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Friday, 17 July 2015

जज के सामने ही चलता रहा बोलियों का दौर

सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय की जमानत से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रोचक मामला सामने आया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सहारा की 140 एकड़ जमीन को बेचने पर बहस हो रही थी। दरअसल सहारा समूह के वकील ने कोर्ट को बताया था कि समृद्धि डेवलपर्स 64 करोड़ रुपए में यह प्रॉपर्टी खरीदने को तैयार है। लेकिन गोरखपुर रियल एस्टेट कंपनी ने इसके खिलाफ अर्जी लगा दी। सोमवार को जब इस पर सुनवाई शुरू हुई तो दोनों कंपनियों के वकील बैंच के सामने पेश हुए और जमीन की बोली लगाने लगे। बोली 150 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। उल्लेखनीय है कि सहारा ने सात जुलाई को 140 एकड़ जमीन 64 करोड़ में समृद्धि डेवलपर्स को बेचे जाने की सूचना अदालत को दी थी पर गोरखपुर रियल एस्टेट डेवलपर्स ने कहा कि वह इस जमीन के लिए 110 करोड़ रुपए देने को तैयार है। कोर्ट ने कहा कि वह इसका 10 प्रतिशत रकम (11 करोड़ रुपए) जमा कराए फिर उसकी बात सुनी जाएगी। सोमवार को गोरखपुर डेवलपर्स 11 करोड़ रुपए जमा कर सुनवाई में शामिल हो गई। बहस शुरू हुई तो समृद्धि डेवलपर्स ने कहा कि वह 110 करोड़ भी देने को तैयार है। इस पर गोरखपुर डेवलपर्स ने 115 करोड़ रुपए की बोली लगा दी। यह सब कुछ जज साहबों के सामने होता रहा। इस पर जजों ने समृद्धि डेवलपर्स के वकीलों से पूछा कि वे कुछ कहना चाहते हैं? समृद्धि के वकील पारस कुहार को कोर्ट रूम में मौजूद कंपनी के लोगों ने इशारे में बोली बढ़ाने को कहा। कुहार ने बोली बढ़ाकर 125 करोड़ रुपए कर दी। इतना सुनते ही गोरखपुर डेवलपर्स के वकीलों ने कहाöहम 140 करोड़ रुपए भी देने को तैयार हैं। इस पर समृद्धि डेवलपर्स ने 145 करोड़ की बोली लगा दी। इस पर फिर गोरखपुर डेवलपर्स ने कहा कि हम 150 करोड़ रुपए देंगे। आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई रोक दी और अगली तारीख तीन अगस्त की तय कर दी। साथ ही शर्त रखी कि दोनों पक्ष 150 करोड़ रुपए की 25 प्रतिशत रकम 31 जुलाई तक तीन किश्तों में डिपॉजिट करें। जो पक्ष बीच में भागा या बाकी रकम जमा कराने में नाकाम रहा उसके 37.5 करोड़ रुपए जब्त होंगे। जमीन से मिली रकम सेबी-सहारा के एकाउंट में जमा होगी। कोर्ट ने सुब्रत राय की जमानत के लिए इसी एकाउंट में पैसा जमा कराने को कहा है। जमानत के लिए 5000 करोड़ रुपए कैश और इतने की ही बैंक गारंटी जमा करानी है। इसके बाद 18 महीने में 26 हजार करोड़ रुपए चुकाने हैं। राय के वकील कपिल सिब्बल ने पिछली सुनवाई में कहा था कि दुनिया का कोई भी बिजनेस ग्रुप 18 माह में 30 हजार करोड़ रुपए नहीं चुका सकता। पीठ ने सेबी से कहा है कि वह सहारा समूह की सेबी-सहारा खाते का विवरण मुहैया कराए। यह भी बताए कि समूह द्वारा सेबी-सहारा खाते में जमा रकम का कहां-कहां निवेश किया गया है।

-अनिल नरेन्द्र

लोढ़ा कमेटी का दूरगामी व ऐतिहासिक फैसला

क्रिकेट के चमकते चेहरों से नकाब उतर गया। क्रिकेट को कलंकित करने वालों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। आईपीएल में सट्टेबाजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी द्वारा दिए गए फैसले से क्रिकेट की आड़ में चल रहे गोरखधंधे और लम्बे समय से जारी हितों के टकराव से जुड़ी आशंकाओं की ही पुष्टि हुई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित लोढ़ा कमेटी ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आईपीएल की दो चर्चित टीमोंöचेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स की भागेदारी पर दो साल की रोक लगा दी है। साथ ही इन दो बड़ी टीमों के सहमालिक गुरुनाथ मयप्पन (चेन्नई) और राज पुंद्रा (राज) को सट्टेबाजी में लिप्त पाए जाने पर आजीवन क्रिकेट गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया है। यह फैसला उस बीसीसीआई के मुंह पर तमाचा है जो स्वतंत्र इकाई की दुहाई देकर दादागिरी के अंदाज में क्रिकेट चला रही थी और जिसने आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में जांच में ईमानदारी नहीं दिखाकर दोषियों को बचाने का काम किया। अगर बीसीसीआई में किसी ने गलत हो रहे काम के लिए आवाज उठाई होती तो आज उसे यह दिन नहीं देखना पड़ता। लेकिन तब सभी आंख मूंद कर अपने आका अध्यक्ष श्रीनिवासन की खुशामद में जुटे थे। असल सवाल भद्र जनों का खेल समझे जाने वाले क्रिकेट की साख का है, जिसे बट्टा लगाने में इसके कर्ताधर्ताओं ने ही कोई कसर नहीं छोड़ी है। इनमें सबसे ऊपर एन. श्रीनिवासन का नाम रखा जा सकता है, जिनके दामाद मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज पुंद्रा पर लोढ़ा कमेटी ने आजीवन रोक लगा दी है। हैरानी की बात यह है कि श्रीनिवासन अपने दामाद को सजा सुनाए जाने और चेन्नई सुपर किंग्स पर दो वर्ष की रोक लगाने के बावजूद नैतिक जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं, इसके पूर्व कमिश्नर और भारत में वांछित ललित मोदी को लेकर उठे हालिया सियासी तूफान से इतर सच यह है कि इस फैसले ने आईपीएल की परिकल्पना को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सिर्प श्रीनिवासन और ललित मोदी की मित्रता से बदलती प्रतिद्वंद्विता का नतीजा नहीं है बल्कि लगता है कि आईपीएल को कुछ लोगों ने खड़ा ही इसलिए किया ताकि खेल की आड़ में करोड़ों के वारे-न्यारे किए जा सकें। अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति ब्रिटिश नागरिक राज पुंद्रा जैसे लोगों की इस सट्टेबाजी में संलिप्तता तो यही दर्शाती है कि इसके तार विदेश से भी जुड़े हुए हैं। वैसे समिति के इस फैसले से कई सवाल भी उठ सकते हैं। पहला यह कि दोनों टीमों के खिलाड़ियों को सजा क्यों? दूसरा कि इन टीमों के खिलाड़ियों के भविष्य का क्या होगा? क्या उनकी फिर से नीलामी की जाएगी? तीसरा इन टीमों के नए मालिकों की स्थिति में क्या ये टीमें खेलने की पात्रता हासिल कर सकती हैं। जो स्थिति अब है इसका मतलब यह है कि आईपीएल में सिर्प छह टीमें ही भाग ले सकती हैं। अगले आईपीएल संस्करण में 34 मैच कम हो जाएंगे। इसका सीधा असर फ्रेंचाइजी, बीसीसीआई और प्रसारण अधिकार हासिल करने वालों की कमाई पर पड़ेगा। जस्टिस मुद्गल की रिपोर्ट और जस्टिस लोढ़ा कमेटी के फैसले से बहरहाल यह उम्मीद तो जरूर बंधी है कि सिर्प लीपापोती के लिए कुछ छोटे क्रिकेटरों को टांग दिया जाए, से काम नहीं चलेगा। सट्टेबाजी में लिप्त बड़े लोगों को भी बख्शा नहीं जाएगा। क्रिकेट में स्वच्छता लाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे पर बड़ा सवाल तो यही है कि क्या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड श्रीनिवासन की छाया से बाहर निकल पाएगा? श्रीनिवासन ने अपने दामाद को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी और पूरे मामले को बरी करने का प्रयास किया। अगर वह समय रहते कड़ाई दिखाते तो बोर्ड की साख पर आंच नहीं आती और न ही आईपीएल बदनाम होता।

Thursday, 16 July 2015

भारतीय टेनिस की ऐतिहासिक जीत बधाई

भारतीय खिलाड़ियों ने टेनिस के मक्का में तीन खिताब जीतकर इस बार विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट में इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की शुरुआत शनिवार देर रात सानिया मिर्जा ने स्विस जेड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ मिलकर महिला डबल्स खिताब जीतने से की। इसके बाद रविवार को हरियाणा के सुमित नागल ने ब्वॉयज डबल्स वर्ग और फिर लिएंडर पेस और मार्टिना हिंगिस की जोड़ी ने मिक्स्ड डबल्स का खिताब जीतकर भारतीय टेनिस को एक यादगार उपलब्धि दी है। सानिया मिर्जा की जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जाएगी क्योंकि वह विंबलडन में खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी भी बन गईं। हरियाणा के झज्जर जिले के जैतपुर गांव के 18 वषीय सुमित नागल का भी यह पहला ग्रेंड स्लेम खिताब है। महेश भूपति की सरपरस्ती में अपनी पतिभा तराशने वाले सुमित जूनियर स्तर पर ग्रेंड स्लेम खिताब जीतने वाले पहले भारतीय हैं। इसके बाद लोगों के हरदिल अजीज लिएंडर पेस और मार्टिना हिंगिस की जोड़ी के मुकाबले का बेताबी से इंतजार था। सातवीं वरीय पेस-हिंगिस ने भी फाइनल में आस्ट्रेलिया के एलेक्जेंडर पेया और हंगरी की टीमिया बबोस की पांचवीं वरीयता पाप्त जोड़ी को सीधे सेंटों में आसानी से 6-1, 6-1 से हराकर भारत को इस पतिष्ठित टूर्नामेंट में तीसरा खिताब जिताया। 42 वषीय लिएंडर पेस का यह ऑल इंग्लैंड कल्ब पर चौथा, जबकि करियर का 16वां ग्रेंड स्लेम खिताब है। भारत के रामनाथन कृष्णन ने 1954 में विंबलडन चैंपियनशिप में जूनियर एकल वर्ग का खिलाफ जीता था। लिएंडर पेस ने 1990 में विंबलडन और 1991 में यूएस ओपन में जूनियर एकल का खिताब अपने नाम किया था। सानिया मिर्जा ने भी वर्ष 2003 में विंबलडन में बालिका वर्ग की डबल्स स्पर्धा का खिताब अपने नाम किया था। सानिया मिर्जा को चारों ओर से बधाइयां मिल रही हैं। राष्ट्रपति पणब मुखजी, पधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सानिया को बधाई देते हुए अपने आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट कियाः सानिया मिर्जा और मार्टिना हिंगिस को विंबलडन जीतने पर दिली मुबारकबाद। सानिया मिर्जा की यह उपलब्धि भारतीय युवाओं को पेरणा देगी। मध्य एशिया की यात्रा पर गए पीएम ने ट्वीट कियाः मार्टिना हिंगिस और सानिया मिर्जा ने बेहतरीन टेनिस खेलकर विंबलडन में शानदार जीत दर्ज की है। हमें तुम पर गर्व है और हम बहुत खुश हैं। सानिया की शादी पाक किकेटर शोएब मलिक से हो रखी है। ट्विटर पर कई लोगों का कहना है कि यह पहला मौका है जब दोनों देश एक साथ खुशी मना रहे हैं। क्योंकि सानिया भारत की बेटी हैं और पाकिस्तान की बहू। भाभी हम आपको प्यार करते हैं। सानिया के पति और किकेटर शोएब मलिक ने उन्हें मुबारक बाद देते हुए लिखा है कि मुझे उस पर गर्व है, दृढ़ संकल्प, अनुशासन, फोकस और बड़े सपनों से ही एथलीट बनते हैं। वहीं पाकिस्तान के उमर ने लिखाः भाभी ये भारत के बारे में नहीं है, ये हमारी भाभी के बारे में हैं। भाभी आप जहां भी हों आगे बढ़ती रहो। हम पाकिस्तानी आपको प्यार करते हैं और हमें आप पर गर्व है।

-अनिल नरेंद्र

एक बार फिर पलटा पाकिस्तान

रूस के उफा में तीन दिन पहले नए सिरे से बातचीत शुरू करने पर सहमति जताने वाला पाकिस्तान अपनी आदत के अनुसार एक बार फिर मुकर गया है। यूटर्न लेने के लिए मशहूर पाक पधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि जब तक कश्मीर का मुद्दा एजेंडा में नहीं होगा तब तक भारत से कोई बातचीत नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी गरिमा और सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगा। पाक के राष्ट्रीय सलाहकार ने बताया रूस में मोदी और शरीफ के बीच हुई बातचीत किसी वार्ता पकिया की कोई औपचारिक शुरुआत नहीं थी। उसका मकसद दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव कम करने के लिए एक बेहतर सोच बनाना था। नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की रूस के उफा में हुई बातचीत से जगी उम्मीदों को पाकिस्तान ने तीन दिन भी जिंदा नहीं रहने दिया। भारत सरकार ने दोनों देशों के पधानमंत्रियों की मुलाकात की उपलब्धि यह बताई थी कि इससे 26/11 के दोषियों को सजा दिलवाने का मुद्दा फिर एजेंडे पर आया है। मोदी-शरीफ वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में जिक हुआ कि नवंबर 2008 में मुंबई पर आतंकी हमलों के षड्यंत्रकारियों की आवाज के नमूने देने पर पाकिस्तान राजी हो गया है। मगर पाकिस्तान सरकार के लोक अभियोजक ने यह कहते हुए इसका खंडन कर दिया कि ऐसे नमूने देने पर अदालती रोक लगी है। पाकिस्तान ने मुंबई बम कांड के मुख्य साजिशकर्ता और भारत में वांछित आतंकी जकी-उर-रहमान लखवी के मुद्दे पर जिस तरह से रुख बदला है, उससे आतंकवाद के मुद्दे पर उसका दोहरा चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। उफा में दोनों पधानमंत्रियों के साझा बयान में दोनों नेताओं ने न केवल आतंकवाद के सभी रूपों की आलोचना की थी, बल्कि शांति और स्थिरता कायम करने के लिए इससे निपटने की साझा जिम्मेदारी भी स्वीकार की थी। इतना ही नहीं यह भी आश्वासन दिया था कि मुंबई कांड की सुनवाई तेज करने व आरोपियों के वॉयस सैंपल देने पर भी सहमति जताई थी। लेकिन महज तीन दिन के बाद ही पाक की ओर से जो बयानबाजी हो रही है उससे उसकी कथनी और करनी का फर्क साफ देखा जा सकता है। बची  खुची कसर सरताज अजीज के बयान से पूरी हो गई है। यह अकारण नहीं है कि ठीक इसी समय पाकिस्तानी उच्चायुक्त द्वारा ईद के बहाने कश्मीरी अलगाववादियों को आमंत्रित किए जाने की खबर आई है। इससे पहले भी पिछले वर्ष दोनों देशों के विदेश सचिवों की पस्तावित बातचीत से ऐन पहले भी पाक उच्चायुक्त ने हुर्रियत नेताओं को आमंत्रित कर भड़काने वाला काम किया था। यह तमाम बयान अच्छे इरादे का संकेत नहीं माने जा सकते। अब यह भारत को तय करना है कि वह कितना संयम दिखाता है। कश्मीर को जबर्दस्ती मुद्दा बनाने की मजबूरी पाक सरकार की हो सकती है, यह भी साबित होता है कि पाक सरकार पाक सेना के हाथों में महज एक कठपुतली है जिसे जब सेना चाहे घुमा सकती है। लेकिन इससे सच्चाई तो नहीं बदल जाएगी। हकीकत तो यह है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। यह भी हकीकत है कि पाकिस्तान इन जेहादी आतंकी समूहों को हर तरह मदद करने से बाज नहीं आएगा। हमें समझ नहीं आता कि जब तक पाक जमीनी माहौल नहीं बदलता तब तक अमन की बात करने का फायदा क्या है? क्यों हम बार-बार शांति की वार्ता करते हैं? 

Wednesday, 15 July 2015

दागी विधायकों ने की आप पार्टी की छवि धूमिल

दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर के बाद `आप' के एक और विधायक को फर्जीवाड़े के केस में गिरफ्तार किया गया है। कोंडली के विधायक मनोज कुमार पर एक प्लाट के फर्जी कागजात बनाकर उसका सौदा कर छह लाख रुपए बयाना लेने का आरोप है। शिकायतकर्ता के मुताबिक मनोज ने बाकायदा एग्रीमेंट कर 2012 में उनसे रुपए लिए थे। पीड़ित की शिकायत पर न्यू अशोक नगर थाना पुलिस ने मई 2014 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। गत  बृहस्पतिवार को पुलिस इसी मामले में एक कागज पर हस्ताक्षर करने के बहाने बुलाकर उन्हें अपने साथ ले गई। वहां कुछ देर पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी के तुरन्त बाद विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल को फैक्स भेजकर मामले की जानकारी दे दी गई थी। पुलिस के मुताबिक मनोज ने वर्ष 2012 में घड़ोली गांव के 46 गज के एक प्लाट पर फर्जी एग्रीमेंट बनाकर विजय कुमार नाम के एक शख्स से 21.60 लाख रुपए का सौदा किया था। उन्होंने न्यू अशोक नगर निवासी विजय कुमार से बतौर बयाना छह लाख रुपए लिए थे। गिरफ्तार विधायक मनोज कुमार के खिलाफ फर्जीवाड़े के तीन और मामले भी दर्ज हैं। इनमें मारपीट करना, धमकी देना, छेड़छाड़ व सरकारी काम में बाधा पहुंचाना शामिल है। मनोज कुमार की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी के कई और विधायकों पर दिल्ली पुलिस शिकंजा कसने की तैयारी में है। इनमें पहला नाम मॉडल टाउन के विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी का बताया जा रहा है। मॉडल टाउन पुलिस दंगा उकसाने समेत कई अन्य मामलों में आने वाले दिनों में रोहिणी कोर्ट के न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार की अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। आप समर्थकों का कहना था कि व्यापमं घोटाले से ध्यान हटाने के लिए आप पार्टी के विधायकों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि आप के एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर मनोज सही हैं तो पार्टी उन्हें वकील मुहैया कराएगी, अगर वे दोषी हैं तो उनके बचाव में नहीं खड़ी होगी। आप के 21 विधायकों पर पुलिस की नजर है। इन मामलों से आप पार्टी की छवि बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। इन दागी विधायकों की मौजूदगी से कैसे अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचारमुक्त, स्वच्छ प्रशासन का दावा कर सकते हैं। इन दागियों ने भी आप पार्टी के हक में बने माहौल का पूरा फायदा उठाया और पार्टी आलाकमान ने भी यह नहीं देखा कि इन लोगों का बैकग्राउंड क्या है, छवि क्या है। नतीजा यह है कि पार्टी और सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।

-अनिल नरेन्द्र

इन सियासी दलों को पारदर्शिता से परहेज क्यों?

राजनीतिक दलों को सार्वजनिक प्राधिकार मान रहे आरटीआई यानि सूचना का अधिकार कानून के दायरे में लाने की मांग पिछले कई सालों से उठ रही है। मगर पार्टियां इसे मानने पर राजी नहीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा, कांग्रेस सहित छह राजनीतिक दलों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्हें क्यों नहीं आरटीआई के दायरे में लाया जाए? इन दलों को इस मामले पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया गया है। गौरतलब है कि गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन ऑफ डेमोकेटिक रिफॉर्म ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर मांग की है कि वह सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के लिए अपनी आय के बारे में विस्तृत जानकारी का खुलासा करने को अनिवार्य बनाए। इसमें 20 हजार रुपए से कम चन्दा देने वालों का नाम बताना जरूरी नहीं है, इसलिए राजनीतिक दल बड़ी रकम को छोटी-छोटी राशियों में बांट कर दर्ज कर लेते हैं। जाहिर है कि यह चुनाव आयोग के नियमों से बचने का दरवाजा है जिसका फायदा सभी पार्टियां उठाती रही हैं। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने जून 2003 में फैसला दिया था कि सियासी पार्टियां सार्वजनिक प्राधिकारी (पब्लिक अथॉरिटी) की परिभाषा के दायरे में आती हैं, इसलिए उन्हें आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाएं देनी होंगी। मगर सियासी दलों ने इस फैसले की अनदेखी की। सीआईसी अर्द्ध न्यायिक व्यवस्था है। अत वह नोटिस भेजने के अलावा पार्टियों के खिलाफ कोई कदम उठाने में अक्षम था, इसलिए पार्टियां उन्हें गंभीरता से नहीं लेतीं पर अब यह प्रश्न देश की सर्वोच्च अदालत ने पूछा है। जाहिर है कि अब पार्टियां इस सवाल को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। उनकी यह दलील रही है कि आरटीआई अधिनियम पारित करते समय संसद ने सियासी दलों को इसके अंतर्गत नहीं रखने का फैसला किया। विधि निर्माण विधायिका का विवेकाधिकार है। अत किसी कानून की सीमा वहीं तक हो सकती है, जहां तक संसद उसे तय करती है। मगर अब प्रधान न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट एचएल दत्तू, जस्टिस अरुण कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की बैंच के सामने वह अर्जी है जिसमें सियासी पार्टियों को यह हिदायत देने की गुजारिश की गई है कि वे अपने सारे चन्दे का स्रोत घोषित करें। बेहतर होगा कि तमाम सियासी दल केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश का सम्मान करें। अब भी वक्त है कि वे अदालती नोटिस के जवाब में खुद को आरटीआई के तहत लाने का ऐलान कर दें। देर-सबेर तो उन्हें ऐसा करना ही पड़ेगा।

Tuesday, 14 July 2015

सभी विचाराधीन कैदी तिहाड़ से जमानत पर रिहा हों

दिल्ली सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में तिहाड़ जेल में बन्द हजारों कैदियों के मानवाधिकार की पुरजोर वकालत की है। सरकार ने हाई कोर्ट से जघन्य अपराधों को छोड़कर अन्य अपराधों में छह माह से अधिक समय से जेल में बन्द विचाराधीन कैदियों को जमानत पर रिहा करने का आग्रह किया है। चीफ जस्टिस जी. रोहिणी और जस्टिस जयंत नाथ की पीठ के समक्ष सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि त्वरित न्याय कैदियों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा है कि यदि हम विचाराधीन कैदियों के खिलाफ दर्ज मामले का त्वरित निपटारा नहीं कर सकते तो लम्बे समय तक जेल में बन्द रखना उनके मानवाधिकारों का हनन है। मेहरा ने तिहाड़ जेल में बन्द महिला कैदियों की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए पीठ से आग्रह किया कि न्यायिक व्यवस्था की कमियों की वजह से विचाराधीन कैदियों को भुगतना पड़ रहा है। तिहाड़ जेल में महिला कैदियों की दयनीय हालात को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस कूरियन जोसेफ ने भी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। हाई कोर्ट ने बुधवार को इसी पत्र पर संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा था। जस्टिस जोसेफ ने जेल में 612 महिला कैदियों की दयनीय हालत के बारे में जिक्र करते हुए इस मामले में उचित कार्रवाई करने को कहा था। हम दिल्ली सरकार और जस्टिस जोसेफ की बात से सहमत हैं। वैसे भी तिहाड़ जेल का बुरा हाल है। जज साहब जेल की कोठरी में सोने तक की जगह नहीं है। जेल में क्षमता से कहीं अधिक महिला कैदी हैं। गर्मी के चलते उनके साथ रहने वाले छोटे-छोटे बच्चे सारी रात रोते-बिलखते रहते हैं। साहब हमारी मदद कीजिए, हमें न्याय दिलाएं। तिहाड़ जेल में सजायाफ्ता व विचाराधीन 614 महिला कैदियों ने सुप्रीम कोर्ट के जज कूरियन जोसेफ को पत्र लिखकर यह गुहार लगाई है। पत्र में बताया गया है कि कई महिला कैदियों की जमानत हो चुकी है, लेकिन तय शर्तों को पूरा न करने के कारण वह रिहा नहीं हो पा रही हैं। छोटे बच्चे बिना अपराध के मां के साथ जेल में रहने को मजबूर हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज को लिखे पत्र में तिहाड़ जेल नम्बर छह में बन्द महिला कैदियों ने कहा है कि जेल में केवल 400 कैदियों को रखने की व्यवस्था है। वर्तमान में यहां 600 से अधिक महिला कैदी व उनके करीब 40 बच्चे रह रहे हैं। जेल में 234 सजायाफ्ता व 412 विचाराधीन महिला कैदी हैं। इनमें 27 विदेशी महिला कैदी हैं। नियम के मुताबिक छह वर्ष से अधिक आयु के बच्चे को मां के साथ जेल में नहीं रखा जा सकता, लेकिन कई बच्चों की आयु काफी अधिक हो गई है। बच्चों की जेल में कुख्यात महिला कैदियों के संरक्षण में रखा जा रहा है। हमें उम्मीद है कि हाई कोर्ट जल्द इनकी सुनवाई कर इन्हें न्याय दिलवाएगी और जेल से रिहा करेगी।

-अनिल नरेन्द्र