Thursday, 2 April 2026

दुबई को चुकानी पड़ी सबसे बड़ी कीमत

यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात को बनाने में 40 वर्ष लगे और तबाह होने में मुश्किल से 10 दिन ही लगे। दुबई जो दुनिया के सबसे आधुनिक शहरों में से एक माना जाता था, सुरक्षित माना जाता था जो दुनिया का नया हब बन गया था उसको ईरान ने ऐसा तबाह किया कि वह इतने पीछे चला गया कि अब उसे वर्षें लगेंगे उसी स्थिति में पहुंचने पर। अमेरिका-इजरायल के साथ जंग के बीच ईरान लगातार खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है। एक खास बात सामने आई है कि ईरान सबसे ज्यादा यूएई को निशाना बना रहा है। जिस दिन से (29 फरवरी) जंग शुरू हुई तब से ईरान ने 1714 ड्रोन, 334 बैलिस्टिक मिसाइल दागकर तबाही की इबारत लिख दी है। आखिर ईरान दुबई, आबू धाबी पर लगातार हमले क्यों कर रहा है? अमेरिका-इजरायल-ईरान की इस जंग में ईरान ने हमलों में दुबई के आलीशान होटल, रिफाइनरी, एयरपोर्ट और प्रमुख कॉमर्शियल जोन को काफी प्रभावित किया है। आखिर दुबई को तबाह करने के पीछे ईरान की रणनीति क्या है? क्या इसका कारण सिर्फ इतना है कि अमेरिका वहां से अपने सैन्य अ़ड्डे संचालित करता है? या इन हमलों के पीछे ईरान के कुछ और इरादे हैं? तो इसका जवाब हथियारों से ज्यादा इकोनॉमिक्स और इंवेस्टमेंट के आसपास घूमती है। दरअसल दुबई वाशिंगटन की वह कमजोर नस है, जिसे दबाते ही दर्द सीधे ट्रंप को व्हाइट हाउस में बैठे होने लगता है। मागा (मेक अमेरिका ग्रेट आगेन) के नाटो के साथ डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी सत्ता में दूसरी बार वापसी हुई। जबसे वे सत्ता में लौटे हैं, उनका पूरा फोकस अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने और बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश खींचने पर रहा है। व्हाइट हाउस के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में अमेरिका को अगले दस वर्षों में निवेश के लिए 5.2 ट्रिलियन डॉलर की विदेशी कमिटमेंट्स मिली है तो इस 5.2 ट्रिलियन डॉलर में से सबसे बड़ा हिस्सा यूएई इनवेस्ट कर रहा है। अकेले 1.4 ट्रिलियन डॉलर (यानी कुल निवेश का 27 प्रतिशत) सिर्फ यूएई ने वादा किया है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो यूएई अमेरिका के लिए कमजोर कड़ी बन गया है। ईरान अच्छी तरह जानता है कि अगर दुबई पर मिसाइलें गिरेंगी तो वहां की अर्थव्यवस्था डगमगाएगी और अगर दुबई की अर्थव्यवस्था हिली तो अमेरिका में आने वाले 1.4 ट्रिलियन डॉलर का वह निवेश सीधे तौर पर खतरे में पड़ जाएगा, जिस पर ट्रंप अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। ईरान का निशाना सिर्फ अमेरिका में जाने वाला दुबई का पैसा नहीं है, बल्कि ग्लोबल इंवेस्टमेंट हब के रूप में दुबई और यूएई की पहचान तबाह करना है। दुबई जो आर्थिक, डिजिटल और मीडिया हब रहा है, इस युद्ध में बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मुख्य शेयर सूचकांक एडीएक्स जनरल में पिछले महीने में 11.42 प्रतिशत की गिरावट आई है। हवाई क्षेत्र बंद हेने और उड़ानों के रद्द होने से पर्यटन और एविएशन सेक्टर में दुबई को करीब 9 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। यूएई सरकार और मीडिया ने देश को सुरक्षित जगह वाली छवि बनाएं रखने की कोशिश की। राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि सब कुछ नियंत्रण में है और देश हर खतरे से निपटने के लिए तैयार है। साथ ही अटानी जनरल हमाद सैफ अल शम्सी ने हमलों की तस्वीरें और वीडियो साझा करने की सख्त चेतावनी दी। इस आदेश के तहत कई विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया, जिस पर कम से कम एक साल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। ईरान दुनिया को यह कड़ा संदेश दे रहा है कि युद्ध के मैदान से हजारों किलोमीटर दूर बैठकर भी वह अमेरिका की दुखती आर्थिक नस को काट सकता है। हर ड्रोन हमला, मिसाइल स्ट्राइक दुबई और यूएई और खाड़ी देशों की उस सुरक्षित और स्थिर छवि पर एक करारा प्रहार है, जिसे उन्होंने सालों के रिफार्म और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर बनाया है। -अनिल नरेन्द्र

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