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Sunday, 3 May 2020

अलविदा रोमांस के ऋषि

क्यों ऐसा लगता है कि हमारे बॉलीवुड को किसी की नजर लग गई है। आए दिन कोई न कोई दुखद घटना सुनने को मिल रही है। ऋषि कपूर अब नहीं रहे। वह 67 साल के थे। ल्यूकेमिया यानि बल्ड कैंसर से जूझ रहे थे। गुरुवार सुबह मुंबई के अस्पताल में उनका निधन हो गया। बुधवार को इरफान खान के निधन की खबर से बॉलीवुड उबरा नहीं था कि ऋषि कपूर के जाने की खबर आ गई। वह खुशमिजाजी के लिए जाने जाते थे। आखिरी वक्त तक भी उन्होंने अपना यह अंदाज नहीं छोड़ा। जब उन्होंने अंतिम सांस ली, तब उनके साथ पत्नी नीतू और बेटे रणवीर मौजूद थे। ऋषि की बेटी रिद्धिमा दिल्ली में थीं, जो लॉकडाउन में चार्टर्ड प्लेन की इजाजत नहीं मिलने पर अंत्येष्टि में शामिल नहीं हो पाईं। वह 1400 किलोमीटर लंबी सड़क यात्रा करके मुंबई पहुंचीं। ऋषि का पार्थिव शरीर अस्पताल से सीधे शमशान घाट ले जाया गया। 20 करीबी लोगों की मौजूदगी में शाम करीब चार बजे विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। ऋषि की जिंदगी में कई ऐसे रोचक किस्से हैं, जो बॉलीवुड के गलियारों में खूब सुने जा सकते हैं। इनमें से कुछ का जिक्र उन्होंने अपनी ऑटोबाइग्राफी `खुल्लम खुल्ला' ऋषि कपूर अनसेंसर्ड में किया था जो मीना अय्यर ने लिखी है। 2018 में ऋषि को कैंसर हुआ था। इलाज के लिए वह अमेरिका गए थे। वहां 11 महीने रहने के बाद पिछले साल सितम्बर में भारत लौटे। अमेरिका में पूरे वक्त उनके साथ पत्नी नीतू ही थीं। रणवीर कपूर कई बार उनसे मिलने न्यूयॉर्प गए थे। कुछ दिन पहले ऋषि ने एक इंटरव्यू में कहा थाöअब मैं बहुत बेहतर महसूस कर रहा हूं और कोई भी काम कर सकता हूं। सोच रहा हूं कि एक्टिंग दोबारा से शुरू करूं। पता नहीं लोगों को अब मेरा काम पसंद आए भी या नहीं। न्यूयॉर्प में मुझे कई बार खून चढ़ाया गया था। मैंने नीतू से कहा था उम्मीद करता हूं कि नए खून के बावजूद मैं एक्टिंग नहीं भूलूंगा। दो अप्रैल को ऋषि ने अपना आखिरी ट्वीट किया था जिसमें लिखा थाöसभी भाइयों और बहनों से अपील है कि कृपया हिंसा, पत्थरबाजी या मॉब लिंचिंग का सहारा न लें। डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टॉफ, पुलिसकर्मी आपको बचाने के लिए अपनी जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं। हमें इस कोरोना वायरस युद्ध को एक साथ जीतना होगा। प्लीज। जय हिंद। बॉलीवुड में ऋषि कपूर का नाम एक ऐसे सदाबहार अभिनेता के तौर पर याद किया जाएगा जो अपने रूमानी और भावपूर्ण अभिनय से लगभग तीन दशक तक दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते रहे। अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टॉफ ने कहा कि वह आखिरी समय तक उनका मनोरंजन करते रहे। वह इस बात से खुश थे कि उन्हें पूरी दुनिया में अपने फैंस से बेशुमार प्यार मिल रहा था। उनकी यही इच्छा थी कि उन्हें हर कोई मुस्कान के साथ याद रखे, आंसुओं के साथ नहीं। चार सितम्बर 1952 में जन्मे ऋषि ने बतौर बाल कलाकार मेरा नाम जोकर में अभिनय किया था। 1973 में रिलीज फिल्म बॉबी से बतौर नायक करियर का आगाज किया था। रोमांटिक हीरो के तौर पर स्थापित हुए ऋषि ने करीब पांच दशक तक के करियर में चांदनी, प्रेम रोग, नगीना, लैला मजनू, कर्ज, डीडे, दो दुनी चार, मुल्क, कपूर एंड संस में यादगार भूमिका निभाई। अलविदा ऋषि, आप हमेशा याद रहोगे।

Saturday, 2 May 2020

मुंबई की झुग्गी-बस्तियां बन रही हैं चुनौती

मुंबई में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के प्रयासों के लिए शहर की झुग्गी-बस्तियां बड़ी चुनौती पेश कर रही हैं, जिनमें एक करोड़ 20 लाख की कुल आबादी वाले शहर की बड़ी जनसंख्या बेहद छोटी जगहों एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में रहती है। सपनों की नगरी कहे जाने वाले इस शहर में जहां एक ओर बड़ी संख्या में अरबपति रहते हैं, वहीं दूसरी ओर यहीं एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्ती धारावी भी है, जो कोरोना संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित है। धारावी करीब 2.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, लेकिन इतने से क्षेत्र में 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं। टाटा समूह के मानद अध्यक्ष रतन टाटा ने एक संगोष्ठी के दौरान डेवलपरों और वास्तुकारों द्वारा शहर में मौजूद झुग्गी-झोंपड़ियों के साथ अवशेष की तरह सलूक करने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कोरोना महामारी के तेजी से फैलने की एक बड़ी वजह इन झुग्गी-बस्तियों को भी बताया था। उन्होंने कहा थाöसंकरे आवास और झुग्गियों का उन्मूलन आश्चर्यजनक रूप से दो परस्पर विरोधी मुद्दे हैं। हम लोगों को अनुपयुक्त हालात में रहने के लिए भेजकर झुग्गियों को हटाना चाहते हैं। इन लोगों को जहां रहने की जगह दी जाती है वह भी शहर से 20-30 मील दूर होती है और अपने स्थान से उखाड़ दिए गए इन लोगों के पास कोई काम नहीं होता है। उन्होंने कहा था कि लोग महंगे आवास वहां बनाते हैं, जहां कभी झुग्गियां होती थीं। इस महानगर में कोरोना संक्रमण के 10,498 से ऊपर मामले सामने आ चुके हैं जिसमें 450 से ऊपर लोगों की मौत हो चुकी है। महाराष्ट्र सरकार कोरोना संक्रमण को काबू करने के लिए लोगों से घरों में रहने की अपील कर रही है, लेकिन इन झुग्गी-बस्तियों में 100 से 200 वर्ग फुट के कमरों में आठ से दस लोग साथ रहते हैं। कई परिवारों का शौचालय एक ही है और वह पानी के लिए एक ही नल का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के पूर्व मुख्य नगर नियोजक वीके पाठक ने कहाöनीतिगत विफलता और नेताओं एवं डेवलपरों की कभी न समाप्त होने वाली आकांक्षाओं के कारण शहर झुग्गी-बस्ती से मुक्त नहीं हो पा रहा है और आज यह इलाके कोरोना संक्रमण फैलने का स्रोत बन गए हैं। रियल एस्टेट डेवलपरों के निकाय नारेड़की एस्टेट डेवलपरों के निकाय नारेड़की के राष्ट्रीय अध्यक्ष निरंजन हीराचंदानी ने भी स्वीकार किया कि मुंबई के लिए उचित शहरी योजना कभी भी नहीं बनाई गई। इन झुग्गियों में कोरोना संक्रमण रोकना बहुत बड़ी चुनौती है।

-अनिल नरेन्द्र

हंसाते-हंसाते चला गया एक महान कलाकार

असाधारण अभिनय प्रतिभा के बल पर साधारण नैन-नक्श वाले इरफान खान ने हर किसी को अपना मुरीद बना  लिया। मकबूल, पान सिंह तोमर, मदारी और मुख्यधारा की अंग्रेजी मीडियम, पीकू जैसी फिल्मों के बल पर उन्हें प्रशंसकों का वो प्यार हासिल हुआ है, जिसके  लिए अभिनेता और सितारे, दोनों ही तरसते हैं। हिन्दी सिने जगत के इस अंतर्राष्ट्रीय एक्टर शहंशाह इरफान खान सुपुर्द-ए-खाक हो गए। शांत चेहरे और आंखों से अदाकारी से मकबूल 53 साल के इरफान खान नहीं रहे। उन्हें न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर (कैंसर) था। आंतों में संक्रमण होने पर उन्हें मंगलवार को अस्पताल लाया गया, जहां बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। चार दिन पहले उनकी मां सईदा बेगम का भी निधन हो गया था। जिंदगी के आखिरी पलों में भी अपने काम से जिंदा रहने की ख्वाहिश इरफान में ही थी। वह जीवन के सर्पिस को बाहर खड़े होकर देखते थे। एक संवाददाता ने उनसे पूछा कि जब वह इलाज करवा रहे हैं तो शूटिंग क्यों जारी रखना चाहते हैं? उन्होंने कहाöमैं मरा नहीं हूं न... तो मुझे जिस काम से प्यार है, वह करके जिंदा रहने दो। इरफान को 2018 में न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर हुआ था। उनके परिवार में पत्नी सुतापा और दो बेटे बाबिल और अयान हैं। इरफान खान ने केवल देश में ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया। खान को मलाशय संक्रमण के कारण मंगलवार को मुंबई के कोकिला बेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उनके निधन के संबंध में जारी बयान में कहा गया है, यह काफी दुखद है कि आज हमें उनके निधन की खबर बतानी पड़ रही है। इरफान एक मजबूत इंसान थे, जिन्होंने अंत तक लड़ाई लड़ी और अपने संपर्प में आने वाले हर शख्स को प्रेरित किया। इरफान को बुधवार को अपनी मौत का पूर्वाभास हो गया था। सुबह उन्होंने अस्पाल के कमरे में अपनी पत्नी सुतापा सिकदार से कहा कि देखो अम्मी उनकी तरफ बैठी हैं। वह उन्हें लेने आई हैं। यह सुनकर उनकी पत्नी रोने लगीं और कमरे से बाहर चली गईं। गौरतलब है कि इरफान खान की मौत से ठीक तीन दिन पहले उनकी अम्मी की मौत हो गई थी। लॉकडाउन के चलते वह उनकी अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो पाए। इरफान का आखिरी संदेशöमैं आपके साथ हूं भी और नहीं भी... मेरा इंतजार करना। हैलो भाइयों-बहनों नमस्कार। मैं इरफान। मैं आज आपके साथ हूं भी और नहीं भी। मेरे शरीर के अंदर कुछ अनचाहे मेहमान बैठे हुए हैं। उनसे वार्तालाप चल रहा है। देखते हैं ऊंट किस करवट बैठता है। जैसा भी होगा आपको जानकारी दे दी जाएगी। जब इरफान को इस मनहूस बीमारी का पता चला तो उन्होंने अस्पताल में लिखा थाöकई बार सफर ऐसे भी खत्म होता है। अभी तक मैं एक बेहद अलग खेल का हिस्सा था। मैं एक तेज भागती ट्रेन पर सवार था। मेरे सपने की योजनाएं थीं। मैं पूरी तरह इस सब में व्यस्त था। तभी ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए मुझे रोका। वह टीसी था। बोलाöआपका स्टेशन आने वाला है, नीचे उतर आएं। मैं परेशान हो गया। नहीं-नहीं मेरा स्टेशन अभी नहीं आया है। उसने कहाöनहीं, आपका सफर यहीं तक था। कभी-कभी यह सफर ऐसे ही खत्म होता है। इरफान खान तो चले गए पर उनका अभिनय हमेशा के लिए जिंदा रहेगा। एक नेक इंसान, मिलनसार अभिनेता को हमारा आखिरी सलाम।

Friday, 1 May 2020

बंगला साहब गुरुद्वारे का आभार, हरजीत सिंह का अद्भुत सम्मान

यह किसी से छिपा नहीं कि लॉकडाउन में हमारे देश की पुलिस उल्लेखनीय काम कर रही है। यह भी कि सिखों और गुरुद्वारों ने हजारों, लाखों लोगों को इस महामारी के दौरान खाना देकर उनको भूखे मरने से बचाया है। लॉकडाउन में कोई भूखा न रहे, इसके लिए गुरुद्वारों में लंगर चल रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने बंगला साहब गुरुद्वारों के प्रबंधकों का आभार जताया। पुलिस की जिप्सी और बाइक दस्ते ने सायरन बजाते हुए गुरुद्वारे की परिक्रमा की और अधिकारियों की लंगर सेवा रोज एक लाख से अधिक लोगों तक खाना पहुंचाती रही है। पीएम ने भी ट्वीट किया कि हमारे गुरुद्वारे असाधारण सेवा कर रहे हैं, उनका दयाभाव प्रशंसनीय है। वहीं पंजाब पुलिस के हर जवान ने सोमवार को ही मैं वी हां हरजीत सिंह (मैं भी हरजीत सिंह) नारा लगाया। सोमवार को डीजीपी समेत 80 हजार पुलिस जवानों ने वर्दी पर एसआई हरजीत सिंह के नाम की प्लेट लगाकर ड्यूटी दी। हरजीत चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती हैं। 12 अप्रैल को कर्फ्यू पास मांगने के दौरान भड़के निहंगों ने उनका हाथ काटकर अलग कर दिया था। बाद में पीजीआई चंडीगढ़ में उनके हाथ को जोड़ दिया गया था। डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कहा कि यह हरजीत सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों का हौसला बढ़ाने का प्रयास है। पीजीआई में भर्ती हरजीत ने बताया कि मैंने अपने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा सम्मान मिलेगा। कभी किसी ने ऐसा सम्मान मिलते नहीं देखा। सबका शुक्रिया।

-अनिल नरेन्द्र

टेस्टिंग किट पर लगाया प्रतिबंध तो चीन तिलमिला उठा

घटिया कोविड-19 की जांच के लिए चीनी कंपनियों से आयातित टेस्टिंग किट मामले पर भारत और चीन की ठनती नजर आ रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की चीन से आई रैपिड इस्तेमाल न करने और इसे वापस करने की सलाह के बाद चीन ने चिंता जाहिर करते हुए इसे पूर्वाग्रह से  प्रेरित बताया है। चीनी कंपनियां यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उनकी किट की गुणवत्ता गड़बड़ है। चीनी ने भारत को नसीहत देते हुए कहा है कि किट की स्टोरेज, इस्तेमाल और ट्रांसपोर्टेशन सही तरीके से प्रोफेशनल लोगों द्वारा न किया जाना किट के नतीजों में अंतर ला सकता है। भारत ने गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता न करने का संदेश चीन को दिया है। वहीं सूत्रों की ओर से कहा गया है कि घटिया गुणवत्ता वाली किट लौटाई जा सकती है और इनका भुगतान भी रोका जा सकता है। भारत के इस कदम पर नई दिल्ली स्थित के दूतावास ने बेहद तल्ख प्रतिक्रिया दी है। चीनी दूतावास की प्रवक्ता शी टोंग ने इस फैसले को चिंताजनक व पूर्वाग्रह से पूर्ण बताया है। वहीं भारत को रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट देने वाली कंपनी वोंडको ने इस पर गहरी निराशा जताई और कहा कि वह भी इस आरोप की जांच करेगी। चीनी दूतावास की प्रवक्ता शी टोंग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर चीन सरकार का पक्ष रखा। इसमें कहा गया है कि आईसीएमआर ने चीन को जिन दो कंपनियों से किट मंगाने का फैसला किया था, उस किट को नेशनल प्रॉडक्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन लिमिटेड और भारत के राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान से पूर्ण मंजूरी मिली थी। उक्त दोनों संस्थान सभी तरह के अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में सक्षम हैं। जिन दो कंपनियों ने भारत को निर्यात किया है, वह यूरोप, लैटिन अमेरिका और एशिया के दूसरे देशों को भी उक्त उत्पाद भेज रही हैं। इस प्रतिक्रिया पर सरकारी सूत्रों ने कहा कि खरीद समझौता कंपनियों के साथ हुआ है, चीन सरकार से नहीं। कोई गड़बड़ी हुई है तो उन कंपनियों के स्तर पर हुई है। फिलहाल जिन दो कंपनियों की किट में गड़बड़ी पाई गई है उनसे अब भारत कोई खरीद नहीं करेगा। चीन की तिलमिलाहट के पीछे एक बड़ी वजह यह है कि उसकी रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट पर भारत जैसे बड़े देश ने अंगुली उठाई है। भारत ने चीन की कंपनियों से इस तरह की तकरीबन 12 लाख किट के आयात का कांट्रेक्ट किया है। पांच लाख किट पहले ही पहुंच चुकी हैं, जिसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। आईसीएमआर ने सोमवार को कहा था कि इस किट पर प्रतिबंध लगाने से भारत को आर्थिक हानि नहीं होगी, क्योंकि अभी तक इसका भुगतान नहीं किया गया है।

विवादों में फिर अर्णब गोस्वामी

सुप्रीम कोर्ट ने गत शुक्रवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ और जाने-माने पत्रकार अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। सांप्रदायिक द्वेष भड़काने के आरोप में गोस्वामी के खिलाफ देश में कई जगह एफआईआर दर्ज की गई है। जस्टिस धनंजय चंद्रचूड़ और जस्टिस मुकेश कुमार शाह की बेंच ने कहा कि नागपुर में दर्ज एफआईआर को मुंबई ट्रांसफर किया जाता है। गोस्वामी ने पालघर मॉब लिंचिंग मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की थी। इससे नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देशभर के कई हिस्सों में गोस्वामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन हफ्ते की अवधि से संबंधित अदालत से अग्रिम जमानत हासिल करने के लिए अर्जी दायर कर सकता है। बाकी सभी एफआईआर पर स्टे जारी रहेगा। अर्णब गोस्वामी पर आरोप है कि उसने 21 अप्रैल को अपने टीवी शो में पालघर में दो साधुओं की हत्या को सांप्रदायिक रंग दिया, दो समुदायों के बीच कटुता पैदा की। इसके खिलाफ महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में एफआईआर दर्ज की गई है। सोमवार को मुंबई पुलिस ने करीब 12 घंटे तक गोस्वामी से पूछताछ की। अर्णब सोमवार सुबह 10 बजे मुंबई के एनएम जोशी मार्ग पुलिस थाने पहुंचे थे। प्रवेश करने से पहले उन्होंने अपने ही चैनल के दो पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि सच्चाई की जीत होगी। पूछताछ लंबी खिंचने के कारण ही वह सोमवार अपने टीवी चैनल पर रोज शाम सात बजे आने वाले बहस का शो पूछता है भारत भी प्रस्तुत नहीं कर सके। इस संबंध में उनके चैनल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वह पूछताछ में पुलिस का पूरा सहयोग कर रहे हैं। चैनल ने उन पर हमला करने वाले दोनों युवकों को 15 हजार रुपए की जमानत पर रिहा किए जाने पर गहरा अफसोस जताया है। चैनल ने पुलिस द्वारा इस मामले में लीपापोती किए जाने पर भी अफसोस जताया है। बता दें कि अर्णब गोस्वामी पर घर  लौटते समय हमला हुआ। हमले के समय अर्णब की पत्नी भी उनके साथ थीं। पत्रकार के साथ चल रहे सुरक्षा कर्मियों ने दोनों हमलावरों को दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया। इस हमले के मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी वहीं बॉलीवुड एक्टर और प्रोड्यूसर कमाल आर खान उर्प आरके ने अर्णब गोस्वामी पर हमले पर तंज कसते हुए उन पर निशाना साधा है। कमाल खान ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए अर्णब गोस्वामी पर निशाना साधते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। कमाल आर खान ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है कि अर्णब गोस्वामी पर हमला हुआ हो इससे पहले भी इन पर 2002 के दौरान हमला हो चुका है। उस वक्त यह नरेंद्र मोदी और भाजपा को कोस रहे थे। एक बार फिर अर्णब में 2002 वाला भूत आ गया है और वो सोनिया गांधी को कोस रहे हैं। कमाल आर खान ने आगे कहा कि अर्णब गोस्वामी बिल्कुल झूठ बोल रहे हैं। यह ऐसे इंसान हैं जिनकी कोई जाति है न कोई धर्म। यह जिधर वजन देखते हैं ऊधर भजन करने लगते हैं। इस वक्त भाजपा की सरकार है तो यह उसके पक्ष में बोल रहे हैं और जब कांग्रेस की सरकार आ जाएगी तो फिर यह उसकी चाटुकारिता शुरू कर देंगे। बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है कि केआरके ने अर्णब पर निशाना साधा हो। केआरके का यह ट्वीट काफी वायरल हुआ है। उन्होंने लिखा था कि मेरे प्रिय अर्णब गोस्वामी मेरी आपकी कांग्रेस से जो लड़ाई चल रही है उससे कुछ लेनादेना नहीं, आप कृपया ड्रामा बंद करें।

Thursday, 30 April 2020

पाक में नमाज में शर्तों की धज्जियां उड़ींöसेना के हवाले

पाकिस्तान में रमजान के महीने में सामूहिक नमाज की अनुमति जिन शर्तों के साथ दी गई थी, उनमें से कुछ की पहली रमजान को ही धज्जियां उड़ गईं। पाक में लॉकडाउन के कारण मस्जिदों में सामूहिक नमाज पर प्रतिबंध था। पर उलेमा ने साफ कहा कि रमजान में वह प्रतिबंध नहीं मानेंगे। इस पर संघीय सरकार व देश के विख्यात धर्मगुरुओं की बैठक में समझौता हुआ कि 20 शर्तों के पालन के साथ मस्जिदों में सामूहिक नमाज पढ़ी जा सकती है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पट्टन डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में साफ हुआ कि पंजाब प्रांत में और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की 80 प्रतिशत मस्जिदों में सरकार और उलेमा के बीच शर्तों का शनिवार को उल्लंघन किया गया। इस शर्त का पालन नहीं हुआ कि तरावीह नमाज सड़क और फुटपाथ पर नहीं पढ़ी जाएगी। चारों दिशाओं में नमाजियों के बीच छह फुट की दूरी का भी ख्याल नहीं रखा गया। बहुत-सी मस्जिदों में बड़ों के साथ बच्चे भी दिखे जबकि शर्त में साफ था कि बच्चों को मस्जिद नहीं लाया जाएगा। उधर इमरान खान सरकार ने लॉकडाउन का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई करने का अधिकार सेना को दे दिया है। इसके तहत सेना लॉकडाउन नियम तोड़ने वाले मौलवियों और धार्मिक संगठनों पर भी कार्रवाई कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रावलपिंडी स्थित आईएसआई मुख्यालय में प्रधानमंत्री इमरान खान, सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा, डीजी फैज अहमद, कुछ मंत्रियों और सलाहकारों की बैठक हुई थी। इसमें ही यह फैसला लिया गया। देश में अब तक कोरोना के 12 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। जबकि 265 मौतें हो चुकी हैं। उधर पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीआईएमए) ने कोरोना को लेकर सरकार को चेताया है, पीआईएमए अध्यक्ष डॉ. इफ्तिखार बर्नी ने कहा कि पाक में मस्जिदें कोरोना संक्रमण का प्रमुख स्रोत बन गई हैं। डॉ. बर्नी ने बताया कि 100 डाक्टरों समेत 200 मेडिकल स्टॉफ कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। मई और जून में संक्रमण और तेजी से बढ़ने की आशंका है।

-अनिल नरेन्द्र