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Wednesday, 18 April 2012

जुर्म की दुनिया में महिलाओंकी बढ़ती सक्रियता

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 18 April 2012
अनिल नरेन्द्र
राजधानी दिल्ली और एनसीआर में क्राइम की दुनिया में महिलाओं की सक्रियता चिन्ता का विषय बनता जा रहा है। एक समय था जब जुर्म की दुनिया में पुरुष बिग बॉस हुआ करते थे पर पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिनसे पता चलता है कि अब इस क्षेत्र में केवल पुरुष ही सरगना नहीं रहा महिलाएं भी कूदती जा रही हैं। विजय विहार थाना पुलिस ने शुक्रवार को कम्प्यूटर की मदद से घर में नकली नोट छापकर उन्हें सप्लाई करने वाली एक महिला को गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला की पहचान 42 वर्षीय अलका ग्रोवर के रूप में हुई है। उसके पास से 25,800 रुपये के नकली नोट व छपाई में इस्तेमाल किया जाने वाला सामान भी जब्त किया गया है। उसके दो फरार साथियों की तलाश जारी है। महिला दिल्ली से पंजाब तक यह नकली नोट सप्लाई करती थी। पुलिस उपायुक्त भोला शंकर ने बताया कि शुक्रवार को सूचना मिली थी कि विजय विहार सी ब्लॉक के एक घर में नकली नोट छापे जा रहे हैं। पुलिस ने छापा मारकर घर से 500 रुपये के 46,100 रुपये के 27 और 50 रुपये के दो नकली नोट बरामद किए। पति के जेल में होने की वजह से महिला के आर्थिक हालात बेहद खराब थे। उसके बच्चे पंजाब के स्कूल में पढ़ते हैं। वह जेल में एक दिन जब अपने पति से मुलाकात करने गई तो वहां उसे तेजेन्द्र और विनोद मिले, उसके आर्थिक हालात के बारे में जानकर उन्होंने उसे अपने गिरोह में शामिल कर लिया और यहीं से शुरू हुआ उसका घर में नकली नोट छापने का धंधा। छानबीन कर रही पुलिस ने जब नोट जब्त किए तो इसके नकली होने का उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ। दरअसल इन नोटों को बनाने में बेहतरीन क्वालिटी के कागज का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा वॉटर मार्प और सिक्यूरिटी थ्रेड भी नोट में होने की वजह से इसके नकली होने का किसी को शक नहीं होता था।

कुछ दिन पहले खबर आई थी कि दिल्ली में शराब तस्करी में भी एक महिला लेडी डॉन को गिरफ्तार किया। आउटर दिल्ली पुलिस को सूचना मिली कि रोहिणी इलाके में लिव-इन रिलेशन में रहने वाला एक जोड़ा शराब की तस्करी के धंधे को अंजाम दे रहा है। देर रात पुलिस ने रेड कर शिवानी, ब्रजमोहन और विनोद नामक युवक को गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के अनुसार शिवानी और ब्रजमोहन लिव-इन रिलेशन में रहते हैं। ब्रजमोहन और विनोद हरियाणा से देशी शराब लाने का काम करते थे। फिर महिला के इशारे पर उसे लैला, जॉनी वॉकर आदि जैसी महंगी ब्रांड की बोतलों में भरा जाता था। तस्करी पर शक न हो इसके लिए शिवानी खुद ही ग्राहक ढूंढने और डिलीवरी करने का काम करती थी। लाखों की संख्या में बरामद हुई शराब की बोतलों को पुलिस ने जब्त किया है। पूछताछ में पता चला है कि भारी मात्रा में बरामद शराब को एमसीडी चुनाव में खपाया जाना था। इन दोनों किस्सों के अलावा भी जुर्म की दुनिया में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता के किस्से सामने आए हैं। यह दुःख की बात है कि अवैध धंधों में अब महिलाएं भी बढ़चढ़ कर भाग लेने लगी हैं।
Anil Narendra, Crime, Criminals, Daily Pratap, Vir Arjun, Women in Crime

Saturday, 3 March 2012

दरिंदगी की सारी हदें पार करते दिल्लीवासी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3 March 2012
अनिल नरेन्द्र
पिछले कई दिनों से अखबारों में दिल्लीवासियों की दरिंदगी की खबरों ने चौंका दिया है। बच्चियों से रेप की घटनाओं ने एक बार फिर शर्मसार कर दिया है। इन वारदातों से सवाल उठ रहा है कि आखिर दिल्ली में इतनी दरिंदगी क्यों हो रही है? मुंडका के एक सुरक्षा गार्ड पर एक छह साल की बच्ची से दुष्कर्म का आरोप है। पुलिस ने अजय प्रसाद नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 20 वर्षीय अजय रविवार शाम चार बजे एक फल विकेता की बच्ची को मछली खिलाने के बहाने ले गया। बच्ची के पिता को पहले उस पर शक नहीं हुआ लेकिन जब मामला खुला तो वह दंग रह गया। पुलिस के अनुसार अजय बच्ची को एक खुले मैदान में ले गया और वहां उसके साथ बलात्कार किया। बाद में बच्ची रोती हुई आई और अपनी मां को सारी घटना बताई। उससे एक दिन पहले द्वारका इलाके में एक 16 साल की लड़की के साथ बलात्कार का मामला सामने आया। एक फार्म हाउस के 50 वर्षीय सुरक्षा गार्ड नन्द कुमार ने पास में रहने वाली लड़की को अगवा कर लिया और पास के मैदान में ले जाकर उसकी इज्जत लूटी। उसने लड़की को धमकी दी कि अगर उसने घर पर बताया तो वह उसे जान से मार देगा। पुलिस के अनुसार नन्द कुमार लड़की का परिजन है और उसे काफी समय से जानता है। दिल्ली कैंट में एक सेना के कर्मी पर अपने दोस्त की बीवी के साथ बलात्कार का आरोप है। पुलिस के अनुसार रविन्द्र सेना में सिविल विभाग में कार्यरत है और महिला, उसके पति को पहले से जानता है। घटना सोमवार सुबह करीब 11ः30 बजे की है। रविन्द्र सदर बाजार स्थित अपने एक दोस्त के यहां गया। वहां उसकी बीवी घर में अकेली थी। पुलिस के अनुसार बलात्कार के बाद रविन्द्र गायब हो गया लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि महिला का पति सेना में हैड कांस्टेबल है। रविन्द्र महिला के गांव का है और वह अकसर घर आता-जाता था। गुड़गांव में मालिक की होंडासिटी कार में ही ड्राइवर ने नौकरानी के साथ रेप कर दिया। पुलिस ने भोड़सी से चालक को गिरफ्तार कर लिया। उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सैक्टर-48 निवासी एयरफोर्स से रिटायर्ड अधिकारी मुकेश नाथ की बेटी की शादी रविवार की रात धौलाकुआं के पास हो रही थी। शादी के बाद मुकेश नाथ ने अपने ड्राइवर सोनू के साथ तीन घरेलू नौकरों को गुड़गांव भेजा। इसमें उनकी सास की नौकरानी भी थी। सोनू ने दो नौकर को सोहना रोड पर उतार दिया। आरोप है कि इसके बाद चालक ने उसके साथ रेप किया। दिल्ली की एक अदालत ने पिछले दिनों पार्प में बनी छतरी के नीचे रह रही 50 साल की महिला के अपहरण और रेप के मामले में प्रहलाद (19) को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। एडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ की अदालत ने दोषी पर 17000 रुपये का जुर्माना भी किया है। दुःख से कहना पड़ता है कि दिल्ली में हैवानियत की सारी हदें पार हो रही हैं और अब तो राजधानी को रेप कैपिटल कहा जाए तो गलत नहीं होगा। महिला संबंधित क्राइम तो सारी दुनिया में होते हैं पर छह साल की बच्ची से लेकर 80 साल की वृद्धा के साथ जब रेप हो तो यह चौंका देता है। आखिर हम किस ओर जा रहे हैं। इस तरह तो आदमी और जानवर में कोई फर्प ही नहीं रहेगा।
Anil Narendra, Crime, Criminals, Daily Pratap, Delhi, delhi Police, Vir Arjun

Sunday, 29 January 2012

यूपी चुनाव में 69 उम्मीदवार जेल से ही ठोंकेंगे अपनी ताल

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29th January  2012
अनिल नरेन्द्र
अन्ना हजारे या चुनाव आयोग भले ही जितना भी जोर लगा दें, प्रतिबंध लगा दें, उत्तर प्रदेश में राजनीति का अपराधीकरण होने से नहीं रोक सकते। धन बल और बाहुबल के बढ़ते उपयोग पर अंकुश लगाने के तमाम प्रयासों के बावजूद यह परवान चढ़ती नहीं दिख रही है। यह पहला मौका है जब उत्तर प्रदेश के किसी चुनाव में तकरीबन 69 उम्मीदवार जेल से चुनाव लड़ रहे हैं। वह भी तब जबकि अपराधियों को टिकट न देने का दावा करते हुए कोई दल थकता नहीं है। बात यहीं तक नहीं रुकती, आपराधिक प्रवृत्ति के 77 उम्मीदवारों को राजनीतिक दलों ने उतारने से परहेज नहीं किया। राजनीति में अपराधियों की यह उपस्थिति सिर्प चार चरण के उम्मीदवारों के आधार पर ही आंकी गई है। पूरे उम्मीदवारों के नाम और उन पर चस्पा आरोपों के मद्देनजर विश्लेषण किया जाए तो यह आंकड़ा काफी बड़ा दिखाई देता है। यह स्थिति तो तब है जब तस्वीर अभी धुंधली है। तस्वीर जब साफ होगी तो सही स्थिति का पता चलेगा। उत्तर प्रदेश के इस 16वीं विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव में अपराधियों को चुनावी दंगल में उतारने के मामले में सभी राजनीतिक दल बेनकाब हो गए हैं, हकीकत तो यह है कि इस हमाम में सभी नंगे हैं। शायद ही कोई ऐसा दल हो जिसने जेल में बन्द किसी न किसी को माननीय बनाने की न ठान ली हो। समाजवादी पार्टी ने अमर सिंह को फैजाबाद से उतारा है, जो इन दिनों जेल में बन्द हैं। पीस पार्टी ने यहीं से जितेन्द्र सिंह बबलू को जेल में रहते ही चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी थी। यही नहीं, पीस पार्टी ने सुल्तानपुर से भी दो दबंगों सोनू सिंह और मोनू सिंह को टिकट थमाए हैं। जो हाल ही में जेल से छूटे हैं। अपना दल ने जेल में बन्द अतीक अहमद और अंतर्राष्ट्रीय माफिया मुन्ना बजरंगी को माननीय बनाने की ठानी है। मुन्ना ने तिहाड़ जेल से नामांकन पत्र दाखिल किया है। मऊ से निर्दलीय मुख्तार अंसारी ने आगरा केंद्रीय जेल से नामांकन पत्र दाखिल किया है। इन्हें बीते लोकसभा चुनाव में बसपा ने वाराणसी से भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ उतारा था। गुजरात के अहमदाबाद जेल में बन्द बृजेश सिंह चन्दौली जिले की सैयद रजा सीट पर प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं। कबीना मंत्री नन्द गोपाल नन्दी पर जानलेवा हमले का आरोपी फतेहपुर जेल में बन्द विजय मिश्र सपा की टिकट से मिर्जापुर जिले की ज्ञानपुर सीट से मैदान में हैं। कांग्रेस ने अकेले गाजीपुर की जमनिया सीट से जेल में बन्द कलावती बिन्द को उम्मीदवार बनाया है। इसी जिले से कांग्रेस ने रासुका तथा गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल में बन्द शैलेश सिंह को उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया है। जेल में बन्द फूलन देवी की हत्या के आरोपी शेर सिंह राणा ने भी गौतमबुद्ध नगर की जेवर सीट से राष्ट्रवादी प्रताप सेना के बैनर तले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। दागी उम्मीदवारों को टिकट देने के मामले में सभी दलों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है। इसी का नतीजा है कि तकरीबन गम्भीर आपराधिक मामले वाले 15 फीसदी उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं। भाजपा ने 14, सपा ने 15, कांग्रेस ने 17 फीसदी आपराधिक छवि के उम्मीदवारों को उतारा है। बसपा भी पीछे नहीं, उसने भी 16 फीसदी आपराधिक छवि के उम्मीदवार को उतारा है। छोटे दलों की तो बात ही नहीं करते। इस हमाम में सभी नंगे हैं।
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Tuesday, 24 January 2012

उत्तर पदेश चुनाव में बाहुबलियों के मामले में सबका दामन दागदार

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 24th January  2012
अनिल नरेन्द्र
निर्वाचन आयोग चाहे जितने भी कानून बनाए, उत्तर पदेश विधानसभा चुनावों में इन बाहुबलियों को नहीं रोक सकता। यह कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं। इन बाहुबलियों का अंतिम उद्देश्य शायद एक विधायक बनना होता है और ऐसा करने के लिए पहले तो वह बड़ी सियासी दलों को टटोलते हैं। जब उसे वहां जगह नहीं मिलती तो वह कोई छोटा दल ढूंढता है क्योंकि उसे उस दल के बूते पर तो चुनाव जीतना नहीं उसे तो वह उस पार्टी का चुनाव चिह्न चाहिए। ऐसा ही एक दल है अपना दल। इस दल से ही इलाहाबाद के अतीक अहमद की माननीय बनने का सपना पूरा हुआ था। यह बात दीगर है कि इसके बाद समाजवादी पार्टी ने भी उन्हें अपने यहां जगह देकर लोकसभा तक पहुंचाया और वह भी पंडित जवाहर लाल नेहरू के संसदीय क्षेत्र से। 2004 में अपना दल के संस्थापक सोने लाल पटेल ने बबलू श्रीवास्तव को सीतापुर से अपना दल का उम्मीदवार बनाया था। यही नहीं, उनकी किताब `अधूरा ख्वाब' का लोकार्पण भी पटेल ने किया था। अब जब दूसरे माफिया मुन्ना बजरंगी को माननीय बनने की ख्वाहिश हुई है तब उनके ख्वाब को भी अपना दल ही पंख लगा रहा है। मुन्ना बजरंगी जौनपुर से अपना दल के उम्मीदवार हैं। अतीक अहमद फिर एक बार इलाहाबाद से अपना दल के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं। कुछ यही स्थिति पीस पार्टी की भी है। कांग्रेस पदेश अध्यक्ष डॉ. रीता जोशी का घर जलाने के आरोपी जितेन्द्र सिंह बबलू को पीस पार्टी के अपने यहां जगह दी थी। मायावती बाद में उन्हें निकाल पाईं। अब वह बीकापुर से मैदान में है। यही नहीं, अपने बूते पर सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतते आ रहे अखिलेश सिंह को भी पीस पार्टी में न केवल राजनीतिक शरण मिली बल्कि उन्हें राष्ट्रीय महासचिव का ओहदा भी दे दिया गया। दागियों को चुनाव से दूर रखने की बात सभी दल करते हैं पर इस पर अमल धेले का नहीं होता है। वाराणसी के अजय राम पख्यात बाहुबली हैं। यह पहले भाजपा में थे। लोकसभा में चुनाव का टिकट नहीं मिला तो समाजवादी पार्टी में चले गए। इस बार वह वाराणसी की पिडरा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। निर्दलीय उम्मीदवार रघुराज पताप सिंह उर्प राजा भैया समाजवादी पार्टी के करीब है। इस बार टुंडला सीट से फिर चुनाव लड़ रहे हैं। रायबरेली जिले से उम्मीदवार मोहम्मद मुस्लिम के खिलाफ मारपीट, बलवा जैसे मामले दर्ज हैं। सपा में भी दागियों की कमी नहीं। मित्रसेन यादव को हाल ही में अदालत से एक मामले में सजा हुई है। यादव के बेटे आनंद सेन यादव एक दलित छात्रा के दुष्कर्म और हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। सपा ने मित्रसेन को फैजाबाद जिले की बीकापुर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। बाहुबली अभय सिंह भी फैजाबाद की गोसाईगंज सीट से सपा के उम्मीदवार हैं। गुड्डू पंडित और विनोद सिंह उर्प पंडित सिंह भी सपा के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं। लिस्ट बहुत लंबी है, किस-किस की कहानी बताएं। चुनाव हर हाल में जीतने की चाह में सभी दल यह नहीं देखते कि वह किस व्यक्ति को टिकट दे रहे हैं , उसका चरित्र क्या है और रिकार्ड क्या है? यही वजह है कि राजनीति में अपराधिकरण बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग क्या करे जब यह सियासी दल खुद ही इससे परहेज नहीं करते हैं?
Anil Narendra, Crime, Criminals, Daily Pratap, State Elections, Uttar Pradesh, Vir Arjun