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Saturday, 15 October 2016

जयललिता के स्वास्थ्य पर उठते सवाल

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की बीमारी ने सभी को चक्कर में डाल दिया है। जयललिता के स्वास्थ्य को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। बेशक अन्नाद्रमुक सुप्रीमो के स्वास्थ्य का हालचाल पूछने और हमदर्दी जताने का शिष्टाचार निभाने में सियासी पार्टियां कोई कोताही नहीं कर रहीं मगर अम्मा के भविष्य में सक्रिय रहने पर सवाल कर रहे हैं। प्रमुख विपक्षी दल डीएमके ने जयललिता के स्वास्थ्य पर कई सवाल खड़े किए हैं। द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) प्रमुख एम. करुणानिधि ने कहा है कि कई दिनों से अस्पताल में भर्ती जयललिता कैसे राज्यपाल को यह सलाह दे सकती हैं कि उनके सारे विभाग के कामकाज पनीरसेल्वम को सौंपे जाएं? जयललिता के सभी पोर्टफोलियो फाइनेंस मिनिस्टर ओ. पनीरसेल्वम को सौंप दिए गए हैं जिन्हें जयललिता का विश्वासपात्र माना जाता है। करुणानिधि ने सवाल किया कि जब कोई अस्पताल में जयललिता से मिल नहीं सकता तो राज्यपाल विद्या सागर राव ने यह कैसे तय कर लिया कि पनीरसेल्वम जयललिता का काम संभालेंगे? क्या मुख्यमंत्री ने अपने सभी पोर्टफोलियो पनीरसेल्वम को ट्रांसफर करने की सलाह देने वाले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं या नहीं? 20 दिन से ज्यादा समय से चेन्नई स्थित अपोलो हॉस्पिटल में एडमिट तमिलनाडु की सीएम जे. जयललिता के स्वास्थ्य को लेकर हॉस्पिटल अधिकारियों ने अब तक कई मेडिकल बुलेटिन जारी किए हैं, हालांकि इनमें जयललिता की बीमारी का पूरा खुलासा नहीं किया, बस सीमित खुलासा ही किया है। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता इस कोशिश में है कि अगर जया की हालत में सुधार है तो फिर राज्य सरकार सार्वजनिक रूप से कोई बयान क्यों नहीं जारी करती? तमिलनाडु के राज्यपाल, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री एम. वेंकैया नायडू, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित कई नेताओं को अपोलो अस्पताल जाने पर जयललिता को देखने या उनसे मिलने नहीं दिया गया। जिस तरह से जयललिता के स्वास्थ्य को लेकर अटकलों का दौर जारी है, आने वाला समय एआईडीएमके के लिए चुनौती भरा हो सकता है। मेडिकल बुलेटिन पहले ही बहस का विषय बना हुआ था, अब सीएम की सलाह पर विभाग आवंटन पर करुणानिधि ने सवालिया निशान लगाकर मामले को गंभीर बना दिया है। जाहिर है कि डीएमके चीफ किसी गड़बड़ी का इशारा कर रहे हैं। जया की स्पष्ट सूचना जारी किए बगैर राज्य सरकार के लिए इससे निपटना आसान नहीं होगा। चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती जयललिता के स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों की एक टीम लगातार निगरानी रखे हुए है। अपोलो अस्पताल की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार सुश्री जयललिता को श्वसन संबंधी आवश्यक उपकरण, एंटीबायटिक दवाएं, पोषण सहायक चिकित्सा और फिजियोथैरेपी भी दी जा रही है।

-अनिल नरेन्द्र

बौखलाई शरीफ सरकार आतंकियों को भूल पत्रकारों के पीछे पड़ी

आतंकियों को संरक्षण देने के कारण आज पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ने से बौखलाए पाकिस्तान का अब सारा गुस्सा मीडिया पर उतारू है। आतंकियों को हर संभव समर्थन देने को लेकर नवाज शरीफ सरकार और पाक सेना के बीच तीखे मतभेद की खबर लिखने वाले डॉन अखबार के वरिष्ठ पत्रकार सिरिल अलमीडा के पाकिस्तान से बाहर जाने पर पाक सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। द डॉन के स्तम्भकार और संवाददाता सिरिल ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें बताया गया है कि उन्हें निकास नियंत्रण सूची में रखा गया है। यह पाकिस्तान सरकार की सीमा नियंत्रण की व्यवस्था है। इसके तहत सूची में शामिल लोगों को देश छोड़ने से रोका जाता है। अलमीडा ने कहा कि उन्होंने लंबे समय पहले से विदेश यात्रा की योजना बनाई हुई थी। अब से कम से कम कई माह पहले की योजना। कई ऐसी चीजें हैं, जिन्हें मैं कभी माफ नहीं कर सकता। नवाज सरकार ने इस प्रतिबंध पर आधिकारिक तौर पर तो कोई बयान नहीं दिया है लेकिन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के अधिकारियों ने कहा कि वे इस मनगढ़ंत कहानी छापने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। बता दें कि सिरिल अलमीडा ने एक रिपोर्ट में बताया था कि एक अहम बैठक में सैन्य और असैन्य नेतृत्व के बीच संदिग्ध दरार दिखाई दे रही है। इस बैठक में ताकतवर खुफिया एजेंसी आईएसआई को कहा गया था कि आतंकी समूहों को उसकी ओर से समर्थन दिए जाने से पाकिस्तान वैश्विक रूप से आज दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। एक हफ्ते पहले अलमीडा ने द डॉन में पहले पन्ने पर लिखी इस खबर में आगे लिखा था कि दरार की मूल वजह वे आतंकी समूह हैं, जो पाकिस्तान सेना के संरक्षण में फल-फूल रहे हैं और भारत-अफगानिस्तान में आतंकी हमले करते रहते हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख राहिल शरीफ के दबाव के बाद नवाज सरकार ने यह कदम उठाया है। अलमीडा पर  लगे प्रतिबंध के खिलाफ पाकिस्तान का पूरा मीडिया एकजुट हो गया है और सरकार के इस कदम का विरोध कर रही है। सिरिल पर देश छोड़ने पर रोक लगाकर पाकिस्तान ने अपनी मुसीबत और बढ़ा ली है। विश्व समुदाय के बीच पहले से ही बदनाम पाकिस्तान अब अंतर्राष्ट्रीय समाचार माध्यमों में इस कारण से चर्चा में है कि उसने किसी अपराधी-आतंकी के देश छोड़ने पर पाबंदी लगाने के बजाय एक पत्रकार को एग्जिट कंट्रोल लिस्ट में डाला। अखबार के संपादक की ओर से सिरिल के समर्थन में कहा गया कि उन्होंने जो भी लिखा उसकी सत्यता की जांच-परख की गई थी। पाकिस्तानी मीडिया का एक धड़ा भी सिरिल अलमीडा के खिलाफ खड़ा दिख रहा है। एक अखबार ने तो यहां तक लिख दिया कि वह भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंट हैं। हम अपने पाकिस्तानी भाई पत्रकार सिरिल के साथ खड़े हैं और पाक सरकार के इस कदम की निन्दा करते हैं।

Friday, 14 October 2016

स्ट्राइक लंबी स्ट्रैटेजी के तहत हुई, आगे भी यह चलती रहेगी

भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक ठीक वैसे ही हुई जैसा देश उम्मीद कर रहा था। हमारी सर्जिकल स्ट्राइक आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तान के जनरलों व जेहादी सरगनाओं के दिमाग को भी टारगेट कर रही है। उड़ी हमले के बाद भारत के डीजीएमओ जनरल रणबीर Eिसह ने कहा था कि हम जवाबी कार्रवाई जरूर करेंगे। लेकिन जगह और वक्त हम तय करेंगे। ये हमला उसी रणनीति का सफल नतीजा है। नियंत्रण रेखा के आसपास इस तरह के हमलों के प्लान हमारी सेना के पास हमेशा होते हैं। सेना को आतंकी ठिकानों, लांचिंग पैड की पूरी जानकारी है। यह सर्जिकल स्ट्राइक हमें लगता है कि लंबी स्ट्रैटेजी के तहत की गई और अभी ये आगे भी चलती रहेगी। हाल में हमारी पोलिटिकल लीडरशिप ने पाकिस्तान के खिलाफ खुलकर बयान दिए और सेना को जवाबी कार्रवाई करने की खुली छूट दी उससे सेना को बल मिला है। जहां तक पाकिस्तान की बात है तो वह हमेशा से इंकार करता आ रहा है कि उसने कभी आतंकवाद का साथ दिया है। वह तो यह भी नहीं मानता कि इन सब कारणों से उसका कभी नुकसान हुआ। पाकिस्तान का यह रवैया नया नहीं है। यही वजह है कि पाकिस्तान मना कर रहा है कि ऐसी कोई स्ट्राइक हुई है। एलओसी पर जो लांचिंग पैड हैं, दरअसल वो पाक सेना के कैंप हैं। वहीं आतंकियों को पनाह मिलती है। इस स्ट्राइक से नुकसान सिर्प आतंकियों को ही नहीं, पाकिस्तानी सेना के जवानों को भी हुआ है। गुलाम कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भले ही आतंकी पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में भाग गए हों, लेकिन वे वहां भी ज्यादा दिन तक सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब पाकिस्तान के भीतर कर्वट आपरेशन (खुफिया कार्रवाई) कर भारत के दुश्मनों को खत्म करने की तैयारी में हैं। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पाकिस्तान के भीतर मजबूत नेटवर्प तैयार कर लिया गया है और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल कर्वट आपरेशन के लिए किया जा सकता है। दरअसल मोदी सरकार के सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले के बाद सुरक्षा एजेंसियों के हौसले बुलंद हैं। उन्हें विश्वास है कि पाकिस्तान के भीतर देश के दुश्मनों को खत्म करने के लिए सरकार कर्वट आपरेशन को हरी झंडी दे देगी। पहले सरकार ऐसे अपराधियों और आतंकियों के डोजियर पाकिस्तान को थमा कर चुप बैठ जाती थी। यही कारण है कि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के संरक्षण में आतंकी आकाओं के हौसले लगातार बढ़ते चले गए। मोदी सरकार के आने के बाद पाकिस्तान को डोजियर देने का सिलसिला बंद हुआ और अब सर्जिकल स्ट्राइक कर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। कर्वट आपरेशन दुश्मनों के खिलाफ एक खुफिया कार्रवाई है। इसमें दुश्मन की प्रत्येक हरकत पर नजर रखी जाती है। इन आपरेशनों की खास बात यह है कि मिशन खत्म होने के बाद भी हमलावरों की पहचान का पता नहीं चलता।

-अनिल नरेन्द्र

गिरता अमेरिकी राष्ट्रपति उम्मीदवारों की बहस का स्तर

अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव अगले महीने होना है। प्रचार अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। दोनों उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी-अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में रविवार को दोनों के बीच दूसरी प्रेजिडेंशियल डिबेट पहली वाली डिबेट से ज्यादा स्तरहीन रही। अमेरिका में इस बार का चुनाव इस मायने में ऐतिहासिक कहा जा सकता है क्योंकि यहां पहली बार कोई महिला राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी बनी हैं। पर दुर्भाग्य से कहा जाएगा कि यह चुनाव और डिबेट एक मायने में अभूतपूर्व हैं कि वहां महिलाओं की जैसी बेइज्जती इस बार हो रही है वैसी न सिर्प अमेरिका के बल्कि किसी भी देश के चुनाव में अब तक नहीं हुई थी। 90 मिनट की इस दूसरी डिबेट में माना जा रहा है कि हिलेरी क्लिंटन का पलड़ा भारी रहा। नफरत से भरे माहौल में दोनों उम्मीदवारों ने एक-दूसरे पर निजी हमलों की बौछार लगा दी। शब्दों के साथ-साथ शारीरिक हावभाव से भी एक-दूसरे को लेकर अपनी नापसंदी का इजहार करने में कोई कोताही नहीं बरती। अश्लील टिप्पणियों के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहे डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति और हिलेरी के पति बिल क्लिंटन को ढाल बनाने की कोशिश की। बिल के प्रेम-प्रसंगों का जिक्र करते हुए उन पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को महिलाओं का शिकारी और सबसे खराब शोषक बताया। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया के सबसे ताकतवर राजनीतिक पद के एक घोषित उम्मीदवार पर अहंकारी, नस्लवादी और महिला विरोधी होने के जितने आरोप हैं, उतनी ही तेजी से अपने नए बयानों के जरिये वह इन आरोपों की पुष्टि भी करते जा रहे हैं। दूसरे दौर की बहस के ठीक पहले ट्रंप की अतीत में कही गई कुछ घोर महिला विरोधी बातें मीडिया में आ गईं। स्वाभाविक ही यह मसला बहस में उठा। मगर इसका खंडन करने या इन पर अपना पक्ष रखने की बजाय ट्रंप ने इसके जवाब में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ हमला बोल दिया। आरोप हिलेरी क्लिंटन पर भी कम गंभीर नहीं हैं, लेकिन रणनीति शायद उनकी भी वही है कि अपने ऊपर लगे आरोपों के बचाव के लिए विपक्षी पर ही हमला बोला जाए। हिलेरी और ट्रंप के बीच दूसरी बहस ट्विटर पर छाई रहीं। 1.70 करोड़ से ज्यादा लोगों ने ट्वीट किया। ट्विटर के प्रवक्ता ने बताया कि यह अभी तक का सबसे ज्यादा बार ट्वीट किया गया प्रेजिडेंशियल डिबेट है। 64 प्रतिशत ने ट्रंप पर और 36 प्रतिशत ने हिलेरी के बारे में चर्चा की। बहस के बाद सीएनएन/ओआरसी की ओर से कराए गए सर्वे में 57 प्रतिशत लोगों ने हिलेरी को और 34 प्रतिशत ने ट्रंप को विजेता माना। गौरतलब है कि 27 सितम्बर को पहली डिबेट के बाद सीएनएन के सर्वे में 62 प्रतिशत लोगों ने हिलेरी को विजेता माना था।

Thursday, 13 October 2016

Stop terrorism, and false teaching of Lashkar to children

Pakistani rulers denying all claims of surgical strike from India are now being exposed by their own public. First the villagers located at the LoC told the Indian press about the operation, and now the residents of the entire POK and Gilgit have come on road to witness that how their area has turned into the centre of Pakistani terrorist activities. Recently residents of POK have demonstrated in Muzaffarabad expressing anger against the pro-terrorist Pakistan Government and Pak Army. Residents of Muzaffarabad, Kateli, Chinari, Mirpur, Gilgit, Daimar and Neelam valley in POK fiercely demonstrated on last Thursday raising anti-government slogans. They openly told that their life has become a hell due to these terrorist camps. They are bound to live a miserable life due to these camps. Demonstrators raised slogans against the Nawaz Sharief Government. They were shouting slogans like ‘Stop terrorism, Stop false teachings about Lashkar to children’. They alleged that Pakistan is teaching the lesson of terrorism to the children here. People from Pakistan are opening Madrasas in POK, in which children are taught a lesion to become a terrorist. It should be banned. Taliban and terrorists have camps here, which should be closed down. A local resident of Gilgit told that if the authorities don’t close down the Talibani terrorist camps, we ourselves will take action to ruin those. In Daimar, Gilgit, Baseen and many more such areas general public is prohibited due to the presence of terrorist camps. The way the public there have openly come on roads against the terror policy of Pak Government and Army, it confirms the allegation of India that terrorists in large numbers are mobilized to infiltrate into India from POK. People in large number in POK had also tried to round up the Pak Government on the development issue by holding a procession two month ago. Indian security agencies have been consistently reporting how the movements of terrorists have risen recently on LoC. The news has flashed like a fire in the entire area that now everyone is aware of the loss to terrorist camp and their launch pad. Our Armed Forces have suggested the Government that the terror infrastructure in POK can be destroyed in a well-to-do manner only by running the campaign for continuous six months.

* Anil Narendra

 

 

हर साल 92,600 करोड़ के खाद्य उत्पाद की बर्बादी

अकसर हमसे कहा जाता है कि खाना बर्बाद होने से बचाएं। हमें उन बच्चों के बारे में भी सोचने को कहा जाता है जो हर दिन भूख से तड़प कर जान दे देते हैं। क्या आप जानते हैं कि भारत हर दिन खाने लायक खाना पैदा तो करता है पर फिर भी लाखों लोग भूखे सोने को मजबूर हैं। एक सरकारी स्टडी में सामने आया है कि भारत में हर साल 67 लाख टन खाना बर्बाद होता है। कृषि मंत्रालय की क्राप रिसर्च यूनिट सिफेट ने यह स्टडी की है। भारत में हर साल जितना खाना बर्बाद होता है वह ब्रिटेन के राष्ट्रीय उत्पाद से ज्यादा है। इतना खाना तो इजिप्ट जैसे देश के लिए सालभर के लिए काफी होता है। यह स्टडी देश में 14 एग्रीकल्चरल जोन के 120 जिलों में की गई है। इसके अनुसार बर्बाद हुए खाने का मूल्य 92 हजार करोड़ रुपए है। यह रकम भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के तहत खर्च की जाने वाली रकम का दो-तिहाई है। स्टडी के मुताबिक फल, सब्जियां और दालें सबसे ज्यादा बर्बाद हुईं। इसके अनुसार खाद्यान्नों का सड़ना, कीट, मौसम और स्टोरेज की कमी बर्बादी के सबसे बड़े कारण हैं। फसलों की बात करें तो 10 लाख टन प्याज खेतों से मार्केट में आने के दौरान रास्ते में ही बर्बाद हो गई। वहीं 22 लाख टन टमाटर भी रास्ते में खराब हो गया। इस बर्बादी को रोकने के लिए कोल्ड स्टोरेज निर्माण और किसानों को प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है। स्टडी के मुताबिक हर आपरेशन और स्टेज में कुछ नुकसान होता है। इस तरह कृषि उत्पादों की बड़ी मात्रा थाली तक नहीं पहुंच पाती है। यह स्टडी दो साल पहले मिली जानकारी को अपडेट करने के लिए कराई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य सामग्री को बाजार तक पहुंचने में कई चरणों से गुजरना पड़ता है। हर कदम पर कुछ न कुछ नुकसान होता है। बर्बाद होने के प्रमुख कारण हैं किसानों, व्यापारियों द्वारा ढंग से चीजों को न संभालना। मौसम की मार झेलने वाले स्टोरेज और सप्लायर के पास कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होना। इसे रोकने के लिए तत्काल कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे। भंडारण की पुरानी विधियों की जगह आधुनिक तरीकों की ट्रेनिंग देनी होगी। कोल्ड स्टोरेड की संख्या बढ़ाना अति आवश्यक है। 12वें भारत-अमेरिका आर्थिक सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहाöअनगिनत चुनौतियों के बावजूद भारतीय किसान भारत की 1.3 अरब जनता को खिलाने के लिए पर्याप्त अन्न पैदा कर रहे हैं। दुर्भाग्यवश खाद्य प्रौद्योगिकी में यह गति नहीं देखी गई है। इसे कम करने के लिए उद्योगों को किसानों के साथ साझेदारी करनी चाहिए। इससे हमारे उत्पादों की गुणवत्ता में न केवल सुधार ही आएगा बल्कि हमारे किसानों के लिए अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी और यह बर्बादी कम होगी।

-अनिल नरेन्द्र

चीन से मिले जंगी हथियारों के दम पर अकड़ता पाकिस्तान

पिछले पांच सालों में चीन ने पाकिस्तान को अमेरिका की तुलना में तीन गुना ज्यादा हथियार बेचे हैं। पाकिस्तान ने चीन से लगभग 70 प्रतिशत हथियार खरीदे हैं और अमेरिका से सिर्प 19 प्रतिशत। एक दशक पहले पाकिस्तान को हथियार बेचने में अमेरिका और चीन की हिस्सेदारी लगभग बराबर थी, क्रमश 39 और 38 प्रतिशत। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अब भी हथियारों के मामले में पाकिस्तान भारत से बहुत पीछे है। पाकिस्तान ने हाल ही में चीन से कई हथियार खरीदे हैं। पिछले महीने पाक ने चीन से आठ पनडुब्बियां खरीदीं। यह सौदा 33 हजार करोड़ रुपए का था। 250 से 300 जेएफ-17 विमान दोनों मिलकर पाक एयरफोर्स के लिए बना रहे हैं। 25 हजार टन वाले जुल्फिकार श्रेणी के चार युद्ध पोत चीन से खरीदे हैं। 560 टन वाले अजमत श्रेणी के चार छोटे युद्ध पोत। 600 खालिद टैंक खरीदे हैं जो चीन के टाइप 90-2 जैसे हैं। 9 एचक्यू-16 मिसाइल सिस्टम, जमीन से हवा में मारने में यह सक्षम हैं। चार अवॉक्स (एयरबोर्न वार्निंग सिस्टम)। पिछले चार साल में पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सुरक्षा सहयोग राशि में 73 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं अमेरिका ने सब्सिडी पर आठ एफ-16 विमान भी देने से इंकार कर दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा चीन अमेरिका सहित पश्चिमी देशों को कई मोर्चों पर चुनौती दे रहा है। पर साथ ही पाकिस्तान के जरिये या सीधे भारत को असंतुलित रखना चाहता है। अमेरिका और रूस के बाद चीन हथियारों का तीसरा बड़ा निर्यातक देश है। वैश्विक हथियार निर्यात में उसकी हिस्सेदारी 5.9 फीसदी है जो 2010 में 3.6 प्रतिशत थी। हथियार निर्यात में चीन, अमेरिका और रूस की हिस्सेदारी बढ़ रही है। पाकिस्तान को हथियार बेचने के पीछे चीन का मकसद पैसा कमाना नहीं है। वह पाकिस्तान की सैन्य शक्ति को भारत के बराबर खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। पिछले पांच साल के दौरान जो हथियार पाकिस्तान को दिए हैं, उनमें ज्यादातर फ्रेंडली प्राइस पर हैं। मकसद साफ है कि जो हथियार चाहिए हमसे लो, हम उचित दाम लगा देंगे। जम्मू-कश्मीर में सेना और सुरक्षाबलों पर हो रहे ताजा हमलों में चीन के हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आतंकी चीन निर्मित ग्रेनेड दाग रहे हैं। पाकिस्तानी सेना एलओसी और बार्डर रिहायशी इलाकों में चीन के मोर्टार दाग रही है। एजेंसियों ने इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को भी सूचित किया है। सूत्रों के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक के बाद लश्कर--तैयबा, जैश--मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन ने हाथ मिला लिया है। कटु सत्य तो यह है कि पाकिस्तान चीन से मिले हथियारों के दम पर अकड़ रहा है। चीन ही पाकिस्तान का एक मित्र बचा है।