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Saturday, 4 February 2017

मस्जिद में नमाजियों पर अंधाधुंध फायरिंग

आतंकवाद से आज दुनिया का कोई मुल्क सुरक्षित नहीं है। दुनिया का अपेक्षाकृत काफी शांत माना जाना वाला मुल्क कनाडा भी इसकी मार से नहीं बच सका। रविवार की शाम कनाडा के क्यूबेक शहर की एक मस्जिद में हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर छह लोगों को मौत के घाट उतार दिया। हमले में आठ लोग घायल हो गए। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुदु ने इसे मुसलमानों के खिलाफ आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और गोलाबारी के सिलसिले में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। यह घटना उस वक्त हुई जब क्यूबेक सिटी इस्लामिक कल्चरल सेंटर के भीतर करीब 40 लोग नमाज के लिए पहुंचे थे। हमलावरों की संख्या शुरू में तीन बताई गई। मस्जिद के इमाम मोहम्मद यानगुई ने कहाöमुझे समझ नहीं आ रहा है कि इस तरह का बर्बर हमला यहां क्यों किया गया? इससे पहले 2016 में इसी मस्जिद के बाहर सीढ़ियों पर किसी ने एक सुअर का सिर रख दिया था। क्यूबेक सिटी में मुस्लिम समुदाय की अच्छी-खासी संख्या है। इनमें से ज्यादातर उत्तरी अमेरिका से आए प्रवासी हैं। 2015 के राष्ट्रीय चुनाव में महिलाओं का बुर्का यहां एक बड़ा मुद्दा बना था। यहां की बहुसंख्यक आबादी सार्वजनिक कार्यक्रमों में नकाब पर प्रतिबंध का समर्थन कर रही थी। हाल के वर्षों में यहां इस्लाम के खिलाफ माहौल हावी हुआ है। 2015 में पेरिस आतंकी हमले के एक दिन बाद ओतारियो की एक मस्जिद में आग लगा दी गई थी। 20 दिसम्बर 2016 को म्यूनिख (जर्मनी) की मस्जिद में गोलीबारी में तीन लोग घायल हो गए थे। इस हमले से पहले ही प्रधानमंत्री त्रुदु ने कहा था कि कनाडा में सभी देशों से आने वालों का स्वागत है। उन्होंने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में रोक के आदेश की प्रतिक्रिया में कही थी। कनाडा के लिबरल पार्टी के सांसद ग्रेग फेरगस ने कहा है कि यह आतंकी वारदात मुस्लिमों की वर्षों से हो रही धार्मिक पढ़ाई का नतीजा है। घृणा फैलाने वाले भाषणों का नतीजा सामने आया है। क्यूबेक प्रांत के मुख्यमंत्री फिलिप कोरलार्ड ने मुस्लिम समुदाय को कहा कि क्यूबैक प्रांत मुस्लिमों के घर जैसा है, हम सभी आपके साथ हैं। पिछले कुछ साल में हुई गिनी-चुनी घटनाओं को अगर छोड़ दें तो कनाडा की गिनती दुनिया के शांत देशों में की जाती है, बल्कि कई बार तो मजाक में यह तक कहा जाता है कि कनाडा के जीवन में कोई थ्रिल नहीं है। इस वारदात को भले ही किसी ने अंजाम दिया हो, लेकिन उम्मीद की जाती है कि शांतिप्रिय कनाडा आतंक की चपेट में नहीं आता। यह ठीक है कि आतंकवाद पर काबू पाने के लिए अच्छे पुलिस-प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की जरूरत होती है, लेकिन एक सच यह भी है कि यह पूरा सिलसिला लोगों के सोचने-समझने के तरीके और उनकी मानसिकता को भी बदलता है, जिसका देर-सवेर असर सरकारों पर भी दिखाई देता है। उम्मीद यही है कि कट्टरता का रास्ता कनाडा में थमेगा।

-अनिल नरेन्द्र

क्या भविष्यवाणी कर रहे हैं ये सर्वेक्षण : पंजाब और गोवा में

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर पूरे देश में मची हलचल के बीच शनिवार को वोटिंग का सिलसिला शुरू हो जाएगा। शुरुआत पंजाब और गोवा से हो रही है। शनिवार को इन दोनों राज्यों में एक ही दिन में मतदान पूरा हो जाएगा। पंजाब में 117 सीटें हैं जबकि गोवा में 40 सीटें हैं। पहले बात करते हैं पंजाब की। पंजाब में आम आदमी पार्टी के मैदान में कूदने से चुनाव तिकोना बन गया है। विभिन्न सर्वेक्षणों में अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। आज तक ने एक्सिस के साथ मिलकर जो सर्वेक्षण कराया है उसमें कांग्रेस की सरकार बनने का दावा किया गया है। सर्वेक्षण में कांग्रेस को 60-65 सीटें मिलने की उम्मीद है। जबकि आप पार्टी को 41-44 सीटें मिल सकती हैं। अकाली-भाजपा तीसरे नम्बर पर है 11-15 सीटें  लेकर। सी वोटर ने इसके उलट पंजाब में आम आदमी पार्टी को 63 सीटें मिलने की संभावना प्रकट की है और सरकार वही बना रही है। कांग्रेस को 43 और अकाली-भाजपा को 11। दोनों ही सर्वेक्षणों में अकाली-भाजपा तीसरे नम्बर पर है। पंजाब में सट्टेबाजों ने जो भाव दिए हैं अगर उसे परिणाम में परिवर्तित किया जाए तो ये हर किसी को चौंकाने के लिए काफी होंगे। पन्टरों ने पंजाब में आम आदमी पार्टी को 57-59 सीटें मिलने की संभावना पर सट्टा लगा रखा है। कांग्रेस को 44-46 सीटें, अकाली-भाजपा गठबंधन को 10-11 सीटें। अहम बात यह है कि सबसे महत्वपूर्ण सीट लांबी, जहां से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल चुनाव लड़ रहे हैं, पर 50-60 का भाव लगाया गया है। लांबी में ही कांग्रेस की ओर से सीएम पद के दावेदार कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं। आप भी वहां मैदान में है। वहीं जलालाबाद में आम आदमी पार्टी के भगवंत मान और डिप्टी सीएम सुखबीर बादल चुनाव मैदान में हैं। पर 90-90 का फेवरेट लगाया गया है। संयोग से अरविन्द केजरीवाल ने पंजाब के बाद गोवा ऐसा राज्य चुना जो आकार में छोटा और जहां भाजपा और कांग्रेस में सीधी लड़ाई है। वैसे तो दिल्ली में आप ने सारे समीकरण ध्वस्त कर दिए लेकिन उसके साथ मूल रूप से कांग्रेस का वोटर जुड़ा था। दिल्ली में महज तीन सीटें मिलने पर भी भाजपा के वोट शेयर में ज्यादा कमी नहीं आई थी। केजरीवाल मुद्दा बनाने और उसे लोगों तक पहुंचाने में महारथ हासिल कर चुके हैं। सारी दुनिया कहती रही कि उनकी सरकार ने पिछले कांग्रेस सरकार के मुकाबले कुछ नहीं किया फिर भी केजरीवाल अपनी सरकार को देश की सबसे बढ़िया सरकार का तमगा दिए हुए हैं। आज तक-एक्सिस सर्वे के अनुसार गोवा की 40 सीटों में भाजपा को 22-25 सीटें मिलने की संभावना है जबकि कांग्रेस को 12-14 सीटें और आप को 1-2 सीटें मिलने की संभावना है। देखें जब मतपेटियां खुलती हैं तो कौन-सा सर्वे सही साबित होता है।

Friday, 3 February 2017

स्वागत है नए पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक का

मिलनसार तथा मृदुभाषी छवि के धनी श्री अमूल्य पटनायक दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर का स्वागत है। विशिष्ट सेवा के लिए पुलिस मेडल हासिल करने वाले अमूल्य पटनायक एक नई सोच के व्यक्ति हैं। जो कुछ नया करना चाहते हैं। इसके लिए वो कुछ अपने तौर पर नया करते भी रहे हैं। पुलिसकर्मियों को लगता था कि कभी भी पटनायक आ सकते हैं। अमूल्य पटनायक अपने पुलिस परिवार को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। उनको अपने पुलिस वालों की सुरक्षा का भी हमेशा ध्यान रहा है। वह हर पुलिस वाले की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हैं। आने वाले दिनों में यह हो सकता है कि पुलिस व उनके परिवार से जुड़ी समस्या की फाइल जो पेन्डिंग पड़ी है उनको हस्ताक्षर कराएं। उनके साथ रहकर काम करने वाले कुछ पुलिस वाले बताते हैं कि वह पुलिस वालों की परेशानियों को ध्यान से सुनते हैं और उनकी परेशानी को दूर करने की कोशिश करते हैं। दिल्ली पुलिस के तहत विभिन्न पदों को संभालते हुए उन्होंने कई जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। खासकर महिलाओं तथा बच्चों के प्रति होने वाले अपराध को रोकने में उन्हें महारथ हासिल है और उम्मीद की जा सकती है कि वह अपना पद संभालते ही राजधानी में रहने वाली महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध पर नकेल कसने को और प्रभावी ढंग से उठाएंगे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अमूल्य पटनायक के नाम कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज हैं। वह लंबे समय तक ज्वाइंट सीपी ऑपरेशन भी रहे हैं और उनके कार्यकाल में दिल्ली पुलिस के तहत क्राइम की इन्वेस्टीगेशन लेवल नई ऊंचाइयों तक पहुंची। उनके कार्यकाल में ही मुंबई बलास्ट, पार्सल बम केस में दो लाख के आरोपी बदमाश को दबोचा गया जबकि उनकी देखरेख में सरिता विहार में स्कूली बच्ची की किडनैपिंग केस को महज 12 घंटे में सुलझाते हुए एक लाख के इनामी बदमाश को दबोचा था। नए पुलिस बॉस के सामने कई चुनौतियां हैं। कुछ अंदरूनी और कुछ बाहरी। महिलाओं पर बढ़ते अपराध व सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। नाबालिगों का जिस तरह से गैंग इस्तेमाल कर रहे हैं, ड्रग्स और अवैध हथियार जिस तरह से दिल्ली आ रहे हैं उन पर अंकुश लगाना जरूरी है। आईपीएस अमूल्य पटनायक ने दिल्ली शहर को बारीकी से देखा और समझा है। उनकी काबिलियत की वजह से उन्हें वीवीआईपी सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनकी प्राथमिकताओं में पुलिस और पब्लिक के बीच जो खाई है उसको पाटना भी है। उनका हमेशा से मानना रहा है कि कोई भी एजेंसी शहर की जनता को जब तक साथ लेकर नहीं चलेगी तब तक उस शहर में सुरक्षा को लेकर टैंशन बनी रहेगी। श्री अमूल्य पटनायक का स्वागत करते हैं।

-अनिल नरेन्द्र

यूपी चुनाव : नरेंद्र मोदी बनाम अखिलेश बनाम मायावती

उत्तर प्रदेश में चुनाव जैसे-जैसे अपने मुकाम की ओर बढ़ रहा है, चुनाव रोमांचक स्थिति में पहुंच रहा है। एक ताजा सर्वेक्षण में सट्टा बाजार के अनुसार समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के चुनावी गठबंधन होने के बाद यह गठबंधन सबसे आगे है। उसे 164 से 167 सीटें मिल सकती हैं। जबकि इनके अनुसार भाजपा दूसरे नम्बर पर है उसे 127 से 130 सीटें मिल सकती हैं। जबकि बसपा को 85 से 89 तक सीटें मिल सकती हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव के स्टार प्रचारक हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (भाजपा के लिए) अखिलेश यादव, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और डिम्पल यादव (सपा के लिए) और मायावती (बसपा)। मुलायम सिंह यादव फिलहाल रूठे हुए हैं और कह रहे हैं कि चूंकि वह सपा-कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ हैं इसलिए वह चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। पहले बात करते हैं भारतीय जनता पार्टी की। पार्टी ने हाल ही में यूपी चुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की। इस लिस्ट में पार्टी ने पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों को जगह दी है। लेकिन पार्टी के मार्गदर्शक मंडल के नेता लाल कृष्ण आडवाणी और प्रदेश के कानपुर से लोकसभा सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी का नाम गायब है। वहीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, विनय कटियार और वरुण गांधी का नाम भी सूची में नदारद है। हालांकि पार्टी ने योगी आदित्यनाथ और संजीव बलियान को जगह दी है। महिला नेताओं में हेमा मालिनी और स्मृति ईरानी भी प्रचार करेंगी। चुनावी समीक्षकों ने उत्तर प्रदेश का चुनाव अखिलेश बनाम मोदी मान लिया है। सपा के भीतर महीनों तक चले घमासान के बाद जब अखिलेश जीत गए तो समीक्षकों को लगने लगा है कि घर की लड़ाई तो अखिलेश जीत गए, अब असली लड़ाई मोदी से होनी है। इसलिए इस चुनाव को उन्होंने मोदी बनाम अखिलेश बना दिया है। मोदी नाम का तर्क इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि यूपी में भाजपा ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। भाजपा मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी। बसपा के प्रत्याशियों के लिए बहन जी ही सबसे बड़ी प्रचारक हैं। लगभग हर विधानसभा सीट पर प्रत्याशी उनकी रैली चाहते हैं। याद रहे कि मायावती अकेले अपने दम-खम पर पहले भी पार्टी को सफलता दिला चुकी हैं। बहुजन समाज पार्टी को अमूमन लोग बेहतर कानून व्यवस्था देने वाली पार्टी के रूप में जानते हैं। वर्ष 2007 में जब पार्टी बहुमत में आई तो सरकार बनाने के बाद बहन जी ने 2012 तक कानून व्यवस्था सही कर दी थी। व्यवस्था के आंकड़े देखें तो बलवे, बलात्कार, हत्या एवं अन्य आपराधिक घटनाओं की संख्या कम हुई थी। यह केवल इसलिए संभव हो पाया था कि बसपा ने कानून व्यवस्था के सवाल पर अपनी पार्टी के भीतर से होने वाली इधर-उधर की पैरवियों को सुनना बंद कर दिया था। इस चुनाव में बहन जी उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर ज्यादा फोकस करेंगी। सपा-कांग्रेस में अब नई पीढ़ी कमान संभाल रही है। सपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद सबकी निगाहें प्रियंका गांधी वाड्रा और डिम्पल यादव की जोड़ी पर है। डिम्पल इस बार परिवार और पति की परछाईं से बाहर निकलकर व्यापक स्तर पर पार्टी के लिए प्रचार करेंगी। वहीं प्रियंका पहली बार मां और भाई को जिताने के बजाय पूरे राज्य में स्टार प्रचारक की भूमिका निभाएंगी। ऐसे में दोनों की चुनौती पहले से ज्यादा बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश की सियासत जातिगत पहियों पर चलती है, लेकिन लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के कारण जातिगत समीकरण ध्वस्त हो गए थे। मोदी का विकास का नारा अन्य मुद्दों पर भारी पड़ा था। अखिलेश यह बात समझ रहे हैं। उन्होंने भी विकास को मुख्य मुद्दा बनाया है। अखिलेश यादव जिस तरह का गुणा-गणित बनाकर चल रहे हैं, उससे बसपा-भाजपा के लिए वह कड़ी चुनौती खड़ी कर सकते हैं। कारण, यादव-मुस्लिम वोटों का समीकरण उनके पक्ष में है। गठबंधन के जरिये वोट विभाजन रोकने की कोशिश है। नए चेहरों को सामने लाकर उन्होंने विकास के एजेंडे में भी अपना चेहरा फिट करने की कोशिश की है। मतलब कई मायनों में उत्तर प्रदेश का चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम अखिलेश यादव हो सकता है।

Wednesday, 1 February 2017

सीबीआई बनाम सीबीआई

यह पहली बार ही है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के वर्तमान निदेशक अलोक वर्मा को पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के खिलाफ जांच करने का आदेश दिया है। रंजीत सिन्हा इस मामले में जरूर इतिहास बनाने में कामयाब रहे कि वह पहले पूर्व सीबीआई चीफ हैं, जिनके आपराधिक कारनामों की  जांच सीबीआई करेगी। मामला कुछ यह है कि रंजीत सिन्हा के कार्यकाल में जिन बड़े घोटालों की जांच देश की यह आला खुफिया संस्था कर रही थी, उनमें से बहुत सारे रसूखदार आरोपियों से वह गुप्त रूप से मिलते थे। सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाला मामले में उनके खिलाफ जांच प्रभावित करने के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बना दी है। एसआईटी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से पहले से बनी एमएल शर्मा की अगुवाई वाली कमेटी की रिपोर्ट की पड़ताल करेगी, जिसमें पहली नजर में सिन्हा को अधिकारों के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है। एसआईटी पता लगाएगी कि क्या सिन्हा और कोयला घोटाले के आरोपियों की मुलाकात से जांच पर असर पड़ा? आरोप है कि सिन्हा ने आरोपियों से मिलीभगत कर उन्हें बचाने की कोशिश की। यह कहना कठिन है कि रंजीत सिन्हा के खिलाफ होने वाली जांच किस नतीजे पर पहुंचती है, लेकिन इससे बड़ी विडंबना और कोई नहीं हो सकती कि जिस संस्था पर भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले की जांच सही तरह करने की जिम्मेदारी थी उसके ही प्रमुख के खिलाफ उसी मामले की जांच में लीपापोती करने का न केवल आरोप लगा, बल्कि वह प्रथमदृष्टया सही भी माना गया। इस आरोप को बल तब मिला था जब सिन्हा के आवास की विजिटर डायरी में उन लोगों के नाम दर्ज मिले जो कोयला घोटाले में शामिल थे। यह सही है कि जांच रिपोर्ट आने से पहले रंजीत सिन्हा के बारे में कोई नतीजा नहीं निकाला जाना चाहिए। लेकिन इस मामले ने देश की नौकरशाही में आ रही कुछ बेहद गंभीर बीमारियों की ओर हमारा ध्यान खींचा है। जिस पर अभी बात नहीं की गई तो बहुत देर हो जाएगी। सरकारी अमले का भ्रष्टाचार समस्या का सिर्फ एक पहलू है। कुछेक बड़े मगरमच्छ अगर अपने दुष्कर्मों के लिए रिटायरमेंट के बाद भी रगड़ दिए जाते हैं तो इस पर कुछ रोक लग सकती है। चूंकि खुद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह उजागर हुआ है कि कोयला घोटाले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में उस वक्त सत्ता में बैठे लोगों की ओर से हेरफेर किया गया था, इसलिए यह पता ही चलना चाहिए कि गफलत केवल रंजीत सिन्हा की ओर से की गई या फिर उसमें तत्कालीन शासन की भी भागीदारी थी? निस्संदेह सीबीआई के लिए यह कोई सहज-सामान्य स्थिति नहीं है कि उसे अपने ही पूर्व निदेशक की जांच करनी पड़ रही है, लेकिन उसके समक्ष सच को सामने लाने की जो चुनौती है उस पर क्या वह खरी उतरेगी?

-अनिल नरेन्द्र

पंजाब में दोनों सेनापतियों को आखिरी मौका

पंजाब विधानसभा चुनाव इस बार कांग्रेस अकाली दल के प्रमुखों के लिए न केवल अस्तित्व का ही सवाल है बल्कि साथ-साथ दोनों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। दोनों दलों के सेनापतियों के लिए यह चुनाव आखिरी चुनाव भी हो सकता है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार कैप्टन अमरिन्दर सिंह और पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल दोनों के लिए यह चुनाव नाक का सवाल बना हुआ है। दोनों ने इस चुनाव को अपने जीवन का आखिरी चुनाव मानकर पूरा जोर लगा दिया है। लांबी विधानसभा सीट पर पिछले 20 साल से शिरोमणि अकाली दल का कब्जा है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल चार बार विधानसभा चुनाव यहां से जीतते रहे हैं। इस बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भी लांबी से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा दिलाकर जरनैल सिंह को इन दोनों दिग्गजों के सामने उतारा है। जहां तक पंजाब विधानसभा चुनावों में मुद्दे की बात है तो नशाखोरी बड़ी समस्या के रूप में सामने आई है। 76 फीसदी लोग प्रदेश में अफीम लेने के आदी बताए जाते हैं, जिनमें 18-35 साल के युवा ज्यादा हैं। पंजाब चुनाव में मुख्तियार सिंह काफी चर्चा में हैं। मार्च 2016 में उनके बेटे मनजीत की ड्रग ओवरडोज के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद मुख्तियार ने ड्रग्स से लड़ाई को अपना मकसद बना लिया है। वह तरनतारन (पट्टी डिस्ट्रिक्ट) में कफन बोल पैया कैंपेन के हीरो हैं। मुझे नेता नहीं बनना है। मैं अपने जवान पुत की लाश नू शमशान लैके गया। मैं न चांदा कि किसी होर दे पियू नू आ दिन देखने पवें। 1966 में हरियाणा के गठन के बाद से ही पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे पर विवाद बना हुआ है। पंजाब कहता है कि हमारे पास खुद के लिए पर्याप्त पानी नहीं है, हम हरियाणा के साथ कैसे बांटें? नेताओं की राजनीति छोड़कर इस समस्या का हल निकलना चाहिए। पंजाब में किसानों की बदहाली एक बड़ी समस्या है। हर किसान परिवार पर आठ लाख औसतन कृषि कर्ज है। छह साल में 6926 किसानों ने आत्महत्या की है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष सुखपाल सिंह ने कहा कि 2000 से 2010 के बीच सात हजार से ज्यादा किसान खुदकुशी कर चुके हैं। सरकार चुनाव की वजह से आंकड़े कम करके बता रही है। राज्य में 8.8 करोड़ दलित समुदाय के लोग हैं। 61 फीसदी परिवार गरीबी रेखा से नीचे हैं। जालंधर की पहचान बन चुके हवेली ढाबे पर चर्चा में अपने विचार रखते हुए दलित लेखक एसएल विर्दी ने कहाöहमारे पास संस्कृति, साहित्य और राजनीतिक समझ सब है। इसके बावजूद राज्य में आज तक कोई दलित मुख्यमंत्री नहीं बना। किसी भी दल ने दलितों को उचित जगह नहीं दी है।

Tuesday, 31 January 2017

Trump bans Muslims of seven nations

Keeping his election promise, the US President Donald Trump has under the plans to stop terrorism, ordered to be stricter towards those coming to the US from Pakistan. Now a Pakistani may enter the US only after a thorough investigation and inquiry. Saudi Arabia and Afghanistan are also included in this category. President Trump has stayed the entry for those coming from the seven Muslim countries during the day. Entry scheme for refugees has been postponed for 120 days. The nations from which the refugees have been stayed are Iran, Iraq, Syria, Libya, Yemen, Sudan and Somalia. The US administration initiated its action just after Trump’s executive decision on Saturday. Though a court there has ruled against this order of Trump hearing the petition of an Organization working for human rights. Trump said he isn’t against the Muslim community; he just wants to stop the Muslim terrorism. It is true that Islamic terrorist incidents are happening since 9/11 against which the Americans are very angry. It is this anger that has elected Trump the president, so he doesn’t want to spare any chance to cash it. There is resistance from all quarters for Trump’s step. Though Trump may have cleared that he isn’t against the Muslim community but what he said in terms of the refugees that the Christians would be given preference, it makes clear that some people don’t  justify his step on humanitarian grounds. It is no secret that some Islamic terrorist groups like Al Qaida, Islamic State are continuously active against the US and they have succeeded in misleading the Muslim youths, as such the US has the exclusive rights to take steps for its security. It is no secret that the IS has sent its fighter terrorists along with innocent refugees in Syria in Europe and other Arabian countries and these elements are continuously  attack in Europe these days. It is no secret that just after the 9/11 terrorist attack a large section in the US has been screening the Muslims with suspicion. They feel that they provide shelter to the terrorists of the Muslims nations in the US and all of them are full of hatred against the US. Therefore, so many Muslims in the US from various countries feel themselves insecure. A federal court in the eastern district of New York has ordered on Saturday to stay the government’s decision to repatriate the refugees to their nations. The court believes that it will cause them an irredeemable loss. It may also be seen whether it’s right and constitutional.

ANIL NARENDRA