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Tuesday, 22 August 2023
मनमानी गिरफ्तारी, सम्पत्ति गिराने पर राहत
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाईं चंद्रचूड़ ने कहा है कि मनमाने ढंग से गिरफ्तार किए गए लोगों या सम्पत्ति को गिराए जाने या गैर-कानूनी तरीके से अटैक किए जाने जैसी कार्रवाईं में न्यायिक व्यवस्था में राहत मिलनी चाहिए। गत मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की वास्तविक ताकत यही है कि उस तक आम आदमी की सरल पहुंच है। सीजेआईं ने कहा कि अदालतें जीवन और आजादी के लिए संरक्षण हासिल करने की सुरक्षित लोकतांत्रिक जगह है। उनकी टिप्पणी को हाल के दिनों में आरोपियों या उनके परिवारों के मकान आदि सम्पत्ति को अवैध घोषित कर गिराने की कार्रवाइयों के सिलसिले में देखा जा रहा है। सीजेआईं ने कहा—न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती न्याय तक पहुंचने में आने वाली बाधाओं को खत्म करना है। साथ ही कहा कि अदालतों की कार्यंक्षमता इस बात पर निर्धारित होती है कि वह संवैधानिक कर्तव्य का कितना प्राभावी ढंग से जवाब दे सकते हैं। अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच पर जोर देते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा—जब मैं भविष्य की ओर देखता हूं, मेरा मानना है कि भारतीय न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती न्याय तक पहुंचने में आने वाली बाधाओं को खत्म करना है। उन्होंने कहा—हमें उन बाधाओं को दूर करके प्राव््िरायात्मक रूप से न्याय तक पहुंच बढ़ानी होगी जो नागरिकों को अदालतों में जाने से रोकता है, हमारे पास यह सुनिाित करने के लिए रोड मैप है कि भविष्य की भारतीय न्यायपालिका समावेशी हो और कतार के अंत में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। सीजेआईं चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट की विस्तार योजना के बारे भी बताया। इसके तहत 27 अतिरिक्त अदालतों, 57 न्यायाधीशों के कक्ष, चार रजिस्ट्रार के कक्ष, 16 सब-रजिस्ट्रार कक्ष और वकीलों और वादियों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाओं को समायोजित करने के लिए एक, नईं इमारत शामिल है। सुप्रीम कोर्ट की कार्यंप्राणाली में कईं तकनीकी बदलावों को शामिल करने वाले जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा—न्यायिक प्राव््िरायाओं से जुड़ी अक्षमता और अस्पष्टता को खत्म करने के लिए टेक्नोलॉजी हमारे पास सबसे अच्छा उपकरण है। उन्होंने कहा—हम न्याय में प्राव््िरायात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए टेक्नोलॉजी की पूरी क्षमता का उपयोग करना होगा। साथ ही बताया कि इसके लिए ईं-कोर्ट परियोजना का, तीसरा चरण लागू हो रहा है। जल्दी ही न्यायिक निर्णय लेने में रूढ़िवादिता से निपटने के लिए एक हैंडबुक जारी होगी।
——अनिल नरेन्द्र
संविधान बदलने पर छिड़ा विवाद
प्राधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईंएएसी) के अध्यक्ष विवेक देबरॉय ने एक अखबार में भारत के लिए नए संविधान की मांग करते हुए लिखा था। इस लेख पर विवाद बढ़ा तो प्राधानमंत्री पैनल से सफाईं पेश करते हुए खुद को और वेंद्र सरकार को इससे अलग कर लिया।
ईंएएसी-पीएम ने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण देते हुए लिखा—डॉ. विवेक देबरॉय का हालिया लेख उनकी व्यक्तिगत राय थी, वो किसी भी तरह से ईंएएसी या भारत सरकार के विचारों को नहीं दर्शाता। ईंएएसी-पीएम भारत सरकार खासकर प्राधानमंत्री को आर्थिक मुद्दों पर सलाह देने के लिए गठित की गईं बॉडी है। इसमें उन्होंने लिखा था—अब हमारे पास वह संविधान नहीं है जो हमें 1950 में विरासत में मिला था। इसमें संशोधन किए जाते हैं और हर ब ार वो बेहतरी के लिए नहीं होते, हालांकि 1973 से हमें बताया गया कि इसकी बुनियादी संरचना को बदला नहीं जा सकता है। भले ही संसद के माध्यम से लोकतंत्र वुछ भी चाहता हो, जहां तक मैं इसे समझता हूं, 1973 का निर्णय मौजूदा संविधान में संशोधन पर लागू होता है, मगर नया संविधान होगा तो यह विषय उस पर लागू नहीं होगा। देबरॉय ने एक स्टडी के हवाले से बताया कि लिखित संविधान का जीवनकाल महज 17 साल होता है।
भारत के वर्तमान संविधान को औपनिवेशक विरासत बताते हुए उन्होंने लिखा—हमारा वर्तमान संविधान काफी हद तक 1935 के भारत सरकार अधिनियम पर आधारित है। इसका मतलब है कि यह एक औपनिवेशक विरासत है। मुझे लगता है कि हमें संविधान पर दोबारा विचार करना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि यह विवादास्पद है क्योंकि समय-समय पर दुनिया का हर देश संविधान पर पुनर्विचार करता है। हमने ऐसा संशोधन के जरिये किया है। देबरॉय के इस लेख की आलोचना की जा रही है। कईं नेता और सांसद इस पर प्रातिव््िराया दे रहे हैं। लालू प्रासाद यादव ने भी इस लेख पर कहा है कि क्या यह सब वुछ पीएम की मजा से हो रहा है। ट्विटर पर लिखा—प्राधानमंत्री मोदी का कोईं आर्थिक सलाहकार है बिबेक देबरॉय। वह बाबा साहेब के संविधान की जगह नया संविधान बनाने की वकालत कर रहा है। क्या प्राधानमंत्री की मजा से यह सब कहा और लिखा जा रहा है? सीपीएम सांसद जॉन विटॉस लिखते हैं कि विवेक देबरॉय नया संविधान चाहते हैं। उनकी मुख्य समस्या संविधान के बुनियादी ढांचे में दर्ज समाजवादी, सेक्युलर, लोकतांत्रिक जैसे शब्दों से है। हकीकत में वह हिन्दू राष्ट्र की वकालत करते हैं।
अगर उन्होंने इसे निजी हैसियत से लिखा है तो अपना पद लेखक के साथ क्यों लिखा? साल 2017 में तत्कालीन वेंद्रीय राज्यमंत्री अनंत हेगड़े ने भी संविधान बदलने को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा संविधान बदलने के लिए सत्ता में आईं है और निकट भविष्य में ऐसा किया जाएगा।
हम यहां संविधान को बदलने के लिए आए हैं। हम इसे बदल देंगे।
Thursday, 17 August 2023
सवाल न्याय के मंदिर की सुरक्षा का
दिल्ली की अदालतों में गोलीबारी की हालिया घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उच्चतम न्यायालय ने देशभर के प्रात्येक न्यायिक परिसर में स्थायी अदालत सुरक्षा ईंकाइयों (सीएसयू) की तैनाती सहित एक सुरक्षा योजना की आवश्यकता को रेखांकित किया है। अदालत ने कहा कि न्याय के मंदिर में ही सुरक्षा कवच का अभाव है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाओं से न केवल न्यायाधीशों बल्कि वकीलों, अदालत के कर्मचारियों, वादियों और आम जनता की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करती है। न्यायमूर्ति एस. रविन्द्र भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि न्यायिक संस्थान सभी हितधारकों की भलाईं की रक्षा के लिए व्यापक कदम उठाएं। न्याय प्रादान करने वाले ही जब असुरिक्षत होंगे तो वादी अपने लिए न्याय की क्या उम्मीद कर सकते हैं? पीठ ने कहा कि सीसीटीवी वैमरों सहित आधुनिक सुरक्षा कवच व उपाय होने के बावजूद अदालत की सुरक्षा खामियां अकसर उजागर होती रहती हैं। सीसीटीवी लगाने की रूपरेखा जिलावार आधार पर बनानी होगी, जहां संबंधित राज्य सरकारों को ऐसी योजनाओं के व््िरायान्वयन के लिए समय पर आवश्यक धन उपलब्ध कराना चाहिए। उच्च न्यायालय संबंधित जिला और सत्र न्यायाधीशों को सीसीटीवी वैमरों की स्थापना और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। यह भयावह है कि राष्ट्रीय राजधानी में अदालत परिसर में पिछले एक साल में गोलीबारी की कम से कम तीन बड़ी घटनाएं देखी गईं हैं। इस साल जुलाईं में तीस हजारी कोर्ट में वकीलों के दो गुटों में फायरिग हुईं थीं। शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालयों के प्रामुख सचिवों, प्रात्येक राज्य सरकार के गृह विभागों और राज्यों/वेंद्र शासित प्रादेशों के पुलिस महानिदेशकों या पुलिस आयुक्तों के परामर्श से एक सुरक्षा योजना तैयार करनी चाहिए। सुरक्षा योजना के तहत प्रात्येक अदालत परिसर में स्थायी न्यायालय सुरक्षा इकाईं स्थापित करने का प्रास्ताव शामिल हो सकता है। ऐसी प्रात्येक इकाईं के लिए सशस्त्र/निहत्थे कर्मियों और पर्यंवेक्षक अधिकारियों की तैनाती की जा सकती है। इससे सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होगी। हाल के दिनों में दिल्ली के कईं अदालती परिसरों में गोलीबारी की घटनाएं हुईं हैं। जुलाईं में तीस हजारी अदालत में वकीलों के दो गुटों के बीच गोलीबारी के अलावा अप्रौल में रोहिणी अदालत परिसर में वकीलों और उनके मुवक्किलों के बीच विवाद के बाद गोलीबारी की घटना हुईं थी। इसी महीने साकेत अदालत परिसर में वकील ने एक महिला को गोली मार दी थी। गिरोहबाज जितेन्द्र गोगी की सितम्बर 2021 में रोहिणी अदालत परिसर में दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
——अनिल नरेन्द्र
प्रियंका पर 41 एफआईंआर
मध्य प्रादेश सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भाजपा ने शनिवार को इंदौर में कांग्रोस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराईं। मध्य प्रादेश में 41 से अधिक जगहों पर उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है। इंदौर, ग्वालियर और अन्य शहरों में यह केस दर्ज किए गए हैं। इसे लेकर भाजपा काफी आव््रामक है। वहीं कांग्रोस भी मुंहतोड़ जवाब दे रही है। इंदौर के पुलिस आयुक्त मवंरद देउस्कर ने बताया कि मामले की जांच की दिशा तय करने के लिए एक्स से विवादास्पद पोस्ट को लेकर जानकारी मांगी जाएगी। उन्होंने बताया कि भाजपा के विधि प्राकोष्ठ की स्थानीय इकाईं के संयोजक नीमेष पाठक ने शिकायत की है कि ज्ञानेंद्र अवस्थी नाम के व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से फजा पत्र सार्वजनिक किया, जिसमें ठेकेदारों से 50 प्रातिशत कमीशन मांगे जाने की बात लिखी गईं है।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि यह प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 469 (ख्याति को नुकसान पहुंचाने) के इरादे से जालसाजी के तहत दर्ज की गईं। मामले से जुड़ी विवादास्पद पोस्ट को लेकर एक्स से जानकारी मांगी जाएगी और इस ब्यौरे के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा। उधर कांग्रोस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भाजपा सरकार का काम लोगों को डराना है, हम लोगों से कहना चाहते हैं कि डरे नहीं। कांग्रोस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वह प््िरायंका गांधी, राहुल गांधी, खड़गे व कांग्रोस नेताओं के खिलाफ सैकड़ों एफआईंआर दर्ज कर सकते हैं, लेकिन हम इन सब चीजों से डरने वाले नहीं हैं। हम भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाएंगे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब ठेकेदार खुद लिख रहे हैं कि 50 प्रातिशत कमीशन लिया जाता है तो इससे ज्यादा क्या सुबूत चाहिए? मध्य प्रादेश में विधानसभा चुनावी साल में कथित ठेकेदार संगठन के कथित पत्र को पोस्ट करते हुए वरिष्ठ कांग्रोस नेताओं के ट्वीट के एक दिन बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिह चौहान ने कांग्रोस और उसके नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह लोग सोशल मीडिया पर रणनीति के तहत झूठ और भ्रम पैलाने का प्रायास कर रहे हैं। श्री चौहान ने इस संबंध में एक कार्यंव््राम के दौरान अपने भाषण का वीडियो ट्विटर के जरिये पोस्ट किया है। इसमें श्री चौहान ने कहा कि कांग्रोस सकारात्मक, विकास, जनकल्याण के मामले में भाजपा सरकार का सामना नहीं कर सकती है, इसलिए सोशल मीडिया पर रणनीति के तहत झूठ और भ्रम पैलाने का पूरा प्रायास कर रही है। चुनाव करीब होने से मुख्यमंत्री चौहान को कर्नाटक की तरह इससे राजनीतिक नुकसान नजर आया इसलिए उन्होंने इस मामले में कार्यंवाही के खुद निर्देश दिए।
Sunday, 13 August 2023
चुनाव आयोग को कठपुतली बनाने की कोशिश
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईंसी) और अन्य आयुक्तों (ईंसी) की नियुक्ति के लिए बने पैनल में अहम बदलाव से जुड़ा एक विधेयक गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया। बिल के मुताबिक सभी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्राधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और वैबिनेट मंत्री का तीन सदस्यीय पैनल करेगा। कानून के प्राभाव में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बैंच द्वारा दो मार्च, 2023 को दिया गया वह पैसला खारिज हो जाएगा जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्राधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पैनल की सलाह पर की जाएगी। तब कोर्ट ने साफ कहा था कि यह पैसला तब तक प्राभावी रहेगा, जब तक आयुक्तों की नियुक्ति वाला कानून नहीं बन जाता। इसीलिए सरकार ने पैसले के पांच महीने बाद कानून बनाने की पहल कर दी है। प्रास्तावित बिल के माध्यम से सियासी टकराव का एक और रास्ता खुल गया है। संसद के इसी सत्र में संसद ने दिल्ली ऑर्डिनेंस से जुड़ा बिल पास किया गया जिस पर विपक्ष का कहना था कि वेंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश जबरन पलट रही है। अब अगले वुछ दिनों में इस पर भी राजनीति तेज होगी। हालांकि सरकार का तर्व है कि चाहे दिल्ली से जुड़ा बिल हो या चुनाव आयोग में बदलाव वाला बिल, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप ही काम कर रही है। सरकार का तर्व है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह मानदंड तब तक प्राभावी रहेगा, जब तक कि इस मुद्दे पर संसद में कोईं कानून नहीं बन जाता। हालांकि अगर कानून पास होता है तो इसकी कानूनी समीक्षा का भी रास्ता खुल सकता है। विपक्ष ने गुरुवार को प्राधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह चुनाव निकाय को प्राधानमंत्री के हाथों की कठपुतली बनाने का प्रायास है। आम आदमी पाटा (आप) ने कहा की पीएम भारतीय लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं और नियुक्त होने वाले चुनाव आयुक्त भाजपा के प्राति बफादार होंगे। वहीं तृणमूल कांग्रोस ने आरोप लगाया कि यह 2024 के चुनाव में धांधली की दिशा में एक स्पष्ट कदम है। कांग्रोस नेताओं ने सवाल किया, इसका मकसद चुनाव आयोग को अपनी कठपुतली बनाना है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने हमेशा कहा है कि मौजूदा वेंद्र सरकार हमेशा कोर्ट के ऐसे किसी भी आदेश को पलट देगी जो उसे पसंद नहीं आएगा। यह एक खतरनाक स्थिति है और इससे चुनाव की निष्पक्षता प्राभावित हो सकती है।
तृणमूल कांग्रोस के राष्ट्रीय प्रावक्ता साकेत गोखले ने कहा कि भाजपा 2024 के चुनावों के लिए धांधली कर रही है। ईंसी की पूरी ताकत वेंद्र के हाथ में आ जाएगी क्योंकि पैनल में सरकार के दो सदस्य होंगे।
——अनिल नरेन्द्र
आपने भारत की हत्या की है
कांग्रोस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को मणिपुर में जारी हिसा के मुद्दे पर संसद में सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रास्ताव पर मोदी सरकार की तीखी आलोचना की। पिछले महीने 20 जुलाईं से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में राहुल गांधी का यह पहला भाषण था। इससे पहले तक मोदी सरनेम विवाद में अपनी संसद सदस्यता खोने की वजह से वह लोकसभा की कार्यंवाही में शामिल नहीं हो पा रहे थे। राहुल गांधी ने अपने 37 मिनट लंबे भाषण में से लगभग 50 प्रातिशत वक्त मणिपुर को दिया। भाषण की शुरुआत में उन्होंने अपनी भारत जोड़ो यात्रा और उससे मिले अनुभवों का जिव््रा किया। इसके बाद मणिपुर में जारी हिसा पर उन्होंने बोलना शुरू किया। उन्होंने कहा—मैं वुछ ही दिन पहले मणिपुर गया। हमारे प्राधानमंत्री आज तक नहीं गए क्योंकि उनके लिए मणिपुर हिन्दुस्तान नहीं है, मणिपुर को आपने दो भागों में बांट दिया है। अपने मणिपुर दौरे के दौरान मिले अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा—एक औरत ने मुझसे कहा कि उनका बेटा हिसा में मारा गया और वो उसकी लाश के साथ पूरी रात रहीं। वो अपना घर-बार छोड़कर आ गईं और उनके पास सिर्प अपने मारे गए बेटे की फोटो थी। मैं एक दूसरी औरत से मिला जिससे मैंने पूछा कि तुम्हार साथ क्या हुआ तो वो औरत कांपने लगी और बेहोश हो गईं। मैंने यह सिर्प दो उदाहरण दिए हैं। इन्होंने मणिपुर का नहीं बल्कि हिन्दुस्तान का कत्ल किया है। जब राहुल गांधी हिन्दुस्तान का कत्ल किए जाने की बात कर रहे थे तभी उनके साथ बैठे किसी सांसद ने भारत माता शब्द इस्तेमाल करने की ओर इशारा किया। इसके बाद राहुल ने कहा कि मणिपुर के लोगों की हत्या करके आपने भारत माता की हत्या की है। आपने यह करके देशद्रोह किया है। इस वजह से पीएम मोदी मणिपुर में नहीं जाते हैं। एक ओर मेरी मां यहां बैठी हैं और दूसरी मां को आपने मणिपुर में मारा है। भारत अहंकार को एकदम मिटा देता है। क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा में पहले दो-तीन में मेरे घुटने में दर्द शुरू हो गया। जब भी यह (घुटनों को लेकर) डर बढ़ता था तब कोईं न कोईं शक्ति आ जाती थी। इसके साथ ही उन्होंने रामायण का जिव््रा करते हुए कहा कि रावण की लंका को हनुमान ने नहीं, उसके अहंकार ने जलाया था। उन्होंने कहा—रावण दो लोगों की सुनता था, मेघनाथ और वुंभकरण। इसी तरह नरेंद्र मोदी जी दो लोगों की सुनते हैं—अमित शाह और अडानी की। लंका को हनुमान ने नहीं बल्कि रावण के अहंकार ने जलाया था। राम ने रावण को नहीं मारा था बल्कि रावण के अहंकार ने उसे मारा था। विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी ने जिस अंदाज में भाषण दिया, उसमें नैतिक साहस की झलक मिलती है। वह जो भी कह रहे थे दिल से कह रहे थे। राहुल गांधी ने जिस तरह भाषण दिया, उसमें आत्मविश्वास, नैतिक साहस और दृढ़निाय नजर आया। मणिपुर पर बोले तो दिल से बोले। एक खास बात देखने को मिली।
भाषण के दौरान सत्तापक्ष शोरशराबा, टोकाटाकी करता रहा, पर राहुल ने इनकी बिना परवाह करते अपना संबोधन जारी रखा। बिना कहीं अटके उन्होंने पूरी बात रखी। राहुल गांधी ने बेहद पैनेपन के साथ कम समय में अपनी पूरी बात रखी। अब राहुल उभरते हुए राजनेता की तरह दिखने लगे हैं।
Thursday, 10 August 2023
छोटी गड़बिड़यों पर अब जेल नहीं होगी
इस सम्पादकीय और पूर्व के अन्य संपादकीय देखने के लिए अपने इंटरनेट/ब्राउजर की एड्रेस बार में टाइप करें पूूज्://हग्त्हाह्ंत्दु.ंत्दुेज्दू.म्दस् कारोबार में छोटी-मोटी गड़बिड़यों के लिए अब जेल की सजा नहीं मिलेगी। लोकसभा ने कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए 42 अधिनियमों में संशोधन कर ऐसे मामलों में जेल की जगह जुर्माने का प्रावधान वाले जन विश्वास प्रावधान संशोधन विधेयक पर मुहर लगा दी है। विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में 65 अप्राचलित कानूनों को निरस्त करने वाले सिस्टम और संशोधन विधेयक भी पारित हो गया है। इनके अलावा इसी दिन उपतट क्षेत्र खनिज विकास अधिनियम संशोधन विधेयक पेश किया गया।
जन विश्वास विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा—सरकार कारोबार में सुगमता चाहती है। विश्वास बहाली के लिए 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों में संशोधन कर सरकार विश्वास का वातावरण करना चाहती है। उन्होंने बताया कि विधेयक में सरकार ने संसद की संयुक्त समिति के सुझावों को भी शामिल किया है।
मोदी सरकार ने अपने करीब नौ साल के कार्यंकाल में अब तक 1486 ऐसे कानूनों को निरस्त किया है, जो अप्राभावित हैं। इसी दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए सरकार ने 65 ऐसे अप्राचलित कानूनों को निरस्त करने संबंधी प्रावधानों वाला निरस्त और संशोधक विधेयक लोकसभा में पारित कराया है। इस विधेयक पर राज्यसभा की मुहर लगते ही मोदी सरकार के कार्यंकाल में निरस्त कानूनों की संख्या 1551 हो जाएगी।
जिन कानूनों को निरस्त करने का प्रावधान है, उनमें सबसे ज्यादा रेलवे के 18 विनियोग अधिनियम शामिल है। छोटे-छोटे अपराधों व गड़बिड़यों में जेल की सजा हटाने का हम स्वागत करते हैं। इससे न केवल जेलों में 352 ट्रायलों की संख्या कम होगी, साथ-साथ अदालतों पर पैंडिंग केसों में भी कमी आएगी। सरकार का यह अच्छा पैसला है।
——अनिल नरेन्द्र
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