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Wednesday, 4 May 2016

Religious Groups cautioned not to challenge the regime

Chinese president Xi Zinping has now got firm control of the nation. Each day he is making new promulgations and issuing fresh  warnings. Recently Xi Zinping ordered the officers that there have been many  inflitrations in in the name of religion; officers should keep a strict watch over such elements. People should follow their religion but shouldn’t challenge the power or the ruling Communist Party , he said. As per the official media Zinping warned so in a meeting. The meeting was organized on the subject - How to manage the religion in a most populated country of the world? The President also issued a guideline in this regard for followers of all the religions including Buddhism and Christianity. Zinping said that all the religious sects and communities will accept the power of the Communist Party of China. They will believe in this social and socialist system and the religious policy of the party. Zinping said that all the religious sects will follow the civilization, laws and rules of China. However, he has assured religious freedom, and also not to interfere in the religious matters. They will indulge themselves in the development and socialist modernization of China. The Communist Party of China has adopted liberal economic policy sacrificing its socialist image. Still it prefers the atheist ideology. It believes that the propaganda of the religion is dangerous for the future of the nation. Zinping’s warning may be seen with a view point that after the infiltration of Christians the Communist power declined in countries like Poland. Since last few decades Christianity is rising rapidly in China. About 6.5 crore people believe in it. Christian groups have recently alleged that the Government has evacuated the cross symbol from many churches. Perhaps for this purpose China has tightened the grip over the Foreign Non-Government Organizations (NGOs) by formulating a new law. Now these will be within the police monitoring all the time. They will have to mention the source of the funds. Critics have stated it as government control over the NGOs. While the Chinese Government has said that this was under consideration for a long time. More than 7000 NGOs are functioning in China. The US has remarked that it will reduce the space for Civil Society. It will hinder the reciprocation between China and the US. While Beijing says that foreign organizations were working without any control for a long time. The new law has fixed their working limitations. India too is facing the same problems. What do our Leftists, so called seculars have to say regarding the recent sternness of China?

-        Anil Narendra

 

क्या गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर सेलिब्रेटी को दोषी ठहराया जा सकता है?

पिछले कुछ समय से यह विवाद जोरों पर चल रहा है कि क्या विज्ञापनों के लिए सेलिब्रेटी को दोषी ठहराया जा सकता है या नहीं? संसद की स्थायी समिति की ओर से गुमराह करने वाले विज्ञापनों के ब्रांडों का प्रचार करने के लिए जानी-मानी हस्तियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान के बीच उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए सिर्प सेलिब्रेटीज पर दोष मढ़ना उचित नहीं होगा। उपभोक्ता मामलों पर संसदीय समिति ने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2015 पर अपनी सिफारिशों में इस तरह के मामलों में पांच साल तक की जेल की सजा के अलावा 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान करने को कहा है। समिति ने सुझाव दिया है कि पहली बार की गलती के लिए सेलिब्रेटीज पर 10 लाख रुपए जुर्माना, दो साल की सजा या दोनों होनी चाहिए। दूसरी बार ऐसा करने पर 50 लाख जुर्माना और पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान होना चाहिए। पिछले साल खाद्य नियामक की ओर से मैगी नूडल्स पर प्रतिबंध के बाद ब्रांड एम्बेसडरों की जवाबदेही तय करने को लेकर काफी आवाजें उठी थीं। देश में जानी-मानी हस्तियों का विज्ञापन बाजार करीब 5000 से 7500 करोड़ का है और तेजी से बढ़ रहा है। गलत विज्ञापनों के लिए सेलिब्रेटीज ब्रांड एम्बेसडर को जिम्मेदार ठहराने का ब्रांड गुरुओं ने विरोध  किया है। उनका कहना है कि सेलिब्रेटी के पास प्रॉडक्ट की क्वालिटी जांचने की सुविधा नहीं होती है। इसलिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। पिछले साल मैगी पर प्रतिबंध लगा तब ब्रांड एंडोर्स करने वालों की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठी थी। मैगी के साथ अमिताभ बच्चन, माधुरी दीक्षित और प्रीति जिन्टा जैसी हस्तियां जुड़ी थीं। एमएस धोनी को हाल ही में आम्रपाली का ब्रांड एम्बेसडर पद छोड़ना पड़ा, जब खरीददारों ने सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ दिया था। एड एजेंसी मेडिसन वर्ल्ड के चेयरमैन सैम बलसारा ने कहाöमैं मानता हूं कि सेलिब्रेटी को विज्ञापन की थोड़ी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। लेकिन प्रॉडक्ट या विज्ञापन के लिए उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं है। यह तकनीकी मसला होता है। टेलेंट मैनेजमेंट एजेंसी क्वान के एमडी अनिर्बान दास ने कहाöदीपिका पादुकोण या रणवीर कपूर जैसे बॉलीवुड स्टार जिस प्रॉडक्ट को बढ़ावा देते हैं उनकी क्वालिटी के बारे में उन्हें कुछ पता नहीं होता। विज्ञापन के दावे को जांचने के लिए सेलिब्रेटी के पास टेस्ट लैब नहीं होती। हालांकि सभी विज्ञापनों में एक कांट्रैक्ट होता है और इसमें कोई गलत दावा नहीं किया जाएगा। अगर गलत दावा है तो इसका मतलब है कि सेलिब्रेटी भी धोखाधड़ी का शिकार है। इसलिए उन्हें सजा देना गलत है। मूलभूत जिम्मेदारी विज्ञापन देने वाली कंपनी की है। हालांकि ब्रांड एम्बेसडर कंसल्टेंट हरीश बिजूर इसे कंपनी और सेलिब्रेटी दोनों की जिम्मेदारी मानते हैं। उनके मुताबिक हस्तियां अपने करिश्मे का इस्तेमाल प्रॉडक्ट की बिक्री बढ़ाने में करती हैं। इसलिए उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर खाने-पीने और स्किन केयर जैसी चीजों के मामलों में। उदाहरण के तौर पर कुछ लोगों को अजय देवगन का गुटका के विज्ञापन करने पर ऐतराज है क्योंकि यह सेहत के लिए हानिकारक है। बता दें कि कौन-कौन-सा सेलिब्रेटी विज्ञापन करने के लिए एक दिन का कितना पैसा लेते हैंöआमिर खान 5.7 करोड़ रुपए, सलमान खान 3.5 से 5 करोड़ रुपए, शाहरुख खान 3.5 से 4 करोड़, रणवीर कपूर 3 करोड़ और अमिताभ बच्चन 2.5 करोड़। टाटा मोटर्स का अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ी लियोन मेसी 60 करोड़ रुपए लेता है। अंत में बता दें कि मलाइका अरोड़ा ने विवाद पर कहा कि अब मैंने तय किया है कि मैं कभी शराब, सिगरेट या रंग गोरा करने वाले प्रॉडक्ट्स का एड नहीं करूंगी। इससे लोगों पर बुरा असर पड़ता है।

-अनिल नरेन्द्र

खबरदार जो किसी धार्मिक समूह ने सत्ता को चुनौती दी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। आए दिन वह नई-नई घोषणाएं कर रहे हैं, चेतावनियां दे रहे हैं। हाल ही में शी जिनपिंग ने अफसरों से कहा है कि धर्म के नाम पर बहुत से लोग चीन में घुस रहे हैं, अफसरों को चाहिए कि वे उन पर नजर रखें। लोग अपने धर्म का पालन करते रहें, लेकिन सत्ता या सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी को चुनौती देने की कोशिश न करें। सरकारी मीडिया के मुताबिक जिनपिंग ने यह चेतावनी एक बैठक में दी। विश्व की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में धर्म का प्रबंधन कैसे करें? विषय पर यह बैठक आयोजित थी। राष्ट्रपति ने इस संबंध में बौद्ध और ईसाई सहित सभी धर्मों को मानने वालों के लिए गाइडलाइन भी जारी की। जिनपिंग ने कहाöसभी धार्मिक गुटों और समुदायों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ही सत्ता स्वीकारनी होगी। इन्हें इसी सामाजिक और समाजवादी व्यवस्था और पार्टी की धार्मिक नीति को मानना होगा। जिनपिंग ने कहाöसभी धार्मिक समुदायों को चीन की सभ्यता, कानूनों और नियमों का पालन करना होगा। खुद को चीन के विकास और समाजवादी आधुनिकरण में लगना होगा। हालांकि उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता, धार्मिक मामलों में दखल न देने का आश्वासन दिया है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी समाजवादी छवि का त्याग करते हुए उदार आर्थिक नीति अपनाई है। फिर भी नास्तिक विचारधारा को प्रमुखता देती है। इसका मानना है कि धर्म का प्रचार-प्रसार देश के भविष्य के लिए खतरा है। जिनपिंग की चेतावनी को इस नजर से भी देखा जा सकता है कि ईसाइयों की घुसपैठ के  बाद पोलैंड जैसे देशों में कम्युनिस्ट सत्ता का पतन हुआ। पिछले कुछ दशकों से चीन में ईसाई धर्म तेजी से फैल रहा है। यहां करीब 6.5 करोड़ लोग उसे मानते हैं। ईसाई समूहों ने हाल में आरोप लगाया है कि कई गिरजाघरों पर से क्रॉस का चिन्ह सरकार ने हटवा दिया है। शायद इसी उद्देश्य से चीन ने एक नया कानून बनाकर विदेशी गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर शिकंजा कस दिया है। अब इन्हें हर समय पुलिस की निगरानी में रहना होगा। उन्हें मिलने वाले फंड का स्रोत बताना होगा। आलोचकों ने इसे एनजीओ पर सरकारी अंकुश बताया है। जबकि चीनी सरकार ने कहा है कि ऐसा करना लंबे समय से विचाराधीन था। चीन में 7000 से ज्यादा विदेशी एनजीओ काम कर रहे हैं। इस पर अमेरिका ने कहा है कि इससे सिविल सोसाइटी को जगह मिलना और कम होगा। चीन और अमेरिका के बीच आदान-प्रदान में भी बाधा आएगी। जबकि बीजिंग का कहना है कि लंबे समय से चीन में विदेशी संगठन बिना किसी नियंत्रण के काम कर रहे थे। नए कानून में उनके व्यवहार की सीमाएं तय की गई हैं। भारत में भी यही समस्याएं मुंह फाड़ रही हैं। हमारे वामदलों, तथाकथित धर्मनिरपेक्षों का चीन की ताजा सख्ती पर क्या कहना है?

Tuesday, 3 May 2016

उत्तराखंड के जंगलों में फरवरी से लगी हुई है आग

उत्तराखंड के जंगलों में गर्मी के कारण भड़की आग चिन्ता का कारण बनती जा रही है। उत्तराखंड के पहाड़ों में पिछले एक माह से धधक रहे जंगल ने राज्य में लगभग दो दशक पहले जंगलों में इसी तरह की आग की याद ताजा कर दी है। 13 में से 11 जिले आग से प्रभावित हो रहे हैं। शनिवार को आग कार्बेट रिजर्व के पास तक पहुंच गई। रामनगर में सुबह 11 बजे पार्प से सटे वन विकास निगम के डिपो के पास झाड़ियों में आग लगने से खलबली मच गई। कार्बेट पार्प के बिजरानी जोन, रामनगर, तराई पश्चिमी वन प्रभाग और पवलगढ़ कर्जवेशन रिजर्व के जंगलों में आग से अभी तक भारी मात्रा में वन सम्पदा जलकर राख हो चुकी हैं। वन्य जीव भी इस आग के खतरे की जद में हैं। आपदा का रूप ले चुकी इस भयंकर आग को बुझाने के लिए शासन-प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। बेकाबू आग को नियंत्रित करने के लिए अब वायुसेना को भी मोर्चे पर उतार दिया गया है। वायुसेना के एमआई-17 हेलीकाप्टर पानी की बौछार कर आग बुझाने के प्रयास में जुट गए हैं। हेलीकाप्टरों ने भीमताल से अपना आपरेशन शुरू किया। भीमताल झील से पानी लेकर प्रभावित क्षेत्र पर डाला जा रहा है। एक हेलीकाप्टर एक बार में 5000 लीटर पानी लिफ्ट कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार राज्य के अलमोड़ा, पौड़ी और गोचर में आग का प्रभाव ज्यादा है। यहां एनडीआरएफ की एक-एक यूनिट लगाई गई है। प्रत्येक यूनिट में 45 जवान शामिल हैं। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि राज्य के कुमाऊं तथा गड़वाल दोनों क्षेत्रों में करीब 2269.29 हैक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुका है, वहीं प्रमुख वन संरक्षक बीपी गुप्ता ने बताया कि राज्य में फरवरी में आग लगने की शुरुआत हुई थी। इस साल यहां के जंगलों में आग लगने की 1082 घटनाएं हो चुकी हैं। बहरहाल धुएं से लोग बीमार भी पड़ने लगे हैं। बागेश्वर में परेशानी की शिकायत लेकर 210 लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं। फरवरी से धधक रहे जंगल भूजल के लिए सबसे बड़ा खतरा हो सकते हैं। इससे प्राकृतिक स्रोतों के सूखने में तेजी आएगी, जिससे गांवों से पलायन भी बढ़ सकता है। जंगलों से लगे रिहायशी इलाके भी आग की चपेट में आ रहे हैं जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। आग का प्रचंड रूप भविष्य में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों पर कई तरह का प्रभाव डाल सकता है। उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय ने राज्यपाल से विस्तृत जानकारी मांगी है। पीएम ने उत्तराखंड को हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया है। अब तक करीब छह लोगों की मौत हो चुकी है। उम्मीद करें कि जल्द इस भयंकर आग पर काबू पा लिया जाए। उत्तराखंड में कोई न कोई प्राकृतिक आपदा होती ही रहती है।

-अनिल नरेन्द्र

वेस्टलैंड हेलीकाप्टर डील में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर डील में रिश्वतखोरी मामले में इटली की अदालत के फैसले के बाद जहां एक ओर कांग्रेस और भाजपा में नोकझोंक बढ़ गई है वहीं सीबीआई भी घोटाले की जांच में सक्रिय हो गई है। सीबीआई ने 3600 करोड़ रुपए की गड़बड़ी को लेकर आरोपियों से दोबारा पूछताछ शुरू कर दी है। इस सिलसिले में शनिवार को तत्कालीन उप वायु सेनाध्यक्ष जेएस गुजराल से पूछताछ की। सोमवार को तत्कालीन वायुसेना अध्यक्ष एसपी त्यागी को तलब किया गया। त्यागी के भाइयों को इस सप्ताह पूछताछ के लिए हाजिर होना है क्योंकि उन पर भी घोटाले में शामिल होने का आरोप है। फिलहाल सीबीआई का ध्यान घोटाले के मुख्य दलाल क्रिश्चियन मिशेल को भारत लाने पर है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी है और उसके ताजा ठिकाने का पता लगाया जा रहा है। सीबीआई को इटली से अनुरोध पत्र (एलआर) का पिछले दिसम्बर में ही जवाब मिल चुका है। इसमें घोटाले से संबंधित अहम दस्तावेज शामिल हैं। ब्रिटेन, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड और ट्यूनीशिया ने भी एलआर के कुछ भाग का जवाब दिया है। अन्य देशों से एलआर के जवाब का इंतजार है।  रिश्वत की रकम के लेन-देन की पूरी कड़ी को जोड़ने के लिए इन देशों से एलआर का जवाब जरूरी है। भाजपा ने इस घोटाले को लेकर तीखे सवाल दागने आरंभ कर दिए हैं। रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार को इस बात का जवाब देना होगा कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर सौदे में किसने कथित रिश्वत प्राप्त की। विवाद का प्रश्न यह है कि अगस्ता सौदे में किसने धन लिया? इतालवी अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि 125 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। उसने कुछ नामों का भी खुलासा किया था। उस समय की सरकार को जवाब देने की जरूरत है। अगस्ता डील में भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर सीधा हमला बोल दिया है। भ्रष्टाचार के लिए सोनिया को कठघरे में खड़ा करने के बाद शुक्रवार को फिर से शाह ने चार सवाल दागे और कहा कि बहाना बनाने के बजाय सोनिया को सामने आकर जवाब देना चाहिए न कि उलटा चोर कोतवाल को डांटे की तर्ज पर भाजपा पर सवाल उठाएं। शाह ने सोनिया से पूछा कि किसके इशारे पर ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर नहीं रहने के बावजूद अगस्ता वेस्टलैंड को टेंडर भरने की इजाजत दी गई थी। इसके लिए टेंडर की शर्तों से छेड़छाड़ की गई? किसके कहने पर ट्रायल की शर्तों से छेड़छाड़ हुई? किसके इशारे पर सौदे को रोकने में देरी हुई? कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताते हुए इसके खिलाफ सड़क पर संघर्ष की धमकी दी है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि झूठ का साम्राज्य खड़ा कर जनता को बेवकूफ बनाने की का]िशश की जा रही है। उलटे उन्होंने मोदी सरकार पर घोटाला करने वाली कंपनी फिनमैकेनिका को प्रश्रय देने और पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एसपी त्यागी को बचाने का आरोप लगा दिया। सरकार के साथ टकराव बढ़ने के बीच कांग्रेस ने बड़ी घोषणा भी की है। पार्टी ने शनिवार छह मई को संसद का घेराव करने का फैसला किया है। संसद का घेराव करने वाले जत्थे का नेतृत्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी करेंगे। भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिंहा राव ने कहा है कि सोनिया गांधी और अहमद पटेल इस घोटाले के वास्तुकार हैं। कई साक्ष्य ऐसे हैं जिनसे पता चलता है कि सौदे को मंजूरी दिलाने का काम कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने किया। भाजपा के अनुसार पूरे सौदे को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि दलाली की मोटी रकम मिले। रक्षा मंत्रालय ने 12 हेलीकाप्टरों की खरीद के लिए 4800 करोड़ रुपए का आधार मूल रखा था। हालांकि अगस्ता वेस्टलैंड ने इससे कम कीमत पर हेलीकाप्टर देने का प्रस्ताव किया था। बेस प्राइज अधिक रखने का उद्देश्य यह था कि कोई मोलभाव नहीं किया जा सके और कंपनी को मनमानी रकम दी जा सके। टेंडर की शर्तों को इस तरह से तोड़ा-मरोड़ा गया ताकि केवल एक ही कंपनी इसके लिए क्वालिफाई कर सके।

Sunday, 1 May 2016

मी लॉर्ड! सुब्रत राय शायद पूरी गर्मी जेल में नहीं झेल पाएंगे

सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को बुधवार को भी सुप्रीम कोर्ट से कोई रियायत नहीं मिल सकी। इस मामले में सुब्रत राय और उनके ग्रुप के दो डायरेक्टर चार मार्च 2014 से जेल में हैं। 19 जून 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत राय की जमानत अर्जी को सशर्त मंजूरी दी थी। कोर्ट ने कहा था कि रिहाई के लिए उन्हें पांच हजार करोड़ रुपए की बैंक गारंटी और इतनी ही रकम नकद जमा करानी होगी। सहारा ग्रुप पर आरोप है कि उसने निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपए नहीं लौटाए। यह रकम सहारा ने एसआईआरईसीएल व एमएचएफसीएल कंपनियों के जरिये 2007-08 में निवेशकों से जुटाई थी। ब्याज लगने के बाद सहारा पर निवेशकों की बकाया रकम 36 हजार करोड़ रुपए हो चुकी है। सुनवाई के दौरान सुब्रत राय के वकील राजीव धवन ने कहा कि दिल्ली में तेज गर्मी पड़ रही है। इसका असर तिहाड़ जेल में दिख रहा है। सुब्रत राय की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। ऐसी ही हालत रही तो वे पूरी गर्मी जेल में झेल नहीं पाएंगे। इस]िलए उन्हें पेरोल पर ही सही लेकिन जेल से छोड़ दिया जाए। जवाब में चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हमें भी किसी को जेल में बंद करने से खुशी नहीं मिलती है। सुब्रत राय को भी हम जेल में नहीं रखना चाहते हैं। उन्हें छोड़ने में कोई दिक्कत नहीं है बशर्ते निवेशकों को पैसे वापस मिल जाएं। परिस्थितियां बदलनी चाहिए और हमारे आदेश का पालन होते हुए भी दिखना चाहिए। लेकिन हमें ऐसा दिख नहीं रहा है। न ही निवेशकों को उनका पैसा वापस मिला है। इससे पहले वकील ने कहा कि सहारा ने कोर्ट के आदेश पर 66 सम्पत्तियों के कागजात सेबी को सौंप दिए हैं। उन्हें बेचकर जमानत के पैसे जुटाए जा सकते हैं। इस आधार पर हम पेरोल मांग रहे हैं। जवाब में जज ने कहा कि रिहाई तभी संभव है जब सम्पत्ति बेचने का सेबी का प्लान कामयाब हो जाएगा। सेबी को यह भी बताना होगा कि वह सहारा की सम्पत्ति बेचकर जरूरी रकम वसूल कर पाएगी या नहीं? इसके साथ कोर्ट ने कहा कि 66 सम्पत्तियां बेचकर जुटाए पैसे से जमानत तो मिल सकती है लेकिन इससे निवेशकों के पूरे पैसे नहीं लौटाए जा सकते हैं। इसलिए सहारा अपनी सभी सम्पत्तियों का ब्यौरा बंद लिफाफे में 11 मई तक कोर्ट को सौंपे ताकि यह पता लगाया जा सके कि सहारा समूह निवेशकों के पूरे पैसे लौटाने की स्थिति में है भी या नहीं? इससे पहले सेबी ने सहारा की सम्पत्ति नीलाम करने की प्रक्रिया की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। उसने बताया कि सहारा की 66 सम्पत्तियां बिक्री के लिए तैयार हैं। अगले हफ्ते इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसे चार माह में पूरा कर लिया जाएगा। अगली सुनवाई अब 11 मई को होगी।
-अनिल नरेन्द्र


तृप्ति की शाह अली दरगाह में घुसने की कोशिश

महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर और त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिलाने में सफल रहीं भूमाता ब्रिगेड प्रमुख तृप्ति देसाई अब अपने अभियान को लेकर मुंबई की मशहूर हाजी अली दरगाह पहुंच गई हैं। बृहस्पतिवार को जब तृप्ति मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह पहुंचीं तो उनका विरोध करने के लिए सैकड़ों लोग मौजूद थे। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच लगभग पांच बजे देसाई ने जब दरगाह की राह में बढ़ने की कोशिश की तो विरोधियों ने उन्हें घेर लिया। विरोध करने वालों में एआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल थे। कुछ देर बाद फिर तृप्ति ने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहीं। पहली कोशिश में तो विरोध इतना तगड़ा था कि देसाई कार से भी नहीं उतर सकीं। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने उन्हें कार में ही बैठे रहने को कहा। कुछ समय रुककर वह लौट गईं। कई लोगों का कहना था कि यह पब्लिसिटी स्टंट के अलावा कुछ नहीं है। महाराष्ट्र के राजस्व और अल्पसंख्यक मंत्री एकनाथ खड़से ने कहा है कि राज्य सरकार की भूमिका स्पष्ट है कि महिलाओं को हाजी अली दरगाह में प्रवेश मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल में जो फैसला दिया है उस निर्णय का पालन करना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार ने फरवरी में ही स्पष्ट कर दिया था कि वह हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन करती है। सरकार ने हाई कोर्ट में भी कहा है कि उसने महिलाओं पर प्रवेश की पाबंदी नहीं लगाई है। बता दें कि पीर हाजी अली शाह बुखारी की याद में मुंबई के वर्ली समुद्र तट पर एक छोटे से टापू पर हाजी अली की दरगाह स्थित है। देश-दुनिया से मुस्लिम और बड़ी संख्या में हिन्दू श्रद्धालु यहां जियारत करने आते हैं। 1431 में सूफी संत की याद में इस दरगाह की स्थापना की गई थी। हाजी अली उज्बेकिस्तान के बुखारा से भारत पहुंचे थे। तृप्ति देसाई ने हाजी अली में महिलाओं के प्रवेश मसले पर बॉलीवुड सितारे शाहरुख खान, आमिर और सलमान खान से भी समर्थन की मांग की है। 2011 में ट्रस्ट ने हाजी अली दरगाह पर महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाई। कुछ और दरगाहें हैं जहां महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है। इनमें प्रमुख हैं हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) और सरहिन्द शरीफ (पंजाब)। महिलाओं के कब्रिस्तान में जाने पर भी रोक है। दूसरी ओर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (अजमेर) और कलियर शरीफ (रुड़की) में महिलाओं के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है। यह दोनों बड़ी दरगाह हैं। दरगाह आला हजरत (बरेली) और खानकाह--नियाजीयां में भी महिलाओं के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है। इससे पहले तृप्ति ने हाल में अहमनगर जिला स्थित शनि शिंगणापुर और नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए सफल अभियान चलाया था। बहुत सारे लोगों का विचार था कि यह धार्मिक मामला है और अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए। इसमें उलेमाओं की स्वीकृति भी जरूरी है।