Wednesday, 28 January 2026

ट्रंप को उसी की भाषा में जवाब


बड़बोले और बेलगाम बोलने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगर उन्हीं की भाषा में जवाब दिया है तो वह हैं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी। दरअसल हुआ यह कि कार्नी स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोल रहे थे। मार्क कार्नी के दिए भाषण को अमेरिकी दबदबे वाले वर्ल्ड आर्डर को आईना दिखाने के रूप में देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि दुनिया के लगभग हर देश ट्रंप की नीतियों से परेशान है लेकिन इस तरह बोलने का जोखिम मार्क कार्नी ने उठाया। मंगलवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए मार्क कार्नी ने कहा कि ताकतवर देशों की प्रतिद्वंद्विता में मिडिल पावर वाले देशों के सामने दो विकल्प हैं... या तो समर्थन पाने के लिए आपस में होड़ करें या साहस के साथ एक तीसरा रास्ता बनाएं और ऐसा करने के लिए साथ आएं। भारत समेत दुनिया के बाकी को लग रहा है कि अभी चुप रहना ज्यादा बेहतर है। दूसरी तरफ कनाडा के प्रधानमंत्री को लग रहा है कि मौजूदा विश्व व्यवस्था में कोई संक्रमण नहीं बल्कि विध्वंस की स्थिति है और झूठ का पर्दा हट रहा है। मार्क कार्नी खुलेआम कह रहे हैं कि पुरानी व्यवस्था वापस नहीं आएगी और इसका शोक नहीं मनाना चाहिए बल्कि नई और इंसाफ सुनिश्चित करने वाली वैश्विक व्यवस्था के लिए काम शुरू कर देना चाहिए। कार्नी कह रहे हैं कि मध्यम शक्ति वाले देशों को भ्रम की दुनिया से बाहर आना चाहिए। कार्नी को पता है कि ट्रंप की नीतियों की आलोचना करने का जोखिम भी है। कनाडा की अर्थव्यवस्था बहुत हद तक व्यापार पर निर्भर है और 2024 में कनाडा के कुल निर्यात का 75 प्रतिशत व्यापार अमेरिका में हुआ था। ट्रंप ने अमेरिका के प्रति कृतज्ञता न दिखाने का आरोप लगाते हुए मार्क कार्नी की आलोचना करते हुए कहा, वैसे कनाडा हमसे बहुत-सी मुफ्त सुविधाएं पाता है। उन्हें आभार व्यक्त करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं कर रहे हैं। मैंने मंगलवार को मार्क कार्नी को देखा और वह ज्यादा कतृज्ञ नहीं थे। कनाडा अमेरिका की वजह से ही अस्तित्व में है। अगली बार जब मार्क कार्नी बयान देंगे तो उन्हें... यह बात याद रखनी चाहिए। इससे पहले ट्रंप कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। इतनी धमकियों के और दबाव के बावजूद कनाडा ने ट्रंप को दो टूक जवाब दिया। ऐसे में यह सवाल पूछा जा रहा है कि ट्रंप की नीतियों, धमकियों के बावजूद अमेरिका भारत के हितों को चोट पहुंचा रहा है फिर भी भारत कनाडा की तरह ट्रंप को उन्हीं की भाषा में जवाब आखिर क्यों नहीं दे रहा है? ट्रंप ईरान से तेल खरीदने, रूस से तेल खरीदने, 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से लेकर 70 बार से ज्यादा भारत-पाक युद्ध रोकने की बात कह चुके हैं, अमेरिका ने वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन किया, ईरान में भी सत्ता परिवर्तन करवाने की बात कर रहा है। सवाल यह है कि भारत कनाडा की तरह ट्रंप की नीतियों पर क्यों नहीं बोल पा रहा है?
-अनिल नरेन्द्र

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