पिछले कुछ
दिनों के भीतर अलग-अलग राज्यों में पुलिस-प्रशासन व विधायकी से जुड़े अधिकारियों पर हमले जैसी घटनाएं सामने आई हैं,
उन्हें महज किसी तत्कालिक प्रतिक्रिया मानकर दरकिनार कर देना शायद सही
नहीं होगा। ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश में भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक पुत्र
आकाश विजयवर्गीय का है जिन्होंने बीते दिनों इंदौर में नगर निगम के एक अधिकारी को क्रिकेट
के बैट से पीट दिया था। दुखद बात यह है कि वह ऐसा करने के बाद यह उसे सही ठहराने में
लग गया। चूंकि इस घटना की वीडियो सार्वजनिक हो गया, इसलिए देशभर
में इसकी तीखी आलोचना हुई। दूसरी ओर इन आलोचनाओं की फिक्र करने के बजाय हमला करने वाले
इस विधायक को जमानत मिलने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उलटा जश्न मनाया, मानों वह बहुत महान कार्य करके जेल से रिहा हो। ठीक इसी तरह की दूसरी घटना
मध्यप्रदेश के सतना जिले में रामनगर में हुई और वहां भी भाजपा के एक नेता ने मुख्य
कार्यपाल अधिकारी को बुरी तरह से पीटा, जिससे वे गंभीर रूप से
घायल हो गए। इसके अलावा तेलंगाना में भी सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति के एक विधायक
के भाई की अगुवाई में भीड़ ने एक महिला वन सेवा अधिकारी पर जानलेवा हमला कर दिया। इन
सभी घटनाओं में पीड़ित अफसर महज अपने पद के दायरे में आने वाले दायित्व का निर्वाहन
कर रहे थे, लेकिन नेताओं या उनके रिश्तेदारों ने अपने रसूख की
धौंस दिखाकर उन पर हमला किया। सवाल यह है कि किस बात का अहंकार इन नेताओं के सिर चढ़कर
बोल रहा था कि किसी बात की शिकायत करने पर कानून का सहारा लेने के बजाय इन्होंने अफसरों
पर हमला करना जरूरी समझा? क्या यह महज समझते हैं कि उनका रसूख
व उनकी पार्टी उनकी रक्षा करेगी? यह अच्छा हुआ कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने बैट से पीटने वाले भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय पर बेहद सख्त रुख
अपनाते हुए कहा कि अहंकार और दुर्व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं होगा। भाजपा संसदीय दल
की बैठक में मंगलवार को पीएम ने आकाश का नाम लिए बिना कहाöबेटा
किसी का भी हो, मनमानी नहीं चलेगी। पार्टी नेताओं की पीढ़ियों
को कड़ी मेहनत के बाद सफलता मिली है, इस घटना से पार्टी की छवि
बिगड़ी है। मोदी बोलेöपार्टी के नाम पर ऐसा दुर्व्यवहार अस्वीकार्य
है। ऐसे नेता और उनका समर्थन करने वालों को पार्टी से निकाला जाना चाहिए। मोदी के इस
संबोधन के दौरान कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे। आकाश विजयवर्गीय की हरकत से खफा पीएम
ने ऐसे नेताओं पर अंकुश की जरूरत बताकर बैठक में साफ-साफ कहाöएक विधायक कम हो जाने से पार्टी पर आखिर क्या फर्प पड़ेगा। उन्होंने कहाöनिवेदन और दनादन..., ये कौन-सी
भाषा है। जाहिर है कि ऐसी समस्या को खत्म करना आसान नहीं होगा। फिर भी इस समस्या को
खत्म करने की सबसे बड़ी उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही बांधी जा सकती है।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मोदी को सीधे जनता के विशाल बहुमत का समर्थन हासिल है।
अब देखना यह है कि भारतीय जनता पार्टी अपने इन दोषी नेताओं पर क्या कार्रवाई करती है?
एक बार अगर सख्त कार्रवाई हो जाए तो शायद यह अहंकारी नेता लाइन पर आ
जाएं।
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Thursday, 4 July 2019
Wednesday, 3 July 2019
धर्म-ईमान का वास्ता देकर बॉलीवुड छोड़ना
दंगल गर्ल नेशनल अवार्ड विजेता अभिनेत्री जायरा
वसीम ने काफी कम उम्र और समय में ही अपनी दमदार एक्टिंग से बॉलीवुड में अपनी पहचान
बना ली है। अब वह सोनाली बोस की फिल्म `द स्काई
इज पिंक' में पर्दे पर नजर आएंगी। इस बीच जायरा ने रविवार को
फिल्मों में काम नहीं करने का ऐलान कर दिया। आमिर खान की फिल्म `दंगल' से बॉलीवुड में कदम रखने वाली जायरा ने फेसबुक
पर लिखी अपनी पोस्ट में कहा कि अब मैं काम नहीं करूंगी। उन्होंने लिखा-पांच साल पहले मैंने एक फैसला लिया जिसने मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।
मैंने जैसे ही अपने कदम बॉलीवुड में रखे, इसने मेरे लिए लोकपियता
के दरवाजे खोल दिए। मुझे सफलता के विचार के तौर पर पेश किया जाने लगा और अक्सर युवाओं
के रोल मॉडल के तौर पर मेरी पहचान होने लगी। हालांकि, मैंने कभी
भी ऐसा करना या बनना नहीं चाहा था। अब जब मैंने इस पेशे में 5 साल पूरे कर लिए हैं। मैं इस बात को स्वीकार करती हूं कि काम की वजह से मिली
पहचान से मैं खुश नहीं हूं। नई जीवन शैली पर पकड़ बनाने का पयास करते हुए महसूस हुआ
कि मैं इस जगह के लिए नहीं बनी हूं। यह क्षेत्र निश्चित तौर पर मेरे लिए ढेर सारा प्यार,
सहयोग और सराहना लेकर आया, लेकिन साथ ही इसने मुझे
अज्ञानता के रास्ते पर धकेल दिया, क्योंकि मैं चुपचाप व अंजाने
में ईमान के रास्ते से भटक गई थी। चूंकि मैं लगातार मेरे ईमान के बीच आने वाले माहौल
में काम कर रही थी, मेरे धर्म के साथ मेरा रिश्ता खतरे में पड़
गया था। यह रास्ता मुझे अल्लाह से दूर कर रहा था। जायरा के इस ट्वीट के आते ही सियासी
दंगल शुरू हो गया। जायरा के समर्थन में उतरे समाजवादी पार्टी के सांसद ने विवादित बयान
दे दिया तो दूसरे पार्टियों के नेताओं ने भी उनके उलट बयान दे दिया। सपा के सांसद टी
हसन ने जायरा के फैसले को सही करार देते हुए कहा कि यदि उन्हें जिस्म की नुमाइश करनी
पड़ रही थी तो यह फैसला सही है। उन्होंने कहा कि जिस्म की नुमाइश करना अल्लाह से दूर
होना है और गुनाह है। यूपी के मुरादाबाद से सांसद हसन ने कहा, इस्लाम ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों में भी महिलाओं के जिस्म की नुमाइश करना
मना है। मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि मैं जायरा के फैसले से हैरान हूं। यह
बेवकूफी भरा फैसला है। मुस्लिम समुदाय में कई लोगों की पतिभा बुर्पे के अंदर ही छुपी
रह जाती है। वहीं देवबंदी उलेमा ने जायरा के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जायरा
ने फिल्मों का जो रास्ता चुना था उसके लिए इस्लाम में मना किया गया है। उन्हें गलत
रास्ता चुनने का एहसास हुआ और फिर उन्होंने उससे (फिल्म से)
तौबा कर ली। जायरा बधाई की पात्र हैं -कारी इस्हाक
गोरा, जमीयत दावतुल मुसलमीन के संरक्षक, शिव सेना नेता पियंका चतुर्वेदी का कहना था कि हर किसी को अपनी आस्था का पालन
करने का अधिकार है, लेकिन कैरियर के लिए धर्म को असहिष्णुता नहीं
ठहराया जाना चाहिए। जायरा को लेकर यह फिजूल का विवाद टल सकता था अगर जायरा एक्टिंग
छोड़ने की यूं सार्वजनिक घोषणा न करतीं। वह एक्टिंग करना चाहती हैं या नहीं यह उनका
निजी फैसला है, जिस पर किसी को ऐतराज नहीं हो सकता पर यूं ड्रामा
करके छोड़ना गैर जरूरी था, जिससे बचा जा सकता था। कुछ तो इसे
पब्लिसिटी स्टंट मानते हैं।
-अनिल नरेन्द्र
74 साल में पहली बार उत्तर कोरिया की जमीन पर अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक उत्तर कोरिया पहुंचकर
सारी दुनिया को चौंका दिया। पिछले दो साल से अमेरिका और उत्तर कोरिया के संबंधों में
बहुत फर्प आया है। कोई लंबा वक्त नहीं बीता जब दोनों के बीच तनाव चरम पर था और एक समय
तो बीच में ऐसा भी आया जब यह लगने लगा कि दोनों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ने वाला है
और दोनों तरफ से परमाणु हथियार इस्तेमाल होंगे और तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा। लेकिन
संतोषजनक यह रहा कि ऐसी किसी अनहोनी का खतरा टल गया। शायद राष्ट्रपति ट्रंप और उत्तर
कोरिया के शासक किम जोंग उन के समझ में आ गया कि बातचीत से कोई रास्ता निकल सकता है।
एक ओर उत्तर कोरिया के तानाशाह राष्ट्राध्यक्ष किम जोंग उन थे तो दूसरी तरफ अमेरिकी
राष्ट्रवाद और श्रेष्ठता से पेरित डोनाल्ड ट्रंप। दोनों ही मुखर मिजाज नेताओं ने दुनिया
के दिलो-दिमाग को एक नए युद्ध की आशंका से भर
रखा था। अब ट्रंप और किम की जो तीसरी मुलाकात हुई है और इसके फलस्वरूप कोरियाई लोगों
(दोनों तरफ के) की आंखों में जो आंसू आए हैं,
वो दरअसल राहत के आंसू हैं। युद्ध की विनाशकारी आशंका जब टलती महसूस
होती है तो अनायास आंसू निकल ही पड़ते हैं। डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया पहुंचने वाले
पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं। उत्तर कोरिया के असैन्य इलाके डिमिलिट्राइज्ड जोन
में उनकी किम जोंग उन से मुलाकात हुई। किम ने ट्रंप से कहा-मैंने
कभी सोचा नहीं था कि राष्ट्रपति से इस जगह मिलेंगे। इस पर ट्रंप ने कहा-यह बड़ा पल है। दक्षिण कोfिरया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने इनकी मुलाकात का स्वागत करते हुए कहा कि यह मुलाकात शांति के लिए है।
हालांकि वे इस मुलाकात में शामिल नहीं थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, मुझे दोनों कोरिया को बांटने वाली रेखा को पार करने पर गर्व है। मैं किम को
व्हाइट हाउस आने का न्यौता देता हूं। इस पर किम ने कहा कि हमारे और ट्रंप के बीच शानदार
रिश्ते हैं। बता दें कि पिछले साल सिंगापुर में ट्रंप और किम जोंग उन पहली बार दोनों
नेता मिले थे। फिर दोनों नेताओं ने इसी साल फरवरी में हनोई में मुलाकात की थी। पर तब
वार्ता नाकाम रही। अब बातचीत फिर से बहाल होने की उम्मीद लगी है। ट्रंप और किम दोनों
में भले ही कितनी असमानताएं हों लेकिन एक समानता जरूर है। दोनों कुछ न कुछ ऐसा जरूर
करते हैं जिससे दुनिया चौंके। रविवार को ट्रंप ने वही किया। इस यात्रा को अचानक हुए
दौरे के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे निश्चित ही कुछ खास रणनीतियां हैं। ट्रंप
इस बात को अच्छी तरह से समझ रहे हैं कि उन्होंने एक साथ कई मोर्चे खोल दिए हैं। ईरान
से टकराव चल रहा है, उत्तर कोरिया का संकट पहले से है,
रूस-चीन और हिंद महासागर में चीन के दबदबे से अमेरिका
की नींद उड़ी हुई है, दुनिया के कई देशों के साथ व्यापार युद्ध
के हालात अलग बन हुए हैं। ऐसे में ट्रंप कहां-कहां और किससे उलझेंगे?
हम इस बदलते घटना कम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह शांति
वार्ता आगे बढ़ेगी और अमेरिका और उत्तर कोरिया अपने मतभेदों को टेबल पर बैठकर सुलझा
लेंगे और दुनिया तीसरे महायुद्ध की स्थिति से बचेगी।
कांग्रेस की हार के लिए अकेले राहुल जिम्मेदार नहीं
विधानसभा
चुनाव वाले राज्यों के नेताओं से मुलाकात के क्रम में शुक्रवार को दिल्ली के कांग्रेस
नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। बैठक शुरू होने के साथ ही राहुल
ने नेताओं को हिदायत दी कि मेरे पद छोड़ने को लेकर चर्चा न करें। राहुल ने लोकसभा चुनाव
में हार की सामूहिक जिम्मेदारी के प्रति पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा दिखाई गई उदासीनता
पर दुख जताया। राहुल ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनके पार्टी अध्यक्ष पद
से इस्तीफे की पेशकश के बाद भी कुछ मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को अपनी जवाबदेही
का अहसास नहीं हुआ। विश्वस्त सूत्र ने बताया कि राहुल गांधी ने कहा कि वह इस बात से
दुखी हैं कि उनके इस्तीफे के बाद भी पार्टी शासित राज्यों के कुछ मुख्यमंत्रियों, महासचिवों, प्रभारियों
और वरिष्ठ नेताओं को अपनी जवाबदेही का अहसास नहीं हुआ और न ही किसी ने अभी तक अपने
पद से इस्तीफा ही दिया है। गौरतलब है कि राहुल की यह टिप्पणी इस मायने में अहम है कि
25 मई को हुई कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी)
की बैठक
में उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ
को लेकर विशेष रूप से नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा था कि कुछ नेता अपने-अपने पुत्रों को जिताने में लग गए और पार्टी हितों को नजरंदाज किया। इसके बाद
शुक्रवार को कांग्रेस के भीतर इस्तीफों की झड़ी लग गई। पार्टी के तमाम पदों पर बैठे
सीनियर नेताओं से लेकर वर्पर्स तक ने इस्तीफे की पेशकश कर डाली। एक ही दिन में
120 इस्तीफों की झड़ी लग गई। सामूहिक इस्तीफों के पीछे यह वजह हो सकती
है कि कांग्रेस अध्यक्ष इसके बाद अपने हिसाब से संगठन का कायकल्प कर सकेंगे। संगठन
के पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे भेजे जिसमें एआईसी के पदाधिकारियों से लेकर सचिव,
यूथ कांग्रेस व महिला कांग्रेस के पदाधिकारियों तक शामिल हैं। बताया
जाता है कि एक लिस्ट तैयार हुई है जिसमें 120 लोगों ने अपने साइन
किए हैं। लिस्ट में अभी और नाम जुड़ने की चर्चा है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
वीरप्पा मोइली ने शुक्रवार को कहा कि राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद पर बने रहने
की एक प्रतिशत भी संभावना नहीं है। कांग्रेस पार्टी इतनी पुरानी है और आज के परिपेक्ष
में एक मजबूत विपक्ष की सख्त जरूरत है। कांग्रेस पार्टी के हित में यही है कि राहुल
अध्यक्ष बने रहें और अपने हिसाब से जरूरी पुनर्गठन करें हर स्तर पर। राहुल के विकल्प
पर शायद ही किसी की सहमति हो। ऐसी भी संभावना नहीं दिख रही है कि नेहरू-गांधी परिवार से बाहर का कोई नेता पार्टी को संभाल सकता है। अगर ऐसा होता है
तो पार्टी की टूटने की पूरी संभावना बन जाती है। सोनिया गांधी संप्रग अध्यक्ष हैं वहीं
प्रियंका गांधी वाड्रा महासचिव के रूप में सक्रिय हैं। अभी तक जिन नेताओं ने अपने पद
से इस्तीफा नहीं दिया वह ऐसा करके खुद पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लोकसभा चुनाव
में हार के लिए अकेले राहुल गांधी जिम्मेदार नहीं हैं।
-अनिल नरेन्द्र
डॉक्टर्स डे या डर डे? डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा बंद हो
सोमवार यानि पहली जुलाई डॉक्टर दिवस था। हर साल इस दिन
को खास बनाने वाले डॉक्टर विभिन्न रोगों के प्रति लोगों को जागरूक करते थे, लेकिन इस बार डॉक्टर अपनी सुरक्षा को
लेकर चिंतित हैं। अस्पतालों में लगातार बढ़ रही हिंसा उनके लिए नासूर बनती जा रही है।
सोमवार को ही दिल्ली में एमसीडी के बड़े अस्पताल हिन्दुराव में शनिवार देर रात एक महिला
मरीज की मौत पर उसके परिजन आग-बबूला हो गए। परिजनों ने ऑन ड्यूटी
दो डॉक्टरों की जमकर पिटाई की, जबकि अन्य डॉक्टरों के साथ हाथापाई
भी की। इस घटना में एक डॉक्टर के सिर पर गंभीर चोट आई है। जबकि दूसरे के कपड़े फाड़
दिए गए थे, उसे भी कई जगह चोटें आईं। घटना के खिलाफ रात में ही
एकजुट डॉक्टरों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। रविवार सुबह माहौल को गरमाते
देख प्रबंधन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने आरोपियों पर मामला दर्ज कर कइयों को हिरासत
में लिया। उधर पूरे मामले की जांच के लिए एनडीएमसी ने कमेटी गठित कर दी है। रेजीडेंट
डॉक्टर्स एसोसिएशन के डॉ. मनीष जैन ने बताया कि शनिवार देर रात
राजबाला नामक महिला मरीज को आपातकालीन विभाग लाया गया था। महिला गुर्दा संक्रमण की
परेशानी से जूझ रही थी। उनकी हालत गंभीर थी। रात करीब एक बजकर छह मिनट पर उसकी मौत
हो गई और तीमारदार ने फोन कर 30-40 लोगों को अस्पताल में बुला
लिया। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज के शरीर में संक्रमण पूरी तरह से फैल चुका था। जांच
में उनका गुर्दा फेल हो चुका था। क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ था और मरीज एनीमिया ग्रस्त भी
थी। उसके बचने की संभावना लगभग शून्य थी। हिन्दुराव अस्पताल में डॉक्टर्स से पिटाई
की घटना के विरोध में रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की संस्था फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स
एसोसिएशन (फोडो) और यूनाइटेड रेजीडेंट एवं
डॉक्टर्स एसोसिएशन ने डॉक्टर्स डे नहीं मनाया। वहीं एम्स ने भी हिन्दुराव अस्पताल की
रेजीडेंट डॉक्टरों का समर्थन करने की बात कही है। एम्स के रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन
के अध्यक्ष अमरिन्दर सिंह मल्ली ने कहा कि हम डॉक्टर्स से मारपीट करने की घटना का विरोध
करते हैं। हम अस्पताल की रेजीडेंट एसोसिएशन के साथ हैं। पिछले कुछ समय से डॉक्टरों
से मारपीट का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। दवाइयों की कमी, बेसिक
सुविधाओं के अभाव से मरीजों का जब इलाज उनके तसल्लीबख्श नहीं होता तो वह इसके लिए डॉक्टर
को जिम्मेदार मानते हैं और पीटने लगते हैं। हाल ही में कोलकाता में डॉक्टरों ने हिंसा
के खिलाफ प्रदर्शन व हड़ताल की थी। डॉक्टरों को पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए। सरकार को
डॉक्टरों की सुरक्षा हेतु कानून बनाना चाहिए। एक जुलाई यानि डॉक्टर्स डे। कहने को तो
यह दिन डॉक्टरों को समर्पित है लेकिन कोई भी डॉक्टर मौजूदा हालात में खुश नहीं है।
देशभर में डॉक्टरों के प्रति हिंसा बढ़ती जा रही है और इससे डॉक्टर डरे हुए हैं। ऐसी
घटनाओं को देखते हुए आने वाले समय में शायद ही कोई माता-पिता
अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने की सोचेंगे। अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और
सरकार की लापरवाही का हर्जाना डॉक्टरों को भुगतना पड़ता है। एक समय था कि डॉक्टरों
को भगवान का दर्जा दिया जाता था।
Tuesday, 2 July 2019
क्राइम सीरियल देख रची कत्ल की साजिश
23
जून को वसंत विहार इलाके में स्थित वसंत अपार्टमेंट के फ्लैट संख्या
234 में दो बुजुर्गों सहित तीन लोगों की हत्या के मामले को दिल्ली पुलिस
ने कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार सुलझा ही लिया। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की टीम ने
72 घंटे में सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल की कॉल डिटेल
और परिजनों के बयान से मिले सुरागों के बाद आरोपियों को दबोच लिया। 72 घंटे में ही इस हत्याकांड का खुलासा करने पर दिल्ली पुलिस को बधाई। इन बुजुर्गों
की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपियों प्रीति व मनोज ने पुलिस की पूछताछ में चौंकाने
वाले खुलासे किए हैं। आरोपी प्रीति ने पुलिस को बताया है कि उसने मनोज के साथ मिलकर
एक व्यापार शुरू किया था जो किसी कारणवश घाटे में चला गया। घाटा पूरा करने के लिए दोनों
ने टीवी पर आने वाले अपराध के एक सीरियल को देखकर आठ दिन तक हत्याकांड की प्लानिंग
की। इस दौरान उन्होंने वारदात वाली जगह की दो दिन तक रेकी की और बाद में घटना को अंजाम
दिया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने 15 जून से पीड़ितों
के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। यह करने के बाद प्रीति 17 जून को उनके घर पहुंची, जहां उसने दोनों बुजुर्गों से
मुलाकात की। प्रीति ने 17 जून को बुजुर्ग दम्पति का विश्वास जीतने
के लिए उनकी बेटी से भी फोन पर बात की। बात होने के बाद वह पूरी रात बुजुर्गों के घर
में ही रुकी और दोस्ती की। घर की रेकी करने के लिए मनोज के साथ 21 जून को फिर पहुंची। लेकिन इस दिन वह बुजुर्गों के घर नहीं गई। पुलिस की जांच
में सामने आया है कि आरोपियों ने वारदात वाले दिन अपने फोन घर में ही छोड़ दिए। पुलिस
ने जब दोनों को गिरफ्तार किया तो आरोपियों ने उन्हें हत्या व लूट से इंकार कर दिया।
आरोपियों ने पुलिस से कहा कि कॉल डिटेल व लोकेशन देख लीजिए, हम
अपने घर पर ही थे। लेकिन वारदात में इस्तेमाल बाइक के चलते दोनों की प्लानिंग फेल हो
गई। सीसीटीवी में तीनों आरोपी बाइक पर थे, जो सीसीटीवी में कैद
हो गई। बाइक से उतरते ही तीनों ने अपने चेहरे ढक लिए। प्रीति ने खुशबू से गेट का दरवाजा
खुलवाया और जब वह अंदर पहुंची तो उसने पाया कि शशि माथुर भी जागी हुई थीं। प्रीति ने
दोनों से बात शुरू की और चाय बनवाई। चाय पीने के दौरान उसने मनोज के बारे में बताया।
शशि ने मनोज को घर बुलाने के लिए बोल दिया। प्रीति के बुलाने पर मनोज भी घर के अंदर
दाखिल हो गया। मनोज अपने साथ एक कोल्ड ड्रिंग की बोतल लेकर आया था। आरोपी मनोज ने कोल्ड
ड्रिंक में शराब मिलाई हुई थी। मनोज जब खुशबू के साथ कोल्ड ड्रिंक पी रहा था तो प्रीति
अपने लिए गिलास लेने के बहाने रसोई गई, जहां उसने वहां रखे दो
चाकुओं को उठाया और बाहर आ गई। प्रीति से चाकू लेकर मनोज ने खुशबू की हत्या कर दी।
दोनों ने प्रीति पर करीब 35 वार किए। बाद में दोनों बुजुर्गों
के बैडरूम में गए और उनकी हत्या कर दी। वारदात के दौरान कोई शोर न मचा दे इसलिए टीवी
चला दिया था। शनिवार को क्रिकेट विश्वकप में भारत व अफगानिस्तान का मैच था। मनोज ने
टीवी पर मैच लगाकर उसकी आवाज तेज कर दी ताकि लोगों को यह लगे कि घर में मौजूद लोग मैच
देख रहे हैं। प्रीति और मनोज को बुजुर्ग दम्पति की हत्या का आइडिया टीवी सीरियल से
आया।
-अनिल नरेन्द्र
संदेसरा बंधुओं ने तो नीरव मोदी को भी पीछे छोड़ा
हमारे देश में पता नहीं कितने बड़े घोटालेबाज बैठे हैं? आए दिन एक नए घोटाले का पर्दाफाश होता
है और हजारों करोड़ रुपए की हेराफेरी का पता चलता है। हम तो समझते थे कि नीरव मोदी
और मेहुल चोकसी ही बड़े घोटालेबाज थे पर यहां तो उनसे भी बड़े घोटालेबाजों का पता चला
है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दावा किया
है कि संदेसरा बंधुओं द्वारा बैंकों से की गई धोखाधड़ी नीरव मोदी के पंजाब नेशनल बैंक
घोटाले से भी बड़ी है। ईडी सूत्रों के मुताबिक स्टर्लिंग बॉयोटेक के प्रमोटरों नितिन
संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा ने बैंकों से
14,500 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया जबकि फरार हीरा कारोबारी नीरव
मोदी ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से
11,400 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी। सीबीआई ने 2017 में गुजरात की फार्मा कंपनी स्टर्लिंग बॉयोटेक और इसके प्रमोटरों के खिलाफ
बैंकों से 5383 करोड़ की धोखाधड़ी का केस दर्ज भी किया। इसके
बाद ईडी ने जांच शुरू की। तब पता चला कि संदेसरा समूह की विदेशों में स्थित कंपनियों
ने भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से नौ हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया। यह रकम भारतीय
व विदेशी दोनों मुद्राओं में ली गई। बाद में यह कर्ज पीएनबी में बदल गया। उन्हें यह
कर्ज आंध्र बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के समूह की स्वीकृति पर मिला। समूह से यूको
बैंक, एसबीआई, इलाहाबाद बैंक और बैंक ऑफ
इंडिया शामिल थे। स्टर्लिंग बॉयोटेक ने सरकारी बैंकों से कर्ज लेकर इस पैसे का इस्तेमाल
तय लक्ष्यों की जगह दूसरे कामों में किया। कई फर्मों के जरिये पैसे का हेरफेर भी किया
गया। कंपनी के प्रमोटरों ने कर्ज की रकम का इस्तेमाल व्यक्तिगत उपयोग के साथ ही नाइजीरिया
में तेल कारोबार बढ़ाने में किया। इस मामले के मुख्य आरोपी संदेसरा बंधु फिलहाल फरार
हैं और अल्बानिया में छिपे हैं। ईडी ने इस मामले में 27 जून को
संदेसरा समूह की 9778 करोड़ की सम्पत्ति जब्त की। इसमें जैट विमान,
नाइजीरिया में तेल के कुएं, पनामा में अटलांटिक
ब्लू वॉटर सर्विस के नाम से रजिस्टर्ड चार जहाज और लंदन में विशाल फ्लैट शामिल हैं।
इससे पहले भी ग्रुप की 4730 करोड़ की सम्पत्ति जब्त की गई थी।
सीबीआई और ईडी इस मामले में सात मुख्य आरोपियों सहित 191 के खिलाफ
चार्जशीट पेश कर चुकी है। इनमें स्टर्लिंग बॉयोटेक समेत 184 कंपनियां
शामिल हैं। इनमें से 179 कंपनियां फर्जी हैं। मुख्य आरोपी हितेश
पटेल को 11 मार्च को अल्बानिया से हिरासत में लिया गया था। भारतीय
एजेंसियां उसे वापस लाने के लिए इंटरपोल से सम्पर्प में हैं। नीतिन, चेतन व दीप्ति के खिलाफ भी प्रत्यार्पण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। संदेसरा
बंधुओं ने 300 से अधिक फर्जी (शेल)
और बेनामी कंपनियां बनाई थीं, जिनके जरिये ये बैंक
की रकम विदेश भेजी गई। सवाल यहां यह उठता है कि इतना बड़ा घोटाला बिना संरक्षण के संभव
नहीं हो सकता। अब जब जांच शुरू हो गई है तो शायद पता चले कि संदेसरा बंधुओं की घोटाले
में किस-किस ने और मदद की है।
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