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Wednesday, 10 February 2021

हर सैकेंड 1.81 लाख रुपए कमाते हैं बेजोस

दुनिया के सबसे धनी शख्स, 57 साल के जेफ बेजोस अमेजन में अपनी भूमिका बदल रहे हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने घोषणा की कि वह अमेजन के सीईओ का पद छोड़कर कार्यकारी अध्यक्ष का जिम्मा संभालेंगे। 25 सालों से सीईओ बेजोस अंतरिक्ष कार्यक्रमों से जुड़ी अपनी कंपनी ब्लू ओरिजिन, अर्थ फंड और द वाशिंगटन पोस्ट अखबार पर ध्यान देना चाहते हैं। बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक बेजोस ने 2020 में हर सैकेंड 1.81 लाख रुपए कमाए। बेजोस को जानने वाले मानते हैं कि वह हमेशा समय से आगे रहते हैं। 1982 में हाई स्कूल में बेजोस ने कहा थाöपृथ्वी सीमित है, अगर दुनिया की आबादी और अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ती रही तो अंतरिक्ष पर जाना ही एकमात्र रास्ता बचेगा। साल 2000 में बेजोस ने ब्लू ओरिजिन की स्थापना की थी। इसके दो साल बाद एलन मस्क ने स्पेस एक्स की स्थापना की, लेकिन इन सालों में ब्लू ओरिजिन कुछ खास नहीं कर पाई। माना जा रहा है कि अंतरिक्ष में संभावनाओं को देखते हुए बेजोस इस ओर ध्यान दे रहे हैं। ब्लू ओरिजन इस साल अप्रैल से पर्यटकों को अंतरिक्ष में भेजने की शुरुआत कर रही है। बेजोस चांद पर कॉलोनी बसाना चाहते हैं। अमेजन को बेजोस एक लैब कहते हैं, जहां ग्राहकों के व्यवहार से जुड़े प्रयोग होते हैं। हर ग्राहक का व्यवहार रिकॉर्ड और ट्रैक किया जाता था। व्यवहार का अध्ययन करने के लिए चीफ साइंटिस्ट एंड्रियास वैगंड को हायर किया। अमेजन जब बाजार में सूचीबद्ध हुई तो निवेशकों को लिखा कि लंबे समय में मुनाफा देखें। बेजोस ने प्रतिस्पर्धियों को खत्म करने में अधिकांश पैसा खर्च किया। इसमें कंपनी लंबे समय तक घाटे में रही। अमेजन ने 20 साल पहले फायर नाम से फोन लांच किया था। वॉयस असिस्टेंट और चार कैमरों के साथ फोन फेल हो गया था, लेकिन उसी वॉयस असिस्टेंट तकनीक का इस्तेमाल करके तैयार एलेक्सा आज अमेजन के सबसे सफल उत्पादों में एक है। उल्लेखनीय है कि 1995 में अमेजन की स्थापना करने वाले बेजोस कंपनी को एक साधारण ऑनलाइन बुकसेलर से वर्तमान में 1.7 लाख करोड़ डॉलर यानि लगभग 122 लाख करोड़ रुपए मूल्य की विशाल बहुराष्ट्रीय कंपनी में तब्दील कर चुके हैं। इस यात्रा में उन्होंने दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति कहलाने का गौरव भी हासिल किया। पुस्तक बिक्रेता से लेकर आज रिटेल व लॉजिस्टिकस के ग्लोबल बिजनेस में परचम लहराने वाली अमेजन की विकास की गाथा बेजोस ने ही लिखी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 में कंपनी का कारोबार 38 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ 386 अरब डॉलर का हो चुका है। सालभर पहले की तुलना में 2020 में कंपनी का मुनाफा बढ़कर 21.3 अरब डॉलर का हो गया है। -अनिल नरेन्द्र

Tuesday, 9 February 2021

केंद्र के प्रस्ताव से दिल्ली सरकार से टकराव बढ़ेगा

जब से दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनी है अधिकारों को लेकर आए दिन टकराव की स्थिति बनी रहती है। उपराज्यपाल के बहाने केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारों का मामला जब बहुत बढ़ गया तो सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और कुछ समय तक फिर शांति हो गई। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे अधिकारों का स्पष्ट बंटवारा हो। यही वजह है कि कुछ अंतराल के बाद कोई ऐसा मुद्दा या बिन्दु सामने आ जाता है, जिस पर दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच खींचतान के तेवर तीखे दिखने लगते हैं। गत बुधवार को केंद्र सरकार ने जिस तरह उपराज्यपाल को ज्यादा शक्तियां देने के एक प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है, उससे साफ है कि दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों को लेकर चल रही जंग के बीच अब केंद्रीय कैबिनेट ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिससे एलजी का अधिकार क्षेत्र और बढ़ेगा। प्रस्तावित विधेयक में एलजी को दिल्ली सरकार को तय सीमा में विधायी व प्रशासनिक प्रस्ताव 15 दिन पहले भेजना होगा। ऐसे मुद्दे जिस पर एलजी और दिल्ली सरकार के विचार एक जैसे नहीं होंगे, उसे आखिरी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने का प्रावधान तो है ही, नए प्रस्ताव में यह कहा गया है कि जब तक राष्ट्रपति फैसला नहीं लेते हैं, एलजी को फैसला लेने का अधिकार होगा। बशर्ते वह मामला ऐसा हो, जिस पर तत्काल फैसला करना जरूरी हो। सामान्य मामलों में एलजी को यह अधिकार नहीं होगा। यह प्रावधान इसलिए अहम होगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले में कहा गया था कि दिल्ली सरकार को हर मामले में एलजी से संस्तुति लेना जरूरी नहीं है, बल्कि उन्हें जानकारी दी जा सकती है। इस फैसले के बाद से एलजी की ताकत कुछ हद तक कमजोर हुई थी। एलजी की शक्तियां बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संसद के इसी सत्र में यह बिल पेश हो सकता है, जिस पर सत्तापक्ष व विपक्ष में रार बढ़ सकती है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इन संशोधनों से गवर्नेंस में सुधार हो सकता है। अधिकारों के स्पष्ट विवरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2019 में आए फैसले के बाद स्थितियों को साफ करने की जरूरत पड़ी है। जाहिर है कि इस ताजा प्रस्ताव से दिल्ली सरकार की ओर से सवाल उठना एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि इस संशोधन के जरिये दिल्ली में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के अधिकार छीनकर उपराज्यपाल को देने का काम किया गया है और अब दिल्ली सरकार के पास फैसले लेने की शक्ति नहीं रहेगी। सवाल है कि अगर दिल्ली सरकार का यह आरोप सही है कि केंद्र का यह फैसला लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ किया गया है तो यह चिन्ता की बात है। क्या केंद्रीय मंत्रिमंडल इस संशोधन के जरिये सचमुच दिल्ली सरकार के अधिकारों को सीमित करना चाहती है? निश्चित तौर पर दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार है और अपनी सीमा में सरकार को काम करने का अधिकार होना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही यह भी तथ्य हैं कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी भी है और इस नाते केंद्र को संभवत नीतिगत स्तर पर कई मामलों का ध्यान रखने की जरूरत महसूस होती होगी। कहा जा रहा है कि ताजा संशोधन प्रशासन को बेहतर करने के साथ-साथ दिल्ली सरकार और एलजी के बीच टकराव के हालात कम करने के लिए किए जा रहे हैं। लेकिन विधायी और प्रशासनिक प्रस्ताव पर आगे कदम बढ़ाने के लिए एलजी के पास भेजने की जो शर्त रखी गई है, क्या उससे आने वाले दिनों में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच खींचतान और टकराव की स्थितियां और नहीं बढ़ेंगी? विधायी और प्रशासनिक कार्यों में अगर कोई टकराव या गतिरोध पैदा होता है तो इससे किसी का हित नहीं होगा बल्कि टकराव जरूर होगा।

जो सच बोलता है उसे देशद्रोही और गद्दार कहा जाता है

शिवसेना सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को रिपब्लिक टीवी प्रमुख अर्नब गोस्वामी का मामला संसद में उठाया। संजय राउत ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए मामला उठाया। राउत ने राज्यसभा में केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोल दिया। राउत ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान कह रहे हैं कि सच सुना करो उससे मोक्ष प्राप्ति होती है। हम तो छह साल से सच सुन रहे हैं और झूठ को भी सच मान रहे हैं। लेकिन आज जो देश में माहौल है उसमें जो सच बोलता है उसे गद्दार और देशद्रोही कहा जाता है। जो सरकार से सवाल पूछता है उस पर देशद्रोह का मुकदमा लगा दिया जाता है। हमारे सदन के साथी संजय सिंह पर देशद्रोह का मुकदमा है। जाने-माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई, जिसे सरकार ने पद्मश्री दिया है उस पर भी देशद्रोह का मुकदमा लगा दिया है। शशि थरूर, जिन्होंने यूएन में भारत के लिए काम किया, उन पर भी देशद्रोह का मुकदमा लगा दिया गया है। सिंघु बॉर्डर पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के साथ भी ऐसा ही किया गया है। संजय राउत ने कहाöहमारे कानून की किताब में आईपीसी की सारी धाराएं खत्म कर दी गई हैं और केवल देशद्रोह का कानून रखा गया है। मोदी को प्रचंड बहुमत मिला है। हम इस बात को मानते हैं। लेकिन बहुमत अहंकार से नहीं चलता है, बहुमत बड़ा चंचल होता है। हमारे मराठी के संत तुकाराम ने कहा है कि आपका जो निंदक है उसे आसपास रखना चाहिए। लेकिन आज के वक्त में जो भी सरकार की आलोचना करता है उसे बदनाम कर दिया जाता है। 26 जनवरी को हमारे तिरंगे का अपमान हुआ और हमारे प्रधानमंत्री दुखी हुए। पूरा देश दुखी हो गया। लेकिन लाल किले पर तिरंगे का अपमान करने वाला किसका आदमी है? इस बात पर यह चुप रहते हैं। दीप सिद्धू अभी तक क्यों पकड़ा नहीं गया? 200 से ज्यादा किसानों को जेल में बंद कर दिया गया है। हमारे देश में अभी देशप्रेमी केवल अर्नब गोस्वामी हैं, जिसकी वजह से एक निर्दोष आदमी को महाराष्ट्र में आत्महत्या करनी पड़ी। कंगना रानौत देशप्रेमी हैं। अर्नब गोस्वामी ने बालाकोट की जानकारी सबको पहले ही बता दी और उसे सरकार की सुरक्षा मिली हुई है। यही अर्नब गोस्वामी ने हमारे मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के बारे में क्या नहीं लिखा है? प्रकाश के बारे में उसने जिस भाषा का इस्तेमाल किया है उस पर हम सबको शर्म आनी चाहिए। राउत ने कहा कि जब सिखों ने मुगलों से लड़ाई की तो उन्हें देशभक्त कहा गया, अंग्रेजों से लड़ा तो देशभक्त कहा गया और अब अपने हकों के लिए लड़ रहे हैं तो उन्हें खालिस्तानी कहा जा रहा है। किसान आंदोलन के समर्थन में 75 पूर्व नौकरशाहों की चिट्ठी। पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने शुक्रवार को एक खुले पत्र में कहा कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के प्रति केंद्र सरकार का रवैया शुरुआत से ही प्रतिकूल और टकराव भरा है। जनसत्ता अखबार के मुताबिक दिल्ली के पूर्व एलजी नजीब जंग समेत 75 नौकरशाहों की ओर से हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि गैर-राजनीतिक किसानों को ऐसे गैर-जिम्मेदार प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है जिनका उपहास किया जाना चाहिए। जिनकी छवि खराब की जानी चाहिए और इन्हें हटाया जाना चाहिए। यह सभी लोग कांस्टीट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप के हिस्सा हैं। पत्र में कहा गया है कि ऐसे रवैये से कभी कोई समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि अगर भारत सरकार वाकई मैत्रीपूर्ण समाधान चाहती है तो उसे आधे मन से कदम उठाने के बजाय कानूनों को वापस ले लेना चाहिए।

अस्थिर व्यवहार के कारण खुफिया जानकारियां नहीं देंगे

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बिडेन प्रशासन उनसे एक बड़ा अधिकार छीनने की तैयारी में है। अमेरिका के राष्ट्रपतियों को कार्यकाल खत्म होने के बाद भी अकसर खुफिया सूचनाएं और गोपनीय जानकारियां दी जाती हैं। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन ने एक इंटरव्यू में बताया कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को उनके अस्थिर व्यवहार के कारण गोपनीय खुफिया जानकारियां नहीं दी जानी चाहिए। बिडेन ने सीबीसी न्यूज को दिए इंंटरव्यू में कहाöमैं कयास नहीं लगाना चाहता। मुझे बस यही लगता है कि उन्हें खुफिया जानकारियां दिए जाने की जरूरत नहीं। उन्हें खुफिया जानकारियां देने का क्या महत्व है? वह क्या प्रभाव डाल सकते हैं? इसके बजाय तथ्य तो यह हैं कि कभी भी उनकी जुबान फिसल सकती है और वह कुछ भी कह सकते हैं। यह इंटरव्यू रविवार को प्रसारित किया गया। शुक्रवार को इसके कुछ अंश जारी किए गए थे। इसमें बिडेन कहते दिखे कि ट्रंप को उनके अस्थिर व्यवहार के कारण ऐसी जानकारियां नहीं दी जानी चाहिए। इससे पहले इस सप्ताह की शुरुआत में व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा था कि ट्रंप को खुफिया जानकारियां देने के बारे में समीक्षा की जा रही है। डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सांसदों और यहां तक कि ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने भी उन्हें जानकारी देते रहने के बारे में सवाल उठाए थे। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में मंगलवार से महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होनी है। उन पर छह जनवरी को संसद पर हुई हिंसा के लिए यह कार्रवाई हो रही है। हालांकि उनके बच निकलने के चांस ज्यादा हैं मगर उससे पहले सदन में पूरे विस्तार से उन पर लगे आरोपों की चर्चा होगी। -अनिल नरेन्द्र

Sunday, 7 February 2021

पाक पर ईरानी सर्जिकल स्ट्राइक

पाकिस्तानी आतंकियों के लगातार हमले से भड़की ईरान की सेना ने अमेरिका और भारत की राह पर चलते हुए कथित रूप से पाकिस्तानी सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की और अपने दो सैनिकों को छुड़ा लिया। बताया जा रहा है कि ईरान के अत्यंत प्रशिक्षित रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-अल-अदल के ठिकाने पर हमला करके करीब ढाई साल से बंदी अपने जवानों को छुड़ा लिया। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक जैश-अल-अदल एक कट्टरपंथी वहाबी आतंकवादी गुट है जो दक्षिणी-पश्चिमी पाकिस्तान में ईरान सीमा पर सक्रिय है। फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि जैश-अल-अदल ने ही फरवरी 2019 में ईरान सेना पर हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसमें कई जवान मारे गए थे। ईरानी सेना ने गुप्त सूचना के आधार पर मंगलवार की रात को इस सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। ईरानी सेना ने एक बयान जारी करके कहाöमंगलवार की रात को एक सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है और पिछले ढाई साल से जैश-अल-अदल के कब्जे में बंदी दो सैनिकों को छुड़ा लिया गया। बयान में कहा गया है कि ईरानी सैनिक सफलतापूर्वक देश वापस लौट आए हैं। एनाडोलु एजेंसी के मुताबिक 16 अक्तूबर 2018 को जैश-अल-अदल ने ईरानी सेना के 12 बॉर्डर गार्ड्स का अपहरण कर लिया था। इस घटना को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मर्कवा शहर में अंजाम दिया गया था। यह इलाका पाक-ईरान सीमा के नजदीक है। इसके बाद दोनों देशों की सेना ने जवानों को छुड़ाने के लिए एक ज्वाइंट कमेटी भी बनाई थी। जैश-अल-अदल को आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है। यह संगठन ईरान के खिलाफ सशस्त्र अभियान चलाए हुए है। इसमें बलोच सुन्नी मुसलमान शामिल हैं जो ईरान सुन्नियों के अधिकारों की रक्षा का दावा करते हैं। बता दें कि दो मई 2011 को अमेरिकी सैनिक एक स्पेशल ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में दाखिल हुए और अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को मारकर साथ ले गए। इसी तरह 28-29 सितम्बर 2016 की वह रात को शायद पाकिस्तान कभी भूल नहीं पाएगा। जब भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में घुसकर आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर कई आतंकी मार गिराए थे। ईरान की कार्रवाई पाकिस्तान की भूमि पर हुई। इस सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में पाकिस्तान सरकार या सेना को ईरान द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई, न उन्हें जानकारी थी। सूत्रों के अनुसार इसी वजह से आतंकियों पर आईआरजीसी के हमले के बाद पाकिस्तानी सैनिक भी बचाव में कूद पड़े लेकिन कई गार्ड्स के विशेष प्रशिक्षित ईरानी सैनिकों के हाथों मारे गए। जैश-अल-अदल एक वहाबी व बलूच सुन्नी मुसलमानों का बनाया आतंकी संगठन है। यहां के रसूखदारों से उसे फंडिंग मिलती है और बदले में वह दक्षिण-पूर्वी ईरान में नागरिकों व सैनिकों पर आतंकी हमले करता रहता है। वहीं ईरान ने कई बार पाकिस्तान को आतंकी गतिविधियां रोकने के लिए चेताया है। लेकिन हमले जारी रहे। अदल को कई देशों ने प्रतिबंधित किया हुआ है। इस घटना से एक बार फिर साबित होता है कि पाकिस्तान अपनी सर जमीन से इन आतंकी गुटों को न केवल ऑपरेट करने देता है बल्कि उनकी पूरी मदद करता है। इससे साबित होता है और इस बात की पुष्टि होती है कि जो भारत सालों से कह रहा है। एक बार फिर पाकिस्तान बेनकाब हुआ है।

कोरोना की चपेट में आ चुके हैं 30 करोड़ भारतवासी

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के ताजा सर्वेक्षण (सीरो में पाया गया है कि 10 वर्ष एवं इससे अधिक उम्र की 21 प्रतिशत से अधिक आबादी के पूर्व में कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आने के साक्ष्य मिले हैं। इस सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत में वास्तविक कोरोना संक्रमितों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक है। पिछले सप्ताह सामने आए सीरोलॉजिकल सर्वे के आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक 30 करोड़ यानि हर चौथा व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुका है। सरकार ने बृहस्पतिवार को बताया कि आईसीएमआर का तीसरा राष्ट्रीय सीरो सर्वेक्षण गत सात दिसम्बर से आठ जनवरी के बीच किया गया था। सर्वेक्षणों को पेश करते हुए आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि इस अवधि में 18 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग के 27,589 लोगों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 21.4 प्रतिशत लोगों में पूर्व में कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आने का पता चला है जबकि 10 वर्ष से 18 वर्ष आयु वर्ग के 25.3 प्रतिशत बच्चों में भी यह पुष्टि हुई। भार्गव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 19.1 प्रतिशत आबादी में सार्स सीओवी-2 की उपस्थित के साक्ष्य मिले जबकि शहरी झुग्गी-बस्तियों में यह आंकड़ा 31.7 प्रतिशत पाया गया। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान 60 वर्ष आयु वर्ग से अधिक आयु के 23.4 प्रतिशत बुजुर्गों के भी कभी न कभी संक्रमण की चपेट में आने का पता चला है। भार्गव ने कहा कि सर्वेक्षण की अवधि में 7171 स्वास्थ्य कर्मियों के भी खून के नमूने लिए गए और इनमें से 25.7 प्रतिशत के पूर्व में संक्रमण की चपेट में आने की पुष्टि हुई। पहले एवं दूसरे राष्ट्रीय सीरो सर्वेक्षण के दौरान जिन 21 राज्यों के 700 गांव अथवा 70 जिलों के जिन वार्डों को चुना गया था। तीसरा सर्वेक्षण भी उन्हीं स्थानों पर किया गया। कोरोना वायरस के हालात को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दर 5.42 प्रतिशत है और यह कम हो रही है। पिछले तीन सप्ताह के दौरान 47 जिलों में संक्रमण का एक भी नया मामला सामने नहीं आया और 257 जिलों में एक भी कोविड-19 मरीज की मौत नहीं हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में महज 19 दिनों के भीतर 45 लाख लोगों को कोविड-19 रोधी टीका लगाया जा चुका है। भारत 18 दिन के भीतर 40 लाख लोगों को टीका लगाकर सबसे तेज गति से टीकाकरण करने वाला देश बन गया है। मंत्रालय ने कहा कि कई अन्य देशों को ऐसा करने में 65 दिन लगे थे। भारत ने 16 जनवरी को राष्ट्रव्यापी कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान शुरू किया था। टीकाकरण कराने वाले लोगों की संख्या में हर रोज वृद्धि हो रही है। कोरोना के संक्रमण से ठीक हुए लोगों को टीके की दो खुराक के बजाय केवल एक खुराक की जरूरत हो सकती है अगर वह मॉडर्न या फाइजर का कोविड-19 का टीका लगवा रहे हैं। एक अध्ययन में टीके की आपूर्ति संख्या सीमित होने की स्थिति में खुराक कम करने के तरीके भी सुझाए गए हैं। आप अपने डॉक्टर की सलाह से ही टीका लगवाएं।

नए मैसेजिंग एप का सहारा लेते आतंकी

व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग सर्विस को लेकर बहस जारी है। इस दौरान खबर मिली है कि पाकिस्तान में मौजूदा आतंकी संगठनों ने नए एप का रुख कर लिया है। इनमें तुर्की की एक कंपनी की ओर से हाल ही में विकसित एप भी शामिल है। जम्मू-कश्मीर के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने यह ताजा जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि दहशतगर्दों के साथ मुठभेड़ में मिले सुबूतों और आत्मसमर्पण करने वाले आतंकियों की ओर से पाकिस्तानी संगठनों की मॉउस ऑपरेडी पर प्राप्त जानकारी के आधार पर तीन नए मैसेजिंग एप सामने आए हैं। इनमें से एक अमेरिकी तो दूसरा यूरोपीय कंपनी ने बनाया है। वहीं तीसरे एप का निर्माण तुर्की की कंपनी ने किया है। कश्मीर घाटी में कारिंदों की भर्ती में जुटे आतंकी आका लगातार तीनों एप का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों से इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। अधिकारियों की मानें तो नए एप इंटरनेट की धीमी स्पीड में भी काम करने में सक्षम हैं। उनका उन इलाकों में भी इस्तेमाल मुमकिन है, जहां केवल 2000 के दशक में प्रयुक्त डाटा फॉर ग्लोबल एवोल्यूशन (एच) या 2जी इंटरनेट सेवा उपलब्ध हो। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के बाद वहां उपलब्ध इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी थीं। साल 2020 की शुरुआत में घाटी में 2जी सेवा बहाल हो गई थी। सुरक्षा एजेंसियां घाटी में पहले से ही वर्चुअल सिम कार्ड के खतरे से लड़ रही हैं। ऐसे में नए एप उनके लिए नई चुनौती बनकर उभरे हैं। -अनिल नरेन्द्र