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Tuesday, 29 October 2024

चुनाव के बाद घाटी में लौटता आतंक


रविवार को जम्मू-कश्मीर के गांदर बल जिले में एक निर्माणाधीन सुरंग के पास चरमपंथी हमला हुआ जिसमें दो मजदूरों की तो मौके पर ही मौत हो गई। जबकि डाक्टर और अन्य चार मजदूरों की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई। मारे गए लोगों की पहचान डॉ. शाहनवाज, फहीम, नजीर, कलीम, मोहम्मद हनीफ, शशि अबरोल, अनिल शुक्ला और गुरजीत सिंह के रूप में हुई है। चरमपंथियों ने हमला तब किया। जब गांदरबल में सोनभर्ग इलाके के गुंह में सुरंग परियोजना पर काम कर रहे मजदूर और अन्य कर्मचारी देर शाम अपने शिविर में लौट आए थे। दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई बाकी की अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई। फिलहाल अन्य घायलों का इलाज चल रहा है। आठ अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर चुनाव के नतीजे आए थे और सरकार के गठन के बाद यह पहला मौका था जब इतना बड़ा चरमपंथी हमला हुआ है। कश्मीर घाटी में महीनों के बाद ऐसा हुआ कि 7 दिन में ही 4 आतंकी हमलों में 13 लोगों की जान चली गई। 18 अक्टूबर को शोपिया में हुए आतंकी हमले में बिहार के मजदूर की मौत, 20 अक्टूबर को गांदरबल में 6 गैर स्थानीय व एक स्थानीय डाक्टर की मौत और 24 अक्टूबर को गुलमर्ग में सैन्य वाहन पर हमले में 3 जवान व दो स्थानीय रिपोर्टर की जान गई। विधानसभा चुनावों के बाद ये हमले तेजी से बढ़े हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्वक चुनाव होने से पाक सेना और खुफिया एजेंसी और सरकार बौखला गई है। अब पाक समर्थित से आतंकी घाटी में अपनी मौजूदगी दिखाना चाहते हैं। वे संदेश देना चाहते हैं कि जम्मू कश्मीर में चुनी हुई सरकार बनाकर भले ही आपने लोकतंत्र का परचम बुलंद कर दिया हो, लेकिन हम अभी खत्म नहीं हुए हैं। 1989 से पाक लगातार घाटी में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है। पर मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमलों को कायरतापूर्ण बताते हुए इनकी निंदा की है। उन्होंने एक्स पर लिखाः सोनमर्ग क्षेत्र में गगनगीर में गैर-स्थानीय मजदूरों पर कायरतापूर्ण हमले की बेहद दुखद खबर है, ये लोग इलाके में एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना पर काम कर रहे थे। मैं निहत्थे, निर्दोष लोगों पर हुए इस हमले की कड़ी निंदा करता हूं और उनके प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। पिछले कुछ दिनों में लगातार होते हमले पुलिस प्रशासन और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए बड़ी चुनौती हैं। पूरे राज्य में आतंकवादी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए खुफिया तंत्र, सुरक्षा उपायों को चाक-चौबंद और मजबूत करने की जरूरत है ताकि शांति भंग करने वाले समूहों को पराजित किया जा सके। हालांकि अलगाववादियों और आतंकवाद को जनता का समर्थन नहीं है जो उसकी तमाम धमकियों के बावजूद विधानसभा के लिए खुलकर वोट दिया और लोकतंत्र का समर्थन किया। लेकिन मुश्किल यह है कि सीमा पार से आने वाले घुसपैठियों का छोटा-सा समूह उग्रवाद को पाक सेना के उकसावे पर बढ़ावा दे रहा है। केंद्र और राज्य सरकार को अपने सियासी मतभेदों को दरकिनार करते हुए साझी रणनीति बनानी चाहिए। और इन हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा रणनीति बनानी चाहिए। चुनाव खत्म हो गए हैं। जनता ने अपना फैसला सुना दिया है अब अपने वादे पूरे करने की चुनौती राज्य सरकार, प्रशासन और केंद्र सरकार की है।

-अनिल नरेन्द्र

महाराष्ट्र में लड़ाई असली और नकली में है


चाहे मामला महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का हो, चाहे उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनावों का हो दोनों ही स्थानों पर गठबंधनों का इस्तेमाल है। आज महाराष्ट्र की बात करें तो वहां गठबंधनों के बीच कड़ा मुकाबला तो है ही साथ-साथ वहां, सब की नजरें गठबंधन से ज्यादा असली-नकली पर लगी हुई है। मैं बात कर रहा हूं शिवसेना के दोनों गुटों की और पवार परिवार में चाचा-भतीजे की लड़ाई की। महाराष्ट्र विधानसभा में दो गठबंधन महायुति और महाविकास अघाड़ी आमने-सामने हैं। दोनों गठबंधनों में मुख्य तौर पर तीन-तीन पार्टियां शामिल हैं। पर असल में महाराष्ट्र चुनाव में मुख्य मुकाबला दो पार्टियों के बीच है। विभाजन के बाद दो पार्टियों से टूटकर बनी यह पार्टियों के बीच खुद को मतदाता के सामने असल पार्टी साबित करने की चुनौती है। वर्ष 2019 विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की सियासत काफी बदली है। कभी भाजपा की सबसे मजबूत सहयोगी माने जाने वाली शिव सेना के कांग्रेस और एनसीपी के साथ आने से प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदल गए है। इसके बाद 2022 में शिवसेना और एनसीपी में टूट ने प्रदेश की सियासत में नए समीकरण गढ़ दिए। शिवसेना और एनसीपी टूटकर दो पार्टियों से चार पार्टियों में बदल गई। लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) भाजपा की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन पर भारी पड़ी। एमवीए में शामिल कांग्रेस, शिवसेना (यूटीबी) और एनसीपी (एसवी) 48 में से 30 सीट जीतने में सफल रही। जबकि महायुति में शामिल भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार) के हिस्से में सिर्फ 17 सीटें आईं। इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इसी तरह वरिष्ठ नेता शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने अजीत पवार की एनसीपी से अच्छा प्रदर्शन किया। ऐसे में महाराष्ट्र चुनाव में महाविकास अघाड़ी और महायुति में सीधा मुकाबला होने के बावजूद असल लड़ाई शिवसेना और एनसीपी के अलग-अलग धड़ों के बीच है। विधानसभा चुनाव में मतदाता अपने वोट के जरिए यह साबित करेंगे कि उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे में असली शिवसेना किसकी है। इसी तरह चाचा शरद पवार और भजीते अजित पवार की अध्यक्षता वाली कौन सी एनसीपी ज्यादा प्रभावशाली है। लोकसभा चुनाव के परिणाम को विधानसभा की सीट के मुताबिक देखें तो एमवीए 156 और महायुति 126 सीट पर बढ़त बनाने में सफल रही है। इसलिए शिवसेना और एनसीपी के दोनों धड़ों के बीच आमने-सामने की लड़ाई तो है साथ ही अपने-अपने गढ़ को बरकरार रखने की चुनौती भी है। शिवसेना के दोनों हिस्सों के बीच जहां कोकणा की 39 सीट पर मुख्य मुकाबला है। इस क्षेत्र की 26 सीट पर उद्धव की शिवसेना और शिंदे की शिवसेना से आमने-सामने हैं। इसी तरह पश्चिमी महाराष्ट्र की 58 सीट पर मुकाबला शरद पवार और अजीत पवार की अध्यक्षता वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच है। वहीं 2019 के विधानसभा चुनाव में एनसीपी ने इस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया था। इस चुनाव में एनसीपी ने 54 सीटें जीती थीं। पर बाद में पार्टी में टूट के बाद 40 विधायक अजित पवार के साथ चले गए और राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल हो गए। कुल मिलाकर महाराष्ट्र में गठबंधनों के बीच लड़ाई तो है ही साथ-साथ असली-नकली लड़ाई भी चल रही है।

Saturday, 26 October 2024

प्रियंका गांधी को उम्मीदवार बनाकर साधे समीकरण

आखिरकार कांग्रेस पार्टी ने महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को वायनाड उपचुनाव में अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके साथ ही भारतीय चुनावी राजनीति में प्रियंका की शुरुआत हो गई है। प्रियंका ने 23 अक्टूबर को केरल की वायनाड लोकसभा सीट से अपना पर्चा दाखिल कर दिया है। लेकिन पहली बार वे अपने लिए वोट मांग रही हैं। वहीं राहुल गांधी ने बहन के लिए प्रचार करते हुए कहा कि वायनाड के अब दो सांसद हैं एक औपचारिक और एक अनौपचारिक। ये सीट पहले उनके भाई राहुल गांधी के पास थी। उन्होंने दो लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, वायनाड और रायबरेली। अब पार्टी ने उनकी बहन प्रियंका गांधी के चुनावी डेब्यू के लिए वायनाड सीट को चुना है। राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी की उम्मीदवारी का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, वायनाड के लोगों के लिए मेरे दिल में खास जगह है। मैं उनके प्रतिनिधि के तौर पर अपनी बहन से बेहतर किसी उम्मीदवार की कल्पना नहीं कर सकता था। मुझे उम्मीद है कि वो वायनाड की जरूरतों के लिए जी जान से काम करेंगी और संसद में एक मजबूत आवाज बनकर उभरेंगी। अगर प्रियंका गांधी जीतती हैं तो गांधी परिवार के मौजूदा तीनों सदस्य सांसद हो जाएंगे। राहुल गांधी लोकसभा के सदस्य हैं और सोनिया गांधी राज्यसभा में हैं। भारतीय जनता पार्टी ने वायनाड लोकसभा उपचुनाव के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ नाव्या हरिदास को चुनाव मैदान में उतारा है। नाव्या हरिदास ने रविवार को कहा कि गांधी परिवार इन निर्वाचन क्षेत्र को महज एक विकल्प या दूसरी सीट के रूप में देख रहा है और इस क्षेत्र के लोगों को अब यह बात समझ आ गई है। कोझिकोड निगम में दो बार पार्षद रही हरिदास ने कहा कि वायनाड के मतदाता एक ऐसे नेता चाहते हैं जो उनके लिए खड़ा हो और उनकी समस्याओं का ध्यान करे। पत्रकारों से बातचीत के दौरान हरिदास ने कहा कि जहां तक पूरे देश का सवाल है, तो प्रियंका गांधी वाड्रा कोई नया चेहरा नहीं हैं लेकिन वायनाड के लिए वह नई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी परिवार के प्रतिनिधि के रूप में आ रही हैं, जो वायनाड के मुद्दों को उठाने में असफल रहा है। कांग्रेस पार्टी ने बहुत सोच-समझकर सांसद में वायनाड से प्रियंका को चुनाव मैदान में उतारा है। इनके जरिए पार्टी ने राष्ट्रीय राजनीति के साथ केरल की सियासत को साधने की कोशिश की है। केरल में वर्ष 2026 में विधानसभा चुनाव है। पार्टी के अंदर लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि प्रियंका को चुनाव मैदान में उतरना चाहिए पर कांग्रेस इसे टालता रहा। प्रियंका को उम्मीदवार बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस ने वायनाड के साथ कोई धोखा नहीं किया। राहुल गांधी ने अगर रायबरेली चुनी है तो अपनी बहन को वायनाड भेजा है क्योंकि, दक्षिण भारत में कर्नाटक के अलावा पार्टी की स्थिति कहीं भी बहुत मजबूत नहीं हैं। प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने से यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस दक्षिण को लेकर गंभीर है। लोकसभा चुनाव में पार्टी केरल की 20 में 14 सीटें जीतने में सफल रही थी। पार्टी को उम्मीद है कि प्रियंका गांधी का असर विधानसभा चुनाव पर भी दिखाई देगा। इसके साथ प्रियंका गांधी के जरिए पार्टी ने उत्तर व दक्षिण दोनों में ही अपना संतुलन बनाया है। प्रियंका अगर जीत कर आती है तो लोकसभा में मजबूती से अपनी बातें हिन्दी में रखने वाली वक्ता बनेंगी। -अनिल नरेन्द्र

3 दिन में सरकार बनानी होगी

महाराष्ट्र विधानसभा की तारीख बड़ी दिलचस्प है। यदि किसी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला या कोई मतभेद हो गया तो राष्ट्रपति शासन की नौबत आ जाएगी। दरअसल 20 नवम्बर को मतदान होगा और 23 नवम्बर को नतीजा आएगा। इसके 72 घंटे के अंदर नई सरकार को शपथ लेनी पड़ेगी। क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवम्बर को खत्म हो रहा है। नई सरकार इससे पहले बनना संवैधानिक बाध्यता है, दरअसल नतीजे 23 को देर शाम तक आएंगे। फिर विजेताओं को निर्वाचन आयोग सर्टिफिकेट देगा। बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन 24 को राज्यपाल के पास जाकर सरकार बनाने का दावा करेगा। राज्यपाल जरूरी शर्तों की समीक्षा के बाद सरकार बनाने के लिए दावेदार को बुलाएंगे फिर शपथ ग्रहण होगा और सरकार बनेगी। बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी को बहुमत न मिला तो राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने का न्यौता दे सकते हैं। हालांकि यह न्यौता पाने वाले पर निर्भर है कि वह सरकार बनाए या नहीं। मान लें किसी गठबंधन के पास संख्या बल है पर घटक दलों में तनातनी हो जाए तो सरकार बनाने का रास्ता कठिन हो जाएगा। ऐसे में राष्ट्रपति शासन ही विकल्प बचेगा और इसका फैसला तुरन्त लेना पड़ेगा। यदि किसी पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला तो उसे 24 को राज्यपाल से मिलने का समय लेना होगा। राजभवन को तत्काल मिलने का समय देना होगा, इसमें देरी भी हो सकती है। ऐसे में गठबंधन या पार्टी विधायक दल के नेता को 25 तक सरकार बनाने के लिए राज्यपाल को बुलाना होगा। 26 को शपथ ग्रहण करना होगा। महाराष्ट्र एक बहुत बड़ा राज्य है। दूरदराज इलाकों से जीते हुए विधायकों को भी समय पर पहुंचना होगा, जो काम आसान नहीं होगा। शिवसेना (उद्धव ठाकरे) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन के लिए केवल 48 घंटे का समय निर्धारित किया जाना भाजपा की चाल है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार बनाने का दावा करने में असमर्थ हो जाए। राज्यसभा सासंद ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया। अमित शाह के साथ भाजपा ने यह स्वीकार कर लिया है कि पार्टी महाराष्ट्र चुनाव नहीं जीत पाएगी। ऐसा लगता है कि महाविकास अघाड़ी को सरकार बनाने के बारे में चर्चा करने और निर्णय लेने के लिए समय सीमित करने की रणनीति है। अगर एमवीए के घटक दावा करने में विफल रहते हैं, तो राज्यपाल छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करेंगे। उन्होंने कहा कि मतगणना 23 नवम्बर को होगी, जिसका मतलब है कि एमवीए के घटक दलों - शिवसेना (यूवीटी), कांग्रेस - राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और अन्य छोटे दलों के पास सरकार बनाने के लिए केवल 48 घंटे होंगे। यह सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग का यह कदम भाजपा प्रवक्ता के समान है। आयोग ईवीएम का समर्थन करता है, लेकिन जब हरियाणा चुनावों में इन मशीनों के साथ की गई छेड़छाड़ के बारे में कहते हैं तो यह चुप्पी साध लेती है, आयोग ने लोकसभा चुनावों के दौरान धन के दुरुपयोग की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लगभग 200 विधानसभा क्षेत्रों में 15 करोड़ रुपए वितरित करने का फैसला किया है और यह सरकारी धन है।

Thursday, 24 October 2024

चूका इजराइल का एयर डिफेंस, नेतन्याहू के घर पर हमला


इजराइल में शनिवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आवास पर ड्रोन हमला हुआ। यह कल्पना से बाहर था (अब तक) की कोई इतनी जुर्रत कर सकता है कि इजराइल के प्रधानमंत्री के आवास पर सीधा हमला करे। पर हिज्जबुल्ला ने यह करके दिखा दिया। इजराइली प्रधानमंत्री के कार्यालय ने बताया कि ड्रोन हमला नेतन्याहू के भूमध्य सागर के तटवर्ती शहर सीजेरिया में स्थित आवास पर हुआ इससे पहले लेबनान से बड़ी संख्या में राकेट और ड्रोन इजराइल पर छोड़े गए थे। इनमें से ज्यादातर को इजराइली एयर fिडफेंस सिस्टम ने आकाश में ही नष्ट कर दिया, लेकिन नेतन्याहू के आवास को निशाना बनाने वाले ड्रोन को नष्ट करने से सिस्टम चूक गया। इस चूक ने इजराइली सुरक्षा तंत्र की चिंता बढ़ा दी है। हिज्जबुल्ला ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह अब इजराइल के किसी भी कोने पर हमला कर सकता है। इससे पहले सितम्बर में यमन से हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल दो हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करके बैनगुरियन एयरपोर्ट के पास तक आ गई थी। यह लगभग वही समय था जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू का विमान उतरने वाला था। इस मिसाइल के एयर डिफेंस ने नष्ट करने का दावा किया था। बेजमिन नेतन्याहू ने अपने आवास पर हमले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हिज्जबुल्ला ने मेरी हत्या की कोशिश करके बहुत बड़ी गलती की है। उनके कार्यालय ने एक बयान में बताया कि जिस वक्त यह हमला हुआ उस वक्त प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी वहां पर नहीं थे। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है, बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी निजी आवास पर छोड़े गए ड्रोन को लेकर कहा, ईरान की प्रॉक्सी हिज्जबुल्ला का मेरी और मेरी पत्नी की हत्या करने की कोशिश करना बहुत बड़ी गलती है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, यह मुझे या इजराइल को हमारे भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपने दुश्मनों के खिलाफ युद्ध जारी रखने से नहीं रोकेगा। मैं ईरान और उसके प्रॉक्सी से कहना चाहता हूं, जो भी हमारे लोगों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हम आतंकवादियों को खत्म करना जारी रखेंगे। हम अपने बंधकों को गाजा से वापस घर लेकर आएंगे। नेतन्याहू ने कहा कि हमने हत्यारे याहया सिनवार को मार दिया है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेइनी ने कहा कि सिनवार से पहले फिलिस्तीन के कई नेताओं के मारे जाने के बाद भी हमास अपना अभियान जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि हमास जिंदा है और जिंदा रहेगा। नेतन्याहू के निजी आवास के पास हमले के बाद इजराइल ने गाजा और लेबनान दोनों मोर्चों पर लड़ाई तेज कर दी है। उधर अमेरिका उन लीक दस्तावेजों की जांच कर रहा है जिसमें आंकलन किया गया है कि इजराइल ईरान पर हमला करने का प्लान बना रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि वैध दस्तावेज लग रहे हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के हवाले से चिह्नित सीक्रेट दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि इजराइल ईरान के हमले के जबाव में सैन्य हमले करने के लिए सैन्य साजो-सामान शिफ्ट कर रहा है।

-अनिल नरेन्द्र


जहाजों में बम की अफवाहों से खलबली।

पिछले सप्ताह ही कम से कम 30 ऐसी धमकियां मिलीं थीं जिनकी वजह से विमानों का रूट बदलना पड़ा था। फ्लाइट कैसिंल हुई या फिर काफी देर बाद उड़ान भरी गई। इस साल जून में एक ही दिन में 41 हवाई अड्डों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की झूठी धमकियां मिली थीं। नागरिक उड्डयन मंत्री राजमोहन नायडू का कहना है कि मैं भारतीय एयरलाइंस को निशाना बनाने वाली हालिया घटनाओं से बहुत चिंतित हूं। इससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने प्रभावित हो रही हैं। इस तरह की शरारती और गैर कानूनी हरकतें गंभीरता का विषय है। एयर इंडिया, विस्तारा, अकासा एयर, स्पाइस जेट, स्टार एयरलाइंस और एलायंस एयर के विमानों को बम की धमकी मिली। उड़ानों को सोशल मीडिया से बम की धमकी दी गई। एक विमान के शौचालय में नोट मिला। भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता विमानन बाजार है। यहां ऐसी अफवाहें भारी नुकसान करती हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार पिछले साल भारत में 15 करोड़ से अधिक यात्रियों ने घरेलू उड़ान भरी। देश में 33 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों सहित 150 से अधिक हवाई अड्डों से रोज 3000 से अधिक उड़ाने लैंड होती हैं या उड़ान भरती हैं। पिछले हफ्ते ये झूठी अफवाहों से स्थिति चरम पर थी। इस दौरान भारत की एयर लाइंस पर 14 अक्टूबर को एक दिन के रिकार्ड 4,84,263 यात्री सवार हुए। भारत में 700 से भी कम वाणिज्यक यात्री विमान हैं। विमानन कपंनियों को मिल रही धमकियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की बेचैनी बढ़ गई है। गृह मंत्रालय ने उड्डयन मंत्रालय से रिपोर्ट तलब की है। शनिवार की शाम को सिविल एविएशन सिक्यूरिटी ने विमानन कपंनियों के प्रमुखों के साथ बैठक की जिसमें धमकियों के मद्देनजर यात्रियें को होने वाली असुविधा और आर्थिक नुकसान पर भी चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि इन धमकियों की वजह से हुई अव्यवस्था के चलते करीब 80 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। सोशल मीडिया पर गुमनाम अकाउंट से बम धमकियों में नाटकीय वृद्धि के कारण अपराधियों की पहचान करने के प्रयास जटिल हो गए हैं। खासकर तब जब ईमेल सीधे एयरलाइंस को भेजे जा रहे हैं। इन धमकियों का मकसद साफ नहीं है और ये भी नहीं मालूम है कि इनके पीछे कोई एक व्यक्ति है या कोई गुट। पिछले हफ्ते इस तरह की धमकियां देने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के आरोप में एक 17 वर्षीय लड़के को गिरफ्तार किया गया था। ये स्पष्ट नहीं कि उसने ऐसा क्यों किया लेकिन माना जाता है कि इसने चार उड़ानों को निशाना बनाया।

Tuesday, 22 October 2024

यूक्रेनी महिलाओं ने मार गिराया रूसी ड्रोन


यूक्रेन का एक शहर है बुचा। यहां अंधेरा छाते ही रूस के हमलावर ड्रोन का झुंड आना शुरू हो जाता है। लेकिन ठीक उसी समय निकलती है कुछ बेखौफ महिलाएं। बात हो रही है यूक्रेन की एयर डिफेंस यूनिट की, जिसमें ज्यादातर महिलाएं ही शामिल हैं। ये महिलाएं खुद को विचेज ऑफ बुचा कहती हैं। ये एयर डिफेंस यूनिट की वालंटियर हैं। चूंकि पुरुषों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर भेजा जा रहा है ऐसे में महिलाएं यूक्रेन के आसमान की हिफाजत के लिए आगे आ रही हैं। यूक्रेन के सैनिक अक्सर रूस के उन ड्रोन्स पर निगाह रखते हैं, यह उनके मिसाइल हमलों से पहले एक साथ लहर के तौर पर भेजा जाता है ताकि यूक्रेनी सैनिकों की प्रमुख सुरक्षा पंक्ति पर हावी हुआ जा सके। कई लोग कहते हैं कि यह एक तरीका है। उस विवशता से बाहर आने का, जो उस वक्त महसूस हुई थी जब रूसी सेना ने बड़े पैमाने पर हमले कर बुचा पर कब्जा कर लिया था। ये उन दिनों की डरावनी कहानियां हैं, जिनमें हत्या, यातना और अपहरण जैसी घटनाएं शामिल हैं। ये तब बाहर आना शुरू हुईं जब मार्च 2022 के अंत में यूक्रेनी सेना ने इन इलाकों को आजाद करवा लिया। वेलेंतिना एक पशु चिकित्सक हैं, जो इन गर्मियों में ड्रोन बस्टर्स के तौर पर जुड़ी थीं, उनका कॉलसाइन (पुकारे जाने वाला नाम) वालिकरी है। मैं 51 साल की हूं। मेरा वजन 100 किलो है, मैं दौड़ नहीं सकती हूं। मुझे लगा था कि वो मुझे पैकिंग का काम सौंपेंगे मगर उन्होंने ड्रोन बस्टर्स टीम में ले लिया। वेलेंतिना कहती हैं, मैं यह काम कर सकती हूं। यह किट भारी है लेकिन हम महिलाएं ये कर सकती हैं। वेलेंतिना को ऐसा करके दिखाने का। मौका मिलता है, क्योंकि कुछ घंटों बाद पूरे इलाके में हवाई अलर्ट जारी हो जाता है। उनकी यूनिट अपने वेस से जंगल की ओर भागती है और हम अंधेरे में उनके पिकअप ट्रकों के पीछे चलते हैं जो मैदान के बीच से आगे बढ़ रहा है। इस टीम में एक मात्र पुरुष हैं जिन्हें इनमें कुलेंट के तौर पर हाथ से बोतल-पानी डालना पड़ता है। लेकिन बाबा आदम के जमाने के इन हथियारों का रखरखाव काफी अच्छा है। इन महिलाओं ने बताया कि उन्होंने इन हथियारों से अब तक तीन ड्रोन मार गिराए हैं। वेलेंतिना बताती हैं, मेरी भूमिका ड्रोन की आवाज ध्यान से सुनने की है। यह परेशान करने वाला काम है, लेकिन हमें हर पल हल्की सी आवाज को सुनने के लिए भी सतर्क रहना पड़ता है। वॉल्ँटियर यूनिट पर कोई सार्वजनिक डेटा नहीं है। ये नहीं मालूम कि इसमें कितनी महिलाएं शामिल हैं। मगर जैसे ही रात को रूस के विस्फोटकों से भरे ड्रोन आते हैं, तो ये यूनिट बड़े कस्बों और घरों के ऊपर एक अतिरिक्त ढाल के इर्द-गिर्द सुरक्षा की एक बड़ी ढाल बनाने में मदद करती हैं। इन महिलाओं ने अपनी तैनाती वाली जगह से अपने टैबलेट पर दो ड्रोन ट्रैक किए। ये दोनों पड़ोसी इलाके के ऊपर मंडरा रहे थे। शुरुआत में महिलाओं को सेना व सुरक्षा बलों में शामिल करने की बात को मजाक समझा जाता था। महिलाओं पर कम भरोसा किया जाता था। लेकिन अब ये सोच पूरी तरह बदल गई है। महिलाएं वीकेंड का अधिकतर वक्त मिलिट्री ट्रेनिंग लेने में बिताती हैं, मगर महिलाओं की प्रतिबद्धता और फोकस साफ है, वो अपनी निजी और गहरी वजहों से ऐसा कर रही हैं। वेलेंतिना कहती हैं मुझे मेरा पेशा याद है। मुझे अपने बच्चों की दहशत याद है, वो गहरी सांस लेकर कहती हैं, हम जब भाग रहे थे और बिखरी लाशें याद आ रही थीं।

-अनिल नरेन्द्र