Saturday, 24 June 2017

रिटायरमेंट के 8 दिन बाद, 42 दिन से फरार जस्टिस कर्णन गिरफ्तार

42 दिन से फरार कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सीएन कर्णन को अंतत पश्चिम बंगाल सीआईडी ने मंगलवार को गिरफ्तार कर ही लिया। उन्हें कोयम्बटूर (तमिलनाडु) से छह किलोमीटर दूर स्थित एक रिसोर्ट में पकड़ा गया। वह कुछ दिन पहले ही यहां आए थे। गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने पुलिस टीम का विरोध भी किया। अवमानना केस में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें छह माह जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही 62 वर्षीय जस्टिस कर्णन फरार थे। बता दें कि जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के करीब 20 जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। सीबीआई ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने इसे कोर्ट की अवमानना ठहराते हुए सात जजों की पीठ का गठन किया। शीर्ष अदालत ने दो बार जस्टिस कर्णन को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। 10 मार्च को उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए गए। रिटायरमेंट के करीब एक सप्ताह बाद सीआईडी उन्हें पकड़ने में सफल हो सकी। गिरफ्तार कर्णन को चेन्नई से बुधवार को कोलकाता लाया गया और कोलकाता हवाई अड्डे से सीधे प्रेजीडेंसी जेल भेज दिया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सीआईडी के अधिकारियों की एक टीम उन्हें एयर इंडिया की उड़ान से यहां लेकर आई। अधिकारी ने कहा कि उनका चिकित्सकीय परीक्षण हवाई अड्डे पर ही पूरा किया गया और उन्हें सीधे जेल ले जाया गया। प्रेजीडेंसी जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कर्णन को जैसे ही जेल के भीतर ले जाया गया उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की और जेल अस्पताल से चिकित्सकों की एक टीम ने उनकी जांच की। उन्होंने कहा कि वे वृद्ध हैं, अस्वस्थ लग रहे हैं और हम कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहते। उनकी एक ईसीजी भी की गई। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनकी अंतरिम जमानत और अवमानना के अपराध में छह महीने की सजा का फैसला निलंबित करने की उनकी याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले में सात न्यायाधीशों के आदेश से बंधी हुई है और इसके इतर नहीं जा सकती। न्यायमूर्ति धनंजय वाई. चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति सजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने कहाöइस मामले की सुनवाई सात न्यायाधीशों की पीठ ने की थी और आदेश पारित किया था। यह आदेश हमारे लिए बाध्यकारी है। हम अवकाश के दौरान इसमें दखल नहीं दे सकते। इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते। जस्टिस कर्णन का यह अभूतपूर्व मामला शायद पहली बार हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट ने एक हाई कोर्ट के जज को जेल में डाला है। जस्टिस कर्णन हाई कोर्ट के पहले ऐसे जज हैं जो एक वांछित के तौर पर सेवानिवृत हुए हैं।

-अनिल नरेन्द्र

टीम इंडिया में सिर फुट्टौवल

चैंपियंस ट्राफी का फाइनल जीतने के बाद जहां पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का उनके देश में जबरदस्त स्वागत हुआ वहीं भारत की टीम में जबरदस्त फुट्टौवल हो गया है। पहली बार चैंपियंस ट्राफी में खेलने वाले युवा पाक क्रिकेटरों को देश ने सिर पर उठा लिया और रातोंरात करोड़पति बन गए हैं। खिलाड़ियों के लिए कई तरह के इनामों की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हर खिलाड़ी को एक-एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की। अनुबंधित खिलाड़ियों के लिए दो करोड़ 90 लाख रुपए के बोनस की घोषणा हुई है। पाक बोर्ड भी 10-10 लाख रुपए का बोनस देगा। टीम को ट्राफी जीतने पर 20 करोड़ का पुरस्कार मिला। एक बिल्डर ने हरेक खिलाड़ी को 10-10 लाख रुपए और फ्लैट देने की घोषणा की। वहां तो इनाम बंट रहे हैं यहां टीम इंडिया में घमासान मचा हुआ है। पाकिस्तान के हाथों हार का पहला फालआउट यह हुआ कि मुख्य कोच अनिल पुंबले की विदाई हो गई। अनिल पुंबले ने अपने इस्तीफे का कारण विराट कोहली से मतभेद बताया। वैसे तो कोच और कप्तान के बीच पिछले कई महीनों से मन-मुट्टोवल चल रहा था पर सोच का फर्प उस वक्त सामने ज्यादा आया जब फाइनल मैच में पुंबले चाहते थे कि कप्तान टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करें। लेकिन विराट कोहली ने पहले गेंदबाजी चुनी और पाक ने बड़ा स्कोर खड़ा कर भारत को मुकाबले से बाहर कर दिया। यह सुनते ही कि कोहली ने बॉल करने का फैसला किया है हैरान हो गए। विराट जब ड्रेसिंग रूम में लौटे तो पुंबले ने इस बारे में पूछा, इस पर कप्तान ने बेरुखी से जवाब दिया। इससे भारतीय खेमे में माहौल खराब हो गया और पाकिस्तान से करारी हार टीम के हिस्से आई। कप्तान विराट कोहली और कोच अनिल पुंबले के बीच अनबन की खबरें आ रही थीं। कोई इसके लिए किसी खास खिलाड़ी को लेकर दोनों की राय में अंतर को जिम्मेदार ठहरा रहा है, कोई पुंबले की अनुशासनप्रियता को। बीसीसीआई की तरफ से जिस टीम को दोनों के बीच सुलह कराने भेजा गया था, उसके एक सदस्य का ऑफ द रिकॉर्ड कहना है कि कप्तान किसी भी सूरत में कोच के साथ काम करने को राजी नहीं है और कप्तान को हम हटा नहीं सकते, ऐसे में कोच के पास हट जाने के सिवाय कोई चारा नहीं था। भारतीय क्रिकेट और विवादों का नाता कोई नया नहीं है। यह पहला मौका नहीं है जब यह नजर आया कि टीम इंडिया में कप्तान असली किंग है। 1999 में जब कपिल देव टीम के कोच थे तब भी ऐसा विवाद हुआ था। उस दौरान नवम्बर 1999 से जनवरी 2000 के बीच भारतीय टीम आस्ट्रेलिया के दौरे पर थी। सचिन तेंदुलकर को दूसरी बार टीम की कमान सौंपी गई थी, लेकिन उस आस्ट्रेलिया दौरे के बाद चीजें इतनी तेजी से बदलीं कि कपिल को इस्तीफा देना पड़ा। कोई भी टीम कप्तान, खिलाड़ियों और कोच के आपसी तालमेल से ही आगे बढ़ती है, तालमेल न हो तो समस्याएं आती हैं, टीम का खेल प्रभावित होता है और कई अप्रिय स्थितियां भी बनती हैं। बड़ा सवाल यहां यह है कि क्या कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति एक ऐसी टीम का कोच बनने के लिए तैयार होगा, जिसमें कोच की नियुक्ति से लेकर खिलाड़ियों के चयन और रणनीति बनाने तक सारे फैसले सिर्प कप्तान की मर्जी से लिए जाते हों? भारतीय टीम के बारे में वैसे भी कहा जाता रहा है कि इसमें कोच जब तक ट्रेनर की भूमिका में रहे, तभी तक सब ठीक रहता है। लेकिन क्रिकेट तेजी से बदल रहा है और इसमें कोच का रोल अब कमोबेश हॉकी और फुटबॉल जैसा होने लगा है। कप्तान कोहली को इस घटना के बाद ज्यादा सजग रहना होगा।

Friday, 23 June 2017

आयकर विभाग ने मुश्किल में डाला लालू परिवार को

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और चारा घोटाले के दोषी लालू प्रसाद यादव के परिवार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आयकर विभाग ने बेनामी सम्पत्ति कानून के तहत सख्त कदम उठाते हुए एक हजार करोड़ रुपए की कर चोरी और जमीन सौदों के मामले में लालू की पत्नी, बेटे, बेटियों और दामाद की करोड़ों की बेनामी सम्पत्ति अटैच करने का नोटिस जारी किया है। बेनामी सम्पत्ति कानून के तहत दोषी पाए जाने पर सात साल की कारावास और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इन्हें यह नोटिस बेनामी लेन-देन (निषेध) कानून की धारा 24(3) के तहत जारी किया है। इस नोटिस के जरिये दिल्ली और पटना स्थित जो बेनामी सम्पत्तियां अटैच की जा रही हैं उनकी कीमत 9.32 करोड़ रुपए है जबकि बाजार मूल्य 170 से 180 करोड़ रुपए है। कागजों में तो ये सम्पत्तियां किसी और के नाम दर्ज हैं जबकि इनके असली मालिक लालू के परिवार के सदस्य बताए जाते हैं। बता दें कि लालू यादव की बेटी मीसा पर एक हजार करोड़ रुपए की बेनामी सौदे के मामले में मीसा की जमीन के लेन-देन व चोरी का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय ने 22 मई को मीसा के सीए राजेश अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। आयकर विभाग ने कई बार मीसा को नोटिस जारी कर पेश होने को कहा था पर वह एक बार भी पेश नहीं हुईं। क्या है बेनामी सम्पत्ति? इस सम्पत्ति का असली मालिक कोई और होता है जबकि कागजों में सम्पत्ति किसी दूसरे व्यक्ति के नाम होती है। यह कानून 1988 में बना था, लेकिन इसे पिछले साल नवम्बर से लागू किया गया। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू परिवार की सम्पत्तियों को लेकर नया रहस्योद्घाटन करते हुए कहा है कि पटना में 18,652 वर्ग फीट में बने काम्प्लैक्स में लालू की पत्नी राबड़ी देवी के 18 फ्लैट हैं जिनकी कीमत 20 करोड़ रुपए से अधिक है। यह काम्प्लैक्स जिस जमीन पर बना है उसे राबड़ी देवी ने लालू के रेलमंत्री रहते लिखाया था। काम्प्लैक्स लालू की मां के नाम पर है। सुशील मोदी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बेनामी सम्पत्ति को लेकर लालू परिवार पर कार्रवाई का भरोसा नहीं रहा, इसलिए आयकर विभाग समेत सभी जांच एजेंसियों को वे 15 जुलाई तक अब तक के खुलासे से जुड़े प्रमाण सौंपेंगे। उधर बिहार के उपमुख्यमंत्री और लालू के पुत्र तेजस्वी यादव ने कहा कि राजनीतिक बदले के आधार पर ये गलत बातें चलाई जा रही हैं। हमने कुछ भी नहीं छिपाया है। बुलाने पर हम जवाब देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत मीडिया में गलत खबरें चलाई जा रही हैं।

-अनिल नरेन्द्र

पाक हमारे हथियारों से हमें ही मार रहा है ः अमेरिका

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका के दो शीर्ष सांसदों ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन करने का आरोप लगाते हुए ट्रंप प्रशासन से उसे मिलने वाली सैन्य मदद में कटौती के साथ उसे हथियारों की बिक्री बंद करने की मांग की है। अमेरिका के दो शीर्ष सांसदों डाना रोहराबाचेर और टेड पो ने शुक्रवार को अमेरिकी संसद में कहा कि हम (अमेरिका) पाकिस्तान को हथियार मुहैया करवा रहे हैं और वह हमारे हथियारों से अमेरिकी नागरिकों की हत्याएं कर रहा है। उधर मुहाजिरों के एक समूह ने ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस से अपील की है कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन दिए जाने के मद्देनजर उसे दी जाने वाली सैन्य सहायता एवं बिक्री बंद की जाए। हाल में गठित विश्व मुहाजिर कांग्रेस ने ट्रंप प्रशासन एवं अमेरिकी कांग्रेस को  दिए एक ज्ञापन में कहा कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के कदम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि वे आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में अमेरिका के विश्वासपात्र सहयोगी नहीं हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन को धोखा देना और हक्कानी नेटवर्क, तालिबान द्रेटा शुरा एवं अलकायदा जैसे सैन्य संगठनों को खुश करने की आईएसआई की नीति है। ज्ञापन में कहा गया है कि आज पाक आतंकवाद का गढ़ बन चुका है। ऐसे में अमेरिका के पास आतंकियों को मारने के लिए पाकिस्तानी क्षेत्र के भीतर घुसकर एकतरफा सैन्य कार्रवाई करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। इसमें कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व में चल रही लड़ाई को तब तक जीता नहीं जा सकता जब तक क्षेत्र में आतंकवाद को प्रायोजित करने वाली पाकिस्तानी सेना से जुड़े मुख्य मामलों से निपटा न जाए। सांसद रोहराबाचेर ने दो टूक कहा कि हमें स्पष्ट कर देना चाहिए कि हम पाकिस्तान जैसे देशों को हथियार मुहैया नहीं कराने जा रहे हैं क्योंकि इससे हमारे ही लोगों को मारेंगे और हमें पता है कि वे आतंकवाद में शामिल है। हमें बाखूबी मालूम है कि आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने क्या किया है। पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन का ठिकाना बताने वाले डाक्टर अफरीदी को जेल में डाल दिया। वहीं सांसद टेड पो ने आशंका जताई कि पाकिस्तान सहायता पाने को लेकर अमेरिका के साथ दोहरा खेल खेल रहा है। पाक को संरक्षण के कारण पूरी दुनिया में आतंक फैल रहा है। खबर है कि ट्रंप प्रशासन पाक पर शिकंजा कसने के लिए कई कदमों पर विचार कर रहा है, इनमें ड्रोन हमलों से लेकर आर्थिक, सैन्य मदद को रोकना शामिल है। अमेरिका को समझना होगा कि पाक उनसे दोहरा खेल खेल रहा है और इसे रोकना उसके हित में ही है।

Thursday, 22 June 2017

अब मधुमेह सिर्फ अमीरों की बीमारी नहीं रही

माना जाता रहा है कि मधुमेह यानि डायबिटीज अमीरों की बीमारी है। लेकिन जानी-मानी मेडिकल जर्नल लैंसेंट में प्रकाशित डायबिटीज एंड्रो क्राइनोलॉजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में यह रोग अब तेजी से गरीबों में भी फैल रहा है। इस अध्ययन में दावा किया गया है कि गरीब लोगों के तेजी से मधुमेह की चपेट में आना चेताने वाला है क्योकिं ये लोग उस वर्ग से आते हैं, जो गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं करवा पाते और अनाज के लिए जन वितरण प्रणाली के तहत चलने वाली राशन की दुकानों पर निर्भर रहते हैं। अधिकतर राशन की दुकानें चावल और गेहूं का वितरण कर रही हैं। उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले ये अनाज देशभर में मधुमेह की एक नई और बेहद चिन्ताजनक लहर पैदा कर रहे हैं। हरित क्रांति और अस्वास्थ्यकर आहार के बीच के संबंध की अभी शुरुआत-भर है। भारत को विश्व में मधुमेह की राजधानी माना  व कहा जाता है। इस बीमारी से लगभग सात करोड़ लोग प्रभावित हैं। लेकिन इससे भी ज्यादा चिन्ता की बात यह है कि अभी तक मधुमेह को अमीरों की बीमारी माना जाता था लेकिन नए शोध-पत्र का कहना है कि भारत में मधुमेह की महामारी स्थानांतरित हो रही है और यह आर्थिक रूप से कमजोर समूहों को प्रभावित कर सकती है। शोधकर्ता का कहना है कि इन नतीजों से भारत जैसे देश में चिन्ता पैदा होनी चाहिए, क्योंकि इलाज का खर्च मरीजों की जेब से जाता था। शोधकर्ता इस बीमारी से बचने के लिए रोकथाम के प्रभावी उपायों की तत्काल जरूरत को रेखांकित करते हैं। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की उपाध्यक्ष और इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका आरएम अंजना का कहना है कि यह चलन गहरी चिन्ता का विषय है वह कहती हैं कि क्योंकि मधुमेह की महामारी उन लोगों तक फैल रही है, जो इसके प्रबंधन के लिए धन खर्च करने का बहुत कम सामर्थ्य रखते हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-इंडिया डायबिटीज का अध्ययन भारत में मधुमेह के अध्ययन का राष्ट्रीय तौर पर सबसे बड़ा प्रतिनिधि अध्ययन है। इसमें देश के 15 राज्यों में से 57 हजार लोगों का डेटा है। अध्ययन में शामिल आधे लोग ऐसे थे, जिन्हें परीक्षण से पहले तक यह पता नहीं था कि उन्हें मधुमेह है। भारतीयों की बदलती जीवनशैली उन्हें पारंपरिक स्वास्थ्यप्रद भोजन से दूर लेकर जा रही है। जंक फूड की आसान उपलब्धतता, उनका किफायती होना भारत की सबसे बड़ी समस्या है। सरकार को इस बढ़ती समस्या पर विशेष ध्यान देना होगा। अब तो छोटे-छोटे बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं। जंक फूड से परहेज, जनता में मधुमेह की जागृति करना, मधुमेह की दवाएं सस्ती करना यह कुछ कदम उठाने की जरूरत है।

-अनिल नरेन्द्र

2019 जीतने के लिए मोदी को बिहार में मिले यूपी के रामनाथ

लाल कृष्ण आडवाणी, डाक्टर मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन, सुषमा स्वराज, द्रोपदी मुर्मू, . श्रीधरन... और ऐसे कई नाम राष्ट्रपति बनने के लिए चर्चा में थे। शत्रुघ्न सिन्हा ने तो खुलकर आडवाणी का नाम लेकर अगले राष्ट्रपति की उम्मीद भी जता दी थी। फिर अटकलें इस बात पर भी लगाई जा रही थीं कि शायद गुरुदक्षिणा के नाम पर मोदी जी आडवाणी जी को देश का प्रथम नागरिक बना देंगे। लेकिन जो नाम चर्चा में रहे, मोदी उस पर कभी मुहर नहीं लगाते। नवाज शरीफ को शपथ पर बुलाकर, स्मृति ईरानी का विभाग बदलकर, गुजरात में आनंदीबेन और फिर रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाकर भी वे ऐसे ही चौंका चुके हैं। हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के सीएम के नाम का ऐलान भी सारे कयासों को झुठलाते हुए ही किए थे और अब रामनाथ कोविंद। लेकिन कोविंद ही क्यों? क्या मायने हैं इसके? मोदी-शाह की सोच क्या है? भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के मौजूदा राज्यपाल रामनाथ कोविंद को एनडीए का राष्ट्रपति घोषित कर आखिर सारी अटकलों पर न सिर्फ विराम ही लगा दिया, बल्कि विपक्ष को शायद अपनी रणनीति फिर से बनाने के लिए बाध्य कर दिया है। सच तो यही है कि जिस नाम की अब तक चर्चा तक न थी, उस नाम को सामने लाकर भाजपा नेतृत्व ने अपने-परायों सभी को चारों खाने चित्त कर दिया है। पहली बार प्रधानमंत्री के साथ-साथ राष्ट्रपति भी उत्तर प्रदेश से होगा। रामनाथ कोविंद 15 साल बाद दूसरे दलित राष्ट्रपति होंगे। रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के कई सियासी मायने भी हैं। भाजपा ने मिशन 2019 के लिए बड़ा कार्ड खेला है। कोविंद जीते तो यह पहला मौका होगा जब दोनों पीएम और राष्ट्रपति एक ही राज्य से होंगे। कोविंद के चुने जाने पर वे देश के दूसरे और उत्तर भारत से आने वाले पहले दलित राष्ट्रपति होंगे। कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर भाजपा उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राजनीतिक-सामाजिक समीकरणों वाले राज्यों के दलितों में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश करेगी। भाजपा का कभी कोई राष्ट्रपति नहीं रहा। कलाम को अटल जी ने राष्ट्रपति बनाया था, लेकिन उनका नाम मुलायम सिंह यादव ने बढ़ाया था, भाजपा ने सिर्फ समर्थन दिया था। फिर कलाम गैर-राजनीतिक थे। अब पहली बार भाजपा को यह मौका मिला है और वो इसे चूकना नहीं चाहती। कोविंद संघ और भाजपा के हैं। बावजूद उनकी छवि कट्टरपंथी की नहीं है, यही उनके पक्ष में भी गया। जिस तरह से दलितों के मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो रहा था, मोदी ने उसका तोड़ निकाल लिया है। हां अब बैकफुट पर आया विपक्ष भी किसी दलित को अपना उम्मीदवार बनाने की सोच रहा है। पर यह देश की विडंबना ही कही जाएगी कि अब देश के सर्वोच्च पद पर जाति के आधार पर फैसले होंगे। राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है। उसकी अंतर्राष्ट्रीय विजन, छवि, पहचान जरूरी है। पता नहीं कि श्री कोविंद इन मापदंडों पर कितने खरे उतरते हैं? रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा के साथ विपक्षी गुणा-गणित भले ही नए सिरे से शुरू करें लेकिन कटु सत्य तो यह है कि इस अप्रत्याशित चेहरे को सामने लाकर भाजपा ने विपक्ष के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। भाजपा के वोट और समर्थन के समीकरण की मौजूदा गणित में बड़ा हेरफेर न हुआ तो तय है कि इसके बाद विपक्ष की लड़ाई शायद औपचारिक रह जाएगी। कोविंद दलितों में कोली समुदाय से आते हैं जो यूपी में जाटव और पासी के बाद सबसे बड़ा दलित समुदाय है। बीते लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में मायावती के दलित वोट में सेंध लगाकर बड़ी सफलता हासिल की है और अब इसमें और बढ़ोत्तरी करने की कोशिश करेगी। भाजपा की रणनीति में दलित राष्ट्रपति की योजना पहले से ही थी, इसलिए मध्यप्रदेश से आने वाले थावरचन्द गहलोत के नाम की चर्चा थी। राजनीतिक संदेश के लिए मध्यप्रदेश से ज्यादा बेहतर उत्तर प्रदेश और बिहार होता है इसलिए भी कोविंद का पलड़ा भारी पड़ा। वैसे भी भाजपा में ज्यादा बोलने वाले से ज्यादा सुनने वाले को पसंद किया जाता है। यह भी रामनाथ कोविंद के पक्ष में रहा है।

Wednesday, 21 June 2017

पनामा पेपर्स का फालआउट भारत और पाक दोनों में नजर आया

पनामा पेपर्स लीक मामले में दोनों देशोंöभारत और पाकिस्तान में कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों के खोजी संघ ने अप्रैल 2016 में कर चोरी में मददगार पनामा की कंपनी फोसेंका के सवा करोड़ दस्तावेज लीक किए थे। इसमें कथित तौर पर कर चोरी में लिप्त एक लाख 20 हजार से ज्यादा विदेशी कंपनियों का खुलासा किया गया था। भारत में इन लीक दस्तावेजों पर प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई आरंभ करते हुए गुरुवार को दिल्ली के मशहूर ज्वेलर्स मेहरा संस के विभिन्न खातों में जमा सात करोड़ रुपए जब्त कर लिए। विदेश में कंपनियां खोलकर काला धन छिपाने में मदद करने वाली पानामाई कंपनी मोसैंक फोसेंका के करोड़ों दस्तावेज लीक मामले में यह कार्रवाई हुई। संभवत विदेश में गैर-कानूनी तरीके से सम्पत्ति बनाने से जुड़े फेमा कानून की धारा 37ए के तहत ईडी ने यह पहली कार्रवाई की है। ईडी का कहना है कि आरोपियों का करीब 10.54 करोड़ रुपए अभी भी देश के बाहर जमा हैं। अश्विनी कुमार मेहरा, दीपक मेहरा, शालिनी मेहरा और नवीन मेहरा के विभिन्न बैंक खातों की यह रकम जब्त की गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 1999 से मेहरा परिवार ने बहामास और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में सात कंपनियां पंजीकृत कराईं। ये जगह टैक्स चोरी कर काला धन छिपाने के लिए बदनाम है। पनामा पेपर्स लीक की शुरुआती जांच में नाम सामने आने के बाद मेहरा परिवार ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। अश्विनी मेहरा के बेटे दीपक मेहरा ने माना था कि उनके परिवारी स्टोन बे और मैक्सहिल नाम से विदेश में दो कंपनियां हैं। उधर पनामा पेपर लीक्स मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लंदन में अवैध सम्पत्ति के मामले में गुरुवार को संयुक्त जांच दल (जेआईटी) के सामने पेश हुए। दो घंटे की पूछताछ के बाद नवाज शरीफ आक्रामक तेवर में बाहर आए और कहा कि विरोधियों को भी जवाब देना होगा। शरीफ ने विपक्षी नेताओं को चेतावनी दी कि अगले साल बड़ी जेआईटी बनेगी और भ्रष्ट नेता जांच के शिकंजे में होंगे। पाक पीएम ने कहा कि उन्होंने परिवार की सम्पत्ति से जुड़े सारे दस्तावेज जांच दल को सौंप दिए हैं और वह हर तरह की जांच-पड़ताल और सुनवाई के लिए तैयार हैं। शरीफ ने कहाöमेरे विरोधियों ने मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। लेकिन पहले और न अब इनमें से एक भी आरोप साबित किया जा सका है। कुछ दिनों में जेआईटी की रिपोर्ट सामने आएगी और कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। शरीफ ने सफाई दी कि उन पर लगे आरोपों का उनके प्रधानमंत्री के मौजूद कार्यालय से कोई लेना-देना नहीं है और यह भ्रष्टाचार का मामला नहीं है। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई एवं पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ भी जेआईटी के समक्ष पेश हुए। इस जेआईटी को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया है। नवाज पदभार संभालने के दौरान ऐसे पैनल के समक्ष पेश होने वाले पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री हैं। पनामा पेपर्स में कई और भारतीय दिग्गजों का नाम भी है। पनामा पेपर्स में 500 भारतीय हस्तियों के नामों का खुलासा हुआ, जिन्होंने टैक्स चोरी, काला धन सफेद करने को टैक्स हैवन माने वाले देशों में धन का निवेश किया। इस सूची में कई उद्योगपतियों, फिल्मी सितारों और खिलाड़ियों का भी नाम आया। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, पंचकुला, देहरादून, वडोदरा, मंदसौर के व्यापारियों के नाम भी दस्तावेजों में हैं। पनामा पेपर्स में भारतीयों से जुड़े करीब 36 हजार दस्तावेजों को खंगालने के क्रम में आठ माह तक की गई पड़ताल में 234 भारतीयों के पासपोर्ट की जांच की गई। 300 लोगों के पतों की भी तहकीकात की गई। पनामा पेपर्स लीक का फालआउट अब दोनों हिन्दुस्तान और पाकिस्तान में दिखने को मिलने लगा है। देखें आगे किस-किसका पर्दाफाश होता है।

-अनिल नरेन्द्र