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Tuesday, 17 July 2012

लश्कर सबसे खतरनाक आतंकी संगठन और पाकिस्तान सबसे खतरनाक देश

आतंकवादी हाफिज सईद और हाल में गिरफ्तार किए गए अबू जिंदाल के अनुसार भी 26/11 मुंबई हमलों के पीछे लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई का सीधा हाथ था। मुंबई के 2008 आतंकी हमले के दौरान कराची स्थित नियंत्रण कक्ष में आईएसआई का अधिकारी मेजर समीर अली का मौजूद होना इसको साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत है कि लश्कर और आईएसआई मिलकर भारत व दुनिया के खिलाफ आतंकवाद चला रहे हैं। यह कहना इसलिए गलत न होगा कि आज की तारीख में लश्कर-ए-तैयबा अलकायदा से भी खतरनाक आतंकी संगठन बन गया है और पाकिस्तान दुनिया का इस दृष्टि से सबसे खतरनाक देश। हाल ही में एक पूर्व सीआईए अधिकारी का भी मानना है कि लश्कर-ए-तैयबा अब दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन है। पूर्वी सीआईए विश्लेषक ब्रूस रिडल जो आजकल जान्स हापकिन स्कूल में एक प्रोफेसर हैं, ने कहा कि लश्कर पाकिस्तान के अन्दर स्वतंत्र रूप से संचालित है और पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और देश की खुफिया प्रतिष्ठान के साथ मजबूत परिचालन कनेक्शन जारी है। फिलहाल चूंकि रिडल एक निजी संस्थान के साथ काम कर रहे हैं इसलिए उनकी राय को अमेरिकी हुकूमत की आधिकारिक राय तो नहीं माना जा सकता लेकिन सरकारों का मत अपने देश के रणनीतिकारों की बदलती सोच-समझ के जरिए ही बदलता है। कुछ समय पहले तक लश्कर को इतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था। समझा जाता था कि वह पाकिस्तानी पंजाब के दक्षिणी हिस्से में सक्रिय एक बड़बोला आतंकी संगठन है। जो कभी लाल किले पर तो कभी व्हाइट हाउस पर जिहादी झंडा लहरा देना चाहता है। अमेरिकी सरकार का मानना था कि इस किस्म के दर्जनों आतंकी संगठनों में से एक लश्कर भी है। अमेरिका इसलिए भी ज्यादा चिंतित नहीं था क्योंकि वह मानता था कि यह अमेरिका पर हमला नहीं कर सकता पर 26/11 ने अमेरिका की सोच में भी बदलाव लाया। ब्रूस रिडल का मानना है कि लश्कर-ए-तैयबा का दर्जा फिलहाल दुनियाभर के आतंकी संगठनों में सबसे ऊंचा है, क्योंकि उस पर हाथ डालने की हिम्मत पाकिस्तान सरकार नहीं जुटा पाती और इस संगठन को पाक सेना व उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का किसी न किसी स्तर पर समर्थन भी हासिल है। एक रिपोर्ट के अनुसार लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद पाकिस्तानी सेना के कोर कमांडरों की बैठकों में भी बाकायदा अब हिस्सा लेते हैं। दुनियाभर में और कोई ऐसा आतंकी संगठन मौजूद नहीं जिसके लोग किसी देश की राजधानी में हथियार लेकर रैलियां निकालते हों और किसी अन्य देश पर हुए आतंकी हमलों में अपने लोगों का नाम उजागर होने के बाद भी उसकी गतिविधियों पर कोई अंकुश नहीं लगाता न ही उसे इससे कोई फर्प पड़ता है। इस नतीजे तक पहुंचने के लिए रिडल ने 26/11 से जोड़कर तीन बड़ी गिरफ्तारियों आमिर अजमल कसाब, डेविड कोलमैन हेडली और अबू जिंदाल के बयानों को आधार बनाया है। इन तीनों के बयानों में एक बात साफ है कि हमले की रूपरेखा तैयार करने में आईएसआई और पाकिस्तानी फौज के कुछ अफसर भी भागीदार थे। पाकिस्तान आज भी इस हमले को `नॉन स्टेट एक्सर्ट' की कार्रवाई बताता है। उलटा पाक के एक मंत्री ने तो कुछ दिन पहले यहां तक कह दिया कि 26/11 हमले में भारत के भीतर मौजूद लोगों की ही मुख्य भूमिका थी। पाकिस्तान बेशक कितना भी इंकार करता रहे पर एक के बाद एक गिरफ्तारी उसकी संलिप्तता साबित करती है। पाकिस्तान बुरी तरह बेनकाब होता जा रहा है। ब्रूस रिडल का कहना है कि सउदी अरब की सरकार ने अबू जिंदाल की गिरफ्तारी में जैसी सक्रियता दिखाई है अगर ऐसी ही सक्रियता अन्य खाड़ी देशों की सरकारें लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद और संरक्षण देने में दिखाएं तो देर-सबेर इनकी कमर भी उसी तरह तोड़ी जा सकेगी, जिस तरह अलकायदा की तोड़ी जा रही है। असल मुश्किल तो यह भी है कि खुद अमेरिका द्वारा पाकिस्तान सरकार को दी जाने वाली सहायता भी तमाम जरियों से छनकर लश्कर जैसे संगठनों तक पहुंचती रहती है और जब तक अमेरिका इनको अपने लिए खतरनाक और सिरदर्द नहीं मानेगा, तब तक इनके इलाज में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं बनेगी। आज लश्कर-ए-तैयबा अलकायदा से खतरनाक आतंकी संगठन बन गया है और पाकिस्तान दुनिया में सबसे खतरनाक देश।

Tuesday, 3 July 2012

बिना सरकार की मिलीभगत से कराची का कंट्रोल रूम नहीं बन सकता था

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3 July 2012
अनिल नरेन्द्र
सउदी अरब का भारत को धन्यवाद करना चाहिए कि उसने हमको अबू जिंदाल जैसे खूंखार आतंकी को सौंपा। जिंदाल के ताजा कबूलनामे से भारत को मुम्बई हमले में पाकिस्तान का सीधा हाथ होने का सबूत मिला है। भारत हमेशा कहता रहा है कि 26/11 हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है पर दुनिया मानने को तैयार नहीं थी। जिंदाल के बयानों से पता चलता है कि 26/11 के पीछे पूरी तरह पाक एजेंसियों को न केवल जिम्मेदारी सौंपी गई थी बल्कि उनके निर्देश में ही इस साजिश का ताना-बाना बुना गया। उल्लेखनीय है कि आतंकवाद और विशेषकर मुम्बई के 26/11 के हमले के मुद्दे पर भारत द्वारा अनेक बार सबूत सौंपे जाने के बाद भी पाकिस्तान उन्हें लगातार यह कहकर खारिज करता आ रहा है कि पुख्ता सबूत नहीं है। भारत ने शुक्रवार को कहा कि मुम्बई में 2008 के आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों को निर्देश देने के लिए पाकिस्तान के सरकारी तंत्र की मदद से बनाए गए जिस कराची नियंत्रण कक्ष में सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्प अबू जिंदाल था, वहां उसके साथ अन्य लोगों के अलावा लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद भी मौजूद था और यह बात और किसी ने नहीं बल्कि भारत के गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने कही। केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि जिस कराची नियंत्रण कक्ष से जिंदाल मुम्बई में आतंकी हमला करने वाले दस आतंकवादियों को पल-पल निर्देश दे रहा था, बिना पाकिस्तान के सरकारी अमले के समर्थन के नियंत्रण कक्ष स्थापित ही नहीं किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत पाकिस्तान के पूर्व गृहमंत्री रहमान मलिक की इस बात से सहमत है कि जिंदाल भारतीय नागरिक है और वह कट्टरपंथी भी भारत में ही बना, उसी तरह पाकिस्तान को भी यह बात स्वीकार करनी चाहिए कि जिंदाल वहां गया था, उस संगठन में शामिल रहा जिसने मुम्बई में हमला करने वाले आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया था। नियंत्रण कक्ष में बैठे हमले के मास्टर माइंडों में वह भी शामिल था। पाकिस्तान को यह भी स्वीकारना चाहिए कि जिंदाल को पाकिस्तान सरकार ने एक फर्जी पासपोर्ट जारी किया। जिंदाल के पास पाकिस्तान के दो पहचान पत्र भी थे। वह दावा करता है कि वह पाकिस्तानी है। पाकिस्तान में अबू जिंदाल को बहुत ही सुरक्षित पनाहगाह मिली हुई थी। अबू जिंदाल का पकड़ा जाना महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वस्तुत जिंदाल से पूछताछ में मुम्बई आतंकी हमले से जुड़ी कई ऐसी जानकारियां मिल रही हैं जो अब तक जांच कार्य में एक प्रश्न बनी हुई थीं। इतना तो तय है कि जिंदाल लश्कर में महत्वपूर्ण व्यक्ति था। उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी और वह जिम्मेदारी थी मुम्बई में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले अजमल कसाब सहित दसों आतंकवादियों को हिन्दी सिखाना और प्रशिक्षित करना। उन्हें यह सिखाना कि मुम्बई वाले कैसे दिखते और बोलते हैं और किस तरह मुम्बईवासी की तरह दिखा जा सकता है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि इस केस में भी पाकिस्तान सब आरोपों का खंडन कर अपने आपको पाक-साफ बताने का प्रयास करेगा पर जिंदाल की गिरफ्तारी और बयान और अजमल कसाब का हमारे हाथ में पहले से ही होना मुम्बई हमलों में पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब करने के लिए महत्वपूर्ण है।

Friday, 29 June 2012

आईएसआई के दबाव में फिर मारी पाकिस्तान ने पलटी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29 June 2012
अनिल नरेन्द्र
यू टर्न लेने के लिए पाकिस्तान मशहूर है। वह अपनी बात से मुकर जाता है। ताजा उदाहरण कई सालों से पाकिस्तानी जेल में सड़ रहे सरबजीत सिंह की रिहाई का है। पाक मीडिया में खबर आई कि सरबजीत सिंह को रिहा किया जा रहा है। सरबजीत का परिवार जो वर्षों से उसकी रिहाई की मुहिम चला रहा है उनका खुशियों का अनुमान नहीं रहा और मिठाइयां तक बंट गई। भारत सरकार ने भी पाकिस्तान सरकार का शुक्रिया अदा कर दिया पर ड्रामों के लिए अपने चिर परिचित स्टाइल में पाकिस्तान आखिरी समय पलटी खा गया और उसने यह कहा कि हमने तो सुरजीत सिंह की रिहाई का फैसला किया सरबजीत सिंह का नहीं। पंजाब के तरनतारन जिले में भीखीविंड गांव में रहने वाले सुरजीत सिंह को 1982 में जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था। सैनिक कोर्ट में उन पर मुकदमा चला और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। 1989 में सुरजीत के परिवार के लिए कुछ राहत की खबर तब आई जब पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो प्रधानमंत्री थीं और पाकिस्तानी राष्ट्रपति गुलाम इशहाक खान ने सुरजीत की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दी। उम्रकैद की 25 साल की सजा काटने के बाद सुरजीत सिंह को 2004 में रिहा हो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिवार ने रिहाई की मुहिम शुरू की। गिरफ्तारी के बाद 2008 में पहली बार परिवार को पाकिस्तान की जेल में उनसे मिलने दिया गया। वहां जाकर परिवार ने उन्हें सजा पूरी करने के बाद रिहा करने की अपील की और इसे कोर्ट ने मंजूर भी कर लिया। उनकी रिहाई मई-जून 2012 में ही तय थी लेकिन इस तरह के बड़े कंफ्यूजन के तौर पर किसी ने नहीं सोचा था। एक साल में पाकिस्तान की इस तीसरी गुलाटी ने उसकी नीयत का नमूना दिया है। साथ ही साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में सत्ता का सीन पर्दे के पीछे से संचालित होता है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी ने भारी दबाव में यह कदम उठाया है। पाकिस्तानी मीडिया में भी चर्चा है कि सेना, आईएसआई या लश्कर-ए-तैयबा के दबाव के आगे जरदारी झुक गए। भारतीय खुफिया एजेंसियों के पास जानकारी आई है कि मंगलवार शाम पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जरदारी पर सरबजीत की रिहाई के फैसले के खिलाफ दबाव बनाया। राष्ट्रपति कार्यालय से कहा गया कि इस समय इस फैसले से यही संदेश जाएगा कि पाकिस्तान सरकार ने भारत के सामने घुटने टेकने शुरू कर दिए हैं। खासतौर पर सउदी अरब से पकड़ कर लाए गए अबू हमजा के खुलासे के बाद। इस पलटी से पाकिस्तान-भारत के रिश्तों में खटास आना स्वभाविक है। मामला सरबजीत या सुरजीत की रिहाई का नहीं बात तो अपनी बात कहकर पलटने की है। सरबजीत को भी अब देर सवेर तो रिहा करना ही होगा। आखिर सजा पूरी होने के बाद भी उसे किस बिनाह पर अभी भी कैद कर रखा है। सुरजीत की रिहाई पर हमें खुशी है पर सरबजीत की रिहाई पर और भी खुशी होती। पाकिस्तान में असल ताकत कहां है इस किस्से से साबित होता है।
Anil Narendra, Daily Pratap, ISI, Pakistan, Sarabjeet Singh, Vir Arjun

Wednesday, 27 June 2012

अबू जिन्दाल उर्प अबू हमजा की गिरफ्तारी कसाब के बाद सबसे बड़ी उपलब्धि है

कुख्यात आतंकवादी सैयद जबीउद्दीन उर्प अबू हमजा उर्प अबू जिन्दाल को 21 जून को दिल्ली के इन्दिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया है। दरअसल अबू हमजा को सउदी अरब पुलिस ने पकड़ा था और उन्होंने उसे दिल्ली आने वाली फ्लाइट में बिठा दिया और दिल्ली पुलिस को सूचित कर दिया था कि हमजा फलानी फ्लाइट से नई दिल्ली भेजा जा रहा है। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने उसे हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया। अजमल कसाब के बाद अब हमजा सबसे बड़ा आतंकी है, जिसे गिरफ्तार किया गया। मुम्बई हमले के वक्त हमजा कराची के कंट्रोल रूम में बैठे अपने पांच साथियों के साथ आतंकियों को निर्देश दे रहा था। अबू ने स्वीकार किया है कि उसने इस मॉड्यूल के मास्टर माइंड जकीउर रहमान लखवी के साथ काम किया था। मुम्बई हमले के बाद वह कुछ समय पाकिस्तान में रहा और फिर सउदी अरब चला गया। वह वहां शिक्षक के रूप में काम कर रहा था। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए इंडियन मुजाहिदीन के 12 आतंकियों में से एक पाकिस्तानी मूल के मोहम्मद आदिल ने अबू के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था। मुम्बई हमले के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने लश्कर आतंकियों व पाकिस्तान में उनके आकाओं के बीच हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया था। इस दौरान किसी को कुछ खास हिन्दी के शब्द बोलते हुए सुना गया। बाद में यह आवाज अबू जिन्दाल की पाई गई। सामने यह भी आया कि उसने ही आतंकियों को अपनी पाकिस्तानी पहचान छिपाने और खुद को हैदराबाद के टोली चौक से संबंधित डेक्कन मुजाहिदीन से जुड़ा होने की बात कही थी। हमलों में अबू की संलिप्तता का उल्लेख मुम्बई हमलों में जीवित पकड़े गए एकमात्र आतंकी अजमल कसाब ने किया था। उसने कहा था कि अबू जिन्दाल नाम के व्यक्ति ने 10 आतंकियों को हिन्दी सिखाई थी। मुम्बई पर 26/11 को हुए आतंकवादी हमले में अबू जिन्दाल ने स्पेशल सेल और एनआईए के सामने अपना गुनाह कुबूल कर लिया है। अबू जिन्दाल से पूछताछ कर रहे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उसने मुम्बई हमले के दौरान 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों को सैटेलाइट फोन पर निर्देश दिए थे। उसने बताया कि हमले के दौरान वह लश्कर के सरगना जकीउर रहमान लखवी, अब्दुल रहमान अब्बी और पाकिस्तानी सेना के किसी मेजर के साथ कराची में था। वे लोग टीवी पर हमले की लाइव तस्वीरें देखकर आतंकियों को डिफेंस और अटैक के बारे में हिदायत दे रहे थे। यह खुशी की बात है कि सउदी अरब ने ऐसे खतरनाक आतंकी को भारत को सौंपने में मदद की है। आतंकवाद को लेकर भारत और सउदी अरब के बीच पिछले कुछ सालों में समझौते हुए हैं। इनके आधार पर सउदी अरब ने भारत को आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद की है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि भारतीय खुफिया एजेंसियों को यह सूचना मिली थी कि अबू सउदी अरब में है। दो जून को तीस हजारी कोर्ट ने जबीउद्दीन के नाम गिरफ्तारी वारंट जारी करवा लिया था। इस वारंट के आधार पर सरकारी तौर पर इंटरपोल की मदद से सउदी सरकार को अबू के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद सउदी अरब सरकार ने अबू को पकड़ लिया। उसे 21 जून को दिल्ली डिपोर्ट किया गया, जहां हवाई अड्डे पर उसे स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया। अबू जिन्दाल उर्प अबू हमजा का पकड़ा जाना बहुत महत्वपूर्ण घटना है। अजमल कसाब के बाद यह सबसे बड़ी गिरफ्तारी है। इसकी गिरफ्तारी से न केवल 26/11 की सारी कार्रवाई कैसे की गई, किसने करवाई, की पुष्टि होगी बल्कि वह तमाम आरोप साबित हो जाएंगे जो भारत की सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां लगाती आ रही हैं। इसकी गिरफ्तारी से पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हुआ है। इससे न केवल 26/11 आतंकी हमले का केस मजबूत होगा बल्कि यह भी पता चल सकेगा कि इस खूंखार देश को झिझोड़ने वाले हमले में और कौन-कौन शामिल था। इस हमले में हम हमेशा से कहते रहे हैं कि बेशक हमला 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने किया हो पर इस अंजाम तक पहुंचाने में भारत में बैठे उनके समर्थकों ने भी विशेष भूमिका निभाई होगी। अब शायद इनकी पहचान करने में भी मदद मिले। जहां दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने उल्लेखनीय काम किया है वहीं हमें सउदी अरब की सरकार का धन्यवाद करना होगा जिन्होंने इस खूंखार वांछित आतंकी को गिरफ्तार करने और सजा भुगतने के लिए भारत को सौंपा।

Sunday, 10 June 2012

Number two of al Qaeda killed by US

Anil Narendra

US have an important achievement on the fight against terror front. US have claimed to kill 15 terrorists in a drone attack on Monday in the North Waziristan area of Pakistan. This is being considered the most important achievement of the US after the killing of Osama bin Laden. It has also been reported that Abu Yahya al-Libi has been killed in this raid. The Libyan national, Libi was born in 1963 in Libya. He came to Afghanistan around 1990. He was also considered as an Islamic and Libyan thinker. In a dramatic turn, Libi escaped from the Jail at Bagram Air Base in Afghanistan in 2005. He was arrested in 2002 after the Taliban rule was ended by NATO forces. He became deputy leader of the international terrorist network, al-Qaeda after the death of another Libyan national, Atiyah Abdul Rehman in a US missile attack in North Waziristan last year. He came into prominence in 2007 after he had prepared a complete series of al Qaeda publicity CDs. Abu Yahya al-Libi was considered as a top strategist of al-Qaeda and number two leader after Ayman al-Zawahiri in al-Queda hierarchy. The US had declared $ one billion award on his head. Earlier, in 2009 rumours of his death were proved wrong, as this time also some people are skeptic about the news of his death. Quoting US officials, the New York Times has said that people want to know if he is still alive? The newspaper has reported that according to the tribal sources in Mir Ali area, which was targeted in Monday's drone attack, say that either Libi is dead or he has been wounded seriously. This was the third recent drone attack and was most fierce attack of the year. If the news of Libi's death comes true, then it would be the biggest jolt for the al-Qaeda after the killing of Osama bin Laden. Libi was not only a terrorist, but was also the think tank of al-Qaeda. He was considered to be the mastermind of suicide attacks. Having fluency in Urdu-Arabic and Pashto languages, he had profound knowledge about Islam also. Libi was overseeing terrorist operations in tribal areas and was acting as conduit to the regional terrorist factions. US officials are of the view that at present, there is no body in al-Qaeda who could fill the vacuum created by his death. This is a commendable achievement for US in its 'War on Terror'. The al-Qaeda network is gradually moving towards its end. The terror attributed to it has also come down recently. If al-Qaeda is weakened, it would be easier for the US to meet the dead line of withdrawal of US forces from Afghanistan by 2014. The confirmation of al-Libi's death would also help President Barak Obama to win the US Presidential elections again. Then, he can claim that during his tenure, first it was Laden and then it was Libi who were eliminated.

Laden informer sentenced to 33 years of jail

Anil Narendra

Recently, a Pakistani Court convicted Dr Shakeel Afridi of treason and sentenced him to 33 years of jail. He was the person, who had helped US intelligence agency CIA in locating and killing Al Qaeda Chief Osama bin Laden. We were shocked to hear about this decision of the Court and found it very strange. Mutahir Zeb Khan, the Political Representative of the Khyber tribal area, told the Pak newspaper Dawn that Shakeel was produced before a four-member tribal Court, which sentenced him to 33 years of imprisonment and a fine of Rs 32 lakh. Later, Shakeel was sent to Peshawar Central Jail. Instead of Pakistan criminal code, Shakeel was tried under the Pontier Crime Regulation Act of British era. Under the Act, there is no provision of capital punishment for treason. Dr Shakeel had carried out an immunization programme under the directions of the CIA to enable them to collect blood samples of Osama and his family members. It was on the basis of the evidence thus collected that US was able to kill Osama bin Laden in a raid in May, last year. This action by Pakistan has once again proved that Pakistan is not sincere in his fight against terrorism. It also proves that in the heart of the hearts, Pakistan is sympathetic towards terrorists of all hues, whether they are from al Qaeda or from LeT, and maintains contact with them. Pakistan is bent upon to take revenge on all persons, who had been helpful in eliminating the most wanted terrorist of the world. Perhaps, Dr Shakeel would have been honoured in other parts of the world for his daring act, but in Pakistan, he is being considered as a traitor, who has helped a foreign intelligence agency against national interests. If this episode reveals the double game of Pakistan, then it has also created embarrassment for US, who failed to protect its 'source' or the informer. This episode will further add to the deterioration of relations between Pakistan and US. The US Secretary of State, Hillary Clinton had called this decision as unjust and un-called for. Meanwhile, a Panel of the US Senate has also reduced the aid being given to Islamabad. Hillary said that injustice had been done to Afridi. She regretted his conviction. He had provided invaluable help, on the basis of which one of the most notorious killers of the world could be eliminated. It was, in fact, in the interest of Pakistan, in the interest of the US and in the interest of the whole world. Meanwhile, PPP Chief Bilawal Bhutto has said that extending cooperation to any foreign intelligence agency is against the laws of any country. In a case for spying for Israel, US had sentenced life imprisonment. Ours is an independent Judiciary, which was restored by the PPP. A new chapter has been added in the deteriorating relations between Pakistan and US. We think this action by Pakistan will enhance the morale of terrorists.

Friday, 8 June 2012

अलकायदा के नम्बर दो को अमेरिका ने मार गिराया?


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 8 June 2012
अनिल नरेन्द्र
आतंक के खिलाफ अमेरिका की वॉर ऑन टेरर में उसे एक और बड़ी सफलता मिलने की खबर है। सोमवार को अमेरिका ने पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान में एक ड्रोन हमला करके 15 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अमेरिका की यह सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। इस हमले में अबू याहया अल-लिबी के मारे जाने की खबर है। लीबियाई नागरिक लिबी का जन्म 1963 में लीबिया में हुआ था। 1990 के आसपास वह अफगानिस्तान आया था। उसे एक इस्लामी और लीबिया विचारक के रूप में भी जाना जाता था। लिबी 2005 में अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस स्थित जेल से नाटकीय ढंग से भाग निकला था। उसे वर्ष 2002 में नाटो बलों द्वारा तालिबान शासन को उखाड़ देने के बाद पकड़ा गया था। वह पिछले साल उत्तरी वजीरिस्तान में अमेरिकी मिसाइल हमले में एक और लीबियाई नागरिक आतियाह अब्दुल रहमान के मारे जाने के बाद अंतर्राष्ट्रीय आतंकी नेटवर्प अलकायदा का उपनेता बन गया था। लिबी 2007 में अलकायदा के प्रचार के लिए सीडी की एक पूरी श्रृंखला बनाने के बाद चर्चा में आया। अबु याहया अल लिबी अलकायदा का टॉप का स्ट्रेटेजिस्ट माना जाता था और आयमान अल जवाहिरी के बाद नम्बर दो का अलकायदा लीडर माना जाता था। लिबी पर अमेरिका ने एक अरब डॉलर का इनाम रखा था। चूंकि 2009 में भी उसके मारे जाने की खबर गलत साबित हुई थी इसलिए इस बार भी कुछ लोगों को यह यकीन नहीं हो रहा कि वाकई ही वह मारा गया है? न्यूयार्प टाइम्स ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि लोग यह जानना चाह रहे हैं कि क्या वह अब भी जिन्दा है? अखबार ने कहा कि सोमवार के ड्रोन हमले के निशाना बने मीर अली इलाके में कबाइली सूत्रों ने बताया कि अल लिबी या तो मारा गया है या बुरी तरह घायल हो गया है। हाल के दिनों में यह तीसरा और इस साल का सबसे खतरनाक ड्रोन हमला था। अगर अबू याहया अल लिबी के मारे जाने की खबर सच साबित होती है तो पिछले साल ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अलकायदा के लिए यह सबसे बड़ा झटका होगा। लिबी न सिर्प एक आतंकी था बल्कि अलकायदा का थिंक टैंक भी था। वह आत्मघाती हमलों का मास्टर माइंड भी माना जाता था। उर्दू-अरबी और पश्तो भाषा की गहन जानकारी होने के साथ उसे इस्लाम की गहन जानकारी भी थी। लिबी पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में आतंकी गतिविधियों के संचालन को देखता था और क्षेत्रीय समूहों से सम्पर्प कायम रखता था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उसकी जगह भरने वाला अलकायदा में कोई और नहीं है। अमेरिका को वॉर ऑन टेरर में यह एक उल्लेखनीय सफलता मिली है। अलकायदा का नेटवर्प धीरे-धीरे समाप्त हो जा रहा है। अलकायदा द्वारा दुनिया में फैलाए गए आतंक में भी कमी आई है। अगर अलकायदा कमजोर होता है तो 2014 में अमेरिका को अफगानिस्तान छोड़ने की डेडलाइन को पूरा करने में आसानी होगी। अगर अल लिबी की मौत की खबर की पुष्टि होती है तो इससे राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी राष्ट्रपति चुनाव जीतने में मदद मिलेगी। वह छाती ठोंक कर कह सकते हैं कि उनके कार्यकाल में पहले लादेन और अब लिबी का सफाया उन्होंने किया।
Al Qaida, America, Anil Narendra, Daily Pratap, ISI, USA, Vir Arjun

Friday, 1 June 2012

लादेन की खबर देने वाले डा. अफरीदी को 33 साल कैद

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 1 June 2012
अनिल नरेन्द्र
गत दिनों अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के अभियान में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का साथ देने वाले पाकिस्तानी डा. शकील अफरीदी को एक अदालत ने देशद्रोही करार देते हुए 33 साल की कैद की सजा सुना दी। हमें यह फैसला सुनकर आश्चर्य भी हुआ और अजीबोगरीब भी लगा। खैबर कबाइली क्षेत्र के राजनीतिक पतिनिधि मुताहिर जेबखान ने पाकिस्तानी अखबार `डान' को बताया कि शकील को चार सदस्यीय कबाइली अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 33 साल की कैद और 3.2 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद शकील को पेशावर स्थित केन्द्राrय कारागार भेज दिया गया। शकील को पाकिस्तान अपराध संहिता की बजाए ब्रिटिश कालीन कानून, पंटियर काइम रेगुलेशन एक्ट के तहत दोषी करार दिया गया। इस एक्ट के तहत राजद्रोह के मामले में मौत की सजा का पावधान नहीं है। डा. शकील ने सीआईए के निर्देश पर एबटाबाद में एक टीका अभियान चलाया था, ताकि इसकी मदद से ओसामा और उसके परिवार के सदस्यों के डीएनए नमूने लिए जा सकें। अभियान से मिले सबूतों के आधार पर ही अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन के खिलाफ बीते मई महीने में कार्रवाई कर उसे मार गिराया था। पाकिस्तान द्वारा उठाए गए इस कदम से यह फिर साबित हो जाता है कि पाकिस्तान आतंकवाद से लड़ने के पति गंभीर नहीं है। यह भी साबित होता है कि अंदरखाते पाकिस्तान हर वर्ग के आतंकवादी चाहे वह अलकायदा से हो या फिर लश्कर से हो, संबंध और सहानुभूति रखता है। पाकिस्तान उस आदमी से बदला ले रहा है जिसने दुनिया के मोस्ट वांटेड टेरोरिस्ट को खत्म करने में मदद की थी। दुनिया के किसी और कोने में शायद डा. अफरीदी का सम्मान किया जाता पर पाकिस्तान में वह एक देशद्रोही है जिसने देश के खिलाफ एक विदेशी खुफिया एजेंसी की मदद की। अगर पाकिस्तान की डबल गेम इस किस्से से एक्सपोज होती है तो अमेरिका पर भी सवाल उठते हैं कि वह अपने `सोर्स' यानि मुखबिर को बचा नहीं पाया। इस किस्से से पाकिस्तान और अमेरिकी रिश्तों में और तनाव बढ़ेगा। अमेरिका की विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने फैसले को अन्यायपूर्ण तथा अवांछित बताया। साथ ही अमेरिकी सीनेट के एक पैनल ने इस्लामाबाद को दी जाने वाली सहायता में कटौती भी कर दी। हिलेरी ने कहा कि अफरीदी के साथ जो किया गया है वह अन्यायपूर्ण है। उन्हें दोषी ठहराए जाने पर अफसोस है। उन्होंने जो मदद की वह दुनिया के सर्वाधिक कुख्यात हत्यारों में से एक का खात्मा करने में कारगर रही। यह स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के, हमारे और पूरी दुनिया के हित में था। दूसरी ओर पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने कहा कि विदेशी खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग करना किसी भी देश के कानून के खिलाफ है। अमेरिका में इजराइल के लिए जासूसी करने पर उम्रकैद की सजा दी गई। हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका है जिसे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने बहाल किया है। पाकिस्तान और अमेरिका के पहले से तनावपूर्ण रिश्तों में यह एक और अध्याय जुड़ गया है। हमारी राय में पाकिस्तान का यह कदम आतंकवादियों के उत्साह को बढ़ाने वाला है।

Saturday, 3 March 2012

लश्कर-ए-तोयबा की रणनीति में परिवर्तन

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3 March 2012
अनिल नरेन्द्र
नब्बे के दशक में लश्कर-ए-तोयबा आतंकवादियों को पाकिस्तान के जेहादी अड्डों से भारत धकेलता रहा। मकसद था कश्मीर में तोड़फोड़ करना। इसके बाद पाक सरकार ने आतंकवाद को बाकायदा एक स्टेट पॉलिसी बनाकर आतंकवादियों को भारत के शेष भागों में हमले करवाने की नीति बनाई। इसी के तहत सन 2000 में लाल किले पर हमला हुआ और 2001 में भारतीय संसद पर और 2008 में मुंबई हमले हुए। इन हमलों में आईएसआई ने लश्कर के माध्यम से भारत स्टेट के खिलाफ हमले करवाए। इन हमलों में कुछ आतंकी पाकिस्तान से विशेष रूप से आए तो कुछ यहीं भारत से शामिल हुए पर अब लगता है कि लश्कर ने अपनी रणनीति में थोड़ी तब्दीली की है। 26/11 हमलों के बाद उसने 10 आतंकियों को मुंबई में हमला करने भेजा था पर अब वह पाकिस्तान से आतंकी न भेजकर यहीं भारत से ही जेहादियों से हमले करवा रहा है। वह भारत से हमदर्द जेहादियों को उठाता है और उन्हें पाकिस्तान ले जाकर पूरी ट्रेनिंग देकर वापस भेजकर हमला करवा रहा है। बुधवार को दिल्ली पुलिस ने जिन दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है, उससे आईएसआई और लश्कर की नई नीति के संकेत मिलते हैं। राजधानी दिल्ली में एक प्रसिद्ध बाजार सहित 18 जगह धमाके की साजिश थी। लेकिन जम्मू-कश्मीर, झारखंड और दिल्ली पुलिस के साझा अभियान ने समय रहते बड़े धमाके होने से राजधानी को बचा लिया। साजिश को अंजाम देने की तैयारी में जुटे लश्कर-ए-तोयबा के दो आतंकियों को दबोच लिया गया। मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के निवासी बताए जा रहे दोनों बम बनाने में माहिर हैं। इनके पास से बरामद मैमोरी कार्ड में कुछ ऐसी तस्वीरें कैद हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सुबूत के तौर पर काम आएंगी। मसलन पाकिस्तान में संचालित आतंकी प्रशिक्षण केंद्र, आईईडी (इप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाते हुए। उनके कब्जे से एके 47 राइफल, विस्फोटक पदार्थ, आपत्तिजनक दस्तावेज सहित बहुत कुछ सामान बरामद हुआ है। इनका इरादा दिल्ली की चांदनी चौक मार्केट में विस्फोट करना था। सूत्रों के अनुसार उनमें एक जम्मू-कश्मीर निवासी एहतेशाम है और दूसरा हजारी बाग निवासी शफाकत है। यह दोनों पाकिस्तान में लश्कर के कैम्पों में ट्रेनिंग ले चुके हैं। जानकारी मिली है कि हजारी बाग के जिस शख्स को हिरासत में लिया गया है, वह एहतेशाम का नजदीकी रिश्तेदार है और कई सालों से झारखंड में आ बसा था। झारखंड पुलिस ने इस शख्स से लम्बी पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान इस शख्स ने बताया कि लश्कर के आका दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में भयानक विस्फोट कराने की तैयारी में जुटे हुए हैं। एहतेशाम हजारी बाग में रहने वाले शफाकत और कुछ अन्य लोगों की मदद से वहीं पर खतरनाक बम तैयार करता था, जिन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाना था। बुधवार को जिन आतंकियों को पकड़ा गया है वे दिल्ली के तुगलकाबाद में किराये के मकान में रहते थे। जब इन्हें सीमापार से निर्देश मिला था कि वे दिल्ली के किसी भीड़भाड़ वाले इलाके में बम विस्फोट करें तो इसके लिए इन लोगों ने चांदनी चौक की क्लॉथ मार्पिट का चुनाव किया। यहां शाम के वक्त हजारों लोगों की भीड़ रहती है। पूछताछ के दौरान पकड़े गए आतंकियों ने जानकारी दी है कि यदि वे लोग पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ते तो बुधवार की शाम चांदनी चौक विस्फोटों से दहल जाता। प्लान था 18 जगहों पर विस्फोट करने का। वे केवल भीड़भाड़ वाले स्थान पर विस्फोट करके दहशत फैलाना चाहते थे। आतंकी मंसूबों को नाकाम करने के लिए दिल्ली, झारखंड, जम्मू-कश्मीर की पुलिस तथा केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों को बधाई। बेहतर समन्वय से यह सम्भव हो सका।
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Friday, 2 March 2012

आया तो कब्र से सोना निकालने पर बन गया पाक जासूस

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2 March 2012
अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने पिछले कुछ दिनों से भारत में जासूसी कराने के तौर तरीकों में थोड़ी तब्दीली की है। पिछले कुछ दिनों में पकड़े गए पाक जासूसों से यह बात सामने आई है कि आईएसआई अब ऐसे लोगों को भारत जासूसी करने भेज रही है जिनके पकड़े जाने से उन्हें कोई ज्यादा फर्प न पड़े। वह ऐसे लोगों को तलाशती है जिनका भारत से कोई संबंध होता है और जो क्रिमिनल प्रवृत्ति के होते हैं जो पैसा कमाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। वह भारत में ही आकर बस जाते हैं और अपना काम तब तक करते रहते हैं जब तक वह पकड़े न जाएं। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे ही जासूस को पड़ा। इसकी कहनी किसी बॉलीवुड की फिल्मी कहानी से कम नहीं है। आया तो वह गोवा की एक कब्र में दबे सोने को निकालने था पर वक्त ने ऐसी पलटी मारी की वह जासूस बन गया। ई. मेल और चैटिंग से यह शख्स पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को इंडियन आर्मी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां पहुंचा रहा था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए इसने बकाया कोलकाता में शादी भी कर ली। उसके दो बच्चे भी हैं। अपना काम करने के लिए उसने सेना के एक रिटायर्ड अफसर के यहां ड्राइवर की नौकरी कर ली थी। इस शख्स का नाम है कामरान अख्तर। कामरान की कहानी तब शुरू हुई जब उसे मिलने उसका चाचा मुहम्मद सलीम पाकिस्तान गया। कामरान कराची में भी चोरी करता था। चाचा ने उसे गोवा चोरी करने के लिए कामरान को भारत आने का न्यौता दिया। 1992 में कामरान पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत आया। अटारी बार्डर के रास्ते कामरान कोलकाता आया और चाचा सलीम के यहां रुका। यहां से दोनों गोवा गए। सलीम का एक परिचित अशरफ खान भी उनके साथ गया। जिस जगह पर बनी कब्र में दबे सोने को उन्हें चुराना था, वहां एक आलीशान इमारत बन चुकी थी। लिहाजा उनका प्लान फेल हो गया। इसके बाद उन्होंने वहां चोरियां करनी शुरू कर दीं। लेकिन दूसरी ही चोरी में वह पकड़े गए और तीन साल तक जेल में रहे। जेल से छूटने के बाद कामरान कोलकाता पहुंचा और वहां पर उसने आसिफ हुसैन नाम से भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया। एक महीने का पाक वीजा हासिल कर वह पाकिस्तान चला गया। लेकिन उसके बारे में आईएसआई और पाक आर्मी इंटेलीजेंस को पता लग गया। उन्होंने उसे पकड़कर जासूस बनाने का फैसला किया। ट्रेनिंग के साथ-साथ उसे हिन्दी भी सिखाई गई। इसके बाद आसिफ हुसैन को नेपाल भेजा गया और वहां से 1997 में वह सड़क के रास्ते कोलकाता पहुंचा। कोलकाता पहुंचने के बाद उसने रेडीमेड गार्मेंट्स का काम शुरू किया। दो साल बाद उसने 24 परगना में रहने वाली एक लड़की से शादी कर ली। उसने आसिफ हुसैन के नाम से वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया। बैंक एकाउंट खोल लिया। इस बैंक एकाउंट में पाकिस्तान से सऊदी अरब होते हुए पैसा जमा करवाया जा रहा था। कोलकाता में उसने एक आर्मी अफसर के यहां ड्राइवर की नौकरी हासिल कर ली। अफसर के साथ उसे ईस्टर्न कमांड मुख्यालय विलियम फोर्ट जाने का मौका मिला। यहां दूध बेचने वालों और डाक देने वालों को उसने अपना स्पेर्स बना लिया। दिल्ली में ऐसे ही किसी सोर्स से खुफिया दस्तावेज हासिल करने के लिए वह आया था। दस्तावेज हासिल करने के बाद वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा था, जहां उसे दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है कि नहीं एक दिलचस्प कहानी। आया तो था सोना निकालने और बन गया जासूस।
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Thursday, 23 February 2012

अमेरिका का पस्ताव: बलूचिस्तान एक आजाद मुल्क हो

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 23th February  2012
अनिल नरेन्द्र
अमेरिका ने अब एक नया पंगा शुरू करने का पयास किया है। पाकिस्तान के अशांत दक्षिण बलूचिस्तान पांत में आत्मनिर्णय के अधिकार का यह नया पंगा अमेरिका के तीन सांसदों ने पतिनिधिसभा में एक पस्ताव पेश करके किया है। रिपब्लिकन सांसद डाना रोहराबेकर और दो अन्य सांसदों ने पस्ताव पेश करते हुए कहा कि फिलहाल पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान के बीच में बंटे बलूच नागरिकों को आत्मनिर्णय का और अपने संपभु देश का अधिकार होना चाहिए। उन्हें खुद का स्तर तय करने का मौका मिलना चाहिए। विदेश मामलों की सदन की एक उपसमिति के अध्यक्ष रोहराबेकर ने पिछले हफ्ते बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में कांग्रेस की सुनवाई का आयोजन किया था। रोहराबेकर ने एक बयान में कहा, वे जो राजनीतिक और जातीय भेदभाव सह रहे हैं वह बहुत भयावह है। हालात इसलिए भी और ज्यादा बिगड़ गए हैं क्योंकि अमेरिका इस्लामाबाद में उनका दमन करने वालों को आर्थिक मदद दे रहा है, हथियार बेच रहा है। बलूचिस्तान फिलहाल तो पाकिस्तान का हिस्सा है लेकिन पाकिस्तान बनने के साथ ही उसको स्वतंत्र देश बनाने की मांग शुरू हो गई थी। बलूचिस्तान के दक्षिण पश्चिम में ईरान की सीमा है जिससे लगा क्षेत्र सबसे अशांत माना जा रहा है। पश्चिमी हिस्सा अफगानिस्तान से लगा है और शेष पाकिस्तान से। बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की जंग में अमेरिका और नाटों का समर्थन पाप्त है। अमेरिका चाहता है कि 2013 तक बलूचिस्तान एक स्वतंत्र देश बन जाए।

हमारी राय में बेशक बलूचिस्तान एक अशांत क्षेत्र है और वहां पाकिस्तान खुलेआम मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। ताजा उदाहरण अब्दुल कदीर नामक एक बलोच का है जिसका बेटा 2009 में गायब हो गया था और उसका शव नवम्बर 2011 में मिला। अब्दुल कदीर बलोच का 29 वर्षीय बेटा अब्दुल जलील रेकी 13 फरवरी 2009 को गायब हो गया था और उनके मुताबिक पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उसका अपहरण किया था। बीते साल 22 नवम्बर को ईरान की सीमा से सटे पाकिस्तानी इलाके में अब्दुल जलील रेकी का क्षत-विक्षत शव मिला था। अब्दुल कदीर ने बीबीसी को बताया कि उनके बेटे को तीन गोलियां सीने पर लगी थीं और उनकी पीठ का कोई हिस्सा खाली नहीं था जहां लोहे को गर्म करके और सिगरेट से उनकी पीठ को दागा न गया हो। अब्दुल कदीर बलोच का कसूर इतना था कि वह पाक सेना व आईएसआई के खिलाफ विरोध पदर्शन करते थे। उनके मुताबिक बलूचिस्तान में 14 हजार के करीब लोग अभी भी गायब हैं, जिनमे 200 से अधिक महिलाएं भी हैं। यह ठीक है कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का रिकार्ड बहुत खराब है पर इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका उसमें हस्तक्षेप करे और उसे देश से अलग करने की साजिश छेड़ दे। यह भी कहा जा रहा है कि दरअसल अमेरिका की असल नीयत ईरान में खुफिया नजर रखने की है और इसी मकसद की पाप्ति के लिए वह बलूचिस्तान में अपना अड्डा स्थापित करना चाहता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बलूच की जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार की मान्यता के लिए पस्ताव पेश करके दबाव बनाना चाहता है। पाक मीडिया में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका हमारी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करना चाहता है, जिसकी हम कतई इजाजत नहीं दे सकते। पाक सुरक्षा एजेंसियों के दो अधिकारियों और राजनयिक हलकों के अधिकारियों ने पुष्टि की कि अमेरिकी राजनयिक और सैन्य नेताओं ने बलूचिस्तान में ईरानी सीमा के पास अपने एजेंटों के संचालन के लिए इजाजत मांगी थी। यह रहस्योद्घाटन पाक सुरक्षा एजेंसियों पर बलूचिस्तान में अपहरणों और पस्ताव के अमेरिकी पतिनिधिसभा में पेश होने के तुरन्त बाद हुए हैं। पाक की नेशनल असेंबली यानी निचले सदन ने भी बलूचिस्तान संबंधी अमेरिकी पस्ताव की निंदा की है। पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठनों के सबसे बड़े समूह ने सोमवार को एक भारी पदर्शन किया। इसमें लश्कर-ए-तैयबा संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद भी शामिल है जिसने पतिबंध के बावजूद संघीय राजधानी इस्लामाबाद में पवेश किया। अमेरिकी पस्ताव को पाक सरकार, सेना और आवाम सभी मिलकर विरोध कर रहे हैं। सभी का मानना है कि यह पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप है और इसकी असल वजह और ही है।
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Wednesday, 18 January 2012

आईएसआई भी चला रही है एक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 18th January  2012
अनिल नरेन्द्र
एक रिजर्व बैंक भारत में है और लगता है कि एक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अपने एजेंटों के माध्यम से चला रही है। रिजर्व बैंक से मेरी मुराद है जाली नोटों का गोरखधंधा। असल नोट भारतीय रिजर्व बैंक छापता है तो नकली नोट आईएसआई छपवाकर भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए भिजवाती है। गत शुक्रवार को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने नकली नोटों की एक खेप सीतापुर से पकड़ी। पुलिस ने नकली नोटों की इस खेप के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया, जीशान खान व ऐश मोहम्मद। पुलिस का कहना है कि इन दोनों से करीब दो करोड़, चौबीस लाख पचास हजार के नकली नोट बरामद हुए। पुलिस को पिछले दो महीने से खुफिया एजेंसियों से यह खबर मिल रही थी कि उत्तर प्रदेश के जिला प्रबुद्ध नगर का रहने वाला इकबाल उर्प काना नकली नोटों का नेटवर्प चला रहा है। वह पाकिस्तान में कहीं इस समय छिपा हुआ है। पुलिस का कहना है कि यह नकली नोट बहुत अच्छी क्वालिटी के छपे हैं और आसान नहीं बताना कि कौन-से असली हैं, कौन-से नकली। यह पहली बार नहीं जब मोस्ट वांटेड इकबाल काना ने भारत में नकली नोटों का जखीरा भेजा हो। इससे पहले भी वह वर्ष 2010 में एक तुर्की नागरिक को करीब डेढ़ करोड़ के नकली नोटों के साथ दिल्ली भेज चुका है। पुलिस का दावा है कि यूपी के प्रबुद्ध नगर स्थित कैराना गांव का रहने वाला इकबाल काना इस समय पाकिस्तान के कराची शहर में मौजूद है और पाक की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के इशारे पर डी कम्पनी व लश्कर-ए-तोयबा के साथ मिलकर भारत के विभिन्न हिस्सों में नकली नोटों को भेजने में जुटा हुआ है। पुलिस ने पाया कि इन नकली नोटों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सभी छह आवश्यक मानकों जैसे माइक्रोप्रिंटिंग, वॉटर मार्प ऑफ गांधी जी, 100 प्रतिशत कॉटन पेपर, एम्बोसिस टैक्नोलॉजी, इलेक्टो एड वॉटर मार्किंग व धागे का इस्तेमाल किया गया है। नोटों को देखकर यह पता चलता है कि इन्हें कराची की सरकारी प्रेस में छापा गया होगा। पुलिस ने बताया कि जिन कपड़ों के थान में छिपाकर जाली नोटों की खेप दिल्ली पहुंचाई गई है, उन पर सभी थानों पर छपी मोहर पाकिस्तान के फैसलाबाद की मिली हैं। इनमें सफारी टेक्सटाइल मिल फॉर स्टार सिद्दीकी प्रोसेसिंग मिल, महरानी कलैक्शन, कोहिनूर सूटिंग व उस्मान नईम फैब्रिक मिल शामिल हैं। इन नकली नोटों को भारत में बेचने की कमीशन कुछ इस प्रकार हैöदस लाख रुपये के फर्जी नोट पर चालीस हजार और पचास लाख पर एक लाख रुपये कमीशन देने का वायदा है। आईएसआई ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में यह चाल चली है। खुफिया सूत्रों के अनुसार आईएसआई का टारगेट करीब तीन से चार करोड़ रुपये के फर्जी नोटों को भारत के बाजार में खपाने की नीयत व इरादा है। यह नोट नेपाल और बंगलादेश सीमा के अलावा पंजाब और कश्मीर के रास्ते से भारत आते हैं। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के कराची, क्वेटा, पेशावर और लाहौर के अलावा नेपाल की तराई से जाली नोटों की छपाई दिन-रात चल रही है। आईएसआई को भारतीय नोटों में प्रयोग होने वाली स्याही भी हाथ लग गई है जिससे जाली नोटों को पहचानना बहुत मुश्किल हो गया है। आईएसआई को इस काम को अंजाम देने में दाऊद इब्राहिम भी पूरी मदद कर रहा है। इस काम का भार आईएसआई के मेजर सादिक हुसैन, मेजर ए. असगर, इकबाल राणा और मेहरुन्निसा को दिया गया है। मेजर असगर के रिश्तेदार जहां उत्तर प्रदेश में रहते हैं, वहीं मेहरुन्निसा के रिश्तेदार बिहार में रहते हैं। इनका प्लान नकली नोटों को नेपाल से बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगलादेश के रास्ते बिहार भेजने का है। इसके अलावा पाकिस्तान की सीमा से लगे पंजाब और कश्मीर के रास्ते से भी फर्जी नोटों की खेप पहुंचाई जाएगी। इस खेल में आईएसआई ने काफी सावधानी बरती है। इन चार रास्तों से भारत में नोटों की जो खेप आएगी उसके लिए हर रास्ते के लिए चार टोली बनाई गई हैं। हर टोली में नौ लोग होंगे जिनमें चार महिलाएं हैं। प्रत्येक टोली को कवर करने के लिए एक टोली होगी। दाऊद इब्राहिम का नेटवर्प भी इस काम में मदद कर रहा है। भारत के वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 500 रुपये के नकली नोटर तैयार किए जाते हैं। नकली नोट लेन-देन के कुल मूल्य का 60-74 फीसदी 500 रुपये के नोट की शक्ल में होते हैं। वैसे बाजार में 1000 के नोट का चलन बढ़ने के साथ ही इनके नकली नोटों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। जाली नोटों की बरामदगी निश्चित ही चिन्ताजनक है। मामला तब और भी गम्भीर हो जाता है जब यह सामने आता है कि बरामद किए गए ये नकली नोट देखने में असली नोटों के बेहद करीब थे और इन्हें भेजने वाला पाकिस्तान है। आईएसआई अपनी हरकतों से बाज आने वाली नहीं, हमें ही और चौकस रहना पड़ेगा।
Anil Narendra, Daily Pratap, Fake Currency, ISI, Pakistan, Vir Arjun

Tuesday, 10 January 2012

पाकिस्तान के असल सीआईए एजेंट

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 10th January  2012
अनिल नरेन्द्र
गत सप्ताह पाकिस्तान के कुछ वरिष्ठ पत्रकार हमारे कार्यालय आए थे। हमने उनके स्वागत का भव्य कार्यक्रम बनाया था। इनमें श्री महमूद शाम, अयाज बादशाह प्रमुख थे। आए तो यह हैदराबाद में एक कांफ्रेंस के लिए थे पर दिल्ली में वह दो दिन रुके। वहां अच्छा आदान-प्रदान हुआ। दोनों तरफ कई नई जानकारियां मिलीं। मैंने अपने स्वागत भाषण में कहा कि पाकिस्तान आज पत्रकारों चाहे वह अखबार के हों या टीवी के हों, के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश बन गया है। पाकिस्तान में स्वतंत्र चिन्तन करने वालों पत्रकारों के लिए यह एक कठिन दौर है। अपने कर्तव्य पालन के दौरान इस पेशे से जुड़े 11 लोगों की हत्या 2011 में हुई। इन लोगों की हत्या या तो जातीय गुटों के बीच होने वाली गोलाबारी या चरमपंथी हिंसा या फिर राजनैतिक विचारधारा के चलते की गई। उदाहरण के तौर पर गत वर्ष सलीम शहजाद के अपहरण और हत्या में राज्य की मशीनरी के हाथ होने का आरोप था जबकि इस मामले की जांच के लिए गठित आयोग अभी हवा में ही हाथ-पांव मार रहा है। सलीम शहजाद ने सशस्त्र बल के उन लोगों का पर्दाफाश किया था जिनका अलकायदा या तालिबान के साथ करीबी संबंध थे। पिछले दिनों बलूचिस्तान में राष्ट्रवादी विचारधारा या फिर सुरक्षाबलों द्वारा की जा रही ज्यादतियों को उजागर करने वाले कई पत्रकारों की हत्या कर दी गई। नतीजा यह हुआ कि बहुत से डरे पत्रकारों ने अमेरिका जैसे देशों में शरण दिए जाने के आवेदन करने पड़े। कराची में कुछ पत्रकारों को जातीय समूहों या सियासी दलों द्वारा मिल रही धमकियों के चलते विदेशों में सुरक्षा ठिकाने तलाशने पड़े। इस सिलसिले में मैंने पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार श्री नजम सेठी का एक लेख मिड डे में पढ़ा। उन्होंने बताया कि अब सुरक्षा व्यवस्था के कर्ताधर्ता लोगों की समझ पर चुभते हुए सवाल उठाने के चलते कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के विरुद्ध कपटपूर्ण प्रचार अभियान चला रहे हैं। उनको अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए का एजेंट होने का आरोप लगाया जा रहा है। पाकिस्तान के मौजूदा अमेरिकी विरोधी माहौल में इस तरह के आरोप लोगों को भड़काने के लिए दिए जा रहे हैं। मान लीजिए कि यदि आपने कह दिया कि एबटाबाद में 50 अमेरिकी हमले ने सेना की अक्षमता की पोल खोल दी तो क्या आप सीआईए एजेंट हो गए या आपने कह दिया कि राजनीतिक संस्थाओं का नियंत्रण सेना के उपर होना चाहिए तो क्या आप सीआईए एजेंट हो गए। यदि आपने कह दिया कि सेना को तालिबान के साथ किसी तरह की शांतिवार्ता में शामिल नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे उनको पाकिस्तानी क्षेत्र में पुन संगठित होने का मौका मिल जाएगा तो क्या आप सीआईए एजेंट हो गए? यदि आप कहते हैं कि ड्रोन विमानों के चलते वजीरिस्तान में तालिबान और अलकायदा के चरमपंथियों को खत्म करने में बड़ी मदद की तो आप सीआईए एजेंट हो गए। यदि आपने कह दिया कि सेना के लिए आवंटित बजट का जो कि देश की कुल कर का लगभग एक-चौथाई है की जांच संसद की समिति या पाकिस्तान के आडिटर जनरल के द्वारा की जानी चाहिए तो आप सीआईए एजेंट हो गए। यदि आप कहते हैं कि पाकिस्तान को भारत को व्यापार के क्षेत्र में एमएनएफ का दर्जा देना चाहिए जिसे भारत ने पाकिस्तान को 16 वर्ष पहले ही दे दिया था या वीजा नियमों में ढील देनी चाहिए या मनोरंजन उद्योग से जुड़े लोगों को मदद करने के लिए भारत से सांस्कृतिक संबंध बढ़ाना चाहिए या मीडिया समूह द्वारा चलाई जा रही अमन की आशा कार्यक्रम को सरकार को समर्थन देना चाहिए तो क्या आप सीआईए एजेंट हो गए। यदि आप कहते हैं कि पूर्व अमेरिकी राजदूत हुसैन हक्कानी और आईएसआई प्रमुख शुजा पाशा के मामले में एक समान त्यागपत्र की नीति अपनानी चाहिए। एक के ऊपर अमेरिकी सरकार को पाकिस्तानी सेना के ऊपर सरकार के नियंत्रण के लिए समर्थन मांगने का आरोप है जबकि दूसरे पर अरब शासकों से निर्वाचित सरकार को उखाड़ फेंकने में मदद के लिए अपील करने का आरोप है तो आप सीआईए एजेंट हो गए। यदि आप कहते हैं कि सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा से अधिक आवाम की दशा सुधारने वाली नीतियां बनानी चाहिए तो क्या आप सीआईए एजेंट हो गए। विडम्बना सबसे बड़ी यह है कि जिन लोगों ने अमेरिका के बढ़ते प्रभाव को बेनकाब किया है, इसका विरोध किया है उन्हें ही बदनाम करने के लिए उन पर सीआईए एजेंट की तौहमत लगाई जा रही है। पाकिस्तान में आज पत्रकार आवाम के हित में किसी भी प्रकार की आवाज उठाने से डरते हैं। इसीलिए कहता हूं कि पत्रकारों के लिए आज की तारीख में पाकिस्तान सबसे ज्यादा खतरनाक मुल्क है इस दुनिया में और इन परिस्थितियों में भी यह पत्रकार अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं। हमारा सलाम।
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Saturday, 7 January 2012

Pakistan on Dangerous Cross Roads

- Anil Narendra
The year 2012 might prove very crucial for Pakistan. Pakistan is struggling on a number of fronts simultaneously. On political front, President Asif Ali Zardari and Tehrik-e-Insaf are at logger heads. Popularity graph of Imran is shooting upwards. The second front is open between Army Chief General Ashfaq Parvez Kayani and Pakistan's intelligence agency, ISI Chief General Shuja Ahmed Pasha. That is why, General Kayani has negated the possibility of military rule in Pakistan, but in view of widening distance and mistrust between these two, it is difficult to say anything. Meanwhile, the Pakistan Parliamentary Committee has started investigating the memogate issue. The Pakistan Parliamentary Committee, entrusted with the investigation of the confidential letter (memogate) sent, has decided to issue summons to the-then Pakistan Ambassador to US, Hussain Haqqani, the US national of Pakistan origin, businessman Mansoor Eijaz and ISI Chief General Shuja Pasha. All these three could be asked to be present in person at the next meeting of the Parliamentary Committee, scheduled to be held on 10th January 2012. In the wake of the killing of Osama bin Laden in Pakistan in a US attack on 2nd May last year, it appears that Pakistan politics has entered a stormy phase. After this action in the internal politics of Pakistan, apprehending a military coup, President Asif Ali Zardari had written a letter to the US Administration seeking help. There is no indication of an early end to this storm in the Pak politics. Meanwhile, the Supreme Court of Pakistan has rejected Government's plea to handover the investigation of memogate episode to a Parliamentary Committee. Instead, the Supreme Court has constituted a three-member Committee to investigate the matter and submit its report within four weeks. All the three members of the Committee are Chief Justices of Islamabad, Baluchistan and Sindh High Courts. The Party in power, PPP is not happy with this decision of the Supreme Court and the Government will be requesting the Court to reconsider its decision, but the most serious matter is the deteriorating relations between Pakistan and US. In its report on Monday, the New York Times said, "America is now realizing the truth that the extensive security partnership with Pakistan has come to an end. Under such circumstances, US officials are, in a very limited sense, trying to save the anti-terror alliance. They are, however, aware that it would make the US capability to attack terrorists very complicated and supply in Afghanistan would be badly affected. A US Think Tank has crossed all the limits. This influential US Think Tank has said that the probable threats, US would be facing in 2012 include war with Pakistan. On the basis of interaction with the US officials and experts, The Council on Foreign Relations Centre for Preventive Action in America has prepared a list of probable threats, which US is likely to face during 2012. With reference to attack or anti-terror operations, Pakistan is quite up in this list. This list of America has been released at a time, when Pak Prime Minister Yousuf Raza Gillani has openly challenged US and NATO. After a meeting with the Army Chief Ashfaq Parvez Kayani, Gillani has warned US and NATO that Pakistan Army is completely prepared to deal with any threat, as such Pakistan will retaliate with its full strength to any attempt to violate its sovereignty. At present, Pakistan has stopped NATO supplies and any future decision in this regard is to be taken by the Cabinet. All told, it can be said that Pakistan is standing at dangerous cross roads. We hope that politicians in Pakistan would succeed in tackling these serious challenges and all these apprehensions would prove wrong.

Wednesday, 4 January 2012

निहायत खतरनाक चौराहे पर खड़ा पाकिस्तान

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th January  2012
अनिल नरेन्द्र
2012 का साल पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। पाकिस्तान एक साथ कई मोर्चों पर जद्दोजहद कर रहा है। सियासी मोर्चे पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी बनाम इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की खुली जंग छिड़ गई है। इमरान की लोकप्रियता का ग्रॉफ लगातार बढ़ रहा है। दूसरा मोर्चा पाक सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी और पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख शुजा अहमद पाशा के बीच खुला हुआ है। हालांकि जनरल कयानी ने कहा है कि पाकिस्तान में सैनिक शासन की सम्भावना नहीं है पर जिस तरीके से दोनों पक्षों के बीच फासला और अविश्वास बढ़ रहा है कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उधर पाकिस्तानी संसदीय समिति ने मेमोगेट की जांच जोरों से शुरू कर दी है। अमेरिकी सरकार को भेजे गोपनीय पत्र (मेमोगेट) मामले की जांच कर रही पाकिस्तानी संसदीय समिति ने तत्कालीन राजदूत हुसैन हक्कानी, पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी व्यापारी मंसूर एजाज और आईएसआई प्रमुख जनरल शुजा पाशा को समन भेजने का फैसला किया है। आगामी 10 जनवरी को समिति की अगली बैठक में इन तीनों को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना पड़ सकता है। गत दो मई को अमेरिकी कार्रवाई के बाद ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान की सियासत में मानों भूचाल-सा आ गया। अंदरूनी सियासत में इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट की आशंका को लेकर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने ओबामा प्रशासन को मदद के लिए पत्र लिखा था। इस रहस्योद्घाटन के बाद पाकिस्तान की राजनीति में ऐसा भूचाल आया कि थमने का नाम नहीं ले रहा। उधर पाक सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मेमोगेट कांड की जांच के लिए संसदीय समिति से जांच कराने की सरकार की मांग ठुकरा दी है। अदालत ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया है और चार हफ्तों में अपनी जांच पूरी करने को कहा है। तीनों सदस्य इस्लामाबाद, बलूचिस्तान और सिंध उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश हैं। सत्तारूढ़ पीपीपी इस आदेश से खुश नहीं और सरकार सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश की समीक्षा करने का अनुरोध करेगी पर सबसे गम्भीर मामला है पाकिस्तान और अमेरिका के बिगड़ते रिश्ते। न्यूयार्प टाइम्स ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट में कहा हैöअमेरिका अब इस सच्चाई का सामना कर रहा है कि उसकी पाकिस्तान के साथ व्यापक सुरक्षा भागीदारी का समय समाप्त हो चुका है। ऐसे में अमेरिकी अधिकारी एक बेहद सीमित मात्रा में आतंकवाद विरोधी गठबंधन को बचाने के प्रयासों में जुटे हैं। हालांकि उन्हें यह अहसास भी है कि इससे आतंकवादियों के खिलाफ हमले करने की उनकी (अमेरिकी) क्षमता पेचीदा हो जाएगी और अफगानिस्तान में आपूर्ति भी प्रभावित होगी। अमेरिका के एक थिंक टैंक ने तो सारी हदें पार कर दी हैं। अमेरिका में एक असरदार थिंक टैंक ने कहा है कि साल 2012 में अमेरिका जिन सम्भावित खतरों से सबसे ज्यादा जूझ रहा है, उनमें पाकिस्तान के साथ संघर्ष भी शामिल है। अमेरिका में द काउंसिल ऑन फोरेन रिलेशंस सेंटर फॉर प्रिवेंटिव एक्शन ने अमेरिकी अधिकारियों और विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर उन सम्भावित खतरों की सूची तैयार की है, जिनसे नए साल में अमेरिका को जूझना पड़ेगा। किसी हमले या आतंकवाद विरोधी अभियान के चलते पाकिस्तान से लड़ाई इस सूची में काफी ऊपर है। अमेरिका की यह सूची उस समय सार्वजनिक हुई है, जब पाकिस्तान में प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने अमेरिका और नाटो को खुली चेतावनी दी है। सेना प्रमुख अशफाक परवेज कयानी से मुलाकात के बाद गिलानी ने अमेरिका और नाटो देशों को चेताया कि वह भविष्य में अपनी सप्रभुता पर किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे, क्योंकि उनकी सेना का कहना है कि वह किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। पाकिस्तान ने मौजूदा हालात में नाटो की सप्लाई रोक दी है और भविष्य में इस पर कोई भी फैसला कैबिनेट ही लेगी। कुल मिलाकर पाकिस्तान एक निहायत खतरनाक चौराहे पर खड़ा हुआ है। हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान के सियासतदान इन गम्भीर चुनौतियों से निपटने में कामयाब रहेंगे और सारी आशंकाएं गलत साबित होंगी।
America, Anil Narendra, Asif Ali Zardari, Daily Pratap, General Kayani, Haqqani Network, ISI, Osama Bin Ladin, Pakistan, USA, Vir Arjun

Thursday, 15 December 2011

आईएसआई को देश के अन्दर से पूरी मदद मिलती है


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 15th December 2011
अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत के खिलाफ छेड़े अपने अभियान को आगे बढ़ाने से बाज नहीं आ रही। वह कुछ न कुछ करती ही रहती है पर हमारी सुरक्षा एजेंसियां भी चुस्त और तैयार रहती हैं। हाल ही में इंडियन मुजाहिद्दीन के सात आतंकवादियों को पकड़ने और बड़े नेटवर्प का खुलासा करने के बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा व स्पेशल सेल की विशेष टीम को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। विशेष टीम ने पाक खुफिया एजेंसी के दो एजेंटों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। इनमें एक महिला है। इनके पास से पाकिस्तानी पहचान पत्र व पासपोर्ट के अलावा भारतीय पासपोर्ट व पहचान पत्र भी मिले हैं। आईएसआई ने इन्हें भारत में ठिकाना बनाना और यहां की गुप्त सूचनाएं हासिल करने के लिए भेजा था। सोमवार को दोनों को तीस हजारी स्थित एसीएमएम विनोद यादव की कोर्ट में पेश किया गया, यहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। डीसीपी अशोक चांद के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि दो पाकिस्तानी नागरिकों ने नेपाल बार्डर से भारत में प्रवेश किया है। ये गोरखपुर के पास सोनौली बार्डर से होते हुए गोरखधाम एक्सप्रेस से दिल्ली आ रहे हैं। सूचना मिलते ही स्पेशल सेल सक्रिय हो गया और दोनों को दिल्ली रेलवे स्टेशन से दबोच लिया। सवाल यह उठता है कि इनके पास न केवल भारतीय पासपोर्ट ही थे पर उन पर भारत में प्रवेश की मोहर नहीं लगी थी? यह कैसे सम्भव हुआ? सोफिया के पास एक पाक सरकार द्वारा जारी नागरिकता प्रमाण पत्र भी मिला है। इसके साथ कुछ संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं जिनमें चिप इमरान के नाम से गुजरात से जारी ड्राइविंग लाइसेंस, भारतीय मतदाता पहचान पत्र, यूसुफ के नाम से जारी भारतीय पैनकार्ड, यूसुफ लफ्गाजीवाला के नाम से अहमदाबाद से वर्ष 1986 में जारी भारतीय पासपोर्ट भी बरामद हुआ। इमरान ने पूछताछ में बताया कि वह मूल रूप से अहमदाबाद (गुजरात) का रहने वाला है। लेकिन वर्ष 1988 में वह पाकिस्तान चला गया था और वहां की नागरिकता ग्रहण कर ली थी। जब वह पाकिस्तान में था तो आईएसआई ने उससे सम्पर्प किया कि अगर वह भारत जाकर उनके लिए काम करे तो उसे काफी रुपयों की मदद मिलेगी। इमरान के राजी होने पर मार्च 2011 में उससे कहा गया कि वह भारत जाकर एक महिला को वहां का रेजीडेंट एजेंट बनाए। इसी योजना के तहत वह भारत आया था। यहां से दोनों को आगरा जाना था। इमरान उसे आगरा छोड़कर वापस पाकिस्तान लौट जाता। महिला आगरा में रहकर वहां के लोगों के साथ घुलमिल कर अपना ठिकाना बना लेती। किन्तु दिल्ली में ही दोनों को दबोच लिया गया। यह हैरानी की बात है कि न केवल भारत-पाकिस्तान आना-जाना इतना इन लोगों के लिए मामूली बात है, जब चाहे चले जाएं, जब चाहे वापस आ जाएं पर भारतीय दस्तावेज भी इनके आसानी से बन जाते हैं। हम आईएसआई को तो दिन-रात कोसते रहते हैं पर अपने घर को नहीं देखते जहां कि लचर व्यवस्था के कारण आईएसआई अपने मंसूबों में कामयाब होती है।
Anil Narendra, Daily Pratap, ISI, Terrorist, Vir Arjun

Tuesday, 6 December 2011

आईएसआई का न्यूड मॉडल ः वीना मलिक

कुछ एक्ट्रसों की आदत है कि वह विवादों में बनी रहती हैं। इनके लिए यह अपने प्रोफेशन को बढ़ाने का एक तरीका है। किसी न किसी प्रकार की पब्लिसिटी एंटर में लगी ही रहती है। ऐसी एक्ट्रसों में से एक हैं वीना मलिक। यह वही वीना मलिक हैं जो एक पाकिस्तानी अदाकारा हैं और पिछले दिनों बिग बॉस-4 में आई थीं। वहां भी अश्मित पटेल से इनका इश्क चर्चित हुआ था। यह इश्क असल था या नाटक यह तो वही बेहतर जानती हैं पर इसमें वह कुछ दिनों तक सुर्खियों में जरूर रहीं पर अब जो काम उन्होंने किया है उससे निश्चित तौर पर वह अपने देश पाकिस्तान में जरूर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने एक मेन मैगजीन के लिए कवर पर न्यूड फोटो खिंचवाई है। पहले तो वीना मलिक ने इसे डिनाई किया कि यह फोटो उनकी है पर इससे वह किसी को जब प्रभावित नहीं कर सकीं तो स्वीकार कर लिया। इस न्यूड फोटो की एक खास बात है कि उन्होंने अपने बाएं बाजू पर पाकिस्तान की खुफिया (बदनाम) एजेंसी आईएसआई को बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है। जाहिर-सी बात है कि वीना मलिक ने ऐसा लिखने की स्वीकृति दी होगी तभी तो जाकर यह अक्षर लिखे गए। इस फोटो से पाकिस्तान में भारी प्रतिक्रिया होनी स्वाभाविक ही थी। पाकिस्तान के कई कट्टरपंथी कह रहे हैं कि वीना ने देश को बदनाम कर दिया है। वे उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान में तो कहा जा रहा है कि वीना ने पाकिस्तानी संस्कृति को तबाह कर दिया है, इसे पाक नागरिक बने रहने का कोई हक नहीं है। फेसबुक पर भी उसके बॉयकाट की एक मुहिम चला दी गई है। एक्ट्रेस मीरा जो उसकी पहले भी आलोचना करती रही हैं, ने पहले उसे चीटर कहा था अब उसने ट्विट किया है ः न केवल वह चीटर हैं पर अब तो मैं यह कह सकती हूं कि वह एकदम पागल हो गई हैं। यह वही वीना मलिक हैं जिन्होंने अपने एक्स ब्वॉयफ्रेंड मोहम्मद आसिफ के बारे में कई बातें कही हैं। उसने आसिफ को मैच फिक्सर भी बताया। वीना इस फोटो को गलत बता रही हैं। उनका कहना है कि यह सारी तस्वीरें नकली हैं। मैंने कभी किसी को न्यूड पोज नहीं दिया है, न मैं कभी ऐसा करूंगी। इसमें उनके चेहरे के नीचे जिस्म किसी और का लगा दिया गया है। मैं कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही हूं पर मैगजीन के एडिटर ने वीना की इन बातों को गलत बताया है। उनका कहना है कि यह फोटो 22 नवम्बर को उनकी मंजूरी से शूट की गई थी और उन्होंने बाद में ईमेल से यह जानने की उत्सुकता भी दिखाई कि आखिर यह फोटो कैसी लग रही है और किस रूप में छपकर आ रही है। उन्होंने कहा कि उनके हाथ पर आईएसआई लिखवाने का आइडिया मेरा था और उन्होंने यह सुझाव दिया था कि इसे बड़े अक्षरों में लिखवाया जाए। यह लिखे जाने का बस एक ही कारण था। वह यह कि हमारे यहां हर गलत चीज के लिए आईएसआई को जिम्मेदार ठहराया जाता है। बस मजाक का यही आइडिया था, इसके अलावा और कोई मतलब नहीं है। अब यह फोटो इंटरनेशनल मीडिया में हिट हो रही है। बीबीसी के अलावा अमेरिका और यूरोपीय मीडिया में भी इसने हलचल मचा दी है। पाकिस्तान में पिछले दिनों वीना ने कुछ मौलानाओं को भी चुनौती दे डाली थी। इसके बाद एक मोटी रकम लेकर वह एफ टीवी रिएलिटी शो में स्वयम्वर में भी आई हैं। जैसा मैंने कहा कि वीना जैसे सरीखे की एक्ट्रसों के लिए सुर्खियों में बना रहना वह इसलिए जरूरी मानती हैं कि इससे पब्लिसिटी मिलती है जो उनके प्रोफेशन के लिए अच्छी है, भले ही यह नेगेटिव पब्लिसिटी ही क्यों न हो।

Tuesday, 15 November 2011

Pakistan - advocating death sentence to Kasab

- Anil Narendra
Declaring Ajmal Kasab, accused of Mumbai terrorist attacks of 26/11 a terrorist, the Interior Minister of Pakistan, Rehman Malik advocated him to be hanged. At the sidelines of 17th SAARC Summit, Malik said, 'Pakistan has nothing to do with his activities. He is a non-state actor and should be hanged.' But commenting on Smjhauta Train blast also, he said that incidents like Mumbai attack and Samjhauta blast are adversely affecting the relations between both the countries. We fail to understand why Rehman made such a remark? Pakistan has been known for saying something and doing the opposite. The world knows that Pakistan's intelligence agency ISI was behind the Mumbai terror attacks. Countries like US and UK have also accepted this truth. Pakistan has excluded Jamat-ud-Dawa from the list of terrorist organizations. We should not take Pakistan's remarks at 17th SAARC Summit at Maldives seriously. According to sources, Pakistan's Interior Ministry had issued a list of 31 banned terrorist organizations, but it did not contain the name of Jamat-ud-Dawa, considered to be the umbrella organization for the most dangerous terror outfit in South Asia, Lashkr-e-Toiba. It was banned under the pressure from US and United Nations.
When it became clear that this organization was behind the 26/11 Mumbai attacks, India and US both demanded this outfit to be banned. United Nations Security Council banned this outfit vide its resolution No 1267. Besides, Australia, Britain and European Union also included this organization in the list of banned organizations. Under pressure from all sides, Pakistan also declared JuD as a banned outfit on 7th December 2008. It may be noted that Pakistan never seriously took any action against JuD Chief Hafiz Mohammed Said. He was detained, but later was set free by the Court for want of evidence. FBI had also played an important role in the investigations of Mumbai attacks, as a number of American citizens were killed in this attack. Both, India and US also handed over important evidence to Pakistan. Now, Rehman Malik is saying that Hafiz Said was not released by his government, but by the Supreme Court. ISI's intention also became clear in this case. During the hearing, the prosecution submitted information about involvement in the attack, but not proofs to that effect. Courts base their decisions on evidence not on mere information. How ridiculous is the argument? India had made available solid proofs to Pakistan. It may be mentioned that Pak government or its intelligence agency has not allowed any foreign investigation agency to interrogate Hafiz Mohammed Said.
Everybody knows that ISI and Lashkar were behind the 26/11 Mumbai attacks. I had recently referred to a BBC programme in this column. I am recalling it again just to remind Pak Interior Minister Rehman Malik of certain facts. BBC is an impartial-independent agency, whose credibility is beyond challenge. It has broadcast a programme titled 'Secret Pakistan' in two parts. In the first part, CIA official, Bruce Rudil, former adviser to the US President, Barack Obama, was quoted. Terrorists coming from Pakistan had attacked a number of important places in Mumbai on 26th November, 2008. Obama had been elected as the President of America by then, but he had not taken oath of the Office of the President. Rudil said, 'I asked Pak President to stop playing double game with us. He was also told that Pakistan has been doing this to US and its friends for many years. It is apprehended that such attacks will continue in future also.' Rudil said, 'There are imprints of Lashkar-e-Toiba all over these attacks (26/11). It was quite clear from the beginning that it was the job of LeT.' He further said, 'When you once connect these attacks with Lashkar, then these are sure to be linked to the Pak intelligence agency ISI.' In the second part of the programme, it was said that CIA had received information about direct involvement of ISI in Mumbai attacks.
Pakistan Interior Minister's remarks about hanging Kasab, cannot be taken seriously. Perhaps Rehman Malik wanted to mislead and make fool of the world, especially India with such remarks. But, such remarks cannot absolve Pakistan. Everybody knows that ISI and Pak Army are protecting these organizations and providing all possible help. In the beginning, Pakistan had refused to accept that Ajmal Kasab was a Pakistani citizen, which is the indicator of its intention. Till date, it has not accepted the bodies of the terrorists killed in the Mumbai attacks. Pakistan even did not take the bodies of its soldiers, who had entered Indian territories as infiltrators during the Kargil war. India had to perform their final rites. Rehman Malik also said that there was nothing surprising in Pakistan not being aware of the presence of Osama bin Laden in Abbotabad. He was a trained terrorist leader and he must have had full knowledge how to hide and where to hide. Sources say that in this case, Pakistan itself is providing protection to the Chief of Lashkar-e-Toiba, most dangerous terror outfit of South Asia, Hafiz Said. India no more will be tricked by Rehman Malik and his masters. Enough is enough.

कसाब को फांसी की पैरवी करने वाला पाक



Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 15th November 2011
अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने मुम्बई हमलों के दोषी अजमल आमिर कसाब को गत गुरुवार को आतंकी मानते हुए उसे फांसी पर चढ़ाए जाने की वकालत की। 17वें सार्प सम्मेलन के दौरान कसाब से पल्ला झाड़ते हुए मलिक ने कहा, `उसकी गतिविधियों से पाकिस्तान का कोई लेना-देना नहीं है। वह नॉन स्टेट एक्टर है। इसलिए उसे फांसी मिलनी चाहिए।' लेकिन साथ ही उन्होंने समझौता ट्रेन ब्लास्ट पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि मुम्बई हमले और समझौता ट्रेन ब्लास्ट जैसी आतंकी घटनाएं दोनों देशों के रिश्ते खराब कर रही हैं। हमें समझ नहीं आया कि रहमान मलिक ने ऐसी बात क्यों की? पाकिस्तान की कथनी और करनी में हमेशा बहुत फर्प रहा है। सारी दुनिया जानती है कि मुम्बई हमले के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ था। यह बात अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी मानी है। मुम्बई हमले की साजिश रचने वाले जमात-उद-दावा को पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों की सूची से बाहर कर दिया है। मालदीव में हुए 17वें सार्प सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान ने आतंकवाद से लड़ने के लिए चाहे कितनी ही बड़ी बातें क्यों न कही हों, हमें उसे गम्भीरता से नहीं लेना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक सार्प सम्मेलन के कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने जो 31 प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची जारी की थी उसमें से जमात-उद-दावा का नाम नदारद था। यह संगठन बेहद खतरनाक है। दक्षिण एशिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोयबा का सरपरस्त माने जाने वाले जमात-उद-दावा को अमेरिका व संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दबाव में प्रतिबंधित किया गया था।
26 नवम्बर 2008 को मुम्बई में हुए आतंकी हमले में इस संगठन का हाथ पाए जाने के बाद भारत व अमेरिका दोनों ने ही इस संगठन पर प्रतिबंध की मांग की थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने प्रस्ताव (संख्या 1267) के जरिये इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन व यूरोपीय संघ ने भी इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस चौतरफा दबाव के चलते पाकिस्तान ने 7 दिसम्बर 2008 को इसे प्रतिबंधित घोषित कर दिया था। अहम बात यह रही कि पाकिस्तान ने इस संगठन के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ कभी भी गम्भीरता से कार्रवाई नहीं की। दिखावे के लिए सईद को नजरबन्द किया गया और अदालत ने सुबूतों के अभाव में उसे रिहा कर दिया। चूंकि मुम्बई हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक मारे गए थे, इसलिए एफबीआई ने भी इसकी पड़ताल में अहम भूमिका अदा की थी। भारत व अमेरिका दोनों ही ने पाकिस्तान को उसके खिलाफ अहम सुबूत भी दिए थे। अब रहमान मलिक कह रहे हैं कि हाफिज सईद को सरकार ने नहीं बल्कि उनके देश की सर्वोच्च अदालत ने छोड़ा है। आईएसआई ने इस केस में भी अपनी नीयत का प्रदर्शन कर दिया। सरकारी पक्ष ने केस के दौरान आतंकी हमले में शामिल होने की सूचनाएं दीं, सुबूत नहीं। अदालत सुबूत के आधार पर कार्रवाई करती है, सूचना पर नहीं। यह दलील हास्यास्पद नहीं तो और क्या है। भारत ने उसके खिलाफ पाकिस्तान को पुख्ता सुबूत दिए थे। उल्लेखनीय है कि आज तक पाक सरकार या उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने किसी भी विदेशी जांच एजेंसी को हाफिज मोहम्मद सईद से पूछताछ करने की इजाजत नहीं दी है।
26/11 मुम्बई हमले के पीछे आईएसआई और लश्कर का हाथ था, यह बात अब सभी मानते हैं। मैंने पिछले दिनों इसी कॉलम में बीबीसी के एक कार्यक्रम का जिक्र किया था। पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक की याददाश्त ताजा करने के लिए फिर जिक्र कर रहा हूं। बीबीसी तो एक निष्पक्ष-स्वतंत्र एजेंसी है जिसकी विश्वसनीयता को चैलेंज नहीं किया जा सकता। बीबीसी ने दो हिस्सों में एक कार्यक्रम प्रसारित किया है जिसे `सीकेट पाकिस्तान' का नाम दिया गया था। कार्यक्रम के पहले हिस्से में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार रहे सीआईए अधिकारी ब्रुस रडिल को कोट किया गया। पाक से आए आतंकियों ने
26 नवम्बर 2008 को मुम्बई के कई प्रमुख स्थानों पर हमला किया था। उस वक्त ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे, हालांकि उन्होंने शपथ नहीं ली थी। रडिल ने कहा, `मैंने पाकिस्तानी राष्ट्रपति से कहा कि वे हमारे साथ दोहरा खेल खेलना बन्द करें। उनसे यह भी कहा कि पाक सालों से अमेरिकी और उसके सहयोगियों के साथ ऐसा कर रहा है। उसके आगे भी ऐसा ही करते रहने का अंदेशा है।' रडिल ने कहा, `इन हमलों (26/11) में हर जगह लश्कर-ए-तोयबा की छाप नजर आती है। हमलों की शुरुआत से ही लगने लगा था कि यह लश्कर की करतूत है।' आगे कहते हैं कि एक बार जब आप लश्कर से इन हमलों को जोड़ते हैं तो आप इसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी जोड़ेंगे। कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में कहा गया है कि सीआईए को यह जानकारी मिली थी कि मुम्बई के हमले में आईएसआई सीधे तौर पर शामिल थी।
पाकिस्तान के गृहमंत्री के इस बयान को गम्भीरता से नहीं लिया जा सकता कि कसाब को फांसी पर चढ़ा दो। सम्भव है कि रहमान मलिक ने सोचा हो कि ऐसा बयान देने से वह दुनिया और भारत को विशेष तौर पर गुमराह कर सकते हैं, बेवकूफ बना सकते हैं। ऐसे बयान देने से पाकिस्तान पाक साफ नहीं हो जाता। सबको पता है कि किस तरह से इन संगठनों को फलने-फूलने का पूरा मौका और हर सम्भव मदद आईएसआई और पाक फौज कर रही है। उसकी नीयत का अंदाजा तो इससे लगाया जा सकता है कि पहले तो पाकिस्तान ने अजमल कसाब नाम से किसी व्यक्ति को अपना नागरिक ही मानने से इंकार कर दिया था। आज तक इस हमले में मारे गए अपने देश के आतंकवादियों के शव तक नहीं लिए। इतना ही नहीं, उसने तो कारगिल युद्ध के दौरान घुसपैठी बनकर आए अपने सैनिकों तक के शव नहीं लिए। भारत को ही उनका अंतिम संस्कार करना पड़ा। रहमान मलिक ने यह भी कहा है कि अगर पाकिस्तान को यह नहीं पता चल पाया कि ओसामा बिन लादेन एबटाबाद में रह रहा था तो इसमें आश्चर्य कैसा? प्रशिक्षित आतंकी सरगना लादेन को पता था कि कैसे व कहां छिपा जाए। सूत्रों का मानना है कि यहां तो खुद पाकिस्तान ही दक्षिण एशिया के इस सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तोयबा के रहनुमा हाफिज सईद को संरक्षण दे रहा है। भारत अब रहमान मलिक या उनके आकाओं की चालबाजियों में नहीं फंसेगा। बहुत हो चुका है।
26/11, Al Qaida, Anil Narendra, Daily Pratap, ISI, Jaish e Mohammad, Pakistan, Qasab, Rehman Malik, Vir Arjun, Yousuf Raza Gilani, Zaki ur Rehman Lakhvi

Saturday, 22 October 2011

बद से बदतर होते जा रहे हैं पाकिस्तान के हालात



Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 22nd October 2011
अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तान की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। देश के अन्दर स्थिति खराब है और सीमा पर तो विस्फोटक होती जा रही है। रावलपिण्डी जैसे शहर में लोहे की रॉड से लैस 60 से अधिक नकाबपोशों (कट्टरपंथियों) ने लड़कियों के एक स्कूल में जबरन घुसकर छात्राओं एवं टीचरों की बुरी तरह पिटाई की है। रावलपिण्डी जिला प्रशासन ने दैनिक एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि शुक्रवार की इस घटना के बाद से शहर में दहशत का माहौल है। घटना की खबर मिलने के बाद सभी स्कूल बन्द कर दिए गए। इस घटना का भय मॉडल स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं में इस हद तक बैठ गया कि शनिवार को स्कूल की 400 छात्राओं में से महज 25 ही स्कूल आईं। आसपास के स्कूलों के छात्र भी इस घटना से इस कदर सहम गए कि कोई भी छात्राओं की मदद के लिए घटना स्थल पर नहीं पहुंच सका। न्यू टाउन पुलिस थाने के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्हें इस मामले में कोई कार्रवाई न करने के सख्त निर्देश मिले हैं। कट्टरपंथी हमलावरों ने छात्राओं और अन्य स्कूलों को हिजाब पहने की चेतावनी भी दी।
उधर अमेरिका ने पाकिस्तान के अशांत कबीलाई उत्तर वजीरिस्तान क्षेत्र के साथ लगते अफगान इलाके में भारी गोला बारुद, तोपयुक्त हैलीकाप्टरों के साथ सैकड़ों नए सैनिकों को भेज दिया है। इसके साथ ही इलाके में आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है। बताया जाता है कि शनिवार और रविवार की रात को पाकिस्तान के गुलाम खान से लगते इलाकों में अमेरिकी सैनिकों को नए मोर्चे पर तैनात कर दिया गया है। जियो टीवी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सीमाई इलाकों में रहने वाले कबीलाई लोगों ने बताया कि अफगान और अमेरिकी अधिकारियों ने पूर्वी खोस्त प्रांत के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया है तथा घर-घर की तलाशी ली जा रही है। दी न्यूज ने कहा कि पाकिस्तान के साथ लगते सीमाई इलाकों में अमेरिकी बलों की अचानक तैनाती से आतंकवाद से प्रभावित उत्तरी वजीरिस्तान में तनाव फैल गया है क्योंकि अमेरिकी बलों ने तुरन्त पाकिस्तान के सीमाई कस्बे गुलाम खान और खोस्त को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर यातायात को बन्द कर दिया है। हाल ही में पाकिस्तान के कबायली इलाकों पर अमेरिकी ड्रोन हमलों ने पाक की नाक में दम कर रखा है। पाक के रक्षा मंत्री अहमद मुख्तार ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अब पाक सरकार का धैर्य समाप्त हो रहा है और वाशिंगटन को इसकी सीमा की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। पाकिस्तान लगातार इन एकतरफा ड्रोन हमलों का विरोध कर रहा है और मुख्तार ने कहा कि उनकी सरकार जल्दी ही ड्रोन हमलों पर संशोधित नीतियों का खुलासा करेगी। पाकिस्तान में ड्रोन हमलों पर हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार जून 2004 से चल रहे ड्रोन हमलों में अभी तक 173 बच्चों समेत 775 नागरिक मारे जा चुके हैं। अमेरिका ने इन वर्षों में प्रति वर्ष औसतन 33 हमलों के हिसाब से 300 ड्रोन हमले किए हैं। यह रिपोर्ट लन्दन स्थित ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिज्म ने हाल में जारी की है। अमेरिका और पाकिस्तान में तनाव इस हद तक बढ़ गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी ने वजीरिस्तान में आतंकियों के खिलाफ एकतरफा सैन्य कार्रवाई की बढ़ती आशंका के बीच अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। कयानी ने कहा कि वाशिंगटन उनके देश को इराक या अफगानिस्तान समझने की भूल नहीं करे और किसी भी तरह के हमले से पहले 10 बार सोच ले। सेना मुख्यालय में हुई समिति की बैठक में पाक सेना प्रमुख ने जोर देकर कहा कि अशांत उत्तरी वजीरिस्तान में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने और कब करनी है, इसका फैसला सिर्प और सिर्प पाकिस्तान करेगा। उन्होंने कहा कि पाक परमाणु शक्ति सम्पन्न है और उसकी तुलना इराक और अफगानिस्तान से नहीं की जा सकती। जनरल कयानी ने अमेरिका को परमाणु बम की धौंस तक देते हुए कहा कि एकतरफा किसी भी कार्रवाई करने से पहले अमेरिका 10 बार सोच ले।
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