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Tuesday, 14 April 2026

जिसका डर था वही हुआ

अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो गई है। वार्ता बेनतीजा ही खत्म हो गई है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच पहले दो राउंड में 21 घंटे से ज्यादा शांति को लेकर बातचीत चली, लेकिन यह बेनतीजा रही। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ अमेरिका के लिए रवाना भी हो गए। वेंस जाने से पहले बोले- समझौता न होने के लिए बुरी खबर ः वेंस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि समझौता न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका बिना किसी डील के ही लौट रहा है। किसी भी समझौते के लिए जरूरी है कि ईरान ये वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। सीजफायर डील में अमेरिका की ओर से जेडी वेंस (उपराष्ट्रपति), स्टीव विटकॉफ (विशेष दूत), जेरेड कुशकर (सीनियर एडवाइजर और ट्रंप के दामाद) और ब्रैड कूपर (सैन्य अधिकारी शामिल हुए। ईरान की तरफ से मोहम्मद बागेर गालिबाफ (संसद अध्यक्ष), अब्बास अराघची (विदेश मंत्री) और मजीद तख्त खांची (उप-विदेश मंत्री) शामिल हुए। वार्ता में पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आसिम मलिक शामिल हुए। ईरान से 71 सदस्यीय डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंचा। इस टीम में सिर्फ बातचीत करने वाले लोग ही नहीं थे बल्कि एक्सपर्ट सलाहकार, मीडिया प्रतिनिधि, डिप्लोमेट और सुरक्षा से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। ईरानी संसद के स्पीकर बागेर गलिबाफ जिस विमान से आए, वह बहुत खास था। वह पूरी दुनिया को अमेरिका का सितम दिखाने के लिए पाकिस्तान सुबूत लेकर आए थे। उनके साथ ऐसे यात्री भी आए जो इस दुनिया में अब नहीं हैं। दरअसल, इस विमान में बागेर गालिबाफ के साथ पाकिस्तान आने वाले दो बच्चे हैं। जो अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में अपनी जान गंवा चुके हैं। प्लेन की सीटों पर उन नन्हें बच्चों की तस्वीर रखी हुई थी। गालिबाफ ने वार्ता से पहले यह तस्वीर शेयर की जिसमें विमान की सीटों पर चार बच्चों की तस्वीरें रखी दिखाई देती थी, जिसके साथ एक-एक स्कूल बैग और फूल भी रखा गया था। ईरानी शहर मिनाब के स्कूल में 28 फरवरी को एक प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ था। इसमें 168 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें 160 स्कूली लड़कियां थीं। गालिबाफ ने वार्ता से पहले दिए बयान में कहा था कि उनका देश बातचीत और समझौते के लिए तैयार है। लेकिन इसके लिए अमेरिका को ईमानदारी से समझौते की पेशकश करनी होगी और ईरान के अधिकारों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के पास सद्भावना है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता शुरू होने से पहले ही कहा कि वाशिंगटन ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगाने की इजाजत नहीं देगा। ट्रंप ने आगे कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द ही फिर से खुल जाएगा, चाहे ईरान सहयोग करे या न करे। ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में उनका मुख्य ध्यान तेहरान की परमाणु क्षमताओं को सीमित करने पर होगा। उन्होंने कहा, कोई परमाणु हथियार नहीं। यही 99 प्रतिशत बात है। वार्ता तो फेल होनी ही थी। दोनों पक्षों की मांगों में बहुत बड़ा फासला था जिसे पाटना मुश्किल ही नहीं असंभव था।

-अनिल नरेन्द्र

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