Tuesday, 24 February 2026

पैसला ट्रंप के टैरिफ रद्द करने का

मानना पड़ेगा कि अमेरिका में आज भी लोकतंत्र जिंदा है। संविधान सवरेपरि है। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने दिखा दिया कि वह संविधान की रक्षा करने में किसी के सामने न तो झुकने को तैयार है और न ही किसी दबाव में आएगी। चाहे वह अमेरिका के राष्ट्रपति ही क्यों न हों। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुव्रवार को पैसला सुनाया कि राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप का वैश्विक टैरिफ अवैध है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस जॉन रॉबट्र्स ने पैसला 6-3 के बहुमत से दिया। यानि छह जजों ने टैरिफ को अवैध बताया और तीन इससे असहमत थे। ट्रंप अमेरिकी व्यापार समझौतों को नए सिरे से करने के लिए दुनियाभर में टैरिफ को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। यह पहली बार है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के दूसरे कार्यंकाल की किसी नीति को निर्णायक रूप से रद्द किया है। अन्य क्षेत्रों में अदालत के वंजर्वेटिव बहुमत ने अब तक ट्रंप को कार्यंकारी शक्तियों के व्यापाक उपयोग की छूट दी थी। इस बार सुप्रीम कोर्ट में छह जजों के बहुमत, तीन वंजर्वेटिव और तीन लिबरल ने कहा कि बिना कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की स्पष्ट अनुमति के इतने व्यापक टैरिफ लागू कर ट्रंप ने सीमा लांघी हैं। अदालत ने ट्रंप के इस तर्व को खारिज कर दिया कि 1977 का कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, अप्रत्यक्ष रूप से टैरिफ की अनुमति देता है। जस्टिस रॉबट्र्स ने कहा कि राष्ट्रपति जिस अधिकार का दावा कर रहे हैं, वह किसी भी पैमाने पर सीमा से बाहर का था। चीफ जस्टिस ने पैसले में लिखा है, अगर कांग्रेस टैरिफ लगाने जैसी असाधारण शक्ति देना चाहती कि वह इसे स्पष्ट रूप से कर सकती है। उन्होंने यह भी लिखा कि ट्रंप प्रशासन के कानूनी तर्को को स्वीकार करना व्यापार नीति पर कार्यंपालिका और विधायिका के लम्बे सहयोग को समाप्त कर राष्ट्रपति को अनियंत्रित ताकत देना होगा। ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताने के पैसले से तीन वंजर्वेटिव जजों क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल एलिटो और ब्रेट वैवनॉ ने असहमति जताईं। ट्रंप ने तीन जजों की तारीफ भी की है। वैदनो ने कहा कि कईं कानून राष्ट्रपतियों को टैरिफ और आयात प्रतिबंध लगाने की अनुमति देते हैं। उनके अनुसार 1977 का कानून राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान विदेशी खतरों से निपटने के लिए राष्ट्रपति को अनुमति देते हैं। उधर, ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्प्रेंस में पैसले को भयानक और हास्यास्पद बताया और कहा कि वह अदालत के वुछ सदस्यों से शर्मिदा हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय गलत है। लेकिन इससे कोईं फर्व नहीं पड़ता क्योंकि हमारे पास बहुत शक्तिशाली विकल्प है। ट्रंप के पास दो बड़े विकल्प हैं। पहला: ट्रंप अमेरिकी कांग्रेस यानि प्रतिनिधि सभा और सीनेट में टैरिफ के प्रस्ताव को पास कराने के लिए रख सकते हैं। 435 की प्रतिनिधि सभा में ट्रंप के रिपब्लिकन 218 जबकि विपक्षी डेमोव्रेट 213 है जबकि 100 सीनेट में रिपब्लिकन 53 और डेमोव्रेट 47 हैं। टैरिफ के खिलाफ सेंटीमेंट को देख ट्रंप संसद में टैरिफ को रखने से शायद परहेज करें। अन्य प्रावधान लागू कर सकते हैं, पर लम्बी प्रव्रिया होगी। ट्रंप अमेरिकी संविधान की धारा 301 के तहत टैरिफ के प्रावधान लागू कर सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत टैरिफ को जायज ठहराया जाता है। ट्रंप ने चीन, कनाडा और मैक्सिको पर इन्हीं प्रावधानों के तहत टैरिफ लगाया था। हालांकि इन्हीं प्रावधानों को भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ट्रंप ने भी ऐलान कर दिया है कि वह पीछे नहीं हटेंगे। शुव्रवार रात उन्होंने कहा कि अन्य कानूनी अधिकारों के आधार पर नया 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रंप ने कहा कि हम पीछे नहीं हटेंगे, हम और ज्यादा पूंजी जुटाएंगे। देखें, आगे क्या होता है। सारी दुनिया में अब रिपंड की मांग भी उठनी शुरू हो गईं है। आगे-आगे देखते हैं होता है क्या? ——अनिल नरेन्द्र

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