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Thursday, 16 April 2020

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले ः हम प्रेस का गला नहीं घोटेंगे

सोमवार को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण मामलों में अपने फैसले दिए। पहला मामला था प्रेस पर पाबंदी लगाने का, दूसरा विदेशों में फंसे भारतीयों का और तीसरा था पीएम केयर्स संबंधित याचिका का। उच्चतम न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी फैलने को हालिया निजामुद्दीन मरकज की घटना से जोड़कर कथित रूप से सांप्रदायिक नफरत फैलाने से मीडिया के एक वर्ग को रोकने के लिए मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से सोमवार को इंकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि वह प्रेस का गला नहीं घोटेंगे। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदार की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मुस्लिम संगठन की याचिका पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की और उससे कहा कि मामले में भारतीय प्रेस परिषद को इसका पक्षकार बनाएं। पीठ ने कहा कि वह इस समय याचिका पर कोई अंतरिम आदेश नहीं देगी और उसने यह मामला दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। याचिकाकर्ता ने इस याचिका में आरोप लगाया है कि मीडिया का एक वर्ग दिल्ली में पिछले महीने आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम को लेकर सांप्रदायिक नफरत फैला रहा है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने अपनी याचिका में फर्जी खबरों को रोकने और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्देश केंद्र को देने का अनुरोध किया है। पश्चिमी निजामुद्दीन में पिछले महीने तबलीगी जमात के मुख्यालय में हुए धार्मिक कार्यक्रम में कम से कम नौ हजार लोगों ने शिरकत की थी और यह कार्यक्रम ही भारत में कोविड-19 महामारी संक्रमण फैलने का एक मुख्य स्रोत बन गया क्योंकि इसमें हिस्सा लेने वाले अधिकांश व्यक्ति अपने धार्मिक कार्यों के सिलसिले में देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों में गए जहां वह अन्य लोगों के सम्पर्प में आए। उस याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि देश में कोरोना वायरस महामारी के फैलने के संबंध में मीडिया की रिपोर्टिंग और सरकार की रिपोर्ट लगातार तबलीगी जमात के बारे में ही बात कर रही है। इस पर पीठ ने कहाöहम सोचते हैं कि आप भारतीय प्रेस परिषद को भी इस मामले में एक पक्षकार बनाएं। भारतीय प्रेस परिषद इस मामले में एक जरूरी पक्ष है। न्यायालय ने कहाöवह प्रेस का गला नहीं घोट सकते, हम प्रेस का गला नहीं घोटेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस कोविड-19 को लेकर जारी पूर्ण बंदी के कारण विदेशों में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने पर सोमवार को सलाह दी कि जो जहां है, वहीं रहे। शीर्ष अदालत ने विदेशों में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदार की पीठ ने विदेश में रुके भारतीयों से अपील की कि वह जहां हैं वहीं रहें। न्यायालय ने कहा कि उन्हें अभी वापस लाना संभव नहीं होगा। शीर्ष अदालत ने सात याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई की, जिसमें ब्रिटेन, अमेरिका, ईरान और अन्य खाड़ी देशों में छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, अकुशल श्रमिकों और मछुआरों एवं भारतीय नागरिकों को वहां से निकालने का अनुरोध किया गया था। एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निबटने के लिए प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष पीएम केयर्स बनाने के सरकार के फैसले को निरस्त करने के खिलाफ दायर याचिका सोमवार को खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमएम शांतानागौदार की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा की याचिका सुनवाई के बाद खारिज कर दी। पीठ याचिकाकर्ता शर्मा की इन दलीलों से सहमत नहीं थी कि इस कोष की स्थापना संविधान के अनुच्छेद 266 और 267 में प्रदत्त योजनाओं का अनुसरण किए बगैर ही की गई है। केंद्र ने 28 मार्च को कोविड-19 जैसी महामारी फैलने और इससे प्रभावित लोगों को राहत देने हेतु आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री के नागरिक सहायता और राहत कोषöपीएम केयर्स कोष की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री इस कोष के पदेन अध्यक्ष और रक्षामंत्री, गृहमंत्री और वित्तमंत्री इसके पदेन ट्रस्टी हैं। जनहित याचिका में कहा गया कि पीएम केयर्स फंड की स्थापना के बारे में अध्यादेश और राजपत्र में इसकी अधिसूचना प्रकाशित हुए बगैर ही 28 मार्च को प्रेस बयान जारी होने, कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने और भावी सुविधाओं के लिए प्रधानमंत्री की लोगों से इस ट्रस्ट में दान देने की अपील करने के साथ यह मुद्दा उठा। याचिका में इस कोष में सभी ट्रस्टियों के साथ ही प्रधानमंत्री को भी पक्षकार बनाया गया था। याचिका में इस कोष को मिला सारा दान भारत के समेकित कोष प्राइम मिनिस्टर्स रिलीफ फंड में स्थानांतरण करने का निर्देश देने के साथ ही इस कोष की स्थापना की जांच न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से कराने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह याचिका मिथ्य तथ्यों पर आधारित है। पीठ याचिकाकर्ता शर्मा की इन दलीलों से सहमत नहीं थी कि इस कोष की स्थापना संविधान के अनुच्छेद 266 और 267 में प्रदत्त योजनाओं का अनुसरण किए बगैर ही की गई है।

-अनिल नरेन्द्र

Wednesday, 15 April 2020

बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से

दुनियाभर में कोरोना की महामारी को लेकर बने खौफ और दहशत के बावजूद पाकिस्तान सरहद व सीमांत इलाकों पर लगातार मोर्टार बम गिरा रहा है। उसकी नापाक साजिश उसकी दिशा में लांचिंग पैड्स पर मौजूद आतंकी दस्तों की घुसपैठ कराना है। जिसे अंजाम देने के लिए पाकिस्तानी सेना व पाकिस्तानी रेंजर्स गत कुछ दिनों से 50 बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुके हैं। हालांकि भारतीय सेना ने अपनी कड़ी कार्रवाई में केरन सेक्टर के पार पाकिस्तानी सेना के कई जवानों को मार गिराकर कई चौकियों को ध्वस्त कर दिया, बल्कि काफी बड़ी संख्या में लांचिंग पैड्स पर मौजूद आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। ताजा खबर के अनुसार एलओसी पर पाक सेना की गोलाबारी ने कुपवाड़ा में तीन लोगों की जान ले ली है। मरने वाले तीन नागरिकों में एक महिला, एक पुरुष और एक बच्चा शामिल है। पाक गोलाबारी के कारण कई घर व वाहन भी तबाह हो गए। डरे और दहशतजदा दर्जनों लोगों ने अपने घर त्याग दिए हैं। रविवार को पाकिस्तानी सेना ने बारामूला के चौकी बल इलाके में संघर्षविराम का उल्लंघन किया। एलओसी पार से भारी गोलाबारी कर सेना की चौकियों व रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं भारतीय सेना पाकिस्तान की इस नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब दे रही है। मिलने वाले समाचार कहते हैं कि पाक गोलाबारी के कारण चौकी बल के तुर्माना गांव में पाक गोलों की जबरदस्त बरसात के कारण यह तबाही मची है। अधिकारियों के मुताबिक गोलाबारी में दो दर्जन आवासीय घरों तथा पांच वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है। गांव में जलते घर और वाहनों की तबाही भयानक मंजर पेश कर रही है। उधर कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में बड़े-बड़े गोले दागकर सलाई गांव, जगे चंगा और घन टाडा में दहशत फैलाई। मेढर सेक्टर के रिहायशी इलाकों में पाकिस्तान की तरफ से दागे मोर्टार से लगभग 10 मकानों को नुकसान पहुंचा। इस समय जब खुद पाकिस्तान कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित है तब भी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा। जिस तरह की गोलाबारी हो रही है वह आतंकी संगठन नहीं कर सकते। यह तो सिर्प पाक सेना ही कर सकती है। यह दुर्भाग्य की बात है कि ऐसी आपातकाल स्थिति में भी वह अपनी नीतियों पर चल रहा है। इससे हमें तो नुकसान होगा ही पर पाकिस्तान को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उम्मीद करते हैं कि वह यह गोलाबारी बंद करे और अपने देश में फैले कोरोना को कंट्रोल करने में अपना सारा जोर लगाए तो वह बेहतर विकल्प होगा।

-अनिल नरेन्द्र

चमगादड़ रिसर्च पर अमेरिकी फंडिंग

चीन के वुहान से फैली कोरोना वायरस महामारी आज पूरी दुनिया में फैल चुकी है। अब इसके बारे में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। लंदन की डेली मेल अखबार ने रविवार की रिपोर्ट में इसका खुलासा करते हुए कहा है कि वुहान में स्थित लैब में चीन के वैज्ञानिक चमगादड़ों पर शोध कर रहे थे और इस शोध के लिए अमेरिकी सरकार ने चीन को 28.18 करोड़ रुपए का फंड दिया था। बता दें कि चीन ने दावा किया था कि कोरोना वायरस जंगली जीवों के मार्केट से इंसानों में आया। फिर पता चला कि ऐसे वायरस चमगादड़ में पाए जाते हैं। इसलिए हो सकता है कि यह चमगादड़ से इंसानों में आया। इसके बाद कहा गया कि चीन के वुहान स्थित लैब वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजी से चमगादड़ पर प्रयोग के दौरान कोरोना वायरस लीक हो गया हो और बाद में चीन ने इसे जीवों के मार्केट से फैला वायरस कहा। यह लैब वुहान के जंगली जीवों के मार्केट से 20 मील की ही दूरी पर है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी सरकार ने वायरस पर प्रयोग करने वाले वुहान लैब को 28 करोड़ रुपए दिए। इस खुलासे के बाद अमेरिका के कई नेता भी हैरान हो गए। अमेरिकी सीनेटर मेट गेट्स ने कहाöचीन को अमेरिकी फंड दिए जाने की खबर से मैं बहुत बुरा महसूस कर रहा हूं। वैज्ञानिक मानते हैं कि चमगादड़ के जरिये ही कोरोना का संक्रमण इंसानों के शरीर में आया है। चीन के इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजी ने वुहान से करीब एक हजार मील दूर यून्नान से कुछ चमगादड़ों को पकड़ा और उस पर प्रयोग किया जा रहा है। इसी प्रयोग के जारी रखने के लिए अमेरिकी सरकार ने लैब को 28 करोड़ रुपए का फंड दिया था। कोरोना वायरस के जीनोम पर रिसर्च करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि सबसे पहले यून्नान प्रांत की गुफाओं में रहने वाले चमगादड़ों में यह वायरस दिखा। यहां से कोरोना वायरस वुहान की मीट मार्केट में पहुंचा और फिर यहां से इसका संक्रमण पूरी दुनिया में फैल गया। अमेरिकी फंडिंग की जानकारी सामने आने के बाद अमेरिका की भूमिका को भी संदेह की नजरों से देखा जाने लगा है। अब इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि वायरस का संक्रमण वुहान की मीट मार्केट से नहीं बल्कि लैब से हुआ है। अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ सरकारी एजेंसी है और वुहान के लैब की वेबसाइट में यह संस्था पार्टनर कंपनी के रूप में दर्ज है। अब अमेरिका के कई प्रेशर ग्रुप भी चीन के लैब की अमेरिकी फंडिंग की आलोचना कर रहे हैं। कुछ अमेरिकी सांसद और प्रेशर ग्रुप्स सरकार की इस बात को लेकर आलोचना कर रहे हैं कि जिस लैब में जानवरों पर कूरता बरती जाती है, अवैध प्रयोग होते हैं उसे अमेरिका क्यों आर्थिक मदद दे रहा है? अगर यह रिपोर्ट सही है तो अमेरिका भी कोरोना वायरस के लिए उतना ही जिम्मेदार है जितना चीन।

Tuesday, 14 April 2020

लॉकडाउन से नेता बर्थडे पार्टियां मना रहे हैं, बिरयानी बांट रहे हैं

देश में कई नेताओं के लॉकडाउन को गंभीरता से न लेने के मामले सामने आए हैं। कर्नाटक के भाजपा विधायक ने सरकारी स्कूल में जन्मदिन की पार्टी दी। इलाके की जनता ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और बिरयानी बांटी। उधर पनवेल में एक भाजपा पार्षद को लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर गिरफ्तार कर लिया गया। यह पार्षद 11  दोस्तों के साथ जन्मदिन की पार्टी कर रहे थे। ऐसी ही घटना झारखंड के जामताड़ा में हुई। इस बीच देश में कोरोना के नए केसों पर सबसे बड़ा आंकड़ा सामने आया है। दिल्ली व अन्य शहरों में सब्जी लेने वालों की भीड़ लग रही है। यहां न तो सोशल डिस्टेंसिंग हो रही है और न ही छुआछूत की। अगर ऐसे ही मामला चलेगा तो लॉकडाउन का उद्देश्य फेल हो जाएगा। दुखद पहलू यह भी है कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले पढ़े-लिखे नेता हैं। शायद वह समझते हैं कि चूंकि उनकी पार्टी की सरकार है इसलिए वह बच जाएंगे। यह कोरोना न तो पार्टी को देखता है, न ही बड़े से बड़े नेता को। यह लोग अपनी जान तो खतरे में डाल ही रहे हैं, साथ-साथ अपने हमदर्दों व दोस्तों की भी खतरे में डाल रहे हैं।

-अनिल नरेन्द्र

डब्ल्यूएचओ ने कोरोना महामारी को बढ़ाया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) आजकल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर आ गया है। डब्ल्यूएचओ को पूरी तरह से चीन केंद्रित करार देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस वैश्विक संस्था ने कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत में गलत सलाह देकर इसे वैश्विक महामारी बना दिया है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि कोरोना को लेकर दी गई ताइवान की शुरुआती चेतावनियों को अनदेखा कर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जन स्वास्थ्य पर राजनीति को तरजीह दी। ताइवान ने भी इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र निकाय प्रमुख की ओर से की गई आलोचना पर आक्रोश जाहिर किया है। ट्रंप ने मंगलवार को ट्वीट करके कहाöडब्ल्यूएचओ ने संक्रमण को फैला दिया है। कुछ कारणों से उसे अमेरिका से सबसे अधिक आर्थिक मदद मिलती है, लेकिन वह पूरी तरह से चीन पर केंद्रित है। हम इस मामले को अच्छे से देखेंगे। खुशनसीबी से मैंने उनकी शुरुआती दौर में चीन के साथ अपनी सीमाएं खुली रखने की सलाह को ठुकरा दिया था। आखिर उन्होंने इतनी गलत सलाह हमें क्यों दी? ट्रंप का बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया के देश डब्ल्यूएचओ की भूमिका की आलोचना कर रहे हैं। इस वैश्विक संगठन पर चीन की तरफदारी करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इसके चलते ही कोरोना के संक्रमण ने महामारी का रूप ले लिया और पूरे विश्व में एक लाख से अधिक जानें चली गई। विगत 31 जनवरी को संयुक्त राष्ट्र के इस स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस संक्रमण के बावजूद चीन के लिए अपनी सीमाएं खुली रखने की सलाह दी थी। हालांकि इसी दिन अमेरिका ने चीन की यात्रा को लेकर प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बावजूद अब इस महामारी के कारण अकेले अमेरिका में हजारों मौतें हो चुकी हैं, करीब चार लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अमेरिका को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। वह ऐसा पहला देश बन गया है, जहां एक ही दिन में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार पिछले 24 घंटे में कोरोना के कारण 2108 लोगों की मौत हुई है। यहां मृतकों की संख्या बढ़कर 18,761 हो गई है, जबकि पांच लाख तीन हजार 177 लोग संक्रमित हैं। उधर अमेरिका के न्यूयॉर्प में हालात काबू से बाहर हो रहे हैं। यहां रोजाना 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। हालात यह है कि कब्रिस्तान भर चुके हैं और शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है। हालांकि महामारी शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब यहां आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या कम हुई है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह डब्ल्यूएचओ पर खर्च की जाने वाली राशि पर रोक लगाने जा रहे हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि जब मैंने यात्रा प्रतिबंध लगाया था तो वह उससे सहमत नहीं थे। वह गलत थे। वह कई चीजों के बारे में गलत रहे हैं। उनके पास पहले ही जानकारी थी। वह महीनों पहले इसके बारे में बता सकते थे।

पुश्तैनी पेशा छोड़ सब्जी बेचने पर मजबूर

कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रकोप के कारण देश में लॉकडाउन की स्थिति है। लॉकडाउन की स्थिति में लोग अपने पुश्तैनी पेशे को छोड़कर तरह-तरह के काम करने पर मजबूर हैं ताकि वह अपने बच्चों का पेट पाल सकें। चाहे नाई हो, धोबी हो, मोची हो और हलवाई हो अपने हुनर के कई उस्तादों को जीवन-यापन करने के लिए सब्जी बेचने का काम करने पर मजबूर कर दिया है। देश के हर हिस्से में लगभग यही स्थिति है। लॉकडाउन लागू होने के कारण नाई, धोबी, मोची और हलवाई का काम बंद हो गया है जिसके कारण उनके परिवार के समक्ष दो वक्त की रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। उस्तरा चलाने पर संतुलन साधने में माहिर हाथ, कपड़े पर इसी के समय सजग दिमाग, तेज और नुकीले औजार से अपनी कला को नया स्वरूप देने वाले तथा अनुभवी हाथों से लजीज व्यंजन तैयार करने वाले लोग इन दिनों सब्जी का ठेला लगा रहे हैं। प्रशासनिक सख्ती से न केवल सड़कें सुनसान नजर आ रही हैं बल्कि मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारों में वीरानगी छाई हुई है जिसकी वजह से इन धर्मस्थलों के बाहर कोई फूल बेचने वाला नहीं है। जो किसान फूलों की खेती करते हैं, उनसे कोई खरीदने वाला नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी में ठेले पर सब्जी बेचने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वह पेशे से नाई है लेकिन लॉकडाउन के चलते शहर के चौक-चौराहों पर कुर्सी नहीं लगा पा रहा है। सब्जी बेच रहे एक अन्य व्यक्ति ने खुद को पेशे से मोची बताते हुए कहा कि दफ्तर और परिवहन के साधनों के बंद होने से लोग घर के बाहर कम निकल रहे हैं जिससे पालिश का काम बंद हो गया है। कई धोबियों ने अपने पुश्तैनी धंधे को छोड़कर ठेले पर फल बेचना शुरू कर दिया है। कई हलवाई भी पेशे से विरत होकर अब सब्जी बेच रहे हैं। कबाड़ी, ठेला, ई-रिक्शा चलाने और इस प्रकार के अन्य कार्य करने वाले ज्यादातर लोग साझेदारी में सब्जी बेच रहे हैं। मांस-मछली के व्यवसायी अब चिकन बेचने में जुटे हैं। दर्जी का काम कर अपने परिवार की परवरिश करने वाले लोग नए पेशे की तलाश को लेकर उधेड़बुन में लगे हैं। कई इलाकों में लोग सब्जी उपलब्ध कराकर अपना पेट पाल रहे हैं। आईपी एक्सटेंशन के एक अपार्टमेंट में आवश्यक वस्तु मंगाने के लिए फोन नम्बर की सूची है तो सब्जी की दुकान चारदीवारी के साथ ही  लगी है। करीब 15-20 साल से यहां सब्जी की दुकान लगाने वाले साबिर अली ने कहाöसाहब लोगों को कोई दिक्कत नहीं होने देते। सबके पास टेलीफोन नम्बर है, वो फोन करते हैं, हम सामान जुटा देते हैं। सब्जी के अलावा अगर कोई बाहर से सामान मंगाना चाहे तो भी वो  लाकर देते हैं। साबिर अली ने कहा कि सब्जी के साथ ब्रैड, अंडा, फल देता हूं। दूध-दही के अलावा दवाई या अन्य सामान भी मांगते हैं तो वो भी लेकर उन्हें पहुंचा देते हूं। आखिर लंबे समय से यहां बैठे हैं, हेल्प तो करनी ही चाहिए। वो बताते हैं कि पुलिस वाले कह रहे हैं कि जो सामान आपके पास नहीं है, वो सामान भी रखिए। आपको जितनी देर दुकान खोलनी है, खोलें। साबिर अली ने सैनिटाइजर व मास्क भी रखे हुए हैं। सब्जी में हाथ डालने से पहले हाथ धोते हैं।

Monday, 13 April 2020

सवाल निजी प्रयोगशालाओं में निशुल्क जांच करने का

जिस तरह हर रोज कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है उससे सबसे ज्यादा जरूरी है कि जांच में तेजी लाई जाए और अधिक से अधिक लोगों के नमूने लिए जाएं। इस तरह संक्रमितों की पहचान जल्दी होगी और उन्हें अलग-थलग कर दूसरों में संक्रमण फैलने से रोका जा सके। इस लिहाज से सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकारी लैब की तरह निजी लैब में भी कोरोना संक्रमण की जांच मुफ्त करने का आदेश समय की मांग है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह आदेश दिया कि सरकारी लैब की तरह निजी लैब में भी अब कोरोना संक्रमण की जांच मुफ्त हो। कोर्ट ने इसके अलावा कोरोना के इलाज व जांच में लगे डॉक्टरों और स्टॉफ की समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया। इसके साथ अदालत ने डॉक्टरों व मेडिकल स्टॉफ को सुरक्षा किट मुहैया कराने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और एस. रविन्द्र भट्ट की पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से की। कोर्ट के सामने तीन याचिकाएं थीं जिसमें डॉक्टरों की सुरक्षा व निजी लैब में कोरोना की जांच के लिए 4500 रुपए फीस लेने का मुद्दा उठाया था। पीठ ने कहा कि वह सहमत हैं कि राष्ट्रीय आपदा के दौरान निजी लैब को कोरोना जांच के शुल्क के तौर पर 4500 रुपए लेने की इजाजत देना ठीक नहीं है। पैसे के कारण कोई कोरोना की जांच से वंचित नहीं होना चाहिए। पीठ ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि सरकारी लैब में कोरोना की जांच मुफ्त हो रही है। ऐसी स्थिति में एनएबीएल मान्यता प्राप्त निजी लैब में भी कोरोना की जांच मुफ्त होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय द्वारा निजी प्रयोगशालाओं को कोरोना वायरस की जांच मुफ्त में करने के निर्देश दिए जाने के बाद कई प्रयोगशालाओं ने उम्मीद जताई है कि सरकार तौर-तरीके बताएगी, जिससे वह देश में बढ़ती मांग के बीच जांच का काम जारी रख सकें। कुछ निजी प्रयोगशालाओं के मालिकों ने यह भी कहा है कि उनके पास मुफ्त में यह महंगी जांच करने के लिए साधन नहीं हैं। डॉ. डैंग लैब के सीईओ डॉ. अमुन डैंग ने कहा कि हम उच्चतम न्यायालय के फैसले को स्वीकार करते हैं, जिसका उद्देश्य कोविड-19 जांच की पहुंच बढ़ाने और इसे आम आदमी के लिए वहनीय बनाना है। उन्होंने दलील दीöहालांकि निजी प्रयोगशालाओं के लिए कई चीजों की लागत तय है, जिनमें अभिकर्मकों (रीएजरेंस) उपयोग की वस्तुएं, कुशल कामगारों और उपकरणों के रखरखाव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की जांच में भी संक्रमण के लिए कई उपाय करने पड़ते हैं, जैसे व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, संक्रामक परिवहन तंत्र और साफ-सफाई। साथ ही हर वक्त कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण कदम है। कटु सत्य तो यह भी है कि सरकारी प्रयोगशालाओं की क्षमता इतनी नहीं है कि वह हर रोज हजारों लोगों की जांच कर सकें। फिर यह प्रयोगशालाओं की पूरे देश में इतनी संख्या नहीं है, यह प्रयोगशालाएं कुछ शहरों में ही स्थित हैं। इसलिए दूरदराज के गांवों-कस्बो में लोगों की जांच कर पाना कठिन काम बना हुआ है। ऐसे में निजी प्रयोगशालाओं के सहयोग से जांच में तेजी लाने का सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार का प्रयास कारगर हो सकता है तावक्ते में निजी लैब जांच निशुल्क करने को तैयार हों। गरीब लोग इतने पैसे जांच के लिए इन हालातों में नहीं दे सकते जबकि उनकी रोजी ठप है।

-अनिल नरेन्द्र