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Wednesday, 22 July 2015

कूरता की नई हदें तय हो रही हैं

आनंद पर्वत इलाके में सरेआम एक युवती मीनाक्षी की जिस बेरहमी से हत्या की उससे जहां दिल्ली में कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह तो लगता ही है साथ-साथ इस बात पर भी सवाल उठता है कि अपराधियों को अब किसी से डर नहीं  लगता। इससे साफ जाहिर है कि दिल्ली में बदमाशों के हौंसले बुलंद हैं और उन्हें अब किसी का भी डर नहीं है। आनंद पर्वत की वारदात को जिस तरीके से अंजाम दिया गया वह आरोपियों की कूरता का एक और उदाहरण है। मीनाक्षी उर्प अलका के परिजनों ने 10 अक्तूबर 2013 को आनंद पर्वत थाने में एसएचओ और 15 अक्तूबर 2013 को मध्य जिला के पुलिस आयुक्त को एक लिखित शिकायत में साफ लिखा है कि पड़ोस में रहने वाले जोगी की पत्नी शशि, उसके बेटे ईलू और सन्नी उनकी बेटी अलका के साथ गाली-गलौच करते हैं, तेजाब फेंकने की धमकी देते हैं, उनके साथ मारपीट भी की गई है। अलका का परिवार शांतिप्रिय है। पड़ोस में रहने वाले इन आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के घर अपराधी और गुंडों का आना-जाना है। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपी भाइयों के खिलाफ छेड़खानी का मामला दर्ज कर लिया। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस और लोगों ने बताया कि जब मीनाक्षी शाम को बाजार जा रही थी तो ईलू और सन्नी ने बड़ी बेरहमी से मीनाक्षी के चेहरे, सीने और पेट में चाकुओं से ताबड़तोड़ करीब 35 बार हमला किया। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपी भाइयों ने बाजार गई मीनाक्षी का पीछा किया। बचने के लिए मीनाक्षी एक इमारत की बालकनी में आ गई लेकिन दोनों युवकों ने उसे वहां दबोच लिया और उस पर चाकू से तब तक हमले किए जब तक वह बेहोश नहीं हो गई। मीनाक्षी को बचाने गई उसकी मां को भी नहीं बख्शा गया और उस पर भी वार किए गए। यह वारदात बिगड़ती कानून व्यवस्था के साथ-साथ गिरती नैतिकता का भी जीती-जागती मिसाल है। एक मां अपने बच्चों को अच्छी आदतें सिखाती है पर जब मां ही किसी गलत काम में अपने बच्चों के साथ शामिल हो तो समझा जा सकता है कि सामाजिक व्यवस्था का तानाबाना किस तरह से बिखर गया है। हैरानी और दुख की बात यह भी है कि दिल्ली वालों में इतनी भी इंसानियत नहीं बची है कि वे एक युवती का इस कूरता से कत्ल होते देखते रहे, लेकिन बचाने के लिए एक भी व्यक्ति नहीं आया। यही तो वजह है कि अपराधी खुलेआम अपराध करते हैं और साफ निकल जाते हैं, कोई उन्हें रोकने वाला नहीं। पुलिस हर समय हर वारदात की जगह पर नहीं हो सकती, कुछ तो साहस पब्लिक को भी दिखाना पड़ेगा। वैसे चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि अब इन अपराधियों को पुलिस का भी डर नहीं लगता। यही वजह है कि पिछले दिनों कई बार पुलिस वालों को भी बदमाशों ने निशाना बनाया। जहां पुलिस का भय फिर से पैदा करना होगा वहीं हमारी अदालतें इन अपराधियों से सख्त बर्ताव करें। पुलिस गिरफ्तार कर लेती है और अदालतें उन्हें जमानत आसानी से दे देती हैं ताकि वह फिर अपराध करें। सारे का सारा ढांचा ही बिगड़ा हुआ है। समझ नहीं आता कि दिल्ली को सुरक्षित कैसे बनाएं।

Tuesday, 21 July 2015

क्या सीबीआई जांच में खुलेंगे बड़े घोटाले?

उच्च न्यायालय ने नोएडा के चीफ इंजीनियर रहे बहुचर्चित यादव सिंह की अकूत सम्पत्ति की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इस आदेश के बाद यादव सिंह ही नहीं, उससे जुड़े तमाम नेताओं व नौकरशाहों के भी कठघरे में आने की उम्मीद है। 28 नवम्बर 2014 को आयकर विभाग ने यादव सिंह के नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद सहित कई ठिकानों पर छापे मारकर करोड़ों की नकदी व जेवर बरामद किए थे। अरबपति चीफ इंजीनियर को लेकर हंगामा हुआ तो आठ दिसम्बर 2014 को राज्य सरकार ने यादव सिंह को निलंबित कर दिया था। 10 दिसम्बर 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जांच सीबीआई से कराने के लिए जनहित याचिका दायर की गई थी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ व न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला की पीठ ने इसी याचिका पर गुरुवार को फैसला सुनाते हुए जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए हैं। यूपी के धनकुबेर यादव सिंह की काली कमाई का राज जानने के लिए सीबीआई को पिछले 10 सालों के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जमीन आवंटन में हुई धांधलियों की भी जांच करनी पड़ेगी। नोएडा फार्म हाउस घोटाला भी इसकी एक अहम कड़ी साबित हो सकती है, जिसमें कई दलों के बड़े नेताओं से लेकर आईएएस, आईपीएस अफसरों व बड़े उद्योगपतियों को बेशकीमती जमीनें कौड़ियों के भाव में बेच दी गईं। यादव सिंह के बारे में चर्चा है कि वह बिल्डरों को जमीन देने के बदले एक लाख रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से कमीशन लेता था। इसी के बूते उसने 20,000 करोड़ से ज्यादा का साम्राज्य खड़ा कर लिया था, ऐसा माना जाता है। यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश से प्राधिकरण अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मच गई है। खासतौर पर उन अधिकारियों-कर्मचारियों में जो वर्ष 2002 से 2014 के बीच यादव सिंह के करीबी रहे। भ्रष्टाचार और काली कमाई के आरोपों से घिरे यादव सिंह का विवादों से गहरा नाता रहा है। बसपा सरकार में पॉवरफुल रहे यादव सिंह का प्रमोशन से लेकर ठेकों में सीधा हस्तक्षेप रहा था। सपा सरकार आते ही उनके खिलाफ मनमाने तरीके से ठेके देने को लेकर कोतवाली सेक्टर-39 में 954 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज हुई। छापे से पहले आयकर विभाग को खुद उम्मीद नहीं थी कि उसके हाथ इतना बड़ा `कैच' लग सकता है। मामला सीबीडीटी के जरिए सुप्रीम कोर्ट की एसआईटी तक पहुंचा और सीबीआई जांच की उम्मीद जगी, लेकिन राज्य सरकार ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए न्यायिक जांच बैठा दी। इस बीच यादव सिंह ने कई बार राजधानी आकर अपने राजनीतिक आकाओं से भी मदद मांगी, नतीजतन आठ महीने तक उसे अभयदान मिलता रहा।

-अनिल नरेन्द्र

केजरीवाल जी जरा भाषा तो सही इस्तेमाल करें

चर्चा में बने रहने की दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल की पुरानी आदत है। मीडिया में बने रहने के लिए वह बड़े विवादास्पद बयान देने से भी नहीं चूकते। केजरीवाल ने एक निजी टीवी चैनल के साथ इंटरव्यू में दिल्ली पुलिस के लिए `ठुल्ला' शब्द का इस्तेमाल तक कर दिया। उन्होंने कहाöये कहते हैं कि दिल्ली पुलिस व ठुल्ला अगर किसी रेहड़ी पटरी वाले से पैसे मांगता है तो उसके खिलाफ भी केस नहीं होना चाहिए। यह मंजूर नहीं है। इस पर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर का कड़ा ऐतराज जताना जायज भी है। यदि मुख्यमंत्री ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करेगा तो यह अपमानजनक है। भीम सेन बस्सी ने कहा कि उन्हें पुलिस संगठन का सम्मान करना चाहिए। केजरीवाल ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार और भाजपा को डर था कि हम किसी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाले हैं। इसलिए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) पर नियंत्रण हासिल करने के लिए उसका चीफ बदल दिया। उन्होंने कहा कि लेफ्टिनेंट गवर्नर में हिम्मत नहीं है कि वे हमारे लिए किसी तरह की परेशानी पैदा कर सकें। केजरीवाल को काम करने से रोकने के लिए जंग के जरिए मोदी काम कर रहे हैं। इसी बीच श्री केजरीवाल ने एक आश्चर्यचकित कर देने वाला बयान जारी कर दिया। शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी। केजरीवाल का कहना है कि अगर पार्टी से बाहर निकाले गए योगेन्द्र यादव व प्रशांत भूषण वापसी का फैसला करते हैं तो उन्हें खुशी होगी। अरविंद केजरीवाल ने इंटरव्यू में कहा कि आम आदमी पार्टी में प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव की वापसी का स्वागत होगा। वे लोगों के हित में सबको साथ लेकर काम करने में यकीन रखते हैं। दूसरी तरफ मीडिया से पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक दिलीप पांडेय ने कहा कि आप की विचारधारा से इत्तेफाक रखने वाले सभी लोगों का पार्टी में स्वागत है। वह कोई आम आदमी हो या प्रशांत भूषण या योगेन्द्र यादव, यहां व्यक्ति का सवाल नहीं है। केजरीवाल द्वारा प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव को वापस आने के निमंत्रण पर प्रशांत भूषण ने उन्हीं की जुबान में करारा जवाब दिया। केजरीवाल पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि केजरीवाल पाखंडी हैं, निर्लज्ज और झूठे हैं। प्रशांत भूषण ने ट्विट कियाöसाले कमीने कहकर गालियां देने और सोची-समझी साजिश के तहत एनसी (नेशनल काउंसिल) मीटिंग में विधायकों से हमला कराने के बाद केजरीवाल हमें वापस चाहते हैं। पाखंडी, निर्लज्ज। प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव ने फर्जी डिग्री के आरोपों में गिरफ्तार किए गए कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर को टिकट दिए जाने से भी पार्टी को आगाह किया था। उन्होंने 28 मार्च को विवादास्पद राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अपने ऊपर हमला कराने का भी आरोप लगाया था। बाद में इन दोनों नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर अप्रैल में पार्टी से निकाल दिया गया। बाद में उन्होंने स्वराज अभियान का गठन किया। सवाल यह उठता है कि क्या अरविंद जी अब पार्टी और सरकार दोनों चलाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं जो प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव की वापसी चाहते हैं? बेशक यह सही है कि यह दोनों नेता पढ़े-लिखे, समझदार और अनुभवी हैं। शायद अब केजरीवाल को इनकी कमी महसूस हो रही है?

Sunday, 19 July 2015

ऑटो ड्राइवर से जबरन संबंध बनाना चाहती थी

महिलाओं से बलात्कार की खबरें तो आए दिन सुनते ही रहते हैं पर यह कम ही सुना है कि एक महिला ने एक पुरुष से बलात्कार करने का प्रयास किया पर यह कलयुग है। यहां सब कुछ संभव है। खबर आई है कि एक ऑटो ड्राइवर ने संबंध बनाने से इंकार किया तो दो लड़कियों ने मिलकर उसे पहले तो पीटा और फिर लूट लिया। एक लड़की गिरफ्तार कर जेल भेज दी गई और दूसरी की तलाश जारी है। फरार महिला तंजानिया की रहने वाली है। यह घटना दक्षिण दिल्ली के अर्जुन नगर में हुई। यहां एक इमारत में 32 साल की अंजलि लालवानी किराये पर रहती है। इसी बिल्डिंग में तंजानिया की युवती भी रहती है। मंगलवार रात 12 बजे अंजलि इग्नू रोड पर मंडावली निवासी उमेश प्रसाद के ऑटो में अर्जुन नगर जाने के लिए सवार हुई। किराया 100 रुपए तय हुआ। पीवीआर साकेत पर अंजलि ने ऑटो रुकवाया और उमेश से 300 रुपए उधार लेकर सामान खरीदा। घर जाकर उसने सामान उमेश को पकड़ाया और उधार और किराया चुकाने के लिए उसे पहली मंजिल पर ले गई। उसने सामान अन्दर रखवाने के बहाने उमेश को अन्दर बुलाकर गेट बन्द कर लिया। अंजलि ने उमेश की कमीज और मोबाइल फोन निकाल लिया। अब उसने उमेश से संबंध बनाने के लिए कहा। उमेश ने इंकार कर दिया। अंजलि ने शराब के दो पैग बनाकर एक पैग उमेश को दिया। उसने पीने से मना कर दिया तो उसके मुंह पर अंजलि ने शराब उढ़ेल दी और उससे जबरन किस कर बाहर निकल गई। उसने बाहर से गेट बन्द कर दिया। अब वह तंजानिया की लड़की को बुला लाई। यह विदेशी लड़की मोबाइल से वीडियो बनाने लगी। उमेश ने विरोध किया तो अंजलि ने उसकी कमीज और बनियान फाड़ कर उसे लात मारी। वह नीचे गिर गया। अब विदेशी युवती ने उमेश की पेंट से पर्स निकाल कर उसमें रखे 500 रुपए और ड्राइविंग लाइसेंस निकाल लिया। अब उमेश हिम्मत कर दौड़ा और बॉलकनी से नीचे कूद गया। सड़क पर गिरने की वजह से उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर आ गया। वहां से गुजर रहे राहगीर ने 100 नम्बर पर कॉल कर दी। पुलिस के आने से पहले ही दोनों युवतियां वहां से नदारद हो गईं। कमरे में ताला लगा मिला। उमेश को अस्पताल ले जाया गया जहां उसे प्लास्टर चढ़ा। सुबह अंजलि आई तो लेडीज पुलिस बुलाकर उसे पकड़ लिया गया। उसने पुलिस से कहा कि उमेश उसका जानकार है और उसे उमेश से 1500 रुपए का उधार वापस लेना है। पुलिस उसे उमेश के सामने ले गई। तब अंजलि ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। जैसा मैंने पहले कहा कि कलयुग है और कलयुग में कुछ भी असंभव नहीं।

-अनिल नरेन्द्र

याकूब मेमन की फांसी पर सियासत

मुंबई को 12 मार्च 1993 को दहलाने वाले मुख्य आरोपियों में से एक याकूब मेमन को 22 साल के लम्बे समय बाद 30 जुलाई को फांसी पर लटकाने का फरमान जारी हुआ है। टाडा अदालत की ओर से उसका डैथ वारंट जारी होते ही इस फैसले पर सियासत शुरू हो गई है। एनसीपी नेता एवं वरिष्ठ वकील माजिद मेनन ने इसे जल्दबाजी से उठाया गया कदम बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उधर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आजमी ने याकूब मेमन को बेगुनाह बताते हुए कहा कि यह सरकार की मार्केटिंग का हिस्सा है। माजिद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में याकूब मेमन की सजा को लेकर पुनर्विचार याचिका (क्यूरेटिव रिट) दायर की गई है। इससे पहले सरकार ने सजा का ऐलान कर दिया है, जिसका गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए और आखिरी फैसला आने तक सरकार को इंतजार करना चाहिए। उधर मुख्यमंत्री महाराष्ट्र देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि इस मुद्दे पर हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को मानेंगे। फड़नवीस ने बुधवार को कहा कि जो भी किया जाएगा उसे उपयुक्त समय पर सार्वजनिक किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर फैसला दिया था। न्यायालय की तरफ से जो निर्देश दिया जाएगा महाराष्ट्र सरकार उसके अनुरूप कार्य करेगी। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट अगर 21 जुलाई को पुनर्विचार याचिका को खारिज कर देता है तो याकूब मेमन को फांसी दी जाएगी। मेमन नागपुर केंद्रीय कारागार में बंद है। मामले से जुड़े एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि फिलहाल याकूब की फांसी पर कानूनी रोक नहीं है। सरकार ने टाडा अदालत से फांसी को अमल में लाने की अनुमति मांगी थी, जो मिल गई है। मुख्यमंत्री फड़नवीस ने भी फांसी की तैयारियों की पुष्टि की है। लेकिन तारीख, समय व स्थान को लेकर खुलासा नहीं किया है। मालूम हो कि ये धमाके मोस्ट वांटेड दाउद इब्राहिम के इशारे पर याकूब मेमन के भाई टाइगर मेमन ने करवाए थे। पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट याकूब (53) पर धमाकों की साजिश में शामिल होने के अलावा वारदात के लिए वाहनों का इंतजाम व विस्फोटक लदे वाहनों को निर्दिष्ट जगहों पर खड़ा करवाने का आरोप था। मामले में अभियोजन पक्ष के वकील रहे उज्ज्वल निकम का मानना है कि याकूब को फांसी देने से यहां ही नहीं, पाकिस्तान तक संदेश जाएगा कि भारत आतंकी घटनाओं को लेकर कड़ाई से निपटता है। शिवसेना प्रवक्ता और एमएलसी डॉ. नीलम गोहरे ने बुधवार को कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों को पक्षपात तथा सांप्रदायिक सियासत नहीं करनी चाहिए।

Saturday, 18 July 2015

हेमराज का सिर काटने वाला आतंकी अनवर ढेर

ढाई वर्ष पूर्व जम्मू की सीमा पर 13 राजपूताना राइफल्स बटालियन के लांस नायक हेमराज सिंह का सिर काट कर पाकिस्तानियों को हमारे सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया है। हेमराज के सिर को काटने वाले आतंकी मोहम्मद अनवर द्वारा सीमा में घुसपैठ करने के प्रयास में भारतीय सैनिकों ने उसे मार गिराया है। यह खबर आते ही कि हेमराज का हत्यारा मारा गया है हेमराज के गांव (कोसी कलां) में खुशी की लहर छा गई। गांव में इस बात पर खुशी है कि हेमराज का बदला ले  लिया गया है। हेमराज की पत्नी ने भारत सरकार से आतंकी का सिर भारत लाए जाने की मांग की है। हेमराज के परिजनों एवं गांव वालों ने बुधवार की शाम पटाखे व आतिशबाजी छुड़ाकर दीवाली मनाई और अपनी खुशी का इजहार किया। हेमराज की विधवा पत्नी धर्मवती ने अपने पति के समान ही उस आतंकी का भी सिर भारत लाए जाने की मांग सरकार से की है। उन्होंने मीडिया से कहा कि जिस प्रकार पाक सैनिकों की सहायता वह आतंकवादी उनके पति का सिर काट कर ले गया था, उसी प्रकार उसका भी सिर काट कर भारत लाया जाए। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में आठ जनवरी को जम्मू के वैष्णो देवी घाटी क्षेत्र में सीमा पर चौकसी करते समय पाकिस्तानी सैनिकों ने घात लगाकर 13 राजस्थान राइफल्स की 25 रोसियो फोर्स टुकड़ी में शामिल लांस नायक हेमराज सिंह तथा लांस नायक सुधाकर सिंह की निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि पाक आतंकी मोहम्मद अनवर अपने साथियों के साथ हेमराज सिंह का सिर काट कर ले गया था। इसलिए उसके मारे जाने की खबर मिलने पर मथुरा से कोसी कलां थाना क्षेत्र में स्थित गांव में जश्न मनाया गया। सोमवार को पुंछ के मेडर मनकोट सेक्टर में हुई मुठभेड़ में हेमराज के सिर काटने की साजिश रचने वाला लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मोहम्मद अनवर को सेना ने मार गिराया। बताते हैं कि जवानों के सिर काटने की साजिश अनवर के पीओके स्थित घर में रची गई थी। अनवर लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार आतंकी था और मेडर सेक्टर के कृष्णा घाटी में पाकिस्तान की बैट टीम का हिस्सा था। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि आतंकी अनवर पीओके के बरोच गांव का रहने वाला था और वहां पर इसकी किराने की दुकान थी। अनवर के घर पर पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के कर्नल सिद्दीकी की मौजूदगी में हुई बैठक में सूबेदार जावर खान, आजाद खान व अन्य शामिल हुए। इस घटना के बाद अनवर को लश्कर का कमांडर बना दिया गया था। इस घटना से आईएसआई को झटका लगा है।
-अनिल नरेन्द्र


12 साल बाद आखिर समझौता हो गया

करीब 12 साल की कोशिशों और 17 घंटे की लगातार मैराथन चर्चा के बाद महाशक्तियों ने ईरान से परमाणु हथियार मामले में डील कर ली है। ईरान और सभी महाशक्तियों ने इसे बातचीत का सफल नतीजा बताया है। अपनी एटमी तैयारी पर अंकुश लगाने और इसे अंतर्राष्ट्रीय निगरानी में सौंपने का फैसला लेकर ईरान ने ऐसा व्यावहारिक कदम उठाया है जो उसके साथ पूरी दुनिया के लिए मुफीद साबित होगा। ईरान और छह देशों के बीच इस समझौते की बातचीत एक दशक से अधिक समय से झूल रही थी और इस बीच अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों ने उसका हाल बद से बदतर बना दिया था। ईरान अड़ा था कि समझौते के साथ ही उसे मिसाइल और भारी हथियारों की सप्लाई पर लगे प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया जाए। लेकिन दूसरे पक्ष को आशंका थी कि अगर ऐसा हुआ तो वह इराक, सीरिया और यमन में शिया उग्रवादियों तक खतरनाक हथियार धड़ल्ले से पहुंचाने लगेगा। ईरान इस शर्त पर तैयार नहीं था कि अगर समझौते का उल्लंघन होगा तो उस पर पहले वाली अंतर्राष्ट्रीय पाबंदियां अपने आप बहाल हो जाएंगी। लेकिन इन शर्तों के बाद ईरान को झुकना पड़ा क्योंकि हथियारों पर लगी पाबंदी को हटने में पांच से आठ वर्ष उसे इंतजार करना ही होगा। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के साथ कई सालों से चल रही ईरान की बातचीत कभी किसी ठोस नतीजे पर पहुंच जाएगी, इस बारे में एक साल पहले तक यकीन से कुछ नहीं कहा जा सकता था। लेकिन सीरिया और इराक में आंधी-तूफान की रफ्तार से उभरे चरमपंथी आतंकी संगठन आईएसआईएस ने देखते-देखते सारे समीकरण बदल दिए। ईरान से प्रतिबंध हटाने को लेकर खाड़ी क्षेत्र में सबसे ज्यादा विरोध सऊदी अरब और इजरायल की ओर से आता रहा है। दोनों ही देशों के प्रवक्ताओं ने संदेह जताया है कि प्रतिबंध हटने से ईरान को विदेशों में फ्रीज किए गए असेटस के रूप में जो सैकड़ों अरब डॉलर एकमुश्त मिलने वाले हैं, उनको इस्तेमाल वह सीरिया में बशर अल असद की डगमगाती सत्ता को मजबूत करने के अलावा यमन में हूथी विद्रोहियों और लेबनान स्थित उड्डों से इजरायल को परेशान करने वाले हिजबुल्ला को और ताकतवर बनाने में करेगा। हम अपनी बात करें तो ईरान और महाशक्तियों के बीच समझौते से भारत को कई फायदे हो सकते हैं। सबसे ज्यादा लाभ कच्चे तेल के आयात में मिलेगा। ईरान से भारत जितना तेल चाहे उतना खरीद सकेगा। प्रतिबंध के कारण इस साल ईरान से 90 लाख टन से कुछ ज्यादा कूड आयात नहीं किया जा सकता था। उद्योग चैम्बर फिक्की ने कहा कि भारत-ईरान के बीच अरसे से रुके गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा। ईरान समझौते के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के दाम में तेज गिरावट आई भी है। फारस की खाड़ी में तेल-गैस का भारी भंडार फरजाद-बी नामक जगह पर है जिसे निकालने का सौदा हमें ईरान से मिल सकता है। यहां हमारी ओएनजीसी विदेश कंपनी ने सात साल पहले तेल-गैस का भारी भंडार खोजा था लेकिन ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण आगे बढ़ने की हम हिम्मत नहीं जुटा पाए थे। अब मौका है कि अर्जी के इस विशाल भंडार को अपने यहां लाने के उपाय तलाशें। कोई भी इस तरह के समझौते को जमीन पर उतारने में कठिनाइयां आती हैं। अब यह ईरान पर निर्भर करता है कि वह इन चुनौतियों से कैसे निपटता है। आमतौर पर पूरे विश्व ने इस समझौते का स्वागत ही किया है।