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Wednesday, 4 January 2017

न तो इन दलों के बैंक खाते हैं और न ही चंदे का हिसाब


सभी जानते हैं कि यह राजनीतिक दल देश में कालाधन का सबसे बड़ा कारण हैं। अगर देश में कालाधन समाप्त करना है तो इन पर शिकंजा कसना अति आवश्यक है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने अब ऐसे फर्जी राजनीतिक दलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा कागजों पर चल रहे 255 राजनीतिक दलों को पंजीकरण सूची से अलग कर दिया है और इसके बाद आयकर विभाग ने भी इन्हें लपेटने की तैयारी शुरू कर दी है।  ऐसे फर्जी दलों की मुश्किलें बढ़ना शुरू हो गई हैं जिनको अभी तक पंजीकृत राजनीतिक दलों के रूप में चंदे की रकम जैसे वित्त में आयकर की छूट मिल रही थी। पता चला है कि कुछ पार्टियां संस्थापक सदस्य के निधन के बाद से निष्क्रिय पड़ी हैं तो कुछ ने न तो बैंक खाते खुलवाए और न ही चंदे का कोई हिसाब-किताब रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कालेधन के खिलाफ नोटबंदी के फैसले के तहत चलाई गई मुहिम में जिस प्रकार कालेधन को सफेद करने के मामले सामने आए हैं उनमें ऐसे कागजी दलों द्वारा कालेधन को ठिकाने लगाने की आशंका जताई जा रही थी। देश में चुनाव सुधार की कवायद में जुटे चुनाव आयोग ने भी ऐसी आशंका के तहत 255 गैर मान्यता प्राप्त सियासी दलों को अपनी सूची से बेदखल कर दिया है। चुनाव आयोग ने पंजीकृत सूची से अलग किए गए इन दलों की सूची वित्तीय जांच के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को कार्रवाई के लिए पत्र के साथ भेज दी है। सीबीडीटी के अलावा अभी तक आयकर की छूट का फायदा ले रहे ऐसे दलों के पास जमा धन राशि और चंदे की पड़ताल करने के लिए आयकर विभाग ने कमर कस ली है जो कालेधन और चंदे में दर्शाई गई रकम की जांच करके कानूनी कार्रवाई करेगा। देश में 1931 राजनीतिक दल हैं जिसमें दिल्ली में ही 245 राजनीतिक दलों के पते पर पंजीकृत हैं। हैरानी की बात यह है कि दिल्ली में पंजीकृत दलों में से 67 दलों का पता चुनाव आयोग भी लगाने में असमर्थ रहा है। यही नहीं 10 फीसदी दलों ने आज तक चुनाव आयोग को अपनी आय-व्यय का ब्यौरा तक नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली चुनाव आयोग भी इस मुहिम में जुट गया है और वह जल्द ही ऐसे संदिग्ध राजनीतिक दलों की सूची तैयार करके केंद्र सरकार को भेजेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी का भी कहना है कि चुनाव आयोग में पंजीकृत डमी राजनीतिक दल कालेधन को सफेद करने का जरिया हो सकते हैं। जैदी का कहना है कि 20 हजार रुपए तक का चंदा न घोषित करने की छूट के प्रावधान के चलते इन पार्टियों के चुनाव में कालेधन का वाहक होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

                                                            öअनिल नरेन्द्र

इस्ताम्बुल में नए साल के जश्न में आतंकी हमला



तुर्की के इस्ताम्बुल स्थित एक नाइट क्लब में नए साल का जश्न मना रहे 600 लोगों पर आतंकियों की अंधाधुंध फायरिंग दर्शाता है कि इन दहशतगर्दों ने तुर्की को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। हाल ही में (19 दिसम्बर) को रूसी राजदूत आंद्रे कारलोव को सरेआम गोलियों से एक आतंकी ने भून दिया था। इससे दो दिन पहले (17 दिसम्बर) सैनिकों को ले जा रही एक बस पर आतंकी हमले में 14 सैनिक मारे गए थे। 10 दिसम्बर को एक फुटबॉल मैच के बाद हुए दोहरे बम विस्फोट में 44 लोग मारे गए और 166 घायल हुए जिसमें अधिकतर पुलिस अधिकारी थे। इसको मिलाकर पिछले एक साल में कम से कम 12 आतंकी हमले हुए हैं। नए साल का जश्न  मना रहे 600 लोगों पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर विदेशी नागरिकों समेत 39 को मार डाला। इस हमले में दो भारतीय नागरिकों के मारे जाने की खबर है। इस्ताम्बुल के स्थानीय गवर्नर वासिप साहिन के मुताबिक हमलावरों (दो) ने सबसे बर्बर तरीके से निर्दोष लोगों को निशाना बनाया। कई लोग तो घबराहट में पानी में कूद गए। डोगान न्यूज एजेंसी ने कहा कि सेंटा क्लॉज की ड्रेस पहने दो बंदूकधारियों  ने यह हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब नए साल में महज 15 मिनट पहले तुर्की का प्रवेश हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों ने पहले क्लब के प्रवेश द्वार पर एक पुलिसकर्मी और एक नागरिक को गोलियों से भूना और इसके बाद अंदर घुसकर भीड़ पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। तुर्की के गृह मंत्री सुलेमान सोयलु ने बताया कि हमले के बाद हमलावर भाग गए लेकिन उम्मीद है कि उन्हें जल्द पकड़ लिया जाएगा। मरने वालों में 16 लोग विदेशी नागरिक हैं। सेंटा क्लॉज की ड्रेस पहने दो बंदूकधारियों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। साहिन ने बताया कि यह हमला स्थानीय टाइम के अनुसार 1.15 बजे शुरू हुआ। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावर अरबी भाषा में बात कर रहे थे। नाटो के महासचिव जनरल जेंस स्टोल्टेनवर्ग ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस्ताम्बुल में 2017 की शुरुआत बुरी हुई है। जैसा मैंने बताया कि 2016 तुर्की के लिए अप्रत्याशित रक्तपात का रहा था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। इन हमलों के लिए कुर्द आतंकवादियों और जेहादियों को दोषी ठहराया गया था। पिछले साल तुर्की में खूनी तख्तापलट का विफल प्रयास भी हुआ था। नई दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दो भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि करते हुए ट्वीट किया कि इस्ताम्बुल के इस हमले में हमने दो भारतीयों को खो दिया है। पीड़ितों के नाम हैं अवींस रिजवी, रिजवी बिल्डर्स के सीईओ थे और वे 2014 में आई फिल्म शेर ः दि टाइगर्स ऑफ सुन्दरवन  सहित कई फिल्मों के निर्माता थे। प्रधानमंत्री ने इस हमले में हुई मौतों पर शोक व्यक्त किया है। 2017 तुर्की के लिए शुभ आरंभ नहीं हुआ।


Tuesday, 3 January 2017

द ग्रेट सपा परिवार नाटक का इंटरवल

पिछले चार माह से चला आ रहा यूपी में समाजवादी पार्टी का द ग्रेट पॉलिटिकल ड्रामे का एक सीन खत्म हो गया है या यूं कहें कि इस ड्रामे का इंटरवल हो गया है। बचपन में टीपू नाम से पुकारे जाने वाले अखिलेश शनिवार को सपा के सियासी दंगल के सुल्तान बनकर उभरे। मुख्यमंत्री अपनी ताकत दिखाने में सफल रहे। उनके द्वारा बुलाई गई बैठक में 200 से अधिक सपा विधायकों के पहुंचने के साथ ही मुलायम सिंह और उनके भाई व पार्टी अध्यक्ष शिवपाल यादव बैकफुट पर आ गए। पार्टी से छह साल के लिए निकाले गए अखिलेश व रामगोपाल यादव को 18 घंटे में ही वापस लेने पर मजबूर हुए मुलायम। क्या यह समझा जाए कि अब समाजवादी परिवार की कलह समाप्त हो गई है या यह युद्धविराम है? लगभग ऐसी ही स्थिति अक्तूबर में भी बनी थी और मुलायम उस दौरान अखिलेश को अपनी विकास-पुरुष की छवि पुख्ता करने के लिए शिवपाल को शांत कराने में कामयाब हो गए थे। इससे एक बार फिर सपा चुनावी लड़ाई के अग्रिम मोर्चे पर आती दिखने लगी थी। यह कयास भी लगाए जा रहे थे कि अगर कांग्रेस या बाकी छोटे दलों से कोई तालमेल हो जाता है तो यह गठजोड़ मजबूत टक्कर देने की हालत में आ जाएगा। हालांकि पार्टी में हालात अब भी सामान्य नहीं माने जा सकते। अखिलेश ने बेशक 212 विधायकों को बैठक में बुलाकर अपनी ताकत दिखाई। इसी बीच आजम खान मुलायम से मिले और फिर अखिलेश के पास पहुंचे। विधायकों की बैठक बीच में ही छोड़कर अखिलेश आजम खान के साथ मुलायम सिंह के घर चले गए। बाद में शिवपाल को भी वहां बुलाया गया। करीब एक घंटे चली बैठक के बाद शिवपाल ने दोनों का निष्कासन रद्द कर दिया। बताया जा रहा है कि अखिलेश से मुलाकात के दौरान मुलायम भावुक हो गए। इससे पहले विधायकों की बैठक में अखिलेश भी पिता का नाम लेकर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि यूपी चुनाव जीतकर वह पिता को तोहफा देंगे। पिछले दो-तीन दिनों के घटनाक्रम में अखिलेश और मजबूत होकर उभरे हैं। ऐसे में अखिलेश खेमा अपनी मांगों पर अड़ गया है। मुख्य मांग टिकट बंटवारे में अखिलेश की अहम भूमिका और अमर सिंह का पार्टी से निष्कासन शामिल है। साथ ही शिवपाल के `पर' कतरने की भी बात कही जा रही है। अखिलेश चाहते हैं कि शिवपाल को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाकर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए और मुलायम पार्टी संरक्षक की भूमिका में रहें। पिछले चार माह से चले आ रहे इस द ग्रेट समाजवादी ड्रामे का मैं अभी इंटरवल यानि मध्यांतर इसलिए मानता हूं कि अभी खेल बाकी है। दोस्तो! यह सारी कवायद विधानसभा चुनाव जीतने की है और जनता को बेवकूफ बनाने की है। सरकार अखिलेश के हाथ में है और पार्टी शिवपाल के। सारा झगड़ा फिलहाल अपने-अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा टिकटें दिलाने का है। सरकार अखिलेश के हाथों में है। तमाम कोशिशें अखिलेश को विकास पुरुष के रूप में प्रोजेक्ट करने की हो रही है। बेशक अखिलेश ने सूबे में विकास किया पर कई क्षेत्रों में इस सरकार की कारगुजारी पर सवाल उठते रहते हैं। कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज उत्तर प्रदेश में नहीं है। सैकड़ों दंगे यह दर्शाते हैं कि अखिलेश की प्रशासन पर पकड़ निहायत कमजोर है। इस अंदरूनी यादव परिवार में चल रहे ड्रामे का सबसे ज्यादा फायदा भाजपा और बसपा को होगा। हमें संदेह नहीं कि जल्द ही इस ड्रामे का अंत हो जाएगा। चुनाव की घोषणा किसी भी दिन हो सकती है। समाजवादी पार्टी में जो दरार पड़ी है यह चुनाव के समय तक सीमेंट होती है या नहीं यह तो समय ही बताएगा। कुल मिलाकर इस ड्रामे से समाजवादी पार्टी की छवि बिगड़ रही है।

कार्यकाल के अंत में ओबामा ने रूस पर तगड़ी कार्रवाई की

20 जनवरी को राष्ट्रपति बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति पद से रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के अंत में कई फैसले ऐसे किए हैं जिनका दूरगामी प्रभाव हो सकता है और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए कड़ी चुनौती होगी इनके परिणामों से भुगतना। ताजा फैसले अमेरिका और रूस के आपसी संबंधों पर असर डाल सकते हैं। ओबामा ने रूस के 35 अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। दो रूसी परिसर बंद करने के अलावा नौ इकाइयों पर प्रतिबंध भी लगाए हैं। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रूसी हैकिंग के जवाब में ओबामा ने यह कदम उठाए हैं। ओबामा ने रूस के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान गत गुरुवार को हवाई से किया, जहां वे परिवार के साथ सालाना छुट्टियां मना रहे हैं। दरअसल मामला यह हैöअमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी और उसकी उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन पर साइबर हमले हुए थे। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया था। अमेरिकी एजेंसियां इसमें रूसी संलिप्तता का पर्याप्त सबूत होने का दावा कर रही हैं। खुद ओबामा कह चुके हैं कि पुतिन की शह पर साइबर हमले हुए। अमेरिकी राजनीतिक वेबसाइट और ई-मेल खातों को हैक कर राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के रूसी प्रयासों पर अमेरिका ने एक विस्तृत रिपोर्ट भी जारी की है। 13 पन्नों की यह रिपोर्ट गृह सुरक्षा मंत्रालय और एफबीआई के संयुक्त विश्लेषण पर आधारित है। यह किसी देश या उससे जुड़े लोगों द्वारा अंजाम दी गई दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधि से जुड़ी अपनी तरह की पहली रिपोर्ट है। रूसी विदेश मंत्रालय ने ओबामा की कार्रवाई करने हेतु रूसी राष्ट्रपति से उसी ढंग से जवाबी कार्रवाई करने की सिफारिश की। पर राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने इसे खारिज कर दिया। लेकिन 20 जनवरी को राष्ट्रपति बनने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के मद्देनजर पुतिन ने फिलहाल अमेरिका के खिलाफ बदले की कार्रवाई नहीं करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि रूस बदले की कार्रवाई नहीं करेगा। अमेरिकी राजनयिकों को किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। उधर डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात ट्वीट किया कि पुतिन के जवाबी कार्रवाई न करने के फैसले का वह स्वागत करते हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्हें हमेशा से पता था कि रूसी राष्ट्रपति काफी समझदार हैं। ट्रंप ने चुनाव में कथित हस्तक्षेप के मामले में रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया जताते हुए देश से आगे बढ़ने की अपील की और उन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों से मुलाकात करने का फैसला किया जिनकी उन्होंने कड़ी आलोचना की थी। 2017 का साल अमेरिका-रूस में तनातनी से शुरू हुआ है। देखें, ट्रंप क्या करते हैं?

-अनिल नरेन्द्र

Sunday, 1 January 2017

स्वागत है दिल्ली के 21वें उपराज्यपाल अनिल बैजल का

दिल्ली के 21वें उपराज्यपाल श्री अनिल बैजल का स्वागत है। 70 वर्षीय बैजल थिंक टैंक विवेकानंद फाउंडेशन की कार्यकारी परिषद में थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संस्थान से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत कई अवकाश प्राप्त अधिकारियों को अहम पदों पर नियुक्त किया है। बैजल दिल्ली के 21वें उपराज्यपाल हैं। वह 2006 में शहरी विकास मंत्रालय के सचिव पद से रिटायर हुए थे। वे दिल्ली विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन भी रह चुके हैं। दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने साढ़े तीन साल का कार्यकाल पूरा कर 22 दिसम्बर को अचानक इस्तीफा दे दिया था। श्री बैजल को पद संभालते ही कई चुनौतियों से जंग लड़नी पड़ेगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की भाषा का सामना करने के लिए नजीब जंग जैसा संयम रखना तो उनकी चुनौती होगी ही साथ ही जिन कारणों से नजीब जंग ने अपना सिंहासन छोड़ा है उन कारणों को तलाश कर केंद्र सरकार तथा राजनिवास के बीच संतुलन की कड़ी बनाए रखना भी उनके सामने चुनौती होगी। एक बड़ी चुनौती शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा रिपोर्ट पर कार्रवाई को लेकर भी अनिल बैजल को दो-चार होना पड़ेगा। नव वर्ष के आगाज के साथ ही दिल्ली के राजनिवास में भी एक नई शुरुआत होगी। दिल्ली सरकार और अफसरों के बीच तालमेल से काम करना नए उपराज्यपाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। अधिकारियों से बनी टकराव की स्थिति से सरकारी कामकाज में भी बाधाएं आ रही हैं। आप व भाजपा के बीच टकराव की स्थिति बनी रही है।  इस मामले में आप नेता कह चुके हैं कि भाजपा ऐसे व्यक्ति को इस पद पर लगाएगी जो सीधे तौर पर भाजपा से जुड़ा हो। इस  भ्रम को तोड़ना होगा। वैसे दिल्ली के कामकाज से अनिल बैजल पूरी तरह से वाकिफ हैं। वह दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के जब उपाध्यक्ष थे तो वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो बैजल ने अपने कार्यकाल के दौरान डीडीए में पारदर्शिता लाने में सफलता हासिल की थी। जनता के प्रति कर्मचारियों-अधिकारियों की जवाबदेही के प्रति वह काफी गंभीर थे। अपनी कार्यशैली के लिए चर्चित रहे बैजल को जानने वाले बताते हैं कि समझौते करना उनकी आदत नहीं है, नियम व कानून के तहत काम करने वाले बैजल जिन पदों पर भी रहे वहां उन्होंने कामकाज के ढंग में अनेक सकारात्मक बदलाव किए। 1969 बैच के आईएएस अधिकारी अनिल बैजल अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में गृह सचिव नियुक्त किए गए थे। लेकिन नियुक्ति के करीब चार महीने बाद ही जून 2004 में आई यूपीए सरकार ने इन्हें पद से हटाकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय में भेज दिया था। इसके बाद बैजल कई मंत्रालयों में कार्यरत रहे। इस लिहाज से 70 वर्षीय अनिल बैजल काफी तजुर्बेकार हैं। हम श्री बैजल का स्वागत करते हैं।

-अनिल नरेन्द्र

जाते-जाते 2016 कई रंग दिखा गया, 2017 बेहतर साबित हो

जाते-जाते 2016 का साल अंतिम दिनों में  रंग दिखा गया। नोटबंदी की घोषणा ने सारे देश को बैंकों व एटीएमों की लाइनों में लगा दिया। 2017 भी अनिश्चितता से शुरू हुआ। उम्मीद की जाती है कि इस साल भारत की जनता को इस मुद्दे पर राहत मिलेगी। दिल्ली में जेएनयू का मुद्दा छाया रहा। कन्हैया कुमार व जेएनयू में राष्ट्रविरोधी गतिविधियां अखबारों की सुर्खियों में रहीं। संसद का शीतकालीन सत्र आपसी झगड़ों में ही बर्बाद हो गया। लोकसभा का 83 प्रतिशत और राज्यसभा का 80 प्रतिशत समय विरोध और बहस में ही बर्बाद हो गया। तमिलनाडु की चमत्कारी मुख्यमंत्री जयललिता के निधन से तमिलनाडु गम में डूब गया। 2016 में हमने हरियाणा में जाट आंदोलन का हिंसक रूप देखा। ऐसे ही गुजरात में पाटीदार आंदोलन भी देखने को मिला। साल के अंत में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का ग्रेट सियासी दंगल भी देखने को मिल गया। सैन्य बलों के लिए 2016 मिलाजुला रहा जबकि रक्षा मंत्रालय ने कई समझौतों को मंजूरी देकर इस साल अपने खाते में कई उपलब्धियां जोड़ीं। राफेल लड़ाकू विमानों का समझौता, अमेरिका के साथ सैन्य संसाधन समझौता, रक्षा खरीद और ब्लैकलिस्ट करने संबंधी नई नीतियां और स्वदेश निर्मित परमाणु सक्षम पनडुब्बियों को सेवा में शामिल करना उनमें प्रमुख हैं। नियंत्रण रेखा के पार आतंकियों के ठिकानों पर भारतीय सेना द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक जहां कई दिनों तक याद रहेगी वहीं पाकिस्तान के छद्म युद्ध की जवाबी कार्रवाई में अकेले जम्मू-कश्मीर में ही 80 सुरक्षाकर्मी खोना भारी नुकसान रहा। पठानकोट वायुसेना स्टेशन और उरी तथा नगरोटा में सैन्य शिविरों पर आतंकी हमले बड़े झटके रहे और इनमें कई जानें गईं। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चर्चा में रहे। हाल में क्रिकेटर मोहम्मद शमी पर सोशल मीडिया में हमला बोला गया जब उनकी पत्नी हसीन जहां की तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट की जिसमें वह बिना बाजू वाला गाऊन पहने थीं। उनसे कहा गया कि वह सुनिश्चित करें कि उनकी पत्नी हिजाब में नजर आएं। हालांकि सोशल मीडिया पर क्रिकेटर मोहम्मद कैफ, गीतकार जावेद अख्तर और उनके पुत्र फरहान अख्तर अन्य कई लोगों ने शमी का बचाव किया। इसी तरह बॉलीवुड कलाकार करीना कपूर और सैफ अली खान द्वारा अपने नवजात बेटे का नाम तैमूर रखने पर सोशल मीडिया में खूब चर्चा रही। 2017 में कई राज्यों के विधानसभा चुनावों पर देश की नजरें रहेंगी। 2017 में सबकी नजर नए राष्ट्रपति के चुनाव पर भी होगी। नए साल में विश्व ताकतों के संबंधों में कई निर्णायक मोड़ आने की उम्मीद है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के जनवरी में पद संभालने से स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। भारत को इस बात को समझना होगा कि पाकिस्तान से निपटने के लिए कोई दूरगामी कारगर नीति हो। चीन से भी निपटने की चुनौती हमारे सामने होगी। खासतौर से आतंकी मसूद अजहर के यूएन की प्रतिबंधित आतंकियों की लिस्ट में शामिल कराने के भारत के प्रयासों पर अड़ंगा लगाने की चीन से निपटने की दिशा में कदम उठाने होंगे। चीन और पाकिस्तान के बीच गाढ़ी दोस्ती से भी भारत में जो चिन्ता रही है, उसमें रूस का लिंक जुड़ता दिख रहा है। 2017 में भारत के लिए रूस के रुख को लेकर भी ठोस रणनीति बनानी होगी। लालू-नीतीश की दोस्ती 2015 के आखिर में शुरू हुई। दोनों ने बड़ी जीत ह]िसल की। 2016 में कुछ दरारें आने के बाद भी यह दोस्ती नहीं टूटी। क्या 2017 में भी यह बरकरार रहेगी? मोदी सरकार के चौथे बजट से सबको मैजिक की उम्मीद है। सभी तबके सौगात का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में एक फरवरी 2017 का दिन बहुत खास होने वाला है? 2016 में सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच कई मौकों पर टकराव हुआ। नए साल के पहले वर्किंग डे के दिन नए चीफ जस्टिस जेएस खेहर कार्यभार संभालेंगे। उनके नेतृत्व में  बिगड़ते संबंध किधर मुड़ेंगे? मैं अपनी ओर से, प्रताप, वीर अर्जुन और सांध्य वीर अर्जुन की ओर से नए साल की सबको बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि यह वर्ष मंगलमय हो।

Saturday, 31 December 2016

नोटबंदी के 50 दिन : क्या खोया क्या पाया?...(2)

15.4 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों में करीब-करीब 14 लाख करोड़ रुपए वापस बैंकों में जमा किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवम्बर को 500 और 1000 रुपए के नोटों को अवैध घोषित कर दिया था। तब सरकार को उम्मीद थी कि डिमोनेटाइजेशन के इस फैसले से उसे कई मोर्चों पर फायदा होगा। उम्मीद यह थी कि काले धन के रूप में रखे गए कम से तीन लाख करोड़ रुपए मूल्य के पुराने नोट वापस नहीं होंगे। ऐसा होने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सरकार को अच्छा-खासा लाभांश देती। लेकिन यह उम्मीद पूरी होती नहीं दिख रही है। बैंकों में जमा नोटों की मात्रा से ऐसा लगता है कि लोगों ने काले धन को सफेद करने का रास्ता निकालने में कामयाबी पा ली। अब सरकार इस बात पर खुश हो सकती है कि उसे 2.5 लाख रुपए की सीमा से ऊपर जमा हुए रुपयों पर भारी-भरकम टैक्स मिलेगा। सरकार को एक और फायदा इस लिहाज से भी नजर आ रहा है कि घरों में रखी गई छोटी-छोटी बचतों की रकम बैंकों में आ जाने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। नोटबंदी के ऐलान को बुधवार को 50 दिन हो गए। इन 50 दिनों में 14 लाख करोड़ से ज्यादा नोट बैंकों में वापस जमा हो चुके हैं यानि 91 प्रतिशत से ज्यादा। जबकि इस दौरान सिर्फ छह लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट सिस्टम में मौजूद होने का दावा था। यही वजह है कि आज भी देश कतारों में खड़ा है। मीडिया में एक सर्वे छपा है। इसमें 1300 से ज्यादा गांवों में सर्वे किया गया। नतीजा-अधिकांश लोग फैसले के तो समर्थन में दिखे, लेकिन साथ ही उनका कहना है कि 50 दिन बाद भी उनकी मुश्किलें जस की तस हैं। कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ने के सरकारी दावे भी कमजोर निकले। डिजिटल ट्रांजेक्शन पर नजर रखने वाली सरकारी संस्था एनपीसीआई के आंकड़ों की मानें तो नवम्बर में डिजिटल ट्रांजेक्शन 15 प्रतिशत घटा है। हालांकि एटीएम जैसी कंपनियां 300 प्रतिशत इजाफे की बात कर रही हैं। बात काले धन की करें तो इस दौरान आयकर विभाग ने 678 छापे मारे। इसमें 3600 करोड़ रुपए का ही काला धन पकड़ा। नोटबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हमारा ग्रामीण अंचल है। पांच राज्यों के 1310 गांव के सर्वेक्षण में पता चला कि 61 प्रतिशत गांवों में एटीएम नहीं हैं। 86 प्रतिशत गांवों में स्वाइप मशीनें नहीं हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन इंटरनेट सुविधा पर आधारित है। भारत में कुल 26 प्रतिशत क्षेत्र में इंटरनेट सुविधा है। दिल्ली में हमें इंटरनेट का अनुभव है। यह कितना चलता है? किस स्पीड पर चलता है यह सबको पता है। इसलिए जब शहरों में यह सुविधा ठीक नहीं है तो गांवों में यह कितनी कारगर होगी आप खुद अनुमान लगा सकते हैं। अब बात करते हैं विदेशी निवेशकों की। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स आठ नवम्बर के बाद से डेट और इक्विटी मार्केट में लगभग 10 अरब डॉलर यानि 68,000 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं। यह 2013 के बाद दो महीने के पीरियड में उनकी तरफ से हुई सबसे बड़ी बिकवाली में एक है। नोटबंदी के ऐलान के बाद बैंकिंग सिस्टम में नए नोट आते रहने के बावजूद एटीएमों के बाहर लोगों की लाइनें छोटी नहीं हो रही हैं क्योंकि कुछ भ्रष्ट बैंक मैनेजर और अधिकारी काले धन को सफेद करने में जुटे हैं। इन बैंकरों ने ब्लैक मनी वालों का साथ देने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए। सही कस्टमर की पहचान चुराना। कई ग्राहकों की ओर से जमा कराए गए पैन कार्ड और पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल चोरी-छिपे अवैध लेनदेन में किया गया। एटीएम के पैसे की हेराफेरी। बैंक अधिकारियों ने एटीएम सर्विस एजेंसियों के साथ मिलकर एटीएमों के लिए भेजे गए नोटों (नए) के जरिये काले धन को सफेद किया। जनधन खातों का गलत इस्तेमाल। हर बैंक में 10 से 15 प्रतिशत जनधन खातों का इस्तेमाल काले धन को सफेद करने में हुआ। ऐसा करने वाले बैंकर अब सीबीआई के निशाने पर हैं। डिमांड ड्राफ्ट का फर्जीवाड़ा। बैंक अधिकारियों ने काले धन को सफेद करने के लिए जिन तरीकों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया उनमें एक यह भी है। कमीशनखोर कैशियर। कैशियरों ने कमीशन लेकर पुराने नोटों को नए नोटों से बदल दिया। ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में बैंक गए गरीब और निरक्षरों को ठगा गया। फर्जी खाते खोले। कुछ मामलों में जिन ईमानदार खाताधारकों के आईडी प्रूफ बैंकरों के हाथ लगे, उनके नाम पर खाते खोलकर उसके जरिये पैसे की हेराफेरी की। नोटबंदी के बाद काले धन की बैंकों ने काले धन के बदले नए नोट बदलने में शादी के हथियार तक का जमकर उपयोग किया। शादी का कार्ड डालते ही 2.50 लाख रुपए बदल गए। इसके लिए अलग-अलग आईडी का इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि लोन के लिए जमा फार्म में लगाए आईडी का दुरुपयोग किया गया। कुछ बैंक अफसर-कर्मचारियों ने 25 से 30 प्रतिशत कमीशन के लालच में घर तक नए नोट पहुंचाने की व्यवस्था की थी। सर्वाधिक धांधली एक्सिस बैंक की 10 ब्रांचों में की गई। इस दौरान कई विवाद पैदा हुए। नोटबंदी पर प्रधानमंत्री के स्पष्टीकरण की मांग पर विपक्ष ने संसद का शीतकालीन सत्र नहीं चलने दिया और देश को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। अधूरी तैयारियों के आरोपों के साथ रिजर्व बैंक के बार-बार नया आदेश जारी करने से केंद्रीय बैंक की साख प्रभावित हुई। अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट एजेंसियों ने भारत की विकास दर गिरने की बात कही है। भाजपा विधायक एक वीडियो में यह कहते हुए कैद हुए कि केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के बारे में दो बड़े उद्योगपतियों को पहले से जानकारी थी। हालांकि बाद में वह इस बयान से मुकर गए। हमारे परिवार में दादा जी से लेकर मुझ तक यही परंपरा रही कि हमेशा जनता के हितों में आवाज उठाओ, वह भी बिना किसी लाग-लपेट के। मैंने ऐसा ही करने का प्रयास किया है। पाठक जानते हैं कि मैंने पहले दिन से जिन उद्देश्यों को लेकर नोटबंदी की गई उन पर संदेह व्यक्त किया था। आज भी अपने स्टैंड पर कायम हूं। मैं चाहता हूं कि देश में ब्लैक मनी बंद हो, काले धंधे बंद हों, भ्रष्टाचार समाप्त हो पर इन तरीकों से शायद ही इनमें सफलता मिले? अगर हमें इन उद्देश्यों को पाना है तो कई कदम उठाने होंगे और सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। एसोचैम के मुताबिक 95 करोड़ भारतीयों के पास अब भी इंटरनेट की पहुंच नहीं है। इंटरनेट स्पीड के मामले में भी भारत 3.5 एमबीपीएस के साथ विश्व रैंकिंग में 113वें स्थान पर है। नए नोटों की छपाई के बावजूद पर्याप्त मात्रा में नकदी आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। आरबीआई अनुमानित आर्थिक विकास की दर 7.6 से 7.1 कर चुका है। एशिया विकास बैंक ने भी विकास दर में कमी की। एसोचैम ने 2017 तक मोबाइल फ्राड 65 प्रतिशत बढ़ने की आशंका जताई थी। साइबर धोखाधड़ी को रोकना सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती है। एक अनुमान के मुताबिक मार्च 2016 तक देश में सिर्फ 53 प्रतिशत लोगों के ही बैंक खाते हैं। पूरे देश को बैंक से जोड़ना होगा। अब आप खुद फैसला करें कि नोटबंदी के 50 दिन में देश ने क्या खोया क्या पाया। (समाप्त)

-अनिल नरेन्द्र