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Friday, 10 February 2017

एच1बी वीजा पर नकेल की तैयारी

डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति सात मुस्लिम देशों के नागरिकों को अमेरिका में प्रवेश पर 90 दिन के प्रतिबंध लगाने के बाद अब एच1बी वीजा नीति को पहले से ज्यादा सख्त करने के अभियान में जुट गए हैं। इसे कानूनी रूप देने के लिए अमेरिकी संसद में जो विधेयक पेश किया गया है उसके प्रावधान के मुताबिक यह वीजा प्राप्त करने के लिए न्यूनतम वेतन सीमा साठ हजार डॉलर से बढ़ाकर एक लाख तीस हजार अमेरिकी डॉलर करने का प्रस्ताव है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि यदि यह विधेयक पारित हो गया तो भारत के आईटी सेक्टर में सॉफ्टवेयर उद्योग पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है। इस समय एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में इस समय करीब दो लाख भारतीय आईटी पेशेवर एच1बी वीजा पर कार्यरत हैं और भारतीय मूल के करीब 30 लाख अमेरिकी नागरिक हैं। इसका असर कितना हो सकता है, इसे सिर्फ इसी बात से समझा जा सकता है कि संशोधन विधेयक पेश होते ही भारतीय शेयर बाजारों में आईटी कंपनियों के शेयर मुंह के बल जा गिरे। अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों का सबसे बड़ा बाजार है। वहां काम करने वाले ज्यादातर भारतीय आईटी कंपनियां एच1बी वीजा के तहत ही भारतीय आईटी पेशेवरों को वहां कुछ साल के लिए ले जाती हैं। दरअसल यह इसलिए हो रहा है क्योंकि अमेरिकी आईटी पेशेवरों को नौकरी पर रखने के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है। पर कुछ हद तक यह भी सही है कि अमेरिकी आईटी जाइटस इसलिए भी भारतीयों को ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि भारतीय आईटी प्रोफेशनल अपने अमेरिकी काउंटर पार्ट से ज्यादा मेहनती हैं और काम के प्रति ज्यादा वफादार हैं। यदि हम ट्रंप के चुनाव अभियान के दौरान की गई घोषणाओं और वादों पर गौर करें तो उन्होंने भारतीयों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफों के पुल बांधे थे। इसलिए यह आशावाद जगाता है कि मोदी और ट्रंप के  बीच विशेष तौर पर एच1बी वीजा के सन्दर्भ में कोई संधि हो सकती है, जिसमें ऐसी विशेष रियायतों का प्रावधान हो कि भारतीय कंपनियों के सामने किसी तरह की अड़चन न आने पाए। दरअसल ट्रंप चाहते हैं कि उनके देश में कंपनियां ज्यादा से ज्यादा अमेरिकियों को नौकरी पर रखें। बिल पास होने पर एच1बी वीजा वालों को ज्यादा वेतन देना होगा। भारतीय वहां अमेरिकियों के मुकाबले कम वेतन पर काम करते हैं। ऐसे में  बड़े वेतन पर आईटी कंपनियां अमेरिकियों को तरजीह दे सकती हैं। एक लाख से ज्यादा एच1बी वीजा धारक भारतीय अमेरिका में काम करते हैं। विधेयक पास होने पर इन्हें वापस भारत लौटने पर मजबूर होना पड़ सकता है। साथ ही नए पेशेवरों के लिए मौके कम होने की संभावना है। अभी तक भारतीय प्रोफेशनल्स का सस्ता होना उनके पक्ष में जाता था। यह सुविधा अब उनके हाथ से निकलने का खतरा है। हम उम्मीद करते हैं कि इस समस्या का कोई न कोई हल अवश्य निकल आएगा। दरअसल अमेरिका की श्वेत आबादी मुस्लिम आतंकवाद से त्रस्त है। उनके मन से 9/11 के भीषण आतंकवादी हमले का असर कम नहीं हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुनावों में इन्हीं मानसिकता वाले लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। फिर एच1बी वीजा पर विदेशी वर्करों से काम कराने वाली कंपनियों को जो फायदा अमेरिका की बड़ी कंपनियों को अपने सामान और सेवाएं सस्ती रखने के रूप में मिलता रहा है। नई नीति आने के बाद वह नहीं मिलेगा। जिन्हें यह वीजा दिया जाता है उन्हें कई तरह के अधिकार मिलते हैं, लेकिन उन्हें अमेरिकी प्रवासी वाले अधिकार नहीं मिलते। यह वीजा सिर्फ आईटी क्षेत्र के लिए नहीं है, इसमें बॉयो-टेक्नोलॉजी और फैशन जैसे कई तरह के कारोबार शामिल हैं। अमेरिकी उद्योग जगत ने ट्रंप की इस पहल का स्वागत नहीं किया है। बहरहाल हमें तो यह देखना है कि हमारे आईटी सेक्टर को इससे ज्यादा नुकसान न उठाना पड़े।
-अनिल नरेन्द्र



क्या कानपुर रेल हादसे में आईएसआई का हाथ था?

पिछले साल नवम्बर में कानपुर में हुए रेल हादसे का प्रमुख संदिग्ध व आईएसआई एजेंट शमशुल हुदा को नेपाल की राजधानी काठमांडू में गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे दुबई से प्रत्यार्पित किया गया था। नेपाल पुलिस की एक विशेष टीम ने 48 साल के हुदा को तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया। गत माह बिहार में गिरफ्तार तीन लोगों ने कानपुर रेल हादसे में हुदा का हाथ होने के संकेत दिए थे। दुबई में बैठा हुदा वहीं से इन साजिशों को अंजाम दे रहा था। दुबई में आतंकी संगठनों से हाथ मिलाने के बाद हुदा ने भारतीय रेलवे स्टेशनों पर विस्फोट की योजना पर काम करना शुरू कर दिया था। इसके लिए रक्सौल के पास धोड़ा सहन और अदापुर स्टेशनों को चुना गया। योजना पर काम करने के लिए नेपाल आकर हुदा ने बृजकिशोर गिरी बाबा से सम्पर्क किया। यहां एक अन्य भारतीय नागरिक के सहारे अरुण राम और दीपक राम को आठ लाख रुपए एडवांस देकर रेलवे स्टेशनों पर आईईडी रखने की योजना बनाई। दोनों इसमें कामयाब नहीं हो पाए। लिहाजा उनकी बाद में हत्या कर दी गई। भारत में बड़ी संख्या में ट्रेन दुर्घटना की सज़िश को अंजाम देने के लिए फंडिंग का पुख्ता इंतजाम किया गया था। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती में चल रही इस साजिश के लिए लेनदेन में आए लाखों की रकम के तार दुबई, ढाका, सिंगापुर और हांगकांग से जुड़े हैं। इसमें नेपाल के काठमांडू और पोखरा में व्यवसाय कर रहे कुछ कश्मीरी युवकों की पहचान भी की गई है। कानपुर देहात के पुखरायां-मलासा स्टेशन के बीच पिछले वर्ष इंदौर-राजेन्द्र नगर एक्सप्रेस के पटरी से उतर जाने के बाद 152 यात्रियों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा यात्री घायल हो गए थे। जांच के बाद यह बात सामने आई थी कि रेल को पलटने की साजिश रची गई है, तभी से जांच एजेंसियां मास्टर माइंड की तलाश में जुटी थीं। हादसे के मुख्य साजिशकर्ता शमशुल हुदा को दुबई से नेपाल आने पर काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया गया। शमशुल आईएसआई का नेपाल का इंचार्ज है। जांच एजेंसियों को पूछताछ में पता चला है कि हुदा कई वर्षों से नेपाल में रहकर अपना नेटवर्क बढ़ा रहा था। उसने बताया कि आईएसआई के कहने पर ही आठ लाख रुपए देकर रेल हादसे को अंजाम दिया गया था। अब जब एनआईए ट्रेन दुर्घटनाओं के पीछे साजिश के हर पहलू की जांच कर रही है तब यह आवश्यक है कि खुद रेलवे भी यह देखे कि कहीं हाल की रेल दुर्घटनाएं रेल पटरियों के रखरखाव में लापरवाही का नतीजा तो नहीं हैं? हुदा से जब गहन पूछताछ होगी तभी सारी साजिश का खुलासा होगा। पुखरायां ट्रेन दुर्घटना के मामले में गिरफ्तार किए गए बदमाशों की ओर से यह स्वीकार किया जाना सनसनीखेज मामला है कि उन्हें रेल ट्रैक पर विस्फोट करने के लिए पैसे दिए गए थे। यह दावा जितना सनसनीखेज है उतना ही विचित्र भी, क्योंकि आमतौर पर अपराधी दुर्घटना करने के अपने अपराध की इतनी आसानी से स्वीकारोक्ति नहीं करते? चूंकि बिहार में पकड़े गए अपराधी दुर्घटनास्थल के भूगोल से अपरिचित दिख रहे हैं इसलिए उनके दावे पर पूरी तरह यकीन भी नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके उनके दावों की गहन छानबीन की जानी चाहिए, क्योंकि इससे ही यह पता चलेगा कि उनका पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से या उसके किसी एजेंट से संबंध था या नहीं? यह भी निर्णायक रूप से तय करना होगा कि ट्रेन हादसे के पीछे आईएसआई का ही हाथ था।

Thursday, 9 February 2017

वोट नहीं डालते तो सरकार पर तोहमत मढ़ने का अधिकार नहीं


अगर आप वोट नहीं देते तो आपको किसी काम के लिए सरकार पर तोहमत मढ़ने का अधिकार भी नहीं है। यह बात सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएम खेहर ने एक मामले की सुनवाई के दौरान वादी से कही। वादी ने देशभर के अतिक्रमणों को हटाए जाने के लिए आदेश देने की मांग की थी। यह भी बताया कि सरकारी व्यवस्था से क्षुब्ध होकर वह चुनाव में वोट नहीं डालते। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस एनवी रमन्ना और जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ भी हैं। याचिका की सुनवाई करते हुए पीठ ने देशभर के अतिक्रमणों को हटाए जाने का कोई आदेश देने से साफ इंकार कर दिया। पीठ ने कहा कि दिल्ली में बैठकर यह कैसे जान सकते हैं कि किस शहर में कहां पर अतिक्रमण है। इसलिए याचिककर्ता सड़कों के किनारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण को देखकर उन्हें हटाए जाने की मांग वाली याचिका संबंधित हाई कोर्ट में दायर करें तथा उनसे आदेश पारित कराने की मांग करें। सामाजिक कार्यकर्ता धनेश इराफन ने दिल्ली की गैर सरकारी संस्था वॉयस ऑफ इंडिया की तरफ से याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार अतिक्रमण हटाने के लिए कुछ भी नहीं कर रही है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट पूरे देश में लागू होने वाला आदेश जारी करके केंद्र व राज्य सरकारों से अतिक्रमण हटाने के लिए कहे। सुनवाई के दौरान पीठ ने धनेश से पूछा कि चुनाव में वह मतदान करते हैं या नहीं? जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा, उसने अपने जीवन में कभी वोट नहीं डाला। इस पर पीठ ने उसे आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब तुमने सरकार को चुनने के लिए वोट ही नहीं डाला तो तुम्हें सरकार से सवाल पूछने या उस पर काम न करने की तोहमत मढ़ने का क्या अधिकार है? सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत है। कटु सत्य तो यह है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में एक तिहाई मतदाता मतदान में हिस्सा नहीं लेते। चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आकड़ों के मुताबिक 2014 के लोकसभा में कुल 66 फीसदी मतदान हुआ। वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 58 फीसदी ही मत पड़े थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में कुल 81.5 करोड़ आधिकारिक मतदाताओं में से 55 करोड़ 38 लाख 1 हजार 801 मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया। वहीं 2009 में कुल 71.7 करोड़ आधिकारिक मतदाताओं में से 41 करोड़ 71 लाख 58 हजार 969 लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया। आमतौर पर ऊंचे तबके के लोग अपने घरों में ही मतदान के दिन टीवी देखते रहते हैं और वोट डालना जरूरी नहीं समझते और यही तबका है जो सबसे ज्यादा आलोचना करता है।

-अनिल नरेन्द्र

उत्तर प्रदेश विधानसभा महादंगल शनिवार को आरंभ होगा

उत्तर प्रदेश विधानसभा के पहले चरण में 73 सीटों पर 11 फरवरी को मतदान होना है। अब कुल 840 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें सबसे ज्यादा 26 उम्मीदवार आगरा दक्षिण की विधानसभा सीट पर हैं। आगरा दक्षिण की इस  विधानसभा सीट पर हर पोलिंग बूथ पर मतदान के लिए दो-दो इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें लगाई गई हैं। सबसे कम 6-6 उम्मीदवार मेरठ की हस्तिनापुर सुरक्षित, गाजियाबाद की लोनी, अलीगढ़ की इग्लास सुरक्षित विस सीट पर हैं। आमतौर पर यूपी के इस क्षेत्र को जाटलैंड भी कहा जाता है। अजित सिंह का राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश चुनाव में अपने बूते पर लम्बे अरसे बाद लड़ रहा है। हालांकि गठबंधन की राजनीति की अहमियत अजित सिंह और उनके उत्तराधिकारी जयंत चौधरी अपनी तरह समझते हैं। मंशा तो उनकी भाजपा के साथ तालमेल की थी पर बाद में वह सपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन के भी इच्छुक दिखे, जहां लगता है कि उन्हें मांग के हिसाब से सीटें नहीं मिलीं तो उन्होंने गठबंधन की बजाय एकला चलो रे की राह पकड़ना बेहतर समझा। कांग्रेस-सपा गठबंधन में शामिल न किए जाने के साथ भाजपा का चुनावी समीकरण बिगाड़ने में दोनों चौधरी लगे हुए हैं। चौधरी अजित सिंह थे। भारी तादाद में अपने उम्मीदवार उतार कर सपा व भाजपा के सामने कड़ी चुनौती पेश कर दी है। अजित सिंह अभी तक सौ से ज्यादा उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार चुके हैं। जबकि पिछले विधानसभा  चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन के तहत लोकदल ने केवल 46 उम्मीदवारों को पार्टी का टिकट दिया था। इन सीटों पर लोकदल के उम्मीदवार  बेशक जीत हासिल न कर सकें, लेकिन कहीं सपा तो कहीं भाजपा का खेल बिगाड़ सकते हैं। वेस्ट यूपी में दलितों पर सभी दलों की नजर है लेकिन दलितों के दिल में कौन है यह बड़ा सवाल है? इस विधानसभा चुनाव में ज्यादातर पार्टियों ने रिजर्व सीटों पर ही  कैंडिडेट उतारे हैं। यूपी में 86 रिजर्व सीटें हैं। हालांकि बीएसपी ने जरूर 87 टिकट दिए हैं लेकिन वह भी एक ही ज्यादा है। राजनीतिक दलों की रणनीति है कि पहले और दूसरे फेस में दलितों का साथ मिलने का मैसेज बाकी चरणों के चुनाव में भी जाए। दलित कभी कांग्रेस का वोट बैंक हुआ करता था। बीएसपी के अस्तित्व में आने के बाद उनका झुकाव बसपा की तरफ हो गया। इस क्षेत्र में मुस्लिमों की भी भूमिका है। भाजपा इसी उम्मीद में है कि मुस्लिमों का वोट बंटेगा। मुजफ्फरनगर बैल्ट में अगड़ी जातियों का भी योगदान महत्वपूर्ण है। दंगों के बाद इनका झुकाव भाजपा की ओर हो गया। कुल मिलाकर पहले चरण का मतदान दिलचस्प होगा और इस पर सभी दलों की नजर टिकी रहेगी। तो उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल का शनिवार को श्रीगणेश होगा।

Wednesday, 8 February 2017

ट्रंप के वीजा बैन को अदालती झटका

किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के लिए न केवल थोड़ा राजनीतिक अनुभव जरूरी होता है बल्कि अगर उसके सलाहकार भी अनुभवी हों तो गलतियों के चांस कम हो जाते हैं। हमने अपने देश में ही देखा है कि सियासत के पुराने खिलाड़ी भी कभी-कभी भारी गलती कर जाते हैं जिसकी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ जाती है। जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का चुनाव हुआ तो बहुत से विशेषज्ञों का मानना था कि वह राजनीति नहीं जानते और उनके पास राजनीतिक अनुभव का अभाव है, यही हुआ भी। अपने पहले फैसले में ही गच्चा खा गए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका की एक संघीय अदालत ने उनके देश में सात मुस्लिम देशों के प्रवासियों पर प्रवेश के लिए प्रतिबंध लगाने पर तत्काल से स्टे दे दिया और इन सात देशों के नागरिकों को यात्रा की आज्ञा दे दी। शुक्रवार को अमेरिका में सिएटल के फैडरल जज जेम्स रॉबर्ट ने ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद से वैध वीजा धारकों को अमेरिका में प्रवेश करने की इजाजत मिल गई और 60 हजार लोगों के वीजा बहाल कर दिए गए। वहीं यात्रा पर प्रतिबंध को लेकर ट्रंप के खिलाफ अमेरिका और यूरोप में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। मालूम हो कि ट्रंप प्रशासन ने इराक, ईरान, सीरिया, सूडान, सोमालिया, लीबिया और यमन के नागरिकों की अमेरिका यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था। आनन-फानन में अधूरी तैयारी के साथ अमेरिकी न्याय विभाग ने सैन फ्रांसिस्को स्थित निंथ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील कोर्ट में सिएटल अदालत के फैसले के खिलाफ अपील कर दी। शुक्रवार को फैडरल जज की ओर से ट्रंप के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी। मामले में अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि सोमवार तक ट्रंप के कार्यकारी आदेश को चुनौती देने वाले जवाब दाखिल करें और न्याय विभाग प्रत्युत्तर जवाब दाखिल करे। अदालत के इंकार करने से साफ हो गया है कि अब संबंधित मुस्लिम देशों के वैध वीजा धारक नागरिक अमेरिका की यात्रा कर सकेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आदेश के खिलाफ अदालत के फैसले को हास्यास्पद करार दिया। ट्रंप ने फैसले को पलटने का भी संकल्प लिया है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि अदालत के विचार हास्यास्पद हैं और उनके आदेश को उलट दिया जाएगा। इस दौरान वह मुस्लिम देशों और प्रवासियों पर प्रतिबंध लगाने वाले कार्यकारी आदेश का विरोध करने वाले लोगों पर भी जमकर बरसे। ट्रंप ने कहाöदिलचस्प बात यह है कि मध्य-पूर्वी देश उनके इस प्रतिबंध से सहमत हैं। वे जानते हैं कि अगर कुछ खास लोगों को देश में घुसने की इजाजत दी गई तो वे हत्याएं और विनाश करेंगे। कई एयरलाइंस ने शनिवार को यात्रियों को अमेरिका के लिए उड़ान भरने की इजाजत दे दी।

-अनिल नरेन्द्र

पंजाब व गोवा के बाद फोकस अब यूपी-उत्तराखंड पर

पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के पहले चरण में पंजाब और गोवा में शनिवार को मतदान सम्पन्न हो गया। पंजाब की 117 सीटों पर 1145 प्रत्याशियों का भाग्य मतपेटी में बंद हो गया जबकि गोवा की 40 सीटों पर 257 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव खत्म होने के बाद से ही सभी पार्टियों के नेताओं ने अपनी-अपनी जीत के दावे करने शुरू कर दिए हैं। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व मुख्यमंत्री पद के दावेदार कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य चुनाव को स्थिरता बनाम सांप्रदायिक एवं कट्टरपंथ के लिए वोट करार देते हुए मालवा क्षेत्र सहित पूरे राज्य में पार्टी को बड़ी जीत मिलने का विश्वास जताया। हाल ही में कांग्रेस में आए नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि वह कांग्रेस को पुनर्जीवित कर राहुल गांधी को गिफ्ट देंगे। सिद्धू ने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी को जीत का तोहफा दिया जाएगा। पंजाब में इस बार अमरिन्दर सिंह हमारे लीडर हैं, उनकी आखिरी पारी शानदार होगी। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अकाली-भाजपा सरकार के बहुमत के साथ आने का दावा करते हुए कहा कि सरकार के विकास कार्यों पर जनादेश मिलेगा। आप नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी पंजाब और गोवा में इतिहास रचने का दावा किया। उन्होंने कहा कि गोवा और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। पंजाब और गोवा में चुनाव खत्म होने के बाद अब बड़े नेताओं का सारा फोकस यूपी और उत्तराखंड की तरफ शिफ्ट हो रहा है। यूपी में बड़े नेताओं की करीब दर्जनभर रैलियां हैं। उत्तराखंड में भी हलचल बढ़ रही है। यूपी में लखनऊ और आगरा में इकट्ठे रोड शो कर चुके कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी चीफ व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जुगलबंदी पीएम मोदी पर जमकर हल्ला बोल रही है। मोदी का फोकस यूपी में सपा और बसपा के भ्रष्टाचार और प्रदेश में विकास पर है। राज्य में 11 फरवरी को पहले चरण में 73 और 15 फरवरी को दूसरे चरण में 67 सीटों पर मतदान होना है। उधर उत्तराखंड में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने देहरादून में अपनी पार्टी का घोषणा पत्र जारी कर भाजपा के प्रचार में तेजी लाने का प्रयास किया है। दोनों कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेता भी उत्तराखंड की तरफ रुख कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने बागियों से परेशान हैं। भाजपा के 17 और कांग्रेस के 23 बागी मैदान में हैं। बागियों के नुकसान से बचने के लिए दोनों ही दल रणनीति को आखिरी रूप देने में जुटे हुए हैं। 15 फरवरी को होने वाले चुनाव में मुख्यमंत्री हरीश रावत की प्रतिष्ठा व भविष्य दोनों दांव पर हैं।

Tuesday, 7 February 2017

Kuwait’s trump card on visa

The issue of US ban on seven Muslim nations and strictness on Pak citizens is still hot in the entire world and meanwhile one more nation Kuwait (itself a Muslim nation) has also banned the entry from five Muslim nations. Kuwait has cancelled the visa issuing process for the residents of Pakistani, Syrian, Iraqi, Afghani and Iranian origin. Such decision of Kuwait has confirmed the issue raised by India that Pak has become the safe shelter for terrorism. As per the local newspaper 'Sputnik News' Kuwait has taken such big decision to stop terrorism in its own nation. It means that citizens of Syria, Iraq, Afghanistan and Iran including Pakistan can't enter Kuwait now. Kuwait has stopped the tourism, trade and tourist visa with these five nations. Kuwait is the only nation who had banned the entry of Syrian citizens much before the Trump administration's ban on Muslim nations. Kuwait cancelled the visas of all Syrian citizens in the year 2011. It means that the initiative taken by the Trump administration was already incorporated by Kuwait. However, the Kuwaiti action against Pakistan was a little bit surprising due to good relations between them. As such the question arises whether Kuwait took this step under the US pressure or supported the Indian stand for so long? It can't be denied that Kuwait is struggling hard with the Islamic terrorism for a long time. The current Kuwaiti action shows that the Islamic terrorism has created internal problems even in the Muslim nations. The same indications were visible in the joint declaration by the Prime Minister Narendra Modi and Prince of Abu Dhabi Al Nahyan, visiting New Delhi on the occasion of the Republic Day on 26th January. Are these incidents indicating the new polarization on the globe against the Muslim nations providing shelter to the terrorism? Banning Pakistan supports the fears of India that Pakistan is behind all the terrorist incidents happening in various parts of the country including Jammu & Kashmir. Kuwaiti ban on Pakistan is an alarm bell for it. Other liberal nations may also take action against the nations sponsoring the terrorism like Kuwait.
Anil Narendra