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Sunday, 20 May 2012

राजधानी की सड़कों पर आम पब्लिक तो क्या जज भी सुरक्षित नहीं


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 20 May 2012
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली की सड़कें इतनी असुरक्षित होती जा रही हैं कि अब तो सड़क पर चलने से डर लगने लगा है। आम लोग तो अब दूर की बात है, राजधानी में तो जज तक सुरक्षित नहीं हैं। हाल ही में लाजपत नगर इलाके में रोडरेज की घटना में एक जज के साथ मारपीट हुई थी अब बृहस्पतिवार शाम को एक बार फिर कार सवार तीन जजों पर हमला हो गया। यह वारदात दक्षिणपुरी इलाके में हुई जहां एस्टीम कार में सवार तीन जजों की गाड़ी मामूली रूप से एक बाइक से टच हो गई थी। इस बात को लेकर शुरू हुई कहासुनी के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि बाइक सवार युवकों ने जज की गाड़ी पर ईंटें बरसाकर हमला कर दिया। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (एमएम) अजय गर्ग और दो एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (एजीडे) मनोज कुमार नागपाल और इन्द्रजीत सिंह शाम को साकेत कोर्ट से एक ही कार से फरीदाबाद स्थित अपने घर जा रहे थे। दक्षिणपुरी के जे ब्लॉक में उनकी गाड़ी एक प्लेटिना बाइक से टकरा-सी गई। इससे बाइक पर सवार दो युवक भड़क गए और उन्होंने कार चालक चमन लाल को बाहर खींच लिया। युवकों ने पहले तो कार में सवार जजों के साथ बदसलूकी की और फिर उनके साथ हाथापाई की। थोड़ी देर बाद बाइक सवार दो और युवक वहां पहुंच गए और उन्होंने भी मारपीट शुरू कर दी। हमलावरों ने आसपास पड़े ईंट-पत्थरों से कार की तोड़फोड़ शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पीछे की सीट पर बैठे दोनों एडीजे मनोज कुमार नागपाल और इन्द्रजीत सिंह पास स्थित एक मकान की तरफ भागे। दोनों एडीजे को मामूली चोट आई जबकि एमएम अजय गर्ग और ड्राइवर चमन लाल के सिर में चोटें आई हैं। हमलावर चारों युवक अपनी बाइकें घटनास्थल पर ही छोड़कर फरार हो गए। ये दोनों बाइकें दिल्ली नम्बर की हैं। पुलिस ने वारदात के बाद घटना में शामिल अनिल नामक युवक को अम्बेडकर नगर से पकड़ा और उसकी निशानदेही पर दो अन्य युवकों को भी हिरासत में लिया है। इसमें से अनिल ने खुद को पत्तर से घायल कर लिया है। वह अभी अस्पताल में दाखिल है। दिल्ली में रोडरेज की घटनाएं दिन-प्रति-दिन बढ़ती ही जा रही हैं। वर्ष 2011 में कुल हत्याएं 17 फीसदी रोडरेज के चलते हुईं, 2010 में यह तादाद 15 फीसदी थी। वक्त आ गया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सजग हुआ जाए। सिर्प पुलिस को कोसने से कुछ खास नहीं होगा। बेशक अपराध नियंत्रण का जिम्मा पुलिस का है पर रोडरेज में पुलिस क्या कर सकती है? दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले लोगों का आत्म संयम कम होता जा रहा है। मामूली-सी रगड़ लग जाए, साइड न मिले तो अपना आपा खो देते हैं। इन्हें अब इसकी परवाह भी नहीं कि जिस पर हमला कर रहे हैं वह व्यक्ति कौन है। किस उम्र का है? हाल में `एम्स' के एक अध्ययन का निष्कर्ष है कि दिल्ली के तकरीबन 20 फीसदी से अधिक युवक रक्तचाप यानि ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं। आधुनिक जीवन की आपाधापी और गलाकाट प्रतिस्पर्धा ने युवाओं को दिमागी तथा शारीरिक स्तर पर प्रभावित किया है अब जाहिर है। यही कारण है कि घर के भीतर-बाहर अपराध बढ़ रहे हैं। राजधानी में मौसम के पारे के साथ-साथ सड़क पर युवाओं का पारा भी बढ़ता जा रहा है। सड़कें तंग होती जा रही हैं, वाहन बढ़ते जा रहे हैं। जजों पर हमला करने वाले युवकों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इनको तो सड़क पर चलने ही नहीं देना चाहिए। इनके लाइसेंस ही रद्द कर दो। तभी रोडरेज के यह बढ़ते मामले रुकेंगे।

Friday, 27 April 2012

राजधानी के बच्चियों के सौदागरों का धंधा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 27 April 2012
अनिल नरेन्द्र
राजधानी दिल्ली में छोटी बच्चियों के सौदागरों ने आफत मचा रखी है। पिछले दिनों ऐसी उठाई गई आठ बच्चियों को छुड़ाया गया। एक एजेंसी ने छापा मारकर जिन आठ बच्चियों को छुड़ाया तो उन्होंने अपनी आपबीती चाइल्ड वैलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को बताई। इसके बाद सीडब्ल्यूसी ने पुलिस को निर्देश दिया कि इन लड़कियों से मिले सुरागों के आधार पर प्लेसमेंट एजेंसियों और ट्रेफिकिंग रैकेट में शामिल लोगों की पहचान की जाए और उन पर कार्रवाई की जाए। सीडब्ल्यूसी, लाजपत नगर ने पुलिस को निर्देश दिया है कि ट्रेफिकिंग के जाल में फंसी बाकी बच्चियों को भी छुड़ाया जाए। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों सीडब्ल्यूसी के निर्देश पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक प्लेसमेंट एजेंसी पर छापा मारकर आठ बच्चियों को आजाद कराया था। इन बच्चियों को पश्चिम बंगाल के अलग-अलग गांवों से ट्रेफिकर्स यहां लाए थे। प्लेसमेंट एजेंसी ने इन्हें नौकरानी के काम पर लगा दिया था। आरोप है कि वहां इनका शोषण हो रहा था। सूत्रों के मुताबिक कम से कम 20 बच्चियां इनके जाल में हैं। वसंत विहार जैसे पॉश इलाके से पिछले दिनों एक आठ साल की बच्ची को एक घर से छुड़ाया गया। यह बच्ची वहां नौकरानी थी। बटरफ्लाई चाइल्ड हेल्पलाइन ने वसंत विहार थाने में इस बारे में शिकायत दर्ज की थी। एडीशनल डीसीपी (साउथ) प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि बच्ची बिहार के छपरा की रहने वाली है। जिस घर से बच्ची को छुड़ाया गया है, उसके मालिक का कहना है कि बच्ची उनकी दूर की रिश्तेदार है और 10 दिन पहले ही उसकी दादी उसे वहां छोड़कर आई थी। छुड़ाई गई आठ लड़कियों को सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया गया। दो लड़कियों ने साफ बताया कि उनके साथ बहुत कूरता की गई। उन्होंने कहा कि एम्प्लायर ने उन्हें फिजिकली अब्यूज किया और ये यौन प्रताड़ना की शिकार बनीं। प्लेसमेंट एजेंसी के मालिक के खिलाफ भी शिकायत है कि उसने बच्चियों को कोई मेहनताना भी नहीं दिया। एक लड़की ने बताया कि मालवीय नगर में जहां वह काम करती थी, उसका मालिक उसे छोटी-छोटी बातों पर पीटता था। उसे कभी पैसा नहीं दिया। दूसरी लड़की ने बताया कि उसे बुरी तरह मारा जाता था। उसने दाईं आंख पर चोट के निशान भी दिखाया। उसने बताया कि किस तरह मालिक का बेटा कई बार उसके शरीर को छूता था। जब कोई घर में नहीं होता था तो वह मुझे अपने कमरे में बुलाता था। जब मैंने यह सब करने से मना कर दिया तो उसने बुरा बर्ताव शुरू किया। मैंने डर के मारे किसी को कुछ भी नहीं बताया। एक नाबालिक लड़की जो मेड का काम करती थी, उसको पुलिस और बचपन बचाओ आंदोलन कार्यकर्ताओं ने गीता कॉलोनी से हाल में छुड़ाया। इलाके के घर में नौकरानी का काम करने वाली पर मालिक का डर इतना हावी था कि उसने चार साल पहले अपनी मां को ही पहचानने से इंकार कर दिया। बुधवार को जब वह अपने परिवार से मिली तो उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। राजधानी में मेडों के नाम पर ट्रेफिकिंग का धंधा फलफूल रहा है और इनमें कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों का बहुत बड़ा हाथ है। इसे कैसे रोका जाए, यह पुलिस के अलावा मां-बाप और समाज की भी जिम्मेदारी बनती है।
Anil Narendra, Crime, Daily Pratap, Delhi, delhi Police, Trafficking, Vir Arjun

Sunday, 15 April 2012

क्या दिल्ली एनसीआर तीव्र भूकम्प सह सकेगा?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 15 April 2012
अनिल नरेन्द्र
इंडोनेशिया के पास समुद्र में आए दो जबरदस्त भूकम्पों से बुधवार को भारत से लेकर आस्ट्रेलिया तक धरती कांप उठी। दोपहर बाद आए भूकम्प के बाद हिंद महासागर क्षेत्र के तमाम देशों में सुनामी का खौफ बना रहा। शुक्र है कि कहीं भी सुनामी नहीं आई। इंडेनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास आए इन भूकम्पों की तीव्रता 8.5 और 8.2 मापी गई। इसका केद्र बंदा असेह से 435 किमी दूर और समुद्र तल से 33 किमी की गहराई में था। वर्ष 2004 में बंदा असेह में आए भूकम्प के बाद उठी सुनामी लहरों ने भारत समेत कई देशों में कहर बरपाया था, जिसमें दो लाख से अधिक लोगों की जानें चली गई थीं। इन दो भूकम्पों का असर भारत पर भी पड़ा। कोलकाता, भुवनेश्वर व दिल्ली तक इससे प्रभावित हुए। मैं यह सोचने पर मजबूर हो गया कि भगवान न करे अगर दिल्ली एनसीआर में इतना तीव्र भूकम्प आए तो क्या होगा? पांच मार्च को एनसीआर में सिर्प 4.9 तीव्रता का भूकम्प आया था तो इसी से पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। दिल्ली के ललिता पार्प हादसे की जो रिपोर्ट सरकार के सामने जस्टिस (रिटायर्ड) लोकेश्वर प्रसाद ने पेश की है उसमें साफ किया गया है कि मशरूम की तरह बने एनसीआर में भवन, अनियंत्रित निर्माण, भवन में बिना विशेषज्ञ की देखरेख के अल्ट्रेशन से भूकम्प प्रभावित जोन-4 वाली दिल्ली खतरे में है। न सिर्प भवन निर्माण उपनियम को सख्ती से लागू करने की जरूरत है बल्कि पुराने भवन के खतरों को परखने वाली स्टडी और री-डेवलपमेंट की सख्त जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार इंजीनियरिंग के बिना बनने वाले मकानों के खतरे के अलावा पानी के टैंक, बढ़ती आबादी के कारण अधिक जनसंख्या, बिना कंक्रीट के पिलर के मकान भूकम्प की दशा में बहुत खतरनाक हैं। दिल्ली में 1639 अनाधिकृत कॉलोनियां हैं। इन अनाधिकृत कॉलोनी और अनाधिकृत नियमित कॉलोनी की इमारतें सुरक्षित नहीं हैं। निर्माण में इंजीनियरिंग का पालन नहीं हुआ, मकानों में बिना स्ट्रक्चर लोड टेस्ट के एक के बाद दूसरी मंजिल बनाई जा रही है। इससे मकान कमजोर होता जा रहा है। पूर्वी दिल्ली तो रेत पर खड़ी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि मजबूत भवनों के लिए जरूरी है कि भवन कोड का पालन डिजाइनर स्तर पर हो। निर्माण में इस्तेमाल सामग्री उच्च गुणवत्ता की हो और सुपरविजन स्ट्रिक्ट हो। इतना ही नहीं पुराने मकान पर नई मंजिल या कोई अन्य बदलाव बिना एक्सपर्ट के किया जाता है तो वह खतरनाक है। इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार मिटाने और सुरक्षा के लिए भवन निर्माण का कई स्तर पर थर्ड पार्टी आडिट कराए जाने की सलाह भी दी है। भूकम्प विशेषज्ञ बताते हैं कि एनसीआर में रिएक्टर स्केल पर 8 से ऊपर का भूकम्प आया तो हालात बहुत खराब होंगे। जनगणना 2011 के घरों के सर्वे में इस्तेमाल मैटेरियल को आधार बनाकर एनडीएमए के हिसाब से 92 फीसदी मकान ऐसे हैं जो परमपरागत तरीके से बने हैं। पिछले 2 सालों में भारत के बड़े इलाकों में 4 से 5 मध्य तीव्रता वाले भूकम्प आ चुके हैं। भू-गर्भ विज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों से ज्यादा खिलवाड़ का सिलसिला जारी रहा तो खतरा और बढ़ेगा। जरूरी है कि विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए सुझावों पर शीघ्र अति शीघ्र अमल किया जाए।
Anil Narendra, Daily Pratap, Delhi, Earthquake, Vir Arjun

Thursday, 29 March 2012

नगर निगम चुनाव ः कहीं यह विभीषण न डुबा दे कांग्रेस-भाजपा को

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29 March 2012
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली में नगर निगम के चुनाव को लेकर एक बार फिर राजनीति में गर्मी आ गई है। टिकटों की मारामारी से जहां कांग्रेस बुरी तरह उलझी रही वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इतनी मारामारी शायद पहले कभी नहीं देखी होगी। आशा के अनुरूप दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन विभिन्न दलों और निर्दलीय मिलाकर रिकॉर्ड 1785 पत्याशियों ने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए 68 केंद्रों पर नामांकन किया। एक दिन में इतने अधिक पत्याशियों द्वारा नामांकन का यह रिकॉर्ड है। नगर निगम के उम्मीदवारों के चयन में भाजपा के सभी नियम-कानून तार-तार हो गए। पार्टी ने जहां कई दिग्गजों को बाहर कर दिया ठीक वहीं पदेश अध्यक्ष ने विरोधियों को निपटाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। खास बात यह रही कि करीब 55 पार्षदों को पार्टी ने दोबारा मैदान पर नहीं उतारा है। पार्टी ने इस बार 17 पार्षदों को दूसरे वार्डों से चुनाव मैदान में उतारा है। पार्टी की ओर से जारी उम्मीदवारों की सूची में करीब आधा दर्जन महत्वपूर्ण कमेटियों के अध्यक्षों के नाम गायब हैं। नगर निगम चुनाव में पत्याशियों के चयन में कांग्रेस की एक्सपर्ट कमेटी ने केवल 24 पार्षदों को जीतने योग्य माना और उन पर विश्वास कर उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है। 2007 निगम चुनाव में कांग्रेस के 67 पार्षद जीतने में सफल रहे थे, कांग्रेस चयन समिति ने उन 67 में से 43 पार्षदों को टिकट नहीं दिया है। इनमें कई ऐसे वार्ड हैं जहां वार्डों में बदलाव हुआ है और वह आरक्षित हो गया है। 248 नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। हालांकि कांग्रेस पदेशाध्यक्ष का दावा था कि किसी ऐसे व्यक्ति के परिजन को टिकट नहीं दिया जाएगा जिसका वार्ड आरक्षित हो। वहीं ऐसा भी व्यक्ति टिकट पाने का हकदार नहीं होगा जो वर्ष 2007 के निगम चुनाव में 1000 से अधिक मतों से पराजित हुआ हो। पत्याशी चयन में जो पैमाने पदेश कांग्रेस कमेटी ने बनाए थे, वह सभी ध्वस्त हुए हैं। कांग्रेस की इसी नीति के चलते बड़े पैमाने पर कांग्रेस से बगावत कर लोगों ने दलबल सहित नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। दोनों, भाजपा और कांग्रेस में पुराने नेता और कार्यकर्ताओं की वफादारी पर बड़े नेताओं के चहेतों के साथ रिश्तेदार भारी पड़े। बड़े-बड़े नेताओं ने जमीन के धंधे से जुड़े लोगों के साथ ही अपने रिश्तेदारों में टिकट बांट दी। भाजपा में टिकट बांटने वालों ने अपनी चलाने के लिए मौजूदा 117 पार्षदों के टिकट काट दिए। इनमें से 22 पार्षद अपनी पत्नी या बहू को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। भाजपा के कुल मिलाकर पदों पर जमे 62 नेता अपनी-अपनी पत्नी और बहू को टिकट दिलाने में सफल रहे। ये सब उन महिला कार्यकर्ताओंs पर भारी पड़ी हैं जो लंबे अरसे से पार्टी का झंडा उठा रही थीं। दिल्ली की दोनों पतिद्वंद्वी पार्टियों कांग्रेस-भाजपा ने इतनी बड़ी संख्या में राजनीतिक विभीषण तैयार कर दिए हैं, जो उम्मीदवारों की लंका उजाड़ने का काम करेंगे। कांग्रेस में उम्मीदवारों की सूची हमेशा अंतिम समय पर ही जारी होती थी, लेकिन बगावत के चलते एक उम्मीदवार को टिकट देकर फिर दूसरा उम्मीदवार बदलना पार्टी के लिए नई मुसीबत खड़ी कर रहा है। उधर भाजपा पार्टी विद फैमिली दिखाई दे रही है। यहां पार्टी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपने परिवार को महत्व दिया गया है। बगावत दोनों ही पार्टियों के लिए एक नई सिरदर्द बनकर आई है। कहीं यह विभीषण दोनों पार्टियों की लंका को न जला दे।
Anil Narendra, BJP, Congress, Daily Pratap, Delhi, Elections, MCD, Vir Arjun

Tuesday, 27 March 2012

यूपी की फतह के बाद अब मुलायम की नजरें दिल्ली तख्त पर

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 27 March 2012
अनिल नरेन्द्र
उत्तर प्रदेश की सत्ता हासिल करने के बाद समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की नजर अब दिल्ली के तख्त पर लग गई है। अब मुलायम ने मध्यावधि चुनाव कभी भी सम्भव की बात कही है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहने की बात कही थी। ममता, मुलायम के सुर में सुर मिलाते हुए भाजपा की सुषमा स्वराज ने भी देश में मध्यावधि चुनाव की सम्भावना जताई है। देवास (मध्य प्रदेश) में जिला निगरानी एवं सतर्पता समिति की बैठक में भाग लेने आई सुषमा ने मीडिया कर्मियों से कहा कि देश की राजनीति हर दिन बदल रही है और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मध्यावधि चुनाव की सम्भावना है। सुषमा ने कहा कि केंद्र के लिए 272 का जादुई आंकड़ा नहीं रह गया है तथा वह मात्र 227 सांसदों पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्र में सरकार की अल्पमत की स्थिति को देखते हुए भाजपा मध्यावधि चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। मुलायम का निशाना प्रधानमंत्री बनने का है। उन्होंने शुक्रवार को समाजवादी चिन्तक डॉ. राम मनोहर लोहिया की 102वीं जयंती पर लखनऊ में अपने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि अब लोकसभा के मध्यावधि चुनाव के लिए कमर कस लें क्योंकि लोकसभा चुनाव कभी भी हो सकते हैं। इस साल या फिर अगले साल, इसलिए सारे कार्यकता पूरी ताकत अभी से लगा दें। उन्होंने कार्यकर्ताओं के सामने यूपी की विराट विजय के बाद प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटें जीतने का भी लक्ष्य दिया है। दरअसल श्री मुलायम सिंह यादव ने एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश की है। ऐसे समय जब समाजवादी पार्टी का रुख कांग्रेस के प्रति मुलायम होता दिख रहा था और ममता बनर्जी की भरपायी के लिए सपा को केंद्र में जगह मिलने की अटकलें तेज हो रही थीं तभी मुलायम ने मध्यावधि चुनाव की बात कहकर कांग्रेस की हवा निकाल दी। एक ओर उन्होंने कांग्रेस के प्रति मुलायम होने का अपने रुख का अप्रत्यक्ष रूप से खंडन कर दिया वहीं दूसरी ओर अपने कार्यकर्ताओं को कांग्रेस के खिलाफ धार तेज करने का सन्देश दे दिया। यही नहीं, उन्होंने अपने बेटे और मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह को यह बता दिया कि उनकी सरकार के कामकाज पर ही लोकसभा चुनाव लड़े जाएंगे। भले ही मुख्यमंत्री का कार्यकाल पांच साल का हो पर उनके कसौटी पर होने वाले कामकाज की अग्निपरीक्षा एक साल के भीतर ही हो जाएगी। मुलायम को मध्यावधि चुनाव इसलिए भी सूट करता है क्योंकि अभी उन्होंने न केवल अपने `भाई' (मुस्लिम-यादव) समीकरण को ठीक से बांध रखा है बल्कि समावेशी राजनीति की ओर कदम बढ़ाते हुए सभी जातियों के वोट बैंक हथियाने का करिश्मा दिखाया है। जिस तरह अखिलेश ने अपनी पहली ही बैठक में लैपटॉप, टैबलेट और बेरोजगारी भत्ता सरीखे की घोषणा पत्र की प्रमुख मांगों को हरी झंडी दिखा दी, उससे यह अटकलें भी खारिज हो गईं कि आखिर सपा की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए धनराशि कहां से आएगी। मध्यावधि चुनाव की स्थिति में मुलायम सिंह को यह फायदा होने की उम्मीद होनी चाहिए कि सालभर तक लोग कम से कम मायावती राज की यादें ताजा ही रखेंगे। मायावती के प्रति नाराजगी का फायदा भी सपा को लोकसभा में जरूर मिलेगा। उत्तर प्रदेश के नजरिये से देखा जाए तो मध्यावधि चुनाव बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए भी कम मुफीद नहीं कहा जा सकता। चुनाव में पराजय के बाद अपनी पहली प्रेसवार्ता में बहन जी ने उम्मीद जताई थी कि सपा के लोगों की अराजकता उन्हें फिर अगले चुनाव में जीतने का मौका देगी। हालांकि मायावती के लिए सपा कार्यकाल में जितने दिनों बाद चुनाव हो, वह मुफीद रहेगा क्योंकि उन्होंने उम्मीद पाल रखी है कि सपा की गलतियों से उनकी पार्टी को फायदा होगा। वैसे उनकी यह उम्मीद बेमानी नहीं है क्योंकि पहली बार अगर मुलायम सिंह यादव बसपा के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ते तो उत्तर प्रदेश में पांव पसारने का मौका बसपा को इतनी जल्दी नहीं मिलता। यही नहीं, गेस्ट हाउस कांड नहीं हुआ होता तो भी भाजपा मायावती को मुख्यमंत्री बनाने की गलती नहीं करती। मुलायम सरकार के तीसरे कार्यकाल में सपा कार्यकर्ताओं के उत्पात ने ही मायावती को 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का अवसर दिया। ऐसे में मायावती की खुशफहमी वाजिब है लेकिन जिस तरह सपा सरकार चल रही है उसके मद्देनजर जरूर इसे बेमानी कहा जाएगा। बसपा के संस्थापक कांशीराम अपने भाषणों में साफ तौर पर कहा करते थे कि कमजोर सरकार और बार-बार चुनाव उनकी पार्टी के लिए फायदेमंद हैं।
Anil Narendra, Congress, Daily Pratap, Delhi, MCD, Samajwadi Party, Uttar Pradesh, Vir Arjun

Tuesday, 13 March 2012

इजरायली राजनयिक पर हमले में ईरानी पत्रकार की गिरफ्तारी?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 13 March 2012
अनिल नरेन्द्र
13 फरवरी को नई दिल्ली के अति सुरक्षित क्षेत्रों में से एक औरंगजेब रोड पर इजरायली महिला राजनयिक टाल योहाशुआ की इनोवा कार के पिछले हिस्से में एक मोटर साइकिल सवार ने मैग्नेटिक डिवाइस (स्टिकी बम) लगा दिया था। इसके तत्काल बाद हुए विस्फोट से कार में आग लग गई थी। महिला राजनयिक व कार चालक मनोज घायल हो गए थे। तीन अन्य गाड़ियां भी इसकी चपेट में आई थी, दिल्ली पुलिस ने इस धमाके के सिलसिले में एक ईरानी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। ईरानी व्यक्ति ने स्वयं को एक न्यूज एजेंसी का पत्रकार बताया है। गिरफ्तार व्यक्ति का नाम सैयद मोहम्मद काजमी (50 वर्ष) है और वह ईरानी न्यूज एजेंसी के लिए काम करता था। पुलिस का कहना है कि सैयद मोहम्मद काजमी की गिरफ्तारी के सुराग बैंकाक से मिले थे। याद रहे कि जिस दिन दिल्ली में कार बम लगाया गया था ठीक उसी दिन बैंकाक में भी एक धमाका करने का असफल प्रयास किया गया था। दिल्ली में हुए धमाके के तार न केवल बैंकाक से ही जुड़े हैं बल्कि जार्जिया से भी जुड़े हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दूतावास की कार पर हुए बम धमाके की पहली कामयाबी भी इसी का नतीजा है। फिलहाल पुलिस इस हमले के पीछे शामिल संगठन के नाम का खुलासा नहीं कर रही है लेकिन कहीं न कहीं इस हमले के पीछे ईरानी संगठन पूंड्स (क्यूयूडीएस) के हाथ होने की आशंका जरूर जताई जा रही है। दरअसल बैंकाक में हुए विस्फोट के बाद वहां से कुछ संदिग्ध ईरानी फरार हो गए थे, जिनमें एक महिला भी शामिल थी। बैंकाक पुलिस को उस महिला के घर की तलाशी में एक टेलीफोन डायरी मिली थी जिसमें काजमी का मोबाइल नम्बर था। काजमी के खिलाफ कई महत्वपूर्ण सुबूत मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि हमलों के पीछे ईरानी सेना की स्पेशल फोर्स है, जिसे खासतौर से ईरान-इराक युद्ध के समय गठित किया गया था। मोहम्मद अहमद काजमी को सूचनाएं जुटाने के लिए डालर में भुगतान किया गया था। ब्लास्ट में जिस मोटर साइकिल का इस्तेमाल किया गया वह करोल बाग इलाके से किराये पर ली गई थी। हमलावर विदेश से आकर पहाड़गंज के एक होटल में ठहरे थे। बताया जा रहा है कि स्टिकी बम इसी होटल में तैयार किया गया। पूरे मामले का दुःखद पहलू यह है कि विदेशी बाम्बर जिसने औरंगजेब रोड में कार पर बम लगाया था वह गृह मंत्रालय की सुस्ती के कारण उसी दिन इन्दिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दक्षिण-एशिया के किसी देश की फ्लाइट से भाग गया। 3 बजे के लगभग दोपहर को बम लगाने के 8 घंटे बाद वह निकल गया। गृह मंत्रालय या किसी और सरकारी एजेंसी ने हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन को सूचित नहीं किया कि अमूक व्यक्तियों को रोका जाए, पूछताछ की जाए। गृह मंत्रालय की यह चूक इसलिए भी चिन्ता का विषय है कि बम धमाका होने के तुरन्त बाद इजरायल ने कह दिया था कि हमले के पीछे ईरान का हाथ है। इमिग्रेशन में हर ईरानी को रोक कर तसल्ली करनी चाहिए थी जो नहीं की गई और हमलावर भागने में सफल रहा। इस मामले में गिरफ्तार मोहम्मद अहमद काजमी के परिजनों ने दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि पुलिस द्वारा बरामद स्कूटी उनके एक रिश्तेदार की है। करीब दो साल से वह स्कूटी उनके घर पर खड़ी थी। परिवार का कोई सदस्य उस स्कूटी का उपयोग नहीं करता है। मोहम्मद काजमी के दूसरे बेटे शौजब काजमी ने गिरफ्तारी के अरेस्ट मेमो पर हस्ताक्षर के लिए पुलिस का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है। अपने घर पर किसी ईरानी के आकर ठहरने से इंकार किया। परिजनों का यह भी कहना था कि कर्बला मामले में उनके पिता ने सक्रिय भूमिका निभाई है। बीके दत्त कॉलोनी में उनका अकेला मुस्लिम परिवार है। पेशे से पत्रकार मोहम्मद अहमद काजमी मूल रूप से मेरठ निवासी है। वरिष्ठ पत्रकार सैयद नकवी ने मोहम्मद काजमी की गिरफ्तारी को लेकर कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल के इशारे पर पत्रकार को इजरायली दूतावास कार ब्लास्ट में जबरन गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने इसका मुख्य कारण भी दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के इशारे पर अरब मुल्कों में विद्रोह हो रहा है। उसकी सच्चाई को सैयद मोहम्मद अहमद काजमी ने दुनिया के सामने रखा और इसी के कारण अमेरिका और इजरायल के दबाव में दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस को अपना केस मजबूत कर लेना चाहिए क्योंकि इस केस पर न केवल देश के अन्दर ही बल्कि दुनिया भी देख रही है। इस केस में दिल्ली पुलिस की प्रतिष्ठा एक बार फिर दांव पर है।
Anil Narendra, Daily Pratap, Delhi, delhi Police, Iran, Israil, Mohd. Ahmed Kazmi, Terrorist, Vir Arjun

Wednesday, 7 March 2012

और अब सबकी नजरें दिल्ली नगर निगम चुनावों पर टिकीं

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 7 March 2012
अनिल नरेन्द्र
हालांकि दिल्ली नगर निगम के चुनाव पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव जितना महत्व तो नहीं रखते पर फिर भी राजधानी होने के नाते नगर निगम चुनाव महत्व रखते हैं। पांच राज्यों के चुनावों के बाद अब सबकी निगाहें दिल्ली नगर निगम चुनाव पर आ टिकी हैं। राजधानी में सोमवार से आचार संहिता लागू हो गई है। आचार संहिता लागू होते ही नई परियोजनाओं की घोषणा अथवा उद्घाटनों पर विराम लग जाएगा। हालांकि चुनाव की आचार संहिता 19 मार्च से लागू होगी क्योंकि नामांकन प्रक्रिया 19 मार्च से शुरू होगी। यह संहिता आगामी 17 अप्रैल तक लागू रहेगी। ज्ञात हो कि 17 अप्रैल को एमसीडी चुनाव में मतगणना होगी। इस आचार संहिता के कारण दिल्ली में अगले डेढ़ महीने तक सरकारी एजेंसियां लोक-लुभावनी परियोजनाओं को मंजूरी नहीं दे सकती हैं। आचार संहिता के तहत राज्य चुनाव आयोग धन-बल और शराब माफिया के दुरुपयोग के अलावा राजधानी की सम्पत्तियों पर पोस्टर-बैनर चिपकाने पर भी नजर रखेगा। दिल्ली में भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ाई से पेश आया जाएगा। दूसरी ओर चुनाव तिथि घोषित होते ही राजधानी में घोषणाओं की झड़ी लग गई। महज तीन दिनों के अन्दर सैकड़ों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी गई। महज शुक्रवार और शनिवार को ही एमसीडी स्थायी समिति ने 200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी। चुनाव के ऐन मौके पर 11500 सिलाई मशीनें वितरित करने की परियोजना को हरी झंडी दी गई। इसके अलावा शनिवार को स्थायी समिति की बैठक में 60 से अधिक परियोजनाएं पास की गईं। साथ ही रविवार को महापौर प्रो. रजनी अब्बी की ओर से सभी अखबारों में एमसीडी की सफलताओं को लेकर बड़े पैमाने पर विज्ञापन जारी किया। जहां भाजपा के लिए यह चुनौती होगी कि वह नगर निगमों पर पुन कमल खिलाए वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से सीधी जुड़ी है। दिल्ली नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियां चाहे जो रणनीति बना लें पर चुनाव में मुख्य मुद्दा दिल्ली सरकार ही रहेगी। कांग्रेस जहां अपनी सरकार के 13 साल की कामयाबी को भुनाने पर जोर देगी, वहीं भाजपा सरकार की नाकामी और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाएगी। दोनों दलों के नेता मानते हैं कि चुनाव में मुद्दा दिल्ली सरकार ही रहेगी। दिल्ली सरकार की आज की तारीख में सबसे बड़ी उपलब्धि दिल्ली नगर निगम का तीन भागों में बंटवारा तथा महिलाओं का आरक्षण बढ़ाकर 33 से 50 फीसदी करने को बताती है। वहीं कांग्रेस सरकार द्वारा प्रदान की गई सुविधाओं को भी भुनाने का प्रयास होगा। वहीं भाजपा लगातार मुख्यमंत्री पर घोटालों को लेकर आक्रामक रही है। साथ ही कानून व्यवस्था का मुद्दा भी भाजपा जरूर उछालेगी। पिछले दिनों भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता द्वारा किया गया जनसम्पर्प अभियान खासा सफल रहा है। उनके निशाने पर दिल्ली सरकार व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, दोनों ही रहे। अपने 15 दिन की यात्रा में उन्होंने दिल्ली सरकार की नाकामियों को पानी पी-पीकर गिनाईं। वैसे भाजपा नेता भी मानते हैं कि पार्टी चाहे जितना भी शीला दीक्षित की बुराई कर ले पर एमसीडी बंटवारे की चाल पार्टी पर भारी पड़ सकती है। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम भी जरूर थोड़ा बहुत असर नगर निगम चुनाव पर डालेंगे। भाजपा उत्साहित है, कांग्रेस का मनोबल थोड़ा प्रभावित जरूर होगा। देखें नगर निगम चुनाव में प्रचार के दौरान क्या-क्या मुद्दे उठते हैं?
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Saturday, 3 March 2012

दरिंदगी की सारी हदें पार करते दिल्लीवासी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3 March 2012
अनिल नरेन्द्र
पिछले कई दिनों से अखबारों में दिल्लीवासियों की दरिंदगी की खबरों ने चौंका दिया है। बच्चियों से रेप की घटनाओं ने एक बार फिर शर्मसार कर दिया है। इन वारदातों से सवाल उठ रहा है कि आखिर दिल्ली में इतनी दरिंदगी क्यों हो रही है? मुंडका के एक सुरक्षा गार्ड पर एक छह साल की बच्ची से दुष्कर्म का आरोप है। पुलिस ने अजय प्रसाद नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 20 वर्षीय अजय रविवार शाम चार बजे एक फल विकेता की बच्ची को मछली खिलाने के बहाने ले गया। बच्ची के पिता को पहले उस पर शक नहीं हुआ लेकिन जब मामला खुला तो वह दंग रह गया। पुलिस के अनुसार अजय बच्ची को एक खुले मैदान में ले गया और वहां उसके साथ बलात्कार किया। बाद में बच्ची रोती हुई आई और अपनी मां को सारी घटना बताई। उससे एक दिन पहले द्वारका इलाके में एक 16 साल की लड़की के साथ बलात्कार का मामला सामने आया। एक फार्म हाउस के 50 वर्षीय सुरक्षा गार्ड नन्द कुमार ने पास में रहने वाली लड़की को अगवा कर लिया और पास के मैदान में ले जाकर उसकी इज्जत लूटी। उसने लड़की को धमकी दी कि अगर उसने घर पर बताया तो वह उसे जान से मार देगा। पुलिस के अनुसार नन्द कुमार लड़की का परिजन है और उसे काफी समय से जानता है। दिल्ली कैंट में एक सेना के कर्मी पर अपने दोस्त की बीवी के साथ बलात्कार का आरोप है। पुलिस के अनुसार रविन्द्र सेना में सिविल विभाग में कार्यरत है और महिला, उसके पति को पहले से जानता है। घटना सोमवार सुबह करीब 11ः30 बजे की है। रविन्द्र सदर बाजार स्थित अपने एक दोस्त के यहां गया। वहां उसकी बीवी घर में अकेली थी। पुलिस के अनुसार बलात्कार के बाद रविन्द्र गायब हो गया लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि महिला का पति सेना में हैड कांस्टेबल है। रविन्द्र महिला के गांव का है और वह अकसर घर आता-जाता था। गुड़गांव में मालिक की होंडासिटी कार में ही ड्राइवर ने नौकरानी के साथ रेप कर दिया। पुलिस ने भोड़सी से चालक को गिरफ्तार कर लिया। उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सैक्टर-48 निवासी एयरफोर्स से रिटायर्ड अधिकारी मुकेश नाथ की बेटी की शादी रविवार की रात धौलाकुआं के पास हो रही थी। शादी के बाद मुकेश नाथ ने अपने ड्राइवर सोनू के साथ तीन घरेलू नौकरों को गुड़गांव भेजा। इसमें उनकी सास की नौकरानी भी थी। सोनू ने दो नौकर को सोहना रोड पर उतार दिया। आरोप है कि इसके बाद चालक ने उसके साथ रेप किया। दिल्ली की एक अदालत ने पिछले दिनों पार्प में बनी छतरी के नीचे रह रही 50 साल की महिला के अपहरण और रेप के मामले में प्रहलाद (19) को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। एडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ की अदालत ने दोषी पर 17000 रुपये का जुर्माना भी किया है। दुःख से कहना पड़ता है कि दिल्ली में हैवानियत की सारी हदें पार हो रही हैं और अब तो राजधानी को रेप कैपिटल कहा जाए तो गलत नहीं होगा। महिला संबंधित क्राइम तो सारी दुनिया में होते हैं पर छह साल की बच्ची से लेकर 80 साल की वृद्धा के साथ जब रेप हो तो यह चौंका देता है। आखिर हम किस ओर जा रहे हैं। इस तरह तो आदमी और जानवर में कोई फर्प ही नहीं रहेगा।
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लश्कर-ए-तोयबा की रणनीति में परिवर्तन

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3 March 2012
अनिल नरेन्द्र
नब्बे के दशक में लश्कर-ए-तोयबा आतंकवादियों को पाकिस्तान के जेहादी अड्डों से भारत धकेलता रहा। मकसद था कश्मीर में तोड़फोड़ करना। इसके बाद पाक सरकार ने आतंकवाद को बाकायदा एक स्टेट पॉलिसी बनाकर आतंकवादियों को भारत के शेष भागों में हमले करवाने की नीति बनाई। इसी के तहत सन 2000 में लाल किले पर हमला हुआ और 2001 में भारतीय संसद पर और 2008 में मुंबई हमले हुए। इन हमलों में आईएसआई ने लश्कर के माध्यम से भारत स्टेट के खिलाफ हमले करवाए। इन हमलों में कुछ आतंकी पाकिस्तान से विशेष रूप से आए तो कुछ यहीं भारत से शामिल हुए पर अब लगता है कि लश्कर ने अपनी रणनीति में थोड़ी तब्दीली की है। 26/11 हमलों के बाद उसने 10 आतंकियों को मुंबई में हमला करने भेजा था पर अब वह पाकिस्तान से आतंकी न भेजकर यहीं भारत से ही जेहादियों से हमले करवा रहा है। वह भारत से हमदर्द जेहादियों को उठाता है और उन्हें पाकिस्तान ले जाकर पूरी ट्रेनिंग देकर वापस भेजकर हमला करवा रहा है। बुधवार को दिल्ली पुलिस ने जिन दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है, उससे आईएसआई और लश्कर की नई नीति के संकेत मिलते हैं। राजधानी दिल्ली में एक प्रसिद्ध बाजार सहित 18 जगह धमाके की साजिश थी। लेकिन जम्मू-कश्मीर, झारखंड और दिल्ली पुलिस के साझा अभियान ने समय रहते बड़े धमाके होने से राजधानी को बचा लिया। साजिश को अंजाम देने की तैयारी में जुटे लश्कर-ए-तोयबा के दो आतंकियों को दबोच लिया गया। मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के निवासी बताए जा रहे दोनों बम बनाने में माहिर हैं। इनके पास से बरामद मैमोरी कार्ड में कुछ ऐसी तस्वीरें कैद हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सुबूत के तौर पर काम आएंगी। मसलन पाकिस्तान में संचालित आतंकी प्रशिक्षण केंद्र, आईईडी (इप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाते हुए। उनके कब्जे से एके 47 राइफल, विस्फोटक पदार्थ, आपत्तिजनक दस्तावेज सहित बहुत कुछ सामान बरामद हुआ है। इनका इरादा दिल्ली की चांदनी चौक मार्केट में विस्फोट करना था। सूत्रों के अनुसार उनमें एक जम्मू-कश्मीर निवासी एहतेशाम है और दूसरा हजारी बाग निवासी शफाकत है। यह दोनों पाकिस्तान में लश्कर के कैम्पों में ट्रेनिंग ले चुके हैं। जानकारी मिली है कि हजारी बाग के जिस शख्स को हिरासत में लिया गया है, वह एहतेशाम का नजदीकी रिश्तेदार है और कई सालों से झारखंड में आ बसा था। झारखंड पुलिस ने इस शख्स से लम्बी पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान इस शख्स ने बताया कि लश्कर के आका दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में भयानक विस्फोट कराने की तैयारी में जुटे हुए हैं। एहतेशाम हजारी बाग में रहने वाले शफाकत और कुछ अन्य लोगों की मदद से वहीं पर खतरनाक बम तैयार करता था, जिन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाना था। बुधवार को जिन आतंकियों को पकड़ा गया है वे दिल्ली के तुगलकाबाद में किराये के मकान में रहते थे। जब इन्हें सीमापार से निर्देश मिला था कि वे दिल्ली के किसी भीड़भाड़ वाले इलाके में बम विस्फोट करें तो इसके लिए इन लोगों ने चांदनी चौक की क्लॉथ मार्पिट का चुनाव किया। यहां शाम के वक्त हजारों लोगों की भीड़ रहती है। पूछताछ के दौरान पकड़े गए आतंकियों ने जानकारी दी है कि यदि वे लोग पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ते तो बुधवार की शाम चांदनी चौक विस्फोटों से दहल जाता। प्लान था 18 जगहों पर विस्फोट करने का। वे केवल भीड़भाड़ वाले स्थान पर विस्फोट करके दहशत फैलाना चाहते थे। आतंकी मंसूबों को नाकाम करने के लिए दिल्ली, झारखंड, जम्मू-कश्मीर की पुलिस तथा केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों को बधाई। बेहतर समन्वय से यह सम्भव हो सका।
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Sunday, 26 February 2012

4 जून की रात रामलीला मैदान में हुआ था जुल्म

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26th February  2012
अनिल नरेन्द्र
हमें इस बात की खुशी है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव समर्थकों पर 4 जून 2011 को हुए लाठीचार्ज पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और माना कि उस रात पुलिस कार्रवाई गलत थी। काले धन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर रामलीला मैदान में सत्याग्रह कर रहे बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को 4 जून की रात रामलीला मैदान से बलपूर्वक निकाल बाहर करने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र पर कुठाराघात बताते हुए इसके लिए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि रामलीला मैदान में रात को सो रहे सत्याग्रहियों पर दिल्ली पुलिस की बर्बर कार्रवाई जनता और सरकार के बीच कम हो रहे विश्वास का ज्वलंत उदाहरण है। न्यायमूर्ति बलबीर सिंह चौहान और स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि सत्याग्रहियों के खिलाफ बल प्रयोग करके दिल्ली पुलिस ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। सरकार को दोषी पुलिस अधिकारियों के साथ ही पथराव करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का आदेश दिया है। सरकार को इस कार्रवाई के बारे में तीन महीने के भीतर अदालत में रिपोर्ट देनी है। न्यायाधीशों ने कहा कि 4 जून की रात में हुई घटना को टाला जा सकता था पर पुलिस और प्रशासन ने अपनी ताकत का प्रयोग कर सोते हुए सत्याग्रहियों पर लाठियां बरसाईं जिससे एक महिला की मौत हो गई और कई अन्य जख्मी हुए। अदालत ने सख्त शब्दों में कहा कि पुलिस का काम शांति कायम रखना है लेकिन रामलीला मैदान में उसने शांति भंग करने का ही काम नहीं किया बल्कि सोते हुए सत्याग्रहियों पर लाठियां बरसा कर नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन भी किया। न्यायाधीशों ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि दिल्ली पुलिस ने सत्याग्रहियों को रामलीला मैदान से निकाल बाहर करने के लिए बेहद हिंसक तरीका अपनाया, लेकिन दूसरी ओर बाबा रामदेव के समर्थकों ने भी पुलिस पर हिंसक तरीके से पथराव किया जिससे स्थिति और बिगड़ गई। अदालत ने जान गंवाने वाली राजबाला के परिजनों को 5 लाख रुपये, गम्भीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये और मामूली रूप से घायलों को 25-25 हजार रुपये बतौर मुआवजा अदा करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि मुआवजे की इस राशि का 25 फीसदी अंश का भुगतान बाबा रामदेव का ट्रस्ट करेगा।
हम हमेशा से कहते आ रहे हैं कि केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम और कुछ अन्य मंत्रियों के इशारों पर दिल्ली पुलिस ने 4 जून को सोते हुए लोगों पर कहर ढा दिया। सरकार और पुलिस कहती रही कि कोई लाठीचार्ज नहीं हुआ, न कोई जबरन कार्रवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दूध का दूध पानी का पानी हो गया है पर हमारा मानना है कि दिल्ली पुलिस ने उस रात जो भी किया वह गृह मंत्रालय के आदेशों पर किया। असल कसूरवार तो आदेश देने वाले हैं, दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई का विरोध भी किया था। पुलिस ने कहा था कि हम सुबह होते ही शांति से रामलीला मैदान खाली करवा लेंगे पर मनमोहन सरकार के कुछ मंत्रियों ने तो ठान ली थी कि बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को ऐसी मार मारनी है जो वह दोबारा ऐसा करने की जुर्रत न करें।
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Thursday, 16 February 2012

दिल्ली, तिबलिस और बैंकाक धमाकों का कोई आपसी रिश्ता है?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 17th February  2012
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली के अति सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में इजराइली दूतावास की कार को निशाना बनाने और जार्जिया की राजधानी में असफल बम विस्फोट के प्रयास के 24 घंटे बाद थाइलैंड की राजधानी बैंकाक में लगातर तीन धमाके साबित करते हैं कि यह दहशतगर्द जब चाहे, जहां चाहे हमले कर सकते हैं। यह भी एक बार फिर साबित होता है कि पूरी दुनिया आज आतंकवाद की जकड़ में फंस चुकी है। मंगलवार को बैंकाक में महज 100 मीटर के दायरे में तीन धमाके हुए। घटना में हमलावर समेत पांच लोग घायल हुए हैं। मौके से मिले पहचान पत्र से हमलावर के ईरानी होने की आशंका है। हमलावर की शिनाख्त मोरादी के रूप में हुई है। उसने राजधानी बैंकाक के भीड़भाड़ वाले इलाके में बम फेंके। तीसरा बम पेड़ से टकराने के कारण मोरादी के ही पैर के पास फटा, जिससे वह खुद भी घायल हो गया। उसके एक और ईरानी मददगार मोहम्मद इजाई को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों ने हमले की दिल्ली और जार्जिया की घटना से तार जुड़ने की आशंका जताई है। इस घटना में हमलावर सहित तीन थाई पुरुष और एक महिला भी घायल हुईं। थाई प्रधानमंत्री चिंगलक शिनवात्रा ने पुलिस और देश के राष्ट्रीय गुप्तचर एजेंसी को तिहरे विस्फोट के जांच के आदेश दिए हैं। थाई विदेश मंत्री को ईरान से बात करने को कहा है। थाई प्रधानमंत्री शिनवात्रा गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली विशेष अतिथि के रूप में आई थीं। क्या उनकी यात्रा का, दिल्ली में पहले धमाके फिर बैंकाक में धमाके, इनमें कोई आपसी कनैक्शन है? थाई पुलिस के जनरल पांसिटी प्रापावात ने बताया कि सुरक्षा बलों ने राजधानी स्थित हमलावर के किराये के मकान से भी विस्फोटक बरामद किए। स्थानीय मीडिया के मुताबिक ईरानी मूल के नागरिक ने टैक्सी रोककर चालक से कहीं चलने को कहा लेकिन चालक के मना करने से वह नाराज हो गया और उसने टैक्सी पर बम से हमला कर दिया। वहां खड़े पुलिसकर्मियों ने जब वह वाकया देखा तो वे टैक्सी के पास पहुंचे। हमलावर ने पुलिसकर्मियों पर भी बमों से दूसरा हमला कर दिया लेकिन सुरक्षाकर्मियों की किस्मत अच्छी थी और यह बम एक पेड़ से टकरा गया और खुद हमलावर पर आ गिरा। विस्फोट से हमलावर का पैर उड़ गया तथा हमलावर को पकड़ लिया गया। घटनास्थल से एक पासपोर्ट बरामद हुआ जिससे पता चला कि हमलावर का नाम सामरेब मोरादी है और वह ईरान का रहने वाला है। इससे पहले मध्य बैंकाक के इकामाई क्षेत्र में एक घर में विस्फोट हुआ। हमलावर सहित दो और ईरानी इसी घर में किरायेदार के रूप में रहते थे। सरकारी प्रवक्ता थीतिया चासेंग ने कहा कि पुलिस ने रिपोर्ट दी है कि मकान का प्रयोग बम बनाने के लिए किया जाता था। यहां से विस्फोटक पदार्थ और रिमोट कंट्रोल डिटोनेशन डिवाइसिस मिले हैं। फिलहाल बैंकाक की घटना और नई दिल्ली एवं जार्जिया की घटना का कोई संबंध नहीं स्थापित हो सका लेकिन इजराइल के विदेश विभाग के प्रवक्ता चिगाल पालमोर ने यरुशलम में कहा कि हम किसी भी सम्भावना से इंकार नहीं कर रहे हैं। इन हमलों से ईरान सारी दुनिया की नजरों में आ गया है। पहले से ही अपने विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम की वजह से पश्चिमी देशों की आंखों की किरकिरी बने ईरान के लिए अब यह नई समस्या खड़ी हो गई है। निश्चित रूप से अमेरिका अब ईरान पर और दबाव डालेगा।
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Wednesday, 25 January 2012

राजधानी में फल-फूल रहा है ड्रग्स का गोरखधंधा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 25th January  2012
अनिल नरेन्द्र
दो साल पहले अपने देश घाना से आया तो वह लेडीज फुटवेयर एक्सपोर्ट करने के लिए पर कारोबार की सुस्त रफ्तार से बन गया नशा का सौदागर। मुंबई में रहने वाले उसके एक परिचित ने उसे जल्दी पैसा बनाने का फार्मूला समझाया और उसने नशीले पदार्थों का धंधा शुरू कर दिया। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया और उससे दो करोड़ रुपये की कोकीन बरामद हुई। घाना का यह निवासी पॉल 2010 में भारत आया था। मुंबई में रहने वाले उसके देश के क्रॉस नाम के एक शख्स ने इस कारोबार के फायदे गिनाकर इस धंधे में धकेल दिया। इसके बाद से पॉल दिल्ली में नशे की खेप सप्लाई करने लगा। पॉल अपने जूतों में कोकीन छिपाकर लाता था और फ्लाइट से दिल्ली पहुंचता था। शुक्रवार को नारकोटिक्स ब्रांच ने उसे मुंबई से आई एक डोमेस्टिक फ्लाइट से उतारा था। यहां आते ही उसे दबोच लिया गया। उसके पास से 200 ग्राम कोकीन बरामद हुई जिसकी कीमत अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में दो करोड़ बताई जा रही है। बताया जाता है कि इस कोकीन को पेज थ्री और वीक एण्ड पार्टियों में सप्लाई किया जाना था। इससे कुछ दिन पहले दक्षिण अफ्रीका के रहने वाले कैली विलियम्स मेबन (36) को अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था। यह भी दिल्ली के हाई प्रोफाइल लोगों को कोकीन सप्लाई करता था। इसके पास से 40 लाख रुपये की कोकीन बरामद हुई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि कैली जुलाई 2011 में मुंबई आया था। उसके पास मल्टीपल वीजा था। सितम्बर 2011 में कैली दिल्ली आया और उसने अपने दोस्त जेम्स जिसके साथ वह रहता था कोकीन का धंधा शुरू किया। वह दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर में भी रेव पार्टियों में कोकीन की सप्लाई करता था। इसी सप्ताह में पुलिस ने दो नाइजीरियन को भी दो करोड़ से अधिक की कोकीन के साथ पकड़ा। हाई डोज कोकीन का नशा दिल्ली में हाई प्रोफाइल लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। दिल्ली पुलिस भले ही आज तक किसी रेव पार्टी को न पकड़ पाई हो, लेकिन उसका खुद का दावा है कि कोकीन इन रेव पार्टियों में सप्लाई हो रही है। दिल्ली के फार्म हाउसों की पार्टियों में कोकीन की डिमांड ज्यादा है। कोकीन की बढ़ती पकड़ का इस बात से लग जाता है कि पिछले साल 16 विदेशी कोकीन के धंधे में धरे गए। यह अत्यंत चिन्ता का विषय है कि राजधानी में ड्रग्स का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। वर्ष 2010 की तुलना में 2011 में अधिक मात्रा में पकड़े गए मादक पदार्थों से इस बात की पुष्टि होती है। साथ ही इससे यह भी जाहिर होता है कि दिल्ली के लोग दिनोंदिन नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। इसके चलते ड्रग्स दिल्ली के अन्य हिस्सों के अलावा देश की अति सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल तक भी पहुंच जाती हैं। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने वर्ष 2011 में मादक पदार्थ की तस्करी में 98 लोगों को पकड़ा, जिनमें से 16 विदेशी थे। हाल यह है कि दिल्ली, एनसीआर की इन रेव पार्टियों में शराब के साथ कोकीन मिलाकर पीने से लोग रात-रातभर नाचते हैं। यहां तक कि सेक्स करने के लिए भी कोकीन का जमकर इस्तेमाल होता है। उन्हें लगता है कि इससे अच्छी सेक्स पॉवर बढ़ जाती है। यह कोकीन लैटिन अमेरिका खासकर कोलम्बिया से आती है। इसलिए इसकी कीमत भी अन्य नशों से ज्यादा होती है। दिल्ली में कोकीन के नशे के लिए कई बार बड़े-बड़े हाई प्रोफाइल लोग पकड़े गए हैं। क्रिकेट खिलाड़ी मनिन्दर सिंह, राहुल महाजन व एक विदेशी दूतावास के अधिकारी के बेटे की गिरफ्तारी ने दिल्ली को हिलाकर रख दिया था। राहुल महाजन केस के बाद तो दिल्ली में कोकीन का धंधा करने वाले विदेशी लोगों पर खासी सख्ती बढ़ गई थी। लेकिन अब धीरे-धीरे यह धंधा फिर से सिर उठाने लगा है। अपनी सालाना प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली के पुलिस कमिशनर बीके गुप्ता ने बताया कि ड्रग्स पर 2012 में मुख्य फोकस रहेगा। पहले कुछ विशेष दस्ते ही ड्रग्स तस्करों को पकड़ने का काम करते थे लेकिन पिछले साल थाना स्तर पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसी के चलते बीते वर्ष में 2010 की अपेक्षा में भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए। नशे की चपेट में आए ज्यादातर लोग मध्यमवर्गीय परिवार के हैं। गौरतलब है कि इन दिनों राजधानी में ड्रग्स की खेप कई देशों से आ रही है। इसमें नेपाल, बंगलादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान प्रमुख हैं। हैरत की बात है कि इस तस्करी में पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी संगठन भी शामिल हैं, जो यूरोप, एशिया में ड्रग्स तस्करी से अपने संगठनों को मजबूत कर रहे हैं। ज्यादातर तस्कर कैरियर के रूप में महिलाओं का इस्तेमाल हो रहा है, वहीं कई तस्कर सरकारी एजेंसियों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें रेलवे, पार्सल, भारतीय डाक सेवा आदि शामिल हैं। पुलिस आयुक्त गुप्ता का कहना है कि यदि किसी भी थाना क्षेत्र में ड्रग्स तस्करी का मामला सामने आया तो इसकी जिम्मेदारी बीट कांस्टेबल की होगी, साथ ही थाना प्रभारी भी जिम्मेदार होगा।
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