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Tuesday, 14 July 2015

सभी विचाराधीन कैदी तिहाड़ से जमानत पर रिहा हों

दिल्ली सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में तिहाड़ जेल में बन्द हजारों कैदियों के मानवाधिकार की पुरजोर वकालत की है। सरकार ने हाई कोर्ट से जघन्य अपराधों को छोड़कर अन्य अपराधों में छह माह से अधिक समय से जेल में बन्द विचाराधीन कैदियों को जमानत पर रिहा करने का आग्रह किया है। चीफ जस्टिस जी. रोहिणी और जस्टिस जयंत नाथ की पीठ के समक्ष सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि त्वरित न्याय कैदियों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा है कि यदि हम विचाराधीन कैदियों के खिलाफ दर्ज मामले का त्वरित निपटारा नहीं कर सकते तो लम्बे समय तक जेल में बन्द रखना उनके मानवाधिकारों का हनन है। मेहरा ने तिहाड़ जेल में बन्द महिला कैदियों की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए पीठ से आग्रह किया कि न्यायिक व्यवस्था की कमियों की वजह से विचाराधीन कैदियों को भुगतना पड़ रहा है। तिहाड़ जेल में महिला कैदियों की दयनीय हालात को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस कूरियन जोसेफ ने भी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। हाई कोर्ट ने बुधवार को इसी पत्र पर संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा था। जस्टिस जोसेफ ने जेल में 612 महिला कैदियों की दयनीय हालत के बारे में जिक्र करते हुए इस मामले में उचित कार्रवाई करने को कहा था। हम दिल्ली सरकार और जस्टिस जोसेफ की बात से सहमत हैं। वैसे भी तिहाड़ जेल का बुरा हाल है। जज साहब जेल की कोठरी में सोने तक की जगह नहीं है। जेल में क्षमता से कहीं अधिक महिला कैदी हैं। गर्मी के चलते उनके साथ रहने वाले छोटे-छोटे बच्चे सारी रात रोते-बिलखते रहते हैं। साहब हमारी मदद कीजिए, हमें न्याय दिलाएं। तिहाड़ जेल में सजायाफ्ता व विचाराधीन 614 महिला कैदियों ने सुप्रीम कोर्ट के जज कूरियन जोसेफ को पत्र लिखकर यह गुहार लगाई है। पत्र में बताया गया है कि कई महिला कैदियों की जमानत हो चुकी है, लेकिन तय शर्तों को पूरा न करने के कारण वह रिहा नहीं हो पा रही हैं। छोटे बच्चे बिना अपराध के मां के साथ जेल में रहने को मजबूर हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज को लिखे पत्र में तिहाड़ जेल नम्बर छह में बन्द महिला कैदियों ने कहा है कि जेल में केवल 400 कैदियों को रखने की व्यवस्था है। वर्तमान में यहां 600 से अधिक महिला कैदी व उनके करीब 40 बच्चे रह रहे हैं। जेल में 234 सजायाफ्ता व 412 विचाराधीन महिला कैदी हैं। इनमें 27 विदेशी महिला कैदी हैं। नियम के मुताबिक छह वर्ष से अधिक आयु के बच्चे को मां के साथ जेल में नहीं रखा जा सकता, लेकिन कई बच्चों की आयु काफी अधिक हो गई है। बच्चों की जेल में कुख्यात महिला कैदियों के संरक्षण में रखा जा रहा है। हमें उम्मीद है कि हाई कोर्ट जल्द इनकी सुनवाई कर इन्हें न्याय दिलवाएगी और जेल से रिहा करेगी।

-अनिल नरेन्द्र

बच्चे से भारी बस्ता

ढेर सारी किताबों-कॉपियों का भार लेकर रोज स्कूल जाने की बच्चों की मजबूरी को लेकर काफी समय से चिन्ता जताई जा रही है। मैंने इसी कॉलम में एक लेख लिखा था बच्चे से भारी बस्ता। ऐसे कई अध्ययन आ चुके हैं जो बताते हैं कि बस्ते के बोझ के चलते बच्चों में पढ़ने के प्रति अरुचि, एकाग्रता में कमी या चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक परेशानियां पैदा होती हैं। बस्ते का बोझ घटाने के लिए हालांकि कई बार प्रयास भी हुए हैं लेकिन कोई नीतिगत प्रयत्न अभी तक नजर नहीं आया है। बस्ते के बोझ की बाबत शायद पहली बार किसी सरकारी समिति ने गौर किया है। महाराष्ट्र सरकार ने यह पहल की है। देश के करीब 58 फीसदी स्कूली बच्चे बस्ते के भारी बोझ के कारण बीमारी के शिकार हो रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार की रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है। समिति कि रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजाना किताबों का भार ढोने की वजह से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाला असर सभी के लिए चिन्ता का विषय होना चाहिए। इसके मुताबिक कम उम्र के बच्चों में से 58 फीसदी अपने बस्तों के बोझ के कारण हड्डियों में कमजोरी आने सहित कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। उनके फेफड़ों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इस सन्दर्भ में मामले की सुनवाई करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने तंज कसते हुए कहा है कि जल्दी ही बच्चों को ट्रॉली बैग लेकर स्कूल जाना पड़ेगा, क्योंकि फिलहाल वे अपनी पीठ पर जितना भारी बस्ता लाद कर स्कूल जा रहे हैं, वह नाकाफी साबित हो रहा है। मामले की सुनवाई कर रही बेंच के जस्टिस बीपी कोला वावाला ने भी कहाöस्कूलों में बच्चों को रोज सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। इसलिए उन्हें रोज सभी कॉपी-किताबें ले जानी पड़ती हैं। ऐसे टाइम टेबल में बदलाव होना चाहिए। सरकार ने सुनवाई के दौरान कहा कि बच्चों के बस्ते के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार स्कूलों में ही लॉकर बनाने की सोच रही है। इस पर बेंच के दूसरे जस्टिस वीएम कनाडे ने कहाöऐसे तो बच्चों के माता-पिता को दो-दो सेट में कॉपियां-किताबें खरीदनी पड़ेंगी। एक सेट घर के लिए और दूसरा स्कूल के लिए। क्योंकि बच्चों को बहुत ज्यादा होमवर्प दिया जाता है। कोर्ट में सुझाव दिए गए कि सरकार स्कूली बैग का बोझ कम करने के लिए ई-क्लॉस रूम और ऑडियो-विजुअल तकनीक का इस्तेमाल करें। इस पर कोर्ट ने कहाöसुझाव अच्छा है। इन्हें जल्द से जल्द लागू किया जाए। अगली सुनवाई 23 जुलाई को है तब सरकार बताएगी कि वह क्या करेगी। हम उम्मीद करते हैं कि महाराष्ट्र सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी और फिर अन्य राज्य सरकारें भी उसी तर्ज पर इस समस्या का समाधान करेंगी।

Sunday, 12 July 2015

मार्केटों में बिकता चीनी सिंथेटिक चावल

राजधानी में फल-सब्जियों को पकाने व ताजा रखने के लिए रसायनों का प्रयोग होने की बात कई बार हाई कोर्ट में उठ चुकी है लेकिन बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि चीन से प्लास्टिक से बने सिंथेटिक चावल आयात कर व्यापारी उसे असली चावल में मिलाकर बेच रहे हैं। पहले ही दक्षिण भारत के बाजारों में पटे पड़े चीन से लाए गए सिंथेटिक चावल मिलावटी ही नहीं, पूरी तरह नकली हैं। जाहिर है कि वह चावल सेहत के लिए बेहद हानिकारक हैं। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जो रोहिणी व जस्टिस जयंत नाथ की पीठ ने मामले को गंभीरता से लिया है और याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। बता दें कि बुधवार को याचिकाकर्ता अधिवक्ता सुग्रीव दुबे की फल-सब्जियों में रसायन का प्रयोग होने संबंधी याचिका की सुनवाई तय थी। इस दौरान याचिकाकर्ता ने नया आवेदन दायर कर पीठ के समक्ष चीन से आयात हुए सिंथेटिक चावलों की जानकारी दी। सुग्रीव दुबे के अनुसार पिछले कई वर्षों से देश में चीन से असली चावल की जगह नकली सिंथेटिक चावल का आयात हो रहा है। याचिका में बताया गया है कि चावल गुणवत्ता की जांच के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इनके सैम्पल भी नहीं लिए जाते हैं। चावल के अलावा बाजार में हींग, दाल और आम में रसायन का प्रयोग किया जा रहा है। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि सरकार को थोक व्यापारियों के यहां छापा मारने एवं वहां से सैम्पल लेने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से यह धंधा चल रहा है। आम लोग प्लास्टिक वाले चावल व असली चावल के अन्तर को पहचान नहीं सकते। यह दिखने में तो असली लगता है मगर पचता नहीं है और इससे गैस की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है। हींग भी नकली बिक रही है और ट्रक में आम भरने के दौरान ही उसमें कैल्शियम कार्बाइड रख दिया जाता है। 50 ग्राम कार्बाइड 100 किलो आम के लिए काफी होता है। बता दें कि क्या है यह सिंथेटिक चावल। सिंथेटिक चावल धान के खेतों में न उगाकर चीन की फैक्ट्रियों में तैयार किए जाते हैं। चीन से लाए गए यह नकली चावल आलू, शकरकंदी और प्लास्टिक या पॉलीमार के मिश्रण से बनाए जाते हैं। देखने में यह आम चावल जैसे ही दिखते हैं। लेकिन पकाने पर यह कड़े रहते हैं और पानी सूखने के साथ ही चावल की ऊपरी सतह पर एक महीन प्लास्टिक की पारदर्शी परत नजर आती है। पकाते समय इसमें से प्लास्टिक की बू आती है। थोड़ा ज्यादा पकाने पर यह जलने लगते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों को इस गंभीर समस्या पर अविलंब ध्यान देना होगा और इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

-अनिल नरेन्द्र

नीतीश और लालू को तगड़ा झटका

बिहार विधान परिषद की 24 सीटों के चुनाव में सत्तारूढ़ जद (यू)-राजद-कांग्रेस महागठबंधन को तगड़ा झटका लगा है। वहीं भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों का उत्साह बढ़ना स्वाभाविक है। इस चुनाव में 152 प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य दांव पर था। विधान परिषद की स्थानीय निकाय कोटे की 24 सीटों के लिए सात जुलाई को मतदान हुआ था। गोपालगंज में सबसे कम दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे जबकि सहरसा में सबसे अधिक 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे। इस चुनाव में भाजपा गठबंधन से मुकाबले में नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस व राकांपा ने महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा। भाजपा अकेले दम पर जेडीयू-महागठबंधन पर भारी पड़ी। एनडीए ने 14 जबकि जेडीयू गठबंधन ने आठ सीटें जीती हैं। इनमें से भाजपा को 12, एलजेपी-आरएसएसपी को एक-एक सीट मिली है जबकि अन्य को दो सीटें मिली हैं। बिहार विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे इस चुनाव में जीत से भाजपा के हौंसले बुलंद हैं। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बिहार में भाजपा विधानसभा चुनाव भी जीतेगी। नीतीश और लालू कितना भी बड़ा गठबंधन बना लें, बिहार की जनता ने उन्हें नकार दिया है। इन परिणामों से यह तो साफ नजर आ रहा है कि कागज पर जद (यू)-राजद गठबंधन कितना ही मजबूत हो, भाजपा कुछ मायनों में उससे ज्यादा बेहतर स्थिति में है। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इन नतीजों से राज्य के मतदाताओं को एक संदेश तो गया ही है, क्योंकि इन चुनावों को सेमीफाइनल कहा जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बिहार में अभियान की शुरुआत करेंगे तो उनके सामने इस जीत से उत्साहित भाजपा कार्यकर्ता होंगे। इन परिणामों ने नीतीश-लालू गठबंधन की पोल खोल दी है, हवा निकाल दी है। ऊपरी स्तर पर तो गठबंधन जरूर बन गया लेकिन इस गठबंधन के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल का अभाव रहा। यह होना ही था क्योंकि लगभग दो दशक से ज्यादा तो यह पार्टियां बिहार में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ती रही हैं और इस गठबंधन को बने हुए बहुत थोड़ा वक्त हुआ है। जाहिर है कि इन दलों के कार्यकर्ताओं में तालमेल का अभाव नजर आ गया है। यही नहीं, एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं। अब सिर्प नेताओं के गले मिलने से काम नहीं चलता। वर्षों से जद (यू)-राजद एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे हैं। फिर यह भी तय नहीं हो पाया कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। बेशक लालू ने भारी मन से नीतीश को स्वीकार कर लिया हो पर अन्दरखाते अभी भी विरोध चल रहा है। इन परिणामों से यह भी साबित हो गया कि बिहार में भाजपा का जो जनाधार था वह काफी हद तक मौजूद है और विभिन्न जातियों या सत्ता समूहों के साथ उसने जो रणनीति बनाई थी वह अब भी कारगर है। सबसे बड़ा झटका तो नीतीश कुमार को लगा है। उन्हें जो जनसमर्थन की उम्मीद थी वह नहीं मिला यानि वह इतने लोकप्रिय नहीं हैं जितने वह अपने आपको समझते हैं। बेशक विधान परिषद और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होते हैं, मुद्दे अलग-अलग होते हैं और विधान परिषद का प्रभाव विधानसभा में भी पड़े जरूरी नहीं पर फिर भी हवा के रुख का तो पता चलता है। नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव को अगले दो महीने बहुत मेहनत करनी होगी। भाजपा के लिए यह परिणाम शुभ संकेत हैं और पार्टी का उत्साहित होना स्वाभाविक ही है।

Saturday, 11 July 2015

दुनिया के सौ सबसे अमीर खिलाड़ियों में धोनी

प्रतिष्ठित फोर्ब्स मैगजीन ने हाल में सालाना कमाई के मामले में दुनिया के सौ सबसे अमीर खिलाड़ियों की जारी सूची से पता चलता है कि खेलों में पैसा कितना बढ़ गया है। इस सूची में जगह बनाने वाले भारतीय वनडे के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एकमात्र भारतीय हैं। धोनी 198 करोड़ रुपए की कमाई के साथ 23वें स्थान पर हैं जबकि अमेरिकी बॉक्सर फ्लाइंड मेवेदर रिकार्ड 1915 करोड़ रुपए के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं। इसके अलावा रोजर फेडरर, टाइगर वुड्स, क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी सूची में शामिल हैं। धोनी पिछले साल इस सूची में 22वें स्थान पर थे। भारतीय वनडे क्रिकेट टीम के कप्तान धोनी को 198 करोड़ रुपए की कमाई में से करीब 173 करोड़ रुपए विज्ञापनों के जरिए मिले हैं जबकि 25 करोड़ रुपए उन्हें सैलरी या जीत के जरिए हासिल हुए हैं। इस सूची में खिलाड़ियों की जून 2014 से जून 2015 के बीच सैलरी, पुरस्कार राशि, बोनस और प्रायोजकों, विज्ञापनों से होने वाली आय को शामिल किया गया है। महिलाओं में रूसी टेनिस सुंदरी मारिया शारापोवा 190 करोड़ रुपए की कमाई के साथ 26वें स्थान पर है जबकि अमेरिकी टेनिस दिग्गज सेरेना विलियम्स 47वें स्थान पर 153 करोड़ रुपए की कमाई के साथ हैं। खेलों में इतने पैसों से प्रभावित होकर भारतीय बॉक्सिंग स्टार बिजेन्द्र सिंह ने भी अब प्रोफेशनल बनने का फैसला किया है। बॉक्सिंग तो होगी लेकिन साथ-साथ होगी करोड़ों डॉलर की चमक-दमक और शोहरत। इसी चमक-दमक के कारण बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने एमेच्योर बॉक्सिंग को अलविदा कह प्रो बॉक्सिंग का रुख कर लिया है। यह आसान नहीं होगा। क्योंकि प्रोफेशनल बॉक्सिंग में बॉक्सर के पंच ही उसकी शोहरत तय करते आए हैं। पैसों की बात करें तो आईओएस और न ही क्वींसबरी ने डील की रकम का खुलासा किया है लेकिन मिली जानकारी के मुताबिक बिजेन्द्र अगर अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो वह हर साल चार से छह करोड़ कमा लेंगे। वह प्रो बाक्सिंग में अगर कोई चैंपियनशिप जीत जाते हैं तो रकम 20 से 25 करोड़ तक जा सकती है। हालांकि इसमें क्वींसबरी और आईओएस का भी हिस्सा होगा जो कि विजेन्द्र की प्रमोटर कंपनियां हैं। इस दौरान उनकी ट्रेनिंग का खर्चा उनकी प्रमोटर कंपनी आईओएस उठाएगी। अभी विजेन्द्र की सालाना कमाई करीब 30 से 40 लाख तक है। इस लिहाज से यह करार विजेन्द्र के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। अगर वह ठीक से परफार्म करते हैं। इससे दूसरे बॉक्सरों व खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। भारत के पहले प्रो बॉक्सर राजकुमार सांगवान कहते हैं कि अगर मुक्केबाज में दमखम है तो पैसों के बरसने से कोई नहीं रोक सकता।

-अनिल नरेन्द्र

चावल बाबा पर 36000 करोड़ के घोटाले का आरोप?

आजकल आरोपों का दौर चल रहा है और निशाने पर हैं भाजपा शासित मुख्यमंत्री। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान की वसुंधरा राजे के बाद अब कांग्रेस के निशाने पर हैं चावल बाबा अर्थात डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की ख्याति चावल बाबा के तौर पर है। राज्य में एपीएल और बीपीएल परिवारों को एक रुपए और दो रुपए प्रति किलो की दर से हर महीने 35 किलो चावल दिया जाता है। इसलिए गरीब आदिवासी लोग मुख्यमंत्री को चावल वाला बाबा भी कहते हैं। रमन सिंह का दोबारा राज्य की सत्ता में आने में उनके चावल बांटने की भूमिका अहम रही है। पर अब यही चावल उनके ऊपर आंच बनकर उभरा है। अब कांग्रेस नेता उनको चावल चुराने वाले बाबा कहकर निशाना साध रहे हैं। मुख्यमंत्री रमन सिंह पर कांग्रेस पार्टी ने 36000 करोड़ रुपए के चावल घोटाले का आरोप लगाया है। कांग्रेस का आरोप कुछ इस प्रकार हैöपीडीएस योजना में एक रुपए प्रतिकिलो की दर से चावल उपलब्ध कराने के बहाने रमन सिंह ने चावल मिल मालिकों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार का ऐसा तंत्र बनाया है जिससे पीडीएस दुकान मालिकों और अधिकारियों को हजारों करोड़ रुपए का कमीशन मिल रहा है। कांग्रेस ने कहा कि फरवरी 2015 में एसीबी ने 12 फरवरी 2015 को स्टेट सिविल सप्लाइज कारपोरेशन के 36 कार्यालयों पर छापा मार कर नागरिक आपूर्ति निगम (एनएएन) के कार्यालय से 36463320 रुपए और कई संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए उनकी पत्नी और साली पर भी पैसे के लेनदेन का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में देश का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। कांग्रेस का दावा है कि जांच एजेंसी को छापे के दौरान एक डायरी मिली है जिसमें सीएम, उनकी पत्नी, साली समेत कई बड़े मंत्रियों के नाम हैं। कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई ने मार्च महीने में इस मामले को जोरशोर से उठाया था। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आरोप लगाया था कि राज्य में लाखों फर्जी राशन कार्ड बनाए गए हैं जिसके सहारे इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने कहा कि मुख्यमंत्री रमन सिंह का परिवार इस गोरखधंधे में सीधे शामिल है। इसलिए उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और अगर वह नहीं हटते तो मोदी सरकार को उन्हें तुरन्त बर्खास्त करना चाहिए। एसीबी द्वारा जब्त की गई डायरियों और दस्तावेजों में जनवरी से दिसम्बर 2014 के बीच घोटाले से कमाए गए पैसों का ब्यौरा है। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उनकी पत्नी वीणा सिंह और साली रेणुका सिंह के साथ कई मंत्रियों के नाम हैं। कांग्रेस ने कहा है कि घोटाले में स्वयं मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके परिवार के लोग शामिल हैं, इसलिए इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल यानि एसआईटी से कराई जानी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि घोटाले में  ब्यूरो ने गत छह जून को चालान पेश किया है। मुख्य आरोपी से ब्यूरो ने 113 पेजों का दस्तावेज हासिल किया है लेकिन इनमें से सिर्प छह पेज ही चालान में  लगाए गए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि घोटाले में जो आरोपी हैं उनके नाम गवाह के रूप में दिए गए हैं इसलिए चालान में किसी का नाम नहीं है। एक अन्य डायरी प्रवृष्टि का जिक्र करते हुए आरोप लगाया है कि रमन सिंह ने 16-16 करोड़ रुपए भाजपा मुख्यालय और नागपुर में आरएसएस कार्यालय को दिए। डॉ. रमन सिंह की छवि एक ईमानदार नेता की है। आरोपों के इस दौर में हर आरोप को तब तक सही नहीं माना जा सकता जब तक कोई स्वतंत्र व विश्वसनीय जांच नहीं होती और यह साबित नहीं होता कि छत्तीसगढ़ में इतना बड़ा घोटाला हुआ है तब तक यह महज आरोप है। डॉ. सिंह के खुद के लिए यह जरूरी है कि वह एक स्वतंत्र, निष्पक्ष व विश्वसनीय जांच कराएं।

Friday, 10 July 2015

अब तक 83-दया नायक की रोचक कहानी

कुछ वर्ष पहले बॉलीवुड की एक फिल्म अब तक छप्पन आई थी। उसमें हीरो का रोल नाना पाटेकर ने निभाया था। लोगों का कहना था कि यह फिल्म मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक पर आधारित है। खबर आई है कि एकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक को निलंबित कर दिया गया है। नागपुर में तैनाती दिए जाने के बाद दया नायक ने परिवार की सुरक्षा का हवाला देते हुए ज्वाइन करने से इंकार कर दिया था। नायक का कहना है कि उनके परिवार से पुलिस सुरक्षा हटा ली गई है, ऐसे में वो अपने परिवार को अकेला छोड़कर नहीं जा सकते हैं। मुंबई अंडर वर्ल्ड के 80 से अधिक अपराधियों का एनकाउंटर करने वाले दया नायक पिछले कुछ सालों में खासा विवाद में भी घिरे रहे, अब आय से अधिक सम्पत्ति को लेकर उनके खिलाफ जांच शुरू की गई थी। दया नायक की जीवनी भी कम दिलचस्प नहीं है। कर्नाटक के एक छोटे से गांव से मुंबई पुलिस तक की दया नायक की जिन्दगी भी कम रोचक नहीं है। सातवीं की पढ़ाई खत्म करने के बाद बड्डा और राधा नायक का यह सबसे छोटा बेटा करीब तीन दशकों में मुंबई पुलिस का सबसे दबंग, चर्चित और विवादित अफसर बन गया। दया नायक का परिवार जब गांव छोड़कर मुंबई आया था, तब उनका ठिकाना एक होटल का पोर्टिको हुआ करता था, जहां दया के पढ़ने के लिए स्ट्रीट लाइट की भरपूर रोशनी हुआ करती थी। दया ने गोरे गांव से 12वीं और अंधेरी में एक कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। पढ़ाई खत्म करने के बाद दया ने प्लम्बर अप्रैंटिस का काम करना शुरू कर दिया। बस यही वो मोड़ था, जहां से दया नायक की जिन्दगी बदल जाने वाली थी। प्लम्बरिंग के काम के दौरान ही दया नायक की मुलाकात नारकोटिक्स विभाग के कुछ अधिकारियों से हुई। बस इसी मुलाकात में दया को यूनीफार्म का शौक पैदा हो गया और आखिरकार 1995 में दया जुहू में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर नियुक्त किए गए। यही वो दौर था जब मुंबई में अंडर वर्ल्ड सक्रिय था और सड़कों पर गैंगवार आम बात हुआ करती थी। बस इसके बाद से ही नायक की रफ्तार इतनी तेज हो गई कि फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1996 में नायक ने पहला एनकाउंटर किया था, जो अब तक 83 तक पहुंच चुका है। नायक के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2002 में गलत तरीके से सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप लगने के दौरान ही नायक ने अपने गांव में अपनी मां के नाम पर एक स्कूल खोला था, जिसके उद्घाटन पर कर्नाटक के शिक्षामंत्री सहित देश की कई हस्तियां मौजूद थीं। इसके बाद साल 2004 में मकोका कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्रांच को दया नायक की सम्पत्ति की जांच के निर्देश दिए।

-अनिल नरेन्द्र