपिल सिब्बल व अभिषेक मनु सिंघवी के साथ अपने घर रवाना हो गए। चिदम्बरम के पीछे-पीछे सीबीआई की तीन टीमें भी उनके घर जोरबाग पहुंच गईं। मुख्य गेट बंद होने से तीन अधिकारी दीवार फांदकर भीतर दाखिल हुए और गेट खोला। इस बीच ईडी की टीम भी वहां पहुंच गई। बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता भी पहुंच गए। अधिकारियों को कार्यकर्ताओं का भारी विरोध झेलना पड़ा। सीबीआई चिदम्बरम को लेकर घर से निकली तो एक कार्यकर्ता उस कार पर ही चढ़ गया जिसमें चिदम्बरम को ले जाया जा रहा था। इस बीच भाजपा के वर्पर भी वहां पहुंच गए। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में हाथापाई होने लगी। सीबीआई ने स्थिति बिगड़ती देख दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को भी बुला लिया। चिदम्बरम को हिरासत में लेकर सीबीआई मुख्यालय लाया गया। इस मुख्यालय का उद्घाटन अप्रैल 2011 में तब के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने किया था। इस कार्यक्रम में चिदम्बरम बतौर विशिष्ट अतिथि शरीक हुए थे। उनकी कानूनी लड़ाई लड़ रहे कपिल सिब्बल भी साथ थे। चुनाव में करारी हार के बाद से बुरी तरह बिखरी कांग्रेस पहली बार चिदम्बरम के पक्ष में एकजुट दिखी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुक्रवार को तय होने के बाद कपिल सिब्बल ने अहमद पटेल के जरिये सोनिया गांधी को इसकी सूचना दी। सोनिया के कहने पर पार्टी ने रणनीति बनाई कि अब भगोड़ा दिखने के बजाय हालात का मुकाबला किया जाए। शाम 6.30 बजे तय हुआ कि प्रेस कांफ्रेंस करेंगे। सात बजे फोन पर बातचीत में सोनिया ने कहा कि चिदम्बरम भी प्रेस कांफ्रेंस में आएं। पहले चिदम्बरम को सामने लाने का जिक्र नहीं था। अब पार्टी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई के तौर पर मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पी. चिदम्बरम के  पीछे एकजुट कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मोदी सरकार अब पार्टी के कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को निशाना बना सकती है। भविष्य के इस खतरे को देखते हुए कांग्रेस अब और ज्यादा सतर्प और मुस्तैद हो गई है। पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा और राहुल गांधी के ट्वीट में पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया था कि हमें चिदम्बरम के साथ एकजुट खड़े रहना है। इसी के तहत बुधवार रात पार्टी मुख्यालय में चिदम्बरम की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, सलमान खुर्शीद और विवेक तन्खा मौजूद थे। पार्टी इस मामले को राजनीतिक लड़ाई के तौर पर पेश करना चाहती है। कांग्रेसी खुलकर कह रहे हैं कि गृहमंत्री अमित शाह चिदम्बरम से बदला ले रहे हैं। सोहराबुद्दीन केस में चिदम्बरम ने शाह को जेल भिजवाया था। इसी का बदला अमित शाह ले रहे हैं। साथ ही कांग्रेस यह भी संदेश देना चाहती है कि सीबीआई, ईडी की जो भी कार्रवाई हो रही हैं, वह सत्ता का दुरुपयोग है और राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही हैं। चिदम्बरम तो इस कड़ी में पहले शिकार हैं। रॉबर्ट वाड्रा, राहुल गांधी और खुद सोनिया गांधी का भी नम्बर आ सकता है। वैसे कई लोगों का मानना है कि जिस ढंग से सीबीआई ने चिदम्बरम को गिरफ्तार किया उसकी जरूरत नहीं थी। सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक एनके सिंह के अनुसार इस तरह से चिदम्बरम को गिरफ्तार किया जाना सीबीआई की ज्यादती है जिसमें बचा जा सकता था। उन्होंने कहाöयह सही है कि कानून की नजर में सब बराबर हैं। लेकिन केस को देखना पड़ेगा कि केस है क्या? केस बहुत पुराना है। 10 साल के बाद 2017 में केस रजिस्टर किया गया। इंद्राणी मुखर्जी जो खुद अपनी लड़की की हत्या के आरोप में जेल में बंद है और उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है। वो इस केस में सीबीआई के कहने पर सरकारी गवाह बन जाती है और उनके बयान पर चिदम्बरम के खिलाफ इस मामले की जांच हो रही है। जांच को पूरा किया जाता, अदालत के सामने रखा जाता। यह जो अभियोग है उसकी गंभीरता को देखते हुए यह पुराना मामला है और इसका जो आधार है उन सारी बातों को देखते हुए मुझे तो लगता है कि सीबीआई का एक्सेसिव एक्शन यानि अत्याधिक कार्रवाई है। आखिर सीबीआई शुक्रवार तक क्यों इंतजार नहीं कर सकी जब सुप्रीम कोर्ट चिदम्बरम की जमानत अर्जी की अपील सुनाने वाली थी? ऐसी क्या जल्दी थी? अब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक बन गया है। मोदी जनता को संदेश देना चाहते हैं कि वो ताकतवर से ताकतवर लोगों को जेल भेज सकते हैं। मोदी-अमित शाह यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी, सरकार का मजबूत इरादा है।

Thursday, 22 August 2019

तीन साल और बने रहेंगे जनरल बाजवा सेना चीफ

पाकिस्तान के वर्तमान सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा नवम्बर में इसी साल रिटायर होने वाले थे लेकिन सोमवार को प्रधानमंत्री इमरान खान के ऑफिस ने घोषणा की कि जनरल बाजवा और तीन साल सेना प्रमुख बने रहेंगे। इससे पहले 2010 में तत्कालीन जनरल अशफाक परवेज कियानी को विस्तार दिया गया था। 58 वर्षीय बाजवा को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने नवम्बर 2016 को सेना का प्रमुख नियुक्त किया था। शरीफ ने तब तीन अन्य जनरलों को दरकिनार करते हुए बाजवा को सेना प्रमुख बनाया था। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस फैसले पर कहा कि अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया और भारत के साथ कश्मीर पर बढ़े तनाव को लेकर यह जरूरी फैसला है। उन्होंने इस फैसले को पाकिस्तान की सुरक्षा से भी जोड़ा है। पाकिस्तान के पास दुनिया की छठी सबसे बड़ी सेना है जिसका देश के परमाणु हथियारों पर भी नियंत्रण है। पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान बनने के बाद से कई तख्ता पलट किए हैं और अब तक करीब आधे समय तक देश पर उनका ही राज रहा है। इमरान खान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाने में जनरल बाजवा की उल्लेखनीय भूमिका थी। यह कहा जाए कि इमरान का जो फेवर बाजवा ने किया था उसे इमरान ने रिटर्न कर दिया है। कई दिनों से यह कयास लगाए जा रहे थे कि प्रधानमंत्री जनरल बाजवा को दूसरा कार्यकाल दे सकते हैं क्योंकि दोनों मिलकर काम करते हैं। पीएम इमरान खान की हाल ही में अमेरिकी यात्रा पर बाजवा भी गए थे। पाक सेना प्रमुख की नियुक्ति पीएम व उनकी सरकार को प्राथमिकता है। सबसे वरिष्ठ अधिकारी को सेना प्रमुख बनाए जाने की परंपरा का पालन नहीं किया जाता। पीएम व सरकार द्वारा नियुक्ति को राष्ट्रपति मंजूरी देते हैं। 2016 में सेना प्रमुख बनने के बाद पाकिस्तान में सैनिक शासन की आशंकाएं बनी थीं पर उनको खारिज करने वाले जनरल बाजवा भी अपने पूर्ववर्तियों जैसे ही हैं। आमतौर पर कहा जाता है कि निर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान उनके हाथों की कठपुतली माने जाते हैं। सेना प्रमुख के कार्यकाल को बढ़ाया जाना गैर-मुनासिब बताते हुए विपक्षी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ सदस्य फरहतुल्लाह बाबर ने ट्वीट किया कि मजबूत संस्थाएं किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं करतीं चाहे वह व्यक्ति कितना भी मजबूत, सक्षम और प्रतिभावान ही क्यों न हो। वैसे मजेदार बात है कि सत्ता में आने से पहले इमरान खान सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाना सेना के नियमों को बदलने का काम है जो एक संस्था के रूप में सेना को कमजोर करता है। इमरान का यह बयान 2010 में पीपीपी के सेना प्रमुख अशफाक परवेज कियानी के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के बाद आया था पर आज जो पाकिस्तान की अंदरूनी हालत है उस पर हम इमरान खान की इस नियुक्ति को समझ सकते हैं।

-अनिल नरेन्द्र

बालाकोट के वायुवीरों को वीरता सम्मान

तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से हर साल की तरह स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वीरता पुरस्कारों की घोषणा की गई। इस साल बालाकोट एयर स्ट्राइक पुरस्कारों में छाया रहा। पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक के बाद गुलाम कश्मीर में पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को वीर चक्र से नवाजा जाएगा। कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तान के अत्याधुनिक एफ-16 विमान को अपने मिग-21 बाइसन से मार गिराया था। इस दौरान अभिनंदन का भी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिससे वह पाक सीमा में पहुंच गए थे और तीन दिन बंदी रहे थे। बता दें कि वीर चक्र युद्धकाल में बहादुरी के लिए दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है। वहीं बालाकोट में जैश--मोहम्मद के ठिकानों पर हमला करने वाले वायुसेना के अन्य पायलट विंग कमांडर अमित रंजन, स्क्वाड्रन लीडर राहुल बोसाया, पंकज मुंजडे, बीएन रेड्डी, शशांक सिंह को वायुसेना मैडल से सम्मानित किया जाएगा। बालाकोट में एयर स्ट्राइक के बाद कश्मीर में पाक विमानों की घुसपैठ के दौरान फाइटर कंट्रोलर की जिम्मेदारी संभालने वाली स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल को युद्ध सेवा मैडल दिया जाएगा। इस बार बहादुरी पाने वालों में मिंटी अकेली महिला हैं। मिंटी को यह पुरस्कार बालाकोट हवाई हमले के बाद भारत-पाक में हवाई संघर्ष के दौरान दिए गए योगदान के लिए दिया जाएगा। जब पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने उनके एयर बेस से उड़ान भरी और पीओके के रास्ते भारतीय वायु सीमा में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़े, तभी मिंटी अग्रवाल जो उस समय वायुसेना के रडार कंट्रोल स्टेशन पर तैनात थीं, ने श्रीनगर स्थित वायुसेना के एयर बेस को सूचित कर दिया, जहां विंग कमांडर अभिनंदन सहित कई भारतीय लड़ाकू विमान हाई अलर्ट पर थे। फाइटर कंट्रोलर की भूमिका निभाने वाली स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल से सूचना मिलते ही अभिनंदन वर्धमान ने उड़ान भरी और अपनी वायुसीमा पर पहुंच गए थे। इस बीच मिंटी अग्रवाल अभिनंदन को हर पल पाकिस्तानी जेट की स्थिति के बारे में उन्हें अवगत कराती रहीं, जिससे अभिनंदन ऑपरेशन को पूरा करने में सफल रहे। इसके अलावा पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड गाजी रशीद का सफाया करने वाले आरआर राइफल्स के मेजर विभूति शंकर ढोंढियाल समेत उत्तराखंड के सात जांबाजों को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने बहादुरी पुरस्कार का ऐलान किया। मेजर ढोंढियाल (मरणोपरांत) को शौर्य चक्र और उनके मित्र रहे मेजर चित्रेश बिष्ट (मरणोपरांत) को सेना मैडल दिया गया। मेजर ढोंडियाल और मेजर बिष्ट दोनों देहरादून के निवासी थे। साथ-साथ फौज में गए थे और इसी साल फरवरी में शहीद हुए थे। मेजर ढोंढियाल 18 फरवरी को पुलवामा के विंगलिया गांव में आतंकियों के साथ चले 100 घंटे के ऑपरेशन के बाद शहीद हो गए थे। हम इन जांबाजों को सलाम करते हैं। जय हिन्द।

Wednesday, 21 August 2019

जनसंख्या विस्फोट रोकना भी है देशभक्ति

दुनिया की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि भारत की जनसंख्या भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। यही हालात रहे तो हम साल 2027 तक  चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएंगे। वैश्विक जनसंख्या पर संयुक्त राष्ट्र की ताजा fिरपोर्ट से यह बात सामने आई है। भारत की स्थिति  यह है कि 27.30 करोड़ लोग बढ़ जाएंगे 2019 से 2050 तक। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सदी के अंत तक भारत की आबादी 150 करोड़ हो जाएगी। वहीं जनसंख्या को नियंत्रित करने की नीतियों के कारण चीन की आबादी 110 करोड़ पर रूक जाएगी। 40.30 करोड़ की आबादी के साथ पाकिस्तान पांचवे नंबर पर होगा। 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए 90 मिनट के भाषण में जिस नए और अहम मामलों का जिक पधानमंत्री मोदी ने किया, वह है देश की बढ़ती जनसंख्या। पीएम मोदी ने कहा कि देश की जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए सरकार और आम लोग क्या कर रहे हैं, क्या कर सकते हैं? मोदी ने कहा कि बेहताशा बढ़ रही जनसंख्या सभी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। समाज का एक छोटा वर्ग जो अपना परिवार छोटा रखता है, वह सम्मान का हकदार है। वे जो कर रहे हैं वह भी एक पकार की देश भक्ति है। यह शायद पहली बार है जब पीएम ने इन शब्दों के जरिए जनसंख्या का मुद्दा उठाया है। पधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देश में जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताना और इसकी रोकथाम के लिए हर नागरिक को जवाबदेही तय करने के लिए एकजुट होकर आगे आने का आह्वान सकारात्मक और असरदार भूमिका अदा कर सकता है। बढ़ती जनसंख्या व घटते जल व अन्य संसाधनों से यह तो तय है कि यदि केन्द्र समेत राज्य सरकारों के साथ हर युवा अलर्ट नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। परिवार नियोजन को स्वैच्छिक आंदोलन बनाना होगा। केन्द्र और राज्य सरकारें पहले से अधिक सुविधाएं और रियायतें देकर हम दो हमारे दो का और ध्यान खींचने का जो पयास कर रही है उसमें तेजी लानी होगी। देश को परिवार नियोजन में सख्ती का कड़ा अनुभव 1975-76 के इमरजेंसी में हो चुका है। इससे बढ़ाई सबसे बेहतर रास्ता है सामाजिक जागरुकता। पधानमंत्री मोदी के मुताबिक समय आ गया है जब देश छोटे परिवारों की पैरवी करे क्योंकि यदि पढ़े-लिखे, स्वस्थ नहीं होंगे तो न देश खुश होगा और न ही परिवार। 1.3 अरब लोगों वाला हमारा देश दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश है। यदि लोग देश के लिए कुछ करना चाहते हैं तो इस जरिए भी देशभक्ति कर सकते हैं।

-अनिल नरेन्द्र