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Tuesday, 3 November 2026

चुनाव की जांच मोसाद करेगी


इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में विदेशी दखल के आरोपों की जांच करेगी। इजरायली न्यूज चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक इस चुनाव की जांच में आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट भी शामिल होगी। आरोप है कि कतर और कुछ दूसरे देशों ने मंगलवार को हुए नेसेट के चुनाव में अरब वोटर्स को पैसा देकर ज्यादा से ज्यादा वोट डलवाने की कोशिश की। इस चुनाव में अरब पार्टियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकार्ड 19 सीटें जीती हैं। यह इतिहास में उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पार्टी के नेताओं ने भी अरब पार्टियों पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। हालांकि इजरायल के केन्द्रीय चुनाव आयोग ने साफ किया है कि जांच का दायरा सीमित है। आयोग के मुताबिक इस मामले से चुनाव के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ा है और न ही नतीजों पर सवाल उठता है। जैसा आपको मालूम ही है कि इजरायल के इस चुनाव में त्रिशंकु परिणाम आए हैं। किसी को भी बहुमत नहीं मिला है। बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं और तरह-तरह के सत्ता में बने रहने के हथकंडे और सुझाव दे रहे हैं। नेतन्याहू की चालबाजियों को फेल करने के लिए नेतन्याहू विरोधी दल सरकार बनाने का रास्ता निकालने के लिए प्रधानमंत्री का सीधा चुनाव कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। इस व्यवस्था के तहत जनता अलग से प्रधानमंत्री चुनेगी और इससे अरब पार्टियों के समर्थन के बिना अल्पमत सरकार बनाने का रास्ता खुल सकता है। द टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक हिब्रू मीडिया ने बताया कि विपक्षी गठबंधन इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए कानून लाने पर विचार कर रहा है। सभी वोटों की गिनती के बाद अरब जांईट लिस्ट गठबंधन को 11 सीटें मिली हैं। यह इजरायल के अरब आबादी के अधिकारों की बात करने वाला राजनीतिक गठबंधन है। इनमें तीन अलग-अलग पार्टियां शामिल हैं। गठबंधन में अरब नेताओं के साथ यहूदी नेता भी हैं। उधर प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सहयोगी दल यूनाइटेड तोराह जुटाइज्म ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया है। पार्टी को 7 सीटें मिली हैं। चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने समर्थन के बदले हरेदी समुदाय के लोगों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने की मांग की है। इजरायल में आमतौर पर नागरिकों के लिए सेना में सेवा क्षेत्र अनिवार्य है। इजरायल में सरकार बनाने के लिए चुने गए नेता को शुरुआत में 20 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इसे 14 दिन और बढ़ा सकते हैं। यानी सरकार बनाने के लिए कुल 42 दिन मिल सकते हैं। इस दौरान नेता को दूसरी पार्टियों से समर्थन जुटाना होता है। अगर नेता 61 सीटों का समर्थन नहीं जुटा पाते तो वह छोटी पार्टियों के सहयोग से अल्पमत सरकार बनाने या दो नेताओं के बीच बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनाने का समझौता करने की कोशिश कर सकते हैं। अगर कोई भी गठबंधन सरकार बनाने में सफल नहीं होता तो 90 दिनों के भीतर नए चुनाव कराए जा सकते हैं। इससे नेतन्याहू को एक और मौका मिल सकता है। क्योंकि नए चुनाव होने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। इजरायल में नई संसद के गठन से पहले पार्टियों ने अपने संसदीय दलों के नेताओं के नाम तय करने शुरू कर दिए हैं। गादी आइजनकोट ने अपनी यशार पार्टी से चुने गए सांसद रॉय फौरुमैन को संसदीय दल का नेता चुना है। नई संसद का शपथ ग्रहण 10 नवम्बर को होगा। द टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद चुनाव में विदेशी दखल के आरोपों की जांच करेगी। शक है कि कतर और कुछ अन्य देशों ने नेतन्याहू को हराने के उद्देश्य से इजरायल की अरब पार्टियों को आर्थिक मदद की और कहा कि इजरायल में बसे अरब ज्यादा से ज्यादा घरों से निकलकर नेतन्याहू को हराने की कोशिश करें। अगर विदेशी हस्तक्षेप की बात करें तो क्या नेतन्याहू की अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुलकर मदद करने की अपील नहीं की? जांच तो अमेरिकी हस्तक्षेप की भी मोसाद और शिन बेट को करनी चाहिए।

- अनिल नरेन्द्र