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Saturday, 13 February 2021

एलएसी पर टेंशन कम करने की शुरुआत

पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तनाव घटाने की दिशा में भारत और चीन ने अहम कदम उठाया। सेना के सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों की ओर से तैनात किए गए टैंकों में कुछ कमी की गई है। इससे एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर जारी टेंशन में कमी आएगी, क्योंकि दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के टैंकों की रेंज में थे। इससे पहले चीन ने कहा कि पैंगोंग झील के दक्षिणी और उत्तरी किनारे में चीन और भारत के फ्रंटलाइन पर तैनात सैनिकों को पीछे करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि पैंगोंग झील के दक्षिणी और उत्तरी किनारे से भारतीय और चीनी सैनिक पीछे हट रहे हैं? बेशक पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुयल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीनी सैनिकों के बीच पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन यह अभी बस शुरुआत है और गतिरोध पूरी तरह खत्म होने में लंबा वक्त लगेगा। फ्रंटलाइन पर अभी भी सैनिक तैनात हैं और पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे अहम चोटियों पर भारतीय सैनिक अभी भी मौजूद हैं। बता दें कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि बुधवार को चीन और भारत के फ्रंटलाइन पर तैनात सैनिकों के बीच पैंगोंग झील के दक्षिण और उत्तरी किनारे में डिसगेंजमेंट प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि भारतीय सूत्रों के मुताबिक दोनों तरफ तैनात किए गए टैंकों में ही कमी की गई है लेकिन फ्रंटलाइन पर सैनिक अभी भी तैनात हैं। सूत्रों के मुताबिक भारत-चीन के बीच कोर कमांडरों की मीटिंग में इस पर काफी हद तक सहमति बन गई थी कि पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे यानि फिंगर एरिया में चीनी सैनिक फिंगर-8 से पीछे चले जाएंगे और भारतीय सैनिकों को फिंगर-3 से पीछे जाना होगा। करीब 8-10 महीने तक फिंगर-4 से फिंगर-8 का एरिया नो पेट्रोलिंग जोन रहेगा। सूत्रों के मुताबिक चीन की तरफ से कहा गया कि चीनी सैनिक भले ही फिंगर-8 के पीछे चले जाएंगे लेकिन वह फिंगर-4 तक पेट्रोलिंग करते रहेंगे और पेट्रोलिंग का अधिकार नहीं छोड़ेंगे। पेट्रोलिंग को लेकर क्या तय हुआ है, इस पर अभी कोई खुलकर बात नहीं कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक अभी पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हुई है और जैसे-जैसे यह आगे बढ़ेगी तब कई चीजें साफ होंगी। हमें इन चीनियों पर कोई यकीन नहीं है पर अगर यह वास्तव में ही पीछे हटने पर सहमत हो गए हैं तो यह भारत की बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। महीनों से चला आ रहा गतिरोध धीरे-धीरे संयम में टूट रहा है। यह अच्छी बात है। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया ईमानदारी से आगे बढ़ाएगा चीन।

महुआ मोईना के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस?

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस की फायर ब्रांड सांसद महुआ मोईना द्वारा जबरदस्त भाषण में उन्होंने मोदी सरकार को धो कर रख दिया। यह भाषण इतना तीखा था कि लोकसभा में मौजूद सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद तिलमिला उठे। अपने भाषण के दौरान महुआ मोईना ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लेकर भी टिप्पणी की थी। इसका भाजपा सदस्यों और सरकार की ओर से विरोध किया गया। संसदीय कार्यमंत्री (राज्य) अर्जुन मेघवाल ने उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि इस प्रकार का उल्लेख नहीं किया जा सकता। इस पर पीठासीन, सभापति एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि अगर महुआ मोईना की बात में कुछ आपत्तिजनक पाया जाता है तो उसे रिकॉर्ड में नहीं रखा जाएगा। पर बात यहीं खत्म नहीं हुई। संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि टिप्पणी को लेकर महुआ के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है। लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोईना ने परोक्ष रूप से बाकी बातों के साथ-साथ पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर सदन में काफी हंगामा हुआ था। सरकार के मंत्रियों व भाजपा सांसदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की थी। बाद में सरकार के संकेत भी कार्रवाई के थे। लेकिन मंगलवार को यह मामला ठंडा दिखा। सरकार की तरफ से फिलहाल किसी तरह की कार्रवाई के संकेत नहीं मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार संसदीय कानूनों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव में नफा-नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। भाजपा नहीं चाहती कि किसी तरह की कार्रवाई से तृणमूल कांग्रेस को ऐसे नाजुक समय में कोई सियासी फायदा हो। महुआ मोईना का भाषण यूट्यूब पर मौजूद है।

पाक शह पर चली न्यूयॉर्क असेंबली

न्यूयॉर्क असेंबली में हर साल पांच फरवरी को कश्मीर-अमेरिका दिवस मनाने का प्रस्ताव पास किया गया है। न्यूयॉर्क स्टेट गवर्नर एंड्रयू क्योमो ने स्टेट असेंबली में हर पांच फरवरी को जम्मू-अमेरिका दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे पास कर दिया गया है। बता दें कि पांच फरवरी को पाकिस्तान भी कश्मीर दिवस मनाता है और जैसे ही न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में कश्मीर-अमेरिका दिवस मनाने का प्रस्ताव पास किया गया ठीक वैसे ही न्यूयॉर्क स्थित पाकिस्तानी राजदूत ने ट्वीट करते हुए कहा है कि प्रस्ताव पास होने के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। इस प्रस्ताव को असेंबली के सदस्य नादर सायेघ और 12 अन्य सदस्यों ने प्रायोजित किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि कश्मीरी समुदाय ने हर कठिनाई को पार किया है, दृढ़ता का परिचय दिया है और अपने आपको न्यूयॉर्क प्रवासी समुदायों के एक स्तम्भ के तौर पर स्थापित किया है। इसमें कहा गया है कि न्यूयॉर्क राज्य विविध सांस्कृतिक, जातीय एवं धार्मिक पहचानों को मान्यता देकर सभी कश्मीरी लोगों की धार्मिक, आवागमन एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समेत मानवाधिकारों का समर्थन करने के लिए प्रयासरत है। वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास के एक प्रवक्ता ने इस प्रस्ताव पर टिप्पणी की कि हमने कश्मीर अमेरिका दिवस संबंधी न्यूयॉर्क असेंबली का प्रस्ताव देखा है। अमेरिका की तरह भारत भी एक जीवंत लोकतांत्रिक देश है और 1.35 अरब लोगों का बहुलवादी लोकाचार गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत जम्मू-कश्मीर समेत अपने समृद्ध एवं सांस्कृतिक ताने-बाने और अपनी विविधता का उत्सव मनाता है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जिसे अलग नहीं किया जा सकता। हम लोगों को विभाजित करने के लिए जम्मू-कश्मीर के समृद्ध एवं सामाजिक ताने-बाने को गलत तरीके से दिखाने की निहित स्वार्थों की कोशिश को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं। प्रवक्ता ने प्रस्ताव संबंधी प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि हम भारत-अमेरिका साझेदारी और विविधता भरे भारतीय समुदाय से जुड़े सभी मामलों पर न्यूयॉर्क स्टेट में निर्वाचित प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। यह प्रस्ताव तीन फरवरी को न्यूयॉर्क असेंबली में पारित किया गया था, जिसमें वुयोमो से पांच फरवरी, 2021 को न्यूयॉर्क राज्य में कश्मीर अमेरिका दिवस घोषित करने का अनुरोध किया गया है। न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के महावाणिज्य दूतावास ने इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए सायेघ और द अमेरिकन पाकिस्तानी एडवोकेसी ग्रुप की सराहना की। -अनिल नरेन्द्र

Thursday, 11 February 2021

यह किसानों की पूंजीपतियों से आजादी की लड़ाई है

केन्द्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बहादुरगढ़, दिल्ली बार्डर पर स्थित टिकरी में धरने में बैठे एक और किसान ने रविवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया कि किसान ने एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें केन्द्र सरकार के खराब रवैये से परेशान होने की बात लिखी गई है। उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान हरियाणा के जींद जिले के सिंगवाल के निवासी 52 वर्षीय कर्मवीर सिंगवाल के रूप में की गई है। उन्होंने बताया कि बीती रात ही वह अपने गांव से टिकरी बार्डर पहुंचा था। पुलिस ने बताया कि कर्मवीर ने रविवार को बहादुरगढ़ के बाईपास स्थित नए बस स्टैंड के पास एक पेड़ पर प्लास्टिक की रस्सी का फंदा लगाकर जान दे दी। बीकेयू नेता राकेश fिटकैत रविवार को भिवानी के कितलाना में संयुक्त मोर्चा की ओर से आयोजित किसान रैली में पहुंचे। इस मौके पर टिकैत ने कहा कि कृषि कानूनों को रद्द न होने पर अनाज को रुपए की तरह से संभाल कर तिजोरी में रखना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब तक तीनें कृषि कानून वापस नहीं हो जाते तब तक हमारी घर वापसी नहीं होगी। यह किसानों की पूंजीपूतियों से आजादी की लड़ाई है। टिकैत ने कहा कि कुछ नेताओं ने किसानों को सिख और गैर-सिख में बांटने की कोशिश की। लेकिन वे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए। अब हरियाणा और पंजाब के लोग संगठित हो गए है। खास सिस्टम मजबूत है और आज इसकी जरूरत भी है। टिकैत ने कहा कि तीनों कानून वापस लिए जाएं और एमएसपी पर कानून बनाया जाए और गिरफ्तार किसानों को रिहा किया जाए। जब तक सरकार इन तीनों कानूनों को वापस नहीं लेती तब तक ये आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा यह जन आंदोलन है। यह फेल (नाकाम)। नहीं होगा। टिकैत ने दावा किया कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन मजबूत होता जा रहा है। कई खाप नेता महापंचायत में मौजूद थे। दादरी से निर्दलीय विधायक और सांगवान खाप के प्रमुख सोमवीर सांगवान भी कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने पिछले साल दिसंबर में राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। उन्होंने राज्य सरकार को किसान विरोधी करार दिया था। किसान संगठनों के बीच एकजुटता दिखाते हुए टिकैत ने कहा, मंच और पंच नहीं बदलेंगे। टिकैत ने एक बार फिर से पंजाब बीकेयू नेता बलबीर सिंह राजेवाल की सराहना की। उन्हेंने कहा कि राजेवाल हमारे बड़े नेता हैं। हम यह लड़ाई मजबूती से लड़ेंगे। किसान संगठनों के इरादे पक्के लगते हैं। वह आरपार की लड़ाई लड़ने के मूड़ में हैं। हम फिर दोहराते हैं कि सरकार को इन तीनों कानूनों को स्थगित कर देना चाहिए और इन किसानों की मांगों को (जो उन्हें सही लगती हैं) नए कानून में शामिल करके पारित करें। किसान मानने वाले नहीं हैं। यह बहुत लंबी लड़ाई लड़ने के मूड़ में हैं। सरकार को अविलंब कोई हल निकालना होगा। यह सरकार के हित में भी है, देश हित में भी और किसानों के हित में भी है।

हस्तियों के ट्वीट की जांच करेगी महाराष्ट्र सरकार

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भारत रत्न लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर के साथ ही अक्षय कुमार समेत मशहूर हस्तियों की ओर से किसानों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में किए गए ट्वीट की जांच के आदेश दिए हैं। देशमुख ने इसे गंभीर बताते हुए खुफिया विभाग को ट्वीट की पृष्ठभूमि की जांच करने का आदेश दिया। बताया गया कि इन ट्वीट के कटेंट एक जैसे हैं और एक ही समय पोस्ट किए गए हैं जिसे लेकर शक जाहिर किया गया है और इसकी जांच कराने को कहा गया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत और अन्य कांग्रेस नेता ने किसान आंदोलन पर पॉप सिंगर रिहाना के ट्वीट के जवाब में कई हस्तियों के ट्वीट की शिकायत महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से की थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि इसमें कुछ शब्द ऐसे हैं जो शक पैदा करते हैं। सरकार अब इन हस्तियों के ट्वीट की जांच करके इन निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश करेगी कि क्या इन सितारों ने किसी दबाव में आकर ये ट्वीट किए थे या नहीं? कांग्रेस नेताओं ने शंका जाहिर करते हुए शिकायत की है कि हस्तियों की ओर से केन्द्र की भाजपा की अगुवाई वाली सरकार के समर्थन में दबाव में आकर ट्वीट किए गए हो सकते हैं। कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा कि इन हस्तियों द्वारा किए गए ट्वीटस के बीच एक समान पैटर्न देखा जा सकता है। अधिकांश ने लगभग एक ही जैसे शब्दें और हैशटैग का इस्तेमाल किया है। सावंत ने तर्क दिया कि इससे संदेह पैदा हुआ कि क्या वे किसी बाहरी दबाव में तो नहीं थे? उन्होंने कहा कि मशहूर हस्तियें को अगर किसी का डर है तो उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए। -अनिल नरेन्द्र

Wednesday, 10 February 2021

चमोली में जल प्रलय ने केदारनाथ हादसे की याद ताजा कर दी

उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को कुदरत ने एक बार फिर भारी तबाही मचाई। नीती घाटी में रैणी गांव के शीर्ष भाग में ऋषिगंगा के मुहाने पर सुबह करीब 9ः15 बजे ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया जिससे भीषण बाढ़ आ गई। अचानक आई जल प्रलय से नदी पर निर्मित एनटीपीसी की ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना पूरी तरह से तबाह हो गई। धौलीगंगा नदी पर निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना को भी भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय प्रशासन के अनुसार इन दोनों जगहों पर 155 लोगों के हताहत होने की आशंका है। तपोवन बांध स्थित एक सुरंग से मलबा हटाकर 16 लोगों समेत 25 लोगों को बचाया गया। इनका पता इनके पास मौजूद मोबाइल के सिग्नल से चल सका। हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत चमोली पहुंचे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचाव अभियान पर नजर रखे हुए हैं। करीब साढ़े चार घंटे के बाद श्रीनगर बांध की झील में पानी का तेज बहाव आया, मगर तब तक स्थिति नियंत्रण में आ गई, नहीं तो बाढ़ का असर ऋषिकेश व हरिद्वार तक हो सकता था। तपोवन-विष्णुगाड में 2978 करोड़ रुपए व ऋषिगंगा परियोजना में 40 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। इसके अलावा 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा के अन्य नुकसान की आशंका जताई जा रही है। अब तक राहत और बचाव कार्य के दौरान चमोली जिला पुलिस ने 15 शव मिलने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि अभी भी 150 से अधिक लोग लापता हैं। रात में जलस्तर बढ़ने के कारण कुछ देर रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा था, लेकिन तड़के चार बजे से एक बार फिर बचाव कार्य शुरू हो गया। जेसीबी की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। इसमें फंसे लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है। आईटीबीपी देहरादून में सैक्टर हेडक्वार्टर की डीआईजी अपर्णा कुमार ने बताया कि तपोवन की बड़ी टनल को 70-80 मीटर खोला गया है और मलबा निकाला जा रहा है। यह हादसा जिस दूरस्थ इलाके में हुआ है उसका मतलब यह है कि अभी तक किसी के पास इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं होगा कि यह क्यों हुआ है? ग्लेशियरों पर शोध करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालय के इस हिस्से में ही एक हजार से ज्यादा ग्लेशियर हैं। सबसे प्रबल संभावना यह है कि तापमान बढ़ने की वजह से विशाल हिमखंड टूट गए हैं जिसकी वजह से उनसे भारी मात्रा में पानी निकला और इसी वजह से हिमस्खलन हुआ होगा और चट्टानें और मिट्टी टूटकर नीचे आई होगी। भारत सरकार के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी से हाल में ही रिटायर हुए डीपी डोभाल कहते हैं कि हम उन्हें मृत बर्फ कहते हैं क्योंकि यह ग्लेशियरों के पीछे हटने के दौरान अलग हो जाते हैं और इसमें आमतौर पर चट्टानों और कंकड़ों का मलबा होता है। इसकी संभावना बहुत ज्यादा है क्योंकि नीचे की तरफ भारी मात्रा में मलबा बहकर आया है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि हो सकता है कि ग्लेशियर की किसी झील में हिमस्खलन हुआ है जिसकी वजह से भारी मात्रा में पानी नीचे आया हो और बाढ़ आ गई हो। ग्लेशियर बर्फ का बहुत बड़ा हिस्सा होता है जिसे हिमखंड भी कहते हैं। यह अकसर नदी की तरह दिखते हैं और बहुत धीमी गति से बहते हैं। ग्लेशियर बनने में कई साल लगते हैं। यह ऐसी जगहों पर बनते हैं जहां बर्फ गिरती है। मगर गल नहीं पाती। यह बर्फ धीरे-धीरे ठोस होती जाती है। भार की वजह से यह आगे जाकर पहाड़ों से खिसकती है। हिन्दु कुश हिमालय क्षेत्र में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ़ रहे तापमान के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इसकी वजह से ग्लेशियर झीलें खतरनाक विस्तार ले रही हैं और कई नई झीलें बन रही हैं पर जब उनका जल स्तर खतरनाक बिन्दु पर पहुंच जाता है, वह अपनी सरहदों को लांघ देती हैं और जो भी रास्ते में आता है उसे बहा ले जाती हैं। साल 2013 में जब केदारनाथ और कई अन्य इलाकों में प्रलयकारी बाढ़ आई थी तब भी कई चेतावनियां दी गई थीं पर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने केदारनाथ हादसे से कोई सबक नहीं लिया। खैर! पोस्टमार्टम तो होता रहेगा जरूरत फंसे लोगों को जिन्दा निकालने की है, हम इस हादसे में जो मारे गए हैं उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।

एक बार फिर परिवर्तन यात्रा का दांव चला भाजपा ने

पश्चिम बंगाल के नादिया जिले से शनिवार को भाजपा की परिवर्तन यात्रा की शुरुआत पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने की। इस परिवर्तन यात्रा में नड्डा ने ममता बनर्जी सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि ममता ने राज्य को प्रधानमंत्री किसान योजना से दूर रखा। विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल की जनता ममता बनर्जी और टीएमसी को अलविदा कह देगीं। वहीं मालदा की सभा में नड्डा ने पूछा कि बंगाल में जय श्रीराम के नारों पर ममता को गुस्सा क्यों आता है? इस दौरान भाजपा अध्यक्ष ने किसानों के साथ खिचड़ी और सब्जी भी खाई। अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने व जनता तक पहुंचने के लिए भाजपा का यात्राओं का पुराना फॉर्मूला है, जो उसे सियासी लाभ देता रहा है, लेकिन ऐसी यात्राओं को लेकर विवाद भी खड़े होते हैं और राजनीतिक टकराव भी हुए हैं। पश्चिम बंगाल में भी वही स्थिति बनी हुई है। भाजपा ने सबसे पहले 1990 में रामरथ यात्रा से राजनीतिक उड़ान शुरू की थी। तब के अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी की उस पहली रथ यात्रा में मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अहम भूमिका में थे। इसके बाद आडवाणी व अन्य नेताओं ने विभिन्न नामों से आधा दर्जन से ज्यादा यात्राएं निकालीं और भाजपा के जनाधार व पहुंच को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया। हालांकि यह यात्राएं राजनीतिक विवाद व टकराव का भी सबब रहीं। आडवाणी की पहली सोमनाथ रामरथ यात्रा को बीच में ही रोक लिया गया था और बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सरकार ने आडवाणी को गिरफ्तार किया था। इस रथ यात्रा को तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह के मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने का राजनीतिक जवाब माना गया था। इसके बाद 1991-92 में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी की एकता यात्रा भी जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर में लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराने को लेकर चर्चित रही थी। रथ यात्राओं के जरिये भाजपा ने अपने मुद्दों को देशभर में पहुंचाया और उसे इसका सीधा लाभ भी मिला। चुनावी सफलताएं कम-ज्यादा रही हों, पर 1990 के बाद भाजपा का जनाधार बढ़ता ही रहा है और अब उसकी पहुंच देश के सभी राज्यों तक हो गई है। अब जबकि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल व पुडुचेरी की पांच विधानसभाओं के चुनाव होने हैं, भाजपा एक बार फिर जनाधार बढ़ाने के लिए इसी तरह की रथ यात्राओं को कर रही है। नवम्बर में तमिलनाडु में बेनीवाल रथ यात्रा का आयोजन किया था, जिसे लेकर उसके व सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के बीच टकराव हुआ था। अब पश्चिम बंगाल में भी यही स्थिति बनी हुई है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल के चुनाव को मथने के लिए परिवर्तन यात्रा का फिर सहारा लिया है। वह राज्य में पांच स्थानों से यात्राएं निकालेगी, जो राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी। पहली यात्रा पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुरू कर दी है। रथ यात्रा की दूसरी कड़ी को अमित शाह 11 फरवरी को कूच बिहार से हरी झंडी दिखाने वाले हैं। देखें कि ममता के कड़े विरोध के कारण भाजपा की रथ यात्रा कितनी सफल रहती है?